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वतन तेरे हम लाडले complete

मेजर राज की यह बात सुनकर वह व्यक्ति जोर से हंसने लगा। और बोला ठीक चल बता कि एक यातायात पुलिसकर्मी ने हमारे आर्मी कैप्टन को एक ही वार में कैसे जान से मार दिया ??? इस पर मेजर राज ने कहा इसमें कौन बड़ी बात है, मेरे हाथ खोल अभी बता देता हूँ कि उसे कैसे मारा था। यह कह कर मेजर राज हंसने लगा और बोला अच्छा तो जो मेरा एक हाथ लगने से मर गया वह तुम्हारा आर्मी कैप्टन था ??? आश्चर्य है यार क्या हिजड़े भर्ती करते हो तुम लोग सेना में .. अब शुक्र करो उनके सामने भारत का यातायात कांस्टेबल था कहीं वास्तव में रॉ का एजेंट आ जाता तो तुम्हारा कर्नल इरफ़ान भी इसी कैप्टन की तरह अगले जहां मे पहुँचता।

एक और थप्पड़ मेजर राज के चेहरे पर लगा मगर इस बार मेजर राज ने थप्पड़ खाते ही जवाबी हमला किया और फिर अपना सिर उस व्यक्ति की नाक पर दे मारा। वह व्यक्ति अपना संतुलन बनाए नहीं रख सका और जमीन पर जा गिरा। पीछे खड़े गनमैन एक बार फिर अपनी बंदूकों का रुख मेजर राज की ओर कर खड़े हो गए मगर इस बार वे डरे हुए थे और 2, 2 कदम पीछे हट गए थे। उनको देखकर मेजर राज ने ठहाका लगाया और बोला चलाओ गोली चलाओ ...

मगर उन्होने गोली नहीं चलाई और वह व्यक्ति भी अब अपनी जगह पर खड़ा हो गया था। उसकी नाक से अब खून निकल रहा था। उसका एक हाथ अपनी नाक पर था। वह व्यक्ति गुस्से में बोला घी सीधी उंगली से नहीं निकलेगा तो उंगली टेढ़ी भी करनी आती है हमें। आईएसआई के पास तुम जैसे रॉ के कुत्तों को सीधा करने के एक सौ तरीके हैं। अब वही तुम से निपटेंगे। यह कह कर वह व्यक्ति वापस चला गया और कमरे में एक अजीब सी गंध फैल गई। मेजर राज समझ गया था कि यह विशेष गैस छोड़ी गई है मेजर को बेहोश करने के लिए। उसने अपनी सांस रोकने की बिल्कुल कोशिश नहीं की क्योंकि वह जानता था कि वह इतनी देर सांस रोक नहीं सकता कि इस गैस का प्रभाव दूर हो सके तो व्यर्थ में सांस रोकने की कोई जरूरत नहीं। कुछ ही सेकंड में मेजर राज जमीन पर बेहोश पड़ा था।

इधर......................

मेजर राज के घर से निकलने का रश्मि के सिवा और किसी को मालूम नही हुआ .. अलबत्ता रश्मि राज के कमरे से निकलते ही तुरंत अपने कपड़े पहन कर राज को रोकने के लिए बाहर निकली मगर जैसे ही वह घर के गेट पर पहुंची चौकीदार दरवाजा बंद कर रहा था और दूर मेजर राज की कार की एक रोशनी दिख रही थीं।रश्मि को देखकर चौकीदार बोला नमस्कार बीबीजी .--- में राम सिंग ... आपका चौकीदार ... मेजर साहब अक्सर रात को इसी तरह अचानक चले जाते हैं और अगली सुबह तक वापस आ जाते हैं। आप बेफिक्र होकर अंदर जाएं।रश्मि चौकीदार की बात सुने बिना अंदर आ गई थी। अब वह अपने कमरे में जाने ही लगी थी कि पीछे से आवाज आई बेटा क्या हुआ ??

ये राज की माँ की आवाज थी यानी रश्मि की सास। रश्मि ने सास को सामने देखकर उनको नमस्कार किया और कहा कि अचानक राज को कोई फोन कॉल आई और वह बिना कुछ बताए गाड़ी लेकर कहीं चले गए हैं।

मेजर राज की मां ने आगे बढ़कर अपनी बहू को प्यार किया और कहने लगीं बेटा तुम्हें तो पता ही है वह एक सिपाही है और देश के लिए अपनी जान भी दे सकता है। अक्सर उसको आपातकालीन स्थिति में जब भी बुलाया जाता है वो सब कुछ छोड़ कर अपना कर्तव्य निभाने चला जाता है। बस तुम प्रारथअना करो कि वह खैरियत से वापस आ जाए। उसके बाद राज की मां ने एक बार फिर अपनी नई नवेली दुल्हन का माथा चूमा और वापस अपने कमरे में चली गईं।

रश्मि भी अपने कमरे में जाने ही लगी थी कि उसको कुछ आवाजें सुनाई दीं। ये आवाज़ें रश्मि के साथ वाले कमरे से आ रही थीं। रश्मि ने कान लगाकर सुना तो यह जय की पत्नी डॉली की आवाज़ें थीं। ओय मैं मर गई, प्लीज़ जय धीरे करें। आह .... उफ़ उफ़ उफ़ आह आह आह ..... ऊच। । । मैं मर गई ... आवाज़ें सेक्स से भरपूर थीं और डॉली की इन आवाजों के साथ धुप्प धुप्प की आवाज भी आ रही थीं जिनसे रश्मि समझ गई कि जिस तरह अभी राज रश्मि की चुदाई कर रहा था उसी तरह उसका भाई जय भी अपनी नई नवेली दुल्हन को चोदने में व्यस्त है।

डॉली की यह आवाज सुनकर रश्मि को एक अजीब सा सॅकून मिला था। वह मुस्कुराती हुई अंदर कमरे में आ गई और दरवाजा बंद करके अपने कान फिर से दीवार के साथ लगा दिए। अब की बार उसको ये आवाज़े और भी स्पष्ट आ रही थीं। धुप्प धुप्प की आवाजों में काफी तेजी आ गई थी और डॉली अभी उफ़ आह ... मज़ा आ गया जानू, और जोर से चोदो मुझे मज़ा आ रहा है, जोर से धक्के मारो .... आह जानू बहुत मज़ा आ रहा है ...... जैसी आवाजें निकाल रही थी। रश्मि समझ गई कि अब डॉली सेक्स को एंजाय कर रही है जिस तरह कुछ देर पहले रश्मि कर रही थी। फिर अचानक ही आवाज आना बंद हो गईं। रश्मि ने कुछ देर इंतजार किया लेकिन अब दूसरी तरफ से कोई आवाज नहीं आ रही थी।

फिर रश्मि वापस अपने बिस्तर पर जाकर लेटने लगी तो उसकी नज़र उस सफेद चादर पर पड़ी जो उसने चुदाई से पहले अपने नीचे बिछाई थी। इस पर लाल रंग के निशान थे। रश्मि इन लाल निशानों को देखते ही अपनी सलवार उतार कर अपनी चूत को देखने लगी। वहाँ अब खून का कोई निशान नहीं था। फिर रश्मि ने वह चादर उठाई और अटैच बाथरूम में ले जा कर एक ड्रॉयर में रख दी और खुद बिस्तर पर आकर लेट गई और राज की सुरक्षा की दुआएं मांगने लगी। दुआ माँगते माँगते न जाने कब उसकी आंख लग गई।

सुबह 12 बजे के करीब उसकी आंख खुली तो उसको घर में थोड़ी हलचल महसूस हुई। अब वह बिस्तर से उठ कर बैठी ही थी कि उसके कमरे का दरवाजा नॉक हुआ। रश्मि ने तुरन्त उठकर अपना दुपट्टा लिया और कमरे का दरवाजा खोला तो सामने उसकी सास खड़ी थीं। उन्होंने रश्मि को प्यार किया और बोलीं बेटा घर में मेहमान आए हुए हैं तुम तैयार होकर थोड़ी देर मे बाहर आ जाओ यह कह कर वह बाहर चली गईं और रश्मि तैयार होने लगी।

एक घंटे के बाद रश्मि जब अपने कमरे से निकली तो उसने ब्लैक कलर की साड़ी शोभाये तन कर ( पहन ) रखी थी। ब्लाऊज़ की लंबाई कुछ अधिक न थी, रश्मि की साड़ी का ब्लैक ब्लाऊज़ नाभि यानी बेली बटन से कुछ ऊपर समाप्त हो रहा था। नीचे उसका पेट और कमर का कुछ हिस्सा दिख रहा था और उसके नीचे साड़ी के नीचे वाला हिस्सा था। बारीक पल्लू उसके पेट से होता हुआ सीने के उभारों को छूता हुआ बाएँ कंधे के ऊपर से घूमकर दाएँ हिस्से पर आ रहा था। उसके साथ हल्के रंग का मेकअप रश्मि की सुंदरता को चार चांद लगा रहा था।

रश्मि बाहर आई तो बारी बारी सभी मेहमानों से मिली। जय की दुल्हन डॉली भी वहीं मौजूद थी वह भी खासी तैयार होकर निकली थी। रश्मि डॉली से गले मिलने के बाद जय से हाथ मिलाकर एक सोफे पर बैठ गई जहां बाकी मेहमान भी बैठे थे। कुछ ने राज के बारे में जानना चाहा तो रश्मि ने उन्हें बताया कि वह कुछ नहीं जानती उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। वह अपना मोबाइल भी घर छोड़ गए हैं। जबकि कुछ मेहमानों ने रश्मि को तसल्ली दी कि बेटा चिंता नहीं करो वह जल्द ही आ जाएगा। सब अतिथियों से बातों में व्यस्त हो गए तो रश्मि वहाँ से उठी और जय को अपने पीछे आने का इशारा किया।

बड़ी भाभी का इशारा पाकर जय रश्मि के पीछे चल पड़ा। रश्मि अपने कमरे में जाकर बेड पर बैठ चुकी थी।जय भी कमरे में आया और बोला जी भाभी बताइए क्या बात है? रश्मि रुआंसी सी आकृति बनाकर बोली जय भाई प्लीज़ किसी तरह राज का पता लगाओ वे कहाँ हैं मुझे बहुत चिंता हो रही है उनकी।

