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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

सोनल: वो तो गई, उसने अपने पापा को बुला लिया था।
सोनल के बैठने के बाद मैंने बाइक स्टार्ट कर दी। बाइक स्टार्ट होते ही नवरीत हमारे पास आई और बाइक पर बैठी सोनल के गले लग गई। जब वो सोनल से गले लग रही थी तो उसकी कमर साइड से मुझे टच हो रही थी, बहुत ही सेंसेशनल टच था उसका।
फिर वो मेरे पास आई और मेरी तरफ हाथ बढ़ा दिया।
मैं: ये गलत बात है जी, एक को तो इतनी प्यारी झप्पी और हमें सिर्फ हाथ।
मेरी बात सुनकर सोनल ने मेरी कमर में एक मुक्का जमा दिया।
नवरीत: ओके जी, आप भी क्या याद रखोगे (और मेरे पास आकर मेरे गले लग गई)।
मुझसे गले लगते हुए उसने मर्यादा का काफी धयान रखा था। उसने अपना एक हाथ मेरे गले में डाला दिया और अपना चेहरा मेरे चेहरे पर रगड़ते हुए गले लग गई। पर हमारे बदन के बीच में काफी गेप था।
जब उसके गाल मेरे गालों से टच हुए तो मैं तो बस पागल ही हो गया। क्या मुलायम गाल थे एकदम सॉफ्रट-सॉफ्रट। मेरा पप्पू तो जींस में ही धमा-चौकड़ी मचाने लगा।
वो मुझसे अलग हुई।
सोनल: ओके जी, अब चलो, अब तो झप्पी भी मिल गई।
मैंने बाइक में गियर डाला और नवरीत को बाय कहते हुए निकल लिया।
सोनल ने अपने हाथ मेरे पेट पर कस दिये और मेरी पीठ से चिपक गई। उसके बूब्स मेरी कमर में दबकर पिचक गये। उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और मेरे कानों पर धीमी धीमी फूंक मारने लगी। थोड़ी ही देर में हम घर पहुंच गये।
सोनल: तैयार रहना, रात को आउंगी, मम्मी के सोते ही।
मैं: यार आज बहुत थक गया हूं, आज रहने दो।
सोनल: अच्छा, बताना मुझे किस चीज से थक गये हो, पूरे दिन तो सोते रहे हो।
मैं: अच्छा बाबा! आ जाना, ऐसा चबाउंगा कि दस दिन तक नाम भी नहीं लोगी मेरे कमरे में आने का।
सोनल: हां - हां, देखती हूं, कौन किसको चबायेगा।
और सोनल अंदर चली गई। मैं भी उपर आ गया। नींद का असर अभी भी था तो सोचा कि नहा लिया जाए और मैं नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया। नहाकर मैं टॉवेल लपेटकर बाहर आ गया और छत पर टहलने लगा।

'क्या बात है, आज इतनी रात को कैसे नंगे होकर छत पर घूम रहे हो',
मैं आवाज की तरफ पलटा, पूनम अपनी छत पर खड़ी थी।
मैं: बस वो अभी नहाया था, तो इसलिए सोचा थोड़ा टहल लेता हूं, आज दिन में ज्यादा सो लिया तो नींद भी नहीं आ रही।
मैं: आपके मामा जी कैसे हैं अब?
पूनम: सही हैं, क्यों पूछ रहे हो।
मैं: सोनल ने बताया था कि उनका एक्सीडेंट हो गया था।
पूनम: अरे, वो मामी भी ना, वैसे ही घबरा जाती हैं, बस कुछ खरोंच ही आई थी, और फोन करके कह दिया कि एक्सीडेंट हो गया। पीकर चला रहे थे, एक खड़ी हुई कार में ठोक दी।
मैं: चलो, बढ़िया है, खड़ी कार में ही ठोकी।
मैं: मेरा तो फिर भी कारण है, दिन में सो लिया था, आपकी कैसे रातों की नींद उड़ी हुई है।
पूनम: अभी अभी आई हूं, फ्रेड के यहां गई हुई थी, तो सोचा थोड़ी देर छत पर टहल लेती हूं।
मैं: क्यों तुम्हारें फ्रेंड के यहां भी कोई फंक्शन था क्या?
