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हवस ( रिश्तों में गंदगी ) complete

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लगभग 4 बजे ग़ज़ल थक के चूर हो गई तो चाचा ने उसे घर भेज दिया उसके बाद वो दोनों भी नीचे जाकर सो गए।

फ्रेंड्स एक-एक करके रात को सबने कुछ ना कुछ कांड किया, फिर सो गए। तो चलो लाइन से सबको हम उठा भी देते हैं।

रात को शाजिया ने जो पानी निकाला था वो उसके लिए एक अजीब सा नशा बन गया। टाइम पर उठने वाली शाजिया आज बेसुध पड़ी थी।

अब्दुल जी- अरे अंजुम कहाँ हो भाई कॉफी ले आओ और ये अपनी शाजिया कहाँ है?

अंजुम- वो सो रही है जी… अभी उठाती हूँ।

अब्दुल- ये इसको क्या हो गया है आजकल बड़ी देर तक सोती है?

अंजुम- बेचारी रात देर तक पढ़ रही थी ना… मेरा फ़ोन लिया था कोई नेट से सवाल निकालने के लिए… इसी लिए आँख नहीं खुली होगी।

अब्दुल- अच्छा ये बात है ये फ़ोन का क्या माजरा है… नेट से कौन से सवाल निकालते हैं… कहीं किसी से बात तो नहीं कर रही थी ना?

अंजुम- आप भी बहुत शक करते हो जी, हमारी शाजिया ऐसी है क्या?

अब्दुल- पता है… वो ऐसी नहीं है मगर आजकल के हालत ठीक नहीं… तुम तो जानती हो दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है।

अंजुम- वो तो सही है जी… जो होना था हो गया… बरसों पुरानी बात को आप कहाँ लेकर बैठ गए, उसे जाना था वो चली गई।

शाजिया की आँख खुल गई थी… वो अंगड़ाई लेके उठी और रात की बात याद करके सिहर गई। फिर फ्रेश होकर बाहर आई। तब ये बातें चल रही थीं जिसे उसने सुन लिया।

शाजिया- गुड मॉर्निंग अब्बू गुड मॉर्निंग अम्मी सॉरी मैं लेट हो गई।

अब्दुल- कोई बात नहीं बेटा, आ जा मेरे पास आ, मेरी लाड़ली कैसी है?

शाजिया- मैं ठीक हूँ अब्बू, किसकी बात कर रहे थे आप… कौन चली गई?

अंजुम- किसी की नहीं… तू जल्दी कर… कॉलेज के लिए देर हो जाएगी।

शाजिया के सवाल ने दोनों को परेशान कर दिया।

जब वो किचन में गई तो अंजुम ने कहा- आप क्यों उस बात को दोहराते हो? शाजिया को पता लग गया तो वो ज़रूर सवाल करेगी।

अब्दुल- अच्छा नहीं करता… चलो मैं निकलता हूँ… मुझे देर हो गई।

अब्दुल जी निकल गए… इधर शाजिया भी नाश्ता करने लगी।

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चलो अब रूबी को भी उठा दो।

रात की पलंग तोड़ चुदाई के बाद रूबी को नींद तो मस्त आनी ही थी मगर साथ में उसको बुखार भी हो गया था। उसका पूरा जिस्म दर्द कर रहा था। उसकी मॉम ने उसको जगाया मगर वो नहीं उठी। फिर उन्होंने देखा वो बुखार से तप रही है तो उन्होंने अपनी शौहर को बताना ठीक समझा।

रोज़ी- फर्नाडिस … कहाँ हो सुनो तो!

फर्नाडिस- क्या हुआ रोज़ी डार्लिंग… सुबह सुबह क्यों चिल्ला रही हो?

रोज़ी- वो आपकी लाड़ली बुखार में जल रही है… मैंने कितना उठाया, उठ भी नहीं रही। अब आप ही उसे उठाओ और अपने साथ हकीम के पास ले जाओ।

फर्नाडिस- अरे मैंने रात को बताया था ना… मुझे अर्जेंट काम है और जल्दी जाना है।

रोज़ी- आप बस काम-काम करते रहना, इकलौती बेटी रात को पीकर आए आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ता… देखना ऐसे ही चला तो किसी दिन कोई बड़ी बात हो जाएगी।

फर्नाडिस- तुम दिन पे दिन चिड़चिड़ी होती जा रही हो। मैं जानता हूँ तुम बस यही सोचती हो कि ये तुम्हारी तरह किसी के साथ चली ना जाए।

रोज़ी- हाँ यही सोचती हूँ… एक ही बेटी है मेरी… ये चली गई तो मैं मर ही जाऊंगी।

फर्नाडिस- अरे कुछ नहीं होगा… हम ऐसी नौबत ही नहीं आने देंगे, तुम्हारे अब्बू की तरह में जिद्दी नहीं हूँ जो अपनी बेटी की ख़ुशी के आड़े आऊंगा। ये जिससे कहेगी हम शादी करवा देंगे, तो ये हमें छोड़कर क्यों कहीं जाएगी?

फर्नाडिस की बात रोज़ी को समझ आ गई फिर फर्नाडिस ने कहा- हकीम की ज़रूरत नहीं है.. रात को पार्टी में नाचा गाना किया होगा, जिससे थकान होकर बुखार आ गया। अलमारी से दवा निकाल कर दे दो.. ठीक हो जाएगी।

फर्नाडिस चला गया और रोज़ी ने फिलहाल रूबी को उठाना ठीक नहीं समझा और वो अपने काम में बिज़ी हो गई।

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उधर रज़िया की आँख आज बहुत जल्दी खुल गई थी.. वो उठी और बाथरूम में फ्रेश होने चली गई। जब वो वापस आई तो याक़ूब सीधा लेटा हुआ था और आगे से उसकी कैप्री पूरी गीली थी यानि उसका नाइट फॉल हो चुका था। फिर भी उसका लंड कैप्री में तंबू बनाए हुए था।

रज़िया- ये देखो मेरा सोना तो रात को ठंडा हो गया और अभी भी इसका लंड बंदूक की तरह तना हुआ है इसके लिए कुछ सोचना पड़ेगा। आज के जमाने में इतना सीधा लड़का होना अच्छी बात नहीं है।

रज़िया ने याक़ूब को जोर-जोर से हिलाया वो नहीं उठा, फिर उसने जग में पानी था वो उसके खड़े लंड पर डाल दिया ताकि उसको पता ना लगे कि रात वो झड़ गया था।

याक़ूब- उहहाअ.. क्या है आपा आप सुबह सुबह ऐसे क्यों करती हो?

रज़िया- मेरा सोना, जल्दी कर तुझे जल्दी जाना होता है ना.. तेरी एक्सट्रा क्लास के लिए.. चल उठ जा मॉम की तबीयत ठीक नहीं है। मैं जल्दी से तेरे लिए नाश्ता बना देती हूँ।

याक़ूब को उठा कर रज़िया किचन में गई, तो उसकी अम्मी वहीं नाश्ता बना रही थी।

सुरैया उमर करीब 45 पढ़ी लिखी औरत हैं। मगर शौहर की मौत के बाद उनका बिजनेस संभालना.. साथ में दो बच्चों की परवरिश भी करना, तो बेचारी इनके चक्कर में पड़ कर रह गई। अब बीमार भी रहने लगी है तो बिजनेस फेल हो गया मगर एक शॉपिंग माल है जो इनका है.. उसे इन्होंने किराए पे दिया हुआ है, बस उसकी अच्छी ख़ासी रकम इन्हें मिल जाती है जिससे घर का और इन दोनों की पढ़ाई का खर्च निकल जाता है।

रज़िया- मॉम आप क्यों उठीं.. आपकी तबीयत ठीक नहीं है, चलो जाओ कमरे में.. याक़ूब के लिए नाश्ता मैं बना दूँगी।

सुरैया- अरे कुछ नहीं.. ज़रा सा चक्कर आ गया था बस.. तेरे भाई ने घर सर पर उठा लिया और बेटी तू इतनी रात तक क्यों बाहर रहती है, मुझे तेरी फ़िक्र रहती है।

रज़िया- आप बिना वजह मेरी फ़िक्र करती हैं। मैंने कहा ना मैं आपकी बेटी नहीं बेटा हूँ.. याद है ना अब्बू क्या कहते थे कि ये अकेली 5 लड़कों पर भारी है। तो बस आपकी बेटी ऐसी ही है.. मैं लड़कों की छुट्टी कर देती हूँ।

सुरैया- हाँ पता है.. तू जिद्दी है, कहाँ मेरी मानेगी.. 5 पे भारी कहना आसान है।

रज़िया- कहना तो आसान है मगर इतना मुश्किल भी नहीं है.. मॉम मैं 5 को आराम से नहीं तो थोड़ी मेहनत करके हरा सकती हूँ। वैसे अभी तक 5 का मुकाबला किया नहीं.. मगर जल्दी हो जाएगा।

सुरैया- क्या अनाप-शनाप बोले जा रही है.. चल अब तू जल्दी तो उठ ही गई है तो याक़ूब के साथ तू भी नाश्ता कर ले फिर तेरी फ्रेंड आ जाएगी।

रज़िया ने हामी की.. उसके बाद वो अपने कमरे में चली गई और कुछ ढूँढने लगी।

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उधर हमारी प्यारी शबनम जी जल्दी आँख खुल गई। उस टाइम वो अपने मामू शाहिद से लिपटी हुई थी शाहिद का हाथ उसकी कमर पे था। शाहिद का लंड तना हुआ शबनम के पेट में चुभ रहा था, जिसे महसूस करके शबनम मुस्कुराने लगी। उसने धीमे से अपने आप को शाहिद की कैद से आज़ाद किया फिर बैठ कर लंड को सहलाने लगी।

शबनम- सस्स कितना प्यारा लंड है मामू का.. इसमें रस भी बहुत ज़्यादा है, जब देखो खड़ा हो जाता है।

शबनम लंड को पकड़ कर उसे सहलाने लगी तो शाहिद की आँख खुल गई।

शाहिद- अरे उठ गई मेरी प्यारी भांजी और ये क्या.. तू सुबह-सुबह ही शुरू हो गई?

