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Guest
शाम को शाहिद सीधा रज़िया से मिलने गया. वो उसको लेकर बाहर एक कैफे में लेकर चला गया.
शाहिद- हाँ जानेजिगर.. क्या बात है अब कैसी है खाला की तबीयत. सब ठीक है ना?
रज़िया- हाँ अब मॉम अच्छी हैं. तुम बताओ कॉलेज के क्या हाल हैं?
शाहिद- जैसा पहले था, वैसा ही अब है. तू बता मेरी रांड़ का क्या हाल है.. कहाँ तक पहुँच गई वो?
रज़िया- बड़ी आग लगी है तेरे अन्दर शाजिया के नाम की? बताती हूँ पहले तू ये बता कि शबनम के क्या हाल हैं.. तुम दोनों को चुदाई का मौका मिलता है या नहीं?
शाहिद- तू मौके की बात कर रही है, वो तो मेरे साथ मेरे बेड पे ही सोती है.
रज़िया- क्या बात करता है यार.. अभी तक प्रोग्राम चालू है… लगा रह तेरे मज़े हो गए.. कच्ची कली चोद रहा है तू!
शाहिद- वो तो है.. मगर शबनम नादान है उसमें वो अदाएं नहीं.. जो तुझमें हैं.
रज़िया- बस बस मस्का मत लगा.. सीधे सीधे बोल दे कि शाजिया के हाल जानना है.
शाहिद- अब समझती है तो बताती क्यों नहीं.
रज़िया ने उस रात की सारी घटना शाहिद को बताई कि कैसे उसने भिखारी के पजामे में रिंग डाली थी, फिर याक़ूब वाली बात भी बताई.
शाहिद तो सुनकर उसका दीवाना हो गया.. उसका लंड फुंफकारने लगा.
शाहिद- अबे साली, अपने भाई का लंड चुसवा दिया उसको.. ऐसा क्यों किया? सबसे पहले उसके होंठों को मेरे लंड का टेस्ट करना था.
रज़िया- अरे वो तो छोटा है. शाजिया की लाइफ में पहले मर्द तुम ही रहोगे. अब ये बातें जाने दे.. ले ये मेमोरी कार्ड अपने फ़ोन में डाल ले. इसमें शाजिया का वो वीडियो भी है जब वो पूरी नंगी होकर याक़ूब के साथ मज़े ले रही थी.. समझे मेरे जानू!
शाहिद- क्या बात है जानेजिगर.. तूने तो कमाल कर दिया.. ला दे जल्दी से.
रज़िया- साथ में ये मोबाइल भी ले.. खराब हो गया इसे ठीक करवाना पड़ेगा.
शाहिद ने रज़िया का मेमोरी कार्ड अपने मोबाइल में डाला और शाजिया को वासना की आग में जलता देख कर पागल हो गया.
शाहिद- उह शाजिया साली, क्या जिस्म पाया है तूने.. उफ़ साला लंड का हाल से बेहाल हो गया.
रज़िया- अरे मेरे बलमा.. इतना क्यों तड़प रहा है.. तू कहे तो कहीं चलें, मेरी फुददी भी लंड के लिए बड़ी बेचैन हो रही है.
शाहिद- नहीं डार्लिंग.. आज नहीं कल, कॉलेज के बाद तू मेरे पुराने घर के पास आ जाना.. वहीं तेरी फुददी की आग ठंडी करूँगा. आज तो साली शबनम को थका देता हूँ ताकि कल वो लंड का नाम भी ना ले.
रज़िया- अच्छा ये बात है.. तो ठीक है कल ही सही.. इतना सब्र किया तो एक दिन और सही मगर तू ये मेरा मोबाइल तो ठीक करवा.
शाहिद- वो तो करवा दूँगा.. मगर मुझे ये बता कि तूने शाजिया को मॉर्डन ड्रेस के बारे में कहा या नहीं?
रज़िया- अरे कह दिया मगर उसका अब्बू बहुत खडूस है.. वो इतनी आसानी से मानेगा नहीं, वैसे मैंने उसको तरीका बताया है देखो साला पिघलता है या नहीं.
