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"कपड़े पहन शैतान की अम्मा !" विकास नवयौवना की तरफ़ देखकर गुर्राया----बरना पंखे पर लटका दूगा ।"
नवयौवना कांप गई ।
एकदम वह कपडों की तरफ़ लपकी । तभी चाऊ भी अपने कपडों की तरफ बढा परंतु उसी क्षण विकास की रिवॉल्वर का दबाव बढ़ गया और वह खूनी स्वर में बोला-“तुम कहां चले बेटा चाऊ डार्लिंग मेरे ख्याल से तुम इसी पोज़ में ज्यादा अच्छे लगते हो ।"
चाऊ ठिठका...मानो रो देगा ।
सामने यमदूत.. .हालत बेरंग ।
"बेटा चाऊ!" विकास ने पुकारा।
" जी...." वह मिमिया उठा !
"एक बात बताओं ।"
"पूछिए ।" बडी कठिनाई से उसने थूक सटकते हुए कहा ।
"भारत से जो पांच अंडे लाए गए हैं कहां हैं ?"
"ज . .ज . . जी मैं नहीं जानता।”
"प्रोफेसर बनर्जी कहां हैं?"
"व…वो भी नहीं जानता ।" चाऊ बहुत ही भयभीत हो गया था ।
"तुम क्या जानते हो ?"
"ज…जी… ।" वह बौखला गया।
उधर नवयौबना कपडे. पहनकर तैयार हो गई थी ।
विकास ने उसकी तरफ देखा और बोला…“शेतान की खाला!"
"जी........!"
" यह तो चाकू !" विकास ने एक खुला हुआ चाकू उसकी तरफ बढा दिया ।
बह कुछ हिचकिचाइं परंतु विकास के तेवर देखकर उसकी सात पुश्ते कांप उठी । उसने चाकू ले लिया ।
विकास ने अगला आदेश दिया…“अपने डार्लिग चाऊ का लिंग काट दो?
"क्या ..?" लडकी कांपकर दो कदम पीछे हट गई ।
“नहीं . . ऽ. . . ऽ . . ।" चाऊ बुरी तरह से कांप उठा । माने रो देस । बेचारा चाऊ कितना विवश था । उसकी आंखों में आसू तैर गए । वह करे भी क्या? लडकी की आंखें हैरत से फैली हुई थी ।
शायद वह साक्षात् मौत को देखकर भी इतना भयभीत न होता जितना इस समय विकास से था । लडका उसे सजा ही इतनी भयानक दे रहा था । वह गिड़गिड़ा उठा…"नहीं. . .नही. . .मुझ पर रहम करो. ..रहम... !"
"बक्रो मत अय्याश खटमल !” एकाएक विकास भयानक भेडिया बनकर गुर्रा उठा ।
उसका मासूम चेहरा दहककर भयानक हो गया था । आखे जल रही थी ।
वह फुफकार उठा…"तुम जैसे अय्याशों ने ही नारी मानवता को पतन के मुह पर ला खड़ा किया है । मैं तुम जैसे किसी अय्याश कुत्ते को इस लायक नहीं छोडूंगा कि आगे कभी . . . ।"
"नहीं--नहीं--. ।" चाऊ बीच में ही गिड़गिड़ा उठा । आँसू बहने लगे। वह विकास के पैरों में गिर गया और रोता हुआ बोला…“मुझे माफ कर दो ।"
“बक्रो मत, चीनी सूअर!" विकास गरज उठा । वह भला उन पूतो में से कहाँ था जो आसू देखकर पिघल जाएं? उसे अपराधियों से बेहद घृणा थी ।
अय्याशों को वह अय्याशी के काबिल नहीं छोड़ता था । चाऊ जितना गिड़गिड़ा रहा था, विकास उतना ही भयानक होता जा रहा था । उसने मेडिए की भांति दहकती आंखों से लड़की की तरफ़ देखा और किसी जहरीले सर्प की भांति फूफकारा-----" अय्याश लड़की, जो कहा, सुना नहीं?"
लडकी की सात पुश्ते कांप उठी ।
सामने खडा था शैतान …!
