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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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क्यों फ्रेंड्स आनंद आया ना, ये थी फरज़ाना और अब्दुल की कहानी. उसके बाद तो अब्दुल रोज फरज़ाना को चोदने लगे और वो भी उनके बड़े लंड की आदी हो गई. हाँ एक बात है.. वो अक्सर अब्दुल को छेड़ने के लिए अब्बू कहती और वो उससे गुस्सा करते, बस.

एक बात और.. वैसे तो फरज़ाना को पता था कि अब्दुल की एक बीवी और बेटी है. मगर उसका उनसे मिलने का कभी मौका नहीं पड़ा. वैसे भी अब्दुल उसे बहुत प्यार करते थे, उसकी हर छोटी बड़ी ख़ुशी का ध्यान रखते थे, जो फरज़ाना को बहुत पसंद था. अब वो भी दिल से अब्दुल को चाहने लगी थी.. मगर उसने कभी अब्दुल को अपना शौहर नहीं माना, बस ऐसे ही वो उसके साथ खुश थी. ऐसे ही दो साल निकल गए, वो दोनों इस रिश्ते को निभा रहे थे.

अब वापस कहानी पर चलते हैं.. फरज़ाना ने हलवा लाकर दिया या नहीं देख लेते हैं. एक बात और ये कहानी में कुछ पार्ट बन गए मगर आपको फरज़ाना और अब्दुल की कहानी समझ आए, इसी लिए मैंने पूरी बात एक साथ ही बता दी ताकि आगे कोई भ्रम ना रहे. वैसे अभी रज़िया और रूबी का पूर्व भी आपको बताना है, तो कभी फ़ुर्सत में वो भी आपको बता ……………

चलो अभी इस सेक्स की कहानी का मजा लेते हैं.

फरज़ाना- ये लीजिए गरमा गर्म हलवा.. मैंने सिर्फ़ खास आपके लिए बनाया है.

अब्दुल- वाह भाई आज तो आनंद आ गया, मगर एक बात बताओ मॉल में तुमने ऐसा क्यों कहा कि आपको किसी की इच्छा से क्या लेना-देना! क्या मैं तुम्हें कभी किसी बात के लिए मना करता हूँ.. बोलो? फिर क्यों तुम हमेशा मुझे टेढ़े जबाव देती हो?

फरज़ाना- अरे मेरे बलमा को बुरा लगा.. आपको तो पता है कि ये मेरी आदत हो गई है. जब तक आपको छेड़ ना लूँ.. मुझे चैन नहीं मिलता है. आप इतना टेंशन में क्यों आ जाते हो? आपकी बेटी से अगर मुझे मिलना होता, या उसे कुछ बताना होता तो अब तक बता चुकी होती. मुझे आपका घर नहीं पता या उसका कॉलेज नहीं पता, मगर आपने मना किया तो बस मुझे उनसे मिलने की क्या जरूरत पड़ी. आज तो इत्तफ़ाक़ से मुलाकात हो गई. वैसे शाजिया है बहुत प्यारी.. बिल्कुल आप पे गई है.

अब्दुल- तेरा भी यार कुछ समझ नहीं आता मुझे.. कभी कैसे, कभी कैसे.. चल ला अब मुझे हलवा खाने दे.

फरज़ाना- हाँ लो ना.. किसने रोका है. वैसे एक सवाल है मन में.. पूछ लूँ क्या?

अब्दुल- अब मन में आ गया तो पूछ ले.

फरज़ाना- शाजिया से मेरा क्या रिश्ता है.. मैं उसे अपनी छोटी बहन समझूँ या बेटी?

अब्दुल- तू फिर शुरू हो गई ना.. ले नहीं खाना मुझे हलवा.. तू मुझे कड़वी बातें ही सुना.

फरज़ाना- हा हा हा हा जल गए ना.. हा हा हा अच्छा अच्छा मज़ाक कर रही हूँ आप आराम से खा लो, अब नहीं बोलूँगी.

अब्दुल जी मज़े से हलवा खाने लगे और फरज़ाना उनके पास बैठ गई. फिर जब वो खा चुके तो फरज़ाना ने एक और चौका मार दिया.

फरज़ाना- अच्छा एक बात बताओ आप, आज तक अपने शाजिया को इतना सादा रखा.. फिर आज क्या जरूरत आ गई जो आपने उसे इतने मॉर्डन कपड़े दिलाए?

अब्दुल- अब वो बड़ी हो गई है और कॉलेज जाने लगी है. अब दूसरी लड़कियों को देखेगी तो उसका भी मन करेगा ना.. बस इसी लिए.

फरज़ाना- बुरा मत मानना आप लेकिन उन कपड़ों में वो बहुत सेक्सी लगेगी.. सारे लड़के उसे देख कर आहें भरेंगे.

अब्दुल- तुमने फिर बकवास शुरू कर दी ना.

फरज़ाना- नहीं, ये बकवास नहीं है, आप मेरी बात को समझो.. वो बहुत सुन्दर है और उसके शरीर की बनावट भी बहुत अच्छी है. जब वो इतने हॉट कपड़े पहने, तो आप खुद ही देख लेना.

अब्दुल जी को पता था कि फरज़ाना सही कह रही है. आज वो खुद बहक गए थे लेकिन उन्होंने फिलहाल बात को टाल दिया.

अब्दुल- अच्छा अच्छा.. ये ज्ञान बंद कर.. आज लंड में बहुत हलचल मची हुई है.. चल जल्दी कर, इसे शांत करके बाद में अपनी बक-बक कर लेना.

फरज़ाना कुछ बोलती तभी अब्दुल जी का फ़ोन आ गया, ये शॉप से था शायद.. उन्होंने 5 मिनट बात की, फिर थोड़ा टेंशन में आ गए.

अब्दुल- इन्हें भी अभी आना था.. सारा मूड ऑफ कर दिया.

फरज़ाना- क्या हुआ मेरे बलमा जी किसने आपका मूड खराब कर दिया?

अब्दुल- अरे कोई पुराना ग्राहक है.. थोक में माल लेता है, अब जाना ही पड़ेगा.

फरज़ाना- अरे अभी तो बड़े चोदने की बात कर रहे थे.. ऐसे ही जाओगे क्या?

अब्दुल- मन तो बहुत है मगर जाना भी जरूरी है. चल अब कल ही तेरी चुदाई करूँगा.. अभी तो जाता हूँ.

फरज़ाना- शॉप से वापस आ जाना ना.. कभी तो आप रात को मेरे पास रहा करो.

अब्दुल- नहीं फरज़ाना.. अंजुम को पहले ही मुझ पर शक है, अब शाजिया भी समझदार हो गई है. मैं कोई ख़तरा मोल नहीं लेना चाहता. तू सो जाना ओके.. चलता हूँ.

अब्दुल जी वहां से चले गए और शॉप से अपना काम निपटा कर वो घर चले गए.

अब बेचारे सुबह से कड़क लंड लिए घूम रहे थे तो रात को कमरे में गए. अब्दुल जी को बेचैन देख कर अंजुम ने कारण पूछा- क्या हुआ जी.. आप ठीक तो हो ना..? अपने खाना भी नहीं खाया और आज देरी से भी आए, शॉप की कोई समस्या है क्या?

अब्दुल- अरे कुछ नहीं ऐसे ही आज थोड़ा काम ज़्यादा था और कुछ बात नहीं है.

अंजुम- अच्छा ठीक है सो जाओ.. थके हुए हो आपको अच्छी नींद आएगी.

अब्दुल- अच्छा ये बताओ शाजिया सो गई क्या?

अंजुम- जी.. वो कब की सो गई थी.

रुकावट के लिए खेद है.. आपको बता दूँ अब्दुल जी के कमरे में आने के साथ ही शाजिया बाहर कान लगा के खड़ी हो गई थी. रज़िया की कही बात उसे बेचैन कर रही थी, तो वो आज जानना चाहती थी कि उसके अब्बू और मॉम के बीच सब ठीक तो है ना.

अब्दुल- एक बात कहूँ.. आज बड़ा मन है.. बहुत दिन हो गए.

अब्दुल जी आगे कुछ बोल पाते तभी बीच में अंजुम ने उन्हें टोक दिया- आपको कुछ और नहीं सूझता क्या.. जब देखो यही बात, अब लड़की जवान हो गई है.. अब तो अपने आप पर कंट्रोल करो.

अब्दुल- सात साल से कंट्रोल ही तो किए हुए हूँ. पहले तो तुम महीने में 2 या 3 बार ‘हाँ’ कर देती थीं.. आजकल तो महीने के बाद भी तुम्हारी ना ही सुनने को मिलती है.

अंजुम- आपको पता है मुझे शुरू से ये सब पसंद नहीं.. फिर क्यों आप बार-बार एक ही बात दोहराते हो?

अब्दुल- कैसी औरत है तू.. इतनी सुन्दर है, फिगर भी अच्छा है.. मगर तेरे अन्दर सेक्स क्यों नहीं है.. ये बात मेरी समझ के बाहर है.. तू कैसे इतने दिन बिना संसर्ग के निकाल लेती है?

अंजुम- अब अल्लाह ने जैसा बनाया, वैसी ही हूँ और फिर अपने आप से पूछो, शुरू में कैसे मुझे जानवरों की तरह चोदते थे.. बस उसी वजह से मुझे सेक्स से नफ़रत सी हो गई. अब तो बिल्कुल मन नहीं करता.

अब्दुल- तेरे इसी व्यवहार की वजह से हमें दूसरी औलाद नहीं हुई. ये तो मेरी शराफत है, कोई दूसरा होता तो ना जाने क्या करता.

अंजुम- क्या करता.. बाहर मुँह मारता, यही कहना चाहते हो ना.. आपको किसने रोका है.. आप भी मार लो, मिटा दो खानदान का नाम मिट्टी में.. वैसे भी पहले से ही कांड हुआ पड़ा है, आप भी कर दो एक कांड.. क्या फर्क पड़ता है.

अब्दुल- बस मेरी इसी शराफत का तू फायदा उठाती है. तुझे पता है मैं ऐसा कोई काम नहीं करूँगा, जिससे बदनामी हो.

अंजुम- हाँ जानती हूँ और ये भी जानती हूँ कि आप मुझसे बहुत प्यार करते हो, आप कोई ग़लत कम नहीं करोगे.