शबनम- गुड मॉर्निंग मामू.. मैं कहाँ शुरू हुई? यही मुझे चुभ रहा था, जिससे मेरी आँख खुल गई, फिर मैंने सोचा इसको भी गुड मॉर्निंग बोल दूँ।

शाहिद- हा हा हा… ये सुबह ऐसे ही अकड़ता है। इसको जाने दे और तू नीचे चली जा.. मुझे थोड़ा और सोना है।

शबनम- एक बार इसको किस कर लूँ मामू।

शाहिद- तू भी ना बहुत बदमाश है अच्छा जल्दी कर ले।

शबनम ने लंड को बाहर निकाला.. पहले उसको किस किया, फिर सुपारे को थोड़ा मुँह में लेके चूसने लगी। एक मिनट चूसने के बाद उसने वापस लंड अन्दर कर दिया और हँसती हुई नीचे भाग गई।

शाहिद- उफ़फ्फ़ साली इत्ती सी है मगर चुदवाने को बेताब है। इसका भी जल्दी कुछ करना होगा.. साला लंड भी इसका गुलाम है, देखो मादरचोद सुबह-सुबह कैसे झटके खा रहा है?

शाहिद थोड़ी देर बड़बड़ाता रहा.. फिर टाइम देखा और वापस सो गया।

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शाजिया रेडी होकर सीधे रज़िया के घर पहुँच गई, जहाँ उसकी मुलाकात सुरैया जी से हुई और हमेशा की तरह शाजिया ने बड़े ही प्यार से मुस्कुरा कर उनको सलाम कहा।

सुरैया- सलाम बेटी आज तो रज़िया भी जल्दी उठ गई थी, ये अच्छा है रात को पार्टी में लेट तक जागो फिर जल्दी उठ जाओ। तुम रोज ही पार्टी कर लिया करो ताकि जल्दी उठने की आदत हो जाए।

शाजिया- पार्टी कैसी पार्टी? खाला मैं कुछ समझी नहीं?

सुरैया- अरे, रात को रज़िया अपने फ्रेंड्स के साथ पार्टी करने गई थी ना.. तुम नहीं गई क्या?

शाजिया- नहीं खाला रज़िया ने मुझे किसी पार्टी के बारे में कुछ नहीं बताया?

सुरैया- अच्छा ये क्या बात हुई तू भी तो उसकी दोस्त है, फिर तुझे नहीं पता ये बात तो मेरी भी समझ के बाहर है।

रज़िया- हाय शाजिया गुड मॉर्निंग आ गई तू..?

शाजिया- गुड मॉर्निंग आपा.. आप से मैं नाराज़ हूँ आपने मुझे तो नहीं बताया रात की पार्टी के बारे में?

सुरैया- हाँ रज़िया.. ये क्या बात हुई ऐसे तो तू कहती है शाजिया मेरी बेस्ट फ्रेंड बन गई और इसे पार्टी का पता भी नहीं?

रज़िया- आप भी ना मॉम कहाँ इस बुद्धू की बातों में आ गईं। पार्टी मैंने थोड़ी दी थी जो इसको इन्वाइट करती..! वो एक न्यू गर्ल आई है कॉलेज में, ये उससे नहीं मिली उसी ने छोटी सी पार्टी रखी थी.. सिंपल।

सुरैया- तुम्हारी बात तुम ही जानो, मुझे तो अपना काम करने दो।

सुरैया बड़बड़ाती हुई चली गई, फिर रज़िया शाजिया को अपने रूम में ले गई।

रज़िया- अरे क्या हुआ ऐसे मुँह क्यों फुला लिया तूने यार.. अब कुछ बोल भी?

शाजिया- आप पार्टी में गईं.. मुझे बताया भी नहीं आपने और कौन न्यू लड़की है, जिसे मैंने नहीं देखा..? कल हम साथ ही तो गए थे।

रज़िया- अरे मेरी अम्मी, वो हमारे जाने से पहले ग्रुप से मिली थी। फिर शाहिद ने दोपहर को मुझे उससे मिलवाया, वहीं अचानक पार्टी का प्रोग्राम बना।

शाजिया- अच्छा वो न्यू है.. तो उसकी भी रेगिंग की क्या?

रज़िया- वो तेरी तरह फर्स्ट ईयर की नहीं है.. वो ओल्ड स्टूडेंट है, गोआ यूनिवर्सिटी से आई है। बाकी आज तू उससे मिलकर पूछ लेना। पहले ये बता रात को कहानी रीड की तूने?

शाजिया- आपा अपने क्या कहानी बताई है मेरा तो दिमाग़ घूम गया। एक स्कूल गर्ल को कैसे उसके टीचर ने उल्लू बनाया और अब्बू रे कैसे उसकी चुदाई की। .. मज़ा आ गया मगर उसमें कितनी गंदी भाषा का यूज होता है ना आपा?

रज़िया- वाउ मेरी जान चुदाई तूने कितने आराम से बोल दिया.. यानि तू सुधर रही है। ओल्ड से न्यू जमाने की ओर आ रही है। गुड गुड.. सब कहानी देखना ये भाषा-वाषा के चक्कर में मत पड़। सेक्स मीन खुलकर एंजाय करना और उसका मज़ा ऐसे वर्ड्स से ही आता है.. जैसे लंड, फुददी, झटका, गांड और..

शाजिया- बस बस आपा.. मुझे पता है अब आप सारी डिक्शनरी मत बताओ।

रज़िया- अच्छा बता ना.. तूने कुछ किया भी या बस कहानी पढ़ती रही।

शाजिया- ऐसी कहानी पढ़ कर बिना कुछ किए नींद कहाँ आती है आपा?

रज़िया- वाउ मतलब तूने किया.. चल पूरी बात बता.. कैसे किया और कितनी बार किया?

शाजिया शर्मा रही थी मगर रज़िया ने जोर दिया तो रात की सारी दास्तान उसने रज़िया को सुना दी और साथ में ये भी बता दिया कि आज से वो ये गंदी कहानी नहीं पढ़ेगी, इससे उसको रात बहुत परेशानी हुई।

रज़िया- वाउ यार पहली बार में ही ऐसी स्पीड.. गुड मगर यार तू अब क्यों नहीं पढ़ेगी? इससे तुझे नालेज मिलेगी।

शाजिया- नहीं आपा रोज पढ़ूंगी तो रोज पानी निकलेगा, पता है रात को मेरे पैर काँपने लगे थे.. जरा भी हिम्मत नहीं थी इनमें।

रज़िया- अरे पागल.. पहली बार ऐसा होता है और तुझे किसने कहा रोज निकालने को? जब तेरी फुददी में खुजली हो तब निकालना।

शाजिया- ये कहानी पढ़कर तो खुजली अपने आप होने लगती है।

रज़िया- अच्छा समझ गई, जिस दिन मन हो.. उसी दिन पढ़ना और फुददी को शांत करना बस।

शाजिया- ओके आपा ये सही रहेगा। अब आज के लिए मेरे लिए कोई टास्क है वो बता दो।

रज़िया- अभी कुछ नहीं है शाम को बताऊंगी। अभी तो कॉलेज चल देर हो जाएगी।

दोनों घर से निकल गईं और कॉलेज पहुँच गईं।

 
वहां जाकर सब जमा हुए.. शाहिद भी आ गया था मगर रूबी नहीं आई थी तो उसकी बात वहां जरूर हुई।

आज़म- अरे क्या बात है रूबी अभी तक नहीं आई कहीं कल की चु…

वो आगे बोलता उसके पहले शाहिद ने उसको आँखें दिखाईं और वो समझ गया कि शाजिया के सामने अभी ये बातें नहीं करनी हैं।

शाजिया- क्या हुआ.. आगे तो बोलो क्या चु.. पर अटक गए क्या हुआ था कल?

शाहिद- अरे कुछ नहीं वो कल हमने थोड़ी ड्रिंक की थी.. उसके बाद नाच-गाना हुआ उसमें शायद वो थक के चूर हो गई.. यही बात ये बोल रहा था, इसी वजह से नहीं आई होगी।

शाहिद ने बात को अच्छे से संभाल लिया मगर कहते है ना चूतियों की कमी नहीं इस दुनिया में..

शाजिया- आख़िर ये रूबी है कौन? मुझे भी उससे मिलाओ.. और आपने मुझे अपने ग्रुप में शामिल तो कर लिया मगर शायद अभी तक मुझे अपनी फ्रेंड नहीं माना है, इसी लिए कल की पार्टी में भी मुझे अपने नहीं बुलाया।

सलमान- अरे तुम वहां होतीं, तो डर के भाग जातीं, रूबी की सबने की ऐसी हालत की कि..

शाहिद ने बात काटते हुए कहा- मैं बात कर रहा हूँ ना साले.. तुझे बहुत जल्दी है बोलने की.. तो मैं चला जाता हूँ फिर तू ही सारी रामायण सुना दे।

सलमान- सॉरी यार.. वो ग़लती से…

शाहिद- चुप.. अब बोला ना तो साले को यहीं मारूँगा, मेरे बीच कोई बोले मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है।

शाहिद का ये रूप देख कर शाजिया घबरा गई। अब उसकी भी आगे कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हुई, वो चुपचाप वहीं खड़ी रही।

रज़िया- कूल यार.. ऐसे झगड़ो मत.. चलो, क्लास का टाइम हो गया है।

रज़िया के बोलने के बाद अमन और फैजान उनके साथ चले गए और पीछे से शाहिद ने उन दोनों की क्लास ले ली।

शाहिद- बहन के लंड.. मैं इसे प्यार से रांड़ बनाना चाहता हूँ और तुम दोनों मेरे पूरे प्लान की अम्मी-बहन कर रहे हो!

आज़म- सॉरी यार.. ग़लती हो गई मगर एक बात बता, आज तक एक से बढ़कर एक लड़की हमने देखी.. उसको किसी ना किसी तरह बोतल में तुमने आराम से उतार लिया, मगर ये शाजिया को तू किस तरह तैयार कर रहा है? ये बात समझ नहीं आ रही है।

सलमान- हाँ यार.. इसको तू चाहे तो रूबी की तरह कब का तैयार करके चोद सकता है, मगर तूने ये टास्क-वास्क का क्या नया चक्कर चलाया.. ये समझ के बाहर है?

