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सियासत और साजिश complete

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पूनम अब उसके गोद मे बैठी थी. पर वो वहाँ से उठ नही रही थी, शायद उसे भी अच्छा लग रहा था. उसकी पीठ रवि के फेस की तरफ थी. रवि ने उसकी कमर से अपने बाहें निकाल कर उसके पेट पर रख दी. रवि के हाथों को अपनी टीशर्ट के ऊपेर से अपने पेट और कमर पर महसूस करके, वो एक दम से कांप उठी.

और उसने अपनी पीठ को रवि की छाती से सटा दिया. और अपने सर को पीछे रवि के कंधे पर गिरा लिया. रवि ने अपने एक हाथ को पेट से हटा कर उसके चिन को पकड़ कर अपनी तरफ उसके फेस को घुमाया. पूनम अपनी वासना से भरी नसीली अध खुली आँखों से रवि की आँखों मे झाँकने लगी.

रवि: मैं तो बस आज रात तुम्हे जी भर के प्यार करना चाहता हूँ. और जी भर के अपने दिल की रानी को देख लेना चाहता हूँ. पता नही कल के बाद हमें ऐसा टाइम नसीब हो या ना हो.

और पूनम भावनाओ के सागर मे बहने लगी. उसके दिल मे रवि के लिए प्यार ही प्यार उमड़ रहा था. उसने अपने एक हाथ को रवि के गाल पर पीछे ले जाकर रख लिया. और अपनी आँखों को बंद कर लिया. उसके होंठ थोड़ा सा आगे की तरफ बढ़े. जैसे पूनम रवि को कह रही हो. लो मेरे जान अपनी दिल की रानी को जी भर के प्यार कर लो.

और रवि ने भी मोका देखते हुए, अपने होंठो को पूनम के होंठों पर रख दिया. और धीरे -2 पूनम के होंठो को चूसने लगा. रवि ने अपना दूसरा हाथ भी पूनम की कमर पर कस लिया. और उसे अपने बाहों मे भर लिया. पूनम अपने होंठो को रवि से चुस्वाती हुई, अपने हाथ से रवि के गाल को सहलाती हुई, उसके बालों मे ले गयी. और अपने हाथ की उंगलियों से रवि के बालों को सहलाने लगी.

रवि पूनम के होंठो को ज़ोर-2 से चूसने लगा. पूनम एक दम मस्त हो चुकी थी. रवि उसके दिल मे घर कर गया था. रवि के हाथ धीरे-2 उसके पेट को सहलाते हुए, उसकी चुचियों तक आने लगे. और पूनम का दिल ये सोच कर जोरों से धड़कने लगा कि, रवि के हाथ अब उसकी चुचियों को मसलने वाले है.

रवि के हाथ जैसे ही पूनम की चुचियों पर पहुँचे , पूनम ने अपने होंठो को रवि के होंठो से हटा लिया. और अपनी वासना से भरी हुई, आँखों को धीरे- 2 खोल कर रवि की आँखों मे देखते हुए बोली.

पूनम: (मदहोशी से भरी आवाज़ मे) रवि मत करो ना, मुझ कुछ हो रहा है.

रवि: कुछ नही हो गा जान. मुझ पर भरोसा नही है क्या.

पूनम: तुम पर है पर मैं बहक जाउन्गी.

रवि: तो प्लीज़ बहक जाओ ना. मैं तुम्हें जी भर के प्यार करना चाहता हूँ.

पूनम: प्लीज़ मान जाओ ना.

और रवि ने अपने हाथों को पूनम की चुचियों से हटा लिया. और एक साइड मे देखने लगा. जैसे जता रहा हो कि, मैं तुमसे नाराज़ हूँ.

पूनम: (रवि को उदास होते देख.) नाराज़ हो मुझसे.

रवि: नही.

पूनम अपने होंठो पर मुस्कान लाई, और रवि के हाथों को अपने हाथों मे लेकर, रवि की आँखों मे देखते हुए, रवि के हाथों को अपनी चुचियों पर रख दिया. पूनम ने गरमी के कारण नीचे ब्रा नही पहनी थी, पूनम की नरम चुचियों को अपने हाथों मे महसूस करके, रवि का लंड और तन गया. और पूनम के लोवर के ऊपेर से, उसके चुतड़ों की दरार मे घूंस कर फँस गया.

पूनम के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. एक तो रवि अपने हाथों से उसकी अन्छुइ चुचियों को धीरे-2 मसल रहा था, और दूसरा उसका औजार, उसके चुतड़ों की दरार मे रगड़ खा रहा था. पूनम ने अपने हाथों को रवि के हाथों के ऊपेर कस लिया, और मस्ती मे आकर पूनम की आँखे फिर से बंद हो गयी.

पूनम: (वासना से घुली हुई आवाज़ मे) उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ससेईईईईईईईई जितना चाहे प्यार कर लो अपनी पूनम को.

रवि ने फिर से पूनम के होंठो को अपने होंठो मे ले लिया, और चूसना चालू कर दिया. और साथ-2 मे पूनम की चुचियों को धीरे-2 मसलना चालू कर दिया. पूनम की पैंटी नीचे गीली होने लगी थी. रवि ने पूनम को गरम होता देख, अपने एक हाथ को नीचे ले गया. और उसकी कमर पर ले जाकर उसकी ढीली सी टीशर्ट के अंदर अपने हाथ को डाल दिया. पूनम का बदन एक दम से कांप गया. उसका पेट और कमर थरथराने लगे.

रवि धीरे-2 अपने हाथ को टीशर्ट के अंदर से ऊपेर की ओर ले जाने लगा. पूनम एक दम मदहोश हो गयी. और रवि ने अपने हाथ को टीशर्ट के अंदर से ऊपेर ले जाकर, पूनम की राइट चुचि को अपने हाथ मे भर लिया.

पूनम ने अपने होंठो को रवि के होंठो से हटा लिया, और रवि को अपनी आँखें खोल कर देखते हुए, फिर से अपनी आँखें बंद करके, रवि के होंठो पर टूट पड़ी. अब चोन्कने की बारी रवि की थी. पूनम पागलों की तरहा रवि के होंठो को चूसने लगी. और रवि पूनम को इस्कदर मस्त होता देख, एक दम खुश हो गया.

और अपने दूसरे हाथ को भी, पूनम की टीशर्ट के अंदर से डाल कर, पूनम की लेफ्ट चुचि को पकड़ लिया. और दोनो चुचियों को धीरे- 2 मसलने लगा. पूनम की चूत से पानी बह कर उसकी पैंटी को गीला कर रहा था. जो पूनम को महसूस हो रहा था.

रवि ने पूनम की चुचियों को अपने हाथों मे पकड़े हुए, पूनम को अपने गोद से थोड़ा सा ऊपेर उठा कर बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दिया. और खुद उसके ऊपेर आकर, उसके होंठो को अपने होंठो मे भर कर चूस्ते हुए, उसकी चुचियों को मसलने लगा.

नीचे रवि ने अपनी टाँगों से पूनम की टाँगों को फैला कर, अपनी टाँगों को पूनम की टाँगों के बीच मे कर लिया. जिसके कारण रवि का तना हुआ लंड, पूनम के लोवर और पैंटी के ऊपेर से, उसकी चूत पर जा लगा. पूनम एक दम मचल उठी, और उसने अपनी बाहों को रवि की पीठ पर कस लिया. और अपने मुँह को खोल कर रवि से अपने होंठो और जीभ को चुसवाने लगी.

रवि अब ज़ोर-2 से पूनम की दोनो चुचियों को एक साथ मसल रहा था. पूनम की चुचियों के निपल एक दम तन चुके थे. और कड़े हो चुके त. धीरे-2 रवि अपना वजन अपने घुटनो पर डालते हुए, पूनम की जाँघो के बीच मे बैठ सा गया. और अपना एक हाथ पूनम की चुचि को छोड़ कर टीशर्ट के बाहर निकाल लिया. उसने अपने होंठो को पूनम के होंठो से अलग किया, और पूनम की तरफ देखा.

पूनम अपनी आँखे बंद किए तेज़ी से साँसे ले रही थी. उसके होन्ट कांप रहे थे. रवि ने मोका देखते हुए, पूनम की टीशर्ट को एक हाथ से ऊपेर उठा दिया. और पूनम की चुचियाँ, रवि की आँखों के सामने आ गयी. कड़े और तने हुए निपल्स को देख कर, रवि के मुँह मे पानी आ गया. और उसने बिना देर किए झुक कर पूनम की लेफ्ट चुचि को मुँह मे भर लिया.

पूनम अपनी निपल पर रवि की गरम जीभ को महसूस करके और गरम हो गयी. और उसके मुँह से मस्ती और कामुकता से भरपूर सिसकारियाँ निकलने लगी.

पूनम: अह्ह्ह्ह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह रवि मुझे मुझे कुछ हो रहा ही ना करो आईसीई ओह्ह्ह्ह यूम्ह्ष उम्ह्ह्ह्ह

पर पूनम का बदन पूनम की बातों का साथ नही दे रहा था. उसने अपनी बाहों को रवि की पीठ पर और ज़ोर से कस लिया. रवि का लंड नीचे उसकी लोवर और पैंटी के ऊपेर से उसकी चूत पर रगड़ खा रहा था.

 


पूनम अब अपने आप को रवि को सोन्प चुकी थी. और रवि उसके मस्त बदन से खेल रहा था. और अपने नीचे लेटी हसीन कच्ची कली को देख-2 कर खुश हो रहा था. रवि अब ज़ोर-2 से पूनम के निपल को चूसने लगा. पूनम के हाथ तेज़ी से रवि की पीठ को सहला रहे थी. रवि अपने एक हाथ से उसकी दूसरी चुचि के निपल को उंगलियों मे लेकर मसल रहा था. पूनम का पूरा बदन मस्ती मे कांप रहा था.

पूनम: ओह रवीिइ हाां और्र्ररर प्यार करूऊ. मेरी दूध्ह्ह्ह्ह्ह्ह कूओ अह्ह्ह्ह और चूसो बहुत मज़ा आ रहा हीईीईईईईईई. सचह मे बहुत अच्छा लग रहा है.

पूनम की बात सुन कर रवि और जोश मे आ गया. और पूनम की दूसरी निपल की तरफ लपका, और उसे भी मुँह मे भर कर चूसना चालू कर दिया. पूनम का बदन एक दम से अकड़ गया.

पूनम: उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह रवीीईईईईई और्र्ररर जोर्र्र सीईई चुसूओ जीईई भररर कर चुसीए ले अपनी पूनम को ओह रवि माआअ रीए ओह सचह मे बहुत अच्छा लग रहा हिी ओह.

रवि 10 मिनट तक पूनम की दोनो चुचियों को बारी-2 चूस्ता रहा. अब उसका लंड चूत मे जाने के लिए फडफडा रहा था. रवि पूनम की चुचि को चूस्ते हुए, अपने एक हाथ को नीचे की तरफ़ ले गया. और उसकी लोवर के एलास्टिक मे अपनी उंगलियों को फँसा कर नीचे की तरफ करने लगा. जैसे ही पूनम का लोवर उसके चुतड़ों से थोड़ा सा नीचे सरका. तो उसे अहसास हुआ, कि रवि कहाँ तक बढ़ गया है.

उसने अपने हाथों को रवि के कंधों पर आगे की तरफ रख लिया. और रवि को ऊपेर उठाने की कॉसिश करने लगी.

पूनम: नही रवि बसस्स औरर्र आगे नही. प्लीज़ मान जाओ अह्ह्ह्ह ऑश नही रवीीई ओह्ह

जब पूनम रवि को ऊपेर नही कर सकी तो, उसने रवि को उसके सर से पकड़ कर, अपनी चुचि को रवि के मुँह से निकालने की कॉसिश शुरू कर दी. क्योंकि पूनम को पता था, कि अगर रवि उसकी चुचि को ऐसे ही चूस्ता रहा तो, वो गरम होकर बहक जाएगी. जैसे वो बहक चुकी थी.