अब्दुल- इसी लिए तो बोल रहा हूँ.. मान जाओ ना.. बस आज कर लो बहुत दिन हो गए.. फिर एक महीने तक नहीं कहूँगा.

अंजुम- आप बात को समझते क्यों नहीं.. मेरा मन होगा तो बता दूँगी मगर आज नहीं.. अब सो जाओ, रात बहुत हो गई है.

अब्दुल जी बहुत देर तक मिन्नतें करते रहे मगर अंजुम नहीं मानी और आख़िर हार कर अब्दुल जी सो गए मगर बाहर खड़ी शाजिया के दिमाग़ में एक तूफान छोड़ गए.

शाजिया अपने कमरे में आ गई और अपनी अम्मी को कोसने लगी कि कैसे वो अब्बू को तरसा रही है, इसी लिए अब्बू इतने गुस्से वाले हो गए फिर सुबह वाली बात उसे याद आई वो अब्बू का खड़ा लंड उसे याद आया.

शाजिया- तो क्या अब्बू मेरे जिस्म को टच करके बेचैन हो गए थे, तभी आज उनके मन में इतनी वासना आ रही थी. छी:.. मैं भी क्या सोच रही हूँ वो मेरे अब्बू हैं.

शाजिया बहुत देर तक अपने आपसे बातें करती रही, फिर कब उसकी आँख लगी, उसको पता भी नहीं चला.

 
उधर समीर रात को राबिया के पास आ गया था और वो दोनों कमरे में नंगे एक-दूसरे की बांहों में प्यार में खोए हुए थे.

समीर- जानेजिगर आज तो तुम मुरझाई हुई सी लग रही हो.. सब ठीक तो है ना?

राबिया- मेरी तबीयत ठीक नहीं है यार और फिर जानू, आज हमारी आखरी रात है.

समीर- अरे क्यों क्या हुआ.. तुम ऐसे क्यों बोल रही हो यार?

राबिया- अब क्या बताऊं.. कल गाँव से फवाद की कोई रिश्तेदार आ रही है अब उसके सामने तो हम कुछ नहीं कर सकते ना..!

समीर टेंशन में आ गया, ऐसी मस्त फुददी अब उसको कहाँ मिलती, उसने राबिया को कहीं बाहर मिलने को कहा.

राबिया- बाहर मिलने में ख़तरा है.. फिर भी कभी मौका मिलेगा तो ज़रूर मिल लूँगी. अब बातों में टाइम मत खराब करो, आज जितना चोदना है.. चोद लो. कल से तुम्हें मेरी ये फुददी नहीं मिलेगी समझे मेरे आशिक..!

समीर- हाँ जानेजिगर.. आज तो तेरी जमकर चुदाई करूँगा.. ले जल्दी से मेरे लंड को चूस कर रेडी कर दे.

राबिया ने समीर के लंड को मज़े से चूस कर रेडी किया, फिर समीर ने राबिया को घोड़ी बनाया और चुदाई शुरू कर दी.

रात भर समीर ने राबिया को हर तरीके से चोदा और उसको थका दिया, फिर सुबह जल्दी वो घर से निकल गया.

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उधर शाहिद और शबनम भी मस्ती के मूड में थे तो शाहिद ने सबके सोने का इंतजार किया. जब सब सो गए तो शाहिद ने शबनम से कहा- अब तैयार हो जा मेरी जान.. सब सो गए हैं आज तेरी मस्त चुदाई करूँगा.

शबनम खुद मस्त चुदाई के मूड में थी- अच्छा ये बात है.. तो मेरे प्यारे मामू, कपड़े मैं निकालूं या आप निकालोगे?

शाहिद- तू इत्ती सी है मगर बहुत पॉवर वाली लड़की है. तेरा इस उम्र में ये हाल है.. तो बड़ी होकर पता नहीं क्या गुल खिलाएगी?

शबनम- मुझे अपने ही ऐसा बनाया है मामू अब बोलो ना.. मैं अपनी फुददी का ढक्कन निकालूं क्या?

शाहिद- अब निकाल भी दे क्या पूछ रही है.. आज तुझे जमकर चोदना ही पड़ेगा, तब तू शांत होगी. नहीं तो कल फिर तू शुरू हो जाएगी.

शबनम को कपड़े उतारने की कहने की देर थी.. वो झट से नंगी हो गई. तब तक शाहिद ने भी कपड़े निकाल लिए थे और वो खड़ा ही रहा ताकि शबनम आराम से उसके लंड को चूस सके.

शबनम मज़े से शाहिद के लंड को चूसने लगी और उसकी आँखों में अब नशा चढ़ गया था. थोड़ी देर बाद वो खड़ी हो गई और शाहिद को किस करने लगी.

शाहिद- क्यों मेरी जान, तेरी फुददी में आज बड़ी आग लगी है.

शबनम- जब पता है.. तो क्यों आप तड़पा रहे हो. अब तो मुझे आपके लंड से चुदे बिना रात को नींद भी तो नहीं आती.

शाहिद- अच्छा ये बात है तो मेरी जान आज तेरी गांड का भी मुहूर्त कर ही देता हूँ.

शबनम- नहीं मामू.. वहाँ बहुत दर्द होगा और घर में सबको पता चल जाएगा.

शाहिद- देख कल.. अब्बू का फ़ोन आया था, वो दो दिन के लिए गए थे, मगर उनको वहाँ काम के चक्कर में ज़्यादा रुकना पड़ गया. मगर अब उनका काम हो गया, तो अब वो कभी भी वापस आ सकते हैं. उनके आने के बाद हम रात को चुदाई नहीं कर पाएँगे.

शबनम- ऐसा क्यों मामू, रात को क्या होगा?

शाहिद- अरे पागल लड़की तुम्हारे अब्बू आ जाएँगे तो तुम यहाँ थोड़ी रहोगी रात को!

शबनम- ओह हाँ सॉरी.. भूल गई थी तो फिर?

शाहिद- उनके आने से पहले तेरी गांड का भी मुहूर्त कर ही देता हूँ फिर आराम से हम दोनों दोपहर में आनंद करेंगे.

शबनम- लेकिन अगर मैं चिल्लाई तो क्या होगा?

शाहिद- अरे पगली उस टाइम तो नादान थी मगर अब तो चुदवा कर तुझे पता चल गया है. बस थोड़ी हिम्मत से काम लेना.. मैं आराम-आराम से तेरी गांड मारूंगा.

शबनम- ठीक है मामू मगर पहले मेरी फुददी ही मार लो.. फुददी में बहुत खुजली हो रही है.

शाहिद ने शबनम को बेड पे लिटाया और उसकी फुददी को हवा में उठाकर चूसने लगा.

शबनम- उफ मामू आह.. प्लीज़ आह.. ऐसे नहीं आह.. लंड डालो ना आह..

थोड़ी देर फुददी चूसने के बाद शाहिद ने अपना लंड उसकी फुददी में पेल दिया और ज़बरदस्त चुदाई करने लगा.

शबनम- आह.. आह चोदो मेरे प्यारे मामू आह.. अपनी प्यारी भांजी को आह.. सस्स एयेए नहीं उफ आह.. जोर से चुदाई करो आह..

शाहिद ने 15 मिनट तक शबनम की जमकर चुदाई की, फिर उसे घोड़ी बना दिया और लंड पेल दिया.

शबनम- आह.. मामू आराम से फुददी चुदाई करो उफ आह.. आनंद आ रहा है चोदो पूरा फुददी के अन्दर तक पेलो.. आह..

शाहिद चुदाई के साथ-साथ शबनम की गांड के छेद पर भी अपने मुँह से गीली करके उंगली घुमा रहा था. जब उंगली अन्दर घुसने लगी तो वो धीमे-धीमे उंगली को अन्दर-बाहर करने लगा.

शबनम- आह.. आ उई मामू नहीं आह.. दर्द हो रहा है आह.. फुददी में तेज करो आह.. मामू मेरा आह.. पानी आ रहा है फास्ट करो आह..

शाहिद ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और शबनम की फुददी बहने लगी फिर शाहिद ने उसको सीधा लेटा कर काफ़ी देर चोदा, तब जाकर उसका पानी निकाला. लंड का पानी निकाल कर शाहिद भी शबनम के बराबर में लेट गया.

शाहिद- मेरी जान तुम्हें कितना भी चोद लूँ मगर तुम थकती नहीं हो, ऐसा क्या है तुम्हारे अन्दर.. समझ नहीं आता.

शबनम- हा हा हा ऐसा क्या होगा, कुछ भी नहीं.. बस आप बहुत अच्छे से चोदते हो.

शाहिद- अबकी बार तेरी गांड मारूँगा तब बोलना मैं अच्छा हूँ या बुरा.

शबनम- मामू एक बात कहूँ.. प्लीज़ आज रहने दो.. आप मेरी चीख तो दबा दोगे मगर वहाँ बहुत दर्द होगा और मेरी चाल भी बदल जाएगी, इससे कहीं मेरी मॉम को पता ना लगा जाए.

शाहिद ने शबनम की बात पे गौर किया तो उसे लगा वो ठीक कह रही है. कहीं सुबह कुछ गड़बड़ हो गई तो लेने के देने पड़ जाएँगे.

शाहिद- सही कहा तुमने.. मैंने ये बात सोची ही नहीं, तुझे कैसे ये बात सूझी?

शबनम- आप भूल गए उस दिन मेरी फुददी फाड़ी थी, कितना दर्द हुआ था. वही हाल गांड का भी होगा तो बस मैंने आपको बता दिया और वैसे भी दर्द मुझे हुआ था आपको नहीं.. फिर ये बात आपको क्यों याद रहेगी.

शाहिद- अरे अरे मेरी जान को इतना दर्द हुआ था.. चल आज तेरी फुददी को ही ठंडा करता हूँ.. गांड का प्रोग्राम अपने उसी घर में फिर कभी बना लेंगे.

शबनम- हाँ ठीक है यही सही रहेगा.. अबकी बार तो मैं आपके ऊपर बैठ कर चुदूँगी.

शाहिद- जैसी तेरी मर्ज़ी चुद लेना, चल थोड़ा गर्म कर दे लंड को, फिर मैं तेरी दुबारा चुदाई करता हूँ.

