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Adultery दिव्या का सफ़र

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कर्नल राजेश को फिर से इशारा करता है तो राजेश अब खड़ा हो जाता है और अपने कपड़े खोल रेणुका को बैठा देता है। राजेश अभी भी डर रहा था कि कहीं रेणुका को पता न चल जाए पर रेणुका उसे ज्यादा समय नहीं देती और उसके लंड को साइड से चाटना शुरू कर देती है।

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राजेश की तो टांगे ही कांप जाती हैं। ये अहसास उसके लिए एकदम नया था जैसे उसका कोई सपना पूरा हो गया हो। उसके लंड से प्रीकम निकलने लगता है। वह ये सब पहले ही बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था और रेणुका अचानक उसका लंड अब अपने मुंह में ले लेती है। राजेश से अब रुका नहीं जाता और वह भी रेणुका का मुंह चोदने लगता है।

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रेणुका जिस तरह से राजेश का लंड चूस रही थी वो कुछ ही पलों में झड़ने के नजदीक पहुंच जाता है पर उसे रेणुका के मुंह में झड़ना अच्छा नहीं लगता तो वह अपना लंड बाहर खींच लेता है और वहीं फर्श पर झड़ जाता है।

रेणुका अभी भी तरस रही थी, राजेश को झड़ता देख कर्नल उसे स्माइल देता है और उसकी जगह खुद आ जाता है। कर्नल वहीं रेणुका को लेटा कर उसकी जबरदस्त चुदाई करने लगता है। कर्नल को रेणुका की चूत इस तरह मारते देख राजेश भी यकीन नहीं कर पाता। कर्नल रेणुका की चुदाई तब तक करता है जब तक वो झड नहीं जाता.

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उसके झड़ने के बाद वो अपना लंड रेणुका की चूत से निकाल कर नंगा ही कमरे से बाहर आ जाता है। तब तक राजेश अपने कपड़े पहन चुका था। कर्नल की ऐसी बेशर्मी देख राजेश उसे नजर नहीं मिला पा रहा...

कर्नल टेबल पर बैठते ही फौरन एक और जाम बना देता है और एक ग्लास राजेश की और भी बढ़ा देता है।

लाला: कहो राजेश कैसा लगा तुम्हें आज।

राजेश नज़रे झुकाए ही कर्नल की बात का जवाब देता है।

राजेश: ये तो मैं बता भी नहीं सकता। मैं तो ज्यादा देर अपने आप को रोक भी नहीं सका इतना ज्यादा हॉर्नी हो गया था। लेकिन अंकल आपको बुरा नहीं लगा। आप तो रेणुका से प्यार करते हो ना।

लाला: हाँ करता हूँ और उसकी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता हूँ। तुम इस प्यार को समझ नहीं पाओगे। वैसे भी तुम भी तो मेरे अपने हो। जब मुझे पता चला कि दिव्या ने आज तक तुम्हारा लंड नहीं चूसा तो मुझे लगा कि तुम्हें ये सुख में ही दिला दूँ।

कर्नल और एक जाम राजेश को देता है।
 
राजेश: नहीं अंकल अब बस। अब घर भी जाना है। दिव्या पहले ही गुस्सा है आज।

लाला: घर जा कर तो तुम्हें आज उससे डांट खानी ही है। नशे में रहोगे तो कम बुरा लगेगा।

ये कह कर कर्नल ठहाके मार के हसने लगता है।

राजेश: आप भी मेरा मजाक बना लो अंकल।

राजेश मुँह बना लेता है।

लाला: तुम कहो तो मैं एक बार दिव्या को समझाने की कोशिश करू।

राजेश: वो नहीं मानेगी, वो तो बस यहाँ से घर शिफ्ट करना चाहती है। आप ही बताओ अभी ये सब पॉसिबल है क्या।

