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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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रूबी ने जाकर देखना ठीक समझा वो गई तो शाजिया घोड़े बेच कर सो रही थी. उसने आवाज़ भी दी मगर कोई रेस्पॉन्स नहीं आया. वैसे हमें तो पता ही है कि ये सब नाटक है मगर रूबी को थोड़े पता था. वो वापस आई और दरवाजे को अन्दर से बंद कर लिया.

अब्दुल- क्यों रूबी हो गई तसल्ली? अब तो तैयार हो ना मेरे अजगर को लेने के लिए?

रूबी- तैयार तो इसको देखा था, तभी हो गई थी मगर ऐसे डाइरेक्ट ही घुसाओगे क्या.. पहले बिल को तैयार तो करो.

अब्दुल- मैंने कहा ना… तुमने संपोले रखने वाले छोटे मोटे लोगों को देखा है मगर आज तुम्हारा पाला अजगर वाले संपेरे से पड़ा है, बस अपने आप को इन कपड़ों से आज़ाद कर दो. फिर देखो मैं तुम्हारी कैसी सेवा करता हूँ, जिंदगी भर भुला नहीं पाओगी तुम अपने इस चाचा को.

अब्दुल जी की दमदार बातें रूबी को और उत्तेज़ित कर रही थीं. उसने एक ही झटके में मैक्सी निकाल दी और एकदम नंगी अब्दुल जी के सामने अपने मम्मे तान कर खड़ी हो गई.

अब्दुल- बहुत खूब रूबी अल्लाह ने बड़ी ही फ़ुर्सत से तुम्हें बनाया होगा. इस क़ातिल जवानी को तो बड़े आराम से भोगना पड़ेगा.. तभी मजा आएगा.

रूबी- इतने आराम से भी मत करना कि शाजिया आ जाए और मजा खराब हो जाए.

अब्दुल- मेरी रानी हमारे पास पूरे 4 घंटे हैं. शाजिया इतनी जल्दी उठने वाली नहीं है, वो 4 घंटे पहले हिलेगी भी नहीं.

रूबी- क्या 4 घंटे लगातार आप चुदाई करोगे हा हा हा इतना पावर है आप में?

अब्दुल- मेरी रानी ये तो बहुत कम टाइम है. अगर पूरी रात कहो तो वो भी कर सकता हूँ मैं. अब बातें बंद करो, यहाँ मेरे पास आओ मुझे इस संगमरमरी जिस्म को चूमने दो.. इसका रस पीने दो.

रूबी जब बिस्तर पे आई तो अब्दुल जी ने उसको बांहों में भर लिया उसके होंठों को चूसने लगे और हाथों से उसके चुचों को दबाने लगे. कभी उसकी फुददी को मसलते, कभी निप्पलों को दबाते.

दस मिनट तक ये लिपटा चिपटी का खेल चलता रहा. फिर उन्होंने रूबी को सीधा लेटा दिया और उसके चुचों को चूसने लगे.

रूबी- आह.. सस्स चाचा बहुत खूब आह.. ऐसे ही चूसो आह.. सच्ची में एक्सपीरियेन्स वाले से चुदाई का अलग मजा होता है.. आह.. ऐसे कोई दूसरा नहीं चूस सकता आह..

अब्दुल जी ऊपर से नीचे तक रूबी को चाट रहे थे, उसकी फुददी को चूस रहे थे और वो जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी. थोड़ी देर बाद वो 69 के पोज़ में आ गए और चाचा ने अपना मूसल रूबी के मुँह में ठोक दिया.

रूबी भी लंड चूसने में एक्सपर्ट थी. वो गले तक लौड़ा फँसा कर चूस रही थी उसकी आँखों से आँसू भी आने लगे थे मगर मजा बराबर ले रही थी.

रूबी- आ सस्स बस भी करो आह.. चूस कर ही पानी निकाल दोगे क्या.. आह.. अब बर्दाश्त नहीं होता चाचा डाल दो अपना मूसल.. मेरी फुददी में.. कर दो इसकी आग को शांत आह..

अब्दुल जी ने रूबी के पैरों को कंधे पर डाला और लंड के सुपारे को फुददी पे टिका कर जोरदार झटका दे मारा. एक ही बार में दनदनाता हुआ पूरा लंड फुददी में घुस गया.

रूबी- एयाया आह आराम से डालते ना.. आह.. इतना बड़ा लंड एक ही बार में सस्स घुसा दिया.. आह.. जान निकाल दी मेरी.

अब्दुल- अरे क्यों चिल्ला रही है तू तो खेली खाई है.. तुझे कैसा दर्द हो रहा है?

रूबी- आह.. सस्स चाचा.. आह.. इतना बड़ा लंड कभी नहीं लिया आह.. अब जितना खड्डा खुदा हुआ था उतना तो सह लेती आह.. मगर ये तो उससे भी आगे घुस गया आह..

अब्दुल- अब लौड़ा घुस गया ना तो फुददी में जगह अपने आप बना लेगा. तू बस मजा ले मेरी जानेजिगर.

अब्दुल जी स्पीड से चुदाई करने लगे और रूबी भी उनका साथ देने लगी. वो भी कमर को हिला रही थी. दस मिनट तक हचक कर चोदने के बाद अब्दुल जी ने रूबी को घोड़ी बना दिया और पीछे से उसको चोदने लगे. साथ ही साथ वो उसकी गांड में उंगली भी डाल रहे थे.

रूबी- आह.. सस्स नहीं आह.. चाचा बहुत मजा आ रहा है आह.. चोदो फास्ट आह.. ऐसे ही करो आह.. नहीं एयेए आह…

रूबी को अब डबल मजा मिल रहा था तो वो कहाँ तक टिक पाती. उसकी फुददी की मांसपेसियां सिकुड़ने लगीं और उसका पानी लावा बनकर फूट पड़ा. अब्दुल जी ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी और रूबी झड़ गई, अब वो शांत थी. मगर अब्दुल जी अभी भी चुदाई में लगे हुए थे.

रूबी- आह.. आह.. चाचा थोड़ा तो रेस्ट ले लेने दो मेरी फुददी को.. आह.. नहीं करो.. रूको ना चाचा.

रूबी की बात खत्म होने के पहले अब्दुल जी ने लंड को फुददी से बाहर निकाला और गांड पर सेट करके झटके से पेल दिया.

रूबी- आआह.. आआह.. आप वेबकूफ़ हो क्या आह.. गांड में एयेए क्यों डाला आह.. निकालो उफ़फ्फ़ बहुत जलन हो रही है आह.. आपका इतना बड़ा लंड आह.. नहीं आह.. मैं मर गई..

अब्दुल जी कहाँ सुनने वाले थे. उन्होंने रूबी की कमर को कस कर पकड़ा और दे दनादन गांड की ठुकाई शुरू कर दी.

रूबी बस तड़पती रही और वो उसकी गांड मारते रहे. थोड़ी देर बाद जब लौड़ा अच्छी तरह गांड में अड्जस्ट हो गया तो रूबी का दर्द भी मज़े में बदल गया. अब वो भी गांड को पीछे ढकेलने लगी.

रूबी- आह.. चोदो फाड़ दो मेरी गांड को आह.. फास्ट आह.. मेरी फुददी में भी आ खुजली मची है.. आह.. उसको भी शांत करो ना प्लीज़ आह.. फास्ट करो चाचा..