शबनम ने फिर लंड चूसना शुरू कर दिया और जल्दी ही उसे खड़ा कर दिया. फिर दोनों 69 के पोज़ में आ गए और मस्ती करने लगे.

शाहिद ने थोड़ी देर बाद शबनम को अपने लंड पे बैठा लिया और उसकी चुदाई शुरू हो गई.

दो घंटे में शाहिद ने शबनम को 3 बार चोदा उसको एकदम थका दिया और फिर दोनों चिपक कर सो गए.

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फ्रेंड्स, इनकी तो चुदाई हो गई चलो थोड़ा सा ध्यान रज़िया पर भी डाल देते हैं.

रात को रज़िया और याक़ूब कमरे में लेटे हुए थे.

याक़ूब- आपा आज शाजिया आपा ने पहले मेरा इलाज किया, फिर मैंने उनका किया उसमें बहुत आनंद आया मुझे.. और फिर मेरी लूली खड़ी हुई तो आपा ने फिर इसको चूस कर रस निकाला.

रज़िया- अच्छा इसका मतलब आज तो तूने बड़े मज़े लिए!

याक़ूब- आपा एक बात बताओ.. आपने तो मेरा ऐसा इलाज कभी नहीं किया और आपको खुजली नहीं होती क्या.. मैं आपका भी इलाज कर दूँगा.

रज़िया- अच्छा बेटे, शाजिया से मन नहीं भरा जो अब तू मुझे नंगी करके आनंद लेना चाहता है?

याक़ूब- तो इसमें क्या है आपा आप तो मेरी सग़ी आपा हो.. आपका हक़ तो ज़्यादा है ना.

रज़िया- अच्छा अच्छा जब खुजली होगी तो तुझे बता दूँगी.. अभी सो जा, सुबह स्कूल भी जाना है समझे!

चलो फ्रेंड्स, रात तो ख़त्म हुई सबके चुदाई के प्रोग्राम आपने देख लिए.. अब सीधे सुबह ही देखते हैं कि आज का सूरज किस-किस की लाइफ में क्या-क्या रोशनी बिखेरेगा.

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रोज की तरह अब्दुल जी कॉफी पी रहे थे, आज शाजिया भी जल्दी उठ गई थी, वो अपने अब्बू के पास आई और उन्हें ‘गुड मॉर्निंग’ कहा.

अब्दुल- वाह भाई.. आज मेरे बुलाने के पहले ही तुम रेडी हो गई.. मगर शाजिया तूने नए वाले ड्रेस क्यों नहीं पहने?

शाजिया- पहनना तो मुझे ही है, अब्बू मगर आज नहीं उसका सही टाइम आएगा तब मैं पहनूंगी.

अब्दुल- अब आज पहन या कल, तेरी मर्ज़ी है. वैसे आज तू जल्दी कैसे उठ गई?

शाजिया- कुछ खास नहीं अब्बू ऐसे ही उठ गई. और आप बताओ आपका मूड कैसा है?

अब्दुल- अरे भाई मेरे मूड को क्या होगा.. अच्छा ही है. कुछ चाहिए क्या तुम्हें.. सीधे ही बोल दो हा हा हा हा.

शाजिया- नहीं अब्बू, मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मेरे लिए आपका प्यार ही बहुत है. अगर आप बुरा ना मानो तो आपको हग कर लूँ, मैं आज आप बहुत अच्छे वाले अब्बू लग रहे हो. कल आपने मुझे कितना अच्छा सरप्राइज दिया था ना..!

अब्दुल- हा हा हा… अरे कल तो तूने इतना थैंक्यू बोल दिया था. चल तेरा मन है तो आ जा लग जा मेरे गले से!

शाजिया के मन में क्या था ये तो अल्लाह ही जाने या फिर शाजिया जाने, चलो आगे देखो अब ये क्या गुल खिलाती है.

शाजिया अपने अब्बू से जोर से लिपट गई और उसका पूरा ध्यान सिर्फ़ अब्बू की पैन्ट में फूले रहे उनके लंड पर ही था. उसने जो सोचा, वही हुआ भी, उसके चिपकते ही अब्दुल जी के लंड में तनाव आने लगा. लंड का तनाव महसूस करते ही शाजिया और कसके अपने अब्बू से अपने दूध रगड़ते हुए चिपक गई. शाजिया इतनी जोर से चिपकी थी कि उसके मम्मे अब्दुल के सीने में चुभने लगे थे. शाजिया पर उत्तेजना सवार थी, जिससे उसके निप्पल एकदम हार्ड हो रहे थे.

अब्दुल जी को लगा कि उनका लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आ जाएगा और शाजिया को पता चल जाएगा कि उसका अपना अब्बू उसके जिस्म की गर्मी से पागल हो रहा है.

अब्दुल- बस हो गया.. चल अब मुझे जाने दे, देर हो रही है.

अब्दुल जी ने शाजिया को अलग कर दिया मगर अपनी पैन्ट का उभार शाजिया से ना छुपा सके.. शाजिया की नज़र वहीं लंड पर टिकी थी.

अब्दुल- अच्छा अब मैं चलता हूँ.

शाजिया- ओके अब्बू आप जाओ और कोई परेशानी हो, तो मुझे बता देना. मैं आपकी ‘मदद’ कर दूँगी. ठीक है..!

शाजिया ने यह बात कुछ अलग अंदाज से कही थी, जो अब्दुल जी को भी अजीब लगी. वो कुछ नहीं बोले बस मन में कुछ दुविधा लिए वहाँ से चले गए.

अंजुम किचन में काम कर रही थी तो शाजिया उनके पास चली गई और काम में उनका हाथ बंटाने लगी.

अंजुम- अरे रहने दे मैं कर लूँगी.. तुझे क्या आज कॉलेज नहीं जाना?

शाजिया- अभी टाइम है.. मैं चली जाऊंगी ना.. काम के बहाने आपसे बात भी कर लूँगी.

दोनों अम्मी-बेटी बातें करने लगीं. अचानक शाजिया को ना जाने क्या सूझा कि उसने अपनी अम्मी से ऐसा सवाल कर लिया जिसकी उम्मीद उसकी अम्मी को बिल्कुल भी नहीं थी कि शाजिया कभी ये सवाल भी पूछेगी.

शाजिया- अम्मी एक बात है जो अक्सर मेरे दिमाग़ में आती है, कई बार मैंने सोचा आपको पूछूँ… फिर भूल जाती हूँ.

अंजुम- अरे ऐसी क्या बात है जो मेरी बेटी को परेशान कर रही है, चल आज पूछ ही ले तू!

शाजिया- अम्मी आप मेरी बात का बुरा तो नहीं मनोगी ना… पहले प्रॉमिस करो!

अंजुम- अरे तू ऐसा क्या पूछने वाली है जो मुझे बुरा लगे, चल पूछ मैं तुझे कुछ भी नहीं कहूँगी.

शाजिया- अम्मी, मैं आपकी एक ही बेटी हूँ.. कोई और भाई-बहन क्यों नहीं है?

अंजुम- ये कैसा सवाल है? अल्लाह की मर्ज़ी नहीं हुई बस!

शाजिया- प्लीज़ अम्मी आप नाराज़ मत हो.. क्या बाद में हुए नहीं.. या आपने और अब्बू ने और बच्चे किए नहीं? बताओ ना अम्मी प्लीज़..!

अंजुम ने शाजिया की तरफ गुस्से से देखा- तेरे दिमाग़ में ये बात आई कैसे?

शाजिया- अम्मी बस ऐसे ही ख्याल आ गया अगर आप नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं.. मगर प्लीज़ मुझसे झूठ मत बोलना.

अंजुम- शाजिया क्या हो गया तुझे.. मैं क्यों झूठ बोलूँगी तुझसे हाँ?

शाजिया- आप बुरा मत मानना अम्मी, रात को मेरे सर में बहुत दर्द हो रहा था तो मैं आपसे दवा लेने आपके रूम में आ रही थी, मगर उस टाइम आप और अब्बू बातें कर रहे थे. मैंने नॉक करना चाहा तो कुछ ऐसी बातें मुझे सुनाई दीं, जो शायद मुझे नहीं सुननी चाहिए थीं. सॉरी मॉम.. मैंने आपकी बातें सुनी, फिर मैं वापस चली गई.

 
अंजुम- हाई अल्लाह.. तुझे खटखटा देना चाहिए था.. ऐसे अपने अम्मी-अब्बू की बातें सुनना अच्छी बात नहीं है. ये बात तेरे अब्बू को पता लग गई तो वो बहुत नाराज़ होंगे.

शाजिया- सॉरी मॉम.. मगर मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा. आपको अब्बू से ऐसे पेश नहीं आना चाहिए.

अंजुम- शाजिया बस कर.. अभी तेरी इतनी उम्र नहीं हुई जो तू मुझे ये बात कहे. तू बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे और आगे से कभी ऐसे बातें मत सुनना. इससे बुरा असर पड़ता है समझी मेरी बच्ची..!

शाजिया- ठीक है अम्मी आगे से ध्यान रखूँगी मैं.. मगर प्लीज़ आप भी अब्बू को समझो, उनकी बात मान लिया करो.

अंजुम- बस बहुत हो गया.. तुझे मैं प्यार से समझा रही हूँ, तू समझ ही नहीं रही. ये सब बातें अपने दिमाग़ से निकाल दे समझी..!

इस बार अंजुम की आवाज़ में कड़कपन था, जिससे शाजिया थोड़ी डर गई और वहाँ से चुपचाप अपने कमरे में चली गई. शाजिया कमरे में आ गई और बिस्तर पर बैठ कर बड़बड़ाने लगी- मुझे पता था अम्मी, आपका जबाव ऐसा ही होगा, इसी लिए मैंने रात को ही फैसला कर लिया था कि मैं अब्बू को उनके हिस्से की ख़ुशी ज़रूर दूँगी, चाहे उसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े.

शाजिया ने अपना बैग लिया और जाते हुए अंजुम से बोल गई कि आज एक्सट्रा क्लास है, उसे आने में देर हो जाएगी. फिर वो रज़िया के घर चली गई. वहाँ रज़िया भी आज पहले से रेडी थी. शाजिया को देख कर वो मुस्कुरा दी, मगर शाजिया का मूड ऑफ था. वो बस सीधे जाकर कमरे में बेड पर बैठ गई.