मौत से अधिक भयानक!
मरती क्या न करती?
चाकू लेकर आगे बढी ।
नवयौवना कांप गई ।
एकदम वह कपडों की तरफ़ लपकी । तभी चाऊ भी अपने कपडों की तरफ बढा परंतु उसी क्षण विकास की रिवॉल्वर का दबाव बढ़ गया और वह खूनी स्वर में बोला-“तुम कहां चले बेटा चाऊ डार्लिंग मेरे ख्याल से तुम इसी पोज़ में ज्यादा अच्छे लगते हो ।"
चाऊ ठिठका...मानो रो देगा ।
सामने यमदूत.. .हालत बेरंग ।
"बेटा चाऊ!" विकास ने पुकारा।
" जी...." वह मिमिया उठा !
"एक बात बताओं ।"
"पूछिए ।" बडी कठिनाई से उसने थूक सटकते हुए कहा ।
"भारत से जो पांच अंडे लाए गए हैं कहां हैं ?"
"ज . .ज . . जी मैं नहीं जानता।”
"प्रोफेसर बनर्जी कहां हैं?"
"व…वो भी नहीं जानता ।" चाऊ बहुत ही भयभीत हो गया था ।
"तुम क्या जानते हो ?"
"ज…जी… ।" वह बौखला गया।
उधर नवयौबना कपडे. पहनकर तैयार हो गई थी ।
विकास ने उसकी तरफ देखा और बोला…“शेतान की खाला!"
"जी........!"
" यह तो चाकू !" विकास ने एक खुला हुआ चाकू उसकी तरफ बढा दिया ।
बह कुछ हिचकिचाइं परंतु विकास के तेवर देखकर उसकी सात पुश्ते कांप उठी । उसने चाकू ले लिया ।
विकास ने अगला आदेश दिया…“अपने डार्लिग चाऊ का लिंग काट दो?
"क्या ..?" लडकी कांपकर दो कदम पीछे हट गई ।
“नहीं . . ऽ. . . ऽ . . ।" चाऊ बुरी तरह से कांप उठा । माने रो देस । बेचारा चाऊ कितना विवश था । उसकी आंखों में आसू तैर गए । वह करे भी क्या? लडकी की आंखें हैरत से फैली हुई थी ।
शायद वह साक्षात् मौत को देखकर भी इतना भयभीत न होता जितना इस समय विकास से था । लडका उसे सजा ही इतनी भयानक दे रहा था । वह गिड़गिड़ा उठा…"नहीं. . .नही. . .मुझ पर रहम करो. ..रहम... !"
"बक्रो मत अय्याश खटमल !” एकाएक विकास भयानक भेडिया बनकर गुर्रा उठा ।
उसका मासूम चेहरा दहककर भयानक हो गया था । आखे जल रही थी ।
वह फुफकार उठा…"तुम जैसे अय्याशों ने ही नारी मानवता को पतन के मुह पर ला खड़ा किया है । मैं तुम जैसे किसी अय्याश कुत्ते को इस लायक नहीं छोडूंगा कि आगे कभी . . . ।"
"नहीं--नहीं--. ।" चाऊ बीच में ही गिड़गिड़ा उठा । आँसू बहने लगे। वह विकास के पैरों में गिर गया और रोता हुआ बोला…“मुझे माफ कर दो ।"
“बक्रो मत, चीनी सूअर!" विकास गरज उठा । वह भला उन पूतो में से कहाँ था जो आसू देखकर पिघल जाएं? उसे अपराधियों से बेहद घृणा थी ।
अय्याशों को वह अय्याशी के काबिल नहीं छोड़ता था । चाऊ जितना गिड़गिड़ा रहा था, विकास उतना ही भयानक होता जा रहा था । उसने मेडिए की भांति दहकती आंखों से लड़की की तरफ़ देखा और किसी जहरीले सर्प की भांति फूफकारा-----" अय्याश लड़की, जो कहा, सुना नहीं?"
लडकी की सात पुश्ते कांप उठी ।
सामने खडा था शैतान …!
मौत से अधिक भयानक!
मरती क्या न करती?
चाकू लेकर आगे बढी ।