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Adultery कीमत वसूल

मेरे अंदर की आग भड़क चुकी थी। जिसकी वजह से मुझे शोभा भी अपने लण्ड की खराक नजर आ रही थी। मैंने शाभा के पास जाकर उसकी चूचियों पर हाथ रख दिया। शोभा को शायद इस बात की उम्मीद नहीं थी।

शोभा ठिठक कर पीछे हट गई और बोली- "आप ये क्या कर रहे हो?"

मैंने उसकी चूचयों को कसकर मसलते हुए कहा- "आज तू मेरी प्यास बुझा दे... और मैंने शाभा को अपनी बाहाँ में भर लिया।

शोभा ने खुद को छुड़ाते हुए कहा- "नहीं नहीं ये गलत है... मैं आपको ऐसा नहीं करने दूंगी.."

मैंने उसको अपनी बाहों में फिर से जकड़ते हुए कहा- "शोभा में इस बढ़त तुम्हारी कोई बात नहीं सुनँगा। मेरे लण्ड को इस वक़्त चूत की भूख है। तुम मेरी भावनाओं को समझा और मेरी भूख को शांत कर दो..."

शोभा बोली- "प्लीज... आप मुझे इस काम के लिए मजबूर मत करिए। मैं कैसे भी करके कल तक ऋतु को बुलवा लँगी..."

मैंने कहा- "मैं कल तक रुक नहीं सकता..."

शोभा सोच में पड़ गई फिर बोली- "मैं शायद आपकी बात मान भी जाती, पर मैं मजबूर हैं..."

मैंने उसको घूरते हुए कहा- "क्या मजबूरी है?"

शोभा बोली- "मेरा आज तीसरा दिन है। मेरा मासिक चल रहा है। अगर आप मुझे चोदना ही चाहते हैं तो आप कल मेरे साथ जो मर्जी कर लेना.."

मुझे उसकी बात का यकीन नहीं हो रहा था। मैंने उसकी चूत पर हाथ लगाकर देखा तो मेरे हाथ को एहसास हआ की उसकी चत पैड से टकी हैं। मैं समझ गया की वो सच बोल रही है। मैंने उसको कहा- "चलो मैं तुमको कल चोदूँगा। पर अभी मेरी प्यास कैसे बुझेगी?"

शोभा बोली- "मैं आपका लण्ड चूसकर आपको शांत कर देती हैं.."

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मैंने मन ही मन सोचा- "चलो खाना नहीं मिला, नाश्ता ही सही..."

में पलंग पर लेट गया और अपनी दोनों टांगों के बीच में शाभा को बैठने को कहा। शोभा मेरी दोनों टांगों के बीच में बैठ गई। उसने मेरे लौड़े को अपने हाथों से सहलाना शुरू कर दिया।

मैंने शोभा को कहा- "तुम अपनी मॅक्सी उत्तार दो, मुझे तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां देखनी हैं."

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शोभा ने अपनी मैक्सी उतार दी। अब वो मेरे सामने सिर्फ पैंटी में थी। उसने मेरे लण्ड को अपने मैंड में भर लिया और चूसना शुरू कार दिया। शोभा खेली खाई औरत थी। उसको सब पता था की कैसे एक मर्द को खुश किया जाता है। उसने बड़े ही मस्त तरीके से मेरे लौड़े की चुसाई करनी शुरू कर दी। फिर थोड़ी देर बाद उसने मेरे लण्ड को अपनी बड़ी-बड़ी चूचियों में रखकर दबा लिया, और अपनी चूचियों से मेरे लण्ड की मालिश करने लगी।

मैंने ऋतु के साथ ऐसा कभी नहीं किया था। मुझे मजा आने लगा। कुछ देर बाद मुझे लगने लगा की मैं अब झड़ने वाला हूँ। मैंने शोभा से कहा- "अब रुका नहीं जा रहा है..."

शोभा ने ये सुनकर मेरा लौड़ा अपने मह में फिर से भर लिया, और अपना होंठों में कसकर दबा लिया। मैंने एक जोर का झटका उसके मुँह लगाते हुए उसके मुँह को अपने माल से भर दिया। शोभा ने मेरे माल को पूँट भरते हए सारा माल अपने गले से नीचे उतार लिया।

मैं अब बिल्कुल शांत हो गया था। मैंने शोभा से कहा- "तुमने मुझे खुश कर दिया.."

शोभा ने ये सुनकर बड़ी जालिम अदा से मैंह बनाकर कहा- "आपका काम तो निकल गया। हम तो प्यासे ही रह गये..."

मैंने उसके निप्पल को कस के मसलते हुए कहा- "मैं क्या कर सकता हूँ? तेरी रेड लाइन हो रही है.."

