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Guest
#31
“आह ” गोरी तनी हुई चुचियो को मसलते ही ताई के होंठो से आह फूट पड़ी. मैं दूसरा हाथ थोडा निचे ले गया और ताई के हलके फुले हुए पेट को सहलाने लगा. उफ्फ्फ कितना मुलायम था वो . गहरी नाभि , मैंने पास रखी साबुन उठाई और ताई के उभारो पर लगाने लगा. जल्दी ही झाग ने ताई के उपरी हिस्से को ढक लिया.
झाग की चिकनी पर मेरे हाथ फिसलने लगे थे . मैंने अपने कपडे जल्दी से उतार कर फेंके और अपने लिंग को ताई के मांसल नितम्बो पर सटा दिया. ताई भी पूरी खेली खाई थी . और हम दोनों जानते थे की ये जो भी हो रहा है होकर ही रहेगा. ताई अपना हाथ पीछे ले गयी और मेरे लिंग को अपनी मुट्ठी में जकड लिया.
कुछ देर बाद ताई पलटी और हमारे होंठ एक हो गए. ताई को चुमते हुए मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए नितम्बो तक आ पहुंचा था , ताई ने अपनी जीभ मेरे मुह में डाल दी और मेरी जीभ को चूसने लगी. कसम में ऐसा जबरदस्त अहसास था की मैं क्या ही बताऊ, मध्यम आकार के तरबूजो जैसे ताई के मदमस्त नितम्ब जिन्हें मैं लगातार मसल रहा था .
चूमते चूमते ताई ने मेरे कपडे उतारने शुरू किये और पल भर में ही मैं उसकी बाहों में नंगा था. मेरा झूलता लंड ताई की चूत पर दस्तक दे रहा था .
साबुन के चिकने झाग से लथपथ हमारे गर्म बदन एक दुसरे से रगड़ खाते हुए आज उत्तेजना की हर हद को तोड़ देना चाहते थे . ताई ने नलके को चालु किया और हम भीगने लगे, पानी की ठंडी बूंदों ने जिस्म की आग के शोलो को और भड़का दिया.
“कर ले तेरी मनचाही ” ताई ने शरमाते हुए कहा.
ये उसका खुला निमंत्रण था की आज की रात मैं दबा कर उसे चोदु. ३४-३५ साल की एक खूबसूरत गदराई औरत मेरी बाँहों में पिघल रही थी . मैंने ताई की गीली कच्छी की एलास्टिक में अपनी उंगलिया फंसाई और उस को उतार कर बाथरूम में ही फेंक दिया.
गहरे काले बालो से भरी ताई की हलकी गुलाबी रंगत लिए चूत जिसे देख कर मैं हद से जायदा पागल हो गया था . मैंने ताई को अपनी गोद में उठाया और बाथरूम से कमरे में ले आया. .
मैंने ताई को बिस्तर पर पटका और उसे ऊपर चढ़ गया.
“कितनी खूबसूरत है तू ” मैंने उसके गाल चुमते हुए कहा तो वो शर्मा गयी.
जल्दी ही मैं उसकी छातियो को चूसते हुए उसकी चूत से खेल रहा था . मैंने अपनी ऊँगली उस गर्म तपती चूत के काम रस से भीगे छेद पर रखी और अन्दर सरका दिया. उफ्फ्फ्फ़, क्या गजब था मेरी ताई का हुस्न. मैंने उसके गुदा द्वार को छुआ तो उसके बदन में हलचल मच गयी. गदराई जांघो को चुमते हुए मैं चूत के करीब आ गया था , इतना करीब की उसकी गर्मी मेरी नाक से होते हुए जिस्म में उतरने लगी थी.
मैंने ताई के पैरो को अच्छे से फैलाया और चूत की फांको को फैलाते हुए अपने प्यासे होंठो को चूत पर रख दिया.