रज़िया- आओ शाजिया रानी क्या बात है आज मूड सही नहीं लग रहा, सुबह-सुबह किससे झगड़ा करके आई है.

शाजिया कुछ नहीं बोली बस वैसे ही मुँह फुलाए बैठी रही.

रज़िया- अरे मेरी प्यारी शाजिया अब बोल ना यार.. ऐसे कैसे पता लगेगा?

शाजिया- अब आपको क्या बताऊं आपा मेरा मूड तो रात से खराब है.

रज़िया- अरे बताएगी नहीं.. तो मुझे पता कैसे लगेगा और बिना पता लगे मैं तेरी मदद कैसे कर पाऊंगी?

शाजिया ने रात से लेकर सुबह अपनी अम्मी से हुई बहस तक की सारी कहानी रज़िया को बताई.

रज़िया- अच्छा ये परेशानी है तुझे.. वैसे मेरा अंदाज़ा सही निकला ना.. तेरे अब्बू बेचारे तरस रहे हैं और तेरी अम्मी है कि अपनी ज़िद पर अड़ी हैं.

शाजिया- हाँ आपा अब इसका कोई उपाय बताओ.. मैं अब्बू को ऐसे नहीं देख सकती. आज सुबह मैंने फिर उनसे टाइट्ली चिपक कर उनके अरमान जगा दिए.

रज़िया- तू चाहती क्या है यार.. कल तो तूने कहा था कि तू अब्बू से दूर रहेगी. फिर सुबह-सुबह अब्बू का लंड खड़ा करने की क्या वजह थी?

शाजिया- आपा में बस चैक करना चाहती थी कि मेरे ऐसा करने से अब्बू का रिएक्शन क्या होता है?

रज़िया- अच्छा तो तूने अपनी करनी का नतीजा देख लिया ना.. सुबह-सुबह बेचारे चाचा का लंड खड़ा कर दिया ना!

शाजिया- आपा चाहे कुछ भी हो जाए मुझे अब्बू को ख़ुशी देनी ही होगी.

रज़िया- तेरे इरादे मुझे ठीक नहीं लगा रहे हैं.. कहीं तू अपने अब्बू से चुदवाने के चक्कर में तो नहीं है ना?

शाजिया- छी: छी: आपा आप कैसी बातें कर रही हो.. मेरा मतलब है उन्हें ख़ुशी देनी होगी, उसका आप ही कोई आइडिया बताओ ना!

रज़िया- सॉरी यार मेरे समझने में ग़लती हो गई.. मगर तू करेगी क्या? कुछ तो तेरे दिमाग़ में होगा ना!

शाजिया- नहीं आपा मेरे दिमाग़ में कुछ नहीं है. अब आप ही मेरी कोई मदद करो.

रज़िया- यार तेरी बातें सुनकर ये तो पता लग गया कि तेरे अब्बू सीधे इंसान हैं, वो बाहर किसी रांड़ के पास तो जाएँगे नहीं.. यदि जाना होता तो कब के जा चुके होते और यार कांड वाली क्या बात है ये तो बता..!

शाजिया- ये तो मुझे नहीं पता आपा.. और मैंने इस बारे में सोचा ही नहीं.. वरना मैं अम्मी से ही पूछ लेती.

रज़िया- नहीं.. जाने दे मत पूछना, पहले चाचा के लिए कोई जुगाड़ लगा लेते हैं.

शाजिया- आपा क्या होगा, अब अब्बू किसी और के साथ बिल्कुल नहीं करेंगे वरना इतने साल वो ऐसे तड़पते नहीं.

रज़िया- देख, अभी ये बात यहीं बंद कर दे. मैं आराम से सोच कर तुझे बता दूँगी. अभी कॉलेज चल, देर हो रही है.

दोनों वहाँ से कॉलेज चली गईं. आज सिर्फ़ शाहिद अकेला ही खड़ा था, बाकी सब शायद आए नहीं थे. इन दोनों ने उसे हैलो किया, फिर उसके पास खड़ी हो गईं शाहिद बस शाजिया को निहारता रहा.. पर कुछ बोला नहीं.

रज़िया ने जब गौर किया और शाहिद को टोका तो शाहिद झेंप गया और उसने जल्दी से बात घुमा दी.

शाहिद- आज क्या बात है.. साले वो कहाँ मर गए सब, कोई भी नहीं आया और रूबी का भी कोई ठिकाना नहीं है.

रज़िया- आ जाएँगे.. तुम्हें उनसे कोई काम है क्या, जो ऐसे उतावले हो रहे हो?

शाहिद- मुझे क्या काम होगा, मैं तो ऐसे ही पूछ रहा हूँ.

शाजिया- आपसे एक बात बोलनी थी आप नाराज़ तो नहीं होंगे ना.

शाहिद- अरे बोल क्या बात है.. मैं क्यों नाराज़ होने लगा.

शाजिया- इतने दिनों में आपको मेरे अन्दर कुछ फ़र्क लगा या नहीं?

शाहिद- सच बोलूँ.. अभी तक तो कुछ फ़र्क नहीं लगा, हाँ रज़िया ने बताया तू अब फास्ट हो गई है.. तो अब तेरा टेस्ट लेना होगा.. तभी पता लगेगा तू फास्ट हुई या नहीं.

शाजिया- ठीक है आप जब कहोगे में टेस्ट देने को तैयार हूँ.

शाहिद- तो ठीक है.. अभी तो नहीं, मैं बाद में तुम्हें बता दूँगा ओके.

शाजिया कुछ बोल पाती, तभी वहाँ कोई सर आ गए और उन्होंने कहा कि क्लास में जाओ.. यहाँ क्यों खड़े हो, तो बस उनकी ये सभा यहीं समाप्त हो गई. फिर रूबी और बाकी सब भी आ गए. मगर हमारे काम का कुछ वहाँ नहीं हुआ तो चलो हम लोग भी सीधे पॉइंट पे चलते हैं.

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कॉलेज के बाद रज़िया और शाहिद का आज चुदाई का प्रोग्राम है.. याद है ना और रज़िया ने शाजिया को लाइव चुदाई दिखाने का वादा किया है.. तो चलो वहीं चल कर आनंद लेते हैं.

कॉलेज के बाद शाहिद सीधा अपने उसी घर में चला गया और पीछे से रज़िया ने शाजिया को अपने साथ ले लिया.

शाजिया- आपा मुझे बहुत डर लग रहा है कहीं कोई गड़बड़ ना हो जाए.

रज़िया- अरे कुछ नहीं होगा मेरा प्लान याद है ना तुझे.. बस तू चुपचाप सब चुदाई का खेल देख लेना.

शाजिया- वो तो ठीक है मगर आपके साथ मैं जाऊंगी तो शाहिद मुझे देख लेंगे.

रज़िया- पागल है तू एकदम.. अरे तू मेरे साथ नहीं जाएगी.. मेरे पीछे से आना. समझी.. वो भी जब मैं इशारा करूँ तुझे, तब आना.

शाहिद के घर के बाहर जाकर शाजिया एक तरफ़ चुप गई और रज़िया ने नॉक किया तो शाहिद ने दरवाजा खोला- हाय स्वीटहार्ट आ गईं तुम.. चलो अन्दर आ जाओ.

शाहिद ने ये बात रज़िया से कही मगर ये सिर्फ़ दिखावा था.. असल में उसने इशारे से रज़िया को पूछ लिया कि शाजिया आई है या नहीं.

आप इतने टेंशन में क्यों आ गए कल शाम शाहिद ने रज़िया को प्लान बताया तो था मौके पे चौका मारना याद आया ना.. बस ये सब इन दोनों का किया धरा है.. अब आगे का खेल देखो.

रज़िया ने भी इशारा दे दिया और फिर वो शाहिद के साथ अन्दर चली गई.

शाहिद- वाह रज़िया कमाल कर दिया तूने अब जैसा हमने प्लान किया था, बस वैसे ही करना ताकि शाजिया खिंची चली आए.

रज़िया- फिकर मत करो शाहिद.. आज उसको तुम्हारे लंड का स्वाद चखना ही होगा. तुम कहो तो उसकी फुददी का मुहूर्त भी आज करवा दूँ?

शाहिद- नहीं तू ज़्यादा एक्सट्रा मत सोच.. जितना कहा है, बस उतना करना. अब जा उसे अन्दर लेकर आ जा.. तब तक मैं वॉशरूम में जाता हूँ.

 
शाजिया बाहर खड़ी बहुत घबरा रही थी, उसे लगा कि कोई उसे ऐसे देखेगा तो क्या सोचेगा, तभी रज़िया बाहर आ गई.

रज़िया- जल्दी से अन्दर आ जाओ, शाहिद वॉशरूम में है.

शाजिया बिना कुछ बोले अन्दर आ गई और जिस कमरे में चुदाई होनी थी, रज़िया ने शाजिया को वहीं एक अलमारी के पीछे छुपने को कह दिया.

शाजिया- आपा मुझे बहुत डर लग रहा है कोई गड़बड़ ना हो जाए.. कहीं शाहिद ने मुझे देख लिया तो!

रज़िया- अरे ऐसे कैसे देख लिया.. ये रज़िया का प्लान है.. तू मेरे बिल्कुल पास बैठ कर चुदाई देखना और शाहिद को पता भी नहीं चलेगा.

शाजिया- ये आप क्या बोल रही हो ऐसा कैसे मुमकिन है आपा?

रज़िया- अरे मैं बातों के दौरान शाहिद को ब्लाइंड सेक्स के लिए राज़ी कर लूँगी. फिर उसकी आँख पर होगी पट्टी.. वो कैसे कुछ देख पाएगा?

शाजिया- ओह आपा आप सच में ग्रेट हो… ऐसे तो मैं भी ठीक से देख लूँगी.

रज़िया- हाँ मगर भूल कर भी अपने मुँह से आवाज़ मत निकालना.. नहीं तो सब गड़बड़ हो जाएगी.. समझी तू?

शाजिया- ठीक है आपा, मैं इस बात का ध्यान रखूँगी कि कोई आवाज़ ना हो.

शाजिया वहीं छुपी रही और रज़िया ने शाहिद को आवाज़ देकर बुलाया.

‘कितना टाइम लगाते हो.. अब तुम आ भी जाओ ना!’

