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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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जोज़फ़- क्यों मेरी जान.. अब गंदा नहीं लगा.. तू तो सारा का सारा रस गटक गई.

रूबी- व्व..वो भाई ये सब आपने किया है. पहले मुझे धोखे से इसका आदी बना दिया और अब दिखाया. वैसे ये है क्या भाई.. इसका टेस्ट इतना अलग क्यों है?

जोज़फ़- रूबी बेबी ये कामरस है.. इसका मुकाबला कोई रस नहीं कर सकता.

रूबी- अच्छा मेरी पुसी और आपकी लुली में सेम रस आता है क्या?

जोज़फ़- बेबी ये लंड है और तुम्हारी पुसी फुददी है.. अब तुम ये बच्चों वाले नाम मत लो.

रूबी- ओके लेकिन ये हमने ठीक नहीं किया भाई. मॉम को पता लगेगा तो वो हमसे बहुत नाराज़ हो जाएंगी.

जोज़फ़- अरे उनको क्यों बताना और ये तो कुछ भी नहीं है. असली आनंद तो सेक्स में आता है. तुम सेक्स का मजा लेकर ऐसा कहोगी कि सारी दुनिया एक तरफ़ और सेक्स का आनंद एक तरफ़.

रूबी- रियली भाई! वो कैसे होगा.. मुझे आप बताओ ना प्लीज़.

जोज़फ़ ने अपने मोबाइल में सेक्सी वीडियोज लगा कर रूबी को दे दिया.

जोज़फ़- ये सब वीडियोज देखो.. मैं आता हूँ.

जोज़फ़ किसी काम से बाहर चला गया और रूबी उन वीडियोज को देख कर बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गई. ना चाहते हुए भी उसका हाथ अपने आप फुददी पे चला गया और वो अपनी फुददी को सहलाने लगी.

वो सारे वीडियोज में छोटी लड़कियां ही अलग-अलग लोगों से चुदवाती दिख रही थीं. कोई में भाई से, चाचा से, बूढ़े आदमी से.. ये सब देखते-देखते रूबी बहुत गर्म हो गई थी. जोज़फ़ कब गया, कब वापस आया.. उसे कुछ भी होश नहीं था. पीछे एक घंटे से वो ये वीडियोज में खोई हुई थी और उसकी उत्तेजना चरम पे थी. अगर वो थोड़ी जोर से फुददी को रगड़ देती तो उसका पानी निकल जाता. मगर वो अभी इसके लिए तैयार नहीं थी. वो बस आराम से वीडियोज की फुददी चुदाई का आनंद ले रही थी.

जोज़फ़ चुपके से अन्दर आया. रूबी अब भी वैसे ही नंगी बैठी वीडियो देख रही थी.

जोज़फ़ के हाथ में एक थैली थी, उसने वो टेबल पे रखी और रूबी के पास जाकर बैठ गया और उसको बांहों में लेकर उसके होंठों पे एक किस कर दिया.

रूबी- ओह भाई आप आ गए.. मुझे पता ही नहीं चला.

जोज़फ़- पता कैसे चलेगा जानेजिगर तू तो चुदाई देखने में बिज़ी थी. क्यों आनंद आया देख कर या नहीं?

रूबी- भाई ये जान कर तो मेरा दिमाग़ चकरा गया.. सेक्स ऐसे होता है, कितना बड़ा वो.. उसकी पुसी में घुस गया और वो आनंद ले रही है. मगर इतना मोटा उसमें घुसा कैसे.. ये समझ नहीं आ रहा भाई?

जोज़फ़- अब ये समझना है तो तुझे भी मेरा लंड अपनी फुददी में लेना होगा.

रूबी- नहीं भाई मेरी पुसी बहुत छोटी है और आपका ये बड़ा है.. इसमें नहीं जाएगा.. मुझे बहुत दर्द होगा.

जोज़फ़- बेबी फुददी और लंड बोलो ना.. और जाएगा कैसे नहीं.. वीडियो में नहीं देखा क्या.. आराम से गया था ना!

रूबी- नहीं भाई वो वीडियो ऐसे ही हैं.. अभी मेरी उंगली ग़लती से अन्दर चली गई थी, तो मुझे बहुत दर्द हुआ था. आपका लंड बहुत बड़ा है.. नहीं जाएगा.

जोज़फ़ ने रूबी को बहुत समझाया और उसको सेक्स के मज़े के बारे में बताया तब कहीं जाकर वो मानी. मगर अब भी वो क्न्फयूजन में थी कि इतना बड़ा लंड अन्दर कैसे जाएगा.

जोज़फ़ ने अपने कपड़े उतारे और रूबी को बांहों में भर लिया. उसके मखमली होंठों को चूसने लगा उसके संतरों को दबाने लगा. अब वो ऊपर से नीचे तक रूबी को चूमने लगा. उसकी फुददी को जीभ से चाट कर उसकी उत्तेजना बढ़ाने लगा.

रूबी तो पहले ही सेक्स वीडियो देख कर उत्तेजित थी. अब फुददी चुसाई से वो वेबकूफ़ हो गई और उसने जोज़फ़ को कस कर अपनी फुददी से चिपका लिया.

रूबी- आह.. ससस्स भाई.. उफ़फ्फ़ जोर से चाटो आह.. बहुत खुजली मची है.. आह.. सस्स उउफ्फ..

जोज़फ़ समझ गया कि यही सही मौका है. उसने फुददी से मुँह हटाया और एक ही पल में अपना लंड रूबी के मुँह में घुसा दिया.

रूबी भी बिना किसी देरी के लंड पे चुप्पे मारने लगी. उसकी लार से लंड एकदम गीला हो गया और जोज़फ़ ने फिर लंड को मुँह से निकाला और रूबी को सीधा लेटा कर उसके पैर मोड़ दिए. अब उसकी खिली हुई फुददी उसके सामने थी. उसने लंड को फुददी पे सैट किया और धीमे-धीमे रगड़ने लगा.

रूबी- आह.. भाई ये आपने क्या कर दिया.. उफ़ मेरी पुसी आह.. सॉरी.. फुददी में जलन होने लगी है. आह.. अब बर्दाश्त नहीं होता.. जल्दी से डाल दो भाई.. मत तड़पाओ ना.

जोज़फ़- हाँ बेबी आज मैं तुझे कली से गुलाब बना दूँगा. बस तू फुददी को अपने हाथों से थोड़ा खोल.. बहुत टाइट है ये.. ऐसे लंड अन्दर नहीं जाएगा.

रूबी ने अपने दोनों हाथों से फुददी को फैलाया. तभी जोज़फ़ ने लंड की टोपी फुददी में फँसा दी और एक झटके में रूबी पे झुक गया.. जिससे पूरा सुपारा फुददी में फिट हो गया.

रूबी को बहुत दर्द हुआ, वो चीखती.. इससे पहले जोज़फ़ ने उसके होंठों को कस कर अपने होंठों से दबा दिया और एक जोरदार झटका दे मारा, जिससे आधा लंड फुददी की सील को तोड़ता हुआ अन्दर घुस गया.

रूबी की तो जैसे जान निकल गई उसकी आँखें चढ़ गईं और आँसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. मगर जोज़फ़ को इसकी क्या परवाह थी, उसको तो बस कच्ची फुददी चोदने से मतलब था.

जोज़फ़ ने रूबी के होंठों को आज़ाद किया उसकी साँसें अटकी हुई थीं. चीखना तो दूर.. वो कुछ बोल भी नहीं पा रही थी.

जोज़फ़- सॉरी बेबी पहली बार में थोड़ा दर्द होता है.. मगर तू टेंशन मत ले. मैं धीमे-धीमे करके मजा दूंगा. मैं एक साथ पूरा लंड घुसा कर तुझे तकलीफ़ नहीं दूँगा. मैं आज तेरी सारी तकलीफ़ दूर कर दूँगा. मुझे तेरी फुददी का भोसड़ा बनाना है.

जोज़फ़ ने एक और जोरदार झटका मारा अबकी बार पूरा लंड फुददी में खो गया और उस झटके के साथ एक चीख कमरे में गूँजी.

ना ना रूबी की नहीं वो जोज़फ़ की चीख थी.. जोरदार झटके से जब लंड फुददी में गया तो इतनी टाइट फुददी से उसका लंड शायद छिल गया, तभी उसकी चीख निकली और रूबी तो उस झटके के बाद बेहोश हो गई.

जोज़फ़ का लंड जलने लगा था.. उसने जल्दी से लंड बाहर निकाला तो पूरा लंड खून से सना हुआ था, शायद रूबी की सील टूटने से जो खून निकला था वही लंड पर लग गया होगा, मगर जोज़फ़ ने जब लंड को साफ किया तो उसमें से भी थोड़ा सा खून निकल रहा था यानि रूबी की फुददी के खून के साथ उसका भी खून शामिल था.

जोज़फ़ ने जल्दी से रूबी की टी-शर्ट से उसकी फुददी को साफ किया और अपने लंड को भी साफ करके उस पर कोल्ड कीम लगाई.

जोज़फ़- उफ़ साली कितनी टाइट फुददी है तेरी.. लंड की चमड़ी छिल गई. मगर तुझे ऐसे नहीं बख्शूँगा, तेरी फुददी और गांड को आज इतना ठोकूँगा कि साली पूरी लाइफ तू मेरी दीवानी बन कर घूमेगी.

जोज़फ़ बिस्तर से उठा और एक पानी की बोतल ले आया. वो वापस बिस्तर पे चढ़ गया.

रूबी अब भी बेहोश थी. उसकी फुददी से ज़्यादा तो नहीं.. मगर थोड़ा खून निकला, जो बिस्तर पे लग गया. जोज़फ़ ने वहां रूबी की टी-शर्ट रखी और कोल्ड क्रीम उंगली पर लगा कर अच्छे से रूबी की फुददी में लगाने लगा. फिर उसने अपने लंड पे भी ढेर सारी क्रीम लगा ली.

जोज़फ़ ने लंड को फुददी पर फिर से सैट किया और जोर से धक्का मारा. पूरा लंड फुददी में घुस गया. अब जोज़फ़ स्पीड से चुदाई करने लगा. थोड़ी देर बाद जोज़फ़ ने बोतल से पानी रूबी के मुँह पर डाला, जिससे वो होश में आ गई. रूबी कुछ समझ पाती तब तक जोज़फ़ ने उसकी कमर को पकड़ कर झटके मारने शुरू कर दिए और साथ ही साथ वो उसके निप्पलों को भी चूसने लगा.

रूबी- एयेए एयेए उउह भाई आह.. बहुत आह दर्द ह..हो र्ररहा है आह….

 


जोज़फ़ ने फिर उसके होंठ दबा लिए ताकि उसका रोना बंद हो जाए और वो राजधानी एक्सप्रेस की स्पीड से उसकी चुदाई करने लगा.

कमसिन लड़की की फुददी जितनी टाइट होती है, उससे कहीं ज़्यादा उसमें गर्मी होती है. बड़े से बड़ा चोदू भी उस आग के सामने ज़्यादा टिक नहीं पाता.

जोज़फ़ भी अब चुदाई के चरम सुख को प्राप्त करने के लिए तैयार था. उसकी नसों में खून की गति बढ़ गई थी और किसी भी पल सुनामी आ सकती थी. इधर रूबी को तो कोई आनंद नहीं आ रहा था.. वो तो बस दर्द से ही बेहाल थी. जब जोज़फ़ का पानी उसकी फुददी में भरने लगा.. तब जाकर उसे थोड़ा सुकून मिला और उसने गरम वीर्य से दर्द में कुछ राहत से लंबी सांस ली.

जोज़फ़ अब अलग होकर लेट गया था और रूबी बस उसे घूरे जा रही थी.

जोज़फ़- सॉरी बेबी.. पहली बार में ऐसा होता है. उसके बाद बस मज़े ही मज़े आते हैं.

रूबी- भाई आप बहुत गंदे हो. मेरी जान निकल जाती.. कितना दर्द हुआ मुझे. आप झूठे हो.. वो वीडियो भी झूठे थे. कुछ आनंद नहीं आता, आज के बाद मैं आपसे बात भी नहीं करूँगी.. और मॉम को सब बता दूँगी.

जोज़फ़- नहीं रूबी.. मैं झूठ नहीं बोल रहा. आज तेरी सील टूटी तब दर्द हुआ. यकीन करो चुदाई जैसा आनंद दुनिया में कहीं नहीं है.

रूबी बहुत देर तक जोज़फ़ से लड़ती रही मगर एक चालाक लड़के के सामने वो बच्ची कहाँ टिक पाती.

जोज़फ़ ने फिर उसे बातों में फँसा लिया और बड़े प्यार से गर्म पानी से उसकी फुददी को साफ किया. उसे दर्द ख़त्म करने की दवा दी और एक घंटे बाद फिर बिस्तर पर वो उसके चुचों को सहलाने लगा.

