मेजर राज के कपड़ों में कुछ हथियार मौजूद थे जिनसे वह उन का मुकाबला कर सकता था, लेकिन समस्या यह थी कि तीनों सशस्त्र आदमी पूरी तरह से सतर्क खड़े थे और वह मेजर राज की किसी भी चालाकी पर गोली चलाने से गुरेज़ नहीं करते। उनका एक आदमी जो स्वास्थ्य में उनमे सबसे तगड़ा था बल्कि अगर यह कहा जाए कि सबसे मोटा था तो गलत न होगा और हल्की दाढ़ी ये शायद इनका मुखिया था वह गुर्राते हुए बोला कौन हो तुम और क्या नाम है तुम्हारा ???
अब मेजर राज यहां यातायात कांस्टेबल राज वाली कहानी नहीं सुना सकता था क्योंकि वह जेल से भागा था और अब किसी को यह बताना कि वह भारतीयहै अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर था। मेजर राज ने तुरंत ही अपने मन में एक कहानी बना ली थी। उसने तुरंत बताया कि उसका नाम वक़ार युसुफ है। 2 महीने पहले उसे एक अंडरवर्ल्ड गिरोह ने 2 करोड़ की राशि के लिए अपहरण कर लिया था लेकिन इस राशि की व्यवस्था नहीं हो सकी तो उन्होंने वक़ार युसुफ यानी मेजर राज को बंदी बना लिया था और आज वह किसी तरह कैद से मुक्त होकर भागा है।
अब मेजर राज की बात पूरी ही हुई थी कि रोड से आने वाली गाड़ी भी इसी जगह पर रुक गई और कुछ देर बाद रोड से नीचे उतरी और झाड़ियों की ओर आने लगी। अब कार की रोशनी मेजर राज के ऊपर पड़ रही थी।मेजर राज ने पीछे मुड़ कर देखने की कोशिश नहीं की क्योंकि वह जानता था कि उसकी हल्की सी अशांति पर वो बंदूक से गोली चलाने से परहेज नहीं करेंगे। वह मन ही मन सोच रहा था स्वर्ग से गिरा खजूर में अटका।एक जेल से भागा तो मालूम नहीं यह कौन लोग हैं जो उसके रास्ते में आ गए। इतने में मेजर राज को कार का दरवाजा खुलने की आवाज आई। हथियारबंद लोगों में मोटी तोंद वाला उधर बढ़ गया और बोला हां क्या खबर है वहाँ की ??
मेजर राज को अपने पीछे क़दमों की आवाज़ आई जो उसी की ओर आ रहे थे। फिर कोई मेजर राज से कुछ दूरी से गुज़रता हुआ इन्हीं 3 सशस्त्र लोगों के पास आया।
मेजर राज ने चेहरा ऊपर हल्का सा घुमा कर आने वाले की तरफ देखा तो वह यह देखकर हैरान रह गया कि आने वाला वास्तव में "वाला" नहीं बल्कि "वाली है।" यह एक जवान लड़की थी जिसने लाल रंग की शलवार कमीज़ पहन रखी थी। आंखों पर हल्के ब्राउन रंग का चश्मा था ऊंची एड़ी वाले सैंडल और हाथ में एक छोटे आकार का महिलाओं का बैग पकड़ रखा थाछोटे बाल कंधों से कुछ नीचे कमर को छूने की कोशिश कर रहे थे। पाकिस्तानी कल्चर के अनुसार वह इस सूट मे कयामत खेज लग रही थी
आने वाली लड़की, जिसकी उम्र लगभग 20 साल होगी और लंबाई 5 फुट 6 इंच के करीब रही होगी हल्का सा मुँह टेढ़ा करके मेजर राज की ओर देखा और बंदूकधारी की बात का जवाब देने की बजाय मेजर राज से मुखातिब होते हुए बोली तुम कहाँ से आए हो ???
इससे पहले कि मेजर राज कुछ बोलता सशस्त्र आदमी ने फिर उससे पूछा उसे छोड़ो जिस काम से तुम्हें भेजा था उसका बताओ क्या बना ??
तो लड़की बोली एक आश्चर्यजनक खबर है। वह वहां से पलायन हो चुका है, गेट आधा खुला था और गेट पर गनमैन बेहोश पड़ा था, जबकि अंदर काफी दूर कुछ बंदूकधारियों दिखे जो शायद किसी को ढूंढ रहे थे। हो न हो वह वहां से भाग चुका है ....
अब बंदूकधारी ने फिर से मेजर राज की ओर देखा और बोला हाँ तो वक़ारयुसुफ जी, बताना चाहूँगा कि आप कहां के रहने वाले हैं और उस गिरोह के चंगुल से कैसे भागे ???
इस पर लड़की ने फिर मेजर को देखा और बंदूकधारी को संबोधित करके बोली ये कहाँ से आया है ???