पूनम: नहीं तो, और किसके फ्रेंड के वहां फंक्शन था।
मैं: सोनल जी के, अभी अभी लेके आया हूं, 'फंक्शन में से'।
मैंने आखिरी शब्दों को कुछ ज्यादा जोर देकर कहा, जिससे पूनम हंसने लगी।
पूनम: तो आज तो सोनल नहीं आती होगी रात, को पार्टी में थी तो थक गई होगी।
मैं: वो क्यों आयेगी रात को।
पूनम: ज्यादा बनो मत, मुझे सब पता है। पूरी रात मजे करते हो उसके साथ, कभी हमारी तरफ भी देख लिया करो।
मैं: ऐसा है क्या! मेरे अच्छे भाग, जो आपने हमें इस लायक समझा।
पूनम: तो आज मैं आ जाती हूं, सोनल तो आयेगी नहीं।
मेरे मन में तो खुशी के मारे लड्उू फूट रहे थे। मैंने थोड़ी देर सोचा कि सोनल भी आयेगी, और इसके साथ देख लिया तो कहीं नाराज ना हो जाये। फिर सोचा, वो भी देखी जायेगी, हाथ आई चिड़िया को क्यूं जाने दूं। ऐसे मौके कभी कभी ही आते हैं।
मैं: मेरी बड़ी खुशकिस्मती होगी, जो आपका सानिधय प्राप्त होगा। मैं तो धन्य हो जाउंगा।
पूनम: ज्यादा मस्का लगाने की जरूरत नहीं है।

पूनम: मैं तो उस दिन आपका नाश्ता बनाया था, उसकी दिन से मौके की तलाश में हूं, पर मेरी फूटी किस्मत कोई मौका मिला ही नहीं, पर आज मैं ये मौका नहीं छोड़ूंगी। ठीक है, मैं घरवालों के सोने के बाद आउंगी, दरवाजा खुला ही रखना।
मैं: ओके जी, मैं इंतजार करूंगा, पर कहीं ऐसा ना हो कि इंतजार में ही पूरी रात गुजारनी पड़ जाए।
पूनम (इतराते हुए): अब क्या कह सकते हैं, जिसकी जैसी किस्मत होगी, वैसे ही रात गुजरेगी।
मैं: अच्छा जी, अभी तो बड़ी उछल रही थी।
पूनम: अरे, मैं तो मजाक कर रही हूं।
उसकी ये बात सुनते ही मेरे चेहरे पर उदासी छा गई।
पूनम: क्यों, चेहरा क्यों उतर गया। ------------------------ ओह माय गोड! अरे मैं वो वाला मजाक नहीं कर रही, मैं रात को आउंगी, मजाक तो मैं वो किस्मत वाली बात कह रही थी।
उसकी बात सुनकर मेरे चेहरे पर फिर से चमक आ गई।
ओके, मैं चलती हूं, देखती हूं, घरवाले कब तक सोते हैं, फिर आउंगी (और कहते हुए नीचे चली गई)।
मैं आकर बेड पर लेट गया। अब मैं बस यही दुआ कर रहा था कि सोनल पहले ना आ जाये, नहीं तो सारा काम खराब हो जायेगा।
और आखिरकार रायता फिर ही गया। आधे घण्टे बाद दरवाजा खुला और सोनल चुपके से अंदर आ गई। मैंने उसे देखकर स्माइल पास की तो वो भी मुस्करा दी।
ओह तेरे की, मैं मोबाइल तो उधर ही छोड़ आई - सोनल ने अपने माथे पर हाथ मारते हुए कहा।
मैं: तो क्या हुआ, अब कौनसा तेरे को किसी को फोन करना है।
सोनल: अब रात में किसी का फोन आया तो मम्मी उठ जायेगी, और मैं वहां नहीं मिलूंगी तो, मेरी तो बैण्ड बज जायेगी, अभी लेकर आती हूं।
और सोनल वापिस नीचे चली गई। थोड़ी देर बाद फिर से दरवाजा खुला तो दरवाजे पर देखकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया। दरवाजे पर पूनम खड़ी थी। उसने नाइटी पहनी हुई थी जो बहुत ही ज्यादा पतली थी जिससे उसकी ब्रा और पैंटी साफ साफ चमक रही थी, उसने काली ब्रा और पैंटी पहन रखी थी। नाइटी उसके जांघों तक ही थी जिससे उसके मांसल जांघें और चिकने पैर कहर ढा रहे थे। उसके बूब्स एकदम सेब के आकार के पूरी तरह तने हुए थे। उसके निप्पल ब्रा में से झांक रहे थे। एकदम सपाट पेट थोडी सी भी चर्बी नहीं और एक दम चिकनी मांसल जांघे। मैं तो बस उसे देखता ही रह गया। मेरी नजर उसकी जवानी का रसपान करने में लगी हुई थी।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--22
गतांक से आगे ...........
