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वतन तेरे हम लाडले complete

5 मिनट तक उसी स्थिति में गाण्ड मारने के बाद मेजर ने सोज़ी की गाण्ड से लंड निकाला और सोज़ी को अपनी लुल्ली को जूली की चूत से निकालने को कहा। सोज़ी ने ऐसे ही किया तो मेजर ने अब जूली को अपनी गोद में बिठाया और अपना लंड जूलीकी चूत में फिट कर एक ही धक्के में पूरा लंड अंदर प्रवेश करा दिया सोज़ी की लुल्ली के बाद जब मेजर का लंड जूली की चूत में गया तो जूली की जोरदार सिसकी निकली और मेजर ने बिना रुके धक्के लगाने शुरू कर दिए। अब की बार मेजर के धक्के पहले की तुलना में बहुत तेज थे। मेजर फिर जूली की चूत का पानी निकालना चाहता था।

मात्र 5 मिनट के जानदार धक्कों ने अपना काम दिखा दिया और जूली ने मेजर की गोद में बैठे-बैठे अपनी चूत का पानी निकाल दिया। चूत से पानी दबाव के साथ निकला तो मेजर का पेट और पैर जोली के पानी से भर गये जिन्हें सोज़ी ने अपनी जीभ से चाट लिया। जबकि जूली मेजर पर वारी जा रही थी। उसे विश्वास नहीं आ रहा था कि एक ही रात में एक लंड ने 2 बार उसकी चूत का पानी निकाला। वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पा रही थी और बेतहाशा मेजर के शरीर पर प्यार कर रही थी।

अब मेजर ने सोज़ी को कहा कि वह अब फिर से जूली की चूत में अपना लंड डाले। सोज़ी जो पहले से ही तैयार थी तुरंत जूली के ऊपर चढ़ गई। मगर मेजर ने कहा ऐसे नहीं, तुम नीचे लेटो और जूली को अपने ऊपर लिटाओ फिर उसकी चूत में अपना लंड डाल कर उसकी चुदाई करो। जूली समझ गई कि अब उसकी चूत और गाण्ड के छेद में लंड जाने वाला है, वह तुरंत ही सोज़ी के ऊपर आई और उसकी लुल्ली अपनी चूत के छेद में डाल कर लेट गई ताकि पीछे से मेजर उसकी गाण्ड में अपना 8 इंच का लोड़ा डाल सके । मेजर ने पीछे से आकर जूली की गाण्ड देखी और उसमें पहले अपनी उंगली डालने की कोशिस तो जूली की हल्की सी सिसकी निकली, नीचे सोज़ी अपनी लुल्ली से जूली की चूत में लगातार धक्के लगा रही थी।

कुछ देर जूली की गाण्ड में उंगली करने के बाद मेजर ने अपने लंड की टोपी सोज़ी के मुंह में दे कर उसको गीला करवाया और उसके बाद फिर से पीछे आकर लंड की टोपी को जूली की टाइट गाण्ड के छेद पर रख और एक जोरदार धक्का लगाया। मेजर के लंड की टोपी जूली की गाण्ड में प्रवेश हो चुकी थी। अब की बार जूली ने जोर से चीख मारी अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह साहब जी मैं मर गई। साहब यह आपका अपना लंड है या किसी गधे का लगवा लिया है ?? हे खुदा इतना मोटा लंड मेरी गाण्ड कैसे बरदाश्त करेगी

... मेजर ने थोड़ा इंतजार करने के बाद एक और धक्का लगाया तो मेजर का आधे से ज़्यादा लंड जूली की गाण्ड में था। और अब कमरा जूली की चीखों और सिसकियों की मिलीजुली आवाज से गूंज रहा था।

मेजर ने अब अपने लंड को जूली की गाण्ड में लगातार अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था और जूली मजे की ऊंचाइयों पर पहुंच चुकी थी। मेजर के हर धक्के पर जूली के मांस से भरे हुए चूतड़ मेजर के शरीर से टकराते तो धुप्प धुप्प की आवाज कमरे गूंजने लगती . नीचे सोज़ी की लुल्ली भी अब जूली की चूत को मज़ा देने लगी थी, थोड़ी देर की चुदाई के बाद सोज़ी की लुल्ली ने पानी छोड़ दिया और उसके धक्के लगने बंद हो गए। मगर जूली अभी सोज़ी के ऊपर ही लेटी थी और मेजर के जानदार धक्कों का मज़ा अपनी गाण्ड में ले रही थी।

मेजर ने 5 मिनट तक जमकर जूली की गाण्ड मारी अंत में जूली की गाण्ड ने हार मान ली और वह मेजर से बोली साहब बस कर दो अब, मेरी गाण्ड अब और ज़्यादा आपके लोडे के धक्के सहन नहीं कर सकती। यह सुनकर मेजर ने जूली की गाण्ड से अपना लंड निकाला और बेड से उतर गया, बेड से नीचे उतर कर मेजर ने जूली को अपनी गोद में उठाया, जूली ने अपनी टाँगें मेजर की कमर के गिर्द लपेट ली थीं मेजर ने अपने लंड को जूली की चूत पर रखा और जूली एक झटके में ही मेजरके लंड पर अपना वजन डाल कर बैठ गई, मेजर का लंड जूली की चूत में गुम हुआ तो मेजर ने जूली को गोद में उठाए उसकी चुदाई शुरू की। मेजर ने अपने हाथ जूली के चूतड़ों पर रखे हुए थे और जूली ने मेजर की गर्दन में अपने हाथ डाले हुए थे जूली अपनी गाण्ड उठा उठा कर अपनी चुदाई करवा रही थी। साथ ही वह मेजर को होठों को दीवाना वार चूस रही थी, उसको मेजर राज की मर्दानगी पर प्यार आ रहा था जो जूली की चूत का 2 बार पानी निकलवा चुका था और अब भी वह जूली की चूत में धक्के मार रहा था।

मेजर राज 5 मिनट तक जूली को गोद में उठाए उसकी चूत में लंड से खुदाई करता रहा, आखिरकार मेजर का लंड फूलने लगा और जूली की चूत ने भी मेजर के लंड पर अपने प्यार की बारिश करने का इरादा कर लिया। और 4, 5 जानदार धक्कों से जूली चूत ने मेजर के लंड पर बरसात कर दी और जूली के शरीर को झटके लगने लगे, साथ ही मेजर के शरीर को भी झटके लगे और उसने अपना गरम वीर्य जूली की चूत में ही निकाल दिया . जब मेजर के लंड से सारा वीर्य निकल गया तो मेजर राज जूली को गोद से उतार कर बेड पर ढह गया। सोज़ी और जूली अब दोनों ही मेजर के शरीर पर हाथ फेर रही थी और उसे प्यार कर रही थीं। कुछ देर के बाद सोज़ी ने कमरे में मौजूद दूसरा दरवाजा खोला और 3 मिनट बाद कमरे में लौटी तो उसके हाथ में दूध का प्याला था। सोज़ी ने गर्म गर्म दूध मेजर को पिलाया जिसे पीकर मेजर तरोताज़ा हो गया।

अब मेजर ने अपने कपड़े पहने और दूसरे व्यक्ति का उठाया हुआ बटुआ निकालकर इसमें से 1000, 1000 के दो नोट निकाले और जूली और सोज़ी को दिए। दोनों ने नोट लेने से इनकार कर दिया और कहा कि साहब आज बहुत समय बाद एक असली मर्द ने जमकर चुदाई है आपसे हम पैसे नहीं लेंगे। आप जब चाहें आकर हमारी चुदाई कर सकते हो, मेजर ने एक बार फिर पैसे देने पर जोर दिया मगर दोनों में से किसी ने पैसे नहीं लिए लेकिन फिर आकर चुदाई करने के लिए आमंत्रित जरूर किया मेजर ने पैसे वापस पर्स में रखे और जूली के होंठों पर एक प्यार भरी किस कर के कमरे से निकल गया।

 
दूसरी ओर समीरा ने दूसरे व्यक्ति को अपने शरीर के जलवे दिखा दिखा कर पागल कर दिया था। समीरा का डांस पूरा हुआ तो उसने उस व्यक्ति को जो सेना का अधिकारी था हाथ पकड़ा और अपने साथ एक कमरे में ले गई। वह व्यक्ति भी लहराता हुआ नशे में धुत समीरा की गाण्ड को घूरता उसके पीछे पीछे कमरे में चला गया।कमरे में पहुंचकर समीरा ने उस व्यक्ति को बेड पर लिटाया और खुद उसके साथ लेट कर उसकी शर्ट उतार दी और उसके शरीर पर हाथ फेरने लगी। उस व्यक्ति की पेंट से उसका खड़ा हुआ लंड देखकर समीरा ने अपने होंठों पर जीभ फेरी और उसके निपल्स पर अपनी जीभ फेरने लगी। समीरा अपनी जीभ की नोक उस व्यक्ति की निपल्स पर फेर रही थी जिस पर उस सख्स को बहुत मज़ा आ रहा था।

कुछ देर उस व्यक्ति के निपल्स चूसने के बाद समीरा ने अपनी एक टांग व्यक्ति के पैर के ऊपर रख ली और उसकी ओर करवट लेकर उसके होंठ चूसने लगी। वह व्यक्ति भी नशे में धुत समीरा के होंठ चूस रहा था और अपने एक हाथ से समीरा के चूतड़ों को भी दबा रहा था। कुछ देर होंठ चूसने के बाद समीरा ने उस व्यक्ति को देखा और उसके कान के पास अपने होंठ ला कर धीरे से बोली साहब अपना नाम तो बताओ ... वह व्यक्ति आधी खुली आँखों के साथ समीरा को देखने लगा और फिर बोला लड़की तुम भाग्यशाली हो कि आज तुम कैप्टन फ़ैयाज़ की बाहों में हो। आज रात तुम्हें इतना मज़ा दूंगा कि तुम हमेशा याद करोगी यह कर उसने समीरा की ब्रा से दिखने वाले मम्मों पर अपनी नजरें जमा दीं और अपना एक हाथ समीरा के नरम नरम मम्मों पर रख कर उन्हें दबाने लगा।

