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लगभग 4 बजे ग़ज़ल थक के चूर हो गई तो चाचा ने उसे घर भेज दिया उसके बाद वो दोनों भी नीचे जाकर सो गए।
फ्रेंड्स एक-एक करके रात को सबने कुछ ना कुछ कांड किया, फिर सो गए। तो चलो लाइन से सबको हम उठा भी देते हैं।
रात को शाजिया ने जो पानी निकाला था वो उसके लिए एक अजीब सा नशा बन गया। टाइम पर उठने वाली शाजिया आज बेसुध पड़ी थी।
अब्दुल जी- अरे अंजुम कहाँ हो भाई कॉफी ले आओ और ये अपनी शाजिया कहाँ है?
अंजुम- वो सो रही है जी… अभी उठाती हूँ।
अब्दुल- ये इसको क्या हो गया है आजकल बड़ी देर तक सोती है?
अंजुम- बेचारी रात देर तक पढ़ रही थी ना… मेरा फ़ोन लिया था कोई नेट से सवाल निकालने के लिए… इसी लिए आँख नहीं खुली होगी।
अब्दुल- अच्छा ये बात है ये फ़ोन का क्या माजरा है… नेट से कौन से सवाल निकालते हैं… कहीं किसी से बात तो नहीं कर रही थी ना?
अंजुम- आप भी बहुत शक करते हो जी, हमारी शाजिया ऐसी है क्या?
अब्दुल- पता है… वो ऐसी नहीं है मगर आजकल के हालत ठीक नहीं… तुम तो जानती हो दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है।
अंजुम- वो तो सही है जी… जो होना था हो गया… बरसों पुरानी बात को आप कहाँ लेकर बैठ गए, उसे जाना था वो चली गई।
शाजिया की आँख खुल गई थी… वो अंगड़ाई लेके उठी और रात की बात याद करके सिहर गई। फिर फ्रेश होकर बाहर आई। तब ये बातें चल रही थीं जिसे उसने सुन लिया।
शाजिया- गुड मॉर्निंग अब्बू गुड मॉर्निंग अम्मी सॉरी मैं लेट हो गई।
अब्दुल- कोई बात नहीं बेटा, आ जा मेरे पास आ, मेरी लाड़ली कैसी है?
शाजिया- मैं ठीक हूँ अब्बू, किसकी बात कर रहे थे आप… कौन चली गई?
अंजुम- किसी की नहीं… तू जल्दी कर… कॉलेज के लिए देर हो जाएगी।
शाजिया के सवाल ने दोनों को परेशान कर दिया।
जब वो किचन में गई तो अंजुम ने कहा- आप क्यों उस बात को दोहराते हो? शाजिया को पता लग गया तो वो ज़रूर सवाल करेगी।
अब्दुल- अच्छा नहीं करता… चलो मैं निकलता हूँ… मुझे देर हो गई।
अब्दुल जी निकल गए… इधर शाजिया भी नाश्ता करने लगी।
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चलो अब रूबी को भी उठा दो।
रात की पलंग तोड़ चुदाई के बाद रूबी को नींद तो मस्त आनी ही थी मगर साथ में उसको बुखार भी हो गया था। उसका पूरा जिस्म दर्द कर रहा था। उसकी मॉम ने उसको जगाया मगर वो नहीं उठी। फिर उन्होंने देखा वो बुखार से तप रही है तो उन्होंने अपनी शौहर को बताना ठीक समझा।
रोज़ी- फर्नाडिस … कहाँ हो सुनो तो!
फर्नाडिस- क्या हुआ रोज़ी डार्लिंग… सुबह सुबह क्यों चिल्ला रही हो?
रोज़ी- वो आपकी लाड़ली बुखार में जल रही है… मैंने कितना उठाया, उठ भी नहीं रही। अब आप ही उसे उठाओ और अपने साथ हकीम के पास ले जाओ।
फर्नाडिस- अरे मैंने रात को बताया था ना… मुझे अर्जेंट काम है और जल्दी जाना है।
रोज़ी- आप बस काम-काम करते रहना, इकलौती बेटी रात को पीकर आए आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ता… देखना ऐसे ही चला तो किसी दिन कोई बड़ी बात हो जाएगी।
फर्नाडिस- तुम दिन पे दिन चिड़चिड़ी होती जा रही हो। मैं जानता हूँ तुम बस यही सोचती हो कि ये तुम्हारी तरह किसी के साथ चली ना जाए।
रोज़ी- हाँ यही सोचती हूँ… एक ही बेटी है मेरी… ये चली गई तो मैं मर ही जाऊंगी।
फर्नाडिस- अरे कुछ नहीं होगा… हम ऐसी नौबत ही नहीं आने देंगे, तुम्हारे अब्बू की तरह में जिद्दी नहीं हूँ जो अपनी बेटी की ख़ुशी के आड़े आऊंगा। ये जिससे कहेगी हम शादी करवा देंगे, तो ये हमें छोड़कर क्यों कहीं जाएगी?
