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Adultery कीमत वसूल

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नीरज ने कहा- "सर, आप कब तक आएंगे..."

मैंने कहा- "मैं अब कल से ही आऊँगा..."

थोड़ी देर बाद मोबाइल स्टोर से मझे फोन आ गया। मैंने उसको समझा दिया। फिर मैंने नीरज से कहा- "यहां से मोबाइल लेकर तुम मेरे घर छोड़ देना.."

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हम जब अपनी सिटी में एंटर हए तब तक अंधेरा हो चुका था। मैंने कार अपने घर की तरफ मोड़ दी। जैसे ही

कार घर के बाहर रूकी वाचमैन ने गेट खोल दिया। मैं कार अंदर ले गया। वाचमैन ने मुझे एक पैकेंट दिया। मैं समझ गया उसमें मोबाइल होगा जो मैंने अनु के लिए मैंगवाया था।

मैंने वो पैकेट अपने हाथ में ही रखा और अनु से कहा- "तुम पहली बार मेरे घर आई हो, बाहर से ही जाओगी

तो मुझे अच्छा नहीं लगेगा। 5 मिनट के लिए ही सही अंदर चला..."

अनु भी मना नहीं कर सकी। मैंने घर में पहुँचते ही नौकर को कहा- "जरा बदिया सी 3 काफी बनाकर मेरे रूम में ले आओ..."

मैने अनु से कहा- "आओं रूम में बैठते हैं."

ऋतु को शायद अनु का मेरे घर आना अच्छा नहीं लगा। वो बोली- "सर आप हम लोगों को छोड़ते हए ही आ जाते। अब आप एक बार फिर से हमको छोड़ने जाओगे...'

मैंने कहा- "हीं तुम ठीक बोल रही हो। वैसे तो तुम्हारा घर पहले पड़ता। पर मुझे अनु को कुछ देना था इसलिए पहले यहां आना पड़ा..."

अनु को कुछ देने की बात सुनते ही ऋतु के मुँह पर 12:00 बज गयें। उसका चेहरा उसकी फीलिंग्स को शो करने लगा। पर मुझे उसकी कोई परवाह नहीं थी। मैं अनु को अपने रूम में ले गया। ऋतु भी हमारे साथ-साथ आ गई।

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रूम में जाते ही अनु बोली- "आपके रूम का इंटीरियर ता बहुत बदिया है। जिस होटेल में हम रुके थे उससे भी अच्छा लग रहा है."

मैने मुश्कुराकर अनु से कहा- "वा होटेल था, ये घर है..."

अनु मुस्कुरा उठी। अनु मेरे बाद पर फैले हए कपड़ों को देखकर बोली- "अरे यहां तो कपड़े फैले पड़े हैं। किसी ने सही नहीं किए.."

मैंने मुश्कुराते हए कहा "मेरे रूम में आने की किसी को पमिशन नहीं है। और मैं आज दो दिन बाद आया हैं। कौन करता"

अनु बोली- "क्यों नौकर तो है, वो नहीं कर सकता था?"

मैंने कहा- उसको भी पमिशन नहीं है।

अनु मुझे सवालिया नजर से देखती रही पर बोली कुछ नहीं।

फिर ऋतु में अनु को धीरे से कहा- "इस बारे में सर से कोई बात मत करो, उनको हर्ट होगा.."

मैंने ऋतु में कहा- "अरे नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। जो मेरी लाइफ की हकीकत है उसमें क्या छुपाना..."

मैंने अनु से कहा- "मेरी वाइफ अब मुझसे अलग रहती है। मैं आजकल अकेला रहता हूँ.."

अनु का मुँह खुला का खुला रह गया।

मैंने कहा- "शायद मुझमें कई खामियां है। जिनकी वजह से उसने ऐसा फैसला लिया होगा... फिर मैं हँसते हए बोला- "अरे यार मैं भी तुम लोगों को बोर कर रहा हूँ.." अ नके चेहरा के भाव सिर्फ मैंने देखे थे। वो क्या थे मैं आपको बाद में बताऊँगा।

इतने में लाकर काफी लेकर आ गया।

मैंने कहा- चलो काफी पीते हैं।

फिर हम सब काफी पीने लगे।

मैंने ऋतु में कहा- "तुम कल आफिस आओगी ना?"

ऋतु ने कहा- "क्यों नहीं आऊँगी?"

मैंने कहा- "शायद थकान हो इसलिए मैंने पूछा.."

ऋतु अनु को देखकर कमेंट की"जो थका होगा वो ही तो आराम करेगा। मैं कौन सा थकी है वहां जाकर?"

मैं समझ गया उसकी बात। मैंने अनु को देखकर प्यार से चुप रहने का इशारा किया। फिर कोई कुछ नहीं बोला। काफी पीने के बाद मैंने अनु से कहा- "ये लो.." और मैंने उसके हाथ में मोबाइल दिया और कहा- "अब जब मन करे मेरे से बात कर लेना..