समीरा ने भी अपनी एक टांग से केप्टन फ़ैयाज़ के लंड को दबाना शुरू कर दिया और थोड़ी देर के बाद फिर बोली साहब आज रात मुझे ऐसे चोदना कि जैसे पहले किसी ने ना चोदा हो। कैप्टन ने कहा तुझे मैं अपनी रंडी बनाकर चोदुन्गा, चिंता मत कर तेरी चूत लगातार पानी छोड़ेगी . अब समीरा ने कहा साहब क्या आप रोज आते हो यहाँ ??? कैप्टन ने समीरा के मम्मों पर नजरें जमाए कहा नहीं मैं तो लाहोर का रहने वाला हूँ, एक भारतीय को पकड़ने के लिए यहां आया था मगर कर्नल साजब ने बताया कि वह यहां से चला गया है इसलिए आज सुबह की फ्लाइट से वापस लाहोर जा रहा हूँ। यह सुनकर समीरा ने ने अपना हाथ कैप्टन फ़ैयाज़ के लंड पर रख लिया और उसको पेंट के ऊपर से ही सहलाने लगी। समीरा के हाथों को अपने लंड महसूस कर के कैप्टन का लंड और भी अधिक अकड़ने लगा था।

अब की बार समीरा ने कहा साहब लाहोर में रहते हो आप ?? मुझे लाहोर के एक डांस क्लब में नौकरी दिलवा दो ना। मैं सारी जिंदगी आपकी दासी बनकर रहूँगी। फिर रोज डांस क्लब में डांस करने के बाद आपको अपने शरीर की गर्मी से आराम दिया करूंगी। समीरा की यह बात सुनकर कैप्टन ने कहा, तेरे जैसी रंडियां जामनगर में ही ठीक हैं, लाहोर के डांस क्लब में उच्च श्रेणी की डानसरज़ होती हैं जो बाहर से डांस सीख कर आती हैं। वैसे भी मैं शादीशुदा हूँ। मेरी पत्नी मेरे साथ सुबह वह मेरे साथ ही लाहोर जाएगी और लाहोर में मेरा किसी लड़की के साथ कोई चक्कर नहीं। मेरी पत्नी को तुम्हारे बारे में पता चल गया तो वह तुम्हें मार देगी। बस आज की रात ही मेरे लोड़े से अपनी चूत की प्यास बुझा और फिर मुझे भूल जा।

यह सुनकर समीरा मुस्कुराई और बोली अच्छा आपके लिए जूस लेकर आती हूँ। जूस पीकर आप फ्रेश हो जाओ और फिर मेरे शरीर से खेलो। यह कह कर समीरा अपनी गाण्ड हिलाती हुई कमरे में पड़े फ्रिज की तरफ गई और वहां मौजूद फ्रिज से एक रस का डिब्बा निकाला और गिलास में डाल इसमें एक गोली भी डाली और अच्छी तरह हिलाकर कैप्टन के पास आ गई कैप्टन जो अब बेड पर बैठ चुका था उसने समीरा के चूतड़ों पर हाथ रखा और उसे अपनी ओर खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया। समीरा भी बिना हिचक उसकी गोद में बैठ गई, केप्टन ने अपने होंठ समीरा के मम्मों पर रखे और उन्हें चूसने लगा जब कि जूस का ग्लास समीरा के हाथ में ही था।उसने भी कैप्टन को पूरा मौका दिया अपने मम्मे चूसने का। थोड़ी देर के बाद जब कैप्टन ने समीरा के मम्मों को चूस चूस कर लाल कर दिया और उसका ब्रा उतारने लगा तो समीरा ने कैप्टन को रोक दिया और बोली साहब पहले यह जूस पी लो फिर मेरे सारे कपड़े उतार देना।

यह सुनकर कैप्टन ने समीरा के हाथ से जूस का गिलास पकड़ा और एक ही घूंट में सारा गिलास खाली कर दिया। अब कैप्टन ने फिर से समीरा मम्मों को घूरना शुरू किया जो अब तक उसकी गोद में बैठी थी। फिर कैप्टन का हाथ समीरा की नरम और मुलायम कमर पर रेंगता हुआ उसकी ब्रा की डोरयों तक आया जिन्हें समीरा ने गाँठ लगाकर बांधा हुआ था। कैप्टन ने उसके ब्रा की डोरियां खोलकर ब्रा उतार दिया और दूर फेंक दिया।समीरा के 36 आकार के भरे हुए सुंदर मम्मे कैप्टन ने देखे तो वो तो पागल ही हो गया। मक्खन मलाई जैसे गोरे चिट्टे मम्मे और फिर उनकी शेप देखकर कैप्टन की राल टपकने लगी थी। कैप्टन ने अपनी ज़ुबान निकाली और समीरा के छोटे नपल्स पर फेरने लगा। समीरा की एक सिसकी निकली और उसने अपना हाथ कैप्टन की गर्दन के आसपास लपेट लिया, समीरा ने कुछ देर पहले मेजर राज के लंड को अपनी गाण्ड में महसूस किया था तब से उसकी चूत में खुजली हो रही थी और अब अपने निपल्स पर केप्टन फ़ैयाज़ की ज़ुबान लगने से समीरा मदहोश होने लगी।

कैप्टन ने अपने एक हाथ से समीरा का दाहिना मम्मा पकड़ लिया था और उसे दबा रहा था जबकि दूसरा मम्मा कैप्टन मुँह में था। वह कभी अपने मुंह से समीरा का मम्मा चूसता तो कभी अपने दांतों से समीरा के निपल्स काटता . अभी कैप्टन ने जी भर कर समीरा के मम्मों पर प्यार नहीं किया था मगर उसको अपना सिर भारी भारी लगने लगा। उसे चक्कर आने लगे थे। वह कुछ देर के लिए रुका और उसके बाद फिर से समीरा के मम्मों से दूध पीने लगा, मगर फिर उसको ऐसे लगा जैसे वह अपने होश खो रहा है। और देखते ही देखते कैप्टन बेड पर बेहोश पड़ा था जबकि समीरा अपने कपड़े उतार कर दूसरे कपड़े पहन रही थी। समीरा जिन कपड़ों में यहाँ आई थी वही कपड़े पहनकर उसने कैप्टन के कपड़ों की तलाशी ली और उसमें से जो कुछ निकला उसको अपनी शर्ट के गले में हाथ डाल कर ब्रा के अंदर रख लिया। अब समीरा ने एक बार मेजर की पेंट को देखा जहां कुछ देर पहले लंड खड़ा हुआ नज़र आ रहा था मगर अब वहां किसी लंड के आसार नहीं थे।

अब समीरा ने आखिरी बार कैप्टन की पेंट की जेब में हाथ डाला तो वहां उसे एक कार की चाबी मिल गई।समीरा ने चाबी को अपनी पेंट की जेब में डाला और कमरे से पर्स उठाकर उसमे कुछ जरूरी बातें कर बाहर निकल गई। बाहर निकल कर अब वह मेजर राज को ढूंढने लगी। थोड़ी ही देर में उसे मेजर राज नजर आ गया जो जूली और सोज़ी के कमरे से निकल रहा था। समीरा ने उसे तिरछी नजरों से देखा और बोली जनाब आप इस कमरे में क्या कर रहे थे। मेजर ने समीरा को सिर से पैर तक देखा और बोला अभी जो तुम्हारे हॉट हॉट डांस ने तुम्हारे नरम नरम शरीर ने आग लगाई थी उसे बुझा रहा था। अपने शरीर की प्रशंसा सुनकर समीरा थोड़ा शरमाई और उसके चेहरे पर लालिमा आ गई। फिर उसने राज को कहा यहाँ हम कर्नल इरफ़ान से बचते फिर रहे हैं और आपको शरीर की गर्मी निकालने की पड़ी है। यह सुनकर मेजर ने कहा शुक्र करो उधर ही निकाल ली है शरीर की गर्मी, नहीं तो तुम्हारा डांस देख कर जो मेरा हाल हुआ है रास्ते में तुम्हें ही पकड़ लेना था मैने . यह सुनकर समीरा ने बनावटी गुस्सा व्यक्त करते हुए मेजर को घूर कर देखा और बोली शर्म करो कुछ। यह कह कर वह मेजर राज का हाथ पकड़े उसे अपने साथ ले गई और एक कमरे के सामने जाकर रुक गई उसने कमरे का दरवाजा खोला और मेजर राज को अंदर आने को कहा। मेजर अंदर आ गया तो समीरा ने कमरा बाहर से बंद कर लिया और मेजर को बताया कि वह व्यक्ति कैप्टन फ़ैयाज़ है और वह लाहोर से तुम्हें पकड़ने ही आया था मगर कर्नल इरफ़ान ने सेना को आदेश दिया है कि मेजर राज का जामनगर से अब पलायन हो चुका है इसलिए जामनगर में उसकी खोज समाप्त कर दी जाए।

समीरा ने बताया कि अब वह कैप्टन फ़ैयाज़ सुबह की फ्लाइट से पाक एयर लाइन्स के माध्यम से अपनी पत्नी के साथ लाहोर जाने का इरादा रखता है। साथ ही उसने अपनी जींस की जेब से गाड़ी की चाबी निकाली और मेजर राज की आँखों के सामने लहराने लगी। मेजर ने पूछा यह क्या? तो वह बोली कैप्टन की कार की चाबी।राज ने कहा, तुम पागल हो कैप्टन की कार पर हम जल्दी पकड़े जाएंगे उसने बहुत जल्द अपनी कार गुम होने की सूचना दे देनी है। इस पर समीरा ने इठलाते हुए कहा जनाब केवल आप ही समझदार नहीं, थोड़ी बुद्धि हम में भी है। मैंने कैप्टन को नींद की गोली दे दी है अब वह कल रात से पहले नहीं उठेगा जबकि हम सुबह होते ही यहां से निकल जाएंगे। उसके बाद समीरा ने मेजर के सामने ही अपनी ब्रा में हाथ डाला तो मेजर ऊपर उठकर समीरा की ब्रा में झांकने की कोशिश करने लगा, समीरा का हाथ ब्रा में गया और वापस आया तो इसमें कुछ कागजात थे। समीरा ने मेजर को अपने ब्रा में यूं देखते हुए पाया तो बोली अभी जूली के कमरे से निकले हो, उसने तुम्हारी प्यास नहीं बुझाई क्या जो अब भी नदीदो की तरह मुझे देख रहे हो ???

