यूं ही समय बीतता गया, निमंत्रण और मुँह दिखाई का कार्य भी हो गया, रश्मि ने दुल्हन की बजाय घर की बहू के रूप में आमंत्रण में भाग लिया क्योंकि पति के बिना दुल्हन बनकर मिलाई की दावत में बैठना किसी तरह भी उचित नहीं था जबकि जय और उसकी दुल्हन डॉली ने दूल्हे दुल्हन के रूप मिलाई आमंत्रण अटेंड किया।
3 दिन बीत चुके थे मगर राज का अभी तक कुछ पता नहीं चला था। कल्पना अपने पति के साथ वापस अपने घर जा चुकी थी जबकि राज की छोटी बहन पिंकी राज की नामौजूदगी की वजह से रश्मि के साथ ही उसके कमरे में सोती थी। रश्मि और पिंकी दोनों रात को राज की सुरक्षा की विशेष भगवान से दुआएं मांगती और उसके बाद बिस्तर पर लेटकर लम्बी लम्बी बातें करतीं। पिंकी अपनी रश्मि भाभी को प्रोत्साहित करती और उसे अपने भाई की बहादुरी के किस्से भी सुनाती।
रश्मि की शादी को अब पूरे 7 दिन हो चुके थे। मगर अब तक राज का कुछ पता नहीं चला था। रश्मि के घरवाले, रश्मि खुद और राज के घरवाले अब राज को लेकर काफी परेशान थे। क्योंकि राज के कार्यालय से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा था। न ही अभी तक राज ने घर संपर्क किया था करता भी कैसे वह तो कर्नल इरफ़ान की कैद में था जहां से कोई कैदी बचकर नहीं निकल सका था।
जय को भी अपने भाई की चिंता थी यही कारण था कि उसने अपने हनीमून की योजना को भी कैंसिल कर दिया था जो कि शादी के 3 दिन बाद का था। इस योजना के अनुसार शादी के 3 दिन बाद जय और उसकी पत्नी डॉली और राज और रश्मि ने मिलकर गोआ जाने का प्रोग्राम बनाया था। मगर राज के न होने के कारण यह प्रोग्राम कैंसिल हो गया था।
इस दौरान रश्मि 3 दिन के लिए अपने मायके से भी हो आई थी। दूसरी ओर जय की पत्नी डॉली से अब सब्र नहीं हो रहा था। उसने जय पर जोर डालना शुरू किया कि अब उन्हें हनीमून के लिए जाना चाहिए। पहले पहल तो जय ने उसे डांट दिया मगर फिर अंततः उसे मानना ही पड़ा। तय यह हुआ कि जय, उसकी पत्नी डॉली, रश्मि और जय की बहन पिंकी ये चारों लोग गोआ जाएंगे। जब रश्मि को इस कार्यक्रम का पता चला तो उसने तुरंत ही मना कर दिया कि एक तो वो राज के बिना नहीं जाएगी, दूसरी बात यह जय का हनीमून ट्रिप है तो इसमें वह अपनी पत्नी के साथ ही जाएगा अगर राज होते तो बात और थी मगर यों इस तरह राज के बिना हनीमून यात्रा पर रश्मि के अकेले जाना ठीक नहीं। मगर राज के अभाव से पिंकी को जो अवसर मिला था गोआ की सैर करने का वह उसको बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए वह रश्मि की मिन्नतें करने लग गई कि भाभी आप नहीं जाएंगी तो जय भाई मुझे नहीं लेकर जाएंगे। और अगर आप जाएँगी तो साथ में मैं भी जा सकती हूँ।
रश्मि ने पिंकी को समझाना चाहा कि राज के बिना उसका बिल्कुल दिल नहीं कर रहा वह ऐसे नहीं जा सकती। अगर राज की कोई सुध ही मिल जाती तो शायद वह चली भी जाती। मगर अब नहीं जा सकती पर पिंकी कहां टलने वाली थी। हालांकि पिंकी की उम्र रश्मि से एक साल बड़ी थी मगर रिश्ते में रश्मि न केवल पिंकी बड़ी थी बल्कि जय से भी बड़ी थी। इसलिए पिंकी रश्मि के सामने ऐसे ही जिद कर ने लगी जैसे वह अपने बड़े भाई राज के सामने बच्ची बनकर जिद करती थी। घर में सबसे छोटी होने के कारण पिंकी में बचपना भी काफी था। रश्मि ने पिंकी को यह भी समझाना चाहा कि जय अपनी पत्नी के साथ हनीमून पर जाना चाहता है हम वहाँ कबाब में हड्डी होंगे तो पिंकी तुरंत बोली कि हम अलग कमरे में रहेंगे वे दोनों अलग कमरे में अब और कोई बहाना नहीं बस आप चलने की तैयारी करें। आखिरकार रश्मि को पिंकी की जिद के आगे हार माननी पड़ी। शादी के 10 दिन बाद जय, डॉली, रश्मि और पिंकी हनीमून यात्रा पर गोआ जा रहे थे।डॉली और पिंकी तो बहुत खुश थे, जबकि रश्मि का बिलकुल भी मन नहीं लग रहा था राज के बिना दूसरी ओर जय भी थोड़ा निराश था अपनी भाभी के सामने उसको एहसास था कि राज के अभाव में उसे अपना हनीमून ट्रिप प्लान नहीं करना चाहिए था मगर क्या करता पत्नी की जिद के सामने उसकी एक नहीं चली।
