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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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जाहिरा ने राबिया के कहे अनुसार चुचों को दबाना शुरू किया. फिर निपल्स भी दबाए. अब दोनों एक-दूसरे को साबुन लगा रही थीं.

राबिया ने जब जाहिरा की फुददी पर साबुन लगाया तो वो सिहर उठी. उसकी देसी फुददी पर किसी और का हाथ पहली बार लगा था.

राबिया ने वहीं बस नहीं किया.. वो फुददी को प्यार से सहलाने लगी और उंगली से उसकी फांकों को खोलने की कोशिश करने लगी.

जाहिरा- आह सस्स आपा.. नहीं दुख़ता है.

राबिया ने फिर कोई हरकत नहीं की और दोनों अच्छे से नहाकर बाहर आ गईं. फिर जाहिरा को नया फ्रॉक और हाफ चड्डी पहना कर राबिया ने खुद उसके बाल संवारे.. उसको बहुत प्यार से रेडी किया. ये सब जाहिरा को बहुत अच्छा लग रहा था. फिर राबिया ने जाहिरा की मदद से खाना बनाया और दोनों ने अच्छे से खाना खाया और राबिया उसे अपने कमरे में साथ ले गई.

राबिया- जाहिरा वो सामने वाला कमरा तेरा है.. मगर रात को तेरे जीजू तो आते नहीं हैं.. इसलिए तू मेरे पास ही सोया कर.

जाहिरा- आपा आप बहुत अच्छी हो.. मैंने सोचा था पता नहीं आप कैसी होगी. मुझे मारेगी या ज़्यादा कम करवाएंगी.. मगर आप तो मेरा इतना ख्याल रख रही हो. इतना तो मेरी अम्मी ने भी शायद ना रखा होगा.

राबिया- अरे बस बस.. तू मेरी इतनी भी तारीफ मत कर. बस मैं जैसे कहूँ, करती जाना. फिर देखना मैं तुझे और ज़्यादा प्यार करूँगी.

जाहिरा- ठीक है आपा.. आप जो भी कहोगी, मैं करूँगी. आप सच में बहुत अच्छी हो.

राबिया- अच्छा जाहिरा तूने कहा था ना तू सर को अच्छा दबाती है.

जाहिरा- हाँ आपा सही है.. आपका सर दबाऊं क्या?

राबिया- अरे नहीं मैं बस पूछ रही हूँ. तू सिर्फ़ सर ही अच्छा दबाती है या हाथ-पाँव भी अच्छे से दबा लेती है?

जाहिरा- हाँ आपा मैं सब अच्छे से दबा देती हूँ. आप एक बार अपना शरीर दबवा कर देखो तो मालूम चलेगा.

राबिया- अच्छा चल ठीक है तू मेरे पैर दबा.. फिर तुझे बताती हूँ तुझे कि तूने कैसे दबाए.

जाहिरा तो बस राबिया की ‘हाँ’ का वेट कर रही थी.. वो फ़ौरन शुरू हो गई और धीमे-धीमे वो राबिया की पिंडलियां दबाने लगी.

राबिया- आह तेरे हाथों में तो सच में जादू है जाहिरा.. अब धीमे-धीमे ऊपर की तरफ़ आ.. मेरी जांघें बहुत दुख रही हैं.

जाहिरा ने अपने हाथ ऊपर की तरफ़ चलाने शुरू किए. अब वो राबिया की जांघें दबा रही थी और राबिया और ऊपर और ऊपर करके उसे फुददी के एकदम पास दबाने को बोल रही थी. अब जाहिरा बेचारी को क्या पता कि ये राबिया की चाल है. आज तो सिर्फ़ ट्रेलर है.. असली फिल्म तो कल से शुरू होगी.

थोड़ी देर ऐसे ही दबवाने के बाद राबिया ने उसे रुकने को कहा और उसे वापस अपने पास लेटा लिया.

राबिया- जाहिरा सच में तूने कमाल कर दिया मगर ये कमाल तुझे कल दिखाना होगा. तेरे जीजू रात भर काम करके थके-हारे घर आते हैं. बस तू अच्छे से उनके पैर दबा कर उनको आराम देना.

जाहिरा- ठीक है आपा.. आप देखना मैं कैसे उनको आराम देती हूँ.

राबिया- अच्छा सुन, वो मना करेंगे मगर तू सिर्फ़ मेरी बात मानना, जैसे मेरे पैर दबाए ना ऊपर तक.. उनके भी ठीक वैसे ही दबाना. उनको पैरों के ऊपर वाले हिस्से में ज़्यादा तकलीफ़ होती है, तो तू ऊपर ज़्यादा दबाना.. ठीक है ना..!

जाहिरा- हाँ आपा ठीक है.. आप चिंता मत करो.. मैं अच्छे से दबा दूँगी.

राबिया ने कुछ देर और जाहिरा को अच्छे से समझाया कि कल उसको क्या करना है.. फिर वो दोनों सो गईं.

फ्रेंड्स इनको सोने दो, हम थोड़ा पीछे जाते हैं. शाम को और भी तो कांड हुए होंगे, उन पर भी हमें नज़र डालनी चाहिए ना.

रज़िया की मस्त चुदाई के बाद जब शाहिद घर पहुँचा तो उसकी अम्मी ने लेट आने की वजह पूछी तो शाहिद ने बहाना बना दिया. फिर लंच करके वो ऊपर गया तो देखा शबनम आराम से लेटी हुई थी.

शाहिद- हैलो माय स्वीट डार्लिंग, क्या तुम सो रही हो?

शबनम- नहीं मामू, मैंने अपना होमवर्क किया है. आप आज देरी से क्यों आए?

शाहिद- अरे दोस्त के साथ था. तू बता क्या हाल है.. रात की चुदाई कैसी लगी तुझे.. तेरा मन भरा या नहीं?

शबनम- नहीं मामू रात को अपने बहुत थका दिया था.. आज नहीं और वैसे भी आज स्कूल में मुझे नींद आ रही थी. अब होमवर्क तो हो गया.. बस अब कोई काम नहीं है.. मैं आराम से सोऊँगी.

शाहिद- चल सो जा, मैं भी थका हुआ हूँ तो मुझे भी अच्छी नींद आएगी.

शबनम- अरे मामू बातों-बातों में मैं आपको एक ज़रूरी बात बताना तो ही भूल गई.

शाहिद- अच्छा वो कौन सी बात है.. ज़रा बता तो..!

शबनम- आज स्कूल जाते टाइम ना उस लड़के ने फिर मेरे पीछे अपना लंड टच किया.

शाहिद- अच्छा तो तूने क्या किया.. मैंने जो बताया था वो किया या नहीं?

शबनम- हाँ मामू मैंने वही किया. रूको आपको शुरू से बताती हूँ.. आनंद आएगा.

शाहिद- चल ठीक है बता?

शबनम- आज ना मैं बस में सबसे लास्ट में थी और वो मेरे पीछे खड़ा था. फिर उसने लंड टच करना शुरू किया तो मैंने भी गांड को पीछे करके उसे इशारा दिया. बस फिर क्या था वो जोर-जोर से लंड रगड़ने लगा. फिर ना मैंने हाथ पीछे करके उसके लंड को पैन्ट के ऊपर से पकड़ लिया और सहलाने लगी.

शाहिद- गुड फिर क्या हुआ?

शबनम- होना क्या था वो एकदम कड़क हो गया. और पता है कमीने ने मेरे चुचों को भी टच किया. मैं जोर-जोर से उसका लंड सहलाती रही. जब कुछ देर बाद उसका लंड एकदम गर्म हो गया और उसकी साँसें तेज हो गईं. आपने कहा था ना.. मैंने वैसे ही जोर-जोर से किया. वो मेरा हाथ हटाने लगा मगर मैंने सहलाना जारी रखा. फिर झट से उसका पानी निकल गया.. मुझे जब हल्का सा अहसास हुआ तो मैंने हाथ हटा लिया. फिर पीछे मुड़कर देखा तो उसकी पैन्ट आगे से गीली हो गई थी और वो बहुत घबरा गया था.

शाहिद- वाउ फिर क्या किया तुमने?

शबनम- करना क्या था.. मैं पीछे मुड़ी और जोर से बोली कि अमित ये क्या किया तुमने.. खड़े खड़े सूसू कर दिया?

बस मेरे कहने की देर थी कि पूरी बस उसी को देखने लगी और सब जोर-जोर से हंसने लगे. सब उस पे कमेंट्स मारने लगे.

शाहिद- बहुत अच्छा किया मगर किसी को पता नहीं लगा कि वो सूसू है या कुछ और?

शबनम- छोटे बच्चों को तो सूसू ही लगा.. मगर जिनको पता था वो समझ गए और उनके कमेंट भी वैसे ही थे.

‘कैसे कमेंट्स थे?’

 
‘एक ने कहा साले पीछे खड़े होकर बच्ची के मज़े ले रहा था क्या.. फिर दूसरा बोला बड़ा कमीना है, आनंद लिया तो कंट्रोल करता.. अब निकल गया ना..’