अनु ने मोबाइल देखते हुए कहा- "ये तो बड़ा मैंहगा लग रहा है?"

मैंने हसते हुए कहा- "तुम्हारे आगे इसकी कोई कीमत नहीं.."

अनु फिर से शर्मा गई, और बोली- थैक्स।

मैंने कहा- "मुझे बार-बार थॅंक्स सुनने की आदत नहीं है.."

अनु हँसते हुए बोली- "भच्छा जी... मैं अब नहीं कहूँगी.."

ऋतु को अनु का मोबाइल देखकर बड़ी तकलीफ हो रही थी। उसने कहा- "सर, दीदी जब वापिस चली जाएंगी तो में ये वाला मोबाइल रख लैं?"

मैंने कहा- नहीं, बो अनु के पास ही रहेगा। तुमको लेना है तो मैं और दिलवा दूंगा।

अनु चौंक गई, और बोली- "अरे... मैं इसको वहां कैसे ले जाऊँगी? क्या कहँगी किसने दिया? इतना मैंहगा है नहीं तो बोल देती मम्मी ने दिया है." ‘

मैंने कहा- "तुम बोल देना गिफ्ट दिया है किसी ने."

अनु ने फिर कुछ नहीं कहा।

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मैंने कहा- "चलो तुम लोगों को छोड़ आता है... फिर मैं उन दोनों के साथ कार तक आ गया।
 
जाने से पहले अनु मेरे रूम को बड़ी बारीक निगाहों से देख रही थी। मैं जानता था वो क्या दूँद रही है? पर मैंने उसको कुछ कहा नहीं। मैं जब ऋतु के घर पहुँचा तो मैंने उन लोगों को बाहर ही छोड़ दिया। क्योंकी मैं अंदर जाने के मूड में नहीं था।

अनु और ऋतु में कहा भी आने को। पर मैंने मना कर दिया। मैं वापिस आने लगा। मैंने घर आते ही सबसे पहले दो पेंग लगाए। फिर अपना रुम ठीक किया और बेड पर लेट गया। शायद दो दिन की थकान का असर था की मुझे एकदम से नींद आ गई।

मैं सुबह उठा तो "00 बज चुके थे। मैंने अपने सेल को देखा। मुझे पूरी उम्मीद थी की अनु ने मुझे रात को फोन किया होगा। मैंने मोबाइल देखा तो उसमें कोई मिस काल नहीं थी। मैं फिर तैयार होने लगा। मैं आफिस पहचा तो परे स्टाफ ने पछा, "सर आप कहां गये थे? और ऋतु भी नहीं आई आपके पीछे.."

मैंने कहा- "मैं किसी काम से बाहर गया था." और मैंने अंजान बनते हुए कहा- "ऋतु क्यों नहीं आई? हो सकता है उसको कोई अजेंट काम पड़ गया हो या फिर उसकी तबीयत खराब हो.." कहते हुए मैं अपने केबिन में चला गया।

थोड़ी देर बाद ऋतु भी आ गईं। उसका मुँह अभी तक सूज़ा हुआ था। मेरे केबिन में आकर बोली- “जी. एम. मर..."

मैंने उसको कहा- "आओं ऋतु बैठो.."

अनु बैठ गईं।

मैंने उसको कहा- "मैं जब आफिस में आया तो सबने मुझे पूछा की मैं कहां गया था और तुम भी नहीं आई मेरे पीछे...

ऋतु बोली- "फिर आपने क्या कहा?"

मैंने कहा- "मैंने उनसे कहा है की मैं किसी काम से बाहर गया था। तुम सबको यही बोलना की तुम किसी काम की वजह से नहीं आई। ओके... समझ गई?"

ऋतु ने कहा- "ओके... बोल दूँगी। अब मैं जा सकती हैं।"

मैंने उसको प्यार से कहा- "ऋतु तुम अभी तक नाराज हो क्या?

ऋतु ने कहा- "मैं कौन होती है न न होने वाली? और अगर हो भी जाऊँ तो किसी को क्या फर्क पड़ेगा?"

मैं उठकर उसके पास गया और मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया फिर उसके होंठों पर होंठ रख दिए। पर उसने कुछ नहीं किया। नहीं तो पहले मैं जब उसके होंठों पर होंठ रखता था तो वो मेरे होंठों को चूसती थी। मैं समझ गया उसका मूड सही नहीं है। मैंने उसको कसकर अपनी बाहों में भर लिया, और अपनी गोदी में उसको उठा लिया।

मैंने कहा- "अच्छा अब मह सही कर लो। पलीजज... अनु तो तुम्हारी बहन है, और वो कौन सा यहां रुकने वाली है। कुछ दिन में चली जाएगी। तुम तो हमेशा मेरे पास रहोगी। है की नहीं?"