यह सुनकर राज ने कहा जो बात आप में है वह जूली में कहाँ। यह कह कर मेजर ने समीरा को आँख मारी और उसके हाथ से कागज लेकर देखने लगा। ये कैप्टन फ़ैयाज़ के लाहौर के टिकट थे। एक कैप्टन फ़ैयाज़ जबकि दूसरा उसकी पत्नी का था। मेजर ने दोनों टिकट संभाल कर रख ली, और कागजों में कैप्टन फ़ैयाज़ का आईडी कार्ड और सेना के कुछ कार्ड थे। उनमें एक कार्ड कर्नल इरफ़ान का भी था। मेजर राज ने कार्ड पर मेजर का नाम पढ़ा और नंबर देखा। लैंडलाइन नंबर के साथ सिटी कोड भी मौजूद था कोड लाहोर का ही था उसका मतलब था कि कर्नल इरफ़ान मूल रूप से लाहोर का ही रहने वाला है मगर मेजर राज को पकड़ने के लिए जामनगर आया है।

कर्नल इरफ़ान का कार्ड देखकर मेजर राज ने तुरंत फैसला किया कि अब छुप छुप कर भागने की बजाय कर्नल इरफ़ान को टक्कर देने का समय आ गया है, अब कर्नल से बचकर भागना नहीं बल्कि उस पर हमला करना है। यह सोच कर मेजर ने समीरा को कहा कि अब कुछ देर के लिए सो जाओ नींद पूरी कर के सुबह यहाँ से निकलेंगे और आगे की योजना बनाएंगे।

समीरा ने ठीक कहा और सीधे सामने पड़े बेड पर जाकर लेट गई और तुरंत राज की ओर मुंह करके बोली आपको वहीं सोफे पर सोना है बेड पर मैं लेट जाउन्गी . राज समीरा की बात सुनकर मुस्कुराया और बोला जैसे जैसा आपका आदेश। यह कह कर मेजर पास पड़े सोफे पर लेट गया और कुछ ही देर में उसके ख़र्राटों की आवाजें आने लगीं थीं।

 
जब से आरके ने मारी होटल में पिंकी के होंठों का रस चूसा था वह उसका पहले से अधिक दीवाना हो गया था, होंठों के साथ आरके ने काफी देर अपने हाथ से पिंकी के नरम नरम चूतड़ भी दबाए थे और एक बार उसके बूब्स के उभारों पर भी अपना हाथ रखा था जिसको पिंकी ने तुरंत ही हटा दिया था। आरके भी अब अपनी बहन मिनी और माता पिता के साथ मुम्बई वापस आ चुका था। मगर उसके मन से अब तक पिंकी के साथ बिताए हुए कुछ खूबसूरत पल मिट नहीं पाए थे। वह हर समय पिंकी के बारे में सोचता और उसकी सुंदरता और होंठों के स्पर्श को याद करता रहता। मुम्बई से वापस आकर उसकी एक दो बार पिंकी से मुलाकात तो हुई मगर उसे कोई ऐसा मौका नहीं मिल पाया था कि वह फिर से पिंकी के मुंह से अपने होंठ मिला सके। उसकी पिंकी से मुलाकात के दौरान उसकी बहन मिनी भी साथ थी और उसने अपने भाई की बेकरारी को महसूस कर लिया था। मिनी ने इस बारे में पिंकी से बात करने की ठान ली और एक दिन मौका जानकर और पिंकी को अच्छे मूड में देख मिनी ने पिंकी से पूछ ही लिया कि क्या वह आरके से प्यार करती है ???

मिनी के इस अचानक सवाल पर पिंकी हैरान भी हुई और साथ में उसके गुलाबी गुलाबी गालों पर लाली भी उतर आई और उसने शरमाते मुस्कुराते अपना मुंह नीचे कर लिया। मिनी को पिंकी की इस अदा पर बेतहाशा प्यार आया और उसने मिनी का चेहरा अपने हाथ से ऊपर उठाते हुए कहा, वाह महारानी साहिबा का मुँह तो खुशी से लाल हो गया है। अब की बार पिंकी मिनी की किसी बात जबाब देने की बजाय उसके गले से लग गई। अब ये मिनी के लिए स्पष्ट जवाब था कि पिंकी उसके भाई आरके से प्यार करती है। अब मिनी ने पिंकी को बताया कि वह इस बारे में अपने मम्मी-डैडी से बात करेगी और वे लोग फिर तुम्हारे घर तुम्हारा हाथ मांगने आएंगे और मैं तुम्हें अपनी भाभी बनाकर अपने घर ले जाउन्गी यह सुनकर पिंकी के दिल में लड्डू फूटने लगे और फिर वह मिनी से गले लग गई मगर बोली कुछ नहीं।

फिर वास्तव में कुछ दिन के बाद आरके के माता पिता मिनी के साथ पिंकी के घर आए और पिंकी की मां से पिंकी का हाथ मांग लिया। पिंकी को जब इस बारे में पता लगा तो वह शर्म के मारे किचन में ही छुप गई। रश्मि ने अपनी नंद को यूँ शरमाते देखा तो उसका माथा चूम लिया और बोली चलो जाकर अपने होने वाले सास ससुर को चाय पेश करो। पिंकी ने सिर पर दुपट्टा रखा और शरमाती हुई कांपते हाथों से सास ससुर के सामने जाकर चाय रखी। मिनी ने पिंकी को आते देखा तो वह उठ कर खड़ी हो गई और पिंकी ने चाय टेबल पर रख दी तो मिनी ने आगे बढ़कर उसे गले लगाया और उसकी माथे पर एक चुंबन दिया। फिर पिंकी ने आगे बढ़कर अपने होने वाले ससुर जी के पैर छुए तो सास उसे प्यार करने लगी और सास साहिबा ने पिंकी को अपने साथ बिठा लिया। पिंकी ने कहा कि मैं आपके लिए चाय बना दूं तो उसकी होने वाली सास ने कहा चाय मिनी बना लेगी तुम यहाँ हमारे पास बैठो।

खुद पिंकी की माँ भी बहुत खुश थीं और रश्मि भी खुश थी। कुछ ही देर में डॉली भी कमरे से तैयार होकर निकली और बड़ी खुशदीली के साथ आने वाले मेहमानों से मिली और पिंकी के सिर पर प्यार भरा हाथ फेरा। काफी देर सब लोग बैठे बातें करते रहे। फिर जय भी घर आ गया तो घर में मेहमानों को देखकर हैरान हुआ। अब तक उसे किसी ने नहीं बताया था कि उसकी छोटी बहन का रिश्ता आया है। जय की नजर मिनी पर पड़ी तो उसने तुरंत ही पहचान लिया, वह गोआ में मिनी से मिला था। जय भी सब मेहमानों के साथ बैठ गया। फिर आरके के पिताजी ने जय से बात शुरू की और अपने आने का उद्देश्य जय के सामने रख दिया। जय ने एक नज़र अपनी मां की ओर देखा जिनके चेहरे पर खुशी के स्पष्ट संकेत थे और फिर पिंकी को देखा जो छुई मुई बनी अपनी सास के साथ बैठी थी। डॉली भी जय के साथ आकर बैठ चुकी थी उसने भी जय को सहमति व्यक्त करने को कहा और रश्मि की भी यही इच्छा थी।

सबकी इच्छा देखकर जय ने आरके के पिताजी को हां कर दी मगर साथ में यह भी कहा कि हम अभी कोई रस्म नहीं करेंगे। पहले राज भाई वापस आ जाएं तो उनके वापस आने के बाद सगाई की रस्म भी हो जाएगी और फिर उचित मौका देखकर शादी भी कर देंगे। तब तक आपकी पिंकी हमारे पास आपकी अमानत है। जय के इस फैसले से सभी घर वाले खुश थे और आरके के पिताजी ने भी इस पर सहमति जता दी कि बड़े भाई की मौजूदगी ज़रूरी होगी किसी भी रस्म के लिए। उसके बाद सब लोग बैठे घंटों बातें करते रहे। रात का समय हुआ तो मेहमानों ने जाने की विनती की, और थोड़ी ही देर में तीनों गेस्ट हाउस से चले गए। मेहमानों के जाने के बाद जय ने पिंकी के सिर पर हाथ रख कर उसको प्यार दिया और ढेरों आशीर्वाद दिए और पिंकी आरके का चेहरा अपनी आँखों में सजाए अपने कमरे में चली गई।

