सोनल: वो तो गई, उसने अपने पापा को बुला लिया था।
सोनल के बैठने के बाद मैंने बाइक स्टार्ट कर दी। बाइक स्टार्ट होते ही नवरीत हमारे पास आई और बाइक पर बैठी सोनल के गले लग गई। जब वो सोनल से गले लग रही थी तो उसकी कमर साइड से मुझे टच हो रही थी, बहुत ही सेंसेशनल टच था उसका।
फिर वो मेरे पास आई और मेरी तरफ हाथ बढ़ा दिया।
मैं: ये गलत बात है जी, एक को तो इतनी प्यारी झप्पी और हमें सिर्फ हाथ।
मेरी बात सुनकर सोनल ने मेरी कमर में एक मुक्का जमा दिया।
नवरीत: ओके जी, आप भी क्या याद रखोगे (और मेरे पास आकर मेरे गले लग गई)।
मुझसे गले लगते हुए उसने मर्यादा का काफी धयान रखा था। उसने अपना एक हाथ मेरे गले में डाला दिया और अपना चेहरा मेरे चेहरे पर रगड़ते हुए गले लग गई। पर हमारे बदन के बीच में काफी गेप था।
जब उसके गाल मेरे गालों से टच हुए तो मैं तो बस पागल ही हो गया। क्या मुलायम गाल थे एकदम सॉफ्रट-सॉफ्रट। मेरा पप्पू तो जींस में ही धमा-चौकड़ी मचाने लगा।
वो मुझसे अलग हुई।
सोनल: ओके जी, अब चलो, अब तो झप्पी भी मिल गई।
मैंने बाइक में गियर डाला और नवरीत को बाय कहते हुए निकल लिया।
सोनल ने अपने हाथ मेरे पेट पर कस दिये और मेरी पीठ से चिपक गई। उसके बूब्स मेरी कमर में दबकर पिचक गये। उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और मेरे कानों पर धीमी धीमी फूंक मारने लगी। थोड़ी ही देर में हम घर पहुंच गये।
सोनल: तैयार रहना, रात को आउंगी, मम्मी के सोते ही।
मैं: यार आज बहुत थक गया हूं, आज रहने दो।
सोनल: अच्छा, बताना मुझे किस चीज से थक गये हो, पूरे दिन तो सोते रहे हो।
मैं: अच्छा बाबा! आ जाना, ऐसा चबाउंगा कि दस दिन तक नाम भी नहीं लोगी मेरे कमरे में आने का।
सोनल: हां - हां, देखती हूं, कौन किसको चबायेगा।
और सोनल अंदर चली गई। मैं भी उपर आ गया। नींद का असर अभी भी था तो सोचा कि नहा लिया जाए और मैं नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। नहाकर मैं टॉवेल लपेटकर बाहर आ गया और छत पर टहलने लगा।
'क्या बात है, आज इतनी रात को कैसे नंगे होकर छत पर घूम रहे हो',
मैं आवाज की तरफ पलटा, पूनम अपनी छत पर खड़ी थी।
मैं: बस वो अभी नहाया था, तो इसलिए सोचा थोड़ा टहल लेता हूं, आज दिन में ज्यादा सो लिया तो नींद भी नहीं आ रही।
मैं: आपके मामा जी कैसे हैं अब?
पूनम: सही हैं, क्यों पूछ रहे हो।
मैं: सोनल ने बताया था कि उनका एक्सीडेंट हो गया था।
पूनम: अरे, वो मामी भी ना, वैसे ही घबरा जाती हैं, बस कुछ खरोंच ही आई थी, और फोन करके कह दिया कि एक्सीडेंट हो गया। पीकर चला रहे थे, एक खड़ी हुई कार में ठोक दी।
मैं: चलो, बढ़िया है, खड़ी कार में ही ठोकी।
मैं: मेरा तो फिर भी कारण है, दिन में सो लिया था, आपकी कैसे रातों की नींद उड़ी हुई है।
पूनम: अभी अभी आई हूं, फ्रेड के यहां गई हुई थी, तो सोचा थोड़ी देर छत पर टहल लेती हूं।
मैं: क्यों तुम्हारें फ्रेंड के यहां भी कोई फंक्शन था क्या?
