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वतन तेरे हम लाडले complete



अब की बार सोनिया ने पहले से अधिक चिल्लाते हुए कहा कि प्लीज़ वैसे ही धक्का मारो जैसे अभी मारे थे, लेकिन मेजर राज ने फिर इनकार किया कि उसकी टांग मुड़ जाती है और पैर मे फेक्चर हो जाएगा अगर दोबारा इस एंगल में धक्का मारा। लेकिन सोनिया को कहाँ आराम मिलने वाला था। एक तो पहले ही मेजर राज के लंड ने उसको मजे के अनौखे छोर पर पहुंचा दिया था ऊपर से जी स्पॉट पर लंड घर्षण ने उसको वहशीपन की सीमा तक मज़ा दिया था। जब सोनिया न्र देखा कि अब लंड उसके जी स्पॉट को नहीं छू रहा है तो उसने अपनी चूत से लंड निकाला और सामने पड़ी अपनी पैंट की जेब से एक छोटी सी चाबी निकाली और मेजर राज के पैर खोल दिए . मेजर राज के पैरों खुलते ही उसको अपने पाओं में आराम महसूस हुआ और उसकी टांगों को बहुत आराम मिला। उसने दो तीन बार उछल कर अपनी टांगों को आराम पहुंचाया। तो सोनिया चिल्लाई कि तुम्हारी एक्सरसाइज करने के लिए पैर नहीं खोला अब सही तरह चुदाई करो मेरी और उसी जगह लंड लगना चाहिए जहां पहले लग रहा था।

मेजर राज ने सोनिया से कहा अगर वह उसके हाथ भी खोल दे तो वह ऐसे चोदेगा सोनिया को कि सोनिया फिर कभी किसी और का लंड नहीं माँगेगी। मगर सोनिया ने मना कर दिया और बोली बस उसी पर धन्यवाद करो। अब जल्दी जल्दी अपना काम पूरा करो यह न हो वे दोनों बदमाश फिर आजाएँ और हमें इस हालत में देखकर हमें मार ही डालें।

मेजर राज ने प्यार भरे लहजे में कहा कि जब तक मेरी जान में जान है मेरी सोनिया कोई माई का लाल नुकसान नहीं पहुंचा सकता। अब की बार मेजर राज ने अपनी टांगों को थोड़ा फैला लिया इधर सोनिया ने एक बार फिर मेजर की ओर अपनी पीठ और उसका लंड अपनी चूत में डाल दिया। पीछे से मेजर राज ने पहले वाले एंगल पर जोरदार धक्के लगाने शुरू कर दिए। अब की बार मेजर राज का लंड लगातार सोनिया के जी स्पॉट पर चोट मार रहा था उसका नतीजा यह हुआ कि कुछ ही झटकों ने सोनाया को पानी छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इस बार उसकी चूत से बहुत सा पानी निकला

दूसरी ओर बाहर नियंत्रण कक्ष में दोनों गुंडे अंदर होने वाली चुदाई से बेखबर इस नंबर को ट्रेस करने में सफल हो गए थे जिस पर मेजर राज ने कॉल किया था और अपने भागने की सूचना दी थी। यह मुंबई के एक क्षेत्र का नंबर था जहां कई अंडरवर्ल्ड के ग्रूप थे। उनमें से बहुत से ग्रुप्स पर आरोप था कि इन को पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है और पाकिस्तान के कहने पर ये लोग भारत में बदमाशी फैलाते हैं। जबकि कुछ गिरोह के बारे में यह राय थी कि भारत के लोकल समूह हैं और आईएसआई अपने लक्ष्य के लिए उन्हें इस्तेमाल करती है। मेजर राज ने जिस नंबर पर कॉल की थी यह भारत का एक प्रसिद्ध अंडरवर्ल्ड गिरोह था जिसकी अध्यक्षता दाऊद इस्माइल करता था। इस समूह के बारे में आम धारणा यह थी कि यह आईएसआई के लिए काम करता है, लेकिन मेजर राज के इस समूह के एजेंट को कॉल करना और उनसे मदद माँगना दोनों गुंडों को आश्चर्यजनक लगा था। इन दोनों ने यह खबर तुरंत कर्नल इरफ़ान तक पहुंचाई और कर्नल इरफ़ान भी गिरोह के विश्वासघात पर गुस्सा होने लगा और जल्दी एक योजना बनाने लगा जिसके अनुसार अगले 1 घंटे में इस गिरोह का जड़ से सफाया करना था।

दूसरी ओर कमरे में मेजर राज का लंड अभी सोनिया की चुदाई में व्यस्त था। अब मेजर राज ने सोनिया को कहा कि एक चेयर उठाकर मेजर के पास रख दे, सोनिया ने ऐसे ही सामने पड़ी एक कुर्सी उठाकर मेजर के पास रख दी, मेजर ने अपनी एक टांग कुर्सी पर रखी और सोनिया को कहा कि वह भी अपनी एक टांग उठा कर सामने आ जाए। सोनिया ने आश्चर्यजनक रूप से अपने पैर बिल्कुल सीधी खड़ी कर लिए और मेजर राज के सीने से टिका दिए यह एक और संकेत था कि सोनिया को विशेष प्रशिक्षण प्राप्त है। अब सोनिया की चूत मेजर राज लंड के सटीक निशाने पर थी। मेजर ने अपना लंड फिर से चूत के अन्दर डाला और अपनी एक टांग चेयर पर रखकर नीचे सोनिया चूत में धक्के मारने लगा। मेजर राज का हर धक्का सोनिया की चूत को अंदर तक हिलाकर रख देता था।

सोनिया दिल ही दिल में अफसोस कर रही थी कि कल इतने शक्तिशाली लंड के मालिक को मौत के घाट उतार दिया जाएगा और वह फिर से इस लंड से चुदाई नहीं करा सकेगी। जबकि राज आने वाले समय में यहां से भागने के बारे में सोच रहा था। सोनिया का बताया हुआ प्लान भी उसके मन में था और इस इमारत की सुरक्षा से संबंधित सोनिया ने जो कुछ कहा था उस पर भी मेजर राज को विश्वास था कि उसने सही बताया है। 5 मिनट की चुदाई ने सोनिया की चूत का बुरा हाल कर दिया था। सोनिया सोचने लगी कि अभी तो उसके हाथ बंधे हैं। अगर उसके हाथ खुले होते तो कई शैलियाँ में चुदाई करने पर बहुत मज़ा आता। कुछ ही देर बाद राज ने अपने अंतिम जोरदार धक्के मारे और उसकी चूत में अपनी गर्मी यानी गर्म वीर्य छोड़ दिया। मेजर के शुक्राणुओ को चूत में महसूस कर सोनिया की चूत ने भी पानी छोड़ दिया।

अब मेजर राज गहरी गहरी साँसें ले रहा था और सोनिया प्यार भरी नज़रों से देख रहा था। सोनिया की आंखों में भी नशीले लाल डोरे तैर थे और वह मेजर राज के लंड की प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकी। फिर सोनिया ने एक बार फिर से मेजर राज के होठों पर एक जोरदार किस किया और उसको बोली चलो अब जल्दी से अपने पैर पहली वाली स्थिति में ले आओ ताकि मैं बंद कर दूं वरना बाहर से वो लोग आ गए तो हमें यहीं मार देंगे और हमारा कल का कार्यक्रम धरे का धरा रह जाएगा। यह कह कर सोनिया ने फिर से वही चाबी उठाई मेजर के पैरों से झुकी तो मेजर ने अचानक एक पांव सोनिया के हाथ ऊपर रख कर उसे जोर से दबा दिया जिससे सोनिया के हाथ से वह चाबी निकल गई।

वह गुस्से से ऊपर उठी और गुर्राते हुए बोली यह क्या हरकत है ??? क्या तुम्हें अपनी जान प्यारी नहीं ??

सोनिया की इस बात पर मेजर राज ने एक फ्लाइंग किस सोनिया की तरफ उछाली और बोला सोरी जॉन, तुम बहुत सुंदर हो और तुम्हारी चूत चोदने के योग्य है, लेकिन मुझे अफसोस है कि यह तुम्हारी अंतिम चुदाई थी। यह कहते ही मेजर राज ने एक छलांग लगाई और अपनी दोनों पैर सोनिया की गर्दन के आसपास लपेट कर जोर से दबा दिए सोनिया इस अचानक हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी मगर मेजर की पकड़ में आते ही उसने भी एक छलांग लगाई और अपना घुटना नीचे मेजर को मारा। सोनिया का घुटना लगने से मेजर की तो जान ही निकल गई क्योंकि यह घुटना मेजर के टट्टों पर लगा था। और किसी भी आदमी की सबसे बड़ी कमजोरी उसके टट्टे होते हैं।

मेजर को एक बार अपनी जान निकलती हुई महसूस हुई और उसकी पकड़ सोनिया की गर्दन पर कमजोर पड़ने लगी। मगर फिर मेजर को एहसास हुआ कि अगर अब सोनिया उसकी पकड़ से निकल गई तो उसकी जान बचना मुश्किल है तो उसने टट्टों के दर्द भुलाकर एक बार फिर से सोनिया की गर्दन के आसपास अपनी टांगों का शिकंजा मजबूत कर दिया। अब सोनिया ने फिर से अपना घुटना मेजर के टट्टों पर मारना चाहा लेकिन वह इसमें नाकाम रही क्योंकि उसकी गर्दन इस बार बहुत मजबूती से मेजर राज के पैरों के बीच थी और अब इसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह और प्रतिरोध कर सके।

कुछ ही देर के बाद सोनिया की सुंदर आँखें बाहर निकलने लगीं और वह फटी फटी आँखों से मेजर राज को देख रही थी। मेजर कुछ देर और इसी तरह हवा में सोनिया की गर्दन पैर से दबोचे खड़ा रहा, जब उसे यकीन हो गया कि सोनिया की आखिरी सांस निकल चुकी है तो उसने सोनिया की गर्दन छोड़ी और फिर से जमीन पर आ गया। सोनिया लहराती हुई घूमती हुई ज़मीन पर आ गई थी। मेजर राज ने अंतिम बार सोनिया देखा और फिर उसके ऊपर थूकते हुए बोला तुझे क्या लगा था इतनी आसानी से तेरे काबू में आ जाउन्गा???? फिर मेजर ने अपने पांव की उंगलियों से वह चाबी उठाई जिससे सोनिया ने उसके पैर खोले थे। मेजर राज ने वह चाबी अपने पैर की उंगलियों में फंसाकर अपनी टांग फुल जोर से हवा में उछाली। जिस तरह सोनिया ने अपनी टांग उठाकर मेजर के सीने से लगा दी थी उसी तरह मेजर ने अपनी टांग उठाई तो उसका पांव उसके हाथ के बिल्कुल करीब पहुंच गया था जहां पर मेजर ने पांव की उंगली खोल दी और पैर वापस नीचे ले आया जबकि वह चाबी हवा में उछल गई। कुछ हवा में उछलने के बाद अब चाबी वापस नीचे आने लगी और मेजर राज सिर ऊपर किए चाबी को देखने लगा जो बिल्कुल मेजर राज के हाथ के ऊपर आ रही थी।

