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Adultery कीमत वसूल

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हम सब माल रोड पर आ गये। हमने वहां तीन-चार शोरूम पर देखा पर कुछ समझ में नहीं आया। मैंने अनु से कहा- "तुम मेरे साथ आओं मैं तुम्हें दिलवाता हू..."

अनु को एक शोरूम में ले गया वहां मैंने जाते ही कहा- "मेडम के साइज की जीन्स दिखाओ..."

अनु मुझं चुटकी काटतं हए बोली- "मैंने आपको बताया नहीं था, मैं नहीं पहनती जीन्स.."

मैंने कहा- वहां नहीं पहनती, यहां तो पहन सकती हो?" और मैंने सेल्सगर्ल को कहा- "दिखाओ.."

सेल्सगर्ल ने दिखानी शुरू कर दी।

अनु मुझे घूरती रही फिर बोली- "मैं तो नहीं पहनूंगी.."

पर मैं अनु की परवाह किए बिना जीन्स के कलर देखता रहा। फिर मैंने कहा- "इनके साइज की लोग करती और दिखाओ...

अनु ने कहा- "आप समझते क्यों नहीं? में नहीं पहनंगी, क्या फायदा देखने से?"

मैंने कहा- "रुको तो दो मिनट.." और मैंने कुरती भी पसंद कर ली। मैंने जीन्स और कुरती अनु को देते हुए कहा- "जाओं चेंज रूम में जाकर ट्राई करो..."

अनु ने बुरा सा मुँह बनाया।

ऋतु ने कहा- "दीदी ट्राई तो करके देखो। अच्छी लगेगी.."

मैंने कहा- "अगर अच्छी ना लगे तो नहीं लेना। बस ट्राई तो करो एक बार.."

अनु बेमन में चली गई। अनु जब चेंज रूम से बाहर आई तो मेरे मुँह से निकला- "वाऊओ...'

ऋतु भी बोली- "दीदी सच में आप इस ड्रेस में बड़ी प्यारी लग रही हो...'

अनु हम दोनों को ऐसे देखने लगी जैसे की हम उसको झठ बोल रहे हों। फिर जिस सेल्सगर्ल ने इस दिखाई थी उसने भी कहा- "मॅडम ये इस आप पर बड़ी प्यारी लग रही है.....

अनु को तब जाकर कुछ कान्फिडेन्स आया।

मैने अनु से कहा- "तुम ऐसे ही डर रही थी। तुम जीन्स में जितनी प्यारी लग रही हो, इतनी ता सलवार सूट में भी नहीं लगती..."

अनु ने मिरर में देखा और कहा- "हाँ सच में... ये तो मुझपर अच्छी लग रही है...

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मैंने कहा- "अब इसी ड्रेस में चलो.."

अनु बोली- "पक्का बुरी तो नहीं लग रही ना?"

मैंने कहा- "कसम से बड़ी कातिल लग रही हो, पता नहीं कितनों को मार डालिगी?"

अनु शर्मा गईं।

हम सब वहां से निकले तो ऋतु बोली- "दीदी जीन्स के साथ स्टाइलिश सँडल भी होते तो मजा आता.."

मैंने कहा- "वो भी ले लेते हैं, चलो.." हम एक फुटवेर के शोरूम में गये। वहां अनु को सँडल लेकर दिए, और एक शानदार हैंडबैग भी लेकर दिया।

अनु बोली- "आप तो मुझे ऐसे शापिंग करवा रहे हो जैसे की......"

हम जब वहां से बाहर आए तो मैंने अनु को देखा वो सच में बड़ी प्यारी लग रही थी। मैंने अनु से कहा- "अब मेरे साथ-साथ मत चलना। लोग देखकर मेरे से जलने लग जाएंगे..."

अनु बाली- "दनियां को जलने दो मुझं क्या?" कहकर अनु ने मेरे हाथ में अपना हाथ डाल दिया। अब अनु और में ऐसे चल रहे थे जैसे नये कपल हो।

ऋतु ने कहा- "आप दोनों यहां अपना हनीमून माजा रहे हो। मैं भी आपके साथ है."

मैंने हँसते हुए अनु से कहा- "ये कैसी साली है?"

सुनकर अनु शर्मा गई और ऋतु मुझे ऐसे देखने लगी जैसे की मैने।

थोड़ी देर चुप रहने के बाद अनु ने कहा- "चला मामास खाते हैं."

मुझे भी मोमोस पसंद हैं। मैंने कहा- "हाँ चलो..."

हम लोग मोमोस खाने लगे। अनु ने मोमोस खाते ही सस्स्सी ... सस्स्सी ... करनी शुरू कर दी।

मैंने कहा- "मुझे तो इतना तीखा नहीं लगा.."

अनु बोली- "आपको तीखा नहीं लगा और मेरी हालत खराब हो गई... मेरे तो कानों में सीटियां बज रही हैं। सीईई... सस्स्सी .."

मैंने जल्दी से एक आइसक्रीम लाकर अनु को दे दी। अनु ने झट से आइस्क्रीम खतम कर ली। उसको अब रिलैक्स होने लगा। फिर अनु ने मुझे बड़े ही प्यार से देखा और आँखें बंद करके कहा- "थॅंक्स मेरे बाबू.."

मैंने कहा- "मुझे थॅंक्स क्यों बोल रही हो?"

अनु बोली- "आप मेरी इतनी केयर जो करते हो इसलिए.."

मैंने मुश्कुराकर कहा- "में कभी-कभी केयरलेस भी हो जाता हूँ.."