जैसे ही पूनम ने रवि के सर को अपने हाथों से पकड़ कर ऊपेर उठाना चाहा. पूनम के हाथों से रवि के सर के बाल खिंच गये. और रवि को पूनम की चुचि को अपने मुँह से बाहर निकालना पड़ा. पर रवि अब पीछे नही हटना चाहता था. रज़िया ने उसे जो ट्रैनिंग दी थी. आज वो काम आने वाली थी. रवि जानता था, कि अगर पूनम को चोदना है, तो उसे पूनम को गरम करना और रखना पड़ेगा. एक बार पूनम अपने आपे मे आ गयी, ये मोका उसे दोबारा नही मिलेगा.

रवि ये भी जानता था, कि पूनम के बदन पर पहली बार किसी मर्द के हाथ और होन्ट पड़े है. वो अगर पूनम के बदन के किसी भी हिस्से पर अपने होंठो को रख देगा. उसका असर पूनम पर ज़रूर होगा.

ये सोचते ही, उसने अपने होंठो को पूनम के पेट पर रख कर रगड़ना चालू कर दिया. अपने पेट और नाभि के पास, रवि के होंठो का स्पर्श पाकर पूनम की तो मानो जैसे साँस ही रुक गयी हो. उसने एक बार अपनी पूरी ताक़त से रवि के सर को अपने पेट से ऊपेर उठाने की कॉसिश की. पर रवि अपना ज़ोर नीचे की ओर लगाए हुए, पूनम के पेट और नाभि के आस पास चूमता रहा. फिर उसने पूनम को और गरम करने के लिए, अपनी जीभ निकाल कर पूनम की नाभि को चाटना चालू कर दिया.

पूनम का बदन एक दम से अकड़ गया. उसकी साँस मानो जैसे थम गयी हो. उसके हाथ कमजोर पड़ गये. और उसने अपनी गर्दन को लंबा करके, अपने सर को पीछे की तरफ उठा लिया. पूनम का बदन इस कदर अकड़ गया था, कि उसका सर और चूतड़ ही, नीचे बिस्तर को छू रहे थी. बाकी सारी पीठ हवा मे 1 इंच ऊपेर उठ गयी थी.

पूनम ने रवि के बालों को कस के पकड़ लिया. और मस्ती मे आकर आह ऑश सीईईई जैसी सिसकारियाँ उसके मुँह से निकलने लगी. और उसके हाथों की उंगलियाँ तेज़ी से रवि के बालों मे घूमने लगी.

पूनम: उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह रवीीई मुझिी छोड़ दूओ अहह बहुतत्तत्त गुद्द्दद्ड गुदि हो रही हिी ओह प्ल्स रवीिइ ओह

जैसे ही पूनम का विद्रोह कम हुआ, रवि ने अपने दोनो हाथों से, पूनम के लोवर के जबरन की इलास्टिक मे अपनी उंगलियों को फँसा कर, लोवर को नीचे सरकाना चालू कर दिया. पूनम मस्ती मे कमजोर पड़ गयी थी. उसने रवि को ऐसे करने से नही रोका. और रवि ने एक झटके मे, पूनम के लोवर को उसकी जाँघो के नीचे तक सरका दिया.

पूनम का दिल जोरों से धड़क रहा था. उसकी चूत के फाँकें फडफडाने लगी थी. और अब उसने अपने आप को रवि को समर्पित कर दिया था. पर फिर भी शरम और हया के कारण पूनम अपने हाथों को रवि के सर से हटा कर, नीचे ले गयी. और अपने लोवर को पकड़ कर ऊपेर करने की कॉसिश करने लगी.

पर रवि अब उससे दो कदम आगे था, उसने पूनम के हाथों को पकड़ लिया, और अपने होंठो को उसकी नाभि से हटा कर, उसकी पैंटी के ऊपेर से उसकी चूत के फांकों पर रख दिया. पूनम की तो जैसे जान ही निकल गयी हो. उसकी आँखे किसी शराबी की आँखों की तरहा ऊपेर को चढ़ने लगी. और उसने अपने लोवर को छोड़ कर रवि की कलाईयों को कस के थाम लिया.

पूनम की कमर झटके खाने लगी. और उसकी चूत की दीवारों मे तेज़ी से खुजली सी होने लगी.

पूनम: उनहगगगगगग उंघह रवीीईई ओह ये क्याअ क्याअ कर रही हो आह आह उंह सीईईईई ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

रवि ने अपने हाथों को झटकते हुए, पूनम से अपनी कलाईयों को छुड़वा लिया. और पूनम के हाथों को पकड़ कर बेडशीट से सटा दिया. और फिर अपने हाथों से पूनम के लोवर को पकड़ कर नीचे सरकाना चालू कर दिया. और साथ-2 मे पैंटी के ऊपेर से उसकी चूत को मुँह मे भर कर चूस रहा था.

कुछ ही पलों मे पूनम का लोवर उसके पैरों से निकल कर, बिस्तर के पास फर्श पर पड़ा था. रवि ने अपने होंठो को पूनम की पैंटी के ऊपेर से हटा लिया. और उसकी जाँघो को पकड़ कर, घुटनो से उसकी टाँगों को मोड़ कर ऊपेर उठा दिया. और खुद पूनम की जाँघो के बीच मे घुटनो के बल बैठ गया.

रवि पूनम की ओर देखने लगा. पूनम अपनी आँखे बंद किए लेटी हुई थी, उसकी चुचियाँ उसके तेज़ी से साँस लेने से ऊपेर नीचे हो रही थी. पूनम ने अपनी हथेलियों मे चादर को कस्के पकड़ रखा था. रवि ने अपने पाजामे को खोल कर उतार कर एक साइड मे रख दिया. और पूनम के एक हाथ को पकड़ कर अपने लंड पर रख लिया. पूनम के दिल की धड़कन एक दम से बढ़ गयी. उसके हाथ कांप रहे थाई. और वो अपने हाथो को पीछे की ओर खैंच रही थी.

पर रवि उसके हाथ को मजबूती से थामे हुआ था. आख़िर कार पूनम ने रवि के 7 इंच लंबे और 2 इंच मोटे लंड को अपनी मुट्ठी मे कस लिया.

रवि: जान एक बार इधर तो देखो.

पूनम ने ना मे सर हिला दिया.

रवि: जान प्लीज़ एक बार.

पूनम ने फिर से ना मे सर हिला दिया.

रवि: क्यों क्या हुआ.

पूनम: मुझ शरम आती है.

रवि: प्लीज़ पूनम एक बार मेरी तरफ देख लो. वरना तुम्हारा ये दीवाना मर जाएगा.

 


पूनम ने अपने धड़कते हुए दिल के साथ, रवि की तरफ फेस को घुमाया, और अपनी वासना और मस्ती से भरी आँखों को खोल कर, रवि की तरफ देखा. रवि उसकी ओर देख कर मुस्कुरा रहा है. और फिर उसकी नज़र अपने हाथ पर गयी. जिससे उसने रवि के लंड को पकड़ रखा था. और फिर से शरमाते हुए, अपनी आँखे बंद कर ली.

रवि ने पूनम की ओर देखते हुए, दोनो ओर से उसकी छोटी सी पैंटी को पकड़ कर नीचे की तरफ सरकाने लगा. पूनम ने रवि के लंड को अपने हाथों से छोड़ दिया.

अब पूनम इतनी मस्त हो चुकी थी. कि रवि को रोकने की बजाय उसने अपने चुतड़ों को हल्का सा ऊपेर उठा लिया. और रवि ने उसकी पैंटी को चुतड़ों से नीचे करते हुए, उसके पैरो से निकाल कर एक साइड मे रख दिया. पूनम अपने फेस को दीवार की तरफ करके लेटी हुई थी.

रवि ने पूनम की टाँगों को उठा कर मोड़ दिया. उसकी कुँवारी चूत रवि की आँखों के सामने थी. जिसे देख रवि का लंड हवा मे झटके खाने लगा. रवि आज पहली बार किसी लड़की की कुँवारी चूत को देख रहा था. पूनम की चूत रज़िया की चूत से एक दम अलग थी. जहाँ रज़िया की चूत के फांके कई लंड अंदर लेने के बाद काली पड़ चुकी थी. वहीं पूनम की चूत की फाँकें एक दम गोरी और चिकनी थी.

रज़िया की चूत की फाँकें लटकी हुई और ढीली थी, और पूनम की चूत के फाँकें एक दम कसी हुई, और आपस मे सटी हुई थी, रवि ने पूनम की जाँघो को दोनो ओर फैला रखा था. जिसके कारण उसकी चूत की फाँकें थोड़ा सा खुली हुई थी. जो आपस मे सतने की कॉसिश कर रही थी.

उसकी चूत का गुलाबी छेद देख कर रवि पागल हुआ जा रहा था. जो उसके काम रस से भीगा हुआ था. रवि की आँखों मे पूनम की कुँवारी चूत देख कर चमक आ गयी थी. और वो एक दम से पूनम की चूत के ऊपेर झुक गया. और अपने हाथों की उंगलियों से चूत की फांकों को खोल दिया.

पूनम की चूत का गुलाबी टाइट छेद, रवि को किसी स्वर्ग के दरवाजे की तरहा दिखाई दे रहा था. पूनम ये सोच कर शरम से मरी जा रही थी, कि रवि उसकी चूत के छेद को अपनी उंगलियों से फैला कर देख रहा है. उसका दिल ये सोच कर धड़क रहा था, कि रवि अपने मोटे लंड को उसकी चूत के छेद पर लगाने वाला है.

पर रवि के मन मे कुछ और ही चल रहा था. उसने अपनी जीभ को बाहर निकाल लिया. पूनम अपनी आँखें बंद किए, अपने हाथों से चादर को कस्के पकड़े हुए थी. इसीलिए उसे आने वाले पलों का बिल्कुल भी अंदाज़ा नही था. रवि ने अचानक से अपनी जीभ को पूनम की चूत के छेद को नीचे से ऊपेर तक रगड़ दिया.

अपनी चूत पर रवि की गरम जीभ को महसूस करके, पूनम सीसियाते हुए, लगभग चिल्ला सी पड़ी. उसका बदन ऐसे अकड़ गया. जैसे उसे दौड़ा पड़ गया हो. उसकी आँखे ऊपेर की ओर चढ़ गयी. मुँह एक दम से पूरा खुल गया. और उसकी साँस उसके हलक मे अटक गयी. जैसे ही रवि ने अपनी जीभ उसकी चूत से हटाई. उसकी साँस मे साँस आई. पर अगले ही पल रवि ने फिर से अपनी जीभ को उसकी चूत के छेद पर वैसे ही रगड़ दिया.

पूनम: उनहगगगगगग अहह उन्घ्ह्ह्ह्ह अहह रवीीईई ईईए ओह ईीई ह ईईई क्याअ ओह ओह कार्रर्ररर रहै हूऊ. ओह मेरीईए जान निकल जाएगीईए माँ रीईई

पर रवि तो जैसे उसकी बात को सुन ही नही रहा था, वो तो एक हाथ से पूनम की चूत के फांकों को फैला कर चूस रहा था. और दूसरे हाथ से उसकी टाँगों को ऊपेर उठाए हुए था. पूनम नीचे लेटी जलबीन मछली की तरह तड़पते हुए सिसकारियाँ भर रही थी.

उसकी चूत की दीवारों पर सरसराहट बढ़ गयी थी. और उसने अपने हाथों से चादर को छोड़ कर रवि के सर को अपने हाथों से पकड़ लिया. और तेज़ी से रवि के बालों को सहलाते हुए, सिसकारियाँ भरने लगी.