शोभा बोली- "आज ही तो है, कल तक में माहवारी से निपट जाऊँगी..."

मैंने कहा- इसका मतलब तम कल मेरे से चदबाने की सोच रही हो?

शोभा के चेहरा पर चमक आ आ गई उसने कहा- "हाँ.."

मैंने उसको कहा- "फिर ठीक है। कल सनडे है तुम मेरे घर आ जाना। वहीं तुम्हारी प्यास बुझा दूँगा.."
 
शोभा बोली- "हाँ यही ठीक रहेगा। मैं कल आ जाऊँगी..."

में वहां से आ गया। मुझे रात भर शोभा की चूत के ख्वाब आते रहें। मैं उसकी चूत को देख नहीं पाया था। इसलिए भी मेरे मन में उसकी चत देखने की उत्सुकता थी। अगले दिन सुबह ठीक 11:00 बजे शोभा का फोन आ गया।

मैंने उसको कहा- "तुम 12:00 बजे तक आ जाना..."

फिर मैंने अपने रूम में सीसीटीवी लगाने की जगह देखी। मैं शोभा की चुदाई लीला की वीडियो बनाना चाहता था। मैंने बेड के ठीक ऊपर कैमरा फिट कर दिया और शोभा का इंतजार करने लगा। शोभा ठीक 12:00 बजे आ गई। जब मैंने उसको देखा तो देखता ही रह गया। बया गजब की सुंदर लग रही थी वो।

शोभा ने ब्लैक कलर की साड़ी पहनी थी लो-कट बैंकलेष ब्लाउज उसकी चूचियों को आधा भी टक नहीं पा रहा था। उसने बड़ा मस्त सा हेयर स्टाइल बनाया हुआ था। जैसे ही वो मेरे पास आई बड़ी मादक मी खुशबू मेरी । सांसों में समा गई। मैं समझ गया की आज में साली परे मह में है। वैसे भी पीरियड के बाद औरत की सेक्स की भूख बढ़ जाती है।

मैंने उसको कहा- "बैठो.... फिर मैंने उसको कहा- "थोड़ी सी बिगर चलेंगी?'

शोभा बोली- "हाँ चलेंगी."

मैं मन में सोचने लगा की इसको समझने में मैंने बड़ी देर करी है। मैं तो बड़ी कमीनी है। मैंने ठंडी बियर दो ग्लास में डाली और एक ग्लास शोभा को पकड़ा दिया। उसने उल्लास को मैंह से लगाया और एक ही सांस में आधा पी गई। मैं उसको देखता ही रहा।

फिर मैंने उससे कहा- "कुछ नमकीन तो ले लो.." और मैंने काज का पैकेट खोलकर प्लेट में डाल दिया।

दो-तीन काजू खाने के बाद शोभा ने बाकी की बियर भी गले में उड़ेल ली। मैंने एक बियर और खोलकर उसका ग्लास भर दिया। फिर मैंने शोभा से उसके पति के बारे में बात छेड़ दी। शोभा को अब तक शरुर आने लगा था। वो बिंदास होकर बोल रही थी।

मैंने उसको कहा- "तुम अपने पति के साथ सेक्स कितने दिन में करती हो?"

शोभा ने ये सुनकर बुरा सा मैंह बनाकर कहा- "सेक्स तो उसने तब भी नहीं किया, जब वो जवान था। अब तो उसका खड़ा ही नहीं होता..."

मैं सुनकर थोड़ा और मजा लेते हुए बोला- "फिर तुम अपनी प्यास कैसे बुझाती हो?"

उसने कहा- "मैं अपनी प्यास को दबा-दबाकर अपने अरमानों का गला घोंट रही हैं। कल तमने जो करा उससे मेरे अंदर की औरत फिर से जाग गई है..

मैंने उसको कहा- "तुमने कितने टाइम से सेक्स नहीं किया?"

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शोभा बोली- "अब तो याद ही नहीं.."

मैंने कहा- "फिर भी लास्ट टाइम की कोई याद हो?"

उसने कहा- "लगभग दो-तीन साल पहले..."

मने हैरान हाते हुए कहा- "फिर तुम कैसी रह लेती हा?"

उसने कहा- "मैं जब ज्यादा ही गरम हो जाती हैं तो अपनी उंगली से अपनी चूत की प्यास बुझा लेती हैं। पावो हमेशा अधूरी ही रहती है..."

मैंने कहा- "तुमने कोई सेक्स दवाय इस्तेमाल नहीं किया?"

उसने कहा- घर में दो-दो जवान बेटियां हैं, और इतना छोटा सा घर है। किसी के हाथ में कुछ आ गया तो?