शाहिद- सालो, इसे चोदना मेरा मकसद नहीं है, मैंने कहा ना इसको ऐसी रांड़ बना दूँगा कि दिन रात ये लंड लंड करेगी, तब जाकर मेरे दिल को सुकून मिलेगा।

सलमान- मगर क्यों यार ऐसा क्या किया इसने जो तू इसे रांड़ बनाने पे तुला है?

शाहिद- ये आज की नहीं बहुत पहले की भड़ास है.. तुम लोग नहीं समझोगे।

आज़म- ओ तेरी की.. ये बात है मतलब कोई पुरानी भड़ास है.. साला अब समझा यार पहले भी तू ये बता सकता था।

शाहिद- अब गौर से सुन लो और उन दोनों को भी बता देना, ये बात आज के बाद अपनी ज़ुबान को काबू में रखना समझे और हाँ रज़िया को इस बारे में कुछ मत बताना।

आज़म- वो क्यों यार.. रज़िया तो हमारे साथ ही है.. उससे छुपाने का कोई कारण?

शाहिद- हाँ कारण है, मगर अभी नहीं.. बाद में बताऊंगा अब चलो।

फ्रेंड्स ये तो बदले की भावना में है। अब ऐसा क्या किया शाजिया ने कि ये उसको रांड़ बनाने पे लगा हुआ है। ना ना.. आप बिल्कुल भी सोचो मत.. मेरी कहानी में ट्विस्ट ना हो ऐसा हो सकता है क्या? बस पढ़ते रहो.. अपने आप सब समझ आ जाएगा।

फ्रेंड्स यहाँ तो सब हमने देख लिया। चलो अब वहाँ गाँव का चक्कर लगा आते हैं।

 
फ्रेंड्स यहाँ तो सब हमने देख लिया। चलो अब वहाँ गाँव का चक्कर लगा आते हैं।

चाचा ने रात भर ग़ज़ल की फुददी का जो बैंड बजाया था.. उसने अपना असर दिखा दिया। सुबह वो भी रूबी की तरह बुखार से तपने लगी थी और राबिया की गांड भी दर्द कर रही थी, मगर चाचा अपनी मस्ती में किसी आवारा सांड की तरह मगन हो कर घूम रहा था।

सुबह तो यहाँ भी सब नॉर्मल ही रहा मगर करीब 11 बजे गाँव के किसी घर में आग लग गई तो सारा गाँव वहीं जमा हो गया।

उस वक्त राबिया घर में अकेली थी तभी एक फकीर वहाँ भिक्षा माँगने आ गया।

फकीर की उमर 45 साल के आस-पास होगी, वो हट्टा-कट्टा 6 फुट की हाईट वाला एकदम गोरा फकीर था।

फकीर- घर में कोई है.. अल्लाह हू अल्ला हू..

राबिया बाहर आई और फकीर महाराज को गौर से देखने लगी, उनके चेहरे पे अलग ही तेज था.. जैसे कोई सिद्ध पुरुष हो।

राबिया- बोलो बाबा.. क्या चाहिए, घर वाले सब बाहर गए हैं।

फकीर- बेटी राबिया.. हम तुमसे मिलने ही आए हैं, अल्लाह की तुझपे बहुत दया है मगर तेरे सर पे बहुत बड़ा संकट आने वाला है।

राबिया- आपको मेरा नाम कैसे पता लगा बाबा.. और कैसा संकट आने वाला है?

फकीर- अल्लाह हू अल्ला हू.. हम सब जानते हैं बेटी.. तू शौहर सुख से वंचित थी। यहाँ आकर तुझे थोड़ी संतुष्टि हुई है मगर जल्दी तू यहाँ से चली जाएगी और तेरी कुंडली का दोष तेरे शौहर को खा जाएगा.. तू विधवा हो जाएगी।

राबिया- नहीं बाबा शुभ शुभ बोलिए.. पहले ही अपने अम्मी-अब्बू को खो चुकी हूँ। अब फवाद ही मेरी दुनिया है, वो चला गया तो मैं जीते जी मर जाऊंगी।

फकीर- अल्लाह की तुझपे बड़ी कृपा है इसी लिए मैं अपनी सिद्धि छोड़कर यहाँ तेरे पास आया हूँ बेटी.. तुझे एक कार्य करना पड़ेगा, उसके बाद तेरा कुंडली दोष चला जाएगा और तेरे शौहर की आयु लंबी हो जाएगी।

राबिया- बताओ बाबा.. मैं कुछ भी कर लूँगी.. आप बस उपाय बताओ।

फकीर ने राबिया को उपाय बताया, जिसे सुनकर उसकी आँखें बड़ी हो गईं।

राबिया- ये कैसे होगा बाबा.. ये बहुत मुश्किल है.. मैं नहीं कर पाऊंगी.. वो इसके लिए कभी नहीं मानेंगे।

फकीर- मुश्किल है.. मगर नामुमकिन नहीं, अल्लाह का नाम लेकर कोशिश करो.. ज़रूर सफल हो जाओगी।

राबिया- और कोई उपाय नहीं है क्या बाबा? ये बहुत मुश्किल है, ऐसी लड़की कहाँ से लाऊं.. फिर मैं आप नहीं नहीं.. वो इस बात को जिंदगी में नहीं मानेंगे।

फकीर- नहीं बेटी.. बस एक यही रास्ता है जिससे तेरी कुंडली का दोष ख़त्म होगा। अब तू ये कैसे करेगी ये तेरी समझ है। अल्लाह ने तुझे यहाँ मुझसे मिलवाने के लिए ही बुलाया है। उसकी पुरानी कहानी की तलाश कर.. तुझे हल मिल जाएगा। अब मैं जाता हूँ.. जल्दी ही तुझसे मिलने आऊंगा अल्लाह हू अल्ला हू..

फकीर तो चले गए मगर राबिया को कस्मकस में डाल गए।

सॉरी फ्रेंड्स, बीच में आने के लिए ये फकीर वाला किस्सा काल्पनिक है.. इसका कहानी से कोई लेना-देना नहीं है.. मैंने ऐसे ही इसको डाल दिया मगर इसकी वजह से आपको एक्सट्रा मज़ा मिल जाएगा बस और कुछ नहीं।

शाम तक राबिया इसी सोच में रही कि अब वो क्या करे। फिर उसे याद आया कि फकीर ने उसकी पुरानी जिंदगी के बारे में कुछ बताया था, शायद वहीं से कुछ मिल जाए। मगर उसकी लाइफ के बारे में किसको पूछूँ.. कौन बताएगा मुझे?

चाचा- अरे बहू.. क्या सोच में डूबी हुई हो.. कोई परेशानी है क्या?

राबिया- हाँ चाचा.. बहुत बड़ी परेशानी है अब आप ही मेरी मदद कर सकते हो। हाँ आप ही उसकी पुरानी कहानी जानते होगे.. सही है आप ही बताओगे।

राबिया को इतना बौखलाया देख कर चाचा भी टेंशन में आ गए। वो समझ गए जरूर कोई बड़ी बात है.. तभी ये ऐसे बोल रही है।

चाचा ने राबिया को समझाया- तू पहले विस्तार से सब बात बता.. क्या हुआ है?

राबिया ने सुबह की सारी घटना चाचा को बताई। एक बार तो उनको ये सब अटपटा लगा.. वो मानने को तैयार नहीं हुए।

चाचा- बकवास है ये सब.. तू भी किसी ढोंगी की बात में आ गई।

राबिया- नहीं वो सच्चा फकीर था.. उसे हमारे बारे में सब पता है, जो हमने किया.. सब कुछ मालूम है।

चाचा- अच्छा ये बात है.. इसका मतलब सच में फवाद की जान को ख़तरा है अब क्या करें?

राबिया- आप उसके बचपन से जवानी तक उसके साथ रहे हो.. कोई तो बात होगी ऐसी जिसका फकीर ने जिक्र किया था.. उसकी पुरानी कहानी को तलाश करो प्लीज़ चाचा.. बताओ कुछ तो याद होगा आपको?

चाचा- रूको सोचने दो मुझे.. तब तक तुम मेरे लिए कॉफी लेकर आओ।

राबिया कॉफी बनाने चली गई और चाचा पुराने ख्यालों में खो गया।

ये दोनों कुछ सोचें.. तब तक वापस शहर चलो, वहाँ भी एक ट्विस्ट पैदा हो गया है।

करीब 10 बजे रूबी उठी.. उसे अब भी पूरे जिस्म में दर्द था। उसने अपनी मॉम को आवाज़ दी.. तब रोज़ी ने उसे दवा दी और उसके पास बैठ गई।

रोज़ी- सॉरी रूबी.. रात मैंने तुम्हें डांटा था मगर तुम समझ सकती हो तुम मेरी एक ही बेटी हो.. अगर तुम्हें कुछ हो गया तो?

रूबी- मॉम, आपको हर टाइम ये डर क्यों लगा रहता है.. कहीं आप ये तो नहीं सोचती कि मैं भी आपकी तरह घर से भाग जाऊंगी, बोलो मॉम?

रोज़ी- हाँ डरती हूँ मैं.. मैंने बिना सोचे अपने घर वालों को छोड़ दिया था। आज 22 साल हो गए मुझे उनसे मिले हुए। तुम्हारे अब्बू के प्यार में कोई कमी नहीं थी मगर अपने फैमिली से दूर होना क्या होता है.. ये मुझे बाद में समझ आया।

रूबी- आप वापस क्यों नहीं गईं? एक बार ट्राइ करतीं.. शायद वो माफ़ कर देते।

रोज़ी- कैसे जाती, मेरी वजह से उनकी कितनी बदनामी हुई होगी, पता नहीं उनपर क्या गुज़री होगी?