दो घंटे बाद पिंकी के मोबाइल पर कॉल आई, स्क्रीन पर आरके का नाम था, पिंकी ने कॉल अटेंड की तो उधर से आरके की प्यार भरी आवाज सुनाई दी। आरके की आवाज सुनते ही पिंकी के चेहरे पर शर्म के बादल छा गए। पहले तो पिंकी से कुछ बोला ही नहीं गया। मगर फिर धीरे धीरे उसकी मदहोशी समाप्त हुई तो पिंकी को तब होश आया जब एक घंटे के बाद कॉल खुद ही बंद हो गई। उसके बाद आरके की फिर से कॉल आई और उसने अगले दिन पिंकी को कॉलेज टाइम के दौरान मिलने का कहा। पिंकी थोड़ी देर इनकार करने के बाद आरके की बात मानने पर राजी हो गई और दोनों ने कार्यक्रम बनाया कि कॉलेज टाइम के दौरान दोनों कहीं दूर लांग ड्राइव पर जाएँगें . उसके बाद कॉल बंद हो गई और पिंकी आरके के सपने देखने लगी।

 
कर्नल इरफ़ान अमजद को मुल्तान की ओर रवाना करने के बाद खुद इस कच्चे रास्ते पर आगे मौजूद कस्बों की ओर जा रहा था। अपने साथ मौजूद एक कार को मुल्तान की ओर भेज दिया था ताकि वह अमजद "सरदार सन्जीत सिंह" की जासूसी कर सके। जब कि कर्नल इरफ़ान का अमजद पर शक खत्म हो गया था और उसे विश्वास था कि यह मेजर राज के साथ नहीं बल्कि राज ने उसको जबरन अपने साथ रखा, लेकिन फिर भी कर्नल के मन में कहीं न कहीं बेयकीनी की स्थिति भी मौजूद थी। इसीलिए उसने अपने कुछ आदमियों को आदेश दिया कि वह मुल्तान तक अमजद का पीछा करें और देखें कि वे रास्ते में या मुल्तान पहुंचकर किसी ने संपर्क तो नहीं कर रहा है।और अगर उसने किसी से संपर्क किया तो तुरंत पता लगाया जाए कि उसने किन लोगों से संपर्क किया और उन्हें क्या कहा।

कुछ ही देर के बाद कर्नल इरफ़ान सिंह अपने काफिले के साथ एक छोटे से शहर में मौजूद था। रात का समय था, शहर के लोग दूर से ही वाहनों की रोशनी देखकर उठ गए थे। ऐसे छोटे कस्बों में आमतौर आदमी घर के बाहर ही सोते हैं। इसलिए जैसे ही उनकी आंखों में रोशनी पड़ी उनकी आंख खुल गई और अपराधियों की वजह से उन्होंने तुरंत ही अपने घरों से अपनी बंदूकें निकाल ली थी कि ऐसा न हो कि आने वाला हमारे मवेशी या दूसरा कीमती सामान हथियाने की कोशिश करे . जब वाहन शहर में पहुंच गये तो उन्हें एहसास हुआ कि यह सेना और पुलिस के वाहन हैं। अगर खाली पुलिस वॅन होतीं तो वह पुलिस को तुरंत भगा देते मगर सेना से पंगा लेने की हिम्मत उनमें नहीं थी इसलिए शहर के सरपंच ने सब लोगों को अपनी बंदूकें नीची रखने का कह दिया।

कर्नल इरफ़ान ने भी दूर से ही अनुमान लगा चुका था कि सामने खड़े लोगों के हाथों में बंदूकें हैं। मगर वह जानता था कि जब उन्हें पता लगेगा कि यह सेना की गाड़ियाँ हैं तो वह कोई गलती नहीं करेंगे। इसलिए कर्नल निडरता से आगे बढ़ता रहा। आबादी से कुछ दूर कर्नल ने वाहन रुकवा दिए और कार से उतर कर उन की ओर बढ़ने लगा। कर्नल के आसपास सशस्त्र सैनिक मौजूद थे जो किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार थे जबकि पुलिस वाले भी पीछे पीछे अपनी बंदूकों का रुख शहर वालों की ओर किए चले आ रहे थे।

कर्नल इरफ़ान ने उनके पास पहुंचकर उन्हें नमस्कार किया तो उनका सरपंच आगे आकर खड़ा हो गया और अपना परिचय करवाया। कर्नल इरफ़ान ने उन्हें बताया कि आप लोग चिंता ना करें , हमारा यहां आने का उद्देश्य आप लोगों को नुकसान पहुंचाना कदापि नहीं बल्कि हम यहाँ एक आतंकवादी को ढूंढने आए हुए हैं जिसने भारत से हमारी सीमा में प्रवेश किया है और एक बार पकड़े जाने के बावजूद हमारी कैद से भाग निकला।अब उसके साथ एक आतंकवादी और भी है और साथ में एक लड़की भी है। हमारी जानकारी के अनुसार वह जामनगर बाईपास से मुल्तान जाने की बजाय कच्चे रास्ते पर इसी शहर से आए हैं। अगर आपको इनके बारे में कोई जानकारी हो तो उन्हें पकड़ने में मदद करें। आपकी मदद से हम अपने दुश्मनों को पकड़ कर सकते हैं।

कर्नल की बात समाप्त हुई तो शहर के सरपंच ने कर्नल इरफ़ान को कहा, हम लोग छोटे-मोटे अपराध जरूर करते हैं, लेकिन किसी दुश्मन को शरण देने की सोच भी नहीं सकते। दुश्मन देश का कोई भी व्यक्ति हमारे हत्थे चढ़ जाए तो हम उसको जीवित नही छोड़ेंगे उसको शरण देने या उसकी मदद करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। कर्नल इरफ़ान ने फिर से कहा कि यह आतंकवादी पैसे का उपयोग कर लोगों को खरीदते हैं। हो सकता है आप में से किसी ने पैसे के लिए उनकी मदद की हो। अगर आपको किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में पता है तो हमें बताइए और अगर आप ने किसी अनजान व्यक्ति और उसके साथ लड़की को देखा हो तो वह भी बताएं। सरपंच ने इस बार कर्नल को ललकारा और गुस्से से बोला कि एक बार कह दिया हम किसी आतंकवादी की मदद करने की सोच भी नहीं सकते।

हमें पैसे से नहीं खरीदा जा सकता। हम चोर हैं डाकू हैं अपराधी हैं मगर देशद्रोही हरगिज़ नहीं। हम अपने दुश्मन देश से आए किसी भी आतंकवादी की मदद करना पाप समझते हैं। आप बार बार हम पर यह आरोप लगाकर हमारा अपमान कर रहे हो। अब की बार कर्नल इरफ़ान ने सपाट लहजे में कहा सरपंच जी आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। मगर सरकार हमें इस देश की रक्षा करने की पगार देती है। और जब तक हम अपनी तसल्ली नहीं कर लेते हम यहां से नहीं जाएंगे। हमें इस शहर में मौजूद हर घर की तलाशी लेनी होगी क्या पता किसी ने उसे घर में छुपा कर रखा हो ?? कर्नल की बात सुनकर कस्बे के सरपंच ने बाकी लोगों को देखा और उनसे मुखातिब होकर बोला कर्नल साहब को तलाशी लेने से कभी नहीं रोकेंगे क्योकि यह उनका कर्तव्य है, लेकिन उनकी तलाशी लेने से पहले ही मुझे बतादो अगर किसी ने शरण दी हो किसी आतंकवादी को तो उन्हें अभी कर्नल साहब के हवाले कर दिया जाए। मेरा वादा है कि उसको कुछ नहीं कहा जाएगा। लेकिन अगर तलाशी के दौरान किसी भी घर से आतंकवादी बरामद हुए तो उसकी खैर नहीं फिर।

सभी लोगों ने एक ज़ुबान होकर कहा कि कर्नल को तलाशी लेने दी जाए, हमने किसी को भी शरण नहीं दी। यह सुनकर कर्नल इरफ़ान ने अपने साथियों को इशारा किया और वह 2, 2 की टोलियों में वहाँ घरों में घुसकर तलाशी लेने चले गए जबकि कर्नल इरफ़ान अपने 2 साथियों के साथ बाहर ही मौजूद रहा। करीब आधा घंटा कर्नल के आदमी शहर में मौजूद घरों की तलाशी लेने के बाद विफल लौट आए और बताया कि सर यहाँ कोई मौजूद नहीं है। सरपंच ने गर्व भरी नज़रों से कर्नल देखा जैसे कहना चाह रहा हो कि मैंने पहले ही कहा था हम देशद्रोही हरगिज़ नहीं।

कर्नल ने सरपंच का धन्यवाद किया और अगले शहर से जाने के इरादे से , अभी वह वापसी के लिए मुड़ा ही था कि एक औरत भागती हुई आई और उसने बताया कि उसके साथ वाले घर में एक लड़का रहता है जिसकी उम्र 18 साल है । उसका पिता शहर से बाहर गया हुआ है और कुछ ही देर पहले मैंने उसे अपनी कार में कहीं जाते हुए देखा है। उसके साथ कार में एक लड़की भी मौजूद थी जिसका रूप में सही से देख नहीं पाई और वह आधे घंटे पहले यहां से निकले हैं।

कर्नल ने उसकी बात सुन कर फिर से अपने उस अधिकारी को बुलाया जो जामनगर और शहर के बारे में जानकारी रखता था। कर्नल ने उस औरत से कहा कि इस आदमी को रास्ता समझाए कि वे किस ओर गए हैं। तो इसने अपनी सिंधी ज़ुबान में उसे एक रास्ता समझाया जो छोटे गांवों और कस्बों से होता हुआ मुल्तान के पास जाकर निकलता था। इस अधिकारी ने कर्नल को बताया कि ये सभीरास्ते कच्चे है और यहाँ से मेन रोड तक 3 घंटे में यह दूरी तय होती है कि कच्चे रास्ते से 4 घंटे लग जाएंगे। कर्नल इरफ़ान ने तत्काल अपने साथियों को वाहन में बैठने के लिए कहा और सबसे आगे अपनी कार रखते हुए इस अधिकारी को अपने साथ बिठा लिया ताकि वह रास्ता बता सके। कर्नल के काफिले में ट्रक थे जो कच्चे रास्ते पर खासी गति से अपना सफर तय कर सकते थे उसके विपरीत कार के लिए यह यात्रा कठिन थी और कार अधिक गति के साथ नहीं चल सकती। इसलिए कर्नल को विश्वास था कि इन लोगों के मुल्तान पहुंचने से पहले कर्नल इरफ़ान उन तक पहुंच जाएगा।