जय ने भाभी के कंधे पर हाथ रखकर हल्का सा दबाया और सांत्वना देते हुए बोला रश्मि भाभी आप चिंता न करें राज भाई बिल्कुल ठीक होंगे। मैंने सुबह ही उनके कार्यालय से पता किया तो वहां से मुझे बताया गया कि उन्हें एक विशेष मिशन पर भेजा गया है जो बहुत जरूरी था। उन्हें बस एक व्यक्ति की मुखबिरी करना है उसके बाद वह वापस आ जाएंगे। यह सुनकर रश्मि बोली कि आज आएंगे ना वह वापस? रात एक निमंत्रण भी है। ???जय बोला कि भाभी आज तो मैं कुछ नहीं कि सकता बस उनके कार्यालय से इतना ही पता लगा है कि वह जल्द आएंगे। आप चिंता न करें बाहर बाकी मेहमानों के साथ आकर बैठ जाएँ आपका दिल लगा रहेगा।

यह कह कर जय कमरे से निकल गया। कुछ ही देर बाद रश्मि ने भी अपनी आँसुओं से लथपथ आँखें साफ की और मेकअप को एक हल्का सा स्पर्श देकर बाहर मेहमानों के पास जा कर बैठ गई। राज की बहनें कल्पना व पिंकी भी वहीं मौजूद थीं जबकि शाम तक रश्मि की कुछ कॉलेज फ्रेंड्स भी आ चुकी थीं। कॉलेज फ्रेंड्स को लेकर रश्मि अपने कमरे में आ गई। कमरे में आते ही रश्मि की दोस्तों ने रश्मि को घेर लिया और पूछने लगी कि राज भाई के साथ रात कैसी गुज़री? जिस पर रश्मि ने थोड़ा शरमाते हुए और थोड़ा इठलाते हुए उन्हें अपना मुंह दिखाई उपहार भी दिखाया और दबे शब्दों में अपना कुँवारा पन समाप्त होना भी बताया। रश्मि की एक दोस्त जो ज्यादा ही मुँह फट थी वे बोली तुमको भी खाली करवाया राज भाई ने या खुद ही 2 मिनट में समाप्त होकर साइड मे पड़ गए ??इस पर रश्मि ने बड़े घमंड से कहा कि उन्हें वापस तो आने दे तुझे भी वह 5 बार खाली करवा देंगे। इस पर सभी सहेलियाँ खिलखिला कर हंस पड़ी।

 


यूं ही समय बीतता गया, निमंत्रण और मुँह दिखाई का कार्य भी हो गया, रश्मि ने दुल्हन की बजाय घर की बहू के रूप में आमंत्रण में भाग लिया क्योंकि पति के बिना दुल्हन बनकर मिलाई की दावत में बैठना किसी तरह भी उचित नहीं था जबकि जय और उसकी दुल्हन डॉली ने दूल्हे दुल्हन के रूप मिलाई आमंत्रण अटेंड किया।

3 दिन बीत चुके थे मगर राज का अभी तक कुछ पता नहीं चला था। कल्पना अपने पति के साथ वापस अपने घर जा चुकी थी जबकि राज की छोटी बहन पिंकी राज की नामौजूदगी की वजह से रश्मि के साथ ही उसके कमरे में सोती थी। रश्मि और पिंकी दोनों रात को राज की सुरक्षा की विशेष भगवान से दुआएं मांगती और उसके बाद बिस्तर पर लेटकर लम्बी लम्बी बातें करतीं। पिंकी अपनी रश्मि भाभी को प्रोत्साहित करती और उसे अपने भाई की बहादुरी के किस्से भी सुनाती।

रश्मि की शादी को अब पूरे 7 दिन हो चुके थे। मगर अब तक राज का कुछ पता नहीं चला था। रश्मि के घरवाले, रश्मि खुद और राज के घरवाले अब राज को लेकर काफी परेशान थे। क्योंकि राज के कार्यालय से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा था। न ही अभी तक राज ने घर संपर्क किया था करता भी कैसे वह तो कर्नल इरफ़ान की कैद में था जहां से कोई कैदी बचकर नहीं निकल सका था।

जय को भी अपने भाई की चिंता थी यही कारण था कि उसने अपने हनीमून की योजना को भी कैंसिल कर दिया था जो कि शादी के 3 दिन बाद का था। इस योजना के अनुसार शादी के 3 दिन बाद जय और उसकी पत्नी डॉली और राज और रश्मि ने मिलकर गोआ जाने का प्रोग्राम बनाया था। मगर राज के न होने के कारण यह प्रोग्राम कैंसिल हो गया था।

इस दौरान रश्मि 3 दिन के लिए अपने मायके से भी हो आई थी। दूसरी ओर जय की पत्नी डॉली से अब सब्र नहीं हो रहा था। उसने जय पर जोर डालना शुरू किया कि अब उन्हें हनीमून के लिए जाना चाहिए। पहले पहल तो जय ने उसे डांट दिया मगर फिर अंततः उसे मानना ही पड़ा। तय यह हुआ कि जय, उसकी पत्नी डॉली, रश्मि और जय की बहन पिंकी ये चारों लोग गोआ जाएंगे। जब रश्मि को इस कार्यक्रम का पता चला तो उसने तुरंत ही मना कर दिया कि एक तो वो राज के बिना नहीं जाएगी, दूसरी बात यह जय का हनीमून ट्रिप है तो इसमें वह अपनी पत्नी के साथ ही जाएगा अगर राज होते तो बात और थी मगर यों इस तरह राज के बिना हनीमून यात्रा पर रश्मि के अकेले जाना ठीक नहीं। मगर राज के अभाव से पिंकी को जो अवसर मिला था गोआ की सैर करने का वह उसको बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए वह रश्मि की मिन्नतें करने लग गई कि भाभी आप नहीं जाएंगी तो जय भाई मुझे नहीं लेकर जाएंगे। और अगर आप जाएँगी तो साथ में मैं भी जा सकती हूँ।

रश्मि ने पिंकी को समझाना चाहा कि राज के बिना उसका बिल्कुल दिल नहीं कर रहा वह ऐसे नहीं जा सकती। अगर राज की कोई सुध ही मिल जाती तो शायद वह चली भी जाती। मगर अब नहीं जा सकती पर पिंकी कहां टलने वाली थी। हालांकि पिंकी की उम्र रश्मि से एक साल बड़ी थी मगर रिश्ते में रश्मि न केवल पिंकी बड़ी थी बल्कि जय से भी बड़ी थी। इसलिए पिंकी रश्मि के सामने ऐसे ही जिद कर ने लगी जैसे वह अपने बड़े भाई राज के सामने बच्ची बनकर जिद करती थी। घर में सबसे छोटी होने के कारण पिंकी में बचपना भी काफी था। रश्मि ने पिंकी को यह भी समझाना चाहा कि जय अपनी पत्नी के साथ हनीमून पर जाना चाहता है हम वहाँ कबाब में हड्डी होंगे तो पिंकी तुरंत बोली कि हम अलग कमरे में रहेंगे वे दोनों अलग कमरे में अब और कोई बहाना नहीं बस आप चलने की तैयारी करें। आखिरकार रश्मि को पिंकी की जिद के आगे हार माननी पड़ी। शादी के 10 दिन बाद जय, डॉली, रश्मि और पिंकी हनीमून यात्रा पर गोआ जा रहे थे।डॉली और पिंकी तो बहुत खुश थे, जबकि रश्मि का बिलकुल भी मन नहीं लग रहा था राज के बिना दूसरी ओर जय भी थोड़ा निराश था अपनी भाभी के सामने उसको एहसास था कि राज के अभाव में उसे अपना हनीमून ट्रिप प्लान नहीं करना चाहिए था मगर क्या करता पत्नी की जिद के सामने उसकी एक नहीं चली।

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राज की आंख खुली तो अबकी बार वह पहले से अपेक्षाकृत छोटे कमरे में कैद था। और इस बार नाइलोन की रस्सी की बजाय उसके हाथ लोहे की राड से बँधे थे राज एक दीवार के साथ सीधा खड़ा था उसके हाथ सिर से ऊपर दीवार के साथ लगे लोहे के राड मे थे जबकि पांव भी इसी तरह के लोहे की गोल राड के साथ बाँधे गए थे। अब की बार राज अपनी जगह से हिल भी नहीं सकता था। इन राड को देखकर राज ने परेशान होने की बजाय कुछ सुख का सांस लिया। क्योंकि नाईलोन रस्सी से अपने हाथ छुड़ाना उसके लिए संभव नहीं था क्योंकि इस कमरे में ऐसी कोई चीज़ नहीं थी कि जिससे वह अपनी रस्सी काट सकता। जबकि लोहे के इन राड को वह किसी भी लोहे की पतली पिन से आसानी खोल सकता था। अब समस्या केवल ऐसी पिन प्राप्त करने की थी

राज अब कमरे समीक्षा कर ही रहा था कि कमरे की रोशनी ऑनलाइन हुई यह एक पूरी तरह टॉर्चर सेल था जो विभिन्न प्रकार के उपकरणों से लेस्स था इन उपकरणों को राज ने पहले भी देख रखा था क्योंकि वह भी भारत के खुफिया संगठन का एजेंट था। कमरे की रोशनी ऑनलाइन होने के बाद कमरे का दरवाजा खुला जो लोहे की भारी चादर से बना हुआ था और बिना कोड के उसको खोलना संभव नहीं था। दरवाजे से इस बार 2 पुरुष और एक लड़की अंदर आई दोनों पुरुषों को छोड़कर मेजर राज ने लड़की सोनिया का जायजा लेना शुरू कर दिया। यह लड़की थी ही ऐसी कि जो भी एक बार देख ले वह अपनी नज़रें हटाना भूल जाए। 22 वर्षीय सोनिया को आईएसआई ने विशेष रूप से हायर किया था। सोनिया का आकर्षण उसका शरीर और उसके उतार चढ़ाव थे जो किसी भी पुरुष को दीवाना बना सकते थे। सोनिया का उपयोग अक्सर दुश्मन के रहस्य उगलवाने के लिए किया जाता था। सोनिया किसी भी दुश्मन को अपने बिस्तर पर ले जा कर उसे खूब मज़ा देती थी, लेकिन मजे के साथ उसको खूब परेशान भी करती थी और बातों ही बातों में से कई प्रकार के रहस्य उगलवा कर अपने उच्च अधिकारियों तक पहुँचाती थी।