अनु समझ गई में क्या बोल रहा हूँ। अनु शर्मा गई। उसने अपनी निगाहों को नीचे कर लिया।

ऋतु ने कहा- "आप दोनों के साथ मुझे अब ऐसे लग रहा है जैसे कबाब में हड्डी."

अनु और में दोनों एकसाथ हँस पड़े।

मैंने ऋतु का हाथ पकड़कर कहा- "चलो अब अनु को हड्डी बनाते हैं..." हम लोग जैसे ही रोड पर आए हल्की हल्की बूंदा बांदी होने लगी। मैंने अनु से कहा- "जल्दी बताओं और कुछ खाने पीने का मन है?"

अनु ने कहा- अभी तो नहीं।

मैंने कहा- फिर जल्दी करो बारिश कहीं तेज ना हो जाए।
 
अनु ने कहा- अब सीधा सम में चलते हैं।

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पर ऋतु का मन नहीं था अभी जाने का। उसने मुँह बनाते हए कहा- "आप दोनों को रूम में जाने की जल्दी क्यों है, मुझे पता है?"

मुझे लगा ऋतु अब बुरा मान गई है। इसलिए मैंने उसको प्यार से कहा- "ऋतु जी, अब जब तक आप नहीं कहोगी हम रूम में नहीं जाएंगे..."

ऋतु मेरी बात सुनकर मुश्कराने लगी। हम लोग फिर इधर-उधर घूमते रहे। अचानक बारिश तेज होने लगी। हम लोग बारिश से बचने के लिए एक जगह रुक गये। हम लोग वहां काफी देर तक रुके रहें, पर बारिश तो और तेज होती जा रही थी।

मैंने ऋतु से कहा- "अब तो यहां से होटेल तक भीगते हुए जाना होगा.."

ऋतु ने कहा- "ये सच मेरी वजह से हुआ है सारी."

मैंने कहा- "नहीं पार इसमें तुम्हारी क्या गलती है? बारिश तो पहाड़ों पर कभी भी हो जाती है."

हम लोग बारिश में ही अपने होटल की तरफ चलने लगे। रगम तक जाते-जातें हम सब बुरी तरह भीग गये थे।

अनु की हालत कुछ ज्यादा ही खस्ता हो रही थी, वो ठंड से कॉप रही थी।

मैंने रूम में जाकर ऋतु में कहा- "तुम भी जल्दी से चेंज कर लो, नहीं तो ठंड लग सकती है..." कहकर मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए, फिर अपने जिशम को तालिया से पांछकर बेडशीट में अपने जिएम को लपेट लिया।

अनु को शायद भीगने से ज्यादा ठंड लग गई थी। वो ठंड से काँप रही थी।

मैंने ऋतु से कहा- "अनु को रजाई दे दो.."

ऋतु ने अनु के ऊपर रजाई डाल दी। मैंने विस्की की बोतल खोलकर पेंग बना लिया। में सिप करने लगा। ऋतु मेरे पास आकर बैठ गईं।

मैंने ऋतु से कहा- "अगर तुम्हें ठंड लग रही है तो एक पेग ले लो.."

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ऋतु हिचक कर बोली "कुछ होगा तो नहीं?"

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मैंने ऋतु में कहा- "दवाई समझकर पी लो..."

ऋतु ने हाँ में सिर हिला दिया। मैंने एक लार्ज पेग बनाकर ऋतु को दे दिया। वो बुरे-बुरे से मुँह बनाकर पीने

लगी।

फिर मैंने अनु की तरफ देखा तो वो अभी भी ठंड से काँप रही थी और मुझे देख रही थी। मैंने एक छोटा पैग बनाया और अनु के पास चला गया। मैंने अनु के सिर पर हाथ फेरा और उसका कहा- "उठो ये पी ला.."

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अनु ने हिचकिचाते हुए कहा- "मैंने तो कभी नहीं पी आज तक.."

मैंने कहा- "इसका दबाई समझकर पी जाओ। देखो ऋतु भी पी रही है.."

अनु ने ऋतु की तरफ देखा। फिर मैं अनु की रजाई में घुस गया। मैंने उसके पीछे बैठकर उसको सहारे से बैठा दिया। अब अनु की कमर मेरे सीने पर थी। अनु मरे से टेक लगाकर बैठी थी।

मैंने उसके हाथ में पेग देते हुए कहा- "मेरे कहने से पी लो."

अनु ने मुझे देखा और कहा- "आपके कहने से पी रही हैं, कुछ हो गया तो संभाल लेना.."

मैंने अनु के होंठों को किस किया और कहा- "मेरे होते कुछ नहीं होगा.."

अनु ने अपने मह से ग्लास लगाया और एक घट भरा उसने कभी पी नहीं थी इसलिए उसका बड़ा अजीब सा लग रहा था। अनु ने छी-छीः करते हुए कहा- "इसको पीने से गले में चुभन हो रही है."

मैंने उसको कहा- "देखो में बताता हैं, इसको कैसे पीते हैं?

मैंने ऋतु से कहा- "मेरा पेंग उठाकर मुझे दे दो..."

मैं जब अनु के लिए पेंग लेकर आया था तब अपना पेग वहीं टेबल पर ही छोड़ आया था। ऋतु मेरा पंग उठाकर ले आई। मुझं पंग देकर वो भी मेरे पास ही बैठ गई।

मैंने अनु से कहा- "देखो पहले हल्का-हल्का सिप करो."

अनु ने हल्का-हल्का सिप किया।

मैंने कहा- "अब ऐसे ही पी ..."
 
