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अचानक विजय बोला…"लो प्यारे दिलजले, अब लोग मजा लेने के लिए अपराध करने लगे हैं ।"
इस समय वे तीनों प्रोफेसर बनर्जी की लाश के समीप खडे थे जो यहाँ हुए इस युद्ध में मारे गए थे ।
बनर्जी की मौत का विजय और विकास को वहुत गहरा दुख हुआ, परंतु वे कर भी क्या सकते थे?
अब तो दोनों के दिमाग में एक ही बात घूम रही थी…बैनसीन की घाटी ।
बैनसीन की घाटी...! मानो पत्थर के कोयले की घाटी थी । घाटी के चारो और काली स्याह ऊंची चट्टाने थीं, जिनके ऊपर यदि कोई आदमी गिर जाए तो पता भी न लगे कि कहां गिरा था ।
एक ऐसी ही चट्टान पर इस समय अलफांसे खड़ा हुआ था ।
उसके सारे जिस्म पर इस समय काला लिबास था । वह चट्टान के एक स्थाने पर खडा था जहां से वह बैनसौन की घाटी में प्रविष्ट होते हुए प्रत्येक इंसान को देख सकता था ।
उसने फूचिंग को प्रविष्ट होते हुए भी देख लिया था ।
उस समय अलफांसे के होठो पर बडी विचित्र-सी मुस्कान आई थी । जब छुपने का प्रयास करते हुए विजय और विकास को घाटी में प्रविष्ट होते हुए देखा ।
अलफांसे ने भलीभांति स्थिति का अध्ययन किया और पाया कि इन तीन इंसानो और उसके अतिरिक्त घाटी में आसपास कोई नहीं है ।
यही एकमात्र चट्टान ऐसी थी जहाँ से समूची घाटी पर नजर रखी जा सकती थी । कदाचित् इसीलिए फूचिंग भी इसी चट्टान पर आ गया था, किंतु अलफांसे उस समय एक विशाल काले पत्थर की बैक में हो चुका था ।
उसने यह भी देख लिया था कि विजय और विकास भी बड़े गुप्त ढंग से वहां पहुच चुके है और यह मी उसने देख लिया था कि फूचिंग उन को देख नहीं पाया है ।
ठीक तीन बजे... ।
अचानक अलफांसे विशाल पत्थर की बैक से बोला…"सामने आ जाओं, फूचिंग ।"
फूचिंग चौका, उसे यहां किसी की भी उपस्थिति का ज्ञान न था, लेकिन अगले ही पल वह अपना बैग पत्थर की बैक में ही छोडकर बाहर आ गया ।
अलफांसे भी सामने आ चुका था । उसके हाथ में रिवॉल्वर था, उसने एकदम प्रश्न क्रिया-"माल कहाँ है?"
"अंडों का डिब्बा?" फूचिंग भी कठोर और संयम स्वर में बोला ।
तभी अलफांसे के दाएं हाथ में दबी टार्च रौशन हो गई, सबसे पहले प्रकाश का दायरा अंधकार के भाग को पराजित करता फूचिंग के चेहरे से टकराया, फिर वहां से रेंगकर पत्थरों पर नृत्य करने लगा । अंत में एक काली चट्टान पर रखे एक डिब्बे पर स्थिर हो गया, साथ ही अलफांसे बोला------“वह रहा डिब्बा, माल देकर उठा सकते हो ।"
"माल उस पत्थर के पीछे है जहाँ मैं था, ले सकते हो ।" कहकर फूचिंग ने जैसे ही डिब्बे की तरफ बढना चाहा अलफांसे एकदम फुफकारा-“ ठहरो ..!"
फूचिंग ने ठिठककर उसकी तरफ़ देखा ।
" पहले स्वयं माल लाकर मुझे दो ।"
कुछ सोचकर फूचिंग शांति के साथ उस तरफ बढ़ गया लेकिन जब उसने पत्थर के पीछे से अपना बैग गायब पाया तो पैरों तले से मानो एकदम धरती खिसक गई । दिल पर जैसे किसी ने हथौड़ा दे मारा वह एकदम बोला-“बैग. . .मेरा बैग कहाँ गया? "
तभी अलफांसे के मस्तिष्क को भी झटका-सा लगा, उसने तेजी के साथ टार्च का प्रकाश डिब्बे पर फेका बिन्तु डिब्बा भी अपने स्थान से प्रस्थान कर चुका था । वह संयत स्वर में बोला…“फूचिंग बेटे, अंडे भी गायब है?"