यूं मेजर राज ने वह चाबी पकड़ ली और अपने हाथ मोड़कर चाबी को उंगलियों में फंसाकर अपने हाथ खोल लिए। फिर मेजर ने तुरन्त अपने कपड़े पहने और जमीन पर बिना कपड़े के पड़ी सुंदर सोनिया को अपनी गोद में उठाया और ऐसे ही उसे उठाकर दरवाजे की ओर ले गया। वहां पहुंचकर मेजर ने सोनिया का हाथ पकड़ कर उसकी उंगली से वही कोड मिलाया जिससे सोनिया ने दरवाजा खोला था। कोड पूरा होने पर दरवाजा खुलता चला गया। और सामने एक लंबी गैलरी थी। गलियारे को देखते ही मेजर समझ गया कि सोनिया ने सही कहा था गलियारे में कैमरा है जो ऑटो मैटेक अनजान चेहरे को देखकर ही लेजर ऑन कर देते थे जो मनुष्य को 2 भागों में विभाजित कर सकती थी। मगर मेजर राज रॉ का होनहार एजेंट था। वह जानता था कि इस गलियारे से कैसे निकला जाए कि कैमरा ऑटो मैटेक लेजर चालू न करें।

कर्नल इरफ़ान को जैसे ही खबर मिली कि मेजर राज ने दाऊद इस्माइल गिरोह को अपनी मदद के लिए बुलाया है और आगे से ठीक भी कहा गया है तो कर्नल इरफ़ान के आश्चर्य की सीमा नहीं रही थी। क्योंकि दाऊद जो एक मामूली गुंडा होता था कर्नल इरफ़ान ने ही उसको एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का डॉन बनाया था और फिर कर्नल इरफ़ान ने दाऊद इस्माइल की भरपूर मदद की थी कि वह मुंबई जैसे शहर में अपना गिरोह चला सके। दाऊद जहां अपने अवैध कार्यों के लिए कर्नल इरफ़ान की मदद लेता था वहीं बॉलीवुड में भी दाऊद भाई का बहुत अच्छा दबदबा था। किसी भी हीरोइन की फिल्म फ्लॉप या स्ट्रॅगल एक्ट्रेस को टॉप हीरोइन बना देने के लिए दाऊद की एक कॉल ही काफ़ी थी। उसके साथ बदले में बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री न केवल दाऊद का बिस्तर गर्म करती थीं बल्कि साथ ही साथ उसके कहने पर किसी भी व्यक्ति के साथ रात बिताना सामान्य बात थी। किसी हीरोइन में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह दाऊद को मना कर सके।

इन सभी गतिविधियों के अलावा दाऊद कर्नल इरफ़ान के एक इशारे पर भारत में बम विस्फोट कराने का काम भी करता था। हिंदू मुस्लिम दंगे करवाने के लिए भी दाऊद का गिरोह माहिर था। नाम से तो यह व्यक्ति मुसलमान था लेकिन वास्तव में मनुष्य कहलाने के योग्य भी नहीं था। दाऊद के गिरोह को कर्नल इरफ़ान का राइट हैंड कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा। यही कारण था कि कर्नल इरफ़ान के लिए यह फोन कॉल किसी धमाके से कम नहीं थी। वह सोच भी नहीं सकता था कि दाऊद का गिरोह रॉ के साथ मिल चुका है और मेजर राज को आज़ाद करवाने के लिए वह पाकिस्तानी सेना पर भी हमला कर सकता है। इस बात ने कर्नल इरफ़ान के तन बदन में आग लगा दी थी। यही कारण था कि यह खबर मिलते ही कर्नल इरफ़ान ने अपने विश्वसनीय 10 किल्लर्स को दाऊद के गिरोह का सफाया करने का आदेश दिया था।

कर्नल इरफ़ान का यह आदेश मिलते ही उसके लोग पूरे भारत में अपने अपने क्षेत्र के विश्वसनीय लोगों को लेकर इस समूह का सफाया करने निकल पड़े। मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता, राज स्थान, दिल्ली, बेंगलुरु, राजपुर, पटना और दूसरे बड़े शहरों में पिछले आधे घंटे में दाऊद भाई के 200 विश्वसनीय लोग कर्नल इरफ़ान के साथियों की गोली का निशाना बन चुके थे। मुंबई में कर्नल इरफ़ान ने खुद दाऊद के बहुत से ठिकानों पर हमला करवाया और उसके गिरोह का सफाया कराता चला गया। अंत में दाऊद की बारी थी जिसको मारने का कार्य कर्नल इरफ़ान ने खुद ज़िम्मा लिया था। क्योंकि इस समय दाउद पाकिस्तान में ही छिपा हुआ था

( दोस्तो दाउद पाकिस्तान में क्यों छिपा हुआ था ये तो आप जानते ही है कि जुलाई 2006 में दाउद ने मुंबई में बमबिस्फोट कराए थे जिसमें बहुत से लोग मारे गये थे तब से दाउद प्लास्टिक सर्जरी से अपना चेहरा बदल कर पाकिस्तान मे ही छिपा हुआ था जिसकी मदद कर्नल इरफ़ान ने की थी )

 
दाऊद भाई इन सब बातों से बेखबर बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री ज़रीन खान के शरीर से खेलने में व्यस्त थे। ज़रीन खान जिसे दाऊद भाई के कहने पर ही सलमान खान के साथ प्रसिद्ध फिल्म में कास्ट किया था अपने सेक्सी शरीर की वजह से दाऊद भाई को पसंद आ गई थी। ज़रीन खान के भरे हुए मम्मे 38 आकार के थे और उसकी गाण्ड 36 की थी। दाऊद भाई अपने भव्य सोफे पर पैर फैलाए बैठे थे जबकि ज़रीन खान उसकी टांगों के बीच जमीन पर बैठी थी और दाऊद भाई का 8 इंच का लंड अपने मुंह में लेकर उसकी चुसाइ लगाने में व्यस्त थी। ज़रीन खान की लंड चुसाइ से दाऊद भाई हमेशा ही मजे करते थे। वह आंखें बंद किए ज़रीन खान की चुसाइ का मज़ा ले रहे थे। चुसाइ समाप्त कर ज़रीन खान खड़ी हुई और दाऊद भाई की तरफ अपनी गान्ड की और उनकी गोद में लंड के ऊपर अपनी चूत रखी और बहुत ही आराम के साथ लंड के ऊपर ही बैठ चुकी थी। लंड के ऊपर बैठने के बाद ज़रीन खान ने लंड के ऊपर उछलना शुरू किया और अपने मुंह से अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह फक मी माइ बेबी, फक मी हार्ड की आवाज़ें निकालकर दाऊद को जोश दिलाना शुरू किया।

इससे पहले दाऊद को अधिक जोश चढ़ता और वह ज़रीन खान की चूत को जमकर चोदता अचानक कमरे का दरवाजा एक धमाके से खुला और कर्नल इरफ़ान किसी जिन्न की तरह अंदर दाखिल हुआ, दरवाजा खुलते ही दाऊद भाई ने बिजली की सी तेजी से ज़रीन खान को अपने लंड से उतारा और पास पड़ी हुई पिस्टल उठाकर अंदर आने वाले पर फायर करना चाहा। मगर अंदर आने वाला व्यक्ति दाऊद भाई से कहीं अधिक तेज था। इससे पहले दाऊद भाई पिस्टल से गोली चलाता एक शाएँ की आवाज़ आई और कर्नल इरफ़ान की पिस्टल से चली गोली सीधी दाऊद के हाथ पर लगी और उसके हाथ से पिस्टल छूटकर दूर जा गिरी। ज़रीन खान इस अचानक हमले से भयभीत होकर साथ ही पड़े बेड पर लेट गई थी और अपने शरीर को चादर से छिपा लिया था। कर्नल इरफ़ान को अपने सामने देखकर दाऊद हैरान भी हुआ और खुश भी। आश्चर्य इसलिए कि आखिर कर्नल इरफ़ान को ऐसी क्या ज़रूरत आ गई कि यूं कमरे का दरवाजा खोलकर गोली भी चलाई। और खुश इसलिए कि दाऊद समझ रहा था कि यह कर्नल इरफ़ान ने मजाक के रूप में पंप कार्रवाई करके दिखाया है। कर्नल इरफ़ान को सामने देखकर दाऊद भाई अब मुस्कुराने लगा और फिर साथ पड़ी चादर से अपने लंड को ढक कर सोफे से उठा और कर्नल इरफ़ान को वेलकम कहा और उसके निशाने की सराहना करने के साथ ही अपने हाथ से निकलने वाले खून को भी चादर से साफ करने लगा

लेकिन जल्द ही दाऊद को एहसास हो गया था कि कर्नल इरफ़ान की आँखों में खून उतरा हुआ है ... दाऊद भाई ने कर्नल इरफ़ान से पूछा कि खैर तो है इस सबका क्या मतलब ??? कर्नल इरफ़ान ने गुर्राते हुए कहा मेरे से गद्दारी और देश द्रोह करने वाले को जीने का कोई हक नहीं। दाऊद ने पूछा कौन देश द्रोह और किसने की गद्दारी ?? कर्नल इरफ़ान ने पहले से अधिक गुस्से से कहा रॉ की मदद करने का विश्वासघात और यह देशद्रोह तूने किया है। इससे पहले कि दाऊद कुछ और पूछता, कर्नल इरफ़ान के पिस्टल से गोलियां निकली और दाऊद के सीने को छलनी करती हुई पार हो गई। खून के छींटे पीछे वाली दीवार पर पड़े थे और दाऊद का शव सोफे पर गिर चुका था। मरने के बाद भी दाऊद की आँखों में आश्चर्य के भाव थे जैसे उसे अपनी मौत पर विश्वास न आया हो।