फर्नाडिस की बात रोज़ी को समझ आ गई फिर फर्नाडिस ने कहा- हकीम की ज़रूरत नहीं है.. रात को पार्टी में नाचा गाना किया होगा, जिससे थकान होकर बुखार आ गया। अलमारी से दवा निकाल कर दे दो.. ठीक हो जाएगी।
फर्नाडिस चला गया और रोज़ी ने फिलहाल रूबी को उठाना ठीक नहीं समझा और वो अपने काम में बिज़ी हो गई।
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उधर रज़िया की आँख आज बहुत जल्दी खुल गई थी.. वो उठी और बाथरूम में फ्रेश होने चली गई। जब वो वापस आई तो याक़ूब सीधा लेटा हुआ था और आगे से उसकी कैप्री पूरी गीली थी यानि उसका नाइट फॉल हो चुका था। फिर भी उसका लंड कैप्री में तंबू बनाए हुए था।
रज़िया- ये देखो मेरा सोना तो रात को ठंडा हो गया और अभी भी इसका लंड बंदूक की तरह तना हुआ है इसके लिए कुछ सोचना पड़ेगा। आज के जमाने में इतना सीधा लड़का होना अच्छी बात नहीं है।
रज़िया ने याक़ूब को जोर-जोर से हिलाया वो नहीं उठा, फिर उसने जग में पानी था वो उसके खड़े लंड पर डाल दिया ताकि उसको पता ना लगे कि रात वो झड़ गया था।
याक़ूब- उहहाअ.. क्या है आपा आप सुबह सुबह ऐसे क्यों करती हो?
रज़िया- मेरा सोना, जल्दी कर तुझे जल्दी जाना होता है ना.. तेरी एक्सट्रा क्लास के लिए.. चल उठ जा मॉम की तबीयत ठीक नहीं है। मैं जल्दी से तेरे लिए नाश्ता बना देती हूँ।
याक़ूब को उठा कर रज़िया किचन में गई, तो उसकी अम्मी वहीं नाश्ता बना रही थी।
सुरैया उमर करीब 45 पढ़ी लिखी औरत हैं। मगर शौहर की मौत के बाद उनका बिजनेस संभालना.. साथ में दो बच्चों की परवरिश भी करना, तो बेचारी इनके चक्कर में पड़ कर रह गई। अब बीमार भी रहने लगी है तो बिजनेस फेल हो गया मगर एक शॉपिंग माल है जो इनका है.. उसे इन्होंने किराए पे दिया हुआ है, बस उसकी अच्छी ख़ासी रकम इन्हें मिल जाती है जिससे घर का और इन दोनों की पढ़ाई का खर्च निकल जाता है।
रज़िया- मॉम आप क्यों उठीं.. आपकी तबीयत ठीक नहीं है, चलो जाओ कमरे में.. याक़ूब के लिए नाश्ता मैं बना दूँगी।
सुरैया- अरे कुछ नहीं.. ज़रा सा चक्कर आ गया था बस.. तेरे भाई ने घर सर पर उठा लिया और बेटी तू इतनी रात तक क्यों बाहर रहती है, मुझे तेरी फ़िक्र रहती है।
रज़िया- आप बिना वजह मेरी फ़िक्र करती हैं। मैंने कहा ना मैं आपकी बेटी नहीं बेटा हूँ.. याद है ना अब्बू क्या कहते थे कि ये अकेली 5 लड़कों पर भारी है। तो बस आपकी बेटी ऐसी ही है.. मैं लड़कों की छुट्टी कर देती हूँ।
सुरैया- हाँ पता है.. तू जिद्दी है, कहाँ मेरी मानेगी.. 5 पे भारी कहना आसान है।
रज़िया- कहना तो आसान है मगर इतना मुश्किल भी नहीं है.. मॉम मैं 5 को आराम से नहीं तो थोड़ी मेहनत करके हरा सकती हूँ। वैसे अभी तक 5 का मुकाबला किया नहीं.. मगर जल्दी हो जाएगा।
सुरैया- क्या अनाप-शनाप बोले जा रही है.. चल अब तू जल्दी तो उठ ही गई है तो याक़ूब के साथ तू भी नाश्ता कर ले फिर तेरी फ्रेंड आ जाएगी।
