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Guest
अन्दर शाजिया कुछ और सोच रही थी और बाहर अब्दुल जी कुछ और. अब थोड़ी देर में पता लग ही जाएगा कि किसकी सोच पूरी होती है. तब तक हम लोग थोड़ा सा.. ना ना ज़्यादा नहीं, बस थोड़ा सा घूम कर आते हैं.
रात को फवाद चला गया तो राबिया अब जाहिरा को फवाद से चुदने के लिए मना रही थी. मगर वो डर रही थी. तब राबिया ने उसको फवाद की जान ख़तरे में हैं, वो बात बताई और साथ में ढेर सारे पैसे देने का वादा किया तो वो मान गई.
अब बस राबिया को फकीर के आने का इन्तजार था.
बस हो गया ब्रेक ख़त्म तो देखो अब अब्बू-बेटी के बीच में क्या होता है.
शाजिया का खाना रेडी हो गया था. जब वो बाहर आई, तो उसके अब्बू जी मज़े से बियर पी रहे थे.
शाजिया- ओह.. अब्बू.. ये क्या है आप अभी क्यों पीने लगे.. पहले खाना तो खा लेते. उसके बाद आराम से पी लेते और मैंने भी तो कहा था मैं भी पीऊंगी.
अब्बू- शाजिया, ये कॉफी नहीं जो खाने के बाद पी जाए. ये बियर है बेटा इसको खाने के पहले ही पीते हैं.
शाजिया- तो ठीक है लाओ मुझे भी दो.. मैं भी तो देखूं ये क्या है.
अब्बू- ये तेरे काम की नहीं है बेटा.. तुझे इससे नशा हो जाएगा.
शाजिया- आपने तो कहा था ये शराब नहीं है.. फिर नशा कैसे होगा?
अब्दुल जी ने शाजिया को बहुत समझाया कि पहली बार पीने से नशा होता है मगर वो नहीं मानी और गिलास में बियर डालकर पीने लगी. पहली बार तो उसको ये बहुत अजीब लगी मगर धीमे-धीमे इसका टेस्ट शाजिया को भा गया. उसने आधी बोतल गटक ली.
अब्बू- बस कर.. नहीं तो यहीं लुढ़क जाएगी. चल अब खाना लगा बहुत भूख लगी है. उसके बाद आज तुझे मेरे साथ ही सोना है.. तेरी अम्मी तो है नहीं ना..!
शाजिया- हिच हिच.. नहीं मैं आपके साथ नहीं सोऊंगी.. आप मुझे.. हिच हिच.. परेशान करोगे.
शाजिया की आँखें नशे से लाल हो गई थीं.. उसकी ज़ुबान भी लड़खड़ा रही थी.
अब्बू- मैंने कहा था ना मत पी, अब चढ़ गई ना.. देख सोना तो तुझे मेरे साथ ही पड़ेगा.. आज मुझे आनंद देने का तेरा अपना पक्का वादा याद है ना?
शाजिया- हाँ याद है.. हिच एमेम मगर वो करने के बाद मैं अपने कमरे में सो जाऊँगी.. हिच.. नहीं तो आप पूरी रात सताओगे.
अब्बू- तुझे बहुत चढ़ गई है. तू यहाँ बैठ मैं खाना लगाता हूँ और तेरा इलाज भी करता हूँ. नहीं तो तू ऐसे ही हिचकियां लेती रहेगी और मेरा भी मूड खराब करेगी.
अब्दुल जी ने खाना लगाया और शाजिया को नींबू काट कर चूसने को दिया, जिससे उसका नशा थोड़ा कम हो और एक गिलास में नींबू पानी भी बना के उसको पिला दिया, जिससे उसकी हिचकी बंद हो गई.
दोनों ने जमकर खाना खाया. फिर अब्दुल जी शाजिया को अपने कमरे में ले गए. बियर का नशा अभी भी शाजिया पर था मगर बहुत कम हो गया था. अब वो अपने अब्बू से ठीक से बात कर रही थी- अब्बू लाइट बंद कर दो ना ऐसे हम दोनों को नींद कैसे आएगी?
अब्बू- अरे अभी से सोने की बात कर रही है.. मुझे आराम तो दे दे पहले.. या पहले मैं तुझे आनंद दूँ?
शाजिया- ये सब बाद में.. पहले लाइट बंद कर दो आप.. ओके..!
अब्बू- अरे अंधेरे में तो रोज ही करती हो.. आज ऐसे ही करो ना शाजिया.
