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Adultery दिव्या का सफ़र

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प्रिंसिपल अपना लंड दिव्या की चूत पर टिकाता है पर अंदर नहीं डालता और दिव्या की आंखों में देखने की कोशिश करता है पर दिव्या नज़रें चुराते हुए अपनी चूत नीचे ले जाती है और उसका लंड अपनी चूत में लेकर प्रिंसिपल को चोदना शुरू कर देती है। प्रिंसिपल भी दिव्या की गांड को मसलते हुए उसे सपोर्ट करने लगता है।

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दिव्या की स्पीड अब काफी तेज हो चुकी थी।

मदन: आह दिव्या, बस रुकना मत अब। कितना तरसाया है तुमने इस दिन के लिए।

कुछ ही पलों में दिव्या झड़ना शुरू हो जाती है पर झड़ते हुए वो प्रिंसिपल के लंड को अपनी चूत के अंदर तक ले कर उसे मसलने लगती है जिससे उसका लंड भी झड़ने लगता है। प्रिंसिपल इतना थक चुका था कि अब वो उठने की हिम्मत भी नहीं करता, वो सलमान को अब दिव्या के कपडे वापस देने के लिए कह देता है। लेकिन सलमान भी पक्का हरामी था, वो दिव्या का मुंह चोदे बिना कैसे रह सकता था। वो भी दिव्या के जाने से पहले उसके मुंह में अपना लंड डाल कर उसे चोदना शुरू कर देता है।

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सलमान का लंड झड़ने में काफी समय लेता है, जब सलमान दिव्या के मुंह से अपना लंड बाहर निकलता है तो दिव्या की हालत काफी खराब हो चुकी थी, उसका बदन जगह जगह से वीर्य से सना हुआ था, शरीर पर रगड़ने और मसलने के काफी निशान बन चुके थे।

जैसे तैसे दिव्या अपने आप को संभालती है और अपने कपडे लेने के बाद उन्हें पहनने लगती है। अब दिव्या मदन और सलमान के सामने ही कपडे पहनना शुरू कर देती है क्योंकि अब छुपाने को कुछ राह नहीं था। कपडे पहन दिव्या अपने घर की तरफ निकल पड़ती है।
 
दिव्या घर पहुँचती है तो वो ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करती है क्योंकि राजेश अभी भी घर नहीं पहुँचा था। आज जो भी हुआ उससे दिव्या को अफ़सोस तो बहुत था लेकिन प्रिंसिपल के पास उसका पेपर चुराते हुए विडियो था तो वो कुछ कर भी नहीं सकती थी वरना वो खुद फंस सकती थी। दिव्या सीधा वॉशरूम में जा कर नहाने लगती है और अपनी हालत थोड़ी सुधारने की कोशिश करती है।

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दिव्या डर रही थी कि कहीं राजेश को उसकी हालत देख शक न हो जाए। कुछ देर बाद दिव्या तैयार हो जाती है और घर के काम निपटाने लगती है। दिव्या गुस्से में तो थी कि कैसे कोई उसकी इज़्ज़त से इस तरह से खेल सकता है पर एक सवाल उसके मन में आते ही उसका गुस्सा कम होने लगता है। दिव्या सोचने लगती है कि आज जितना ग़लत बर्ताव उसके साथ हुआ है उसके बावजूद आख़िर उसकी चूत किस तरह झड रही थी। आखिर क्यों वो सब कुछ भूल के खुद भी अपने शरीर को चुदवाने लगी थी।

दिव्या ये सब सोच ही रही थी कि उसे फिर से अपनी चूत में हलचल महसूस होने लगती है। दिव्या सोच रही है कि किस तरह से दो-दो लोगों ने मिलकर आज उसके बदन के एक-एक कोने को मसलकर रख दिया है। दिव्या इस सब में डूबी ही थी कि डोर बेल की आवाज से वो अपने खयालों से बाहर आ जाती है।

राजेश आ चुका था, आते ही वह दिव्या को अपनी बाहों में भर लेता है, दिव्या राजेश को फ़्रेश होने के लिए कह देती है और डिनर लगाने के लिए चली जाती है, दोनों साथ में खाना खाते हैं पर दिव्या के फेस पर मायूसी देख राजेश कई बार उसकी प्रॉब्लम जानना चाहता है पर वह कुछ नहीं बता पाती।