रज़िया ने हामी की.. उसके बाद वो अपने कमरे में चली गई और कुछ ढूँढने लगी।
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उधर हमारी प्यारी शबनम जी जल्दी आँख खुल गई। उस टाइम वो अपने मामू शाहिद से लिपटी हुई थी शाहिद का हाथ उसकी कमर पे था। शाहिद का लंड तना हुआ शबनम के पेट में चुभ रहा था, जिसे महसूस करके शबनम मुस्कुराने लगी। उसने धीमे से अपने आप को शाहिद की कैद से आज़ाद किया फिर बैठ कर लंड को सहलाने लगी।
शबनम- सस्स कितना प्यारा लंड है मामू का.. इसमें रस भी बहुत ज़्यादा है, जब देखो खड़ा हो जाता है।
शबनम लंड को पकड़ कर उसे सहलाने लगी तो शाहिद की आँख खुल गई।
शाहिद- अरे उठ गई मेरी प्यारी भांजी और ये क्या.. तू सुबह-सुबह ही शुरू हो गई?
शबनम- गुड मॉर्निंग मामू.. मैं कहाँ शुरू हुई? यही मुझे चुभ रहा था, जिससे मेरी आँख खुल गई, फिर मैंने सोचा इसको भी गुड मॉर्निंग बोल दूँ।
शाहिद- हा हा हा… ये सुबह ऐसे ही अकड़ता है। इसको जाने दे और तू नीचे चली जा.. मुझे थोड़ा और सोना है।
शबनम- एक बार इसको किस कर लूँ मामू।
शाहिद- तू भी ना बहुत बदमाश है अच्छा जल्दी कर ले।
शबनम ने लंड को बाहर निकाला.. पहले उसको किस किया, फिर सुपारे को थोड़ा मुँह में लेके चूसने लगी। एक मिनट चूसने के बाद उसने वापस लंड अन्दर कर दिया और हँसती हुई नीचे भाग गई।
शाहिद- उफ़फ्फ़ साली इत्ती सी है मगर चुदवाने को बेताब है। इसका भी जल्दी कुछ करना होगा.. साला लंड भी इसका गुलाम है, देखो मादरचोद सुबह-सुबह कैसे झटके खा रहा है?
शाहिद थोड़ी देर बड़बड़ाता रहा.. फिर टाइम देखा और वापस सो गया।
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शाजिया रेडी होकर सीधे रज़िया के घर पहुँच गई, जहाँ उसकी मुलाकात सुरैया जी से हुई और हमेशा की तरह शाजिया ने बड़े ही प्यार से मुस्कुरा कर उनको सलाम कहा।
सुरैया- सलाम बेटी आज तो रज़िया भी जल्दी उठ गई थी, ये अच्छा है रात को पार्टी में लेट तक जागो फिर जल्दी उठ जाओ। तुम रोज ही पार्टी कर लिया करो ताकि जल्दी उठने की आदत हो जाए।
शाजिया- पार्टी कैसी पार्टी? खाला मैं कुछ समझी नहीं?
सुरैया- अरे, रात को रज़िया अपने फ्रेंड्स के साथ पार्टी करने गई थी ना.. तुम नहीं गई क्या?
शाजिया- नहीं खाला रज़िया ने मुझे किसी पार्टी के बारे में कुछ नहीं बताया?
सुरैया- अच्छा ये क्या बात हुई तू भी तो उसकी दोस्त है, फिर तुझे नहीं पता ये बात तो मेरी भी समझ के बाहर है।
रज़िया- हाय शाजिया गुड मॉर्निंग आ गई तू..?
शाजिया- गुड मॉर्निंग आपा.. आप से मैं नाराज़ हूँ आपने मुझे तो नहीं बताया रात की पार्टी के बारे में?
सुरैया- हाँ रज़िया.. ये क्या बात हुई ऐसे तो तू कहती है शाजिया मेरी बेस्ट फ्रेंड बन गई और इसे पार्टी का पता भी नहीं?