रूबी- भाई उस टाइम कितना आनंद आ रहा था.. मेरी फुददी से बस पानी आने ही वाला था कि आपने लंड घुसा कर सब गड़बड़ कर दिया.

जोज़फ़- अरे मेरी बेबी.. तू अधूरी रह गई थी. कोई बात नहीं जानेजिगर.. चल अब तेरी फुददी चाट कर मैं तुझे आनंद दे देता हूँ.

रूबी- नहीं.. देखो आपने क्या कर दिया. मेरी फुददी कैसे सूज कर लाल हो गई है. अब आप जीभ टच करोगे तो मुझे दर्द होगा.

जोज़फ़- नहीं बेबी कुछ नहीं होगा, जितना दर्द होना था हो गया. अब बस मज़े ही मज़े हैं.

जोज़फ़ फिर शुरू हो गया. वो रूबी के निप्पलों को चुटकी में दबा कर मसलने लगा.. उन्हें चूसने लगा.

रूबी- सस्स आह.. आराम से भाई.. दुख़ता है.

जोज़फ़ ने धीमे-धीमे उसके जिस्म को चाटना शुरू किया. फिर उसकी फुददी को भी धीमे से चाटा.

रूबी- सस्स आह.. उफ़ भाई दर्द हो रहा है आह.. मगर हल्का सा.. उफ़ मीठा सा आनंद भी आ रहा है. हाँ ऐसे ही करो.

जोज़फ़- बेबी मेरे ऊपर आ जाओ तुम लंड को चूसो.. मैं फुददी की मालिश जीभ से करता हूँ.

दोनों 69 के पोज़ में आ गए. दस मिनट तक जोज़फ़ फुददी को चाटने में लगा रहा अब रूबी उत्तेजित हो गई थी. उसकी फुददी के भीतर खुजली होने लगी थी जो अब जीभ से नहीं मिट सकती थी. उसे तो अब लंड ही चाहिए था.

रूबी- आह.. भाई उफ़.. जीभ अन्दर घुसाओ ना.. आह.. और अन्दर.. बहुत खुजली हो रही है.

जोज़फ़- बेबी अब जीभ ज़्यादा अन्दर नहीं जा सकती.. तुम कहो तो मैं लंड घुसा कर इसे मिटा सकता हूँ.

रूबी- आह.. नहीं भाई.. सस्स उससे बहुत दर्द होता है. तुम उंगली से करो ना उफ़ आह…

रूबी बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी और जोज़फ़ तो मौकापरस्त इंसान था.

जोज़फ़- नहीं बेबी कसम से.. अबकी बार दर्द नहीं होगा.. मैं धीमे से करूँगा. तुम देखना अब तुम्हें बहुत आनंद आएगा.

रूबी- नहीं एयेए आह सस्स भाई मुझे डर लग रहा है.

जोज़फ़- बस एक बार थोड़ा सा डालूँगा अगर दर्द होगा बता देना. मैं निकाल लूँगा.

रूबी- सस्स आह.. भाई.. अब बर्दाश्त नहीं होता आह.. धीमे से डालना प्लीज़.. आह.. सस्स..

जोज़फ़ ने रूबी को अलग किया और उसके पैरों को मोड़ कर कमर के नीचे तकिया लगा दिया, जिससे फुददी खुलकर उसके लंड के एकदम सामने आ गई.

जोज़फ़- बेबी अब देखो अपने भाई का कमाल.. मैं तेरी फुददी को लंड से ही ठंडा करूँगा. फिर तुम कहना कि आनंद आया या नहीं.

रूबी- आ ठीक है भाई आप डाल दो.

जोज़फ़ ने लंड को फुददी पे सैट किया और बड़े प्यार से अन्दर घुसाने लगा.

रूबी- आह.. सस्स आआह.. आराम से आह.. दर्द हो रहा है भाई.

जोज़फ़ ने धीमे-धीमे पूरा लंड फुददी में घुसा दिया और अब वो शांत होकर रूबी पे लेट गया.. उसके निप्पलों को चूसने लगा.

रूबी- आह.. भाई अब आनंद आ रहा है… दर्द कम है.. आह.. थोड़ा हिलो ना.. आह.. अपने लंड से मेरी फुददी की खुजली मिटाओ ना..!

जोज़फ़ ने धीमे-धीमे धक्के लगाने शुरू किए और रूबी को आनंद आने लगा.

रूबी- आह.. सस्स आनंद आ रहा है.. उई आह.. आराम से.. दर्द होता है. आह.. करो उफ़..

जोज़फ़ का लंड अब फुददी में बराबर एड्जस्ट हो गया था. फुददी से हल्का पानी रिसने लगा था, जिससे लंड को फिसलने में मदद मिल रही थी.

रूबी- आह.. जोर से भाई आह.. उह करो मेरी फुददी आह.. आआह एयेए..

रूबी ने लंबी साँसें लेना शुरू किया और उसकी फुददी ठंडी हो गई.. मगर जोज़फ़ उसी लय में उसकी चुदाई करता रहा.

थोड़ी देर बाद उसको घोड़ी बना कर उसकी चुदाई की. अब रूबी को चुदाई का असली मतलब समझ आ गया था. वो खुलकर जोज़फ़ का साथ दे रही थी.

दोपहर तक जोज़फ़ ने 4 बार रूबी को चोदा. अब दोनों ही थक गए थे और दोनों को जोरों की भूख भी लगी थी.

रूबी- आहह भाई.. पैरों में ज़रा भी ताक़त नहीं. देखो मैं उठ भी नहीं पा रही हूँ.

जोज़फ़- रूबी बेबी आज पहला दिन था.. तो ऐसा हुआ. अब रोज चुदेगी ना.. तो फिर देखना तुझे लंड की आदत हो जाएगी.

रूबी- भाई एक बात कहूँ.. शुरू में तो दर्द से जान निकल गई थी मगर बाद में ऐसा आनंद आया कि क्या बताऊं आपको.

जोज़फ़- बस बेबी अब तुझे अपनी रानी बना कर रखूँगा. तेरी ऐसी चुदाई करूँगा कि सारी जिंदगी तू लंड-लंड का नाम लेगी.

रूबी- भाई इतनी उछल कूद के बाद बहुत जोरों की भूख लगी है.

जोज़फ़- मुझे भी लगी है.. इसी लिए मैं बाहर से पहले ही पिज़्ज़ा ले आया था.

दोनों ने साथ में खाना खाया. फिर सो गए और शाम को देर तक सोते रहे.

रात को जोज़फ़ ने रूबी को फिर चोदा और 2 दिन तक इन दोनों ने बहुत चुदाई की. अब रूबी के मॉम-अब्बू आ गए थे मगर जोज़फ़ और रूबी चुदाई का मौका ढूँढ ही लेते.

जोज़फ़ ने रूबी की गांड भी खोल दी थी और रूबी अब लॉलीपॉप की जगह बस जोज़फ़ का लंड ही चूसती थी.

तीन साल तक ये चुदाई का खेल चलता रहा. अब तो रूबी बिना लंड लिए सोती ही नहीं थी. मगर जोज़फ़ की पढ़ाई पूरी हो गई थी और उसके अब्बू को हार्ट अटॅक हुआ तो उसे जल्दी में अमेरिका जाना पड़ा.

जब जोज़फ़ चला गया. रूबी बहुत रोई थी और कुछ दिन उदास भी रही, उसके बाद उसने कॉलेज के एक लड़के से दोस्ती की और धीमे-धीमे वो दोनों घुल मिल गए. अब चुदाई भी होने लगी मगर वो लड़का ढीला था. रूबी जैसी सेक्सी लड़की को संतुष्ट नहीं कर सकता था इसलिए उनका ब्रेकअप हो गया और रूबी फिर से अकेली हो गई.

 
बस यार 5 पार्ट रूबी की कहानी सुनाने में बन गए.. बाकी सबको तो हम भूल गए. तो फ्रेंड्स अब भूतकाल से निकलो और वापस वर्तमानकाल में आ जाओ. यहाँ बहुत कुछ देखना बाकी है और इनकी ये हरकतें भविष्य में बहुत आनंद देने वाली हैं.. तो हम कहाँ थे.

हाँ याद आया.. खाने की टेबल पे दोनों अब्बू बेटी बैठे थे, तो चलो वहीं वापस चलते हैं.

खाने के बाद रूबी अपने अब्बू के कमरे में गई और उन्हें देख कर मुस्कुराने लगी.

फर्नाडिस- अब क्या हुआ.. तुम यहाँ क्यों आई हो?

रूबी- वो आपसे एक बात करनी थी. अब्बू आपने कहा था ना कोई फ्रेंड बना लूँ. यहाँ तो मेरे कुछ फ्रेंड बने हैं और मैं उन्हें यहाँ बुलाना चाहती हूँ.

फर्नाडिस- अरे तो बुला लो बेटा.. इसमें पूछना क्या है. वो यहाँ आएँगे तो मैं भी उनसे मिल लूँगा.. इसमें क्या है?

रूबी- अब्बू, आप मॉम का क्या करोगे?

फर्नाडिस- क्या मतलब मॉम का क्या करोगे?

रूबी- अब्बू वो मेरे फ्रेंड हैं. अब सब आपके जैसे सीधे तो है नहीं जो मुझे ऐसे आधी नंगी देख कर आँखें झुका लेंगे. वो तो कुछ हरकत करेंगे ही.

फर्नाडिस- रूबी तुम मुझसे किस बात का बदला ले रही हो. मेरे सब्र का इतना इम्तिहान मत ले.. मैं तेरा अब्बू हूँ. मेरे सामने ऐसे नंगी होना, ऐसी गंदी बातें करना ठीक नहीं है.

रूबी- आप किस मिट्टी के बने हो अब्बू जो पिघलते ही नहीं उहह..

रूबी वहां से गुस्से में अपने कमरे में चली गई और फर्नाडिस वहीं बैठा उसे जाते हुए देखता रहा.

अब आगे हम लोग शाजिया की तरफ चलते हैं जहां अब्बू बेटी सेक्स का खेल चल रहा है.

रात को खाने के बाद अब्दुल जी बैठे कुछ हिसाब लगा रहे थे और अंजुम किचन में बिज़ी थी. शाजिया अच्छी तरह जानती थी कि उसकी अम्मी किचन से एक घंटे पहले बाहर नहीं आने वाली. वो सारा काम निपटा कर ही बाहर आएंगी और सीधे सोने जाएंगी.

तब शाजिया ने सोचा कि अभी कुछ करना चाहिए. वो धीमे से अब्दुल जी के पास आकर बैठ गई. जैसा रज़िया ने उसे समझाया था वो एक पतली सी टी-शर्ट और पजामे में थी. उसके अन्दर उसने कुछ नहीं पहना हुआ था.

अब्दुल- तुम्हें कुछ चाहिए क्या शाजिया?

शाजिया- क्यों.. कुछ चाहिए होगा.. तभी आपके पास आऊंगी क्या? ऐसे नहीं बैठ सकती?

अब्दुल- अरे बेटी, तू तो मेरी जान है.. तुझे बैठने से कौन रोक सकता है?

शाजिया- अब्बू पहले आप मुझे गोद में बिठा कर मेरे सर की मालिश करते थे ना.. बहुत अच्छा लगता था. मगर अब तो आप इतने बिज़ी हो गए हो कि मुझ पर ध्यान ही नहीं देते. बस सारा दिन काम काम करते हो.

अब्दुल- अरे तब तू छोटी थी.. इसलिए गोद में बैठा लेता था. अब तू बड़ी हो गई है.

शाजिया- क्या अब्बू मैं कहाँ बड़ी हुई हूँ. वैसी ही तो हूँ.. आप बस बहाना कर रहे हो. साफ-साफ बोल दो ना कि आप मुझे प्यार नहीं करते.

अब्दुल- अरे ऐसा कुछ नहीं है बेटी.. तुम तो मेरी जान हो. मैं तुमसे प्यार कैसे नहीं करूँगा.. ऐसा हो सकता है क्या?

शाजिया- अच्छा ये बात है… तो चलो ये काम को करो साइड में और मुझे पहले की तरह अपनी गोद में बिठा कर मेरी मालिश करो.

अब्दुल जी रात को सिर्फ़ लुंगी पहनते थे.. अन्दर कुछ नहीं और आज तो शाजिया ने भी कुछ नहीं पहना था. अब अब्दुल जी उसे कुछ कह पाते, तब तक वो उनकी गोद में बैठ गई. अब्दुल जी का लंड सीधा शाजिया की मुलायम गांड के नीचे दब गया.

अब्दुल जी कुछ समझ पाते, तब तक शाजिया ने दूसरा पासा फेंक दिया- चलो अब्बू, अब मेरी गर्दन के पीछे से दबाओ, सर की मसाज करो.. जैसे आप पहले करते थे.

