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Guest
क्यों फ्रेंड्स आनंद आया ना, ये थी फरज़ाना और अब्दुल की कहानी. उसके बाद तो अब्दुल रोज फरज़ाना को चोदने लगे और वो भी उनके बड़े लंड की आदी हो गई. हाँ एक बात है.. वो अक्सर अब्दुल को छेड़ने के लिए अब्बू कहती और वो उससे गुस्सा करते, बस.
एक बात और.. वैसे तो फरज़ाना को पता था कि अब्दुल की एक बीवी और बेटी है. मगर उसका उनसे मिलने का कभी मौका नहीं पड़ा. वैसे भी अब्दुल उसे बहुत प्यार करते थे, उसकी हर छोटी बड़ी ख़ुशी का ध्यान रखते थे, जो फरज़ाना को बहुत पसंद था. अब वो भी दिल से अब्दुल को चाहने लगी थी.. मगर उसने कभी अब्दुल को अपना शौहर नहीं माना, बस ऐसे ही वो उसके साथ खुश थी. ऐसे ही दो साल निकल गए, वो दोनों इस रिश्ते को निभा रहे थे.
अब वापस कहानी पर चलते हैं.. फरज़ाना ने हलवा लाकर दिया या नहीं देख लेते हैं. एक बात और ये कहानी में कुछ पार्ट बन गए मगर आपको फरज़ाना और अब्दुल की कहानी समझ आए, इसी लिए मैंने पूरी बात एक साथ ही बता दी ताकि आगे कोई भ्रम ना रहे. वैसे अभी रज़िया और रूबी का पूर्व भी आपको बताना है, तो कभी फ़ुर्सत में वो भी आपको बता ……………
चलो अभी इस सेक्स की कहानी का मजा लेते हैं.
फरज़ाना- ये लीजिए गरमा गर्म हलवा.. मैंने सिर्फ़ खास आपके लिए बनाया है.
अब्दुल- वाह भाई आज तो आनंद आ गया, मगर एक बात बताओ मॉल में तुमने ऐसा क्यों कहा कि आपको किसी की इच्छा से क्या लेना-देना! क्या मैं तुम्हें कभी किसी बात के लिए मना करता हूँ.. बोलो? फिर क्यों तुम हमेशा मुझे टेढ़े जबाव देती हो?
फरज़ाना- अरे मेरे बलमा को बुरा लगा.. आपको तो पता है कि ये मेरी आदत हो गई है. जब तक आपको छेड़ ना लूँ.. मुझे चैन नहीं मिलता है. आप इतना टेंशन में क्यों आ जाते हो? आपकी बेटी से अगर मुझे मिलना होता, या उसे कुछ बताना होता तो अब तक बता चुकी होती. मुझे आपका घर नहीं पता या उसका कॉलेज नहीं पता, मगर आपने मना किया तो बस मुझे उनसे मिलने की क्या जरूरत पड़ी. आज तो इत्तफ़ाक़ से मुलाकात हो गई. वैसे शाजिया है बहुत प्यारी.. बिल्कुल आप पे गई है.
अब्दुल- तेरा भी यार कुछ समझ नहीं आता मुझे.. कभी कैसे, कभी कैसे.. चल ला अब मुझे हलवा खाने दे.
फरज़ाना- हाँ लो ना.. किसने रोका है. वैसे एक सवाल है मन में.. पूछ लूँ क्या?
अब्दुल- अब मन में आ गया तो पूछ ले.
फरज़ाना- शाजिया से मेरा क्या रिश्ता है.. मैं उसे अपनी छोटी बहन समझूँ या बेटी?
अब्दुल- तू फिर शुरू हो गई ना.. ले नहीं खाना मुझे हलवा.. तू मुझे कड़वी बातें ही सुना.
फरज़ाना- हा हा हा हा जल गए ना.. हा हा हा अच्छा अच्छा मज़ाक कर रही हूँ आप आराम से खा लो, अब नहीं बोलूँगी.