शाहिद- आज नहीं तो कल साले को मानना ही पड़ेगा. तू एक काम कर शाजिया को अबकी बार समझा.
शाहिद बोलता रहा और रज़िया गौर से सब सुनने लगी और ये सुनकर उसकी आँखों में चमक भी आ गई.
रज़िया- वाउ यार.. प्लान तो अच्छा है मगर क्या वो ये सब मानेगी?
शाहिद- वीडियो में देखा नहीं तूने.. साली कैसे लंड के लिए तड़प रही थी. उसका तो अब्बू भी मानेगा.. तू बस सही मौके पे चौका मारना.. समझी मेरी जान!
रज़िया- ठीक है मेरे शाहिद.. चल अब मुझे जाना होगा अम्मी को दवाई भी देनी है.
दोनों वहां से निकल गए और शाहिद ने रज़िया को घर छोड़ दिया.
शाम को अब्दुल जी भी फ्रेश होकर चले गए और जाते टाइम वो बोल गए कि उन्हें आने में देर हो जाएगी. बस फिर क्या था शाजिया को तो घर से बाहर जाने का मौका चाहिए, वो अपनी अम्मी से बहाना बना कर रज़िया से मिलने पहुँच गई.
शाजिया ने अपनी नई ड्रेस नहीं पहनी थी मगर उसने एक रेड सलवार सूट पहना था, जिसमें वो खिल रही थी. वो सीधे रज़िया के घर चली गई.. दरवाजा याक़ूब ने खोला.
याक़ूब- हैलो आपा.. कैसी हो आप? आओ अन्दर आओ.
शाजिया ने भी याक़ूब से हाथ मिलाया और अन्दर चली गई. याक़ूब को देख कर शाजिया को वो सीन याद आ गया तो वो मुस्कुराने लगी, जिसे देख याक़ूब भी मुस्कुरा दिया.
शाजिया- रज़िया कहाँ है और खाला कैसी हैं.. अब उनकी तबीयत ठीक है ना?
याक़ूब- आपा किसी काम से बाहर गई हैं.. और मॉम ठीक हैं मगर वो उस कमरे में आराम कर रही हैं.
शाजिया- ओह अच्छा चलो उनको आराम करने दो.. वैसे रज़िया कब तक आएगी?
याक़ूब- अभी आ जाएंगी.. उनका मोबाइल खराब हो गया तो वो शायद उसे शॉप पर देने गई हैं. आप बैठो मैं पानी लेकर आता हूँ.
शाजिया- अरे नहीं अभी पानी पीने का मूड नहीं.. तू यहाँ मेरे पास बैठ.
याक़ूब वहीं शाजिया के सामने बैठ गया उसने बरमूडा पहना हुआ था और शायद अन्दर कुछ नहीं पहना था.
याक़ूब- आपा एक बात पूछूँ.. आप सच बताओगी मुझे.. प्लीज़!
शाजिया- हाँ पूछ क्या बात है? सच और झूठ की क्या बात है.. मुझे पता होगा तो बता दूँगी तुम्हें.. नहीं तो नहीं!
याक़ूब- उस रात अपने मेरे साथ क्या किया था, जो सुबह अपने आप मेरी आँख खुली.
याक़ूब की बात सुनते ही शाजिया के पैरों तले ज़मीन निकल गई. सवाल ही ऐसा किया था उसने… मगर शाजिया ने संभाल लिया- अरे पागल.. मैंने क्या किया? रज़िया ने तुझसे मज़ाक किया था तुम्हारी नींद पूरी हो गई होगी तब तू उठ गया.. सिंपल है!
याक़ूब- आप झूठ बोल रही हो, मुझे पता है. मैंने पहले ही कहा था सच बताना नहीं तो मना कर देना.
शाजिया- अरे मैं सच बोल रही हूँ, तुझे ऐसा क्यों लगता है मैं झूठ बोल रही हूँ और मैं तुम्हारे साथ क्या कर सकती हूँ?