22 साल की गर्म जवानी में उसके सीने पर 36 आकार के पहाड़ जैसे मम्मे सिर उठाए खड़े थे और 34 आकार के बाहर निकले हुए उसके नितंब किसी भी बेजान लंड में जान डालने के लिए पर्याप्त थे। 30 की कमर के साथ सोनिया एक पटाखा लड़की थी। सोनिया अब तक 3 एसएल, 2 बंगाली और 5 भारतीयसैनिकों को अपने बिस्तर पर ले जा कर उनसे अलग रहस्य उगलवा चुकी थी। और कर्नल इरफ़ान और आईएसआई के अन्य उच्च अधिकारी सोनिया के प्रदर्शन से बहुत खुश थे। सोनिया ने उस समय एक टाइट पैन्ट पहन रखी थी जिसमें उसके मांस से भरे हुए इनपुट और 34 के चूतड़ बहुत सेक्सी लग रहे थे। ऊपर उसने एक छोटी सी शर्ट पहन रखी थी जो सिर्फ उसके 36 आकार के मम्मों को छिपाने का काम कर रही थी। पेट का ज्यादातर हिस्सा नंगा था उसी तरह कमर भी ज्यादातर नंगी ही थी कंधों तक छोटे और हल्के बालों को उसने टट्टू का रूप देकर सिर के पीछे बांध रखा था।

सोनिया ने जब मेजर राज को यूँ अपनी समीक्षा करते हुए देखा तो उसने एक सेक्सी स्माइल पास की और दिल ही दिल में बोली कि यह भी गया काम से। सोनिया के साथ आए 2 पुरुषों ने मेजर राज को सख़्त और कर्कश स्वर में बोला कि तुम कौन हो और कर्नल इरफ़ान तक कैसे पहुंचे ?? मेजर राज ने सोनिया के मम्मों से नज़रें हटाए बिना जवाब दिया यातायात पुलिस का कांस्टेबल राज हूँ तुम्हारा कर्नल इरफ़ान राज मार्ग पर 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से होंडा चला रहा था इसलिए मैं उसका पीछा करने लगा और जब मुझे पता चला कि यह दुश्मन देश का कर्नल है तो मैंने उसको पकड़ने के लिए उसकी नाव तक उसका पीछा किया। मेजर राज ने एक ही सांस में जवाब दिया। यह जवाब वह तब से सोच बैठा था जब पहले वाले कमरे में उससे पूछताछ शुरू हुई थी। मेजर राज ने जैसे ही जवाब समाप्त किया एक व्यक्ति ने दीवार के साथ लगा हुआ लीवर ऊपर उठा दिया। लीवर ऊपर उठाते ही मेजर राज को अपना शरीर कटता हुआ महसूस होने लगा। उसके हाथ और पैर में सूइयां चुभने लगीं। यह दर्द असहनीय था। मेजर की आंखें लाल हो गईं और रंग फीका पड़ने लगा।

कुछ देर के बाद इस व्यक्ति ने लीवर वापस नीचे किया तो मेजर राज को एक झटका लगा और फिर धीरे धीरे उसके शरीर को आराम मिलने लगा। अब की बार सोनिया मेजर राज के पास आई और उसके चेहरे पर हाथ फेरने लगी, मेजर राज अपनी सारी तकलीफ भूलकर सोनिया को ऐसे देखने लगा जैसे अब आँखों ही आँखों में उसकी चुदाई कर डालेगा। सोनिया बड़े ही प्यार से बोली देख मेरी जान ये दोनों कमीने बहुत क्रूर हैं। अगर तुम उन्हें सच नहीं बता देंगे तो यह तुम्हारी बोटी-बोटी कर देंगे। इसलिए भलाई इसी में है कि इन लोगों को सच बता दो। यह कह कर सोनिया पीछे गई मगर मेजर राज की नजरें उसके मम्मों से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी। शॉर्ट ब्लाऊज़ में उसके बूब्स का उभार बहुत ही सेक्सी लग रहा था।

अब की बार फिर से एक कर्कश आवाज़ आई सच सच बताओ तुम कौन हो और कर्नल इरफ़ान का पीछा क्यों कर रहे हो? मेजर राज की ज़ुबान फिर चल पड़ी: यातायात पुलिस का कांस्टेबल राज हूँ तुम्हारा कर्नल इरफ़ान राज मार्ग आगरा पर .......... फिर मेजर राज के शरीर में करंट दौड़ गया और उसको अपने हाथ और पैर में वही सुई की चुभन महसूस हुई और उसका रंग पीला हो गया। कुछ देर बाद लीवर नीचे गया तो मेजर की स्थिति कुछ संभली।अब की बार फिर से सोनिया मेजर के पास आई और उसके होंठों पर अपने होंठ रखती हुई बोली बता दे मेरी जान, इन्हे सब कुछ सच सच बता दे। वरना यह तुझे नहीं छोड़ेंगे। सोनिया के चुप होते ही मेजर राज ने अपने होंठों से सोनिया के रसीले होंठ चूस डाले। मेजर ने ऐसी मजेदार पप्पी ली थी कि सोनिया कि एक पल के लिए तो वह भूल ही गई कि वह दुश्मन देश के गुप्त एजेंट के सामने खड़ी है। मेजर राज ने सोनिया के होंठों को छोड़ा और बोला जानेमन तुम्हारी इस गर्म जवानी की कसम खा रहा हूँ सच कह रहा हूँ। अगर उन्हें मेरी बात पर यकीन नहीं आता तो यह बताएँ उन्हें क्या जवाब देना चाहिए। जो यह कहेंगे वही शब्द दोहरा दूंगा।

इस पर दूसरे व्यक्ति ने बोला मान जा तू रॉ का एजेंट है। मेजर राज ने कहा हां में रॉ का एजेंट हूँ। इस पर दूसरे व्यक्ति ने बोला और तुझे मेजर जनरल सुभाष ने कर्नल इरफ़ान का पीछा करने के लिए भेजा था। राज बोला हां मुझे मेजर जनरल सुभाष ने कर्नल इरफ़ान का पीछा करने भेजा था। पहला व्यक्ति गुर्राया और बोला- अब बता क्यों कर रहा था तू कर्नल इरफ़ान पीछा ??? इस पर मेजर राज बोला तुम ही बताओ न कि मैंने क्या कहना है। जैसा तुम कहोगे वैसे ही में दुहरा दूँगा एक झन्नाटे दार थप्पड़ से मेजर राज का गाल लाल हो गया और वह व्यक्ति फिर से गुर्राया हरामज़ादे .... सच सच बोल तू कौन है और कर्नल इरफ़ान का पीछा क्यों कर रहा था।

यातायात पुलिस का कांस्टेबल राज हूँ तुम्हारा कर्नल इरफ़ान। । । । । । । । । । । फिर मेजर राज का रंग पीला हो गया। वही करंट उसके शरीर में फिर से छोड़ा गया था। अब की बार मेजर को अपनी जान निकलती हुई महसूस हुई और उसकी आँखें बंद होने लगी। बेहोश होने से पहले जो आखिरी बात मेजर राज की आँखों के सामने थी वह सोनिया के मम्मे थे।

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दोस्तो आज के अपडेट में बस इतना ही

दोस्तो अपनी राय से अवगत ज़रूर कराएँ
 
Ankit wrote: राज भाई क्या डायलॉग मारा हैं

आश्चर्य है यार क्या हिजड़े भर्ती करते हो तुम लोग सेना में .. अब शुक्र करो उनके सामने भारत का यातायात कांस्टेबल था कहीं वास्तव में रॉ का एजेंट आ जाता तो तुम्हारा कर्नल इरफ़ान भी इसी कैप्टन की तरह अगले जहां मे पहुँचता।
 
रात के 12 बजे जय बाकी लोगों के साथ गोआ पहुंच चुका था। वहां आर्मी कॅंट मे पहुंचते ही जय और डॉली अपने कमरे में चले गए जबकि रश्मि और पिंकी दूसरे रूम में चले गए। मेजर राज की वजह से जय की पहले से ही आर्मी केंट में एक सुंदर रूम की बुकिंग थी। बॉम्बे से हवाई जहाज़ के माध्यम गोआ तक की यात्रा में सब थक गये थे सर्विस बॉय ने सारा सामान जय के कहने के अनुसार उचित कमरों में रख दिया था। थोड़ी देर बाद सर्विस बॉय ने पहले जय और फिर रश्मि का कक्ष खटखटाया और उन्हें खाने के लिए डाइंग टेबल पर आने के लिए कहा। कुछ ही देर में सब लोग खाना खा हो चुके तो थकान के कारण अपने अपने कमरों में चले गए। रश्मि और पिंकी अपने कमरे में गए जबकि डॉली और जय अपने रूम में चले गए।जय के कमरे में एक खिड़की थी जिसके पीछे समुद्र और पेड़ ही पेड़ थे। रात के इस पहर में यह दृश्य खासा भयानक लग रहा था मगर जय जानता था कि सेना के अंडर होने के कारण यह सुरक्षित क्षेत्र है।डॉली ने कमरे में जाते ही उस खिड़की के पर्दे गिरा दिए और शौचालय चली गई।

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जय ने कमरे की रोशनी बंद कीं और एक ज़ीरो वाट का बल्ब जलता रहने दिया। वह बहुत थक चुका था और अब कुछ सोना चाहता था। अपने बूट और कोट उतार कर अब वह कंबल में घुसने ही लगा था कि शौचालय का दरवाजा खुला और डॉली बाहर आई। डॉली पर नज़र पड़ते ही जय अपनी नज़रें हटाना भूल गया था। पिंक कलर की शॉर्ट नाइटी में डॉली इस समय कोई सेक्स क्वीन लग रही थी। गहरे गले वाली नाइटी में डॉली के 38 आकार के बूब्स का उभार बहुत स्पष्ट नजर आ रहा था। कसे हुए सख्त मम्मे आपस में जुड़े हुए थे और उनके बीच बनने वाली क्लीवेज़ लाइन किसी भी आदमी को पागल कर देने के लिए काफी थी। नाइटी मुश्किल से डॉली के 34 आकार के चूतड़ों को घेरे हुए थी। नीचे डॉली ने एक जी स्ट्रिंग पैन्टी पहन रखी थी जिसने सामने से डॉली की चूत को ढक रखा था जबकि पीछे से डॉली के चूतड़ों को कवर के लिए पैन्टी मौजूद नहीं था। पीछे की साइड पर केवल पैन्टी की एक स्ट्रिंग थी जो डॉली के 34 आकार के भरे हुए चूतड़ों की लाइन में गुम हो गई थी।