शाहिद- हा हा हा बहुत मस्त.. अब आगे से वो ध्यान रखेगा.

शबनम- सुनो तो मामू… बस में हमारी एक मैडम भी होती हैं.. उन्होंने उसे इतना डांटा और उसी टाइम बस रुकवा कर नीचे उतार दिया और उसके पेरेंट्स को उसके साथ लाने को कहा.

शाहिद- बहुत खूब ऐसे कमीने के साथ ऐसा ही होना चाहिए था.

शबनम- सब आपके आइडिया का कमाल है मामू… चलो अब सो जाते हैं.. मुझे नींद आने लगी.

शाहिद- अच्छा सुन वो लड़का अब चिड़चिड़ा हो गया है… उसके पास भी मत जाना.. बात भी मत करना समझी.

शबनम को समझा कर वो दोनों सो गए.

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शाम को शाजिया का दिल बहुत बेचैन था आज की शाहिद की हरकतें उसे बार-बार याद आ रही थीं और दूसरी तरफ़ उसके अब्बू का टेंशन भी उसको सता रहा था. फिर वो रेडी हुई और रज़िया से मिलने जाने लगी, तभी अंजुम ने उसको रोक लिया.

अंजुम- शाजिया बेटा आई एम सॉरी मैंने गुस्से में तुझे डांट दिया तूने कुछ नहीं खाया है.. प्लीज़ कुछ खा लो.

शाजिया- नहीं.. मैं रज़िया के घर जा रही हूँ.. वहीं कुछ खा लूँगी.

अंजुम आगे कुछ बोलती तब तक शाजिया वहां से निकल गई और सीधे रज़िया के घर जा पहुँची. वहां उसकी अम्मी से मिली उनका हाल पूछा, फिर रज़िया के कमरे में गई. रज़िया भी उसी टाइम उठी थी, उसके हाथ में कॉफी और बिस्कुट थे.

रज़िया- अरे आओ.. सही टाइम पे आई.. ले तू भी नाश्ता कर ले.

शाजिया- भूख तो मुझे भी बहुत है.. लाओ दे दो और मेरी कॉफी कहाँ है?

रज़िया- तू बैठ.. तेरे लिए अभी लाती हूँ.

दोनों ने नाश्ता किया. फिर रज़िया ने डोर बंद कर लिया और शाजिया को देखने लगी.

शाजिया- क्या हुआ आपा आप मुझे ऐसे क्यों देख रही हो?

रज़िया- देख रही थी ऐसे तो बहुत नादान बनती है तू मगर आज जो शाहिद के साथ मज़े ले रही थी.. मुँह से एक आवाज़ भी नहीं निकाली.. तूने इतना कैसे कंट्रोल किया?

शाजिया- ओह आपा प्लीज़ चुप रहो ना… वो बात दोबारा याद मत दिलाओ.

रज़िया- क्यों.. फुददी में कुछ कुछ होता है क्या तुझे हा हा हा हा..

शाजिया- हाँ आपा, सच में याक़ूब और शाहिद के साथ करने में बहुत फ़र्क है.

रज़िया- अच्छा तू कहे तो अबकी बार तुझे बिना आँख बंद किए आनंद दिलवा दूँ.

शाजिया- नहीं आपा, प्लीज़ आप शाहिद को कुछ नहीं बताओगी प्लीज़, वरना मैं आपसे कभी भी बात नहीं करूँगी.

रज़िया- अच्छा ठीक है जब तेरा मन हो, बता देना. यही पट्टी वाला खेल दोबारा कर लेंगे और ये बता तुझे लाइव चुदाई देख कर आनंद आया या नहीं?

शाजिया- बहुत आनंद आया आपा.. आपकी चुदाई देख कर तो मैंने दोबारा पानी निकाल दिया था.

रज़िया- चुदाई देख कर इतना एंजाय किया, जिस दिन खुद चुदेगी ना.. तब मेरी जान तुझे और ज़्यादा आनंद आएगा.

शाजिया- हाँ आपा, लगता तो ऐसा ही है.. एमेम मगर..

अचानक शाजिया बोलते-बोलते चुप हो गई.

रज़िया- अरे क्या हुआ बोल ना क्या मगर..?

शाजिया- आपा मेरी फुददी बहुत छोटी है, इसमें इतना बड़ा लंड कभी नहीं जा ही सकता, इसमें बहुत दर्द होगा ना..!

रज़िया- तू एकदम वेबकूफ़ है, दुनिया में कोई ऐसी फुददी नहीं.. जो लंड ना ले सके. अरे मेरी जान ये फुददी दिखती छोटी है.. मगर बड़े से बड़ा लंड खा जाती है. तू जब तक ट्राइ नहीं करेगी, तुझे पता कैसे लगेगा?

शाजिया- आपकी बात सही है मगर अभी नहीं.. जब मुझे लगेगा, मैं आपको बता दूँगी. फिलहाल आप मेरे अब्बू के लिए कुछ बताने वाली थीं.. वो बताओ.

रज़िया- आइडिया तो है यार मगर तू कर पाएगी क्या.. वो सोच रही हूँ.

शाजिया- आप बताओ तो आपा.. मैं अब्बू को खुश देखना चाहती हूँ बस.

रज़िया- देख इसके लिए हमको कोई ऐसी लड़की ढूँढनी होगी जो तेरे अब्बू के साथ सेक्स करने को मान जाए.

शाजिया- ऐसी लड़की अगर मिल भी गई तो अब्बू नहीं मानेंगे ना.

रज़िया- मानेंगे.. जरूर मानेंगे, अगर हम उनकी तड़प को इतना बढ़ा दें कि बिना सेक्स किए वो रह ना पाएं, तो वो मान जाएँगे.

शाजिया- वो कैसे.. मैं कुछ समझी नहीं?

रज़िया- सुन शाहिद ने तुझे फुददी चूस कर आनंद दिया और तुझे इतना तड़पाया.. तू उसके सामने कैसे मजबूर हो गई थी. अगर उस टाइम मैं ना रोकती, तो वो तेरी फुददी में लंड घुसा देता और मुझे पता है कि तू भी उसे नहीं रोक पाती.

शाजिया- हाँ आपा सही है, मैं उस टाइम बहुत गर्म हो गई थी.

रज़िया- बस यही तुझे अपने अब्बू के साथ करना है. उनसे किसी ना किसी बहाने चिपक, तेरे जिस्म की गर्मी उन्हें महसूस करा.. फिर देख वो कैसे तड़पते हैं और जब हमें लगेगा कि अब तेरे अब्बू की बर्दाश्त से बाहर है, हम किसी लड़की को उनके करीब ले आएँगे और वो उसे चोद देंगे.

शाजिया- ये आप क्या बोल रही हो आपा.. मैं कैसे ये सब कर सकती हूँ.. नहीं नहीं मुझसे ये नहीं होगा, ये पाप होगा आपा. वो मेरे अब्बू हैं. नहीं नहीं, मैं ऐसा सोच भी नहीं सकती. आप कुछ और सोचो.

रज़िया- वेबकूफ़ मत बन.. मैं तुम्हें उनके साथ चुदाई के लिए नहीं कह रही.. समझी! अरे आज सुबह जो तू चिपकी वो क्या था हाँ? तूने उन्हें चैक किया ना.. बस वैसे ही करना है और तेरे सिवा ये कोई नहीं कर सकता. तुझे उनकी वासना को भड़काना होगा, तभी वो किसी और के साथ चुदाई करने को राज़ी होंगे. नहीं तो फिर देख ले, ऐसे एक ना एक दिन उनका गुस्सा बढ़ता जाएगा और कुछ भी हो सकता है.

रज़िया की दमदार बातों ने शाजिया को हिला कर रख दिया. वो सोचने लगी कि अगर अब्बू को कुछ हो गया तो क्या होगा.

शाजिया- नहीं आपा प्लीज़ ऐसा मत कहो. मैं कोशिश करूँगी मगर अब्बू मेरे बारे में क्या सोचेंगे.. और मैं कैसे करूँ कुछ भी समझ में नहीं आ रहा?

रज़िया- मैं किस लिए हूँ.. मैं तुझे आइडिया दूँगी कि कैसे तू अपने अब्बू को सिड्यूस करेगी समझी.. बस तुझे ये सब ऐसे करना है जैसे तुझे कुछ पता ही नहीं कि क्या हो रहा है.

शाजिया- थैंक्स आपा, मगर इससे अब्बू कहीं मेरे लिए गंदा सोचने लगे तो?

रज़िया- वो तो उसी दिन उन्होंने सोच लिया, जब पहली बार तेरे चिपकने से उनका लंड खड़ा हुआ था. अब तुझे बस उस आग को भड़काना है, हो सके तो अपने मम्मे भी उनको दिखा देना.. इससे वो जल्दी काबू में आ जाएँगे.

शाजिया- इस्स.. क्या मम्मे भी.. आप क्या बोल रही हो.. ये कैसे होगा और मैं शर्म से मर ना जाऊं.. ऐसा सुनकर मेरी जान निकल गई. नहीं आपा ये मुमकिन नहीं है.