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राज की आंख खुली तो अबकी बार वह पहले से अपेक्षाकृत छोटे कमरे में कैद था। और इस बार नाइलोन की रस्सी की बजाय उसके हाथ लोहे की राड से बँधे थे राज एक दीवार के साथ सीधा खड़ा था उसके हाथ सिर से ऊपर दीवार के साथ लगे लोहे के राड मे थे जबकि पांव भी इसी तरह के लोहे की गोल राड के साथ बाँधे गए थे। अब की बार राज अपनी जगह से हिल भी नहीं सकता था। इन राड को देखकर राज ने परेशान होने की बजाय कुछ सुख का सांस लिया। क्योंकि नाईलोन रस्सी से अपने हाथ छुड़ाना उसके लिए संभव नहीं था क्योंकि इस कमरे में ऐसी कोई चीज़ नहीं थी कि जिससे वह अपनी रस्सी काट सकता। जबकि लोहे के इन राड को वह किसी भी लोहे की पतली पिन से आसानी खोल सकता था। अब समस्या केवल ऐसी पिन प्राप्त करने की थी
राज अब कमरे समीक्षा कर ही रहा था कि कमरे की रोशनी ऑनलाइन हुई यह एक पूरी तरह टॉर्चर सेल था जो विभिन्न प्रकार के उपकरणों से लेस्स था इन उपकरणों को राज ने पहले भी देख रखा था क्योंकि वह भी भारत के खुफिया संगठन का एजेंट था। कमरे की रोशनी ऑनलाइन होने के बाद कमरे का दरवाजा खुला जो लोहे की भारी चादर से बना हुआ था और बिना कोड के उसको खोलना संभव नहीं था। दरवाजे से इस बार 2 पुरुष और एक लड़की अंदर आई दोनों पुरुषों को छोड़कर मेजर राज ने लड़की सोनिया का जायजा लेना शुरू कर दिया। यह लड़की थी ही ऐसी कि जो भी एक बार देख ले वह अपनी नज़रें हटाना भूल जाए। 22 वर्षीय सोनिया को आईएसआई ने विशेष रूप से हायर किया था। सोनिया का आकर्षण उसका शरीर और उसके उतार चढ़ाव थे जो किसी भी पुरुष को दीवाना बना सकते थे। सोनिया का उपयोग अक्सर दुश्मन के रहस्य उगलवाने के लिए किया जाता था। सोनिया किसी भी दुश्मन को अपने बिस्तर पर ले जा कर उसे खूब मज़ा देती थी, लेकिन मजे के साथ उसको खूब परेशान भी करती थी और बातों ही बातों में से कई प्रकार के रहस्य उगलवा कर अपने उच्च अधिकारियों तक पहुँचाती थी।
22 साल की गर्म जवानी में उसके सीने पर 36 आकार के पहाड़ जैसे मम्मे सिर उठाए खड़े थे और 34 आकार के बाहर निकले हुए उसके नितंब किसी भी बेजान लंड में जान डालने के लिए पर्याप्त थे। 30 की कमर के साथ सोनिया एक पटाखा लड़की थी। सोनिया अब तक 3 एसएल, 2 बंगाली और 5 भारतीयसैनिकों को अपने बिस्तर पर ले जा कर उनसे अलग रहस्य उगलवा चुकी थी। और कर्नल इरफ़ान और आईएसआई के अन्य उच्च अधिकारी सोनिया के प्रदर्शन से बहुत खुश थे। सोनिया ने उस समय एक टाइट पैन्ट पहन रखी थी जिसमें उसके मांस से भरे हुए इनपुट और 34 के चूतड़ बहुत सेक्सी लग रहे थे। ऊपर उसने एक छोटी सी शर्ट पहन रखी थी जो सिर्फ उसके 36 आकार के मम्मों को छिपाने का काम कर रही थी। पेट का ज्यादातर हिस्सा नंगा था उसी तरह कमर भी ज्यादातर नंगी ही थी कंधों तक छोटे और हल्के बालों को उसने टट्टू का रूप देकर सिर के पीछे बांध रखा था।