पूनम: अहह ओह्ह्ह रवि बसस्स्सस्स बसस्स करो ना ओह मुझे बहुत्त्त्त गुदगुदी हूओ रहै हिईए ओह्ह ओह ओह

रवि: (पूनम की चूत से मुँह को हटाते हुए) क्यों मज़ा नही आ रहा.

पूनम: (मदहोशी से भरी आवाज़ मे) बहुत माजा आ रहा है. रवि मुझ बहुत अच्छा लग रहा है. ऊन्घ्ह्ह्ह उंघह

और रवि ने इस बार पूनम की चूत की फांकों को पूरा मुँह मे भर कर चूस लिया. पूनम का बदन फिर से झटके खाने लगा. रवि ने फिर से अपने मुँह को पूनम की चूत से हटाया. और पूनम की ओर देखते हुए बोला.

रवि: तो फिर अब और चुसू कि नही.

इससे पहले कि पूनम कुछ बोल पाती. रवि ने उसकी चूत की फांकों को अच्छे से फैला कर, उसकी चूत के क्लिट को अपने मुँह मे भर लिया. जो तन कर और उभर कर बड़ा हो गया था. जैसे ही रवि ने चूत के क्लिट को मुँह मे भरा. पूनम अपनी गान्ड को तेज़ी से ऊपेर की ओर उछाल कर सिसकरायाँ भरने लगी. वो इतनी उत्तेजित हो गये कि, अपनी गान्ड को बिस्तर से 2-2 फुट तक ऊपेर की और उछालने लगी.

पूनम: ओह ओह रवि ओह हाआआं चूसो औरर्र जोर्र्र्र्र्ररर से ओह मार डााला ओह उफफफफफफ्फ़ क्या कार्ररर रहै हूऊ हाआअँ आईसीए हिी .

पूनम अब पूरी तरहा मस्त हो चुकी थी. वो ये भी भूल चुकी थी, नयी काम वाली रोमा साथ के रूम मे सो रही है. रोमा नींद से जाग चुकी थी. और साथ वाले रूम से आ रही मादक और मस्ती से भरी हुई सिसकारियों को सुन कर उसके दिल की धड़कन भी बढ़ गयी थी. वो उठ कर रूम की उस दीवार के पास गयी. जो रवि के रूम के दीवार के साथ थी. रवि का रूम हरिया और रोमा दोनो के रूम के बीच मे था.

 
रोमा ने दीवार को ऊपेर से नीचे तक देखा. और फिर उसकी नज़र दीवार के ऊपर बने हुए छेद पर चली गयी. जिसमे से रोसनी निकल कर उसके रूम तक आ रही थी. पर वो छेद काफ़ी ऊपेर था. रोमा का दिल अब रवि के रूम के अंदर झाँकने को कर रहा था. पर छेद काफ़ी ऊपेर था. उसने कमरे मे चारो तरफ नज़र दौड़ाई.

और फिर उसकी नज़र कुछ ऐसे चीज़ों पर पड़ी. जिसपर चढ़ कर वो उस छेद मे से झाँक सकती थी. सबसे पहले उसने रूम मे पड़े, एक पूराने से संदूक को उठाया. और उसे दीवार के पास रख दिया. फिर एक पुरानी लकड़ी के चेर को उठा कर संदूक के ऊपेर रखा. और फिर वो धीरे-2 संभालते हुए चेर पर चढ़ गयी.

दोनो चीज़ों को नीचे रखने से वो लगभर 5 फुट ऊपेर हो गयी थी. अब वो छेद ठीक उसकी आँखों के सामने था. उसने रूम मे झाँक कर देखा. रूम के पीछे की दीवार के साथ एक चारपाई लगी हुई थी. फिर उसकी नज़र रूम के डोर की तरफ गयी. जो अंदर से बंद था. और फिर डोर के साथ वाली दीवार पर. और दीवार के साथ रवि और पूनम को ऐसे हालत मे देख, रोमा के रोंगटे खड़े हो गये.

रवि पूनम की जाँघो को फैलाए हुए, उसकी चूत पर झुका हुआ था. और उसकी चूत को चाट रहा था. पूनम अपने दोनो हाथों से रवि के सर को पकड़ कर अपनी गान्ड को बार -2 उछाल रही थी. उसका पूरा बदन झटके खा रहा था.

पूनम: ओह रवीीईईई जीई भरररर के चुस्स्स्स लीयी अपनी पूनम को आज्ज्जज ओह्ह्ह अगर मुझे पता होताा ओह मुझे इतना मज़ा आएगा. मैं कब्ब्ब से ओह्ह्ह्ह्ह्ह .

और पूनम कहती -2 चुप हो गयी. और उसने शरमा कर अपने फेस पर तकिये को रख लिया. पूनम की बात सुन कर, रवि ने अपने मुँह को उसकी चूत से हटाया. और पूनम के हाथों से तकिया को खैंच कर, उसके फेस से हटा दिया. पूनम अपनी आँखे बंद किए हुए थी. उसके होंठो पर शरम से भरी मुस्कान थी.

रवि: अगर पहले पता होता तो क्या करती.

पूनम: (वासना से लिप्त आवाज़ मे) मुझ नही पता. मुझ शरम आ रही है.

और पूनम ने अपने नंगे पन को छुपाने के लिए, रवि की बगलों मे से अपनी बाहें गुज़ारते हुए, रवि को अपने ऊपेर खैंच लिया. रवि एक दम से उसके ऊपेर आ गया. और उसका लंड जो कि तन कर एक दम फूला हुआ था. वो सीधा पूनम की चूत के फांकों पर जा टकराया.

पूनम के बदन मे बिजली सी दौड़ गयी. और वो थोड़ा सा कसमासाई. उसके हिलने से रवि के लंड का सुपाडा, उसकी चूत की फांकों पर रगड़ ख़ाता हुआ, उसकी चूत के छेद पर जा लगा.

रवि के लंड के गरम सुपाडे को अपनी चूत के छेद पर महसूस करते है. वो एक दम से मचल उठी, और उसने अपनी आँखे खोल कर रवि की ओर देखा. रवि के होन्ट उसकी चूत काम रस से एक दम भीगे हुए थे. जो उसे थोड़ा गंदा सा लग रहा था. पूनम अपनी चूत के छेद पर रवि के लंड को महसूस करके मचले जा रही थी.

पूनम: (काँपती हुई आवाज़ मे) तुम्हें वहाँ मुँह ओह लगाना गंदा नही लगा ओह्ह्ह मेरी जानणन्न् निकाल दी तुमने ओह.

रवि: मैं तुम्हें और तुम्हारे बदन के हर हिस्से को अपनी जान से ज़्यादा प्यार करता हूँ. ये तो फिर भी तुम्हारी चूत से निकाला तुम्हारे प्रेम का रस ही. मे तो तुम्हारे लिए जहर भी पी सकता हूँ.

पूनम एक बार फिर से रवि की बातों मे आकर भावनाओ मे बहने लगी. उसे रवि पर बहुत प्यार आ रहा था. और उसने अपना रवि के लिए प्यार जाहिर करने के लिए. अपनी चूत के रस से भीगे हुए, रवि के होंठो को अपने होंठो मे ले लिया. और पागलों की तरहा चूसने लगी.

उधर साथ वाले कमरे मे रोमा का भी बुरा हाल था. वो ब्लाउस और पेटिकोट पहन कर सोई हुई थी. बेचारी पति की मौत के बाद से उसने आज पहली बार लंड को देखा था. उसका पेटिकॉट उसकी कमर तक चढ़ा हुआ था. और ब्लाउस के आगे के तरफ सारे हुक्स खुले हुए थे. वो अपनी हाथ की एक उंगली को चूत मे डालकर तेज़ी से अंदर बाहर कर रही थी. और दूसरे हाथ की उंगलियों से अपनी चुचियों के निपल्स को बारी-2 मसल रही थी.

रवि भी पूनम की चुचियों को अपने हाथों मे मसलते हुए, तेज़ी से पूनम के होंठो को चूस रहा था. और पूनम मस्ती के सागर मे डूबी जा रही थी. उसकी चूत की फांके, रवि के लंड के सुपाडे के चारो और कसी हुई थी. उसकी चूत की फाँकें फड़फदा कर सिकुड और फैल रही थी.

पूनम की चूत मे आग अब इस्कदर बढ़ गयी थी. कि अब उससे रुका नही जा रहा था. और वो अपनी बाहों को रवि की पीठ पर कसे हुए. अपनी कमर को धीरे-2 ऊपेर करके, रवि के लंड के सुपाडे पर अपनी चूत के छेद को दबाने लगी.

रवि जानता था, कि पूनम की चूत एक दम कोरी है. अगर उसने बिना किसी चेतावनी के अपने लंड को उसकी चूत मे घुसाया तो, बात बिगड़ने का ख़तरा है.

रवि: (पूनम के होंठो से अपने होंठो को हटाते हुए) पूनम तुम्हे पता है. जब कोई लड़की पहली बार चुदवाती है, तो उसे बहुत दर्द होता है.

पूनम: (काँपती हुई आवाज़ मे) हां मैने ओह स्कूल मे सहेलियों से सुना हैं. पर तुम मुझे इतना प्यार करते हो. मे तुम्हारे लिए इतना तो सह ही सकती हूँ. तुम्हरे लिए मेरी जान भी हाजिर है.

रवि ने पूनम के होंठो पर अपने होंठो को रख कर फिर से चूसना चालू कर दिया. और अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपने लंड को पकड़ कर लंड के सुपाडे को अच्छे से पूनम की चूत के छेद पर लगा दिया. और अपनी कमर को पूरी ताक़त से आगे की तरफ हिलाया.

रवि के लंड का सुपाडा पूनम की गीली हो चुकी चूत की सील को तोड़ता हुआ अंदर घुस गया. उसके लंड का मोटा सुपाडा, पूनम की चूत के टाइट छेद मे फँस सा गया. और चूत की फांकों ने सुपाडे के चारो तरफ फँदा सा कस लिया.

पूनम नीचे पड़ी हुई दर्द के मारें छटपटा उठी. उसने अपने हाथों के नाख़ून को रवि की पीठ पर गढ़ा दिया. और उसके मुँह से चीख निकल कर रवि के मुँह मे घुट कर रह गयी. पूनम ने अपने फेस को दूसरे तरफ करते हुए, अपने होंठो को रवि के होंठो से अलग कर लिया. और तेज़ी से साँसें लेते हुए कराहने लगी.

रवि: क्या हुआ बहुत दर्द हो रहा है.

पूनम: (दर्द से तिलमिलाते हुए) हां रवि बहुत दर्द हो रहा है. बस थोड़ी देर के लिए रुक जाओ ओह बहुत दर्द हो रहै है रवि. आह्ह्ह्ह हाआआं धीरीई -2 अंदर डालो.

रवि ने अपने लंड को फिर से पूनम की चूत मे घुसाने के लिए पोज़िशन ले ली. उसके लंड का सुपाडा, पूनम की चूत मे फँसा हुआ था. पूनम ने अभी अपनी चूत पर रवि के लंड के अगले वार को सहने के लिए तैयारी कर ली.

पूनम ने अपनी आवाज़ को दबाने के लिए. अपने होंठो को दाँतों मे भींच लिया. और रवि की पीठ पर अपनी बाहों को कस लिया.

रवि: पूनम अपनी टाँगों को जितना हो सके फैला लो. इससे तुम्हे दर्द कम होगा.

पूनम ने अपनी टाँगों को घुटनो से मोडे हुए, दोनो तरफ पूरी तरफ फैला दिया. और रवि को अपने लंड को पूनम की चूत मे गहराइयों तक उतारने का मोका मिल गया. रवि ने अपनी साँस रोक कर अपनी पूरी ताक़त अगले झटके मे लगा दी. रवि का लंड पूनम की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ, अंदर और अंदर घुसता चला गया.