रज़िया- शाजिया एक पुरानी कहावत है कि जब ओखली में सर दे दिया तो मूसल से क्या डरना. अब तू उन्हें सिड्यूस करने निकली है तो मेरी जान ये सब करना होगा.. मगर तुम ऐसे सामने जाकर नंगी मत हो जाना.. हा हा हा नहीं तो सारा मामला बिगड़ जाएगा.

शाजिया- क्या आपा आप भी ना कुछ भी बोल देती हो. अब ठीक से बताओ ना क्या करना है?

रज़िया- अरे मेरी नादान बहन, हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या.. सुन, तू मौका देखना कि अब्बू तेरे कमरे में आ रहे हों, बस उसी टाइम कपड़े बदलने की एक्टिंग करना. उन्हें कुछ तो दिखेगा.. समझी तू ऐसे ही उनकी वासना जागेगी.

शाजिया- वो तो ठीक है आपा मगर क्या मैं ये सब कर पाऊंगी?

रज़िया- ये सब नहीं.. तुझे बहुत कुछ करना होगा. इतने से वो काबू नहीं आने वाले.

रज़िया ने शाजिया को अच्छी तरह से समझाया कि कैसे उसे सब करना है. रज़िया की बातें सुनकर शाजिया के पसीने निकल आए क्योंकि जो काम रज़िया ने बताए थे.. वो आसान नहीं थे.

अब आगे भी बढ़ो यार.. सारी बातें यहीं जान लोगे तो आपको आगे आनंद कैसे आएगा, समझे कुछ..!

 
शाजिया- आपा मुझे बहुत डर लग रहा है कहीं कोई गड़बड़ ना हो जाए.

रज़िया- कुछ नहीं होगा.. तू बस मेरी बातों को मानती रहना और हाँ, सबसे पहले तू अपनी मॉम से सुलह कर ले और उनसे प्यार जता.

रज़िया की ये बात शाजिया के समझ में नहीं आई वो बस सवालिया नज़रों से उसकी तरफ़ देखने लगी.

रज़िया- ज़्यादा सोच मत.. मैं बताती हूँ, तू अपनी अम्मी के सुहाग को किसी और लड़की के लिए तैयार कर रही है. अब अगर तू उनसे ऐसे नाराज़ रहेगी तो उनका ज़्यादा ध्यान तुझ पर ही रहेगा और तू कुछ नहीं कर पाएगी. इसी लिए उनसे नॉर्मल हो जा, फिर वो ध्यान नहीं देंगी और तू अपना काम करती रहना.

शाजिया को अब रज़िया की बातें समझ आ गई थीं. सीधी-साधी शाजिया अब नए खेल की शुरूआत करने जा रही थी. आज रज़िया ने शाजिया को वो काम करने को कह दिया था जो शायद एक रांड़ भी ना करती.

अपने ही अब्बू को सिड्यूस करना एक बड़ा काम था. मगर कहते है ना, बुरी संगत में रहोगे तो बुरा ही असर आएगा. अब शाजिया क्या गुल खिलाती है, ये आगे पता लगेगा.

इन दोनों की मीटिंग ख़त्म होने के बाद शाजिया वापस घर चली गई और प्लान के हिसाब से अपनी अम्मी से ठीक से पेश आने लगी.

फ्रेंड्स यहाँ भी अब कुछ बताने को नहीं है, तो चलो रूबी से मिल लेते हैं वैसे भी बहुत फ्रेंड्स की शिकायत है कि मैंने रूबी को कहाँ गायब कर दिया, तो आओ उसी को देखते हैं.

कॉलेज के बाद रूबी अपने घर गई तो उसके अब्बू वहीं थे.

रूबी- अरे अब्बू आप घर पे..! क्या बात है?

फर्नाडिस- अरे कुछ नहीं.. आज थकान थी तो आ गया और वैसे भी तेरी मॉम घर पे नहीं है.. वो शाम को आएगी.

रूबी- क्यों.. कहाँ गई हैं मॉम?

फर्नाडिस- अरे वो उसकी कोई सहेली के घर प्रोग्राम है.. वहीं गई है, शाम तक आ जाएगी. चल जल्दी से फ्रेश हो ज़ा, हम साथ में लंच करते हैं

रूबी- बस 5 मिनट रूको आप.. मैं अभी आई.

रूबी कमरे में गई और उसने जल्दी से अपने सारे कपड़े निकाल दिए.. साथ में ब्रा-पेंटी भी निकाल दी. अब वो एकदम नंगी थी. फिर वो वॉशरूम गई और हाथ-मुँह धोकर फ्रेश हो गई और कमरे में आकर उसने एक पतली सी नाइटी पहन ली और बाहर आ गई. इन कपड़ों में वो बहुत सेक्सी लग रही थी, बिना ब्रा के उसके मम्मे उस नाइटी से साफ दिख रहे थे. वो जब खाने की टेबल पर फर्नाडिस के सामने बैठी तो उसके झुकने से उसके खरबूजे आधे से ज़्यादा बाहर निकल आए.

फर्नाडिस- तू कब सुधरेगी.. कपड़े तो ठीक से पहना कर!

रूबी- ओह अब्बू प्लीज़.. आप भी मॉम की तरह शुरू मत हो जाओ. अब मॉम नहीं हैं, यही सोच कर मैंने ढीले कपड़े पहने हैं ताकि रिलेक्स रहूं और ढेर सारा खाना खाऊं.

फर्नाडिस- अच्छा तुझसे जीतना मेरे बस का नहीं.. चल अब चुपचाप खाना खा.

फ्रेंड्स, आपको मुझपे गुस्सा आ रहा होगा कि ये अब्बू और बेटी के बीच ऐसा क्या है, जो मैं बता नहीं रहा. चलो आज मैं ये किस्सा सुना ही देता हूँ. नहीं तो पता नहीं आप क्या-क्या ख्याली पुलाव पका लोगे.

बात 5 साल पुरानी है. जब रूबी छोटी थी और अपने मॉम-अब्बू की लाड़ली बेटी थी. इनके बीच सब कुछ अच्छा चल रहा था. एक दिन फर्नाडिस के बड़े भाई का फ़ोन आया कि उसका बेटा जोज़फ़ इंडिया आ रहा है, तो बस फर्नाडिस और रोज़ी खुश थे कि पहली बार उनके घर जोज़फ़ आ रहा है.

शाम को जोज़फ़ जब आया तो सब बहुत खुश थे. वैसे आपको बता दूँ कि जोज़फ़ 23 साल का नौजवान लड़का था.. उसकी 5 फुट 8 इंच की हाईट थी और मस्त बॉडी थी. उसको इंडिया से बहुत लगाव था इसलिए वो अपने अब्बू से ज़िद करके इंडिया पढ़ने आ गया था. चलो अब आगे का हाल देखो.

रूबी उस टाइम खिलती कली थी और वो बहुत चंचल भी थी. जोज़फ़ के आने से वो खुश थी.

कुछ दिन सब नॉर्मल चला. फर्नाडिस और रोज़ी अब जोज़फ़ के आ जाने से बहुत खुश थे और रूबी भी स्कूल से आकर बस जोज़फ़ के साथ ही ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताती थी, भाई-भाई की रट लगाती रहती और नई-नई फरमाइशें करती.

एक महीने में जोज़फ़ घर का सदस्य बन गया. अब फर्नाडिस और रोज़ी भी बाहर चले जाते, उन्हें अब रूबी की टेंशन नहीं थी क्योंकि जोज़फ़ उसका अच्छे से ख्याल रखता था.

एक बार रूबी स्कूल से आई और अपने कमरे में कपड़े बदलने चली गई. उसने एक ग़लती कर दी.. डोर बंद नहीं किया और ऐसे ही स्कूल ड्रेस को निकाल लिया. उसी टाइम जोज़फ़ वहां से गुजरा और उसकी नज़र जब रूबी पर गई, वो एकदम नंगी थी. उसके छोटे छोटे मम्मे और कसी हुई फुददी देख कर उसका लंड झटके खाने लगा.

सुबह तक वो रूबी को बहन मानता था मगर अब उसी को चोदने का सोचने लगा. उसके दिमाग़ में वासना ने घर कर लिया. जब रूबी ने कपड़े बदल लिए वो वहां से चला गया और सोचने लगा कि रूबी इतनी भी छोटी नहीं है. वो तो एकदम मस्त माल है, इसके तो मज़े लेने चाहिए.

जोज़फ़ अब सारा दिन यही सोचता रहता कि कैसे इसे पटाऊं और इसकी कमसिन जवानी को मसलूँ.

वैसे तो रूबी सारा दिन उसके साथ ही रहती थी, खेलती थी.. मगर जोज़फ़ को इतना मौका नहीं मिल रहा था कि वो कुछ कर सके.

रूबी की एक आदत थी जो उसकी अम्मी को बिल्कुल पसंद नहीं थी. वो लॉलीपॉप की बहुत शौक़ीन थी. जब भी उसे मौका मिलता.. वो बस लॉलीपॉप चूसने लगती और यही बात जोज़फ़ को उसका दीवाना कर गई. जोज़फ़ ने सोचा ये लॉलीपॉप को ऐसे चूसती है तो लंड कैसे चूसेगी. फिर उसने एक प्लान किया और बाजार से कुछ जरूरी चीजें लाकर अपने बैग में रख दीं.