शाजिया की गांड का स्पर्श पाकर लंड हरकत में आ गया. उसमें धीमे-धीमे तनाव आने लगा क्योंकि लंड और गांड के बीच बस अब्दुल जी की लुंगी और शाजिया का पतला पजामा ही था. अब्दुल जी का लंड अकड़ रहा था, जिसे शाजिया ने भी महसूस किया मगर वो तो अनजान बन कर बस अपने अब्बू को सिड्यूस कर रही थी.

शाजिया- अब करो ना अब्बू.. क्या सोचने लगे?

अब्दुल जी की तो हालत देखने लायक थी मगर उन्होंने कुछ ग़लत नहीं सोचा और शाजिया की गर्दन पर धीमे-धीमे दबाने लगे.. जैसे पहले करते थे.

शाजिया अब किसी ना किसी बहाने हिल रही थी, जिससे गांड का दबाव लंड पे पड़ता और अब्दुल जी बस हल्की आह.. करके रह जाते.

शाजिया- उफ़ अब्बू मेरी पीठ पे खुजली हो रही है.. प्लीज़ खुज़ला दो ना आप.

अब्दुल जी ने टी-शर्ट के ऊपर से खुज़ाया तो शाजिया ने कहा- ऐसे नहीं.. आप मेरी टी-शर्ट ऊपर करके खुजाओ ना.

अब्दुल जी ने टी-शर्ट थोड़ी ऊपर की तो शाजिया आगे की ओर झुक गई- अब्बू थोड़ा ऊपर करो ना प्लीज़.

अब्दुल- अरे कहाँ.. तू ठीक से बता ना?

शाजिया- जहाँ आप कर रहे हो.. उससे थोड़ा ऊपर करो. वहीं खुजली हो रही है.

अब्दुल जी का हाथ शाजिया की नंगी पीठ पर था.. जब उन्होंने टी-शर्ट और ऊपर की तो वो समझ गए कि शाजिया ने ब्रा नहीं पहनी है.

शाजिया- आह.. अब्बू यहीं.. हाँ अच्छे से करो ना.

अब्दुल जी का हाथ वहां था, जहाँ ब्रा के स्ट्रीप होते हैं. अब एक अब्बू के अन्दर धीमे-धीमे शैतान जाग रहा था, वो सोच रहे थे कि शाजिया नादान है, इसे क्या पता चलेगा.. थोड़ा आनंद ले लेना चाहिए.

अब्दुल जी ने खुजाते हुए एक उंगली थोड़ी आगे की तरफ़ निकाली. वो शायद शाजिया के चुचों को टच करना चाहते थे मगर अब्बू और बेटी के बीच इतनी जल्दी ये सब होना बहुत मुश्किल होता है. वो थोड़ा डर भी रहे थे तो बस उन्होंने एक बार कोशिश की, फिर जल्दी से टी-शर्ट नीचे कर दी.

अब्दुल- बस हो गई ठीक.. चल अब उठ मुझे काम भी करना है.

शाजिया- अरे अभी दो मिनट भी नहीं हुए अब्बू.. प्लीज़ गर्दन पे करो ना.. आप बहुत अच्छा करते हो, जिससे नींद बहुत अच्छी आती है.

शाजिया धीमे-धीमे गांड को हिला रही थी.. जिससे लंड अब बेकाबू हो गया और ऊपर से अब्दुल जी ये जान गए कि शाजिया ने ब्रा नहीं पहनी और गांड की रगड़ से उनको समझने में देर नहीं लगी कि पैंटी भी नहीं है. अब तो उनका लंड एकदम टाइट हो गया और उसमें दर्द भी होने लगा.

अब्दुल- अच्छा करता हूँ, एक मिनट उठ और ठीक से बैठ जा.

शाजिया अपने मन में बोली कि पता है अब्बू.. आपका लंड खड़ा हो गया है, मगर सॉरी अब्बू इसको खड़ा करूँगी तभी आप किसी के साथ करने को तैयार होंगे.

अब्दुल- क्या सोच रही है.. उठ ना एक बार?

शाजिया- मैं उठ जाऊंगी तो आप मुझे दोबारा नहीं बैठाओगे.

अब्दुल- अरे बैठ जाना तू… अच्छा थोड़ी उठ जा, बस फिर बैठ जाना ओके.

शाजिया थोड़ी सी ऊपर हुई तो अब्दुल जी ने जल्दी से लंड को एड्जस्ट किया. अब वो लुंगी में तंबू बना रहा था, जैसे ही शाजिया बैठी.. उन्होंने लंड को दोनों जाँघों के बीच से आगे निकाल दिया.

शाजिया अब तक जो भी कर रही थी, ये उसके लिए आसान नहीं था मगर वो हिम्मत करके सब कर रही थी. मगर जब अपने अब्बू का लंड उसने सीधे फुददी पे महसूस किया तो उसकी जान निकल गई.

अब्दुल अपने मन में सोच रहे थे कि उफ़ ये क्या हो रहा है.. मैं अपनी ही बेटी की वजह से गर्म क्यों हो रहा हूँ.. नहीं ये ग़लत है.

शाजिया मन में सोच रही थी कि आह.. अब्बू.. आपका लंड तो बहुत तन गया.. मेरी फुददी ने अगर पानी छोड़ दिया तो मेरा पजामा गीला हो जाएगा उफ़ नहीं..

दोनों चुपचाप थे मगर ये चुप्पी ज़्यादा देर नहीं रही क्योंकि रज़िया ने शाजिया को जो टिप्स दी थी, उसमें इससे बहुत ज्यदा था. अब शाजिया तो उसे अपनी गॉडफादर मानती थी तो उसकी बात कैसे टालती.

अब शाजिया ने ऐसी हरकत कर दी, जिससे अब्दुल जी के अन्दर का अब्बू छुप गया और एक उत्तेजित मर्द बाहर आ गया.

शाजिया पीछे मुड़ी और उसने अपने अब्बू के गाल पे जोरदार किस कर दी और साथ ही साथ अपनी फुददी को जल्दी से एक-दो बार लंड पे अच्छे से रगड़ भी दिया- आई लव यू अब्बू.. आप बहुत अच्छे हो.. रियली आप वर्ल्ड के बेस्ट अब्बू हो.

अब्दुल जी अब अपना कंट्रोल खो चुके थे. उन्होंने भी शाजिया को कस के पकड़ लिया और अपना हाथ इस तरह शाजिया के पेट पर रखा कि जब वो चाहे बस हल्का सा हाथ ऊपर करते और उस कमसिन कन्या के मम्मे छू लेते.

थोड़ी देर ये नाटक चलता रहा. अब दोनों ही ज़्यादा उत्तेजित हो गए थे, शाजिया की फुददी रिसने लगी थी, अब ज़्यादा देर बैठना ख़तरे से खाली नहीं था और यही हाल अब्दुल जी का था. उनको लग रहा था अगर कुछ देर ऐसे ही चलता रहा तो वो अपना आपा खो देंगे और शाजिया के चुचों को मसल देंगे.

शाजिया- आह.. अब्बू.. अपने आज कितने दिनों बाद ऐसे किया, मुझे बहुत अच्छा लगा. अब मुझे जाना चाहिए, आप अपना काम कर लो.

इतना कहते हुए शाजिया उठ गई और बहुत आराम से पीछे मुड़ी ताकि अब्दुल जी को संभलने का मौका मिल जाए और वो लंड जो तना हुआ है उसे वो छुपा लें.

अब्दुल जी ने वैसा ही किया. जल्दी से उन्होंने लुंगी को ऊपर की तरफ़ समेट लिया, जिससे लंड का उभार दिखाई देना बंद हो गया.

शाजिया अब अब्दुल जी के ठीक सामने खड़ी थी मगर उसने एक ग़लती कर दी उसे जल्दी वहां से निकल जाना चाहिए था क्योंकि फुददी की जगह पे हल्का सा गीलापन था और अब्दुल जी की नज़र सीधी वहीं चली गई. जब शाजिया को ये अहसास हुआ उसके तो पैर वहीं जम गए. अब उससे ना रुकते बन रहा था ना जाने की उसमें हिम्मत आ रही थी.

अब्दुल- जाओ शाजिया बेटा.. अब सो जाओ.

शाजिया- ज्ज..जी अब्बू बाय.

इससे ज़्यादा शाजिया कुछ ना बोल सकी और फ़ौरन वहां से चली गई.

अब्दुल- इस लड़की को ये क्या हो गया. बिना ब्रा-पैंटी के मेरी गोद में बैठ गई और इसके नीचे गीलापन हुआ.. कहीं इसने लंड को महसूस तो नहीं किया. नहीं नहीं.. ये मैं क्या सोच रहा हूँ शाजिया बच्ची है, ये बस इत्तेफ़ाक से हुआ है.

अब्दुल जी काफ़ी देर तक ऐसे ही बड़बड़ाते रहे, फिर अंजुम आ गई और वो अपने हिसाब में बिज़ी हो गए.

अंजुम- आपको सोना नहीं है क्या जी??

अब्दुल- तुम सो जाओ, मुझे थोड़ा काम है.. मैं बाद में सो जाऊंगा.

उधर शाजिया सीधे अपने बिस्तर पर जाकर लेट गई और उस पल को याद करने लगी.

शाजिया- आज तो गड़बड़ हो गई.. शायद अब्बू ने मेरी गीली फुददी देख ली.. मगर मैंने ये ठीक किया क्या? अब अब्बू सारी रात परेशान रहेंगे. अम्मी तो मानेगी भी नहीं.. काश किसी तरह उनका पानी निकल जाए तो उन्हें थोड़ा सुकून मिल जाए. ये अम्मी भी ना सेक्स नहीं करती हैं. कम से कम लंड चूस कर ही अब्बू को शांत कर सकती हैं.. मगर नहीं वो बिल्कुल नहीं करने वालीं.. काश मैं कुछ कर पाती.

शाजिया ऐसे ही सोच रही थी अचानक उसे ख्याल आया कि जैसे उसकी अंतरात्मा उसके शरीर से बाहर आ गई और उससे बात कर रही हो.

शाजिया की आत्मा- ऐसे क्या सोच रही है? तू खुद क्यों नहीं लंड चूस कर उन्हें सुकून दे देती, ऐसे तो बाहर उस याक़ूब का और शाहिद का चूस चुकी है. अब तू अपने अब्बू के लिए पीछे क्यों हट रही है?

शाजिया- नहीं ये ग़लत होगा, वो मेरे अब्बू हैं मैं कैसे उनका लंड चूस सकती हूँ.

 
शाजिया की आत्मा- बस बस ज़्यादा शरीफ मत बन.. उन्हें उकसा रही है उनके लंड पे बैठ सकती है, तो चूसने में क्या हर्ज है.. मैं तुझे कौन सा चुदवाने को बोल रही हूँ.

शाजिया- मगर ये कैसे मुमकिन है, मैं कैसे चूस सकती हूँ. उनसे कैसे कहूँ? नहीं ये बहुत मुश्किल है.

बहुत देर तक शाजिया ऐसे ही अपने आपसे बातें करती रही. फिर उसने सोचा कि अगर मौका मिल जाए तो शायद वो कुछ करेगी.

शाजिया ऐसे ही ख्यालों में एक घंटे तक बिस्तर पर पड़ी रही, फिर अचानक उसने बाहर कुछ आहट सुनी तो वो जल्दी से उठी और बाहर गई. उसने देखा कि उसके अब्बू किचन से पानी ले रहे थे.

शाजिया- अरे अब्बू आप सोये नहीं अभी तक..?

अब्दुल- बस अब सोने जा रहा हूँ.. मगर तू क्यों जागी हुई है? तुझे नींद नहीं आ रही क्या?

शाजिया- कब से सोने की कोशिश कर रही हूँ.. मगर नींद आती ही नहीं.

अब्दुल- अच्छा ये बात है तो चल आज मैं तुझे सुला देता हूँ जैसे पहले सुलाता था.

शाजिया- ओह वाउ अब्बू.. रियली आनंद आएगा.. आज कितने टाइम बाद आपकी गोद में सर रख कर सोऊंगी और आप मेरे बालों में हाथ घुमा कर मुझे सुलाओगे.

अब्दुल जी शाजिया के कमरे में आकर बेड पर पालथी मारकर बैठ गए और शाजिया उनकी जाँघ पर सर रख कर लेट गयी.

अब्दुल- अब तू अपनी आँख बंद करके सोने की कोशिश कर.. मैं तेरे सर को सहला कर तुझे सुलाता हूँ.. ठीक है ना!

शाजिया ने ‘ठीक है..’ कहा और आँखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगी. थोड़ी देर ये सब चलता रहा

अब्दुल जी बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ घुमा रहे थे.