अनु ने तीन-चार छोटे-छोटे सिप लिए। फिर उसने बड़े सिप लेते हए पेंग खतम कर दिया।

मैंने कहा- "अब बोलो चुभन हुई?"

अनु ने कहा- "नहीं, अब तो कुछ नहीं हुआ.."

मैंने अनु से कहा- "अब तुम रजाई में लेटी रहीं। थोड़ी देर में नार्मल लगने लगेगा..." कहकर मैं उठने लगा।

अनु बोली- "बाबू ऐसे ही बैठे रहो ना, अच्छा लग रहा है."

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मैंने कहा- "अच्छा जी जैसे आपको अच्छा लगे... मेरा पेंग खतम हो गया था।

मैंने ऋतु से कहा- "बोतल उठाकर यहीं ले आओ.." ऋतु उठकर बोतल ले आई।

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****

मैंने अपना पंग फिर से बनाया और सिप करने लगा। मैंने ऋतु से एक बार फिर पूछा- "और लोगी बया?"

ऋतु ने भी कह दिया- "हाँ एक और..

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मैंने उसका फिर से लार्ज पेग बना दिया, हम दोनों सिप करते रहे।

ऋतु ने कहा- "आप बिना नमकीन के कैसे पी लेते हो?"

मन हँसते हए कहा- "मैं बड़ा पुराना शराबी हैं... मैं जानबूझ कर ऋतु को बड़े-बड़े पैग बनाकर दे रहा था ताकी वो रात को चैन से सो जाए। मैं अनु के साथ रजाई में बैठा हा एक हाथ से उसकी चूचियों को भी सहला रहा था।

अब अनु का जिम कुछ गरम होने लगा था। विस्की अपना असर दिखा रही थी। फिर मैंने ऋतु में कहा- "यार एक-एक पेग सब पीते हैं, और बोतल को खतम कर देते हैं."

अनु ने मेरे हाथ को रजाई में जार से दबाया। मैंने उसको देखा तो अपनी आँखों की भाषा से मुझे समझाने लगी। अनु की आँखों के इशारें अब मैं समझने लगा था। उसने इशारे से कहा, "मैं नहीं पियंगी..."

मैंने भी उसकी चूचियों को सहलाकर उसको इशारे से समझा दिया. "तुम चुप रहो...

ऋतु दो पंग के बाद शरण में आ गई थी। उसको और पीने की तलब मच गई। मैंने ऋतु को इस बार पहले से हरू का पेग बनाकर दिया। अपने लिए सेम और अनु को बिल्कुल ही जरा सा पेग बनाकर दिया। अनु मुझे देखने लगी। मैंने उसको प्यार से इशारा किया। उसने पेग पकड़ लिया।

ऋतु में अपना पंग झटके में खतम किया और लंबी सांस लेकर बोली "मुझे नींद आ रही है..."

मैंने कहा- "पहले डिनर तो कर लो, फिर सो जाना.." फिर मैंने रूम सर्विस पर आईर कर दिए, और मैं अपना पेग सिप करने लगा। मैं अभी तक अनु के साथ रजाई में ऐसे ही बैठा था।

मैंने अनु से कहा- "अपना पेग खतम करो जल्दी से.."

ऋतु को कुछ ज्यादा ही नशा हो गया था। उसकी हालत देखकर मैंने कहा- "ऋतु तुम थोड़ी देर सो जाओ। जब डिनर आ जाएगा मैं तुमको उठा दूँगा."

ऋतु के मन में जो बात दबी हई थी वो नशे की वजह से उसके मुंह से निकल गई। उसने कहा- "मैंने आज आप दोनों के बीच में सोना है। आप दोनों को आज अलग-अलग साना पड़ेगा..."

ऋतु की बात सुनकर अनु मुझे देखने लगी। मैंने उसको इशारा किया की वो कुछ ना बोले। मैंने उठकर ऋतु से कहा- "तुम अनु के पास सो जाओ। में बेड के इस साइड में सो जाऊँगा.."

ऋतु अनु के पास सो गई। मैं अपनी साइड में लेट गया। ऋतु का लेटते ही नींद आ गई। मैं कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा। इतने में डिनर भी आ गया। मैंने अनु से कहा- "ऋतु को उठा दो.."

अनु ने ऋतु का उठाने की कोशिश की पर ऋतु की नींद नहीं खुली।

मैंने अनु से कहा- "आओं तुम डिनर कर लो। ऋतु जब उठेगी उसके लिए फिर से आ जाएगा... हम दोनों डिनर करने लगे।

अनु भी हल्के शरण में थी उसने मुझसे कहा- "देखा आपने ऋतु का?"

मैंने मुश्कुराकर कहा- "जाने दो, बो अभी होश में नहीं है."

पर अनु बोली- "मुझे उसकी ये बाद गलत लगी.."

मैंने अनु को प्यार से समझाते हए कहा- "अनु तुम शायद उसकी बात का गलत मतलब निकाल रही हो.. असल में वो खुद को अकेला महसूस कर रही होगी..."

अनु मेरी बात सुनकर और गुस्से में आ गई। उसकी आँखों में नमी भर आई। मुझे बोली- "आप उसका इतना फेवर कर रहे हो। मेरी बात की कोई कीमत ही नहीं आपकी नजर में... और अनु ने खाना बीच में ही छोड़ दिया।
 
मैने अनु को प्यार से कहा- "अनु तुम मुझे गलत मत समझा। मेरे लिए जो तुम हो, वो कोई नहीं हो सकता। मुझे जब कभी ऐसा लगेगा की कोई तुम्हें डामिनेट कर रहा है, तब मैं तुम्हारा ही साथ दूंगा.." कहते हए मैंने एक कौर अनु के मुह में डाल दिया।

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अनु ने खा लिया, और बोली- "अब आप मुझे खिलाओगे?"