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डॉली ने मदहोश नजरों से जय को देखा और एक सेक्सी अंगड़ाई ली जिससे डॉली की शॉर्ट नाइटी और ऊपर उठ गई और उसकी जी स्ट्रिंग पैन्टी स्पष्ट दिखने लगी। इसी तरह डॉली ने मुंह दूसरी तरफ कर लिया तो नाइटी ऊपर उठने की वजह से उसके भरे हुए चूतड़ भी अपना जलवा दिखाने लगे। डॉली को इस हालत में देखते ही जय की पेंट में लंड सिर उठाने लगा और गोवा में नवंबर की ठंड में भी जय के शरीर में आग लगा दी।

जय बेड से उठा और तुरंत डॉली के पास पहुंचकर उसको अपनी गोद में उठा लिया। गोद में उठाया तो डॉली के 38 आकार के गोल मम्मे जय के चेहरे के सामने आ गए जबकि जय के हाथ डॉली के पैरों के आसपास थे। डॉली ने अपनी टाँगें पीछे की ओर फ़ोल्ड कर ऊपर उठा ली और जय को सिर से पकड़ कर अपने सीने के साथ लगा दिया। डॉली के सीने पर सिर रखते ही जय को लगा जैसे उसने अपना सिर एक नरम और गुदाज़ तकिए पर रख दिया हो। जय ने अपना सिर उठाया और डॉली की क्लीवेज़ लाइन देखने लगा तो उसने अपने गर्म गर्म होंठ डॉली के मम्मों के उभारों पर रख दिए जो नाइटी से बाहर दिख रहे थे। जय दीवाना वार डॉली के मम्मों को प्यार करने लगा। थोड़ी देर बाद जय ने डॉली को बेड पर धक्का दिया और खुद उसके ऊपर गिर कर उसको पागलों की तरह चूमने लगा। जय कभी डॉली के नरम होंठों का रस चूसता तो कभी उसकी गर्दन को दांतों से खाने लगता। कभी उसके मम्मे हाथ में पकड़ कर जोर से दबाता तो कभी डॉली के चूतड़ों का मांस हाथ में लेकर उन्हें जोर से दबाता।

डॉली की मोटी थाईज़ पर प्यार करते हुए जय उनकी नरमी का दीवाना हुआ जा रहा था। वह बड़े जोश के साथ डॉली की थाईज़ को चूम रहा था और फिर जय के होंठ थाईज़ से होते हुए डॉली की पैन्टी तक पहुंचे, जो अब तक की कार्रवाई के परिणामस्वरूप काफी गीली हो चुकी थी। डॉली की पैन्टी से आने वाली खुशबू ने जय को मदहोश कर दिया था। जय ने अपनी ज़ुबान निकाली और पैन्टी के गीले हिस्से पर रख कर उसको चाटने लगा। डॉली ने अपने दोनों पैर उठाकर जय की गर्दन के आसपास लपेट दिए और उसके सिर के बालों में अपनी उंगलियां फेरने लगी। जैसे-जैसे जय डॉली की पैन्टी पर अपनी जीभ फेर रहा था वैसे-वैसे डॉली की आउच, उम्मह, उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आह आह आह। आह आह। । अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्म । । उम उम्म्म .... मज़ा आ गया जान, आह, खा जाओ इन्हे तुम्हारे ही है यह, ऊच जैसी आवाजें बुलंद हो रही थीं। थोड़ी देर के बाद जय ने डॉली की पैन्टी उतार दी। पैन्टी उतारते ही वह डॉली की हल्के गुलाबी रंग की चूत पर टूट पड़ा। डॉली की चूत महज 10 दिन पहले ही पहली बार फटी थी इसीलिए अभी तक उसकी चूत के होंठ आपस में मिले हुए थे। अब जय की ज़ुबान तेजी के साथ चल रही थी। डॉली ने गोवा आने से पहले विशेष रूप से अपनी चूत की सफाई की थी। उसका पहले से कार्यक्रम था कि गोआ जाते ही वहां की ठंड में जय के गरम लंड से अपनी चूत की प्यास बुझानी है। कुछ ही देर के बाद जय की ज़ुबान की रगड़ाई के कारण डॉली की चूत ने पानी छोड़ दिया।

इस ठंड में भी डॉली की चूत ने कई बार गर्म पानी छोड़ा था जिससे जय का चेहरा भर गया था। उसके बाद डॉली ने पास पड़े बॉक्स से तोलिया निकाल कर जय के चहरे को साफ किया और उसे चूमने लगी। फिर डॉली ने जय की शर्ट को गले से पकड़ा और एक ही झटका मारा , जय की शर्ट खुलती चली गई उसकी शर्ट के बटन टूट चुके थे और डॉली ने बिना इंतजार किए उसकी शर्ट उतारने के बाद उसकी बनियान भी एक ही झटके में उतार दी और उसके सीने पर प्यार करने लगी। वह एक जंगली बिल्ली की तरह जय पर टूट पड़ी थी। जब की शादी के बाद जय उसको 5, 6 बार चोद चुका था मगर ऐसी दीवानगी जय ने अभी तक नहीं देखी थी। जय को डॉली की यह दीवानगी और जंगली पन बहुत अच्छा लग रहा था। डॉली अपने हाथ और उंगलियों को जय की कमर पर फेर रही थी उसके नाखून जय की कमर पर अपने निशान छोड़ रहे थे जिससे जय की दीवानगी भी बढ़ती जा रही थी। फिर डॉली ने जय को बेड पर धक्का दिया और उसकी पेंट की बेल्ट खोलने के बाद ज़िप खोली और उसकी पेंट को घुटनों तक नीचे उतार दिया।

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वीर्य की निकलने वाली बूंदों की वजह से जय का अंडर वेअर गीला हो चुका था जय की तरह डॉली ने भी अपनी ज़ुबान को जय के गीले अंडर वेअर पर रख दिया और उसके वीर्य की सुगंध का आनंद लेने लगी। कुछ देर तक उसका अंडर वेअर चाटने के बाद अब डॉली ने जय का अंडरवेअर भी उतार दिया और पैन्ट भी उतार दी थी। जय अब पूरी नंगा था और उसका 7 इंच का लंड डॉली के हाथ में था जिसको वह किसी लॉलीपाप की तरह चूसने में व्यस्त थी। जय की टोपी से निकलने वाला पानी डॉली अपनी जीभ से चाट्ती और फिर उस पर थूक का गोला बनाकर गिराती और अपने हाथों से इसे पूरे लंड पर मसल देती। उसके बाद फिर से जय के लंड की टोपी को अपने मुंह में डालती और जय के लंड से फिसलता हुआ डॉली का मुंह आंडो तक चला जाता। डॉली के मुंह की गर्मी जय के लंड को बहुत मज़ा दे रही थी। डॉली बहुत ही मजे के साथ जय की लंड चुसाइ कर रही थी।

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कुछ देर की चुसाइ के बाद जय के लंड की मोटाई थोड़ी बढ़ी और उसकी नसें स्पष्ट होने लगीं। डॉली समझ गई कि उसका लंड वीर्य उगलने वाला है मगर आज तो डॉली अपने आप में नहीं थी उसने बिना इसकी परवाह किए जय के लंड के चौपे लगाना जारी रखे और आखिरकार जय ने अपनी सारी वीर्य डॉली के मुँह में ही निकाल दिया जिसकी आखिरी बूंद तक डॉली ने अपने गले से नीचे उतार ली . जब जय अपना सारा वीर्य निकाल चुका तो डॉली ने अपनी जीभ से उसके लंड पर लगा हुआ वीर्य भी चाट लिया और फिर अपने होंठों पर जीभ फेरकर उसके मजे लेने लगी।

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अब जय का लंड थोड़ा मुरझा गया था। अब जय उठा और डॉली की नाइटी उतार दी। डॉली ने नीचे ब्रा पहनने की जहमत नही उठाई थी उसके 38 आकार के भारी मम्मे जय के हाथों में थे जिन पर वह अपनी ज़ुबान फेर रहा था। डॉली ने जय का एक हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रखा और दूसरा हाथ मम्मों पर ही रहने दिया, जय अब एक हाथ से उसका एक मम्मा दबा रहा था जबकि दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगली फेर रहा था और डॉली का दाहिना मम्मा जय के मुंह में था जिसका निप्पल जय लगातार चूस रहा था और डॉली आँखे बंद किए आह अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्हऊच की आवाजें निकाल रही थी। डॉली आज निडर होकर सिसकियाँ ले रही थी और आज की रात सेक्स एंजाय कर रही थी।

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जब कि डॉली की सिसकियाँ घर में भी रश्मि को सुनाई देती थीं मगर वहाँ डॉली काफी नियंत्रित करती थी मगर कमरा साथ होने के कारण कुछ सिसकियाँ साथ वाले कमरे में भी सुनाई दे रही थीं। मगर आज तो डॉली को किसी बात का होश नहीं था। वो बिना किसी डर के जोर से सिसक रही थी। वह जानती थी कि औरत की सिसकियाँ पुरुष को जोश दिलाती है और वह फिर जमकर चुदाई करता है। और हो भी ऐसा ही रहा था डॉली की सिसकियों की ही वजह से जय का लंड फिर से तन चुका था और चूत में जाने के लिए तैयार था। एक कमरा छोड़ कर दूसरे कमरे में लेटी रश्मि भी डॉली की सिसकियाँ सुन रही थी जबकि पिंकी कमरे में पहुंचते ही सो गई थी। डॉली की सुनाई देने वाली सिसकियाँ रश्मि को तीव्रता से राज की याद दिला रही थीं। राज ने पहली रात में रश्मि को अपने 8 इंच के लंड से जो मज़ा दिया था रश्मि वह मज़ा अभी तक नहीं भूली थी। और डॉली की सिसकियाँ रश्मि की चूत को भी गर्म कर रही थीं।