शाहिद- अरे आ गया जानेजिगर ऐसी भी क्या जल्दी है.. आज बहुत दिनों बाद तेरी फुददी मारने का मौका मिला है, इसे तो आराम से मारूँगा और तू है कि जल्दी कर रही है.

रज़िया- क्या करूँ यार पीरियड्स ख़त्म होने के बाद फुददी में खुजली बहुत हो रही है.

ये दोनों ऐसे ही सेक्सी गर्म बातें करने लगे और इनकी बातें सुनकर शाजिया का हाल बिगड़ने लगा, मगर वो अभी भी छुपी हुई थी. उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.

शाहिद- मेरी जान.. अब बातों में टाइम तुम खराब कर रही हो.. कपड़े निकालो और मुझे मेरी फेवरिट फुददी के दीदार कराओ.

रज़िया ने अपने कपड़े निकालने शुरू किए और एक-एक करके उसने सब कपड़े निकाल दिए. उसके साथ ही शाहिद भी नंगा हो गया और जब उसने रज़िया की तरफ़ देखा तो बस उसका नंगा जिस्म शाहिद के सामने था. वो उसे गौर से देखने लग गया.

फ्रेंड्स, आपके सामने भी रज़िया पहली बार नंगी हुई है.. तो चलो आप भी जी भर के इसके जिस्म को देख के आनंद ले लो.

रज़िया का रंग दूध सा सफ़ेद था और उसके मम्मे 34 इंच के एकदम पके हुए खरबूजे थे. वैसे तो वो कई बार चुद चुकी है और शाहिद ने उसके चुचों को काफ़ी मसला हुआ है. मगर उनकी कसावट अब भी वैसी ही है. रज़िया के मम्मे बिल्कुल भी लटके हुए नहीं हैं. उसके बाद उसकी 30 इंच की पतली कमर और उसके नीचे ऊपर को उठी हुई 32 इंच की मदमस्त गांड.. जो शाहिद को पागल बनाने के लिए काफ़ी थी.

रज़िया की फुददी किसी त्रिभुज के जैसी थी एकदम क्लीन फुददी.. वैसे उसे देख कर बताना मुश्किल था कि वो चुदी हुई है. क्योंकि रज़िया की फुददी की दोनों फांकें आपस में मिली हुई थीं.

शाहिद- वाह मेरी जान, मानना पड़ेगा.. तूने अपने जिस्म को बड़े प्यार से संभाला हुआ है.. वैसा का वैसा ही है.

रज़िया- सब तुम्हारे ही लिए है मेरे प्यारे शाहिद आ जाओ और निचोड़ लो.. मेरे एक-एक अंग को.

शाहिद- मेरी जान आज तुझे ऐसे चोदूंगा कि बस तू याद करेगी.

रज़िया- रूको मुझे छूने से पहले तुम्हें मेरी एक बात माननी होगी.

शाहिद- अब क्या हुआ तुम्हारी कौन सी बात बाकी रह गई है.. जल्दी बोलो.

रज़िया- आज बहुत दिनों बाद तुम मुझे छूने जा रहे हो तो पहले अपनी आँखों पर पट्टी लगाओ. उसके बाद ही तुम मुझे छू पाओगे.

शाहिद- क्या यार, ये भी कोई बात है?

रज़िया- प्लीज़ मेरी खातिर शाहिद.. आज हम एक खेल खेलेंगे, तुम बस अंधे बने रहो और हम ऐसे ही आनंद करेंगे.

शाहिद ने रज़िया की बात मान ली और रज़िया ने उसकी आँखों पर एक काली पट्टी बाँध दी. फिर रज़िया ने शाहिद को बेड पे लेटने को कह दिया.

शाहिद- यार कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा अब आ जाओ ना.. कहाँ हो तुम!

रज़िया- रूको ना, पहले कोई अच्छा सा गाना लगा देती हूँ.. मुझे म्यूज़िक के साथ चुदाई करने में ज़्यादा आनंद आता है.

रज़िया ने गाना चालू कर दिया और वो अब अलमारी के पास आ गई.. जहाँ शाजिया छुपी थी.

रज़िया- आ जाओ बाहर.. अब तुम आराम से एंजाय कर सकती हो.

शाजिया- नहीं आपा मुझे डर लग रहा है कहीं शाहिद को पता चल गया तो?

रज़िया- पागल मत बन.. उसको कुछ दिखाई नहीं देगा. अब चल भी आज तुझे असली लंड दिखाती हूँ आ जा मेरे साथ..!

ये दोनों बहुत धीमे-धीमे बातें कर रही थीं. वैसे तो शाहिद को सब पता था मगर वो अनजान बना हुआ था.

 
शाहिद- डार्लिंग कहाँ रह गईं.. जल्दी आओ ना..!

रज़िया- आ रही हूँ यार.. इतने बेसब्र मत बनो.. तुम कभी तो कुछ नया करने दो.

रज़िया ने शाजिया का हाथ पकड़ा हुआ था वो उसको लेकर सीधे बेड के पास आ गई. नजदीक आते ही शाजिया की नज़र सीधे शाहिद के लंड पे गई, जो अभी आधा ही खड़ा था यानि पूरा कड़क नहीं था. फिर भी वो कोई 5 इंच का दिख रहा था मगर उसकी मोटाई वैसी ही थी जिसे देख कर शाजिया बस उसमें खो गई.

रज़िया ने शाजिया को कुछ नहीं कहा और वो बस लंड को सहलाने लगी. उसे आगे-पीछे करके आनंद लेने लगी. बीच-बीच में वो उसे चूमती सुपारे को जीभ से चाटती.

शाहिद- आह.. रज़िया तेरा ये अंदाज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है आह.. चूस मेरी जान आह.. मुँह में पूरा ले ना आह..

अब ऐसी हरकतें तो लंड को खड़ा करने में सहायक होती हैं. शाहिद का लंड अपने पूरे शबाब पे था.. और पूरा 8″ का तन कर खड़ा हो गया.

जब रज़िया ने अपना मुँह हटाया तो शाजिया की आँखें फटी की फटी रह गईं. शाहिद का लंड पूरा तन कर फुंफकार मार रहा था.

शाजिया बस टकटकी लगाए लंड को देख रही थी.. तभी रज़िया ने उसका हाथ पकड़ कर लंड पर रख दिया. इस अचानक हमले से शाजिया घबरा गई मगर रज़िया ने धीमे से उसके कान के पास जाकर कहा- डर मत.. ये मज़े में खोया हुआ है.. तू भी असली लंड का थोड़ा आनंद ले ले.

शाहिद के लंड को देख कर वैसे तो शाजिया का मन भी बेचैन था मगर एक झिझक उसमें थी, जो रज़िया ने दूर कर दी, अब शाजिया आहिस्ता-आहिस्ता लंड को सहलाने लगी.

शाजिया के हाथ का स्पर्श शाहिद से छुपा नहीं था.. वो उसके लंड छूने से बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गया.

शाहिद- आह.. उफ़ मेरी जान अब मत तड़पा आह.. चूस ना इसे.. आह.. देख तेरे होंठों का स्पर्श पाने के लिए ये कितना बेचैन है.

रज़िया ने शाजिया को इशारा किया कि ले ले मुँह में.. तुझे ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा.

बस शाजिया तो खुद यही चाहती थी. रज़िया के कहने की देर थी और शाजिया ने सुपारा मुँह में भर लिया. शाजिया के मुलायम मगर तपते होंठों का अहसास शाहिद को मज़े की अलग दुनिया में ले गया.. वो बस आहें भरने लगा.

शाहिद- आह.. ससस्स मेरी जान उफ तेरे होंठों में ऐसी गर्मी है आह.. तो तेरी फुददी में कितनी गर्मी होगी आह.. चूस मेरी जान चूस आह..

शाहिद की बातों से शाजिया की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. उसकी फुददी रिसने लगी थी.

रज़िया पास बैठी इस पल को मज़े से एंजाय कर रही थी.. फिर उसने धीमे से शाजिया के कान में कहा कि शाहिद फुददी की चुसाई बहुत मस्त करता है.. कपड़े निकाल दे और फुददी चुसवा कर आनंद ले ले.. मगर शाजिया के दिल में डर था. उसने ‘ना’ में इशारा किया.

रज़िया भी कम नहीं थी, वो शाजिया के पास बैठ गई और उसके चुचों को सहलाने लगी. रज़िया बार-बार कहने लगी कि कुछ नहीं होगा, बस एक बार असली मर्द के हाथों अपने जिस्म को रगड़वा ले, बहुत आनंद आएगा.

वासना की मारी शाजिया ने आख़िर कर ‘हाँ कह दी और शाहिद का लंड रज़िया के हवाले करके उसने रज़िया को एक बार दूर चलने को कहा ताकि वो कुछ बात कर सके.

रज़िया उसका इशारा समझ गई और उसने शाहिद के लंड को मुँह से निकाल दिया.

शाहिद- उफ क्या हुआ रज़िया.. करो ना यार..

रज़िया- बस एक मिनट सब्र करो मेरे शाहिद, मैं बस अभी गई.. अभी आई.

शाहिद तो जानता था कि वो कहाँ जा रही है मगर फिर भी उसने थोड़ा नाटक किया तो रज़िया उसे वॉशरूम का बोल कर शाजिया को लेकर कमरे से बाहर चली गई.

रज़िया- क्या हुआ.. तू ना क्यों कह रही है?

शाजिया- मैं नंगी हो जाऊंगी तो शाहिद जी मुझे देख लेंगे.

रज़िया- पागल मत बन वो कैसे देखेगा? उसकी आँख तो बंद हैं.. आनंद लेने में तेरा क्या जाता है?

शाजिया- मगर जोश में उन्होंने आँख खोल दीं या फिर मेरी फुददी में लंड घुसा दिया तो?

रज़िया- मैं किस लिए हूँ ऐसा कुछ नहीं होगा.. अब जल्दी कर मेरी फुददी में बड़ी आग लगी है. तेरे मज़े लेने के बाद चुदाई तो मुझे ही करवानी है.

शाजिया वासना के भंवर में थी, तो वो रज़िया की बातों में आ गई और उसने नंगी होने की ‘हाँ’ कह दी. दोनों साथ में अन्दर आ गईं और शाजिया अपने कपड़े निकालने लगी.