अब्दुल जी मज़े से हलवा खाने लगे और फरज़ाना उनके पास बैठ गई. फिर जब वो खा चुके तो फरज़ाना ने एक और चौका मार दिया.
फरज़ाना- अच्छा एक बात बताओ आप, आज तक अपने शाजिया को इतना सादा रखा.. फिर आज क्या जरूरत आ गई जो आपने उसे इतने मॉर्डन कपड़े दिलाए?
अब्दुल- अब वो बड़ी हो गई है और कॉलेज जाने लगी है. अब दूसरी लड़कियों को देखेगी तो उसका भी मन करेगा ना.. बस इसी लिए.
फरज़ाना- बुरा मत मानना आप लेकिन उन कपड़ों में वो बहुत सेक्सी लगेगी.. सारे लड़के उसे देख कर आहें भरेंगे.
अब्दुल- तुमने फिर बकवास शुरू कर दी ना.
फरज़ाना- नहीं, ये बकवास नहीं है, आप मेरी बात को समझो.. वो बहुत सुन्दर है और उसके शरीर की बनावट भी बहुत अच्छी है. जब वो इतने हॉट कपड़े पहने, तो आप खुद ही देख लेना.
अब्दुल जी को पता था कि फरज़ाना सही कह रही है. आज वो खुद बहक गए थे लेकिन उन्होंने फिलहाल बात को टाल दिया.
अब्दुल- अच्छा अच्छा.. ये ज्ञान बंद कर.. आज लंड में बहुत हलचल मची हुई है.. चल जल्दी कर, इसे शांत करके बाद में अपनी बक-बक कर लेना.
फरज़ाना कुछ बोलती तभी अब्दुल जी का फ़ोन आ गया, ये शॉप से था शायद.. उन्होंने 5 मिनट बात की, फिर थोड़ा टेंशन में आ गए.
अब्दुल- इन्हें भी अभी आना था.. सारा मूड ऑफ कर दिया.
फरज़ाना- क्या हुआ मेरे बलमा जी किसने आपका मूड खराब कर दिया?
अब्दुल- अरे कोई पुराना ग्राहक है.. थोक में माल लेता है, अब जाना ही पड़ेगा.
फरज़ाना- अरे अभी तो बड़े चोदने की बात कर रहे थे.. ऐसे ही जाओगे क्या?
अब्दुल- मन तो बहुत है मगर जाना भी जरूरी है. चल अब कल ही तेरी चुदाई करूँगा.. अभी तो जाता हूँ.
फरज़ाना- शॉप से वापस आ जाना ना.. कभी तो आप रात को मेरे पास रहा करो.
अब्दुल- नहीं फरज़ाना.. अंजुम को पहले ही मुझ पर शक है, अब शाजिया भी समझदार हो गई है. मैं कोई ख़तरा मोल नहीं लेना चाहता. तू सो जाना ओके.. चलता हूँ.
अब्दुल जी वहां से चले गए और शॉप से अपना काम निपटा कर वो घर चले गए.
अब बेचारे सुबह से कड़क लंड लिए घूम रहे थे तो रात को कमरे में गए. अब्दुल जी को बेचैन देख कर अंजुम ने कारण पूछा- क्या हुआ जी.. आप ठीक तो हो ना..? अपने खाना भी नहीं खाया और आज देरी से भी आए, शॉप की कोई समस्या है क्या?
अब्दुल- अरे कुछ नहीं ऐसे ही आज थोड़ा काम ज़्यादा था और कुछ बात नहीं है.
अंजुम- अच्छा ठीक है सो जाओ.. थके हुए हो आपको अच्छी नींद आएगी.
अब्दुल- अच्छा ये बताओ शाजिया सो गई क्या?
अंजुम- जी.. वो कब की सो गई थी.