यही कारण था कि इधर डॉली की सिसकियाँ जय के लंड खड़ा कर चुकी थीं तो उधर उसकी सिसकियों से रश्मि भी अपनी चूत में उंगली फेर रही थी। रश्मि की चूत आज भी ऐसी ही थी जैसे बिल्कुल कुंवारी चूत होती है। क्योंकि इसमें सिर्फ एक बार ही सुहागरात वाले दिन लंड गया था।

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जब जय का लंड फिर से चुदाई को तैयार हुआ तो जय ने डॉली के पैर खोलना चाहे ताकि वो उसकी चूत में अपना लंड उतार सके। मगर डॉली ने उसको मना कर दिया और जय को लेटने को कहा। जय लेट गया तो डॉली जय के ऊपर आई और उसके लंड का टोपा अपनी चूत के छेद पर फिट कर एक ही झटके में उसके लंड पर बैठ गई।

[IMG]] जय का लंड डॉली चूत की दीवारों के साथ रगड़ खाता हुआ उसकी चूत की गहराई तक उतर गया और गर्भाशय से जा टकराया जिस पर डॉली ने एक जोरदार सिसकी भरी जिसने रश्मि के कानों में घुस कर उसकी चूत में और ज़्यादा आग लगा दी । उधर डॉली जय के लंड पर घोड़े की तरह सवारी कर रही थी और आवाज़ें निकाल रही थी तो दूसरे कमरे में रश्मि की उंगली अब चूत में पहले से अधिक तेजी के साथ अपना काम कर रही थी।

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जब डॉली जय के लंड पर उछल उछल कर के थक गई तो जय ने उसे अपने ऊपर लिटा लिया और नीचे से अपना लंड पूरी गति के साथ डॉली की चूत में चलाना शुरू किया। 5 मिनट की चुदाई के बाद डॉली की योनी में बाढ़ आ गई और उसकी चूत का सारा पानी जय के आंडों और थायज़ तक आ गया था। डॉली ने बिना इंतजार किए जय की गोद से उतर कर डॉगी स्टाइल की स्थिति ले लिया और जय को आमंत्रित किया कि वह अब पीछे से आकर डॉली की चुदाई करे। जय ने भी बिना समय बर्बाद किए पीछे से आकर डॉली की चूत पर अपना लंड रखा और एक ही धक्के में पूरा लंड सट से डॉली की चूत में उतार दिया। फिर डॉली की टाइट योनी में जय का 7 इंच का लंड पकडम पकड़ाई खेलने लगा। जैसे ही लंड अंदर की ओर धक्का लगाता चूत पूरी ताकत के साथ उसे पकड़ लेती जिसकी वजह से पूरा लंड एक पल के लिए दब सा जाता तो लंड अपनी ताकत से चूत की पकड़ से निकलता और चूत से बाहर निकल आता केवल लंड का टोपा ही चूत के अंदर रह जाता है, फिर धक्का लगता और फिर से लंड चूत के अंदर जाता और चूत फिर से उसको पूरी ताकत के साथ पकड़ लेती।

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डॉली का यह रूप जय के लिए बिल्कुल नया था। उसने पहले भी बहुत तेज़ी से डॉली को चोदा था मगर डॉली ने ऐसा दीवाना पन पहले कभी नहीं दिखाया था। पहले डॉली डॉगी स्टाइल में चुदाई करवाते हुए थोड़ी बेचैनी महसूस करती थी मगर आज तो वह खुद अपनी गाण्ड आगे पीछे करके चुदाई का मज़ा उठा रही थी। जय जैसे जैसे डॉली की चूत में धक्के मार रहा था वैसे ही साथ में उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मार मार कर डॉली को और अधिक आनंद दे रहा था डॉली के चूतड़ों से जय की जांघे टकराने पर धुप्प धुप्प की आवाज कमरे के वातावरण को बहुत सेक्सी बना रही थीं। डॉली के 38 आकार के मम्मे हवा में लटके हुए थे जो हर धक्के के साथ आगे हिलते और जब लंड बाहर निकलता तो मम्मे भी वापस पीछे की ओर झूलते जब चूतड़ों पर हाथ मार मार कर डॉली के चूतड़ लाल हो गए तो जय ने आगे झुककर डॉली के मम्मे पकड़ लिये, अब जय के पास ज्यादा गैप नहीं था वह लंड को ज़्यादा बाहर नहीं निकाल पा रहा था। मगर अब उसके धक्के पहले की तुलना में अधिक गति से लग रहे थे, जय का आधा लंड योनी से बाहर निकलता और एक जोरदार धक्के के साथ वापस योनी की गहराई से जाकर टकरा जाता

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अब डॉली ने अपना अगला हिस्सा ऊपर उठा लिया था। जो कि वह अभी भी एक तरह से डॉगी स्टाइल में ही चुदाई करवा रही थी क्योंकि जय पीछे से ही उसकी चूत में लंड डाले उसको चोद रहा था मगर उसने अपना अगला धड़ उठा लिया था और घुटनों पर खड़ी हो गई थी जबकि उसकी गाण्ड बाहर निकली हुई थी क्योंकि लंड को चूत तक का रास्ता चाहिए था। डॉली की कमर जय के सीने से जुड़ी हुई थी और गाण्ड बाहर निकलकर जय की नाभि के हिस्से से टकराती थी जबकि लंड लगातार डॉली की चूत की खुदाई कर रहा था। इस स्थिति में डॉली की सिसकियाँ चीखों में बदल चुकी थीं जय ने उसे आवाज हल्की रखने को कहा मगर डॉली इस समय अपने आप में नहीं थी उस पर चुदाई का भूत सवार था और वह अपनी हनीमून की पहली रात को यादगार बनाना चाहती थी। वह जय के तूफानी धक्कों को काफी देर से सहन कर रही थी साथ ही अपनी चूत को अपनी उंगली से भी सहला रही थी। थोड़ी देर के बाद एक बार फिर डॉली की चूत ने पानी छोड़ दिया जो फव्वारे के रूप में चादर पर गिरता चला गया। और कुछ बूँदें बेड की दूसरी ओर फर्श पर भी जा गिरी

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दूसरे कमरे में रश्मि का चेहरा लाल हो रहा था उसको उस समय राज के लंड की कमी महसूस हो रही थी मगर वह सिर्फ अपनी उंगली को ही अपनी चूत में चला रही थी। उसकी चूत अब डॉली की सिसकियाँ सुन सुनकर काफी गीली हो चुकी थी जबकि रश्मि का दूसरा हाथ उसके मम्मों पर था और वह अपना मम्मा जोर से दबा रही थी।

डॉली तीसरे राउंड के लिए तैयार थी जबकि जय के लंड ने अभी तक पानी नहीं छोड़ा था। डॉली अब बॅड पर लेट गई और खुद ही अपनी टाँगें खोल कर जय को बीच में बैठने के लिए आमंत्रित किया, जय ने डॉली के पैर पकड़कर चौड़े किए और उसके बीच बैठकर अपने लंड की टोपी डॉली की चूत पर रखकर एक ही झटके में लंड उसकी चूत के अंदर प्रवेश करा दिया अब जय का लंड बड़े आराम से डॉली की चूत को चोद रहा था और डॉली अपने मम्मों को अपने हाथों में पकड़ कर उन्हें दबा दबाकर अधिक आनंद महसूस कर रही थी। उसकी आंखों में लाल डोरे तैर रहे थे और वह जय को प्रशंसा भरी नज़रों से देख रही थी और उसको अधिक से अधिक उकसा रही थी कि वह और अधिक शक्ति के साथ उसकी चूत की चुदाई करे।

5 मिनट की चुदाई ने डॉली की चूत को लाल कर दिया था अब जय के शक्तिशाली लंड के सामने उसको अपनी चूत हार मानती दिख रही थी और उसकी हिम्मत जवाब दे रही थी, जय के धक्के भी पहले की तुलना में तूफानी होते जा रहे थे और कुछ ही देर बाद वो तीनों एक साथ ही अपना अपना पानी निकालने लगे। डॉली और जय का पानी डॉली की चूत में ही मिल गया जबकि रश्मि की चूत का पानी उसकी सलवार के अन्दर ही बहता रहा। डॉली और रश्मि दोनों ने चूत का पानी निकलते हुए सिसकियाँ ली और जय भी अपना पानी निकालने के बाद डॉली के ऊपर गिर गया।

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डॉली अब प्यार से जय को चूम रही थी और उसकी प्रशंसा कर रही थी कि उसने आज बहुत मज़ा दिया। जबकि जय भी डॉली के जंगली पन बहुत खुश था। उसे नहीं मालूम था कि उसकी पत्नी में इतनी आग भरी हुई है वरना वो शादी के तीसरे दिन ही उसे हनीमून पर लाकर खूब चोदता। कुछ देर बाद जय और डॉली एक दूसरे के सीने से लगे सो चुके थे। वे नंगे ही बिना कपड़े पहने सो गए थे। पहले यात्रा की थकान और फिर डॉली के वहशीपन के कारण जबरदस्त चुदाई ने दोनों को खूब थका दिया था। दूसरी ओर रश्मि भी चूत का पानी निकलने के बाद कुछ शांत हुई थी और राज का लंड याद करते करते सो गई।

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mastram wrote: मस्ती से भरपूर कहानी लगती है राज भाई
 