अमजद धीमी गति के साथ मुल्तान का सफर तय कर रहा था। उसे पता था कि रास्ते में अभी और भी पुलिस नाकों पर उसे रोका जाएगा मगर अब वह संतुष्ट था कि जब कर्नल इरफ़ान उसे नहीं पहचान पाया तो यह आम पुलिसकर्मी सरसरी तौर पर वाहन की चेकिंग के बाद उसको छोड़ देंगे। और हुआ भी यही, अमजद को रास्ते में जहां कहीं भी रोका गया उसने अपना राशन कार्ड निकाल कर दिखाया जिस पर सरदार सन्जीत सिंह का नाम दर्ज था, पुलिस कर्मियों ने अमजद की कार की तलाशी ली और उसको आगे जाने दिया। यह काम हर पुलिस नाके पर हुआ और अमजद बिना परेशान हुए पूरे विश्वास के साथ हर नाके पर अपनी जाँच करवाता रहा।

 
अपनी ओर से वह पूरी संतुष्ट था मगर उसको चिंता थी तो राज और समीरा की। उसने अपने दम पर तो कर्नल इरफ़ान को चकमा दे दिया था और और अब कर्नल इरफ़ान कच्चे रास्तों से होता हुआ मेजर राज को पकड़ने की कोशिश कर रहा था। मगर अमजद जानता था कि हर नाके पर बसों को भी जाँच की जाएगी, और जिस बस में उसने मेजर राज और समीरा को बिठाया था उसकी भी जाँच होगी। और अगर कहीं ये लोग पकड़े गए तो सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा। पहले रॉ से उसको मेजर राज की रिहाई का लक्ष्य मिला था, इससे पहले कि अमजद अपनी कोई योजना बनाता मेजर राज खुद ही छूट आया था, और अब न केवल उसके पकड़े जाने का फिर से भय था बल्कि साथ में समीरा भी पकड़ी जाती तो समस्या और भी बढ़ सकती थी केवल यही एक बात थी जो अमजद को परेशान कर रही थी।

अमजद को मुल्तान की ओर जाते हुए कोई एक घंटे से ऊपर का समय गुजर चुका था इस दौरान अमजद ने नोट किया था कि एक कार लगातार अमजद का पीछा कर रही है। जबकि पीछे आने वाली गाड़ी काफी दूरी पर थी मगर फिर भी अमजद का शक था कि यह कार उसी के पीछे आ रही है कि हो न हो कर्नल इरफ़ान ने ही भेजी है। अमजद ने अपनी तसल्ली के लिए कुछ स्थानों पर अपनी गति बहुत धीमी कर दी और इंतजार करने लगा कि पीछे आने वाली गाड़ी आगे निकलती है या नहीं। मगर अमजद का शक सही निकला, जैसे ही अमजद अपनी गति धीमी करता पीछे आने वाली गाड़ी भी धीरे हो जाती और जब अमजद अपनी कार की गति बढ़ाता तो पीछे आने वाली गाड़ी भी तेज हो लेती।

अब मुल्तान 1 घंटे की दूरी पर था। रात के 3 या 4 बजे का समय हो रहा था और अमजद को शौचालय जाने की भी जरूरत महसूस हो रही थी। कुछ ही दूरी पर एक मोड़ था और मोड़ से आगे एक गैस पंप था। अमजद ने अचानक ही अपनी कार की गति बढ़ा दी और मोड़ मुड़ने के बाद कार गैस पंप की ओर ले गया। यूं तो उसे विश्वास था कि पीछे आने वाली गाड़ी उसी का पीछा कर रही है, लेकिन वह फिर भी पूरी तसल्ली करना चाहता था। मोड़ मुड़ते ही अमजद ने अपनी कार सड़के से उतार कर खड़ी कर दी मगर पंप से दूर रखा क्योंकि वह चाहता था पीछे आने वाली गाड़ी जैसे ही मोड़ मुड़े उसको अमजद की कार नज़र आ जाए।

कार सड़क से उतार कर अमजद गाड़ी से निकला और पंप पर मौजूद टॉयलेट में चला गया। बिना समय बर्बाद किए जब अमजद बाहर निकला तो उसने देखा की पीछे आने वाली कार अब अमजद की कार से कुछ आगे खड़ी थी और एक सैनिक पंप पर खड़ा इधर उधर देख रहा था जैसे किसी को खोजने की कोशिश कर रहा हो। अमजद शौचालय से निकला और दुकान पर चला गया वहाँ से एक रस का डब्बा और बिस्कुट का पैकेट उठाकर बाहर आने लगा। दुकानदार ने पैसे मांगे तो अमजद ने बाहर खड़े सेना ज़बान की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह बाहर मेरे अधिकारी खड़े हैं वे ही देंगे पैसे। सैनिक को देखकर दुकानदार चुप हो गया। और अपने काम में लग गया। अमजद चुपचाप बाहर आया मगर अबकी बार वह सीधा सैनिक के पास गया। सैनिक ने अमजद को अपनी ओर आते हुए देखा तो वह अनजान बन कर इधर उधर देखने लगा जैसे कि वह अमजद को जानता ही नहीं और न ही वो अमजद की तलाश में था। अमजद इस सैनिक के पास गया उसको सतश्रीअकाल कहा और फिर बोला कि साहब जी मेरे पास खाने के पैसे नहीं हैं मुझे बहुत भूख लग रही है मैंने यह रस डिब्बा और बिस्कुट इस दुकान से लिए हैं आप उन्हें मेरी जगह पैसे दे दे? ?

सैनिक ने गुस्से से अमजद को देखा और बोला क्यों दूँ तुम्हारी जगह पैसे ??? अमजद बोला साहब जी बड़ी मेहरबानी होगी आपकी। मुझे आपके बड़े साहब जी ने मुल्तान जाने का आदेश दिया है अगर पैसे नहीं देंगे तो यह दुकानदार मुझे यहाँ से जाने नहीं देगा और मुझे देर हो जाएगी। आप पैसे दे दें तो मैं अभी चला जाऊंगा और समय के साथ आपके बड़े साहब की की भेजी हुई जगह पहुंच सकूंगा। सैनिक ने यह बात सुनी तो बोला अच्छा अच्छा ठीक है तुम जाओ मैं दे दूंगा पैसे। अमजद धन्यवाद करते हुए अपनी कार में आकर बैठ गया और और बिस्कुट का पैकेट खोलकर सामने रख लिया और कार स्टार्ट करके फिर से यात्रा शुरू कर दी . सैनिक ने जब देखा कि अमजद जा रहा है तो वह तुरंत दुकान पर गया उसको पैसे दिए और फिर से अपनी कार में बैठ कर अमजद का पीछा करने लगा।

इस सारी करवाई में अमजद केवल इस सैनिक का विश्वास हासिल करना चाहता था। न तो उसे सख्त भूख लगी थी और न ही वह इतना बेशर्म था कि राह चलते किसी से भी पैसे मांग ले। लेकिन यह हरकत कर के अमजद ने सैनिक के मन में यह बात बिठा दी थी कि अगर यह कोई आतंकवादी है तो उसको तो सेना से दूर भागना चाहिए, लेकिन यह बिना डर खाए एक सैनिक के पास आकर उस से मदद मांग रहा है। और अमजद का यह तीर ठीक निशाने पर जाकर लगा था। सैनिक ने पीछा करते हुए अब कर्नल इरफ़ान को कॉल की और उसको सारी स्थिति से अवगत करते हुए बताया कि अमजद किसी भी रूप में उन लोगों के साथ शामिल नहीं हो सकता। बस मजबूरी की वजह से यह उनके साथ था। कर्नल इरफ़ान ने भी अमजद को ग्रीन सिग्नल दे दिया मगर पीछा जारी रखने का आदेश देते हुए कहा क्या मालूम वेवो लोग इससे पेट्रोल पंप पर मिलने आएँ . इसलिए तुम ध्यान रखना जैसे ही कोई आए उसको तुरंत धर लेना।

एक घंटे की ड्राइव के बाद अमजद मुल्तान शहर के पहले पटोल पंप पर अपनी कार खड़ी कर के खड़ा था। जबकि पीछे आने वाला सैनिक पेट्रोल पंप से काफी दूर अपनी कार खड़ी कर खेतों से होता हुआ पेट्रोल पंप की दीवार के करीब पहुंच गया था और अमजद पर नजर रखे हुए था। अमजद की पीठ सैनिक की ओर थी, वह इस बात से तो बेखबर था कि सैनिक कहाँ खड़ा है मगर इतना जरूर जानता था कि कहीं न कहीं वह अमजद पर नजर रखे हुए है। जब पेट्रोल पंप पर खड़ा था अमजद को 5 से 6 घंटे हो गए और वहाँ कोई नहीं आया तो सैनिक ने फिर कर्नल इरफ़ान को फोन किया तो कर्नल इरफ़ान ने अब इसे मुल्तान शहर में प्रवेश करने के लिए कहा और वहां मौजूद आर्मी कैंप में बुलाया । और साथ ही उसे आदेश दिया कि सरदार सन्जीत सिंह को कहो अब वह पेट्रोल पंप से निकल जाए और किसी सुरक्षित जगह पर जाकर छुप जाए।