रूबी- फिर भी मॉम एक बार कम से कम एक बार तो आपको जाना चाहिए था।

रोज़ी- गए थे बेटा.. टेंशन से मैं बीमार हो गई थी। तब तेरे अब्बू एक बार गए थे.. मगर वहाँ कोई नहीं था. मेरे भाग जाने के बाद अब्बू को हार्ट अटॅक हुआ था। वो लोगों की बातें सहन ना कर सके और फिर उन्होंने सब कुछ बेच दिया और उसके बाद न जाने कहाँ चले गए, किसी को कुछ पता नहीं।

रूबी- ओह.. सॉरी मॉम प्लीज़ आप ये चिड़चिड़ापन ख़त्म कर दो, मैं वादा करती हूँ आपसे दूर कहीं नहीं जाऊंगी। अगर किसी से प्यार भी करूँगी तो आपको सबसे पहले आकर बता दूँगी। प्लीज़ मॉम अपने आपको संभालो.. आजकल आप बहुत टेंशन लेने लगी हो। कहीं फिर से आप बीमार ना हो जाओ।

फ्रेंड्स, ये दोनों अम्मी-बेटी आपस में गले लग कर एक-दूसरे को तसल्ली देने लगीं मगर आप सोचो मत.. अब कड़ी से कड़ी जुड़ने का टाइम आ गया है। धीमे-धीमे सब कहानी मिलकर एक हो जाएगी।

चलो अब यहाँ से वापस गाँव चलते हैं, उधर राबिया ने कॉफी तैयार कर दी है।

 
राबिया कॉफी लेकर आ गई तब तक चाचा को भी फवाद की पुरानी बात याद आ गई थी।

राबिया- कुछ याद आया आपको?

चाचा आराम से कॉफी की चुस्की ले रहे थे और राबिया इन्तजार कर रही थी कि चाचा अब बोलें तब बोलें। जब राबिया के सब्र का बाँध टूट गया तो वो फिर से बोली- चाचा कुछ तो बताओ?

चाचा- क्या बताऊं बहू, बचपन में तो वो सीधा साधा ही था, पढ़ाई में तेज था तो आगे की पढ़ाई के लिए उसे शहर भेज दिया गया था। हाँ, जब वो छुट्टियों में आता तो एक बार सरपंच की छोरी ने उसकी शिकायत की थी कि वो उसको नहाते हुए देख रहा था। बस उस दिन उसकी जो कुटाई हुई, पूछो मत!

राबिया- ये सब तो बचपन में सबके साथ होता है चाचा.. कोई खास बात जो फकीर की बात की तरफ़ इशारा करे।

चाचा- नहीं राबिया, उस दिन के बाद तो वो छुट्टियों में भी नहीं आता.. कुछ ना कुछ बहाना कर लेता था। हाँ, एक आदमी तेरी मदद कर सकता है.. उसका खास दोस्त, जो स्कूल से कॉलेज तक उसके साथ पढ़ा भी.. और रहा भी।

राबिया- चाचा कौन दोस्त..? मैंने तो किसी दोस्त को नहीं देखा, दरअसल फवाद थोड़ा अजीब ही है। उसके इतने कोई खास दोस्त हैं भी नहीं.. घर से काम पर जाना और काम से घर आना। इसके अलावा मैंने कभी किसी का जिक्र ही नहीं सुना।

चाचा- है राबिया.. एक है, समीर.. शादी के 2 महीने पहले फवाद का उससे झगड़ा हुआ था, बस तब से वो लापता है।

राबिया- लापता..! मतलब फवाद ने कुछ कर दिया क्या उसको?

चाचा- अरे नहीं रे पगली.. मतलब दोस्ती टूट गई, वो अपने रास्ते फवाद अपने रास्ते।

राबिया- ये सब आपको कैसे पता लगा?

चाचा- समीर के बारे में यहाँ सब जानते हैं। वो कई बार यहाँ आ चुका है मगर शादी के टाइम वो नहीं आया तो मैंने ही पूछ लिया था। तब फवाद ने झगड़े के बारे में बताया था।

राबिया- झगड़े की वजह क्या थी चाचा?

चाचा- वो तो मुझे ना पता.. मगर एक बार में शहर गया था तो समीर मिला था। मैंने उससे भी पूछा उसने बस यही कहा वो मेंटल है.. ऐसी घटिया सोच के आदमी के साथ मैं इतने साल कैसे रहा.. मैं ही जानता हूँ।

राबिया- चाचा लगता है फकीर ने इसी और इशारा किया है, मगर ये समीर अब कहाँ मिलेगा मुझे?

चाचा- अरे तेरे शहर में ही है.. कोई बंदर मोहल्ले में उसकी कॉफी की शॉप है।

राबिया- हा हा हा बंदर नहीं चाचा बांद्रा एक एरिया का नाम है.. मगर इतना पढ़ा-लिखा आदमी और कॉफी की शॉप?

चाचा- अरे उसी ने बताया था और बताया क्या.. मैं खुद वहां उसके साथ गया था। हमारे गाँव की जैसी छोटी शॉप नहीं है.. बहुत बढ़िया शॉप है। उसमें एसी भी लगा है और हाँ पता है कॉफी कितनी महंगी है.. शुरुआत ही 150 रुपये से है और 1000 तक की होगी।

राबिया- ओह अच्छा समझ गई चाचा.. वो कॉफी की शॉप नहीं कैफे है। अब उसको ढूंढना आसान है.. बांद्रा में तो टी-विला कैफे ही फेमस है.. शायद वही होगा।

चाचा- अब क्या है.. वो तू जाने, मुझे ये सब नहीं पता, बस फवाद को कुछ ना हो अल्लाह करे.. वो फकीर का उपाय काम कर जाए और फवाद की जान बच जाए।

राबिया- हाँ चाचा.. मैं कल सुबह ही निकाल जाऊंगी.. पता नहीं समीर मिलेगा भी या नहीं?

चाचा- अच्छा ये बात है तो तुझे जाना ही चाहिए। आज रात तेरी जमकर चुदाई कर देता हूँ.. वहां जाकर फिर तुझे तड़पना नहीं पड़ेगा.. ठीक है ना!

राबिया- हाँ चाचा.. आज मज़े से चोद लेना और जल्दी शहर आ जाना। मुझसे ज़्यादा दिन सब्र नहीं होगा.. मेरी फुददी आपके लंड की आदी हो गई।

चाचा- चिंता ना कर.. मैं आ जाऊंगा तू पहले उस समीर को तो खोज ले।

ये दोनों काफ़ी देर तक बात करते रहे। फिर राबिया की सास आ गई तो चाचा इधर-उधर हो गए ताकि किसी को शक ना हो।

फ्रेंड्स वहाँ भी ऐसा कुछ खास नहीं हुआ जो आपको बताऊं।

हाँ, शाहिद कॉलेज से घर आया तो शबनम रोज की तरह उससे पढ़ने उसके पास आ गई। मगर शाहिद के सर में बहुत दर्द था तो उसने शबनम को कहा कि वो अपना होमवर्क कर ले.. तब तक वो थोड़ा सो जाए। उसके सर में दर्द है.

और शबनम ने भी मौके की नजाकत को समझ कर हाँ कह दी।

शबनम ने अपना होमवर्क करके शाहिद को एक-दो बार उठाने की कोशिश की, मगर वो गहरी नींद में था सो नहीं उठा, तो शबनम भी उसके पास ही सो गई।

फ्रेंड्स, शाम तक कुछ नहीं हुआ सब अपने अपने कामों में बिज़ी थे।

रात को करीब 8 बजे अब्दुल जी घर आए, तब शाजिया और अंजुम रूम में बैठी बातें कर रही थीं।

अंजुम- अरे आप आज जल्दी कैसे आ गए? सब ठीक तो है ना.. आपकी तबीयत तो ठीक है ना?

अब्दुल- अरे सब ठीक है.. वो मैंने बताया था ना सूरत में एक नई कपड़ा मिल खुली है। बस कई दिनों से उससे बात चल रही थी। अब शॉप में वहाँ से कपड़ा मँगवाएगे तो ज़्यादा फायदा होगा। शाम को उनसे बात हुई.. कुछ जरूरी बातें हैं जो फ़ोन पर नहीं हो पाएंगी.. इसलिए अभी सूरत जा रहा हूँ, सुबह जल्दी उनसे मिलना है।

अब्दुल जी जल्दी में थे मगर अंजुम ने उनको खाना खिलाया और शाजिया ने उनका बैग पैक किया और वो निकल गए।

ठीक 9 बजे रज़िया उनके घर आई, शाजिया की अम्मी से मिली, फिर वो शाजिया के कमरे में चली गई।

शाजिया- मैं आपका ही वेट कर रही थी आपा, और बताओ आज आप क्या टास्क दोगी?

रज़िया- बताऊंगी मेरी जान.. पहले ये बता तेरे अब्बू कब आते हैं?

शाजिया- वैसे तो वो 10 बजे आते हैं, कभी लेट भी आये हैं, मगर आज जल्दी आ गए और अर्जेंट में किसी काम से सूरत गए हैं।

रज़िया- गुड… यानि आज मैं तुझे रस चखा सकती हूँ।

शाजिया- कैसा रस? आपा मैं कुछ समझी नहीं.. आप क्या बोल रही हो?

रज़िया- आज तुझे मेरे साथ घर चलना होगा.. वहीं जाकर मैं बताऊंगी।

शाजिया- मगर आपा.. अम्मी नहीं मानेगी मैं उनसे क्या कहूँ?

रज़िया- उसकी टेंशन तू मत ले.. बस मेरे साथ चलने को तैयार हो जा।

शाजिया- तैयार हो जाऊं.. मतलब आपा आप क्या पहेलियाँ बुझा रही हो.. ठीक से बताओ ना!

रज़िया- कुछ नहीं.. तू रुक मैं अभी तेरी अम्मी को पटा कर आती हूँ।

रज़िया जल्दी से बाहर गई और अंजुम जी को एक झूठी कहानी सुना दी कि उनके कल टेस्ट हैं मगर ये बात अर्जेंट उसको पता लगी। अब उन दोनों ने तैयारी भी नहीं की है।

अंजुम- हाई अल्लाह.. ये कॉलेज वाले भी ऐसे कैसे करते हैं?

रज़िया तो झूठ की शॉप थी, बस किसी तरह उसने खाला को पटा लिया कि वो शाजिया को अपने घर ले जा रही है.. वहीं साथ पढ़ाई करेगी।

अंजुम- मगर बेटी, तेरे चाचा भी नहीं हैं। तुम दोनों यहीं पढ़ाई कर लो ना?