इससे पहले कि पूनम दर्द से चीख भी पाती. रवि ने दो बार और अपनी कमर को जबरदस्त तरीके से आगे की तरफ हिलाया. और लंड का सुपाडा पूनम की बच्चेदानी से जा टकराया. पूनम की आँखों मे से आँसू बहने लगे. वो किसी तरहा अपने आप को चीखने रोक ली थी. पर दर्द के मारे उसकी जान निकली जा रही थी.

 
पूनम: (रोते हुए अपनी हथेलियों को रवि की पीठ पर रगर्ते हुए) ओह रवि बहुत दर्द हो रहा है. मे मर जाउन्गी ओह निकाल लूऊओ ईसीए ओह्ह्ह मुझसे सहा नही जा रहा . निकाल लो.

रवि: (पूनम के गालों पर बह रहे आँसुओं को अपने जीभ से चाटते हुए) बस मेरी जान बस तुझे जितना दर्द सहना था. तूने सह लिया. अब देखना थोड़ी देर मे दर्द ख़तम हो जाएगा.

पूनम को रवि का यूँ अपने गालों और आँसुओं को चाट कर उसे प्यार करना बहुत अच्छा लग रहा था. पर दर्द के मारें उसकी जान निकली जा रही थी.

पूनम: (रोते हुए) ओह्ह्ह नही रवीीईईई इसे निकाल लो. मेरी चू.

और पूनम बोलते -2 रुक गयी. और रोते हुए एक दम से चुप हो गयी. उसने अपनी आँखें फिर से बंद कर ली/

रवि: क्या बोले रही थी. तुम्हारी चू क्या

पूनम: ओह मुझे इतना दर्द हो रहा है. और तुम मज़ाक कर रहे हो. बस करो रवि. मुझ मार कर छोड़गे क्या. उईमा.

रवि: (बहुत ही धीरे-2 अपने लंड को पूनम की चूत के अंदर बाहर करते हुए )अच्छा-2 निकाल लेता हूँ. पहले बताओ क्या बोलने वाली थी.

अब पूनम का दर्द भी कम होता जा रहा था. और रवि के लंड के सुपाडे का घर्सन उसे अपनी चूत की दीवारों पर महसूस हो रहा था. जो उसे बहुत सुखद लग रहा था.

पूनम: मे वो कहने वाली ओह्ह्ह्ह रवि उंह उंह सीईईईईई मेरी चूत्त्त्त्त सीईई निकालने की लिए ओह माआअ क़हह रही थीए.

रवि: (अपने लंड को धीरे-2 अंदर बाहर करते हुए) निकल लूँ अपने लंड को तुम्हारी चूत से. बोलो ना.

पूनम: (शर्मीली मुस्कान होंठो पर लाते हुए) नही ओह्ह ओह ओह.

रवि: फिर क्या करूँ. मेरी जान.

पूनम: (रवि के लंड के सुपाडे को अपनी चूत की दीवारों से रगड़ता हुआ महसूस करके एक दम से मस्ती मे आने लगी) ओह्ह्ह्ह ओह रवीीईई चोदूऊ मुझिए अहह मेरी चूत को चोद्द्द ले रवि ओह ओह्ह्ह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईईईईई.

पूनम की आवाज़ अब मस्ती के कारण काँपने लगी थी. उसकी आँखे भारी हो चुकी थी, और वो चाह कर भी अपनी आँखे खोल नही पा रही थी. रवि के लंड का मोटा सुपाडा , पूनम की चूत की दीवारों को फैलाता हुआ अंदर बाहर हो रहा था. और पूनम मस्ती मे आकर अपनी जाँघो को खोल कर रवि के लंड को अपनी चूत मे ले रही थी.

फिर रवि सीधा घुटनो के बल बैठ गया. और अपने लंड को धीरे-2 पूनम की छूट से बाहर निकालने लगा. जैसे ही रवि का पूरा लंड पूनम की चूत के छेद से बाहर आया, तो पूनम की चूत से खून की पतली सी धार बह कर उसकी गान्ड के छेद की तरफ जाने लगी. रवि ने देखा उसका लंड भी खून से सना हुआ है.

रवि जल्दी से बिस्तर से खड़ा हुआ, और तेज़ी से एक पुराने कपड़े को उठा कर अपने लंड को सॉफ करने लगा. पूनम अपनी चूत पर हाथ लगा कर देखने लगी. जब उसने अपने हाथ को अपने सामने लिया. तो उसका रिक्षन देख कर रवि एक दम से हैरान हो गया.

पूनम अपनी चूत से खून निकलता देख, ज़रा भी घबरा नही रही थी. बल्कि उसके होंठो पर हल्की सी मुस्कान आ गयी. रवि तेज़ी से फिर से पूनम की जाँघो के बीच मे आ गया. और उसकी चूत से बहते हुए खून को सॉफ करने लगा.

रवि: (रवि को इस बात का बिल्कुल पता नही था, कि जब किसी कुँवारी लड़की की सील टूटती है तो, उसमे से खून निकलता है. रज़िया ने उसे बस इतना ही बताया था. कि लड़कियों को पहली बार ज़्यादा तकलीफ़ होती है.) पूनम इससे तो खून निकल रहा है. अब क्या होगा.

पूनम: (रवि के हाथ से कपड़ा लेते हुए. पहले उसने अपनी चूत और फिर हाथ को अच्छे से सॉफ किया, और मुस्कुरा कर शरमाते हुए बोली.) तुम भी ना बड़े बुद्धू हो, बोंदु राम. इतने ज़ोर से कर रहे थे. खून नही निकलेगा.

पूनम: अर्रे मेरे पागल मजनू. हर लड़की के पहली बार खून निकलता है.

और पूनम ने रवि को अपने ऊपेर खैंच लिया. और रवि के गालों को पागलों की तरहा चूमने लगी.

पूनम: (रवि के गालों और फेस पर हर जगह चूमते हुए) आहह रवि अब जल्दी करो. मुझसे रहा नही जा रहा.

रवि: (अपने नीचे लेटी पूनम की चुचियों को मसलते हुए) क्या करूँ मेरी जान.

पूनम: (रवि के कंधों पर मुक्के मारते हुए) तुम ना ऐसे नही मनोगे. मेरी चूत मे अपना लंड डाल कर मुझे चोदो.

पूनम को यूँ रंग मे आता देख कर. रवि का दिल ख़ुसी के मारे नाचने लगा. उसने पूनम की एक चुचि को चूस्ते हुए, अपने लंड को पकड़ कर उसकी चूत के छेद पर टिका दिया. पूनम की चूत रवि के लंड को अपने अंदर लेने के लिए पहले से ही फुदक रही थी.

जैसे ही पूनम को अपनी चूत के छेद पर रवि के लंड के गरम सुपाडे का अहसास हुआ. पूनम ने रवि को अपनी बाहों मे कसते हुए, अपनी कमर को ऊपेर की तरफ करना चालू कर दिया. पूनम की चूत जब रवि के लंड के सुपाडे पर दबने लगी.

उसकी चूत की फाँकें फैल गयी. और चूत का छेद रवि के मोटे लंड को अंदर लेने के लिए फैलने लगा. और लंड का सुपाडा चूत के छेद और दीवारों को फैलाता हुआ अंदर घुसने लगा.

पूनम: ओह्ह्ह्ह उंह रवीीईई अब मेरी चूत्त्त को इस तरहा अपने लंड के लिए क्यों तड़पा रहे हो ओह डालो नाअ मेरी चूत मे अपने लंड को.

और रवि अपनी सारी ताक़त इकट्ठी करके अपनी कमर को आगे की तरफ 3-4 बार हिला दिया. लंड का मोटा सुपाडा एक बार फिर से पूनम की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ, उसकी बच्चे दानी से जा टकराया.

 


पूनम: ओह रविई बहुत अच्छा लग रहा है. हान्ंनणणन् आईसीए हाइ अपनेन्णन लंड को मेरीए चूत मे कुछ दर्र्ररर रहिईएन दो ओह. तुम्हारा लंड बहुत बड़ा हाइ ओह्ह्ह्ह माआ.

रवि कुछ देर ऐसे ही अपने लंड को पूनम की छूट मे डाले हुए, उसकी चुचियों को चूस्ता रहा. धीरे-2 पूनम की चूत की नसें फूलने लगी. और उसकी चूत मे और ज़्यादा खुजली होने लगी. और अपनी चूत की खुजली मिटाने के लिए, पूनम अपनी कमर को ऊपेर की ओर उचकाने लगी.

पूनम: (अपने होंठो को रवि के कंधों और गर्दन पर रगड़ते हुए) ओह्ह्ह्ह रवि अब जल्दी से मेरी चूत को अपने लंड से ओह रवि चोदो नाआ ओह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्हो ओह.

और पूनम तेज़ी से अपनी कमर को ऊपेर की ओर उचका कर रवि के लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर करने की कॉसिश करने लगी. उसकी चूत अब पूरी तरहा गीली हो चुकी थी. और रवि के लंड को अपनी दीवारों मे कस-2 कर मसल रही थी.

रवि भी पूनम की चूत की नसों को अपने लंड पर कसता हुआ, महसूस करके मस्त हो गया. और अपने लंड को सुपाडे तक बाहर निकाल कर फिर से एक ही बार मे चूत मे पेलने लगा. लंड चूत गीली होने के कारण फॅक -2 की आवाज़ से अंदर घुस्स गया. पूनम रवि के बदन से एक दम चिपक गयी. उसने अपनी जाँघो को फैला कर अपनी टाँगों को रवि की कमर पर लपेट लिया.

अब रवि का लंड पूनम की चूत की ठुकाई करने के लिए सबसे अच्छी पोज़ीशन मे था. उधर रोमा अपनी चूत मे लगतार उंगली करते हुए, दो बार झाड़ चुकी थी. उसकी चूत , चूत के झांते और उसके हाथ उसकी चूत से निकल रहे रस से एक दम भीग चुके थे. और वो दो बार झड़ने के बाद फिर से गरम हो चुकी थी.

रवि अपने लंड को धीरे-2 पूनम की चूत के अंदर बाहर करने लगा. लंड का सुपाडा चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर हो रहा था. और पूनम भी अपनी चूत को ऊपेर की तरफ उचका-2 कर रवि के लंड को अपनी चूत मे लेकर चुदवा रही थी.

पूनम: ओह रवि आज मुझे ओह्ह्ह्ह माआ जीईई भर क्ीई ओह चोद ले ओह मुझिईए सरीई रात चोद्द्द्द ओह मेरी जानंणणन् उंह उंह

और पूनम रवि के फेस को ऊपेर करके उसके पूरे फेस पर चुंबनो की बोछार करने लगी. ऊपेर से वो रवि के फेस के चारो तरफ चूम कर रवि के लिए अपने प्यार का इज़हार कर रही थी. और नीचे से पूनम की चूत अपना काम रस बहा कर रवि के लंड के लिए अपने प्यार का इज़हार कर रही थी.

दोनो पहले से काफ़ी गरम थे. जब रवि का लंड पूनम की चूत मे जड तक उतरता. तो रवि के लंड की जडो के आस पास का हिस्सा, पूनम की चूत की फांकों और उसके आस पास के हिस्से पर बुरी तरहा चोट करता. पर दोनो एक दूसरे की ओर अपनी कमर को पटक रहे त. पूनम की चूत की फाँकें और आस पास का हिस्सा एक दम लाल हो चुका था. पर वासना इस कदर हावी थी, कि दोनो मे से किसी को होश नही था.

दोनो अब झड़ने के करीब थे, और दोनो तेज़ी से अपने कमर को हिला रहे थे. रवि का लंड अब किसी एंजिन के पिस्टन की तरह तेज़ी से पूनम की चूत के अंदर बाहर हो रहा था. दोनो एक दूसरे से लिपटे हुए, एक दूसरे के बदन को चूम रहे थे.