बंदूकधारी ने हाथ के इशारे से बताया कि यह उसी ओर से आया है जहां से तुम आ रही हो ... यह सुनकर उस लड़की के चेहरे पर मुस्कान आई और वह बोली कहीं तुम ही तो मेजर राज तो नहीं हो ??? लड़की के मुंह से अपना नाम सुनकर मेजर राज हैरान रह गया और फिर बोला नहीं मैं किसी मेजर राज को नहीं जानता। मेरा नाम वक़ारयुसुफ है और मैं लाहोर का रहने वाला हूँ। मेरा वहाँ कपड़े का कारोबार है।
मेजर राज ने अभी जो कहा तो केवल लड़की ही नहीं बल्कि तीन बंदूकधारियों भी मुस्कुरा रहे थे और आश्चर्यजनक रूप से अब उन्होने अपनी बंदूक का रुख भी जमीन की ओर कर दिया था और वह बहुत रिलैक्स खड़े थे।
मेजर राज ने सोचा अवसर का लाभ उठाना चाहिए, उसने एक ही पल में अपनी जेब में हाथ डाला और उसमें से एक छोटे आकार की पिस्टल निकाली और एक ही छलांग लगा कर लड़की के सिर पर पहुँच गया उसने अपनी पिस्टल लड़की की गर्दन पर रख दी थी और उसके गोरे पेट के आसपास हाथ डाल कर उसको कसकर पकड़ लिया था। मेजर राज चिल्लाया कि तुम सब अपनी-अपनी बंदूक नीचे फेंक दो नहीं तो तुम्हारी यह साथी अपनी जान से जाएगी। यह कह कर मेजर राज ने काउन्टिन्ग शुरू कर दी, 1। । । । । । । 2। । । । । । । मगर यह क्या .... वे तीनों सशस्त्र लोग डरने की बजाय अब भी मेजर राज को देखकर मुस्कुरा रहे थे और लड़की की भी हंसी निकल रही थी।
मेजर राज फिर चिल्लाया मगर इस बार बंदूकधारी ने मेजर राज को संबोधित किया और बोला मेजर साहब कपड़े का कारोबार करने वाला इस फुर्ती मे कभी हमला नहीं कर सकता। यह कह कर उसने अपनी बंदूक नीचे रखी और मेजर की तरफ हाथ फैलाकर बढ़ने लगा,
मेजर राज इस स्थिति पर हैरान था, उसने एक बार फिर अपनी पिस्टल लड़की की गर्दन पर रखी और धमकी भरे लहजे में बोला एक कदम भी आगे बढ़ाया तो गोली चला दूंगा।मगर लड़की अब भी मुस्कुरा रही थी। अब वह बंदूकधारी सीधा खड़ा हुआ और मेजर राज को सलयूट किया और बोला सर समीरा को तो छोड़ दें यह आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगी, और जहां से आप भागे हैं यह अभी वहीं से होकर आ रही है और हमें आश्चर्य है कि आप कर्नल इरफ़ान की इस जेल से कैसे जीवित और सलामत बच कर निकल आए ... आज तक उसकी जेल से कोई बच कर नहीं निकल सका।
मेजर राज ने इस बार हैरान होकर पूछा तुम कौन हो ??
तो इस व्यक्ति ने अपने सिर से पगड़ी उतार दी और बोला सर मेरा नाम अमजद है, यह राणा काशफ, और सरमद है। और लड़की की ओर इशारा करते हुए बोला और यह मेरी बहन समीरा है। हमारा संबंध जमात-उल-अहरर से है। हमें मेजर जनरल सुभाष ने काम दिया था कि उनका एक मेजर कर्नल इरफ़ान की कैद में है उसको वहां से रिहा करवाना है। हमने समीरा को कार पर आगे भेजा था कि वह वहाँ की समीक्षा कर वापस आकर हमें वहां के हालात से अवगत करे, इतने में आप मिल गए, हम समझ तो गए थे कि आप ही मेजर राज होंगे क्योंकि यह बहुत वीरान क्षेत्र है यहां दूर दूर तक कोई आबादी नहीं। और ऐसी जगह पर आपका आना और आपकी यह स्थिति साफ बता रही है कि आप किसी जेल से भागे हैं।
अपनी बात पूरी करके अमजद कुछ देर चुप हुआ और फिर हैरान खड़े राज को देखा जो यह सोच रहा था कि उनकी बात पर विश्वास करना चाहिए या नहीं, फिर अमजद बोला सर अब तो समीरा को छोड़ दीजिए अब तो हमने अपनी बंदूक भी साइड पर रख दी हैं।
अब मेजर राज कुछ सोचता हुआ समीरा से पीछे हट गया, लेकिन उसकी उंगली अभी पिस्टल के ट्रिगर पर थी ताकि किसी भी हालत में वो तुरंत अपनी सुरक्षा हेतु गोली चला सके। जैसे ही मेजर राज ने समीरा को छोड़ा अमजद ने शेष 2 लोग राणा काशफ और सरमद से कहा चलो अब जल्दी निकलें इधर से कर्नल इरफ़ान के लोग अब पागल कुत्तों की तरह मेजर को ढूँढेंगे वह किसी भी समय इधर पहुँच सकते हैं। यह कहते ही सब ने अपनी अपनी बंदूक पुनः उठाई और कार की ओर भागे।