दूसरे दिन रूबी के मॉम-अब्बू घर में नहीं थे तो उसने सोचा आज अपने प्लान को अंजाम देने का मौका अच्छा है.

जोज़फ़- रूबी इधर आओ.. तुम सारा दिन ये क्या चूसती रहती हो?

रूबी- भाई ये लॉलीपॉप है और ये मेरी फेवरिट है.. इसको चूसे बिना मुझे आनंद नहीं आता है.

जोज़फ़- अच्छा ये बात है मगर ये छोटी सी लॉलीपॉप क्या चूसती हो.. अमेरिका में तो ये बड़ी-बड़ी और मोटी लॉलीपॉप होती हैं, अलग-अलग फ्लवर्स की.. मैं कुछ अपने साथ लाया भी हूँ, मगर अभी तक तुझे दी नहीं.

रूबी- रियली भाई.. प्लीज़ मुझे दे दो ना प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़.. मुझे वो बड़ी वाली लॉलीपॉप चूसनी है, उसका टेस्ट कैसा होगा उम्म्म.. सोच कर ही मुँह में पानी आने लगा है.

जोज़फ़- अच्छा तो तुझे बड़ी वाली लॉलीपॉप चूसनी है.. मगर उसके लिए मेरी 2 शर्त हैं

रूबी- कैसी शर्त भाई.. आप बस जल्दी बोलो.

जोज़फ़- देखो बेबी तुम्हारी मॉम को तुम्हारा सारा दिन लॉलीपॉप चूसना पसंद नहीं. अब उनको पता लगेगा कि मैंने तुम्हें बड़ी वाली लॉलीपॉप दी है, तो वो नाराज़ हो जाएंगी इसलिए तू ये बात किसी को नहीं बताएगी.. तू पहले मुझसे ये वादा कर.

रूबी- ओके भाई.. मैं आपसे पक्का वादा करती हूँ. ये बात हम दोनों के सिवा किसी को भी पता नहीं लगने दूँगी. बस.. और अब दूसरी शर्त क्या है?

जोज़फ़- दूसरी शर्त ये है कि तेरे हाथ बँधे होंगे और तेरी आँखें भी बंद होगी. तू मेरे हाथ से बड़ी लॉलीपॉप चूसना, तू उसे देख भी नहीं सकती है ओके..!

रूबी- भाई ये क्या शर्त है ऐसे मुझे आनंद कैसे आएगा.. नहीं नहीं प्लीज़ ऐसा मत कहो आप.. मैं अपने हाथ से पकड़ कर ही लॉलीपॉप चूसूंगी ना.

जोज़फ़- नहीं ये शर्त तुम्हें माननी होगी. नहीं तो जाने दो, चूसो अपनी ये छोटी वाली लॉलीपॉप.. मैं चला अपने कमरे में.

जोज़फ़ वहां से चला गया और रूबी भी उसके पीछे-पीछे आ गई.

जोज़फ़- क्या हुआ क्यों आई हो मेरे पीछे?

रूबी- अच्छा भाई आप जैसा कहोगे.. मैं कर लूँगी प्लीज़ मुझे बड़ी वाली लॉलीपॉप चूसना है.. उसका टेस्ट कैसा है.. ये देखना है.

जोज़फ़- ओके तो चलो ये चेयर पर बैठ जाओ.. पहले तुम्हारे हाथ और आँख बंद करता हूँ, फिर तुझे आनंद देता हूँ.

रूबी तो लालच में थी, उसे क्या पता था कि जोज़फ़ उसे क्या चुसवाएगा. उसने जोज़फ़ की बात मान ली और बैठ गई.

 
जोज़फ़ ने अच्छे से रूबी के हाथ बांधे और आँख पर पट्टी लगा दी. फिर अपना लंड पेंट से बाहर निकाल लिया और साथ ही अपने बैग से एक ड्रॉप्स वाली बोतल भी निकाली, जिसमें पाइनॅएपल का रस था.

रूबी के नर्म होंठ लंड पर लगेंगे, ये सोच कर ही उसका लंड खड़ा हो गया था. फिर जोज़फ़ ने सुपारे पर अच्छे से रस लगाया और रूबी के एकदम पास जाकर खड़ा हो गया.

जोज़फ़- बेबी मुँह खोलो और हाँ ये अलग किस्म की लॉलीपॉप है.. इस पर दाँत मत टच करना. ये यहाँ की जैसी नहीं है.. समझ गई ना तुम! वरना फिर दोबारा नहीं चूसने दूँगा.

रूबी- ठीक है भाई.. अब दे दो ना.. देखो मैंने कब से चूसने के लिए मुँह खोला हुआ है.

रूबी ने अपना मुँह खोल लिया था. अब जोज़फ़ कहाँ पीछे रहने वाला था, उसने धीमे से सुपारा उसके होंठों को टच किया.

रूबी ने जीभ निकाल कर उसको चाटा और उसका टेस्ट उसको बहुत अच्छा लगा.

रूबी- उम्म्म वाउ भाई ये तो पाइनॅएपल फ्लेवर है.. मेरे मुँह में पूरी दो ना.. मुझे इसको अच्छे से चूसना है.

जोज़फ़ ने धीमे से लंड उसके मुँह में पेल दिया और वो मज़े से लंड को चूसने लगी. वैसे उसकी मोटाई से उसको दिक्कत हो रही थी मगर स्वाद के मारे वो चूस रही थी. जोज़फ़ भी पक्का खिलाड़ी था वो ड्रॉप से बार-बार लंड पर रस डाल रहा था ताकि रूबी को किसी तरह का शक ना हो.

रूबी- उम्म्म भाई मस्त है.. मगर ये लॉलीपॉप बहुत मोटी और बड़ी है मुँह में ठीक से जा नहीं रही.

जोज़फ़- मोटी है मगर मजेदार भी है, चल अबकी बार तू बस इसे मुँह में लेकर होंठ से दबा लेना. मैं इसे अन्दर-बाहर करूँगा तो तुझे ज़्यादा आनंद आएगा.

रूबी ने बात मान ली तो जोज़फ़ अब उसके मुँह को चोदने लगा और उसका पानी निकलने वाला था. एक बार तो उसने सोचा इसके मुँह में ही धार मार दूँ, फिर सोचा नहीं इससे काम बिगड़ जाएगा और उसने जल्दी से लंड बाहर निकाल लिया. लंड का सारा वीर्य ज़मीन पे गिर गया.

रूबी- अरे क्या हुआ भाई आनंद आ रहा था.. निकाल क्यों लिया आपने?

जोज़फ़ ने जल्दी से लंड अन्दर किया और रुमाल से वीर्य साफ कर दिया. फिर रूबी को खोल दिया और उसके पास खड़ा रहा.

रूबी अपने होंठों पे जीभ घुमा कर जोज़फ़ को देख रही थी.

रूबी- भाई कितना आनंद आ रहा था.. आपने निकाल क्यों ली और चूसने देते ना.

जोज़फ़- नहीं अभी बस टेस्ट के लिए था. बाकी रात को चूसना और हाँ इसमें एक ट्विस्ट भी है, जो तुझे रात को बताऊंगा.

रूबी- कैसा ट्विस्ट भाई.. अभी बताओ ना.. प्लीज़ और मुझे वो लॉलीपॉप देखनी भी है. अब तो आप दिखा दो प्लीज़!

जोज़फ़- बोला ना, अभी नहीं रात को बताऊंगा.

रूबी- अच्छा ठीक है मगर भाई एक बात बताओ.. पाइनॅएपल के टेस्ट के साथ कुछ नमकीन सा स्वाद भी मुझे लगा वो कैसे?

जोज़फ़- ओह तो तूने ये गौर कर ही लिया, यही तो ट्विस्ट है. चल तुझे बता देता हूँ. ये अलग किस्म की लॉलीपॉप है इसको चूसते रहो, फिर लास्ट में इसका फ्लेवर चेंज हो जाता है और ढेर सारा रस एक साथ निकलता है जो नमकीन होता है.. मगर बहुत अच्छा होता है.

रूबी- वाउ ये तो बहुत मस्त चीज है. प्लीज़ भाई मुझे वो ट्विस्ट दिखाओ ना.. एक साथ बहुत सारा रस.. वाउ आनंद आएगा.

जोज़फ़- हाँ रात को पक्का तुझे उसका स्वाद चखा दूँगा मगर ये बात हम दोनों के सिवा किसी को भी पता नहीं लगनी चाहिए.

रूबी- अरे मैंने प्रोमिस किया ना, मैं किसी को नहीं बताऊंगी.. पक्का..!

जोज़फ़ को यकीन हो गया था कि अब ये किसी को कुछ नहीं बताएगी और फिर वो बाहर चला गया. रात को सबने साथ डिनर किया.

एक बात आपको बताना भूल गई कि जोज़फ़ के आने के बाद रूबी की पढ़ाई अच्छी हो गई थी क्योंकि वो उसकी मदद करता था और अक्सर उसे रात को या शाम को पढ़ाया करता था.

