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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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शाम को शाहिद सीधा रज़िया से मिलने गया. वो उसको लेकर बाहर एक कैफे में लेकर चला गया.

शाहिद- हाँ जानेजिगर.. क्या बात है अब कैसी है खाला की तबीयत. सब ठीक है ना?

रज़िया- हाँ अब मॉम अच्छी हैं. तुम बताओ कॉलेज के क्या हाल हैं?

शाहिद- जैसा पहले था, वैसा ही अब है. तू बता मेरी रांड़ का क्या हाल है.. कहाँ तक पहुँच गई वो?

रज़िया- बड़ी आग लगी है तेरे अन्दर शाजिया के नाम की? बताती हूँ पहले तू ये बता कि शबनम के क्या हाल हैं.. तुम दोनों को चुदाई का मौका मिलता है या नहीं?

शाहिद- तू मौके की बात कर रही है, वो तो मेरे साथ मेरे बेड पे ही सोती है.

रज़िया- क्या बात करता है यार.. अभी तक प्रोग्राम चालू है… लगा रह तेरे मज़े हो गए.. कच्ची कली चोद रहा है तू!

शाहिद- वो तो है.. मगर शबनम नादान है उसमें वो अदाएं नहीं.. जो तुझमें हैं.

रज़िया- बस बस मस्का मत लगा.. सीधे सीधे बोल दे कि शाजिया के हाल जानना है.

शाहिद- अब समझती है तो बताती क्यों नहीं.

रज़िया ने उस रात की सारी घटना शाहिद को बताई कि कैसे उसने भिखारी के पजामे में रिंग डाली थी, फिर याक़ूब वाली बात भी बताई.

शाहिद तो सुनकर उसका दीवाना हो गया.. उसका लंड फुंफकारने लगा.

शाहिद- अबे साली, अपने भाई का लंड चुसवा दिया उसको.. ऐसा क्यों किया? सबसे पहले उसके होंठों को मेरे लंड का टेस्ट करना था.

रज़िया- अरे वो तो छोटा है. शाजिया की लाइफ में पहले मर्द तुम ही रहोगे. अब ये बातें जाने दे.. ले ये मेमोरी कार्ड अपने फ़ोन में डाल ले. इसमें शाजिया का वो वीडियो भी है जब वो पूरी नंगी होकर याक़ूब के साथ मज़े ले रही थी.. समझे मेरे जानू!

शाहिद- क्या बात है जानेजिगर.. तूने तो कमाल कर दिया.. ला दे जल्दी से.

रज़िया- साथ में ये मोबाइल भी ले.. खराब हो गया इसे ठीक करवाना पड़ेगा.

शाहिद ने रज़िया का मेमोरी कार्ड अपने मोबाइल में डाला और शाजिया को वासना की आग में जलता देख कर पागल हो गया.

शाहिद- उह शाजिया साली, क्या जिस्म पाया है तूने.. उफ़ साला लंड का हाल से बेहाल हो गया.

रज़िया- अरे मेरे बलमा.. इतना क्यों तड़प रहा है.. तू कहे तो कहीं चलें, मेरी फुददी भी लंड के लिए बड़ी बेचैन हो रही है.

शाहिद- नहीं डार्लिंग.. आज नहीं कल, कॉलेज के बाद तू मेरे पुराने घर के पास आ जाना.. वहीं तेरी फुददी की आग ठंडी करूँगा. आज तो साली शबनम को थका देता हूँ ताकि कल वो लंड का नाम भी ना ले.

रज़िया- अच्छा ये बात है.. तो ठीक है कल ही सही.. इतना सब्र किया तो एक दिन और सही मगर तू ये मेरा मोबाइल तो ठीक करवा.

शाहिद- वो तो करवा दूँगा.. मगर मुझे ये बता कि तूने शाजिया को मॉर्डन ड्रेस के बारे में कहा या नहीं?

रज़िया- अरे कह दिया मगर उसका अब्बू बहुत खडूस है.. वो इतनी आसानी से मानेगा नहीं, वैसे मैंने उसको तरीका बताया है देखो साला पिघलता है या नहीं.

शाहिद- आज नहीं तो कल साले को मानना ही पड़ेगा. तू एक काम कर शाजिया को अबकी बार समझा.

शाहिद बोलता रहा और रज़िया गौर से सब सुनने लगी और ये सुनकर उसकी आँखों में चमक भी आ गई.

रज़िया- वाउ यार.. प्लान तो अच्छा है मगर क्या वो ये सब मानेगी?

शाहिद- वीडियो में देखा नहीं तूने.. साली कैसे लंड के लिए तड़प रही थी. उसका तो अब्बू भी मानेगा.. तू बस सही मौके पे चौका मारना.. समझी मेरी जान!

रज़िया- ठीक है मेरे शाहिद.. चल अब मुझे जाना होगा अम्मी को दवाई भी देनी है.

दोनों वहां से निकल गए और शाहिद ने रज़िया को घर छोड़ दिया.

शाम को अब्दुल जी भी फ्रेश होकर चले गए और जाते टाइम वो बोल गए कि उन्हें आने में देर हो जाएगी. बस फिर क्या था शाजिया को तो घर से बाहर जाने का मौका चाहिए, वो अपनी अम्मी से बहाना बना कर रज़िया से मिलने पहुँच गई.

शाजिया ने अपनी नई ड्रेस नहीं पहनी थी मगर उसने एक रेड सलवार सूट पहना था, जिसमें वो खिल रही थी. वो सीधे रज़िया के घर चली गई.. दरवाजा याक़ूब ने खोला.

याक़ूब- हैलो आपा.. कैसी हो आप? आओ अन्दर आओ.

शाजिया ने भी याक़ूब से हाथ मिलाया और अन्दर चली गई. याक़ूब को देख कर शाजिया को वो सीन याद आ गया तो वो मुस्कुराने लगी, जिसे देख याक़ूब भी मुस्कुरा दिया.

शाजिया- रज़िया कहाँ है और खाला कैसी हैं.. अब उनकी तबीयत ठीक है ना?

याक़ूब- आपा किसी काम से बाहर गई हैं.. और मॉम ठीक हैं मगर वो उस कमरे में आराम कर रही हैं.

शाजिया- ओह अच्छा चलो उनको आराम करने दो.. वैसे रज़िया कब तक आएगी?

याक़ूब- अभी आ जाएंगी.. उनका मोबाइल खराब हो गया तो वो शायद उसे शॉप पर देने गई हैं. आप बैठो मैं पानी लेकर आता हूँ.

शाजिया- अरे नहीं अभी पानी पीने का मूड नहीं.. तू यहाँ मेरे पास बैठ.

याक़ूब वहीं शाजिया के सामने बैठ गया उसने बरमूडा पहना हुआ था और शायद अन्दर कुछ नहीं पहना था.

याक़ूब- आपा एक बात पूछूँ.. आप सच बताओगी मुझे.. प्लीज़!

शाजिया- हाँ पूछ क्या बात है? सच और झूठ की क्या बात है.. मुझे पता होगा तो बता दूँगी तुम्हें.. नहीं तो नहीं!

याक़ूब- उस रात अपने मेरे साथ क्या किया था, जो सुबह अपने आप मेरी आँख खुली.

याक़ूब की बात सुनते ही शाजिया के पैरों तले ज़मीन निकल गई. सवाल ही ऐसा किया था उसने… मगर शाजिया ने संभाल लिया- अरे पागल.. मैंने क्या किया? रज़िया ने तुझसे मज़ाक किया था तुम्हारी नींद पूरी हो गई होगी तब तू उठ गया.. सिंपल है!

याक़ूब- आप झूठ बोल रही हो, मुझे पता है. मैंने पहले ही कहा था सच बताना नहीं तो मना कर देना.

शाजिया- अरे मैं सच बोल रही हूँ, तुझे ऐसा क्यों लगता है मैं झूठ बोल रही हूँ और मैं तुम्हारे साथ क्या कर सकती हूँ?

याक़ूब- आपा, ये तो मुझे पता नहीं कि आप झूठ क्यों बोल रही हो मगर क्या कर सकता हूँ. आप ये मत बोलो मैं छोटा हूँ.. अब मैं इतना भी छोटा नहीं कि कुछ समझ ना सकूं. उस रात आप बिना कपड़ों के मेरी लूली से खेल रही थीं ना? आपको क्या लगता है ऐसे में कोई सो सकता है.. बोलो?

शाजिया तो बेचारी अभी तक कुँवारी थी मगर आज याक़ूब ने अपनी बातों से उसकी गांड फाड़ दी थी. उसके माथे पे पसीने की बूंदें आ गईं और उसको कुछ समझ ही नहीं आया अब वो करे तो क्या करे, कैसे याक़ूब को पता लग गया. वो जाग कर मज़े ले रहा था.. ये सोचते ही उसकी हालत खराब हो गई.

याक़ूब- क्या हुआ आपा.. बोलो अब चुप क्यों हो.. कह दो ये भी झूठ है?

शाजिया- आई एम सॉरी याक़ूब व्व..वो मुझे उस टाइम कुछ समझ नहीं आया..

याक़ूब- अरे आपा आप टेंशन मत लो प्लीज़.. मैंने ये किसी को नहीं बताया है और बताऊंगा भी नहीं.. प्लीज़ आप बिल्कुल भी घबराओ मत, उस रात जो हुआ सच्ची बहुत अच्छा था. आपने तो मेरी लाइफ बना दी.. बस एक बार और वैसा कर दो ना प्लीज़ आपा.. उसके बाद मैं कुछ नहीं कहूँगा.

शाजिया के तो होश उड़ गए, याक़ूब उसे परोक्ष धमकी दे रहा था और उसके मुँह से एक शब्द नहीं निकल पा रहा था.

याक़ूब- क्या हुआ आप कुछ तो बोलो ना.. मेरी बात का जवाब तो दो या फिर मैं ये समझूँ कि आप नहीं करोगी.. बोलो?

तभी..

रज़िया- थप्पड़ से काम चल जाएगा या डंडे से तेरी पिटाई करूँ चल अपनी चॉइस तू खुद बता दे.

रज़िया बहुत पहले वहां आ गई थी, वो बस याक़ूब की बातें सुन रही थी और जो हाल शाजिया का था, उसे भी वो देख रही थी. जब उसे लगा कि अब बहुत ज़्यादा हो गया है तो उसने अन्दर आकर याक़ूब को धमकी दी.

रज़िया को देख कर शाजिया की जान में जान आई.. वहीं याक़ूब की हवा निकल गई.

याक़ूब- व्व..वो आपा मैं तो बस ऐसे ही..

रज़िया- चुप.. इत्ता सा है और अभी से धमकी देना सीख गया, उससे क्या पूछता है जो पूछना है तू मुझसे पूछ! वो क्या कर रही थी और क्या नहीं.. बोल अब?

शाजिया- जाने दो ना आपा.. बात बढ़ाने से क्या फायदा.. ग़लती तो मेरी ही है ना!

रज़िया- नहीं तुम्हारी कोई ग़लती नहीं है.. ग़लती तो मेरी है जो मैंने अपने भाई पे इतना विश्वास किया कि इसे कुछ पता नहीं.. ग़लती मेरी है जो मैंने सोचा ये बहुत गहरी नींद में सोता है, इसे कुछ पता नहीं लगेगा. ग़लती मेरी है जो मैं इसे बहुत प्यार करती हूँ.. ग़लती मेरी है जो मैंने इसकी खुजली पर दवा लगाने के लिए इसकी लली को टच किया. मगर मुझे पता नहीं था कि मेरा अपना सगा भाई रात को सोते हुए मज़ा ले रहा था और मुझे पता भी नहीं लगा.

रज़िया की बात सुनकर शाजिया और याक़ूब दोनों टेंशन में आ गए.. क्योंकि वो बहुत ज़्यादा गुस्से में थी. याक़ूब की आँखों से आँसू निकल आए वो बहुत डर गया था. इधर रज़िया भी खड़ी उसको घूर रही थी..

वो भाग कर रज़िया के पास गया और उससे लिपट कर जोर से रोने लगा- मुझे माफ़ कर दो आपा, सॉरी मुझसे ग़लती हो गई प्लीज़ आपा.. आगे से मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा.

 
फ्रेंड्स, उस रात आप बड़ा बोल रहे थे ना ऐसी नींद किसी की नहीं होती कि कोई लंड को ऐसे चूसे, मसले और आँख ना खुले.. लो आपकी बात सच हो गई. ये याक़ूब भी जाग गया था.. भले ही ये नासमझ हो मगर वो इतना भी छोटा नहीं था कि लंड चुसाई को एंजाय ना करे, वही इसने किया. चलो अब आगे देखो क्या होता है.

रज़िया- अरे मेरा सोना तो रोने लगा.. चल अब बस चुप हो ज़ा, नहीं करती गुस्सा..

रज़िया और शाजिया दोनों ने उसको काफ़ी देर तक चुप करवाया तब कहीं वो चुप हुआ. फिर उसको पानी पिलाया और बेड पे अपने पास बिठा कर रज़िया उसके बालों में हाथ घुमाते हुए शाजिया को इशारा किया कि वो जैसे कहे तू हाँ कह देना, शाजिया भी समझ गई.

रज़िया- सोना, अब बोल तू ठीक है ना?

याक़ूब- हाँ आपा.. मैं ठीक हूँ सॉरी आपा..