लाला: तुम बैठो मैं एक बार उसे समझाता हूँ। शायद मेरे समझाने से वो मान जाए।

कर्नल कपड़े पहनकर राजेश के फ्लैट की और चल देता है और उसकी डोर बेल बजाता है।

दिव्या का गुस्सा काफ़ी हद तक अब कम हो चुका था, वो भी ये बात समझती है कि उन्होंने ये घर अभी कुछ समय पहले ही लिया है इसलिए राजेश भी ऐसे घर शिफ्ट करने के लिए रेडी नहीं हो सकता। वो सोचती है कि उसने बेकार ही राजेश को नाराज कर दिया, इतने दिनों बाद तो आया था। वो एक खूबसूरत सी ड्रेस पहने राजेश का वेट कर रही थी कि तभी बेल की आवाज सुन वो दरवाजे की तरफ दौड़ पड़ती है।

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दिव्या दरवाजा खोलती है तो सामने कर्नल को मुस्कुराता देख उसे समझ नहीं आता कि राजेश क्यों नहीं आया। दिव्या वापस दरवाजा बंद करने लगती है तो कर्नल दरवाजे पर पैर अड़ा लेता है और अंदर आने लगता है। दिव्या पीछे की और हटते हुए कहती है।

दिव्या: ये क्या बदतमीजी है।

लाला: क्या बात है इतना अकड़ क्यों रही हो।

दिव्या: आप प्लीज बाहर चले जाइए। और राजेश कहाँ है।

लाला: उसी ने तो मुझे भेजा है तुम्हे मनाने के लिए।

कर्नल दिव्या के कंधे पर हाथ रखने की कोशिश करता है तो वह हाथ झटक के पीछे की ओर चलती रहती है पर अचानक वह किसी चीज से टकरा के रुक जाती है।
 
दिव्या को पता नहीं चलता कि कब वह पीछे जाते हुए अपने बेडरूम में आ गई।

लाला: दौड़ कर कहाँ जा रही हो दिव्या?

दिव्या: अंकल आप प्लीज चले जाइए नहीं तो मैं राजेश को सब बता दूँगी।

लाला: क्या बताओगी दिव्या। यही कि किस तरह तुम सलमान के साथ गुलछर्रे उड़ा रही हो, या फिर रेणुका से अपने जिस्मानी रिश्ते के बारे में बताओगी।

दिव्या: आप अखिर चाहते क्या हो मुझसे।

लाला: वही जो तुमने उस दिन सोने का नाटक करते हुए किया था।

दिव्या: मुझे नहीं पता आप क्या बात कर रहे हो।

ये कह दिव्या कर्नल को धक्का देकर जाने की कोशिश करती है पर कर्नल उसे पीछे धकेल देता है जिससे दिव्या वही बेड के पास गिर जाती है।

कर्नल अपना पेंट नीचे कर अपना लंड बाहर निकालने लगता है, दिव्या उसे बार बार मना करती है पर कर्नल उसके बालों में हाथ डाल कर खींचता है और जैसे ही दिव्या चिल्लाती है कर्नल अपना लंड उसके मुंह में डाल कर उसका मुंह चोदने लगता है।

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दिव्या कुछ देर काफी कोशिश करती है अपना मुँह पीछे करने की पर कर्नल की मजबूत पकड़ के आगे वह कुछ कर नहीं पाती।

कर्नल दिव्या के मुँह को पूरी तरह अपने लंड पर प्रेस कर अपना पूरा लंड उसके मुँह में अंदर बाहर करने लगता है।

दिव्या उसे मना तो करना चाहती है पर अब उसकी आवाज़ उसके मुँह में ही घुट कर रह जाती है।

लाला: अब दिव्या और कुछ पल, और उसके बाद तुम अभी के लिए फ्री हो। बस अब कुछ भी बाहर मत निकलने देना।

दिव्या ये सुन पीछे हटने की लाख कोशिश करती है पर कर्नल उसके मुँह से लंड बाहर आने नहीं देता।

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दिव्या सारा माल अंदर नहीं रख पाती और काफी कुछ उसके मुंह से बाहर आ गिरता है।

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कर्नल लंड निकालकर उसे दिव्या के होठों पर फेरता हुआ हँसता है।

लाला: तुम जल्दी सीख जाओगी दिव्या। लेकिन आज के बाद यहाँ से जाने की बात की तो सोच लेना, मैं राजेश को सब बता दूंगा।