ऋतु की आँखों में आँस आ गये। उसने कहा "आपका मेरे से मन भर गया है तो बता दीजिए। अब आप मुझे प्यार नहीं करते। मैं आपको अच्छी नहीं लगती..."

मैंने उसको फिर से चूमते हुए कहा- "पागल हो क्या? जो ऐसी बातें सोच रही हो। और फिर तुमने खुद ही तो नैनीताल जाने का प्रोग्राम बनाया था। मुझे और अनु को साथ नैनीताल लेकर गई थी। फिर खुद ही गुस्सा हो रही हो..."
 
ऋतु आँसू पोंछते हुए बोली- "हाँ, मैंने ही तो गलती की है। मुझे इसकी सजा तो मिलनी ही है..."

मुझे अब बात समझ में आ गई की उसको सिर्फ अ से प्राब्लम है। मैंने उसको कहा- "ऋतु तुम मुझे समझ पाई हो या नहीं? मैं नहीं जानता पर इतना जरूर कहूगा की जो मेरे मन में होता है वही मेरी जुबान पर। मैं दोहरा जीवन नहीं जीता। और अगर फिर भी तुमको यही लगता है तो, मैं तुम्हें और ज्यादा कबिन्स नहीं कर सकता.." कहकर मैं अपनी चेयर पर जाकर बैठ गया।

ऋतु बहुत देर मह को झकाए बैठी रही फिर कहने लगी- "अच्छा... मैं आपकी बात समझ गई पर अब आप अनु से नहीं मिलोगे..."

में उसके मुँह से दीदी की जगह अनु सुनकर थोड़ा सा चौका। पर मैंने कुछ कहा नहीं। मैंने कहा- "तुम ऐसा क्यों कह रही हो?"

ऋतु बोली- "मुझे नहीं पता। पर अब अगर आप अनु से मिले तो..... और उसने अपनी बात को अधूरा छोड़ दिया।

मैं समझ गया वो मुझे अब एमोशनल बलेकमेल कर रही है। पर मैं उसको कुछ नहीं कहने चाहता था। मैंने उसको कहा- "ऋतु देखो, तुम मेरे ऊपर अपनी मर्जी थोप नहीं सकती। लेकिन मैं तुमसे ये वादा करता हूँ की जब तक अनु यहां है, वो मुझे अगर खुद मिलने आई तो मैं उसको जरग मिलेगा। पर यहां से जाने के बाद मैं उसको कभी मिलने नहीं जाऊँगा, ना ही मैं उसको फोन करेगा..."

मेरी बात सुनकर ऋतु को कुछ राहत मिली, फिर बोली- "अच्छा आप उसको नहीं कहोगे की वो आपको मिले, और आपको मुझे ये प्रामिस करना होगा की यहां से जाने के बाद अनु आपकी लाइफ से बाहर हो जाएगी..."

मैंने कहा- "आई प्रामिस."

फिर ऋतु कहने लगी- "वैसे भी जीज अब उसको यहां भेजेंगे कबर"

मैंने कहा- ऐसा क्यों?

ऋतु बोली- "वो में आपको नहीं बताऊँगी.."

मैंने कहा- "मुझं तुमने जो कहा, मैंने माना और तुम मुझसे छुपा रही हो..."

ऋतु बोली- "आप समझ नहीं रहे हो? वो उनका पर्सनल मामला है..."

मैंने कहा- "फिर भी क्या बात है पता तो चले?"

ऋतु ने कहा- "आप मेरे जीज से कभी नहीं मिले। अगर मिल लेतें तो आप खुद समझ जाते..."

मैंने कहा- "मुझे डीटेल में बताओ माजरा क्या है?"

ऋतु बोली- "अनु की शादी जब हई थी, तब जीज की जाब टेम्परारी थी, और उनका अपना घर भी नहीं था। पर हम लोगों से उन्होंने ये बात छुपाई थी.."

मैंने ऋतु की बात काटते हुए कहा- "पहले अनु के पति का नाम बताओ?"

ऋतु ने कहा- "मुमित.."

मैंने कहा- "हाँ अब बताओं सुमित के बारे में?"

ऋतु बोली- "फिर जब हम लोगों ने रिश्ता पक्का कर दिया, तो वो जल्दी शादी की जिद करने लगे। हमने जैसे तैसे इंतजाम किया..."

मैंने कहा- "हाँ, वो बात तो मुझे पता ही है."

ऋतु बोली- "शादी के बाद जब हमें जाब वाली बात पता चली तो पापा को बड़ा गुस्सा आया..."

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मैंने कहा- "सही बात है। कोई भी होता तो उसका गुस्सा आता..."