रज़िया- अरे अब जाने दे, तू जब उठ गया था तो कुछ बोला क्यों नहीं, बस इसी लिए मुझे गुस्सा आया और शाजिया जो कर रही थी, मैंने ही तो इसे कहा था ताकि तुझे आराम मिले. उस दिन कैसे तुझे खुजली हो रही थी.. बस उस रात भी कुछ ऐसा ही हुआ था, तुझे पता नहीं लगा. क्यों शाजिया तू बता ना?

शाजिया- हाँ याक़ूब, तू नींद में बहुत परेशान हो रहा था मैं इसी लिए तो आई थी.. रज़िया आपा ने मुझे बुलाया था.

याक़ूब- अच्छा ये बात है मगर आपा ने आपको क्यों बुलाया? उस दिन तो आपा ने खुद तेल लगाया था?

रज़िया- अरे बुद्धू ये शाजिया को खुजली का इलाज करना आता है.. तेल से कुछ देर में आराम मिलता है मगर इसको दूसरा तरीका पता है, बस ये वही कर रही थी.

याक़ूब- उह अच्छा.. मगर आपा इन्होंने कपड़े क्यों निकाले हुए थे?

रज़िया- वो इलाज ऐसे ही होता है, अब तू सवाल करना बंद कर.. पहले ये बता तू जगा कब था और तुझे कैसे पता लगा कि उस रात ये बिना कपड़ों के थी?

याक़ूब- आपा मैं तो आराम से सो रहा था मगर अचानक मेरी लूली में दर्द हुआ तो मेरी आँख खुल गई. ये शाजिया आपा को देख कर मैं बहुत डर गया और जल्दी से मैंने आँख बंद कर ली. फिर मैं सोचने लगा कोई भूत तो नहीं आ गया मगर आपकी आवाज़ सुनी, फिर शाजिया आपा की आवाज़ सुनी.. तब मुझे लगा आप जाग रही हो और आपकी कोई फ्रेंड मेरे साथ कुछ कर रही है. बस फिर मुझे बहुत आनंद आने लगा और मैं चुप पड़ा रहा.

रज़िया- अच्छा जब तेरी आँख खुली तो शाजिया कहाँ थी और तूने क्या आवाज़ सुनी?

याक़ूब- आपा मेरी आँख खुली तब शाजिया आपा मेरे पैरों के पास बैठी हुई थीं और इनके बाल मेरे ऊपर थे. ये शायद मेरी लूली पे कोई गीली सी चीज लगा रही थीं. मुझे कुछ समझ नहीं आया फिर मेरी लूली से पता नहीं क्या निकला.. वो सूसू तो नहीं थी लेकिन कुछ निकला था, मुझे ऐसा लगा. फिर आपा ने आपको कुछ कहा.. कुछ रस चाटने की बात की. मुझे ठीक से समझ नहीं आया. फिर आपने भी रस की बात की. थोड़ी देर बाद आप दोनों दूर हो गईं. तब मैंने आँख खोल कर देखा तो शाजिया आपा एकदम नंगी थीं.. मैं फिर डर गया कहीं आपने देख लिया तो आप गुस्सा हो जाओगी तो मैं सो गया. मैंने बहुत देर तक आप दोनों की हल्की आवाजें सुनी मगर कुछ समझ नहीं आया. फिर पता नहीं मैं कब सो गया.

रज़िया ने दिमाग़ पर जोर डाला तो उसे याद आ गया कि याक़ूब कब उठा होगा. चलो आप भी देख लो कुछ समझ आ जाए.

शाजिया की फुददी एकदम आग का गोला बन गई जो किसी भी पल फटने वाले थी और उसी जोश में वो लंड को पूरा मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगी. वो साथ में अपनी फुददी को रगड़ने लगी, उसी पल याक़ूब ने आँख खोली थी.

दोनों का फुव्वारा साथ में छूटा मगर इस बार शाजिया जोश में थी तो याक़ूब का सारा रस वो गटक गई और अपनी फुददी का रस अपने हाथ पे लेकर वहीं ज़मीन पे निढाल होकर बैठ गई.

रज़िया जल्दी से उसके पास आई और उसके हाथ को चाटकर उसका रस पीने लगी. वो भी कब से तड़प रही थी. अब उसके बर्दाश्त के बाहर हुआ तो उसने शाजिया का रस चाट लिया.

शाजिया- उह आपा.. सच कहा था आपने.. लंड रस बड़ा टेस्टी होता है. अबकी बार मैंने पूरा पी लिया मगर अपने मेरा रस क्यों पिया?

रज़िया- अरे तेरा रस वेस्ट ना हो इसलिए पी लिया मेरी जान.. अब चल याक़ूब के कपड़े ठीक कर और वहां बेड पर चल, वहीं बातें करेंगे.

शाजिया- रूको मैं वॉशरूम होकर आती हूँ आपा.. फिर हम दोनों बातें करेंगे.

अब आपको समझ आ गया ना.. याक़ूब कब उठा था तो चलो अब आप आगे का सब हाल भी जान लो.

रज़िया- अच्छा ये बात है.. तब जगा तू… क्यों शाजिया कुछ याद आया तुझे?

शाजिया- हाँ आपा, सब कुछ याद आ गया.

याक़ूब- आपा प्लीज़ बताओ ना.. आपने कपड़े क्यों निकाले हुए थे और मेरी लूली पर आपने गीला-गीला क्या लगाया था.. वो बहुत अच्छा लग रहा था और ये रस कहाँ से आया था.. बताओ ना प्लीज़?

याक़ूब की बात सुनकर दोनों खिलखिला कर हंसने लगीं और याक़ूब बेचारा उन्हें देखता रहा. जब बहुत देर तक दोनों ने जवाब नहीं दिया वो नाराज़ हो गया- हँसो आप.. जाओ मैं आपसे बात नहीं करता.. अब कभी बात नहीं करूँगा.

रज़िया- हा हा हा अरे तेरे पर नहीं हंस रहे.. अच्छा सॉरी सुन, तुझे सब बताती हूँ. पहले मेरा एक काम कर.. जा बाहर से दो कोल्ड ड्रिंक लेकर आ, पता नहीं सीने में जलन हो रही है और तू अपने लिए भी कुछ ले आना.

रज़िया ने याक़ूब को पैसे दे दिए और वो चला गया. उसके बाद शाजिया और रज़िया एक-दूसरे को देखने लगीं.. दोनों के मन में कुछ चल रहा था. अब देखो इन दोनों में पहले शुरूआत कौन करती है.

शाजिया- आपा अब क्या होगा.. याक़ूब ने मुझे बिना कपड़ों के देख लिया. अब आप उसके सवाल का जवाब क्या दोगी?

रज़िया- अरे अभी तूने देखा नहीं, मैंने कैसे उसको उल्लू बनाया है. वो सीधा है यार.. उसको इतना समझ नहीं आएगा.

शाजिया- फिर भी आपा कभी किसी को बोल दे तो.. हम उसे ऐसे लाइटली नहीं ले सकते.

रज़िया- बात तो ठीक है तुम्हारी.. और वैसे भी मैं आज सोच ही रही थी कि जमाने में इतना सीधा होना भी ठीक नहीं, तो इसको कुछ सिखाऊं मगर मौका नहीं मिला. अब आज इसने खुद मौका दे दिया तो हम आज इसे सिखा ही देते हैं.. क्यों, क्या बोलती है?

शाजिया- क्या सिखा देते हैं.. मैं कुछ समझी नहीं आपा?

रज़िया- अच्छा ये बता उसका लंड चूसने में आनंद आया था ना तुझे?

शाजिया- हाँ आपा बहुत आनंद आया था.

रज़िया- आज दोबारा आनंद लेगी उसके रस का?

शाजिया- मन तो है मगर आज कैसे, अब तो उसको पता चल गया है?

रज़िया- अरे पगली हम उसको झूठी कहानी बता कर ऐसा फँसा लेंगे, फिर वो किसी को कुछ नहीं बताएगा और तुम उसका रस भी मज़े से चख लेना.

शाजिया- वो कैसे आपा पहले आप मुझे बताओ.

रज़िया ने अपना आइडिया शाजिया को बताया तो वो उसको अच्छा लगा फिर दोनों काफ़ी देर तक उसी टॉपिक पे बात करती रहीं.

याक़ूब कोल्ड ड्रिंक ले आया था. अब वो वहीं बैठा हुआ था.

रज़िया ने कोल्डड्रिंक का घूँट भरा और कहा- हाँ अब सुकून मिला मुझे.. तो अब बोल तू क्या बोल रहा था?

याक़ूब- आपा अपने बताया नहीं, उस रात आपा नंगी क्यों थीं और वो रस क्या था?

रज़िया- मेरे सोना.. तेरी खुजली से शाजिया को भी खुजली हो गई थी. तब मैंने पहले इसको तेल लगाया था.. बाद में इसने तेरा इलाज किया.

याक़ूब- अच्छा और वो रस वाली बात..?

रज़िया- वो तेरी लूली से निकला था मगर ये बात तू किसी को बताना मत, नहीं सब तेरा आनंदक उड़ाएंगे समझे.

याक़ूब- क्यों आपा ऐसा क्यों और लूली से कैसा रस निकला था?

रज़िया- सुन मेरे भाई.. शाजिया अभी तुझे सब करके बता देगी मगर तू ये बात किसी को नहीं बोलेगा. पहले तू मेरे सर की कसम खा.

रज़िया ने याक़ूब को बातों में फँसा लिया और उससे कसम भी ले ली. वो जानती थी याक़ूब उसकी कसम कभी नहीं तोड़ेगा. बस फिर क्या था.

उसने शाजिया को कहा- शुरू हो जा, तब तक मैं मॉम को देख आती हूँ.

शाजिया- आपा उस रात ये सोया था मगर अभी ये जगा है मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है.. मैं कैसे कर पाऊंगी?

रज़िया- याक़ूब अब खड़ा क्या है.. चल सारे कपड़े निकाल दे, आज शाजिया आपा तुम्हें कुछ सिखाएगी और उसमें तुझे आनंद भी आएगा.

याक़ूब- आपा सारे कपड़े क्यों? मुझे आप दोनों से शर्म आएगी ना!

रज़िया- ले भाई इधर ये शर्मा रही है और अब तू भी शर्मा रहा है.. तब हो गया इलाज, अब मेरे गुस्सा होने का वेट कर रहा है क्या.. चल जल्दी निकाल कपड़े!

रज़िया की भारी आवाज़ से याक़ूब डर गया उसने 2 मिनट भी नहीं लगाए और नंगा होकर बेड पर अपने पैर सिकोड़ कर बैठ गया.

रज़िया- गुड ब्वॉय.. अब तुम्हें भी अलग से इन्वाइट करना पड़ेगा क्या? चल याक़ूब को बता कि तूने कैसे उसका इलाज किया था?

शाजिया को शर्म आ रही थी मगर याक़ूब को नंगा देख कर उसकी वासना भी जाग गई थी. फिर रज़िया ने इशारे से उसको समझाया कि वो नादान है उसको कुछ पता नहीं.. तू आराम से एंजाय कर, मैं अभी आती हूँ.

रज़िया ने दरवाजा बंद किया और वहां से चली गई. उसके बाद शाजिया बेड पे बैठ गई.

शाजिया- अरे तुम ऐसे क्यों बैठे हो.. आराम से बैठो, मुझे देखने दो अब कोई दाना तो नहीं है ना.. मेरे इलाज के बाद तुम्हें फ़र्क पड़ा या नहीं.

याक़ूब ने शर्माते हुए टाँगें सीधी कर दीं, उसको लंड सोया हुआ था.

याक़ूब के लंड को देखकर शाजिया के मुँह में पानी आ गया. डर तो उसे भी लग रहा था मगर याक़ूब को देख कर उसने सोचा कि जब ये खुद इतना शर्मा रहा है तो मुझे थोड़ा खुलना चाहिए. शाजिया ने आराम से याक़ूब के लंड को ऊपर-नीचे करके देखा और फिर उसे सहलाने लगी. अब ऐसी मालिश से किसी नामर्द का ही खड़ा ना होता होगा, मगर याक़ूब का तो पूरा तन गया था.

याक़ूब- आह आपा.. ये लूली तो बड़ी हो गई.. उफ़ अब अच्छा लग रहा है आह ऐसे ही करो आह..

शाजिया- क्यों आनंद आ रहा है ना.. अब देखना धीमे-धीमे और आनंद आएगा. तू बस ऐसे ही आराम से लेटा रह ओके!

याक़ूब- ओके आपा.. आह उस दिन वो गीला-गीला क्या था आह उसमें बहुत आनंद आ रहा था, आपा आप प्लीज़ वैसे ही करो ना.

शाजिया- अच्छा वैसे चाहिए तो ऐसा करो अपनी आँख बंद कर लो और देखो खोलना मत ओके.. नहीं मैं दोबारा आनंद नहीं दूँगी ओके!

 
याक़ूब ने शाजिया की बात मान ली और आँखें बंद करके सीधा लेट गया. अब शाजिया को भी इसी मौके का इन्तजार था. उसने एक ही पल में उसके खड़े लंड को मुँह में भर लिया और मज़े से चूसने लगी.

याक़ूब- सस्स आह… आपा आह… ऐसे ही हाँ बहुत आनंद आ रहा है उफ़ सस्स कितना आनंद आ रहा है आपा.. आह ऐसे ही करो बस..

शाजिया तो खुद लंड की प्यासी थी वो पूरे लंड को ऊपर-नीचे करके चूस रही थी. कभी होंठ दबा कर चूसती, तो कभी अपनी जीभ पूरे लंड पर घुमाती.