कर्नल दिव्या को उसी हालत में छोड़ अपना लंड पेंट के अंदर डाल कर वहां से चला जाता है। दिव्या भी अपना बदन साफ करती है पर उसके आंसू थमने का नाम नहीं लेते क्योंकि उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस सिचुएशन से कैसे निपटें।
 
दिव्या: ये क्या कर रहे हो, कोई आ जाएगा। तुम जाओ अभी।

मनीष: जाने को क्यों कह रही हो मैडम। आप भी तो मेरे लिए आई हो ना।

मनीष दिव्या की और बढ़ने लगता है।

मनीष: तो मैम आप अपनी ब्रा उतारोगी या मैं उतारूँ।

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दिव्या: तुम पागल हो क्या, मैं कैसे कर सकती हूँ ऐसा। ब्रा तुम्हें दी तो मैं क्या पहनूंगी।

मनीष: आपको एक्स्ट्रा लानी थी मैम। आपको पहले से पता था कि पनिशमेंट में आपको क्या देना होगा मुझे।

दिव्या: मेरे हस्बैंड कल अचानक घर आ गए जिसकी वजह से मैं भूल ही गई थी।

मनीष: अब आपको मुझे तो ब्रा देनी ही होगी।

मनीष दिव्या के कंधे पर हाथ रख देता है। दिव्या मनीष को इग्नोर करने के लिए दूसरी ओर घूम जाती है पर अब मनीष भी चांस लेने से पीछे नहीं हटना चाहता है। मनीष दिव्या को उसी पोजिशन में दीवार से लगा देता है और उसके बदन को अपनी बाहों में जकड़ लेता है और उसके बदन को चूमना शुरू कर देता है। रह रह कर वो कभी दिव्या की गांड तो कभी उसके मम्मो को मसलने लगता है।

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दिव्या जिस भावना को अपने दिल में दबाए बैठी थी, मनीष के अचानक ऐसे हमले करने से उसके सब्र का बंध भी टूटने लगता है। मनीष दिव्या का मुंह अपनी ओर करने की कोशिश करता है तो दिव्या खुद बिना किसी विरोध के अपने होंठों को उसे सौंप देती है।

दिव्या को इस तरह से साथ देता देख मनीष और आगे बढ़ जाता है और उसके टॉप को नीचे को और खिसका देता है जिससे उसे ब्रा में छुपे दिव्या के मम्मों के दर्शन हो जाते हैं।

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टॉप इस तरह अचानक उतरने से दिव्या को खतरे का अभास होता है और वह मनीष को रुकने के लिए कहती है और मनीष को पीछे धकेलने लगती है।

दिव्या: समझो ना। बस बहुत हुआ कोई आ जाएगा अब।

मनीष: कोई कैसे आएगा मैम। दरवाजा तो बंद है ना।

दिव्या - हम्म, इस तरह कोई आया तो क्या सोचेगा कि दरवाजा क्यों बंद है। बस अब मुझे जाने दो।

मनीष: तो आप कहो तो मैं दरवाजा खोल देता हूं। पर आज इतनी आसानी से तो नहीं जाने दूंगा।

दिव्या - दरवाजा खोलोगे तब भी तो कोई आ ही सकता है। मुझे इस वक़्त जाने दो।
 
मनीष गेट तो खोल देता है पर दिव्या को बाहर नहीं जाने देता। वह दिव्या को धकेल कर टॉयलेट में ले जाता है और दिव्या के कपडे उतार देता है।

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दिव्या थोड़ा रोकने की कोशिश करती है पर मनीष उसे नंगा करके अंदर खींच कर दरवाजा बंद कर ही देता है। उसे अपनी किस्मत पर भरोसा नहीं होता की आज दिव्या ने ज्यादा विरोध नहीं किया और पहली बार उसके सामने पूरी नंगी खड़ी थी।

मनीष: अब यहाँ किसी को पता नहीं चलेगा। बस आप शांत रहना।

दिव्या को नंगा होकर काफी शर्म आने लगती है तो वो अपना चेहरा अपने हाथो से छुपा लेती है पर मनीष दिव्या का चेहरा अपने हाथों में लेकर उसके काफी नजदीक आ जाता है।