रज़िया- शाहिद डार्लिंग मैं आ गई हूँ मगर अब तुम्हारे लंड को बाद में चूस कर आनंद दूँगी.. पहले तुम मेरी फुददी को थोड़ा चूस के गरम करो.. ओके..!

शाहिद- ठीक है मेरी जानेजिगर आ जाओ.

शाजिया अब एकदम नंगी थी, उत्तेजना से उसके निप्पल खड़े हो गए थे मगर उसको अभी भी ये डर सता रहा था कि कहीं शाहिद उसको ऐसे ना देख ले.

रज़िया ने शाजिया को लेट जाने को कहा और फिर वो उसके पास बैठ कर बोली- शाहिद मैं तुम्हारे पास लेटी हूँ मगर तुम्हें मेरी कसम है.. देखने की कोशिश मत करना.. बस तुम आनंद लो.

शाहिद- ठीक है मेरी जान तेरी कसम मैं कैसे तोड़ सकता हूँ. अब देख तुझे कैसे आनंद देता हूँ.. आज तेरी फुददी चूस चूस कर ही तुझे ठंडा ना कर दूँ तो कहना.

शाहिद ने करवट बदली और शाजिया उसकी बांहों में आ गई. अब शाहिद उसके मखमली होंठों को चूसने लगा और एक हाथ से उसके चुचों को दबाने लगा.

वैसे तो शाजिया और रज़िया के चुचों में बहुत फर्क था मगर शाहिद को पता था ये शाजिया है. बस ये बात शाजिया के दिमाग़ में नहीं आई वो तो वासना की आग में सब कुछ भूल गई थी.

शाहिद का लंड तो झटके खाने लगा था. वो जानता था जिसे सिर्फ़ मोबाइल में नंगा देखा था आज वो उसके नीचे लेटी है. शाहिद अब शाजिया के निप्पलों को चूसने और काटने लगा वो सिसकने लगी थी मगर उसकी आवाज़ शाहिद पहचान ना जाए, इस डर से वो दबी-दबी आहें ले रही थी.

शाजिया- ससस्स आह.. एम्म आह.. सस्स उफ़..

शाहिद तो अपने काम में लगा हुआ था. वो शाजिया को धीमे-धीमे चूसता हुआ उसकी नाभि तक पहुँच गया. अब वो अपनी जीभ उसकी नाभि में घुसा कर कुरेदने लगा.

शाजिया तो बेचारी याक़ूब से ये खेल खेली हुई थी. अब असली खिलाड़ी के सामने वो कब तक टिक पाती. उसकी उत्तेजना चरम पर पहुँच गई.

शाजिया- आह.. सस्स सस्स आह.. आ उम्म्म..

जब शाहिद के गर्म होंठ उसकी फुददी पे लगे. उसी पल उसका बाँध टूट गया और वो कमर को हिला-हिला कर झड़ने लगी.

 
शाहिद ने भी मौका नहीं गंवाया. उसने सारा फुददी रस जीभ से चाट कर साफ किया और फ़ौरन वो शाजिया की टांगों के बीच बैठ गया, जिसकी उम्मीद शाजिया को नहीं थी.

शाहिद ने उसके पैरों को मोड़ दिया और अपना लंड उसकी फुददी पर सैट कर दिया और धीमे-धीमे वो उसको फुददी पर घिसने लगा.

जब शाजिया को इस बात का अहसास हुआ उसकी तो जान ही निकल गई कि अचानक ये क्या हो गया?

शाहिद और शाजिया के इस खेल में रज़िया इतनी खोई हुई थी कि बस पूछो मत, वो अपनी फुददी को रगड़ रही थी और बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी.

शाजिया ने रज़िया के हाथ को पकड़ कर उसे इशारा किया कि शाहिद को रोको वरना बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी. तब जाकर रज़िया ने आँखें खोलीं और एक बार तो वो भी सोच में पड़ गई कि शाहिद ऐसा कैसे कर सकता है. वो ये अच्छी तरह जानता है कि इसके नीचे मैं नहीं, शाजिया है.. फिर भी ये शाजिया की फुददी पर पर लंड सैट कर रहा है.

शाहिद- वाह रज़िया.. आनंद आ गया आज तक इतना आनंद नहीं आया. आज पता नहीं तेरी फुददी के रस का स्वाद ही अलग था.. उम्म अब तक जीभ लपलपा रही है. अब मुझे लंड तेरी फुददी में घुसा कर ही सुकून मिलेगा.

रज़िया- नहीं शाहिद एक मिनट रूको प्लीज़ अन्दर मत डालना.. बस एक मिनट रुक जाओ मेरे प्यारे

शाहिद.. उसके बाद जितना चाहे आनंद ले लेना.

शाहिद- अरे यार अब क्या हुआ मेरा लंड बहुत अकड़ रहा है.. अब बर्दाश्त नहीं होता.

शाहिद की बात सुनकर शाजिया के होश उड़ गए.. उसे लगा अब वो नहीं बचेगी.

रज़िया- मैंने मना कब किया है.. मगर ऐसे नहीं.. मैं आज घोड़ी बन कर चुदना चाहती हूँ.. बस मुझे पोज़िशन चेंज कर लेने दो.. फिर तुम आराम से चोद लेना.

शाहिद- ठीक है जानेजिगर मुझे तो तूने अँधा बना दिया.. कुछ देख भी नहीं सकता. अब मैं तो ऐसे ही रहूँगा चल जल्दी से बन जा घोड़ी.. अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता.

शाहिद के कहने की देर थी कि शाजिया झट से उठ कर अलग हो गई और रज़िया उसकी जगह घोड़ी बन गई और शाहिद के लंड को पकड़ कर फुददी पर सैट कर दिया. शाहिद ने एक ही झटके से लंड फुददी में पेल दिया.

रज़िया- आह.. मेरे शाहिद उफ.. अब जाकर मेरी फुददी को सुकून मिला आह..

शाहिद- अभी तो तेरा रस निकाला था मेरी जान तब सुकून नहीं मिला था क्या..!

रज़िया- कितनी भी फुददी को चटवा लूँ.. मगर असली आनंद तो लंड के फुददी में जाने पर ही आता है. अब बातें ही करोगे या चोदोगे भी..!

दोनों ये बातें शाजिया को सुनाने के लिए कर रहे थे और इसका असर शाजिया पर हो रहा था. अभी कुछ देर पहले ही वो ठंडी हुई थी मगर इनकी चुदाई का सीन देख कर वो फिर से अपनी फुददी रगड़ने लगी थी.

शाहिद अब स्पीड से लंड को अन्दर-बाहर करने लगा और रज़िया मस्ती में आ गई- आह.. आह चोदो शाहिद आनंद आ गया.. उफ़ यू आर बेस्ट फकर आह.. फक मी हार्ड आह.. फक मी डीप उम्म्ह… अहह… हय… याह…

शाहिद- ले मेरी जान आह.. तेरी फुददी को तो आज ठंडी करके ही दम लूँगा.

ये दोनों अब फुल मस्ती में आ गए थे और इनकी बातें शाजिया को पागल बना रही थीं. लंड का फुददी में अन्दर-बाहर होना उसे और ज़्यादा उत्तेजित कर रहा था. वो लगातर अपनी फुददी को रगड़ रही थी और उसकी ये उत्तेजना अब चरम पर थी. जल्दी ही उसकी फुददी ने पानी छोड़ दिया.

शाहिद भी अब स्पीड से झटके मारने लगा था.. शायद उसका भी वीर्य अब निकलने वाला था. जब शाजिया को ये अहसास हुआ उसने जल्दी से अपने आप को संभाला और कपड़े पहन कर रज़िया को इशारा किया कि वो जा रही है. इस वक्त रज़िया भी अब चुदाई के चरम सुख का आनंद लेना चाहती थी तो उसने जाने को कह दिया. अब रज़िया भी गांड को हिला-हिला कर शाहिद का साथ देने लगी.

शाजिया चुपचाप वहां से निकल गई और इधर ये दोनों साथ में ठंडे हो गए. चुदाई का तूफान थम गया था मगर शाहिद को ये पता नहीं था कि शाजिया चली गई है. वो वैसे ही पट्टी बांधे हुए रज़िया के बराबर में लेट गया.

शाहिद- उफ़ रज़िया, तेरी फुददी क्या कमाल की है.. आज तो आनंद आ गया.

रज़िया ने कुछ नहीं कहा.. वो कमरे से बाहर गई और जब उसे तसल्ली हो गई कि शाजिया चली गई, तब उसने मेन डोर लॉक किया फिर वापस आ गई.

शाहिद- तुम कुछ बोलती क्यों नहीं यार.. मैं कब से बोले जा रहा हूँ.

रज़िया- अब ये पट्टी निकाल दो.. वो चली गई है.

शाहिद ने जल्दी से आँखें खोलीं और रज़िया को एक जोरदार किस कर दिया.

शाहिद- ऊओ माय डार्लिंग रज़िया आई लव यू.. तूने कमाल कर दिया. साली को कैसे उल्लू बना कर मेरे नीचे ले आईं.. कसम से आनंद आ गया. उस टाइम तो ऐसा लगा साली की फुददी आज ही फाड़ दूँ.

रज़िया- मुझे भी यही लगा था कि तुम आज उसको चोदने वाले हो. अच्छा हुआ मैंने टाइम रहते तुम्हें रोक दिया.

शाहिद- पागल, मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाला था.. बस उसको लंड का अहसास करा रहा था. वैसे भी जब तक वो पक्की चुदासी होकर खुद नहीं कहती, तब तक मैं उसे नहीं चोदने वाला.. समझी तू..!

रज़िया- यार, वो चुदने के लिए अभी रेडी नहीं है.. तुम अगर आज उसे चोद देते तो वो तुम्हारी दीवानी हो जाती.

शाहिद- नहीं रज़िया.. ऐसे तो मैं उसे कब का चोद चुका होता. मैं उसे रांड़ बनाना चाहता हूँ.

शाहिद की आँखों में अचानक गुस्सा देख कर रज़िया ने उसके बालों को सहलाना शुरू कर दिया.

रज़िया- अरे ये क्या.. ऐसे गुस्सा होकर क्यों बोल रहे हो तुम? और एक बात बताओ तुम ये उस बेचारी को रांड़ बनाने पे क्यों तुले हो?