याक़ूब तो मज़े की दुनिया में ऐसा खोया कि बस पूछो मत.. वो बस मादक सिसकारियाँ ले रहा था. शाजिया अब बेकाबू हो गई थी, वो लंड चूसने के साथ-साथ अपनी फुददी भी रगड़ रही थी. उसके मुँह से भी मादक सिसकारियाँ निकलने लगी थीं, जो शायद याक़ूब के कान तक भी गई. बस फिर क्या था याक़ूब ने आँखें खोल लीं और जो नजारा उसने देखा तो उसको यकीन ही नहीं हुआ. शाजिया उसका लंड पूरा मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी.

याक़ूब का आनंद तो दुगुना बढ़ गया अब वो भी शाजिया को देख रहा था और आहें भर रहा था. जल्दी ही उसकी नसें फूलने लगीं. इधर शाजिया को भी पता लग गया कि लंड का पानी आने वाला है तो वो और तेज लंड पर चुप्पे मारने लगी थी.

याक़ूब- एयेए आह आपा आह… मुझे कुछ हो रहा है आह.. उफ़फ्फ़ रूको आह शायद आह मेरा सूसू आ जाएगा नहीं आह आ आह..

याक़ूब कुछ समझ पाता, तब तक देर हो चुकी थी. उसके लंड से पिचकारी निकलने लगी थी और शाजिया को ये पता था तो उसने पहले ही लंड को गाल की साइड कर लिया था.

लंड से एक के बाद एक पिचकारी निकलती रहीं और शाजिया ने सारा रस गटक लिया, तब कहीं जाकर उसने लंड को आज़ाद किया. जब उसने याक़ूब की तरफ़ देखा वो उसे घूर रहा था.

शाजिया- मैंने आँख खोलने से मना किया था ना.. फिर क्यों खोलीं?

याक़ूब- आपा सॉरी मगर आप बहुत अच्छी हो.. मुझे कितना आनंद आया कैसे बताऊं आपको? और मेरी लूली से कुछ निकला था ना?

शाजिया- चलो कोई बात नहीं.. हाँ तेरा रस रुक रुक निकला था.

याक़ूब के लंड से एक बूँद और निकली.. जिसे शाजिया ने उंगली पे लेकर याक़ूब को दिखाई और फिर चाट गई.

याक़ूब- ये क्या था वाइट सा.. कहीं यही तो रस नहीं था क्या?

शाजिया- हाँ यही रस था, अब तुम किसी को ये बताना मत.. ओके!

याक़ूब- ओके आपा नहीं बताऊंगा. मगर अपने मेरी लूली को मुँह में क्यों लिया?

शाजिया- क्यों तुम्हें अच्छा नहीं लगा क्या?

याक़ूब- नहीं बहुत आनंद आया मगर मुँह में लेने से क्या होता है.

शाजिया- तुम आनंद लो, बाकी सब जाने दो.

याक़ूब- अच्छा ठीक है आपा.. ये तो बताओ आप बार-बार नीचे खुजा क्यों रही हो.. आपको भी मेरी तरह खुजली हो गई क्या?

शाजिया- हे अल्लाह तुम कितने सवाल करते हो.. अब बस भी करो.

रज़िया- अरे बस क्यों.. जो बात है इसे बता दे ना.. बेचारा सही तो पूछ रहा है.

रज़िया बहुत देर से इन दोनों के खेल को देख कर मज़े ले रही थी.

शाजिया- उह आपा, आप आ गईं. अब आप ही बता दो इसके सवाल ख़त्म ही नहीं होते हैं.

रज़िया- अच्छा ये बात है तो सुन मेरे सोना.. तुम्हें जो आनंद मिला ना वो एक थेरपी है, जो आपा ने तुमको दी. इससे खुजली मिट जाती है. अब जाहिर सी बात है आपा को भी खुजली हो रही होगी. तभी ये बार-बार खुजा रही है. अगर तुम आपा को थैंक्स बोलना चाहते हो तो तुम भी इनको आनंद दे दो.. हिसाब बराबर हो जाएगा.

शाजिया- ये आप क्या बोल रही हो आपा? नहीं मुझे कुछ नहीं हुआ.

याक़ूब- अरे आप झूठ मत बोलो.. मैंने देखा है आप नीचे खुजा रही थीं. फिर आपकी आवाज़ भी मैंने सुनी थी.

रज़िया- हाँ शाजिया आज मौका है.. चटवा लो.. याक़ूब से तुम्हें आराम भी मिल जाएगा.

शाजिया- नहीं आपा, प्लीज़ मुझे नहीं करना.. मैं ठीक हूँ.

रज़िया- अच्छा ठीक है मत कर.. याक़ूब ऊपर के कमरे में जाकर टेबल पे एक बैग रखा है.. तू वो लेकर आ.

रज़िया ने अचानक से ये बात कही जो ना शाजिया के समझ आई ना याक़ूब के.

याक़ूब- कैसा बैग आपा.. और उसमें क्या है?

रज़िया- तुझे जितना कहा है वो कर.. ज़्यादा सवाल मत काट.. जा अब.

याक़ूब ने अपने कपड़े ठीक किए और वहाँ से चला गया.

रज़िया- पागल है तू क्यों बार-बार मना कर रही है, ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा.

शाजिया- आपा मैं याक़ूब के सामने कैसे नंगी हो सकती हूँ और फिर फुददी चटवाना.. नहीं नहीं.. सोच कर ही अजीब लग रहा है.

रज़िया- अरे यार फुददी चटवाना हर किसी के नसीब में नहीं होता.. तू उंगली से आनंद लेकर देख चुकी. आज ये भी ट्राई कर ले और फिर याक़ूब तो घर का ही है उससे कोई ख़तरा भी नहीं होगा.

शाजिया- मगर आपा मुझे शर्म आएगी.

रज़िया- अच्छा अभी जो उसका लंड मज़े से चूस रही थी.. तब तेरी शर्म कहाँ गई थी?

शाजिया- व्व..वो उस टाइम पता नहीं चला फिर आप भी नहीं थी ना यहाँ!

रज़िया- अच्छा ये बात है तो चल मैं फिर बाहर चली जाऊंगी मगर तू खुल कर मज़े लेना.. समझी! इसे अपना टास्क ही समझ.. अब बस तू बहुत करीब है पास होने के.. उसके बाद सब टास्क ख़त्म और तू हमारे जैसी फास्ट हो जाएगी.

शाजिया- सच आपा ऐसा हो जाएगा क्या?

रज़िया- अरे हाँ ऐसा ही होगा.. आज तू एक नई दुनिया में जाएगी. याक़ूब का और तेरा ये पहली बार है.. देखना जब दो अनाड़ी मिलते हैं तो कैसा आनंद आता है.

शाजिया- ठीक है आपा मगर कुछ होगा तो नहीं ना?

रज़िया- कुछ नहीं होगा तुझे वो वीडियो याद है ना.. बस सब कुछ वैसे ही करना और पहले अपने निप्पल याक़ूब से चुसवाना.

 
शाजिया- आपा मुझे पूरी नंगी होना पड़ेगा. मैं तो समझी कि याक़ूब से बस फुददी चटवानी होगी.

रज़िया- अरे पागल डायरेक्ट फुददी चटवाने में क्या आनंद आएगा.. खुल कर आनंद ले. फिर देख कितना आनंद आता है. अब देख याक़ूब आ रहा है.. बस जैसा मैं कहूँ वैसा ही करना ओके!

रज़िया ने जल्दी-जल्दी शाजिया को कुछ समझाया कि उसे क्या करना है.

याक़ूब- क्या आपा वहां कोई बैग नहीं था.. आप भी ना कहीं और रख दिया होगा आपने.

रज़िया- हाँ शायद कहीं और रखा होगा मैंने.. जाने दे तू बैठ यहाँ.

रज़िया ने शाजिया को इशारा किया तो वो शुरू हो गई. वो कभी अपने चुचों पे खुजाती, तो कभी नीचे फुददी पर जिसे याक़ूब ने भी देख लिया.

रज़िया- अरे अरे ऐसे मत खुजा.. बाद में दिक्कत हो जाएगी.. मैं बोल रही हूँ.. तू याक़ूब से इलाज करवा ले ना!

याक़ूब- हाँ आपा प्लीज़ मान जाओ.. नहीं आपको भी मेरी तरह लाल दाने हो जाएँगे.

शाजिया- हाँ करवा तो लू याक़ूब.. मगर बाहर किसी को पता लगेगा तो सब मेरा मज़ाक उड़ाएंगे और हँसेंगे.

रज़िया- अरे बाहर किसी को पता नहीं लगेगा, जैसे मैं याक़ूब की आपा हूँ तुम भी तो वैसी ही हो. अब याक़ूब अपनी आपा का मज़ाक बनवाएगा क्या.. हाँ?

याक़ूब- हाँ आपा मैं किसी को नहीं बताऊंगा. आपको यकीन नहीं तो आपा की कसम.. बस मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगा.

रज़िया और शाजिया समझ गईं कि याक़ूब अब फँस गया है, वो किसी को कुछ नहीं बताएगा.

रज़िया- ये हुई ना बात.. अच्छा ठीक है मैं अम्मी के पास जाती हूँ याक़ूब तुम अच्छे से आपा का इलाज करना हाँ.. जैसा ये कहें.. वैसे ही करना तुम समझे मेरे सोना..

याक़ूब ने ‘हाँ’ में गर्दन हिला दी. फिर रज़िया वहाँ से बाहर चली गई और याक़ूब बस शाजिया को देखने लग गया.

शाजिया- क्या हुआ? तू मुझे ऐसे क्यों देख रहा है याक़ूब?

याक़ूब- अरे आपा, जल्दी आप कपड़े निकालो तो मैं इलाज करूँ ना आपका.

शाजिया- हा हा हा बड़ा आया हकीम.. मेरा इलाज करेगा, चल पहले अपने सारे कपड़े निकाल तू.. फिर मैं निकालूंगी.

याक़ूब- अरे मैं क्यों निकालूँ.. इलाज आपका करना है मेरा नहीं.

शाजिया- तू तो कपड़े पहने होगा और मुझे नंगी होने को बोल रहा है.. ऐसे मुझे शर्म आएगी.

याक़ूब- अच्छा ये बात है.. मैं भी नंगा रहूँगा तो आपको शर्म नहीं आएगी तो ठीक है.. ये लो अभी निकाल देता हूँ.

याक़ूब ने झट से अपने कपड़े निकाल दिए अब वो पूरा नंगा शाजिया के सामने खड़ा था.

याक़ूब- चलो अब आप भी जल्दी से निकाल दो.

शाजिया- तू पहले मुँह उधर कर ना.

याक़ूब- अरे इतना भी क्या शर्माना आपा.. अभी मुँह उधर कर लूँगा, फिर इलाज के टाइम तो आपको देखूँगा ना.. और वैसे भी उस रात मैंने आपको देखा था. चलो अब अपने कपड़े जल्दी से निकाल दो.

शाजिया- नहीं तू मुँह उधर कर.. बाद में चाहे देख लेना समझे.

याक़ूब- अच्छा ठीक है लो उधर मुँह कर लिया.. आप भी नहीं मानोगी.

याक़ूब ने अपना चेहरा दूसरी तरफ़ घुमा लिया था. अब शाजिया के होंठों पे एक हल्की मुस्कान आ गई थी.

शाजिया- देखना मत तुम ओके.. मैं जब कहूँ तभी मुड़ना.

याक़ूब- अच्छा ठीक है आपा, जब तक आप नहीं बोलोगी मैं पीछे नहीं देखूँगा.

शाजिया को यकीन हो गया कि याक़ूब अब पीछे नहीं देखेगा तो उसने अपने कपड़े निकाल दिए, अब वो सिर्फ़ ब्रा पेंटी में थी, उसके निपल्स एकदम हार्ड हो गए थे और फुददी भी पानी-पानी हो गई थी. ये सोच कर कि आज तो याक़ूब के होंठों से उसको अलग ही आनंद मिलने वाला है.

याक़ूब- क्या हुआ आपा.. जल्दी करो ना आप!

याक़ूब की आवाज़ सुनकर शाजिया का ध्यान टूटा.. पहले उसने सोचा ऐसे ही उसके सामने जाए, फिर ना जाने क्या सोच कर उसने ब्रा और पेंटी भी निकाल दी. अब वो एकदम नंगी थी.. उसका जिस्म तो आपने देखा ही हुआ था. आज इसके दिमाग़ में सेक्स चढ़ गया था, जिससे इसके छोटे निप्पल तन कर बाहर निकल आए थे और फुददी आग की भट्टी बनी हुई थी.

शाजिया बेड पे अपने पैरों को सिकोड़ कर बैठ गई.. फिर याक़ूब को आवाज़ दी कि आ जाओ.

जब याक़ूब पलटा तो बस शाजिया को देखता ही रह गया. हालांकि याक़ूब सेक्स से अनजान था मगर एक जवान लड़की को नंगी देखना किसी भी लड़के के लिए आसान नहीं होता, उसकी उम्र तो ऐसी थी कि वो किसी की भी चुदाई के लायक था मगर उसका भोलापन उसे रोके हुए था.

 
मगर फ्रेंड्स, ये सेक्स की चुल्ल होती ही ऐसी है.. कि अपने आप आ जाती है. ऐसा ही कुछ हाल याक़ूब का भी हुआ. शाजिया को देखकर उसके जिस्म में चींटियां रेंगने लगीं.