"'क्या?" फूचिंग को ऐसा लगा जैसे अभी-अभी विस्फोट हुआ हो ।
"माल इधर है फूचिंग प्यारे" आवाज विजय की थी ।
"और अंडे इधर ।” शरारती विकास के आवाज आई ।
फूचिंग और अलफांसे ने देखा कि शैतान गुरु और चेले उनके दाएं-बाएं हाथों में रिवॉल्वर लिए खड़े थे । जबकि दोनो 'के बांए हाथ में क्रमश: माल का बैग और अंडों का डिब्बा था । न जाने एक पल के लिए तो अलफांसे बड़े ही रहस्यमय ढंग से मुस्कराया और बोला…"पुझे मालूम था कि तुम यहीं हो ।"
"तुम मेरे गुरु जरूर हो, क्राइमर अंकल!" विकस चीखा----" तुम्ही ने से अपने देश से प्यार करना सिखाया है, साथ ही यह भी सिखाया है कि देश प्रेम मार्ग में चाहे जो आए उसे क्षमा मत करों और अव तुम भी मेरे देश के दुश्मन के रूप में सामने हो.।"
"मतलब? "
“मतलब ये कि मैं आपको जिंदा नहीं छोडूंगा ।" विकास गंभीर और सर्द लहजे में बोला---------“लेकिन वह भी दुनिया के इतिहास में शायद नई बात ही होनी कि शिष्य गुरु को मार दे ।"
"तुम अलफांसे के शिष्य तो जरूर हो प्यारे चेले दी ग्रेट ।" अलफांसे रहस्यमय ढंग से मुस्कराकर बोला-“लेकिन अभी इतने सशक्त नहीं हुए हो कि गुरु को मारने का रिकॉर्ड बना सको ।"
“गुरू !" अभी विकास कहना ही चाहता था कि विजय चीख पड़ा ।
"चुप हो बे साले दिलजले वरना तुझे उठाकर तेरे गुरु पर ही दे मारूंगा ।" विजय सतर्क था…“ये भी ख्याल नहीं है कि हम यहां खडे हैं । अबे, जब तू इस लूमड़ प्यारे गुरु को मारेगा तो हम क्या यहां टमाटर बेचने क्रो खडे हैं?”
"तुम दोनों में से कोई भी नहीं कर सकता, जासूस प्यारे!" अलफांसे बोला-" जरा एक-दूसरे के पीछे देख लो ।" कहते हुए टार्च का प्रकाश पहले विकास के पीछे वाली चट्टानों पर डाला, सामने से विजय ने देखा कि पत्थरों के पीछे से कई रिवॉल्वर झांक रहे थे जिनका रुख विकस की तरफ ही था । फिर अलफांसे ने टार्च का प्रकाश विजय के पीछे वाले पत्थरों में डाला । इस बार विकास ने देखा कि उनके झकझकिए अंकल के पीछे रिवॉल्वर तने हुए है ।
"तो लूमड यहाँ भी लूमड़पना दिखा ही गए ।"
"लूमड़पना तो तुमने भी दिखाया, लेकिन ये भूल गए कि मैं तुमसे ज्यादा बड़ा लूमड हू! बेटा दिलजले! अब ये तमंचे नीचे फेक दो ।" विजय ने अपनी रिवॉल्वर फेंकते हुए कहा ।
विकास ने भी स्थिति को समझते हुए रिवॉल्वर फेक दिया ।
तभी अलफांसे बोला…“फूचिंग बेटे! अब तुम आसानी से लड़के के हाथ से डिब्बा ले सकते है और मैं इस जासूस से अपना माल. . . ।"
"मैं एक प्रार्थना और करूंगा, मिस्टर अलफांसे!” अचानक फूचिंग बोला ।
"क्या?"
"मैं इस लडके से चीन में किए गए अत्याचारों का बदला लेना चाहता हु, इसकी कीमत तुम्हें मुंह मांगी मिलेगी ।"
"लडका तुम्हारे सामने खडा है ।" अलफांसे जहरीले स्वर ने बोला…"चारों औरर छुपे हुए मेरे आदमी तुम्हारा साथ देगे?"
“धन्यवाद !” कहता हुआ फूचिंग शैतानी ढंग से अंधेरे में विकास को घूरता हुआ उसकी तरफ़ बढा ।
"क्यो वे लूमड़ प्यारे, इसी चेले से प्यार करता था तू !" विजय क्रोधित होकर चीखा ।
“मुझे आपसे यह आशा नहीं थी, क्राइमर अंकल!'' विकास तेज स्वर में गुर्राया ।
"बड़े बेवकूफ़ हो तुम गुरु और चेले ।" अलफांसे जहरीले स्वर में बोला-----"इतने दिन अलफांसे के साथ रहकर भी नहीं जाने कि अलफांसे केवल दौलत का दोस्त हो सकता है ।"
"मुझे तो तेरी नस्ल का पहले ही पता था लूमड़!"