ना बाबा ना... मैं इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकती.'
 
मैंने कहा- "तुमने कोई सेक्स दवाय इस्तेमाल नहीं किया?"

उसने कहा- घर में दो-दो जवान बेटियां हैं, और इतना छोटा सा घर है। किसी के हाथ में कुछ आ गया तो?

ना बाबा ना... मैं इतना बड़ा रिस्क नहीं ले सकती.'

मैं हँसने लगा। मैंने उसको कहा- "मैं जब ऋतु को तुम्हारे घर में चोद रहा था, तो तुम साथ वाले रूम में सब सुन रही थी?"

शोभा ने कहा- हौं, मझे सब पता चल रहा था। ऋतु की चीखों को सुनकर मेरे मन में कुछ-कुछ होने लगा था। में इतनी गरम हो गई थी की मैं भी अपनी चूत में उंगली डालकर अपना पानी निकाल रही थी।

मैंने कहा- तुम कल तो मुझे मना कर रही थी।

शोभा ने कहा- आपकी बात सुनकर मेरा मन तो ललचा गया था पर मैं इतना जल्दी अगर मान जाती तो आपको भी लगता की में पहले से ही ऐसा सोच रही हैं।

मैंने कहा- "हम्म्म्म... अपना ग्लास खाली करो। एक-एक ग्लास और पीते हैं.."

शोभा बोली- "नहीं नहीं बस और नहीं। मैं इससे ज्यादा नहीं पी सकती..."

मैंने कहा- तुमको शाम तक यहा रहना है। एक ग्लास और पी लो तो मूड बना रहेगा।

शोभा बोली- हाँ ये भी ठीक है।

मैंने उसका ग्लास फिर से भर दिया।

शोभा बोली- "मैंने कल जब आपका लण्ड देखा तब से ही मेरा मन आपसे चुदवाने को कर रहा है। पर कल मैं इस लायक नहीं थी, वरना कल ही आपका लौड़ा अपनी चूत में घुसवा लेती." उसको इस अंदाज में बात करते देखकर मैं समझ गया अब ये पूरी तरह से फिट हो गई है।

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मैंने उसको कहा- "बाकी खतम करो फिर मजा लेटते हैं..."

शोभा ने झटके से उलास खाली किया और खड़ी हो गई। बड़ी मादक सी अंगड़ाई लेते हुए बोली- "मजा आ गया..' उसने जब अपने हाथ उठाए तो उसकी गोरी गोरी चिकनी कौंख देखकर मेरे लण्ड में तनाव बढ़ने लगा।

मैंने उसको पूज- "तुम काँखें हमेशा शेब करती हो या आज ही करके आई हो?"

शोभा ने कहा- "मैं वैसे तो कभी कभार ही करती हैं। पर आज इतना बड़ा दिन है मेरे लिए तो आज तो मैं पूरी तरह से खुद को तैयार करके आई है.."

मैंने हँसते हुए कहा- "अपनी चूत को भी तैयार किया है?"

उसने कहा- हाँ वहां भी तैयार है।

मैंने कहा- जरा मेरे पास आकर मुझे अपनी चत के दर्शन तो करवाओ।

शोभा मेरे पास मस्त चाल से चलती हुई आकर खड़ी हो गई। मैंने उसकी साड़ी में हाथ डाला तो सीधा उसकी चूत पर जाकर रुका।

मैंने उसको कहा- "तुम पैंटी नहीं पहनकर आई?"

शोभा ने शरारत से कहा- "पैंटी उतरवाने आई है. पहनकर क्या करती?"

मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। शोभा में मस्ती से भरी हुई सिसकी ली। मैनें उंगली को 4-5 बार अंदर-बाहर किया तो उसकी चूत में पानी छोड़ दिया। मैं समझ गया की इसकी चत अब लौड़ा माँग रही है। पर मैं तो उसको तड़पा-तड़पाकर चोदना चाहता था, मैंने उसकी साड़ी को खींचकर उतारना शुरू कर दिया, तो वो अपनी जगह खड़ी-खड़ी घूम गई। शोभा अब पेटीकोट ब्लाउज में खड़ी थी। उसका गोरा जिम मेरी आँखों के आगे था। उसकी बाड़ी सच में जवान लड़कियों जैसे थी। कहीं में टीलापन नहीं था।
 
मैंने उसको कहा- "मेरा मूड अभी पूरी तरह से नहीं बना। पहले मेरा मूड बनाओ तब तुमको चुदवाने में मजा आएगा..."

शोभा ने मुझे सवालिया नजर से देखा, और कहा- "आपका मह कैसे बनेगा? आप खुद बता दीजिए.."