याक़ूब- आपा आप तो बहुत सुन्दर हो.

शाजिया- अच्छा कपड़े निकालने के बाद तुझे मैं सुन्दर लगी.. पहले नहीं लगी क्या?

याक़ूब- अरे नहीं आपा, आप तो सुन्दर ही हो, बस कपड़े निकलने के बाद आपका पूरा बदन लाइट की तरह चमक रहा है.

शाजिया- अच्छा अब बातें बंद करो.. आओ मेरे पास आओ मेरा इलाज शुरू करो.

याक़ूब उसके पास जाकर बैठ गया, अब शाजिया को समझ नहीं आ रहा था कि उसको कैसे कहें और क्या कहें.

याक़ूब- हाँ आपा.. आप ठीक से लेट जाओ ना.. और बताओ आपको कहाँ खुजली हो रही है?

शाजिया ने हिम्मत करके फैसला किया कि अब शर्म जाए भाड़ में, आनंद लेना ही ठीक होगा. ये सोच कर वो सीधी लेट गई और याक़ूब को उसने कहा कि वो उसकी पूरी बॉडी पे हाथ घुमाए.

याक़ूब- आपा तेल तो है ही नहीं.. क्या मैं ऐसे ही हाथ घुमाऊं?

शाजिया- हाँ ऐसे ही घुमा.. बस ऐसा सोच तू तेल ही लगा रहा है समझा!

याक़ूब- ठीक है आपा समझ गया.. बाकी आप बताती रहना ओके.

याक़ूब ने अपना हाथ शाजिया के गले पर रखा और वहां से धीमे-धीमे सहलाना शुरू किया. फिर वो शाजिया के चुचों पे आ गया और जब शाजिया के निप्पल उसकी हथेली से रगड़े, तो शाजिया की आह.. निकल गई.

शाजिया- इस्स आह.. याक़ूब ऐसे ही कर आनंद आ रहा है उफ इसस्स..

याक़ूब- आपा लगता है कि आपको यहीं ज़्यादा खुजली है.. तभी आप यहाँ खुजा रही थीं.

शाजिया- आह.. याक़ूब तू भी मेरी तरह इनको मुँह से चूस ना.. तब ज़्यादा आराम मिलेगा.

याक़ूब ने ‘हाँ’ कहा और शाजिया के चुचों को चूसने लगा.. धीमे-धीमे उन पर जीभ घुमाने लगा.

शाजिया- आह.. सस्स याक़ूब ऐसे ही करो आह.. इनको मुँह में लेकर चूसो ना आह.. उफ..

याक़ूब को भी ये सब करने में एक अलग ही आनंद आ रहा था, वो अब निप्पलों को बारी-बारी से चूसने लगा और शाजिया मज़े की अलग ही दुनिया में चली गई.

कुछ देर याक़ूब ऐसे ही शाजिया के निप्पलों को चूसता रहा. इससे शाजिया की देसी फुददी अब एकदम गीली हो गई थी और वो उंगली से फुददी को रगड़ने लगी थी, जिसे याक़ूब ने देख लिया.

याक़ूब- आपा ऐसे मत खुजाओ.. मैं अभी मुँह से आपको आराम देता हूँ.

इतना कहकर याक़ूब शाजिया के पैरों के पास बैठ गया. शाजिया अब किसी रांड़ की तरह बर्ताव कर रही थी, उसने पूरे पैरों को फैला दिया और फुददी को याक़ूब के सामने कर दिया ताकि वो उसको आराम से चूस सके.

याक़ूब ने पहले तो फुददी के ऊपर हल्के-हल्के अपनी जीभ फिराई और बाद में धीमे-धीमे वो फुददी को प्यार से चूसने लगा. उसको शुरू में फुददी का टेस्ट थोड़ा अजीब लगा, मगर बाद में पता नहीं उसको क्या हुआ.. वो पागलों की तरह फुददी को जीभ से कुरेदने लगा, जैसे आज खजाना यहीं से निकलने वाला हो.

शाजिया का ये पहला अहसास था कि उसकी फुददी पे उंगली के अलावा कुछ और टच हुआ हो और वो भी एक कुंवारे लड़के की जीभ, उसकी तो साँसें रेलगाड़ी के इंजन की तरह फास्ट चलने लगीं.. वो अपनी सुध-बुध खो चुकी थी.

शाजिया- आह.. याक़ूब जोर से चाटो आह.. ऐसे ही उफ़फ्फ़ आनंद आ रहा है आह.. अपनी जीभ और अन्दर घुसाओ आह.. हा ऐसे ही आह.. उफ..

करीब 5 मिनट तक याक़ूब ऐसे ही शाजिया की फुददी को चूसता रहा. अब बेचारी शाजिया से कहाँ ऐसी ज़बरदस्त चुसाई बर्दाश्त होगी. ना ना आप गलत मत समझो याक़ूब भले ही अनाड़ी होगा, मगर शाजिया को क्या पता कि लड़के फुददी कैसे चूसते हैं. उसके लिए तो ये नई बात थी, बस वही उसको भारी पड़ गई और वो अपने चरम पर पहुँच गई. शाजिया ने बैठ कर उत्तेजना में याक़ूब के सर को पकड़ा और अपनी फुददी पर जोर से दबा दिया.

शाजिया के जिस्म से जैसे जान निकल गई हो.. उसका फुव्वारा ऐसे छूटा जैसे बरसों से रस फुददी में कैद था. बेचारा याक़ूब इस हमले से बेख़बर था, उसका पूरा चेहरा फुददी रस से भर गया और ना चाहते हुए भी उसने शाजिया का रस पी लिया.

जब याक़ूब का दम घुटने लगा तो उसने जोर से शाजिया के हाथ को हटाया और अलग हुआ.

शाजिया- आह सस्स याक़ूब ये क्या कर दिया तूने.. आज उफ़फ्फ़ मेरी फुददी आह.. प्लीज़ तुम ये चाट कर साफ कर दो ना!

याक़ूब को जवान देसी फुददी का रस पसंद आ गया था, वो खुद दोबारा फुददी चाटने की सोच रहा था.. तभी शाजिया ने भी कह दिया. बस फिर क्या था.. वो झट से फुददी पर टूट पड़ा और जीभ से सारा रस चाट कर साफ कर दिया.

शाजिया- आह.. याक़ूब तुम सच में बहुत अच्छे हो.. आओ मेरे पास आओ.

याक़ूब जैसे ही उठा.. शाजिया ने उसको टाइट्ली हग किया फिर उसने याक़ूब के लंड को देखा, जो एकदम अकड़ा हुआ था.

शाजिया- अरे याक़ूब ये दोबारा कैसे खड़ा हो गया, अभी तो इसका रस निकला था?

याक़ूब- पता नहीं आपा.. मैं जब आपका इलाज कर रहा था ना.. तब ये धीमे-धीमे बड़ा होता गया और अब इसमें दर्द भी हो रहा है.

याक़ूब को फुददी चूसना, चुदाई करना ये सब नहीं पता था, मगर ये जो लंड होता है ना.. बड़ा कमीना होता है. ये पैदा होने के साथ ही सब कुछ जानता है. आपको यकीन ना आए तो किसी छोटे बच्चे की नूनी को थोड़ा सहला कर देख लो, वो भी खड़ी हो जाएगी, फिर याक़ूब तो पूरा लड़का था.. उसका लंड तो टाइट होना ही था.

शाजिया- अच्छा ये बात है तो क्या मैं इसे दोबारा चूस कर छोटा कर दूँ?

याक़ूब- हाँ आपा प्लीज़ ऐसा ही कर दो.. आपके चूसने से मुझे बहुत आनंद मिलता है.

शाजिया ने याक़ूब को खड़ा ही रखा और खुद घुटनों के बल बैठ कर उसके लंड को फिर से चूसने लगी. कभी वो उसकी गोटियां चूसती, तो कभी पूरे लंड को मुँह में भर कर जोर-जोर से आगे-पीछे करती.

याक़ूब तो मज़े में पागल हुआ जा रहा था और उधर खिड़की के बाहर रज़िया सब कुछ देख रही थी. उसकी फुददी भी अब गीली हो गई थी मगर वो अन्दर आकर याक़ूब का आनंद खराब नहीं करना चाहती थी, तो बस वो बाहर ही खड़ी रही और सब देखती रही.

लगभग 5 मिनट तक शाजिया लंड चूसती रही, फिर उसको भी फुददी में खुजली होने लगी तो उसने याक़ूब को कहा- अब जैसे मैं कहूँ वैसे ही करना ताकि हम दोनों को आनंद आए. याक़ूब ने ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिला दी, तो शाजिया सीधी लेट गई और याक़ूब को समझाया कि लंड को ऐसे सीधा फुददी पर रगड़े.

 
याक़ूब को बात समझ आ गई, वो रज़िया के ऊपर आ गया और लंड को अच्छे से फुददी पर रगड़ने लगा.. जिससे शाजिया का आनंद दुगुना हो गया.

शाजिया- आह.. सस्स याक़ूब गुड आह.. ऐसे ही आह.. रगड़ो आह.. फास्ट करो आह..

याक़ूब भी स्पीड से फुददी पर लंड के घस्से मारने लगा, रज़िया बाहर खड़ी सोच में पड़ गई. एक बार तो उसको लगा ये दोनों चुदाई कर रहे हैं.. मगर उसने गौर किया तब समझ गई कि शाजिया बस लंड से फुददी को रगड़वा रही है.

याक़ूब को भी इस खेल में बहुत आनंद आने लगा था. फिर अचानक से याक़ूब का कंट्रोल बिगड़ा और लंड सीधा शाजिया की फुददी के मुख से जा टकराया.

शाजिया- आआह.. पागल हो क्या ऐसे मत करो.. दर्द होता है और इसे अन्दर क्यों डाला?

याक़ूब- सॉरी आपा.. पता नहीं ये कैसे अन्दर चला गया वैसे इसे अन्दर डालने से क्या होता है.. आपको दर्द हुआ क्या?

लंड थोड़ा सा शाजिया की फुददी के मुँह में गया होगा या शायद फुददी की फांकों के बीच में टच हुआ होगा, मगर शाजिया को दर्द बहुत हुआ और वो समझ गई कि चुदाई के टाइम कितना दर्द होता है. अब उसका ना चुदवाने का फैसला उसको एकदम सही लगा.

शाजिया- पागल इसको अन्दर नहीं डालते.. इससे बहुत तकलीफ़ होती है. तू बस ऊपर ही रगड़ कर आनंद ले और मुझे भी आनंद दे.

याक़ूब को बात समझ आ गई और वो फिर से लंड रगड़ने लगा. उधर रज़िया बाहर खड़ी उनकी बातें सुनकर बड़बड़ाने लगी.

रज़िया- मेरी जान तुझे मेरे भाई से तो चुदवाना ही होगा, ये भोला है इसे तू ही फास्ट करेगी, बस आज से इसकी टयूशन तू ही लेगी. बस कुछ दिनों की बात है.. पहले तुझे फास्ट कर दूँ, फिर तू मेरे भाई को फास्ट करना.

याक़ूब ने दस मिनट अपने लंड को अच्छे से फुददी पर रगड़ा तब कहीं वो चरम पर पहुँचा और शाजिया भी उसके साथ ही चरम पर पहुँच गई.

शाजिया- आह.. आ सस्स याक़ूब जोर से रगड़.. उफ़फ्फ़ आह.. आ जल्दी कर ना आह.. आह..

याक़ूब- आह.. आपा कर तो रहा हूँ आह.. लगता है आह.. मेरा भी आह.. रस आने वाला है आह.. सस्स आपा मैं गया आह..

दोनों एक साथ झड़ गए, याक़ूब का पूरा रस शाजिया की फुददी पर फ़ैल गया, जिसे याक़ूब ने गौर से देखा. वो अपना वीर्य आज लाइफ में पहली बार देख रहा था.

याक़ूब- आपा देखो, मेरा कितना रस निकला है और आपका भी बहुत निकला है?

शाजिया उसको देख के कुछ नहीं बोली वो बस मुस्कुराने लगी.

याक़ूब- आपा अब आपको आराम मिला कि नहीं?

शाजिया- बहुत आराम मिला है याक़ूब.. चल अब कोई कपड़ा दे मुझे, ये सब मुझे साफ भी तो करना है.

तब तक रज़िया भी अन्दर आ गई और दोनों को देख कर हंसने लगी.

रज़िया- हा हा हा तुम दोनों ऐसे नंगे-पुँगे कितने अजीब लग रहे हो हा हा हा..

शाजिया- आपा प्लीज़ आप हमारा मज़ाक मत उड़ाओ.. नहीं दोबारा मैं याक़ूब से इलाज नहीं करवाऊंगी अपना हाँ!

रज़िया- अरे ऐसे ही मज़ाक कर रही हूँ यार.. याक़ूब, वो सामने कपड़े रखे हैं, वो आपा को दे दे और तू अपने कपड़े पहन कर बाहर जा, अब बहुत हो गया चूसना-वूसना मुझे शाजिया से कुछ काम है.

याक़ूब ने शाजिया को कपड़े दे दिए, फिर अपने कपड़े पहन कर बाहर चला गया.

शाजिया ने भी अपने आपको साफ किया फिर वॉशरूम जाकर अच्छे से साफ करके वो बाहर आ गई और उसने अपने कपड़े पहन लिए.

रज़िया- क्यों मेरी जान, तुझे असली लंड से फुददी रगड़वाने में आनंद आया ना!