होठों से भी पीओगे या बस नजरों से ही पीने का इरादा है, पूनम मुस्कराती हुई मेरे पास आकर बेड पर बैठ गई।
मैंने अपने हाथ सीधे उसकी जांघों पर टिका दिये। पूनम में मुंह से हलकी आह निकल गई। मैं भी बेड पर बैठ गया और उसके पीछे की साइड से अपनी ठोडी उसके कंधे पर रख दी और अपने हाथ उसके पेट पर कस दिए। पूनम की सांसे एकदम तेज तेज चलने लगी और उसका पेट फडकने लगा। मैं अपने गालों को उसके गालों से रगड़ने लगा। वो कुछ शरमा रही थी। मैंने उसके पेट को सहलाना शुरू कर दिया और उसके गालों पर धीमी धीमी फूंक मारने लगा। ये फूंक मारने वाला आइडिया सोनल से आया, जब वो रात को लौटते वक्त मेरे कानों पर फूंक मार रही थी तो बहुत ही मजा आ रहा था।
पूनम की आंखें बंद होने लगी। उसने अपने हाथ मेरे हाथों पर रख दिए और मेरे हाथों को पकड़ लिया। मैंने कुछ देर अपने हाथों को ऐसे ही रखा और फिर से उसके पेट को सहलाना शुरू कर दिया। उसके पेट को सहलाते हुए ही मैंने उसके गालों पर अपनी जीभ फिरानी शुरू कर दी।
तभी दरवाजा खुला और सोनल अंदर।
पूनम को अंदर देखकर सोनल का मुंह खुला का खुला रह गया और वो मुझे घूरकर देखने लगी। सोनल के अंदर आते ही पूनम एकदम से खड़ी हो गई और कभी सोनल की तरफ तो कभी मेरी तरफ देखने लगी।
सोनल मेरी तरफ आंखें तरेरते हुए अंदर आ गई और दरवाजा बंद करके कुंडी लगा दी। सोनल के हाथ में एक कटोरी थी। मैंने उसकी तरफ आंखों से इशारा करके पूछा की ये क्या है।
सोनल (थोड़ा गुस्से में): तेल लाई थी गर्म करके, सोच रही थी थोड़ी मालिश करवा लूंगी, थकान उतर जायेगी। पर यहां तो और ही किसी की मालिश चल रही है।
सोनल की बात सुनकर पूनम ने अपनी नजरे नीची कर ली।
सोनल (बेड पर बैठते हुए, पूनम की तरफ देखते हुए): मेरी जान, मैं तुम्हें कोई खा नहीं जाउंगी, इतना घबरा क्यों रही हो।
पूनम ने सोनल की तरफ देखा, सोनल मुस्करा रही थी। सोनल की बात सुनकर पूनम के जी में जी आया।
पूनम: मुझे पता नहीं था कि आप आयेंगी, नहीं तो-----। ओके मैं चलती हूं, आप मालिश करवाओ।
और पूनम दरवाजे की तरफ चलने लगी।
सोनल ने जल्दी से आगे होकर उसका हाथ पकड़ लिया और खींचकर बेड पर बैठा दिया।
सोनल: अच्छा, बड़ी आई जाने वाली। चुपचाप बैठ जा यहां पर।
बेड पर बैठकर पूनम सोनल की तरफ सवालिया नजरों से देखने लगी।
सोनल: ऐसे क्या देख रही है, आज इसका कचूमर निकालेंगी दोनों मिलकर, बड़ा आया मुझे चबाने वाला। अब देखती हूं, कौन किसको चबायेगा।
सोनल की बात सुनकर मैं मुस्कराने लगा।
सोनल: हां, मुस्करा ले, मुस्करा ले। आज पता चलेगा तुझे। कल तो मैंने कुछ नहीं किया, नहीं तो कल ही पता चल जाता।
मैं: तो मना किसने किया था, अंदर डालने से पहले ही खल्लास होकर साइड में पसर गई। बेचारी तान्या ने ही मैदान संभाला।