मैंने मुश्कराकर कहा- "बस इतनी सी बात?" और मैं अनु को खिलाने लगा। फिर अनु और मैं डिनर के बाद बेड पर आ गये।

मैंने अत को देखा तो वो अब तक होश में नहीं थी और अब वो बेड पर इस तरह से सोई हुई थी की बेड पर सिर्फ एक ही इंसान और सा सकता था। मैंने अनु से कहा- "इतनी जगह में दोनों नहीं सो सकते। तुम बैंड पर सो जाओ मैं सोफे पर सो जाता हैं." कहकर में सोफे पर जाकर लेट गया।

अनु भी अपना मन मार कर बेड पर पड़ गई। थोड़ी देर बाद मुझे अनु की आवाज आई. "मुझे नींद नहीं आ रही, में आपके पास आ जाऊँ?"

मैंने कहा- "आ जाओ..."

अनु मेरे पास आ गई। मैंने उसको मुस्कुराते हुए कहा तुम्हें नींद नहीं आ रही या तुम्हारी. मैंने उसकी चूत

की तरफ इशारा करते हुए कहा।

अनु झंपते हुए मेरी गोद में आकर बैठ गईं।

मैंने उसको कहा- "अच्छा, अगर तुमको सिर्फ सोना है तो हम दोनों साफे पर सो सकते हैं। पर अगर कुछ और मह हो तो फिर हमें नीचे सोना पड़ेगा। बोलो नीचे सो सकती हो, कोई प्राब्लम तो नहीं होगी?"

अनु मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर चूमते हुए बोली "जहां आप हो वहां मैं हर हाल में खुश हूँ."

मैंने कहा- "चलो फिर..." और हम दोनों नीचे लेट गये। अनु मेरे पास में लेटी हई मेरे सीने के बालों से खेलने लगी। मैंने अनु को अपने और पास करते हए उसके ऊपर अपनी टांग रख दी, और उसके गालों को चूमते हए कहा- "अब बताओ, मेरे साथ सोकर क्या करना है?"
 
अनु मेरी बाहों में सिमट गई और बोली- "मुझे आपसे प्यार करना है..."

मैंने कहा- "प्यार... कौन सा वाला?"

ने मेरे लण्ड को पकड़कर कहा- "ये वाला."

मैंने अनु से कहा- "मेरी इतनी आदत मत डालो, नहीं तो तुम्हें परेशानी होगी.."

अनु ने कहा- "अब तो आप मेरी सांसों में बस गयें हो। आपकी आदत क्या, अब तो आप मेरी जान बन गये हो..." कहते हए अनु मेरे से चिपक कर बोली- "मेरे बाब, मेरे शोना..."

मैंने अनु से फिर इस बारे में कोई बात नहीं करी। मैंने उसको कहा- "पहले अपने कपड़े उत्त..."

अनु ने अपने कपड़े उतार दिए। मैंने उसका फिर से अपनी बाहों में ले लिया और अनु के गाल चूमते हए उसके कानों को अपने होंठों में दबा लिया, और फिर उसको अपनी जीभ की नोक से सहलाने लगा।

अनु ने जोर से सिसकी ली- "सस्स्स्स्सीईई अहह... बाबू आह्ह.."

मैंने फिर से ऐसा ही किया। इस बार अनु आउट आफ कंट्रोल हो गई। उसने मेरे चेहरे पर बेहतशा चमना शुरू कर दिया। बो मेरे पूरे चेहरे को मेरी गर्दन को ऐसे चूम और चाट रही थी जैसे भूखी बिल्ली को मलाई मिल गई हो। अनु ने मेरे पूरे चेहरे को अपनी जीभ से चाट-चाटकर गीला कर दिया। मेरा पूरे चेहरा अनु की लार से भर गया। अनु ने फिर मेरे सीने पर किस करना शुरू कर दिया।

मुझे ऐसा लगने लगा की अनु अगर कुछ देर मुझे ऐसे ही चूमती रही तो मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगा। फा में इतनी जल्दी अनु को चोदने के मूड में नहीं था। मैंने अनु को अपने ऊपर से उतारकर अपने नीचे कर दिया। अब में अनु के ऊपर था। मैंने उसकी दोनों चूचियों को हाथ से अलग-अलग कर दिया और दोनों चूचियों के बीच की जगह पर अपनी जीभ रख दी। फिर मैंने अपनी जीभ को नीचे से ऊपर तक फिरा दिया। अनु की दोनों चचियां मेरे दोनों हाथों में थी। मैंने उसकी चूचियों पर अपने हाथों को गोल-गोल घुमाकर उसकी चूचियों में दूध उतार दिया। अनु के निपल से दूध रिस कर गिरने लगा।

में इतना कीमती दूध जाया नहीं होने देना चाहता था। मैंने अपना मुँह उसकी चूची पर लगा दिया, और चूसने लगा। अनु मुझे सिसकियां लेते हुए अपनी चूची चुसवा रही थी। बीच-बीच में वो मेरे होठों को अपने होंठों से चूस लेती थी। फिर मैं उसके होंठों से अपना मुँह हटाकर उसकी चूची चूसने लगता था। मैंने अनु की दोनों चूचियों को जमकर चूसा। अनु की हालत अब ऐसे हो गई थी की वो लण्ड को बार-बार पकड़कर मुझे चुदाई के लिए इन्वाइट कर रही थी। पर मैं तो अभी और मजा लेना चाहता था।

मैंने अनु की चूचियों को अपने हाथ से ऊपर किया और उसकी चूचियों के नीचे के हिस्से पर अपनी जीभ फेर दी। फिर मैंने अनु के पेंट पर अपनी जीभ रख दी। मैं अपनी जीभ को धीरे-धीरे नीचे की तरफ ला रहा था। फिर मैंने अपनी जीभ अनु की नाभि के चारों तरफ घुमा दी।

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अनु को फिर से कुछ हो गया। वो मुझे खींचकर मेरे होठों को चूसने लगी। फिर अनु मेरे कान में कांपती हुई आवाज में बोली- "बाब.. चादा ना उम्म्म्म ..."