शाजिया- हाँ आपा.. सच में बहुत आनंद आया, याक़ूब का लंड बहुत अच्छा है. उसको चूसने में भी बहुत आनंद आता है.

रज़िया- अरे वो तो अभी छोटा है, कभी किसी असली मर्द का चूस कर देख, फिर कहना तुझे कैसा आनंद मिलता है.

शाजिया- उसका जब टाइम आएगा, तब देख लूँगी.. अभी तो यही मजेदार है.

रज़िया- अच्छा ये बात है.. बड़ी फास्ट हो गई तू.. तो याद है उस दिन तो तू मेरे सामने नंगी होने में कैसे शर्मा रही थी और आज याक़ूब के सामने आराम से नंगी घूम रही है. मेरी भी कोई परवाह नहीं.. एकदम बिंदास मेरे सामने नंगी होकर वॉशरूम गई. लगता है तू फास्ट हो रही है.. अब तेरे टास्क ख़त्म होने लगे हैं. जल्दी ही शाहिद तुझे आज़ाद कर देगा, फिर तू हमारे ग्रुप में नहीं रहेगी. चलो अच्छा है इसी बहाने तू फास्ट तो बन गई.. नहीं वैसे ही गँवार देसी लड़की रहती.

शाजिया- आपा प्लीज़ ऐसा मत कहो ना.. मुझे आपके जैसे फ्रेंड्स को खोना नहीं है, मैं अब भी आपके ग्रुप में ही रहूंगी.

रज़िया- नहीं यार.. भले ही तू फास्ट हो गई, मगर इतनी भी नहीं कि हमारे साथ रह सके. अभी तुमने हमारी पार्टी भी कहाँ देखी है, वो तुमसे कभी नहीं होगा.

शाजिया- क्या आपा जब याक़ूब के साथ मैंने ये सब कर लिया, तो अब मैं कुछ भी कर सकती हूँ और वैसे भी मैंने आपको बताया नहीं कि आज अब्बू ने मुझे कैसा सरप्राइज दिया है.

रज़िया- क्या बात कर रही है.. तेरे अब्बू और तुझे सरप्राइज.. बता तो क्या दिया?

 
शाजिया ने पूरी बात विस्तार से रज़िया को बताई, जिसे सुनकर रज़िया की आँखों में चमक आ गई.. वो मुस्कुराते हुए बोली- वाउ यार मतलब मेरा आइडिया काम कर गया गुड, मगर तू अभी वो कपड़े मत पहनना, जब मैं कहूँ तब पहनना ओके!

शाजिया- अच्छा ठीक है आपा मगर आप कुछ पार्टी की बात कर रही थीं.. वो क्या है और मुझसे क्या नहीं होगा?

रज़िया- हमारी पार्टी में बियर पीना, डांस करना, चुदाई करना ये सब होता है.. बोल तुझसे हो सकेगा?

शाजिया- हाई अल्लाह.. इतना कुछ और चुदाई भी.. नहीं आपा बियर और डांस तक कर सकती हूँ, मगर मुझे चुदाई नहीं करनी.. मैंने ये सोच रखा है.

रज़िया- मैं जानती हूँ.. तू अभी तैयार नहीं है, मगर एक ना एक दिन तो चुदाई करनी ही पड़ेगी ना तुझे.. तो थोड़ा एक्सपीरियेन्स ले ले.

शाजिया- आपकी बात सही है.. इसी लिए तो याक़ूब के साथ मैंने आज आनंद किया. इसी के साथ मैं ये सब करके सीख जाऊंगी.

रज़िया- ओये मैडम, मेरे मासूम भाई को क्यों बलि का बकरा बना रही है? अगर सीखना ही है तो किसी मर्द के साथ करके सीख.. इस याक़ूब को क्या पता कि चुदाई क्या होती है!

शाजिया- नहीं आपा.. वो अभी नहीं, अगर किसी मर्द के साथ करूँगी तो वो फिर बिना चोदे नहीं रहेगा, याक़ूब को तो कैसे भी रोक सकती हूँ मैं.. मगर ना ना.. आप इस बारे में कुछ और सोचो.

रज़िया- चल जाने दे, मत कर मगर रियल चुदाई देख कर तो कुछ सीख सकती है ना?

शाजिया- हाँ वो तो है आप मुझे वीडियो दिखा कर सिखा दो.

रज़िया- धत तेरी की.. अभी भी वहीं अटकी हुई है, अरे पागल, वीडियो में नहीं मैं लाइव सेक्स देखने की बात कर रही हूँ.

शाजिया- क्या..! मगर मैं किसका सेक्स देखूँ?

रज़िया- अपने मॉम-अब्बू का देख लेना रात को, वैसे भी आज से तू उनकी चुदाई देखना ट्राई करने वाली है ना!

शाजिया- छी: आपा.. कुछ भी बोल देती हो आप, मुझे नहीं देखना उनका सेक्स और अब ट्राई की क्या ज़रूरत, अब्बू ने तो ड्रेस दिला दिए ना!

रज़िया- नहीं तुम ट्राई ज़रूर करना, तेरे अब्बू ने ड्रेस क्यों दिलाए.. ये तू नहीं समझेगी और मैं बताऊंगी तो तुझे बुरा लगेगा. प्लीज़ बात को समझ.. उनकी चुदाई देखना ट्राई करना बहुत जरूरी है.

शाजिया- उन्होंने मुझे ड्रेस क्यों दिलाए और ऐसी क्या बात है जो मुझे बुरी लगेगी.. ज़रा आप खुल कर बताओगी?

रज़िया सोच में पड़ गई, अब वो शाजिया को क्या बताए.

रज़िया- बात को समझ शाजिया.. अभी बताऊंगी तो तुझे कुछ समझ नहीं आएगा. बस कुछ दिन रुक जा.. और जैसे मैं कहूँ, वैसा करती जा.. तुझे सब समझ आ जाएगा.

शाजिया ने बहुत ज़िद की तब जाकर रज़िया ने उसे बताया.

रज़िया- अच्छा सुन.. बुरा मत मानना जब तू तेरे अब्बू से चिपकी तो उनका लंड खड़ा हुआ था या नहीं?

रज़िया की बात सुनकर शाजिया को वो पल याद आ गया, जब उसके अब्बू का लंड उसकी नाभि में चुभा था और फिर उसने लुंगी में बना हुआ तंबू भी देखा था.

शाजिया- हाँ आपा हुआ था.. मैंने देखा भी मगर अब्बू ने मुझे फ़ौरन हटा दिया था इस बात का क्या मतलब हुआ?

रज़िया- तेरे अब्बू प्यासे हैं, शायद इसी लिए तेरे जिस्म की गर्मी पाकर उनका लंड खड़ा हो गया, समझी कुछ!

शाजिया- नहीं आपा, ये गलत है वो मेरे अब्बू हैं और मेरे बारे में गंदा कैसे सोच सकते हैं वो, नहीं नहीं..

रज़िया- अरे पागल उन्होंने कुछ गंदा नहीं सोचा, जवान जिस्म जब टच होता है तो लंड अपने आप खड़ा हो जाता है.. अब तुझे कैसे समझाऊं.

शाजिया- अच्छा समझ गई आपका मतलब अब्बू के मन में मेरे लिए कुछ गंदा विचार नहीं, बस मेरे टच होने से उनका खड़ा हुआ, यही ना!

रज़िया- हाँ यार जब समझ गई तो मुझे क्यों पका रही है?

शाजिया- सॉरी आपा अब आगे से ध्यान रखूँगी कि अब्बू से दूर रहूँ बेचारे मेरी वजह से ऐसे ही परेशान होंगे.

रज़िया- अच्छा ये सब जाने दे, तुझे लाइव सेक्स देखना है ना.. तो मेरा और शाहिद का देख लेना, बोल क्या बोलती है?

शाजिया- सच.. वो कैसे? मगर मैं शाहिद के सामने ऐसे नहीं आना चाहती.

रज़िया- शाहिद को पता भी नहीं लगेगा और तू मज़े से सब देख भी लेगी, बोल देखना है तुझे लाइव सेक्स या नहीं?

शाजिया- देखना तो है मगर ये सब होगा कैसे.. मुझे समझ नहीं आ रहा.

रज़िया- देख मेरे पीरियड के चक्कर में बहुत दिनों से मैं चुदी नहीं हूँ. आज मैंने और शाहिद ने चुदाई का प्रोग्राम बनाया है. कल कॉलेज के बाद मैं उससे मिलूंगी और वहीं हमारा चुदाई का खेल होगा. तू मेरे साथ चलना और फिर आराम से सब देख लेना.

शाजिया- अच्छा ये बात है.. मगर शाहिद के सामने मैं कैसे आऊंगी? आपने तो कहा उसको पता नहीं लगेगा.

रज़िया- अरे पागल मेरी पूरी बात तो सुन.. फिर तू चपर-चपर करना.

रज़िया ने कल के लिए शाजिया को कुछ समझाया और उसे सुनकर शाजिया खुश हो गई. वैसे ये रज़िया का नहीं शाम को शाहिद ने रज़िया को जो बताया वो प्लान था. अब कल आप खुद देख लेना, सब समझ आ जाएगा.

शाजिया- वाउ आपा ये बेस्ट है, मगर शाहिद को कोई शक तो नहीं होगा ना?

रज़िया- अरे मैं किस लिए हूँ.. अब तू कल बस घर पर कोई बहाना बना कर कॉलेज आ जाना ताकि दोपहर को तू लाइव प्रोग्राम देख सके, समझी मेरी जान!

शाजिया- ओके आपा समझ गई. अब मैं चलती हूँ और कल नई वाली ड्रेस पहन कर ही आऊंगी.

रज़िया- नहीं अभी मत पहन, जब मैं कहूँ, तब पहनना समझी! अब तुम घर जाओ मुझे भी थोड़ा काम है, कल मिलते हैं.

शाजिया वहां से चली गई और रज़िया अपनी अम्मी के पास चली गई.

फ्रेंड्स आज मॉल में एक नए किरदार की एंट्री हुई थी, अब वो कौन है.. ये जानने का टाइम आ गया है तो चलो उससे आपको अच्छी तरह मिलवा देता हूँ.

एक बड़ी सी बिल्डिंग के बाहर अब्दुल जी की गाड़ी रुकी और फिर वो बिल्डिंग में एक फ्लैट के बाहर जाकर बेल दबाने लगे.

थोड़ी ही देर में फरज़ाना ने दरवाजा खोला वो एक ब्लैक नाइटी में थी और बहुत ही सेक्सी लग रही थी.

फरज़ाना- क्या बात है अब्बू आ गए आप.. मुझे तो लगा आज आपके दर्शन ही नहीं होंगे.

अब्दुल- बकवास बंद करो मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है कि मुझे अब्बू मत बोला कर, तेरी समझ में नहीं आता क्या?

फरज़ाना- अरे आप नाराज़ क्यों होते हो. अब आपने मेरी अम्मी से शादी की है तो आप मेरे अब्बू ही हुए ना? हा हा हा हा..

 
अब्दुल ने फरज़ाना को बांहों में भर लिया और उसके बाल खींच कर एक जोरदार किस किया. फिर उसको बेड पे गिरा कर खुद उस पर चढ़ गए और उसकी नाइटी खोलने लगे.

अब्दुल- साली कुतिया बड़ी ज़ुबान चलने लगी है तेरी.. मैं अभी तुझे सबक सिखाता हूँ.

फरज़ाना- अरे रूको प्लीज़.. अभी नहीं अच्छा सॉरी अब नहीं बोलूँगी आपको अब्बू.. रूको तो मैंने आपके लिए बादाम का हलवा बनाया है.. वो तो खा लो फिर मुझे आराम से खा लेना.. मैं कहीं भाग कर नहीं जा रही हूँ.

अब्दुल- साली आज लंड में एक्सट्रा तनाव आ रहा है, ऊपर से तू बादाम का हलवा खिला रही है. आज तुझे ऐसे चोदूंगा कि तेरी सारी अकड़ निकाल जाएगी.

फरज़ाना- अब रहने भी दो.. मेरी अकड़ तो पहली रात ही अपने निकाल दी थी.

अब्दुल ने फरज़ाना के चुचों को जोर से दबाया.. फिर सीधे होकर लेट गए.

अब्दुल- आह.. दो साल से तुझे चोद रहा हूँ, फिर भी कभी तेरी फुददी से मन नहीं भरता. पहली रात की तो याद ही मत दिला.. साली क्या टाइट फुददी थी तेरी, आनंद आ गया था.

फरज़ाना- आपको तो आनंद ही आएगा ना.. हालत तो आपने मेरी खराब की थी. आपका लंड भी कोई लंड है.. घोड़ी को चोदो.. तो वो भी चिल्लाने लगे, इतना बड़ा और मोटा है. पता नहीं आपकी अम्मी ने क्या खाकर आपको पैदा किया होगा.

अब्दुल- हा हा हा साली बहुत बोलती है तू.. आज मॉल में भी मेरी बेटी के सामने बहुत बक-बक कर रही थी. अगर उसको शक हो जाता तो?

फरज़ाना- आज तक किसी को हुआ है क्या.. जो उसको होता? एक शहर में आप दो बीवी और एक रखैल रखे हुए हो.. अब तक किसी को पता लगा?

अब्दुल- अबे ये क्या बकवास है, कितनी बार कहा मैंने कि तू मेरी बीवी है.. रखैल नहीं!