“”””””सीईईईई ” यकीं मानिये उस पल हम दोनों के मुह से एक साथ वो आह निकली थी . “पुच ” मैंने ताई की चूत को हलके से चूमा और बहते रस को जीभ से चाट लिया. ताई ने मस्ती के मारे अपने पैरो को इधर उधर पटका पर मेरी पकड़ मजबूत थी खुरदुरी जीभ से मैं उस नाजुक अंग को चाटता रहा .
आहे भरते हुए वो हुस्न की परी कभी मेरे सर को सहलाती कभी चूतड ऊपर उठा कर चूत को चुसवाती अब मेरे लिए भी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था पर इस से पहले की मैं कुछ और कर पाता ताई ने मुझे पलट दिया अब मैं निचे और वो ऊपर आ गयी थी . ताई ने मेरे लंड को पकड़ा और चूत पर लगा कर उस पर बैठने लगी. मैंने चूत के छेद को फैलते हुए देखा .
धीरे धीरे मेरा पूरा लंड ताई की प्यासी चूत में गायब हो गया था . ताई ने मेरे सीने पर अपने हाथ रखे और उपर निचे होने लगी. जब वो अपने मादक नितम्बो को जोर जोर से पटकती तो मैं ब्यान नहीं कर सकता की कितना मजा मिल रहा था मुझे. कुछ देर बाद वो मेरे चेहरे पर झुक गयी और मेरे होंठो को चूमने लगी. अपने से आधी उम्र के लड़के को ताई वो सुख प्रदान कर रही थी जिसे कुछ भाग्यशाली ही उस उम्र में प्राप्त करते है .
मैं लगातार ताई की पीठ कंधो को सहला रहा था , कुछ देर और बीती ही थी की वो धडाम से मेरे ऊपर ढेर हो गयी. ताई की लम्बी गहरी साँसे मेरे गालो पर पड़ रही थी, कुछ पलो के लिए उसकी हालत ऐसी हो गयी की जैसे वो कितना थकी हुई थी .
“मेरे ऊपर आजा और जैसा मैंने किया वैसा ही कर ” ताई ने पीठ के बल लेटते हुए कहा.
मैंने एक बार फिर से लंड उसकी चूत में पेला और उसने टांगो को मेरी कमर पर लपेट लिया. जैसे जैसे मेरी नसों में दौड़ रहा था , मेरे धक्को में तेजी आ रही थी . कुछ देर तक ये धक्क्म्पेली चलती रही और फिर वो सुखद अहसास मैंने महसूस किया . मेरे लंड से कुछ गरम गरम निकल कर ताई की चूत में गिरने लगा. उस अहसास से मेरा तन इतना कांप रहा था की मैं क्या बताऊ,
और जब ये सैलाब थमा तो पसीने से लथपथ मैं और ताई एक दुसरे की बाँहों में पड़े थे. क्या मालूम हम थोड़ी देर के लिए सो ही गए हो. पर जब आँख खुली तो ताई मेरे बगल में लेटी मुझे ही देख रही थी .
“कैसा लगा ” उसने पूछा
मैं- बहुत अच्छा.
“अब ये रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा , सब बदल जायेगा ” ताई ने कहा
मैं- परवाह नहीं, तुम भी तो मुझसे प्यार करती हो न .
ताई- अपने बेटे के साथ सोना, दुनिया इसे प्यार नहीं कहेगी.
मैं- दुनिया से अपने को क्या लेना देना .
ताई- पर ये बाते छुपती भी नहीं, ये भी नहीं छुप सकेगा
मैं- क्या तुम्हे परवाह होगी .
ताई- नहीं
मैं- तो फिर मत सोच इस बारे में .
उस रात एक बार और हमने सेक्स किया. अगली सुबह न जाने क्यों मुझे बड़ी खुशगवार लग रही थी . सुबह ही मुझे रीना की मामी मिली और मुझे एक ऐसी जानकारी दी जिसकी मुझे सख्त जरुरत थी . मेरा दिल बेचैन था मीता से मिलने के लिए. मैं पैदल ही मीता से मिलने के लिए निकल गया , नहर को पार किया ही था की तभी एक गाडी मेरे सामने आकर रुकी और उस से जो उतरा .........