याक़ूब- आपा, ये तो मुझे पता नहीं कि आप झूठ क्यों बोल रही हो मगर क्या कर सकता हूँ. आप ये मत बोलो मैं छोटा हूँ.. अब मैं इतना भी छोटा नहीं कि कुछ समझ ना सकूं. उस रात आप बिना कपड़ों के मेरी लूली से खेल रही थीं ना? आपको क्या लगता है ऐसे में कोई सो सकता है.. बोलो?
शाजिया तो बेचारी अभी तक कुँवारी थी मगर आज याक़ूब ने अपनी बातों से उसकी गांड फाड़ दी थी. उसके माथे पे पसीने की बूंदें आ गईं और उसको कुछ समझ ही नहीं आया अब वो करे तो क्या करे, कैसे याक़ूब को पता लग गया. वो जाग कर मज़े ले रहा था.. ये सोचते ही उसकी हालत खराब हो गई.
याक़ूब- क्या हुआ आपा.. बोलो अब चुप क्यों हो.. कह दो ये भी झूठ है?
शाजिया- आई एम सॉरी याक़ूब व्व..वो मुझे उस टाइम कुछ समझ नहीं आया..
याक़ूब- अरे आपा आप टेंशन मत लो प्लीज़.. मैंने ये किसी को नहीं बताया है और बताऊंगा भी नहीं.. प्लीज़ आप बिल्कुल भी घबराओ मत, उस रात जो हुआ सच्ची बहुत अच्छा था. आपने तो मेरी लाइफ बना दी.. बस एक बार और वैसा कर दो ना प्लीज़ आपा.. उसके बाद मैं कुछ नहीं कहूँगा.
शाजिया के तो होश उड़ गए, याक़ूब उसे परोक्ष धमकी दे रहा था और उसके मुँह से एक शब्द नहीं निकल पा रहा था.
याक़ूब- क्या हुआ आप कुछ तो बोलो ना.. मेरी बात का जवाब तो दो या फिर मैं ये समझूँ कि आप नहीं करोगी.. बोलो?
तभी..
रज़िया- थप्पड़ से काम चल जाएगा या डंडे से तेरी पिटाई करूँ चल अपनी चॉइस तू खुद बता दे.
रज़िया बहुत पहले वहां आ गई थी, वो बस याक़ूब की बातें सुन रही थी और जो हाल शाजिया का था, उसे भी वो देख रही थी. जब उसे लगा कि अब बहुत ज़्यादा हो गया है तो उसने अन्दर आकर याक़ूब को धमकी दी.
रज़िया को देख कर शाजिया की जान में जान आई.. वहीं याक़ूब की हवा निकल गई.
याक़ूब- व्व..वो आपा मैं तो बस ऐसे ही..
रज़िया- चुप.. इत्ता सा है और अभी से धमकी देना सीख गया, उससे क्या पूछता है जो पूछना है तू मुझसे पूछ! वो क्या कर रही थी और क्या नहीं.. बोल अब?
शाजिया- जाने दो ना आपा.. बात बढ़ाने से क्या फायदा.. ग़लती तो मेरी ही है ना!
रज़िया- नहीं तुम्हारी कोई ग़लती नहीं है.. ग़लती तो मेरी है जो मैंने अपने भाई पे इतना विश्वास किया कि इसे कुछ पता नहीं.. ग़लती मेरी है जो मैंने सोचा ये बहुत गहरी नींद में सोता है, इसे कुछ पता नहीं लगेगा. ग़लती मेरी है जो मैं इसे बहुत प्यार करती हूँ.. ग़लती मेरी है जो मैंने इसकी खुजली पर दवा लगाने के लिए इसकी लली को टच किया. मगर मुझे पता नहीं था कि मेरा अपना सगा भाई रात को सोते हुए मज़ा ले रहा था और मुझे पता भी नहीं लगा.
रज़िया की बात सुनकर शाजिया और याक़ूब दोनों टेंशन में आ गए.. क्योंकि वो बहुत ज़्यादा गुस्से में थी. याक़ूब की आँखों से आँसू निकल आए वो बहुत डर गया था. इधर रज़िया भी खड़ी उसको घूर रही थी..
वो भाग कर रज़िया के पास गया और उससे लिपट कर जोर से रोने लगा- मुझे माफ़ कर दो आपा, सॉरी मुझसे ग़लती हो गई प्लीज़ आपा.. आगे से मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा.