तब जीज ने कहा- "अपनी लड़की को ले जाओ, जब मेरी जाब पक्की हो जाएगी मेरे पास छोड़ जाना..."

अत- "अब लड़की को घर में कैसे बैठा लेते। हम कुछ कर नहीं सकते थे। मजबूरी में हमें अडजस्ट करना पड़ा."

मैंने कहा- "अब उनका अपना घर है या अब भी...."

ऋतु बोली- "नहीं अभी तक वा रेंट पर ही रहते हैं.."

मैंने कहा- "और जाब?"

ऋतु बोली. "वही तो है सारे फसाद की जड़."

मैंने कहा- "क्या मतलब वो कहीं और जाब कर रहा है?"

ऋतु बोली- "हाँ, 5-6 महीने से वो कहीं और जाब कर रहे हैं। अनु भी बीच में उनकी हेल्प के लिए घर पर बच्चों

को पढ़ाती थी। पर बेंबी होने की बजह से उनको अब ट्यशन छोड़नी पड़ी..."

मैंने कहा- फिर?

ऋतु बोली- "अब जीजू जहां जाब करते हैं, वहां उनकी सेलरी ₹9000 है। पहले तो जैसे-तैसे घर चल रहा था पर

अब बेबी हो गया है। अब मुश्किल हो रही है..."

मैंने कहा- "तुमने जो भी बात बताई है, उसका इस बात से क्या मतलब है की वो यहां नहीं आएगी? ये बात मुझे समझ में नहीं आई की वो यहां क्यों नहीं भेजेंगा?"

ऋतु बोली- "बता तो रही हूँ। अब जीजू ने ये कहा है की अनु भी जाब करेंगी, तब घर चलेगा.."

मैंने कहा- "हम्म्म्म .. इसलिए वो यहां नहीं आएगी। चलो अच्छा है उसका मन जाब में लग जाएगा, तो वैसे भी मुझे कहां याद रखेंगी?"

ऋतु बोली- "आप अनु को नहीं जानते, वो जाब नहीं करेंगी.."

मैंने कहा- "उसको क्या प्राब्लम है जाब करने में? सुमित की हेल्प ही तो करेगी वो जाब करके। सुमित सही तो कह रहा है। अनु पढ़ी लिखी है अगर जाब करेंगी तो उसकी हेल्प हो जाएगी..."

ऋतु बोली- "अनु भी मान गई है। पर जब तक बेबी छोटा है वो कैसे करें?"

मैंने पूछा- "सुमित के पैरेंट्स उसके साथ रहते हैं या अलग?"

ऋतु ने कहा- "उनके पैरेंट्स नहीं हैं..."

मैंने कहा- "फिर किसी ई-बोडिंग में बेबी को छोड़कर दोनों पति पत्नी जाब कर सकते हैं...

ऋतु बोली- "यही बात तो अनु नहीं मान रही। इसीलिए जीजू अनु को यहां छोड़कर गये थे की उसको हम सब समझाएं की बा जाब कर ले..."

मैंने कहा- फिर अनु मान गई?

ऋतु ने कहा- "हाँ, वो मन तो गई पर जीजू जहां उसका जाब के लिए कह रहे हैं, वो वहां नहीं करना चाहती..."

मैंने कहा- वहां कोई प्राब्लम है तो ना करे, कहीं और कर ले।

ऋतु बोली- यही तो है सारे प्राब्लम की जड़। जीजू उसको वहीं जाब करने के लिए जोर दे रहे हैं।

मैंने कहा- सुमित ने उसकी कोई वजह तो बताई होगी?
 
ऋतु ने कहा- "वो तो यही कह रहे थे की मैं जहां जाब लगवा रहा हूँ वहां सैलरी ज्यादा मिलेगी और जगह से।

मैंने कहा- फिर अनु को ये बात समझ में नहीं आ रही या कोई और बात है उसके मन में?

ऋतु बोली- "असल में जिस जगह जीजू कह रहे हैं, एक तो वो उनके घर में 15-20 किलोमीटर दूर है, दूसरा वो फैक्टरी बिल्कुल सूनसान जंगल में है, और अनु कह रही थी......"

मैंने कहा- "क्या कहा अनु ने?"

ऋतु बोली- "अनु ने बताया है की उस फैक्टरी में लेडीस का बड़ा बुरा हाल है। मतलब आप समझ सकते हो."

मैंने होंठों को गोल करके सीटी बजाई, और कहा- "सुमित को कोई शौक तो नहीं? जैसे शराब, जुआ या कोई

और?"

ऋतु बोली- "शराब का तो पता नहीं, पर वो मैच पर पैसे लगाते हैं। पता नहीं क्या होता है?"

मैंने कहा- "बॅटिंग करता है इसका मतलब? पर ये बताओं उसके पास पैसा कहां से आता है इसके लिए?"