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दिव्या भी अपने होठों को खोल देती है और मनीष को जी भर के खुद को चूमने देती है।

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मनीष भी लगातार उसके मुंह में अपनी जीभ डाल-डाल कर चूसता है। कुछ देर बाद दिव्या पीछे हटने लगती है।

दिव्या- बस अब बहुत पुनिशमेंट हो गई। अब छोड़ो मुझे और मेरे कपडे वापस करो।

मनीष- अभी कहाँ कुछ किया है मैम और वैसे भी आपकी ब्रा तो वापस नहीं दूंगा।

दिव्या- कल दूसरी ले आउंगी तो दे दूंगी।
 
मनीष- कल तो स्कूल की छुट्टी है। आपने पागल समझा है मुझे।

दिव्या- तो जिस दिन स्कूल खुलेगा उस दिन दे दूंगी।

मनीष- रात में ऑनलाइन आओगी।

दिव्या- कैसे आ सकती हूँ। बताया तो हसबैंड आ गए हैं।

मनीष- फिर तो आपको ऐसे नहीं जाने दे सकता मैं। एक बार डालने दो न।

दिव्या- वो नहीं हो सकता और मेरे सारे कपडे उतार कर इतना कुछ तो कर लिया है तुमने।

मनीष दिव्या का हाथ अपने लंड पर ले जाने लगता है और उसे उसको मसलने को कहता है। दिव्या मना करती है पर मनीष की जिद के आगे झुक ही जाती है। वह मनीष के लंड को उसकी पैंट के ऊपर से सहलाने लगती है।

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मनीष को यकीन नहीं होता कि आज दिव्या मैम खुद उसका लंड सहला रही हूँ। मनीष का लंड पैंट में एकदम तन जाता है जिससे उसे भी परेशानी होने लगती है, वह अपने लंड को बाहर निकालने के लिए अपनी चेन खोलने लगता है पर तभी दिव्या उसे रोक देती है।

दिव्या: ये अब क्या कर रहे हो मनीष, मैंने इतना कुछ तो कर दिया है तुम्हारे कहने पर।

मनीष: बस एक बार इसे डालने दो न मैम या फिर थोड़ा हिला देना बस।

दिव्या- नहीं अब नहीं। काफी देर हो गई है वैसे भी यहाँ हमें। अब मुझे जाना है।

मनीष: रुको ना मैम थोड़ी देर। वैसे भी मुझे नहीं लगता कि छुट्टी के दिन आप आओगी ऑनलाइन।

दिव्या- तुम अभी जाने दो। मैं कोशिश करूँगी आने की।

मनीष: और नहीं आई तो।

दिव्या- मेरे पति के जाने के बाद तो आऊँगी ही ना। बाकी आज भी अगर हो सका तो आऊँगी।

मनीष: मेरा तो मन नहीं है आपको जाने देने का। एक बार हाथ में ले कर तो देखो।

दिव्या- नहीं प्लीज़। मेरी बात नहीं मानोगे तो मैं कभी बात नहीं करूँगी।

दिव्या गेट खोल कर जाने लगती है पर मनीष उसका हाथ पकड़ लेता है।

मनीष: अच्छा बस इतना बता जाओ कि क्या आपका मन नहीं कर रहा मेरा लंड बाहर निकलने का।

दिव्या कुछ जवाब नहीं दे पाती और कपडे पहन कर गेट से बाहर निकल जाती है।
 
वही दूसरी ओर सुबह राजेश सो कर काफी लेट उठता है। उसे कल जो भी हुआ उस पर यकीन नहीं होता। उसके दिलों-दिमाग में रेणुका रह रह कर आ रही थी, वहीं वह ये भी सोच रहा था कि उसने रेणुका के साथ धोखे से जो किया है वो गलत है, पर ये तो नशे में हो चुका था जो अब राजेश चाह कर भी चेंज नहीं कर सकता।

साथ ही ये भी डर था कि कहीं ये सब दिव्या को पता न चल जाए। कुछ समय बाद राजेश कर्नल से मिलने की सोचता है तो वह उसके फ्लैट पर चला जाता है। राजेश दो बार बेल बजाता है तो सामने रेणुका दरवाजा खोलती है।