तान्या का नाम सुनते ही पूनम ने हमारी तरफ आश्चर्य से देखा।
सोनल: अरे यार वो कल तान्या भी थी हमारे साथ।
पूनम: तो यहां पर पूरी मस्ती चलती है रात को। और कौन कौन आ चुकी है।
सोनल: अरे वो तो कल तान्या इधर ही रूक गई थी, इसलिए वो भी शामिल हो गई, नहीं तो हम दोनों ही होते हैं।
मैंने पूनम की कमर में अपना हाथ डाला और उसे पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया।
सोनल: हां, नया माल मिल गया, अब मेरी तरफ क्यों देखोगे।
मैंने अपना दूसरा हाथ सोनल की कमर में डाला और उसे भी अपनी तरफ खींचकर अपने जिस्म से चिपका लिया। मेरी इस हरकत से सोनल थोड़ा शरमा गई।
सोनल (मेरे कंधे पर मुक्का मारते हुए): छोड़ो बेशर्म कहीं के।
मैं: अरे कुछ करोगी, तभी तो छूटेगा। ऐसे क्या बिना हाथ लगाये ही छूट जायेगा।
मेरी बात सुनकर पूनम का चेहरा लाल हो गया और सोनल ने मेरी कमर में एक जोरदार मुक्का जमा दिया।
मैंने सोनल का हाथ पकड़ा और उसे बेड पर पटक दिया और उसकी जांघों पर बैठ गया। सोनल ने मेरी कमर में अपना हाथ डाला और एक झटके में मेरा तौलिया खोल दिया। तौलिया निकलकर सोनल की जांघों पर गिर गया और मेरा लिंग उछलकर बाहर आ गया।
मुझे लग रहा था कि जबसे मैंने सोनल के साथ सैक्स शुरू किया है तब से लेकर अब तक लिंग के साइज में काफी अंतर आ गया है। अब वह पहले से ज्यादा मोटा और शायद कुछ लम्बा भी हो गया है। मैंने कभी नापा तो नहीं, इसलिए साइज को पता नहीं, पर काफी लंबा और बड़ा है।
मेरा तौलिया खुलते ही पूनम की आंखें मेरे लिंग पर जम गई। मैंने अपने हाथ सोनल के उभारों पर रख दिये और उन्हें मसलने लगा। जब सोनल ने पूनम को ऐसे मेरे लिंग को घूरते देखा तो उसका हाथ पकउ़कर मेरे लिंग पर रख दिया। उसके हाथ का स्पर्श होते ही मेरे लिंग ने एक झटका खाया और मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया।
 
पूनम कुछ देर हाथ को वैसे ही रखे रही, फिर उसने मेरे लिंग को अपनी मुठ्ठी में भर लिया। कोमल कोमल हाथों में जाकर मेरा लिंग फूला नहीं समा रहा था। पूनम थोड़ा एडजस्ट हुई और बेड पर उपर पैर करके अच्छी तरह से हमारे पास होके आलथी-पालथी मारकर बैठ गई। उसने फिर से मेरे लिंग को अपनी मुठ्ठी में भर लिया और उसकी खाल को पिछे करने लगी। जिससे चमकता हुआ गुलाबी सुपाड़ा बाहर निकल आया।
मेरे हाथ सोनल के उभारों को मसलने में बिजी थे। सोनल ने मेरे एक हाथ को पकड़ा और मेरी एक उंगली अपने मुंह में ले ली और चूसने लगी। उसके गरम मुंह में उंगली डालने में भी बहुत मजा आ रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे लिंग को ही चूस रही थी। हमारी जांघों के बीच पड़ा तौलिया शायद पूनम को कुछ परेशान कर रहा था, उसने तौलियों को पकड़कर खींचकर बाहर निकालने की कोशिश की। पर वो मेरे नीचे दबा था। मैंने पूनम की तरफ देखा और थोड़ा सा उपर उठ गया। पूनम ने खींचकर तौलिया को एक तरफ रख दिया।