शाहिद- हाँ जानेजिगर.. क्या बात है अब कैसी है खाला की तबीयत. सब ठीक है ना?
रज़िया- हाँ अब मॉम अच्छी हैं. तुम बताओ कॉलेज के क्या हाल हैं?
शाहिद- जैसा पहले था, वैसा ही अब है. तू बता मेरी रांड़ का क्या हाल है.. कहाँ तक पहुँच गई वो?
रज़िया- बड़ी आग लगी है तेरे अन्दर शाजिया के नाम की? बताती हूँ पहले तू ये बता कि शबनम के क्या हाल हैं.. तुम दोनों को चुदाई का मौका मिलता है या नहीं?
शाहिद- तू मौके की बात कर रही है, वो तो मेरे साथ मेरे बेड पे ही सोती है.
रज़िया- क्या बात करता है यार.. अभी तक प्रोग्राम चालू है… लगा रह तेरे मज़े हो गए.. कच्ची कली चोद रहा है तू!
शाहिद- वो तो है.. मगर शबनम नादान है उसमें वो अदाएं नहीं.. जो तुझमें हैं.
रज़िया- बस बस मस्का मत लगा.. सीधे सीधे बोल दे कि शाजिया के हाल जानना है.
शाहिद- अब समझती है तो बताती क्यों नहीं.
रज़िया ने उस रात की सारी घटना शाहिद को बताई कि कैसे उसने भिखारी के पजामे में रिंग डाली थी, फिर याक़ूब वाली बात भी बताई.
शाहिद तो सुनकर उसका दीवाना हो गया.. उसका लंड फुंफकारने लगा.
शाहिद- अबे साली, अपने भाई का लंड चुसवा दिया उसको.. ऐसा क्यों किया? सबसे पहले उसके होंठों को मेरे लंड का टेस्ट करना था.
रज़िया- अरे वो तो छोटा है. शाजिया की लाइफ में पहले मर्द तुम ही रहोगे. अब ये बातें जाने दे.. ले ये मेमोरी कार्ड अपने फ़ोन में डाल ले. इसमें शाजिया का वो वीडियो भी है जब वो पूरी नंगी होकर याक़ूब के साथ मज़े ले रही थी.. समझे मेरे जानू!
शाहिद- क्या बात है जानेजिगर.. तूने तो कमाल कर दिया.. ला दे जल्दी से.
रज़िया- साथ में ये मोबाइल भी ले.. खराब हो गया इसे ठीक करवाना पड़ेगा.
शाहिद ने रज़िया का मेमोरी कार्ड अपने मोबाइल में डाला और शाजिया को वासना की आग में जलता देख कर पागल हो गया.
शाहिद- उह शाजिया साली, क्या जिस्म पाया है तूने.. उफ़ साला लंड का हाल से बेहाल हो गया.
रज़िया- अरे मेरे बलमा.. इतना क्यों तड़प रहा है.. तू कहे तो कहीं चलें, मेरी फुददी भी लंड के लिए बड़ी बेचैन हो रही है.
शाहिद- नहीं डार्लिंग.. आज नहीं कल, कॉलेज के बाद तू मेरे पुराने घर के पास आ जाना.. वहीं तेरी फुददी की आग ठंडी करूँगा. आज तो साली शबनम को थका देता हूँ ताकि कल वो लंड का नाम भी ना ले.
रज़िया- अच्छा ये बात है.. तो ठीक है कल ही सही.. इतना सब्र किया तो एक दिन और सही मगर तू ये मेरा मोबाइल तो ठीक करवा.
शाहिद- वो तो करवा दूँगा.. मगर मुझे ये बता कि तूने शाजिया को मॉर्डन ड्रेस के बारे में कहा या नहीं?
रज़िया- अरे कह दिया मगर उसका अब्बू बहुत खडूस है.. वो इतनी आसानी से मानेगा नहीं, वैसे मैंने उसको तरीका बताया है देखो साला पिघलता है या नहीं.
शाहिद- आज नहीं तो कल साले को मानना ही पड़ेगा. तू एक काम कर शाजिया को अबकी बार समझा.