फरज़ाना- मुझे बेटी तो आप मानते नहीं.. बीवी की तरह चोदते जरूर हो. मगर शादी के बिना कोई भी औरत बीवी नहीं, रखैल ही होती है.

अब्दुल- कमीनी तू अपनी अम्मी की सौतन बनना नहीं चाहती तो कैसे शादी करता? ये बकवास बंद और जा अब जाकर हलवा ले आ, फिर आज मुझे तेरी मस्त चुदाई भी करनी है.

अरे ये क्या नया फंडा है.. कौन है ये फरज़ाना.. और सीधे साधे अब्दुल जी अचानक से ऐसे कैसे हो गए? यही सवाल आप लोगों के दिमाग़ में चल रहा होगा है ना? ना ना.. ज़्यादा टेंशन मत लो, इस बात में मैं कोई सस्पेंस नहीं रखूँगा क्योंकि और कहीं कुछ ऐसा नहीं जो आपको बताऊं तो चलो इस राज को आप लोग जान ही लो कि ये क्या चक्कर है.

फरज़ाना की अम्मी रेशमा अपने टाइम की बहुत हसीन औरत थी. उसका शौहर अब्दुल के यहाँ काम करता था, मगर वो नशेड़ी था और इसी नशे ने एक दिन उसे मौत के हवाले कर दिया. अब रेशमा और उसकी बेटी का कोई सहारा नहीं था तो अब्दुल जी ने रेशमा को अपनी शॉप पर रख लिया. वैसे पहले से ही अब्दुल उसके हुस्न के दीवाने थे.. अब तो उनके पास पूरा मौका था. उन्होंने अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों से रेशमा को फँसा लिया और चुपके से उससे शादी कर ली, उस वक्त फरज़ाना छोटी थी.

यकीन वो इतनी भी छोटी नहीं थी, ये बात केवल 6 साल पहले की ही है, उस टाइम वो 16 साल की थी.

फरज़ाना पढ़ाई में तेज थी तो अब्दुल जी ने उसे पढ़ने के लिए एक अच्छे बोर्डिंग स्कूल भेज दिया ताकि वो खुल कर रेशमा के मज़े ले सके.

तीन साल तक अब्दुल जी ने रेशमा को खूब चोदा मगर इस बात का ध्यान रखा कि उसको कोई बच्चा ना हो जाए. इस दौरान फरज़ाना छुट्टियों में घर आती मगर अब्दुल जी उससे कम ही बात करते थे. फिर रेशमा को दिमाग़ में टयूमर हो गया. अब्दुल जी ने उसका इलाज कराने में कोई कसर नहीं रखी. उसका ऑपरेशन हुआ मगर भाग्य को कुछ और ही मंजूर था. हकीम ने रेशमा का टयूमर तो निकाल दिया, मगर वो पागल हो गई. बहुत कोशिश की.. मगर वो ठीक ना हो सकी. फिर उसको पागलखाने में भरती करवाना पड़ा. उस टाइम फरज़ाना 19 साल की भरपूर जवान हो गई थी. अब उसका जिस्म खिलने लगा था. उसके 30″ के मदमस्त मम्मे, पतली कमर और भरी हुई गांड.. ये सब देख कर कोई भी बहक जाए.

रेशमा के पागलख़ाने जाने के बाद अब्दुल जी को दिक्कत हो गई. पहले तो वो दिन में ही रेशमा के पास जाते थे मगर अब फरज़ाना आई हुई थी और उसको रात को अकेले छोड़ना ठीक नहीं था.

इस बात से चिंतित अब्दुल जी किसी बहाने से फरज़ाना के पास रुक गए और घर पर बता दिया कि वो शहर से बाहर जा रहे हैं.

इस दौरान फरज़ाना को अकेले डर लगता था तो वो अब्दुल के साथ ही सोती थी. एक-दो दिन तो अब्दुल जी ने कंट्रोल किया मगर एक जवान लड़की उसके साथ एक ही बिस्तर पे सोए तो मंशा बिगड़ने में देर नहीं लगती.

फरज़ाना के सो जाने के बाद अब्दुल जी उसके अंगों को सहलाते मगर ज़्यादा कुछ ना कर पाते, एक डर उनके मन में था कि कहीं कोई गड़बड़ ना हो जाए.

ये सिलसिला 5 दिन चला, अब ज़्यादा दिन वो घर से दूर नहीं रह सकते थे तो उन्होंने फरज़ाना को समझाया कि उसको अकेले रहने की आदत डालनी होगी. फिर उन्होंने फरज़ाना का दाखिला भी यहीं करवा दिया.

ऐसे ही एक साल और गुजर गया. अब फरज़ाना 20 साल की हो गई थी. उसका फिगर भी 32-26-32 का हो गया था. अब वो और ज़्यादा सुन्दर दिखने लगी थी. मगर अब्दुल जी को उसके ब्वॉयफ्रेंड की भनक लग गई बस उन्होंने उसी दिन से उसका कॉलेज बंद करवा दिया और उसे घर में कैद कर दिया.

अब्दुल जी ने उसे धमकी दी कि अगर वो उसके खिलाफ गई तो वो उसकी अम्मी का इलाज बंद करवा देंगे, फिर वो कभी ठीक नहीं होगी और उसको भी घर से निकाल देंगे.

फरज़ाना मजबूर हो गई.. अब वो सारा दिन घर पे ही रहती. अपने ब्वॉयफ्रेंड से भी उसने नाता तोड़ लिया. असल में वो दोनों प्यार करने लगे थे मगर अपनी अम्मी के लिए फरज़ाना ने प्यार को कुर्बान कर दिया.

 
अब अब्दुल जी की गंदी नज़र फिर फरज़ाना पर पड़ने लगी और ये बात फरज़ाना भी समझ रही थी.

एक रात अब्दुल जी घर आए.. तब फरज़ाना नाइट सूट पहन कर सोई हुई थी. उसके मम्मे सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे तो बस अब्दुल के मन का शैतान जाग गया और वो उसके पास बैठ कर उसके चुचों को सहलाने लगे. फिर उन्होंने फरज़ाना की टी-शर्ट को ऊपर किया और उसकी ब्रा भी ऊपर कर दी. फिर उसके निप्पल को चूम लिया, तभी फरज़ाना की आँख खुल गई.

फरज़ाना- अब्बू ये आप क्या कर रहे हो?

अब्दुल- अबे चुप साली.. हराम की पैदायश, मुझे अब्बू मत बोल.. मैं कोई तेरा अब्बू नहीं हूँ समझी, अब तेरी अम्मी तो है नहीं.. तो मेरी प्यास कौन बुझाएगा बोल?

फरज़ाना की आँखों में आँसू आ गए. वो पहले ही जानती थी एक ना एक दिन ये ज़रूर होगा क्योंकि अब्दुल कई बार उसे छू कर आनंद ले चुके थे.. मगर आज तो उन्होंने हद ही कर दी.

फरज़ाना- आपको शर्म नहीं आती आपकी सग़ी ना सही.. मगर बेटी तो हूँ मैं..! अपने मेरी मॉम से शादी की है.. समझे! आप अब जाओ यहाँ से.. नहीं तो मैं शोर मचा दूँगी.

अब्दुल- चुप साली कुतिया.. तू किसी हालत में मेरी बेटी नहीं बन सकती समझी.. तेरी अम्मी से मैंने ऐसे ही शादी नहीं की.. मेरी नज़र तुझपे भी थी. मुझे लगा आज नहीं तो कुछ साल बाद तू जवान होगी तो मेरे ही काम आएगी. इसी लिए तुम अम्मी-बेटी पे इतना खर्चा किया.. वरना तुम्हारी क्या औकात थी जो ऐसे आलीशान फ्लैट में रहती.. ये महंगे कपड़े पहनती?

फरज़ाना- छी: कितनी गंदी सोच है आपकी.. आपको थोड़ा भी अल्लाह का डर नहीं? आपकी एक बीवी है, एक बेटी है.. ज़रा सोचो कभी उनके साथ ऐसा हुआ तो?

फरज़ाना आगे कुछ बोलती, तब तक अब्दुल जी ने उसे एक थप्पड़ जड़ दिया.

अब्दुल- चुप हरामजादी.. उनके बारे में तू अपनी गंदी ज़ुबान से एक शब्द मत निकालना. मैंने तेरी अम्मी को जब सहारा दिया, जब उसके पास कोई चारा नहीं था और तुझे अच्छे स्कूल में पढ़ाया.. नहीं तो तू आज किसी कोठे पे होती और पता नहीं कौन कौन तुझे कुचलता.

फरज़ाना पर तो जेसे कोई पहाड़ टूट पड़ा, वो समझ ही नहीं पा रही थी कि अब क्या करे. फिर भी उसने हिम्मत करके कहा- यहाँ से चले जाओ.. नहीं तो मैं शोर मचा दूँगी.

अब्दुल- ठीक है, तेरी अकड़ मैं कल निकालता हूँ. सुबह से तेरी अम्मी का इलाज बंद और ये फ्लैट भी खाली कर देना तुम.. फिर जहाँ मर्ज़ी चली जाना.. जिससे मर्ज़ी चुदवाना.. समझी! अब तक तुमने मेरी शराफत देखी है.. अब तुम मेरा गुस्सा देखना.

अब्दुल जी वहां से चले गए और सुबह जो उन्होंने कहा, वो कर दिया. फरज़ाना एकदम लाचार हो गई.. उसकी अम्मी को उसके हवाले कर दिया और फ्लैट बंद करके चाभी अब्दुल जी ने ले ली. उसकी अम्मी पागल थी मगर साथ में बीमार भी थी.. उसकी हालत खराब हो गई.

फरज़ाना- प्लीज़ अब्बू ऐसा ज़ुल्म मत करो.. मुझे आप बेटी मानो या मत मानो ये आपकी पत्नी हैं, इनकी हालत बिगड़ रही है. प्लीज़ कुछ तो रहम करो इन्हें वापस भरती करवा दो.. चाहे मुझे आप धक्के मार कर निकाल दो.

अब्दुल- तेरे और तेरी अम्मी के लिए मेरे पास फ़िजूल पैसा नहीं है.. जाओ भागो यहाँ से.. मुझे और भी काम हैं.

फरज़ाना बहुत रोई, बहुत गिड़गिड़ाई मगर अब्दुल जी पे कोई असर नहीं हुआ.

जब वो जाने लगे तो फरज़ाना उनके सामने खड़ी हो गई.

फरज़ाना- रूको आप मेरी इज़्ज़त ही लेना चाहते हो ना.. ले लो मगर मेरी अम्मी को ऐसे मत ठुकराओ.. आपको मैंने अब्बू समझा था मगर आप तो पापी हो. कर लो अपनी हवस पूरी.. निकाल लो अपने मन की.

अब्दुल- ज़्यादा फिल्मी मत बन.. मुझे पता था तू मानेगी, इसी लिए पहले ही हॉस्पिटल फ़ोन कर दिया था. उधर देख.. वो आ गए इसे लेने और ये चाभी ले.. अन्दर जा.. मैं इतना बुरा इंसान नहीं हूँ जो ज़बरदस्ती कुछ करूँ.. समझी अभी में जाता हूँ.. तू अपना ध्यान रखना.

अब्दुल जी चले गए और फरज़ाना सोच में पड़ गई कि ये आदमी अच्छा है या बुरा.. कुछ किया भी नहीं और चला गया.

रात तक वो बस सोच ही रही थी. आज उसकी आँखों में नींद नहीं थी. जब अब्दुल जी आए तो फरज़ाना समझ गई कि अब उसे अपना वादा पूरा करना होगा. वो अब्दुल जी के सामने खड़ी हो गई और अपनी शर्ट उतारने लगी.

अब्दुल- ये क्या कर रही हो.. नीचे करो इसे!

फरज़ाना- आपने ही तो कहा था आप मुझे पाना चाहते हो.

अब्दुल जी- ज़्यादा फिल्मी मत बन.. जा जाकर कॉफी बनाकर ला मेरे सर में दर्द है.

फरज़ाना उन्हें देख कर मुस्कुराते हुए बोली.

फरज़ाना- आप क्या हो.. मेरी समझ के बाहर है. जब आपको कुछ करना ही नहीं था तो आपने ये सब ड्रामा क्यों किया?

अब्दुल जी- जैसी तेरी सोच है मैं वैसा बुरा इंसान नहीं हूँ.. बस मेरी भी कुछ ज़रूरत हैं जिन्हें पूरा करना ज़रूरी है. तुझे ज़बरदस्ती पाने का मेरा कोई मंसूबा नहीं है.

फरज़ाना की कुछ भी समझ नहीं आ रहा था वो क्या बोले वो बस चुपचाप खड़ी रही.

अब्दुल जी- अगर तू अपने मन से मेरी होगी, तभी मुझे ख़ुशी मिलेगी, समझी तू.. कल जो मैंने किया या कहा, उसके लिए मैं शरमिंदा हूँ, मगर मैं क्या करता! मेरी बीवी मुझे हाथ नहीं लगाने देती, दूसरी शादी की.. तो वो पागलख़ाने में है.. और तू मुझे पापी समझती है. अब मैं जाऊं तो कहाँ जाऊं. देख फरज़ाना.. तुझे एक ना एक दिन किसी से तो शादी करके चुदवाना ही होगा, तो मेरे से क्यों नहीं? तेरी अम्मी को तूने देखा था ना.. वो कितनी खुश थी, मेरे जैसा आदमी तुझे कहीं नहीं मिलेगा. सब सुख सुविधा तुझे मिलेगी, मैं बुरा इंसान नहीं हूँ. फिर भी तुझे लगता है कि मेरे साथ तुम खुश नहीं रहोगी तो फिर मैं यहाँ कभी नहीं आऊंगा. तुम्हें जैसे रहना है, रहो.. और हाँ तुम अम्मी की चिंता मत करो.. उनको बराबर इलाज मिलेगा. तुम्हें भी मैं टाइम पर पैसे भेज दूँगा, मगर मेरी जरूरत को पूरा करने के लिए मुझे तो कोई जुगाड़ करना ही होगा. तो देखूँगा किसी और को.. ठीक है आराम से सोच कर बताना. जाओ पहले कॉफी लेकर आओ.