मैंने कहा- "अभी और प्यार तो करने दो.."

अनु ने कहा- "बाब, उहहन चोरो ना.." फिर अनु ने ने कहा- "पहले अंदर डाल दो फिर जो मन में हो करते रहना... बाबू मुझे और नहीं तड़पाओ...'

मैंने अनु से कहा- "रुका नहीं जा रहा क्या?"

अनु ने कहा- "नहीं बाबू अब और मत तड़पाओं मेरे बाबू... जल्दी से डालो ना.."

मैंने अनु की बात मान ली, और अपना लण्ड अनु की चूत पर रख दिया। मैंने अनु से कहा- "लो अपनी चूत को उठाकर डाल लो...

अनु ने अपनी चूत को जितना उठा सकती थी उठाया, और उसकी चूत में थोड़ा सा लण्ड चला गया। अनु ने अपनी चूत को नीचे किया तो लण्ड फिर से निकल गया। अनु ने मेरे सीने पा !से बरसाते हुए कहा- "बाबू मुझे इतना मत सताओं प्लीज़... बाब."

मुझे अनु पर बड़ा प्यार आया। मैंने कहा- "अच्छा जान ये लो." और मैंने अनु की चूत में लण्ड घुसेड़ दिया।
 
अनु मेरा पूरा लण्ड अपनी चूत में लेकर खुश हो गई। अनु के चेहरा पर अब संतुष्टि के भाव थे। अनु की सिसकियां अब सुख वाली सिसकियों में बदल गई। मैं अनु को पूरे दिल से चोद रहा था। अनु भी मेरी हर चोट

पर अपनी चूत उछाल-उछालकर मेरे जोश को बढ़ा रही थी। मैंने अनु की चूत में अब लण्ड डालकर धक्के मारने बंद कर दिए और मैंने अनु के हाथ को अपने हाथ में लेकर उसकी कलाई को ऊपर कर दिया। अनु की चिकनी काँख पर मैंने अपनी जीभ फेरी, तो अनु अपनी चूत को उछाल-उछालकर मेरे लण्ड से रिक्वेस्ट करने लगी की मुझे चोदो।

मेरे लण्ड ने भी अपनी सखी की बात मानकर उसको चोदना शुरू कर दिया। मैं अनु को अब चूमते हुए चोद रहा

था। मैं अनु के पूरे जिश्म को सहलाकर उसको चोद रहा था। मुझे भी ऐसी चुदाई करने में मजा आ रहा था। मेरा मन कर रहा था की मैं अनु को बस चोदता ही रहं, उसकी चूत में ऐसे ही अपना लण्ड डाले रहा और फिर

अनु की चूत में मैंने अपने लौड़े को जड़ तक धक्के मारते हुए झड़ने का हुकुम दे दिया।

मैं अनु की चूचियों पर अपना मुँह रखकर लंबी-लंबी सांसें लेने लगा। अनु भी ऐसे सांसें ले रही थी जैसे दूर से भागकर आई हो। मैंने अनु से कहा- "जान तुमने तो आज श्रका दिया.."

अनु ने मेरे सिर पर अपना हाथ फेरते हए कहां मेरा- "बाब थक गया... उम्म्म्म ..."

अनु और में दोनों साथ-साथ लेटे हुए थे। मैंने अनु से कहा- "अब थोड़ी देर सो जाते हैं मुबह जल्दी उटना है."

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अनु ने पूछा- "हम सुबह किस टाइम चलेंगे?"

मैंने जवाब दिया- "9:00 बजे तक..."

अनु ने कहा- "उम्म्म... इतनी जल्दी क्या है आराम से चलेंगे.."

मैंने कहा- "मुझे तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन तुम सोच लो..'

अनु ने सोचते हुए कहा- "हम यहां से लंच करके चलेंगे..."

मैंने कहा- "जैसे तुम कहो। पर अभी तो सो जाओ, मुझे भी अब हल्की-हल्की नींद आने लगी है.."

अनु ने मेरे हाथ को अपने हाथ में ले लिया, फिर कहने लगी- "मैं आपका हाथ अपने हाथ में लेकर सो जाऊँ?"

मैंने कहा- तुम्हें अगर ऐसे अच्छा लगता है तो सो जाओ।

मैं सोने लगा। थोड़ी देर बाद अनु ने मेरी टांग पर अपनी टांग रख ली, और मेरे कंधों को सहलाने लगी। मैंने अनु की तरफ प्यार में देखा और कहा- "नींद नहीं आ रही बया?"

अनु मुझे देखकर मेरी आँखों में आँखें डालते हुए कहने लगी- "बाबू हम कल सच में चले जाएंगे?"

मैंने कहा- तुम्हारा मन नहीं कर रहा क्या जाने का?