रज़िया- वो खाला, मॉम बीमार हैं.. रात को उन्हें संभालना होता है। फिर भाई भी छोटा है.. उसको डर लगता है इसलिए।

काफ़ी सोच-विचार के बाद अंजुम ने ‘हाँ’ कह दी और रज़िया ने कमरे में जाकर शाजिया को सब समझा दिया।

शाजिया- आपा आप भी ना.. कैसे-कैसे झूठ बोलती हो.. अच्छा मैं कपड़े बदल लूँ।

रज़िया- अरे तुझे कौन सा पार्टी में जाना है.. ऐसे ही ठीक है.. अरे दिखा तो ये क्या है?

शाजिया के हाथ में एक अंगूठी थी जो बहुत ओल्ड फॅशन थी.. मगर अच्छी लग रही थी।

रज़िया- वाउ सो नाइस यार.. ये रिंग कहाँ से आई मेरी जान.. कहीं मंगनी कर ली क्या?

शाजिया- आप भी ना कुछ भी.. ये अम्मी की शादी पर अब्बू ने उनको दी थी। आज अम्मी ने अलमारी खोली तो मैंने पहनने को ले ली।

रज़िया- अच्छा ये बात है.. चल-चल अब देर मत कर.. कल के टेस्ट की तैयारी भी करनी है।

शाजिया- कैसा टेस्ट.. आपने अम्मी को झूठ कहा था.. अब आप खुद भूल गई क्या हा हा हा?

दोनों खिलखिला कर हंसने लगीं।

थोड़ी देर बाद दोनों घर से निकल गईं। रात का सन्नाटा और दो लड़कियां सड़क पे चुपचाप चली जा रही थीं। तभी कोने में एक शराबी एकदम टुन्न होकर पड़ा था.. जिसे देखकर शाजिया डर गई।

 
रज़िया- अरे डर मत उसको होश कहाँ है, नशे में धुत पड़ा है।

रज़िया उसके पास गई उसको हिलाया मगर वो तो बेसुध पड़ा था। वो कोई 40 साल का आदमी था.. शक्ल से भिखारी लग रहा था। उसने फटा हुआ कुर्ता और पजामा पहना हुआ था।

शाजिया- आपा क्या कर रही हो आप हटो वहां से.. वो आपको मार देगा.. प्लीज़ हटो।

रज़िया वहां से हट गई, उसके दिमाग़ में एक शैतानी आइडिया आया, वो शाजिया के पास आई।

शाजिया- आपा प्लीज़ चलो.. कोई आ जाएगा।

रज़िया- अच्छा रुक ना, तेरी रिंग तो दिखा मुझे कैसी है?

शाजिया बहुत डरी हुई थी, वो कुछ समझ ना पाई.. और उसने जल्दी से अपनी रिंग रज़िया को उतार कर दे दी।

उधर रज़िया भी शातिर थी.. वो रिंग लेकर उस शराबी के पास जाकर बैठ गई। शाजिया को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था।

शाजिया- ये आप क्या कर रही हो.. चलो ना?

रज़िया- रुक मेरी जान, तेरा टास्क टाइम हो गया है। अभी ये देखना है तेरी हिम्मत बढ़ी या पहले की तरह तू डरपोक है।

शाजिया- आप क्या बोल रही हो.. यहाँ कौन सा टास्क है? प्लीज़ आपा चलो मुझे डर लग रहा है.. कोई देख लेगा तो बहुत बुरा होगा।

रज़िया- तेरे अन्दर से डर ही तो निकालना है.. ये देख ये तेरी रिंग गई अन्दर.. इसे निकाल ले यही तेरा टास्क है।

रज़िया ने शाजिया को रिंग दिखाई और उस शराबी के पजामे में डाल दी।

शाजिया- ओह गॉड, आपा ये आपने क्या किया? ये मेरी मॉम की रिंग थी अब क्या होगा?

रज़िया- होना क्या था.. आकर निकाल ले, ये तो सोया हुआ है.. चल आजा।

शाजिया- नहीं आपा ये मुझसे नहीं होगा, प्लीज़ आप निकाल लो ना प्लीज़।

रज़िया ने उसके पजामे में हाथ दिया और बड़े आराम से रिंग निकाल ली। वो आदमी हिला भी नहीं.. वैसे ही सोया रहा।

रज़िया- देख कुछ हुआ? चल अब दोबारा डालती हूँ, तू चुपचाप आकर निकाल ले।

शाजिया के तो पैर काँपने लगे थे। रज़िया ने रिंग वापस डाल दी और वहीं खड़ी मुस्कुराने लगी।

शाजिया के पसीने निकल रहे थे, वो चुपचाप धीमे से आगे बढ़ी और भिखारी के पास बैठ गई।

रज़िया उसको देख कर इशारे कर रही थी कि जल्दी निकाल लो।

शाजिया- नहीं आपा मुझसे नहीं होगा प्लीज़ आप निकाल लो ना प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़..

रज़िया- नहीं तुझे रिंग चाहिए तो निकाल ले, वरना चल अगर कोई आ गया ना फिर तुम रिंग भूल ही जाना।

शाजिया बेचारी टेंशन में आ गई। वो अम्मी की रिंग कैसे छोड़ सकती है और अगर चाहिए तो किसी के पजामे वो कैसे हाथ डाले, ये सोच कर ही उसको डर लग रहा था।

रज़िया- अरे डर मत.. निकाल ले कुछ नहीं होगा, देख ये बेसुध पड़ा है।

रज़िया ने उस आदमी के लंड पर हाथ फिराया और शाजिया को यकीन दिलाया कि देख रिंग यही है। अब शाजिया तो फंसी हुई थी, रिंग उसके लिए बहुत जरूरी थी। तो बस उसने डरते-डरते अन्दर हाथ घुसा दिया। वो अपनी उंगली से रिंग ढूँढ रही थी तब उसको अहसास हुआ कि अन्दर बाल ही बाल है यानि उसकी झांटें शाजिया को महसूस हुईं। फिर उसने इधर-उधर हाथ मारा तो उस आदमी का लंड शाजिया की उंगलियों से टच हुआ।

शाजिया के पूरे जिस्म में करंट दौड़ने लगा। वो समझ गई कि उसने क्या टच किया है। उसकी आँखों में लंड की तस्वीर उभर आई और उसने जल्दी से हाथ बाहर निकाल लिया।

रज़िया- अरे ऐसे तो सुबह तक तुझे रिंग नहीं मिलेगी.. अच्छे से हाथ घुमा।

शाजिया- आपा व्व..वो इसने अन्दर कुछ नहीं पहना हुआ है, मेरा हाथ इसके व्ववो उससे टच हुआ.. नहीं आपा मुझसे नहीं होगा।

रज़िया- अरे क्या वो वो.. साफ बोल ना उसका लंड टच हुआ.. उसमें क्या है.. डिल्डो को तो बहुत मज़े से पकड़े हुए थी अब असली कैसा होता है वो भी देख ले ना.. चल जल्दी कर!

शाजिया- व्व..वो बड़ा अजीब सा लगा आपा नर्म सा गिलगिला सा है।

रज़िया- सोया लंड ऐसा ही होता है, चल निकाल जल्दी.. बहुत देर हो गई।

शाजिया ने अबकी बार हिम्मत करके हाथ अन्दर घुसा दिया। उसकी झांटों में अच्छे से हाथ घुमाया। अब उसका डर कम हो गया था, उसने लंड को भी पूरा मुठ्ठी में पकड़ लिया। उस आदमी का लंड सोया हुआ था। अब उसको ये अहसास मज़ा देने लगा और उसकी फुददी में अजीब सी बेचैनी शुरू हो गई या ऐसा समझो शाजिया की फुददी से पानी रिसने लगा। काफ़ी देर तक उसको रिंग नहीं मिली मगर वो अब लंड को दबा-दबा कर मज़ा लेने लगी। उसके दिमाग़ से रिंग गायब हो गई थी.. वो बस लंड के मज़े लेने में लगी हुई थी, जिसे रज़िया ने ताड़ लिया था.. मगर वो कुछ बोली नहीं और बस देखती रही।

आदमी चाहे कितना नशे में हो मगर एक कच्ची कली के हाथ का स्पर्श लौड़ा भली-भाँति समझता है और उसके बाद आपको तो पता ही है ना.. कि वो अपना रूप लेने लगता है यानि अकड़ने लगता है। उस आदमी का भी लौड़ा ऐसे ही अकड़ने लगा। शाजिया को जब ये अहसास हुआ उसने झट से अपना हाथ बाहर निकाल लिया और खड़ी हो गई। तभी दूर से कोई आता हुआ उसको दिखा।

शाजिया- आपा सामने से कोई आ रहा है यहाँ से जल्दी चलो।

रज़िया भी मौके की नजाकत समझ गई और वो दोनों तेज़ी से वहां से भाग गईं। सीधे रज़िया के घर जाकर ही उन्होंने सांस ली।

रज़िया के घर का दरवाजा खुला था दोनों अन्दर चली गईं और सीधे रज़िया के कमरे में जाकर शाजिया ने लंबी सांस ली। इसी के साथ उसकी नज़र याक़ूब पर भी गई.. जो आराम से अपने बेड पे सोया हुआ था। वैसे रज़िया ने उसके बारे में शाजिया को बताया था मगर उसे देखा शाजिया ने आज ही था। इस टाइम शाजिया की साँसें उखड़ी हुई थीं.. उसने याक़ूब को इग्नोर किया और पास रखी बोतल से पानी पिया।

शाजिया- आह आपा आपने तो आज मरवा ही दिया था।

रज़िया- अच्छा पहले तो बड़े नाटक कर रही थी.. मगर बाद में उसके लंड को बड़ा दबा-दबा कर देख रही थी।

शाजिया- उह.. आपा धीमे बोलो आपका भाई सुन लेगा और ये सब झूठ है.. मैंने कोई मज़ा नहीं लिया, मैं बस रिंग ढूँढ रही थी।

रज़िया- अच्छा तो इतनी देर में तुझे रिंग मिली भी नहीं और उस शराबी का लौड़ा तूने दबा-दबा के खड़ा भी कर दिया।

शाजिया- ओह आपा प्लीज़ धीमे बोलो.. ये सुन लेगा आप भी ना!