शाजिया को अचानक अहसास हुआ कि वो अब्बू के लंड के कितने करीब है. वैसे तो उस टाइम लंड सोया हुआ था, मगर शाजिया के दिल में आया कि ये अच्छा मौका है, वो लंड के एकदम करीब है. अगर थोड़ी कोशिश करेगी तो उसके मुँह से लंड टच हो जाएगा.. मगर उसके लिए पहले लंड को खड़ा करना जरूरी है. फिर उसके दिमाग़ में एक आइडिया आया.

शाजिया- अब्बू मेरे मुँह पर कोई कपड़ा डाल दो ना.. ऐसे तो मुझे नींद ही नहीं आएगी.

अब्दुल- अच्छी बात है.. तो ऐसा कर कोई दुपट्टा डाल ले या फिर ये चादर डाल कर सो जा, मैं चादर के ऊपर से तेरा सर सहला दूँगा और तुझे नींद आ जाएगी.

शाजिया- हाँ ये ठीक रहेगा और अब्बू सिर्फ़ सर मत सहलाना.. गर्दन और कंधे भी दबाना.. मुझे अच्छा लगता है.

अब्दुल- अच्छा कर दूँगा. चल अब ये चादर डाल ले और सोने की कोशिश कर.

शाजिया ने मुँह पर चादर डाल ली और अब्दुल जी उसके सर को सहलाने लगे. अब शाजिया ने अपने हाथ चादर के अन्दर कर लिए थे और बहुत हल्के से वो लुंगी के ऊपर से लंड को छूने लगी. यानि कुछ इस तरह से छूने लगी कि अब्दुल जी को जल्दी समझ में नहीं आता कि वो टच कर रही है या उनका लंड ही वहाँ है.

शाजिया की कोशिश कामयाब होने लगी. लंड महाराज इतनी सी छुवन भी भाँप गए और बस ख़ुशी के मारे फूलने लगे. अब अब्दुल जी का लंड खड़ा होगा तो उन्हें तो पता होगा ही ना, बस वो बेचैन हो गए और उन्होंने चादर में हाथ डाल कर लंड को एड्जस्ट किया ताकि शाजिया को पता ना लगे. मगर शाजिया तो अब फास्ट हो रही थी, तो फ़ौरन उसने अब्दुल जी को टोक दिया.

शाजिया- अब्बू आप सर दबाओ ना.. चादर के अन्दर क्यों हाथ ला रहे हो.

अब्दुल- अरे वो थोड़ी खुजली हो रही थी तो बस खुजाने के लिए लाया था. तू सोने की कोशिश कर.. ऐसे ही बोलती रहेगी क्या?

शाजिया- अच्छा अच्छा सो रही हूँ मगर अबकी बार आपको खुजली हो, तो मुझे बता देना.. मैं कर दूँगी. आप बस मेरा सर सहलाओ.

अब्दुल जी ने ‘ठीक है..’ कहा और फिर सर को सहलाने लगे. अब शाजिया फिर से लंड पर उंगली घुमा रही थी और लंड था कि बस अकड़े जा रहा था.

अब्दुल जी ने बहुत ध्यान लगाया कि लंड से कुछ टच हो रहा है मगर शाजिया इतने हल्के तरीके से छू रही थी, जिससे अब्दुल जी को समझ नहीं आ रहा था कि शाजिया छू रही है या कपड़े की रगड़ से लंड खड़ा हुआ है.

अब अब्दुल जी शाजिया के कंधे दबाने लगे और शाजिया के चिकने जिस्म पर उनका हाथ लगते ही लंड ने जोरदार अंगड़ाई ली. अब लंड अपने पूरे शवाब पर आ गया था. शाजिया को अब भी पता नहीं चल रहा था कि लंड किस पोज़िशन में है, वो बस हल्की सी उंगली टच कर रही थी. फिर उसने करवट लेने के बहाने जल्दी से पूरा हाथ लंड पर लगा दिया और उसको ये जानकार झटका लगा कि अब्बू का लंड काफ़ी बड़ा और एकदम कड़क है.

ये इतना अचानक हुआ कि अब्दुल भी समझ नहीं पाए कि शाजिया ने जानबूझ कर लंड छुआ या अंजाने में हो गया.

शाजिया के करवट लेने के बाद सारा मामला ही बदल गया. अब्दुल जी की लुंगी थोड़ी सरक गई और लंड का टोपा बाहर निकल आया. ये बात दोनों को ही नहीं पता थी. मगर जब शाजिया थोड़ी आगे हुई उसके होंठ सीधे सुपारे से टच हुए. तो उसी पल अब्दुल जी भी समझ गए कि लंड बाहर निकल गया है. मगर वो कुछ नहीं बोले और वैसे ही शाजिया की टी-शर्ट में हाथ डालकर उसकी गर्दन और पीठ को सहलाते रहे.

शाजिया ने सोचा ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा. उसने धीमे से अपनी जीभ निकाल कर सुपारे पर घुमाई और अब्दुल जी फ़ौरन हरकत में आ गए.

अब्दुल- शाजिया सो गई क्या.. कुछ बोल तो?

शाजिया ने सांस रोक ली और चुपचाप वैसे ही पड़ी रही.

अब्दुल जी को लगा कि शाजिया शायद सो गई है. उन्होंने धीमे से चादर हटाई तो अन्दर का नजारा देख कर उनके होश उड़ गए.

शाजिया करवट लेकर सोई हुई थी और लंड पूरा बाहर था. शाजिया के होंठ लंड से एकदम सटे हुए थे.

ये नजारा देख कर एक पल के लिए अब्दुल जी सब कुछ भूल गए और उनकी कामवासना जाग गई. शाजिया के नर्म होंठ लंड से सटे हुए थे और अब्दुल जी के शरीर में करंट दौड़ने लगा था. उन्होंने लंड को हाथ से पकड़ा और शाजिया के होंठों पे रगड़ने लगे.

शाजिया इस हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी. वो घबरा गई और जल्दी से सीधी होकर लेट गई. अब उसकी साँसें तेज चल रही थीं और उसके मम्मे साँसों के साथ ऊपर-नीचे होने लगे.

अब्दुल जी ने जल्दी से लुंगी ठीक की और लंड को अन्दर कर लिया. मगर उनकी नज़र अब शाजिया के मदमस्त चुचों पर जा टिकी.

अब्दुल जी ने एक-दो बार शाजिया को आवाज़ दी. उसे हिलाया.. मगर वो जस की तस रही. अब सोई होती तो शायद जाग जाती.. मगर जागती हुई को कैसे जगाया जाए.

अब्दुल जी को जब यकीन हो गया कि शाजिया सो गई है.. उन्होंने डरते हुए अपना एक हाथ शाजिया के एक मम्मे पे रख दिया, मगर उन्होंने कोई हरकत नहीं की, बस मम्मे पर हाथ रखे हुए शाजिया के चेहरे को देखते रहे.

शाजिया अपने मन में सोचने लगी कि ओह गॉड.. अब्बू ये क्या कर रहे हो. मेरे मम्मे पे हाथ क्यों रख दिया.. उफ़ अब मैं क्या करूँ?

 
शाजिया सोच ही रही थी कि क्या करूँ तभी उसके कान में अब्दुल जी की धीमी आवाज़ आई- ओह शाजिया.. तुम अब बड़ी हो गई हो.. उफ़ तेरे जिस्म में कितनी आग है.. देखो मेरा हाथ तेरे मम्मे पे रखा हुआ कैसे जल रहा है. तूने तो आज मेरी आग भड़का दी है.. काश तेरी अम्मी भी तेरे जैसी गर्म होती. अब मैं क्या करूँ.. कहाँ जाऊं.. कैसे अपने इस लंड को शांत करूँ.

अब्दुल जी की बात सुनकर शाजिया को बहुत दुख हुआ और वो अपनी अम्मी को कोसने लगी. फिर उसने डिसाइड किया कि अब जो हो देखा जाएगा. बस वो आज तो अपने अब्बू को शांत करके ही सोएगी.

अब्दुल जी ने अपना हाथ वापस हटा लिया, शायद वो डर रहे थे और शाजिया को लगा कि अब शायद वो चले जाएँगे.

शाजिया मन में बुदबुदाने लगी- ओह गॉड अब्बू तो जा रहे हैं.. ऐसे तो सारी रात ये परेशान ही रहेंगे. क्या करूँ शाजिया.. कुछ कर तू.. ओह आपा लगता है आपकी बात पूरी करनी होगी. मुझे अब्बू को कुछ नजारा दिखाना ही होगा.

शाजिया ने पेट पर खुजली के बहाने टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और थोड़ी देर खुजा कर वो शांत हो गई. मगर उसके आधे मम्मे अब नंगे हो गए और अब्दुल जी उन्हें देख कर अपने होश खो बैठे.

अब्दुल- हे अल्लाह ये आज मेरे साथ क्या हो रहा है.. मैं जितना शाजिया से दूर जाना चाहता हूँ, हालात मुझे इसके और करीब ला रहे हैं. अब ऐसा नजारा सामने है, मैं जाऊं या रुकूं.. क्या करूँ.

अब्दुल जी दुविधा में थे. उनका लंड तो अकड़ कर उन्हें इशारा दे रहा था कि कली सामने है और तू जा रहा है.. मसल दे. मगर दिल बोल रहा था कि नहीं वो तेरी बेटी है, ये ग़लत है.. यहाँ से जा चला जा.

अब्दुल जी अभी किसी नतीजे पे पहुँच पाते, तब तक शाजिया ने दूसरा धमाका कर दिया.

शाजिया ने धीमे से आँख खोल कर देखा तो अब्दुल जी खड़े हुए कुछ सोच रहे थे. शाजिया अपने मन में बोल रही थी- लगता है अब्बू इतने से नहीं रुकेंगे.. कुछ और करना होगा.

शाजिया ने फिर खुजने के बहाने से अबकी बार अपने पजामे में हाथ डाल दिया और उसे थोड़ा नीचे कर दिया यानि पजामे को बस दो इंच और नीचे करती तो उसकी फुददी का दीदार उसके अब्बू को हो जाता. मगर शाजिया इतना कैसे कर रही थी, ये वही जानती थी. बिना चुदे ही उसकी गांड फट रही थी. ये तो रज़िया की बातें और पिछले दिनों की कुछ गंदी हरकतें थीं, जो उसमें इतनी हिम्मत आ गई. फिर भी डर से उसकी साँसें तेज हो गई थीं.

अब नजारा कुछ ऐसा था टी-शर्ट पूरी ऊपर.. और पजामा नीचे सरका हुआ था, जिससे शाजिया का पूरा पेट नंगा और आधे चुचों की झलक दिख रही थी. इसी के साथ उसकी फुददी के ऊपर का हिस्सा भी दिख रहा था. इस हालत में एक अब्बू अपने अन्दर के मर्द के सामने हार गया.

अब अब्दुल की आँखों में सिर्फ़ वासना नज़र आ रही थी. वो धीमे से बिस्तर पर बैठ गए और शाजिया की टी-शर्ट को पूरा ऊपर कर दिया. अब उस कमसिन कली के 30″ के दिल को छू लेने वाले मम्मे पूरे नंगे होकर अब्दुल जी के सामने थे. वो नजारा देख कर उनके होंठ सूख गए. उनका मन कर रहा था कि जल्दी से शाजिया के पिंक निप्पलों को चूस लें, मगर वो उठ ना जाए.. ये डर भी उनके मन में था.

वो थोड़ी देर ऐसे ही उस नजारे को देखते रहे, फिर हिम्मत करके उन्होंने एक मम्मे को हाथ में लिया और धीमे-धीमे उसे दबाने लगे.

शाजिया की तो हालत खराब थी, वो मुँह को कसके भींचे हुए पड़ी थी कि उसकी कहीं सिसकी ना निकाल जाए.

बस बस कहानी खत्म हो गई.. सॉरी फ्रेंड्स वर्ड्स लिमिट खत्म, बाकी का नजारा कल देख लेना.

अब्दुल जी को लगा कि शाजिया गहरी नींद में है, तो वो थोड़ा खुलकर उसके चुचों को सहलाने लगे.. उसके निप्पलों को छेड़ने लगे. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद उन्होंने एक निप्पल अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू किया. मगर ये कुछ ज़्यादा हो रहा था और शाजिया के लिए अब अपने आपको रोक पाना मुश्किल था. वो नींद में फिर खुजाने के बहाने हिली और उसने अपनी टी-शर्ट को नीचे कर दिया. इस हरकत के कारण अब्दुल जी फ़ौरन उससे अलग हो गए.

शाजिया- ओह गॉड.. ये अब्बू तो कुछ ज़्यादा ही गर्म हो गए हैं.. अब क्या करूँ ऐसे तो इन्हें पता लग जाएगा कि मैं उठी हुई हूँ.. हे अल्लाह कोई आइडिया दो.. मैं कैसे इन्हें शांत करूँ.