उसके बाद कर्नल इरफ़ान ने ज़रीन खान को देखा जो डरी और सहमी हुई कभी कर्नल इरफ़ान को देखती तो कभी दाऊद की लाश को। कर्नल इरफ़ान ने ज़रीन खान को कपड़े पहनने को कहा तो वह किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह अपने कपड़े पहनने लगी। ब्रा और पैन्टी पहनने बाद ज़रीन खान ने अपनी शॉर्ट निक्कर और सेक्सी शर्ट पहनी तो कर्नल इरफ़ान उसे अपने साथ आने को कहा। कर्नल इरफ़ान दाऊद के गिरोह को पूरी तरह से खत्म कर चुका था अब वह ज़रीन खान के शरीर से अपने आपको आराम पहुंचाना चाहता था। कुछ ही देर बाद ज़रीन खान एक बार फिर अपने कपड़ों से मुक्त कर्नल इरफ़ान के बेड पर उसके लंड की चुसाइ लगाने में व्यस्त थी।

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आइए इधर मेजर राज क्या कर रहा है ज़रा देख लेते हैं

इन कैमरों की खास बात यह थी कि यह तब ही लेजर सक्रिय करते थे जब कोई अनजान चेहरा दिखे। मेजर राज ने दरवाजे से कदम आगे बढ़ाने से पहले सोनिया की शर्ट से अपना चेहरा ढक लिया था जबकि सोनिया के शरीर को अपने आगे कर लिया था। मेजर राज ने सोनिया के शव को अपने सामने इस तरह किया कि मानो वह कोई जीवित आदमी हो और चलती जा रही हो। मेजर राज ने सोनिया के पांव के ऊपर पाँव रखा था और उसका चेहरा जिसमें जीवन की कोई रमक शेष न थी ऊपर उठाया हुआ था ताकि कैमरा जब इन दोनों पर पड़े तो वह सोनिया के चेहरे को पहचान ले। और मेजर राज का चेहरा कैमरे की आंख से ओझल रहे और वहां पर चेहरे के बजाय एक शर्ट दिखे। मेजर राज ने सोनिया के शरीर आगे किया जहां से मेजर राज की समझ के अनुसार सुरक्षा वाला हिस्सा स्टार्ट होता था। जैसे ही सोनिया का शरीर इस हिस्से से आगे हुआ सामने लगे दो कैमरे अपना एंगल बदल कर सोनिया की ओर गए। कैमरों से इंफ्रा रेड किरणें निकली और सोनिया के चेहरे पर पड़ी। कैमरा डेटाबेस में सोनिया का चेहरा मौजूद था जो ऑटोमैटिक सिस्टम से तुरंत ही अप्रूव कर दिया गया और अब कैमरे में एक ग्रीन लाइट ब्लिंक कर रही थी। यह संकेत देखकर मेजर राज ने आगे बढ़ना शुरू किया। मेजर राज के शरीर के आगे सोनिया का शरीर था, जो कपड़ों से मुक्त था।

लंबे गलियारे के अंत में जाकर मेजर राज को अपने दाहिनी ओर के कमरे से कुछ आवाजें सुनाई दीं। मेजर राज ने इन आवाजों को तुरंत ही पहचान लिया था। यह वही आवाज़ें थीं जो कि मेजर राज से इनवेसटीगेशन कर रही थीं। उन्हें मेजर राज ने अपना नाम और कर्नल इरफ़ान का पीछा करने के बारे में तो सच बता दिया था मगर बाकी जो कुछ बताया था वह झूठ पर आधारित था। मेजर राज ने तुरंत फैसला किया कि उसे न केवल अपने अपमान का बदला लेना है बल्कि उनको अगले जहां पहुंचाकर औरों के जीवन को सुरक्षित बनाना है। मेजर राज ने दीवार के साथ लग कर दरवाजे पर हल्का सा दबाव डाला तो वह खुलता चला गया और अंदर बैठे दोनों गुंडे दरवाजे की तरफ देखने लगे। मगर अंदर कोई नहीं आया तो उन्हें चिंता होने लगी। उन्होंने सोनिया को आवाज देते हुए कहा अब आ भी जाओ जानेमन अंदर क्यों तड़पा रही हो ???

मेजर राज ने यह आवाज़ सुनी तो सोनिया का एक पैर अपने हाथ से दरवाजे के आगे कर दिया। सोनिया के नंगे पैर देखकर उनमें से एक गुंडा अपने लंड को हाथ में पकड़े दरवाजे पर आया और जैसे ही बान्छे खिलाए कमरे से बाहर निकल कर सोनिया को पकड़ा तो सोनिया लहराती हुई उसकी बाहों में गिर गई। इससे पहले कि गुंडे को समझ आती कि उसकी बाहों में सोनिया का शव है मेजर राज के हाथ इस गुंडे की गर्दन तक पहुंच चुके थे और एक ही झटके में उसकी जान निकल चुकी थी।

अंदर बैठा गुंडा जो इंतजार कर रहा था कि कब उसका साथी सेक्सी सोनिया को अपनी बाँहों में उठाए अंदर लाएगा उसने अपने साथी के शव को जमीन पर गिरते देखा और उसके साथ ही उसकी नजर सोनिया के नग्न शरीर पर भी पड़ी जिस पर मौत के आसार स्पष्ट थे। यों इस तरह अपने सामने 2 शव गिरते देख कर उसका हाथ तुरंत अपनी पिस्टल की ओर गया और इससे पहले कि वह गोली चला पाता मेजर राज एक ही छलांग में उसके सिर पर पहुँच चुका था। मेजर राज ने पहला वार उसके हाथ पर किया और उसकी पिस्टल दूर जा गिरी जबकि दूसरा वार मेजर राज ने उसके पेट पर किया। मेजर राज का घूंसा लगते ही वह गुंडा दर्द से दोहरा हो गया। उसके दोहरा होने पर उसकी कमर पर मेजर राज की शक्तिशाली कोहनी लगी जिसकी ताब न लाते हुए वह गुंडा जमीन पर ढह गया। और तड़पने लगा। मेजर राज ने इधर उधर देखा और उसे वही लोहे का रोड नज़र आया जिससे इस गुंडे ने मेजर राज के पैरों पर बेतहाशा वार किए थे। मेजर राज ने तुरंत ही वह रोड उठा लिया और उस गुंडे के पैरों पर बरसाना शुरू कर दिया।

अच्छी तरह धोने के बाद मेजर राज ने इस गुंडे को भी जीवन की कैद से मुक्त कर दिया और फिर नियंत्रण कक्ष में मौजूद सिस्टम से पूरी बिल्डिंग के कैमरों का दृश्य देखा और सुरक्षा की समीक्षा की। बिल्डिंग में 10 स्थानों पर सुरक्षा गार्ड मौजूद थे जिनके हाथ में आधुनिक किस्म के हथियार था और वह हर तरह के हालात का सामना करने के लिए चाक-चौबंद खड़े थे। मेजर राज ने उनकी पोशीनज़ अपने दिमाग़ मे बिठाई और मेन गेट पर मौजूद सुरक्षा का भी जायजा लिया। कमरे में एक लाल रंग काबटन भी था जिसको दबाने पर सुरक्षा हाई अलर्ट हो जाती तब यहाँ से किसी को भी बख्शा जाना संभव नहीं था। मेजर राज ने कमरे से बाहर निकलने से पहले गलियारे की सुरक्षा प्रणाली को जाम कर दिया और उसके बाद गलियारे में प्रवेश होकर बाहर जाने का दरवाजा खोलकर देखा तो सामने खुला मैदान था जिसमें एक तरफ कुछ झाड़ियां थीं और दूसरी तरफ एक टूटी फूटी सड़क बनी हुई थी। सामने कोई 500 मीटर की दूरी पर एक दीवार और गेट नजर आ रहा था।

मेजर राज ने दरवाजा बंद किया और फिर से बिल्डिंग का नक्शा देखने लगा जोकि इसी कंट्रोल रूम में मौजूद था। इस बिल्डिंग के चारों ओर से इसी तरह के सुनसान क्षेत्र से घिरी हुई थी जबकि चारों ओर एक दीवार थी और बाहर जाने का एक ही रास्ता था जोकि मेजर राज से कोई 500 मीटर दूर था और ज़रूर वहां पर भी सुरक्षा गार्ड मौजूद थे। अब मेजर राज इस कैद से निकलने का प्लान करने लगा। अचानक ही उसके ज़हन में एक जबरदस्त प्लान आया। दोनों गुंडों में से एक गुंडे ने हल्की दाढ़ी रखी हुई थी और डेटाबेस में उसकी तस्वीर भी दाढ़ी के साथ ही थी। मेजर राज भागता हुआ गलियारे से वापस अपने कारावास के कमरे में गया वहाँ बहुत सारा सामान मौजूद था जो कैदियों को यातना पहुँचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। मेजर राज ने इस उपकरण से एक ब्लेड निकाला और वापस कंट्रोल रूम में आ गया, ऑटोमैटिक सुरक्षा मेजर राज पहले से ही जाम कर चुका था इसलिए उसे बाहर गलियारे से गुजर में कोई प्रॉब्लम नहीं हुई।

वापस आकर मेजर राज ने इस गुंडे चेहरे के बाल साफ किए और उसके चेहरे पर 2 अलग जगह पर ब्लेड से निशान भी लगा दिया। ब्लेड लगने से खून निकलने लगा जो मेजर राज ने उसके चेहरे पर मल दिया।अब किसी भी कैमरे के लिए इस को पहचानना संभव नहीं था। अब मेजर राज ने नियंत्रण कक्ष की समीक्षा की और वहां से कुछ हथियार उठा कर अपने कपड़ों में छिपा लिए और उसके बाद ऑटोमैटिक सिस्टम टाइमर ऑन कर दिया। 5 मिनट के बाद सुरक्षा प्रणाली को स्वचालित रूप से ऑनलाइन हो जाना था। मेजर राज ने सोनिया और पहले गुंडे का शव कमरे के अंदर कर दिया और दूसरे गुंडे के शव को गलियारे में रख दिया उसके बाद मेजर राज ने गलियारे के बाहर जाने वाला दरवाज़ा खोला और दोनो ओर का जायज़ा लेकर झाड़ियों की ओर दौड़ लगा दी। मेजर राज अपनी पूरी ताकत लगाकर पूरी तेजी के साथ झाड़ियों का सहारा लेता हुआ मेन गेट की ओर भाग रहा था। जब यह दूरी 100 मीटर रह गई तो मेजर राज रुक गया और वापस गलियारे वाले रास्ते से देखने लगा।