शाहिद- अरे मैं गुस्सा कहाँ हूँ.. बस ऐसे ही आवाज़ थोड़ी तेज हो गई.. और रही बात उसको रांड़ बनाने की.. तो यार मैं कौन सा उससे धंधा करवाऊंगा. बस सब दोस्त मिलकर उसके साथ एंजाय करेंगे.

रज़िया- वो तो तुम कर ही रहे हो.. मैं हूँ, रूबी है.. तो उसमें ऐसा क्या खास है?

शाहिद- यार उसकी मासूमियत और भोलापन देख कर मन में ख्याल आया कि अगर ये शराफत का नकाब उतार दे तो हम सभी को कितना आनंद देगी.

रज़िया- उसका वो नकाब अब उतर चुका है.. तू नहीं जानता वो लंड की कितनी प्यासी है. तूने अभी देखा ना कैसे वो मज़े से तुम्हारे लंड को चूस रही थी!

शाहिद- अरे अभी कहाँ.. अभी तो उसकी चाहत और बढ़ानी होगी. तब कहीं जाकर वो पक्की रांड़ बनेगी हा हा हा हा..

रज़िया- शाहिद कहीं ऐसा ना हो तुम देर कर दो और वो किसी और से चुदवा ले.

शाहिद- ये क्या बकवास कर रही है तू! वो किसी और से कैसे चुदवा सकती है हाँ?

रज़िया- तू गुस्सा मत हो मेरी बात ध्यान से सुन.. उसका अब्बू आजकल उस पर बड़ा प्यार जता रहा है. उसको मॉर्डन ड्रेस भी दिला दिए और उसके जिस्म की गर्मी से उसका लंड खड़ा भी होने लगा है.

शाहिद- ये तू क्या बोल रही है.. ठीक से समझा मुझे?

रज़िया ने शुरू से सारी बात शाहिद को बताई.. जिसे सुनकर वो हंसने लगा.

रज़िया- अब तुम्हें क्या हो गया है?

शाहिद- साला हरामी, अपनी ही बेटी के मज़े ले रहा है हा हा हा.. अच्छा है बहुत अच्छा है. ये खेल चलने दे इससे शाजिया की तड़प और बढ़ेगी. तू एक काम कर उसको और आइडिया दे.

 
रज़िया को कुछ समझ नहीं आया तो शाहिद ने उसे कुछ बातें समझाईं कि अब आगे वो शाजिया को क्या करने को कहेगी, जिसे सुनकर रज़िया की आँखों में चमक आ गई.

रज़िया- वाउ यार ये तो मस्त आईडिया है. तुमने तो शाजिया की प्राब्लम का हल निकाल दिया.

शाहिद- मगर ध्यान रहे बस जितना बताया.. उतना ही होना चाहिए उससे ज़्यादा हुआ तो साला बूढ़ा ठरकी

शाजिया की फुददी फाड़ के रख देगा और मैं लंड हाथ में लिए हिलाता रह जाऊंगा.

रज़िया- ठीक है जानू.. अब शाजिया को मारो गोली और मेरी प्यास अच्छे से बुझाओ. आज तुमने मेरी फुददी नहीं चाटी.

शाहिद- अबे चुदाई के पहले तो चाटी थी.

रज़िया- अच्छा ये बात है उस शाजिया की फुददी चाटी थी.. मेरी नहीं समझे..!

शाहिद- मेरी तो आँख बंद थीं मुझे क्या पता तू थी या शाजिया.

रज़िया- बस बस ज़्यादा बनो मत, उसकी फुददी कैसे मज़े से चाट रहे थे. चलो अब शुरू हो जाओ.. नहीं तो चैन से रहने नहीं दूँगी.

शाहिद फिर से मस्ती के मूड में आ गया अब वो दोनों एक-दूसरे को आनंद देने लग गए. कभी शाहिद फुददी को जीभ से कुरेदता, कभी रज़िया की पूरी फुददी होंठों से दबा कर चूसता. रज़िया भी अब शाहिद का पूरा साथ देने लगी. वो दोनों 69 के पोज़ में थे और रज़िया लंड को अच्छे से चूस रही थी.

थोड़ी मस्ती के बाद यहाँ चुदाई शुरू हो गई और अबकी बार शाहिद ने जमकर रज़िया को चोदा. उसको चोद कर 3 बार ठंडा किया, तब कहीं जाकर शाहिद के लंड ने पानी उगला.

अब तक रज़िया थक गई थी और शाहिद भी बहुत थक गया था क्योंकि उसने रात को शबनम की चुदाई और इस वक्त उसने रज़िया की मस्त चुदाई कर दी थी.

थोड़ी देर दोनों वहीं लेटे बातें करते रहे.. फिर अपने अपने रास्ते हो लिए.

शाजिया दो बार ठंडी हुई थी और यहाँ से निकल कर वो अपने घर चली गई. अब उसके साथ क्या हुआ.. ये भी जान लेते हैं.

शाजिया जब घर गई तो अंजुम ने उसे खाने के लिए कहा मगर उसने ‘भूख नहीं है..’ कह कर अपने आपको कमरे में बंद कर लिया. उसकी अम्मी ने बहुत कोशिश की मगर वो नहीं मानी और आख़िरकार अंजुम थक कर वहां से चली गई.

शाजिया ने कपड़े बदले और बेड पर पेट के बल लेट कर वो उस पल को याद करके मुस्कुराने लगी.. जब शाहिद उसको चूम रहा था, उसके नाज़ुक बदन को अपने हाथों से मसल रहा था.

शाजिया- उफ़ शाहिद ये आपने क्या कर दिया.. मेरे पूरे जिस्म में आग लगा दी आपके हाथों का स्पर्श अभी भी मैं महसूस कर रही हूँ. क्या सच में सेक्स करने में इतना आनंद मिलता है.

वह ऐसे ही बहुत देर तक सोचती रही फिर थकान से उसको नींद आ गई.

उधर फवाद और राबिया को आप शायद भूल गए तो चलो हम लोग आज उनके घर भी झाँक आते हैं.

दोपहर को फवाद सोकर उठा तो राबिया उसके लिए कॉफी बना कर ले आई.

फवाद- जानेजिगर, आजकल तुम बहुत बदल गई हो.. पता नहीं मगर मुझे ये अजीब लगता है. जब तुम्हें चोदने का बोलता हूँ तो मना कर देती हो.. मुझसे नाराज़ हो क्या..?

राबिया ने फवाद के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया और कमरे को ठीक करने लग गई, जिसे देख कर फवाद को बड़ा अजीब लगा. वो खड़ा हुआ और उसने राबिया को बांहों में लेकर किस कर दिया.

राबिया- ओह छोड़ो ना फवाद.. क्या है आपको क्या हो गया है.. मुझे काम करने दो.

फवाद- मुझे कुछ नहीं हुआ… ये बताओ तुम्हें क्या हुआ है.. जब से गाँव से आई हो अजीब हो गई हो. पहले तो चुदाई के लिए तड़पती रहती थी.. मगर अब मेरे कहने के बाद भी मना कर देती हो.

राबिया- ऐसा कुछ नहीं है.. पहले मैं जो करती थी वो ग़लत था. अब मुझे समझ आ गया है कि औरत को अपनी हद में रहना चाहिए.. ज्यादा चुदाई में मन नहीं लगाना चाहिए.. बस इसी लिए.

फवाद- ये तो अच्छी बात है.. मगर आज करते हैं ना यार!

राबिया- नहीं आज नहीं.. आज मुझे बहुत काम है और हाँ कल सुबह आप आओगे तो आपके लिए एक सरप्राइज भी होगा.

फवाद- अच्छा क्या बात है.. मतलब कल तुम्हारा कुछ खास करने का मंसूबा है? चलो अब तो कल ही देखेंगे.

शाम तक दोनों नॉर्मल ही रहे. फिर फवाद अपनी जॉब पे चला गया तो राबिया ने रुबीना को कॉल किया कि अब वो उस लड़की को ले आए.

आधा घंटा बाद रुबीना आ गई, उसके साथ एक लड़की थी जो फटा हुआ सा फ्रॉक पहने हुए थी. उसके हाथ में एक पोटली भी थी शायद उसके कपड़े होंगे. मगर उन फटे पुराने कपड़ों में भी वो खिलता हुआ गुलाब नज़र आ रही थी, जिसे देख कर राबिया की आँखों में चमक आ गई और उसने रुबीना को थैंक्स कहा.

रुबीना- अरे अभी कहाँ थैंक्स बोल रही है.. पहले तेरा काम तो हो जाए.

वो लड़की थोड़ी घबरा रही थी और वहीं एक कोने में खड़ी हुई थी.

राबिया- अरे तू ऐसे डर क्यों रही है? आ इधर आ मेरे पास आ.

रुबीना- ये ऐसी ही है.. अठारह की हो गई है लेकिन थोड़ी शरमीली है मगर समझदार है. तू इसे ठीक से समझा देगी तो देखना सब काम अच्छे से कर देगी.

राबिया- अच्छा नाम क्या है इसका?

रुबीना- इसका नाम जाहिरा है और जाहिरा आज से तुझे यहीं रहना है. बस हफ्ते में एक बार तुझे छुट्टी मिलेगी, तब तू घर जा सकती है. ये आपा बहुत अच्छी हैं तेरा बहुत ख्याल रखेगी, बस तू इनकी सब बातें मानती रहना और तुझे पैसे भी बहुत मिलेंगे. समझ गई ना तू मेरी बात..!

जाहिरा ने बस ‘हाँ’ में गर्दन हिला कर रुबीना को जबाव दिया.

राबिया- यार ये तो बहुत डरी हुई लग रही है.. कोई प्राब्लम है क्या?

रुबीना- अरे नहीं ऐसा कुछ नहीं है. पहली बार घर से बाहर रहेगी ना.. बस इसी लिए थोड़ी घबरा रही है.

राबिया- अच्छी बात है.. चल अब तू निकल, मुझे जाहिरा को काम समझाना है और इसे कुछ अच्छे कपड़े भी दिलाने होंगे. देखो इसके कपड़े कैसे फटे हुए हैं.

रुबीना- अब वो तेरी मर्ज़ी है तू इसे क्या दिलाती है, चल मुझे बाहर तक छोड़ दे.