ऋतु बोली- "दीदी का सारा जेंवर उन्होंने बेच दिया इसी काम में..."

मैंने कहा- "इस काम को करने वाला तो......."

ऋतु बोली- "आपकी बात मैं समझ गई."

मैंने ऋतु में कहा- "तुम अनु से कुछ मत कहना की तुमने मुझे ये सब बता दिया है। वरना उसको बुरा लगेगा..."

ऋतु बोली- "नहीं मैंने तो आपकी जिद्द की वजह से आपको बताया है। वरना में आपको बताती भी नहीं.."

मैंने उसको कहा- "अब तुम जरा आफिस का काम देखो। दो दिन में क्या हुआ पता नहीं। में भी देखता हैं, और शाम को जब मेरे पास आना तो मूड ठीक करके आना..."

ऋतु मुश्कुराकर बोली- "आपसे ज्यादा देर तक कोई भी नाराज नहीं रह सकता.."

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ऋतु मुश्कुराकर बोली- "आपसे ज्यादा देर तक कोई भी नाराज नहीं रह सकता.."

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मैंने कहा- "मजाक बना रही हो?"

ऋतु बोली- नहीं कसम से।

ऋतु के जाने के बाद मैं अनु के बारे में सोचने लगा। सच बात तो ये थी की मैं मन ही मन अनु को प्यार कर बैठा था। मुझे उसकी में तकलीफ अपनी लगने लगी। पर मैं उसकी तब तक कोई हेल्प नहीं कर सकता था जब तक वो मुझसे कुछ ना कहे। क्योंकी वो शादीशुदा है। अगर मैं उसको कोई हेल्प करता तो, हो सकता है इ उसके पति के मन में कोई गलत बात आती। मैं यही सब सोचता रहा। फिर मैंने अनु को फोन मिला दिया।

अनु ने हेलो कहा।

मैंने कहा- पहचाना?

अनु बोली- "आपको भल सकती है क्या? और आपका टाइम मिल गया?"

कहा- "ये बात तो मुझे तुमसे पूऊजी है?"

अनु बोली- “जब से आई हूँ आराम कर रही ह.."

मैंने कहा- "और आज बोर तो नहीं हो रही?"

अनु बोली- "आपके साथ तो नहीं हुई थी। पर अब होने लगी है.."

मैंने कहा- वापिस कब जाना है?

अनु बोली- अभी कुछ नहीं पता।

मैंने कहा- "मैं तुमसे मिल सकता हूँ?"

अनु बोली- कब?

मैंने कहा- "आज। अभी...

अनु ने कहा- कहा?

मैंने कहा- मेरे घर पर।

अनु बोली- मैं वहां किसके साथ आऊँगी, और मम्मी को क्या कहेंगी? ऋतु का भी मूड खराब है कल से।

मैंने कहा- ऋतु का मूड अब सही है, मैंने उसको समझा दिया है। तुम आने की चिंता नहीं करो। कार भेजता हूँ।

अनु बोली- पर मम्मी ?

मैंने कहा- उनसे कोई बहाना बना दो की किसी दोस्त से मिलने जा रही हैं।

अनु बोली- नहीं-नहीं, मैं यहां किसी को जानती ही नहीं। मैं क्या कहूँगी?

मैंने कहा- "चलो मैं तुमको एक आइडिया देता हैं। अगर फिट हो जाए तो मुझे बता देना.. अनु को मैंने

आइडिया बता दिया। मेरा आइडिया फिट बैठ गया।

अनु का फोन आया, "बताइए में कहां आऊँ?"

उसके घर के पास एक बाजार है, उसको वहां बुला लिया। मैंने कहा- "तुम वहां पहुँचो में आ रहा हैं."

मैं आफिस से ये कहकर निकला की मुझे कोई काम है, और मैं सीधा अनु के पास गया। अनु ने मुझे देख लिया। मैंने उसको अपनी कार में बैठाया और घर आ गया। मैंने अनु को अपने रूम में लेजाकर उसको अपनी बाहों में भर लिया और चूमते हुए कहा- "तुमसे दूर एक दिन भी नहीं रहा गया.."
 
अनु बोली- "बाब, मैं भी आपसे मिलने को तड़प रही हैं पर क्या करती?"

मैंने कहा- "तुम मुझे फोन तो कर देती.."

अनु बोली- "कल से ऋतु मुझे उल्टा सीधा बोल रही है। मैं कल जब से आई हूँ वो मुझे अकेला छोड़ ही नहीं रही थी। आपका फोन कैसे करती?"

मैंने कहा- कोई बात नहीं।

अनु ने कहा- "ऋतु आफिस में है?"

मैंने कहा- हाँ पर उसको पता नहीं की मैं यहां तुम्हारे पास हूँ

अनु मुश्कुराकर बोली- "आप बड़े चंट हो.."

