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आर्थर ने प्लग दीवार पर लगे स्विच बोर्ड के साकिट में फंसाया और फिर आगे बढाकर तार के दोनों सिरे कमाण्डर को थमा दिये ।
"स्विच ऑन करों ।" कमाण्डर ने हुक्म दनदनाया ।
आर्थर ने तुरन्त आदेश का पालन किया ।
जब तारों मे करण्ट प्रवाहित हो चुका था ।
मेरा कलेजा उछलकर हलक में आ फंसा ।
कमाण्डर धधकता चेहरा लिये मेरी तरफ बढा ।
मैं बेबसी भरी निगाहों से उसे देखती रही । मेरे करीब पहुंचकर _ उसने तारों के नंगे सिरे मेरे चेहरे से छुआ दिये,, फिर तुरन्त अपने हाथ पीछे खींच लिये।
. मेरे हलक से हौंलनाक चीख उबल पड्री । मेरे समूचे जिस्म में तीव्र झनझनाहट दौड़ गई थी । क्षणभर में ही साक्षात् नर्क का नजारा हो गया था मुझे ।
कमाण्डर हिंसक स्वर में बोला-"अगर तारों के ये नंगे सिरे चन्द सैकंडों तक तुम्हारे चेहरे से सटे रहे तो तुम्हारी मौत निश्चित है । अभी भी वक्त है , अपना मुह खोल दो । क्यों बेमौत मरना चाहती हो ।"
. … किन्तु मेरे होंठ तक नहीं हिले । कमाण्डर ने तारें पुन: मेरे चेहरे से छुआ दीं ।
मेरे हलक से हौंलनाक चीख उबल पडी । मुझे अपना समूचा चेहरा सुन्न होता हुआ सा लगा था । मैंने महसूस किया, अगर कुछ देर तक ये सिलसिला इसी तरह से चलता रहा तो मैं निश्चित रूप से मौत की बाहों में समा जाऊंगी । उसकी यातनाओं से बचने का मेरे सामने एक ही रास्ता था कि मैं बेहोशी कर नाटक कर लूं। और मैंने यहीं किया ।
मैंने अपना चेहरा सीने पर ढलका दिया ।
"स्विच आँफ करों आर्थर ।" मेरे कानों से कमाण्डर का स्वर टकराया।
दूसरे क्षण ।
खट् ।
मेरे कानों से हल्की सी आवाज टकराई । मैँ समझ गई कि आर्थर ने स्विच आँफ कर दिया था ।
"इसे देखो । मर गई या जिन्दा हैं?" स्वर कमाण्डर का था ।
शीघ्र ही मैंने अपने चेहरे पर सांसों का स्पर्श महसूस किया था । जाहिर था कि आर्थर मेरे चेहरे पर झुका हुआ था ।
"ये सिर्फ बेहोश हुई है सर ।"
"जव इसे होश आ जाये तो इसे बैरक में बन्द कर देना ।"
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कमाण्डर का आदेश भरा स्वर मुझे सुनाईं दिया था-"सुबह इसे -हैडक्वार्टर भेज दिया जायेगा ।"
"ओ० के० सर ।"
फिर मुझे भारी बूटों की आबाज दूर होती सुनाई दी थी ।
मैंने दायी आँख में झिर्री बनाकर देखा, कमाण्डर वापस लोट रहा था । मैंने राहत की सांस ली ।
मेरे मेहरबान दोस्त सोच रहे होगे कि इस बार मैं किस खतरनाक मिशन पर हूँ और कहां हू?