पूनम: नहीं तो, और किसके फ्रेंड के वहां फंक्शन था।
मैं: सोनल जी के, अभी अभी लेके आया हूं, 'फंक्शन में से'।
मैंने आखिरी शब्दों को कुछ ज्यादा जोर देकर कहा, जिससे पूनम हंसने लगी।
पूनम: तो आज तो सोनल नहीं आती होगी रात, को पार्टी में थी तो थक गई होगी।
मैं: वो क्यों आयेगी रात को।
पूनम: ज्यादा बनो मत, मुझे सब पता है। पूरी रात मजे करते हो उसके साथ, कभी हमारी तरफ भी देख लिया करो।
मैं: ऐसा है क्या! मेरे अच्छे भाग, जो आपने हमें इस लायक समझा।
पूनम: तो आज मैं आ जाती हूं, सोनल तो आयेगी नहीं।
मेरे मन में तो खुशी के मारे लड्उू फूट रहे थे। मैंने थोड़ी देर सोचा कि सोनल भी आयेगी, और इसके साथ देख लिया तो कहीं नाराज ना हो जाये। फिर सोचा, वो भी देखी जायेगी, हाथ आई चिड़िया को क्यूं जाने दूं। ऐसे मौके कभी कभी ही आते हैं।
मैं: मेरी बड़ी खुशकिस्मती होगी, जो आपका सानिधय प्राप्त होगा। मैं तो धन्य हो जाउंगा।
पूनम: ज्यादा मस्का लगाने की जरूरत नहीं है।
पूनम: मैं तो उस दिन आपका नाश्ता बनाया था, उसकी दिन से मौके की तलाश में हूं, पर मेरी फूटी किस्मत कोई मौका मिला ही नहीं, पर आज मैं ये मौका नहीं छोड़ूंगी। ठीक है, मैं घरवालों के सोने के बाद आउंगी, दरवाजा खुला ही रखना।
मैं: ओके जी, मैं इंतजार करूंगा, पर कहीं ऐसा ना हो कि इंतजार में ही पूरी रात गुजारनी पड़ जाए।
पूनम (इतराते हुए): अब क्या कह सकते हैं, जिसकी जैसी किस्मत होगी, वैसे ही रात गुजरेगी।
मैं: अच्छा जी, अभी तो बड़ी उछल रही थी।
पूनम: अरे, मैं तो मजाक कर रही हूं।
उसकी ये बात सुनते ही मेरे चेहरे पर उदासी छा गई।
पूनम: क्यों, चेहरा क्यों उतर गया। ------------------------ ओह माय गोड! अरे मैं वो वाला मजाक नहीं कर रही, मैं रात को आउंगी, मजाक तो मैं वो किस्मत वाली बात कह रही थी।
उसकी बात सुनकर मेरे चेहरे पर फिर से चमक आ गई।
ओके, मैं चलती हूं, देखती हूं, घरवाले कब तक सोते हैं, फिर आउंगी (और कहते हुए नीचे चली गई)।
मैं आकर बेड पर लेट गया। अब मैं बस यही दुआ कर रहा था कि सोनल पहले ना आ जाये, नहीं तो सारा काम खराब हो जायेगा।
और आखिरकार रायता फिर ही गया। आधे घण्टे बाद दरवाजा खुला और सोनल चुपके से अंदर आ गई। मैंने उसे देखकर स्माइल पास की तो वो भी मुस्करा दी।
ओह तेरे की, मैं मोबाइल तो उधर ही छोड़ आई - सोनल ने अपने माथे पर हाथ मारते हुए कहा।
मैं: तो क्या हुआ, अब कौनसा तेरे को किसी को फोन करना है।
सोनल: अब रात में किसी का फोन आया तो मम्मी उठ जायेगी, और मैं वहां नहीं मिलूंगी तो, मेरी तो बैण्ड बज जायेगी, अभी लेकर आती हूं।
और सोनल वापिस नीचे चली गई। थोड़ी देर बाद फिर से दरवाजा खुला तो दरवाजे पर देखकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। दरवाजे पर पूनम खड़ी थी। उसने नाइटी पहनी हुई थी जो बहुत ही ज्यादा पतली थी जिससे उसकी ब्रा और पैंटी साफ साफ चमक रही थी, उसने काली ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। नाइटी उसके जांघों तक ही थी जिससे उसके मांसल जांघें और चिकने पैर कहर ढा रहे थे। उसके बूब्स एकदम सेब के आकार के पूरी तरह तने हुए थे। उसके निप्पल ब्रा में से झांक रहे थे। एकदम सपाट पेट थोडी सी भी चर्बी नहीं और एक दम चिकनी मांसल जांघे। मैं तो बस उसे देखता ही रह गया। मेरी नजर उसकी जवानी का रसपान करने में लगी हुई थी।
क्रमशः.....................