“आह ” गोरी तनी हुई चुचियो को मसलते ही ताई के होंठो से आह फूट पड़ी. मैं दूसरा हाथ थोडा निचे ले गया और ताई के हलके फुले हुए पेट को सहलाने लगा. उफ्फ्फ कितना मुलायम था वो . गहरी नाभि , मैंने पास रखी साबुन उठाई और ताई के उभारो पर लगाने लगा. जल्दी ही झाग ने ताई के उपरी हिस्से को ढक लिया.
झाग की चिकनी पर मेरे हाथ फिसलने लगे थे . मैंने अपने कपडे जल्दी से उतार कर फेंके और अपने लिंग को ताई के मांसल नितम्बो पर सटा दिया. ताई भी पूरी खेली खाई थी . और हम दोनों जानते थे की ये जो भी हो रहा है होकर ही रहेगा. ताई अपना हाथ पीछे ले गयी और मेरे लिंग को अपनी मुट्ठी में जकड लिया.
कुछ देर बाद ताई पलटी और हमारे होंठ एक हो गए. ताई को चुमते हुए मैं उसकी पीठ को सहलाते हुए नितम्बो तक आ पहुंचा था , ताई ने अपनी जीभ मेरे मुह में डाल दी और मेरी जीभ को चूसने लगी. कसम में ऐसा जबरदस्त अहसास था की मैं क्या ही बताऊ, मध्यम आकार के तरबूजो जैसे ताई के मदमस्त नितम्ब जिन्हें मैं लगातार मसल रहा था .
चूमते चूमते ताई ने मेरे कपडे उतारने शुरू किये और पल भर में ही मैं उसकी बाहों में नंगा था. मेरा झूलता लंड ताई की चूत पर दस्तक दे रहा था .
साबुन के चिकने झाग से लथपथ हमारे गर्म बदन एक दुसरे से रगड़ खाते हुए आज उत्तेजना की हर हद को तोड़ देना चाहते थे . ताई ने नलके को चालु किया और हम भीगने लगे, पानी की ठंडी बूंदों ने जिस्म की आग के शोलो को और भड़का दिया.
“कर ले तेरी मनचाही ” ताई ने शरमाते हुए कहा.
ये उसका खुला निमंत्रण था की आज की रात मैं दबा कर उसे चोदु. ३४-३५ साल की एक खूबसूरत गदराई औरत मेरी बाँहों में पिघल रही थी . मैंने ताई की गीली कच्छी की एलास्टिक में अपनी उंगलिया फंसाई और उस को उतार कर बाथरूम में ही फेंक दिया.
गहरे काले बालो से भरी ताई की हलकी गुलाबी रंगत लिए चूत जिसे देख कर मैं हद से जायदा पागल हो गया था . मैंने ताई को अपनी गोद में उठाया और बाथरूम से कमरे में ले आया. .
मैंने ताई को बिस्तर पर पटका और उसे ऊपर चढ़ गया.
“कितनी खूबसूरत है तू ” मैंने उसके गाल चुमते हुए कहा तो वो शर्मा गयी.
जल्दी ही मैं उसकी छातियो को चूसते हुए उसकी चूत से खेल रहा था . मैंने अपनी ऊँगली उस गर्म तपती चूत के काम रस से भीगे छेद पर रखी और अन्दर सरका दिया. उफ्फ्फ्फ़, क्या गजब था मेरी ताई का हुस्न. मैंने उसके गुदा द्वार को छुआ तो उसके बदन में हलचल मच गयी. गदराई जांघो को चुमते हुए मैं चूत के करीब आ गया था , इतना करीब की उसकी गर्मी मेरी नाक से होते हुए जिस्म में उतरने लगी थी.
मैंने ताई के पैरो को अच्छे से फैलाया और चूत की फांको को फैलाते हुए अपने प्यासे होंठो को चूत पर रख दिया.