रुकावट के लिए खेद है.. आपको बता दूँ अब्दुल जी के कमरे में आने के साथ ही शाजिया बाहर कान लगा के खड़ी हो गई थी. रज़िया की कही बात उसे बेचैन कर रही थी, तो वो आज जानना चाहती थी कि उसके अब्बू और मॉम के बीच सब ठीक तो है ना.
अब्दुल- एक बात कहूँ.. आज बड़ा मन है.. बहुत दिन हो गए.
अब्दुल जी आगे कुछ बोल पाते तभी बीच में अंजुम ने उन्हें टोक दिया- आपको कुछ और नहीं सूझता क्या.. जब देखो यही बात, अब लड़की जवान हो गई है.. अब तो अपने आप पर कंट्रोल करो.
अब्दुल- सात साल से कंट्रोल ही तो किए हुए हूँ. पहले तो तुम महीने में 2 या 3 बार ‘हाँ’ कर देती थीं.. आजकल तो महीने के बाद भी तुम्हारी ना ही सुनने को मिलती है.
अंजुम- आपको पता है मुझे शुरू से ये सब पसंद नहीं.. फिर क्यों आप बार-बार एक ही बात दोहराते हो?
अब्दुल- कैसी औरत है तू.. इतनी सुन्दर है, फिगर भी अच्छा है.. मगर तेरे अन्दर सेक्स क्यों नहीं है.. ये बात मेरी समझ के बाहर है.. तू कैसे इतने दिन बिना संसर्ग के निकाल लेती है?
अंजुम- अब अल्लाह ने जैसा बनाया, वैसी ही हूँ और फिर अपने आप से पूछो, शुरू में कैसे मुझे जानवरों की तरह चोदते थे.. बस उसी वजह से मुझे सेक्स से नफ़रत सी हो गई. अब तो बिल्कुल मन नहीं करता.
अब्दुल- तेरे इसी व्यवहार की वजह से हमें दूसरी औलाद नहीं हुई. ये तो मेरी शराफत है, कोई दूसरा होता तो ना जाने क्या करता.
अंजुम- क्या करता.. बाहर मुँह मारता, यही कहना चाहते हो ना.. आपको किसने रोका है.. आप भी मार लो, मिटा दो खानदान का नाम मिट्टी में.. वैसे भी पहले से ही कांड हुआ पड़ा है, आप भी कर दो एक कांड.. क्या फर्क पड़ता है.
अब्दुल- बस मेरी इसी शराफत का तू फायदा उठाती है. तुझे पता है मैं ऐसा कोई काम नहीं करूँगा, जिससे बदनामी हो.
अंजुम- हाँ जानती हूँ और ये भी जानती हूँ कि आप मुझसे बहुत प्यार करते हो, आप कोई ग़लत कम नहीं करोगे.
अब्दुल- इसी लिए तो बोल रहा हूँ.. मान जाओ ना.. बस आज कर लो बहुत दिन हो गए.. फिर एक महीने तक नहीं कहूँगा.
अंजुम- आप बात को समझते क्यों नहीं.. मेरा मन होगा तो बता दूँगी मगर आज नहीं.. अब सो जाओ, रात बहुत हो गई है.
अब्दुल जी बहुत देर तक मिन्नतें करते रहे मगर अंजुम नहीं मानी और आख़िर हार कर अब्दुल जी सो गए मगर बाहर खड़ी शाजिया के दिमाग़ में एक तूफान छोड़ गए.
शाजिया अपने कमरे में आ गई और अपनी अम्मी को कोसने लगी कि कैसे वो अब्बू को तरसा रही है, इसी लिए अब्बू इतने गुस्से वाले हो गए फिर सुबह वाली बात उसे याद आई वो अब्बू का खड़ा लंड उसे याद आया.
शाजिया- तो क्या अब्बू मेरे जिस्म को टच करके बेचैन हो गए थे, तभी आज उनके मन में इतनी वासना आ रही थी. छी:.. मैं भी क्या सोच रही हूँ वो मेरे अब्बू हैं.