पूनम: (एक दम मस्ती से भरी आवाज़ मे) ओह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह रवि मेरी चूत आहह ओह्ह्ह्ह पानी छोड़ने वाली है. तेज़ी से अपने लंड से चोदो ना ओह्ह्ह्ह और ज़ोर से और तेजज्ज़ ओह मरर गयी ओह्ह माआ रवि रवि अहह अहह ओह

पूनम का बदन एक दम से ढीला पड़ गया. और रवि भी 3-2 बार अपने लंड को अंदर बाहर करने के बाद उसकी चूत मे अपने वीर्य की बोछार करने लगा. दोनो निढाल होकर लेट गये. जब कुछ देर बाद पूनम की साँसें दुरस्त हुई. उसने जल्दी से अपने ऊपेर से रवि को हटाया. और अपने पैंटी और लोवर पहन कर बाहर की तरफ जाने लगी.

रवि: (जल्दी से खड़ा होते हुए)कहाँ जा रही हो.

पूनम जानती थी, कि अगर रवि का बॅस चले तो, वो उसे सारी रात ऐसे ही अपने कमरे मे चोदता रहे गा. पर पूनम जानती थी, कि दोनो ने कॉंडम के बिना सेक्स किया है. जो ठीक नही है. और वो रवि को रोक भी नही पायगी.

पूनम: वो मे बाथरूम मे जा रही हूँ.

रवि: अच्छा जल्दी आना मे तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ.

ये बोलते ही रवि फिर से अपना पाजामा पहन कर वापिस बिस्तर पर बैठ गया. पूनम ने डोर खोला और, डोर के बाहर जाकर बोली. अब सो जाओ. मे भी अपने रूम मे सोने जा रही हूँ.

और पूनम ये बोल कर तेज़ी से भाग कर अपने कमरे मे आ गयी. और अंदर डोर लॉक कर लिया. जब तक रवि बाहर आया, तो पूनम अपने कमरे मे घुस्स चुकी थी.

रवि अपने होंठो पर मुस्कान लिए अंदर आ गया. और लाइट बंद कर बिस्तर पर लेट गया. उसके दिल को इतना तो सकुन मिल ही गया था, कि अब जब भी आगे उसे मोका मिलेगा. वो पूनम को चोद सकता है

अगली सुबह जब रवि उठा. तो 10 बज चुके थे. जब वो नहा धो कर आगे हवेली मे गया तो, सामने मुरली और उसकी पत्नी निर्मला खड़ी थी.

रवि: अर्रे मुरली काका . आप यहाँ कैसे आना हुआ?

मुरली: वो बाबू जी ने तेरी काकी को यहाँ हवेली मे काम के लिए बुलाया है. वो आज से कुछ महीनो के लिए यहीं रहेगी.

रवि: ओह्ह अच्छा. और सुनाओ आप कैसे हो.

मुरली: मे ठीक हूँ. बेटा तुम कैसे हो?

रवि: मे भी ठीक हूँ काका. और खेतो मे काम कैसे चल रहा है.

मुरली: बस सब ठीक है.

और इतने मे राज भी अपने रूम से बाहर आ गया. निर्मला को देख राज के होंठो पर मुस्कान आ गये. दोनो की नज़रें आपस मे मिली. और निर्मला ने अपनी सारी के पल्लू को अपने होंठो के आगे कर लिया. ताकि किसी को शक ना हो.

राज : और आ गये.

मुरली: जी बाबू जी.

राज : और खेतो मे काम कैसे चल रहा है.

मुरली: बाबू जी सब ठीक है. अच्छा बाबू जी अब मे चलता हूँ.

राज : ठीक है. अगर किसी चीज़ की ज़रूरत पड़े तो मुझ बता देना.

मुरली: जी बाबू जी.

और मुरली वापिस चला गया.

 


राज उस दिन बहुत खुस था. क्योंकि आज उसकी हवेली मे ही उसके लिए चूत का इंतज़ाम हो गया था. पर अभी राज को शायद चूत के लिए थोड़े दिन और तड़पना था. ठीक उसी टाइम फोन की घंटी बज उठी. राज ने फोन उठाया. और बात करने लगा. फोन डॉली की ससुराल से आया था.

जैसे कि मे पहले ही बता चुका हूँ. कि डॉली का पति अपनी माँ बाप की एकलौती औलाद था. और उसकी मौत के बाद. उसके पति का बिजनिस साहिल के नाम उसके सास ससुर ने कर दिया था. उनका बहुत बड़ा बिज्निस था. जिसमे 8-10 करोड़ की तो राज ने इनवेस्टमेंट करी थी, और बाकी का इनवेस्टमेंट का बड़ा हिस्सा डॉली के सास ससुर का था.

जैसे रवि ने डॉली के ससुर की आवाज़ सुनी. उसने डॉली को आवाज़ लगा दी. ये सोच कर कि वो शायद डॉली से बात करना चाहते हों. पर फिर राज जैसे फ़्रीज़ सा हो गया. डॉली उसके पास आकर खड़ी हो गयी. और राज से इशारे से पूछने की कॉसिश करने लगी. कि किसका फोन है. पर राज ने उसे इशारे से चुप रहने को कहा.

डॉली चुप हो गयी. राज ने कुछ देर बात की, और फोन रख दिया. उसके माथे पर शिकन सी आ गयी थी. राज को परेशान देख, डॉली भी परेशान हो गयी.

डॉली: क्या हुआ भैया. क्या बात है किसका फोन था.

राज : कुछ नही तुम्हारे ससुर का फोन था.

डॉली: क्या कह रह थे वो.

राज : कुछ नही. बस जो उन्होने नयी फॅक्टरी शुरू करने के लिए ज़मीन खरीदी थी. उसपर से उसका पहला मालिक कब्जा नही छोड़ रहा है. वो ये कह कर और पैसे माँग रहे है. कि ज़मीन के रेट बढ़ गये हैं.

डॉली: (परेशान होते हुए.) पर भैया. मम्मी पापा ने तो सारे पेपर्स अपने नाम ट्रान्स्फर करवा लिए थे. फिर वो अब ऐसे कैसे कर सकता है. क़ानून नाम की भी कोई चीज़ है.

राज : (हंसते हुए. जैसे डॉली की बात को मज़ाक मे उड़ा रहा हो.) किस क़ानून की बात करती हो. जिसकी आँखों पर काले रंग की पट्टी बँधी होती है.

डॉली: पर ये तो नाइंसाफी है.

राज : (सोफे से खड़ा होते हुए) हूंम्म तुम्हे पता है. जो न्याय की देवी की मूरत कोर्ट मे लगी होती है. उसकी आँखों पर काले रंग की पट्टी सी बँधी होती है. जानती हो पट्टी किस चीज़ की होती है.

डॉली: किस चीज़ की भैया. पर उससे हमे क्या लेना देना.

राज (अपने सर को हिलाते हुए) लेना देना है डॉली लेना देना है. वो पट्टी पैसो की ताक़त वर लोगों की तरफ से बँधी होती है डॉली. और उस पट्टी का क्या करना है मुझ अच्छी तरह पता है.

डॉली: भैया कुछ करो ना. ऐसे तो हमारे बहुत से पैसें डूब जाएँगे.

राज : (डॉली के सर पर हाथ फेरते हुए) तू फिकर क्यों कर रही है. अभी तुम्हारा भाई ज़िंदा है.

और राज ने फोन उठा कर विशाल को कॉल की, और विशाल को सारे बात बताई. विशाल अपने दोस्त के लिए कुछ भी कर सकता था. विशाल ने ये बोल कर फोन रख दिया. कि वो 1 घंटे मे उसके घर पहुँच रहा है.

राज फोन रख कर अपने कमरे मे चला गया. डॉली भी उसके पीछे रूम मे आ गयी.

डॉली: भैया अब आप क्या करने वाले है. मुझे आपके इरादे कुछ ठीक नही लग रहे.

राज : (अपने कुछ कपड़ों को बॅग मे डालते हुए) मे अभी अलीगढ़ जा रहा हूँ.

डॉली: मे भी साथ चलूंगी.

राज : देखो तुम वहाँ जाकर क्या करोगी. तुम ऐसे ही फिकर करने लग जाती हो.

डॉली: नही भैया मुझे भी साथ चलो. और मैं कुछ दिन वहाँ माँ और पापा के साथ रहूंगी.

राज जानता था. कि डॉली भी उसी की तरहा ज़िद्दी है.

राज : ठीक है. जाओ तैयार हो जाओ. और हां रवि को भी तैयार होने के लिए बोल दो. जब मैं वहाँ से वापिस आ जाउन्गा. वो वहीं रहगा तुम्हारी और साहिल की देखभाल के लिए. मुझ कुछ दिन पहले तुम्हारे ससुर ने बताया था कि, उन्होने घर से 1 नौकर को छोड़ कर सब को हटा दिया है.

और वैसे भी अब उन्हे ज़्यादा नौकरों की ज़रूरत नही है. इसीलिए रवि अगर तुम्हारे साथ रहेगा. तो उन्हे भी साहिल और तुम्हे संभालने मे मदद मिल जाए गी. जाओ जाकर तैयार हो जाओ

और डॉली ने जल्दी से बाहर आकर हरिया को बोल दिया कि रवि को तैयार होने के लिए कह दें. और डॉली अपने रूम मे आकर तैयार होने लगी. राज तैयार होकर अपना बॅग उठा कर बाहर आ गया. रवि पहले से बाहर तैयार खड़ा था. उसका मन जाने का बिल्कुल भी नही था. पर वो राज की बात को कैसे टाल सकता था. और शायद होनी को भी यहीं मंजूर था.

राज का रवि और डॉली को साथ लेचलने मे अपना भी स्वार्थ था. क्योंकि डॉली के जाने के बाद राज बिना किसी डर के निर्मला के बदन को भोग सकता था. और रवि ही हवेली के अंदर ऐसा था. जो तेज था, जो शायदा राज के इरादों को भाँप सकता था.

जैसे ही राज बाहर आया. तो बाहर से गार्ड के साथ माखन शर्मा हवेली मे आ गया. गार्ड उसे हाल मे छोड़ कर चला गया.

राज: आओ माखन कैसे हो. तुम्हारा बेटा कैसे है.

माखन: आपकी दया से वो अब ठीक है बाबू जी. दो दिन बाद उसे छुट्टी मिलजाएगी.

राज : अच्छा अगर तुम्हें कोई तकलीफ़ ना हो तो क्या. तुम मेरे साथ 1-2 दिन के लिए अलीगढ़ चल सकते हो.

माखन : बाबू जी आप के मुँह से निकली हुई हर बार अब मेरे लिए भगवान के हुकम के बराबर है. बताए क्या काम है.

राज : कुछ ख़ास नही बस कुछ ज़मीन का लफडा है. चलो गे साथ मे.

माखन : जी बाबू जी. मे बस एक बार घर पर अपने छोटे भाई को बता कर आता हूँ. फिर मे आप के साथ कहीं भी चल सकता हूँ.

ये कह कर माखन शर्मा, अपने घर की ओर चला गया. और थोड़ी देर में है, डॉली भी साहिल को गोद मे उठाए हुए बाहर हाल मे आ गये. हरिया उनके बॅग्स उठा कर गाड़ी मे रखने लगा. करीब आधे घंटे मे विशाल भी राज के पास आ पहुँचा. सब लोग बाहर आ गये. विशाल के साथ उसका एक आदमी भी था. थोड़ी देर इंतजार करने के बाद माखन भी आ गया.