अंदर गलियारे में गुंडे की लाश पड़ी थी जो अब डेटाबेस में मौजूद छवि से काफी अलग थी। 5 मिनट पूरे होने पर सुरक्षा प्रणाली ऑनलाइन हो गई और जैसे ही पारगमन कैमरा चालू हुए तो स्वचालित सुरक्षा प्रणाली इस शव को पहचानने की कोशिश करने लगी मगर कैमरे से मिलने वाली तस्वीर डेटाबेस में मौजूद किसी भी तस्वीर से मैच न हुई तो स्वचालित लेजर ऑनलाइन हो गई और साथ ही पूरी बिल्डिंग जोरदार सायरन से गूंजने लगी। लेजर ने शव के टुकड़े कर दिए थे जबकि सायरन की आवाज सुनकर सभी सुरक्षा अधिकारी अपनी अपनी जगह छोड़ कर उस बिल्डिंग के गलियारे से निकलने वाले दरवाजे के सामने अपनी अपनी स्थिति लेने लगे थे। कोई बिल्डिंग की छत से नीचे उतरा तो कोई बिल्डिंग के बाहर वाली साइड पर मौजूद कमरे से निकला। इसी तरह मेन गेट पर मौजूद 2 सुरक्षा कर्मियों में से एक ने भी भागना शुरू किया और गलियारे के दरवाजे के बाहर अपनी स्थिति संभाल ली। अब मेजर राज ने मेन गेट की तरफ भागना शुरू किया।

मेन गेट पर मौजूद एकमात्र सुरक्षाकर्मी को झाड़ियों में हलचल महसूस हुई तो वह देखने के लिए आगे बढ़ा।अचानक ही झाड़ियों से मेजर राज ने लंबी छलांग लगाई और इससे पहले कि सुरक्षाकर्मी कुछ समझता मेजर राज के हाथ में मौजूद धारदार चाकू उसकी गर्दन पर था। अब यह अधिकारी कुछ बोल नहीं सकता था।मेजर राज ने उसको तेज शब्दों में कहा जीवन बचाना है तो तुरंत इस गेट को खोल दो नहीं तो 3 गिनती तक तुम अपनी जान से हाथ धो बैठोगे और मेरे हाथ में तेज चाकू तुम्हारी गर्दन काट डालेगा। इसके साथ ही मेजर राज ने गिनती शुरू कर दी। 1। । । । । । । । 2। । । । । । । । । इससे पहले कि मेजर राज 3 कहता इस सुरक्षा अधिकारी ने मेजर राज को गेट खोलने में मदद करने का आश्वासन दिया, मेजर राज अब उसे घसीटता हुआ गेट के पास ले गया तो उसने अपनी जेब से एक चाबी निकाली और गेट मे लगा दी। उसके बाद उसने गेट में लगे सिस्टम पर कोई कोड एंट्री की और फिर चाबी घुमाई तो गेट खुलने लगा।

गेट खुलते ही मेजर राज का हाथ चला और सुरक्षा गार्ड लहराता हुआ जमीन पर आ गिरा मेजर राज ने उसे जान से नहीं मारा था बल्कि उसकी गर्दन पर अपना विशिष्ट वार किया था जिससे वो जल्दी बेहोश हो गया और जमीन पर गिर गया, जबकि मेजर राज गेट से निकलते ही दाईं ओर भागने लगा। अंदर मौजूद बाकी सुरक्षाकर्मी अभी पारगमन का दरवाजा खुलने का इंतजार कर रहे थे। न तो अंदर कोई मौजूद था न ही दरवाजा खुला। और सुरक्षा अधिकारी इंतजार ही करते रह गए।

 
Rohit Kapoor wrote: शर्माजी अपडेट बहुत अच्छा है
 
मेजर राज भागते भागते बहुत दूर निकल आया था मगर अभी तक किसी शहर या आबादी के कोई आसार नजर नहीं आए थे। भाग भाग कर मेजर की हालत खराब हो चुकी थी। उसके भ्रम व गुमान में भी नहीं था कि उसे इतना भागना पड़ेगा। दूर दूर तक पानी का भी नामोनिशान नहीं था। बस एक टूटी फूटी सड़क थी और मेजर राज उसके साथ भाग रहा था। काफी देर भागने के बाद जब मेजर राज थक चुका तो उसने चलना शुरू कर दिया था। शाम का अँधेरा हो चुका था और मेजर राज को इस बिल्डिंग से निकले कोई 30 मिनट हो चुके थे। अचानक मेजर राज को दूर कहीं से कार की आवाज आई। मेजर राज ने पीछे मुड़ कर देखा तो सड़क पर एक कार आ रही थी जिसकी हेड लाइट्स ऑनलाइन थीं। गाड़ी को देखते ही मेजर रोड से उतर गया और कुछ ही दूर मौजूद झाड़ियों में छिप गया और वाहन के गुजरने का इंतजार करने लगा। इससे पहले कि गाड़ी वहां से गुजरती मेजर को लगा कि उसके पीछे कोई खड़ा है ... मेजर नेपीछे मुड़ कर देखा तो वहाँ 3 हटे कटे पुरुष खड़े थे जिनके हाथ में राइफल थीं और उनका रुख मेजर राज की ओर था .....

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ज़रीन खान कर्नल इरफ़ान के सामने अब डॉगी स्टाइल में झुक गई थी और कर्नल इरफ़ान अपना 9 इंच लंबा लंड ज़रीन खान के पीछे से आकर उसकी चूत पर रख चुका था। कर्नल इरफ़ान के लंड की टोपी ने अभी ज़रीन खान की चूत को छुआ ही था कि ज़रीन खान ने खुद ही पीछे की ओर एक धक्का मारा और आधा लंड अपने अंदर उतार लिया, बाकी का आधा लंड कर्नल इरफ़ान के एक जोरदार धक्के से ज़रीन खान की चूत में उतर चुका था। भरे हुए शरीर की मालिक ज़रीन खान को चोदने की इच्छा कई फिल्मी हीरो करते थे मगर वह हर किसी को अपनी चूत नहीं देती थी। सलमान खान के अलावा केवल अक्षय कुमार ही वह व्यक्ति था जो ज़रीन खान की चूत लेने में सफल हुआ था।

लेकिन दाऊद नियमित रूप से ज़रीन खान की चूत लेता था। ज़रीन खान जैसी भरे हुए शरीर की लड़कियों दाऊद भाई को ज़्यादा पसंद थीं। मगर वह अब इस दुनिया में नही रहा। कर्नल इरफ़ान पहली बार ज़रीन खान को चोद रहा था और उसको इस चुदाई में बहुत मज़ा आ रहा था। ज़रीन खान भी कर्नल इरफ़ान का 9 इंच लंड पूरी तरह अपने अंदर छिपाए चुदाई का मज़ा ले रही थी और उसका इज़हार वह अपने मुंह से सेक्सी आवाज निकाल कर कर रही थी। ज़रीन खान अपनी चूत से हर आदमी को मज़ा देने की क्षमता रखती थी जैसे ही कर्नल इरफ़ान अपने लंड को चूत के अंदर घुसाता ज़रीन खान अपनी चूत को टाइट कर लेती जिससे लंड अच्छी पकड़ मिलती और कर्नल को मज़ा आता, लंड बाहर निकलने लगता तो ज़रीन अपनी चूत को ढीला छोड़ देती कर्नल का लंड ज़रीन खान की चूत की गहराई तक चोट मार रहा था यही कारण था कि पिछले 10 मिनट में ज़रीन खान की चूत ने 2 बार पानी छोड़ दिया था। और अभी भी चूत में लगने वाले धक्कों ने ज़रीन खान को तीसरी बार पानी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था।

ज़रीन खान की चूत पानी से भरी हुई थी मगर कर्नल इरफ़ान का लंड थकने का नाम नहीं ले रहा था वह वास्तव में दाऊद इस्माइल की गद्दारी का गुस्सा ज़रीन खान की चूत पर निकाल रहा था उसके हर धक्के में दाऊद के विश्वासघात के खिलाफ गुस्सा स्पष्ट था । अब कर्नल इरफ़ान ने लंड ज़रीन खान की चूत से निकाला और और अपनी उंगली पर थूक लगा कर ज़रीन खान की चिकनी गाण्ड में प्रवेश करा दी। ज़रीन खान की गाण्ड भी काफी चिकनी और थोड़ा खुली थी। मगर फिर भी कर्नल उंगली की जाने से ज़रीन खान की एक सिसकी निकली आवोवोच .. ... ... .. उसने पीछे मुड़कर पहले कर्नल को देखा और फिर उसके लंड को देखा तो बोली आराम से गाण्ड मारना कर्नल आपका लंड बहुत लंबा है।

मगर कर्नल को आज होश नहीं था कुछ भी। उसने अपनी टोपी ज़रीन खान की गाण्ड पर सेट की और एक जोरदार धक्का मारा। ज़रीन खान की एक चीख निकली और उसने अपनी आँखें बंद कर ली। कर्नल का आधे से अधिक लंड ज़रीन खान की नाजुक गांड को चीरता हुआ अन्दर जा चुका था। कर्नल ने थोड़ा लंड और बाहर निकाला और एक और जोरदार धक्का मारा। बाकी लंड भी अब ज़रीन खान की गाण्ड में था। कर्नल ने बिना इंतजार किए फिर से डॉगी स्टाइल में ही ज़रीन खान की गाण्ड बजाना शुरू कर दी। पहले पहल तो ज़रीन खान को काफी तकलीफ हुई लेकिन फिर धीरे धीरे उसको मज़ा आने लगा। वह हल्के हल्के अपनी गाण्ड हिला रही थी जिसकी वजह से कर्नल के धक्के और भी शिद्दत के साथ उसकी गाण्ड को चीरते हुए लंड अंदर पहुँच रहे थे।

अब कर्नल ने लंड ज़रीन खान की गाण्ड से निकाला और ज़रीन खान को सीधा लेटने को कहा। ज़रीन खान कर्नल के बेड पर सीधा लेट गई और लेटते ही अपनी टाँगें खोल दीं कर्नल ने ज़रीन खान की चूत में अपनी उंगली डाल कर अंदर की चिकनाई का जायज़ा किया तो अब उसकी चूत थोड़ा सूखापन था। कर्नल ने अपना लंड उसकी चूत पर सेट किया और एक जानदार धक्के में 9 इंच लंड ज़रीन खान की योनी में उतार दिया। और खुद ज़रीन खान के ऊपर झुक कर उसके 38 आकार के बूब्स को दबाने लगा और पीछे से अपनी गाण्ड हिला हिलाकर ज़रीन खान को चोदने लगा। ज़रीन खान भी कर्नल के बालों में हाथ फेर कर उसको प्यार कर रही थी और जबरदस्त चुदाई में सिसकियों के माध्यम से अपनी खुशी और आनंद व्यक्त कर रही थी। कर्नल इरफ़ान ने अब ज़रीन खान के 38 आकार के मम्मे अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिए थे। वह ज़रीन खान के गहरे ब्राउन निपल्स को अपने मुँह में लेकर चूसता और फिर दांतों में लेकर काटता जिसकी वजह से ज़रीन खान के अंदर की जंगली औरत जाग गई थी और वह अब अपनी गाण्ड उठा उठा कर कर्नल का साथ दे रही थी। साथ ही उसकी आवाज में भी शिद्दत पैदा हो गई थी और उसके हाथ अब कर्नल की कमर पर अपने नाखूनों के निशान डाल रहे थे। कर्नल का लंड भी अब पूरी गति के साथ ज़रीन खान की योनी को चोद रहा था। आखिरकार कर्नल के लंड ने फूलना शुरू किया और सारा वीर्य जब लंड के अंदर जमा हो गया तो कर्नल इरफ़ान के लंड ने झटकों के साथ कतरा कतरा वीर्य ज़रीन खान की चूत में निकालना शुरू कर दिया। गर्म गर्म वीर्य चूत को जैसे ही मिला चूत ने भी अपनी गर्मी दिखाने के लिए गर्म पानी छोड़ दिया।

अब कर्नल इरफ़ान ज़रीन खान के साइड में लेटा दाऊद के बारे में सोच रहा था, ज़रीन खान को चोदते हुए भी कर्नल का ध्यान दाऊद में ही था। उसके भ्रम व गुमान में भी न था कि दाऊद उसे धोखा देगा। कर्नल अभी इन्हीं सोचों में गुम था उसके गुप्त मोबाइल पर घंटी बजी। कर्नल ने तुरंत मोबाइल उठाया और आने वाली कॉल अटेंड करते हुए गुर्राते हुए बोला कर्नल इरफ़ान स्पीकिंग वाट से दा अपडेट ?? आगे कहा गया सर बुरी खबर है ... कर्नल इरफ़ान ने बेपरवाह होकर कहा बोलो। आगे बोलने वाले व्यक्ति ने बताया कि मेजर राज भाटिया सोसायटी जामनगर जेल से फरार हो चुका है। जेल में उसकी निगरानी में तैनात एजेंट राय और और उसके साथी की लाश गलियारे और कंट्रोल रूम में मिली है, जबकि कैप्टन सोनिया भी मृत हालत में पाई गई है।

कर्नल इरफ़ान अपने दांत पीसता हुआ बोला और कोई बात ??? आगे बताया गया कि मेजर राज ने दाऊद इस्माइल गिरोह के जिस आदमी से फोन पर बात की थी उसे अपना परिचय एजेंट 35 कह कर करवाया था।जबकि दाऊद गिरोह का एजेंट 35 तभी से रॉ की कैद में है। यह सुनकर कर्नल इरफ़ान ने अपना फोन दीवार पर दे मारा और जोर से गरजा मेजर राज शर्मा, यू फकड विद मी। आई विल किल यू बास्टर्ड .. ... ... ..

कर्नल इरफ़ान का शरीर गुस्से से कांप रहा था वह मेजर राज की चतुराई पर बहुत हैरान था। जिसने न केवल इस जेल की सुरक्षा को नाकाम कर दिया था जिसको आज तक कोई कैदी नहीं तोड़ सका था बल्कि साथ ही साथ उसने अपनी एक साधारण से फोन कॉल के माध्यम से कर्नल इरफ़ान के राइट हैंड गिरोह दाऊद इस्माइल गिरोह का भी सफाया करवा दिया था। और वह सफाया खुद कर्नल इरफ़ान ने किया था। वह अपनी इस मूर्खता पर अपने आप को कोस रहा था।

वास्तव में मेजर राज ने सोनिया से जो वास्तव में पाकिस्तान आर्मी में कैप्टन के पद पर थी की बातों पर कभी विश्वास किया ही नहीं था। उसे पूरा विश्वास था कि वह ये सब भारत के गुप्त रहस्य अगलवाने के लिए अपने शरीर का उपयोग कर रही है। जब सोनिया ने मेजर राज को कहा कि तुम अपने साथियों को फोन करो ताकि वह मदद कर सकें, तभी मेजर राज को विश्वास हो गया था कि यह मेरे साथ और लोगों को पकड़वाना चाहती है ताकि मेजर राज को चारे के रूप में इस्तेमाल कर वो अपनी वाह वाह करवा सके। मेजर राज ने तुरंत हामी भर ली थी मगर सोनिया जाने के बाद वह सोचता रहा कि आखिर उन्हें कैसे चकमा दिया जाए ?? तभी मेजर राज के मन में वह आतंकवादी आया जो मुम्बई बम ब्लास्ट में शामिल था और अब से 2 महीने पहले मेजर राज ने ही उसे गिरफ्तार किया था। और जांच के दौरान उसने बताया था कि वह दाऊद इस्माइल के गिरोह के लिए काम करता है और उसका कोड वर्ड एजेंट 35 है।

यहीं से मेजर राज ने सोचा कि चलो अपनी जान बचे या न बचे मगर इस गिरोह का तो सफाया होना चाहिए ताकि ये लोग ज़्यादा निर्दोष लोगों की जान न ले सकें। इसी सोच के साथ मेजर राज ने एक नंबर पर फोन किया, यह नंबर भी उसे एजेंट 35 से ही मिला था। मेजर जानता था कि जैसे ही उन लोगों को शक होगा कि यह गिरोह भारत की खुफिया एजेंसी के लिए भी काम करता है तो कर्नल इरफ़ान खुद ही इस गिरोह का सफाया करवा देगा। । मगर मेजर राज नहीं जानता था कि यह गिरोह कर्नल इरफ़ान के लिए कितना महत्वपूर्ण था। यूं मेजर राज की इस चाल से भारत का तो फायदा हुआ ही था मगर साथ में कर्नल इरफ़ान पर भी बहुत गहरी चोट की थी। वो खुद अपने ही हाथों से अपना एक शक्तिशाली हाथ काट चुका था।यही वजह थी कि अब वह पागल कुत्ते की तरह मेजर राज को ढूंढ रहा था।

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मेजर राज के कपड़ों में कुछ हथियार मौजूद थे जिनसे वह उन का मुकाबला कर सकता था, लेकिन समस्या यह थी कि तीनों सशस्त्र आदमी पूरी तरह से सतर्क खड़े थे और वह मेजर राज की किसी भी चालाकी पर गोली चलाने से गुरेज़ नहीं करते। उनका एक आदमी जो स्वास्थ्य में उनमे सबसे तगड़ा था बल्कि अगर यह कहा जाए कि सबसे मोटा था तो गलत न होगा और हल्की दाढ़ी ये शायद इनका मुखिया था वह गुर्राते हुए बोला कौन हो तुम और क्या नाम है तुम्हारा ???

अब मेजर राज यहां यातायात कांस्टेबल राज वाली कहानी नहीं सुना सकता था क्योंकि वह जेल से भागा था और अब किसी को यह बताना कि वह भारतीयहै अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर था। मेजर राज ने तुरंत ही अपने मन में एक कहानी बना ली थी। उसने तुरंत बताया कि उसका नाम वक़ार युसुफ है। 2 महीने पहले उसे एक अंडरवर्ल्ड गिरोह ने 2 करोड़ की राशि के लिए अपहरण कर लिया था लेकिन इस राशि की व्यवस्था नहीं हो सकी तो उन्होंने वक़ार युसुफ यानी मेजर राज को बंदी बना लिया था और आज वह किसी तरह कैद से मुक्त होकर भागा है।

अब मेजर राज की बात पूरी ही हुई थी कि रोड से आने वाली गाड़ी भी इसी जगह पर रुक गई और कुछ देर बाद रोड से नीचे उतरी और झाड़ियों की ओर आने लगी। अब कार की रोशनी मेजर राज के ऊपर पड़ रही थी।मेजर राज ने पीछे मुड़ कर देखने की कोशिश नहीं की क्योंकि वह जानता था कि उसकी हल्की सी अशांति पर वो बंदूक से गोली चलाने से परहेज नहीं करेंगे। वह मन ही मन सोच रहा था स्वर्ग से गिरा खजूर में अटका।एक जेल से भागा तो मालूम नहीं यह कौन लोग हैं जो उसके रास्ते में आ गए। इतने में मेजर राज को कार का दरवाजा खुलने की आवाज आई। हथियारबंद लोगों में मोटी तोंद वाला उधर बढ़ गया और बोला हां क्या खबर है वहाँ की ??

मेजर राज को अपने पीछे क़दमों की आवाज़ आई जो उसी की ओर आ रहे थे। फिर कोई मेजर राज से कुछ दूरी से गुज़रता हुआ इन्हीं 3 सशस्त्र लोगों के पास आया।

मेजर राज ने चेहरा ऊपर हल्का सा घुमा कर आने वाले की तरफ देखा तो वह यह देखकर हैरान रह गया कि आने वाला वास्तव में "वाला" नहीं बल्कि "वाली है।" यह एक जवान लड़की थी जिसने लाल रंग की शलवार कमीज़ पहन रखी थी। आंखों पर हल्के ब्राउन रंग का चश्मा था ऊंची एड़ी वाले सैंडल और हाथ में एक छोटे आकार का महिलाओं का बैग पकड़ रखा थाछोटे बाल कंधों से कुछ नीचे कमर को छूने की कोशिश कर रहे थे। पाकिस्तानी कल्चर के अनुसार वह इस सूट मे कयामत खेज लग रही थी

आने वाली लड़की, जिसकी उम्र लगभग 20 साल होगी और लंबाई 5 फुट 6 इंच के करीब रही होगी हल्का सा मुँह टेढ़ा करके मेजर राज की ओर देखा और बंदूकधारी की बात का जवाब देने की बजाय मेजर राज से मुखातिब होते हुए बोली तुम कहाँ से आए हो ???

इससे पहले कि मेजर राज कुछ बोलता सशस्त्र आदमी ने फिर उससे पूछा उसे छोड़ो जिस काम से तुम्हें भेजा था उसका बताओ क्या बना ??

तो लड़की बोली एक आश्चर्यजनक खबर है। वह वहां से पलायन हो चुका है, गेट आधा खुला था और गेट पर गनमैन बेहोश पड़ा था, जबकि अंदर काफी दूर कुछ बंदूकधारियों दिखे जो शायद किसी को ढूंढ रहे थे। हो न हो वह वहां से भाग चुका है ....

अब बंदूकधारी ने फिर से मेजर राज की ओर देखा और बोला हाँ तो वक़ारयुसुफ जी, बताना चाहूँगा कि आप कहां के रहने वाले हैं और उस गिरोह के चंगुल से कैसे भागे ???

इस पर लड़की ने फिर मेजर को देखा और बंदूकधारी को संबोधित करके बोली ये कहाँ से आया है ???

बंदूकधारी ने हाथ के इशारे से बताया कि यह उसी ओर से आया है जहां से तुम आ रही हो ... यह सुनकर उस लड़की के चेहरे पर मुस्कान आई और वह बोली कहीं तुम ही तो मेजर राज तो नहीं हो ??? लड़की के मुंह से अपना नाम सुनकर मेजर राज हैरान रह गया और फिर बोला नहीं मैं किसी मेजर राज को नहीं जानता। मेरा नाम वक़ारयुसुफ है और मैं लाहोर का रहने वाला हूँ। मेरा वहाँ कपड़े का कारोबार है।

मेजर राज ने अभी जो कहा तो केवल लड़की ही नहीं बल्कि तीन बंदूकधारियों भी मुस्कुरा रहे थे और आश्चर्यजनक रूप से अब उन्होने अपनी बंदूक का रुख भी जमीन की ओर कर दिया था और वह बहुत रिलैक्स खड़े थे।

मेजर राज ने सोचा अवसर का लाभ उठाना चाहिए, उसने एक ही पल में अपनी जेब में हाथ डाला और उसमें से एक छोटे आकार की पिस्टल निकाली और एक ही छलांग लगा कर लड़की के सिर पर पहुँच गया उसने अपनी पिस्टल लड़की की गर्दन पर रख दी थी और उसके गोरे पेट के आसपास हाथ डाल कर उसको कसकर पकड़ लिया था। मेजर राज चिल्लाया कि तुम सब अपनी-अपनी बंदूक नीचे फेंक दो नहीं तो तुम्हारी यह साथी अपनी जान से जाएगी। यह कह कर मेजर राज ने काउन्टिन्ग शुरू कर दी, 1। । । । । । । 2। । । । । । । मगर यह क्या .... वे तीनों सशस्त्र लोग डरने की बजाय अब भी मेजर राज को देखकर मुस्कुरा रहे थे और लड़की की भी हंसी निकल रही थी।

मेजर राज फिर चिल्लाया मगर इस बार बंदूकधारी ने मेजर राज को संबोधित किया और बोला मेजर साहब कपड़े का कारोबार करने वाला इस फुर्ती मे कभी हमला नहीं कर सकता। यह कह कर उसने अपनी बंदूक नीचे रखी और मेजर की तरफ हाथ फैलाकर बढ़ने लगा,

मेजर राज इस स्थिति पर हैरान था, उसने एक बार फिर अपनी पिस्टल लड़की की गर्दन पर रखी और धमकी भरे लहजे में बोला एक कदम भी आगे बढ़ाया तो गोली चला दूंगा।मगर लड़की अब भी मुस्कुरा रही थी। अब वह बंदूकधारी सीधा खड़ा हुआ और मेजर राज को सलयूट किया और बोला सर समीरा को तो छोड़ दें यह आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगी, और जहां से आप भागे हैं यह अभी वहीं से होकर आ रही है और हमें आश्चर्य है कि आप कर्नल इरफ़ान की इस जेल से कैसे जीवित और सलामत बच कर निकल आए ... आज तक उसकी जेल से कोई बच कर नहीं निकल सका।

मेजर राज ने इस बार हैरान होकर पूछा तुम कौन हो ??

तो इस व्यक्ति ने अपने सिर से पगड़ी उतार दी और बोला सर मेरा नाम अमजद है, यह राणा काशफ, और सरमद है। और लड़की की ओर इशारा करते हुए बोला और यह मेरी बहन समीरा है। हमारा संबंध जमात-उल-अहरर से है। हमें मेजर जनरल सुभाष ने काम दिया था कि उनका एक मेजर कर्नल इरफ़ान की कैद में है उसको वहां से रिहा करवाना है। हमने समीरा को कार पर आगे भेजा था कि वह वहाँ की समीक्षा कर वापस आकर हमें वहां के हालात से अवगत करे, इतने में आप मिल गए, हम समझ तो गए थे कि आप ही मेजर राज होंगे क्योंकि यह बहुत वीरान क्षेत्र है यहां दूर दूर तक कोई आबादी नहीं। और ऐसी जगह पर आपका आना और आपकी यह स्थिति साफ बता रही है कि आप किसी जेल से भागे हैं।

अपनी बात पूरी करके अमजद कुछ देर चुप हुआ और फिर हैरान खड़े राज को देखा जो यह सोच रहा था कि उनकी बात पर विश्वास करना चाहिए या नहीं, फिर अमजद बोला सर अब तो समीरा को छोड़ दीजिए अब तो हमने अपनी बंदूक भी साइड पर रख दी हैं।

अब मेजर राज कुछ सोचता हुआ समीरा से पीछे हट गया, लेकिन उसकी उंगली अभी पिस्टल के ट्रिगर पर थी ताकि किसी भी हालत में वो तुरंत अपनी सुरक्षा हेतु गोली चला सके। जैसे ही मेजर राज ने समीरा को छोड़ा अमजद ने शेष 2 लोग राणा काशफ और सरमद से कहा चलो अब जल्दी निकलें इधर से कर्नल इरफ़ान के लोग अब पागल कुत्तों की तरह मेजर को ढूँढेंगे वह किसी भी समय इधर पहुँच सकते हैं। यह कहते ही सब ने अपनी अपनी बंदूक पुनः उठाई और कार की ओर भागे।

मेजर राज के पास और कोई विकल्प नहीं था वह भी कार की ओर भागा, अमजद ड्राइविंग सीट पर बैठ गया, जबकि समीरा उसके साथ फ्रंट सीट पर बैठ गई राणा काशफ और सरमद पिछली सीट पर बैठ गए मेजर राज भी उनके साथ बैठ गया और कार फर्राटे भर्ती हुई वहां से निकल गई।

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सुबह होने पर डॉली की आंख खुली तो उसने देखा वह अब तक बना कपड़ों के लेटी थी और उसके पहलू में जय भी बना कपड़ों के सो रहा था। डॉली कंबल से बाहर निकली और अपने कपड़े पहनने लगी। रात होने वाली चुदाई का सोच कर उसकी आंखों में एक मस्ती और होठों पर मुस्कान थी। कपड़े पहनने के बाद उसने जय भी उठने को कहा और खुद शौचालय में घुस गई, जहां गर्म गर्म पानी से स्नान किया और उसके बाद जय से भी स्नान करने को कहा। स्नान करने के बाद डॉली दूसरे कमरे में जाकर पिंकी और रश्मि को जगाने चला गई जो अभी भी सो रही थीं। कमरे का दरवाजा खुला ही था डॉली सीधी अंदर गई और पहले पिंकी और फिर रश्मि को उठाया और तुरंत तैयार होने को कहा और बताया कि आज हम बीच जाएंगे और समुद्र मे भ्रमण भी करेंगे तो जल्दी जल्दी तैयार हो जाना दोनों। यह कह कर वह वापस अपने कमरे में चली गई और तैयार होने लगी। पिंकी भी तुरंत उठी और नहाने घुस गई जबकि रश्मि ऐसे ही बेड पर लेटी रही।

उसका कहीं भी जाने का कोई मूड नहीं था। राज से दूरी उसको एक पल भी आराम नहीं लेने दे रही थी। ऊपर से इतने दिन बीतने के बावजूद अब तक राज की कोई खबर नहीं आई थी। यही वजह थी कि रश्मि गोआ आकर अपने आप को दोषी मान कर रही थी। एक औरत जिसका पति शादी की रात से ही लापता है वह गोआ की सैर कर रही है यह सोच कर ही रश्मि को महसूस होने लगा कि वह अपने पति से विश्वासघात कर रही है। रश्मि इन्हीं सोचों में गुम थी कि पिंकी तैयार हो गई और रश्मि को देखकर बोली भाभी आप अब तक ऐसे ही बैठी हैं चलने का इरादा नहीं है क्या ?? इस पर रश्मि बोली नहीं यार मेरा मन नहीं कर रहा कहीं भी जाने को। राज की याद आ रही है। भाई का नाम सुनकर एक पल पिंकी भी उदास हुई मगर फिर रश्मि को तसल्ली देते हुए बोली भाभी चिंता मत करो, भाई का तो काम ही है आपको तो पता है वह एक सिपाही हैं और उन्हें अक्सर ऐसे मिशन पर रवाना होना पड़ता है कि कई कई दिन उनकी खबर नहीं आती। आप चिंता न करें और चलने की तैयारी करें।

इतने में डॉली ने आकर नाश्ता लगने की खबर दी, रश्मि मुंह धोकर पिंकी के साथ नाश्ते की टेबल पर पहुंची तो डॉली और जय फुल तैयारी कर चुके थे और पिंकी भी तैयार थी, इन दोनों ने रश्मि को ऐसी हालत में देखा तो पूछा भाभी आप अब तक तैयार क्यों नहीं हुई ?? रश्मि बोली तुम जाओ मेरा मूड नहीं है। यह सुनकर डॉली ने कारण पूछना चाहा मगर जय ने मना कर दिया और बोला जैसे आपकी मर्ज़ी भाभी लेकिन आप चलेंगी तो हमें खुशी होगी। रश्मि ने जय को देखा मगर बोली कुछ नहीं। उसकी आंखों की उदासी ने सब कुछ कह दिया था और जय समझदार था वह भी समझ गया कि रश्मि राज के बिना अच्छा फेल नहीं कर रही और डॉली और जय को साथ मे देखकर भी हो सकता है उसे राज की कमी महसूस हो। इसीलिए जय ने उस पर दबाव नहीं डाला और नाश्ता समाप्त कर वह डॉली और पिंकी के साथ निकल गया जाते हुए वह रश्मि को ताकीद कर गया कि अपना ध्यान रखे और किसी भी प्रकार की जरूरत हो तो बिना हिचक जय को अपना छोटा भाई समझ कर फोन करे वह तुरंत वापस आ जाएगा। यह सुनकर रश्मि ने प्यार से जय के सिर पर हल्की सी चमाट मारी और बोली नहीं तुम एंजाय करो मैं यहाँ ठीक हूँ और अगर किसी चीज़ ज़रूर हुई भी तो मेजर की पत्नी हूँ यहाँ फुल प्रोटोकॉल लूँगी। यह सुनकर रश्मि और जय दोनों ही हंस पड़े और पिंकी भी उनके साथ हंसने लगी जबकि डॉली के चेहरे पर नाराज़गी के आसार थे।

 
Ankit wrote: राज भाई मेजर राज तो कमाल का एजेंट है इतनी टाइट सुरक्षा को तोड़ के बाहर आ ही गया और फिर एक हसीना भी मिल गई वाह मज़ा आएगा आगे पढ़ कर
 
गोवा में सबने काफ़ी मस्तियाँ की सिर्फ़ रश्मि को छोड़कर क्योंकि राज के बगैर रश्मि को सब फीका और बेकार लगता था कभी वो सोचती कि उसे जय आदि के साथ आना ही नही चाहिए था . दो दिन गोआ में बिताकर जय ने कश्मीर जाने का प्लान बनाया सही मायने में ये सब करने के डॉली ने ही जय पर दवाब डाला था खैर जो भी हो अगले दिन प्लेन से वो जम्बू पहुँचे और फिर वहाँ से कश्मीर आ गये . और सफ़र में इतना थक चुके थे पूरी रात घोड़े बेच कर सोए .