रज़िया ने याक़ूब को ज़ोर-ज़ोर से हिलाया और आवाज़ दी मगर उस पर कोई असर नहीं हुआ।

ये सब शाजिया आँखें फाड़े देखती रही।

रज़िया- कुछ समझ आया? ये कुंभकरण का अब्बू है.. ढोल नगाड़े भी बजाओ तब भी नहीं उठेगा। इस पर सुबह पानी डालना पड़ता है, तब जाकर ये उठता है।

शाजिया- हा हा हा… ऐसी भी क्या नींद है, हा हा हा… आपा ये तो दुनिया का आठवाँ अजूबा है।

रज़िया- इसको जाने दे.. तू बता असली लंड पकड़ कर मज़ा आया या नहीं?

शाजिया- आप भी ना आपा, कुछ भी मैंने कुछ नहीं पकड़ा.. बस रिंग ढूँढ रही थी।

जैसे ही शाजिया को रिंग याद आई वो मायूस हो गई मगर रज़िया तो पक्की खिलाड़ी थी, दूसरी बार उसने रिंग अन्दर डाली ही नहीं थी.. अपने हाथ में छुपा ली थी।

शाजिया- आपा अब मैं अम्मी को क्या कहूँगी.. वो रिंग उनकी शादी की थी मज़ाक-मज़ाक में आपने ये क्या कर दिया?

शाजिया का चेहरा उदास हो गया।

तब रज़िया ने उसके हाथ को पकड़ा और उसकी हथेली पर वो रिंग रख दी, जिसे देख कर जो ख़ुशी शाजिया के चेहरे पे आई देखने लायक थी। वो बस कभी रज़िया को तो कभी रिंग को देख रही थी। उसकी आँखों में एक ही सवाल था कि ये सब कैसे और कब हुआ?

रज़िया ने उसको बताया कि दूसरी बार उसने रिंग छुपा ली थी। उसे पता था कोई भी आ सकता था ऐसे में रिंग तेरे से निकलती नहीं।

शाजिया- ओह आपा, आप सच में बहुत अच्छी हो, थैंक्स आपा।

रज़िया- अब ये सबको गोली मार.. सच बता उसके पजामे में क्या फील किया?

शाजिया- अब आपसे कुछ छिपा तो है नहीं आपा… शुरू में तो अजीब लगा मगर बाद में उसका लंड पकड़ने में अच्छा लगा।

रज़िया- गुड… ये हुई ना बात तो यार पजामा खिसका कर आराम से दबा देती… थोड़ा चूस भी लेती तो ज़्यादा मज़ा आता।

शाजिया- क्या आपा आप भी ना.. मैं क्यों उस गंदे आदमी का लंड चूसती छी छी पकड़ना अलग बात है.. मगर चूसना छी छी उसके अन्दर कितने बाल थे ना!

रज़िया- अय हय.. मेरी जान को चिकना लौड़ा पसंद है.. तो ये बता अगर साफ सुथरा लंड सामने होगा तब चूस लेगी ना?

शाजिया- क्या आपा.. वो जब होगा तब देखेंगे अभी क्यों आप ये लेके बैठ गई?

रज़िया- तू भूल रही है ये टास्क चल रहा है.. चल बता हाँ की ना..?

शाजिया- अगर अच्छा लगा तो शायद चूस के देख सकती हूँ मगर..

रज़िया- ये अगर मगर बाद में करना.. वो देख याक़ूब सोया हुआ है। जा उसके पास और उसके लंड को कैप्री से निकाल कर चूस कर दिखा।

शाजिया- आपका दिमाग़ खराब हो गया क्या? ये सोया हुआ है और आप क्या बोल रही हो?

रज़िया- तुझे अभी तो बताया था ये उस शराबी से भी ज़्यादा गहरी नींद में है। जब उसका पकड़ सकती है इसका क्यों नहीं?

शाजिया- आपा प्लीज़ आप समझो.. ये आपका भाई है इसके साथ में कैसे कर सकती हूँ?

रज़िया- मेरा भाई है.. तेरा तो नहीं ना? चल चल जल्दी कर, अब इतना सोच मत.. लंड पकड़ ना!

फ्रेंड्स, उस भिखारी के लंड को पकड़ कर शाजिया को अच्छा लगा था और अभी भी उसका मन था। मगर थोड़ा नाटक तो करना पड़ता है ना.. आख़िर वो एक शरीफ बच्ची है।

 
रज़िया के बार-बार कहने पर शाजिया याक़ूब के पास जाकर बैठ गई और उसकी कैप्री को नीचे खिसका दिया.. उसके सोए लंड को गौर से देखने लग गई।

शाजिया- आपा ये तो बहुत छोटा सा है।

रज़िया- अरे सोया लंड ऐसा ही होता है.. ज़रा इसको सहला प्यार कर फिर देख कैसे खड़ा होता है और तुझे सलामी देता है।

शाजिया अब याक़ूब के लंड को हाथ से सहलाने लगी.. उसको उंगली से गोल-गोल घुमाने लगी थी। शाजिया की फुददी तो उस भिखारी के लंड से ही गीली थी, अब दोबारा उसमें दोबारा खुजली शुरू हो गई।

रज़िया ने मौका देखकर मोबाइल ऑन कर लिया और उसका वीडियो बनाने लगी।

शाजिया अब लंड की दीवानी हो गई थी.. उसको कुछ भी ध्यान नहीं था। लंड भी उसके कोमल हाथों का स्पर्श पाकर उठाव लेने लगा था।

थोड़ी देर में लंड ने अपना पूरा आकार ले लिया। एकदम गोरा चिकना लंड देखकर शाजिया के होंठ सूख गए। उसने अपनी जीभ हल्के से उसके सुपारे पर घुमाई, उसको एक अलग ही मज़ा मिला।

रज़िया- अरे ऐसे क्या कर रही है इसे केले की तरह पूरा मुँह में लेके चूस.. फिर तुझे असली मज़ा आएगा।

शाजिया तो खुद यही चाहती थी, बस रज़िया के कहने की देर थी। उसने झट से लंड को मुँह में भर लिया और मज़े से चूसने लगी।

याक़ूब नींद में था.. मगर लंड तो जगा हुआ था। ऐसी चुसाई का वो पूरा मज़ा ले रहा था। वैसे शाजिया अनाड़ी थी इतनी अच्छी चुसाई नहीं कर पा रही थी मगर लंड भी तो नया था। अब दोनों का ये पहली बार था तो भरपूर मज़ा आ रहा था। जिसका सबूत लंड से आने वाली पानी की बूंदें थीं।

लंड के पानी का टेस्ट शाजिया को अजीब सा लगा, उसने जल्दी से लंड को मुँह से निकाल दिया।

रज़िया- क्या हुआ.. चूस ना, मज़ा नहीं आ रहा क्या तुझे?

शाजिया- मज़ा तो बहुत आ रहा था मगर इसमें से अजीब सा पानी निकल रहा है जिसका टेस्ट भी अजीब है?

रज़िया- अरे पागल.. यही वो अमृत है जिसके लिए लड़कियां तरसती हैं। शुरू में अजीब लगेगा, फिर मज़ा आएगा.. तू कंटिन्यू कर।

शाजिया ने लंड को गौर से देखा फिर उसको चूसने लगी।

फ्रेंड्स, कुँवारी लड़की का मुँह भी फुददी की तरह होता है। उसकी गर्मी ऐसी होती है कि अच्छे से अच्छे लंड पिघल जाएं। फिर याक़ूब तो बेचारा बच्चा था.. वो कहाँ तक टिक पाता। उसकी नसें फूलने लगीं, वो नींद में था.. फिर भी बदन को कड़क कर लिया और एक तेज पिचकारी सीधे शाजिया के गले में उतर गई। वो कुछ समझ पाती, तब तक और पिचकारी उसके मुँह को वीर्य से भर गई। जल्दी से उसने लंड को मुँह से निकाला तब तक और भी रस निकला जो उसके हाथ पर लग गया।

शाजिया को बड़ा अजीब लगा.. कुछ रस तो उसके गले में सीधा चला गया था, जो उसे निगलना पड़ा बाकी उसके मुँह में था वो भाग कर वॉशरूम गई.. मुँह हाथ सब अच्छे से साफ किया। इधर रज़िया उसको देखकर बस हँसे जा रही थी।

शाजिया- छी आपा, ये क्या हो गया.. याक़ूब ने तो पानी छोड़ दिया.. कुछ मुझे पीना पड़ गया.. उउउ उउउ उल्टी जैसा लग रहा है।

रज़िया- अरे अरे पागल.. अमृत को वेस्ट कर दिया, ये रस किसी-किसी को ही नसीब होता है। तू ज़्यादा सोच मत, यहाँ बैठ आराम से और बता असली लंड चूस कर मज़ा आया ना?

शाजिया ने मुस्कुराते हुए ‘हाँ’ में सर हिला दिया और रज़िया से लिपट गई।

रज़िया- क्या बात है मेरी जान.. चल ठीक से बता ना यार.. कैसा लगा मेरे भाई का लंड और उसका रस?

शाजिया- सच बताऊं आपा डिल्डो और असली लंड में बहुत फ़र्क है। इसको पकड़ने का और चूसने का मज़ा ही अलग है।

रज़िया- पागल असली और नकली में फ़र्क नहीं होगा.. क्या तू भी ना!

शाजिया- हाँ आपा.. सही कहा आपने.. सच में बहुत मज़ा आ रहा था मगर लास्ट मौके पे आपके भाई ने सब गड़बड़ कर दी।

रज़िया- अरे गड़बड़ कैसी? तूने उसके लंड की इतनी मस्त चुसाई की थी कि अच्छे-अच्छे लंड पानी फेंक दें, फिर ये तो अभी छोटा है।

शाजिया- आपा उसमें अजीब सी गंध थी और स्वाद भी कितना अजीब था, शुरू में तो वो ठीक सा लगा.. मगर जब गाढ़ा सफेद रस आया तो उससे मुझे घिन सी आ गई।

रज़िया- अरे शुरू में अजीब लगता है मगर बाद में उसे चाटने के लिए दिल बेताब हो जाता है.. तुझे पूरा चाटना चाहिए था।

शाजिया- नहीं आपा जो अन्दर गया वही बहुत है.. कुछ भी कहो लंड चूसने का मज़ा अलग था.. काश याक़ूब पानी ना फेंकता और मैं उसके लंड को चूसती रहती।

रज़िया - अरे इस छोटे से लंड से क्या होता है.. किसी मर्द का लंड चूस.. फिर देखा कैसा मज़ा आता है।

शाजिया- नहीं आपा वो मुझसे नहीं होगा। ये तो सोया था तब हिम्मत हो गई, मगर किसी और का.. ना बाबा कहीं उसने मेरे साथ कुछ कर दिया तो मैं तो मर ही जाऊंगी।

रज़िया- अरे कोई ज़बरदस्ती कुछ नहीं करता। तुम एक बार ट्राइ तो करो, डर लगे तो मत करना.. सिंपल है।

शाजिया- आपा, प्लीज़ अभी जाने दो ना ये सब..!