 
क्या हुआ दोस्तो आपकी तरफ से कोई रिस्पोन्स नही मिल पा रहा है
 
राज ने माखन शर्मा को विशाल की कार मे बैठा दिया. रवि राज की कार की पिछली सीट पर साहिल को अपने हाथ लेकर बैठ गया, और डॉली और राज दोनो आगे बैठ गये. दोनो कार्स चल पड़ी. 2 घंटे के सफ़र के बाद वो सब अलीगढ़ पहुँच गये. डॉली के सास घर पर थे. और ससुर अपने ऑफीस मे गये थे.

डॉली ने जाते ही. अपनी साँस के पैर छुए. और डॉली की सास ने घर के नौकर से सब के लिए नाश्ता बनाने को कहा.

राज : (डॉली के साँस से) आंटी अंकल कहाँ है.

साँस: बेटा वो तो ऑफीस गये है.

राज : तो ठीक है. हम वहीं जाकर उनसे बात कर लेंगे.

चाइ नाश्ते के बाद राज विशाल और माखन शर्मा के साथ डॉली के ससुर के पास उनके ऑफीस पहुँच गये. डॉली का ससुर अजीत शर्मा एक बहुत ही सुलझा हुआ बिजिनिस मॅन था. पर इस मामले मे वो अपने आप को बहुत अकेला महसूस कर रहा था. राज ने अजीत शर्मा के कॅबिन के डोर नॉक किया.

अजीत शर्मा: (कॅबिन के अंदर से) कम इन.

और राज विशाल को लेकर अंदर चला गया. माखन शर्मा और विशाल के साथ आया हुआ आदमी बाहर रिसेप्षन मे सोफे पर बैठ गये.

अजीत शर्मा: (राज को देख कर अपनी चेर से खड़े होते हुए) अर्रे आओ बेटा. मे तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था. प्लीज़ बी सीट.

दोनो अजीत शर्मा के सामने चेर्स पर बैठ गये. अजीत शर्मा रिसेप्षन पर फोन करके कोल्ड ड्रिंक्स मँगवाई. और राज विशाल से अजीत शर्मा को मिलवाने लगा.

राज शर्मा: अंकल ये मेरा दोस्त है विशाल.

विशाल ने अजीत शर्मा से हाथ मिलिया.

राज शर्मा: अब बताए अंकल आख़िर बात क्या है.

अजीत शर्मा: बात वही है बेटा जो मेने तुम्हे सुबह बताई थी.

विशाल: अंकल बस आप उस आदमी का नाम बता दो. और वो कहाँ मिलेगा. बाकी हम देख लेंगे. आप को चिंता करने के ज़रूरत नही है.

अजीत शर्मा: (अपनी नम हुई आँखों को सॉफ करते हुए) काश कि मेरा बेटा इस दुनियाँ मे होता. तो किसी की हिम्मत नही होती मुझसे उलझने की.

राज : (अजीत के हाथ के ऊपेर अपने हाथ को रखते हुए) अंकल क्या आप मुझ अपना बेटा नही मानते.

अजीत शर्मा: नही बेटा ऐसे बात नही है. अब जो भी है. मेरे लिए तो तुम सब ही हो.

राज : बस फिर आप जल्दी से उस हरामजादे का नाम बता दो.

अजीत शर्मा ने एक विज़िटिंग कार्ड राज की तरफ बढ़ा दिया.

अजीत शर्मा: इस पर उसका नाम फोन नंबर. घर का अड्रेस, और ऑफीस का अड्रेस सब है.

राज शर्मा: (कार्ड पर लिखे नाम को पढ़ते हुए) बलजीत शर्मा. लगता है इससे मिलना ही पड़ेगा. अच्छा अंकल हम इससे मिल कर आते हैं.

विशाल राज दोनो अजीत शर्मा के ऑफीस से बाहर आ गये. उनको देख माखन शर्मा और विशाल के साथ आया हुआ, आदमी उनके पीछे बाहर आ गये

राज : (बाहर आते हुए.) विशाल अब इस बलजीत का क्या करना है.

विशाल: मे जानता हूँ इसका क्या करना है.(विशाल पीछे मूड कर उन दोनो की तरफ देखता है) तुम दोनो तैयार हो जाओ. अब देखते हैं, तुम्हारे बाजुओ मे कितनी जान है.

चार कार मे बैठ कर कार्ड पर लिखे हुए अड्रेस की तरफ चल पड़ते हैं.

माखन: बाबू जी आप ज़रा भी चिंता ना करो. मैं साले के पसलियां तोड़ दूँगा.

विशाल: बिल्कुल ऐसा ही करना पड़ेगा. उस साले के साथ.

और वो लोग कुछ ही देर मे बलजीत के ऑफीस के अंदर थे. जैसे ही वो लोग बिल्डिंग मे एंटर हुए, तो सामने एक लड़की रिसेप्षन पर खड़ी थी. विशाल उस लड़की के पास गया.

विशाल: हमे बलजीत से मिलना है.

लड़की विशाल और राज की तरफ देखने लगी…….बोलिए क्या काम है आप को?

विशाल: जी आप बस उससे इतना कह दो, कि विशाल और राज उससे बात करना चाहते हैं.

लड़की ने फोन उठाया. और इंटरकम से बलजीत के ऑफीस का नंबर. डायल किया.

बलजीत अपने ऑफीस मे चेर पर बैठा हुआ था. और उसके सामने एक लड़की नीचे घुटनो के बल बैठी हुई, उसके लंड को चूस रही थी. और बलजीत अपनी आँखे बंद किए हुए, जन्नत की सैर कर रहा था. जैसे ही फोन के रिंग बजी, बलजीत ने फोन उठा लिया. वो लड़की बिना रुके बलजीत के लंड को चूस रही थी.

बलजीत: (गुस्से से) क्या है, क्यों परेशान कर रही हो.

लड़की: सर कोई विशाल और राज आप से मिलना चाहते है.

बलजीत बात सुन कर थोड़ा सोच मे पड़ जाता है. और उस लकड़ी को बाहर जाने का इशारा किया. वो लड़की उठ कर बाहर चली गयी. बलजीत ने अपने लंड को अपनी पेंट मे किया. और पेंट ठीक करते हुए बोला.

बलजीत: उन्हें वेट करने के लिए बोलो.

लड़की: जी ठीक है.

लड़की: आप थोड़ी देर वहाँ बैठ कर वेट करें. सर अंदर बिजी हैं.

विशाल: तुम्हारे सर का ऑफीस कहाँ हैं.

लड़की एक रूम की तरफ इशारा करती है. विशाल राज की तरफ देखता है. और दोनो बलजीत के ऑफीस की तरफ जाने लगते हैं.

लड़की: (पीछे से ) सर प्लीज़ आप ऐसे अंदर नही जा सकतें. आप यहाँ बैठ कर वेट करो. सर आप को बुला लेंगे.

विशाल: तुमने हमें समझ क्या रखा है. मुझे वेट करने की आदत नही है.

अंदर शोर सुन कर बाहर खड़े दो सेक्यूरिटी गार्ड राज और विशाल की तरफ भागते हैं. और उनमे से एक राज के कंधे को पकड़ लेता है. पर अगले ही पल माखन उस आदमी को पीछे से गले से पकड़ लेता है. और उस आदमी का हाथ राज के कंधे से निकल जाता है. जैसे ही वो माखन की तरफ घूमता है. उसकी आँखों के सामने अंधैरा छा जाता है.

क्योंकि तब तक माखन शर्मा अपने बड़े से हाथ का घूँसा बना कर उसके मुँह पर दे मारता है. वो आदमी वहीं ढेर हो जाता है. और फर्श पर गिर जाता है. दूसरे गार्ड के होश वैसे ही उड़ जाते हैं. और वो वही रुक जाता है. राज और विशाल एक दम से बलजीत के ऑफीस के अंदर आ जाते हैं.

बलजीत जैसे ही अपने सामने विशाल और राज को देखता है, उसके होश उड़ जाते हैं. और वो अपनी चेर से खड़ा हो जाता है. राज और विशाल दोनो उसके सामने चेर्स पर बैठ जाते हैं.

विशाल: अबे साले ऐसे क्या देख रहा है. अपने बाप को पहचाना नही.

बलजीत को कुछ याद आता है. और उसके माथे पर पसीना आने लगता है. वो चेर पर बैठ जाता है.

बलजीत: क्या चाहिए तुम्हे. और तुम ऐसे किसी के भी ऑफीस मे कैसे घुस सकते हो.

विशाल: अबे चुप कर हराम की औलाद. हमें कॉन रोक सकता है. और सुन तूने भाई के रिश्ते दार की ज़मीन पर कब्जा कैसे कर लिया.

बलजीत: आप किसकी बात कर रहे हैं.

राज : अजीत शर्मा की बात कर रहे हैं.

बलजीत थोड़ी देर सोचता है. और फिर कहता है. पर अगर आप को वो ज़मीन चाहिए. तो और पैसे देने पड़ेंगे.

विशाल: अच्छा ठीक है. तूने पिछले महीने मेरे गाँव के साथ वाले गाँव मे बहुत सी ज़मीन खरीदी है ना. अब तू उसपर कदम रख कर दिखा. साले जिंदा गाड दूँगा वहाँ पर.अगर तूने वहाँ कदम भी रखा तो.

विशाल राज को इशारा करता है. और दोनो उठ कर बाहर आ जाते हैं.

राज : अब इसका क्या करना है.

विशाल: कुछ नही. जो करना था कर दिया. देखना अब साला कैसे लाइन पर आता है.

फिर वो लोग कार मे बैठ कर वापिस अजीत शर्मा के ऑफीस की तरफ चल पड़ते. और कुछ ही देर मे दोनो अजीत शर्मा के ऑफीस के अंदर थे. और अजीत शर्मा ने उनका स्वागत बड़ी सी मुस्कान के साथ किया.

राज : (अजीत शर्मा के सामने चेर पर बैठते हुए.) क्या बात है अंकल आप बहुत खुश लगे रहे है.

अजीत शर्मा: हां राज अभी-2 उस बलजीत के बच्चे का फोन आया था. मुझसे माफी माँग रहा था. और कह रहा था. कि उससे ग़लती हो गयी है. आप अपनी ज़मीन वापिस ले लो.

विशाल: देखा ना साले की दुखती रग पर हाथ रखा, तो कैसे तड़प रहा है.

राज : अच्छा अंकल जी अब हम चलते हैं. वापिस गाँव भी जाना है.

अजीत शर्मा: अर्रे भाई आज रात रुक जाओ. आज ही तो आए हो.

राज : नही अंकल जी. वहाँ का काम भी तो देखना है. वैसे भी डॉली यहाँ पर कुछ दिन रहने वाली है.

और राज ने सामने पड़ी टेबल पर रखे हुए फोन का उठाया, और अजीत शर्मा के घर का नंबर. डाइयल किया. और डॉली से बात की, और ये बता दिया कि, वो यहीं से वापिस गाँव की ओर लौट रहे हैं.

उसके बाद राज और विशाल अपने आदमियों को साथ लेकर गाँव की तरफ निकल लिए. राज शाम को अपनी हवेली मे था. वो शायद इसीलिए जल्दबाज़ी मे था, क्योंकि आज हवेली मे निर्मला भी थी..

राज शाम को गाँव पहुँच जाता है. कुछ देर विशाल उसके साथ बैठ कर बातें करता है. और फिर ये बोल कर चला जाता है, कि उससे जब भी ज़रूरत हो बस एक फोन कर दे. विशाल के जाने के बाद राज अपने रूम मे चला गया. हरिया और निर्मला खाना तैयार कर चुकी थी. निर्मला राज के रूम मे आ गयी.

निर्मला: (होंठो पर कामुक मुस्कान लिए हुए) बाबू जी खाना तैयार है. कहें तो खाना लगा दूं.

राज : (निर्मला की तरफ देखते हुए) हां लगा दो.

निर्मला बाहर आकर हरिया के साथ टेबल पर खाना लगाने लगी. जैसे ही खाना टेबल पर लगा. राज रूम से बाहर आ गया. और चेर पर बैठ गया.