सोनल के बैठने के बाद मैंने बाइक स्टार्ट कर दी। बाइक स्टार्ट होते ही नवरीत हमारे पास आई और बाइक पर बैठी सोनल के गले लग गई। जब वो सोनल से गले लग रही थी तो उसकी कमर साइड से मुझे टच हो रही थी, बहुत ही सेंसेशनल टच था उसका।
फिर वो मेरे पास आई और मेरी तरफ हाथ बढ़ा दिया।
मैं: ये गलत बात है जी, एक को तो इतनी प्यारी झप्पी और हमें सिर्फ हाथ।
मेरी बात सुनकर सोनल ने मेरी कमर में एक मुक्का जमा दिया।
नवरीत: ओके जी, आप भी क्या याद रखोगे (और मेरे पास आकर मेरे गले लग गई)।
मुझसे गले लगते हुए उसने मर्यादा का काफी धयान रखा था। उसने अपना एक हाथ मेरे गले में डाला दिया और अपना चेहरा मेरे चेहरे पर रगड़ते हुए गले लग गई। पर हमारे बदन के बीच में काफी गेप था।
जब उसके गाल मेरे गालों से टच हुए तो मैं तो बस पागल ही हो गया। क्या मुलायम गाल थे एकदम सॉफ्रट-सॉफ्रट। मेरा पप्पू तो जींस में ही धमा-चौकड़ी मचाने लगा।
वो मुझसे अलग हुई।
सोनल: ओके जी, अब चलो, अब तो झप्पी भी मिल गई।
मैंने बाइक में गियर डाला और नवरीत को बाय कहते हुए निकल लिया।
सोनल ने अपने हाथ मेरे पेट पर कस दिये और मेरी पीठ से चिपक गई। उसके बूब्स मेरी कमर में दबकर पिचक गये। उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और मेरे कानों पर धीमी धीमी फूंक मारने लगी। थोड़ी ही देर में हम घर पहुंच गये।
सोनल: तैयार रहना, रात को आउंगी, मम्मी के सोते ही।
मैं: यार आज बहुत थक गया हूं, आज रहने दो।
सोनल: अच्छा, बताना मुझे किस चीज से थक गये हो, पूरे दिन तो सोते रहे हो।
मैं: अच्छा बाबा! आ जाना, ऐसा चबाउंगा कि दस दिन तक नाम भी नहीं लोगी मेरे कमरे में आने का।
सोनल: हां - हां, देखती हूं, कौन किसको चबायेगा।
और सोनल अंदर चली गई। मैं भी उपर आ गया। नींद का असर अभी भी था तो सोचा कि नहा लिया जाए और मैं नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। नहाकर मैं टॉवेल लपेटकर बाहर आ गया और छत पर टहलने लगा।
'क्या बात है, आज इतनी रात को कैसे नंगे होकर छत पर घूम रहे हो',
मैं आवाज की तरफ पलटा, पूनम अपनी छत पर खड़ी थी।
मैं: बस वो अभी नहाया था, तो इसलिए सोचा थोड़ा टहल लेता हूं, आज दिन में ज्यादा सो लिया तो नींद भी नहीं आ रही।
मैं: आपके मामा जी कैसे हैं अब?
पूनम: सही हैं, क्यों पूछ रहे हो।
मैं: सोनल ने बताया था कि उनका एक्सीडेंट हो गया था।
पूनम: अरे, वो मामी भी ना, वैसे ही घबरा जाती हैं, बस कुछ खरोंच ही आई थी, और फोन करके कह दिया कि एक्सीडेंट हो गया। पीकर चला रहे थे, एक खड़ी हुई कार में ठोक दी।
मैं: चलो, बढ़िया है, खड़ी कार में ही ठोकी।
मैं: मेरा तो फिर भी कारण है, दिन में सो लिया था, आपकी कैसे रातों की नींद उड़ी हुई है।
पूनम: अभी अभी आई हूं, फ्रेड के यहां गई हुई थी, तो सोचा थोड़ी देर छत पर टहल लेती हूं।
मैं: क्यों तुम्हारें फ्रेंड के यहां भी कोई फंक्शन था क्या?