रज़िया- आप भी ना मॉम कहाँ इस बुद्धू की बातों में आ गईं। पार्टी मैंने थोड़ी दी थी जो इसको इन्वाइट करती..! वो एक न्यू गर्ल आई है कॉलेज में, ये उससे नहीं मिली उसी ने छोटी सी पार्टी रखी थी.. सिंपल।
सुरैया- तुम्हारी बात तुम ही जानो, मुझे तो अपना काम करने दो।
सुरैया बड़बड़ाती हुई चली गई, फिर रज़िया शाजिया को अपने रूम में ले गई।
रज़िया- अरे क्या हुआ ऐसे मुँह क्यों फुला लिया तूने यार.. अब कुछ बोल भी?
शाजिया- आप पार्टी में गईं.. मुझे बताया भी नहीं आपने और कौन न्यू लड़की है, जिसे मैंने नहीं देखा..? कल हम साथ ही तो गए थे।
रज़िया- अरे मेरी अम्मी, वो हमारे जाने से पहले ग्रुप से मिली थी। फिर शाहिद ने दोपहर को मुझे उससे मिलवाया, वहीं अचानक पार्टी का प्रोग्राम बना।
शाजिया- अच्छा वो न्यू है.. तो उसकी भी रेगिंग की क्या?
रज़िया- वो तेरी तरह फर्स्ट ईयर की नहीं है.. वो ओल्ड स्टूडेंट है, गोआ यूनिवर्सिटी से आई है। बाकी आज तू उससे मिलकर पूछ लेना। पहले ये बता रात को कहानी रीड की तूने?
शाजिया- आपा अपने क्या कहानी बताई है मेरा तो दिमाग़ घूम गया। एक स्कूल गर्ल को कैसे उसके टीचर ने उल्लू बनाया और अब्बू रे कैसे उसकी चुदाई की। .. मज़ा आ गया मगर उसमें कितनी गंदी भाषा का यूज होता है ना आपा?
रज़िया- वाउ मेरी जान चुदाई तूने कितने आराम से बोल दिया.. यानि तू सुधर रही है। ओल्ड से न्यू जमाने की ओर आ रही है। गुड गुड.. सब कहानी देखना ये भाषा-वाषा के चक्कर में मत पड़। सेक्स मीन खुलकर एंजाय करना और उसका मज़ा ऐसे वर्ड्स से ही आता है.. जैसे लंड, फुददी, झटका, गांड और..
शाजिया- बस बस आपा.. मुझे पता है अब आप सारी डिक्शनरी मत बताओ।
रज़िया- अच्छा बता ना.. तूने कुछ किया भी या बस कहानी पढ़ती रही।
शाजिया- ऐसी कहानी पढ़ कर बिना कुछ किए नींद कहाँ आती है आपा?
रज़िया- वाउ मतलब तूने किया.. चल पूरी बात बता.. कैसे किया और कितनी बार किया?
शाजिया शर्मा रही थी मगर रज़िया ने जोर दिया तो रात की सारी दास्तान उसने रज़िया को सुना दी और साथ में ये भी बता दिया कि आज से वो ये गंदी कहानी नहीं पढ़ेगी, इससे उसको रात बहुत परेशानी हुई।
रज़िया- वाउ यार पहली बार में ही ऐसी स्पीड.. गुड मगर यार तू अब क्यों नहीं पढ़ेगी? इससे तुझे नालेज मिलेगी।
शाजिया- नहीं आपा रोज पढ़ूंगी तो रोज पानी निकलेगा, पता है रात को मेरे पैर काँपने लगे थे.. जरा भी हिम्मत नहीं थी इनमें।
रज़िया- अरे पागल.. पहली बार ऐसा होता है और तुझे किसने कहा रोज निकालने को? जब तेरी फुददी में खुजली हो तब निकालना।
शाजिया- ये कहानी पढ़कर तो खुजली अपने आप होने लगती है।
रज़िया- अच्छा समझ गई, जिस दिन मन हो.. उसी दिन पढ़ना और फुददी को शांत करना बस।
शाजिया- ओके आपा ये सही रहेगा। अब आज के लिए मेरे लिए कोई टास्क है वो बता दो।
रज़िया- अभी कुछ नहीं है शाम को बताऊंगी। अभी तो कॉलेज चल देर हो जाएगी।
दोनों घर से निकल गईं और कॉलेज पहुँच गईं।
फ्रेंड्स एक-एक करके रात को सबने कुछ ना कुछ कांड किया, फिर सो गए। तो चलो लाइन से सबको हम उठा भी देते हैं।
रात को शाजिया ने जो पानी निकाला था वो उसके लिए एक अजीब सा नशा बन गया। टाइम पर उठने वाली शाजिया आज बेसुध पड़ी थी।
अब्दुल जी- अरे अंजुम कहाँ हो भाई कॉफी ले आओ और ये अपनी शाजिया कहाँ है?
