25 टैबू (वर्जना)
तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे सिद्धू?” आशा फोन पर चिल्लाई।
मैं ऐसा ही करूंगा मोम..” दूसरी तरफ से सिद्धू की बेचैन आवाज आई- “अगर मैं आपके साथ नहीं जी सकता तो फिर जीने का कोई मतलब ही नहीं बनता.."
तुम मेरे साथ ही तो जी रहे हो मेरे बच्चे..” आशा का जैसे रोना छूट पड़ा- “मैं माँ हूँ तेरी, हमेशा तेरे साथ हूँ, जिंदगी भर..."
“नहीं मोम..” सिद्धू जिद पर अड़ा हुआ था- “आप जानती हैं मैं क्या कह रहा हूँ। माँ बेटे का रिश्ता तो हमने उसी रात खतम कर दिया था जब पहली बार मैं और आप एक मर्द और औरत की तरह साथ थे...”
“चुप हो जा सिद्धू। प्लीज... मैं हाथ जोड़ती हूँ तेरे...” आशा ने पानी से भरी आँखें बंद करते हुए कहा।
नहीं माँ... अब चुप नहीं हो सकता मैं। एक महीने से घुट घुट कर जी रहा हूँ पर अब और नहीं। अब नहीं जी पाऊँगा मैं...”
और तब पहली बार आशा को एहसास हुआ के वो लड़का कितना सीरियस था। वो एमोशनल होकर यूँ ही बकवास नहीं कर रहा था। उसकी आवाज में शामिल संजीदगी पहली बार आशा पर जाहिर हुई।
नहीं सिद्धू.. तुझे मेरी कसम है। कुछ उल्टा सीधा मत करना..” आशा ने कहा।
बहुत देर हो चुकी माँ... बहुत देर हो चुकी..."
कोई देर नहीं हुई सिद्धू। मेरी बात सुन...” आशा ने समझने की कोशिश की।
आप मेरी बात सुनो माँ..." सिद्धू ने बात बीच में ही काट दी- “क्या चाहती हो आप... मैं तो दोनों तरफ से पिस रहा हूँ ना... अगर मैं सब भूलकर फिर आपके साथ माँ बेटे का रिश्ता बना हूँ तो सारी जिंदगी अपने आपसे आँख नहीं मिला पाऊँगा की मैंने अपनी माँ के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाया था। दूसरी तरफ से मैं अगर ये सोचें की। मैं कितना चाहता हूँ आपको, कितना तरसता हूँ आपके लिए, एक बेटे की तरह नहीं पर एक मर्द की तरह तो भी नुकसान मेरा ही है क्योंकी आपका कहना है की हम एक नहीं हो सकते...”
तूं अच्छी तरह जानता है की हम क्यों एक नहीं हो सकते। समझाया था मैंने तुझे उस दिन...” आशा लगभग चिल्लाती हुई बोली।
क्या सिर्फ वही एक वजह है..” सिद्धू ने पूछा।
“तू मेरा बेटा है और मैं तेरी माँ। इससे बड़ी वजह और क्या हो सकती है..” आशा इस बार चिल्ला ही पड़ी- “पाप है ये। घोर पाप..”
तो ठीक है माँ। फिर एक पाप और कर लेने दो मुझे। इस तरह से जिंदा नहीं रह सकता मैं। बस अब बर्दाश्त नहीं होता..."
सिद्धू सुन... कुछ उल्टा सीधा नहीं करना। मेरी कसम है तुझे। अपने साथ तूने कुछ भी किया तो...” इससे पहले की आशा बात पूरी करती, सिद्धू फोन काट चुका था।
आशा ने फौरन दोबारा फोन मिलाया, पर सिद्धार्थ का सेल स्विच्ड आफ था। उसने फौरन अपने घर का लण्डलाइन नंबर मिलाया, पर बिजी टोन आती रही। यानी किसी ने रिसीवर को उठाकर एक तरफ रखा हुआ था। वो बेचैन हो उठी। समझ नहीं आया की क्या करे?
एक बार को उसने किसी और को फोन करने की सोची पर फिर ये ख्याल आते ही रुक गई की क्या कहेगी... की उसका बैठा आत्महत्या कर रहा है, जाके रोको उसको.. क्यों करना चाहता है आत्महत्या?
झल्लाकर वो जल्दी से उठी और अपना बैग उठाकर होटल रूम से बाहर निकली। सामान पैक करने का टाइम था नहीं इसलिए रूम से चेक आउट नहीं किया। लाबी में आकर उसने अपनी गाड़ी निकली और तेजी से अपने घर की तरफ भगा दी।
हे भगवान... प्लीज सिद्धू.. कुछ करना मत बेटा..." दिल ही दिल में वो सोचती जा रही थी।
वो उस रात एक किटी पार्टी में थी जब पहली बार उसका और उसके बेटे सिद्धार्थ का रिश्ता बदल गया था। हर महीने वो और उसकी कुछ दोस्त मिलकर एक किटी पार्टी रखते थे जहाँ पर सिर्फ औरतें होती है, और वो सब आशा की अच्छी दोस्त थीं।
पार्टी के दौरान शराब बहुत ही आम बात थी। पार्टी में मौजूद सारी औरतें पीती थी और उसके बाद पार्न मूवीस और गंदी बातों का सिलसिला चलता। जब वहाँ मौजूद औरतें अपना मुँह खोलती, तो शर्म के सारे पर्दे हटाकर बात करती।
अपने ग्रुप में एक आशा को छोड़कर सब औरतों के बायफ्रेंड थे, ज्यादातर जवान लड़के और वहाँ सब अपने एक्सपीरियेन्सेस शेयर करती। कौन किस पोज में किससे चुदी, कब चुदी, कितनी देर चुदी, कैसे चुदी, सब खुलकर बताया जाता। पार्टी में चलेंज था की कौन सी औरत एक साथ कितने मर्दो को झेल सकती है और उसका रेकार्ड फिलहाल मिसेज कुलकर्णी के नाम था जिन्होंने एक साथ एक ही बिस्तर पर चार मर्दो से चुदवाया था। पूफ के तौर पर उन्होंने अपनी खुद की बनाई हुई एक फिल्म लाकर दिखाई थी जिसमें वो अपने बेडरूम में चार चार के साथ अकेली भिड़ी पड़ी थी।
उस रात भी यही हाल था। शराब और वासना हवा में थी और बेशर्मी हर औरत की जुबान पर। पर हद तब हो गई जब मिसेज शर्मा ने अपने पर्स से नशे की सिगरेट्स निकाली। आशा स्मोक तो करती थी पर ड्रग्स उसने पहली बार उस पार्टी में ली थी। पूरी सिगरेट खतम होने के बाद उसे अपना कोई होश नहीं था पर साथ ही साथ वो ये जानती थी की वो क्या कर रही है। सिगरेट में मौजूद ड्रग्स ने उसकी हालत अजीब कर दी थी। वो अपने होश में थी भी और नहीं भी।निकल रही हो..." रात के एक बजे जब आशा ने अपना समान पैक करना शुरू किया तो पास ही खड़ी मिसेज भट्टी ने पूछा।
हाँ..” आशा ने जवाब दिया।
कौन पिक कर रहा है?”
मेरा बेटा सिद्धार्थ..” आशा बोली।