सैनिक ऐसे ही किया, वह वापस अपनी कार तक गया और फिर कार में बैठकर वापस पेट्रोल पंप पर आया वहाँ रुक कर वह अमजद से मिला। अमजद ने हैरानगी जताते हुए कहा साहब जी आप वही हो न जो पहले भी पेट्रोल पंप पर मिले थे मुझे ?? तो सैनिक ने कहा, हां मैं वही हूँ। मेरे अधिकारी ने मुझे भेजा है और कहा है कि सरदार जी से कहो अब यहाँ कोई आतंकवादी नहीं आने वाला आप बेफिक्र होकर जा सकते हैं मगर अपनी सुरक्षा के लिए अधिक बाहर न निकलना बल्कि किसी सुरक्षित ठिकाने पर जाकर छुप जाओ। अमजद ने सैनिक को धन्यवाद दिया मगर अपने मन में मौजूद परेशानी को दूर करने के लिए सैनिक से पूछा कि वो आतंकवादी जिन्हें आप ढूंढ रहे हैं वह मिल गया है या नहीं? सैनिक कहा नहीं पता नहीं उन्हें आसमान खा गया या जमीन निगल गई। वह कहीं भी नहीं मिल पाए और ना ही अभी उनका कोई सुराग मिल रहा है। यह सुनकर अमजद को तसल्ली हुई और उसने सोचा कि राज और समीरा खैरियत से मुल्तान पहुँच चुके होंगे। क्योंकि अमजद कोई 6 घंटे पेट्रोल पंप पर रुककर जाहिर आतंकवादियों का इंतजार करता रहा था और वह बस जिसमें उसने राज और समीरा कि बिठाया था कोई 7 घंटे पहले मुल्तान पहुंच चुकी होगी। अब अमजद ने सैनिक को बताया कि यहां उसके कुछ दोस्त रहते हैं उनकी तरफ जाकर छिप जाऊंगा अब वही एक सुरक्षित जगह है मेरे लिए। सैनिक ने उसकी बात पर बिना कोई ध्यान दिए ठीक कहा और वहां से चला गया।

 
अमजद भी अब पेट्रोल पंप से निकला और मुल्तान में मौजूद अपने ठिकाने की ओर बढ़ने लगा। वह जानता था कि अब उसका पीछा नहीं होगा और वह संतुष्टि के साथ सरमद काशफ, बौद्धिक और समीरा को मिल सकता है और आगे की योजना बनाई जाएगी। कुछ ही देर में विभिन्न मार्गों से होता हुआ अमजद अपने वांछित ठिकाने पर पहुंच चुका था। मध्य वर्ग से संबंध रखने वाली इस कॉलोनी में अमजद ने एक फ्लैट किराए पर ले रखा था जो उसने आज़ाद कश्मीर के एक परिवार को किराए पर दिया हुआ था। और अमजद का जब दिल करता वह यहाँ आ जाता था।

अमजद जब घर पहुंचा तो सामने कमरे में राणा काशफ और सरमद घोड़े बेचकर सो रहे थे। अमजद ने इधर उधर देखा मगर न तो उसे समीरा कहीं दिखी और न ही मेजर राज शर्मा। फिर अमजद दूसरे कमरे में गया लेकिन वहां भी उसे कोई दिखाई न दिया तो ऊपर वाले पोरशन में कश्मीरी परिवार से अमजद ने जाकर राज और समीरा के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि रात 3 बजे के करीब बस 2 आदमी ही आए हैं जो इस समय नीचे ही होंगे उनके अलावा और कोई नहीं आया यहाँ पर। यह खबर अमजद पर पहाड़ बनकर टूटी थी। जो पहला विचार उसके मन में आया वह यही था कि कर्नल इरफ़ान समीरा और मेजर को पकड़ चुका है और पेट्रोल पंप से वापस जाने का कहना और अपना विश्वास व्यक्त करना कर्नल की कोई चाल होगी ताकि वो अमजद का पीछा करके बाकी लोगों भी पकड़ सकें। यह विचार मन में आते ही अमजद के माथे पर पसीने की बूँदें दिखाई देना शुरू हो गई थी

सुबह 6 बजे समीरा की आंख खुली तो वह बेड से उठकर राज के सोफे ओर बढ़ी मगर वहां राज नहीं था। वह अपने कमरे से निकलकर जूली के कमरे में गई लेकिन वहां जूली और सोज़ी घोड़े बेचकर सो रही थीं। फिर समीरा ने कुछ कमरों को चेक किया और बाहर गली में भी देखने आई मगर राज का कहीं अता-पता नहीं था। समीरा वापस अपने कमरे में आई तो मेजर राज सामने ही बेड पर बैठा था। समीरा मेजर को कमरे में देखकर हैरान हुई और बोली कि कहाँ थे तुम ??? मेजर ने कहा तुम्हें इससे क्या तुम तो ऐसे सोई पड़ी थी जैसे अपनी अम्मा जी के घर सोई हुई हो। मेजर की बात सुनकर समीरा ने कहा कल सारा दिन तुम्हारे साथ घूमती रही हूँ इसीलिए थकान की वजह से अच्छी नींद आ गई। मगर तुम बताओ तुम कहाँ थे ???

मेजर ने बताया कि तुम्हारे केप्टन फ़ैयाज़ के कमरे तक गया था। उससे कुछ काम था। समीरा ने हैरान होकर पूछा तुम्हें क्या काम पड़ गया और तुम वहाँ गए ही क्यों ?? तो मेजर ने उसे कहा छोड़ो तुम्हारा इससे क्या संबंध। बस जिस काम के लिये मैं गया था वो हो गया। अब तुम तैयारी करो हमें लाहोर जाना है। लाहोर का नाम सुनते ही समीरा बोली लाहोर क्यों ?? हमें तो मुल्तान जाना है ?? अमजद वहाँ हमारे इंतजार में है। समीरा की बात सुनकर मेजर ने समीरा को कहा तुम कर्नल इरफ़ान की कैदी बनना चाहती हो तो शौक से जाओ मुल्तान। वह पागल कुत्ते की तरह तुम्हे और मुझे ढूंढ रहा है। मुल्तान और जामकोट सभी स्थानीय चैनलों पर हमारे बारे में समाचार दी जा रही हैं। वहाँ जाना मौत को दावत देने के बराबर है। लाहोर बड़ा शहर है वहां हमें आसानी से रहने की जगह भी मिल जाएगी और उसके साथ कर्नल इरफ़ान पर निशाना भी लगा सकेंगे। कर्नल इरफ़ान के बारे में बहुत सी जानकारी प्राप्त कर चुका हूँ। अब तैयारी करो निकलें यहाँ से।

कुछ ही देर में समीरा और राज कैप्टन फ़ैयाज़ की जीप में बैठे शहर से दूर जा रहे थे। एक प्लाजा के पास पहुंचकर मेजर राज ने गाड़ी रोक ली। सुबह का समय था प्लाजा का मेन गेट बंद पड़ा था और बाहर एक चौकीदार बैठा था। मेजर राज ने चौकीदार से कहा हमें शाजिया जी से मिलना है। चौकीदार बोला शाजिया जी 11 बजे अपना काम शुरू करती हैं अब तुम लोग जाओ बाद में आना। मेजर राज ने चौकीदार को फिर कहा कि मेरी बात हो गई है शाजिया जी से तुम उन्हें बताओ कि कैप्टन फ़िरोज़ आए हैं उनसे मिलने। कैप्टन शब्द सुनते ही चौकीदार खड़ा हुआ और पास केबिन में मौजूद फोन से मिस शाजिया का नंबर मिलाया और उन्हें केप्टन फ़िरोज़ के आने की खबर दी। शाजिया जी ने कहा कि उन्हें मेरे कमरे तक पहुंचा दो। चौकीदार ने अब छोटे गेट को खोला और राज को बोला आप लोग गाड़ी यहीं खड़ी रहने दो, मैं आपको शाजिया जी के कमरे तक ले जाता हूँ।मेजर राज ने गाड़ी से चाबी निकाली और समीरा का हाथ पकड़कर चौकीदार के पीछे चलने लगा। चौकीदार प्लाजा बिल्डिंग में मौजूद लिफ्ट का उपयोग कर चौथी मंजिल पर गया और एक कमरे के सामने रुक गया चौकीदार ने कमरे को नॉक किया तो अंदर से शाजिया की आवाज़ आई कम इन।

चौकीदार पीछे हट कर खड़ा हो गया और मेजर राज को अंदर जाने का इशारा किया। मेजर राज समीरा को लिए अंदर चला गया। अंदर एक 40 वर्षीय अधेड़ उम्र महिला ने मेजर राज और समीरा का अभिवादन किया। मेजर राज से हाथ मिलाते हुए शाजिया ने उसे कैप्टन फ़िरोज़ कह कर संबोधित किया जबकि समीरा से मिलते हुए उसे श्रीमती फ़िरोज़ कह कर संबोधित किया। समीरा अब सही स्थिति समझ नहीं पाई थी और राज से कुछ पूछने ही लगी थी कि राज की आवाज आई शाजिया जी अब जल्दी जल्दी अपना काम कीजिए हमारे पास समय बहुत कम है। यह सुनकर शाजिया समीरा और राज को लेकर अंदर एक कमरे में गई। यह एक ब्यूटी पार्लर जैसा कमरा था। जहां एक 25 वर्षीय लड़की और भी खड़ी थी।