मैंने उसको कहा- "तुम बैंड पर खड़ी हो जाओ, और अपने कपड़ों को एक-एक करके उतारा। मुझे अपनी अदाओं से दीवाना बनाओ, मुझे तुम्हारी जो अदा सबसे मस्त लगेगी मैं अपना एक कपड़ा उतार दूँगा। जब तुम मुझे पूरा नंगा कर दोगी, तब मैं तुम्हें चोदूंगा। ये एक खेल है खेलागी मेरे साथ? बोलो मंजूर है?"

शोभा मस्ती में डूबी हुई बोली- "मंजूर है.." फिर शोभा पलंग पर खड़ी हो गई।

मैंने म्यूजिक ओन कर दिया और शोभा बेड पर खड़ी होकर दो मिनट तक तो म्यूजिक के साथ अपने जिएम को हिलती रही। फिर उसने अपने ब्लाउज के हक को एक-एक करके खोलना शुरू कर दिया। फिर उसने अपने ब्लाउज को उतारकर फेंक दिया। मैं उसके हर आक्सन को बड़े ध्यान से देख रहा था, और मन ही मन हँस भी रहा था की इसकी हर हरकत कामुक हो रही है। फिर शोभा ने अपनी ब्रा को खोल दिया तो उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां उसके जिश्म के साथ हिलने लगी। मुझे उसकी ये अदा पसंद आई तो मैंने अपनी शर्ट उतार दी। ये देखकर शोभा को जोश आ गया। उसने अपना पेटीकोट अपनी जांघों तक उठाया।

मैं उसकी गोरी गोरी चिकनी जांघं देखकर मदहोश हो गया। फिर शोभा ने मेरी तरफ अपनी गाण्ड कर दी और अपने पेटीकोट को अपनी गाण्ड तक उठा दिया। उसके गोरे-गोरे सेब की तरह के चतड़ मस्त लग रहे थे। शोभा अपनी गाण्ड को म्यूजिक के साथ गोल-गोल करके किसी डान्सर की तरह घुमाने लगी। मुझे उसकी ये अदा और ज्यादा पसंद आई, तो मैंने अपनी जीन्स उतार दी।

शोभा ने जब मेरी तरफ मुँह घुमाया तो मैं सिर्फ अपने जोक्की में था। शोभा को लगा की उसकी मेहनत सफल हो गई। अब शोभा पूरे जोश में आ गई थी। उसने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और पूरी नंगी होकर मेरे सामने अपने जिस्म को म्यूजिक के साथ थिरकाने लगी। फिर उसने अपना हाथ अपनी चूत पर रख दिया, और अपनी चूत को सहलाने लगी। शोभा में मेरी तरफ देखा।

मैंने कहा- "थोड़ा सा और..."

अब शोभा बेड पर अपनी दोनों जांघों को फैलाकर बैठ गई, और अपनी उंगली को अपनी चूत में डालकर बड़ी सेक्सी आवाज में- "अहह... आआआ.. आहह..." करने लगी।

उसकी इस अदा पर मैंने अपना जोक्की भी उतार दिया। अब मैं बिल्कुल नंगा था। मेरे ताने हए लौड़े को देखकर शोभा की चूत मचलने लगी।

शोभा ने अपनी बाहों को फैलाकर कहा- "मेरे राजा अब और मत तड़पाओ, मेरी चत में अपना लौड़ा डाल दो.."
 
में सुनकर मुझसे रहा नहीं गया। मैं शोभा की दोनों जांघों के बीच में बैठ गया और अपना लौड़ा उसकी चूत में घुसा दिया। मेरे लौड़े को शोभा की चूत में जाने में कोई अड़चन नहीं हुई। शोभा की चूत का अगर भोसड़ा नहीं बना था तो टाइट भी नहीं थी। मेरा लौड़ा शोभा की चूत में बड़े आराम से जा रहा था। मैं अपना पूरा लौड़ा शोभा की चूत में अंदर-बाहर कर रहा था। फिर शोभा ने जब अपनी गाण्ड उठाकर मेरे हर शाट का जवाब देना शुरन किया तब मैंने शोभा की गाण्ड के नीचे तकिया लगा दिया।

अब शोभा की चूत मेरे लौड़े के बिल्कुल पास हो गई। मैं उसकी चूत में अपना लौड़ा पूरा निकालकर धक्का मार रहा था। मेरा इंच का लौड़ा जब एक ही झटके में शोभा की चत में जाता था तो शोभा की सिसकी मिकलती थी। अब दोनों तरफ से आग लगी हुई थी। पर चुदाई के खेल में हमेशा बलिदान लण्ड को ही देना पड़ता है। और फिर शोभा की चूत में मेरा माल झड़ गया। इतनी मेहनत के बाद 5 मिनट का आराम तो बनता है। मैं शोभा की चूचियों पर अपना मुँह रखकर अपनी सांसों को कंट्रोल करने लगा। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों बेड पर नंगे पड़े थे एक दूसरे के साथ चिपके हुए।

मैंने शोभा से पूछा- "मजा आया?"