पूनम ने सोनल की तरफ देखा, वो तो आंखें बंद किए मजे से मेरी उंगली को लिंग सोचकर चूस रही थी। पूनम के होंठों पर मुस्कान तैर गई और उसने थोड़ा आगे होकर मेरे लिंग को फिर से पकड़ लिया और उसके सुपाड़े पर उंगली फिराने लगी। मजे के मारे मेरी आंखें भी बंद होने लगी। पूनम के हाथों का कमाल की मेरे सुपाड़ों पर प्रिकम की बूंदू चमकने लगी। पूनम ने उसे अपनी उंगली पर लगाया और मेरे पूरे लिंग पर मसल दिया। बहुत ही मजा आ रहा था। पूनम बहुत ही प्यार से मेरे लिंग को छेड़ रही थी। ऐसा लग रहा था कि मैं हवा में उड़ रहा हूं।
मैंने सोनल के निप्पल को अपनी दो उंगलियों के बीच भरा और जोर से भींच दिया। सोनल के मुंह से कराह और आनंद की मिली जुली सिसकारी निकली और उसने मेरी उंगली को और कसके चूसना शुरू कर दिया।

मैंने अपना हाथ सोनल के उभार पर से हटाया और पूनम के उभार पर रख दिया और हल्के हल्के उसे सहलाने लगा। पूनम के मुंह से एक सिसकारी निकली। सोनल ने अपनी आंखें खोलकर मेरे हाथ को देखा कि कहां गया और पूनम के उभारों पर पहुंचा देखकर वापिस अपनी आंखें बंद कर ली। मैं पूनम के उभारों को बारी बारी हलके हलके सहलाने लगा। मेरी इस हरकत से सोनल के शरीर में रह रहकर तरंगे सी उठ रही थी और उसकी मेरे लिंग पर पकउ़ बढ़ती जा रही थी। अब वो मेरे लिंग पर अपने हाथ को आगे पिछे चला रही थी।
मैंने पूनम की नाइटी को पकड़ा और उपर उठाने लगा, पर वो पूनम के नीचे दबी हुई थी। पूनम थोड़ी सी उपर को हुई और मैंने नाइटी को उसकी कमर तक खींच लिया। वो वापिस बैठ गई। मैंने धीरे धीरे करके एक हाथ से ही उसकी नाइटी को उसके शरीर से अलग कर दिया और बेड पर एक साइड में रख दी। फिर मैं अपना हाथ पिछे की तरफ ले गया और उसकी ब्रा के हुक खोलने की कोशिश करने लगा। पर एक हाथ से खुल नहीं पा रहे थे। मुझे परेशान होते देखकर पूनम ने अपने हाथ पिछे किए और हुक खोल दिया और वापिस से मेरे लिंग पर अपने हाथ की पकड़ बना ली। अब उसने अपना एक हाथ मेरी कमर पर कुल्हों के पास रख दिया था और धीरे धीरे सहलाने लगी थी। मुझे तो इतना मजा आ रहा था कि मुझे लग रहा था कि मैं अब गया। मैंने पूनम की ब्रा को उसके शरीर से अलग कर दिया। अब वो बस एक पैंटी में बैठी थी।
मैंने वापिस अपना हाथ उसके उभारों पर टिका दिया और उसके निप्पल को चुभलाने लगा। वो मजे के मारे सिसकारियों निकाल रही थी और बड़बड़ा रही थी, आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है। मजे के मारे उसने उसकी आंखें बंद हो चुकी थी।