अंजुम- वो सो रही है जी… अभी उठाती हूँ।
अब्दुल- ये इसको क्या हो गया है आजकल बड़ी देर तक सोती है?
अंजुम- बेचारी रात देर तक पढ़ रही थी ना… मेरा फ़ोन लिया था कोई नेट से सवाल निकालने के लिए… इसी लिए आँख नहीं खुली होगी।
अब्दुल- अच्छा ये बात है ये फ़ोन का क्या माजरा है… नेट से कौन से सवाल निकालते हैं… कहीं किसी से बात तो नहीं कर रही थी ना?
अंजुम- आप भी बहुत शक करते हो जी, हमारी शाजिया ऐसी है क्या?
अब्दुल- पता है… वो ऐसी नहीं है मगर आजकल के हालत ठीक नहीं… तुम तो जानती हो दूध का जला छाछ भी फूँक कर पीता है।
अंजुम- वो तो सही है जी… जो होना था हो गया… बरसों पुरानी बात को आप कहाँ लेकर बैठ गए, उसे जाना था वो चली गई।
शाजिया की आँख खुल गई थी… वो अंगड़ाई लेके उठी और रात की बात याद करके सिहर गई। फिर फ्रेश होकर बाहर आई। तब ये बातें चल रही थीं जिसे उसने सुन लिया।
शाजिया- गुड मॉर्निंग अब्बू गुड मॉर्निंग अम्मी सॉरी मैं लेट हो गई।
अब्दुल- कोई बात नहीं बेटा, आ जा मेरे पास आ, मेरी लाड़ली कैसी है?
शाजिया- मैं ठीक हूँ अब्बू, किसकी बात कर रहे थे आप… कौन चली गई?
अंजुम- किसी की नहीं… तू जल्दी कर… कॉलेज के लिए देर हो जाएगी।
शाजिया के सवाल ने दोनों को परेशान कर दिया।
जब वो किचन में गई तो अंजुम ने कहा- आप क्यों उस बात को दोहराते हो? शाजिया को पता लग गया तो वो ज़रूर सवाल करेगी।
अब्दुल- अच्छा नहीं करता… चलो मैं निकलता हूँ… मुझे देर हो गई।
अब्दुल जी निकल गए… इधर शाजिया भी नाश्ता करने लगी।
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चलो अब रूबी को भी उठा दो।
रात की पलंग तोड़ चुदाई के बाद रूबी को नींद तो मस्त आनी ही थी मगर साथ में उसको बुखार भी हो गया था। उसका पूरा जिस्म दर्द कर रहा था। उसकी मॉम ने उसको जगाया मगर वो नहीं उठी। फिर उन्होंने देखा वो बुखार से तप रही है तो उन्होंने अपनी शौहर को बताना ठीक समझा।
रोज़ी- फर्नाडिस … कहाँ हो सुनो तो!
फर्नाडिस- क्या हुआ रोज़ी डार्लिंग… सुबह सुबह क्यों चिल्ला रही हो?
रोज़ी- वो आपकी लाड़ली बुखार में जल रही है… मैंने कितना उठाया, उठ भी नहीं रही। अब आप ही उसे उठाओ और अपने साथ हकीम के पास ले जाओ।
फर्नाडिस- अरे मैंने रात को बताया था ना… मुझे अर्जेंट काम है और जल्दी जाना है।
रोज़ी- आप बस काम-काम करते रहना, इकलौती बेटी रात को पीकर आए आपको कोई फ़र्क नहीं पड़ता… देखना ऐसे ही चला तो किसी दिन कोई बड़ी बात हो जाएगी।
फर्नाडिस- तुम दिन पे दिन चिड़चिड़ी होती जा रही हो। मैं जानता हूँ तुम बस यही सोचती हो कि ये तुम्हारी तरह किसी के साथ चली ना जाए।
रोज़ी- हाँ यही सोचती हूँ… एक ही बेटी है मेरी… ये चली गई तो मैं मर ही जाऊंगी।
फर्नाडिस- अरे कुछ नहीं होगा… हम ऐसी नौबत ही नहीं आने देंगे, तुम्हारे अब्बू की तरह में जिद्दी नहीं हूँ जो अपनी बेटी की ख़ुशी के आड़े आऊंगा। ये जिससे कहेगी हम शादी करवा देंगे, तो ये हमें छोड़कर क्यों कहीं जाएगी?