अब्दुल जी तो आज कामदेवता बन गए थे. उन्होंने गांड से लौड़ा निकाला और फुददी में पेल दिया. अब वो फुददी की चुदाई करने लगे. कई मिनट तक कभी फुददी कभी गांड.. वो बदल बदल कर चोदते रहे और ऐसी ज़बरदस्त चुदाई के आगे रूबी फिर ढेर हो गई. उसका रज फिर बहने लगा. अब अब्दुल जी भी अपने चरम पे थे, किसी भी पल उनका लावा भी फूटने वाला था.

रूबी- आ आह.. फास्ट करो आह.. मैं गई चाचा फास्ट एयेए मजा आ गया.

रूबी झड़ गई.. अब वो शांत थी तभी अब्दुल जी भी मोन करने लगे, उनका वीर्य भी निकलने को बेताब था.

अब्दुल- आआह.. रूबी तेरी फुददी बहुत मस्त है आह.. ले मेरा भी माल निकलने वाला है.. आज तेरी फुददी को रस से भर दूँगा आह.. ले..

रूबी- नहीं अन्दर मत निकालना आह.. मुझे आपका लंड रस पीना है… प्लीज़ मेरी फुददी में नहीं.

रूबी की बात सुनते ही अब्दुल जी ने झट से लौड़ा फुददी से निकाल लिया और रूबी भी बिजली की तेज़ी से पलटी और लंड को मुँह में भर लिया. उसी पल उस विशाल लंड से वीर्य की बारिश शुरू हो गई. एक के बाद एक ना जाने कितनी पिचकारियां रूबी के हलक में उतर गईं और रूबी मज़े से पूरा रस गटक गई. लंड की लास्ट बूँद तक निचोड़ कर ही उसका मन भरा.

रूबी- ओह माय गॉड.. मुझे यकीन नहीं होता कोई इंसान इतना पावरफुल भी हो सकता है. आपने चोद चोद कर मेरी हालत खराब कर दी, तब कहीं आपका पानी निकला और वो भी इतना ज्यादा कि जैसे किसी घोड़े का पानी हो.

अब्दुल- क्यों अब यकीन आया ना कि मेरे लंड में कितना पावर है और ये तो शुरूआत है, अबकी बार देखना तुम्हें और भी ज़्यादा टाइम तक चोदूँगा.

रूबी- मैं वेबकूफ़ थोड़े ही हूँ जो अब चुदवाऊंगी आपसे.. अभी ही आपने मेरी हालत बिगाड़ दी, अबकी बार तो चलने लायक भी नहीं रहूंगी. आपके झटके बहुत तगड़े हैं और पानी का टेस्ट भी बहुत अच्छा है. बस एक बार अच्छी तरह लंड को चूस कर ही मजा लूँगी.

अब्दुल- हा हा हा… अरे वो तो तेरी बात पर मैंने दिमाग़ को कंट्रोल में रख कर इतना लंबा टाइम लिया है ताकि तुझे अपना पावर दिखा सकूँ. अब की बार जल्दी निकाल दूँगा.. पक्की बात है.

रूबी- अच्छा अच्छा ठीक है, अभी तो आप हटे हो, थोड़ा रेस्ट तो करने दो. फिर चोद लेना.

फ्रेंड्स, आपको पता ही है कि शाजिया सोई नहीं थी. वो कमरे के बाहर खड़ी थो. वो ये चुदाई की आवाजें सुनती रही मगर जब उसको लगा वो खुद गर्म हो रही है तो सच में वो जाकर सो गई क्योंकि उसको पता था अब्बू अब शाम तक रूबी को नहीं छोड़ेंगे.

अब्दुल- चल तुझे आराम करना है तो कर ले मगर 10 मिनट.. बस उसके बाद वापस शुरू करेंगे क्योंकि तेरी जैसी कमसिन फुददी मुझे बार बार नहीं मिलने वाली.

रूबी- नहीं चाचा, आप ग़लत सोच रहे हो.. मैं तो आपकी दीवानी हो गई हूँ. बस थोड़ी शराब और होती तो मैं आपके साथ खुल कर मज़े लेती.

अब्दुल- अच्छा तो ये बात है? कोई बात नहीं अबकी बार उसका भी इंतजाम कर दूँगा.. वैसे गोआ में सब ऐसे ही पीते है क्या?

रूबी- हाँ, ज़्यादातर पीते हैं, वहां की बेस्ट फैनी वर्ल्ड फेमस है.

अब्दुल- अच्छा तुम गोआ की ही हो या बाद में वहां जाकर बसे?

अब्दुल जी अब रूबी के जीवन की सच्चाई के करीब पहुँच गए थे.

रूबी ने अपने अम्मी अब्बू की प्यार की कहानी बताई कि कैसे उन्होंने भाग कर शादी की थी.. वगैरह वगैरह.

अब्दुल- क्या मैं तुम्हारे मॉम अब्बू का नाम जान सकता हूँ?

रूबी- क्यों चाचा बहुत पूछ रहे हो क्या मंसूबा है मेरे मॉम अब्बू के पास रिश्ता लेकर जाओगे क्या मेरा? हा हा हा हा हा!

अब्दुल- अरे नहीं बस, ऐसे ही पूछ रहा हूँ. मुझे ऐसा लगता है शायद मैं तुम्हें करीब से जानता हूँ.

रूबी ने जब अपने पेरेंट्स का नाम बताया तो अब्दुल जी की हवा टाइट हो गई. रोज़ी उनकी सग़ी बहन थी जो घर से भाग गई थी यानि रूबी उनकी सग़ी भांजी थी, जिसको अभी उन्होंने ताबड़तोड़ चोदा था.

रूबी- क्या हुआ चाचा? नाम सुनकर ऐसे टेंशन में क्यों आ गए?

अब्दुल- नहीं ऐसा कुछ नहीं है… अच्छा ये बताओ तुम्हें रिश्तों में चुदाई करना कैसा लगता है.. अगर कभी मौका मिले तो करोगी?

रूबी- चाचा सच बताऊं तो मेरी चुदाई की शुरूआत ही रिश्तों से हुई है और मेरा बहुत मन था कि आपके जैसा तगड़ा लंड हो और बड़ी उमर का कोई हो, उससे मैं चुदाई करूँ.

अब्दुल- अच्छा फिर तो आज तुम्हारी इच्छा पूरी हो गई होगी ना.. मैं भी तो तुम्हारा चाचा हूँ और तगड़ा लंड वाला भी हूँ.

रूबी- नहीं चाचा आप सगे नहीं हो. वैसे आपके साथ बहुत मजा आया अगर कुछ भी रिश्ता होता तो शायद बात कुछ और ही होती.

लो फ्रेंड्स, ये राज भी खुल गया.

अब्दुल- अरे रिश्ते तो कच्चे धागे जैसे होते हैं, वो कभी भी टूट सकते हैं. सबसे बड़ा रिश्ता तो प्यार का होता है जो हमारे बीच हो चुका है.

रूबी- आपकी बात सही है चाचा मगर करीब के रिश्तों में मेरा झुकाव ज़्यादा रहा है, अब आप कुछ भी समझो.

अब्दुल जी समझ गए कि अब ज़्यादा खींचना ठीक नहीं होगा वरना रूबी सच जान जाएगी. वो अभी उसको कुछ भी बताना नहीं चाहते थे वैसे अगर बता भी देते तो रूबी बहुत खुश हो जाती. मगर फिर शाजिया को सब पता लग जाता, उसके बाद रोज़ी और अब्दुल जी अभी ये बिल्कुल नहीं चाहते थे कि उनकी बहन से उनका सामना हो.

रूबी- आप किस सोच में पड़ गए चाचा?

अब्दुल- कुछ नहीं, बस सोच रहा हूँ अबकी बार तुम्हें अपने ऊपर कुदवाऊं या गोदी में लेकर चोदूँ… हा हा हा हा.