शाहिद बोलता रहा और रज़िया गौर से सब सुनने लगी और ये सुनकर उसकी आँखों में चमक भी आ गई.
रज़िया- वाउ यार.. प्लान तो अच्छा है मगर क्या वो ये सब मानेगी?
शाहिद- वीडियो में देखा नहीं तूने.. साली कैसे लंड के लिए तड़प रही थी. उसका तो अब्बू भी मानेगा.. तू बस सही मौके पे चौका मारना.. समझी मेरी जान!
रज़िया- ठीक है मेरे शाहिद.. चल अब मुझे जाना होगा अम्मी को दवाई भी देनी है.
दोनों वहां से निकल गए और शाहिद ने रज़िया को घर छोड़ दिया.
शाम को अब्दुल जी भी फ्रेश होकर चले गए और जाते टाइम वो बोल गए कि उन्हें आने में देर हो जाएगी. बस फिर क्या था शाजिया को तो घर से बाहर जाने का मौका चाहिए, वो अपनी अम्मी से बहाना बना कर रज़िया से मिलने पहुँच गई.
शाजिया ने अपनी नई ड्रेस नहीं पहनी थी मगर उसने एक रेड सलवार सूट पहना था, जिसमें वो खिल रही थी. वो सीधे रज़िया के घर चली गई.. दरवाजा याक़ूब ने खोला.
याक़ूब- हैलो आपा.. कैसी हो आप? आओ अन्दर आओ.
शाजिया ने भी याक़ूब से हाथ मिलाया और अन्दर चली गई. याक़ूब को देख कर शाजिया को वो सीन याद आ गया तो वो मुस्कुराने लगी, जिसे देख याक़ूब भी मुस्कुरा दिया.
शाजिया- रज़िया कहाँ है और खाला कैसी हैं.. अब उनकी तबीयत ठीक है ना?
याक़ूब- आपा किसी काम से बाहर गई हैं.. और मॉम ठीक हैं मगर वो उस कमरे में आराम कर रही हैं.
शाजिया- ओह अच्छा चलो उनको आराम करने दो.. वैसे रज़िया कब तक आएगी?
याक़ूब- अभी आ जाएंगी.. उनका मोबाइल खराब हो गया तो वो शायद उसे शॉप पर देने गई हैं. आप बैठो मैं पानी लेकर आता हूँ.
शाजिया- अरे नहीं अभी पानी पीने का मूड नहीं.. तू यहाँ मेरे पास बैठ.
याक़ूब वहीं शाजिया के सामने बैठ गया उसने बरमूडा पहना हुआ था और शायद अन्दर कुछ नहीं पहना था.
याक़ूब- आपा एक बात पूछूँ.. आप सच बताओगी मुझे.. प्लीज़!
शाजिया- हाँ पूछ क्या बात है? सच और झूठ की क्या बात है.. मुझे पता होगा तो बता दूँगी तुम्हें.. नहीं तो नहीं!
याक़ूब- उस रात अपने मेरे साथ क्या किया था, जो सुबह अपने आप मेरी आँख खुली.
याक़ूब की बात सुनते ही शाजिया के पैरों तले ज़मीन निकल गई. सवाल ही ऐसा किया था उसने… मगर शाजिया ने संभाल लिया- अरे पागल.. मैंने क्या किया? रज़िया ने तुझसे मज़ाक किया था तुम्हारी नींद पूरी हो गई होगी तब तू उठ गया.. सिंपल है!
याक़ूब- आप झूठ बोल रही हो, मुझे पता है. मैंने पहले ही कहा था सच बताना नहीं तो मना कर देना.
शाजिया- अरे मैं सच बोल रही हूँ, तुझे ऐसा क्यों लगता है मैं झूठ बोल रही हूँ और मैं तुम्हारे साथ क्या कर सकती हूँ?
याक़ूब- आपा, ये तो मुझे पता नहीं कि आप झूठ क्यों बोल रही हो मगर क्या कर सकता हूँ. आप ये मत बोलो मैं छोटा हूँ.. अब मैं इतना भी छोटा नहीं कि कुछ समझ ना सकूं. उस रात आप बिना कपड़ों के मेरी लूली से खेल रही थीं ना? आपको क्या लगता है ऐसे में कोई सो सकता है.. बोलो?