अब की बार मेजर राज की आंख खुली तो हुश्न देवी सोनिया अपने सारे हुश्न के साथ उसके सामने खड़ी थी। अभी भी वह टाइट पैंट में शॉर्ट ब्लाऊज़ के साथ अपने मम्मों का जलवा मेजर राज को दिखा रही थी। राज के होश में आते ही उसका लंड भी होश में आने लगा था क्योंकि सोनिया के मम्मे और उसकी मोटी गाण्ड के सामने कोई लंड सो जाये ऐसा संभव ही नहीं था। सोनिया के हाथ में खाने की थाली थी। उसने अपने हाथ से निवाला तोड़ा और मेजर राज को खिलाने लगी जो उसने बड़े ही प्यार से खाया। इसी तरह सोनिया ने सारा खाना मेजर राज को खिला दिया। भूख की वजह से उसका बुरा हाल था। ऊपर से बिजली के झटकों ने भी उसे निढाल कर दिया था उसे ताकत की ज़रूरत थी जो इस खाने से पूरी हो गई थी। मेजर राज को खाना खिलाने के बाद सोनिया ने काफी सीरियस होते हुए मेजर राज को कहा देखो तुम जो भी हो, जहां से भी आए हो उन को सब सच सच बता दो, अन्यथा यह तुम्हारे साथ बुरा सलूक करेंगे। तुम पहले कैदी हो जो मुझे पसंद आया। तुम्हारी बहादुरी और बेबाकी ने मेरा दिल जीत लिया है। मैंने हर कैदी को उन लोगों के सामने बिलखते और सिसकते देखा है मगर तुम पहले कैदी हो जो लोगों की परवाह किए बिना मेरे सीने पर नजरें जमाए मजे लेता रहा और बिजली के झटके लगने के बाद भी मैंने तुम्हारी आँखों में भय का तिनका तक नहीं देखा। इसलिए इन लोगों को सब कुछ सच सच बता दो इसी में तुम्हारी भलाई है।

सोनिया की ये बातें सुनकर मेजर राज बोला तुम्हारा नाम क्या है ?? सोनिया ने अपना नाम बताया तो मेजर राज बोला मैंने बहुत सी हसीन लड़कियाँ देखी हैं मगर तुम जैसी तेज तर्रार लड़की मैंने आज तक नहीं देखी। तुम्हारे शरीर के उभार मुझे पागल किए दे रहे हैं। मेजर राज अभी और भी बहुत कुछ कहता मगर सोनिया ने उसकी बात काटी और बोली में तुम से क्या कह रही हूँ और तुम हो कि तुम्हें आशिकी सूझ रही है। सोनिया ने इधर उधर देखा जैसे देखना चाह रही हो कि कोई आस पास है या नहीं ... फिर मेजर राज के कान के पास होकर बोली तुम जानते ही होगे कि अगर तुमने उन को सब कुछ बता दिया जो यह जानना चाहते हैं तो यह तुम्हे जीवित नहीं छोड़ेंगे, और अगर कुछ और दिन तुम उन्हें सच नहीं बताओगे तब भी यह तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ेंगे। यह हर मामले में तुम्हें मार देंगे। और मेरा इस्तेमाल भी करेंगे तुमसे सच उगलवाने के लिए।

में अपने हुश्न से पुरुषों को पागल करती हूँ और जब उन्हें मेरी ज़रूरत होती है तो उन्हें तड़पा तड़पा कर में सब जान लेती हूँ। और उसके बाद ये लोग उसे मार देते हैं। मगर तुम मुझे पसंद आए हो, तुम उन्हें सच सच बताओ जो यह पूछते हैं उसके बाद मैं तुमसे वादा करती हूँ कि मैं तुम्हारी यहां से निकलने में मदद करूंगी। राज उसकी यह बात सुनकर हैरान होकर बोला क्या तुम मेरी मदद क्यों करोगी ???

सोनिया ने कहा क्योंकि तुम्हारी मर्दानगी मुझे पसंद आ गई है। मैंने कई कड़ियल जवानों को इस जेल में सिसकते और बिलखते देखा है। मगर आप इन सबसे अलग हो निडर और बेबाक। इसलिए मैं नहीं चाहती कि यह तुम्हें कोई नुकसान पहुँचाएँ।

सोनिया बात सुनकर मेजर राज उसकी आँखों में देखता हुआ बोला अगर आपको लगता है कि पहले वाले सभी कैदियों से अलग हूँ और साहसी और निडर हूँ तो आप को यह भी पता होना चाहिए कि यहां से रिहाई पाने के लिए किसी औरत की और वह भी दुश्मन देश की महिला की मदद नहीं माँगूंगा मैं मर तो जाऊंगा मगर तुम्हारे सामने मदद के लिए हाथ नहीं फैलाउन्गा यह कह कर मेजर राज ने एक बार फिर अपना चेहरा आगे कर सोनिया के होंठों को चूस लिया। सोनिया ने नागवारी से पीछे हटते हुए मेजर राज को एक गाली दी और बाहर चली गई, जबकि पीछे मेजर राज ठहाके लगाने लगा।

सोनिया के जाने के बाद फिर से वही 2 बदमाश अंदर आए और मेजर राज से सवाल करने लगे और मेजर राज बिना सोचे समझे वह स्टोरी सुनाने लगा यातायात कांस्टेबल राज हूँ तुम्हारा कर्नल इरफ़ान राज मार्ग आगरा ........... .. इन्ही जवाबों की वजह से वो आदमी मेजर राज के शरीर में करंट दौड़ाने लगता। आज फिर यह सवाल जवाब 3 बार हुए मगर मेजर राज का जवाब चेंज नही हुआ। आखिरकार उनमें से एक बदमाश ने गुस्से में आकर पास पड़े लोहे के रॉड को उठाया और मेजर राज के पैरों पर बरसाना शुरू कर दिया। लोहे का रॉड जब मेजर के पैरों पर पड़ता तो मेजर राज की जान निकलने लगती उसको अपनी माँ याद आने लगती और वह चीख़ें मारने लगता। मगर उसने अपना बयान नहीं बदला। 10 मिनट तक मार खाने के बाद भी जब मेजर राज से सवाल पूछा गया तो उसने काँपती हुई आवाज़ और लुढ़के हुए चेहरे के साथ वही कहानी सुनाई यातायात कांस्टेबल राज हूँ तुम्हारा कर्नल इरफ़ान .. .. .. एक बार फिर बिजली के झटके लगे मेजर राज को और वह फिर से बेहोश हो गया।

मेजर राज को फिर से होश आया तो एक बार फिर सोनिया अपने हुश्नो जमाल के साथ उसके सामने मौजूद थी। जबकि मेजर राज का मार खा खा कर बुरा हाल हो गया था। अब की बार फिर सोनिया ने उस पर तरस खाते हुए कहा देखो जान उनको सब कुछ सच सच बता दो और मुझे यहाँ से लेकर भाग जाओ में अपना शेष जीवन तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूं। मैं यहाँ की हर सुरक्षा प्रणाली से परिचित हूँ मैं तुम्हारी मदद करूंगी यहां से भागने में और फिर अपना पूरा जीवन तुम्हारी बाँहों में बिता दूँगी। सोनिया की आवाज में सच्चाई भी थी और दर्द भी। वह शायद सच में मेजर राज से प्यार करने लगी थी। उसकी आँखों में नमी भी थी।

मेजर राज ने उसकी आँखों में आँखें डाल कर देखा और बोला तुम सच कह रही हो तो मुझे बताओ कि सामने जो दरवाजा है उसको खोलने का कोड क्या है ??? सोनिया ने बिना झिझक वह कोड बता दिया। मेजर राज जानता था कि कोड सही बताया गया है क्योंकि उसने अर्द्ध बेहोश हालत में सोनिया के साथ आने वाले बदमाशों को बाहर जाते देखा था तब उन्होंने दरवाजा खोलने के लिए जो कोड लगाया था मेजर राज ने उसको अपने दिमाग़ मे सेव कर लिया था। और सोनिया ने वास्तव में कोड मेजर राज को बता दिया था।

अब की बार मेजर राज की आवाज धीमी थी। वह सोनिया को कह रहा था कि मुझे भी आप अच्छी लगी हो, मगर यह तुम्हारी भूल है कि हम दोनों यहाँ से बचकर निकल सकते हैं। मैंने ऐसे जेल देख रखे हैं। मैं इस दरवाजे से निकल भी जाऊँ तो भी यहां से बच निकलना संभव नहीं होगा बाहर अनगिनत सुरक्षाकर्मी होंगे इसके अलावा ऑटो सिस्टम भी होगा जो मुझे मोनीटर कर रहा होगा और उसके साथ साथ यह जो सामने दरवाजे पर कोड लगा हुआ है यह उंगलियों के निशान भी रीड करता है। हमें सही कोड पता भी हो तब भी हम यहाँ से निकल नहीं सकेंगे। इस पर सोनिया ने उसे बताया कि तुम्हारी यह बात तो सही है कि यहाँ प्रणाली स्वचालित है। मगर यहां सुरक्षा के लिए कोई नहीं होता। बस में हूँ और बाहर वह 2 लोग हैं जो तुम से इनवेस्टिगेट करते हैं। इसके अलावा एक लंबी गैलरी है जिसमे पारगमन कैमरे लगे हुए हैं और अंत में मैन गेट है जिस पर 3 जवान मौजूद होते हैं। इसके अलावा पूरी बिल्डिंग में कोई नहीं। लेकिन पारगमन कैमरे की रेंज में जैसे ही कोई अनजान व्यक्ति आएगा तो स्वचालित गलियारे में लेजर बीम एक्टिव हो जाएंगी जो मानव शरीर को दो भागों में विभाजित कर सकती हैं। इससे तुम बचाकर निकल जाओ तो हम आसानी से गेट पर मौजूद गनमैन को काबू कर सकते हैं क्योंकि वो बहुत रिलैक्स बैठे होते हैं आज तक इस कमरे से कोई बच कर भाग नहीं सका इसलिए उन्हें चिंता नहीं होती। ऐसे में उनको काबू करना भी आसान है। और रह गई बात उंगलियों के निशान की तो तुम्हारी बात ठीक है। मगर जब मैं तुम्हारे साथ मौजूद हूँ तो मेरी उंगलियों के निशान से यह लॉक खुलेगा जिसका सबूत तुम्हें अब मिल जाएगा जब मैं बाहर जाउन्गी

मेजर राज अब सोच में पड़ गया था और बाहर निकलने का उपाय करने लगा। वह सोच रहा था कि सोनिया पर विश्वास करना चाहिए या नहीं ??? कहीं ऐसा तो नहीं कि यह दुश्मन की कोई चाल हो ??? मगर फिर अचानक मेजर राज ने सोनिया को बताया कि मेरा नाम राज है और इंडियन आर्मी में मेजर हूँ। और मुझे कर्नल इरफ़ान को पकड़ने का काम दिया गया था जो असफल रहा। इससे अधिक अब मैं तुम्हें कुछ नहीं बता सकता। मेजर राज की यह बात सुनकर सोनिया ने आगे बढ़कर मेजर राज को गले लगाया और उसे चुंबन करने लगी। वह टूटकर मेजर राज के होंठ चूस रही थी और अपने प्यार का इजहार कर रही थी। मेजर राज भी इसी उत्सुकता के साथ सोनिया के रस भरे होठों से उसका रस चूस रहा था। सोनिया के मम्मे मेजर राज के सीने में धँस गए थे जिन्हें मेजर राज अपने सीने पर सॉफ सॉफ महसूस कर रहा था, उसका बस नहीं चल रहा था कि अभी उसके हाथ जाए और वो सोनिया के मम्मे पकड़ कर उन्हें चूसने लग जाए।

कुछ देर एक दूसरे के होंठों का रस चूसने के बाद सोनिया पीछे हटी। उसकी आँखों में नशा था और होठों पर मुस्कान थी। उसने मेजर राज को कहा कि बस आप सब बातें भी उन सच सच बता देना। जब आप सब कुछ बता दोगे तो ये लोग खुद तुम्हें यहाँ से निकालेंगे और जैसे ही हम इस बिल्डिंग से निकलेंगे तब हम भागने की योजना बनाएंगे। मेजर राज ने पूछा मगर यह मुझे यहाँ से बाहर निकालेंगे क्यों ?? तो सोनिया ने कहा कि यह तुम्हें फर्जी ऐन्काउन्टर में मारेंगे और मीडिया में दिखाएंगे कि भारत से भेजा गया एक आतंकवादी पाकिस्तानी पुलिस ने मार डाला। इस तरह यह अपनी जान भी छुड़ा लेंगे और पुलिस की भी मीडिया में वाहवाही होगी और वैश्विक स्तर पर यह लोग भारत पर दबाव बढ़ा सकेंगे।

मेजर राज को सोनिया की एक एक बात में सच्चाई नजर आ रही थी। अब सोनिया ने मेजर राज को आगे का प्लान बताया और यह भी बताया कि वह अपने कुछ साथियों को कहेगी कि जब हम लोग तुम्हें यहाँ से निकालने लगेंगे तो वे हम पर हमला कर दें इस अवसर का लाभ उठाकर हम भाग निकलेंगे। साथ ही सोनिया ने सवालिया नज़रों से मेजर राज को देखा और बोली अगर आपका भी कोई साथी हैं तो मैं उनसे कोन्टीकट कर लूंगी उससे हमारे यहां से निकलने में मदद मिलेगी। इस तरह हमें रहने का ठिकाना भी मिल जाएगा और इन लोगो से भी जान छुड़वा लेंगे। मेजर राज ने सोनिया को कहा कि वह किसी एक फोन की व्यवस्था कर दे तो वह अपने लोगों से संपर्क करके अपनी लोकेशन बता सकता है और बाहर निकलने पर वे मदद को आ जाएंगे।

मेजर की यह बात सुनकर सोनिया ने वादा किया कि वह किसी न किसी तरह फोन की व्यवस्था कर लेगी। यह कह कर सोनिया दरवाजे की तरफ गई और वही कोड एंट्री किया, दरवाजा खुला और सोनिया बाहर निकल गई।

मेजर राज अब आने वाले हालात के बारे में सोच रहा था। उसका उद्देश्य कर्नल इरफ़ान को पकड़ना था और उसके लिए यहां से निकलना बहुत जरूरी था। और मेजर राज तय कर चुका था कि यहां से निकलने के लिए वह सोनिया की मदद लेगा।

सोनिया बाहर निकली तो लंबे गलियारे से होती हुई सीधे हाथ पर बने कंट्रोल रूम में गई और वहां बैठे इन्हीं दो बदमाशो में से एक की गोद में जाकर बैठ गई और उसकी एक लंबी किसकी। इस बदमाश ने भी अपना एक हाथ सोनियाके मम्मे पर रख दिया और बोला बोल मेरी जान कुछ मुंह से फूटा वह भारतीय??? तो सोनिया ने इठलाते हुए कहा दुनिया में ऐसा कोई आदमी नहीं जो सोनिया के हुश्न के आगे झुक ना जाए। इस भडवे का नाम राज है और वह भारतीयआर्मी में मेजर रैंक का ओफीसर है। उसका उद्देश्य कर्नल इरफ़ान को गिरफ्तार करना था शायद ये जान गए हैं कि कर्नल किस मिशन को पूरा होने के लिए भारत गया था। सोनिया की बात सुनकर दोनों बदमाश जोर से हंसने लगे।

सोनिया ने दूसरे व्यक्ति को संबोधित करते हुए कहा इतना ही नहीं एक और सुसमाचार भी है। इस व्यक्ति ने पूछा वो क्या? तो सोनिया बोली कि उसने एक फोन मांगा है। जिससे वह अपने साथियों को फोन करेगा और एक निश्चित समय बताएगा जिस पर हम लोग इसको लेकर यहाँ से निकलेंगे। और एक निश्चित स्थान पर उसके साथी उसे और मुझे छुड़ाने के लिए हम पर हमला करेंगे। सोनिया की यह बात सुनकर कक्ष फिर इन तीनों की हँसी से गूंजने लगा। उनमें से एक व्यक्ति बोला यानी यह कुत्ता बाकी कुत्तों की भी मौत का कारण बनेगा। यह कह कर उस ने सोनिया को अपना फोन दिया और बोला कल जाकर यह फोन उसे दे देना। हम पता कर लेंगे कि उसने कहां कॉल की है। इस तरह हम उन हिंदुस्तानियों का पूरा नेटवर्क ख़त्म कर देंगे। कक्ष अभी हँसी के बजाय पिचक पिचक की आवाजों से गूंज रहा था। सोनिया एक बदमाश की गोद में बैठी उसके होंठ चूस रही थी जबकि दूसरा बदमाश उसकी गाण्ड ऊपर उठा कर उसकी पैंट नीचे करके उसकी चूत में लंड डाले झटके मारने में व्यस्त था।

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अगले दिन मेजर राज सोनिया का बेताबी से इंतजार कर रहा था। सोनिया तो आई मगर उसके साथ बाकी दो गुंडे थे। उन्होंने मेजर राज से वही सवाल किया तो मेजर ने बिना चूं-चपड़ बता दिया कि वह मेजर राज है और उसका कार्य कर्नल इरफ़ान को पकड़ कर मौत के घाट उतारना था। क्योंकि वह हमारे परमाणु ठिकानों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जान चुका था। इस गोपनीय जानकारी की मदद से कर्नल इरफ़ान हमारे परमाणु ठिकानो पर हमला करवा सकता है और किसी भी देश के द्वारा हमारे ठिकानों परमाणु मिसाइल चला सकता है। जो कि बहुत खतरनाक बात है। इसी तरह मेजर राज ने कुछ और बातें भी बताई जिस पर वे दोनों बदमाश सोनिया के साथ बाहर निकल गए।

कुछ देर बाद सोनिया कमरे में आई और मेजर राज को पहले की तरह खाना खिलाया। इस दौरान मेजर राज ने सोनिया से आगे का कार्यक्रम जानने की कोशिश की मगर सोनिया ने हाथ के इशारे से बोलने से मना कर दिया और अपने सीने की ओर इशारा करते हुए इसे एक माइक्रो फोन दिखाया। यह इस बात का संकेत था कि सोनिया की निगरानी हो रही है और अंदर हम जो बातें करेंगे वह बाहर सुनी जाएंगी।

मेजर राज ने तुरंत ही टॉपिक बदल दिया और सोनिया के हुस्न की तारीफ करने लगा। सोनिया ने मेजर राज से बहुत कुछ सवाल पूछे जिनका मेजर राज जवाब देता रहा क्योंकि वह जानता था कि ये बातें बाहर सुनी जा रही हैं इसलिए वह सब कुछ बताता चला गया। मगर इस दौरान उसने अपने और सोनिया के भागने के बारे में कोई बात नही की। खिलाने के बाद सोनिया वहां से चली गई।

कोई 2 घंटे के बाद कमरे का फिर दरवाजा खुला और सोनिया अंदर आई। वह बहुत गोपनीय तरीके से अंदर आई थी। अंदर आकर उसने मेजर राज को एक बार अपने सीने से लगाया और फिर उसके होठों पर प्यार करने लगी। फिर सोनिया ने अपने शॉर्ट ब्लाऊज़ में हाथ डाला और वहाँ एक छोटा सा एमपी थ्री प्लेयर के बराबर का एक मोबाइल फोन निकाला। यह बहुत छोटा फोन था जो बा में आसानी कहीं छिपाया जा सकता था। सोनिया ने फोन मेजर राज की ओर बढ़ाया तो मेजर राज ने अपने हाथों से इशारा किया जो बंधे थे।

सोनिया ने यह देखकर कहा कि अच्छा चलो मुझे नंबर बताओ मैं नंबर मिलाती हूँ। मेजर राज ने सोनिया को नंबर बताया और फिर उसको कहा कि मोबाइल फोन राज के कान के साथ लगा दे। सोनिया ने मेजर का बताया हुआ नंबर मिलाया और राज के कान से लगा दिया। इस दौरान मेजर राज ने सोनिया से पूछा कि वह जगह का नाम क्या बताए तो सोनिया ने उसे बताया कि भाटिया सोसायटी से निकलेंगे हम। कुछ देर बाद फोन पर हैलो की आवाज आई तो मेजर राज ने एक कोड वर्ड बोला। अल्फ़ा 43 रेड जोन। एजेंट 35 स्पीकिंग। दुश्मन की कैद में हूँ, कल किसी भी समय मुझे भाटिया सोसायटी से निकाला जाएगा। तुम हमले के लिए तैयार रहना। यह कह कर मेजर राज ने सोनिया को फोन बंद करने को कहा।

सोनिया ने फोन बंद कर दिया। नियंत्रण कक्ष में बैठे दोनों बदमाश फोन पर होने वाली बातचीत भी सुन चुके थे और उस नंबर से भी परिचित थे जो इस फोन से डायल किया गया। मेजर राज की बात पूरी होने के बाद आगे से महज ठीक है आवाज आई थी और फोन बंद हो गया था। अब दोनों बदमाश इस फोन को ट्रेस करने में व्यस्त हो गए।