“फिर भी धोखा खा गए ।" कहता हुआ रिवॉल्वर संभालकर अलफांसे ठीक विजय के समीप पहुंच गया और बोला-----" जासूस प्यारे, वो माल का बैग मुझे दे दो ।"
उसी पल. . . ।
इस समय वे तीनों प्रोफेसर बनर्जी की लाश के समीप खडे थे जो यहाँ हुए इस युद्ध में मारे गए थे ।
बनर्जी की मौत का विजय और विकास को वहुत गहरा दुख हुआ, परंतु वे कर भी क्या सकते थे?
अब तो दोनों के दिमाग में एक ही बात घूम रही थी…बैनसीन की घाटी ।
बैनसीन की घाटी...! मानो पत्थर के कोयले की घाटी थी । घाटी के चारो और काली स्याह ऊंची चट्टाने थीं, जिनके ऊपर यदि कोई आदमी गिर जाए तो पता भी न लगे कि कहां गिरा था ।
एक ऐसी ही चट्टान पर इस समय अलफांसे खड़ा हुआ था ।
उसके सारे जिस्म पर इस समय काला लिबास था । वह चट्टान के एक स्थाने पर खडा था जहां से वह बैनसौन की घाटी में प्रविष्ट होते हुए प्रत्येक इंसान को देख सकता था ।
उसने फूचिंग को प्रविष्ट होते हुए भी देख लिया था ।
उस समय अलफांसे के होठो पर बडी विचित्र-सी मुस्कान आई थी । जब छुपने का प्रयास करते हुए विजय और विकास को घाटी में प्रविष्ट होते हुए देखा ।
अलफांसे ने भलीभांति स्थिति का अध्ययन किया और पाया कि इन तीन इंसानो और उसके अतिरिक्त घाटी में आसपास कोई नहीं है ।
यही एकमात्र चट्टान ऐसी थी जहाँ से समूची घाटी पर नजर रखी जा सकती थी । कदाचित् इसीलिए फूचिंग भी इसी चट्टान पर आ गया था, किंतु अलफांसे उस समय एक विशाल काले पत्थर की बैक में हो चुका था ।
उसने यह भी देख लिया था कि विजय और विकास भी बड़े गुप्त ढंग से वहां पहुच चुके है और यह मी उसने देख लिया था कि फूचिंग उन को देख नहीं पाया है ।
ठीक तीन बजे... ।
अचानक अलफांसे विशाल पत्थर की बैक से बोला…"सामने आ जाओं, फूचिंग ।"
फूचिंग चौका, उसे यहां किसी की भी उपस्थिति का ज्ञान न था, लेकिन अगले ही पल वह अपना बैग पत्थर की बैक में ही छोडकर बाहर आ गया ।
अलफांसे भी सामने आ चुका था । उसके हाथ में रिवॉल्वर था, उसने एकदम प्रश्न क्रिया-"माल कहाँ है?"
"अंडों का डिब्बा?" फूचिंग भी कठोर और संयम स्वर में बोला ।
तभी अलफांसे के दाएं हाथ में दबी टार्च रौशन हो गई, सबसे पहले प्रकाश का दायरा अंधकार के भाग को पराजित करता फूचिंग के चेहरे से टकराया, फिर वहां से रेंगकर पत्थरों पर नृत्य करने लगा । अंत में एक काली चट्टान पर रखे एक डिब्बे पर स्थिर हो गया, साथ ही अलफांसे बोला------“वह रहा डिब्बा, माल देकर उठा सकते हो ।"
"माल उस पत्थर के पीछे है जहाँ मैं था, ले सकते हो ।" कहकर फूचिंग ने जैसे ही डिब्बे की तरफ बढना चाहा अलफांसे एकदम फुफकारा-“ ठहरो ..!"
फूचिंग ने ठिठककर उसकी तरफ़ देखा ।
" पहले स्वयं माल लाकर मुझे दो ।"
कुछ सोचकर फूचिंग शांति के साथ उस तरफ बढ़ गया लेकिन जब उसने पत्थर के पीछे से अपना बैग गायब पाया तो पैरों तले से मानो एकदम धरती खिसक गई । दिल पर जैसे किसी ने हथौड़ा दे मारा वह एकदम बोला-“बैग. . .मेरा बैग कहाँ गया? "
तभी अलफांसे के मस्तिष्क को भी झटका-सा लगा, उसने तेजी के साथ टार्च का प्रकाश डिब्बे पर फेका बिन्तु डिब्बा भी अपने स्थान से प्रस्थान कर चुका था । वह संयत स्वर में बोला…“फूचिंग बेटे, अंडे भी गायब है?"