 
शाजिया जी ने श्रीमती फ़िरोज़ यानी समीरा को एक चेयर पर बैठने को कहा और पास खड़ी लड़की बोली मेडम जी का एकदम जबरदस्त मेकअप कर दो तब तक मिस्टर फ़िरोज़ का मेकअप कर लूँ। समीरा अब तक समझ नहीं पाई थी कि सुबह सुबह मेकअप क्यूँ और क्या है ??? और इस समय कौन सा ब्यूटी पार्लर खुला होता है ?? और राज को कैसे पता कि यहां जामनगर में प्लाजा में एक ब्यूटी पार्लर भी मौजूद है। मगर वह चुपचाप बैठी अपना मेकअप करवाने लगी। लड़की ने पहले समीरा का हेयर कट किया। समीरा के लंबे घने बाल जो करीब उसकी कमर के बराबर थे अब मात्र कंधों तक रह गए थे। इसके अलावा फ्रंट हेयर की कटिंग ने समीरा को बिल्कुल ही नया लुक दे दिया था . कुछ ही देर में समीरा का मेकअप भी हो गया था, अब वह किसी भी एंगल से कश्मीरी या किसी जिहादी संगठन की लड़की नहीं लग रही थी। बल्कि समीरा अब दिखने में उच्च श्रेणी परिवार की जवान लड़की के रूप में थी। अब वही लड़की समीरा को साथ वाले रूम में लाई उसे वार्ड रोब से कुछ कपड़े दिखाए। यहाँ सब कपड़े उच्च वर्ग के परिवारों के अनुसार थे। समीरा ने एक सूट पसंद कर लिया।

स्किन टाइट पैंट के साथ एक ढीली सी शर्ट जो समीरा के पेट पर आकर खत्म हो रही थी पहनकर समीरा खुद को शीशे में देखने लगी। लाइट मेकअप, हेयर कट और इस ड्रेस में समीरा वाकई एक आधुनिक परिवार की महिला लग रही थी। अब उस लड़की ने समीरा को उसके साथ ऊँची एड़ी के जूते भी लाकर दिए, जिन्हें पहनकर समीरा और भी सुंदर दिख रही थी और साथ ही ब्लैक कलर के ग्लासेज उसके व्यक्तित्व को काफी आश्वस्त कर रहे थे। समीरा जो कुछ देर पहले एक सेक्सी अरबी लड़की के रूप में डांस क्लब में डांस कर रही थी अब एक पूरी दबंग और ग्रेस फुल लड़की के रूप में खड़ी थी। तैयार होकर जब वह बाहर निकली तो राज को देखकर हैरान रह गई। मेजर राज अब राज कम और कप्तान फ़ैयाज़ अधिक लग रहा था। शाजिया जी ने मेजर राज का मेकअप कुछ इस तरह से किया था कि अब उसका गोरा रंग कुछ काला हो गया था और अगर कोई कैप्टन फ़ैयाज़ की तस्वीर देखकर मेजर राज को देखता तो उसे लगता उसके सामने कैप्टन फ़ैयाज़ ही खड़ा है।

10 मिनट के मेकअप टच के बाद राज भी अपनी चेयर से खड़ा हो गया और शाजिया ने उसे भी कुछ मर्दाना कपड़े दिखाए जिनमें से राज ने एक जोड़ी का चयन किया और फिर शाजिया जी को एक बड़ी रकम देकर वापस कैप्टन फ़ैयाज़ की जीप में आकर बैठ गया। मेजर के हाथ में एक बैग भी था जो पहले नहीं था। कार में बैठ कर मेजर ने कार स्टार्ट की और राज मार्ग नंबर 6 से होता हुआ एयरपोर्ट रोड पर चढ़ गया। अब समीरा को समझ लग गई थी कि रात जो लाहोर के टिकट मेजर राज को मिले थे मेजर इन्हीं का उपयोग करके लाहोर जाएगा और कप्तान फ़ैयाज़ की तस्वीर दिखाकर उसने शाजिया जी से अपना मेकअप इस तरह करवाया कि उनकी आकृति अब काफी मिलती जुलती लगने लगी थी।

समीरा ने मेजर राज से पूछा कि बाकी सब कुछ तो मुझे समझ आ गया मगर आप ने शाजिया जी को कैप्टन फ़ैयाज़ की तस्वीर कैसे दिखाई ??? मेजर राज ने जेब से एक मोबाइल फोन निकाला और समीरा को पकड़ा दिया। इस सेमसंग कंपनी का गैलेक्सी एस 5 मोबाइल था। समीरा ने पूछा यह तुम्हारे पास कहाँ से आया ??? तो मेजर ने बताया कि तुम तो घोड़े बेचकर सो गई थी मगर थोड़ी सी नींद पूरी करने के बाद कमरे में गया जहां तुम ने कैप्टन फ़ैयाज़ को बेहोश किया था। वहां जाकर मैंने उसकी और तलाशी ली कि शायद कोई काम की चीज़ मिल जाए। यह मोबाइल मिला, उससे मैंने कर्नल इरफ़ान के बारे में भी बहुत सी जानकारी प्राप्त कर ली हैं और साथ ही कैप्टन फ़ैयाज़ के बारे में भी। इसी मोबाइल से कप्तान फ़ैयाज़ के चित्र बनाए और फिर मोबाइल से ही सर्च किया जामनगर मेकअप कलाकार के बारे में तो मुझे शाजिया जी के फेसबुक पेज के बारे में पता लगा वहाँ से उनका मोबाइल नंबर लेकर उन्हें कॉल किया और अपने आप को कैप्टन बताकर कर उन्हें मजबूर किया कि वह सुबह 7 बजे हमें मिलने का मौका दें। और मेरा मेकअप इस तरह करें कि मेरा रूप आतंकवादी फ़ैयाज़ से मिले। यह कह कर राज ने एक जोरदार ठहाका लगाया और ड्राइविंग जारी रखी। फिर मेजर राज ने बताया कि कैप्टन फ़ैयाज़ की 9 बजे की फ़्लाईट है लाहोर की। हम इसी फ़्लाईट से कप्तान फ़ैयाज़ और मिसेज़ फ़ैयाज़ बनकर मुंबई जाएंगे। वहां सेना रेजीडेंसल कॉलोनी में कर्नल इरफ़ान का घर है जहां उसकी एक बेटी राफिया रहती है और उसके अलावा कुछ कर्मचारी हैं घर में। कर्नल खुद जामनगर और मुल्तान में मुझे देख रहा है जब तक उसे मेरी खबर होगी मैं उसके मिशन के बारे में बहुत कुछ पता लगा लूँगा कि आखिर वह भारत से कौन सी गोपनीय जानकारी लेकर पाकिस्तान आया है।

और कोशिश करेंगे कि यह भी पता लगा सकें कि भारत में कौन सा नेटवर्क कर्नल इरफ़ान की मदद करता है। समीरा ने पूछा कि हम रहेंगे कहाँ लाहोर में? तो राज ने कहा उसकी भी व्यवस्था कर चुका हूँ। वहां के एक अपराधी गिरोह से मेरी बात हुई है उनको भारी राशि देकर एक ठिकाना मिल जाएगा और अगर कर्नल इरफ़ान लाहोर आ भी जाए तो वह मुझे ढूंढने के लिए अपराधियों के ठिकानों पर नहीं देगा बल्कि स्वतंत्रता चाहने वाले संगठनों के ठिकानों पर मुझे ढूंढने की कोशिश करेगा, ऐसे में आराम से अपना काम कर सकता हूँ।

अब मेजर राज और समीरा मिस्टर और मिसेज़ फ़ैयाज़ के रूप में एयरपोर्ट पर मौजूद थे। रिसेप्शन पर मेजर राज ने कैप्टन फ़ैयाज़ का कार्ड दिखाया तो रिसेप्शन पर मौजूद महिला ने मेजर राज को सुशआमदीद कहा और साथ ही समीरा यानी मिसेज़ फ़ैयाज़ का हालचाल पूछने लगी। कुछ ही देर बाद मेजर राज और समीरा लाहोर जाने वाली फ़्लाईट में मौजूद थे और विमान टेक ऑफ कर चुका था। एक घंटे और 10 मिनट की छोटी फ्लाइट के बाद करीब 10:30 बजे फ़्लाईट मुंबई एयरपोर्ट पर लैंड कर चुकी थी। एयर पाक की फ्लाइट में मेजर राज ने अपने मन में और योजना और कुछ हद तक समीरा को भी अपने प्लान के बारे में सूचना दी।

एयरपोर्ट से बाहर निकल कर मेजर राज ने एक टैक्सी ली और जिन्ना नगर में मौजूद एक घर का पता बताया। रास्ते में मेजर राज ने एक जगह टैक्सी रुकवाई। टैक्सी रुकी तो मेजर राज नीचे उतरा और आसपास मौजूद लोगों को देखने लगा। उनमें से एक व्यक्ति जो थोड़ा गरीब लग रहा था मेजर राज उसकी तरफ बढ़ा और उससे कहा कि मैं काफी मुश्किल में हूँ अपने मोबाइल से मुझे एक कॉल तो करने दो। इस व्यक्ति ने मेजर राज को ऊपर से नीचे तक देखा और बोला क्या साहब इतना पैसा है तुम्हारे पास और एक मोबाइल नहीं रख सकते क्या ??? मेजर राज ने सेमसंग एस 5 लहराते हुए कहा यार मोबाइल तो है मगर मैं अभी कनाडा से आया हूँ तो मेरे पास सिम मौजूद नहीं और मुझे बहुत अर्जेंट कॉल करनी है। मेजर की उम्मीद के मुताबिक उस व्यक्ति ने कहा कि साहब कॉल कर लो मगर इस कॉल के हम 50 रुपये लेगा . मेजर राज ने कहा ठीक है यार तुम 100 रुपये ले लेना मुझे फोन करना हैं। मेजर ने उसका मोबाइल लेकर एक व्यक्ति को कॉल की और उसे बताया कि वह लाहोर पहुंच चुके हैं और कुछ ही देर में उसकी बताई हुई जगह पर पहुंच जाउन्गा . अब मुझे तुरंत अपना आवश्यक समान चाहिए। दूसरी साइड पर मौजूद व्यक्ति ने कहा, तुम बेफिक्र हो जाओ तुम्हें सब कुछ मिल जाएगा। यह कह कर उसने फोन बंद कर दिया। मेजर राज ने जेब से 100 का नोट निकाला और उस व्यक्ति को दे दिया साथ में मोबाइल भी वापस कर दिया।