रूबी- आप भी ना चाचा… सच में बड़े चोदू हो.

अब्दुल- अब रेस्ट टाइम पूरा हो गया है चलो मेरे लंड को चूस कर गीला करो उसके बाद मैं तुम्हें लंड की सैर कराता हूँ.

रूबी- हाँ जरूर… चलो आप भी मेरी फुददी को चाट कर मजा दो, उसके बाद तो आपके अजगर से इसकी शामत आनी ही है.. हा हा हा..

दोनों चुदाई की मस्ती में खो गए और जैसा कि अब्दुल जी ने कहा था, अबकी बार रूबी को ऊपर कुदवाया. उसकी अच्छे से चुदाई की, गांड भी जमकर मारी, उसके बाद दोनों थक गए.

अब्दुल अपनी बेटी की सहेली की चुदाई करके बहुत खुश था.

रूबी ने जल्दी से कपड़े पहने और कमरे से निकल गई. उसने शाजिया को उठाया वो उस टाइम बड़े मज़े से सो रही थी.
 


रूबी- हैलो महारानी उठो तुम यहाँ चैन की नींद ले रही हो और वहां तुम्हारे अब्बू ख़ूँख़ार जानवर बने हुए हैं.

शाजिया- उउउ सोने दो ना.. क्या हुआ? आप कहाँ थीं अब तक?

रूबी- तू तो सो गई और मैं तेरे अब्बू के मज़े लेने गई थी मगर उल्टा उन्होंने मेरे मज़े ले लिए यार.

शाजिया- क्या बोल रही हो आप यानि अब्बू के साथ आपने खेल कर लिया?

रूबी- कर लिया? अरे वेबकूफ़ उन्होंने चोद चोद कर मेरी हालत बिगाड़ दी. चल अब मुझे जाना होगा, नहीं 9 महीने बाद तेरा भाई मेरे पेट से पैदा हो जाएगा. तेरे अब्बू ने सारा रस मेरे अन्दर ही डाल दिया है.

शाजिया- आप भी ना रूबी आपा ऐसा कुछ नहीं होगा, मेरे अन्दर भी तो…

शाजिया बोलते बोलते रुक गई उसको अहसास हो गया कि उसने बहुत बड़ी बात बोल दी है, अब रूबी को पता लग जाएगा.

रूबी- क्या बोली? फिर से बोल मैंने ध्यान नहीं दिया. उफ़ ये तेरी मैक्सी भी नहीं निकल रही यार.

शाजिया ने चैन की सांस ली कि रूबी का ध्यान कहीं और था, उसने वो बात सुनी ही नहीं.

शाजिया- कुछ नहीं, आप भी आपा की तरह गोली खा लेना.. आपको कुछ नहीं होगा.

रूबी ने जल्दी से कपड़े बदल लिए और शाजिया को किस करके आज की मस्त चुदाई के लिए थैंक्स कहा और फिर वहां से सीधी घर चली गई.

रूबी के जाने के बाद दोनों अब्बू बेटी मिले और आपस में बातें की, अब्दुल जी ने बताया कि कैसे उसने रूबी को मज़े दिए, अब वो दोबारा भी उनसे चुदवाने जरूर आएगी. अब बस रज़िया को काबू में करना था. वैसे तो शाजिया ने याक़ूब को कुछ समझाया था, अब वो कितना काम करता है.. ये आने वाला टाइम ही बताएगा.

यहाँ का खेल खत्म हो गया तो चलो पीछे जाकर रज़िया और याक़ूब को भी देख आते हैं कि वहां क्या हुआ होगा.

रज़िया- अरे मेरा सोना भाई, कहाँ था तू.. और सुना आज तुमने शाजिया के साथ खूब मस्ती की होगी ना?

याक़ूब- क्या खाक मस्ती की.. शाजिया आपा तो सो गई थीं. मैंने उठाया तो गुस्सा हो गईं.. और बोलीं कि रज़िया आए तो उससे मस्ती कर लेना, वो थकी हुई है.

रज़िया- क्या उसने ऐसा कहा.. तुम्हें गुस्सा भी किया? आने दो उसको आज मैं उस शाजिया की अच्छी तरह खबर लेती हूँ.

याक़ूब- बस आपा आप उनको कुछ नहीं कहोगी, ग़लती उनकी नहीं है. ग़लती आपकी है आप मेरी आपा हो, फिर मुझे मजा क्यों नहीं देती आप.. हाँ?

रज़िया- दिमाग़ खराब है तुम्हारा? मैं तुम्हारी आपा हूँ समझे.. और क्या मैं अपने ही भाई के साथ ये सब करूं?

याक़ूब- शाजिया भी तो आपा हैं उसको आप करने को बोल सकती हो तो खुद क्यों नहीं?

रज़िया- अब तुम्हें कैसे समझाऊं वो बस नाम की आपा है.. और मैं तुम्हारी सग़ी बहन हूँ समझे.. और ये जो मज़े मज़े करते हो तुम, ये समाज की नज़र में गंदी बात है समझे!

याक़ूब- खुजली मिटाना कैसे गंदी बात हो गई.. और पहले तो नहीं थी आज कैसे हो गई?

याक़ूब ज़िद पे अड़ा था और रज़िया को उसके सवाल परेशान करने लगे थे तो वो गुस्सा हो गई.

रज़िया- बस याक़ूब बहुत हो गया चुपचाप यहाँ से चला जा.. नहीं तो तू अब मुझसे मार खाएगा.

याक़ूब- आपको मारना है मार लो आप.. या मैं खुद आज मर जाऊंगा या तो आप मुझे बताओगी कि आपने मेरे साथ वो सब शाजिया को करने को कहा. अगर वो ग़लत था तो ये कैसे गलत है? मुझे ये सब जानना ही है, नहीं तो आज आप मेरा मरा मुँह देखोगी.

याक़ूब की आँखों में अलग ही तेज था. उसका रौद्र रूप देख कर रज़िया भी डर गई.

रज़िया- नहीं मेरा सोना भाई.. ऐसा सोचना भी मत.. अम्म… मैं तुम्हें सब कुछ बताती हूँ.

याक़ूब- ठीक है फिर बताओ क्या बात है?

रज़िया- देखो भाई तुम बहुत भोले हो. आज के जमाने में इतना सीधा होना ठीक नहीं, इसलिए मैंने शाजिया का सहारा लिया. हाँ मानती हूँ कि वो कोई इलाज नहीं, वो सेक्स था जो एक गंदी बात है. मगर आज नहीं तो कल तुम्हें ये सब सीखना ही होगा ना.. इसलिए मैंने ये सब किया. अब तुम ये मेरे साथ करना चाहते हो भाई, ये ग़लत है. रिश्तों में ये सब नहीं होता.. हम इंसान हैं, जानवर नहीं जो किसी रिश्ते नाते को ना माने.. और तुम मेरे सगे भाई हो, तुम और मैं सब करें, ये नामुमकिन है. मेरी बात को समझो.

याक़ूब- समझ गया आपा रिश्तों में ये नहीं करना चाहिए. ये सिर्फ़ जानवर करते हैं और आपा जानवर तो सबके साथ करते हैं ना?

रज़िया- हाँ भाई, इंसानों में जोड़ी होती है मगर जानवर किसी के भी साथ कर लेते हैं. एक के बाद दूसरा या तीसरा.. उन्हें कोई फरक नहीं पड़ता. और सबसे बड़ी बात वो पेट से होते हैं, उनको बिल्कुल पता नहीं होता कि वो बच्चा किसका है.