रज़िया समझ गई इस पर ज़्यादा ज़ोर देना ठीक नहीं। फिर उसकी नज़र याक़ूब पर गई।

रज़िया- अरे शाजिया तूने याक़ूब की कैप्री ठीक नहीं की.. उसका लौड़ा तो बाहर ही निकला पड़ा है। दोबारा चूसने का मंसूबा है क्या?

शाजिया- सॉरी आपा भूल गई.. वैसे आप बुरा ना मानो तो एक बार और चूस लूँ?

रज़िया- मैं क्यों बुरा मानने लगी मगर अबकी बार उसका पानी पीना होगा समझी.. तभी तुझे रस का स्वाद समझ आएगा।

शाजिया- नहीं आपा वो बहुत अजीब है.. और ऐसे अचानक पानी आता है तो अजीब लगता है। हाँ अगर पता हो पानी आएगा.. तब मैं उसको हाथ पे ले लूँगी फिर सोचूँगी कि टेस्ट करूँ या नहीं लेकिन ऐसा होगा कैसे?

रज़िया- बहुत आसान है.. तू चूसती रह जब अचानक लंड की गर्मी बढ़ जाए उसमें एक्सट्रा तनाव महसूस होने लगे तो समझ जाना कि बस उसका रस निकलने वाला है।

शाजिया- हाँ आपा.. उस टाइम ऐसा हुआ था।

रज़िया- गुड यानि तूने महसूस किया था। चल अबकी बार दोबारा ट्राइ कर.. मैं देखती हूँ तू कैसे करती है?

शाजिया- ओके आपा.. अभी लो आपको दिखाती हूँ।

रज़िया- अरे रुक अभी तो निकला है उसका पानी.. थोड़ा वेट कर फिर निकालना.. ऐसे फ़ौरन थोड़े ही वो खड़ा हो जाएगा।

शाजिया- क्यों आपा ऐसा क्यों होता है.. इसमें टाइम क्यों लगता है?

रज़िया ने उसको विस्तार से सब समझाया कि आदमी को गर्म होने में टाइम लगता है.. कोई जल्दी तो कोई ज़्यादा टाइम लेता है।

शाजिया- अब समझी उस कहानी में भी ऐसा ही कुछ लिखा था।

रज़िया- हाँ सही समझी.. चल उसको अभी भूल जा, मैं कॉफी बना कर लाती हूँ.. फिर आराम से तेरे साथ बातें करूँगी।

शाजिया- मैं भी आपके साथ चलती हूँ।

 
फ्रेंड्स यहाँ ब्रेक ज़रूरी था। बेचारे याक़ूब को मरवाओगे क्या.. चलो उधर आपके लिए दूसरा गर्म सीन भी तैयार है।

दोपहर को तो शाहिद सो गया था मगर शबनम की नादान जवानी उसे रात को कहाँ सोने देने वाली थी।

सबके सो जाने के बाद कमरे में वो दोनों बैठे हुए थे।

शबनम- मामू अभी तो आपके सर में दर्द नहीं है ना?

शाहिद- नहीं मेरी जान.. सर तो ठीक है मगर इस लंड का क्या करूँ.. इसमें बड़ा दर्द हो रहा है?

शबनम- मैं हूँ ना.. आपका चूस कर सारा रस निकाल दूँगी तो दर्द अपने आप चला जाएगा।

शाहिद- नहीं पगली.. सिर्फ़ चूसने से कुछ नहीं होता.. इसे ठंडा होने के लिए फुददी चाहिए.. ये उसी को चोद कर ही ठंडा होगा।

शबनम- अरे तो मेरे पास है ना.. उसके अन्दर डाल दो और ठंडा कर लो।

शाहिद- तू अभी छोटी है.. तेरी फुददी में इसे डालूँगा तो तेरी फुददी फट जाएगी।

शबनम- हा हा हा मामू ये कोई कपड़ा है क्या जो फट जाएगी.. आप भी ना हा हा हा..

‘अब तुझे कैसे समझाऊं पगली.. एक काम कर.. अपने पूरे कपड़े निकाल, आज तुझे समझा ही देता हूँ कि फुददी की चुदाई क्या होती है। साला ऐसे तो तुझे देख-देख कर लंड की हालत खराब होती रहेगी। अब कुछ ना कुछ तो जुगाड़ लगाना ही पड़ेगा।’

शबनम तो ख़ुशी-ख़ुशी नंगी हो गई। उसको तो बस मज़ा चाहिए था चुदना क्या होता है.. उसको नहीं पता था। इधर शाहिद भी नंगा हो गया और शबनम को बिस्तर पे लिटा कर उस पर पागल कुत्ते की तरह टूट पड़ा।

कभी उसकी छोटी चूचियों को दबाता.. कभी चूसता.. वो शबनम के मुलायम होंठ ऐसे चूसने लगा जैसे आज सारा रस निचोड़ देगा।

जब शबनम एकदम गर्म हो गई.. तब शाहिद ने अपनी ज़ुबान से उसकी फुददी को चाटा।

शबनम- आह मामू उफ़ आप बहुत अच्छे हो आह ऐसे ही चाटो.. उई और तेज करो.. अह..

आज शाहिद का मंसूबा कुछ और था। वो फुददी चाट कर शबनम का पानी नहीं निकालने वाला था। जब शबनम की फुददी रिसने लगी.. तो उसने चाटना बंद कर दिया और उसके पैरों को मोड़ कर उसके पास बैठ गया।

शबनम- उफ़ मामू क्या हुआ.. मज़ा आ रहा था और चाटो ना प्लीज़ आह..

शाहिद- रुक मेरी जान अब फुददी को चटवाती ही रहेगी.. तो चुदेगी कब? आज तुझे चुदाई सीखनी है तो चुपचाप लेटी रह और मेरे लंड का कमाल देख आज तुझे नया मज़ा देता हूँ।

शाहिद ने अपनी उंगली को मुँह में लेके गीला किया, फिर उसको शबनम की फुददी पे घुमाने लगा और धीमे-धीमे उंगली को फुददी में घुसेड़ने लगा।

शबनम- आह मामू दर्द होता है उफ़ आह…

शाहिद- तुझे ज़्यादा मज़ा लेना है ना तो इतना सा दर्द नहीं सह सकती.. अभी उंगली से तू ऐसे कर रही है.. तो सोच मेरा लौड़ा कैसे अन्दर ले पाएगी तू.. हाँ बोल?

शबनम- सॉरी मामू आप करो.. मैं बर्दाश्त कर लूँगी.. अब कुछ नहीं कहूँगी।

शाहिद ने फिर अपना काम शुरू कर दिया वो धीमे-धीमे दो इंच तक उंगली को फुददी में घुसेड़ने में कामयाब हो गया। अब कुँवारी फुददी.. फिर शबनम थी भी छोटी.. उसको दर्द होना लाजमी था। मगर वो बड़ी बहादुर लड़की थी, अपने दाँत को भींच कर दर्द सहन कर गई।

थोड़ी देर शाहिद एक उंगली को ही आगे-पीछे करता रहा और शबनम की फुददी को चोदता रहा। जब उसको लगा शबनम अब मज़े ले रही है.. तो उसने फिर अपनी दो उंगलियों को गीला किया और फुददी में घुसाने लगा।

अबकी बार शबनम को ज़्यादा दर्द हुआ उसने चादर कसके पकड़ ली मगर कोई आवाज़ मुँह से नहीं निकाली। बड़ी मुश्किल से शाहिद ने दो उंगली अन्दर घुसाईं.. अब पहले की तरह वो वैसे ही उसको चोदने लगा। शबनम दर्द के मारे अपना सर कभी इधर घुमाती कभी उधर करती।

ऐसे ही 5 मिनट तक शाहिद उसको चोदता रहा। अब शबनम को दर्द के साथ मज़ा आने लगा था वो कमर को हिलाने लगी थी।

शाहिद समझ गया कि इसको मज़ा आने लगा है वो ज़ोर-ज़ोर से उंगली आगे-पीछे करने लगा। मगर उसने पूरा ख्याल रखा कि ज़्यादा आगे उंगली ना जाए वरना शबनम की सील उंगली से ही टूट जाएगी।

शबनम- आ आह मामू उफ़ आह ये तो आअज्ज और ज़्यादा आ मज़ा आ रहा है, उई मामू करो आह ज़ोर से करो..

शाहिद ने सोचा ऐसे तो इसका पानी निकल जाएगा.. अभी ये फुल जोश में है, लौड़ा घुसा देना चाहिए। बस यही सोच कर उसने उंगली बाहर निकाल ली और लंड पर अच्छे से थूक लगा कर उसको फुददी के छेद पर सैट कर दिया।

शबनम- आह जल्दी करो ना.. मज़ा आ रहा था.. उफ़ आ आप अब आ लंड घुसाओगे क्या.. आह आराम से मामू आपका बहुत मोटा है।

शाहिद- चुप.. अब चुदवाने की खुजली है तो थोड़ा दर्द भी सह ले।

शाहिद ने लंड को हाथ से पकड़ कर फुददी में दबाना शुरू किया.. शबनम की आँख में डर साफ दिखाई दे रहा था। शाहिद ने थोड़ा ज़ोर लगाया तो फुददी की दीवारों को फैलाकर सुपारा अन्दर घुस गया और शबनम के बर्दाश्त का बाँध भी टूट गया, उसके मुँह से एक दमदार चीख निकल गई।

शबनम- उह अहह..