शोभा ने मेरे लण्ड को पकड़कर बड़े प्यार से कहा- "मैं तो अब इसकी दीवानी बन गई हैं। सच कहूँ तो में अपनी लाइफ में आज तक इतना संतुष्ट कभी नहीं हुई। आज आपने मुझे वो सुख दिया है जिसका मैं आज तक कभी नहीं ले पाई। काश आप मेरी लाइफ में पहले से होते.."

में उसकी सब बातों को सुन रहा था मैं कुछ बोला नहीं।

फिर मैंने शोभा से कहा- "मुझे सस आया है.."

शोभा ने कहा- "मुझे भी."

मैं हँसते हुए बोला- "चलो दोनों करके आते हैं."

फिर हम दोनों टायलेट में गये वहां जाकर शोभा शीट पर बैठ गई और बड़ी तेज आवाज में शुउउउ उउउ करके मम करने लगी।

मैंने उसको कहा- "तुम सूसू करते टाइम कितना शोर कर रही हो?"

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शोभा ने कहा- "आपको पता नहीं हम लोगों की मी ही आवाज होती है..."

फिर मैंने शोभा से कहा- "मेरा लौड़ा अपने हाथ में लेकर सूसू करवाओ.."

शोभा ने मेरे लण्ड को बड़े प्यार से अपने हाथों में पकड़ा और बोली- "करिए.

मैंने सूस करना शुरू कर दिया। शोभा मेरे लौड़े को बीच-बीच में कस के दबा देती थी, जिससे मेरा सस रुक जाता था। फिर एकदम से छोड़ देती जिसमें धार बनकर मूस आता था। मैं शोभा की इस हरकत को देख रहा था की साली कितनी कमीनी है, मुझे हर तरीके से मजा दे रही है। हम दोनों बेडरूम में आ गये।

मैंने शोभा से कहा- "थोड़ी-थोड़ी बियर और पीते हैं."
 
मैंने सूस करना शुरू कर दिया। शोभा मेरे लौड़े को बीच-बीच में कस के दबा देती थी, जिससे मेरा सस रुक जाता था। फिर एकदम से छोड़ देती जिसमें धार बनकर मूस आता था। मैं शोभा की इस हरकत को देख रहा था की साली कितनी कमीनी है, मुझे हर तरीके से मजा दे रही है। हम दोनों बेडरूम में आ गये।

मैंने शोभा से कहा- "थोड़ी-थोड़ी बियर और पीते हैं."

शोभा ने हाँ कर दी। मैंने फ़िज़ से बिगर निकाली और उल्लास में डालकर शोभा को दी, और बोतल अपने मुँह से लगा ली। शोभा मुझे इस तरह सहयोग देगी मैं सोच भी नहीं सकता था।

मैंने शोभा को कहा- "में अब तुम्हारी गाण्ड का मजा लेना चाहता है."

शोभा बोली- "इसका मतलब आपको मेरी चूत में मजा नहीं आया?"

मैंने कहा- "ऐसा कुछ नहीं है। मैं तो बस तुम्हारी गाण्ड का दीवाना है. इसलिए गाण्ड मारने को कह रहा हूँ..."

शोभा बोली- "आपका जो मन करें आप वा करो..."

मैंने कहा- "गाण्ड में कोई क्रीम लगानी है क्या?"

शोभा ने कहा- मुझे कोई जरूरत नहीं है। आप मुझे घोड़ी बनाकर मेरी चूत को चोदो। जब लण्ड मेरी चूत में गीला हो जाए तो मेरी गाण्ड में डाल देना."

मुझे आइडिया सही लगा। मैंने शोभा को घोड़ी बना दिया और उसकी चूत में लण्ड पेल दिया। थोड़ी देर में मेरा लण्ड उसकी चूत के पानी से भीग गया था। मैंने उसकी चूत से अपने लण्ड को निकालकर उसकी गाण्ड में पेल दिया। मैंने शोभा की गाण्ड में जब लण्ड पैला तब उसने हल्की सी चीख मारी, पर उसके बाद वो अपनी गाण्ड को खुद आगे-पीछे करने लगी। मुझे शोभा की मस्त गाण्ड का पूरा मजा आने लगा। मेरे लौड़े को शोभा की गाण्ड में जन्नत नजर आ रही थी। मेरी हर चोट पर पट-पट की आवाज आ रही थी। फिर आखीर में जो होता है वही हआ। मैं शोभा की गाण्ड में अपना लौड़ा झाड़ कर लंबी सांसें लेने लगा।

थोड़ी देर बाद शोभा के संल पर ऋतु का फोन आया की मम्मी हम लोग आ रहे हैं रास्ते में हैं एक घंटे तक घर पहुँच जायेंगे।

सुनकर शोभा बोली- "वा लोग आ रहे हैं, मुझे उनके आने से पहले घर पहुँचना होगा..."