शाजिया- नहीं अब्बू मुझे शर्म आती है.
अब्दुल जी ने साफ़ साफ़ कह दिया- ये क्या बात हुई शाजिया, तुम मेरा लौड़ा कई बार चूस चुकी हो और मुझसे अपनी फुददी चटवा चुकी हो.. अब कैसी शर्म?
शाजिया- छी: अब्बू ये आज आप कैसी बातें कर रहे हो.. मैं नहीं सोती यहाँ.. मैं जा रही हूँ.
शाजिया उठ कर जाने लगी तो अब्दुल जी ने उसे पकड़ लिया और बिस्तर पे गिरा कर खुद उसके ऊपर आ गए और अब दोनों की गर्म साँसें एक-दूसरे के होंठों पे पड़ रही थी. बस किसी के पहल करने की देर थी.
शाजिया- नहीं अब्बू.. ये ग़लत है आप ऐसा नहीं कर सकते.. मैं आपकी बेटी हूँ.
अब्बू- शाजिया कुछ ग़लत नहीं है. इन दिनों हम दोनों ने जो किया, वो यही तो था. बस हम दोनों अनजान बने हुए थे और आज खुलकर आनंद करेंगे.
शाजिया- आप एक मिनट हटो तो.. मुझे आपको कुछ समझाना है.. प्लीज़ एक बार हटो तो सही!
अब्दुल जी हट गए तो शाजिया उनके पास बैठ गई और शुरू से सारी बात उन्हें बताईं कि कैसे उसने उस रात उनकी और अम्मी की बात सुनी थी. फिर अपनी सहेली के साथ मिलकर उसने ये प्लान बनाया और आज ये जो हो रहा है ये सब बस वो अब्दुल जी को तड़पाने के लिए उसने किया था ताकि वो किसी और के साथ अपनी भूख शांत कर लें और उनका गुस्सा ठंडा हो जाए.
अब्बू- मेरी बेटी, तुम कितनी अच्छी हो. तुमने मेरे बारे में इतना सोचा आई लव यू डार्लिंग मगर तुम शायद ये भूल गई कि अगर तुम मुझे ऐसे तड़पाओगी तो तुम भी तो साथ में तड़पोगी ना.. अब तुम्हें भी तो लंड की जरूरत पड़ेगी तो कोई और क्यों? तुम ही मेरे साथ कर लो ना.. ताकि घर की बात घर में ही रहे.
शाजिया- नहीं अब्बू मुझे डर लगता है.. इससे बहुत दर्द होता है.. नहीं नहीं.. मैं नहीं करूँगी.
अब्बू- अरे तूने कभी किया ही नहीं तो तुझे क्या पता दर्द होगा.
शाजिया- अब्बू मैं कोई बच्ची नहीं हूँ. इतना तो पता ही है, इसके लिए करना जरूरी नहीं है.
अब्बू- अच्छा तू किसी और पे भरोसा मत कर.. मैं तेरा अब्बू हूँ मुझपे तो तुझे भरोसा है ना, मैं बहुत आराम से करूंगा… एकदम धीमे-धीमे..!
शाजिया- अब्बू, मैं आपका लंड चूस कर पानी निकाल देती हूँ ना.. प्लीज़ मुझे बहुत डर लग रहा है. मेरा सेक्स करने का कोई मंसूबा नहीं था, आप समझो ना प्लीज़.
शाजिया के चेहरे पर डर साफ नज़र आ रहा था.
अब्बू- देख शाजिया, तू मेरी बात सुन आज नहीं तो कल तुझे चुदाई करनी ही होगी. मुझसे नहीं तो किसी और से.. या शादी के बाद अपने शौहर से तो चुदेगी ही, तब क्या होगा.. सोच?
शाजिया- अब्बू, पता नहीं मुझे इससे इतना डर क्यों लगता है.
अब्बू- अच्छा तुझे कैसे पता दर्द का.. कुछ तो हुआ होगा? तू खुलकर मुझे बता ना!
शाजिया ने बताया वो एक बार नहा रही थी तब नीचे साबुन लगाते टाइम ग़लती से उसकी उंगली अन्दर चली गई तो बहुत दर्द हुआ था.. तब से उसको डर लगता है. शाजिया ने एक झूठी कहानी सुनाई मगर उसमें जो दर्द हुआ वो सच था आपको भी याद होगा कहानी पढ़ते टाइम शाजिया ने फुददी में उंगली की थी.
अब्दुल जी समझ गए कि शाजिया को सेक्स फोबिया है यानि इंसान किसी भी चीज का वहाँ अपने मन में तय कर लेता है, फिर वही उसका डर बन जाता है. हालांकि शाजिया ने कभी चुदाई नहीं की थी मगर एक बार फुददी रगड़ते टाइम उसकी उंगली जरा सी अन्दर घुस गई थी बस उसी पल से उसको अहसास हुआ कि ये छोटी सी उंगली से इतना दर्द हुआ तो लंड से कितना होगा और यही डर धीमे-धीमे उसको चुदाई के खिलाफ कर चुका था.
अब्बू- अच्छा ये बात है.. चल जाने दे मैं तेरी चुदाई नहीं करूंगा मगर तुझे मैं खुलकर प्यार तो कर सकता हूँ ना.. उसमें तो तू मेरा साथ देगी ना.
शाजिया- हाँ अब्बू, सेक्स के अलावा आप कुछ भी कहो… मैं करने को रेडी हूँ.
अब्बू- तो ठीक है ये नाइटी निकाल दे, मैं रोशनी में तेरे जिस्म को देखना चाहता हूँ.. इसे चूसना चाहता हूँ तेरे निपल्स को निचोड़ कर इनका रस पीना चाहता हूँ.
शाजिया- चुप करो अब्बू, मुझे आप से शर्म आ रही है.
अब्दुल जी ने अपनी लुंगी उतार दी और लंड को हाथ से सहलाते हुए बोले- अरे लंड चूसने में शर्म नहीं आई तो देखने में कैसी शर्म? ये देख कैसे मेरा लंड तुझे बुला रहा है.. चल अब निकाल दे.
शाजिया- अब्बू आप ही निकाल लो ना प्लीज़.
शाजिया ने इशारा दे दिया तो अब्दुल जी आगे बढ़े और बेटी को नंगी कर दिया अब वो ऊपर से नीचे तक शाजिया को निहार रहे थे और मन ही मन अपनी कामयाबी पे खुश हो रहे थे, उन्होंने शाजिया को बिस्तर पर लेटाया; उसके नर्म होंठों को अपने होंठों से जकड़ लिया और फिर एक लंबी किस के बाद वो शाजिया की जीभ को चूसने लगे.
अब शाजिया भी खुलकर उनका साथ दे रही थी.
रात को फवाद चला गया तो राबिया अब जाहिरा को फवाद से चुदने के लिए मना रही थी. मगर वो डर रही थी. तब राबिया ने उसको फवाद की जान ख़तरे में हैं, वो बात बताई और साथ में ढेर सारे पैसे देने का वादा किया तो वो मान गई.
अब बस राबिया को फकीर के आने का इन्तजार था.
बस हो गया ब्रेक ख़त्म तो देखो अब अब्बू-बेटी के बीच में क्या होता है.
शाजिया का खाना रेडी हो गया था. जब वो बाहर आई, तो उसके अब्बू जी मज़े से बियर पी रहे थे.
शाजिया- ओह.. अब्बू.. ये क्या है आप अभी क्यों पीने लगे.. पहले खाना तो खा लेते. उसके बाद आराम से पी लेते और मैंने भी तो कहा था मैं भी पीऊंगी.
अब्बू- शाजिया, ये कॉफी नहीं जो खाने के बाद पी जाए. ये बियर है बेटा इसको खाने के पहले ही पीते हैं.
शाजिया- तो ठीक है लाओ मुझे भी दो.. मैं भी तो देखूं ये क्या है.
अब्बू- ये तेरे काम की नहीं है बेटा.. तुझे इससे नशा हो जाएगा.
शाजिया- आपने तो कहा था ये शराब नहीं है.. फिर नशा कैसे होगा?
अब्दुल जी ने शाजिया को बहुत समझाया कि पहली बार पीने से नशा होता है मगर वो नहीं मानी और गिलास में बियर डालकर पीने लगी. पहली बार तो उसको ये बहुत अजीब लगी मगर धीमे-धीमे इसका टेस्ट शाजिया को भा गया. उसने आधी बोतल गटक ली.
अब्बू- बस कर.. नहीं तो यहीं लुढ़क जाएगी. चल अब खाना लगा बहुत भूख लगी है. उसके बाद आज तुझे मेरे साथ ही सोना है.. तेरी अम्मी तो है नहीं ना..!
शाजिया- हिच हिच.. नहीं मैं आपके साथ नहीं सोऊंगी.. आप मुझे.. हिच हिच.. परेशान करोगे.
शाजिया की आँखें नशे से लाल हो गई थीं.. उसकी ज़ुबान भी लड़खड़ा रही थी.
अब्बू- मैंने कहा था ना मत पी, अब चढ़ गई ना.. देख सोना तो तुझे मेरे साथ ही पड़ेगा.. आज मुझे आनंद देने का तेरा अपना पक्का वादा याद है ना?
शाजिया- हाँ याद है.. हिच एमेम मगर वो करने के बाद मैं अपने कमरे में सो जाऊँगी.. हिच.. नहीं तो आप पूरी रात सताओगे.
अब्बू- तुझे बहुत चढ़ गई है. तू यहाँ बैठ मैं खाना लगाता हूँ और तेरा इलाज भी करता हूँ. नहीं तो तू ऐसे ही हिचकियां लेती रहेगी और मेरा भी मूड खराब करेगी.
अब्दुल जी ने खाना लगाया और शाजिया को नींबू काट कर चूसने को दिया, जिससे उसका नशा थोड़ा कम हो और एक गिलास में नींबू पानी भी बना के उसको पिला दिया, जिससे उसकी हिचकी बंद हो गई.
दोनों ने जमकर खाना खाया. फिर अब्दुल जी शाजिया को अपने कमरे में ले गए. बियर का नशा अभी भी शाजिया पर था मगर बहुत कम हो गया था. अब वो अपने अब्बू से ठीक से बात कर रही थी- अब्बू लाइट बंद कर दो ना ऐसे हम दोनों को नींद कैसे आएगी?
अब्बू- अरे अभी से सोने की बात कर रही है.. मुझे आराम तो दे दे पहले.. या पहले मैं तुझे आनंद दूँ?
शाजिया- ये सब बाद में.. पहले लाइट बंद कर दो आप.. ओके..!
अब्बू- अरे अंधेरे में तो रोज ही करती हो.. आज ऐसे ही करो ना शाजिया.
शाजिया- नहीं अब्बू मुझे शर्म आती है.
अब्दुल जी ने साफ़ साफ़ कह दिया- ये क्या बात हुई शाजिया, तुम मेरा लौड़ा कई बार चूस चुकी हो और मुझसे अपनी फुददी चटवा चुकी हो.. अब कैसी शर्म?
शाजिया- छी: अब्बू ये आज आप कैसी बातें कर रहे हो.. मैं नहीं सोती यहाँ.. मैं जा रही हूँ.
शाजिया उठ कर जाने लगी तो अब्दुल जी ने उसे पकड़ लिया और बिस्तर पे गिरा कर खुद उसके ऊपर आ गए और अब दोनों की गर्म साँसें एक-दूसरे के होंठों पे पड़ रही थी. बस किसी के पहल करने की देर थी.
शाजिया- नहीं अब्बू.. ये ग़लत है आप ऐसा नहीं कर सकते.. मैं आपकी बेटी हूँ.
अब्बू- शाजिया कुछ ग़लत नहीं है. इन दिनों हम दोनों ने जो किया, वो यही तो था. बस हम दोनों अनजान बने हुए थे और आज खुलकर आनंद करेंगे.
शाजिया- आप एक मिनट हटो तो.. मुझे आपको कुछ समझाना है.. प्लीज़ एक बार हटो तो सही!
अब्दुल जी हट गए तो शाजिया उनके पास बैठ गई और शुरू से सारी बात उन्हें बताईं कि कैसे उसने उस रात उनकी और अम्मी की बात सुनी थी. फिर अपनी सहेली के साथ मिलकर उसने ये प्लान बनाया और आज ये जो हो रहा है ये सब बस वो अब्दुल जी को तड़पाने के लिए उसने किया था ताकि वो किसी और के साथ अपनी भूख शांत कर लें और उनका गुस्सा ठंडा हो जाए.
अब्बू- मेरी बेटी, तुम कितनी अच्छी हो. तुमने मेरे बारे में इतना सोचा आई लव यू डार्लिंग मगर तुम शायद ये भूल गई कि अगर तुम मुझे ऐसे तड़पाओगी तो तुम भी तो साथ में तड़पोगी ना.. अब तुम्हें भी तो लंड की जरूरत पड़ेगी तो कोई और क्यों? तुम ही मेरे साथ कर लो ना.. ताकि घर की बात घर में ही रहे.
शाजिया- नहीं अब्बू मुझे डर लगता है.. इससे बहुत दर्द होता है.. नहीं नहीं.. मैं नहीं करूँगी.
अब्बू- अरे तूने कभी किया ही नहीं तो तुझे क्या पता दर्द होगा.
शाजिया- अब्बू मैं कोई बच्ची नहीं हूँ. इतना तो पता ही है, इसके लिए करना जरूरी नहीं है.
अब्बू- अच्छा तू किसी और पे भरोसा मत कर.. मैं तेरा अब्बू हूँ मुझपे तो तुझे भरोसा है ना, मैं बहुत आराम से करूंगा… एकदम धीमे-धीमे..!
शाजिया- अब्बू, मैं आपका लंड चूस कर पानी निकाल देती हूँ ना.. प्लीज़ मुझे बहुत डर लग रहा है. मेरा सेक्स करने का कोई मंसूबा नहीं था, आप समझो ना प्लीज़.
शाजिया के चेहरे पर डर साफ नज़र आ रहा था.
अब्बू- देख शाजिया, तू मेरी बात सुन आज नहीं तो कल तुझे चुदाई करनी ही होगी. मुझसे नहीं तो किसी और से.. या शादी के बाद अपने शौहर से तो चुदेगी ही, तब क्या होगा.. सोच?
शाजिया- अब्बू, पता नहीं मुझे इससे इतना डर क्यों लगता है.
अब्बू- अच्छा तुझे कैसे पता दर्द का.. कुछ तो हुआ होगा? तू खुलकर मुझे बता ना!
शाजिया ने बताया वो एक बार नहा रही थी तब नीचे साबुन लगाते टाइम ग़लती से उसकी उंगली अन्दर चली गई तो बहुत दर्द हुआ था.. तब से उसको डर लगता है. शाजिया ने एक झूठी कहानी सुनाई मगर उसमें जो दर्द हुआ वो सच था आपको भी याद होगा कहानी पढ़ते टाइम शाजिया ने फुददी में उंगली की थी.
अब्दुल जी समझ गए कि शाजिया को सेक्स फोबिया है यानि इंसान किसी भी चीज का वहाँ अपने मन में तय कर लेता है, फिर वही उसका डर बन जाता है. हालांकि शाजिया ने कभी चुदाई नहीं की थी मगर एक बार फुददी रगड़ते टाइम उसकी उंगली जरा सी अन्दर घुस गई थी बस उसी पल से उसको अहसास हुआ कि ये छोटी सी उंगली से इतना दर्द हुआ तो लंड से कितना होगा और यही डर धीमे-धीमे उसको चुदाई के खिलाफ कर चुका था.
अब्बू- अच्छा ये बात है.. चल जाने दे मैं तेरी चुदाई नहीं करूंगा मगर तुझे मैं खुलकर प्यार तो कर सकता हूँ ना.. उसमें तो तू मेरा साथ देगी ना.
शाजिया- हाँ अब्बू, सेक्स के अलावा आप कुछ भी कहो… मैं करने को रेडी हूँ.
अब्बू- तो ठीक है ये नाइटी निकाल दे, मैं रोशनी में तेरे जिस्म को देखना चाहता हूँ.. इसे चूसना चाहता हूँ तेरे निपल्स को निचोड़ कर इनका रस पीना चाहता हूँ.
शाजिया- चुप करो अब्बू, मुझे आप से शर्म आ रही है.
अब्दुल जी ने अपनी लुंगी उतार दी और लंड को हाथ से सहलाते हुए बोले- अरे लंड चूसने में शर्म नहीं आई तो देखने में कैसी शर्म? ये देख कैसे मेरा लंड तुझे बुला रहा है.. चल अब निकाल दे.
शाजिया- अब्बू आप ही निकाल लो ना प्लीज़.
शाजिया ने इशारा दे दिया तो अब्दुल जी आगे बढ़े और बेटी को नंगी कर दिया अब वो ऊपर से नीचे तक शाजिया को निहार रहे थे और मन ही मन अपनी कामयाबी पे खुश हो रहे थे, उन्होंने शाजिया को बिस्तर पर लेटाया; उसके नर्म होंठों को अपने होंठों से जकड़ लिया और फिर एक लंबी किस के बाद वो शाजिया की जीभ को चूसने लगे.
अब शाजिया भी खुलकर उनका साथ दे रही थी.