आज भी पढ़ाई के बहाने जोज़फ़ उसे अपने कमरे में ले आया और जब उसके मॉम-अब्बू सो गए, तो उसने वही सुबह वाला खेल शुरू कर दिया.

रूबी- भाई प्लीज़ अब बार-बार ऐसे मत बांधो ना.. मुझे लॉलीपॉप देखनी भी है.

जोज़फ़- देख कुछ दिन तू ऐसे ही आनंद ले. फिर अगले हफ्ते जब तेरे मॉम-अब्बू शादी में केरल जाएँगे ना.. तब तुझे हाथ में देकर कहूँगा कि ले अब जितना मर्ज़ी चूस इसको.

जोज़फ़ को पता था कुछ दिनों बाद रूबी के पेरेंट्स शादी में जाने वाले हैं और रूबी को सफ़र जमता नहीं है, तो वो नहीं जाएगी. बस इसी लिए उसने रूबी को ये बात कही और रूबी भी ये बात जानती थी तो उसने भी ‘हाँ’ कह दी.

रूबी- अच्छा ठीक है.. तब दिखा देना मगर अभी तो चूसने दो और हाँ अबकी बार लास्ट तक चुसवाना मुझे ढेर सारा रस पीना है.. उम्म्म आनंद आएगा.

जोज़फ़- ठीक है मेरी जान अभी कौन सा फ्लेवर चूसना है ये बता दे मुझे.

रूबी- ओह यानि आपके पास अलग अलग फ्लवर्स की लॉलीपॉप हैं.. वाउ भाई आनंद आएगा. ऐसा करो आप ऑरेंज की लाओ.

 
जोज़फ़ ने फिर वैसे ही अपने लंड पे रस लगाया और रूबी के मुँह में लंड घुसा दिया. अब रूबी मज़े से लंड को चूस रही थी और जोज़फ़ उसके मुँह को चोद रहा था.

रूबी- उम्म्म आह भाई ये नमकीन वाला फ्लेवर भी मस्त है. सिर्फ़ यही लॉलीपॉप है क्या.. और ऐसी कोई नहीं है?

जोज़फ़- हाँ बेबी है ना.. अभी लाता हूँ उसमें तुझे और ज़्यादा आनंद आएगा.

जोज़फ़ ने लंड को साफ किया और फिर रूबी को चूसने के लिए कहा. अब कोई रस नहीं था. रूबी सीधे लंड को चूस रही थी और आनंद ले रही थी.

जोज़फ़ जब झड़ने के करीब हुआ तो उसने रूबी का सर पकड़ा और उसके मुँह को चोदने लगा.

जोज़फ़- हाँ ऐसे ही फास्ट चूस.. आह.. ढेर सारा रस आने वाला है.. गुड चूस आह ऐसे ही.

रूबी भी रस के चक्कर में लंड को कस कर चूसने लगी और फिर जो वीर्य की धार उसके गले में गई. एक बार तो वो हड़बड़ा गई मगर फिर उसने सारा रस गटक लिया और जब रस ख़त्म हो गया तो लंड को अच्छे से चूस कर साफ कर दिया. उसने लंड से आखिरी बूंद तक निचोड़ कर चूस ली.

जोज़फ़ जब शांत हो गया.. उसने जल्दी से लंड बाहर निकाल लिया और फिर रूबी को खोल दिया.

रूबी- वाउ भाई ये रस तो बहुत ही मस्त स्वाद वाला था और अलग भी.. मैंने आज तक ऐसा रस नहीं चखा था. वैसे ये कौन सा फ्लेवर था?

जोज़फ़- यही तो सरप्राइज है.. जब इसका सही टाइम आएगा, मैं तुझे बता दूँगा तब तक बस तू ऐसे ही अलग-अलग फ्लेवर्स का आनंद लेती रहना.

फ्रेंड्स ये सिलसिला अब शुरू हो गया था जोज़फ़ को जब भी मौका मिलता, वो रूबी को लंड चुसा देता और रूबी भी उसके लंड चूसने की आदी हो गई. उसको वीर्य पीना अच्छा लगने लगा था. वो अलग बात है कि वो उसको लॉलीपॉप समझ कर चूसती थी.

तय कार्यक्रम के अनुसार फर्नाडिस और रोज़ी किसी शादी से शहर से बाहर गए, आपको याद है ना मैंने बताया था उनको शादी में केरल जाना था. बस वो चले गए, रूबी की स्कूल की छुट्टी थी.. वो उसे भी लेकर जाना चाहते थे मगर रूबी नहीं गई. वो जोज़फ़ के पास घर पर रुक गई और जोज़फ़ इसी दिन का तो इंतजार कर रहा था कि कब वो लोग जाएं और वो रूबी को चोद दे.

जोज़फ़ और रूबी घर पर अकेले थे तो शाम को जोरों की बारिश शुरू हो गई.

रूबी- वाउ भाई बारिश आ गई.. चलो भीग कर नहाते हैं, आनंद आएगा.

जोज़फ़- हाँ चलो, ऐसे नहाए हुए मुझे भी बरसों हो गए.

रूबी- क्यों भाई आपके वहां बारिश नहीं होती है क्या.. जो आप इतने साल नहीं नहाए?

जोज़फ़- अरे होती क्यों नहीं.. मगर अपने देश की बात ही अलग है. ऐसे वहां खुल कर कौन आनंद लेता है. अब बातें जाने दो चलो हम दोनों नहाने का आनंद लेते है.

दोनों बारिश का आनंद लेने लगे. कभी रूबी कीचड़ में जोर से पैर मारती और जोज़फ़ को गंदा करती, तो कभी जोज़फ़ ऐसा करता.

रूबी ने सफेद टीशर्ट और हाफ कॅप्री पहनी हुई थी. अब वो ब्रा तो पहनती नहीं थी, उस टाइम उसके मम्मे भी बड़े वाले संतरे जितने होंगे. उधर जोज़फ़ भी सिर्फ़ बरमूडा में था.

अब बारिश का पानी अपना असर दिखाने लगा था. रूबी की टी-शर्ट भीग कर उसके जिस्म से चिपक गई थी. उसके मम्मे साफ-साफ दिखने लगे थे. जब जोज़फ़ की नज़र उन पर पड़ी, तो उसका लंड हिचकोले खाने लगा.

पहले तो जोज़फ़ ने इग्नोर किया मगर सामने कच्ची कली और बारिश का मौसम, वो ठंडी हवाएं.. अच्छे अच्छों का ईमान बिगाड़ दें, फिर जोज़फ़ क्या चीज था.

जोज़फ़ ने रूबी को पकड़ने के बहाने से उसके चुचों को टच किया. उफ़ ये क्या उसके लंड का तनाव तो ऐसे बढ़ गया जैसे किसी स्प्रिंग को दबा कर अचानक छोड़ दिया हो.

रूबी- भाई कितना आनंद आ रहा है ना ऐसे नहाने में… चलो ना कोई गेम खेलते हैं.

रूबी ने तो जोज़फ़ के मुँह की बात छीन ली, वो भी कुछ ऐसा ही सोच रहा था.

जोज़फ़- हाँ सही कहा.. बहुत आनंद आ रहा है.. हम दोनों कीचड़ में कुश्ती करते हैं.. बहुत आनंद आएगा.

रूबी- आप तो इतने बड़े हो, मैं आपसे हार जाऊंगी.

जोज़फ़- अरे बाबा हम कोई जीतने हारने के लिए थोड़ी खेल रहे हैं.. बस मस्ती करने के लिए खेल रहे है, बहुत आनंद आएगा.

रूबी- तब ठीक है भाई चलो करते हैं.. आनंद आएगा.

दोनों का खेल शुरू हो गया जोज़फ़ किसी ना किसी बहाने रूबी के चुचों को टच करने लगा, कभी उसके ऊपर आ जाता और अपने लंड को उसकी फुददी पे रगड़ देता.

करीब 15 मिनट तक ये खेल चलता रहा और इस दौरान जोज़फ़ ने रूबी के खूब मज़े लिए. उसका लंड एकदम टाइट हो गया था.

जोज़फ़- बस अब बहुत नहा लिए.. चलो अन्दर चलते हैं, साफ पानी से नहा कर फ्रेश हो जाते हैं.

रूबी- हाँ भाई, अब तो ठंड भी लगने लगी.

जोज़फ़ बुदबुदाया- तुझे ठंड लग रही है और मेरे जिस्म में आग लगी हुई है.

ये बात जोज़फ़ ने धीमे से कही थी.

रूबी- आपने कुछ कहा भाई?

जोज़फ़- अरे नहीं, चलो अब.. नहीं तुझे ठंड लग जाएगी और बीमार हो जाओगी.

 
दोनों अन्दर चले गए रूबी अपनी मॉम के रूम वाले बाथरूम में चली गई और जोज़फ़ बाहर कॉमन बाथरूम में चला गया. वहां उसने रूबी के नाम की मुठ मारनी शुरू की. उसका 6.5″ का लंड एकदम तना हुआ था और वो उसे जोर-जोर से हिलाने लगा.

जोज़फ़- आह रूबी.. साली तू कितनी हॉट है.. उफ़ सस्स आज तूने मुझे वेबकूफ़ बना दिया है, आह लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा.. आह अब तो तेरी फुददी मरने का कोई जुगाड़ लगाना ही होगा.. आह सस्स एयेए.

जोज़फ़ का पानी निकल चुका था. उसका लंड भले ही शांत हो गया था मगर उसकी वासना शांत नहीं हुई थी.

थोड़ी देर बाद रूबी बाहर आई, उसने पिंक टी-शर्ट और ब्लेक कॅप्री पहनी हुई थी. वो एकदम बार्बीडॉल जैसी लग रही थी.

रूबी के हाथ में लॉलीपॉप था वो उसे मज़े से चूस रही थी.

जोज़फ़ सोफे पर बैठा उसे देख कर ठंडी आहें भर रहा था. उसे ऐसा लग रहा था जैसे रूबी उसके लंड को चूस रही हो.

जोज़फ़ मन में बोला कि बस मेरी जान बहुत हो गया ये चूसना.. अब आज मुझे तेरी फुददी को फाड़ कर ही सुकून आएगा.

थोड़ी देर वो सोचता रहा कि कैसे वो इस कली को निचोड़ कर इसका रस निकाले. बस फिर उसको एक आइडिया आया.

रात को दोनों ने खाना खाया, फिर जोज़फ़ ने रूबी को एक गोली दी और उसे खाने को कहा.

रूबी- ये किस लिए भाई.. मुझे क्या हुआ है जो आप गोली दे रहे हो?

जोज़फ़- अरे बेबी तुम बारिश में भीगी थी. अब कहीं बुखार ना हो जाए इसलिए ले लो, मैंने भी ली है और चुपचाप सो जाओ समझी.

रूबी- ओह भाई आप कितने अच्छे हो.. मेरा कितना ख्याल रखते हो.

जोज़फ़- अच्छा अब तू सो जा, मैं थोड़ी देर बाद सोऊंगा और घबराना मत मैं यहीं हूँ.

रूबी बेचारी क्या जाने कि उसका भाई उसे किस इरादे से गोली दे रहा है. उसने दवा खा ली और बिस्तर पे सो गई.

रात को करीब 11 बजे रूबी एकदम गहरी नींद में थी और जोज़फ़ बियर की बोतल पीकर उसके पास आकर बैठ गया.

जोज़फ़- बेबी सो गई क्या.. हैलो सुनो तो..!

जोज़फ़ ने रूबी को हिलाया-डुलाया मगर वो गहरी नींद में सोई रही.

जोज़फ़- लगता है नींद की दवा असर कर गई. अब मैं खुलकर इस कली को मसल सकता हूँ.

जोज़फ़ ने रूबी की टी-शर्ट उतार दी, उसके सामने उसकी नारंगियां उछलते हुए आ गईं. मैंने पहले ही बताया था कि रूबी के मम्मे एकदम गोल थे. उनका साइज़ तो पता नहीं.. मगर गोल-गोल संतरे जैसे थे और उन पे छोटे से निपल्स बड़े लुभावने लग रहे थे.

फिर जोज़फ़ ने उसकी कॅप्री भी निकाल दी. अन्दर नजारा बड़ा मस्त था. रूबी की फुददी एकदम चिकनी और चिपकी हुई थी. अब इससे ज़्यादा क्या बताऊं.. बस कुल मिलाकर वो एक कली थी, जिसे चोद कर जोज़फ़ खिलता गुलाब बनाना चाहता था.

जोज़फ़- वाउ रूबी बेबी.. तू तो ऊपर से नीचे तक आग है आग.. तेरी इस जवानी को तो तेरा ये भाई ऐसे मसलेगा, ऐसे मसलेगा कि तू सारी जिंदगी मुझे याद करेगी.

जोज़फ़ एकदम नंगा हो गया और रूबी पे टूट पड़ा. वो उसके चुचों को दबाने और चूसने लगा. उसके जिस्म को काटने लगा जैसे बरसों का कोई भूखा कुत्ता हो.

रूबी गहरी नींद में थी या ऐसा कहो नींद की दवा के असर से बेसुध पड़ी थी मगर उसके नाज़ुक जिस्म के साथ जोज़फ़ जो वासना का गंदा खेल शुरू कर चुका था, उससे वो तड़पने लगी थी. नींद में भी उसकी दर्द भरी सिसकियाँ निकलने लगी थीं.

जोज़फ़ अपने काम में लगा हुआ था, उसका लंड अब बहुत टाइट हो गया था. अब वो रूबी की फुददी को जीभ से कुरेद रहा था पूरे भगनासे को मुँह में लेकर चूस रहा था.

रूबी- आआ आह ससस्स उउउ उम्म एयेए..

रूबी के दर्द की उस जालिम को कहाँ कुछ परवाह थी, वो तो बस मज़े लेने में लगा हुआ था. फिर वो उठा और अपना लंड फुददी पे रगड़ने लगा. उसने उंगली से फुददी को फैलाया और सुपारा उसमें घुसाने की सोचने लगा. मगर फुददी बहुत टाइट थी और दर्द की वजह से रूबी नींद में भी चीख पड़ी.

जोज़फ़- ओह शिट.. ये मुझे क्या हो गया अभी गड़बड़ हो जाती. ये एकदम कुँवारी है और मैं नशे में इसकी फुददी फाड़ने चला था.. सुबह पता नहीं क्या होता. मगर ये लंड का क्या करूँ साला अकड़ा हुआ है.. काश ये चूस कर इसे ठंडा कर देती, मगर ये साली तो मज़े से सोई हुई है.

जोज़फ़ अपने आप से बातें कर रहा था. तभी उसे याद आया कि वो लॉलीपॉप चूसने की बहुत आदी है क्यों ना इसको लंड चुसा कर देखूँ, क्या पता नींद में भी आनंद दे दे.

 
जोज़फ़ जल्दी से उठा और रूबी की एक लॉलीपॉप ले आया, फिर उसके मुँह में लॉलीपॉप दिया और जैसा उसने सोचा था, वही हुआ. रूबी नींद में भी मुँह चलाने लगी.

जोज़फ़- गुड बेबी अब तू मेरा लंड चूस कर आनंद दे सकती है.

जोज़फ़ ने जल्दी से लॉलीपॉप निकाली और अपना लंड उसके मुँह में घुसा दिया. वो सुपारे को अच्छे से चूसने लगी. मगर जब उसको टेस्ट अच्छा नहीं लगा, उसने करवट मार ली.

जोज़फ़ भी कहाँ मानने वाला था. उसने फिर लॉलीपॉप उसको दी और वो फिर शुरू हो गई. अब जोज़फ़ को आइडिया मिल गया वो कभी उसको लंड चुसवाता, कभी लॉलीपॉप.. बस ऐसे ही वो चरम पर पहुँच गया और जब उसका वीर्य निकलने लगा तो उसने लंड को बाहर निकाला और जोर-जोर से हिलाया तो सारा वीर्य रूबी के पेट पर गिर गया. अब जोज़फ़ शांत हो गया था.

जोज़फ़ ने रूबी के पेट से पानी साफ किया, उसको कपड़े पहनाए और सुकून की नींद सो गया.

सुबह जब रूबी उठी तो उसके चुचों में दर्द था और होगा भी क्यों नहीं.. रात को जोज़फ़ पागलों की तरह उन्हें दबा रहा था. उधर नींद की दवा का असर अभी भी था तो उसका सर भी भारी हो रहा था. वो उठी और बाथरूम में चली गई, वहां उसने सोचा नहा लेगी तो ठीक हो जाएगी. जब उसने अपने कपड़े निकाले और अपने जिस्म पर लाल निशान देखे जो रात को जोज़फ़ ने चूस कर बनाए थे, तो वो डर गई और जल्दी से कपड़े पहन कर बाहर आ गई.

रूबी- भाई कहाँ हो आप.. भाई बोलो ना.

रूबी एकदम घबरा गई और जोज़फ़ को ढूँढने लगी, उस टाइम जोज़फ़ किचन में नाश्ता बना रहा था.

जोज़फ़- अरे यहाँ हूँ.. तुम्हारे लिए नाश्ता बना रहा हूँ.. क्या हुआ है?

रूबी भागती हुई जोज़फ़ के पास आई और उससे आकर लिपट कर रोने लगी.

जोज़फ़- अरे क्या हुआ कुछ बोल तो?

रूबी- उउउ उउउ भाई एमेम में अभी नहाने गई तो उउउ मेरे जगह-जगह लाल निशान हैं.. उउउ अयू और मेरा सीना भी बहुत दुख रहा है.. अब मैं मर जाऊंगी.

रूबी की बात सुनकर जोज़फ़ का माथा ठनका. उसे अपनी करनी पर पछतावा हुआ, रात की सारी घटना उसे याद आ गई.

जोज़फ़- अरे रूबी बेबी पहले तू चुप हो ज़ा.. कुछ नहीं हुआ है तुम्हें, ऐसे ही किसी मच्छर ने काटा होगा.

जोज़फ़ की बात सुनकर रूबी ने टी-शर्ट थोड़ी नीचे की और अपने गले से नीचे निशान दिखाया, वो एकदम लाल था.

रूबी- ये देखो भाई आप.. मच्छर ऐसे काटेगा क्या? और भी बहुत निशान हैं. अब मैं नहीं बचूंगी.. मैं मर जाऊंगी.

जोज़फ़- अरे शायद वो दवा गड़बड़ कर गई. तू फिकर मत कर कुछ नहीं होगा तुझे.. और ये क्या मरने की रट लगा रखी है?

रूबी- मेरे स्कूल की एक लड़की को ऐसे रिएक्शन हो गया था और वो मर गई थी.

जोज़फ़- कुछ नहीं होगा तुझे.. ये कोई रिएक्शन नहीं है, बस दवा गर्म कर गई. चल तू पहले नहा ले, फिर मैं तेरे सारे निशान मिटा दूँगा ओके.

रूबी- भाई आप सच बोल रहे हो ना.. मुझे कुछ नहीं होगा ना..?

जोज़फ़- हाँ मेरी बेबी तेरी कसम.. तुझे कुछ नहीं होगा. अब जा, नहा ले ओके.

रूबी चली गई और जोज़फ़ वहीं खड़ा बड़बड़ाने लगा- सॉरी रूबी रात को मैं बहक गया था मगर अब तू टेंशन मत ले तेरे निशान ही मुझे तेरी फुददी तक लेकर जाएँगे.

नहाने के बाद दोनों ने नाश्ता किया. रूबी अब भी टेंशन में थी, नहाने के बाद उसने एक लोंग फ्रॉक पहना था और नीचे सिर्फ़ चड्डी थी.

जोज़फ़- बेबी कूल यार.. ऐसे उदास मत बैठो.. कुछ नहीं हुआ तुम्हें, सब ठीक है.

रूबी- भाई कुछ ठीक नहीं है. मेरे सीने में भी बहुत दर्द हो रहा है और वो निशान भी तो हैं. आप मॉम-अब्बू को कॉल करो.. मुझे बहुत डर लग रहा है.

कॉल की बात सुनकर जोज़फ़ घबरा गया मगर वो शातिर दिमाग़ का था. उसने बात को संभाल लिया और रूबी को पटा भी लिया- तत..तू वेबकूफ़ हो गई है क्या.. ये बात उनको पता लगेगी तो वो तुझे बहुत डांटेंगे, बोलेंगे तू बारिश में नहाई ही क्यों और क्या पता तेरी लॉलीपॉप ही बंद कर दें.

रूबी- भाई ये आप क्या बोल रहे हो.. इस बात का मेरी लॉलीपॉप से क्या लेना-देना?

जोज़फ़- तू बच्ची है.. तुझे नहीं पता लॉलीपॉप के लिए तुझे मॉम मना करती हैं ना.. बस उनको बहाना मिल जाएगा. तू डर मत, मैं हूँ तो उनको क्यों कॉल करना.. तुझे मैं ही ठीक कर दूँगा.

रूबी- अच्छा ठीक है भाई, अब आपको जो करना है वो करो.. मगर प्लीज़ जल्दी करो.. मेरे सीने में बहुत दर्द हो रहा है.

जोज़फ़- तू एक काम कर.. कमरे में जा और मैं अभी सरसों का तेल गर्म करके लाता हूँ. फिर देखा तेरा दर्द गायब हो जाएगा.

रूबी कमरे में जाकर बेड पे बैठ गई और जोज़फ़ तेल को हल्का गर्म करके ले आया.

जोज़फ़- बेबी अपना फ्रॉक निकाल दो, मैं तेरी मालिश कर देता हूँ, फिर तुझे आराम मिलेगा.

रूबी- भाई आपके सामने मुझे शर्म आएगी.. मैं कैसे निकालूं?

जोज़फ़- अरे मैं तेरा भाई हूँ और मुझसे कैसी शर्म.. चल निकाल दे.

रूबी- भाई मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है. मॉम को पता लगेगा तो वो मुझसे बहुत नाराज़ होंगी. ऐसे ही वो गुस्सा करती रहती हैं.

रूबी की मॉम शुरू से ही सख़्त रही हैं. तभी तो जवानी में आकर उन दोनों की ज़्यादा बनती नहीं है. अब जोज़फ़ तो रूबी को चोदने का मन बना चुका था.

 
जोज़फ़- अरे हम उनको कुछ बताएँगे ही नहीं.. ये बस हमारे बीच रहेगा और मेरा यकीन कर, तुझे बहुत अच्छा लगेगा.

रूबी ने थोड़ी ना-नुकुर की, फिर वो जोज़फ़ की मीठी बातों में आ गई और कपड़े निकाल कर बैठ गई.

जोज़फ़- गुड गर्ल, अब तू आराम से लेट जा, फिर देख तुझे कितना आराम मिलता है.

रूबी बेड से टेक लगाकर लेट गई और जोज़फ़ हल्के हाथों से उसके चुचों की मालिश करने लगा.

अब फ्रेंड्स, रूबी कोई दूध पीती बच्ची तो थी नहीं, जो किसी मर्द के हाथ उसके चूचों पे मालिश करें और वो उत्तेजित ना हो, ये तो कुदरत का क़ानून है, भले ही उस उम्र में सेक्स का ज्ञान नहीं होता मगर उत्तेजना तो अपने आप ही आ जाती है.

जोज़फ़ धीमे-धीमे उसके चुचों को सहला रहा था और साथ ही साथ उंगली से उसके निप्पलों को भी छेड़ रहा था.

रूबी- ससस्स भाई आ उम्म्म्म आह..

जोज़फ़- क्यों बेबी आराम मिल रहा है ना.

रूबी- आह ससस्स भाई, बहुत आराम मिल रहा है.. आह ऐसे ही करते रहो आह..

रूबी अपने दोनों पैरों को आपस में रगड़ने लगी थी. उसकी फुददी में झनझनाहट शुरू हो चुकी थी.

जब जोज़फ़ ने ये देखा तो उसने सोचा ये उत्तेजित हो रही है और इसे एक स्टेप और आगे ले जाने का यही मौका है.

जोज़फ़- रूबी बेबी लगता है तेरे पाँव भी दर्द कर रहे हैं. मैं ऐसा करता हूँ तेरे पैरों पर भी मालिश कर देता हूँ. तुझे अच्छा लगेगा और आराम भी मिलेगा.

रूबी- ठीक है भाई आह ऊपर की तरफ़ करना आह… वहां दुख रहा है.

जोज़फ़ ने उसकी जाँघों को सहलाना शुरू कर दिया. रूबी ने दोनों पैर पूरे खोल दिए, वो बोल तो नहीं रही थी मगर उसकी चाहत थी कि जोज़फ़ उसकी फुददी को भी सहलाए.

रूबी- सस्स आ भाई थोड़ा ऊपर करो ना.

जोज़फ़ का तीर निशाने पे लग रहा था, अब रूबी अपना संतुलन खो चुकी थी. वो बस यही चाहती थी कि जोज़फ़ उसकी फुददी को सहलाए और खूब मसले.

जोज़फ़ ने मौके का फायदा उठाया अब वो उंगली को चड्डी के एकदम पास ले जाता.. फिर नीचे कर लेता, जिससे रूबी एकदम वेबकूफ़ हो गई.

रूबी- सस्स आह भाई… ठीक से करो ना उफ़ थोड़ा और ऊपर करो आह वहां बहुत जलन हो रही है ससस्स प्लीज़ करो जल्दी..

जोज़फ़- बेबी, ऊपर करूँगा तो तुम्हारी चड्डी खराब हो जाएगी, तुम कहो तो ये चड्डी निकाल दूँ.. फिर आराम से कर दूँगा.

रूबी- आह ठीक है… निकाल दो उफ़ अच्छे से करना भाई आह..

जोज़फ़ तो इसी मौके की तलाश में था. उसने जल्दी से रूबी की चड्डी निकाल दी. अब वो पूरी नंगी उसके सामने पड़ी तड़प रही थी और वो उसकी जाँघों से हाथ उसकी फुददी के एकदम पास ले जाता मगर फुददी को टच नहीं होने देता, इससे रूबी झुंझला गई.

रूबी- आह भाई थोड़ा और ऊपर आ मेरी जान निकल रही है प्लीज़.

जोज़फ़- अरे कर तो रहा हूँ अब तुम ही बताओ कहाँ करूँ.. मेरी तो समझ में नहीं आ रहा.

रूबी ने जोज़फ़ का हाथ पकड़ा और अपनी फुददी पर रख दिया.

रूबी- भाई प्लीज़ यहाँ करो.. आह यहाँ बहुत दर्द हो रहा है प्लीज़ भाई.

जोज़फ़- ऐसा बोल ना.. यहाँ करना है. कब से पूछ रहा था. अब तू आँखें बंद करके आराम से लेट जा और पैर पूरे खोल दे, फिर देख आज तेरा सारा दर्द कैसे बाहर निकालता हूँ.