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रेणुका को देखते ही राजेश को समझ नहीं आता है कि कैसे रिएक्ट करें। कांपती आवाज से वह कर्नल के बारे में पूछता है। पर रेणुका एकदम नॉर्मली रिएक्ट करती है।

रेणुका: जी वो तो किसी काम से आज बाहर गए हैं। रात में देर तक ही आ पाएंगे शायद।

राजेश: ओह, ठीक है रेणुका जी मैं चलता हूँ फिर।

रेणुका: आपकी वाइफ स्कूल से आ गई है क्या।

राजेश: जी अभी तो नहीं।

रेणुका: तो यही बैठ जाइए मैं चाय कॉफी ले आती हूँ।

राजेश: आप क्यों परेशान हो रही हो। मैं अंकल के आने के बाद आता हूँ।

रेणुका: इसमें परेशानी कैसी। आप आएंगे तो मुझे भी अच्छा ही लगेगा।

रेणुका ये कह उसे अंदर बुलाती है और खुद किचन की और चल देती है। राजेश उसकी मटकती गंद देख के अपने लंड को खड़ा होने से रोक नहीं पाता। राजेश भी अंदर चला जाता है और रेणुका के आने का वेट करता है।

कुछ ही सेकंड में रेणुका ग्लास में पानी ले कर बाहर आती है। रेणुका को अपनी और आता देख राजेश अपनी नजरें नीचे कर लेता है। साड़ी से झांकते उसके बूब्स देख कोई भी उसकी और आकर्षित हो उठे।

रेणुका जान के राजेश को ग्लास देते वक्त झुक कर उसे अपने बूब्स के दर्शन कराती है और वापस उठने में थोड़ा समय लेती है।

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राजेश एक बार अपनी नज़र उठा कर देखता है तो रेणुका के चहरे पर अजब सी स्माइल देख वह फिर से नज़र दूसरी और कर लेता है।

रेणुका: आपको एयर कंडीशनर में भी इतनी गर्मी। क्यों लग रही है राजेश जी। देखो कितना पसीना बह रहा है।

इतना कहते ही रेणुका अपनी साड़ी के पल्लू से पसीना पोंछने लगती है। राजेश के शरीर में तो मानों करंट दौड़ जाता है, उसे समझ नहीं आता ये सब क्या हो रहा है।

तभी रेणुका का एक सवाल उसे निशब्द कर देता है।
 
रेणुका: क्या हुआ अभी बहुत डर रहे हो, क्या तुम आँखों पर पट्टी बंधी औरतो का ही फायदा उठाते हो बस।

राजेश कुछ कह नहीं पाता। उसे लगता है कि कहीं कर्नल ने उसे कुछ बता तो नहीं दिया।

राजेश: जी क्या मतलब?

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रेणुका अपने बालों को बांधते हुए थोड़ा गुस्सा दिखाती है।

रेणुका: मतलब भी बताना पड़ेगा आपको। कल रात आपने जो किया मुझे आपसे ये उम्मीद नहीं थी।

अब तो राजेश के मुँह से आवाज़ बाहर ही नहीं आती। वो काफ़ी डर जाता है।

राजेश: मुझे माफ़ कर दीजिए रेणुका जी। कल नशे में बहक गया था। मुझसे ग़लती हो गई।

राजेश को डरा हुआ देख रेणुका हल्का सा मुस्कुरा देती है और सोफे पर उसके साथ बैठ जाती है। राजेश पीछे को झुक जाता है। उसे समझ नहीं आता कि रेणुका क्या चाह रही है।

रेणुका अपने बालों को खोल कर वापस लहरा देती है।

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रेणुका: डरो मत। मैं दिव्या को कुछ नहीं बोलने वाली। पर मुझे पता नहीं था कि तुम ऐसे हो।

राजेश: मुझे माफ़ कर दीजिए, मुझसे ग़लती से ये सब हुआ। और इसमें अंकल का हाथ ज्यादा था, उन्होंने ही मुझे उकसाया था और फिर उन्होंने आपको न जाने क्या क्या बताया है।

रेणुका: मुझे उन्होंने नहीं बताया।

राजेश: फिर आपको पता कैसे चला?