अब्दुल जी थोड़ी देर वैसे ही शांत बैठे रहे.. जब उनको लगा शाजिया शांत है. तो उन्होंने अबकी बार शाजिया का पजामा धीमे से नीचे किया और उसकी फुददी को देख कर हल्के से बोल पड़े- वाह, क्या मस्त फुददी है तेरी शाजिया.. कोई नसीब वाला ही होगा जिसे तू मिलेगी. अब तूने मेरी आग तो भड़का दी है.. मगर इस लंड को कैसे शांत करूँ. तेरे साथ ज़्यादा कुछ कर भी नहीं सकता, तू जाग गई तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी.

अब्दुल जी बड़बड़ा रहे थे मगर अबकी बार शाजिया ने एकदम ध्यान दिया तो उसे सब समझ आ गया. तभी उसके दिमाग़ में एक आइडिया आया और वो नींद में बोलने लगी.

शाजिया- उम्म्म रज़िया प्लीज़, मुझे भी आईसक्रीम चूसनी है.. उम्म दो ना प्लीज़..

 
शाजिया ने अपना मुँह खोल दिया था अब्दुल जी ने सोचा नींद में अपनी सहेली के साथ बात कर रही है. शाजिया का खुला हुआ मुँह देख कर अब्दुल जी से रहा नहीं गया, वो उसके पास खड़े हो गए और धीमे से अपना सुपारा उसके होंठों पर टिका दिया.

शाजिया तो ऐसे ही किसी मौके की तलाश में थी. उसने सुपारे को चाटना शुरू किया और मुँह में पूरा लंड लेने की कोशिश करने लगी, मगर अब्दुल जी का लंड काफ़ी मोटा था और शाजिया नींद में थी तो ऐसे कैसे ले लेती. इससे तो उसकी चोरी पकड़ी जाती मगर उसका ये काम उसके अब्बू ने आसान कर दिया.

अब्दुल जी ने लंड पर दबाव बनाया और सुपारा उसके मुँह में घुसा दिया. अब शाजिया धीमे-धीमे अपने अब्बू का लंड चूसने लगी.

अब्दुल- आह.. शाजिया तेरी आईसक्रीम के चक्कर में तू अपने अब्बू का लंड चूस रही है.. उफ्फ बहुत आनंद आ रहा है.

ये खेल आगे चलता.. इससे पहले एक गड़बड़ हो गई.. बाहर जोर की आवाज़ हुई शायद कोई बर्तन गिरा था और उस आवाज़ के होते ही अब्दुल जी ने जल्दी से लंड मुँह से निकाला और लुंगी में डाल लिया.

ना चाहते हुए भी शाजिया की आँख खुल गई, शायद घबराहट की वजह से ऐसा हुआ था. मगर उसकी आँखें खुलीं तो सीधे अब्दुल जी की आँखों से मिल गईं. अब शाजिया का दिमाग़ कंप्यूटर की तरह चलने लगा. एक ही पल में उसने बात को संभाल लिया.

शाजिया ने एक जोरदार अंगड़ाई ली, जैसे वो बहुत गहरी नींद से जागी हो.

शाजिया- उम्म्म उम्म्म अब्बू.. क्या हुआ इतनी जोर से आवाज़ आई.. मैं डर गई कैसी आवाज़ थी ये? और आप अभी तक यहीं हो.. मुझे कब नींद आई, पता भी नहीं चला.

अब्दुल- अरे कुछ नहीं बिल्ली होगी शायद.. तू सो जा.. मैं जाकर देखता हूँ.

शाजिया- अब्बू मुझे डर लग रहा है.. प्लीज़ आप देख कर वापस आ जाना. मैं सो जाऊं फिर आप चाहें तो चले जाना.

अब्दुल- अच्छा ठीक है.. तू रुक, मैं बाहर देख कर आता हूँ.

अब्दुल जी बाहर चले गए और शाजिया बिस्तर पे बैठ गई.

शाजिया- शिट.. ये क्या किया मैंने.. मुझे ऐसे अचानक आँख नहीं खोलनी चाहिए थी. कहीं अब्बू को कुछ शक हो गया तो..! अब क्या करूँ वैसे अब्बू का लंड काफ़ी मोटा है शायद.. इसी लिए मेरे मुँह में नहीं जा रहा था. काश एक बार में देख पाती. अब अब्बू वापस आएँगे तो क्या करूँ.. कैसे उनको शांत करूँ, कुछ समझ में नहीं आ रहा.

तभी..

अब्दुल- मैंने कहा था ना बिल्ली होगी. उसको मैंने भगा दिया. चल अब तू सो जा, रात बहुत हो गई है. मैं अपने कमरे में जाता हूँ.. नहीं तेरी अम्मी उठेगी और मुझे वहां नहीं देखेगी तो घबरा जाएगी.

शाजिया की ज़रा भी हिम्मत नहीं हुई कि वो कुछ बोले या उन्हें रुकने को कहे. उसने बस ‘हाँ’ में गर्दन हिला दी और चादर लेकर सो गई.

अब्दुल जी ने कुछ सोचा, फिर वो भी कमरे में चले गए. अब उनको कहाँ नींद आने वाली थी. बस बार-बार शाजिया के मम्मे और चिकनी फुददी ही उन्हें दिखाई दे रही थी. उनका लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था. वो उठे और एक बार शाजिया के कमरे के पास जाकर रुके, जब उन्हें लगा शाजिया सो गई तो वो टॉयलेट में जाकर लंड को सहलाने लगे.

अब आपको बता दूँ कि शाजिया भी सोयी नहीं थी, वो भी उन्हीं पलों को याद कर रही थी. तभी उसे अहसास हुआ कि कमरे के बाहर कोई है तो वो सोने का नाटक करने लगी. जब अब्दुल जी टॉयलेट में चले गए, तो वो धीमे से कमरे से बाहर आई और टॉयलेट के पास जाकर रुक गई.

अब्दुल जी अन्दर बैठे अपने लंड को सहला रहे थे और शाजिया को याद कर रहे थे.

अब्दुल- आह.. शाजिया बेटी… ये तूने क्या कर दिया.. उफ्फ तेरे हुस्न को देख कर आज तेरा अब्बू वेबकूफ़ हो गया. देख लंड कैसे अकड़ा हुआ है.. उफ्फ मैं तेरे होंठों का स्पर्श अभी तक महसूस कर रहा हूँ.. आह.. आह.. चूस ले शाजिया.. जोर से चूस आह.. आनंद आ रहा है.

अपने अब्बू के मुँह से अपने बारे में ऐसी गंदी बातें सुनकर शाजिया भी उत्तेजित हो गई और उसने वहीं खड़ी रह कर अपने पजामे को नीचे किया. अब वो अपनी फुददी को उंगली से रगड़ने लगी थी.

अब सीन देखिए.. अन्दर अब्बू और बाहर बेटी वासना की आग में जल रहे थे.

काफ़ी देर तक अब्दुल जी शाजिया के नाम की मुठ मारते रहे और आख़िर उनके लंड ने पानी छोड़ ही दिया,

इधर शाजिया भी झड़ चुकी थी. उसका पूरा हाथ रस से भीग गया था. उसने जल्दी से पजामा ऊपर को किया और जल्दी से अपने कमरे में जाकर लेट गई.

शाजिया- उफ्फ ये मुझे क्या हो गया था. मैं कैसे बाहर अपनी फुददी को रगड़ रही थी. अगर अम्मी आ जातीं तो सस्स.. आज पानी निकालने में इतना आनंद क्यों आया.. क्या अब्बू के बारे में सोच कर? नहीं नहीं.. ये ग़लत है. मुझे बस अब्बू को किसी और के साथ सेक्स करने के लिए तैयार करना है, इससे ज़्यादा कुछ नहीं.

शाजिया ऐसे ही सोचती हुई सो गई और उधर अब्दुल जी पानी निकालने के बाद भी शांत नहीं हुए. वो बस रात भर शाजिया के बारे में सोचते रहे और आख़िरकार उन्हें भी नींद ने अपने आगोश में ले लिया.

सुबह का सूरज क्या नई कहानी लेकर आएगा, ये तो सुबह ही पता लगेगा.

रोज की तरह अब्दुल जी जल्दी उठ गए और कॉफी पी रहे थे. जब बहुत देर तक शाजिया अपने कमरे से बाहर नहीं आई.

अब्दुल- अरे आज शाजिया नहीं उठी क्या.. उसको कॉलेज नहीं जाना क्या?

अंजुम- आपकी याददाश्त कमजोर हो गई है.. बादाम खाया करो, आज सनडे है और सनडे को कौन सा कॉलेज खुलता है?

अब्दुल- अरे हाँ.. याद आया. कल शाम तक तो याद था कि आज शॉप का माल आने वाला है, अभी पता नहीं कैसे भूल गया.

अंजुम- आज भी आप शॉप जाओगे क्या? मैं सोच रही थी कि आज मैं मस्जिद होकर आऊँगी.

अब्दुल- तो मुझसे तुझे क्या काम है.. चली जाना, किसने रोका है?

अंजुम- अरे शाजिया भी तो घर पर है, अब लड़की को अकेली छोड़ कर जाऊं क्या?

अब्दुल- अरे तो मैं कौन सा शाम तक रहूँगा.. बस अभी गया और अभी आया. सामान की लिस्ट चैक करनी है, बाकी तो आदमी देख लेंगे.

अंजुम- ठीक है जी.. आप होकर आ जाओ, तब तक मैं अपना काम निपटा लेती हूँ और अपनी लाड़ली को भी उठा दो.. ताकि उसे भी नाश्ता करवा दूँ.

शाजिया को उठाने की बात सुनकर अब्दुल जी के जिस्म में करंट दौड़ गया. उन्हें रात वाली बात याद आ गई, वो उठे और शाजिया के कमरे में चले गए. उस टाइम शाजिया सीधी लेटी हुई थी. उसके बाल चेहरे पर थे और सांस के साथ सीना ऊपर-नीचे हो रहा था.

ये नजारा देख कर अब्दुल जी का मन डोल गया, वो उसके पास बैठ गए- शाजिया उठ जाओ, सुबह हो गई है.

शाजिया ने कोई रेस्पॉन्स नहीं दिया, वो वैसे ही बेसुध सोई रही. तब अब्दुल जी ने थोड़ी हिम्मत करके उसके चुचों पे हाथ लगाया और धीमे से दबा दिया.. जिससे शाजिया की नींद टूट गई और वो उठ गई. अब्दुल जी ने जल्दी से हाथ हटा लिया.

शाजिया- उउउह क्या है.. अब्बू सोने दो ना.. आज छुट्टी है. आज तो मेरा बस सोने का मन कर रहा है.

अब्दुल- बच्चे तेरी अम्मी को मस्जिद जाना है. तू उठ जा, नाश्ता कर ले. फिर मुझे भी शॉप जाना है.

 
शाजिया उठ कर बैठ गई और उसने एक जोरदार अंगड़ाई ली और अपने अब्बू से लिपट गई- अब्बू, आप कितने अच्छे हो.. रात को अपने कितने प्यार से मुझे सुलाया.. मुझे बहुत अच्छी नींद आई.

अब्दुल- अच्छा ऐसी बात है.. तो मैं रोज तुझे ऐसे सुला दूँगा, चल अब उठ जा.

शाजिया- अब्बू, आज शॉप मत जाओ ना. अम्मी भी जा रही हैं, मैं अकेली क्या करूँगी.

अब्दुल- अरे मैं अभी जाकर जल्दी आ जाऊंगा.. बस सामान की लिस्ट देखनी है.. फिर पूरा दिन तेरे साथ ही रहूँगा.

शाजिया- अच्छा अब्बू, ठीक है, आप बाहर जाओगे तो एक लॉक भी लेते आना. मेरे कमरे का बाथरूम का लॉक खराब हो गया है.

अब्दुल- अरे कब हुआ.. तूने बताया नहीं.

शाजिया- अब्बू, कल ही हुआ है. मैं आपको बताना भूल गई थी.

अब्दुल- अच्छा रुक.. मैं अभी देखता हूँ.

अब्दुल जी खड़े हुए और लॉक को चैक करने लगे. वो अटक गया था तो उन्होंने स्क्रूड्राइवर लिया और लॉक को खोल दिया. अब की होल से अन्दर आराम से देखा जा सकता था, मगर ये बात अभी अब्दुल जी के दिमाग़ में नहीं थी. उन्होंने तो कुछ और सोच कर लॉक खोला था.

आप खुद देख लो कि इसका क्या खेल होना है.

अब्दुल- लो मैंने लॉक खोल लिया.. अब ऐसा ही दूसरा ले आऊंगा.. ऐसे लाता, तो फ़र्क आ जाता.

शाजिया बिस्तर से उठ कर नीचे आई और बाथरूम के दरवाजे को करीब से जाकर देखने लगी.

अब्दुल- अब ये सुस्ती छोड़ और तू जल्दी से नहा कर फ्रेश हो जा.