फरज़ाना के तो पैरों तले ज़मीन निकल गई. वो अजीब धर्मसंकट में पड़ गई. ये अब्दुल जी ने कौन सा दांव खेल डाला था. अब वो क्या करे, बस इसी उधेड़बुन में वो कॉफी बना कर ले आई और अब्दुल जी को दे दी.

अब्दुल- सुनो फरज़ाना, मैं कल सुबह 11 बजे आऊंगा, तब तक तुम अपना फैसला मुझे बता देना. अगर तुम्हारी ‘हाँ’ हुई तो रात को तुम्हें अपनी बीवी बना लूँगा और ना हुई, तो कल के बाद तुम मेरी शक्ल नहीं देखोगी, किसी भी हाल में तुम मेरी बेटी नहीं रहोगी, क्योंकि मैंने शुरू से तुम्हें बेटी माना ही नहीं.. अब फैसला तुम्हें करना है.

अब्दुल जी तो चले गए और फरज़ाना पूरी रात करवटें बदलती रही. अलग-अलग तरह से उसने सोचा फिर किसी नतीजे पे पहुँच गई और कब उसकी आँख लगी, उसे पता भी नहीं लगा.

सुबह 11 बजे जब अब्दुल जी आए, तब फरज़ाना ने ब्लेक नाइटी पहनी हुई थी. उसके बाल खुले थे और उस टाइम वो बेहद हसीन लग रही थी.

अब्दुल- वाह क्या बात है, आज तो तुम बहुत निखरी हुई लगा रही हो.

फरज़ाना- बस ऐसा कुछ नहीं है.. आपके देखने का तरीका ऐसा है कि मैं आपको अच्छी लग रही हूँ.

अब्दुल- हाँ तो क्या सोचा तुमने.. मैं रुकूं या यहाँ से जाऊं?

फरज़ाना- अरे इतनी भी क्या जल्दी है.. पहले आपके लिए कॉफी तो बना लाऊं.

अब्दुल- नहीं मुझे थोड़ा काम है, मैं बस तुम्हारा जवाब ही जानने आया हूँ.

फरज़ाना- अच्छी बात है.. तो सुनिए मेरी अम्मी आपकी बीवी है, उस हिसाब से अगर मैं आपकी बीवी बनती हूँ तो मेरी अम्मी की सौतन बन जाती हूँ, जो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं और आप मुझे बेटी बनाओगे नहीं.. तो आप बस ये बता दो. अगर मेरा जबाव ‘हाँ’ हुआ तो मैं आपकी क्या लगूंगी.. हमारा रिश्ता क्या होगा?

अब्दुल- अरे बहुत सिंपल है.. हमारा प्यार का रिश्ता होगा, जो सबसे बड़ा होता है.

फरज़ाना- ठीक है अगर किस्मत को यही मंजूर है तो यही सही.. मैं तैयार हूँ अब इस रिश्ते की शुरूआत अभी करोगे या रात को?

फरज़ाना की बात सुनकर अब्दुल जी खुश हो गए और उसे गले से लगा लिया.

अब्दुल- मैं जानता था कि तुम ‘हाँ’ ही कहोगी. अब देखो मैं तुम्हें कितना प्यार देता हूँ. मगर अभी नहीं रात को.. अभी तो मुझे बहुत तैयारी करनी है.

फरज़ाना- आपको कैसी तैयारी करनी है?

अब्दुल- अरे आज तो ख़ुशी का मौका है. तुझे मेरी दुल्हन बना कर मैं तेरे साथ सुहागरात मनाऊंगा.

फरज़ाना- नहीं अब्बू, आप ऐसा कुछ नहीं करोगे.. मुझे कोई दुल्हन नहीं बनना, आपकी बीवी मेरी अम्मी हैं, वही रहेंगी.. आज से मैं आपकी रखैल बन कर रहूंगी. बोलो मंजूर है आपको.. प्यारे अब्बू..!

अब्दुल- ये क्या बकवास कर रही हो तुम.. और मैंने कहा ना, मुझे अब्बू मत कहो.

फरज़ाना- अरे आप नाराज़ क्यों होते हो. मैंने बस प्यार से कहा है.. आपने ही तो कहा था कि हमारा प्यार का रिश्ता होगा हा हा हा.. अभी आप जाओ, जो तैयारी करनी है.. मैं कर लूँगी और ये सुहागरात वगैरह सब भूल जाओ, जो करना है ऐसे ही करेंगे समझे..!

अब्दुल- ठीक है, जैसा तुम कहो मगर अपने आपको थोड़ा ‘साफ-सुथरा’ कर लेना.. मेरी बात समझ गई ना तुम..!

फरज़ाना- इतनी भी नादान नहीं हूँ पा.. नहीं.. ये तो आपको जमेगा नहीं, चलो कोई नया नाम सोचती हूँ.. बलमा कैसा रहेगा..?

अब्दुल- हाँ ये ठीक रहेगा, मैं बलमा तू मेरी रानी.. चल मैं रात को आता हूँ.

अब्दुल जी तो चले गए और फरज़ाना कुछ सोच में पड़ गई कि अब क्या करे.

ऐसे ही दिन बीता और शाम हो गई. फरज़ाना ने अपनी फुददी के बाल साफ किए फिर वो ब्यूटी पार्लर गई और वहां अच्छे से तैयार होकर घर आ गई. आज उसने रेड और वाइट कलर का एक गाउन पहना था, जिसमें उसका निखार अलग ही नज़र आ रहा था.

अब्दुल जी रात को जब वहां आए तो बस फरज़ाना को देखते ही रह गए.

फरज़ाना उनके सामने अपने बालों को सवांरती हुई खड़ी मुस्कुरा रही थी.

अब्दुल जी ऊपर से नीचे फरज़ाना को निहार रहे थे, वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी.

फरज़ाना- क्या हुआ बलमा जी.. ऐसे क्या देख रहे हो? नज़रों से ही मुझे खा जाओगे क्या..?

अब्दुल- तुम हो ही इतनी सुन्दर.. नज़र हटाने को मन ही नहीं करता.

फरज़ाना- कुछ लोगे या आपका सीधे मुझे ही खाने का मूड है?

अब्दुल- नहीं मेरी रानी, खाना-पीना सब हो गया, अब तो बस मैं तुम्हें प्यार ही करूँगा.

फरज़ाना- अच्छा तो चलो कमरे में.. देर किस बात की है, आपने जैसा कहा था आपके लिए सब क्लियर कर दिया मैंने.

अब्दुल- गुड गर्ल.. तो ऐसे ही करें क्या.. तुम कपड़े नहीं बदलोगी?

फरज़ाना- हा हा हा आप भी ना.. जब 2 मिनट बाद सब निकालने ही हैं, तो बदलने से क्या हो जाएगा हा हा हा हा..

अब्दुल- बड़ी तेज हो गई है तू आज तुझे मैं चोद कर अपनी रानी बना लूँगा.

अब्दुल उसके करीब हो गए और उसे जोरदार किस किया, फिर उसे गोद में उठा कर कमरे में ले गए और बिस्तर पर लेटा दिया. फिर जल्दी से अपनी शर्ट निकाल फेंकी और फरज़ाना पर दोबारा टूट पड़े. वो कभी उसको किस करता तो कभी कपड़ों के ऊपर से फरज़ाना के चुचों को दबाते. बेचारी फरज़ाना का ये हाल था कि वो बस सिसकियाँ ही ले रही थी.

थोड़ी देर बाद अब्दुल जी ने फरज़ाना को कहा- अब तू खड़ी होकर ये गाउन निकाल दे.

फरज़ाना- ऐसे ही निकाल दो ना.. अब खड़ी क्या होना था.. आप भी ना..!

अब्दुल- मेरी रानी तुझे ठीक से देखना चाहता हूँ.. तेरे एक-एक अंग की बनावट अच्छे से देख कर ही तुझे रानी बनाऊंगा, चल अब देर मत कर.. निकाल दे ये गाउन..!
 


फरज़ाना खड़ी हुई और शर्माते हुए उसने गाउन निकाल दिया. अब वो सिर्फ़ लाल ब्रा-पेंटी में थी. सच में उसके जिस्म की कसावट ऐसी थी, जैसे रोज जिम जाती हो. उसके मम्मे ब्रा से बाहर आने को मचल रहे थे और पेंटी से फुददी का उभार साफ बता रहा था कि अन्दर उसने खजाना छुपा रखा था.

अब्दुल- वाह.. फरज़ाना क्या लाजवाब हुस्न है तेरा.. चल अब ये ब्रा भी निकाल और आज़ाद कर दे तेरे मचलते आमों को..!

फरज़ाना- नहीं मुझे शर्म आती है.. मुझसे ये नहीं होगा, आप खुद निकाल दो.

फरज़ाना का ये पहला मौका था कि वो ऐसे किसी के सामने नंगी हो रही थी. वैसे तो वो एक पढ़ी-लिखी समझदार लड़की थी. सेक्स का भी उसको ज्ञान था. कुछ सहेलियों से तो कुछ नेट से बाकी उसका स्वाभाव भी थोड़ा बिंदास ही था तो वो ऐसे नंगी अब्दुल के सामने खड़ी हो गई. कोई और होती तो शायद इतना नहीं कर पाती.

अब्दुल जी अपनी जगह से उठे और फरज़ाना को बांहों में भर लिया. फिर उसकी ब्रा को खोल कर अलग कर दिया और अगले ही पल वो नीचे बैठ गए और सीधे उसकी पेंटी को निकाल दिया. मगर ये निकालते टाइम अब्दुल ने एक बार भी चुचों और फुददी की तरफ़ नहीं देखा, वो बस फरज़ाना की आँखों को देख रहे थे.

फरज़ाना को नंगी करने के बाद वो उससे दूर हुए, फिर फरज़ाना के चुचों की तरफ़ देखा, जिसे देख कर उनका लंड पेंट फाड़ने को बेताब हो गया क्योंकि फरज़ाना के मम्मे कुछ अलग ही थे, जो शायद बहुत कम लड़कियों के होते हैं.

फरज़ाना के 32″ के एकदम गोल, साँचे में ढले हुए मम्मे और थोड़ा ऊपर को उठे हुए थे. आमतौर पर लड़कियों के मम्मे जहाँ होते हैं, उससे थोड़ा सा और ऊपर जैसे उन्हें अलग से चिपकाया गया हो.. वैसे होते हैं. फरज़ाना के मम्मे एकदम उठे हुए और उन पर हल्के भूरे नोकदार निप्पल जैसे कोई सुई की नोक जैसे नुकीले हों. इस वजह से फरज़ाना के मम्मे अलग ही कमाल कर रहे थे.

मैंने पहले भी बताया कि फरज़ाना बहुत खूबसूरत लड़की है, फिर ऐसा हुस्न किसी को भी पागल बना दे. उसकी पतली कमर के नीचे जब अब्दुल की नज़र गई, तो बस पूछो मत.. एकदम लंबी बरफी की तरह कटावदार फुददी, थोड़ी सी फूली हुई और फांकें एकदम गुलाबी थीं.

यह नजारा अब्दुल जी के होश खोने के लिए काफ़ी था. वो झट से फरज़ाना के पास गए और उसे गोदी में उठा कर घूमने लगे.

अब्दुल- ओह फरज़ाना, तुम सच में अल्लाह का दिया मेरे लिए अनमोल तोहफा हो. तुम्हें तो मैं बड़े ध्यान से रखूँगा.. तुम्हें अपनी रानी बना कर रखूँगा.

अब्दुल ने फरज़ाना को बेड पे लिटा दिया और अंडरवियर को छोड़कर अपने सारे कपड़े निकाल दिए. वैसे तो फरज़ाना का हुस्न देख कर उनका लंड तना हुआ था मगर उन्होंने कच्छा पहना हुआ था और दूसरी बात फरज़ाना ने उनके लंड पर गौर नहीं किया कि लंड कैसा है.. नहीं तो लंड का उभार देख कर वो समझ जाती कि अन्दर अज़गर छुपा हुआ है.

अब्दुल जी अब पागलों की तरह फरज़ाना को प्यार करने लगे. उसके होंठों को चूसते, कभी उसके चुचों को दबाते.. निप्पलों को चूसते.

फरज़ाना का हाल बुरा होता जा रहा था. वो बस सिसकियाँ ले रही थी. वो किसी जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी.

अब्दुल जी उसके हुस्न को चूमते जा रहे थे. वे उसकी नाभि पे अपनी जीभ घुमाने लगे और एक हाथ से उसकी मखमली फुददी, जो आज ही उसने साफ की थी… उस पर हाथ घुमाने लगे.

फरज़ाना- आह… सस्स नहीं उफ़फ्फ़ प्लीज़ आह… ऐसे मत करो अब्बू आह… मैं मर जाऊंगी आह..