राज : हरिया तुम आज कहाँ सो रहे हो.

हरिया: जैसे आप कहें बाबू जी.

राज : तुम्हारी बेटी आई हुई है ना. इसीलिए आज तुम पीछे अपने रूम मे सो जाना.

हरिया: ठीक है बाबू जी.

राज : आज निर्मला यही सो जाएगी.

निर्मला पास खड़ी राज की बातें सुन कर ही गरम हो रही थी. उसे पता था, कि आज राज उसकी चूत के जम कर चुदाई करने वाला है.

हरिया अपना और अपनी बेटी का खाना लेकर पीछे चला गया. रोमा भी पीछे चली गयी. खाना खाने के बाद राज ने हाल के मेन डोर को अंदर से लॉक कर दिया. और निर्मला को अपने रूम मे आने का इशारा करके अंदर चला गया.

थोड़ी देर बाद जब निर्मला रूम मे आई तो, उसका दिल राज को देख कर जोरों से धड़कने लगा. राज सिर्फ़ अंडरवेर मे उसकी तरफ पीठ करके खड़ा था. राज उसकी तरफ पलटा. तो निर्मला ने होंठो पर कामुक मुस्कान लाकर उसकी तरफ देखने लगी. और फिर राज की तरफ आने लगी.

निर्मला: क्या बात है बाबू जी. बड़ी जल्दी मे हो. इतनी जल्दी कपड़े भी उतार दिए.

और निर्मला ने पास आकर राज के लंड को अंडरवेर के ऊपेर से अपनी हथेली मे पकड़ लिया.राज ने भी निर्मला को उसके चुतड़ों से थाम लिया, और धीरे से उसके दोनो चुतड़ों को मसलने लगा.

निर्मला: आहह बाबू जीए. और ज़ोर से दबाइए ना. मुझ आप के हाथों की सख्ती बहुत पसंद है. ज़ोर-2 से दबाइए ना.

राज ने उसके चुतड़ों को उसके साड़ी और पेटिकॉट के ऊपेर से ज़ोर-2 से दबाना चालू कर दिया. निर्मला के मुँह से मस्ती भरी सिसकारियाँ निकलने लगी.

 
निर्मला ने अपना हाथ राज के लंड से हटा लिया. और दोनो हाथों से अपने ब्लाउस के बटन खोलने लगी. जैसे-2 निर्मला अपने ब्लाउस के बटन खोल रही थी. राज की आँखों के चमक बढ़ती जा रही थी. निर्मला ने अपने ब्लाउस के सारे बटन खोल कर ब्लाउस एक तरफ फैंक दिया.

अब उसके बड़े-2 आमो जैसे बूब्स उसकी वाइट कलर की ब्रा मे कसे हुए फड़ फडा रहे थे. राज पीछे हट गया. और निर्मला जल्दी से अपनी साड़ी और पेटिकॉट को उतारने लगी. कुछ ही पलों मे निर्मला सिर्फ़ वाइट कलर की पैंटी और ब्रा मे राज के सामने खड़ी थी.

राज का लंड निर्मला के गुदाज बदन को देख कर अंडरवेर मे झटके खाने लगा. और वो अपने लंड को अंडरवेर के ऊपेर से मसलने लगा.

राज : (अपने लंड को मसलते हुए) अब जल्दी से इन्हे भी उतार दे. चल जल्दी कर.

राज का इशारा ब्रा और पैंटी की तरफ था. राज का उतावला पन देख कर, निर्मला के होंठो के होंठो पर कामुक सी मुस्कान फैल गयी. और अपने हाथों को अपनी पीठ के पीछे ले गई. और अपनी ब्रा के हुक्स को खोलने लगी.

जैसे ही निर्मला ने अपनी ब्रा को उतारा. उसकी चुचियाँ उछल कर बाहर आ गयी. जिसके निपल्स देख कर राज के मुँह मे पानी आ गया. और वो निर्मला के करीब जाने लगा.

राज से रहा नही गया, और उसने आगे बढ़ कर निर्मला की पीठ पर अपनी बाहों को कस लिया. और अपने हाथों को उसके चुतड़ों की तरफ बढ़ाने लगा. निर्मला के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी. और वो राज से चिपक गयी.

निर्मला की चुचियाँ राज की नंगी चैस्ट मे रगड़ खा रही थी. उसकी चुचियाँ के निपल्स की रगड़ अपनी चैस्ट पर महसूस करके, राज का लंड और तन गया.

राज निर्मला की पैंटी को दोनो साइड से पकड़ कर, उसके चुतड़ों से नीचे सरका दिया. और उसके चुतड़ों को दोनो हाथों मे पकड़ कर कसकस के दबाने लगा. निर्मला मस्ती के सागर मे गोते खा रही थी.

राज ने उसे बेड पर पटक दिया. और किसी भूखे जानवर की तरह उसके ऊपेर आ कर उसकी चुचियों को मसल्ने लगा.

निर्मला: अहह बाबू जी धीरे ओह्ह्ह जान निकाल दीए ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह बाबू जी धीरे ओह्ह्ह्ह.

राज: साली तुझे मेरे हाथों की सखती बहुत पसंद है ना. ये ले, देख आज तेरे बदन को कैसे मसलता हूँ.

राज ने निर्मला की लेफ्ट चुचि को मुँह मे लेकर सक करना चालू कर दिया. निर्मला की आँखे मस्ती मे बंद होने लगी. राज किसी भूखे बच्चे की तरहा उसकी चुचियों को बारी-2 चूस रहा था. और निर्मला उसके नीचे लेटी हुई कसमसा रही थी.

निर्मला: बाबू जीईए अह्ह्ह्ह और ज़ोर से चूसो अहह बहुत अच्छा लग रहा है. हान्णन्न् पी जाओ मेरी चुचियाँ का सारा रस ओह मॅजा आ गया.

निर्मला की पैंटी उसकी जाँघो मे फसी हुई थी, उसकी चूत के फाँकें राज का लंड लेने के लिए फडक रही थी. राज का लंड भी पूरी तरहा फूल कर निर्मला की नाभि पर रगड़ खा रहा था. अचानक से राज घुटनो के बल बैठ गया. और उसकी पैंटी को दोनो तरफ से पकड़ कर खैंचते हुए, उतारने लगा.

निर्मला की चूत मे पहले से आग लगी हुई थी. वो तो बस राज के लंड को अपनी चूत मे जल्दी से जल्दी महसूस करने के लिए मचल रही थी. उसने भी अपनी गान्ड को थोड़ा सा ऊपेर उठा दिया. जिससे राज ने आसानी से निर्मला के पैंटी को निकाल कर एक तरफ फैंक दिया. और खुद के अंडरवेर को भी उतार दिया.

निर्मला की चूत मे राज का फनफनाता लंड देख कर और पानी आने लगा. और वो अपने होंठो को दाँतों मे भींच कर बड़ी ही कामुकता के साथ राज के लंड को वासना भरी नज़रों से देखने लगी.

निर्मला: आह बाबू जी आप का लंड कैसे लोहे की रॉड जैसे खड़ा है. अब जल्दी से अपना लौडा मेरी भोसड़ी मे घुस्सा दो ना. देखो ना मेरी चूत कैसे अपनी लार टपका रही है, आप के लंड को देख कर.

राज ने निर्मला की टाँगों को घुटनो से मोड़ कर ऊपेर उठा दिया. और उसकी जाँघो को दोनो तरफ फैला दिया. निर्मला अपने हाथों को अपनी चूत पर ले गयी. और अपनी चूत की फांकों को पूरी तरहा फैला दिया.

निर्मला की चूत का छेद उसके कामरस से लबालबा रहा था. उसकी चूत का चेड कभी फैल और कभी सिकुड रहा था. निर्मला की चूत का गुलाबी भीगा हुआ छेद देख कर, राज का लंड और झटके खाने लगा.

निर्मला: (अपनी चूत के गीले छेद को राज को दिखाते हुए) आहह देखो ना बाबू जी आप का लंड लेने के लिए कैसे मेरी चूत लार टपका रही है. अब इसकी रगड़ रगड़ कर चुदाई कर दो.

राज ने अपने लंड के सुपाडे को निर्मला की चूत के छेद पर टिका दिया. जैसे ही निर्मला की चूत के छेद पर राज का मोटा गरम सुपाडा लगा. निर्मला की आँखे मस्ती मे बंद हो गयी. उसने अपने हाथों से अपनी चूत की फकॉं को छोड़ दिया. और चूत की फाके राज के लंड के सुपाडे पर कसने लगी.

निर्मला: अह्ह्ह्ह बाबू जीई अब डाल भी दो मेरी चूत मे आग दहक रही ही. ओह बाबू जीई चोदो मुझे.

राज ने अपने हाथों से निर्मला की जाँघो को घुटनो के पास से पकड़ कर उसके जाँघो को उसके पेट से सटा दिया. और अपनी कमर को पूरी रफ़्तार से आगे की तरफ धकेला. लंड का सुपाडा निर्मला की चूत के छेद को फैलाता हुआ अंदर घुस गया. निर्मला की आँखे बंद हो गयी. उसके होंठो पर मुस्कान फैल गयी.

निर्मला: उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह सीईईई बाबू जी बहुत मोटा लंड है आपका ओह्ह्ह बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसे ज़ोर जोर्र्र से धक्के मारो ना. ओह्ह ओह

राज निर्मला की बातें सुन कर जोश मे आ गया, और तेज़ी से अपनी कमर हिलाते हुए. अपने लंड को निर्मला की चूत मे अंदर और अंदर करने लगा. निर्मला अपनी चूत की दीवारों पर राज के मुन्सल लंड के मोटे सुपाडे की रगड़ को महसूस करके और मस्त हो गयी. और वो अहह सीईईईईई उंह जैसे मादक सिसकारियाँ भरने लगी.

राज का लंड निर्मला की चूत से निकल रहे पानी से गीला होकर फॅक-2 की आवाज़ करते हुए अंदर बाहर हो रहा था. निर्मला ने भी मस्ती मे आकर अपने चुतड़ों को ऊपेर की तरफ उछाल-2 कर अपनी चूत को राज के लंड पर पटकना चालू कर दिया. दोनो की जाँघो के जडे आपस मे टकरा कर ठप-2 की आवाज़ कर रही थी.

निर्मला: (तेज़ी से अपनी जाँघो को फैला कर ऊपेर की तरफ अपनी चूत को उछालते हुए) हाअ हाां बाबू जी ओह्ह्ह उम्ह्ह्ह्ह्ह और ज़ोर से चोदो ओह फाड़ दो मेरी चूत को उम्ह्ह सीयी ओह्ह्ह्ह बाबू जी मेरी चूत पानी छोड़ने वाली है. भर दो मेरी चूत को अपने वीर्य से ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.

राज के तबडतोड़ धक्कों से निर्मला का पूरा बदन हिल रहा था. उसका बदन अकडने लगा. और उसने बेड शीत को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उछालना चालू कर दिया. और फिर उसका बदन झटके खाने लगा. और उसकी चूत से गरम पानी की नदी बह निकली. राज भी उसके पीछे -2 झड गया. और उसके ऊपेर लूड़क गया.

दूसरी तरफ डॉली के ससुराल मे अगले दिन.

दोपहर का वक़्त था. घर का नौकर वापिस जा चुका था. अब वो शाम को वापिस आने वाला था. डॉली की सास अपने रूम मे सो रही थी. डॉली ऊपेर अपने रूम मे सो रही थी. रवि को डॉली के साथ वाला छोटा सा स्टोर रूम रहने के लिए दिया गया था. स्टोर रूम मे काफ़ी पुराना समान पड़ा हुआ था, और एक बेड लगा हुआ था. जिसपर रवि बैठा हुआ तेज़ी से अपने लंड को अपने हाथ से हिला रहा था. वो चूत ना मिलने के कारण थोड़ा परेशान था. तभी उसके डोर पर नॉक हुआ, रवि एक दम से घबरा गया.