फर्नाडिस की बात रोज़ी को समझ आ गई फिर फर्नाडिस ने कहा- हकीम की ज़रूरत नहीं है.. रात को पार्टी में नाचा गाना किया होगा, जिससे थकान होकर बुखार आ गया। अलमारी से दवा निकाल कर दे दो.. ठीक हो जाएगी।
फर्नाडिस चला गया और रोज़ी ने फिलहाल रूबी को उठाना ठीक नहीं समझा और वो अपने काम में बिज़ी हो गई।
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उधर रज़िया की आँख आज बहुत जल्दी खुल गई थी.. वो उठी और बाथरूम में फ्रेश होने चली गई। जब वो वापस आई तो याक़ूब सीधा लेटा हुआ था और आगे से उसकी कैप्री पूरी गीली थी यानि उसका नाइट फॉल हो चुका था। फिर भी उसका लंड कैप्री में तंबू बनाए हुए था।
रज़िया- ये देखो मेरा सोना तो रात को ठंडा हो गया और अभी भी इसका लंड बंदूक की तरह तना हुआ है इसके लिए कुछ सोचना पड़ेगा। आज के जमाने में इतना सीधा लड़का होना अच्छी बात नहीं है।
रज़िया ने याक़ूब को जोर-जोर से हिलाया वो नहीं उठा, फिर उसने जग में पानी था वो उसके खड़े लंड पर डाल दिया ताकि उसको पता ना लगे कि रात वो झड़ गया था।
याक़ूब- उहहाअ.. क्या है आपा आप सुबह सुबह ऐसे क्यों करती हो?
रज़िया- मेरा सोना, जल्दी कर तुझे जल्दी जाना होता है ना.. तेरी एक्सट्रा क्लास के लिए.. चल उठ जा मॉम की तबीयत ठीक नहीं है। मैं जल्दी से तेरे लिए नाश्ता बना देती हूँ।
याक़ूब को उठा कर रज़िया किचन में गई, तो उसकी अम्मी वहीं नाश्ता बना रही थी।
सुरैया उमर करीब 45 पढ़ी लिखी औरत हैं। मगर शौहर की मौत के बाद उनका बिजनेस संभालना.. साथ में दो बच्चों की परवरिश भी करना, तो बेचारी इनके चक्कर में पड़ कर रह गई। अब बीमार भी रहने लगी है तो बिजनेस फेल हो गया मगर एक शॉपिंग माल है जो इनका है.. उसे इन्होंने किराए पे दिया हुआ है, बस उसकी अच्छी ख़ासी रकम इन्हें मिल जाती है जिससे घर का और इन दोनों की पढ़ाई का खर्च निकल जाता है।
रज़िया- मॉम आप क्यों उठीं.. आपकी तबीयत ठीक नहीं है, चलो जाओ कमरे में.. याक़ूब के लिए नाश्ता मैं बना दूँगी।
सुरैया- अरे कुछ नहीं.. ज़रा सा चक्कर आ गया था बस.. तेरे भाई ने घर सर पर उठा लिया और बेटी तू इतनी रात तक क्यों बाहर रहती है, मुझे तेरी फ़िक्र रहती है।
रज़िया- आप बिना वजह मेरी फ़िक्र करती हैं। मैंने कहा ना मैं आपकी बेटी नहीं बेटा हूँ.. याद है ना अब्बू क्या कहते थे कि ये अकेली 5 लड़कों पर भारी है। तो बस आपकी बेटी ऐसी ही है.. मैं लड़कों की छुट्टी कर देती हूँ।
सुरैया- हाँ पता है.. तू जिद्दी है, कहाँ मेरी मानेगी.. 5 पे भारी कहना आसान है।
रज़िया- कहना तो आसान है मगर इतना मुश्किल भी नहीं है.. मॉम मैं 5 को आराम से नहीं तो थोड़ी मेहनत करके हरा सकती हूँ। वैसे अभी तक 5 का मुकाबला किया नहीं.. मगर जल्दी हो जाएगा।
सुरैया- क्या अनाप-शनाप बोले जा रही है.. चल अब तू जल्दी तो उठ ही गई है तो याक़ूब के साथ तू भी नाश्ता कर ले फिर तेरी फ्रेंड आ जाएगी।