अनु ने अपने नचले हॉट को दबाते हुए कहा "नहीं.."

मैंने कहा- "तुम यहां सिर्फ एक दिन के लिए आई थी और तुमने दो गत का यहां स्टे कर लिया। अभी भी मन नहीं भरा? अब तो जाना ही पड़ेगा.."

अनु मेरे और पास आकर मेरे से चिपक गई और बोली- "बाबू एक बात पछ?"

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मैंने कहा- हाँ पूछो ना।
 
अनु ने कहा- "आप वहां जाकर मुझे भूल तो नहीं जाओगे?"

मैंने उसके गाल पर अपना हाथ फेरते हए कहा- "तुम्हें अचानक ऐसा क्यों लग रहा है?"

अनु बोली- बताइए ना?"

मैंने कहा- तुम्हें क्या लगता है?

अनु ने मेरे सीने पर अपना सिर रख दिया और कहने लगी- "पता नहीं... पर डर लग रहा है...

मैंने अनु को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठों पर किस किया। फिर मैंने कहा- "ऐसा सोचना भी नहीं कभी..."

अनु ने कहा- सच?

मैंने कहा- "तुम्हारी कसम.."

अनु ने मेरे होंठों को चूसकर कहा- "बाबू.."

मैने अनु को प्यार से सहलाते हए कहा- "अब सो जाओ..."

हम दोनों सो गये। करीब दो घंटे बाद मेरी नींद खुली तो मैंने देखा अनु मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर साई हुई थी, उसके चेहरे पर स्माइल थी। जैसे वो नींद में भी कोई प्यार भरा ख्वाब देख रही हो। मैंने धीरे से अपना हाथ उसके हाथ से छुड़ाया और उसको प्यार से देखा। अनु दुनियां से बेखबर सोई हुई थी। मैंने उसके ऊपर रजाई डाल दी। मुझे सस आ रहा था। मैं बाथरूम में चला गया।

मैं सस करके वापिस आया। मैंने ऋतु को देखा तो वो गहरी नींद में सोई हुई थी। मैं फिर से अनु के पास जाकर रजाई में घुस गया। अनु अब उठी हुई थी बो फिर से मेरे से चिपक गई। मैंने भी उसको खुद से चिपका लिया। मेरे हाथ फिर से अनु के जिएम को सहलाने लगे।

अनु ने फिर कहा- "आपने जब मुझे वीडियो में देखा था तब आपने मुझ में ऐसा क्या देख लिया था? जो मैं आपको इतनी पसंद आ गई..."

मैंने कहा- "तुम हो ही इतनी खूबसूरत... जो भी तुमको देख ले तो वा तुम्हारा दीवाना बन जाएगा.."

अनु ने कहा- "फिर भी आपको मुझमें क्या अच्छा लगा? प्लीज... बताइए ना..."

मैंने अनु की गाण्ड पर हाथ फेरते हुए कहा- "ये.."

अनु ने शर्माते हुए कहा- "हो... हाय राम... आप सच में बड़े बेशर्म हो.."

मैंने कहा- "तुमने जो पूछा बा मैंने सच-सच बता दिया। सच में अनु तुम्हारी गाण्ड बड़ी मस्त है। इसको देखते ही लण्ड खड़ा हो जाता है."

अनु कहने लगी- "अच्छा जी... आपको ये मस्त लगती है पर ये तो सबकी एक जैसी होती है..."

मैंने कहा- "सबके पास इतनी मस्त नहीं होती.."

अनु बोली- "मुझे तो अपनी ये चीज बड़ी भारी लगती है। मुझे जब कभी फिटिंग वाली ड्रेस पहननी पड़ती है तो बड़ी शर्म आती है..."

मैंने कहा- क्यों शर्म आती है?
 
अनु ने कहा- उसमें मेरे चूतड़ों की शेप साफ-साफ नजर आती हैं."

मैंने कहा- "इसीलिए तो सेक्सी लगती हो..."

अनु बोली- "आपको ही तो लगती हैं..." कहकर अनु ने मेरे सीने में मुंह छुपा लिया और बोली- "सब कहते हैं मेरे चूतड़ भारी हैं, मुझे टाइट ड्रेस अच्छी नहीं लगती। मुझे भी बड़ा अजीब लगता है। मैं जब कहीं जाती है तो सब वही देखते हैं, तो मुझे बड़ी शर्म आती है."

अनु फिर बोली "शादी से पहले मैं ऋतु जैसी स्लिम दुबली-पतली थी पर शादी के बाद मैं मोटी हो गई। मैं

आपको मोटी नहीं लगती?"

मैंने कहा- "नहीं। तुम्हारें जिम का गदरायापन तुमको और ज्यादा सेक्सी बना देता है... फिर मैंने अनु का हाथ पकड़कर अपने लौड़े पर रख दिया और कहा- "देखो तुम्हारी गाण्ड के नाम से ये भी उठ गया."

अनु ने मेरे लौड़े को प्यार से सहलाया और बोली- "इसका जो मन करे इसको करने दो। फिर सो जाएगा."

मैने अनु की गर्दन पर चूमते हुए कहा- "इसका तुम्हारी गाण्ड मारजे का मन कर रहा है.."

अनु हँसने लगी और बोली. "इसमें सोचने की क्या बात है? जैसे आपको करना है कर लो.."

मैंने कहा- "पर तुम्हें पीछे से करवाने में दर्द होता हैं। मैं तुम्हें दर्द नहीं देना चाहता। रहने दो। आगे से ही कर लंगा.."