याक़ूब- आपकी बात एकदम सही है आपा मगर एक बात पूछूँ.. मैंने सुना है इंसानों में तो जानवरों से ज़्यादा गंदगी है. वो तो कभी किसी के साथ कभी किसी के साथ करते हैं.. मगर इंसान तो एक साथ यानि एक लड़की और कई लड़के करते हैं. उनको क्या कहेंगे? क्या वो इंसान हैं है या कुछ और हैं?

याक़ूब की बात सुनकर रज़िया के पैरों तले ज़मीन निकल गई क्योंकि इतना सा लड़का और इतनी बड़ी बड़ी बातें कर रहा था.

रज़िया- तत..तू ये क्या बोल रहा है किसने बताया तुम्हें.. ये सब कौन करता है ऐसे.. ये सब झूठ है.. ऐसा कुछ नहीं होता.

याक़ूब- आपा झूठ मत बोलो, मेरे फ्रेंड ने सब देखा है इसी लिए आपसे पूछ रहा हूँ.. बताओ उस लड़की को क्या कहेंगे, जो एक साथ कई लड़कों के साथ ऐसा करती है?

रज़िया- चुप रहो कब से सुन रही हूँ.. बकवास पे बकवास किए जा रहा है.. ऐसा मैंने कुछ नहीं किया.

गुस्से में रज़िया बहक गई और उसने वो बोल दिया जो याक़ूब सुनना चाहता था.

याक़ूब- आपा रिलॅक्स.. क्या हो गया है आपको! मैंने आपका नाम कब लिया? मैं तो बस ऐसे ही बता रहा था. वैसे आपा आप इतनी टेंशन में क्यों आ गईं?

रज़िया अपनी ही बात से सकपका गई और फ़ौरन उसने बात पलट दी. वो अच्छी तरह समझ गई कि याक़ूब को जरूर शाजिया ने कुछ बताया है मगर उसका नाम लेना अभी ठीक नहीं होगा. इस टाइम चुप रहने में भलाई है. उसने बाथरूम का बहाना बना कर वहां से निकलना ठीक समझा.

फ्रेंड्स यहाँ भी एक नया खेल शुरू हो गया है. अब रज़िया अपने ही भाई से नज़रें चुरा रही है.. और बड़ी होने के बावजूद आज वो खुद को कितनी छोटी महसूस कर रही है.

यही होता है जब इंसान कोई गुनाह करता है और रज़िया अपने बीएफ शाहिद के साथ मिलकर जो खेल शाजिया के साथ खेल रही थी, वो सिर्फ़ गुनाह नहीं बहुत बड़ा गुनाह है. उसने एक अब्बू और बेटी के रिश्ते को गंदा किया था. अब जैसा करोगे, वैसा भरोगे वाली बात हो गई.

सॉरी मैं बोर करने लगी ना.. चलो अब रज़िया का जो होगा वो आगे पता चल ही जाएगा. अभी हम कहानी पे ध्यान देते हैं.

सुबह जब रज़िया कॉलेज गई थी, वहां उसकी और शाहिद की कुछ बातें हुई थीं. वो मैं बताना भूल गई थी, जो आपके लिए जानना जरूरी है.

शाहिद- जानेजिगर क्या हाल है तेरे.. और आज मेरी जान कहाँ है.. दिखी नहीं?

रज़िया ने शाजिया की हालत के बारे में पूरी बात शाहिद को बताई.

शाहिद- अरे यार, ये उसका अब्बू साला हरामी ऐसे कैसे उसको अकेला छोड़ कर जा सकता है?

रज़िया- अरे अब अर्जेंट काम होगा तभी तो चाचा गए होंगे ना.. वरना ऐसे अपनी बेटी को अकेला छोड़ कर कौन जाता है.

शाहिद- अरे कोई काम वाम नहीं होगा.. वो साला जरूर फरज़ाना के पास गया होगा.. कुत्ता साला मेरी फरज़ाना को पता नहीं कैसे चोदता होगा.

रज़िया- ये फरज़ाना कौन है और तुम्हारा उससे क्या लेना देना हाँ?

शाहिद जोश में बोल तो गया मगर फिर उसको समझ आया कि उसने रज़िया को क्या बोल दिया. अब उसके सवालों का जवाब देना उसको भारी पड़ेगा.

शाहिद- कोई नहीं.. तू अपना काम कर बस शाजिया पे ध्यान दे.

रज़िया- नहीं शाहिद, ऐसे नहीं अब जब नाम निकला है तो मुझे बताओ.. ये फरज़ाना कौन है?

शाहिद- मैंने कहा ना कोई नहीं.. एक बार में बात समझ नहीं आती क्या?

शाहिद ने चिल्लाने के अंदाज में बात कही, जिससे रज़िया का पारा भी चढ़ गया.

रज़िया- ये चिल्ला क्यों रहे हो? मैंने कितनी बार कहा कि तुम किसी को चोदो आई डोंट केयर.. लेकिन मुझसे कुछ छिपाया मत करो. अब ये फरज़ाना जो कोई भी है, उसको चोद चुके या चोदना चाहते हो, इससे मुझे कोई प्राब्लम नहीं. मगर किसी भी ऐरी गैरी के लिए तुम मुझ पर ऐसे चिल्ला कैसे सकते हो?

शाहिद- चुप करो रज़िया.. वो कोई ऐरी गैरी नहीं है.. मेरी जान है वो समझीं.. और सबको तुम अपनी जैसी रांड़ मत समझो मेरा और उसका रिश्ता सेक्स का नहीं प्यार का है.. समझी तुम?

शाहिद की बात सुनकर रज़िया को धक्का लगा. आज उसने रज़िया को रांड़ बना दिया. अब जो बोया है वही तो काटना पड़ेगा ना. रज़िया खून का घूँट पी गई और चुपचाप वहां से निकल गई. उसके बाद रूबी के साथ घर चली गई.

लो फ्रेंड्स ये बात थी, जिससे रज़िया का मूड ऑफ था और बाकी कसर याक़ूब ने पूरी कर दी. अब रज़िया टूट गई थी मगर आगे आने वाले दिनों में क्या होगा, ये कोई नहीं जानता था.

ना ना मुझे तो सब पता है.. बस आपको बताना बाकी है, तो चलो आप आगे की कहानी भी सुन लो.

यह दिन ऐसे ही गुजर गया और दूसरे दिन सब नॉर्मल रहा. शाजिया कॉलेज गई, सब से मिली. अब उसके हाव भाव देख कर शाहिद को शक हुआ कि ये कुछ ज़्यादा फास्ट हो गई है. अब टाइम आ गया कि इसको चोदने का प्लान बना लिया जाए… मगर किस्मत को कुछ और मंजूर था. उसी शाम शाहिद का बाइक से एक्सीडेंट हो गया, जिससे उसका पैर टूट गया. हकीम ने प्लास्टर चढ़ा दिया तो शाजिया को चोदने का प्रोग्राम कुछ दिनों के लिए रुक गया. शाजिया ने रूबी को पटा लिया कि वो रज़िया को उसके अब्बू के बारे में कुछ ना बताए तो रूबी भी मान गई. इधर रज़िया तो पहले ही शाहिद से दुखी थी, अब शाहिद के पैर टूट जाने से उसको ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ा. हाँ उसने बस उसका हाल पूछ लिया.

रज़िया ने शाजिया से याक़ूब वाली बात भी की मगर शाजिया कसम खाते हुए साफ मुकर गई कि उसकी याक़ूब से ऐसी कोई बात नहीं हुई. फिर रज़िया ने सोचा शायद ये सच कह रही है तो उसने बात को ख़त्म करने का सोचा.

ऐसे ही दिन गुजरते गए. हाँ अब्दुल जी और शाजिया की रासलीला बराबर चल रही थी. एक दो बार रूबी भी अपनी आग मिटाने अब्दुल जी के पास चली गई. बाकी रज़िया इन दिनों मायूस रहने लगी तो अब्दुल जी ने शाजिया को मना कर दिया कि कुछ दिन रज़िया से ज़्यादा बात ना करो, वो कहीं खोई हुई है. जब नॉर्मल हो जाए तब उसको यहाँ लाना.

 
फ्रेंड्स कहानी को फास्ट ले जाने के लिए माफी चाहता हूँ मगर ये जरूरी था अब कुछ दिन ऐसा खास हुआ नहीं तो फास्ट बता रहा हूँ.

एक हफ्ते बाद शाजिया की अम्मी वापस ट्रेन से आ रही थी और कुदरत की मार देखो ट्रेन का बहुत बड़ा एक्सीडेंट हो गया, जिसमें बहुत लोगों की जान गई. उसी के साथ शाजिया की अम्मी भी इस दुनिया में नहीं रही. अब्दुल जी की जिंदगी में गम के बादल छा गए. वैसे उनके पास तो बीवी की कमी नहीं थी मगर शाजिया पर इस हादसे का बुरा असर पड़ा. वो एकदम टूट गई.. ऐसा समझो वो खुद को गुनहगार मानने लगी.

शाजिया पे इस हादसे का बुरा असर पड़ा वो एकदम टूट गई. ऐसा समझो वो खुद को गुनहगार मानने लगी.

उसको लगा कि शायद अपनी अम्मी के सुहाग के साथ ऐसा करने से अल्लाह नाराज़ हो गए, तभी उसकी अम्मी को उठा लिया. अब उसने अब्दुल जी को कुछ भी करने से साफ मना कर दिया. उधर अब्दुल जी भी मायूस थे. हाँ इन दिनों वो फरज़ाना के पास कई बार गए, तब फरज़ाना ने उनको शाहिद के बारे में बताया कि वही उसका बॉयफ्रेंड है और अब वो शाजिया को रांड़ बना कर बदला लेना चाहता है. तब अब्दुल जी ने फरज़ाना को बता दिया कि अभी टाइम सही नहीं है.. उसको बाद में देख लेंगे.

शाहिद तो टूटे पैर के साथ घर में पड़ा था मगर शबनम के साथ उसकी चुदाई बराबर चल रही थी. इस वक्त शबनम उसके लंड पर कूद कर अपनी फुददी की प्यास बुझा लेती थी.

ऐसे ही एक महीना गुजर गया अब कहानी को उसके अंजाम तक पहुँचाने का टाइम आ गया है तो चलो विस्तार से आपको बताता हूँ कि क्या हुआ आगे.

सुबह के 8 बजे अब्दुल जी शाजिया के कमरे में गए, वो सोई हुई थी.

अब्दुल- शाजिया उठो बेटा बहुत देर हो गई. अब तो तुम्हारे कॉलेज की छुट्टियां भी खत्म हो गईं, फिर भी आज तुम नहीं गईं.

शाजिया- उउउ सोने दो ना अब्बू.. मेरा मन नहीं था इसलिए नहीं गई.

अब्दुल- शाजिया ऐसे कैसे चलेगा बेटा.. अब तेरी अम्मी तो है नहीं, जो तुझे सब रेडी मिल जाएगा. अब जो भी करना है तुम्हें ही करना है. हम दोनों का ख्याल तुम्हें ही रखना है बेटा.. उठो.

शाजिया उठी उसने नाश्ता बनाया और दोनों अब्बू बेटी ने साथ में खाया. उसके बाद उनकी बातें शुरू हो गईं.

अब्दुल- शाजिया कितने दिन हो गए अब तो मान जाओ बेटा.. जो हुआ उसमें तुम्हारी कोई ग़लती नहीं, वो अल्लाह की मर्ज़ी थी कि आगे का जीवन मैं तुम्हारे साथ बिताऊं.

शाजिया- प्लीज़ अब्बू चुप रहो.. अभी अम्मी को एक महीना भी नहीं हुआ और आप ऐसी बातें कर रहे हो.

अब्दुल- मानता हूँ इस टाइम तुम्हें मेरी बातें अच्छी नहीं लगेंगी. मगर हमारी भी जरूरत हैं.. अब मरने वाले के साथ खुद मरा तो नहीं जाता ना.. खाना भी तो खा रहे हैं, तो उसमें क्या दिक्कत है?

शाजिया- अगर आपको इतनी ही जरूरत पड़ रही है तो आज रूबी को बुला लेती हूँ और अगर उससे भी मन ना भरे तो आप दूसरी शादी कर लो, मुझे कोई प्राब्लम नहीं.. मगर प्लीज़ मैं अब कुछ नहीं करूँगी.

अम्मी की मौत का शाजिया पर बहुत गहरा असर हुआ था. अब्दुल जी ने उसको बहुत मनाने की कोशिश की मगर वो नहीं मानी.

फ्रेंड्स, यहाँ कुछ नहीं है, चलो कहीं और घूम कर आते हैं.

कॉलेज में शाहिद अपने फ्रेंड्स के साथ बैठ बातें कर रहा था, तभी रज़िया पीछे से वहां पहुँच गई और उनमें से किसी ने उसको नहीं देखा वो बस अपनी बातों में लगे हुए थे.

सलमान- यार शाहिद, तेरे एक्सीडेंट के चक्कर में फुददी देखे हुए बहुत दिन हो गए. अब और कितना इन्तजार करना पड़ेगा, वो साली शाजिया दिन पर दिन क़यामत बनती जा रही है.

फैजान- हाँ यार, उसकी गांड भी बाहर निकल रही है, कहीं ऐसा ना हो कोई और उसको ठोक कर निकल जाए और हम लंड मलते रह जाए.

शाहिद- अबे चुप साले.. इतनी किसकी मजाल है जो उसको चोद सके. उस साली को मैं रांड़ बना कर रखूँगा. उसके बाद उसे एक एक करके पूरे शहर से चुदवाऊंगा.

आज़म- यार तू अपना बदला बाद में लेते रहना, पहले हमको आनंद करवा देना बस..

अमन- यार शाहिद, ये बदले वाली बात रज़िया को पता लगेगी तो क्या होगा?

शाहिद- उस रांड़ से मुझे कैसा डर? वो तो हमारे लंड के लिए बनी है.. उसकी मुझे टेंशन नहीं है, बस टेंशन तो उस हरामी अब्दुल की हैं.. कहीं वो शाजिया पे हाथ साफ ना कर दे.

सलमान- क्या बोल रहे हो यार? ऐसा हो सकता है क्या.. और उसने शाजिया को चोद दिया तो हमें क्या मिलेगा?

शाहिद- अरे वो कमीना कुछ भी कर सकता है.. जब उस भैन के लंड ने फरज़ाना को नहीं बख्शा.. जबकि वो भी तो उसकी बेटी थी, तो शाजिया के साथ क्या नया करेगा, वैसे वो कर भी ले तो कोई दिक्कत नहीं.. मैं तो चाहता यही हूँ इससे तो शाजिया और बड़ी रांड़ बनेगी.

इन सबकी बातें सुनकर रज़िया के पैरों तले ज़मीन निकल गई, भले ही वो खुले ख्यालों वाली लड़की थी मगर ऐसे किसी की लाइफ बर्बाद करना उसके बस की बात नहीं थी. वो वहां से वापस चली गई.

रज़िया जब घर गई तो परेशान थी, उसको देख कर याक़ूब उसके पास आ गया.

याक़ूब- क्या हुआ आपा आप परेशान लग रही हो.. कुछ हेल्प करूं आपकी?