रज़िया ने हामी की.. उसके बाद वो अपने कमरे में चली गई और कुछ ढूँढने लगी।
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उधर हमारी प्यारी शबनम जी जल्दी आँख खुल गई। उस टाइम वो अपने मामू शाहिद से लिपटी हुई थी शाहिद का हाथ उसकी कमर पे था। शाहिद का लंड तना हुआ शबनम के पेट में चुभ रहा था, जिसे महसूस करके शबनम मुस्कुराने लगी। उसने धीमे से अपने आप को शाहिद की कैद से आज़ाद किया फिर बैठ कर लंड को सहलाने लगी।
शबनम- सस्स कितना प्यारा लंड है मामू का.. इसमें रस भी बहुत ज़्यादा है, जब देखो खड़ा हो जाता है।
शबनम लंड को पकड़ कर उसे सहलाने लगी तो शाहिद की आँख खुल गई।
शाहिद- अरे उठ गई मेरी प्यारी भांजी और ये क्या.. तू सुबह-सुबह ही शुरू हो गई?
शबनम- गुड मॉर्निंग मामू.. मैं कहाँ शुरू हुई? यही मुझे चुभ रहा था, जिससे मेरी आँख खुल गई, फिर मैंने सोचा इसको भी गुड मॉर्निंग बोल दूँ।
शाहिद- हा हा हा… ये सुबह ऐसे ही अकड़ता है। इसको जाने दे और तू नीचे चली जा.. मुझे थोड़ा और सोना है।
शबनम- एक बार इसको किस कर लूँ मामू।
शाहिद- तू भी ना बहुत बदमाश है अच्छा जल्दी कर ले।
शबनम ने लंड को बाहर निकाला.. पहले उसको किस किया, फिर सुपारे को थोड़ा मुँह में लेके चूसने लगी। एक मिनट चूसने के बाद उसने वापस लंड अन्दर कर दिया और हँसती हुई नीचे भाग गई।
शाहिद- उफ़फ्फ़ साली इत्ती सी है मगर चुदवाने को बेताब है। इसका भी जल्दी कुछ करना होगा.. साला लंड भी इसका गुलाम है, देखो मादरचोद सुबह-सुबह कैसे झटके खा रहा है?
शाहिद थोड़ी देर बड़बड़ाता रहा.. फिर टाइम देखा और वापस सो गया।
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शाजिया रेडी होकर सीधे रज़िया के घर पहुँच गई, जहाँ उसकी मुलाकात सुरैया जी से हुई और हमेशा की तरह शाजिया ने बड़े ही प्यार से मुस्कुरा कर उनको सलाम कहा।
सुरैया- सलाम बेटी आज तो रज़िया भी जल्दी उठ गई थी, ये अच्छा है रात को पार्टी में लेट तक जागो फिर जल्दी उठ जाओ। तुम रोज ही पार्टी कर लिया करो ताकि जल्दी उठने की आदत हो जाए।
शाजिया- पार्टी कैसी पार्टी? खाला मैं कुछ समझी नहीं?
सुरैया- अरे, रात को रज़िया अपने फ्रेंड्स के साथ पार्टी करने गई थी ना.. तुम नहीं गई क्या?
शाजिया- नहीं खाला रज़िया ने मुझे किसी पार्टी के बारे में कुछ नहीं बताया?
सुरैया- अच्छा ये क्या बात हुई तू भी तो उसकी दोस्त है, फिर तुझे नहीं पता ये बात तो मेरी भी समझ के बाहर है।
रज़िया- हाय शाजिया गुड मॉर्निंग आ गई तू..?
शाजिया- गुड मॉर्निंग आपा.. आप से मैं नाराज़ हूँ आपने मुझे तो नहीं बताया रात की पार्टी के बारे में?
सुरैया- हाँ रज़िया.. ये क्या बात हुई ऐसे तो तू कहती है शाजिया मेरी बेस्ट फ्रेंड बन गई और इसे पार्टी का पता भी नहीं?