मैंने कहा- "तुम्हारे लिए बनना पड़ा। तुम कल मेरे गम में जो देख रही थी वो में तुमको दिखा?"

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अनु झेंप गई।

मैंने कहा- "आओ मैं दिखता है.." कहकर मैं उसको दूसरे रूम में ले गया। वहां मैंने मेरी पत्नी सोनम की फोटो अनु को दिखाई।

अनु पिक देखकर देखती रही फिर बोली- "आपकी वाइफ तो बड़ी सुंदर है मेरे से भी कहीं ज्यादा..."

मैंने कहा- "हो... सुंदरता दो तरह की होती है- तन की, और मन की। दोनों सबके पास नहीं होती.."

अनु बोली- "इसका मतलब?"

मैंने कहा- "तुम्हें टाइम आने पर समझ में आ जाएगा। अब चलो मेरे राम में बैठकर बातें करते हैं.."

मैंने अनु से पूछा- "सुमित का फोन तो नहीं आया था?"

अनु मेरे मुँह में अपने पति का नाम सुनकर चौंक गई।

मैंने कहा- "मुझे उसका नाम ऋतु ने बताया है.."

अनु ने मुझे देखा और कहा- "ऋतु में और क्या बताया है?"

मैंने कहा- कुछ नहीं।

अनु ने कहा- बाब, आप मेरे से झठ मत बोलो।

मैंने कहा- सच में।

अनु बोली- आपको झठ बोलना नहीं आता। आपके चेहरा से पता लग रहा है।

मैंने कहा- हौं ऋतु ने थोड़ा बहुत बताया था, पर जाने दो। ये बताओ क्या लोगी चाय या काफी?

अनु बोली- पहले आप बताओ आपको क्या कहा ऋतु ने?
 
मैंने अनु को सब बता दिया क्योंकी अब उसको पता चल हो चुका था। मैंने अनु से कहा- "मुझे ये सब सुनकर बड़ी तकलीफ हुई है। तुम जो चाहो तो मैं तुम्हारी हेल्प करने को तैयार हैं। बोलो जितना कहो उतना"

अनु मेरे सीने से लगकर बोली- "बाबू आपने मेरे दर्द को समझा। मेरे लिए वही बहुत है। मुझे कुछ नहीं लेना.."

मैंने कहा- तुमको दुखी देखकर मुझे चैन नहीं आएगा।

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अनु ने कहा- "दुख तो मेरी किश्मत में लिखा है आप चाहकर भी उसको बदल नहीं सकते...' कहते हुए अनु की आँखों से मोती बहने लगे।

मैंने अनु के आँसू पोछते हुए कहा- "अनु अगर तुम ऐसे रोने लगी तो तुम जिंदगी की जंग को बिना लड़े ही हार जाओगी..' कहकर अनु को मैंने अपने गले से लगा लिया।

अनु अब मेरे सीने पर अपना मुँह रखकर सिसक रही थी।

मैंने अनु को पानी दिया और कहा- "पानी पियो.."

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अनु ने दो घूँट पिए।

फिर मैंने कहा- "मुझ पर विश्वास है?"

अनु ने कहा- "खुद से भी ज्यादा..." और मेरे से चिपक गईं।

मैंने कहा- फिर तुम वैसा ही करो जैसा मैं कहूँ।

अनु मुझं लाल-लाल आँखों से देखती हुई बोली- "बताइए?"

मैंने कहा- "सबसे पहले तो अपना मूड ठीक करो। लाइफ में दुख तो सबको आता है पर जो लोग उसका सामना करने से डरते हैं, वो अक्सर हार जाते हैं.."

अनु मुझे एकटक देखती ही रह गई।

फिर मैंने कहा- "तुम पहले ये बताओ जाब करोगी या नहीं?"

अनु ने कहा- " करूँगी पर....."

मैंने कहा- क्या पर?

अनु ने कहा- मैं कम से कम 3 महीने बाद जाब कलंगी, और वहां किसी भी कीमत पर नहीं करेंगी।

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मैंने अनु को कहा- "तुम्हें 3 महीने तक जाब करने के लिए कोई नहीं कहेगा। ये मेरी गारंटी है."

अनु मुझं हैरान होकर देखने लगी, और बोली- "आप क्या करोगे?"

मैंने कहा- "ये सब मुझ पर छोड़ दो। काई तुम्हें मजबूर नहीं करेगा.." फिर पूछा- "जहा सुमित जाब के लिए कह रहा है, वहां जो प्राब्लम है मुझे बताओ.."

अनु बोली- "क्या बताऊँ? बस इतना समझ लीजिए की वहां जाने के बाद......"

मैंने कहा- वहां ऐसा क्या है बताओ ना?