रज़िया- हाँ अपना जूता ला और तू मेरे मुँह पर मार.

याक़ूब- अरे, ये आप क्या बोल रही हो आपा, मैं भला आपको क्यों मारूँगा?

रज़िया बहुत उदास थी उसको बस शाजिया याद आ रही थी. अंजाने में उसने उसके साथ बहुत ग़लत किया था.

रज़िया- नहीं याक़ूब तू जा लेकर आ.. मैंने काम ही ऐसे किए हैं ऊउउ ऊउउ मेरी वजह से शाजिया की लाइफ बर्बाद हो गई ऊउउ.

याक़ूब- आपा आप रो मत प्लीज़.. क्या हुआ बताओ तो मुझे.. और शाजिया आपा को क्या हुआ?

रज़िया- नहीं याक़ूब, अल्लाह करे कि ऐसा कुछ ना हुआ हो.. तू रुक मैं अभी आती हूँ.

रज़िया को अचानक कुछ याद आया वो झट से उठी और शाजिया के घर की तरफ चल दी. रज़िया वहां पहुँचे, तब तक एक और घटना पर नज़र डाल लेते हैं.

शबनम की अचानक तबीयत खराब हो गई उसको चक्कर आ गया. वो गिर गई तो उसके मॉम अब्बू उसको हॉस्पिटल लेकर गए. हाँ शाहिद की मॉम भी उस टाइम वही थीं, तो वो भी उनके साथ चली गईं. शबनम के चेकअप के बाद हकीम ने कहा कि ये माँ बनने वाली है. अब ये बात सुनकर उसके मॉम अब्बू का क्या हाल हुआ होगा आप खुद सोच सकते हो.

वहां तो वो चुप रहे मगर घर आकर उन्होंने शबनम के साथ सख्ती से पूछताछ की तब शबनम ने डर के मारे सब कुछ बता दिया, जिसे सुनकर उसके अब्बू इतने गुस्सा हुए कि आपको इस बात का अंदाज़ा भी नहीं होगा.

उन्होंने शाहिद को बुलाया और बुरी तरह से पीटने लगे. उन्हें बड़ा अफ़सोस हो रहा था उस पर की, कैसे उसने अपनी भानजी को अपनी हवस का शिकार बनाया.

उधर हॉस्पिटल के हकीम ने पुलिस कम्प्लेंट कर दी कि किसी लड़की के साथ कुछ ग़लत हुआ है तो थोड़ी देर में वहां पुलिस भी पहुँच गई और शाहिद के अब्बू ने खुद उसको पुलिस के हवाले कर दिया.

फ्रेंड्स, आप सोच रहे होंगे कि ये सब कैसे हो गया. शाहिद ने तो शबनम को गोली दी थी, मगर आप शायद भूल रहे हो. ये टेबलेट रेग्यूलर लेनी होती है और शबनम तो नादान थी, उसको ये सब कहाँ याद रहता. बस भूल का नतीजा सामने आ गया. वैसे शाहिद जैसे लड़के के साथ ऐसा ही होना चाहिए, जो नादान लड़की और खास कर फैमिली मेंबर्स के साथ ऐसा घिनौना काम करता है.

शाहिद तो जेल जाएगा ही. अब रज़िया वहां पहुँच कर क्या धमाका करेगी, वो भी देख लेते हैं.

रज़िया सीधे शाजिया के पास गई और शाहिद की सारी बातें उसको बता दीं.

शाजिया- आपा, ये आप क्या बोल रही हो? मैंने शाहिद का क्या बिगाड़ा जो वो मेरे साथ ऐसा कर रहा है और मेरे अब्बू की और कौन बेटी है? नहीं नहीं, ये ग़लत है!

रज़िया- ये तो चाचा ही बता सकते हैं मगर अल्लाह का लाख लाख शुक्र है कि टाइम रहते मैंने उनकी बातें सुन लीं, नहीं तो वो तुम्हें रांड़ बना देते.

शाजिया- नहीं आपा, बहुत देर कर दी आपने, जो वो चाहता था वो तो हो गया है, मैं कब की रांड़ बन चुकी हूँ.

रज़िया- ये तू क्या कह रही है.. कैसे कब? पूरी बात बता यार.. मेरा दिल बैठा जा रहा है.

शाजिया- आपा मैंने आपसे बहुत कुछ छिपाया है. आपके आइडियाज मैंने कब के पूरे कर दिए.. मैं रांड़ बन गई आपा.

रज़िया- शाजिया प्लीज़ मुझे बता क्या हुआ है.. तुम ऐसे क्यों बोल रही हो?

शाजिया ने शुरू से आख़िर तक की सारी बात रज़िया को बता दी, जिसे सुनकर उसके होश उड़ गए.

रज़िया- ओ माय गॉड.. इतना सब हो गया और मुझे भनक भी नहीं लगी.. मगर तू डर मत.. ये बात शाहिद को नहीं पता है, ना वो तुम्हें बदनाम नहीं करेगा, तुम तुम रांड़ नहीं बनोगी.. मैं मैं.. ऐसा कुछ नहीं होने दूँगी.

शाजिया- नहीं आपा, जिस बेटी ने कुंवारी फुददी अब्बू से चुदवा ली.. अब उसमें बचा ही क्या है? शायद कोई रांड़ भी इतना घटिया काम ना करे.

रज़िया- सॉरी यार शाजिया, मुझे नहीं पता था उनका ये प्लान है. मैं तो समझी बस एक रेगिंग जैसा कुछ है.
 


शाजिया- आपा, आप खुद देख लो आपकी रेगिंग ने आख़िर मुझे रांड़ बना ही दिया.. और तो और मैंने इस घटिया खेल में रूबी को भी शामिल कर लिया छी.. छी.. मुझे अपने आप से घिन आने लगी है.

फ्रेंड्स, रज़िया जब यहाँ आई थी जस्ट उसी समय रूबी भी उसके पीछे पीछे यहाँ आ गई थी.. मगर वो रज़िया की बातें सुनकर बाहर ही रुक गई थी.

रज़िया- उस कमीने शाहिद को तो सबक सिखाना ही पड़ेगा.

रूबी- उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी रज़िया, उसको ऑलरेडी सबक मिल गया है.

रज़िया- टीटी तुम कब आई रूबी.. और कैसा सबक मिल गया उसको?

रूबी- मुझे कुछ देर पहले पता चला शाहिद के बारे में.. तो मैं जल्दी से तुमसे मिलने तुम्हारे घर गई मगर वहां पता लगा कि तुम यहाँ आई हो तो मैं यहाँ आ गई और तुम दोनों की बातें सुनकर बाहर ही रुक गई.

मगर जब शाजिया ने मेरा नाम लिया, तो मुझसे रहा नहीं गया और मैं अन्दर आ गई.

रज़िया- वो सब ठीक है.. तुम शाहिद के बारे में क्या बात कर रही थीं?

रूबी ने शाहिद की करतूत के बारे में उनको बताया तो दोनों हैरान हो गईं.

रज़िया- तुझे ये सब कैसे पता लगा?

रूबी- अरे, वो इंस्पेक्टर चाचा मेरे अब्बू के बहुत करीबी दोस्त हैं, वो हमारे घर आए थे, तो अब्बू को उन्होंने बताया और मैंने सुन लिया. वैसे पहले मुझे शक था कि शायद किसी और की बात होगी मगर जब हमारे कॉलेज का नाम सामने आया और हाँ इस केस के अलावा उस पर पहले से ही 2 केस हैं… किसी कॉलेज गर्ल को शराब पिला कर उसके साथ रेप करने का मामला भी है.

