‘एक ने कहा साले पीछे खड़े होकर बच्ची के मज़े ले रहा था क्या.. फिर दूसरा बोला बड़ा कमीना है, आनंद लिया तो कंट्रोल करता.. अब निकल गया ना..’
शाहिद- हा हा हा बहुत मस्त.. अब आगे से वो ध्यान रखेगा.
शबनम- सुनो तो मामू… बस में हमारी एक मैडम भी होती हैं.. उन्होंने उसे इतना डांटा और उसी टाइम बस रुकवा कर नीचे उतार दिया और उसके पेरेंट्स को उसके साथ लाने को कहा.
शाहिद- बहुत खूब ऐसे कमीने के साथ ऐसा ही होना चाहिए था.
शबनम- सब आपके आइडिया का कमाल है मामू… चलो अब सो जाते हैं.. मुझे नींद आने लगी.
शाहिद- अच्छा सुन वो लड़का अब चिड़चिड़ा हो गया है… उसके पास भी मत जाना.. बात भी मत करना समझी.
शबनम को समझा कर वो दोनों सो गए.
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शाम को शाजिया का दिल बहुत बेचैन था आज की शाहिद की हरकतें उसे बार-बार याद आ रही थीं और दूसरी तरफ़ उसके अब्बू का टेंशन भी उसको सता रहा था. फिर वो रेडी हुई और रज़िया से मिलने जाने लगी, तभी अंजुम ने उसको रोक लिया.
अंजुम- शाजिया बेटा आई एम सॉरी मैंने गुस्से में तुझे डांट दिया तूने कुछ नहीं खाया है.. प्लीज़ कुछ खा लो.
शाजिया- नहीं.. मैं रज़िया के घर जा रही हूँ.. वहीं कुछ खा लूँगी.
अंजुम आगे कुछ बोलती तब तक शाजिया वहां से निकल गई और सीधे रज़िया के घर जा पहुँची. वहां उसकी अम्मी से मिली उनका हाल पूछा, फिर रज़िया के कमरे में गई. रज़िया भी उसी टाइम उठी थी, उसके हाथ में कॉफी और बिस्कुट थे.
रज़िया- अरे आओ.. सही टाइम पे आई.. ले तू भी नाश्ता कर ले.
शाजिया- भूख तो मुझे भी बहुत है.. लाओ दे दो और मेरी कॉफी कहाँ है?
रज़िया- तू बैठ.. तेरे लिए अभी लाती हूँ.
दोनों ने नाश्ता किया. फिर रज़िया ने डोर बंद कर लिया और शाजिया को देखने लगी.
शाजिया- क्या हुआ आपा आप मुझे ऐसे क्यों देख रही हो?
रज़िया- देख रही थी ऐसे तो बहुत नादान बनती है तू मगर आज जो शाहिद के साथ मज़े ले रही थी.. मुँह से एक आवाज़ भी नहीं निकाली.. तूने इतना कैसे कंट्रोल किया?
शाजिया- ओह आपा प्लीज़ चुप रहो ना… वो बात दोबारा याद मत दिलाओ.
रज़िया- क्यों.. फुददी में कुछ कुछ होता है क्या तुझे हा हा हा हा..
शाजिया- हाँ आपा, सच में याक़ूब और शाहिद के साथ करने में बहुत फ़र्क है.
रज़िया- अच्छा तू कहे तो अबकी बार तुझे बिना आँख बंद किए आनंद दिलवा दूँ.
शाजिया- नहीं आपा, प्लीज़ आप शाहिद को कुछ नहीं बताओगी प्लीज़, वरना मैं आपसे कभी भी बात नहीं करूँगी.
रज़िया- अच्छा ठीक है जब तेरा मन हो, बता देना. यही पट्टी वाला खेल दोबारा कर लेंगे और ये बता तुझे लाइव चुदाई देख कर आनंद आया या नहीं?
शाजिया- बहुत आनंद आया आपा.. आपकी चुदाई देख कर तो मैंने दोबारा पानी निकाल दिया था.
रज़िया- चुदाई देख कर इतना एंजाय किया, जिस दिन खुद चुदेगी ना.. तब मेरी जान तुझे और ज़्यादा आनंद आएगा.
शाजिया- हाँ आपा, लगता तो ऐसा ही है.. एमेम मगर..
अचानक शाजिया बोलते-बोलते चुप हो गई.
रज़िया- अरे क्या हुआ बोल ना क्या मगर..?
शाजिया- आपा मेरी फुददी बहुत छोटी है, इसमें इतना बड़ा लंड कभी नहीं जा ही सकता, इसमें बहुत दर्द होगा ना..!
रज़िया- तू एकदम वेबकूफ़ है, दुनिया में कोई ऐसी फुददी नहीं.. जो लंड ना ले सके. अरे मेरी जान ये फुददी दिखती छोटी है.. मगर बड़े से बड़ा लंड खा जाती है. तू जब तक ट्राइ नहीं करेगी, तुझे पता कैसे लगेगा?
शाजिया- आपकी बात सही है मगर अभी नहीं.. जब मुझे लगेगा, मैं आपको बता दूँगी. फिलहाल आप मेरे अब्बू के लिए कुछ बताने वाली थीं.. वो बताओ.
रज़िया- आइडिया तो है यार मगर तू कर पाएगी क्या.. वो सोच रही हूँ.
शाजिया- आप बताओ तो आपा.. मैं अब्बू को खुश देखना चाहती हूँ बस.