मैं भी अब तक चुका था। मैंने शोभा को कहा- "मैं तुमको घर छोड़ आता है.. मैं अपनी कार से शोभा को उसके घर छोड़ने जा रहा था।

रास्ते में शोभा ने कहा- "आज मुझे वो सुख मिला है जिस सुख की हर औरत की तमन्ना होती है। मुझे अब इर लग रहा है की ऋतु के आने के बाद आप कभी ये मोका मुझे दोगे या नहीं?"

मैंने शोभा को कहा. "मैं तुम्हारी प्यास को जब तुम कहोगी बुझाऊँगा। अगर तुम मेरा साथ दोगी तो मैं भी तुम्हारा कभी साथ नहीं छोड़ेगा.." फिर शोभा का घर आ गया।

मैंने उसको बाड़ बोलकर कार बैंक कर दी। शोभा को छोड़कर जब मैं वापिस घर आया तो आते ही सबसे पहले मैंने कैमरे की कार्डि चेक करी, तो देखा क्लियर थी। मैंने वो कार्डि एक सी.डी. में सेव कर के रख दी और फिर मुझे नींद में अपनी बाहों में भर लिया।
 
अगले दिन मैं आफिस थोड़ा देर से गया था। अत पहले से ही आई हुई थी। मझे देखते ही वो मेरे साथ-साथ मेरे केबिन में आ गई। उसने मुझे कुछ बोलने का मौका ही नहीं दिया। एकदम से मेरे से चिपक कर मेरे होंठों पर अपने होंठों रख दिए, 5 मिनट तक हम ऐसे ही एक दूसरे के साथ चिपके रहे।

फिर ऋतु रंधे गले से बोली- "आपसे 4 दिन दूर रहकर मुझे ऐसा लग रहा है जैसे की 4 साल बीत गये हो.."

मैंने उसको कहा- "मैंने भी तुमको बहुत मिस किया..."

ऋतु अपना मुँह फुलाकर बोली- "और तो और मेरे सेल में भी मुझे धोखा दिया। वहां जाते ही खराब हो गया। मैं आपसे बात भी नहीं कर पाई..."

मैंने कहा- "चला अब जो होना था सा हो गया। फिलहाल तो तुम मेरे पास हो."

अत् ने मुँह बनाकर कहा- "अगर सेल खराब नहीं होता तो मैं आपको बहां की वीडियो बनाकर दिखाती.."

मैंने कहा- वहां कुछ खास था, जिसकी वीडियो मुझे दिखानी थी?

ऋतु बोली- "मैंने वहां खूब मस्ती करी, खूब डान्स किया..."

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मैंने ऋतु को चिटाते हुए कहा- "तुम्हें डान्स करना भी आता है?"

ऋतु ये सुनकर लाल होते हुए बोली- "अगर आपने मेरा डान्स देख लिया तो कहोगे की ऐसा डान्स किसी मूवी में भी नहीं देखा.."

मैंने कहा- अच्छाजी... अगर ऐसा है तो तुम उस फंक्सन की डी.वी.डी. मगवाओ। मैं देखकर ही बताऊँगा की तुम डान्स कैंसा करती हो?" फिर मैं बोला- "ऋतु तुम अब अपनी आँखों को बंद करो.."

ऋतु बोली- क्या?

मैंने कहा- करो तो सही।

ऋतु ने अपनी आँखों को हल्के से बंद किया।

मैंने कहा- "ऐसे नहीं सही से बंद करो..."

उसने कर ली।

मैंने एक पैकेट उसके हाथ में पकड़ा दिया और कहा- "अब अपनी आँखों को खोलो.."

ऋत् ने आँखें खाली और बोली- "इसमें क्या है?"

मैंने कहा- खोलकर देखो।

ऋतु में जल्दी से पैकेट खोला तो उसकी खुशी देखते ही बन रही थी। वो बोली- "सर, इतना मःगा मोबाइल मैंने कभी इस्तेमाल नहीं किया..."

मैंने कहा- "अब कर लो..."

ऋतु खुशी से भरी मेरे पास आकर मेरी गोद में बैठ गई, और मेरे गले में अपनी बाहों को डालकर बोली- "आप कितने स्वीट हो, मेरा कितना खयाल रखते हो..."