रज़िया- ओह माय गॉड व्व..वो शिल्पा और मेघा का मामला होगा शायद उसमें तो मैंने भी शाहिद की हेल्प की थी मगर वो पुरानी बात है.

रूबी- हाँ पुरानी बात है मगर केस आज सुबह ही उसके खिलाफ दर्ज हुआ उन लड़कियों ने बताया कि कोई बहुत बड़े आदमी को रेप केस में पुलिस ने पकड़ा तो उनकी हिम्मत जागी कि उनको भी इंसाफ़ मिल जाएगा. बस उन्होंने पुलिस को आकर सब बता दिया. उसके सभी दोस्तों को भी अरेस्ट कर लिया है.

रज़िया- यार पुलिस मुझे भी ढूंढ रही होगी.. मैं भी इस पाप में शामिल थी.

रूबी- नहीं, ऐसा कुछ नहीं है तुम्हारे बारे में कोई जिक्र नहीं हुआ.. तुम डरो मत.

रज़िया- थैंक्स यार उन दोनों ने मेरा जिक्र नहीं किया वरना मैं भी फंस जाती.

शाजिया- आपा, आपने कैसे उनकी लाइफ बर्बाद कर दी और आज मेरी बारी आई तो आपकी अंतरात्मा जाग गई ऐसे कैसे?

रज़िया- नहीं शाजिया, उस टाइम मैंने बस उन लड़कियों को शाहिद के करीब किया था.. बाकी ये रेप वाली बात मुझे आज तक पता नहीं थी. मेरे हिसाब से उनकी मर्ज़ी से हुआ था.

रूबी- ये सब जाने दो अब आगे क्या करना है? हमारे घर वालों तक ये बात नहीं जानी चाहिए कि शाहिद हमारा दोस्त था.. नहीं तो बड़ी गड़बड़ होगी.

रज़िया- घर वालों की बात जाने दो, पुलिस तक गई तो वो पूछेगी और बार बार बुलाएगी.

इनकी बातें चल रही थीं, तभी वहां अब्दुल जी आ गए और तीनों को देखकर खुश हो गए.

अब्दुल- क्या बात है आज सारी सहेलियां एक साथ बैठी हैं.. क्या बातें हो रही हैं?

शाजिया- आपकी ही बातें हो रही थीं. आप भी आ जाओ और मुझे बताओ ये फरज़ाना कौन है?

फरज़ाना का नाम सुनकर अब्दुल जी की हवा टाइट हो गई, वो इधर उधर देखने लगे.

शाजिया- ऐसे चुप होने से आपके गुनाह छुप नहीं जाएँगे.. अब्बू बोलो, नहीं तो मैं आज कुछ कर बैठूंगी.

अब्दुल- सीसी कौन फरज़ाना.. मैं किसी फरज़ाना को नहीं जानता आ..और तुम्हें ये सब बातें किसने बताई हैं?

शाजिया- अब्बू छुपाने से कोई फायदा नहीं.. मुझे सब पता है. अब आप बताते हो या..

शाजिया आगे कुछ बोल पाती, उसके पहले रज़िया ने उसको चुप करा दिया.

रज़िया- रूको शाजिया, ऐसे इनकी समझ में बात नहीं आएगी. मैं ही पूरी बात इनको बताती हूँ.

रज़िया ने शुरू से सारी बातें बताईं, जिसे सुनकर अब्दुल जी का पारा चढ़ गया- उस कमीने की ये मजाल वो मेरी बेटी को रांड़ बनाएगा.. उसको तो ऐसी मौत मारूँगा कि उसकी रूह भी कांप जाएगी.

शाजिया- उसकी कोई जरूरत नहीं है.. क़ानून उसको सज़ा दे देगा. आप फरज़ाना के बारे में बताओ.. वो कौन है, कहाँ से आई.. मुझे सब कुछ जानना है.

अब्दुल- इस बारे में हम बाद में बात करेंगे. ऐसे बाहर वालों के सामने तुम अपने अब्बू को क्यों जलील कर रही हो?

शाजिया- कौन बाहर वाला? इनको सब पता है.. ये रूबी जिसके साथ आप कितनी बार सो चुके हो और ये रज़िया इसी की वजह से अपने मुझे भी नहीं बख्शा है.

अब्दुल- ये ग़लत है मैंने कुछ नहीं किया. मैं हमेशा से तुम्हें अच्छी नज़रों से देखता था. मेरे अन्दर के मर्द को तुमने जगाया था. तुमने ही मुझे ये पाप करने पे मजबूर किया था.

अपनी ग़लती का अहसास होते ही शाजिया शांत हो गई मगर फरज़ाना वाली बात उसने नहीं छोड़ी. आख़िर अब्दुल जी को उन सबको सारी कहानी बतानी पड़ी.

शाजिया- छी.. अब्बू आप इतने कैसे गिर सकते हो.. कितनी शादी करोगे आप.. उस फरज़ाना को बेटी बनाकर घर लाते तो मुझे ख़ुशी होती, आपने तो उसको रखैल बना दिया और उसके होते हुए भी आप क्यों तड़पने का नाटक कर रहे थे.. क्यों मेरी जिंदगी बर्बाद की आपने?

अब्दुल- वो नाटक तेरी अम्मी को दिखाने के लिए था ताकि उसको शक ना हो मगर मैं करता भी क्या? तुम्हारी अम्मी शुरू से ऐसी ही थी. मजबूर होकर मैंने फरज़ाना की अम्मी से शादी की, जब वो बीमार पड़ गई तो फरज़ाना को मैंने अपनी बना लिया.

शाजिया- अब्बू आपने पाप किया है अब आप इसको छुपाने की कोशिश मत करो.

अब्दुल- ऐसा कुछ नहीं है, तुम फरज़ाना से मिल चुकी हो.. वो अपनी मर्ज़ी से मेरे साथ है. मैंने उसको पहले ऑफर दिया था मगर वो मेरे साथ ही खुश थी.. चाहो तो तुम उससे मिल कर पूछ लो.

शाजिया को वो शॉपिंग वाली बात याद आ गई जब वो फरज़ाना से मिली थी. उसके बाद रज़िया और रूबी चली गईं और शाजिया के ज़िद करने पर अब्दुल जी उसको फरज़ाना के पास ले जाने को तैयार हो गए और दोनों घर से फरज़ाना के घर की ओर निकल गए.

मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, फरज़ाना जब मार्केट सामान लेने गई तो रोज़ी से उसकी मुलाकात हो गई. रोज़ी याद है ना आपको, अरे रूबी की मॉम.. हाँ वही शाजिया की बुआ रोज़ी, तो उनकी मुलाकात हो गई. अब बातों बातों में अचानक रोज़ी की तबीयत खराब हो गई तो फरज़ाना उसको अपने साथ अपने घर ले गई ताकि थोड़ा आराम करेगी तो ठीक हो जाएगी.

वहां पहुँच कर रोज़ी ने अपने शौहर फर्नाडिस को कॉल कर दिया कि उसकी तबीयत खराब है तो वो किसी के यहाँ रुकी है. उसने फरज़ाना के घर का पता भी दे दिया.

अब फ्रेंड्स आप समझ रहे होंगे कि यहाँ क्या होने वाला है? हाँ सही समझे भाई और बहन का मिलाप होने वाला है. तो चलो देर किस बात की, करवा देते है मिलाप.

अब्दुल और शाजिया जैसे ही फरज़ाना के घर के बाहर पहुँचे, तभी वहां फर्नाडिस और रूबी भी आ गए.

शाजिया- तुम यहाँ कैसे रूबी और ये साथ में कौन हैं?