फरज़ाना की बात का अब्दुल पर कहाँ असर होने वाला था, वो तो बस उस कमसिन कन्या का रस को पीने में मस्त थे. फिर अब्दुल ने अपने तपते होंठ उसकी कुँवारी फुददी पर रखे और जीभ से उसकी फुददी को चाटने लगे.

फरज़ाना- ऑश अम्मी मर गई रे आह… नहीं अफ सस्स आह… मत तड़पाओ आह… आह..

अब्दुल ने अब उसकी फुददी के दाने को मुँह में लेकर चूसा और अगले कुछ ही पलों में फरज़ाना का बाँध टूट गया. उसका फुददी बह निकला, फुददी रस को अब्दुल बड़े प्यार से चाट गए. फिर उसकी फुददी को पूरी तरह से चाट कर ऐसे साफ कर दिया, जैसे कुछ हुआ ही ना हो.

फरज़ाना गहरी लंबी साँसें लेने लगी, वो तो बस ऊपर की तरफ़ देख रही थी. उसे जो सुख मिला…. उसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता. उसके बाद अब्दुल उसके पास लेट गए और उसके चुचों पर हाथ घुमाने लगे.

अब्दुल- क्यों मेरी रानी बहुत जल्दी झड़ गई ना तू… आनंद आया तुझे?

फरज़ाना- आपका हमला ही इतना ख़तरनाक था. मैं तो कुँवारी हूँ… कोई शादीशुदा औरत भी ऐसे ही झड़ जाती. ऐसा आनंद मुझे कभी नहीं मिला, जैसा आज आपने दिया है.

अब्दुल- क्या कभी पहले भी तूने अपना पानी निकाला है? सही बताना या किसी के साथ ये सब किया हुआ है?

फरज़ाना- ये कैसी बातें कर रहे हो आप… मैं एकदम कुँवारी हूँ, मैंने कभी ऐसा कुछ किसी के साथ नहीं किया… हाँ बस कभी कभी नहाते टाइम मन में कुछ उत्तेजना आ जाती तो फुददी को ऊपर से रगड़ कर पानी निकाल लेती थी.

अब्दुल- मैं जानता हूँ मेरी रानी, बस ऐसे ही मज़ाक कर रहा था. अब तू भी मुझे प्यार कर मेरे लंड को सहला, उससे खेल… क्योंकि आज के बाद तुझे उसी से सुकून मिलेगा.

फरज़ाना- नहीं… मुझे शर्म आती है, मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाली.

अब्दुल- ये क्या है फरज़ाना… तुम ऐसे करोगी तो मुझे लगेगा तुम ये सब मजबूरी में कर रही हो… ख़ुशी से नहीं. मैंने तुम्हें साफ-साफ कह दिया था, अगर तुम चाहो तो मैं कभी यहाँ नहीं आऊंगा और तुम्हारी अम्मी को भी संभाल लूँगा. जब तुमने ‘हाँ’ कहा, तभी मैं यहाँ आया हूँ, अब जो भी करो दिल से करो.

फरज़ाना- ठीक है मेरे बलमा… आपकी यही मर्ज़ी है तो अब मैं सब कुछ दिल से ही करूँगी. आज आपको इतना सुख दूँगी कि आप खुश हो जाओगे.

अब्दुल जी सीधे लेटे हुए थे, उनका लंड अभी तक फुंफकार रहा था. जब फरज़ाना ने अब्दुल जी का कच्छा उतारा, तो उसकी तो साँसें ही अटक गईं. अन्दर से अज़गर जैसा भयानक लंड बाहर निकल पड़ा… जो पूरा तना हुआ किसी घोड़े के लंड जैसा लग रहा था. उसकी लंबाई और मोटाई का आपको क्या बताऊं… वो एक 10″ लंबा और फरज़ाना की कलाई जितना मोटा था.

फरज़ाना- ओ माय गॉड… ये क्या है… इतना बड़ा और मोटा! नहीं अब्बू प्लीज़ मुझसे नहीं होगा, इससे तो मैं मर ही जाऊंगी.

अब्दुल- अरे फिर अब्बू… तुझे कैसे समझाऊं, मैं तुम्हारा अब्बू नहीं हूँ और इसको देख कर तेरी अम्मी तो बहुत खुश हुई थी, तूने भी देखा होगा वो मुझसे शादी के बाद कितनी खुश रहती थी.

फरज़ाना- हाँ वो तो सही है मगर इसको देख कर खुश होने की क्या वजह थी?

अब्दुल- अरे पागल… किस्मत से ही ऐसा लंड किसी को मिलता है… तेरा नशेड़ी अब्बू उसको चुदाई का सुख नहीं दे पाता था, वो प्यासी थी. मैंने ही उसकी प्यास बुझाई थी और आज तुझे चोद कर अपने लंड की दीवानी ना बना दूँ तो तुम कहना.

फरज़ाना ने डरते डरते लंड को छुआ, फिर वो उसको सहलाने लगी.

अब्दुल- अरे चूम इसे… मुँह में ले, फिर देख कैसा आनंद आता है.

फरज़ाना- इतना मोटा मेरे मुँह में कैसे जाएगा और इसकी लंबाई इतनी है, ये तो मेरे गले में उतर जाएगा.

अब्दुल- हा हा हा ऐसा कुछ नहीं होगा… तू कोशिश तो कर… फिर आनंद आएगा तुझे.

फरज़ाना ने लंड को चूमना शुरू किया, अब उस पर भी नशा चढ़ने लगा था. वो लंड को मुँह में लेके चूसने लगी. उसको थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी, मगर वो पूरा आनंद लेके चूस रही थी. फिर अब्दुल ने उसको अपने ऊपर लेटा लिया और उसकी फुददी को चूसने लगे… यानि दोनों 69 के पोज़ में थे.

थोड़ी देर बाद अब्दुल ने फरज़ाना को नीचे लेटा दिया, उसके पैरों को मोड़ कर कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया, जिससे उसकी फुददी ऊपर उठ गई. अब वो अपने भीमकाय लंड को उसकी फुददी पे रगड़ने लगे.

फरज़ाना- आराम से करना, आपका लंड बहुत बड़ा है… कहीं मेरी छोटी सी फुददी फट ना जाए.

अब्दुल- डर मत मेरी जान… एक बार तो तुझे दर्द होगा मगर उसके बाद सारी जिंदगी तू मेरे लंड के गुण गाएगी.

फरज़ाना- वो तो बाद की बात है, आज पता नहीं आप मेरा क्या हाल करोगे. मैं कुँवारी हूँ मेरी फुददी बहुत टाइट है… प्लीज़ आप ध्यान से करना.

अब्दुल ने उंगलियों से फुददी के मुँह को खोला और अपना टोपा उसमें फँसा दिया. फिर फरज़ाना की कमर को पकड़ कर एक झटका मारा, टोपा फुददी को फैलाता हुआ अन्दर घुस गया और फरज़ाना की दर्दनाक चीख निकल गई. वो संभल पाती कि तभी अब्दुल जी ने दूसरा झटका दे मारा. अबकी बार आधा लंड फुददी को चीरता हुआ अन्दर घुस गया. फरज़ाना की सील टूट चुकी थी और उसकी चीखें कमरे में गूंजने लगीं. तभी फ़ौरन अब्दुल ने उसके मुँह पे हाथ रखा और आधे लंड को फँसाए हुए ही उस पर लेट गए.

फरज़ाना की आँखों से आँसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, उसका चेहरा एकदम लाल हो गया. वो दर्द से छटपटाने लगी. मगर अब्दुल जी वैसे ही उस पर यूं ही पड़े रहे. कोई 5 मिनट बाद जब वो थोड़ी शांत हुई तब अब्दुल ने अपना हाथ हटाया.

फरज़ाना- एयेए एयेए प्लीज़ निकाल लो आह… बहुत दर्द हो रहा है एयेए आह… मैं मर जाऊंगी प्लीज़.

अब्दुल- अरे कुछ नहीं होगा भला चोदने से कोई मरता है क्या? मैंने कहा ना… बस आज सहन कर ले, फिर आनंद ही आनंद है… तू बोलेगी तब आगे चोदूंगा ठीक है..!

फरज़ाना ने कुछ देर बाद कहा- अब धीमे-धीमे करना… जोर मत लगाना.

अब्दुल ने आधे लंड को आगे-पीछे करना शुरू किया. फरज़ाना को दर्द तो हो रहा था मगर वो साँसें रोके पड़ी थी. जब कुछ देर बाद उसकी फुददी में लंड एड्जस्ट हुआ तो उसकी फुददी में करंट पैदा होने लगा और उसको थोड़ा आनंद आने लगा.

फरज़ाना- आह… आ ऐसे ही आह… बलमा आह… अब दर्द के साथ आनंद आने लगा है उफ आह… मेरी फुददी में कुछ हो रहा है.

अब्दुल- देख मैंने कहा था ना… अब बस दाँत भींच ले एक झटका और लगाता हूँ, फिर पूरा लंड फुददी में घुस जाएगा, उसके बाद मज़े ही मज़े.

फरज़ाना- क्क्क..क्या… अभी आधा ही गया है! नहीं प्लीज़ अब्बू नहीं अब और नहीं जाएगा…. मैं मर जाऊंगी प्लीज़ नहीं.

अब्दुल- साली कितनी बार कहा… मुझे अब्बू मत बोल… ले अब संभाल पूरा लंड..!

अब्दुल ने फरज़ाना के होंठों को अपने होंठों से लॉक किया और जोर से कमर को पीछे लेके एक धक्का मार दिया. अबकी बार उनका अज़गर फुददी को फाड़ता हुआ पूरा अन्दर घुस गया और इस बार दर्द की इंतेहा हो गई, बेचारी फरज़ाना इस दर्द से बेहोश हो गई मगर अब्दुल अब लंड को स्पीड से आगे-पीछे करने लगे.

दस मिनट तक वो अँधाधुंध चुदाई करते रहे. अब उनका लंड फुददी में बराबर अड्जस्ट हो गया था और फरज़ाना को भी होश आने लगा था. वो बस रोए जा रही थी और अब्दुल उसको चोदे जा रहे थे.

फरज़ाना- उउउ उउउ आह… प्लीज़ आह… बहुत दर्द हो रहा है आह… आ नहीं आह… आह..

अब्दुल पर कोई असर नहीं हुआ, वो तो चुदाई में लगे हुए थे. अब फरज़ाना का दर्द कम हो गया और फिर से वो उत्तेजित हो गई… उसकी फुददी में खुजली होने लगी.

फरज़ाना- आह… आ अब्बू आह… चोदो आह अब आनंद आने लगा आह… चोदो अपनी सौतेली बेटी को… आह… आ आह.

अब्दुल- चुप साली आह… ले उहह उहह बदजात तू मेरी रखैल है… उहह उहह ले मुझे अब्बू बोलकर आह… ले उहह तू बचेगी नहीं ले उह..

अब्दुल जी अब हावड़ा मेल की स्पीड से चुदाई करने लगे थे और फरज़ाना इस हमले को सह नहीं पाई, उसकी फुददी का झरना बहने लगा.

फरज़ाना- आह… आ आह… आ फास्ट बलमा फास्ट आह… मेरी आह… आ फुददी आह… पानी आह… निकाल एयेए आह… आ रहा है आह..

फरज़ाना झड़ गई मगर अब्दुल जी का लंड चुदाई में लगा रहा, पता नहीं उस लंड में कितना पॉवर था, वो एक ही स्पीड से फुददी की अम्मी चोदने में लगे हुए थे. ऐसे ही 15 मिनट और निकल गए… बस ताबड़तोड़ चुदाई होती रही. इससे फरज़ाना एक बार फिर उत्तेजित हो गई थी. उसकी फुददी फिर बहने को तैयार थी. इस बार अब्दुल जी भी अपने चरम पे पहुँच गए थे, वो पूरी ताक़त से फरज़ाना को चोद रहे थे.

फरज़ाना- आह… आ अब्बू चोदो आह… बन जाओ बेटीचोद आह… मैं फिर आह… झरने वाली हूँ आह… फास्ट करो आह… फास्ट..

अब्दुल- चुप हरामजादी मेरा भी आह… पानी निकलने वाला है… ले साली आह… ले..

फिर दोनों एक साथ झड़ गए, चुदाई का ये तूफान थम गया. अब कमरे में सिर्फ़ दोनों की सांसों का शोर था. जब अब्दुल ने लंड बाहर निकाला, तो वीर्य के साथ बहुत सा खून भी बाहर आ गया. पूरी चादर खून से लाल थी और फरज़ाना की मासूम फुददी अब खूनी फुददी बन गई थी. उसमें सूजन भी आ गई थी.

काफ़ी देर दोनों वैसे ही पड़े रहे, फिर अब्दुल ने फरज़ाना को सहारा देकर उठाया, उसको वॉशरूम लेके गए. वहां दोनों ने साथ में सफ़ाई की, फिर अब्दुल ने कमरे में आकर बेड को ठीक किया, चादर बदली और फरज़ाना के साथ लेट गए.

कुछ देर बाद दोनों फिर प्यार में मगन हो गए. अबकी बार अब्दुल ने फरज़ाना को घोड़ी बना कर चोदा. काफ़ी देर तक वो उसे अलग-अलग तरीके से चोदते रहे और उन्होंने फरज़ाना को इतना थका दिया कि उसकी हालत खराब कर दी. फिर उसको कुछ दवा देकर अब्दुल वहां से अपने घर चले गए.

 
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