मेजर राज के पास और कोई विकल्प नहीं था वह भी कार की ओर भागा, अमजद ड्राइविंग सीट पर बैठ गया, जबकि समीरा उसके साथ फ्रंट सीट पर बैठ गई राणा काशफ और सरमद पिछली सीट पर बैठ गए मेजर राज भी उनके साथ बैठ गया और कार फर्राटे भर्ती हुई वहां से निकल गई।
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सुबह होने पर डॉली की आंख खुली तो उसने देखा वह अब तक बना कपड़ों के लेटी थी और उसके पहलू में जय भी बना कपड़ों के सो रहा था। डॉली कंबल से बाहर निकली और अपने कपड़े पहनने लगी। रात होने वाली चुदाई का सोच कर उसकी आंखों में एक मस्ती और होठों पर मुस्कान थी। कपड़े पहनने के बाद उसने जय भी उठने को कहा और खुद शौचालय में घुस गई, जहां गर्म गर्म पानी से स्नान किया और उसके बाद जय से भी स्नान करने को कहा। स्नान करने के बाद डॉली दूसरे कमरे में जाकर पिंकी और रश्मि को जगाने चला गई जो अभी भी सो रही थीं। कमरे का दरवाजा खुला ही था डॉली सीधी अंदर गई और पहले पिंकी और फिर रश्मि को उठाया और तुरंत तैयार होने को कहा और बताया कि आज हम बीच जाएंगे और समुद्र मे भ्रमण भी करेंगे तो जल्दी जल्दी तैयार हो जाना दोनों। यह कह कर वह वापस अपने कमरे में चली गई और तैयार होने लगी। पिंकी भी तुरंत उठी और नहाने घुस गई जबकि रश्मि ऐसे ही बेड पर लेटी रही।
उसका कहीं भी जाने का कोई मूड नहीं था। राज से दूरी उसको एक पल भी आराम नहीं लेने दे रही थी। ऊपर से इतने दिन बीतने के बावजूद अब तक राज की कोई खबर नहीं आई थी। यही वजह थी कि रश्मि गोआ आकर अपने आप को दोषी मान कर रही थी। एक औरत जिसका पति शादी की रात से ही लापता है वह गोआ की सैर कर रही है यह सोच कर ही रश्मि को महसूस होने लगा कि वह अपने पति से विश्वासघात कर रही है। रश्मि इन्हीं सोचों में गुम थी कि पिंकी तैयार हो गई और रश्मि को देखकर बोली भाभी आप अब तक ऐसे ही बैठी हैं चलने का इरादा नहीं है क्या ?? इस पर रश्मि बोली नहीं यार मेरा मन नहीं कर रहा कहीं भी जाने को। राज की याद आ रही है। भाई का नाम सुनकर एक पल पिंकी भी उदास हुई मगर फिर रश्मि को तसल्ली देते हुए बोली भाभी चिंता मत करो, भाई का तो काम ही है आपको तो पता है वह एक सिपाही हैं और उन्हें अक्सर ऐसे मिशन पर रवाना होना पड़ता है कि कई कई दिन उनकी खबर नहीं आती। आप चिंता न करें और चलने की तैयारी करें।
इतने में डॉली ने आकर नाश्ता लगने की खबर दी, रश्मि मुंह धोकर पिंकी के साथ नाश्ते की टेबल पर पहुंची तो डॉली और जय फुल तैयारी कर चुके थे और पिंकी भी तैयार थी, इन दोनों ने रश्मि को ऐसी हालत में देखा तो पूछा भाभी आप अब तक तैयार क्यों नहीं हुई ?? रश्मि बोली तुम जाओ मेरा मूड नहीं है। यह सुनकर डॉली ने कारण पूछना चाहा मगर जय ने मना कर दिया और बोला जैसे आपकी मर्ज़ी भाभी लेकिन आप चलेंगी तो हमें खुशी होगी। रश्मि ने जय को देखा मगर बोली कुछ नहीं। उसकी आंखों की उदासी ने सब कुछ कह दिया था और जय समझदार था वह भी समझ गया कि रश्मि राज के बिना अच्छा फेल नहीं कर रही और डॉली और जय को साथ मे देखकर भी हो सकता है उसे राज की कमी महसूस हो। इसीलिए जय ने उस पर दबाव नहीं डाला और नाश्ता समाप्त कर वह डॉली और पिंकी के साथ निकल गया जाते हुए वह रश्मि को ताकीद कर गया कि अपना ध्यान रखे और किसी भी प्रकार की जरूरत हो तो बिना हिचक जय को अपना छोटा भाई समझ कर फोन करे वह तुरंत वापस आ जाएगा। यह सुनकर रश्मि ने प्यार से जय के सिर पर हल्की सी चमाट मारी और बोली नहीं तुम एंजाय करो मैं यहाँ ठीक हूँ और अगर किसी चीज़ ज़रूर हुई भी तो मेजर की पत्नी हूँ यहाँ फुल प्रोटोकॉल लूँगी। यह सुनकर रश्मि और जय दोनों ही हंस पड़े और पिंकी भी उनके साथ हंसने लगी जबकि डॉली के चेहरे पर नाराज़गी के आसार थे।