शाजिया बहुत देर तक अपने आपसे बातें करती रही, फिर कब उसकी आँख लगी, उसको पता भी नहीं चला.
एक बात और.. वैसे तो फरज़ाना को पता था कि अब्दुल की एक बीवी और बेटी है. मगर उसका उनसे मिलने का कभी मौका नहीं पड़ा. वैसे भी अब्दुल उसे बहुत प्यार करते थे, उसकी हर छोटी बड़ी ख़ुशी का ध्यान रखते थे, जो फरज़ाना को बहुत पसंद था. अब वो भी दिल से अब्दुल को चाहने लगी थी.. मगर उसने कभी अब्दुल को अपना शौहर नहीं माना, बस ऐसे ही वो उसके साथ खुश थी. ऐसे ही दो साल निकल गए, वो दोनों इस रिश्ते को निभा रहे थे.
अब वापस कहानी पर चलते हैं.. फरज़ाना ने हलवा लाकर दिया या नहीं देख लेते हैं. एक बात और ये कहानी में कुछ पार्ट बन गए मगर आपको फरज़ाना और अब्दुल की कहानी समझ आए, इसी लिए मैंने पूरी बात एक साथ ही बता दी ताकि आगे कोई भ्रम ना रहे. वैसे अभी रज़िया और रूबी का पूर्व भी आपको बताना है, तो कभी फ़ुर्सत में वो भी आपको बता ……………
चलो अभी इस सेक्स की कहानी का मजा लेते हैं.
फरज़ाना- ये लीजिए गरमा गर्म हलवा.. मैंने सिर्फ़ खास आपके लिए बनाया है.
अब्दुल- वाह भाई आज तो आनंद आ गया, मगर एक बात बताओ मॉल में तुमने ऐसा क्यों कहा कि आपको किसी की इच्छा से क्या लेना-देना! क्या मैं तुम्हें कभी किसी बात के लिए मना करता हूँ.. बोलो? फिर क्यों तुम हमेशा मुझे टेढ़े जबाव देती हो?
फरज़ाना- अरे मेरे बलमा को बुरा लगा.. आपको तो पता है कि ये मेरी आदत हो गई है. जब तक आपको छेड़ ना लूँ.. मुझे चैन नहीं मिलता है. आप इतना टेंशन में क्यों आ जाते हो? आपकी बेटी से अगर मुझे मिलना होता, या उसे कुछ बताना होता तो अब तक बता चुकी होती. मुझे आपका घर नहीं पता या उसका कॉलेज नहीं पता, मगर आपने मना किया तो बस मुझे उनसे मिलने की क्या जरूरत पड़ी. आज तो इत्तफ़ाक़ से मुलाकात हो गई. वैसे शाजिया है बहुत प्यारी.. बिल्कुल आप पे गई है.
अब्दुल- तेरा भी यार कुछ समझ नहीं आता मुझे.. कभी कैसे, कभी कैसे.. चल ला अब मुझे हलवा खाने दे.
फरज़ाना- हाँ लो ना.. किसने रोका है. वैसे एक सवाल है मन में.. पूछ लूँ क्या?
अब्दुल- अब मन में आ गया तो पूछ ले.
फरज़ाना- शाजिया से मेरा क्या रिश्ता है.. मैं उसे अपनी छोटी बहन समझूँ या बेटी?
अब्दुल- तू फिर शुरू हो गई ना.. ले नहीं खाना मुझे हलवा.. तू मुझे कड़वी बातें ही सुना.
फरज़ाना- हा हा हा हा जल गए ना.. हा हा हा अच्छा अच्छा मज़ाक कर रही हूँ आप आराम से खा लो, अब नहीं बोलूँगी.
अब्दुल जी मज़े से हलवा खाने लगे और फरज़ाना उनके पास बैठ गई. फिर जब वो खा चुके तो फरज़ाना ने एक और चौका मार दिया.