अनु बोली- "आपकी खुशी के लिए मुझे हर दर्द मंजूर है। आप पीछे से कर लो.."

मैंने फिर से कहा- "तुम्हें दर्द हुआ तो?"

अनु बोली- "नहीं होगा ना... मैं आपको कह रही हैं, आप करो."

मैंने कहा- "रहने दो यार."

अनु ने कहा- "आप करो ना... अच्छा अगर दर्द हआ तो मैं आपको बता देंगी..."

मैंने कहा- “पक्का? अगर तुम्हें जरा सा भी दर्द हुआ तो मुझे बता देना में बाहर निकाल लूगा.."

अनु बोली- "हाँ बाबू, मैं आपको बता दूँगी..' फिर मुझे किस किया और बोली- "वैसे (घोड़ी) बनूं मैं?"

मैंने अनु के होठों को अपने होंठों में दबा लिया और उसके चूतड़ों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। मेरी उंगली अब उसकी गाण्ड के छेद पर घमने लगी थी। अनु भी मेरे साथ चिपक गई। मैंने अज से कहा- "जाओं कोई कीम उठाकर लाओ..."

अनु ने कीम लाकर मुझे दे दी। मैंने अनु की गाण्ड के छेद पर क्रीम लगा दी और अपनी उंगली को उसकी गाण्ड में डाल दिया। अनु ने सीईई... की आवाज करी।

मैंने कहा- दर्द हो रहा है?

अनु बोली- नहीं आप करते रहो।

मैंने अनुकी गाण्ड में फिर से अपनी उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। अनु की गाण्ड में अच्छी तरह से कीम लगाकर मैंने कहा- "अब घोड़ी बन जाओ..."

अनु घोड़ी बन गईं। मैंने उसकी गाण्ड में थोड़ी और कीम लगा दी और उंगली में अंदर कर दी।

मैंने कहा- "अब में लण्ड डालं?"

अनु ने कहा- हम्म्म्म

... आपकी घोड़ी तैयार है।

मुझे अनु का इन्विटेशन अच्छा लगा। मैंने अनु की गाण्ड पर लौड़ा रखकर जोर से दबा दिया।

अनु ने हल्की सी सस्स्स

अ उईईई... की आवाज निकली।

मैंने कहा- दर्द हो रहा है?

अनु बोली- नहीं नहीं।

मैंने अपना लण्ड अनु की गाण्ड में थोड़ा और डाला। अनु की कोई आवाज नहीं आई। मैंने अपना लण्ड धीरे से पूरा डाल दिया। मैंने अपना पूरा लण्ड अनु की गाण्ड में डालकर धक्के मारने शुरू कर दिए। मेरे धक्के पड़ने पर अनु की सिर्फ हम्म्म्म ... की आवाज आ रही थी।

मैंने कहा- "दर्द तो नहीं हो रहा?"

अनु ने सर हिलाकर कहा- "नहीं.."

मैं अनु की गाण्ड मारता रहा। अनु ने कोई विरोध नहीं किया, और फिर जब मेरे लौड़े से बर्दाश्त नहीं हआ, तो मैंने अपना माल अनु की गाण्ड में झाड़ दिया, फिर अपना लण्ड अनु की गाण्ड से निकाल लिया।

अनु अभी तक घोड़ी बनी हई थी। मैंने अपने लण्ड को तौलिया में साफ किया और अनु को कहा- "अब तो सीधी होकर लेट जाओ।

अनु सस्स्स्स

... आह्ह.. की आवाज करते हुए सीधा लेट गईं।
 
मैंने अनु को देखा तो उसकी आँखें लाल हो गई थी। उसका पूरा चेहरा आँसुओ से भीगा हुआ था। मैंने उसका कहा- "तुम रो रही थी ना?"

अनु ने कहा- नहीं तो।

मैंने उसके चेहरे पर अपनी उंगली फेरते हुए कहा- "अभी तक आँसू हैं.."

अनु मेरे से कसकर चिपट गई।

मैंने उसको गुस्से से कहा- "झठी... मुझसे कहा क्यों नहीं? मैं इतना जालिम तो नहीं जो तुम्हारे दर्द को नहीं समझता...

अनु बोली. "बाबू आपकी खुशी से बढ़कर मेरे लिए और कुछ नहीं."

मैं अनु को देखता ही रह गया।

अनु की प्यार भरी आवाज मेंरे कानों में सुनाई दे रही थी- "उठिए ना... उठिए."

मैंने नींद में ही कहा- "अभी उठ जाऊँगा जान.."

फिर मुझे अपने होंठों पर अनु के होंठों का एहसास हुआ। उसके नाजुक होंठ मेरे होंठों को चूसने लगे। अनु की

महकती सांसें मेरी सांसों में घुल गई। अनु की सांसों की महक मेरी सांसों में बस गईं। मेरे चेहरे पर उसकी भीगी जुल्फें बिखरी हुई थी। मैंने फिर भी आँखें नहीं खाली।

फिर से आवाज आई- "मेरे बाबू को बड़ी नीद आ रही है.."

अब मैंने अपनी आँखों को खोला तो अनु मेरे ऊपर झुकी हुई थी। मैंने अनु को देखा, तो ऐसा लग रहा था जैसे वो अभी-अभी नहाकर आई हो, उसके बाल गीले थे। अनु का गोरा रंग उसकी बड़ी-बड़ी आँखें और उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होंठ कयामत लग रहे थे। अनु मुझे बड़े प्यार से मुश्कुराती हुई देख रही थी।

.