एक झटके में शाहिद ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और शबनम के मुँह पर हाथ रख दिया।

शाहिद- पागल है क्या.. ऐसे क्यों चिल्लाई.. नीचे कोई सुन लेगा तो पता है क्या होगा?

शबनम ने शाहिद का हाथ हटाया और सॉरी कहा।

शाहिद- सॉरी कहने से क्या होगा.. अच्छा हुआ टाइम पर मैंने लौड़ा निकाल दिया।

शबनम- मामू बहुत ज़्यादा दर्द हुआ था.. मेरी चीख अपने आप निकल गई।

शाहिद- ऐसे तो ये लौड़ा मैं तेरी फुददी में कभी नहीं पेल पाऊंगा।

शबनम- मामू ये बहुत मोटा है.. ऐसे अन्दर नहीं जाएगा।

शाहिद- देख दुनिया का सबसे ज़्यादा मज़ा इसी में है, ये पूरा अन्दर जाएगा और तुझे मज़ा देगा समझी।

शबनम- हाँ मामू पता है जब उंगली से इतना मज़ा आ रहा था तो इससे और भी ज़्यादा मज़ा आएगा मगर ये जाएगा कैसे?

शाहिद- जाएगा मेरी जान और कल ही ये तेरी फुददी में जाएगा।

शबनम- वो कैसे मामू, बताओ मुझे भी।

शाहिद कुछ सोचने लगा जिसे देख कर शबनम उसके पास बैठ गई. थोड़ी देर बाद शाहिद को आइडिया आ गया.

शाहिद- देख घर पर तो तुझे चोदना ख़तरनाक होगा. एक काम कर.. कल तू स्कूल के लिए निकलना मगर जाना मत.. वो पीछे जो पार्क है ना, वहीं रुक जाना, मैं से जल्दी वहाँ आकर तुझे अपने साथ ले जाऊंगा और हाँ बैग में अपनी कोई पुरानी टी-शर्ट रख लेना याद से.

शबनम- ठीक है मामू मगर पुरानी टी-शर्ट का क्या करोगे आप?

शाहिद- कल बता दूँगा.. अब चल मेरे ऊपर आकर लेट जा.. तू लौड़ा चूस, मैं तेरी बुर का रस निकालता हूँ. आज तो ऐसे ही काम चलाना पड़ेगा, कल ही तेरी सील तोड़कर तुझे चुदने लायक बना दूँगा ताकि ऐसी नौबत दोबारा ना आए.

वो दोनों 69 के पोज़ में हो गए और एक-दूसरे को मज़ा देने लगे. शबनम पहले ही ओर्गज्म पर आ चुकी थी इसलिए उसने जल्दी पानी फेंक दिया मगर शाहिद को टाइम लगता है.. तो बस वो शबनम की बुर चाटता रहा और उसे फिर गर्म कर दिया. फिर 15 मिनट बाद शबनम झड़ गई, तब शाहिद ने उसको उकड़ू बिठा कर उसका मुख चोदन किया और अपना पानी उसके मुँह में भर दिया. अब दोनों शांत हो गए थे.

दो बार झड़ने के बाद शबनम को नींद आने लगी, मगर शाहिद संतुष्ट नहीं था वो कल के लिए सोचने लगा कि उसको क्या करना है.

शबनम तो थोड़ी देर में ही सो गई मगर शाहिद को बहुत देर बाद नींद आई और वो शबनम से लिपट कर सो गया.

 
उधर शाजिया और रज़िया ने भी कॉफी बना ली थी और कमरे में बैठ कर दोनों आराम से चुस्की लेते हुए बातें कर रही थीं.

शाजिया- आपा एक बात पूछूँ.. आप बुरा तो नहीं मनोगी ना?

रज़िया- अरे पूछ यार.. बुरा क्या मानना जो दिल में है पूछ ले.

शाजिया- आपा अपने कभी सेक्स किया है?

रज़िया- ले, इस बात के लिए मैं बुरा मानूंगी.. अरे पागल सेक्स तो अल्लाह का दिया अनमोल तोहफा है.. हर लड़की को एक ना एक दिन इसका सुख मिलता है. मुझे थोड़ा जल्दी मिल गया था और उसके बाद तो बस पूछ मत.. लंड बुर में जाता है तो ही क्या बताऊं कैसा मज़ा आता है. तू सोच भी नहीं सकती कि चुदाई करवाने में कितना मज़ा आता है.

शाजिया- पहली बार में बहुत ज़्यादा दर्द होता होगा ना आपा?

रज़िया- अरे किसने कहा.. अगर चोदने वाला अनाड़ी होगा तो दर्द ज़्यादा होगा मगर कोई पक्का खिलाड़ी चुदाई करेगा ना तो बड़े प्यार से बुर को खोलेगा. तब दर्द कम होगा और मज़ा ज़्यादा आएगा.

शाजिया- सस्स आपा ये चुदाई पता नहीं क्या होती है.. मगर इसका नाम सुनकर नीचे तेज खुजली ज़रूर शुरू हो जाती है.

रज़िया- अगर तू मेरी बात माने तो तुझे मैं एक बहुत ज़्यादा मज़ा लेने का आइडिया दूँ?

शाजिया- हाँ आपा बताओ, मैं आपकी बात कैसे नहीं मानूँगी.. आप बस जल्दी से बोलो.

रज़िया- अपने पूरे कपड़े निकाल दे फिर मेरे भाई के लंड को चूस.. उसे अपने चुचों पे रगड़.. अपनी दहकती बुर पे रगड़.. जैसे डिल्डो को रगड़ा था. फिर देख कितना मज़ा आता है तुझे.. फिर तू इस लम्हे को याद करेगी.

शाजिया- आपा बात तो अपने अच्छी कही मगर इतना सब कुछ करने से याक़ूब उठ गया तो?

रज़िया- अरे डर मत वो नहीं उठेगा, मुझे पता है ना तू शुरू हो जा बस.

शाजिया- नहीं आपा अगर उठ गया तो उस सिचुयेशन में हम क्या करेंगे. उसके बारे में पहले सोच लो, फिर मैं खुल कर मज़े ले सकती हूँ, नहीं तो डर के मज़ा नहीं आएगा.

रज़िया- ये भी ठीक है.. अच्छा सुन ये चादर तू अपने पास में रख ले.. अगर ये उठ गया तो मैं फ़ौरन लाइट ऑफ कर दूँगी. ये कुछ समझे तब तक तुम उसके लंड को अन्दर करके ये चादर लपेट लेना. वो गहरी नींद से जागेगा उसे जल्दी कुछ समझ नहीं आएगा. फिर मैं बहाना बना दूँगी कि तू इसे डराने के लिए उसके पास गई थी.. सिंपल!

शाजिया- वाउ आपा आपका दिमाग़ है या कंप्यूटर.. आपने तो फ़ौरन मुश्किल हल कर दी.

रज़िया- आगे-आगे देख तुझे भी ऐसे ही फास्ट बना दूँगी मैं.. फिर तू भी ऐसे आइडिया आराम से लगा लेगी. चल अब शुरू हो जा.. देख याक़ूब का लंड अभी भी तेरा इन्तजार कर रहा है.. जाकर टूट पड़ उस पर.

शाजिया पर तो चुदास की मस्ती छाई हुई थी. उसने जल्दी से अपने कपड़े निकाल फेंके और एक चादर लेकर याक़ूब के पास जाकर बैठ गई.

शाजिया का नंगा जिस्म तो आपने उस दिन देखा ही था तो अब आगे इसकी जवानी की प्यास भी देख लो कि ये क्या-क्या करती है.

शाजिया अब लंड को सहलाए जा रही थी.. उसे किस करके खड़ा करने की कोशिश कर रही थी. रज़िया का तो आपको पता ही है ना.. वो इस हसीन पल को अपने मोबाइल में कैद कर रही थी. शाजिया को इस बात का पता नहीं था.. वो तो बस अपने ही ख्यालों में खोई हुई थी और लंड को चूमे जा रही थी.

शाजिया- सस्सश आह… कितना अच्छा है याक़ूब तुम्हारा लंड आह मन करता है इसे खा जाऊं अभी के अभी.. आह उफ़ उम्म उम्म आह..

शाजिया बड़बड़ाए जा रही थी और याक़ूब के लंड को चूसे जा रही थी. अब वो पूरा खड़ा हो गया था.

शाजिया की वासना की आग बहुत बढ़ गई थी, उसके निप्पल एकदम हार्ड हो गए थे. वो याक़ूब के लंड पर अपने निप्पल रगड़ने लगी.. कभी दोनों चुचों को दबा कर लंड को चूसती और आहें भरती जा रही थी.

शाजिया- आह ससस्स याक़ूब.. उफ़ आह.. तेरे लंड तो आह.. बुर में हलचल मचा दी है आह.. उफ़ थोड़ा सा आह.. इसे बुर पे भी रगड़ लेती हूँ आह.. मज़ा आएगा आ.

शाजिया बिस्तर पर चढ़ गई और खड़े लंड पर अपनी फुददी को घिसने लगी. ये नजारा देख कर तो रज़िया भी हिल गई. इतनी जल्दी ये शरीफजदी ऐसे रांड़ की तरह कर रही है.. उसको यकीन नहीं आया. मगर जब उसको शाहिद की बात याद आई तो वो मुस्कुराने लगी.

रज़िया- सच ही कहा था शाहिद तुमने.. जब एक शरीफ लड़की वासना की आग में जलती है.. तो उसके सामने बड़ी से बड़ी रांड़ भी फीकी पड़ जाती है. यही हाल आज इसका हो रहा है.

शाजिया अब बड़े प्यार से अपनी बुर को लंड पर घिस रही थी. सामने से कोई देखे तो ऐसे लगता जैसे वो याक़ूब से चुद रही है. मगर असल में वो बस बुर की घिसाई कर रही थी.

अब फ्रेंड्स, आप सोच रहे होंगे इतना सब कुछ होने के बाद आँख ना खुले तो ऐसा हो सकता है क्या.. मगर यहाँ तो हो रहा है.. अब ऐसे लोग भी होते हैं यार, ज़्यादा सोचो मत.. बस कहानी एंजाय करो.

 
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