अनु ने कहा- मेरे घर के पास मेरी एक दोस्त है। उसने मुझे बताया था वहां के बारे में।

मैंने कहा- क्या बताया था?

अनु बोली- "उसने कहा था की वहां जो भी लड़की जाती है, सिर्फ रंडी बनकर बाहर निकलती है."

मैंने कहा- "हम्म्म्म... लेकिन जो बात तुमको पता है वो सुमित को पता ना हो ऐसा तो हो नहीं सकता."
 
अनु मुझे देखकर 5वांसी आवाज में बोली- "उसको सब पता है."

मैंने कहा- "ये बात जानते हए भी वो ऐसा कर रहा है।"

अनु ने कहा- "वो तो मुझे कब से इस्तेमाल करने की सोच रहा है। मेरी किश्मत ही अच्छी है जो मैं अभी तक..."

मैंने कहा- "मतलब इससे पहले भी उसने कोई हरकत करी थी?"

अनु ने कहा- "शादी के 4-5 महीने बाद सुमित ने मेरे को कहा की उसकी जाब टेम्पोरेरी है। उसकी जाब पर्मानेंट हो जाएगी अगर मैं उसकी हेल्प करग तो.."

मैंने कहा- इसमें क्या सोचना है? आप जो कहोगे करने को मैं कर दूँगी..."

तब सुमित ने कहा- "तुम्हें मेरे बास को खुश करना पड़ेगा। बस एक रात की बात है। तुम उसको खुश कर दो मेरा प्रमोशन भी हो जाएगा..."

तब मैंने कहा- "तुम जैसा घटिया इंसान मैंने कभी नहीं देखा। वो सच में बड़ा कमीना है..."

मैंने कहा- ये बात तुमने अपनी मम्मी को बताई थी?

अनु की सनी आँखों में फिर से आँस आ गये। अनु बाली- "मैंने कहा था, पर मम्मी उनसे भी ज्यादा महान हैं..."

मैंने कहा- क्या मतलब?

अनु ने कहा- "मम्मी बोली की अगर उसकी मज़ीं है तो तुझे क्या फर्क पड़ रहा है। मान जा। एक रात में तेरा क्या बिगड़ जाएगा?"

मैंने अनु को अपने गले से लगाकर कहा- "फिर तुमने क्या किया?"

अनु ने कहा- मैंने उसको साफ-साफ बोल दिया की अगर तुमने मेरे साथ जबरदस्ती की तो मैं जहर खा लेंगी। इस बात से वो डर गया। उसने मुझे कुछ नहीं कहा। पर उसके मन में आज तक मेरे लिए प्यार नहीं देखा मैंनें।

मैंने कहा- तुमने बिल्कुल ठीक किया। ऐसे आदमी की कोई बात मत मानना।

अनु ने कहा- मैं आपको कैसे बताऊँ वो कितना जालिम है। मेरे साथ जानवरों जैसे बिहेंब करता है।

मैंने अनु को देखा तो अनु की आँखें फिर से भर आई। फिर बोली- "वो मुझे जानवरों की तरह मारता है। मेरे बाल पकड़कर मुझे घसीटता है, गालियां देता है, मेरे जिश्म को सूजा देता है मार-मार कर..." बोलते-बोलते अनु फिर से रोने लगी।

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मैंने उसको चुप कराया और कहा- "अनु प्लीज... बस करो। मैं और एक शब्द भी नहीं सुन सकता। तुम्हारी बात सुनकर मेरा खून खोलने लगा है...

अनु बोली- "अभी एक बात तो और है जो मैंने आज तक किसी को नहीं बातयी। पर आपको बता रही है..."

मैंने कहा- क्या?

अनु बोली- जब में प्रेग्नेंट थी तब उसने मुझसे कहा था की शिल्पा को बुलवा लो कुछ दिन के लिए।

मैंने कहा- वो यहां पर क्या करेंगी?

तब उसने कहा था- "जब तक तू मेरे साथ सोने के लायक नहीं है वो सोएगी..."

अनु बोली- "छी... कितना जलील है वो इंसान?"

मैंने कहा- फिर?

अनु ने कहा- उसके मन में शिल्पा के लिए शुरू से ही गंदगी भरी है। मैं जानती हैं।

मैंने कहा- तुम्हारे घर शिल्पा कभी गई है रहने?
 
अनु बोली- "अभी जब गई थी तब भी उसने कोशिश तो करी पर, मैंने उसका कुछ करने नहीं दिया। इस बात के लिए उसने मुझे इतना मारा था की में पूरा दिन बेंड से उठ नहीं सकी। वो अब उसी बात का बदला ले रहा है,

मुझे वहां जाब करने के लिए मजबूर करके..."