मैंने कहा- "मुझे जब पता चला की तुम्हारा मोबाइल खराब हो गया है। मैंने तभी साच लिया था की तुमको बदिया सा मोबाइल दगा। अब इसमें अपना सिम डालकर सबसे पहले अपनी दीदी को फोन करो और उस फंक्सन की डी.वी.डी. मैंगवाओ.."

ऋतु ने खुश होते हए अपना सिम मोबाइल में लगाया और अपनी दीदी को फोन किया। पहले तो उनकी खैर खबर ली फिर बोली- "दीदी फंक्सन की डी.वी.डी. आ गई?"

उधर से जवाब मिला- "हाँ आ गई."

ऋतु ने कहा- "दीदी आज ही उसकी कारिगर से भेज दो... फिर दो-चार इधर-उधर की बात करके ऋतु ने फोन काट दिया और मुझे देखकर बोली- "कल डी.बी.डी, आ जायेंगी तब पता चलेगा आपको."

मैने मुश्कुराकर कहा- "अगर तुमको मेरी बात का बुरा लगा है तो आई आम वेरी सारी..."
 
ऋतु ने कहा- "दीदी आज ही उसकी कारिगर से भेज दो... फिर दो-चार इधर-उधर की बात करके ऋतु ने फोन काट दिया और मुझे देखकर बोली- "कल डी.बी.डी, आ जायेंगी तब पता चलेगा आपको."

मैने मुश्कुराकर कहा- "अगर तुमको मेरी बात का बुरा लगा है तो आई आम वेरी सारी..."

अगले दिन आफिस में कॉरियर में एक पैकेट आया। पैकेट ऋतु के नाम था। वो समझ गई। अत पैकेट लेकर सीधा मेरे पास आई और बोली- "लीजिए, और इसका अभी देखिए.."

मैंने डी.वी.डी. अपने लप्पी में लगा दी। प्ले होतें ही ऋतु बोली- "इसको फारवई करिए, मैं आपको वो सीन दिखाती हैं, जिसमें मैं डान्स कर रही हैं."

मैंने डी.बी.डी, का फारवर्ड किया, जहां से ऋतु का डान्स शुरू हुआ वहां से देखनी शुरू की। सच में जैसा ऋतु ने कहा था, उसका डान्स उससे भी बढ़ कर था। उसकी बल खाती कमर गजब ढा रही थी। उसकी शिरकन किसी आर्टिस्ट जैसी थी।

फिर मेरा ध्यान किसी और पर गया जो ऋतु के साथ डान्स कर रही थी। मैंने दिल ही दिल में आऽऽ भरी। ऋतु के साथ डान्स करने वाली जो भी थी मैं उसको नहीं जानता था। पर उसका चेहरा ऋतु में मिल रहा था। वो थोड़ी मोटी थी पर थी बला की संदर। उसका डान्स उससे भी सेक्सी था। वो अपने चूतड़ों को ऐसे मटका रही थी की देखने वाला अपना आपा खो बैठे। वो अपनी चूचियों को हिला-हिलाकर डान्स कर रही थी। डान्स करते टाइम उसका पूरा जिम थिरक रहा था। फिगर भी बिल्कुल 36-30-36 था। इतना मस्त फिगर देखकर लण्ड में हंकार मारी। मैं उसको देखता ही रह गया। उसकी मोटी-मोटी जांघों को देखकर में पागल हो उठा।

मैंने ऋतु में कहा- "ये कौन है?"

ऋतु ने कहा- यही तो है अनु दीदी जिनके घर हम गये थे।

मेरे मुँह से सीटी बज उठी। मैंने कहा- "वाह... कितना सेक्सी डान्स कर रही हैं। कितनी सुंदर है तुम्हारी दीदी..."

ऋतु ने ये सुनकर मुझे घूरते हुए कहा- "आपके मन में क्या चल रहा है?"

मैंने कहा- "कुछ नहीं। मैं तो हुश्न का पुजारी हूँ। तारीफ के लायक जिसको भी देखता हूँ तारीफ कर देता हैं."

सुनकर ऋतु हसने लगी, और बोली- "आप भी ना..."

मैंने कहा- मैं भी ना क्या?

ऋतु बोली- कुछ नहीं

फिर मैंने ऋतु से कहा "मैं तुम्हारा डान्स देखकर मान गया की तुम सच में बहुत अच्छा डान्स करती हो... मैं इस डी.बी. डी. को अपनी लप्पी में सेव कर लेता हैं रात को ठीक से देखूगा.."
 