जोज़फ़ ने उंगली पर तेल लगाया और बहन की फुददी की मालिश शुरू कर दी. वो धीमे-धीमे उंगली से फुददी को खोलता, उसकी गुलाबी लकीर में ऊपर से नीचे उंगली घुमाता. बस एक कच्ची कली के लिए ओर्गज्म तक जाने के लिए ये बहुत था.

रूबी- ससस्स आह भाई उफ़फ्फ़ उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह बहुत अच्छा लग रहा है.. आह.. ऐसे ही करो आह.. थोड़ा तेज करो भाई उफ़ आह…

 
रूबी की फुददी किसी भी पल लावा उगलने को बेताब थी और जोज़फ़ इस कली के पहले कामरस को वेस्ट नहीं करना चाहता था. उसने फ़ौरन अपने होंठ फुददी पे लगा दिए और जीभ से फुददी को चूसना शुरू किया. उसी पल रूबी ने रस की फुहार छोड़ दी, जिसे जोज़फ़ लपालप चाटने लगा.

रूबी- एयाया सस्सस्स भाई आह उउउंम्म..

जब जोज़फ़ ने अपनी बहन की फुददी को चाट कर एकदम साफ कर दिया, तब रूबी को होश आया कि अभी जो हुआ वो क्या था.

रूबी- ओह शिट भाई.. ये क्या था अपने मेरी पुसी को चाटा और उसमें से सूसू जैसा कुछ निकाला, आपने वो भी चाट लिया छी: छी: आपको ज़रा भी घिन नहीं आई?

जोज़फ़- माय स्वीट बेबी.. वो सूसू नहीं कामरस था. तू पहली बार झड़ी है. उसे मैं कैसे वेस्ट कर देता. अब बोल तेरा दर्द कम हुआ या नहीं या और मालिश चाहिए?

रूबी- भाई, ये ग़लत है आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था. मैं आपके सामने ऐसे नंगी पड़ी हूँ छी: नहीं भाई हमने ये सही नहीं किया.. ये ग़लत है.

फ्रेंड्स हर लड़की नादान नहीं होती, अब रूबी को सेक्स का अता-पता नहीं था मगर ये जो हुआ इतना तो वो समझ ही रही थी कि ग़लत हुआ और वो खुद इसके लिए काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार थी. उसने ही जोज़फ़ को अपने मज़े के लिए चड्डी निकालने को कहा था.

जोज़फ़- कुछ ग़लत नहीं हुआ है और इसमें छी: वाली कौन सी बात है?

रूबी- भाई अपने मेरी पुसी को चाटा, उसमें से सूसू निकला.. वो पी गए. ये गंदी बात नहीं है क्या..?

जोज़फ़- अरे मेरी नादान बेबी वो सूसू नहीं कामरस था तेरा.. उसमें जो टेस्ट होता है तुझे कैसे बताऊं मैं?

रूबी- आपकी बात मेरे समझ के बाहर है भाई.. मुझे बस ये पता है ये जो हुआ वो ग़लत हुआ और अब आप यहाँ से जाओ.. मुझे कपड़े पहनने हैं.

अपना प्लान फेल होते देख जोज़फ़ घबरा गया और उसने दूसरा पासा फेंका.

जोज़फ़- अच्छा सुन सुन.. सब कुछ भूल जा और ये बता तुझे आनंद आया या नहीं?

रूबी- व्ववो.. भाई आनंद तो बहुत आया मगर..

जोज़फ़- अगर-मगर को गोली मार.. अच्छा तुझे बड़ी वाली लॉलीपॉप देखनी थी ना?

रूबी- हाँ भाई देखनी है.. आप मुझे कभी दिखाते ही नहीं हो.

जोज़फ़- आज तू अपने हाथ से पकड़ के चूसना और अपनी आँखों से देख भी लेना मगर मेरी एक छोटी सी शर्त है.

रूबी- भाई आप ऐसे ही करते हो, अब कौन सी शर्त हाँ.. आज मैं हाथ नहीं बंधवाऊंगी.. बता दिया बस.

जोज़फ़- हाँ बाबा नहीं बांधना.. बस आँखें बंद रखना, जब मैं कहूँ तब खोलना.

जोज़फ़ की चिकनी चुपड़ी बातों में रूबी ये भूल गई कि वो एकदम नंगी है और अभी वो ग़लत सही की बातें कर रही थी.

रूबी ने आँखों पे हाथ लगा लिया और जोज़फ़ को कहने लगी- जल्दी से लेकर आओ भाई.

जोज़फ़- रूबी, कोई चीटिंग नहीं.. तुझे तेरे अब्बू की कसम है, जब मैं कहूँ तभी देखना ओके.

रूबी अपने अब्बू से बहुत प्यार करती थी इसलिए कसम तोड़ने का सवाल ही नहीं था.

जोज़फ़ धीमे से बिस्तर पे आया और अपना लंड पैन्ट से निकाल कर रूबी के होंठों पे रगड़ने लगा.

रूबी- भाई अब मैं देखूँ क्या?

जोज़फ़- नहीं पहले इसे चूसो.. फिर जब मैं कहूँ तब देखना और इसे हाथ से पकड़ कर अच्छे से चूसना ओके..!

रूबी ने ‘ओके..’ कहा और लंड को चूसने लगी. वो अब बड़े आराम से लंड को चूस रही थी.

जोज़फ़- गुड बेबी अब तू मेरी बात का जवाब दे.. फिर तुझे देखने का बोलूँगा.

रूबी- जी भाई कहो क्या बात है?

जोज़फ़- तुझे ये बड़ी वाली लॉलीपॉप अच्छी लगती है ना.. और इसका रस तुझे कैसा लगता है?

रूबी- भाई सच्ची में मुझे ये चूसना बहुत पसंद है और इसका रस तो बहुत टेस्टी है. मेरी आज तक की सारी लॉलीपॉप से बेस्ट टेस्ट है.

जोज़फ़- ओके माय स्वीट बेबी अब आँख खोलो और अपनी बेस्ट लॉलीपॉप को देखो.

रूबी ने आँखें खोलीं और अपने सामने जोज़फ़ के खड़े लंड को देख कर वो सन्न हो गई.. उसको यकीन ही नहीं आया कि वो लंड को मज़े से चूस रही थी.

रूबी- छी: भाई ये क्या है.. आप मुझे अपनी लुली चूसा रहे थे.. ओह आप कितने गंदे हो.. मैं कभी आपसे बात नहीं करूँगी.

रूबी थोड़ी गुस्सा हो गई मगर जोज़फ़ ने उसे जाने नहीं दिया और बिस्तर पर गिरा कर उसके ऊपर सवार हो गया और उसके निप्पलों को चूसने लगा. एक हाथ से उसकी फुददी को सहलाने लगा.

रूबी ने जोज़फ़ को हटाने की बहुत कोशिश की, मगर जोज़फ़ अपने काम में लगा रहा और थोड़ी ही देर में रूबी भी उत्तेजित हो गई. उसका गुस्सा कम हो गया. अब वो बस बहुत हल्के हाथ से जोज़फ़ को हटाने की व्यर्थ की कोशिश कर रही थी. उसकी आवाज़ में भी बदलाव आ गया.

रूबी- आह.. भाई इसस्स नहीं.. आह.. प्लीज़ हटो ना आपको शर्म आनी चाहिए आह…. आप ये क्या कर रहे हो.. हटो ना.

जोज़फ़ समझ गया कि उसका जादू असर कर रहा है. अब वो रूबी के होंठों को चूसने लगा और अपना हाथ उसकी फुददी पर जोर से रगड़ने लगा.

रूबी अब एकदम उत्तेजित हो गई थी उसकी साँसें तेज चलने लगी थीं. तभी जोज़फ़ उससे अलग हुआ और उसको अपने ऊपर लिटा दिया मगर इस बार जोज़फ़ ने पोज़ बदल लिया था. वो 69 के पोज़ में आ गया था और रूबी की फुददी को चूसने लगा गया था.

रूबी की आँखों के सामने जोज़फ़ का लंड था.. उसके होंठ सुख रहे थे. थोड़ी देर उसने लंड को देखा फिर अपने हाथों से पकड़ा और उसे प्यार से सहलाने लगी और अगले ही पल घप से उसने लंड को मुँह में ले लिया.

अब दोनों एक-दूसरे के लंड और फुददी को मज़े से चूस रहे थे.

दस मिनट तक ये खेल चलता रहा. अब रूबी चरम पर आ चुकी थी और वो लंड को जोर-जोर से चूसने लगी. उसकी फुददी सिकुड़ने लगी और उसका लावा बह गया, जिसे जोज़फ़ ने चाट-चाट कर साफ कर दिया. फिर जोज़फ़ का ज्वालामुखी भी फट गया और ये रस तो रूबी का फेवरिट था, वो कहाँ इसे वेस्ट करती. उसने भी सारा वीर्य पी लिया और अब दोनों अलग-अलग होकर लेट गए. बस उनकी तेज चलती साँसों की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी.

 
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