जबकि दूसरी ओर सोनिया कमरे से बाहर जाने लगी तो मेजर राज ने सोनिया को आवाज़ दी। सोनिया ने वापस मुड़ कर देखा तो मेजर राज ने नीचे की ओर इशारा किया। सोनिया देखा कि मेजर राज अपने लंड की ओर इशारा कर रहा था कि उसकी पैंट में तम्बू बना खड़ा था .... सोनिया ने मेजर राज का लंड देखा तो रुक गई और बोली अभी तो भागने का प्लान बनाना है बाद में मैं तुम्हारे पास ही रहूंगी यह काम बाद में करेंगे। मगर मेजर राज बोला जान कितने दिनों से मैं कैद में हूं। न तो कोई लड़की चोदने को मिली और न ही अपनी मुठ मार कर उसे आराम दे सकता हूँ। आज प्लीज़ उसको आराम पहुंचा दो।

मेजर राज की तड़प देखकर सोनिया मेजर की तरफ बढ़ी और उसकी पेंट मे लंड के ऊपर हाथ फेरने लगी। सोनिया ने जब मेजर राज के लंड पर हाथ फेरा तो उसकी लंबाई से प्रभावित हुई और प्रशंसा भरी नज़रों से राज को देखने लगी। फिर उसने नीचे झुक कर मेजर राज की पेंट की ज़िप खोली और अंदर हाथ डाल कर लंड पकड़ लिया। लंड हाथ में लेने के बाद सोनिया ने उसकी मोटाई और कठोरता को मापना शुरू किया तो उसके मुंह और चूत में पानी आने लगा। उसने तुरंत ही मेजर राज की ज़िप खोलकर उसका लंड बाहर निकाल लिया। 8 इंच लंबा और मोटा लंड देखकर सोनिया की आंखों में नशा सा आ गया। सोनिया का शरीर जितना सेक्सी था उसकी सेक्स की मांग भी उतनी ही अधिक थी।

सेक्स करते हुए सोनाया जंगली बिल्ली बन जाती थी उसको आगे पीछे कोई होश नहीं रहता था। मेजर राज का 8 इंच लंड देखकर सोनिया की कुछ ऐसी ही स्थिति थी। उसने तुरंत ही मेजर के लंड को अपने मुँह में लिया और उसको चूसने लगी। सोनिया चुसाइ लगाने में माहिर थी। बाहर बैठे दोनों बदमाश खाली समय में सोनिया से चौपा लगवाते रहते थे। मगर उनके लंड इतने बड़े नहीं थे जितना बड़ा राज का लंड था। साथ ही राज के लंड का टोपा भी सोनिया को बहुत पसंद आया था। उसे पता चल गया था कि यह टोपा उसकी योनी को बहुत मज़ा देगा।

कुछ देर तक सोनिया राज का लंड चूसती रही तो राज ने सोनिया से कहा जॉन अब अपने मम्मे भी दिखा दो। कितने दिनों से तुम्हारे बूब्स का उभार देखकर मेरा लंड सख्त होता रहा है। आज दिखा भी दो मम्मे। यह सुनकर सोनिया अपनी जगह से खड़ी हुई और छलांग लगाकर मेजर राज की गोद में चढ़ गई। उसने अपना शॉर्ट ब्लाऊज़ एक ही झटके में उतारा तो उसके 36 आकार के मम्मे उछलते हुए बाहर आ गए। गोल सुडौल और कसे हुए मम्मे ऐसे उछल रहे थे जैसे उनमे स्प्रिंग लगे हुए हों इन उछलते हुए मम्मों को देख कर राज के मुंह में पानी आ गया और उसने तुरंत ही अपना मुंह सोनिया के मम्मों पर रख दिया। और उन्हें चूसने लगा।

सोनिया के मम्मे चूसते हुए राज का लंड बिना रुके झटके खा रहा था। अंतिम बार उसने रश्मि को चुदाई की थी हनीमून पर और जब फिर से उसकी चूत में लंड डालने लगा था तो उसको आवश्यक कॉल आ गई थी और वह रश्मि की प्यासी चूत को प्यासा ही छोड़ कर निकल गया था। राज की गोद में चढ़ी हुई सोनिया को भी अपनी गाण्ड पर मेजर राज का लंड महसूस हो रहा था। मगर उस समय वह राज को बड़े प्यार से अपने मम्मे चूसता देख रही थी। मेजर राज ने सोनिया के एक मम्मे का निपल अपने मुँह मे लिया और उसको काटने लगा। राज की इस हरकत से सोनिया के तन बदन में आग लग गई और वह जोर से सिसकियां लेने लगी। राज की प्यास देखकर सोनिया मस्त मज़ा मिल रहा था क्योंकि उसे राज का लंड देखकर अंदाजा हो गया था कि आज काफी दिन के बाद उसकी चूत को कोई तगड़ा लंड चोदेगा।

कुछ देर सोनिया के 36 आकार के मम्मे चूसने के बाद राज ने सोनिया से अपनी चूत दिखाने की फरमाइश की। सोनिया तुरंत राज की गोद से उतरी और और अपनी पैंट उतार कर उसको अपनी चूत का नज़ारा करवाने लगी। सोनिया की चूत देखकर राज का लंड उसकी चूत की माँग करने लगा मगर राज ने सोनिया को कहा कि अगर वह उसके हाथ खोल दे तो वह आराम के साथ उसकी चूत चाट सकता है। राज की बात सुनकर सोनिया मुस्कुराई और बोली जानेमन अब तुम्हारे हाथ खोलने का जोखिम नहीं ले सकती में।

अगर बाहर इन दोनों को पता लग गया तो वह तो मुझे यहीं मार डालेंगे। लेकिन अगर तुम्हें मेरी चूत चाटनी ही है तो इसे चाटो, यह कह कर स्नेहा ने एक जम्प लगाई और अपना एक पांव राज की नाभि वाली हड्डी पर जमाया और ऊपर उछल कर अपना दूसरा पैर मेजर के सीने तक लाई और घुटना मेजर के कंधे पर रख दिया। और जिन राड के साथ मेजर राज के हाथ बांधे गए थे उन्हीं राड से सहारा लेकर खड़ी हो गई।

सोनिया के इस तरह उछलने से मेजर राज को अंदाज़ा हो गया था कि सोनिया को लड़ई की प्रॉपर ट्रेनिंग दी गई थी। इस तरह कूद कर अपनी चूत खड़े सख्श के मुंह के सामने ले आना साधारण लड़की के बस की बात नहीं थी। यह वही कर सकती थी जिसको व्यायाम प्रशिक्षण मिला हो। मगर मेजर राज को इससे क्या, उसके सामने तो सोनिया की चूत थी जो चाटने लायक थी। चूत पर हल्के हल्के ब्राउन बाल बता रहे थे कि सोनिया ने 3 दिन पहले ही अपनी चूत की सफाई है। राज ने सोनिया की चूत पर अपना मुँह लगाया और अपनी जीब उसके अंदर सरका दी . सोनिया की चूत को राज की जीब का लुजलुजा सा स्पर्श बड़ा अच्छा लगा और सोनिया अपनी चूत को राज के मुँह पर दबाने लगी राज की जीब जब अपना कमाल दिखाया तो सोनिया हाय हाय कर उठी अब सोनिया की चूत लंड माँग रही थी और सोनिया अब पूरी तरह चुदने के मूड में आ चुकी थी

अब सोनिया ने देर करना उचित नही समझा और वा राज के कंधे से नीचे उतर गई और कुतिया की स्टाइल मे अपनी चूत को राज के लंड पर सटाने लगी मगर सोनिया की योनी सही तरह से मेजर राज के लंड तक नहीं पहुंच रही थी। इसलिए सोनिया का इस तरह खड़े होना मुश्किल था।

उसका समाधान सोनिया ने यह निकाला कि वो एक बार फिर मेजर राज की गोद में चढ़ गई। उसकी गर्दन में अपने हाथ डाले और अपनी चूत के छेद को मेजर राज के लंड की टोपी पर रखा और एक झटके में लंड के ऊपर बैठ गई। फिर सोनिया ने मेजर राज के लंड ऊपर उछलना शुरू कर दिया। नीचे से मेजर राज भी अपनी गाण्ड हिला हिला कर धक्के लगा रहा था। मगर पैर बंधें होने की वजह से वो सही तरह से चुदाई नही कर पा रहा था। इसके बावजूद मेजर राज के 8 इंच लंबे लंड ने 5 मिनट में ही सोनिया की चूत को एक बार फिर पानी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था।

जब सोनिया की चूत ने पानी छोड़ा तो वह मेजर की गोद से नीचे उतर गई और नशीली नज़रों से मेजर राज को देखने लगी। उसको मेजर राज की चुदाई से बेहद मज़ा आया था। मगर मेजर का लंड अब भी सोनिया की चूत मांग रहा था। अब की बार सोनिया ने अपनी गाण्ड मेजर राज की ओर की और पंजों के बल खड़ी होकर अपनी चूत का छेद मेजर के लंड के ऊपर किया और मेजर ने धक्का मार कर लंड सोनिया की चूत में उतार दिया।

अब सोनिया पंजो के बल खड़ी थी और पीछे से मेजर राज उसकी चूत में धक्के मार रहा था। अब मेजर राज सोनिया के जी स्पॉट को ढूँढना चाह रहा था। स्त्री का जी स्पॉट उसकी चूत का सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है जिसमे लंड लगने से चूत बहुत जल्दी पानी छोड़ देती है और मज़ा भी दुगुना हो जाता है। कुछ देर के बाद जब मेजर राज ने एक विशेष एंगल से सोनिया की चूत में धक्का मारा तो उसकी सिसकारी निकल गई। मेजर राज ने सिर्फ़ 2 बार इसी एंगल से धक्का मारा तो फिर सोनिया की सिसकारी निकली जिसका मतलब था कि यही जी स्पॉट है। पता चलते ही मेजर राज ने फिर से इस एंगल से धक्का नहीं मारा तो सोनिया चिल्लाई वैसे ही चोदो जैसे अभी धक्के मारे थे मगर मेजर राज ने थोड़ी देर बाद उसी एंगल से 2 धक्के मारने के बाद फिर एंगल चेंज कर लिया। सोनिया फिर से चिल्लाई उसी जगह फिर धक्के मारो तो राज बोला कि उसके पैर बँधे हुए हैं इससे अधिक कुछ नहीं कर सकता।

 
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