उस व्यक्ति ने खुशी खुशी 100 का नोट जेब में रख लिया, मेजर राज वापसी के लिए जाने लगा मगर फिर अचानक उस व्यक्ति की ओर मुड़ा जैसे कोई चीज भूल गया हो। इस व्यक्ति ने मेजर को अपनी ओर आता देखा तो बोला क्या साहब कोई और कॉल भी करनी है ?? तो मेजर राज ने उसे कहा यार कॉल तो बार बार करनी होगी, अभी मैं बाहर से आया हूँ तो मेरे पास अपना आईडी कार्ड नहीं तुम अपनी सिम मुझे दे दो तो मैं तुम्हें 500 रुपये दूंगा। इस पर वह व्यक्ति बोला न साहब हमें भी कॉल करनी होती है हम तुम्हें अपनी सिम नहीं देगा। मेजर ने कहा, यार 1000 रुपये ले लो। अब उस व्यक्ति ने थोड़ा सोचा कि इस व्यक्ति की मजबूरी का फायदा उठाना चाहिए और जल्दी से सिम निकाल ली मोबाइल से मगर साथ में कहा साहब 2000 लेगा हम सिम का। मेजर राज ने कहा यार 500 रुपये में सिम मिल जाती है मैं तो 1000 दे रहा हूँ चलो तुम 1500 लो। वह व्यक्ति बोला न साहब 2000 में सौदा तय करना है तो सिम ले जाओ नहीं तो जाओ। राज ने जेब से 2000 रुपये निकाले और उस व्यक्ति दिए और वापस कार में आ गया।

टैक्सी अब नेहरू नगर की ओर जा रही थी। पीछे बैठी समीरा ने पूछा कि यह नाटक क्यों किया ??? नया सिम ले लेते ?? तो मेजर राज ने समीरा को मुंह चिड़ाते हुए कहा कहीं भी अपना प्रूफ छोड़ना बेवकूफी होगी। अगर मैं कैप्टन फ़ैयाज़ के नाम पर भी सैम निकलवा लूँ तो उन्हें पता चल जाएगा कि मैं लाहोर में हूं और वो आसानी से इस सिम को ट्रेस कर सकते हैं। मगर यह एक राह चलते व्यक्ति की सिम है उसका कोई पता नहीं होगा। यह सुनकर समीरा चुपचाप दूसरी ओर देखने लगी। कुछ ही देर में दोनों नेहरू नगर के एक छोटे से घर में मौजूद थे। घर पहुंच कर समीरा ने शाजिया जी द्वारा लाए गए शॉपिंग बैग खोलकर देखा तो उनमें कुछ महिलाओं के कपड़े थे और 2 जीनटस सूट थे। घर पहुंचकर मेजर राज ने अपना चेहरा गर्म पानी से अच्छी तरह धोया ताकि यहां केप्टन फ़ैयाज़ का कोई जानने वाला राज को फ़ैयाज़ समझकर मिलने ही न चला आए। चेहरा अच्छी तरह से साफ करने के बाद मेजर राज शौचालय से बाहर आ गया और फिर से एक नंबर पर कोल की और आवश्यक समान मंगवाया।

कुछ ही देर में दरवाजे पर दस्तक हुई और एक काला सा छोटे कद का व्यक्ति मेजर राज को एक छोटा सा बैग पकड़ा कर वापस चला गया। मेजर ने समीरा के सामने ही बैग खोला तो उसमें से एक रिवाल्वर और गोलियों के कुछ राउंड और इसके अलावा एक गाड़ी की चाबी कुछ नकदी भी बैग में मौजूद थी ... समीरा ने यह सब देखा तो बोली इस रिवाल्वर तो समझ आती है अपराधियों से आसानी से मिल जाते हैं मगर इस कार की चाबी और साथ नकदी ??? यह क्या चक्कर है ?? / मेजर राज ने मुस्कुराते हुए कहा तुम्हें कहा था ना कि अब हमे भागने और छिपने की बजाय कर्नल इरफ़ान पर घात लगानी है तो मैंने कैप्टन फ़ैयाज़ के फोन से भारत में संपर्क किया और उन्होंने पाकिस्तान में मौजूद अपने लोगों के माध्यम से यह चीज़े पहुंचाई हैं।

यह कह कर मेजर राज ने गाड़ी की चाबी हाथ में पकड़ी और लिफाफा कमरे में मौजूद एक अलमारी में रख कर घर से बाहर चला गया। 5 मिनट बाद मेजर राज वापस आया तो उसके पास एक लैपटॉप बैग मौजूद था। समीरा ने पूछा अब यह कहाँ से आया? मेजर राज ने बताया बाहर खड़ी कार में यह लैपटॉप था। मेजर ने लैपटॉप ऑनलाइन किया और बैग से ही मोबीलिंक मोबाइलज़ की एक थ्री जी डिवाइस निकालकर इंटरनेट ऑन कर लिया। समीरा ने राज से पूछा इंटरनेट पर क्या करोगे ??? मेजर राज ने समीरा की तरफ देखा और फिर धीरे से बोला गंदी गंदी तस्वीरें देखना चाहता हूँ देखोगी तुम ??? यह सुनकर समीरा ने राज को घूरा और बोली खुद ही देखो, यह कह कर समीरा सामने मौजूद सोफे पर बैठ गई। मेजर ने समीरा को कहा साथ ही किचन है वहाँ जाकर कुछ खाने की ही व्यवस्था कर दो पेट में चूहे दौड़ रहे हैं। समीरा बोली यह जो गंदी गंदी देखने वाले हो, उसी से भर लो ना पेट अपना। मेजर ने एक ठहाका लगाया और बोला अरे यार इन बातों से तो कभी पेट नहीं भरता, प्लीज़ कुछ खाने की व्यवस्था करो। समीरा उठी और साथ ही मौजूद किचन में जाकर देखने लगी कि वहां क्या कुछ मौजूद है।

मेजर राज ने अब इंटरनेट में लाहोर के नक्शे देखने लगा, यहाँ विभिन्न पब, डांस क्लब, विश्वविद्यालयों, मेन कालोनीज़, रेलवे केंद्रों, बस स्टेंड आदि अपने दिमाग़ मे सेव कर लिए। इसके साथ ही उसने कर्नल इरफ़ान बेटी राफिया की फेसबुक प्रोफाइल खोलकर भी उसको चेक करना शुरू किया। ये प्रोफाइल मेजर को कैप्टन फ़ैयाज़ केमोबाइल से मिली थी। राफिया लाहोर विश्वविद्यालय में मास्टर्स कर रही थी। मेजर ने जिन्ना नगर से लाहोर विश्वविद्यालय तक का रोड मैप देखा और अपने पास मौजूद मोबाइल मे गूगल मैप में सेव कर लिए। यह रास्ता काफी आसान था क्योंकि लाहोर एयरपोर्ट के साथ ही लाहोर विश्वविद्यालय था जहां से कुछ देर पहले मेजर राज टैक्सी में बैठ कर आया था।

इसके बाद मेजर ने सेना की रेजीडेंसल कॉलोनी तक का रास्ता भी अच्छी तरह मन में बिठा लिया और उसको भी अपने मोबाइल में सेव कर लिया . राफिया की फेसबुक प्रोफाइल से ही मेजर राज को यह बात भी पता लगी कि वह अक्सर हिना गैलरी के पास स्थित प्रसिद्ध नाइट क्लब, क्लब लीबिया मे भी जाती है। और राफिया की फेसबुक स्थिति के अनुसार उसको आज भी अपने कुछ दोस्तों के साथ इसी क्लब में जाना था। मेजर राज ने इस क्लब में जाने का रास्ता भी ध्यान कर लिया। यह सारा काम करके मेजर राज फ्री हुआ तो समीरा ब्रैड गर्म कर चुकी थी साथ में चाय बनाकर अंडे और जेम के साथ ट्रे में रखे वह मेजर राज के पास आ गई।

दोनों ने मिलकर नाश्ता किया तो मेजर राज ने समीरा को अपने अगले कार्यक्रम के बारे में बताया। नाश्ता करते ही समीरा और मेजर राज दोनों घर से निकल गए, घर को बाहर से लॉक करने के बाद घर के साथ ही खड़ी काले रंग की होंडा सिटी में बैठे और लाहोर विश्वविद्यालय की ओर जाने लगे। जबकि मेजर राज को काफी हद तक रास्ता पता लग चुका था मगर फिर भी समय बचाने की खातिर मेजर ने अपना मोबाइल समीरा को पकड़ा दिया जो अब गूगल मैप से मेजर राज को रास्ता बता रही थी। 20 मिनट की ड्राइव के बाद मेजर राज विश्वविद्यालय लाहोर के सामने मौजूद था। मेजर पहले राफिया की तरफ गया और वहां मौजूद रिसेप्शन पर अपना परिचय कैप्टन फ़िरोज़ के नाम से करवाया और सरसरी तौर पर जेब से एक कार्ड निकाल कर दिखा दिया। रेसेप्शन पर मौजूद महिला कैप्टन शब्द सुनकर ही सीधी हो गई थी कार्ड देखने की भी कोशिस नही की राज ने भी कैप्टन फ़ैयाज़ का कार्ड वापस जेब में रख लिया और धन्यवाद किया कि उसकी उम्मीद के मुताबिक महिला ने कार्ड चेक नहीं किया और नाम सुनकर ही सहयोग के लिए तैयार हो गई। अब मेजर राज ने रिसेप्शन पर मौजूद महिला से राफिया के बारे में पूछा तो महिला ने बताया कि वह इस समय लेक्चर कक्ष में हैं और कुछ ही देर में उनका यह अंतिम लेक्चर समाप्त हो जाएगा तो आप उनसे मिल सकते हैं।

 
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