अनु ने कहा- गुड मार्निंग

मैंने उसको अपनी बाहों में भरकर कहा- "गड़ मानिंग मेरी जान... काश। तुम रोज मुझे ऐसे उठाती.."

अनु के चेहरा पर लाली और बढ़ने लगी।

फिर मैंने कहा- "आज इतनी जल्दी कैसे उठ गई?"

अनु ने कहा- "पता नहीं अपने आप ही नींद खुल गई थी.." फिर बोली- "जल्दी से उठ जाओं बाब.."

मैंने हँसते हुए हुए अनु से कहा- "इतनी जल्दी क्यों कर रही हो?"

अनु ने कहा- "मैंने ब्रेकफस्ट का आर्डर दिया हुआ है। आप जल्दी से तैयार हो जाओ..."

मैंने रूम में देखा तो ऋतु नजर नहीं आ रही थी। मैंने पूछा- "ऋतु कहां है?"

अनु बोली- "वो नहा रही है."

मैंने अनु को आँख मारते हुए कहा- "क्या बात है जान, आज बड़ी प्यारी लग रही हो?"

अनु ने शांत हुए कहा- "थैक्स."

इतने में ऋतु नहाकर आ गई।

मैंने उसको कहा. ऋतु अब कैसा लग रहा है?

ऋतु ने कहा- "मैं ठीक हूँ.."

मुझे एहसास हो गया की उसका मूड सही नहीं है। मैंने कुछ नहीं कहा और फिर मैं बाथरूम में चला गया। मैं तैयार होकर बाहर आया तो ऋतु नाश्ता कर रही थी। अनु ऐसे ही बैठी थी।

मैंने अनु से कहा- "तुम नाश्ता नहीं कर रही, किसका इंतजार कर रही हो?"

अनु मुझे देखकर बोली- "आपका.."

मैं अनु के पास जाकर बैठ गया। अनु ने मुझे नाश्ता सर्व किया। फिर वो भी मेरे साथ नाश्ता करने लगी। हम लोगों ने जब नाश्ता कर लिया तब मैंने ऋतु से कहा- "अभी चलें या थोड़ी देर रूक कर चलना है?"

ऋतु बोली- "अब यहां रुकने का मूड नहीं है. जल्दी से चलिए."
 
हम सब कार में बैठ गये। मैंने कार स्टार्ट की और चल दिए। अनु मेरे साथ ही बैठी थी। थोड़ी देर बाद मैंने ऋतु से कहा- "क्या बात है तुम कुछ अपसेट लग रही हो?"

उसने कोई जवाब नहीं दिया और बाहर देखती रही। मैंने अनु की तरफ देखा। उसने मुझे इशारा किया की में इस

बारे में कोई बात ना करूं। मैं फिर कुछ नहीं बोला।

थोड़ी देर बाद मैंने चुप्पी को तोड़ते हुए अनु से कहा- "कैसा लगा यहां आकर?"

अनु ने मुश्कुराकर कहा- "मुझे तो बड़ा मजा आया। मेरा तो मन ही नहीं कर रहा था वहां से आने का.."

मैंने मिरर में ऋतु को देखा तो उसने बुरा सा मुँह बनाया हुआ था। जैसे उसको अनु की बात अच्छी ना लगी हो। मैं उसको ऐसा करते देख कर कुछ बोला नहीं। मैं अनु से ही बातें करता रहा। हम दोनों आपस में ही मस्त हो गये थे।

काफी देर बाद ऋतु ने कहा- "मुझे टायलेट जाना है। प्लीज कहीं कार रोक देना..."

मैंने कहा- "ओके... कोई सही जगह आने दो रोकता है."

थोड़ी दर चलने के बाद एक ढाबा नजर आया। मैंने वहां कार रोक दी और ऋतु से कहा- "जाओ..."

ऋतु कार से निकालकर जोर से दरवाजा बंद करते हुए चली गई।

अनु ने मेरी तरफ देखते हुए कहा- "देखा आपने?"

मैने कहा. "ऋतु का मूड़ क्यों अपसेट है?"

अनु ने कहा- "इसका कल रात का गुस्सा है."

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मैंने कहा- "चलो कोई बात नहीं। घर जाकर इसका मूड अपने आप ठीक हो जाएगा.."

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अनु बोली- "आपको लगता है पर मुझे नहीं। ये तो अब घर जाकर भी मुझे उल्टा सीधा बोलेगी."

मैंने कहा- "अगर ऋतु कुछ कहे तो तुम इसकी बात का बुरा नहीं मानना। मुझे बता देना। मैं उसको समझा दूंगा अपने तरीके से..."

अनु बोली- "मैं आपको कैसे बताऊँगी? मेरे पास तो अपना सेल भी नहीं है। और ऋतु ने मुझे अपने सेल से बात ना करने दी तो?"

मैंने अनु को कहा- "तुम्हें सेल मैं अभी दे दूँगा?"

अनु बोली- "पर कैसे? नहीं-नहीं रहने दीजिए, ऋतु को और गुस्सा आएगा.."

मैंने अनु को कहा- "उसकी चिता तुम मत करो.."

इतने में ऋतु आ गई। कार में बैठकर बोली- "अब चलिए, यहां भी रुकने का इरादा है क्या?"

मैंने कहा- "तुम्हारे लिए ही तो सका था.." मैंने रास्ते में ही अपने आफिस फोन कर दिया। मैंने अपने स्टाफ का एक लड़का है उसको कहा- "सुनो नीरज, तम आफिस के पास जो मोबाइल स्टोर है वहां चले जाना और मेरी बात करवा देना..."
 
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