फिर मैंने ऋतु से कहा "मैं तुम्हारा डान्स देखकर मान गया की तुम सच में बहुत अच्छा डान्स करती हो... मैं इस डी.बी. डी. को अपनी लप्पी में सेव कर लेता हैं रात को ठीक से देखूगा.."

ऋतु बोली- "हाँ आप कर लीजिए.."

मैंने झट से डी.वी.डी. अपने लप्पी में सेव कर लिया और डी.वी.डी. ऋतु को देते हुए कहा- "चार दिन बाद आफिस आई हो, जरा जाकर देखा तो कितना काम पेंडिंग पड़ा है?"

ऋतु ने कहा- "हाँ, मैं अब जाकर सब पंडिंग काम देखती हूँ.."

मैंने ऋतु के जाते ही फिर से डी.वी.डी. प्ले कर दी। मेरा सारा ध्यान अब अन् को देखने में था। मेरे दिमाग में उसका भरा हआ बदन उसकी मोटी-मोटी जांघे और उसकी मस्त छातियां घूम रही थीं। मैं हर उस सीन को पाज करके देखने लगा जिसमें अन् थी। फिर एक सीन ऐसा देखा जिसमें वीडियो कवर करने वाले में पूरा हरामीपना किया था। वो सीन कुछ ऐसा था जिसमें अन सोफे पर बैठी थी, उसकी मोटी-मोटी जांचें फैली हुई थी, उसकी अंदर की जांघ क्लिपर दिख रही थी। अन में सफेद कलर की लेगिंग पहनी हुई थी, जिसमें उसकी जांघ की पूरी शंप बिलयर दिख रही थी। अन की मोटी-मोटी जांघों में उसकी चूत कैसी होगी? उसकी चूचियां कितनी मस्त होगी? मैं उसके बारे में सोचने लगा। मैंने डी.बी.डी. को कई बार देखा। शाम कब हो गई पता ही नहीं चला। अनु के जिम को देख-देखकर मेरे लण्ड का बुरा हाल हो गया था।

मैंने अत को बुलाया तो बो आते ही बोली- "आपके पास टाइम ही नहीं है मेरे लिए "

मैं समझ गया की वो गुस्से में है। मैंने उसको कहा- "ऐसा नहीं है। मैं काम में बिजी था.."

ऋतु मेरे पास आ गई उसने मेरी शर्ट के दो बटन खोल दिए और मेरे सीने के बालों से खेलने लगी। मैं समझ गया की ये 4 दिन से चुदी नहीं, इसलिये इसकी चूत में खुजली मच रही है, और उसकी चूत अब लण्ड माँग रही हैं। मैंने ऋतु को अपनी गोद में खींच लिया और किस करने लगा। अन् को देखकर में पहले से ही गरम हो गया था। ऋतु के जिम से खेलते हुए आग और बढ़ गई।

मैंने ऋतु को कहा- "चलो अपनी चुदाई वाली जगह पर..."

ऋतु समझ गई और साफ की और चल दी। मैंने जाते ही ऋतु की कमीज उतार दी। उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। मैं उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया झटकं से, तो उसकी सलवार उतर गई। में परे जोश में था। मैंने उसकी पैटी को नीचे खिसकाया। ऋतु में बाकी का काम खुद कर लिया। मैं ऋतु को सोफे पर लेकर पड़ गया।

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मैंने उसकी चूची को मुँह में लेते हुए कहा- "आज मेरा लण्ड तुम अपने हाथ से पकड़कर अपनी चूत पर रखो.."

ऋतु भी 4 दिन से चुदासी हो रही थी। उसने झट से मेरा लौड़ा अपने हाथ से पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया। मैंने जोर का झटका मारा और ऋतु की चूत में लण्ड घुसा दिया। लौड़ा पूरा डालकर धक्के मारने लगा। मैं ऋतु को चोदते समय अन की कल्पना कर रहा था। मैंने अपनी आँखों को बंद करके ये सोचा जैसे की मैं अन् को ही चोद रहा हूँ। मुझे ऋतु में अनु नजर आ रही थी।

ऋतु आज जल्दी ही झड़ गई। उसने झड़ते ही मुझे अपनी बाहों में कस लिया। मैं भी अब कहां रूकने वाला था। दो मिनट बाद मैंने भी अपना माल ऋतु की चूत में झाड़ दिया। ऋतु और में दोनों कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे।

फिर मैंने ऋतु से कहा, "मेरे लण्ड को साफ कर दो.."

ऋतु समझ गई की उसको क्या करना है। उसने अपनी पैंटी से मेरे लौड़े को पोंछकर साफ कर दिया। मैं अब उसकी पैंटी से ही लण्ड को साफ करवाता था। फिर ऋतु में अपने कपड़े पहने, और जाने के लिए तैयार हो गई।
 
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