"'क्या?" फूचिंग को ऐसा लगा जैसे अभी-अभी विस्फोट हुआ हो ।
"माल इधर है फूचिंग प्यारे" आवाज विजय की थी ।
"और अंडे इधर ।” शरारती विकास के आवाज आई ।
फूचिंग और अलफांसे ने देखा कि शैतान गुरु और चेले उनके दाएं-बाएं हाथों में रिवॉल्वर लिए खड़े थे । जबकि दोनो 'के बांए हाथ में क्रमश: माल का बैग और अंडों का डिब्बा था । न जाने एक पल के लिए तो अलफांसे बड़े ही रहस्यमय ढंग से मुस्कराया और बोला…"पुझे मालूम था कि तुम यहीं हो ।"
"तुम मेरे गुरु जरूर हो, क्राइमर अंकल!" विकस चीखा----" तुम्ही ने से अपने देश से प्यार करना सिखाया है, साथ ही यह भी सिखाया है कि देश प्रेम मार्ग में चाहे जो आए उसे क्षमा मत करों और अव तुम भी मेरे देश के दुश्मन के रूप में सामने हो.।"
"मतलब? "
“मतलब ये कि मैं आपको जिंदा नहीं छोडूंगा ।" विकास गंभीर और सर्द लहजे में बोला---------“लेकिन वह भी दुनिया के इतिहास में शायद नई बात ही होनी कि शिष्य गुरु को मार दे ।"
"तुम अलफांसे के शिष्य तो जरूर हो प्यारे चेले दी ग्रेट ।" अलफांसे रहस्यमय ढंग से मुस्कराकर बोला-“लेकिन अभी इतने सशक्त नहीं हुए हो कि गुरु को मारने का रिकॉर्ड बना सको ।"
“गुरू !" अभी विकास कहना ही चाहता था कि विजय चीख पड़ा ।
"चुप हो बे साले दिलजले वरना तुझे उठाकर तेरे गुरु पर ही दे मारूंगा ।" विजय सतर्क था…“ये भी ख्याल नहीं है कि हम यहां खडे हैं । अबे, जब तू इस लूमड़ प्यारे गुरु को मारेगा तो हम क्या यहां टमाटर बेचने क्रो खडे हैं?”
"तुम दोनों में से कोई भी नहीं कर सकता, जासूस प्यारे!" अलफांसे बोला-" जरा एक-दूसरे के पीछे देख लो ।" कहते हुए टार्च का प्रकाश पहले विकास के पीछे वाली चट्टानों पर डाला, सामने से विजय ने देखा कि पत्थरों के पीछे से कई रिवॉल्वर झांक रहे थे जिनका रुख विकस की तरफ ही था । फिर अलफांसे ने टार्च का प्रकाश विजय के पीछे वाले पत्थरों में डाला । इस बार विकास ने देखा कि उनके झकझकिए अंकल के पीछे रिवॉल्वर तने हुए है ।
"तो लूमड यहाँ भी लूमड़पना दिखा ही गए ।"
"लूमड़पना तो तुमने भी दिखाया, लेकिन ये भूल गए कि मैं तुमसे ज्यादा बड़ा लूमड हू! बेटा दिलजले! अब ये तमंचे नीचे फेक दो ।" विजय ने अपनी रिवॉल्वर फेंकते हुए कहा ।
विकास ने भी स्थिति को समझते हुए रिवॉल्वर फेक दिया ।
तभी अलफांसे बोला…“फूचिंग बेटे! अब तुम आसानी से लड़के के हाथ से डिब्बा ले सकते है और मैं इस जासूस से अपना माल. . . ।"
"मैं एक प्रार्थना और करूंगा, मिस्टर अलफांसे!” अचानक फूचिंग बोला ।
"क्या?"
"मैं इस लडके से चीन में किए गए अत्याचारों का बदला लेना चाहता हु, इसकी कीमत तुम्हें मुंह मांगी मिलेगी ।"
"लडका तुम्हारे सामने खडा है ।" अलफांसे जहरीले स्वर ने बोला…"चारों औरर छुपे हुए मेरे आदमी तुम्हारा साथ देगे?"
“धन्यवाद !” कहता हुआ फूचिंग शैतानी ढंग से अंधेरे में विकास को घूरता हुआ उसकी तरफ़ बढा ।
"क्यो वे लूमड़ प्यारे, इसी चेले से प्यार करता था तू !" विजय क्रोधित होकर चीखा ।
“मुझे आपसे यह आशा नहीं थी, क्राइमर अंकल!'' विकास तेज स्वर में गुर्राया ।
"बड़े बेवकूफ़ हो तुम गुरु और चेले ।" अलफांसे जहरीले स्वर में बोला-----"इतने दिन अलफांसे के साथ रहकर भी नहीं जाने कि अलफांसे केवल दौलत का दोस्त हो सकता है ।"
"मुझे तो तेरी नस्ल का पहले ही पता था लूमड़!"
“फिर भी धोखा खा गए ।" कहता हुआ रिवॉल्वर संभालकर अलफांसे ठीक विजय के समीप पहुंच गया और बोला-----" जासूस प्यारे, वो माल का बैग मुझे दे दो ।"
उसी पल. . . ।