रवि: ( अपने शॉर्ट्स को ऊपेर करते हुए) कॉन ही.

डॉली: रवि मुझे नहाना है. तुम ज़रा मेरे रूम मे आकर साहिल के पास बैठ जाओ.

रवि: (डोर खोल कर) चलें दीदी……

और रवि डॉली के पीछे उसके रूम मे आ गया. साहिल बेड पर बैठा हुआ, अपने खिलोनो से खैल रहा था. रवि बेड पर बैठ गया, और डॉली एक नाइटी लेकर बाथरूम मे जाने लगी. रूम मे अंधेरा था. पर जैसे ही डॉली ने बाथरूम का डोर खोला. और अंदर जल रही लाइट से डॉली की नाइटी जो उसने पहनी हुई थी. उसके अंदर का बदन नाइटी मे सॉफ दिखाई देने लगा….डॉली ने अंदर कुछ नही पहना हुआ था. उसका साँचे मे ढला बदन नाइटी के अंदर से रवि के ऊपेर कहर ढा रहा था. डॉली बाथरूम मे घुस्स गयी.

बाहर रवि का लंड उसके शॉर्ट्स मे लोहे की रोड की तरह खड़ा झटके खा रहा था. रवि अपने लंड को शॉर्ट के ऊपेर से सहलाने लगा. जैसे ही रवि के कानो मे पानी गिरने की आवाज़ पड़ी…उसकी दिल की धड़कन तेज हो गयी, और वो ना चाहते हुए भी, बाथरूम के डोर के पास आकर खड़ा हो गया….अंदर से डॉली के गुनगुनाने की आवाज़ आ रही थी. रवि अपने पर काबू ना रख सका, और घुटनो के बल नीचे बैठ कर के होल से अंदर झाँकने लगा……

जैसे ही उसकी नज़रें डॉली पर पड़ी, उसके दिल ने धड़कना बंद कर दिया. उसकी नज़रों के सामने डॉली का दूधिया बदन था. डॉली की पीठ डोर की तरफ थी. रवि की आँखे उसके बदन के हर हिस्से को नाप रही थी…..एक दम गोरी चिकनी पीठ और नीचे पतली कमर देख कर रवि का लंड झटके खाने लगा….जब डॉली अपने बदन को अपने हाथों से रगड़ती, तो उसके दोनो चूतड़ मटकने लगते…जिसे देख रवि मस्ती के सागर मे डूबता जा रहा था….शवर के नीचे खड़े-2 डॉली डोर की तरफ पलट गयी….रवि की आँखों के सामने एक मेच्यूर और दुनियाँ की सबसे हसीन औरत के बूब्स थे…..

रवि को अपना थूक अपने गले के नीचे गटकना मुस्किल हो गया. वो तेज़ी से अपने लंड को अपने शॉर्ट्स के ऊपेर से मसलने लगा…..डॉली की 36 साइज़ की चुचियाँ एक दम कसी हुई और गुदाज थी…उसके निपल्स एक दम तने हुए थी……और ऊपेर की तरफ झाँक रहे थी….नीचे डॉली की मसल जाँघो के बीच छुपी हुई चूत की फांकों की लकीर देखते ही, रवि के लंड ने उसके शॉर्ट्स मे वीर्य की धार छोड़ दी….रवि वहीं बैठा हाँफने लगा,…..कुछ देर बाद वो बेड पर आकर बैठ गया….और डॉली के बाहर आने का इंतजार करने लगा……

थोड़ी देर बाद डॉली बाथरूम से बाहर आई….उसने दूसरी नाइटी पहनी हुई थी….जैसे ही रवि उठ कर बाहर जाने लगा….डॉली ने उसे पीछे से आवाज़ लगाई. रवि वहीं रुक गया….उसका दिल डर के मारे धड़कना भूल गया……..कहीं डॉली दीदी को पता तो नही चल गया......

डॉली: रवि अभी थोड़ी देर और बैठो ……मे नीचे से दूध की बॉटल ले आउ…नही तो साहिल फिर से परेशान करेगा……..

डॉली नीचे चली गयी…डॉली के जाने के बाद रवि बाथरूम मे घुस गया, और पेशाब करने लगा…..तभी उसकी नज़र डॉली की वाइट कलर की वीशेप पैंटी पर पड़ी… नज़ाने रवि मे कहाँ से हिम्मत आ गयी….उसने पैंटी को उठकर अपनी शॉर्ट्स की एलास्टिक मे दबा लिया….और तेज़ी से बाहर आकर साथवाले स्टोर रूम मे पैंटी को रख कर वापिस डॉली के रूम मे आकर बैठ गया…..थोड़ी देर बाद जब डॉली ऊपेर वापिस आई…तो रवि बिना कुछ बोले वापिस अपने स्टोर रूम मे चला गया…..

रात का टाइम था…..सब लोग बैठ कर खाना खा रहे थे….पर रवि स्टोर रूम को अंदर से बंद करके डॉली की पैंटी को अपने लंड पर कस्के मूठ मार रहा था…उसके दिमाग़ मे डॉली का गोरा बदन घूम रहा था….वो सुबह 2 बार मूठ मार चुका था…और अपना सारा वीर्य डॉली की पैंटी मे उडेल चुका था….डॉली की पैंटी रवि के वीर्य से पूरी तरहा सनी हुई थी….रवि तेज़ी से अपने लंड को हिला रहा था….तभी उसके डोर पर नॉक हुआ, और बाहर से डॉली की आवाज़ आए…….

डॉली की आवाज़ सुनते ही उसके हाथ पैर डर के मारे काँपने लगी….उसने जल्दी से पैंटी को बेड के नीचे फैंक दिया, और उठ कर शॉर्ट्स को पहन कर डोर खोला….सामने डॉली खड़ी थी.

डॉली: क्या बात है रवि तुम्हारी साँस इतनी क्यों चढ़ि हुई है….तबीयत तो ठीक है ना.

रवि: जी वो दीदी जी बिल्कुल ठीक हूँ……

डॉली: जा फिर नीचे जाकर खाना खा ले…..रात बहुत हो चुकी है.

डॉली वापिस चली गयी……रवि अपने हाथ धो कर नीचे खाना खाने के लिए चला गया….

खाना खाने के बाद रवि फिर से अपने रूम मे आ गया….उसका दिल डॉली की ससुराल मे बिल्कुल भी नही लग रहा था….वो मन मे सोचने लगा कि, अगर वो गाँव मे होता तो, पूनम उसकी बाहों मे होती, और वो उसकी जवानी का रस पान कर रहा होता. अगर पूनम के साथ कुछ करने का मोका ना भी मिलता तो, रज़िया तो उसके हाथ मे है ही. वो कभी भी अपने लंड को उसकी चूत मे डाल कर अपने लंड को शांत कर सकता था.

पर अब वो यहाँ कैसे अपने लंड को शांत कर सकता था…इसीलिए वो अपने उस छोटे से स्टोर रूम मे बेड पर बैठा हुआ, अपने लंड पर डॉली की वीशेप पैंटी को कसे हुए मूठ मार रहा था…..और उसके दिमाग़ मे डॉली का गोरा बदन घूम रहा था…उसने रात भर दो बार मूठ मारी……और थकान के कारण उसे कब नींद आई…उसे पता नही चला………

अगली सुबह……..

रवि सो रहा था…….तभी बाहर से डॉली ने डोर को नॉक करना शुरू कर दिया….जैसे ही रवि नींद से जगा उसे अपनी हालत का अंदाज़ा हुआ…वो बेड पर एक दम नंगा लेटा हुआ था…और डॉली की पैंटी उसकी टाँगों के बीच मे पड़ी हुई थी…जो उसके वीर्य से एक दम सनी हुई थी…वो डॉली की आवाज़ सुन कर एक दम से हड़बड़ा गया. और जल्दी से उठ कर अपना शॉर्ट्स और टीशर्ट पहनने लगा…..कपड़े पहनने के बाद उसने डॉली की पैंटी को फिर से बेड के नीचे फैंक दिया…….और डोर खोला…

बाहर डॉली साहिल को गोद मे उठाए खड़ी थी….साहिल रो रहा था….शायद भूख के कारण…रवि डॉली की ओर देखते हुए बोला….

रवि: क्या हुआ दीदी क्या बात है…..

डॉली: देखो ना रवि साहिल भूक के कारण रो रहा है…घर मे दूध भी ख़तम है….जाओ बाज़ार से दूध ले आओ….(डॉली ने रवि की तरफ हाथ मे पकड़े हुए पैसे बढ़ा दिए….रवि ने पैसे लिए और तेज़ी से नीचे चला गया)

डॉली साहिल को चुप कराने के लिए बाहर गॅलरी मे टहलने लगी…इधर उधर घूमते हुए उसकी नज़र स्टोर रूम मे पड़े बॅट पर पड़ी…..ये बॅट डॉली के पति का था….उसे क्रिकेट खेलने का बहुत शॉंक था……..डॉली अपने आप को रोक ना पे…और स्टोर रूम के अंदर जाने लगी…अभी वो बॅट की तरफ बढ़ ही रही थी…कि उसके पैर मे कोई चीज़ अटक गये….स्टोर रूम मे अंधैरा था….जब डॉली ने उसे अपने पैर से निकाल कर ऊपेर उठाया…..तो उसकी आँखें फटी-2 रह गयी….

डॉली: ये क्या ये तो मेरी पैंटी है…पर ये ये यहाँ कैसे आई……

डॉली को कुछ समझ मे नही आ रहा था…वो पैंटी को उठा कर बाहर ले आई…और बाहर आकर देखने लगी….उसके चहरे का रंग एक दम से उड़ गया…..उसकी पैंटी रवि के वीर्य से सनी हुई थी….उसकी पैंटी पर रवि के कम के निशान पड़े हुए थे…जो अब तक सुख चुके थे…डॉली के गुस्से का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया….उसे कुछ समझ मे नही आ रहा था, कि आख़िर ये हो क्या रहा है…..डॉली ने पैंटी को वहीं वापिस फैंक दिया…..और साहिल को लेकर अपने रूम मे आ गयी……

अपने रूम मे आने के बाद उसने साहिल को बेड पर लेटा दिया…..और खुद बाथरूम मे जाकर अपने हाथ को धोने लगी….उसे रवि से बहुत घिन आ रही थी…हाथ धोने के बाद वो बेड पर आकर बैठ गयी , और साहिल को उठा लिया…..डॉली के कुछ ही दिनो पहले दूध आना बंद हुआ था..इसीलिए वो अब साहिल को अपना दूध नही पिला पा रही थी…थोड़ी देर बाद रवि उसके रूम मे आ गया….उसके हाथ मे दूध की बॉटल थी…

रवि: दीदी ये लो……मे दूध ले आया….

डॉली ने उसकी तरफ देखे बिना उसके हाथ से दूध की बॉटल ली….और रवि बाहर चला गया….रवि के जाने के बाद डॉली साहिल को दूध पिलाने लगी…

दोपहर को जब सब लोग खाना खा चुके थे…..तो डॉली ऊपेर अपने रूम मे आ गयी…उसकी सास नीचे अपने रूम मे सो रही थी…घर मे जो नौकर काम करता था….वो वापिस जा चुका था…और घर मे रवि डॉली और उसकी सास ही थी… डॉली का दिल बहुत बेचैन था…वो बार-2 अपने मन मे यही सोच रही थी, कि आख़िर रवि की हिम्मत कैसे हुई, ऐसी हरकत करने की…..क्या वो भैया को नही जानता…वो उसे जिंदा ज़मीन मे गाढ देंगे……

 
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