मैने अनु की बंद पलकों पर किस करा और कहा- "अब तुम बिल्कुल फिकर मत करो। मैं तुम्हारे साथ हूँ। मैं तुमको अब दुखी नहीं होने दूंगा.."

अनु बोली- "आपके साथ वहां मैं अपने सब गम भूल गई थी। मुझे वहां लग ही नहीं रहा था की मेरे को कोई गम हैं। पर यहां आते ही वही सब याद आ गया."

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मैंने कहा- "मैं हूँ ना... चिता मत करो." फिर मैंने अनु से कहा- "अब कुछ मन हल्का हुआ?"

अनु ने कहा- "ही... आपसे बात करके अब अच्छा लग रहा है.."

मैंने कहा- "चला अब तुमको छोड़ आता हूँ। मुझे भी आफिस जाना है.."

अनु ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे बैंड पर अपने साथ बैठा लिया। फिर उसने मेरे चेहरा को अपने हाथों से पकड़कर मेरे होठ चूस लिए और बोली- "बाबू मेरा मन कर रहा है की आज आपको प्यार करंग..."

मैंने कहा- सच में?

अनु ने मेरी आँखों में अपनी आँखें डाली और कहा- "सच में..."

मुझे उसकी बात सच लगी। क्योंकी उसकी आँखों में अपने लिए मुझे प्यार नजर आने लगा था। पर एक औरत के दिल को कोई नहीं समझ सकता। मैंने अनु को अपनी बाहों में ले लिया और उसको चमतं कहा- "अनु आज मेरा मूड बन नहीं रहा तुम बना सकती हो तो?"

अनु ने मुश्कुराकर कहा- "बस इतनी सी बात?" और अनु ने अपने सब कपड़े उतार दिए और मेरे भी अब हम दोनों बेड पर नंगे थे। अनु ने मेरे सीने पर से चमना शुरू किया और मेरे लण्ड के पास तक चूमती रही। फिर अनु ने मेरे लौड़े को अपने मुह में ले लिया और अपनें होंठों में कसकर दबा दिया।

अनु के मुंह में जाते ही मेरे लौड़े को मजा आने लगा। अनु में मेरे लौड़े को अपनी जीभ से सहलाया फिर उसने मेरे लौड़े को अपने मुंह से बाहर निकालकर अपने हाथ में ले लिया और फिर उसने मेरे टटे को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और हाथ से लण्ड को हिलाने लगी। फिर अनु ने मेरे लौड़े को अपनी जीभ से ऐसे चाटा जैसे कोई आइसक्रीम को चाट रहा हो।

मेरे मुँह से- "उफफ्फ़." की आवाज निकली। अनु ने फिर से मेरी गोलियों को चूसना शुरु कर दिया। मैं मस्ती में भर कर- "आअहह... अनु मेरी जान..." करने लगा।

अनु ने फिर मेरे लण्ड पर अपना मैं रख दिया और अपने होंठों को मेरे लण्ड की जड़ पर लेजाकर रख दिया।

उसकी इस हरकत से मरे पर जिएम में बिजली दौड़ गई। मैं मस्ती की आहे भरने लगा। मैंने कहा- "अनु मेरी जान..."

अनु ने मेरे लण्ड को अपने मुँह से बाहर निकाला और लंबी साँस लेकर कहा. "बाबू मजा आया?"

मैंने कहा- जान ही आअहह... आज क्या कर रही हो... आज तो पागल बना दोगी आअहह.."

अनु ने एक बार फिर से वैसा ही किया। वो मेरे लौड़े को अपने गले तक ले गई। फिर मैंह में लेकर चूसने लगी।

मैं बोला- "अनु मेरी जान ... लगता है आज चूत का नम्बर नहीं आने दागी मुँह से ही झाड़ कर मानोगी."

मुश्कुराकर अनु ने कहा- "झड़ने दो.." अनु ने फिर मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और उसका लोलीपाप की तरह चसने और चाटने लगी। मेरे लौड़े पर इतना प्यार बरसा रही थी अनु की मेरे लण्ड के भी आँस निकल पड़े।

मैंने कहा- अनु मेरी जान मेरे लौड़े को मैंह से कस-कस कर चसा मैं झड़ने वाला हैं।

अनु ने मेरे लौड़े को मुँह में अच्छे से जकड़ लिया और लण्ड को झड़ा दिया। मेरे माल से अनु का मुँह भर गया। पर अनु ने उसको बाहर नहीं आने दिया सब पी गई।

मैने अनु से कहा- "आहह... मजा आ गया..."

अनु बोली- "आपको मजा आ गया, इसका मतलब मैंने सही किया है."

मैंने उसकी चूची को पकड़कर कहा "ही मेरी जान..." और पूछा- "उस दिन का टेस्ट अच्छा था या आज का?"

अनु ने नजरें झुका कर कहा- "आज का.."

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