फरज़ाना- अच्छा एक बात बताओ आप, आज तक अपने शाजिया को इतना सादा रखा.. फिर आज क्या जरूरत आ गई जो आपने उसे इतने मॉर्डन कपड़े दिलाए?
अब्दुल- अब वो बड़ी हो गई है और कॉलेज जाने लगी है. अब दूसरी लड़कियों को देखेगी तो उसका भी मन करेगा ना.. बस इसी लिए.
फरज़ाना- बुरा मत मानना आप लेकिन उन कपड़ों में वो बहुत सेक्सी लगेगी.. सारे लड़के उसे देख कर आहें भरेंगे.
अब्दुल- तुमने फिर बकवास शुरू कर दी ना.
फरज़ाना- नहीं, ये बकवास नहीं है, आप मेरी बात को समझो.. वो बहुत सुन्दर है और उसके शरीर की बनावट भी बहुत अच्छी है. जब वो इतने हॉट कपड़े पहने, तो आप खुद ही देख लेना.
अब्दुल जी को पता था कि फरज़ाना सही कह रही है. आज वो खुद बहक गए थे लेकिन उन्होंने फिलहाल बात को टाल दिया.
अब्दुल- अच्छा अच्छा.. ये ज्ञान बंद कर.. आज लंड में बहुत हलचल मची हुई है.. चल जल्दी कर, इसे शांत करके बाद में अपनी बक-बक कर लेना.
फरज़ाना कुछ बोलती तभी अब्दुल जी का फ़ोन आ गया, ये शॉप से था शायद.. उन्होंने 5 मिनट बात की, फिर थोड़ा टेंशन में आ गए.
अब्दुल- इन्हें भी अभी आना था.. सारा मूड ऑफ कर दिया.
फरज़ाना- क्या हुआ मेरे बलमा जी किसने आपका मूड खराब कर दिया?
अब्दुल- अरे कोई पुराना ग्राहक है.. थोक में माल लेता है, अब जाना ही पड़ेगा.
फरज़ाना- अरे अभी तो बड़े चोदने की बात कर रहे थे.. ऐसे ही जाओगे क्या?
अब्दुल- मन तो बहुत है मगर जाना भी जरूरी है. चल अब कल ही तेरी चुदाई करूँगा.. अभी तो जाता हूँ.
फरज़ाना- शॉप से वापस आ जाना ना.. कभी तो आप रात को मेरे पास रहा करो.
अब्दुल- नहीं फरज़ाना.. अंजुम को पहले ही मुझ पर शक है, अब शाजिया भी समझदार हो गई है. मैं कोई ख़तरा मोल नहीं लेना चाहता. तू सो जाना ओके.. चलता हूँ.
अब्दुल जी वहां से चले गए और शॉप से अपना काम निपटा कर वो घर चले गए.
अब बेचारे सुबह से कड़क लंड लिए घूम रहे थे तो रात को कमरे में गए. अब्दुल जी को बेचैन देख कर अंजुम ने कारण पूछा- क्या हुआ जी.. आप ठीक तो हो ना..? अपने खाना भी नहीं खाया और आज देरी से भी आए, शॉप की कोई समस्या है क्या?
अब्दुल- अरे कुछ नहीं ऐसे ही आज थोड़ा काम ज़्यादा था और कुछ बात नहीं है.
अंजुम- अच्छा ठीक है सो जाओ.. थके हुए हो आपको अच्छी नींद आएगी.
अब्दुल- अच्छा ये बताओ शाजिया सो गई क्या?
अंजुम- जी.. वो कब की सो गई थी.
रुकावट के लिए खेद है.. आपको बता दूँ अब्दुल जी के कमरे में आने के साथ ही शाजिया बाहर कान लगा के खड़ी हो गई थी. रज़िया की कही बात उसे बेचैन कर रही थी, तो वो आज जानना चाहती थी कि उसके अब्बू और मॉम के बीच सब ठीक तो है ना.