सुबह सबसे पहले डॉली जगी और उसने सब उठाया और कहा कि जल्दी से तैयार हो जाएँ नाश्ते के बाद घूमने चलना है

रश्मि ने उनके साथ जाने से फिर इनकार कर दिया और कहा कि आप लोग घूम आइए मैं यही रहूंगी . जय ने भी रश्मि की हालत को महसूस करके ज़्यादा ज़िद नही की . और कुछ देर बाद तीनों सैर के लिए निकल चुके थे जबकि रश्मि अपने हट में ही मौजूद रही। कुछ देर खाली बैठे बैठे जब वो बोर हो गई तो उठ कर बाहर निकल आई और हट की एक साइड पर मौजूद पेड़ों के बीच चलती हट से एक दूर निकल आई। यहाँ पहाड़ की हल्की सी ढलान थी और एक उपयुक्त जगह देख कर कर रश्मि बैठ गई। यहाँ से बहुत सुंदर दृश्य देखने को मिल रहा था। रश्मि इस नज़ारे को एंजाय करने लगी, हल्की हल्की ठंड के कारण रश्मि ने एक शाल भी ओढ़ रखी थी।

जबकि दूसरी ओर डॉली और जय चेयर लिफ्ट पर बैठे एंजाय कर रहे थे और उनसे पिछली चेयर पर पिंकी अकेली बैठी थी। पिंकी ने ब्लू कलर की जींस पहन रखी थी उसके साथ एक टाइट टी शर्ट थी और ऊपर से एक ब्राउन कलर का मोटा और गर्म ऊपरी पहन रखा था। बालों को गठबंधन करके एक टट्टू डाली हुई और लांग बूट पहने पिंकी बहुत सुंदर लग रही थी। गोरा चेहरा और पिंक पिंक गालों वाली पिंकी को अब तक कई लड़के देखकर देखते ही रह गए थे, जो भी देखता वो अपनी नज़रें हटाना भूल जाता। चेयर लिफ्ट से उतरते हुए जय ने पिंकी को सहारा दिया और फिर तीनों केबल कार पर बैठकर गुल मर्ग पहुंचे और वहां बर्फ से खेलने लगे। वहाँ कुछ और परिवार भी आए हुए थे और कुछ कॉलेज के समूह भी थे।

डॉली जय के साथ अकेले इस जगह पर एंजाय करना चाहती थी मगर पिंकी की वजह से वह कुछ उखड़ी-उखड़ी थी। लेकिन फिर अचानक ही एक लड़की ने पिंकी को देखकर चीख मारी और भागती हुई हाथ फैलाकर पिंकी की ओर आई पिंकी ने उसे देखा तो वह भी खुशी से निहाल हो गई और आने वाली लड़की से गले मिलने लगी। पिंकी ने गले मिलते ही लड़की से पूछा कि तुम यहाँ कैसे ??? तो उसने बताया तुम भूल गई, तुम्हें बताया तो था कि हम लोग भी कश्मीर आएंगे। मम्मा पापा और भाई के साथ कल रात ही यहां पहुंची हूं।

ये पिंकी की विश्वविद्यालय के समय की दोस्त मिनी थी। इन दोनों की बहुत अच्छी दोस्ती थी और इस दोस्ती का असली कारण मिनी का भाई रोहित था जिसे सब प्यार से आरके कह कर बुलाते थे। आरके पिंकी को पसंद करता था और दोनों की बहुत अच्छी दोस्ती थी। पिंकी भी आरके पसंद करती थी और उससे शादी करना चाहती थी मगर अब तक आरके ने पिंकी की माँ से कोई बात नहीं की थी इस बारे में। मिनी और पिंकी अब बातें करने में व्यस्त थे कि आरके भी वहां पहुंच गया और पिंकी को देखकर बहुत खुश हुआ, उसने भी पिंकी से हाथ मिलाया और बोला तुम तो आज बड़ी प्यारी लग रही हो ... पिंकी ने इठलाते हुए कहा यह कौन सी नई बात है, मैं तो हमेशा ही प्यारी लगती हूँ। यह सुनकर मिनी भी हंसने लगी। फिर पिंकी ने दोनों का परिचय जय और डॉली से करवाया।

मिनी ने जय से अनुमति ली कि वह पिंकी को अपने साथ लेजाए तो जय ने मना करना चाहा मगर डॉली ने उसे अनुमति दे दी। वह तो पहले ही पिंकी की मौजूदगी से परेशान थी क्योंकि हनीमून यात्रा पर भला बहन का क्या काम भाई के साथ। भाभी से अनुमति मिलते ही पिंकी मिनी के साथ चल पड़ी और जय को कह दिया कि वह भाभी के साथ ही वापस चले जाएं वो उन्हीं लोगों के साथ वापस पहुंच जाएगी डॉली ने भी जय का हाथ पकड़ा और दूसरी साइड पर चल दी जहां भीड़ थोड़ी कम थी वह एकांत में जय के साथ बैठकर इस रोमांटिक मौसम को एंजाय करना चाहती थी। वैसे भी मुम्बई वालों के लिए यह ठंडा मौसम भी बहुत अच्छा था।

पिंकी अब मिनी और आरके के साथ सैर करने लगी। पिंकी के दाईं ओर मिनी जबकि बाईं ओर आरके था जो रह रहकर पिंकी को छेड़ रहा था मगर पिंकी उसकी इन हरकतों का बुरा नहीं मान रही थी। क्योंकि वह भी आरके को पसंद करती थी। पिंकी ने दोपहर होने पर आरके और मिनी के मम्मी-डैडी के साथ ही खाना खाया और फिर वापस कश्मीर आ गए। शाम 5 बजे कश्मीर में ठंड का इज़ाफ़ा होगया था मगर पिंकी इस मौसम को एंजाय चाहता थी. आरके के मम्मी-डैडी जीपीओ चौक पर मौजूद होटल में अपने कमरे में चले गए जबकि पिंकी मिनी और आरके मॉल में मौसम को एंजाय और विंडो खरीदारी के लिए चले गए। अब पिंकी और आरके एक दूसरे का हाथ पकड़े मॉल में फिर रहे थे। आने जाने वाले भोंडे प्रकार के लड़के हसरत भरी निगाहों से आरके को देखते और उसकी किस्मत पर ईर्ष्या करते जो इतनी सुंदर लड़की के साथ फिर रहा था।

तीनों काफी देर तक मॉल में फिरते रहे और तीनों ने मिलकर आयस्क्रीम भी खाई फिर आरके मिनी और पिंकी को लेकर प्रस्ताव राईड की ओर ले गया। मिनी ने तो मोशन राईड पर बैठने से साफ इनकार कर दिया जबकि पिंकी के चेहरे पर भी थोड़े डर के आसार थे मगर आरके के कहने पर वह अंदर चली गई और चेयर पर बैठकर सीट बेल्ट बांध ली। पिंकी ने चेयर पर हत्थे को मजबूती से पकड़ रखा था। पिक्चर शुरू हुई और चेयर में भी हरकत शुरू हो गई। शुरुआत में तो पिंकी पकड़ करके बैठी रही मगर जैसे ही सामने चलने वाली मूवी में ट्रेन पटरी से नीचे गिरी तो पिंकी को लगा कि जैसे उसकी अपनी चेयर भी हवा में उड़ने लगी है और वह अब नीचे गिर जाएगी, वह तुरंत ही चेयर के हत्थे को छोड़ के साथ वाली चेयर पर बैठे आरके कंधों पर हाथ रख लिए और उसे कसकर पकड़ लिया,

पिंकी की यह हालत देखकर आरके हंसने लगा जबकि पिंकी की चीखें ही खत्म नहीं हो रही थीं, वह तो अब सामने लगी स्क्रीन पर देख ही नहीं रही थी जबकि उसकी चेयर अभी भी कभी उसको हवा में उड़ाती तो कभी पीछे से गिराती मगर उसने आरके को नहीं छोड़ा और मजबूती से उसे पकड़ कर बैठी रही। आरके ने भी एक हाथ पिंकी की कमर के चारों ओर लपेट लिया। और उसे कसकर पकड़ कर हौसला देने लगा। कुछ ही देर में मूवी खत्म हो गई और आरके ने सीट बेल्ट खोल दी। मगर पिंकी अब तक डरी हुई थी और वह आरके के साथ लिपटी हुई थी, आरके ने हाथ आगे बढ़ा कर उसकी सीट बेल्ट खोली और उसे नीचे उतरने में मदद की। पिंकी काँपते पैरों के साथ नीचे उतरी और आरके के सीने पर थप्पड़ मारते हुए बोली मैंने कहा था न मुझे नहीं बैठना इसमें मगर आप ने मेरी सुनी ही नहीं। आरके ने यह सुनकर एक ठहाका लगाया और बोला अरे मुझे क्या मालूम था कि मेरी पिंकी इतनी डरपोक है। यह कह कर उसने फिर से अपना हाथ उसके कंधे पर रख कर उसे अपने से करीब कर लिया।

अब रात के 9 बजने वाले थे। इस दौरान जय ने 2 बार पिंकी को कॉल करके खैरियत मालूम की और पिंकी ने जय को संतुष्ट किया कि आप चिंता न करें मैं बिल्कुल ठीक हूँ। अब मिनी आरके और पिंकी वापस अपने होटल में आ चुके थे जहां उसके मम्मी डैडी आराम करने के बाद सैर करने निकल गए थे। अपने कमरे में आते ही मिनी बेड पर ढह गई। एक दिन की यात्रा और आज सारे दिन की सैर ने उसको थका दिया था। जबकि पिंकी की थकान आरके के साथ ने खत्म कर दी थी। अब पिंकी और आरके दोनों एक दूसरे के साथ सोफे पर बैठे बातें कर रहे थे। जबकि मिनी बेड पर आंखें बंद किए लेटी थी। शायद उसकी आंख लग गई थी।