“”””””सीईईईई ” यकीं मानिये उस पल हम दोनों के मुह से एक साथ वो आह निकली थी . “पुच ” मैंने ताई की चूत को हलके से चूमा और बहते रस को जीभ से चाट लिया. ताई ने मस्ती के मारे अपने पैरो को इधर उधर पटका पर मेरी पकड़ मजबूत थी खुरदुरी जीभ से मैं उस नाजुक अंग को चाटता रहा .
आहे भरते हुए वो हुस्न की परी कभी मेरे सर को सहलाती कभी चूतड ऊपर उठा कर चूत को चुसवाती अब मेरे लिए भी बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था पर इस से पहले की मैं कुछ और कर पाता ताई ने मुझे पलट दिया अब मैं निचे और वो ऊपर आ गयी थी . ताई ने मेरे लंड को पकड़ा और चूत पर लगा कर उस पर बैठने लगी. मैंने चूत के छेद को फैलते हुए देखा .
धीरे धीरे मेरा पूरा लंड ताई की प्यासी चूत में गायब हो गया था . ताई ने मेरे सीने पर अपने हाथ रखे और उपर निचे होने लगी. जब वो अपने मादक नितम्बो को जोर जोर से पटकती तो मैं ब्यान नहीं कर सकता की कितना मजा मिल रहा था मुझे. कुछ देर बाद वो मेरे चेहरे पर झुक गयी और मेरे होंठो को चूमने लगी. अपने से आधी उम्र के लड़के को ताई वो सुख प्रदान कर रही थी जिसे कुछ भाग्यशाली ही उस उम्र में प्राप्त करते है .
मैं लगातार ताई की पीठ कंधो को सहला रहा था , कुछ देर और बीती ही थी की वो धडाम से मेरे ऊपर ढेर हो गयी. ताई की लम्बी गहरी साँसे मेरे गालो पर पड़ रही थी, कुछ पलो के लिए उसकी हालत ऐसी हो गयी की जैसे वो कितना थकी हुई थी .
“मेरे ऊपर आजा और जैसा मैंने किया वैसा ही कर ” ताई ने पीठ के बल लेटते हुए कहा.
मैंने एक बार फिर से लंड उसकी चूत में पेला और उसने टांगो को मेरी कमर पर लपेट लिया. जैसे जैसे मेरी नसों में दौड़ रहा था , मेरे धक्को में तेजी आ रही थी . कुछ देर तक ये धक्क्म्पेली चलती रही और फिर वो सुखद अहसास मैंने महसूस किया . मेरे लंड से कुछ गरम गरम निकल कर ताई की चूत में गिरने लगा. उस अहसास से मेरा तन इतना कांप रहा था की मैं क्या बताऊ,
और जब ये सैलाब थमा तो पसीने से लथपथ मैं और ताई एक दुसरे की बाँहों में पड़े थे. क्या मालूम हम थोड़ी देर के लिए सो ही गए हो. पर जब आँख खुली तो ताई मेरे बगल में लेटी मुझे ही देख रही थी .
“कैसा लगा ” उसने पूछा
मैं- बहुत अच्छा.
“अब ये रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा , सब बदल जायेगा ” ताई ने कहा
मैं- परवाह नहीं, तुम भी तो मुझसे प्यार करती हो न .
ताई- अपने बेटे के साथ सोना, दुनिया इसे प्यार नहीं कहेगी.
मैं- दुनिया से अपने को क्या लेना देना .
ताई- पर ये बाते छुपती भी नहीं, ये भी नहीं छुप सकेगा
मैं- क्या तुम्हे परवाह होगी .
ताई- नहीं
मैं- तो फिर मत सोच इस बारे में .
उस रात एक बार और हमने सेक्स किया. अगली सुबह न जाने क्यों मुझे बड़ी खुशगवार लग रही थी . सुबह ही मुझे रीना की मामी मिली और मुझे एक ऐसी जानकारी दी जिसकी मुझे सख्त जरुरत थी . मेरा दिल बेचैन था मीता से मिलने के लिए. मैं पैदल ही मीता से मिलने के लिए निकल गया , नहर को पार किया ही था की तभी एक गाडी मेरे सामने आकर रुकी और उस से जो उतरा .........