सोनिया ने जब मेजर राज को यूँ अपनी समीक्षा करते हुए देखा तो उसने एक सेक्सी स्माइल पास की और दिल ही दिल में बोली कि यह भी गया काम से। सोनिया के साथ आए 2 पुरुषों ने मेजर राज को सख़्त और कर्कश स्वर में बोला कि तुम कौन हो और कर्नल इरफ़ान तक कैसे पहुंचे ?? मेजर राज ने सोनिया के मम्मों से नज़रें हटाए बिना जवाब दिया यातायात पुलिस का कांस्टेबल राज हूँ तुम्हारा कर्नल इरफ़ान राज मार्ग पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से होंडा चला रहा था इसलिए मैं उसका पीछा करने लगा और जब मुझे पता चला कि यह दुश्मन देश का कर्नल है तो मैंने उसको पकड़ने के लिए उसकी नाव तक उसका पीछा किया। मेजर राज ने एक ही सांस में जवाब दिया। यह जवाब वह तब से सोच बैठा था जब पहले वाले कमरे में उससे पूछताछ शुरू हुई थी। मेजर राज ने जैसे ही जवाब समाप्त किया एक व्यक्ति ने दीवार के साथ लगा हुआ लीवर ऊपर उठा दिया। लीवर ऊपर उठाते ही मेजर राज को अपना शरीर कटता हुआ महसूस होने लगा। उसके हाथ और पैर में सूइयां चुभने लगीं। यह दर्द असहनीय था। मेजर की आंखें लाल हो गईं और रंग फीका पड़ने लगा।
कुछ देर के बाद इस व्यक्ति ने लीवर वापस नीचे किया तो मेजर राज को एक झटका लगा और फिर धीरे धीरे उसके शरीर को आराम मिलने लगा। अब की बार सोनिया मेजर राज के पास आई और उसके चेहरे पर हाथ फेरने लगी, मेजर राज अपनी सारी तकलीफ भूलकर सोनिया को ऐसे देखने लगा जैसे अब आँखों ही आँखों में उसकी चुदाई कर डालेगा। सोनिया बड़े ही प्यार से बोली देख मेरी जान ये दोनों कमीने बहुत क्रूर हैं। अगर तुम उन्हें सच नहीं बता देंगे तो यह तुम्हारी बोटी-बोटी कर देंगे। इसलिए भलाई इसी में है कि इन लोगों को सच बता दो। यह कह कर सोनिया पीछे गई मगर मेजर राज की नजरें उसके मम्मों से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी। शॉर्ट ब्लाऊज़ में उसके बूब्स का उभार बहुत ही सेक्सी लग रहा था।
अब की बार फिर से एक कर्कश आवाज़ आई सच सच बताओ तुम कौन हो और कर्नल इरफ़ान का पीछा क्यों कर रहे हो? मेजर राज की ज़ुबान फिर चल पड़ी: यातायात पुलिस का कांस्टेबल राज हूँ तुम्हारा कर्नल इरफ़ान राज मार्ग आगरा पर .......... फिर मेजर राज के शरीर में करंट दौड़ गया और उसको अपने हाथ और पैर में वही सुई की चुभन महसूस हुई और उसका रंग पीला हो गया। कुछ देर बाद लीवर नीचे गया तो मेजर की स्थिति कुछ संभली।अब की बार फिर से सोनिया मेजर के पास आई और उसके होंठों पर अपने होंठ रखती हुई बोली बता दे मेरी जान, इन्हे सब कुछ सच सच बता दे। वरना यह तुझे नहीं छोड़ेंगे। सोनिया के चुप होते ही मेजर राज ने अपने होंठों से सोनिया के रसीले होंठ चूस डाले। मेजर ने ऐसी मजेदार पप्पी ली थी कि सोनिया कि एक पल के लिए तो वह भूल ही गई कि वह दुश्मन देश के गुप्त एजेंट के सामने खड़ी है। मेजर राज ने सोनिया के होंठों को छोड़ा और बोला जानेमन तुम्हारी इस गर्म जवानी की कसम खा रहा हूँ सच कह रहा हूँ। अगर उन्हें मेरी बात पर यकीन नहीं आता तो यह बताएँ उन्हें क्या जवाब देना चाहिए। जो यह कहेंगे वही शब्द दोहरा दूंगा।
इस पर दूसरे व्यक्ति ने बोला मान जा तू रॉ का एजेंट है। मेजर राज ने कहा हां में रॉ का एजेंट हूँ। इस पर दूसरे व्यक्ति ने बोला और तुझे मेजर जनरल सुभाष ने कर्नल इरफ़ान का पीछा करने के लिए भेजा था। राज बोला हां मुझे मेजर जनरल सुभाष ने कर्नल इरफ़ान का पीछा करने भेजा था। पहला व्यक्ति गुर्राया और बोला- अब बता क्यों कर रहा था तू कर्नल इरफ़ान पीछा ??? इस पर मेजर राज बोला तुम ही बताओ न कि मैंने क्या कहना है। जैसा तुम कहोगे वैसे ही में दुहरा दूँगा एक झन्नाटे दार थप्पड़ से मेजर राज का गाल लाल हो गया और वह व्यक्ति फिर से गुर्राया हरामज़ादे .... सच सच बोल तू कौन है और कर्नल इरफ़ान का पीछा क्यों कर रहा था।
यातायात पुलिस का कांस्टेबल राज हूँ तुम्हारा कर्नल इरफ़ान। । । । । । । । । । । फिर मेजर राज का रंग पीला हो गया। वही करंट उसके शरीर में फिर से छोड़ा गया था। अब की बार मेजर को अपनी जान निकलती हुई महसूस हुई और उसकी आँखें बंद होने लगी। बेहोश होने से पहले जो आखिरी बात मेजर राज की आँखों के सामने थी वह सोनिया के मम्मे थे।
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