राजेश आज कर्नल के पास न जाने की सोच दिव्या के बिस्तर पर आने की वेट करता है, कुछ देर में काम खत्म होते ही दिव्या भी आ जाती है और सोने के लिए बेड पर लेट जाती है, राजेश से रहा नहीं जाता, वह दिव्या को हग करने लगता है पर दिव्या उसे सर दर्द का बहाना कर मना करने लगती है। दरसल उसे डर है कि कहीं राजेश को उसकी हालत देख शक न हो जाए। राजेश को बुरा तो बहुत लगता है पर वह ज्यादा कुछ कह नहीं पाता।

राजेश दिव्या को एनिवर्सरी तक बिलकुल नाराज नहीं करना चाहता था। राजेश कुछ समय में सो जाता है पर दिव्या की आँखों में नींद नहीं थी, वह फिर से उन्हीं खयालों में खो जाती है जो कैसे आज प्रिंसिपल और सलमान ने उसकी ली है और कैसे वह उनके लंड लेने के लिए मचलने लगी थी। किस तरह वह दोनों बेशर्मी से उसके जिस्म के साथ खेल रहे थे।

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यहाँ दिव्या को नींद नहीं आ रही थी, वहीं दूसरी और मनीष भी उसकी याद में सो नहीं पा रहा था, उसे उम्मीद थी कि अब दिव्या रोज उससे बात करने का कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेगी पर काफी रात बीत जाने के बाद भी वह ऑनलाइन नहीं आती और मनीष के कदम अपनी बहन रूचि के कमरे की और बढ़ जाते हैं।

वह अपने आप को काफी कंट्रोल करता है पर अपनी बहन को छूए बिना रहना अब उसके लिए मुश्किल था, रूचि के पास पहुँचते ही वह सोचने लगता है कि क्या दिव्या मैम का शक सही तो नहीं है, क्या रूचि मेरे छूने से उठ तो नहीं गई थी।

डरते डरते वह रूचि के पास पहुँच कर उसके बदन को कपड़ों के ऊपर से छूना स्टार्ट करता है।

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कमरे में अंधेरा होने की वजह से मनीष को ज्यादा अंदाज़ा नहीं हो पा रहा था कि रूचि जागी है या सोई है, लेकिन तभी रूचि की एक हल्की सी आह से वह घबरा जाता है और वहीं अपने हाथों को रोक लेता है।

रूचि सीधी होकर लेट जाती है, इस बार मनीष उसे छूने से पहले कुछ देर वेट करता है। मनीष रूचि की टीशर्ट को ऊपर को उठाकर उसके मम्मों तक ले जाता है, रूचि की निप्पल एकदम टाइट थी जिसे देख उसे और डाउट होने लगता है।

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वो रूचि के दोनों मम्मों पर हाथ फेरने लगता है पर उसकी हिम्मत नहीं होती कि ज्यादा आगे बढ़ सके। वो ऐसे ही बार बार रूचि की चून्चियों को छूता है और अपना लंड बाहर निकाल कर हिलाने लगता है। कुछ देर में जब उसका लंड झड़ने के करीब होता है तो वो रुकने की कोशिश करता है पर अपने आपको रोक नहीं पाता और रूचि के चेहरे पर ही झड जाता है।

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रूचि कुछ नहीं बोलती लेकिन मनीष समझ जाता है की उसकी बहन जाग रही है लेकिन झड़ने से मनीष की हवस शांत हो गयी थी तो वो अपनी बहन के रूम से बाहर आ जाता है। हवस शांत होने के बाद उसे दिव्या पर ऑनलाइन न आने पर थोड़ा गुस्सा भी आता है पर वो अपने आप को तसल्ली देता है कि शायद राजेश अभी सोया ही न हो, या कोई और वजह होगी।
 
रेणुका: दिव्या तो सारा दिन अकेले घर में ही रहती है तो क्यों न उसे कहीं बाहर ले जाओ किसी रिसॉर्ट में या कोई अच्छा होटल।

राजेश: आइडिया तो अच्छा है, उसे भी अच्छा लगेगा लेकिन मेरे पास ज्यादा छुट्टी नहीं है तो कहीं आस पास का ही देखते हैं।

लाला: तो एक काम करो, शहर के बाहर मेरा एक फार्म हाउस है, तुम दिव्या को वहाँ ले जाओ। एकांत भी मिलेगा और आजादी भी। इसी बहाने मैं भी अपना फार्म हाउस देख आऊंगा।

राजेश: तो क्या आप भी चलेंगे अंकल?

लाला: भाई तुमको अपना वादा पूरा करना है या नहीं। या भूल गए अपना प्रॉमिस?

राजेश: कौन सा प्रॉमिस?

लाला: दिव्या को नंगा दिखाने का। बस एक बार उसे पूरा नंगा देखना चाहता हूँ मैं। वैसे अगर तुम्हें परेशानी है तो मैं रुकुंगा नहीं सिर्फ दिव्या को नंगा देख कर रात में वापस आ जाऊंगा।

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राजेश: मैंने अभी उस बारे में कुछ सोचा नहीं है और फिर आप वहां अकेले बोर हो जाएंगे।

लाला: अकेले क्यों, रेणुका को भी ले चलता हूँ। क्यों रेणुका?

कर्नल पूछते हुए रेणुका के मम्मे दबा देता है।

रेणुका: आह, हाँ, मैं भी तैयार हूँ।

राजेश परेशान हो जाता है क्योंकि उसने कर्नल से कोई प्रॉमिस नहीं किया था सिर्फ बोला था की सोचूंगा और अब कर्नल उसके पीछे पड़ गया है। राजेश मन ही मन तय करता है की वो फार्म हाउस नहीं जायेगा। राजेश को परेशान देख कर कर्नल भांप जाता है की राजेश फार्म हाउस नहीं भी आ सकता है और बोलता है।

लाला: यार तुम परेशान मत हो, अगर कल मौका नहीं मिला तो तुम मुझे दिव्या को बाद में कभी दिखा देना। ज्यादा प्रेशर मत लो बस वादा याद रखना। मैं नहीं चाहता की मेरी वजह से तुम्हारी एनिवर्सरी ख़राब हो।

राजेश: थैंक्स अंकल। आपने ये बोल कर मेरा बोझ हल्का कर दिया। मैं इसी बात को लेकर काफी परेशान था की मैं ये कैसे करूंगा।

लाला: मैं तुम्हारी परेशानी समझ गया था इसीलिए तुमको कल की छूट दे रहा हूँ लेकिन तुम दिव्या को सरप्राइज देना। पहले से बता कर मजा खराब मत कर देना, उसे बिना बताये ले जाना वहां।

राजेश: हम्म, जी बिलकुल।

कर्नल अब रेणुका को अपने पैरो के पास बिठा कर अपना लंड उसके मुंह में डाल देता है।

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राजेश अपनी नजरे चुराता है लेकिन ऐसा नजारा देखे बिना रह नहीं पाता।
 
लाला: वैसे तुम दिव्या से क्या गिफ्ट लेने वाले हो राजेश।

राजेश: अब मैं क्या मांगूँ।

लाला: (सिसकियां लेते हुए) तुमने कभी दिव्या को मुंह में नहीं दिया ना, अच्छा मौका है।

राजेश: आप नहीं जानते उसे अंकल। वो नहीं मानेगी।

लाला: वो सब मैं संभाल लूंगा, तुमको ऐसी टिप दूंगा की वो मना नहीं कर पायेगी।

ये बोल कर कर्नल अपनी आंखें बंद कर दिव्या की एनिवर्सरी पर उसको चोदने के सपने देखने लगता है और रेणुका के बालों को पकड़ कर जोर जोर से उसका मुंह चोदने लगता है।

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राजेश का लंड भी उसकी पेंट में अकड़े जा रहा था पर वह कर्नल को बीच में रोकना नहीं चाहता था।

कर्नल और रेणुका पूरी तरह बेशर्म हो चुके थे।

लाला: आह राजेश, क्या मैं तुम्हारी बीवी को इमेजिन कर रेणुका का मुंह चोद लूं?

राजेश थोड़ा सोच में पड़ जाता है।

लाला: बोलो राजेश, तुम्हें कोई परेशानी तो नहीं?

राजेश: सोच लो अंकल, वैसे भी सोचने से ये सच तो नहीं हो जाएगा। मैं दिव्या को अच्छे से जानता हूँ।

कर्नल अब रेणुका को दिव्या कह कर पुकारने लगता है और उसके मुंह को अपने लंड पर तेज-तेज चलाने लगता है।

लाला: आह दिव्या, आह, क्या चूसती हो आःह्ह्ह क्या मम्मे है तुम्हारे आह!

कर्नल के मुंह से इस तरह दिव्या का नाम सुन कर राजेश के मन में भी एक अजीब सी सनसनाहट फैल जाती है।

लाला: तुम नहीं जानते हो राजेश। औरत के अंदर की रांड बस जगाने की जरूरत होती है। रेणुका ने भी कभी अपने पति का लंड मुंह में नहीं लिया था पर आज देखो इसे, अच्छी तरह जानती है कि एक आदमी को कैसे खुश करना है।

राजेश भी अब रह नहीं पा रहा था, वह रेणुका की कमर पर अपना हाथ फेरने लगता है पर रेणुका तो कर्नल का लंड जैसे छोड़ना हो नहीं चाहती थी।

लाला: इसे आज मेरे ही लिए छोड़ दो राजेश, तुम्हें तो कल दिव्या की लेनी है, उसके मुंह में लंड देना है।

राजेश: वह नहीं मानेगी अंकल।

लाला: मैं मनाऊंगा उसे राजेश, कोशिश करके बस उसकी आंखों पर पट्टी बांध देना बाकी मैं संभाल लूंगा।

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राजेश के जाने के बाद दिव्या काफी बोर होने लगती है, उसे कल का इंतजार नहीं हो पा रहा था। फिर उसको मदन और सलमान की हरकतें याद आने लगती हैं। इन सब बातों से ध्यान हटाने के लिए वो अपना फोन उठाती है तो उसमें मनीष का मेसेज देखती है जिसमें लिखा होता है ‘मैडम एक प्रॉब्लम है, मुझे आपसे बात करनी है’

दिव्या को याद आता है कि कल मनीष भी उसका इंतजार कर रहा होगा रात में। वह ऑनलाइन आती है तो उसमें मनीष ने कई मेसेज भेजे हुए थे, वह इस समय भी ऑनलाइन ही था। दिव्या उसे मेसेज भेजती है पर वह जवाब नहीं करता।

दिव्या: अब मान भी जाओ, तुम्हें पता है मेरे पति घर पर ही हैं।

दिव्या भी कई मेसेज करती हैं पर मनीष उनको इग्नोर करता रहता है। दिव्या जानती है कि मनीष सभी मेसेज पढ़ तो रहा है पर जवाब नहीं कर रहा, दिव्या को एक शरारत सूझती है।

दिव्या: ठीक है बात नहीं करनी तो, मैं जानती हूँ तुम कैसे रिप्लाई दोगे मुझे।

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दिव्या अपना कैम ऑन करती है तो मनीष की नज़रे कैम पर ही टिकी रह जाती हैं। दिव्या एक सेक्सी ड्रेस में सामने खड़ी हुई थी।

मनीष अभी भी दिव्या को रिप्लाई नहीं करता वो देखना चाहता है कि दिव्या किस हद तक जाएगी। दिव्या मनीष को टीज़ करने के लिए टॉप उतारने उतारने की सोचती हैं पर उसका मन अंदर से नहीं मानता, फिर वो खुद को समझाती है कि मनीष को तो उसने कितनी बार अपनी देह के दर्शन कराये हैं, और शायद मनीष ही है जो दिव्या को सबसे ज्यादा जानता था, भले ही मनीष आज तक उसको हासिल न कर सका हो। दिव्या अख़िरकार अपने हाथ ब्रा के हुक की ओर बढ़ा देती हैं।

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दिव्या आज बिना मनीष के कुछ कहे उसके लिए नंगी हो गई थी पर मनीष तो शायद उसे हर हद तक टेस्ट करना चाहता था। वो और देखना चाहता था कि दिव्या अब आगे क्या करती है।

दिव्या: ठीक है मनीष तुम जान के रिप्लाई नहीं कर रहे तो तुम्हारी मर्जी, मैं भी अब रिप्लाई नहीं करूँगी।

इतना लिख कर दिव्या अब मनीष की चाल उसपर ही चलने की सोचती है, और कैमरा बंद करके बैठ जाती है, मनीष भी बेचैन हो उठता है और दिव्या को मैसेज करने लगता है पर दिव्या को तो इसमें मजा आने लगता है।
 
मनीष: मैडम मुझे कुछ पूछना था आपसे, अब रिप्लाई करो ना।

कई बार मैसेज भेजने के बाद भी दिव्या जवाब नहीं देती।

मनीष: ठीक है मैडम अगर आप रिप्लाई नहीं कर रही तो मैं आपके घर आकर ही आपसे पूछ लूंगा आज।

दिव्या ये मेसेज देख कर हँसने लगती है, वो जानती है कि मनीष राजेश के घर में होते हुए, घर आने का जोखिम नहीं उठाएगा।

मनीष के ऑफलाइन होते ही वो घर के दुसरे कामों में लग जाती है।

कुछ ही देर में राजेश भी आ जाता है, और उसके हाथ में एक गिफ्ट था जो वो दिव्या को पहनने को कहता है, दिव्या खोल कर देखती है तो उसमें एक काफी सेक्सी सी नाइटी थी। दिव्या उस नाइटी को अपनी एनिवर्सरी पर पहनने की कह कर राजेश को टाल देती है। पर फिर भी राजेश दिव्या को ऐसे ही तो नहीं छोड़ने वाला था, वो दिव्या को अपनी बाहों में भर कर उसके बदन को चूमना शुरू कर देता है। दिव्या भी राजेश को पूरा सपोर्ट करती है और उसे अपनी बाहों में भर लेती है। राजेश दिव्या के चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसके लबों को चूमने लगता है तो दिव्या भी अपने होठ खोलकर उसकी जीभ अपने मुंह में ले लेती है।

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राजेश का लंड दिव्या की चूत पर टकरा रहा था जो उसे और भी मदहोश कर रहा था, दिव्या राजेश के ऊपर झुकने लगती है तो राजेश एक एक कर दिव्या के कपड़े उसके बदन से अलग करने लगता है।

कुछ ही पलों में राजेश दिव्या को लेकर बिस्तर पर गिरा देता है और उसके बदन को चूमने लगता है। दिव्या अचानक राजेश के ऊपर आ जाती है और उसको पेट से चूमते हुए ऊपर की ओर बढ़ने लगती है।

राजेश ये एक्सपेक्ट नहीं कर रहा था, पर इसमें उसे काफी मजा आने लगता है। दिव्या का ये नया रूप झेलना उसके बस से बाहर था। वो दिव्या को अपनी बाहों में भरने लगता है और बिस्तर पर दोनों एक दूसरे को मसलने लगते हैं।

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राजेश दिव्या को झट से नीचे ला कर उसके मम्मे को ब्रा से बाहर निकालने लगता है। राजेश दिव्या के बदन को अब चूमता हुआ नीचे की ओर बढ़ने लगता है, दिव्या भी अपनी टांगे फैला लेती है पर राजेश पेट से ही वापस ऊपर आने लगता है, दरसल रेणुका की चूत चाटते हुए राजेश नशे में था पर इस समय वो जैसे दिव्या की चूत के पास गया उसकी स्मेल से वो उसे चाट नहीं पाया और वापस ऊपर की तरफ बढ़ गया, दिव्या काफी निराश होती है पर इस समय उसे सिर्फ अपने बदन की आग बुझानी थी। वो राजेश को जबरदस्त किस करके उसे उकसाती है कि वो उसके बदन को और रौंदे पर राजेश तो जैसे हमेशा की तरह जल्दी में ही था।
 
राजेश बिना देर किये दिव्या की चूत में अपना लंड उतार देता है। दिव्या भी लंड लेने के लिए उतावली तो थी पर वो अभी और टाइम लेना चाहती थी क्योंकि वो जानती है कि एक बार लंड अंदर जाने के बाद राजेश ज़्यादा देर होल्ड नहीं कर पाता है।

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पर राजेश दिव्या की चूत में जोरदार लगाना शुरू कर चुका था तो अब दिव्या भी अपनी टाँगे उठा कर राजेश का लंड अंदर तक लेने लगती है। राजेश के धक्के भी अब अपनी फुल स्पीड में आ चुके थे। दिव्या चाहती है कि राजेश अपनी स्पीड थोड़ी कम करे, क्योंकि उसे पता है इस तरह राजेश ज्यादा देर टिक नहीं पाएगा। पर इस समय उसे जो मजा मिल रहा था उसकी वजह से वह राजेश से कुछ नहीं कह पाती।

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दिव्या राजेश के धक्कों के साथ अपनी चूत को हिला हिला कर अपनी स्पीड उसके साथ मैच करने की कोशिश करती है पर कुछ ही पलों में राजेश दिव्या के बदन के ऊपर ही ढेर हो जाता है। हालांकि आज राजेश ने जिस तरह दिव्या की चूत में धक्के लगाये थे उससे उसे काफी मजा आया पर आज भी वह अंदर से प्यासी ही रह गई थी। दिव्या कुछ देर बिस्तर में पड़े रहने के बाद शांत हो जाती है और सोने की कोशिश करने लगती है। राजेश भी कुछ ही समय में गहरी नींद में डूब चुका था।

रात में दिव्या प्यास की वजह से उठकर किचन में चली जाती है। वह फ्रिज से पानी निकालने ही वाली थी कि उसे कोई अपने पीछे महसूस होता है। दिव्या अपने मुंह से कुछ आवाज निकाल पाती है इससे पहले ही उसे कोई हाथ दिव्या के मुंह पर आ जाता है। दिव्या बुरी तरह से जकड़ चुकी थी पर तभी एक जानी-पहचानी सी आवाज़ से वह शांत हो जाती है।

मनीष: आराम से मैम, मैं हूँ।

दिव्या: मनीष अखिर तुम्हें यहाँ आने की क्या जरूरत थी।

मनीष: मैंने तो कहा था कि अगर आप जवाब नहीं देंगी तो मैं खुद आ जाऊंगा।

दिव्या: मैंने तुम्हारा मैसेज नहीं देखा था, वर्ना मैं तुम्हें रिप्लाई जरूर देती।

मनीष: अब झूठ मत बोलो, मैम।
 
दिव्या: मैंने ऐसा कुछ नहीं किया। मैं सच में सो गई थी।

मनीष: हाँ सोते हुए तो मैंने भी आपको देखा है।

दिव्या: तुम जाओ ना प्लीज, मुझे डर लग रहा है।

मनीष: पहले मुझे अपनी गांड से कुछ देर मजे लेने दो, अब यहां आया हूँ तो आपको सजा तो दे ही दूंगा मुझे इग्नॉर करने की।

दिव्या: अब आगे से कभी ऐसे इग्नोर नहीं करूंगी तुम प्लीज जाओ।

मनीष: समझो ना मैडम, बस कुछ देर, मुझे पता है आप फिर ऐसा चांस नहीं देने वाली।

दिव्या: फिर कभी कर लेना लेकिन अभी नहीं।

मनीष: देख लो मैडम, जब मैं कहूंगा आपको आज का हिसाब पूरा करना होगा।

दिव्या: ठीक है बाबा अब जाओ।

मनीष: जाता हूँ पर आपकी ऐनिवर्सरी पर आपको ऐसा तड़पता नहीं छोड़ सकता।

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इतना कह कर मनीष नीचे की और बैठने लगता है और दिव्या की चूत पर कपड़ों के ऊपर से किस करते हुए उसकी कमर को पकड़ लेता है। दिव्या चाह कर भी मनीष को रोक नहीं पाती और मनीष उसकी पेंटी को साइड कर उसकी चूत को चाटना शुरू कर देता है।
 
दिव्या कुछ कह नहीं पाती, बस सिसकियाँ भरती रह जाती हैं, वो कब मनीष के लिए अपनी टाँगे और फैला लेती है, उसे खुद पता नहीं चलता। धीरे-धीरे मनीष दिव्या की पेंटी को नीचे की सरकाते हुए उतार लेता है। दिव्या के मचलने से वो समझ जाता है कि अब दिव्या किसी भी वक्त झड सकती है।

दिव्या: मनीष, राजेश घर में ही है समझो।

मनीष: आप चाहती हैं कि मैं अभी चला जाऊँ।

मनीष जानकर अपना मुँह दिव्या की चूत से हटा कर उसके चेहरे की और देखता है और उससे नजरे मिलाने की कोशिश करता है।

दिव्या बस अपना मुंह दूसरी और कर लेती है। मनीष दिव्या की एक टांग घुटनों से पकड़कर ऊपर की और उठाने लगता है जिसमें उसे कुछ मेहनत नहीं करनी पड़ती, क्योंकि दिव्या उसका पूरा साथ देती है।

मनीष उसकी टांग उठा कर अपने कंधे पर रख लेता है और एक बार फिर उसकी चूत पर अपना मुंह लगा देता है। इस बार मनीष का हमला और भी तेज था, वह सीधा दिव्या की कई लंडो से चुदी हुई चूत में अपनी जीभ डाल देता है और उसका सारा रस चूसने लगता है।

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कुछ ही पलों में दिव्या झड़ने लगती है और उसकी आह इतनी तेज हो जाती है कि उसे खुद के मुंह को अपने हाथों से दबाना पड़ता है। मनीष दिव्या की चूत को तब तक चाटता रहता है जब तक कि उसे पूरा साफ़ ना कर दे, जिस समय मनीष वापस ऊपर उठता है उसका मुंह दिव्या के रस में पूरा सना पड़ा था, जाने से पहले वह दिव्या की आँखों में देख कर स्माइल करता है और उसके चेहरे को अपने हाथों में ले कर अपने होंठ उसकी ओर बढ़ा देता है, आज मनीष के किस करने में हवस से ज्यादा मोहब्बत थी।

दिव्या भी मनीष की किस में पूरा साथ देती है। दिव्या भी मनीष की किस में पूरा साथ देती है। मनीष अपना एक हाथ दिव्या की मोटी गांड पर फिराने लगता है और दिव्या आहें भरने लगीं। दिव्या सोचती है की आज तक सबने उसे जबरदस्ती ही चोदा है बस एक मनीष ही है जो उसकी बात मान लेता है। वो सोचती है की क्यों न आज वो टीचर स्टूडेंट का रिश्ता अपने मन से निकाल कर मनीष का साथ दे।

सच तो ये था की उसके इस ख्याल के पीछे उसकी वो प्यास थी जो राजेश आज भी बुझाने में नाकाम रहा था। दिव्या मनीष को दुसरे कमरे में चलने का इशारा करती है तो मनीष की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता। वो फ़ौरन दिव्या के साथ दुसरे कमरे में चला जाता है और दिव्या रूम का दरवाजा बंद कर लेती है। मनीष दिव्या को बेड पर लिटा कर उसके साथ लेट जाता है और उसे फिर से किस करने लगता है।

अब दिव्या मनीष की शर्ट खोलने लगती है। मनीष समझ जाता है की आज उसे सब्र का फल मिलने वाला है। दिव्या बेताबी से मनीष के कपड़े उतार रही और मनीष चुपचाप उसको देख रहा था।

फिर मनीष भी दिव्या को चूमते हुए उसकी ब्रा खोलने की कोशिश करने लगता है।

दिव्या: जल्दी करो मनीष। हमारे पास ज्यादा टाइम नहीं है।

दिव्या के इतना कहते ही मनीष दिव्या के मम्मों को ब्रा की कैद से आजाद कर देता है। ब्रा खुलते ही दिव्या के मम्मे हवा में लहराने लगे। मनीष दिव्या के एक निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा। दिव्या सिसकारी भरने लगती है।

दिव्या की पैंटी मनीष पहले ही उतार चूका था तो अब दोनों पूरे नंगे थे। दिव्या मनीष के लंड को सहलाती है और फिर मनीष के इशारा करने पर लंड को मुँह में लेकर आइसक्रीम के जैसे चूसने लगती है।

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