शाजिया- अब्बू ये लॉक खुल जाने से इसमें तो 2 होल हो गए हैं, अब तो अन्दर का दिखेगा.

अब्दुल- अरे तो यहाँ कौन आ रहा है. तू कमरे का दरवाजा बंद करके नहा ले.

अब्दुल जी की बात सुनकर शाजिया के दिमाग़ में अचानक एक आइडिया आया.

शाजिया- नहीं अब्बू, अभी नहीं, बाद में नहा लूँगी.. अभी बस मुँह धोकर नाश्ता कर लेती हूँ, फिर आराम से नहा लूँगी.

अब्दुल- अच्छा जैसी तेरी मर्ज़ी.. चल जल्दी आ जाना, मैं बाहर जा रहा हूँ.

अब्दुल जी के दिमाग़ में अभी भी कोई विचार नहीं आया था. वो बाहर जाकर वापस चेयर पे बैठ गए.

शाजिया जल्दी बाहर आ गई उसके बाद नाश्ता किया और अपनी अम्मी का हाथ बंटाने लगी.

अंजुम- आप बैठे रहोगे क्या.. जाओ जल्दी अपना काम निपटा कर आ जाओ, फिर मुझे जाना भी है. शाजिया अकेली रहेगी क्या?

अब्दुल- अच्छा जाता हूँ.. चैन से बैठने भी नहीं देती और हाँ तुम निकल जाना, मैं एक घंटे में आ जाऊंगा.

शाजिया- अब्बू आप जल्दी ही आ जाना ओके.

अंजुम- हाँ आ जाएँगे और तू दरवाजा अन्दर से लॉक कर लेना, तेरे अब्बू के पास चाभी है, वो खोलकर आ जाएँगे.

अंजुम ने थोड़ा ज्ञान दिया, फिर अपने काम में लग गई और अब्दुल जी वहां से निकल गए.

अब्दुल जी सीधे शॉप गए, वहां अपना काम निपटा कर वो फरज़ाना के पास चले गए.

फरज़ाना- क्या बात है.. आज इतनी सुबह आप यहाँ.. वो भी सनडे के दिन? सब ठीक तो है ना..!

अब्दुल- ठीक ही तो नहीं है.. दो दिन से तड़प रहा था.. सोचा आज सुबह-सुबह तेरी चुदाई कर आता हूँ.

फरज़ाना- हा हा हा हा आपका तो आज पोपट बन गया हा हा हा… आपका केएलपीडी हो गया है.

अब्दुल- अरे क्या हुआ.. दाँत निकल रही है.. कुछ बता भी मुझे?

फरज़ाना- मेरे प्यारे अब्बू, रेड सिग्नल है आज.. अब मुझे एक हफ्ते तक भूल जाओ.

अब्दुल- धत तेरी फुददी की.. साली क्या आज ही तुझे महीने से होना था.. सोचा था आज तेरी जमकर चुदाई करूँगा मगर सब चौपट हो गया. अब तू मुँह से भी रस नहीं निकालने वाली.. तेरे नखरे भी बहुत हैं.

फरज़ाना- आपको तो पता है मुझे जब पीरियड आते है तो बहुत ज़्यादा आते हैं.. जिससे मेरी हालत खराब हो जाती है. किसी चीज में मन नहीं लगता तो चूसना.. चुदवाना बहुत दूर की बात है.

अब्दुल- भाड़ में जाओ तुम.. मूड खराब कर दिया सारा.. मैं चलता हूँ.

फरज़ाना- अरे रूको आए हो तो कॉफी पीते जाओ.

अब्दुल- नहीं.. घर से नाश्ता करके आया हूँ, बाजार में थोड़ा काम है. तेरे पास फिर कभी आता हूँ ओके..!

अब्दुल जी वहां से निकल गए और लॉक लेने बाजार चले गए.

फ्रेंड्स ये बाजार से घर जाएं तब तक आपको कुछ और दिखा देती हूँ. फवाद घर आ गया होगा, वहां भी कच्ची कली आई हुई है.. तो देखो आज राबिया क्या गेम खेलती है.

जाहिरा को जल्दी उठने की आदत थी तो वो जल्दी उठ गई थी और उसे राबिया ने टाइम बता दिया था कि फवाद कब आता है, उसी हिसाब से उसने कॉफी बना दी.

फवाद घर में आया, तब तक उसे जाहिरा का पता नहीं था. उसने बैग रखा और चेयर पे बैठ कर राबिया को आवाज़ लगाई- राबिया कहाँ हो यार.. आज तो मेरी हालत खराब हो गई.

आवाज़ सुनकर जाहिरा कॉफी लेकर बाहर आई, जिसे देख कर फवाद चौंक गया.

जाहिरा- ये लीजिए गर्म कॉफी.. इससे आपकी सारी थकान गायब हो जाएगी.

फवाद- तुम कौन हो और यहाँ कैसे आई?

राबिया- साली है ये तुम्हारी.. जाहिरा नाम है इसका.. और आज से ये यहीं हमारे साथ रहेगी.

इतना बोलकर राबिया फवाद के पास आई और वहां खड़ी-खड़ी मुस्कुराने लगी.

फवाद सवालिया नज़रों से राबिया को देखने लगा कि साली कहाँ से पैदा हो गई. वो कुछ पूछता तभी राबिया फिर बोली- जाहिरा, तू किचन की सफ़ाई कर और आप कमरे में चलो, मुझे कुछ बात करनी है.

फवाद तो किसी बच्चे की तरह राबिया के पीछे कमरे में चला गया. राबिया ने कमरे को लॉक किया और फवाद से लिपट गई.

राबिया- आज मैं बहुत खुश हूँ फवाद, जैसी लड़की मुझे चाहिए थी, वैसी मिल गई.

फवाद- मगर ये है कौन और तुम्हारी बहन कैसे.. कुछ समझ नहीं आ रहा?

राबिया ने फवाद को समझाया कि ये काम वाली है. उसकी फ्रेंड ने लाकर दी है और वो उसे अपनी छोटी बहन बना चुकी है.

फवाद- अच्छा ये बात है, मगर तुम्हें ये कुछ ज्यादा छोटी नहीं लगती?

राबिया- अरे मैं कौन सा इससे ज़्यादा काम करवाया करूँगी. बस थोड़ी हेल्प मिल जाएगी, यही बहुत है और सबसे खास बात इसकी जो है, वो तुम्हें पता लगेगी तो तुम्हारा दिल खुश हो जाएगा.

फवाद- अच्छा ऐसी क्या बात है बताओ तो?

राबिया- अभी नहीं पहले तुम मुँह हाथ धोकर आओ.

फवाद कुछ कहना चाहता था मगर राबिया ने उसको बाथरूम की तरफ़ धकेल दिया और बोली कि बाकी बातें बाद में करूँगी. फवाद फ्रेश हो गया और उसने टी-शर्ट और पजामा पहन लिया. घर आने के बाद वो अंडरवियर नहीं पहनता था. अब राबिया ने अपना खेल खेलना शुरू किया.

राबिया- तुम्हें पता है, ये जाहिरा हाथ-पैर इतने अच्छे से दबाती है.. पूछो मत.

फवाद- अच्छा तुम्हें इस बात का कैसे पता है?

राबिया- अरे रात को मैंने दबवाए थे उससे.. अभी तुम्हारे दबवाती हूँ, फिर देखना.

फवाद- अरे नहीं मुझे नहीं दबवाने!

राबिया- जान मैं बोल रही हूँ ना.. चलो तुम चुपचाप लेट जाओ. उसके बाद जाहिरा का कमाल देखना ओके..!

राबिया ने जाहिरा को अन्दर बुला लिया और फवाद के पैर दबाने को कहा. अब जाहिरा बेचारी क्या जाने कि राबिया की क्या चाल है. वो ख़ुशी से शुरू हो गई और जैसा कि समीर ने बताया था कि कच्ची कली फवाद की कमजोरी है. जाहिरा का हाथ लगते ही फवाद के जिस्म में खून का दौरा तेज हो गया.

राबिया- जाहिरा अच्छे से दबाना, तब तक मैं नहा कर आती हूँ और फवाद जब तक मैं नहीं आ जाऊं.. इसे मना मत करना ओके..!

जाहिरा- आप जाओ आपा, अगर जीजू मना भी करेंगे ना, तो भी मैं नहीं जाऊंगी.

फवाद- क्या बात है सीधे जीजू..! ये अच्छा है.. चल मेरी साली दिखा अपना जादू.. मैं भी तो देखूँ.. तेरी आपा सही कह रही है या नहीं?

जाहिरा शुरू हो गई और जैसे राबिया ने उसको सिखाया था, वो नीचे से शुरू हुई और जाँघ पर आकर दबाने लगी.

फवाद का लंड तन गया. अब उसका पजामा ऊपर उठ गया. फवाद ने सोचा जाहिरा देख ना ले, मगर फिर उसने सोचा कि ऐसी कली का हाथ एक बार लंड को लग जाए तो आनंद आ जाएगा और वैसे भी ये छोटी है, सो कुछ समझ भी नहीं पाएगी.

फवाद- आह.. साली जी सच में जादू है तेरे हाथों में, उफ्फ थोड़ा ऊपर दबा.. वहां ज़्यादा दर्द हो रहा है.

जाहिरा के दोनों हाथ दोनों जाँघों पर रखकर वो मालिश करवाने लगा. अब जैसे उसके हाथ ऊपर जाते तो उंगली लंड को टच हो जाती और फवाद सिहर जाता.

 
राबिया नहाने के बहाने गई थी मगर वो छुप कर ये नजारा देख रही थी. राबिया मन हि मन बोल रही थी ‘ओह फवाद तुम तो बहुत जल्दी गर्म हो गए. अब लंड उसके हाथ में दे दो.. और इससे लंड की भी मालिश करवा लो.’

फवाद- आह.. ऐसे ही दबा.. गुड, अच्छा लग रहा है.. हाँ ऐसे ही.. थोड़ा ऊपर बस थोड़ा सा.. और ऊपर कर जाहिरा..!

अब फवाद आउट ऑफ कंट्रोल हो गया था. वो भूल गया था कि राबिया बाथरूम में है और ये लड़की उसकी बीवी नहीं काम वाली है. वो ऊपर-ऊपर करके जाहिरा से लंड दबवाना चाहता था मगर जाहिरा की समझ में नहीं आ रहा था. वो बस जाँघों को ही दबा रही थी.

फवाद- उफ्फ जाहिरा तू जरा जोर-जोर से रगड़ ना..!

जाहिरा ने फूले हुए लंड को देखा फिर वो मुस्कुरा दी.

फवाद- क्या हुआ.. तू ऊपर क्यों नहीं करती और ये हंस क्यों रही है?

जाहिरा कुछ बोले उसके पहले राबिया की आवाज़ दोनों को सुनाई दी, जिसे सुनकर फवाद होश में आया और जल्दी से जाहिरा का हाथ हटा दिया.

राबिया- जाहिरा में टॉवल लाना भूल गई हूँ. वो सामने टेबल पर है, देना तो मुझे.

जाहिरा जल्दी से उठी और टॉवल राबिया को दे दिया. उस टाइम तक राबिया नहाई नहीं थी. बस फवाद और जाहिरा को देख रही थी. जब उसे लगा फवाद बहुत ज़्यादा गर्म हो गया है, तब उसने जाहिरा को आवाज़ लगाई थी.

टॉवल लेने के साथ राबिया ने जाहिरा को काम भी बता दिया कि वो बाहर झाड़ू लगा दे. बस फिर क्या जाहिरा वहां से चली गई और फवाद खड़ा लंड लिए वहीं पड़ा रहा.

थोड़ी देर बाद जब राबिया नहा कर आई तो फवाद उसे खा जाने वाली नज़रों से देख रहा था.

राबिया- क्या हुआ ऐसे क्या घूर रहे हो.. मुझे क्या मंसूबा है?

फवाद- डार्लिंग, मंसूबा तो तेरी फुददी चाटने का है और जमकर तेरी चुदाई करना है.

राबिया- नहीं आज कुछ नहीं, जाहिरा बाहर है.. आज उसका पहला दिन है. मैं नहीं चाहती उस बच्ची पर कोई बुरा असर पड़े.

फवाद- अरे यार ये क्या बात हुई. उसे काम करने के लिए रखा है या मेरा काम रोकने के लिए.. ये ग़लत है यार..!

राबिया- अरे ऐसे तो आते ही सो जाते हो. आज क्या हो गया जो सुबह-सुबह लंड खड़ा करके मेरे पीछे पड़े हो हाँ..!

राबिया ने ये बात गुस्से में कही, जिससे फवाद झेंप गया और अपनी चोरी पकड़ी जाने के डर से उसने बात को घुमा दिया.

फवाद- अरे रोज थका हुआ आता हूँ तो सो जाता हूँ आज जाहिरा ने कमाल कर दिया. ऐसे पैर दबाए कि मेरी सारी थकान निकल गई.