जाहिरा वहीं बुत बनी खड़ी रही और राबिया अपनी सहेली के साथ बाहर आ गई.

रुबीना- क्यों राबिया कैसी लगी जाहिरा?

राबिया- यार मस्त है.. एकदम कच्ची कली है.. फवाद तो इसको देख कर पागल हो जाएगा. तुझे पता है इसे देख कर तो मुझे ही कुछ-कुछ होने लगा. इसके होंठ देख कितने प्यारे है ना!

 


रुबीना- हा हा हा तुझे किसने रोका है. तू भी इसके साथ आनंद कर लेना मगर जल्दबाज़ी मत करना वरना काम बिगड़ जाएगा. इसे प्यार से लाइन पर लाना, बाकी तू खुद समझदार है. ठीक है अब मैं चलती हूँ.

राबिया- तू टेंशन मत ले.. इसे कैसे लाइन पे लाना है, मुझे पता है.

राबिया को बाय बोलकर रुबीना वहां से चली गई और राबिया वापस अन्दर आ गई.

जाहिरा पहले जहाँ खड़ी थी, अब भी वहीं खड़ी रही, जिसे देख कर राबिया को उस पर बड़ा प्यार आया और वो उसके पास जाकर बैठ गई.

राबिया- जाहिरा तू ऐसे डर क्यों रही है? मैं तुझे ज़्यादा काम नहीं दूँगी और ना ही तुझे गुस्सा करूँगी.. चल इधर आ और मुझसे बातें कर ना.

जाहिरा चुपचाप राबिया के साथ सोफे के पास आकर खड़ी हो गई.

राबिया- अरे खड़ी क्यों है.. बैठ ना यहाँ.

जाहिरा- नहीं मेमसाब मैं नौकर हूँ.. आपके पास कैसे बैठ सकती हूँ?

राबिया- धत तेरी की.. तुझे किसने कहा तू नौकर है? अरे तू तो बस मेरी मदद करने आई है और मुझे मेम साब नहीं, आपा बोल.. समझी मेरा नाम राबिया है मेरा मगर तू सिर्फ़ आपा बोलना समझी!

राबिया ने एक घंटे तक जाहिरा से बातें की और उसका विश्वास जीत लिया. अब जाहिरा भी खुलकर राबिया से बात करने लगी थी.

राबिया- अच्छा तेरी ये पोटली में कोई ढंग का कपड़ा भी है या नहीं.. दिखा तो.

जाहिरा- हम गरीब हैं आपा.. दूसरों के पुराने कपड़े ही पहनने को मिलते हैं.

राबिया- अब तू ये फटे पुराने कपड़े नहीं पहनोगी.. चल यहीं पास में कपड़ों की शॉप है. तेरे लिए अच्छे कपड़े लाते हैं.

जाहिरा- नहीं आपा रहने दो.. ये जो मेरे पास हैं.. वही अच्छे हैं.

जाहिरा का मासूम चेहरा देख कर राबिया को हँसी आ गई- अरे डर मत.. ये मेरी तरफ़ से तुझे तोहफा है, मैं तेरे पैसे नहीं काटूंगी.

राबिया के समझाने पर जाहिरा मान गई और फिर दोनों कपड़े लेने चली गईं. राबिया ने कुछ कपड़े पसंद किए और कुछ जरूरत का सामान लिया फिर वो जाहिरा को लेकर घर आ गई.

राबिया- देख जाहिरा, वैसे तो सारा काम मैं अकेले ही करती हूँ मगर कभी-कभी बीमार होती हूँ तो मुश्किल हो जाती है. अब तू ये बता तुझे क्या-क्या काम करना आता है?

जाहिरा- आपा, मुझे कॉफी बनानी आती है मगर खाना बनाना नहीं आता.. हाँ मैं साफ-सफ़ाई कर सकती हूँ और सर भी अच्छा दबा देती हूँ. मेरी अम्मी कहती है कि मेरे हाथों में जादू है.. झट से दर्द निकल जाता है.

राबिया- अच्छा फिर तो तू मेरे बहुत काम की है. अच्छा सुन मेरे शौहर की रात की ड्यूटी होती है, वो सुबह जल्दी वापस आते हैं, तू बस सुबह उनके लिए कॉफी बना देना और थोड़े बहुत बर्तन साफ कर देना.. बाकी खाना वगैरह मैं बना लूँगी, ठीक है.

जाहिरा- ठीक है आपा.. और घर की सफ़ाई भी मैं कर दूँगी.

राबिया- अच्छा सुन तू मेरे शौहर को जीजू बोलना.. उन्हें अच्छा लगेगा. ठीक है.

जाहिरा- वो क्यों आपा.. मैं उन्हें भाई जान बोलूँगी ना!

राबिया- अरे नहीं.. मैं तेरी आपा हूँ, तो वो जीजू हुए ना. चल अब ये गंदे कपड़े निकाल कर अच्छे से तुझे नहला देती हूँ.. फिर हम खाना बनाएंगे.

राबिया ने जाहिरा का फ्रॉक निकालना चाहा तो वो शर्मा गई और राबिया का हाथ पकड़ लिया.

जाहिरा- ये आप क्या कर रही हो आपा.. मैं अपने आपसे कर लूँगी.

राबिया- हा हा हा, अरे तू मेरी छोटी बहन जैसी है.. अब मुझसे कैसी शर्म! चल निकालने दे पगली कहीं की!

जाहिरा ने थोड़ी ना-नुकुर की मगर राबिया कहाँ मानने वाली थी. उसने जाहिरा का फ्रॉक निकाल दिया. अब ऊपर से वो एकदम नंगी थी और नीचे सिर्फ़ एक पुरानी सी चड्डी पहने हुए थी. फिर राबिया ने ज़बरदस्ती उसकी चड्डी भी निकाल दी.

अब वो कमसिन कली बिना कपड़ों के राबिया के सामने थी, जिसे देख कर राबिया हैरान हो गई कि इतना कसा हुआ बदन और एकदम बेदाग, कहीं पर कोई भी निशान तक नहीं था.

जाहिरा का फिगर आपको क्या बताऊं.. कोई साइज़ ही नहीं था उसका.. उसके मम्मे कोई सेब जितने होंगे.. एकदम कड़क. इन्हें देख कर साफ पता चलता है कि किसी के हाथ इन तक नहीं पहुँचे होंगे. उसकी फुददी एकदम क्लीन चमकती हुई. हाँ थोड़े से रोंए उसपे अभी उगना शुरू ही हुए थे और वो फूली हुई जैसे कोई बड़ा पाव हो. मगर फुददी की दोनों फांकें ऐसे चिपकी हुई थीं जैसे इन्हें चाकू से काटकर खोलना पड़ेगा.. नहीं तो ये खुलेंगी ही नहीं.

जाहिरा बहुत शर्मा रही थी मगर राबिया ऐसे बर्ताव कर रही थी जैसे ये उसका रोज का काम हो.

राबिया- अरे जाहिरा तू ऐसे क्या शर्मा रही है.. क्या तेरी अम्मी ने तुझे कभी नहलाया नहीं है?

जाहिरा- व्ववो आपा, मैं जब छोटी थी तब नहलाती थीं.. अब तो मैं खुद नहाती हूँ.

राबिया- ओये होये छोटी थी जब.. अब तू कौन सी बड़ी हो गई है.. ये तेरे दूधू तो देख इत्ते से हैं और मेरे देख कितने बड़े हैं.

राबिया ने उसके चुचों को मसलते हुए टच करके ये बात कही.. साथ ही उसके चूचों का जायजा भी ले लिया. वैसे राबिया को पता था जो वो कर रही है.. वो बहुत जल्दी कर रही है मगर उसके पास टाइम भी कम था. बाबा की बात उसे अच्छे से याद थी और फवाद की जान भी बचानी थी.

जाहिरा- आ आपा दुख़ता है.. ऐसे मत करो ना.

राबिया- ओह सॉरी सॉरी अच्छा तुमने इन्हें कभी ऐसे नहीं दबाया क्या?

जाहिरा- नहीं आपा, मैं इनको क्यों दबाऊंगी?

राबिया- अरे नहाती है.. उस टाइम साबुन तो लगाती होगी ना.. तब दर्द नहीं होता?

जाहिरा- नहीं आपा, साबुन तो ऐसे आराम से लगाती हूँ.. आपके जैसे दबा कर नहीं.

राबिया समझ गई कि जाहिरा एकदम अनछुई कली है और इसे इस हालत में फवाद को देना बहुत ख़तरनाक होगा. इसको पहले थोड़ा तैयार करना होगा.

राबिया- चल अब तुझे अच्छे से नहलाती हूँ… फिर तेरा गोरा बदन और चमक जाएगा.

जाहिरा- आपा, मैं खुद नहा लूँगी ना!

जाहिरा अब भी थोड़ी शर्मा रही थी मगर राबिया तो अब पक्की खिलाड़ी बन चुकी थी. उसने अपने कपड़े निकालने शुरू किए.

राबिया- मेरे सामने नंगी है इसी लिए शर्मा रही है ना.. चल हम दोनों साथ में नहाते हैं बहुत आनंद आएगा.

राबिया को नंगी देख कर जाहिरा को और ज़्यादा शर्म आने लगी. साथ ही राबिया के बड़े चुचों को देख कर उसको थोड़ा अजीब भी लगा. ये शायद उसका पहला मौका था जब कोई लड़की या औरत ऐसे नंगी उसके सामने थी.

राबिया- बस खुश! अब हम दोनों ही नंगी हैं अब तो कोई शर्म नहीं ना.. चल अब हम दोनों मिलकर मज़े से नहाती हैं.

राबिया उसको लेकर बाथरूम में चली गई और पहले दोनों ने अच्छे से शावर लिया. फिर बड़े प्यार से राबिया उसको साबुन लगाने लगी और उसके एक-एक अंग को छू कर आनंद लेने लगी.

राबिया- वाउ यार, जाहिरा तेरे बदन में कितनी चिकनाहट है.. साबुन फिसलता जा रहा है.

जाहिरा- आपा, मैं भी आपको साबुन लगाऊं?

राबिया- अरे हाँ लगा ना.. और ये मेरे चुचों को भी दबाना.. और भी आनंद आएगा.

 
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