आरके ने पिंकी का हाथ पकड़ा और उसे अपने दोनों हाथ में लेकर उसे प्यार करने लगा जबकि पिंकी भी आरके के साथ बैठी और ज़्यादा पिंक हो गई थी। शर्म से उसके हल्के गुलाबी गाल अब पहले से अधिक गुलाबी हो चुके थे। आरके ने पिंकी का हाथ अपने हाथ में लिया और ऊपर उठा कर अपने होंठों के करीब लाकर उसके नरम नरम हाथ पर अपने होंठ रख दिए। और अपना एक हाथ पिंकी के कंधे पर रख कर उसे अपने पास कर लिया। पिंकी ने भी अपना सिर आरके के कंधे पर रख दिया। बहुत समय बाद उसे अपने प्रेमी के इतने करीब होने का मौका मिला था। जिससे पिंकी बहुत खुश थी।

पिंकी के हाथ पर प्यार करते हुए आरके ने हल्की आवाज में पिंकी के कान में फुसफुसाते करते हुए आई लव यू जान कहा, जिस पर पिंकी थोड़ा कसमसाई और जवाब में आई लव यू टू आरके को कहा। आरके ने पिंकी के चेहरे के नीचे अपना हाथ रख कर उसका चेहरा ऊपर उठाया और उसकी तरफ प्यार से देखने लगा। आरके को अपनी ओर यों देखते हुए पाकर पिंकी शर्म से लाल हो गई और अपनी नज़रें झुका लीं। जबकि आरके पिंकी की सुंदरता पर मरा जा रहा था। वह अपनी किस्मत पर रश्क कर रहा था। योंही पिंकी को देखते हुए वह थोड़ा आगे झुका और पिंकी के नरम गुलाबी होठों पर अपने होंठ रख दिए। अपने होठों पर आरके के होठों का स्पर्श पाते ही पिंकी को एक झटका लगा और वह वह पीछे हट गई और आरके को मना किया आरके प्लीज़ अभी यह सब ठीक नहीं।

इस पर आरके बोला कि जान तुम इतनी सुंदर लग रही हो कि मुझसे रहा ही नही गया, तुम्हारे यह नरम गुलाबी होंठ मुझे अपनी ओर खींच रहे हैं और तुम्हारे इस सुंदर चेहरे को देख कर चाँद भी शर्मा रहा है ... अपनी तारीफ सुन कर पिंकी के चेहरे पर खुशी और शर्म के मिश्रित भाव थे जिन्होने 21 वर्षीय पिंकी की सुंदरता में और वृद्धि कर दी थी। कहते हैं महिला की शर्म और हया ही उसका असली हुश्न होता है। और विनय हया जब पिंकी जैसी सुंदर लड़की के चेहरे पर हो तो उसके हुस्न को चार चांद लग जाते हैं। यही वजह थी कि आरके बार बार पिंकी को अपने पास कर रहा था। उनके बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं था मगर आज आरके का बस नहीं चल रहा था कि वह पिंकी को अपने सीने से लगाकर बहुत सारा प्यार करे।

आरके ने एक बार फिर पिंकी के होंठों पर होंठ रख दिए, इस बार पिंकी ने भी आरके के होंठों पर अपने होंठ गोलाई में घुमाते हुए हल्के से चूम लिया जिस पर आरके बहुत खुश हुआ लेकिन फिर पिंकी तुरंत ही सोफे से खड़ी हो गई और आरके से कहने लगी कि वह उसे भाई के पास में छोड़ आए वहां उसकी भाभी अकेली होंगी। आरके अपनी जगह से खड़ा होकर पिंकी के सामने आकर खड़ा हो गया और सिर से पाँव तक पिंकी को देखने लगा, उसने जैसे ही पिंकी की बात सुनी ही नहीं थी। पिंकी कमरे में आकर अपना गर्म कोट उतार चुकी थी अब वह टाइट टी शर्ट और जींस पहने आरके के सामने खड़ी थी। जिससे पिंकी के शरीर के उभार बहुत स्पष्ट हो रहे थे।

पिंकी के 34 आकार के मम्मे टी शर्ट में फंसे थे और उसकी 32 की गाण्ड जींस में बहुत स्पष्ट दिख रही थी। पिंकी न केवल सुंदर चेहरे की मालिक थी बल्कि उसका नसवानी हुश्न भी देखने लायक था। आरके फिर पिंकी के पास आया और अपना हाथ उसकी कमर के चारों ओर लपेट कर उसको अपने पास कर लिया। पिंकी ने भी बिना कोई प्रतिरोध किए उसके पास आ गई मगर उसकी आँखें झुकी हुई थी, पिंकी के 34 आकार के गोल मम्मे आरके के सीने को छू रहे थे, आरके ने पिंकी के चहरे ऊपर उठाया और फिर से अपने होंठ पिंकी के होंठों पर रख दिए। इस बार पिंकी ने आरके का साथ देना शुरू किया तो आरके का हौसला बढ़ा और उसने पिंकी और भी अधिक मज़बूती के साथ अपने साथ लगा लिया और पिंकी के सुंदर गुलाब की पत्ती जैसे होठों को चूसने लगा। पिंकी ने भी अपना एक हाथ आरके की गर्दन पर रखा और उसके होंठों को चूसने लगी। दोनों एक दूसरे के होंठों से रस पी रहे थे। पिंकी के लिए यह सब कुछ नया था इसलिए उसे अपने होठों पर एक आदमी के होठों का स्पर्श बहुत प्यारा लग रहा था।

कुछ देर होंठ चूसने के बाद अब आरके के होंठ पिंकी की सुराही दार गर्दन को चूम रहे थे और पिंकी अपना चेहरा ऊपर किए अपनी गर्दन पर आरके के होंठों के गर्म स्पर्श को महसूस कर के अपने होश गंवा रही थी। आरके का हाथ पिंकी की कमर से नीचे सरकता हुआ उसके चूतड़ों पर आकर रुका था। और अब हल्के हल्के उसके चूतड़ों को दबा रहा था। पिंकी ने अपने एक हाथ से आरके का हाथ अपने चूतड़ों हटाना चाहा मगर आरके ने पहले से अधिक मजबूती से उसके एक साइड के चूतड़ को पकड़ कर दबा दिया जिससे पिंकी के मुँह से एक सिसकी निकली। अब आरके पिंकी की गर्दन से होता हुआ उसके सीने तक आ गया था और अपने होंठों से पिंकी की सुंदर मलाई जैसी सफेद छाती पर प्यार कर रहा था। जबकि उसका दूसरा हाथ अब तक पिंकी के चूतड़ों पर था। पिंकी ने अपने एक हाथ से उसके बालों में प्यार करना शुरू कर दिया था जबकि आरके ने अपना दूसरा हाथ पिंकी के कूल्हे पर रख दिया और धीरे धीरे उसका हाथ ऊपर की ओर सरकता हुआ उसके पेट पर आ गया। पेट से होता हुआ उसका हाथ बूब्स के पास आया तो पिंकी ने तुरंत ही आरके को मना किया और उसका हाथ पकड़ कर ज़्यादा ऊपर जाने से रोक लिया।

आरके भी ज्यादा ज़िद नहीं की और अपना हाथ पिंकी के मम्मों से कुछ नीचे रोक लिया मगर अब उसने अपने होंठ फिर से पिंकी के होंठों पर रख दिए थे और पिंकी अब पहले से अधिक तीव्रता से आरके के होंठों को चूस रही थी। यहां तक कि अब आरके की ज़ुबान पिंकी के मुँह के अंदर पिंकी की ज़ुबान को छू रही थी और पिंकी बीच-बीच में अपना मुंह बंद करके आरके की ज़ुबान को चूसने लगी। दोनों इस बात से अनजान थे कि मिनी सोई नहीं थी, बल्कि थकान की वजह से आंखें बंद किए लेटी थी, होंठ चूसने की आवाज को सुनकर मिनी ने आँखें खोलकर देखा तो उसका भाई उसकी बेस्ट फ्रेंड के होंठ चूसने में व्यस्त था और उसकी प्रेमिका भी उसके भाई के होठों का फुल मज़ा ले रही थी, यह देखकर मिनी हौले से मुस्कुराई और फिर आँखें बंद करके लेट गई। आरके ने एक बार फिर से कोशिश की और अपना हाथ पिंकी की शर्ट के ऊपर से ही उसके गोल और बाहर निकले हुए मम्मे पर रख दिया। इस बार वह अपना हाथ पिंकी के मम्मों पर रखने में सफल तो हो गया और हौले से उसके बाएं मम्मे को दबा भी दिया मगर फिर पिंकी ने उसके हाथ पर अपना हाथ रख कर उसके हाथ को अपने मम्मों से हटा दिया मगर उसके होठों को चुस्ती रही । आरके ने उसके कसे हुए टाइट बूब्स का स्पर्श महसूस कर लिया था जिसकी वजह से उसकी पेंट के अंदर उसके लंड ने सिर उठाकर पिंकी की चूत को सलाम किया था। पिंकी को भी अपनी चूत पर अब आरके के लंड का उभार महसूस होने लगा।

आरके के चुंबन में तीव्रता आ रही थी कि अचानक पिंकी ने अपने होंठों को आरके के होंठों से अलग कर लिया और उससे दूर होकर खड़ी हो गई। वह गहरी गहरी साँस ले रही थी, उसके चेहरे पर शर्म और चुंबन से मिलने वाले आनंद के मिश्रित भाव थे। आरके ने प्यार से पिंकी को एक बार फिर अपने पास किया और बोला- क्या हुआ जान अच्छा नहीं लगा क्या ??? पिंकी कुछ न बोली मात्र शरमाती रही और फिर पिंकी के मोबाइल की घंटी बजने लगी। पिंकी ने जल्दी से अपने बैग से फोन निकाला तो जय की कॉल थी। वो खाने पर पिंकी का इंतजार कर रहा था। पिंकी ने आरके को कहा कि अब प्लीज़ वह उसे उसके भाई के पास छोड़ आए वहां उसके भाई और भाभी उसका इंतजार कर रहे हैं। यह सुनकर आरके ने मिनी को उठाया और उसे साथ लेकर पिंकी को छोड़ने निकल गया। पिंकी के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी और वह प्यार भरी नज़रों से आरके को देख रही थी, आरके भी खुश था कि आज उसने पिंकी के सुंदर होठों से रस पी लिया था जबकि मिनी पिछली सीट पर बैठी दोनों के चेहरों पर मौजूद भाव को देख कर अंदर ही अंदर खुश हो रही थी।

 
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