राबिया- अच्छा ये बात है.. चलो अभी सो जाओ दोपहर को इच्छा पूरी कर लेना. मैं अभी-अभी नहाई हूँ.. दोबारा मुझे गंदा नहीं होना.

फवाद- अरे इसमें गंदा क्या होना हाँ..?

राबिया- बोला ना आज मुझे घर की सुखशान्ति के लिए शबनम करनी है.. तुम सोते हो या तुम्हें करने को कोई काम बताऊं.

फवाद समझ गया कि अब ये मानने वाली नहीं.. तो सोने में ही भलाई है. उसने राबिया को बाहर जाने को कहा और सो गया.

राबिया- जाहिरा, जरा मेरे पास इधर तो आ.

जाहिरा- हाँ आपा बोलो, क्या हुआ, जीजू को मेरा पैर दबाना अच्छा लगा क्या?

राबिया- हाँ अच्छा लगा मगर वो थोड़े नाराज़ भी हैं.. तुम्हें ऊपर करने को कहा तो तुम क्यों नहीं कर रही थीं?

जाहिरा- व्व..वो आपा और ऊपर करती तो जीजू की लुल्ली से हाथ लगता.. उनकी वो एकदम खड़ी हुई थी.

राबिया- अच्छा, तुझे ये भी पता है. मैं तो समझी थी कि तू नादान है और लुल्ली खड़ी थी ये तुझे कैसे पता चला?

जाहिरा- आपा पहले पता नहीं था.. अभी कुछ महीने पहले ही मुझे पता लगा.

राबिया- कैसे पता लगा.. जरा मुझे भी बता.. तो मैं भी तो देखूं कि तुझे क्या-क्या पता है?

जाहिरा- वो हमारे घर के पास नाला है, सब आदमी उसी में मूतते हैं, तो कई बार उनकी लुल्ली देखने को मिल जाती है. फिर हमारे घर के पास बड़ी लड़कियां उनके बारे में बातें करती हैं कि इसका बड़ा है और इसका देखो खड़ा है. बस उन्हीं से पता लग गया. इससे ज्यादा मुझे और कुछ नहीं पता.

राबिया- ओह ये बात है.. अच्छा वो सब चुदाई की बातें भी करती है क्या?

जाहिरा- ये क्या होती है आपा, मैंने नहीं सुनी.

राबिया समझ गई थी कि जाहिरा को ज़्यादा कुछ पता नहीं है, ये कोरा कागज है. अब तू इस पर जो चाहे वो लिख सकती है.

राबिया- देख जाहिरा जैसे पैर दुख़ते हैं ना.. वैसे लुल्ली भी दुखती है. अबकी बार जीजू कहे तो दबा देना और उनसे ये मत कहना कि मैंने कहा था.. समझ गई ना?

जाहिरा- ठीक है आपा दबा दूँगी… मगर मेरी अम्मी कहती है आदमी की लुल्ली की बात नहीं करना चाहिए.. ये गंदी बात होती है.

राबिया- अरे तेरी अम्मी को क्या मालूम. उसको जाने दे, तू यहाँ काम करने आई है ना.. तो बस मन लगा कर काम कर मेरी सारी बातें मानेगी ना.. तो मैं तुझे ज़्यादा पैसे दूँगी.

पैसों का नाम सुनकर जाहिरा खुश हो गई. अब गरीब के लिए तो पैसा ही सब कुछ है और बेचारी नादान-भाली जाहिरा क्या जाने कि पैसों के चक्कर में उसकी फुददी की सील टूटने वाली है.

जाहिरा- अच्छा आपा मैं अबकी बार जीजू की लुल्ली दबा दूँगी.

राबिया- गुड गर्ल.. अच्छा सुन तेरे जीजू जैसे जैसे कहें, तू करना. तुझे बहुत आनंद आएगा और आज रात मैं तुझे एक खेल खेलना भी सिखाऊंगी. फिर हम दोनों मिलकर आनंद करेंगे.

राबिया ने जाहिरा को अपनी बातों के जाल में फँसा लिया. फिर वो उसे साथ लेकर बाजार से कुछ सामान लेने चली गई.

उधर शाजिया के दिमाग़ में शैतानी आइडिया आ गया था. अब पता नहीं ये नादान शाजिया को क्या हो गया. ऐसे अचानक इतनी तेज कैसे हो गई. इसका एक कारण तो हम सब जानते हैं कि रज़िया की संगत का असर था और दूसरा उसने ऐसे-ऐसे टास्क कर लिए थे, जिससे उसकी वासना जाग गई थी. मगर अपने अब्बू के लिए ऐसे सोचना.. इसका सबसे बड़ा कारण इंसानी प्रवृति है. अक्सर हम दूसरों के मुक़ाबले अपने किसी करीबी से ज़्यादा उत्साहित होते हैं, इसे शैतानी दांव भी कहते हैं. अब जो भी है.. हमें उससे क्या. चलो ज्ञान बहुत हो गया अब कहानी का मजा लेते हैं.

शाजिया ने मेनडोर अनलॉक किया हुआ था और खिड़की से छुपकर वो अपने अब्बू के आने का इन्तजार कर रही थी.

शाजिया- ओह अब्बू कहाँ रह गए, आ जाओ ना जल्दी से.. आपके लिए अभी तक मैं नहाई भी नहीं हूँ. आज मैं आपको अपना जिस्म दिखाना चाहती हूँ. मैं आपकी सोई हुई कामवासना आज जगा दूँगी. फिर आप किसी को भी चोदने को राज़ी हो जाओगे.

शाजिया ये बातें सोच ही रही थी तभी उसे अब्बू आते हुए दिखाई दिए. वो जल्दी से भाग कर अपने कमरे के बाथरूम में चली गई और अपने कपड़े निकाल दिए.

जैसा शाजिया ने सोचा, ठीक वैसा ही हुआ. अब्दुल जी अन्दर आए और बिना आवाज़ किए वो सीधे शाजिया के कमरे में आ गए. शायद उनके मन में भी चोर था. शाजिया ने की-होल से उन्हें आता देखा तो पानी का शावर चालू कर दिया और मज़े से गुनगुनाते हुए नहाने लगी.

अब्दुल जी धीमे से की-होल के पास बैठ गए और जैसे ही उन्होंने अन्दर देखा, उनका लंड एक झटके में खड़ा हो गया.. जैसे कोई बरसों का प्यासा हो.

शाजिया के जवान जिस्म को देख कर अब्दुल जी के अन्दर वासना भर गई. उनका दिल करने लगा कि अभी अन्दर जाकर उसके खड़े निपल्स को चूस के उसके मदमस्त चूचों को मसल डालें और उसकी कुँवारी फुददी का सारा रस पी जाएं. मगर बीच में जो अब्बू और बेटी के रिश्ते की दीवार थी.. उसको कैसे तोड़ें.

अब्दुल जी ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और शाजिया की सुलगती जवानी को देखते हुए वो लंड को सहलाने लगे.

 
शाजिया को पता था कि बाहर उसके अब्बू उसकी जवानी का आनंद लूट रहे हैं. ये सोचकर उसके निप्पल हार्ड हो गए, फुददी में खुजली होने लगी मगर उसने अपने आप पर काबू रखा. शाजिया ये बिल्कुल नहीं चाहती थी कि अपने अब्बू के सामने वो फुददी को रगड़े या कुछ ऐसी हरकत करे, जिससे उसके अब्बू उसे गंदी लड़की समझें. वो तो बस अनजान बन कर अपने अब्बू को मज़े देना चाहती थी.

जब शाजिया नहा चुकी तो उसने अपने जिस्म को अच्छे से पौंछा और सिर्फ़ टॉवल लपेट कर वो बाहर आ गई. तब तक अब्दुल जी वहां से बाहर निकल गए थे और फिर उन्होंने बाहर से शाजिया को आवाज़ दी, जैसे वो अभी-अभी घर में दाखिल हुए हों.

अब्दुल- शाजिया कहाँ हो तुम? देखो मैं जल्दी आ गया ना.

शाजिया ने कोई जवाब नहीं दिया और बस मुस्कुराते हुए धीमे से बोली- वाह अब्बू, मेरे जिस्म को देख कर आँखें सेंक ली, अब बहाना बना रहे हो. वैसे आपका लंड भी तो मेरी फुददी की तरह फड़क रहा होगा, उसे तो मैं ही अपने मुँह से चूस-चूस कर ठंडा करूँगी. देखना आप.

शाजिया- मैं नहा रही थी अब्बू.. बस अभी कपड़े पहन कर आती हूँ.

अब्दुल- अरे घर में ही तो रहना है, कपड़े पहनने की क्या जरूरत है.

अब्दुल जी को पता नहीं क्या हो गया था. वो कुछ भी बोल रहे थे मगर फ़ौरन उन्हें अहसास हुआ तो बात बदल दी.

अब्दुल- एमेम… मेरा मतलब है जल्दी से कुछ भी पहन ले.. कोई घर में पहनने लायक कपड़े.. समझ गई ना..!

शाजिया- ओके अब्बू, बस अभी एक मिनट में आई.

शाजिया ने अपने कपड़ों में से एक कॉटन की मैक्सी निकाली और पहन ली. इसके अन्दर उसने कुछ नहीं पहना था.

शाजिया- ये लो आ गई. अब्बू इस मैक्सी में मैं कैसी लग रही हूँ?

अब्दुल- वाह बहुत अच्छी लग रही हो मगर ये तो वो पुरानी वाली है ना?

शाजिया- हाँ अब्बू मगर ये पतली है.. तो इसमें आराम रहता है और वैसे भी आज मैंने ये बहुत दिनों बाद पहनी है.

अब्दुल- अच्छी बात है.. चल तेरे बाथरूम का लॉक लगा देते हैं, देख मैं नया ले आया हूँ. उसके बाद बैठ कर बातें करेंगे.

शाजिया- अब्बू पहले आप कपड़े तो बदल लो, ऐसे पैन्ट पहन कर काम करोगे क्या?

अब्दुल जी को लगा शाजिया सही बोल रही है और वैसे भी उनका मंसूबा उसके मज़े लेने का था तो पैन्ट में आनंद नहीं आता, इसलिए वो अन्दर गए और सिर्फ़ लुंगी और बनियान पहन कर आ गए, उसके बाद बाथरूम का लॉक लगा दिया.

अब्दुल- ले भाई, ये काम तो हो गया, अब बोल?

शाजिया- अब्बू, पहले आप मेरे साथ कितना रहते थे मगर अब तो आप बहुत बिज़ी रहते हो.. मेरे साथ खेलते ही नहीं.

अब्दुल- अरे मेरा तो बड़ा मन है तेरे साथ खेलने का.. मगर डर लगता है.

शाजिया- कैसा डर अब्बू..? मैं आपकी बात का मतलब कुछ समझी नहीं.

अब्दुल- व्व..वो मेरा मतलब है तुझे कोई चोट ना लग जाए इसलिए.

शाजिया- हा हा हा हम कौन सा कुश्ती लड़ने वाले हैं जो चोट लगेगी.

अब्दुल- हाँ ये भी है. चल आज तेरे मन की बात पूरी करते हैं, बोल क्या खेलेगी?

शाजिया सोचने लगी कि ऐसा कौन सा खेल खेले, जिससे वो अब्बू को आनंद दे सके और उनका लंड भी देख सके. रात से उसके मन में ख्याल था कि अब्बू का लंड कैसा होगा.

शाजिया- कुछ समझ में नहीं आ रहा अब्बू क्या खेल खेलूँ.

अब्दुल- अरे अभी तो बोल रही थी खेलते नहीं. अब खुद ही सोच में पड़ गई. चल ऐसा कर मैं तुझे गोदी में बिठा कर झूला झुला देता हूँ और तेरे सर की मालिश भी कर दूँगा. बोल क्या कहती है.

शाजिया मन में- अच्छा अब्बू बड़ी जल्दी है आपको आनंद लेने की.. मेरी फुददी से लंड टच करना चाहते हो क्या.

अब्दुल- अरे कुछ तो बोल.. हाँ या ना.. ऐसे पुतला बन कर क्यों खड़ी हो गई..?

अब्दुल जी की बात सुनकर शाजिया के दिमाग़ में एक आइडिया आया- वाउ अब्बू क्या आइडिया दिया है, ये मस्त है इसमें आनंद आएगा.

अब्दुल- अरे क्या आइडिया आया मुझे भी बता.

शाजिया- अब्बू हम एक खेल खेलते हैं जिसमें एक पुतला बन जाएगा और दूसरा उसके जिस्म से छेड़खानी करेगा, लेकिन उसको हिलना नहीं है. वो सिर्फ़ बोल सकता है. ये टाइम देख कर खेलेंगे जो ज़्यादा देर तक टिका रहा, वो जीत जाएगा और हारने वाले की बात मानेगा.