शाजिया तो बेचारी अभी तक कुँवारी थी मगर आज याक़ूब ने अपनी बातों से उसकी गांड फाड़ दी थी. उसके माथे पे पसीने की बूंदें आ गईं और उसको कुछ समझ ही नहीं आया अब वो करे तो क्या करे, कैसे याक़ूब को पता लग गया. वो जाग कर मज़े ले रहा था.. ये सोचते ही उसकी हालत खराब हो गई.
याक़ूब- क्या हुआ आपा.. बोलो अब चुप क्यों हो.. कह दो ये भी झूठ है?
शाजिया- आई एम सॉरी याक़ूब व्व..वो मुझे उस टाइम कुछ समझ नहीं आया..
याक़ूब- अरे आपा आप टेंशन मत लो प्लीज़.. मैंने ये किसी को नहीं बताया है और बताऊंगा भी नहीं.. प्लीज़ आप बिल्कुल भी घबराओ मत, उस रात जो हुआ सच्ची बहुत अच्छा था. आपने तो मेरी लाइफ बना दी.. बस एक बार और वैसा कर दो ना प्लीज़ आपा.. उसके बाद मैं कुछ नहीं कहूँगा.
शाजिया के तो होश उड़ गए, याक़ूब उसे परोक्ष धमकी दे रहा था और उसके मुँह से एक शब्द नहीं निकल पा रहा था.
याक़ूब- क्या हुआ आप कुछ तो बोलो ना.. मेरी बात का जवाब तो दो या फिर मैं ये समझूँ कि आप नहीं करोगी.. बोलो?
तभी..
रज़िया- थप्पड़ से काम चल जाएगा या डंडे से तेरी पिटाई करूँ चल अपनी चॉइस तू खुद बता दे.
रज़िया बहुत पहले वहां आ गई थी, वो बस याक़ूब की बातें सुन रही थी और जो हाल शाजिया का था, उसे भी वो देख रही थी. जब उसे लगा कि अब बहुत ज़्यादा हो गया है तो उसने अन्दर आकर याक़ूब को धमकी दी.
रज़िया को देख कर शाजिया की जान में जान आई.. वहीं याक़ूब की हवा निकल गई.
याक़ूब- व्व..वो आपा मैं तो बस ऐसे ही..
रज़िया- चुप.. इत्ता सा है और अभी से धमकी देना सीख गया, उससे क्या पूछता है जो पूछना है तू मुझसे पूछ! वो क्या कर रही थी और क्या नहीं.. बोल अब?
शाजिया- जाने दो ना आपा.. बात बढ़ाने से क्या फायदा.. ग़लती तो मेरी ही है ना!
रज़िया- नहीं तुम्हारी कोई ग़लती नहीं है.. ग़लती तो मेरी है जो मैंने अपने भाई पे इतना विश्वास किया कि इसे कुछ पता नहीं.. ग़लती मेरी है जो मैंने सोचा ये बहुत गहरी नींद में सोता है, इसे कुछ पता नहीं लगेगा. ग़लती मेरी है जो मैं इसे बहुत प्यार करती हूँ.. ग़लती मेरी है जो मैंने इसकी खुजली पर दवा लगाने के लिए इसकी लली को टच किया. मगर मुझे पता नहीं था कि मेरा अपना सगा भाई रात को सोते हुए मज़ा ले रहा था और मुझे पता भी नहीं लगा.
रज़िया की बात सुनकर शाजिया और याक़ूब दोनों टेंशन में आ गए.. क्योंकि वो बहुत ज़्यादा गुस्से में थी. याक़ूब की आँखों से आँसू निकल आए वो बहुत डर गया था. इधर रज़िया भी खड़ी उसको घूर रही थी..
वो भाग कर रज़िया के पास गया और उससे लिपट कर जोर से रोने लगा- मुझे माफ़ कर दो आपा, सॉरी मुझसे ग़लती हो गई प्लीज़ आपा.. आगे से मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा.