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Adultery दिव्या का सफ़र

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राजेश: क्या हुआ अंकल, अभी तो बहुत बुराई कर रहे थे कि मेरी वाइफ पुरानी सोच की है, अब क्या हुआ।

लाला: मानना पड़ेगा, दिव्या तो इन कपड़ों में किसी की भी सांस रोक सकती है।

रेणुका: अब तुम दोनों दिव्या को ही निहारते रहोगे या आगे का प्रोग्राम चलू करे।

लाला: हा हा क्यों नहीं, तुम जाकर किचन से केक और बाकी सामान ले आओ।

रेणुका: केक तो काफी भारी है, मैं सब सामान अकेले नहीं ला पाऊंगी।

कर्नल कुछ कहता है इससे पहले ही राजेश उसकी हेल्प के लिए साथ चलने लगता है। किचन में पहुंचते ही राजेश रेणुका को पीछे से जकड़ लेता है और उसके मम्मे अपने हाथों में भर लेता है।

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रेणुका: आह, क्या बात है मिस्टर एनिवर्सरी मेरे साथ मनानी है क्या।

राजेश: नहीं मैं तो बस ऐसे ही हग कर रहा था।

रेणुका पलटती है और सीधा राजेश के लंड पर अपना हाथ फेरती है।

रेणुका: अच्छा, पर ये तो कुछ और ही कह रहा है।

राजेश सिसकी सी भरता है: ये तो बस ऐसे ही। सच कहूँ तो तुम इतने करीब हो पर तुम्हे छू भी नहीं पा रहा हूँ। सुबह से मन कर रहा है कि तुम्हारे साथ टाइम बिताने को मिल जाए।

रेणुका राजेश के लंड को सहलाती रहती है: अगर मेरे साथ टाइम बिताओगे तो दिव्या का क्या होगा।

राजेश: हम्म, प्रॉब्लम तो यही है, उसके होने की वजह से ही तो तुम अभी तक बची हुई हो, वरना उसी शॉवर के नीचे ही कर्नल की जगह मैं तुम्हारी ले रहा होता।

रेणुका: तुम मेरी लोगे तो कर्नल को दिव्या की दिलवानी पड़ेगी। कहो तो आज कर्नल को दिव्या के पीछे लगा दूं।
 
दरअसल उसने जान कर राजेश और रेणुका को अंदर भेजा था जिससे रेणुका राजेश को तैयार करे की वह दिव्या को खुद आज रात कर्नल को सौंप दे, पर राजेश ने सिर्फ दिव्या को ब्रा पेंटी में रख कर कर्नल से उसे उतरवाने तक की ही बात मानी थी।

कुछ ही देर में हल्के म्यूजिक के साथ केक काटने का प्रोग्राम शुरू हो जाता है, दिव्या और राजेश केक काट कर पहले एक दूसरे को खिलाते हैं, फिर राजेश केक का एक टुकड़ा रेणुका और कर्नल के मुंह में देता है, कर्नल भी केक का एक पीस उठा कर पहले राजेश के मुंह में डालता है, फिर दिव्या के मुंह की ओर बढ़ा देता है, दिव्या चाहती तो नहीं थी पर वह अपना मुंह थोड़ा सा खोल लेती है और कर्नल कुछ हिस्सा उसके मुंह में डालकर बाकी उसके फेस पर रगड़ देता है, सभी हँसते हैं पर दिव्या थोड़ा नाराज जो जाती है और अपना फेस धोने के लिए वाशरूम चली जाती है।

लाला: लगता है दिव्या को पसंद नहीं आया मेरा केक लगाना।

राजेश: आप जानते तो हैं ना अंकल वह कितने पुराने ख़यालात की है, चलिए कोई नहीं मैं मानता हूँ उसे।

लाला: अरे नहीं मैंने नाराज किया है तो मैं ही सॉरी बोल कर मनाता हूँ। तुम रुको।

दिव्या अपना फेस धोने के बाद किचन में पानी पी रही थी। वो जैसे ही बोतल वापस फ्रिज में रखती है वहां कर्नल आ जाता है। कर्नल उसे फ्रिज से सटा देता है और उसकी ड्रेस में हाथ डाल कर उसकी पेंटी के ऊपर से उसकी चूत रगड़ने लगता है।

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लाला: यू बिच, तू चाहती है कि मैं तेरे उस नामर्द पति के सामने ही तेरे मुंह में अपना लंड डाल दूं।

दिव्या: आप आखिर मुझसे चाहते क्या हो।

लाला: बस मैं जो हल्का-फुल्का एन्जॉय कर रहा हूं वो करने दे, मेरा मूड खराब करने की जरूरत नहीं है।

दिव्या: प्लीज़ मुझे छोड़ दीजिए, आपने कई बार मेरे साथ जबरदस्ती की है और मैंने अब तक अपने पति से शिकायत नहीं की।

लाला: करदे ना फिर, बता दे कितनी बार मेरा लंड चूसा है तुने।

दिव्या: आप समझते क्यों नहीं, ये सब सही नहीं है। मैं अपनी शादी खराब नहीं करना चाहती।

लाला: वो तो अब तेरे उपर है।

कर्नल दिव्या को छोड़ देता है और उसके सामने अपनी उंगली कर देता है।

लाला: लुक हाउ यू लाइक मी।

दिव्या अपनी चूत के पानी में सनी कर्नल की उंगली देख अपनी नज़रे नीचे कर लेती है और किचन से बाहर आ जाती है, उसके साथ पीछे ही कर्नल भी आ जाता है। जब वो बाहर आते हैं तो राजेश और रेणुका पहले ही टेबल पर एक साथ वाली चेयर पर बैठे हुए थे, दिव्या भी राजेश के सामने वाली चेयर पर बैठ जाती है और कर्नल रेणुका के सामने। कर्नल रेणुका को इशारा करता है तो वो चार ग्लास में वाइन डाल देती है पर दिव्या मना करती है।
 
राजेश: हा हा अंकल ये बिल्कुल नहीं पीती।

लाला: जानता हूँ नहीं पीती लेकिन थोड़ा साथ तो दे सकती है ना। वैसे भी इसमें नशा ना के बराबर है।

दिव्या: नहीं अंकल मुझे काफ़ी कड़वी लगती है ये।

लाला: (वाइन का ग्लास दिव्या के होठों की और बढ़ाते हुए) पहले पी कर तो देखो।

दिव्या ग्लास अपने हाथ में ले लेती है और एक सिप मार लेती है। इसी बीच रेणुका राजेश का ग्लास में थोड़ी ज्यादा वाइन भर देती है। अपस में बातें शुरू हो जाती हैं। और दिव्या बस अपने उस एक ग्लास में ही हल्के हल्के सिप मारती रहती है, रेणुका कर्नल से इशारों में पूछती है दिव्या को ज्यादा पिलाने की पर वो उसे मना कर देता है और राजेश की ओर इशारा करता है।

लाला: कुछ भी कहो राजेश मैं गलत था दिव्या के बारे में।

राजेश: वो कैसे।

लाला: मुझे लगा था ये सिर्फ ट्रेडिशन ही पहनती सकती है पर सच कहूँ तो इस ड्रेस में ये काफी खूबसूरत लग रही है।

राजेश: दिव्या पर तो हर ड्रेस अच्छी लगती है।

लाला: कॉलेज टाइम में तो बहुत बॉयफ्रेंड रहे होंगे तुम्हारे दिव्या।

दिव्या: (थोड़ा झेपते हुए) जी नहीं।

लाला: ऐसा तो हो ही नहीं सकता, अब राजेश के सामने नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं।

एक और सब बात कर रहे थे वहीं दूसरी और रेणुका टेबल के नीचे से राजेश के पैरों पर अपने पैर रगड़ रही थी। राजेश डर भी रहा था कि कहीं दिव्या को पता न चल जाए वहीं उसका लंड मानो उसकी पैंट फाड़ कर बाहर आने को तैयार था।

तभी कर्नल अपने खाली ग्लास की और रेणुका को इशारा करता है पर कर्नल के सामने बैठे होने की वजह से उसे उसका ग्लास लेने में थोड़ी मेहनत करनी पड़ती है, तो कर्नल उसे अपनी चेयर राजेश और अपने बीच में लगाने को कहता है जिससे वो दोनों को आसानी से सर्व कर सके, हालांकि उसके मन में तो कुछ और ही चल रहा था।

रेणुका अपनी चेयर कर्नल और राजेश के बीच में ले आती है और उनके बीच के स्पेस में एडजस्ट होकर बैठने लगती है जिससे कर्नल को भी थोड़ा दिव्या की और खिसकना पड़ता है।

रेणुका अब दोनों के ग्लास में ड्रिंक बनाती है पर आज राजेश भी धीरे-धीरे पी रहा था क्योंकि वो अपनी ऐनिवर्सरी बेहोश होकर नहीं बिताना चाह रहा था पर फिर भी उस पर नशे का असर तो हो ही रहा था। अचानक उसके माथे पर पसीना आ जाता है जब उसे अपनी जांघो पर कुछ हिलता हुआ महसूस होता है।

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रेणुका अपने हाथ को धीरे-धीरे राजेश के लंड की ओर ले जा रही थी और उसकी धड़कन बढ़ने लगी थी कि कहीं दिव्या को पता न चल जाए। पर कहते हैं ना जब लंड खड़ा होता है तो दिमाग चलना खुद बंद कर देता है।

राजेश को इनिशिएट ना करते देख रेणुका खुद उसका हाथ अपनी जांघ पर रख लेती है और अब वो भी उसकी जांघों में हाथ फेरने से खुद को रोक नहीं पाता और बड़ी सावधानी से वो उसकी जांघों को साड़ी के ऊपर से मसलने लगता है।
 
जैसे-जैसे राजेश वाइन की सिप ले रहा था उसकी हिम्मत और बढ़ रही थी, अब उसका पूरा मन किसी तरह रेणुका की साड़ी में हाथ डालने का था उधर मौका देख कर कर्नल भी अपना हाथ दिव्या की जांघ की ओर बढ़ा देता है और उसे टच करता है।

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दिव्या की टांगे तो पहले ही काफी हद तक उसकी ड्रेस की वजह से नंगी थीं, उसकी चिकनी जंघ को छू कर कर्नल का लंड भी हिलोरे मारने लगता है। कर्नल हंस कर राजेश की तरफ देखता है तो राजेश समझ जाता है कि कर्नल रेणुका और उसके बीच जो हो रहा है उसे अच्छे से देख सकता है, पर कर्नल से उसे कैसा डर, हालांकि वह इस बात से अनजान था कि कर्नल भी उसकी वाइफ की चूत की तरफ हाथ बढ़ा रहा था। कर्नल की ऐसी हरकत से दिव्या की सांस उखड़ने लगती है, वह एक्साइटेड भी थी और डर भी रही थी कि कहीं राजेश कर्नल का हाथ उसकी नंगी जांघ पर न देख न ले।

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दिव्या चाह कर भी ज्यादा रिएक्ट नहीं कर पाती। वहीं राजेश भी ज्यादा चांस लेने में डर रहा था। ऐसे में कर्नल राजेश की और देखता है और उससे दिव्या के साथ डांस की परमिशन मांगता है।

लाला: राजेश तुमको दिक्कत न हो तो क्या मैं तुम्हरी बीवी के साथ डांस कर सकता हूँ।

राजेश: क्यों नहीं अंकल, अगर दिव्या को कोई दिक्कत न हो तो।

इतना कह कर्नल दिव्या की ओर अपना हाथ बढ़ा देता है, दिव्या जानती है कि अगर वह टेबल पर बैठी रही तो भी कर्नल रुकने वाला नहीं है, वह कर्नल के हाथ में अपना हाथ दे देती है, कर्नल राजेश की और आंख मारता है और दिव्या को उसी कमरे में थोड़ा सा डार्क स्पेस में ले जाता है और हल्के म्यूजिक पर उसके साथ नाचने लगता है। कर्नल अपना लंड जो उसकी पैंट में टेंट बनाए खड़ा था बार बार दिव्या की चूत के आस पास छुआ रहा था, डर की वजह से दिव्या बार बार राजेश की ओर मुड़कर देखती है।

लाला: बार बार वहाँ क्यों देख रही हो जान।

दिव्या: अंकल, राजेश को शक हुआ तो मेरी लाइफ खराब हो जाएगी।

लाला: कोई शक नहीं होगा उसे। तू बस ज्यादा नखरे मत कर।

दिव्या की पीठ राजेश की ओर थी, डांस करते हुए कर्नल घूम जाता है और अब उसकी पीठ राजेश की तरफ हो जाती है।

दिव्या कर्नल के बड़े शरीर के पीछे छुप चुकी थी, वह खुद भी अब राजेश को नहीं देख पा रही थी, कर्नल अब अपना हाथ दिव्या की कमर से नीचे ले कर जाने लगता है तो उसकी आंखें बंद होने लगती हैं, वह हल्की आवाज में कर्नल को मना करती है।
 
लाला: स्विमिंग पूल से क्यों चली गई थी दिव्या।

दिव्या: वो आपने गलत तरीके से छुआ था मुझे पूल में।

लाला: अच्छा। और अगर मैं अभी छूना चाहूं तो।

दिव्या: प्लीज़ अंकल ऐसा मत करना।

लाला: तेरी मखमली गांड छुए बिना कौन रह सकता है।

अगले ही पल कर्नल दिव्या की गांड को पकड़ कर मसलने लगता है।

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दिव्या की चूत पूरी गीली हो चुकी थी जिसका अंदाज़ा कर्नल को भी हो चुका था, वो दिव्या के साथ थोड़ा सॉफ्ट बिहेव करने लगता है और उसकी गांड पर हाथ रख कर उसे अपनी ओर खींच लेता है, अब दोनों के बीच में कोई गैप नहीं बचा था और कर्नल के मसलने से दिव्या की भी सिसकियां छूटने लगती हैं, वहीं राजेश भी रेणुका की साड़ी को अब उपर उठा चुका था पर वह खुलकर आगे कुछ भी नहीं कर पा रहा था।

कर्नल नाचते हुए अपने लंड को दिव्या चूत की में रगड़े जा रहा था, दिव्या भी उसके साथ ही अपने शरीर को स्विंग कर रही थी।

लाला: किस कलर की पेंटी पहनी है तुमने दिव्या।

दिव्या: व्हाइट।

लाला: मुझे यकीन नहीं है।

दिव्या: मैं सच बोल रही हूँ।

लाला: तो ठीक है मुझे देखनी है अभी।

कर्नल अपना हाथ नीचे से दिव्या की ड्रेस में डालने लगता है तो वो थोड़ा घबरा जाती है।

दिव्या: ये क्या कर रहे हो अंकल, राजेश ने देख लिया तो।

लाला: ओह, फिकर मत करो, उसे कुछ पता नहीं चलेगा।

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कर्नल नाचते हुए दिव्या को उसी कमरे में एक खम्भे की आड़ में ले जाता है और जल्दी से नीचे बैठ कर उसकी पेंटी उसकी टांगों से नीचे खींच कर उतार देता है और उसे अपनी नाक के आगे रख कर इस तरह से सूंघता है कि दिव्या शर्म से पानी पानी हो जाती है।

दिव्या के मन में एक अलग अलग तरह के मिले जुले ख्याल आ रहे थे। ये सब कर्नल ने काफी जल्दी कर दिया और दिव्या के रियेक्ट करने से पहले ही वापस दिव्या के साथ नाचने लगा, अब दिव्या का दिल काफी जोरों से धड़क रहा था और वो बिना पेंटी के कर्नल के साथ नाच रही थी। उसकी जांघ उसकी चूत से रिसने वाले रस से भीग गई थी।
 
लाला: सो दिव्या, यू लाइक माय डिक ?

दिव्या: ऐसा कुछ नहीं है।

लाला: ओह रिएली, तुमने शायद देखा नहीं है कि तुम्हारी पेंटी कैसे भीगी हुई है, तुम कहो तो मैं दिखाऊं तुम्हें।

दिव्या: नहीं अंकल, प्लीज उसे अपनी जेब में ही रहने दो।

लाला: तो बताओ ना, यू लाइक ओर नॉट।

दिव्या अभी भी चुप ही रहती है, उसे समझ नहीं आता कि सच कैसे कहे। तभी कर्नल उसके हाथ को पकड़ कर अपनी पेंट में डाल लेता है।

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लाला: देखो ना दिव्या मैं कितना तड़प रहा हूँ तुम्हारे लिए।

कर्नल का लंड दिव्या के हाथ में आते ही उसके शरीर में करंट दौड़ जाता है। न जाने क्यों उसका हाथ खुद भी कर्नल के लंड को जकड़ लेता है।

लाला: आह दिव्या, टेक इट आउट।

दिव्या: ये क्या कह रहे हो आप।

लाला: कम ऑन, मैं जानता हूँ तुम्हें ये चाहिए। बाहर निकालो इसे।

दिव्या: नहीं अंकल, मैं नहीं कर सकती।

लाला: क्यों डर रही हो दिव्या, तुम्हारा पति तुम्हें नहीं देख सकता ऐसे। जो कह रहा हूँ वो करो।

कर्नल उसके मम्मे मसलते हुए कहता है। दिव्या धीरे-धीरे कर्नल के लंड को बाहर निकाल लेती है और अपनी नज़रें नीचे कर जब वो उसको देखती है तो उसकी नजर वहीं टिक जाती है। कर्नल एक-दो बार अपना लंड दिव्या के हाथ से हिलाकर उसे छोड़ देता है पर दिव्या का हाथ अब रुकता नहीं।

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कर्नल भी ये देख कर खुश था, वो जानता है कि अब दिव्या उसके काबू में है। रेणुका भी ये सब समझ रही थी तो वो खुद कर्नल से पूछती है कि खाना लगाने को। कर्नल भी उसे हाँ कह देता है, रेणुका राजेश की और मुस्कुरा किचन की ओर चली जाती है जिसका राजेश भी बेशब्री से इंतजार कर रहा था।
 
रेणुका के किचन में पहुंचते ही एक बार फिर राजेश उसे पीछे से दबोच लेता है, राजेश के हाथ लगते ही रेणुका घूम जाती है और राजेश को और ललचाती है, राजेश झट से रेणुका का पल्लू उसके बदन से अलग कर देता है।

राजेश: कितना तड़पाती हो तुम मुझे।

रेणुका बिना कुछ कहे उसके होंठों को चूमना शुरू कर देती है।

वहीं राजेश के जाते ही कर्नल दिव्या को घुमा कर उसकी गांड पर अपना लंड मसलने लगता है, दिव्या की ड्रेस इतनी उठ चुकी थी कि अब कर्नल का लंड सीधे उसके नंगे बदन पर रगड़ रहा था, दिव्या अपने होश खो बैठी थी, उसे तो ये भी नहीं पता था की राजेश अब रूम में नहीं है।

कर्नल एक हाथ से उसके गले को पकड़ कर हग करता है और दूसरे से अब उसकी चूत को सहलाते हुए पीछे से उसकी गांड पर अपना लंड रगड़ता है।

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दिव्या भी अपना हाथ कर्नल के बालों में ले जाकर उसे सपोर्ट करती है। वो मुंह से तो कर्नल को मना करती है पर रह-रह कर अपनी गांड को खुद भी कर्नल के लंड पर मसलने लगती है।

कर्नल भी अपना हाथ अब दिव्या के गले से नीचे की ओर ले जाकर उसकी ड्रेस में डाल कर उसकी चून्चिया मसलने लगता है।

दिव्या: आह अंकल, प्लीज मैं शादीशुदा हूँ।

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लाला: मैं जानता हूँ मेरी जान पर शायद तुम नहीं जानती की शादी तो लाइसेंस है खुल कर चुदने चुदवाने का। लेकिन क्या तुम सच में चाहती हो कि मैं रुक जाऊँ।

दिव्या अब कोई जवाब नहीं देती, कर्नल जो लगातार अपनी मोटी उंगली उसकी चूत में डाल रहा था अब दिव्या छोड़ देता है।

दिव्या बस दीवार से टिकी तरसती निगाहों से कर्नल को देखती रह जाती है कि अचानक उसने उसे क्यों छोड़ दिया। कर्नल भी उसकी प्यास काफी बढ़ा चुका था, वो फिर से दिव्या के नजदीक जाता है तो दिव्या अपने होंठों को खोल लेती है, कर्नल उसके होंठों को चूमते हुए एक बार फिर उसकी चूत में अपनी उंगलियां डाल देता है।

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वहीं अब राजेश भी रह नहीं पा रहा था, वो पागलों की तरह रेणुका के बदन को चूम रहा था पर रेणुका ज्यादा रिस्पोंस नहीं दे रही थी।
 
राजेश: क्या हुआ रेणुका अब क्यों तरसा रही हो?

रेणुका: काफी देर हो गयी है कहीं दिव्या को शक न हो जाए।

राजेश: बस दो मिनट मेरा लंड चूस लो प्लीज।

इतना कह वो रेणुका को नीचे बैठाने लगता है, रेणुका भी ज्यादा मना नहीं करती और उसके लंड के लिए अपना मुंह खोल देती है।

राजेश को तो जैसे जन्नत मिल गई हो वो रेणुका के मुँह में लंड डालकर चोदने लगता है पर रेणुका जानकर इसी बीच एक बर्तन अपने हाथ से छोड़ देती है जिसकी आवाज सुनकर कर्नल बाहर से आवाज लगाकर पूछता है कि क्या हुआ।

राजेश: कुछ नहीं अंकल, वो बस कुछ गिर गया था।

लाला: ओके, कितनी देर है खाना आने में।

राजेश: बस दो मिनट में आते हैं।

राजेश को अपना लंड रेणुका के मुँह से पहले ही निकलना पड़ता है, दिव्या भी ये सुनकर निराश हो जाती है क्योंकि वो अब कैसे भी झड़ जाना चाहती थी। कर्नल राजेश के आने की आहट सुनते ही दिव्या को म्यूज़िक पर हल्का सा घुमा कर पहले वाली पोजीशन में ले आता है और नोर्मल डांस करने लगता है।

राजेश: खाना लगने वाला है अंकल, अब कितना नाचोगे आप। आ जाओ।

लाला: हम्म, बस ये गाना खत्म हो जाए, तुम इतने टेबल रेडी करो।

कर्नल दिव्या की जांघों को टच कर थोड़ा सा उठाने की कोशिश करता है तो दिव्या उसका इशारा समझ जाती है, वो झट से अपनी एक टांग उठा कर कर्नल को अपनी जांघों का एक्सेस देती है, हालांकि उसे डर था कि कर्नल का लंड अब भी उसकी पेंट से बाहर निकला हुआ है, प्रीकम से उसकी ड्रेस पर निशान आ सकते।

कर्नल अपना हाथ उसकी जांघों से फेरता हुआ उसकी ड्रेस ऊपर को सरकाने लगता है।

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दिव्या: खाने की टेबल तैयार होने वाली है अंकल, अब ये सब मत करो प्लीज़।

लाला: डोंट वरी, अभी गाना खत्म होने में दो मिनट और हैं।

इतना कह कर्नल दिव्या को अपने बदन पर पूरी तरह झुका लेता है। कर्नल का लंड दिव्या की चूत पर दस्तक दे रहा था, कर्नल को अपना हाथ दिव्या की चूत तक ले जाने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी तो वह दिव्या को हल्का सा और अपनी बॉडी पर झुका कर दिव्या की ड्रेस पीछे से पूरी तरह उसकी गांड से ऊपर उठा देता है और अपनी उंगलियों को उसकी चूत में डाल कर फिंगरफ़क करने लगता है।

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कर्नल की मोटी उंगलियाँ दिव्या को किसी लंड से कम मजा नहीं दे रही थीं।

एक तरफ जहाँ उसकी चूत में कर्नल की उंगलियाँ उसे मदहोश कर रही थीं, वहीं दिव्या की ड्रेस ऊपर होने से कर्नल का नंगा लंड भी उसकी चूत पर रगड़ रहा था, दिव्या तड़प उरही थी, उसका दिमाग मानों बंद पड़ गया हो, उसे इस वक्त सिर्फ किसी भी तरह लंड चाहिए था। वह पागलों की तरह अपनी चूत कर्नल के लंड पर रगड़ रही थी पर कर्नल लंड अंदर नहीं जाने दे रहा था।
 
दिव्या: ओह, अंकल।

लाला: क्या हुआ दिव्या।

दिव्या: अंकल प्लीज़।

लाला: प्लीज़ क्या माय डियर।

कर्नल अपनी उंगलियों और तेज चलाने लगता है। दिव्या को लगता है कि वह किसी भी समय अब झड़ने वाली है।

दिव्या: उम्म्म, आआह्ह्ह

दिव्या सिर्फ सिसकी भर के रह जाती है।

कर्नल अचानक अपनी उंगलियों की स्पीड कम कर देता है, जिससे दिव्या और तड़प उठती है।

दिव्या: अंकल प्लीज़।

लाला: क्या प्लीज़ दिव्या, तुम बोलोगी नहीं तो मैं समझूंगा कैसे।

कर्नल हल्की सी स्माइल दिव्या को देता है। और इतने में गाना भी खतम हो जाता है। कर्नल दिव्या की टांग खुद ही छोड़ देता है, दिव्या का मन नहीं था इस समय हटने का पर वह जानती है कि अब इसका कोई फ़ायदा नहीं क्योंकि खाना टेबल पर लग चुका था और उसके पास और कोई चारा नहीं बचा था। दिव्या अपनी ड्रेस नीचे कर कर्नल के पीछे चल देती है।

सभी लोग खाना शुरू करते हैं और फिर से एक बार रेणुका, कर्नल और राजेश के ग्लास वाइन से भर देती है, कर्नल इशारा कर दिव्या का ग्लास भरने को कहता है और फिर भरा हुआ गिलास खुद दिव्या के मुँह की ओर बढ़ा देता है, दिव्या इस बार मना नहीं कर पाती और एक ही बार में कर्नल आधा ग्लास उसके मुँह पर लगा कर खाली करवा देता है, दिव्या का सर घूम सा जाता है पर उसे ज्यादा टेंशन कर्नल के हाथ की थी जो फिर एक बार उसकी जांघों के बीच में घुसा जा रहा था।

वहीं राजेश भी अब काफ़ी उत्तेजित हो चुका था, उसने रेणुका की साड़ी पूरी तरह से उसकी जांघों में चढ़ा दी थी, उसका हाथ लगातार रेणुका की जांघ मसलने में लगा था।

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जैसे तैसे कर दिव्या अपनी ड्रिंक ख़तम करती है पर वो जानती है कि अब कर्नल नहीं रुकने वाला और उसका हद से बढ़ना उसकी और राजेश की शादी के लिए ठीक नहीं है तो वो सर दर्द का बहाना कर राजेश से अपने कमरे में चलने को कहती है, राजेश को भी अब अपने लंड को शांत करना मुश्किल हो रहा था, वो उठने ही वाला था कि कर्नल उसे रोक लेता है।

लाला: तुम जाओ दिव्या, राजेश 10 मिनट में आ जाएगा।

दिव्या: ठीक है अंकल।
 
राजेश कमरे में जाते ही कमरे को बंद कर देता है पर उसे दिव्या कहीं दिखती नहीं, वो दिव्या को आवाज देता है तो दिव्या वॉशरूम से निकलकर उसके सामने उसकी दी हुई नाइटी में आ जाती है।

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दिव्या नाइटी में बेहद हॉट लग रही थी। उसे देखते ही राजेश खुद को रोक नहीं पाता और सीधा अपने होंठ उसके होंठों की तरफ बढ़ा देता है। जितना प्यासा आज राजेश था शायद उतनी ही दिव्या भी थी।

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दिव्या झट से उसके लबों को चूमना शुरू कर देती है और राजेश किस करते हुए दिव्या को बेड की तरफ ले जाने लगता है, जल्द ही दिव्या बेड पर बैठ जाती है और राजेश के बदन से चिपकने लगती है। वो इस समय जल्द से जल्द राजेश का लंड अपनी चूत में उतार लेना चाहती थी।

दिव्या अपना हाथ राजेश की जांघों में डालने लगती है तो राजेश न चाहते हुए भी उसका हाथ रोकने की कोशिश करता है, उसे डर था कि कहीं उसका लंड इस समय छेड़ने से ही झड़ न जाए। और वैसे भी वह जल्दी से जल्दी कर्नल को किया वादा पूरा कर दिव्या के साथ फ्री होकर चुदाई करना चाहता था।

राजेश अंदर ही अंदर डर रहा था कि कैसे ये सब हो पाएगा। कहीं दिव्या को पता न चल जाए। इसी डर के बीच, राजेश दिव्या को खड़ा कर दिव्या के होंठों को चूमता हुआ उसे अचानक टर्न करके उसकी आँखों पर पहले एक काला कपड़ा बांध उसे ब्लाइंड फोल्ड करता है, फिर उसके हाथों को हैंडकफ से बाँधने लगता है।

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दिव्या के लिए ये सब नया था, पहले कभी राजेश ने ऐसा नहीं किया था पर इससे दिव्या को एक थ्रिल का अहसास फील होता है।
 
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