रूबी- ये मेरे अब्बू हैं यार मेरी मॉम यहाँ हैं.. उनकी तबीयत ठीक नहीं तो यहाँ रुक गई थीं और उन्होंने अब्बू को कॉल पर बता दिया था. उस टाइम मैं अब्बू के साथ थी तो हम दोनों ही यहाँ आ गए.

उनकी बातें अब्दुल जी ने भी सुनी. अब उनकी हालत तो देखने लायक थी.

उन्होंने शाजिया से बहाना किया कि तुम अन्दर जाओ मैं थोड़ी देर में आता हूँ मगर शाजिया नहीं मानी और उनको अन्दर साथ ही लेकर गई, जहाँ सबसे पहले उनकी मुलाकात रोज़ी से ही हुई और रोज़ी को एक सेकेंड भी नहीं लगा अपने भाई को पहचानने के लिए.

अब यहाँ तो भाई और बहन का मिलाप हो रहा था. वहीं शाजिया और रूबी की नज़रें एक दूसरे से मिलीं कि ये क्या अनहोनी हो गई. रूबी ने अपने सगे मामू से चुदाई की थी.

रोज़ी ने एक के बाद एक सवाल पूछने शुरू कर दिए- भाभी, कहाँ हैं बच्चे कितने हैं वगैरह वगैरह..

अब्दुल जी ने जैसे तैसे रोज़ी के सवालों का जवाब दिया और उसको कहा कि घर जाकर सब बातें करेंगे, अभी नहीं. वैसे फरज़ाना के बारे में वो सब कुछ साफ छुपा गए.

फर्नाडिस और रोज़ी से शाजिया को मिलवाया और जैसे तैसे करके उन्हें घर भेज दिया बस रूबी वहीं रुक गई.

फरज़ाना को जब सारी कहानी पता लगी. उसने भी अब्दुल जी को बहुत सुनाई और रूबी ने भी शाजिया को बता दिया कि उस दिन ये मेरी मॉम के बारे में बहुत पूछ रहे थे. शायद इन्हें पहले ही पता था कि मैं इनकी भांजी हूँ. तो शाजिया ने अपने अब्बू को बहुत कोसा, भला बुरा कहा और अब्दुल जी मायूस होकर वहां से निकल गए.

आप सोच रहे होंगे मैं ये किस तरह कहानी बता रहा हूँ तो फ्रेंड्स इसका जवाब मैं लास्ट में आपको दूँगा. पहले ये देखो कि यहाँ क्या गजब हो गया.

अब्दुल जी ने समाज और इंसानियत के सारे नियम तोड़ दिए थे. अब वो अपनी सग़ी बेटी, सौतेली बेटी और भांजी की नज़रों में गिर गए थे. अब बस उनको टेंशन थी तो रोज़ी की कि वो कैसे उनका सामना करेंगे. उन्होंने तो उनकी बेटी को भी गंदा कर दिया था. बस यही सब सोच कर वो घर गए, एक पेपर पे कुछ लिखा और खुद को खत्म कर लिया.

जब शाजिया और रूबी फरज़ाना के साथ घर आए तो उनकी हालत देख कर दंग रह गए. अब अब्दुल जी इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे और कागज पर उन्होंने सबसे माफी माँगी थी. खास तौर पर वो सबको कह गए कि बस ये राज को यहीं खत्म कर दो. रोज़ी को कभी मत बताना कि मैं ऐसा था.

लो फ्रेंड्स, यही होता है बुरे काम का बुरा नतीजा. अब्दुल जी ने जो किया, वो शुरू में बड़ा मजेदार था. आपको भी पढ़कर आनंद आ रहा था. पहले फरज़ाना फिर शाजिया और रूबी.. मगर आख़िर में पाप का घड़ा भर गया तो जान देनी पड़ी.

बस फ्रेंड्स यही मेरा मकसद था आपको बताना कि कभी रिश्तों को गंदा मत करना. ये कहानी शुरू में अच्छी लगती है मगर इसका एंड कोई नहीं समझता.

अब खुद देखो शाहिद ने क्या नहीं किया. उसने भी खूब एंजाय किया, आपमें से कई नौजवान शाहिद जैसा बनने की चाहत करने लगे मगर ग़लत काम का कभी अच्छा फल नहीं मिलता और देखो आज शाहिद जेल की सलाखों के पीछे है, ऊपर से किसी को मुँह दिखाने लायक भी नहीं बचा. साथ में उसके दोस्त भी अपनी करनी का फल भुगत रहे हैं.

इनकी एक साथी रज़िया को भूल गए, आप सोच रहे होंगे इसने भी मज़े किए थे, ये कैसे बच गई. तो इसकी भी सुनो इसने अपने भाई को फास्ट करने के लिए जो पाप किया था, उसकी सज़ा इसको ये मिली कि धीमे धीमे याक़ूब इतना बिगड़ गया कि बाहर फ्रेंड्स के साथ हर किस्म के फालतू काम करने लगा, रंडियों के पास जाने लगा. एक बार तो सोते टाइम रज़िया के साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश भी की, रज़िया ने उसको मारा पीटा, मगर वो नहीं सुधरा.

तो यही थी रज़िया की सज़ा, उसकी करनी की सज़ा उसके भाई और अम्मी को भुगतनी पड़ी.

बहुत फ्रेंड्स को शुरू से लगता था कि फवाद और राबिया का शाजिया से कोई रिश्ता होगा.. मगर फ्रेंड्स ऐसा कुछ नहीं है. ये दो अलग अलग कहानी थीं, जो मैंने आपको साथ साथ सुना दी थीं. वैसे फवाद के बारे में बता देता हूँ कि वो उस लड़की के खूब मज़े लेने लगा और मौके का फायदा उठा कर राबिया भी समीर से चुदती रही. हाँ वो अलग बात है फवाद की नज़रों में वो शरीफ़ ही बनी रही. फिर एक बार चाचा भी गाँव से आए थे तो फवाद की गैर मौजूदगी में उन्होंने जमकर राबिया की चुदाई की. मतलब चाचा ससुर के मोटे लंड से बहु की चुदाई होती रही.

अब आप सोच रहे होंगे कि चाचा और राबिया ने भी पाप किया है तो इनको सज़ा मिली या नहीं, तो फ्रेंड्स जरूरी नहीं सब को यही सज़ा मिले, कुछ फैसले अल्लाह के हाथ होते हैं, वो कब और कैसे किसको सज़ा दे दे, ये सिर्फ़ वही जानता है. इनकी लाइफ में आगे क्या हुआ ये किसी को नहीं पता.

तो फ्रेंड्स ये थी कहानी- हवस ( रिश्तों में गंदगी ).. मैं जानता हूँ कि इतनी जल्दी कहानी खत्म होने से मेरे फ्रेंड दुखी होंगे मगर फ्रेंड्स कहानी तो एक ना एक दिन एंड होनी ही थी.

फ्रेंड्स अब आपसे विदा लेता हूँ और जाते जाते फिर कहता हूँ कि हिन्दुस्तान हमारा है, इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत ही रिश्ते नाते हैं. तो प्लीज़ इसकी कदर करें और प्यार से रहें. सभी रिश्ते बड़े होते हैं, इनको गंदा मत करना, बाकी ऊपर वाला आपको समझ देता ही है.

समाप्त
 
फ्रेंड्स कहानी कैसी लगी ज़रूर बताएँ

फ्रेंड्स आप सब ने इस कहानी को इतना अच्छा रिस्पोन्स दिया कि ये कहानी आरएसएस पर सबसे कम समय में एक लाख व्यूज पाने वाली पहली कहानी बन चुकी है दोस्तो आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद
 
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