मैं मडलैण्ड की धरती पर पैराशूट से कूदी थीं और ज़मीन पर पांव रखते ही फंस गई ।
मेरे चाहने वाले ये भी अच्छी तरह से जानते हैं वि, मेरा भारी भरकम चीफ खुराना मुझे एक से एक खतरनाक मिशन सौंपता है । ऐसे मिशन जो इंटरनेशनल लेवल के होते हैं । जिनमें हर वक्त जान जाने का पूरा खतरा वना रहता है ।
उस रोज भी मैं एक खतरनाक मिशन से ही वापस लौटी थी, जिसका सम्बन्ध सीधा देश की आन्तरिक सुरक्षा से था ।
शाम का वक्त था ।
. मैं काफी देर तक अपनी गुलाबी मांसल देह क्रो शावर की रोमांचित कर देने वाली बौछार से भिगोती रही थी ।
मेरी थकान गायब हो चुकी थी, फिर मैं रोयेंदार तौलिये से अपनी देह से पानी की अन्तिम बूद को सुखाकर बाथरूम से बाहर निकली और आदमकद आइने की तरफ बढ गई ।
चूंकि मैं बीस दिन बाद मिशन से वापस लौटी थी । इसलिये जाकर मनोरंजन करने क मूड में थी । उस शाम तो मेरा मूड हंगामाई था । वो शाम मैं एक शानदार क्लब में गुजारना चाहती थी ।
मैं.. अपके सपनों की रानी रीमा.. .रीमा भारती । भारत की सबसे महत्वपूर्ण जासूसी संस्था आई०एस०सी० यानि इण्डियन सीक्रेट कोर की नम्बर बन एजेन्ट दोस्तों की दोस्त । देशप्रेमियों की कद्रदान देशद्रोहियो तथा दुश्मनों के लिए: साक्षात् मौत ।
वो बला, जिससे मौत भी पनाह मागे ।
मैं आइने के सामने पहुंचकर ठिठकी । तदुपरांत मैंने दोनों साथ ऊपर उठाकर एक मादक अगड़ाई ली तो मेरा अंग-अंग मुखर हो उठा ।
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मेरर गोरा भरा हुआ सुडौल जिस्म । सुडौल चिकने कधें ।। गोरी मखमली बांहें । गिरिवर की चोटियों की मानिन्द सिर उठाये गुलाबी
उन्नत वक्ष । जिन्हें देखकर कोई भी बालिग मर्द नन्हा-सा बच्चा बनने पर मजबूर हो जाये । ..
सुराहीदार गर्दन । पतली खमदार कमर । वक्षस्थल का आकर्षण और ज्यादा बढ़ गया था । आंखों में गजब का आकर्षण था, जिन्हें देखकर कोई भी मेरी तरफ खिंचा चला आ सकता है । समतल गोरा पेट, उस पर प्यारा-सा नाभिकूप और ढलान से नीचे प्यार-सा त्रिकोण, जिसे देखकर कोई भी पागल हुए विना नहीं रह सकता ।
आदमकद आइने में अपना प्रतिबिम्ब देखकर मैं गुदगुदा उठी थी ।
मैंने अपनी कोमल हथेली से अपने वक्षों को सहलाया तो मेरे समूचे जिस्म में सिरहन सी दौढ़ती चली गई ।
पहले मैंने अपने मखमली जिस्म पर खुशबूदार पाउडर छिढ़का । हालाकि मैं आदतन ब्रेजरी नहीं पहनती, लेकिन उस दिन ब्रेजरीं पहनी, जिसके मुलायम पेडों का स्पर्श अपनी मुलायम त्वचा पर पाकर मैं रोमांचित हो उठी थी ।
उसी क्षण फोन की घण्टी ने अपना बेसुरा राग अलापा। इस वक्त फोन का आना बेहद नागवार गुजरा था । मैं झुंझला उठी ।। किन्तु . . . फोन पर मेरी झुंझलाहट का क्या प्रभाव पड़ने वाला था? उसकी घण्टी बराबर बजे जा रही थी । मैंने आगे बढकर रिसीवर उठाया और कान से लगाकर माउथपीस में बोली-हैलो ।"
"रीमा !"
मेरे होठों से गहरी सांस निकल गई । लाइन पर खुराना था ।
"गुड ईवनिंग सर ।"
वह मेरे अभिवादन का ज़वाब देकर बोला-""क्या कर रहीं हो ?"
"मैं क्लब जाने के लिये तैयार हो रही थी सर ।"
"क्लव जाने का प्रोग्राम कैन्सिल करों और तुरन्त आफिस पहुचो ।