अब्दुल- एक बात कहूँ.. आज बड़ा मन है.. बहुत दिन हो गए.
अब्दुल जी आगे कुछ बोल पाते तभी बीच में अंजुम ने उन्हें टोक दिया- आपको कुछ और नहीं सूझता क्या.. जब देखो यही बात, अब लड़की जवान हो गई है.. अब तो अपने आप पर कंट्रोल करो.
अब्दुल- सात साल से कंट्रोल ही तो किए हुए हूँ. पहले तो तुम महीने में 2 या 3 बार ‘हाँ’ कर देती थीं.. आजकल तो महीने के बाद भी तुम्हारी ना ही सुनने को मिलती है.
अंजुम- आपको पता है मुझे शुरू से ये सब पसंद नहीं.. फिर क्यों आप बार-बार एक ही बात दोहराते हो?
अब्दुल- कैसी औरत है तू.. इतनी सुन्दर है, फिगर भी अच्छा है.. मगर तेरे अन्दर सेक्स क्यों नहीं है.. ये बात मेरी समझ के बाहर है.. तू कैसे इतने दिन बिना संसर्ग के निकाल लेती है?
अंजुम- अब अल्लाह ने जैसा बनाया, वैसी ही हूँ और फिर अपने आप से पूछो, शुरू में कैसे मुझे जानवरों की तरह चोदते थे.. बस उसी वजह से मुझे सेक्स से नफ़रत सी हो गई. अब तो बिल्कुल मन नहीं करता.
अब्दुल- तेरे इसी व्यवहार की वजह से हमें दूसरी औलाद नहीं हुई. ये तो मेरी शराफत है, कोई दूसरा होता तो ना जाने क्या करता.
अंजुम- क्या करता.. बाहर मुँह मारता, यही कहना चाहते हो ना.. आपको किसने रोका है.. आप भी मार लो, मिटा दो खानदान का नाम मिट्टी में.. वैसे भी पहले से ही कांड हुआ पड़ा है, आप भी कर दो एक कांड.. क्या फर्क पड़ता है.
अब्दुल- बस मेरी इसी शराफत का तू फायदा उठाती है. तुझे पता है मैं ऐसा कोई काम नहीं करूँगा, जिससे बदनामी हो.
अंजुम- हाँ जानती हूँ और ये भी जानती हूँ कि आप मुझसे बहुत प्यार करते हो, आप कोई ग़लत कम नहीं करोगे.
अब्दुल- इसी लिए तो बोल रहा हूँ.. मान जाओ ना.. बस आज कर लो बहुत दिन हो गए.. फिर एक महीने तक नहीं कहूँगा.
अंजुम- आप बात को समझते क्यों नहीं.. मेरा मन होगा तो बता दूँगी मगर आज नहीं.. अब सो जाओ, रात बहुत हो गई है.
अब्दुल जी बहुत देर तक मिन्नतें करते रहे मगर अंजुम नहीं मानी और आख़िर हार कर अब्दुल जी सो गए मगर बाहर खड़ी शाजिया के दिमाग़ में एक तूफान छोड़ गए.
शाजिया अपने कमरे में आ गई और अपनी अम्मी को कोसने लगी कि कैसे वो अब्बू को तरसा रही है, इसी लिए अब्बू इतने गुस्से वाले हो गए फिर सुबह वाली बात उसे याद आई वो अब्बू का खड़ा लंड उसे याद आया.
शाजिया- तो क्या अब्बू मेरे जिस्म को टच करके बेचैन हो गए थे, तभी आज उनके मन में इतनी वासना आ रही थी. छी:.. मैं भी क्या सोच रही हूँ वो मेरे अब्बू हैं.
शाजिया बहुत देर तक अपने आपसे बातें करती रही, फिर कब उसकी आँख लगी, उसको पता भी नहीं चला.