पूनम: नहीं तो, और किसके फ्रेंड के वहां फंक्शन था।
मैं: सोनल जी के, अभी अभी लेके आया हूं, 'फंक्शन में से'।
मैंने आखिरी शब्दों को कुछ ज्यादा जोर देकर कहा, जिससे पूनम हंसने लगी।
पूनम: तो आज तो सोनल नहीं आती होगी रात, को पार्टी में थी तो थक गई होगी।
मैं: वो क्यों आयेगी रात को।
पूनम: ज्यादा बनो मत, मुझे सब पता है। पूरी रात मजे करते हो उसके साथ, कभी हमारी तरफ भी देख लिया करो।
मैं: ऐसा है क्या! मेरे अच्छे भाग, जो आपने हमें इस लायक समझा।
पूनम: तो आज मैं आ जाती हूं, सोनल तो आयेगी नहीं।
मेरे मन में तो खुशी के मारे लड्उू फूट रहे थे। मैंने थोड़ी देर सोचा कि सोनल भी आयेगी, और इसके साथ देख लिया तो कहीं नाराज ना हो जाये। फिर सोचा, वो भी देखी जायेगी, हाथ आई चिड़िया को क्यूं जाने दूं। ऐसे मौके कभी कभी ही आते हैं।
मैं: मेरी बड़ी खुशकिस्मती होगी, जो आपका सानिधय प्राप्त होगा। मैं तो धन्य हो जाउंगा।
पूनम: ज्यादा मस्का लगाने की जरूरत नहीं है।
पूनम: मैं तो उस दिन आपका नाश्ता बनाया था, उसकी दिन से मौके की तलाश में हूं, पर मेरी फूटी किस्मत कोई मौका मिला ही नहीं, पर आज मैं ये मौका नहीं छोड़ूंगी। ठीक है, मैं घरवालों के सोने के बाद आउंगी, दरवाजा खुला ही रखना।
मैं: ओके जी, मैं इंतजार करूंगा, पर कहीं ऐसा ना हो कि इंतजार में ही पूरी रात गुजारनी पड़ जाए।
पूनम (इतराते हुए): अब क्या कह सकते हैं, जिसकी जैसी किस्मत होगी, वैसे ही रात गुजरेगी।
मैं: अच्छा जी, अभी तो बड़ी उछल रही थी।
पूनम: अरे, मैं तो मजाक कर रही हूं।
उसकी ये बात सुनते ही मेरे चेहरे पर उदासी छा गई।
पूनम: क्यों, चेहरा क्यों उतर गया। ------------------------ ओह माय गोड! अरे मैं वो वाला मजाक नहीं कर रही, मैं रात को आउंगी, मजाक तो मैं वो किस्मत वाली बात कह रही थी।
उसकी बात सुनकर मेरे चेहरे पर फिर से चमक आ गई।
ओके, मैं चलती हूं, देखती हूं, घरवाले कब तक सोते हैं, फिर आउंगी (और कहते हुए नीचे चली गई)।
मैं आकर बेड पर लेट गया। अब मैं बस यही दुआ कर रहा था कि सोनल पहले ना आ जाये, नहीं तो सारा काम खराब हो जायेगा।
और आखिरकार रायता फिर ही गया। आधे घण्टे बाद दरवाजा खुला और सोनल चुपके से अंदर आ गई। मैंने उसे देखकर स्माइल पास की तो वो भी मुस्करा दी।
ओह तेरे की, मैं मोबाइल तो उधर ही छोड़ आई - सोनल ने अपने माथे पर हाथ मारते हुए कहा।
मैं: तो क्या हुआ, अब कौनसा तेरे को किसी को फोन करना है।
सोनल: अब रात में किसी का फोन आया तो मम्मी उठ जायेगी, और मैं वहां नहीं मिलूंगी तो, मेरी तो बैण्ड बज जायेगी, अभी लेकर आती हूं।
और सोनल वापिस नीचे चली गई। थोड़ी देर बाद फिर से दरवाजा खुला तो दरवाजे पर देखकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। दरवाजे पर पूनम खड़ी थी। उसने नाइटी पहनी हुई थी जो बहुत ही ज्यादा पतली थी जिससे उसकी ब्रा और पैंटी साफ साफ चमक रही थी, उसने काली ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। नाइटी उसके जांघों तक ही थी जिससे उसके मांसल जांघें और चिकने पैर कहर ढा रहे थे। उसके बूब्स एकदम सेब के आकार के पूरी तरह तने हुए थे। उसके निप्पल ब्रा में से झांक रहे थे। एकदम सपाट पेट थोडी सी भी चर्बी नहीं और एक दम चिकनी मांसल जांघे। मैं तो बस उसे देखता ही रह गया। मेरी नजर उसकी जवानी का रसपान करने में लगी हुई थी।
क्रमशः.....................