अब्दुल- नहीं नहीं, इसमें कुछ आनंद नहीं आएगा थोड़ी सी गुदगुदी की और खेल खत्म.. कुछ और सोच, जिसमें आनंद आए.

शाजिया ने थोड़ी देर सोचा मगर उसके दिमाग़ में कोई आइडिया नहीं आया, जिससे वो खेल के बहाने अब्बू को आनंद दे सके. साथ ही अब्दुल जी भी इसी सोच में थे कि कैसे वो शाजिया को लंड चुसवाए, उनके दिल में बस यही बात थी कि एक बार शाजिया उनका लंड चूस दे और वो उसके निपल्स चूस सकें.

शाजिया- मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा आप सोचो, मुझे तो भूख लगने लगी है. मैं फ़्रीज़ से केला लेकर आती हूँ. आपको भी एक लाकर दूँ क्या.

केले का नाम सुनते ही अब्दुल जी के दिमाग़ की घंटी बजी और एक ज़बरदस्त आइडिया उनके दिमाग़ में आ गया.

अब्दुल जी शाजिया के पास गए और उसके चेहरे को पकड़ कर मुस्कुराने लगे.

शाजिया- क्या हुआ? केला चाहिए आपको भी?

अब्दुल- नहीं शाजिया मेरे दिमाग़ में एक खेल आ गया है. तू ये बता अगर केला खाने की वजह चूसा जाए तो कैसा लगेगा?

शाजिया- हा हा हा अब्बू, आप भी ना कुछ भी.. ये कैसा खेल हुआ? भला कोई केला भी चूसने की चीज है क्या?

अब्दुल- अरे पगली पता है मुझे.. मगर ये एक खेल है. अच्छा सुन तुझे मैं ठीक से समझाता हूँ. देख इस खेल में आँखें और हाथ बंद होंगे. मैं तुझे फ़्रीज़ की कोई भी चीज जैसे केला हो या कोई सब्जी जैसे भिंडी या तुरयी, कुछ भी मुँह में दूँगा. तू उसे चूस कर बताना वो क्या है?

 
अब्दुल जी की बात सुनकर शाजिया की आँखों में चमक आ गई, वो समझ गई इस खेल में उसे लंड चूसने को मिलेगा और साथ ही साथ वो अपने अब्बू की होशियारी पर फिदा हो गई. मगर उसे थोड़ा शक हुआ अगर अब्दुल जी ने लंड ना चुसवाया तो फिर उसने भी दिमाग़ दौड़ाया और फिर बोली- वाओ अब्बू, ये गेम तो बहुत मस्त सोचा आपने, मगर फ़्रीज़ में क्या-क्या है ये तो मुझे पता है. फिर सब्जी की तो महक से ही पता लग जाएगा कोई ऐसी चीज चूसने को देना, जिसका आसानी से पता ना लग सके. जैसे पेन या पेन्सिल या कोई भी ऐसी चीज जिसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो. हाँ साथ में सब्जी भी यूज करना ताकि कन्फयूजन रहे और खेल लंबा चले.

अब्दुल जी ये सुनकर बड़े खुश हुए कि शाजिया ने उनकी मुश्किल आसान कर दी.

अब्दुल- हाँ ऐसे ही करेंगे, चलो अब पहले तुम्हारी आँख और हाथ बाँध दूँ.

शाजिया- क्यों मेरी क्यों.. आपकी क्यों नहीं? आप टेस्ट करोगे और बताओगे, मैं नहीं बताने वाली.

शाजिया ने तो अब्दुल जी के अरमानों पर पानी फेर दिया मगर ये भी उसकी अपने अब्बू को तड़पने की एक साजिश थी.

अब्दुल- अरे नहीं आइडिया मैंने दिया, तो मैं ही पहले खेलूँगा. आँख तुम्हें बंद करनी होगी समझी!

शाजिया ने थोड़ी ज़िद की, मगर फिर वो मान गई. वैसे भी उसे मानना ही था.

अब्दुल- तुम यहाँ चेयर पर बैठोगी, पीछे तुम्हारे हाथ बाँध दूँगा और आँख पर पट्टी.. ताकि ना तुम छूकर पता कर सको, ना देख कर, समझी!

शाजिया- अब्बू इस सबकी क्या जरूरत है मैं हाथ नहीं लगाऊंगी और सच्ची में आँख भी बंद रखूँगी, प्लीज़ ऐसे ही करते है ना.

अब्दुल- नहीं खेल के कुछ नियम होते हैं, उसी हिसाब से खेलना चाहिए.

शाजिया मान गई तो अब्दुल जी ने उसे चेयर पे बैठा कर पीछे हाथ बाँध दिए और आँखें भी बंद कर दीं.

अब्दुल- इन्तजार कर.. बस मैं अभी सब चीजें लेकर आता हूँ हाँ..!

अब्दुल के जाने के बाद शाजिया दिल ही दिल में बहुत खुश थी कि आज तो उसे अब्बू का लंड खुलकर चूसने को मिलेगा.

अब्दुल- हाँ तो शाजिया तैयार हो तुम? और हाँ सिर्फ़ जीभ और होंठों से पता करना है.. किसी भी चीज को दाँत मत लगाना.

शाजिया मन में- ओह अब्बू डरो मत.. मैं आपके लंड को प्यार से चुसूंगी, काटूंगी नहीं, बस जल्दी से मेरे मुँह में आप अपना लंड घुसा दो.

अब्दुल- कुछ सुन भी रही है तू.. मैंने अभी क्या कहा तुमसे?

शाजिया- हाँ अब्बू सुन लिया, अब शुरू करो.

अब्दुल जी ने पहले शाजिया के मुँह में रोटी बेलने का बेलन दिया और थोड़ी देर में शाजिया ने बता दिया. उसके बाद केला, पेन्सिल दिया, वो भी शाजिया ने बता दिया.

शाजिया- अब्बू मैं जीत गई, मैंने सब चीज सही बताई हैं.

अब्दुल- अरे अभी कहाँ.. अब लास्ट चीज बाकी है. इसका नाम बता तब तू जीतेगी.

शाजिया- अच्छा तो लाओ, उसमें क्या है अभी उसका नाम भी बता देती हूँ.

अब्दुल जी अब उत्तेजित हो गए थे, उन्होंने अपना लंड लुंगी से बाहर निकाला, जो अभी आधा ही खड़ा था.. यानि पूरे शबाब पे नहीं आया था.

अब्दुल- ये अनोखी चीज है शाजिया, ध्यान से बताना तू.. ठीक है?

इतना कहकर वो लंड को उसके होंठों के एकदम पास ले गए.

शाजिया ने पहले जीभ से सुपारे को चाटा और फिर धीमे से अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

अब्दुल जी को असीम आनन्द की प्राप्ति हुई, मगर वो अपने ज़ज्बात को काबू में किए हुए वैसे ही खड़े रहे.

शाजिया ने थोड़ी देर लंड चूसा, फिर मुँह हटा लिया क्योंकि थोड़ा नाटक करना पड़ता है, नहीं तो अब्दुल जी को शक हो जाता.

शाजिया- अब्बू, ये क्या है बहुत अजीब सी चीज है, गोल भी है, नर्म भी है कुछ नमकीन सा स्वाद है, समझ नहीं आ रहा.

अब्दुल- अरे कहा था ना.. ये हार्ड है. ऐसे जल्दी समझ नहीं आएगा वैसे तुझे एक हेल्प देता हूँ. ये लंबी चीज है अगर तू पूरा मुँह में लेकर चूसेगी तो शायद इसका नाम बता पाएगी, नहीं तो हार जाओगी.

शाजिया ने फिर लंड को मुँह में ले लिया और मज़े से चूसने लगी. अब्दुल जी भी अपनी बेटी को लंड चुसवा कर बहुत ज़्यादा खुश हो रहे थे.

शाजिया सुपारे को होंठों में दबा कर चूस रही थी. अब वो ज़्यादा से ज़्यादा लंड मुँह में लेना चाहती थी मगर वो कोई याक़ूब का लंड तो था नहीं, जो वो पूरा निगल जाती. ये तो 8″ का अज़गर था, जिसे निगलना मुश्किल था. दूसरी बात वो चीज को पहचानने के लिए ये कर रही थी, तो ज़्यादा आनंद भी नहीं ले सकती थी. मगर उसने एक तरकीब लगाई, लंड को वापस बाहर निकाला.

अब्दुल- अरे क्या हुआ.. तुझे इसका नाम पता चल गया क्या?

शाजिया- नहीं अब्बू समझ में नहीं आ रहा. ये तो कोई बड़ी लॉलीपॉप जैसी कोई चीज है. इसमें से थोड़ा नमकीन रस जैसा आ रहा है.. और ऐसा स्वाद मैंने लाइफ में कभी नहीं चखा है.

शाजिया की बात सुनकर अब्दुल जी थोड़े घबरा गए क्योंकि उनके लंड से पानी की बूंदें आने लगी थीं और शाजिया को शक ना हो जाए ये सोच कर उन्होंने बात को बदल दिया और शाजिया तो खुद यही चाहती थी.

अब्दुल- अरे वाह तू तो बहुत करीब आ गई. ये रियल में ऐसी ही चीज है, इसमें रस भी रियल है. अब तू इसको चूसती रह और आनंद लेती रह. जब समझ आ जाए बता देना.

शाजिया- ठीक है अब्बू अब तो खुलकर चूसना पड़ेगा.. तभी आनंद आएगा.

अब्दुल- हाँ ये हुई ना बात, चल चूस और रस के पूरे मज़े ले.

शाजिया को अब कोई डर नहीं था वो खुलकर लंड को चूसने लगी. मगर एक गड़बड़ थी कि उसने पेंटी नहीं पहनी थी और उसकी फुददी रस टपका रही थी. ऐसे तगड़े लंड की चुसाई से उसकी उत्तेजना भी बढ़ गई थी. उसका बहुत मन था कि उसके अब्बू उसकी फुददी को चूस कर उसकी खुजली मिटा दें. मगर ये इतना आसान नहीं था, तो वो बस लंड को चूस कर आनंद लेने लगी.

काफ़ी टाइम तक ये लंड चुसाई चलती रही. अब तो अब्दुल जी धीमे-धीमे झटके भी मारने लगे थे, उनकी उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी. उनके विशाल लंड से रस की धारा निकलने को बेताब थी, तभी उन्होंने जल्दी से लंड को बाहर निकाला और पास पड़े प्याले में सारा रस निकाल दिया तब जाकर उनको सुकून मिला.

शाजिया भी समझ गई थी कि उसके अब्बू ठंडे हो गए हैं मगर उसने अनजान बनने का नाटक किया- क्या हुआ अब्बू, चुसाओ ना.. बहुत आनंद आ रहा था.

अब्दुल- बस बस.. बहुत टाइम हो गया और तू इसको पहचान भी नहीं पाई इसका मतलब तू हार गई है.

शाजिया- अरे थोड़ी देर और चूसती तो पता लग जाता ना अब्बू.

अब्दुल- नहीं अब तुझे हार मान लेनी चाहिए.. मैंने तुझे बहुत मौका दिया.

शाजिया- अच्छा बाबा हार गई मैं.. बस हैप्पी! चलो अब मुझे खोलो तो.

अब्दुल जी ने वो प्याला टेबल के नीचे छुपा दिया और लुंगी ठीक करके शाजिया को खोल दिया. मगर ये सब करने के पहले उन्होंने ये नहीं सोचा था कि लास्ट में शाजिया को वो क्या चीज का नाम बताएँगे.

शाजिया- ओफफो आप बहुत स्मार्ट हो अब्बू.. लास्ट में चीज ऐसी ले आए कि मैं पता ही नहीं लगा सकी. वैसे अब तो में हार गई हूँ, तो बताओ मुझे वो क्या चीज थी.. जिसे चूसने में मुझे इतना आनंद आ रहा था?

अब्दुल- व्व..वो तत..तू हार गई है. अब तुझे मेरी बात माननी पड़ेगी समझी.

शाजिया- अरे मगर वो चीज का नाम तो मुझे पता होना चाहिए ना?

अब्दुल- नहीं अगर बता दूँगा तो दोबारा मैं कैसे जीतूँगा.. चल तू हार गई है.

शाजिया- अच्छा ऐसे कैसे हार गई. आपकी बारी भी आएगी और आपको भी ऐसे ही बताना होगा.

अब्दुल जी तो अब ठंडे हो गए थे. अब कहाँ उनका मन था, तो बस वो बहाना बनाने लगे कि वो थक गए हैं, आराम करना है.

शाजिया- ये चीटिंग है अब्बू, ऐसे मैं नहीं हार मानूँगी ओके.

बोलते बोलते शाजिया की नज़र टेबल के नीचे पड़े प्याले पे गई.

शाजिया- अच्छा तो वो चीज अपने नीचे छुपा कर रखी है, अभी देखती हूँ.

 
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