रज़िया- आप भी ना मॉम कहाँ इस बुद्धू की बातों में आ गईं। पार्टी मैंने थोड़ी दी थी जो इसको इन्वाइट करती..! वो एक न्यू गर्ल आई है कॉलेज में, ये उससे नहीं मिली उसी ने छोटी सी पार्टी रखी थी.. सिंपल।
सुरैया- तुम्हारी बात तुम ही जानो, मुझे तो अपना काम करने दो।
सुरैया बड़बड़ाती हुई चली गई, फिर रज़िया शाजिया को अपने रूम में ले गई।
रज़िया- अरे क्या हुआ ऐसे मुँह क्यों फुला लिया तूने यार.. अब कुछ बोल भी?
शाजिया- आप पार्टी में गईं.. मुझे बताया भी नहीं आपने और कौन न्यू लड़की है, जिसे मैंने नहीं देखा..? कल हम साथ ही तो गए थे।
रज़िया- अरे मेरी अम्मी, वो हमारे जाने से पहले ग्रुप से मिली थी। फिर शाहिद ने दोपहर को मुझे उससे मिलवाया, वहीं अचानक पार्टी का प्रोग्राम बना।
शाजिया- अच्छा वो न्यू है.. तो उसकी भी रेगिंग की क्या?
रज़िया- वो तेरी तरह फर्स्ट ईयर की नहीं है.. वो ओल्ड स्टूडेंट है, गोआ यूनिवर्सिटी से आई है। बाकी आज तू उससे मिलकर पूछ लेना। पहले ये बता रात को कहानी रीड की तूने?
शाजिया- आपा अपने क्या कहानी बताई है मेरा तो दिमाग़ घूम गया। एक स्कूल गर्ल को कैसे उसके टीचर ने उल्लू बनाया और अब्बू रे कैसे उसकी चुदाई की। .. मज़ा आ गया मगर उसमें कितनी गंदी भाषा का यूज होता है ना आपा?
रज़िया- वाउ मेरी जान चुदाई तूने कितने आराम से बोल दिया.. यानि तू सुधर रही है। ओल्ड से न्यू जमाने की ओर आ रही है। गुड गुड.. सब कहानी देखना ये भाषा-वाषा के चक्कर में मत पड़। सेक्स मीन खुलकर एंजाय करना और उसका मज़ा ऐसे वर्ड्स से ही आता है.. जैसे लंड, फुददी, झटका, गांड और..
शाजिया- बस बस आपा.. मुझे पता है अब आप सारी डिक्शनरी मत बताओ।
रज़िया- अच्छा बता ना.. तूने कुछ किया भी या बस कहानी पढ़ती रही।
शाजिया- ऐसी कहानी पढ़ कर बिना कुछ किए नींद कहाँ आती है आपा?
रज़िया- वाउ मतलब तूने किया.. चल पूरी बात बता.. कैसे किया और कितनी बार किया?
शाजिया शर्मा रही थी मगर रज़िया ने जोर दिया तो रात की सारी दास्तान उसने रज़िया को सुना दी और साथ में ये भी बता दिया कि आज से वो ये गंदी कहानी नहीं पढ़ेगी, इससे उसको रात बहुत परेशानी हुई।
रज़िया- वाउ यार पहली बार में ही ऐसी स्पीड.. गुड मगर यार तू अब क्यों नहीं पढ़ेगी? इससे तुझे नालेज मिलेगी।
शाजिया- नहीं आपा रोज पढ़ूंगी तो रोज पानी निकलेगा, पता है रात को मेरे पैर काँपने लगे थे.. जरा भी हिम्मत नहीं थी इनमें।
रज़िया- अरे पागल.. पहली बार ऐसा होता है और तुझे किसने कहा रोज निकालने को? जब तेरी फुददी में खुजली हो तब निकालना।
शाजिया- ये कहानी पढ़कर तो खुजली अपने आप होने लगती है।
रज़िया- अच्छा समझ गई, जिस दिन मन हो.. उसी दिन पढ़ना और फुददी को शांत करना बस।
शाजिया- ओके आपा ये सही रहेगा। अब आज के लिए मेरे लिए कोई टास्क है वो बता दो।
रज़िया- अभी कुछ नहीं है शाम को बताऊंगी। अभी तो कॉलेज चल देर हो जाएगी।
दोनों घर से निकल गईं और कॉलेज पहुँच गईं।