रेणुका राजेश के कानों के पास अपना मुँह ला कर फुसफुसाती है: तुम्हें क्या लगा कि मैं क्या उनका पहली बार चूस रही थी। मुझे अच्छे से पता था कि वो लंड उनका नहीं था, और उनके सिवा सिर्फ तुम ही यहाँ थे।
 
रेणुका के मुँह से इस तरह लंड सब्द सुन राजेश के शरीर में एक लहर सी दौड़ जाती है, दिव्या कभी इस तरह बात नहीं करती थी।

राजेश: आपने वो सब होने क्यों दिया।

रेणुका: एक बुड्ढे के साथ कोई कब तक सेक्स कर सकता है।

रेणुका राजेश को और कुछ खाने का मौका ही नहीं देती और उसके होंठों को चूसना शुरू कर देती है।

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राजेश अपने आपको रोकने की कोशिश करता है। राजेश को सपोर्ट नहीं करता देख, रेणुका रुक जाती है।

रेणुका: क्या हुआ।

राजेश: मुझे कल जो हुआ वो गलती से हुआ। मैं अपनी वाइफ को धोखा नहीं दे सकता।

रेणुका सोफे से खड़ी हो जाती है।

रेणुका: जैसी तुम्हारी मर्जी लेकिन मुझे लगा तुम फिर से वही मजा लेना चाहते हो।

ये कह कर रेणुका वहाँ से किचन की और चली जाती है और राजेश सोफे पर ही बैठा रह जाता है। उसे समझ नहीं आता कि वो क्या करे। आखिर वो रेणुका के पीछे ही किचन की और चल देता है।

रेणुका भी कदमों की आहट से जान जाती है कि राजेश अंदर आ गया है पर वो मुड़ क नहीं देखती।

राजेश डरते हुए उसके पीछे जा पहुँचता है पर उसे छूने से डरता है।

रेणुका हल्की सी गरदन घुमा के उसे कहती है: कल रात में तुम्हें इतना डर नहीं लगा था, तब तो बड़ी आहें भर रहे थे। अब पत्नीव्रता बन रहे हो।
 
ये सुनते ही राजेश अपना हाथ रेणुका की कमर से उसकी नाभि की और ले आता है।

रेणुका भी लम्बी सांसें भरने लगती है जिससे राजेश को और हिम्मत मिलती है। रेणुका घूम जाती है तो राजेश थोड़ा रुक जाता है। पर रेणुका अपने होंठों को राजेश के काफी करीब ले आती है तो राजेश ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पाता और अपने होंठ रेणुका के होंठो की तरफ बढ़ा देता है।

रेणुका तभी दोनों के होंठों के बीच अपना हाथ ले आती है।

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रेणुका: क्या हुआ अब अपनी वाइफ को धोखा नहीं दे रहे तुम।

राजेश: तुमने ही कहा था धोखा एक बार दो या बार बार बात एक ही है।

रेणुका अपना हाथ बीच में से हटा लेती है और राजेश को किस करते हुए ही अंदर कमरे में ले जाती है। राजेश की सांसें भी अब उखड़ने लगी थी। रेणुका जिस तरह से उसके होंठों को चूम रही थी, ऐसे तो वो ज्यादा देर टिक ही नहीं सकता था।

रेणुका किस करते हुए राजेश को बेड पर गिरा देती है और उसके सामने खड़े होकर एक-एक कर अपने कर अपने कपड़े उतारने लगती हैं। राजेश बस उसे देखता रहा जाता है। रेणुका अपने बाद राजेश की पैंट खोलकर उसके लंड को सहलाने लगती है।

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राजेश के लंड से पानी निकल कर उसके इनर को काफी गीला कर देता है।

रेणुका: तुम्हारी हालत तो काफी खराब लग रही है राजेश।

राजेश: आह। ऐसे तो कोई भी झड़ जाएगा। मुझे थोड़ी सांसें तो लेने दो।

रेणुका: मेरा रुकना तो मुश्किल है अब। तुम चाहो तो उठ कर जा सकते हो।
 
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