रज़िया- देख इसके लिए हमको कोई ऐसी लड़की ढूँढनी होगी जो तेरे अब्बू के साथ सेक्स करने को मान जाए.
शाजिया- ऐसी लड़की अगर मिल भी गई तो अब्बू नहीं मानेंगे ना.
रज़िया- मानेंगे.. जरूर मानेंगे, अगर हम उनकी तड़प को इतना बढ़ा दें कि बिना सेक्स किए वो रह ना पाएं, तो वो मान जाएँगे.
शाजिया- वो कैसे.. मैं कुछ समझी नहीं?
रज़िया- सुन शाहिद ने तुझे फुददी चूस कर आनंद दिया और तुझे इतना तड़पाया.. तू उसके सामने कैसे मजबूर हो गई थी. अगर उस टाइम मैं ना रोकती, तो वो तेरी फुददी में लंड घुसा देता और मुझे पता है कि तू भी उसे नहीं रोक पाती.
शाजिया- हाँ आपा सही है, मैं उस टाइम बहुत गर्म हो गई थी.
रज़िया- बस यही तुझे अपने अब्बू के साथ करना है. उनसे किसी ना किसी बहाने चिपक, तेरे जिस्म की गर्मी उन्हें महसूस करा.. फिर देख वो कैसे तड़पते हैं और जब हमें लगेगा कि अब तेरे अब्बू की बर्दाश्त से बाहर है, हम किसी लड़की को उनके करीब ले आएँगे और वो उसे चोद देंगे.
शाजिया- ये आप क्या बोल रही हो आपा.. मैं कैसे ये सब कर सकती हूँ.. नहीं नहीं मुझसे ये नहीं होगा, ये पाप होगा आपा. वो मेरे अब्बू हैं. नहीं नहीं, मैं ऐसा सोच भी नहीं सकती. आप कुछ और सोचो.
रज़िया- वेबकूफ़ मत बन.. मैं तुम्हें उनके साथ चुदाई के लिए नहीं कह रही.. समझी! अरे आज सुबह जो तू चिपकी वो क्या था हाँ? तूने उन्हें चैक किया ना.. बस वैसे ही करना है और तेरे सिवा ये कोई नहीं कर सकता. तुझे उनकी वासना को भड़काना होगा, तभी वो किसी और के साथ चुदाई करने को राज़ी होंगे. नहीं तो फिर देख ले, ऐसे एक ना एक दिन उनका गुस्सा बढ़ता जाएगा और कुछ भी हो सकता है.
रज़िया की दमदार बातों ने शाजिया को हिला कर रख दिया. वो सोचने लगी कि अगर अब्बू को कुछ हो गया तो क्या होगा.
शाजिया- नहीं आपा प्लीज़ ऐसा मत कहो. मैं कोशिश करूँगी मगर अब्बू मेरे बारे में क्या सोचेंगे.. और मैं कैसे करूँ कुछ भी समझ में नहीं आ रहा?
रज़िया- मैं किस लिए हूँ.. मैं तुझे आइडिया दूँगी कि कैसे तू अपने अब्बू को सिड्यूस करेगी समझी.. बस तुझे ये सब ऐसे करना है जैसे तुझे कुछ पता ही नहीं कि क्या हो रहा है.
शाजिया- थैंक्स आपा, मगर इससे अब्बू कहीं मेरे लिए गंदा सोचने लगे तो?
रज़िया- वो तो उसी दिन उन्होंने सोच लिया, जब पहली बार तेरे चिपकने से उनका लंड खड़ा हुआ था. अब तुझे बस उस आग को भड़काना है, हो सके तो अपने मम्मे भी उनको दिखा देना.. इससे वो जल्दी काबू में आ जाएँगे.
शाजिया- इस्स.. क्या मम्मे भी.. आप क्या बोल रही हो.. ये कैसे होगा और मैं शर्म से मर ना जाऊं.. ऐसा सुनकर मेरी जान निकल गई. नहीं आपा ये मुमकिन नहीं है.
रज़िया- शाजिया एक पुरानी कहावत है कि जब ओखली में सर दे दिया तो मूसल से क्या डरना. अब तू उन्हें सिड्यूस करने निकली है तो मेरी जान ये सब करना होगा.. मगर तुम ऐसे सामने जाकर नंगी मत हो जाना.. हा हा हा नहीं तो सारा मामला बिगड़ जाएगा.
शाजिया- क्या आपा आप भी ना कुछ भी बोल देती हो. अब ठीक से बताओ ना क्या करना है?
रज़िया- अरे मेरी नादान बहन, हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या.. सुन, तू मौका देखना कि अब्बू तेरे कमरे में आ रहे हों, बस उसी टाइम कपड़े बदलने की एक्टिंग करना. उन्हें कुछ तो दिखेगा.. समझी तू ऐसे ही उनकी वासना जागेगी.
शाजिया- वो तो ठीक है आपा मगर क्या मैं ये सब कर पाऊंगी?
रज़िया- ये सब नहीं.. तुझे बहुत कुछ करना होगा. इतने से वो काबू नहीं आने वाले.
रज़िया ने शाजिया को अच्छी तरह से समझाया कि कैसे उसे सब करना है. रज़िया की बातें सुनकर शाजिया के पसीने निकल आए क्योंकि जो काम रज़िया ने बताए थे.. वो आसान नहीं थे.
अब आगे भी बढ़ो यार.. सारी बातें यहीं जान लोगे तो आपको आगे आनंद कैसे आएगा, समझे कुछ..!