मैंने अपना हाथ उसके सिर के पिछे किया और उसको अपनी तरफ खींच लिया। शायद वो समझ गई थी कि मैं क्या कर रहा हूं, इसलिए वो अपने घुटनों के बल खड़ी हो गई। उसकी आंखें बंद ही थी। मैंने उसके चेहरे को निहारा, बहुत ही प्यारी लग रही थी, वासना के कारण उसका चेहरा एकदम गुलाबी हो गया था। मैं कुछ देर तक उसके चेहरे में ही खो गया। जब मैंने कोई हरकत नहीं की तो पूनम ने अपनी आंखें खोली और मेरी तरफ देखा। मुझे इस तरह खुदकर को देखता पाकर उसने शरम से अपना चेहरा एक तरफ घुमा लिया। मैंने उसकी ठोडी को पकड़कर उसके चेहरे को घुमाया और धीरे धीरे अपने चेहरे को उसके चेहरे के पास ले जाने लगा। उसने हया से अपनी आंखें बंद कर ली। मैंने अपने होंठ उसके नाक की चोंच पर रख दिये। मेरे होंठ लगते ही वो सिहर गई। उसने अपने हाथ मेरे कंधों पर रख दिये। मैंने अपने होठों को उसके गालों पर फिराया, बहुत ही मजेदार अनुभव था, ऐसा लग रहा था कि मैं अपने होठों से मक्खन को छू रहा हूं। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उसके गालों को चाटने लगा। उसके हाथ मेरे बालों में हरकत करने लगे। फिर मैंने उसके रस भरे फडकते होंठों पर अपनी जीभ फिराई। मजे के मारे उसके होंठ थोड़े से खुल गये।
मैंने उसके उपर वाले होंठ को अपने होंठों में पकड़ लिया और चूसने लगा। हमारे होंठ मिलते ही वो बुरी तरह से मेरे नीचले होंठ को चूसने लगी। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली और उसके होंठों से निकलते रस का पान करने लगा। उसके हाथ मेरे सिर में फिर रहे थे। वो बार बार मेरे सिर को अपने चेहरे पर दबा रही थी। मैंने थोड़ी सी आंखें खोलकर सोनल की तरफ देखा, वो मेरी उंगली को अपने होठों पर फिरा रही थी और हमारी तरफ देखकर मुस्करा रही थी। मैं वापिस पूनम के लबों का रसपान करने में मशगूल हो गया। पूनम किस करने में पूरा साथ दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि वो किस करने में माहिर है। सच बताउं तो मुझे अबसे पहले किस करने में इतना मजा नहीं आया था। मैं उसके होठों को चूसे ही जा रहा था और वो मेरे होंठों को। मेरे लिंग को खाली देखकर सोनल ने उसे अपने हाथों में दबोच लिया और उससे खेलने लगी।
सोनल एक हाथ से अपने उभारों के साथ खेल रही थी और दूसरे हाथ से मेरे लिंग के साथ खेलते हुए हमें मजे लेकर देख रही थी।
मैंने अपना एक हाथ सोनल के उभार पर रख दिया और मसलने लगा और दूसरा हाथ पूनम के सिर पर था ही। सोनल जोर जोर से मेरे लिंग को सहलाने लगी। मुझे लग रहा था कि मैं बस निकलने वाला हूं। मुझे इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि मैं अभी झडना नहीं चाहता था, मैंने सोनल के हाथ को पकड़ लिया और वैसे ही रहने दिया। सोनल ने मेरी तरफ देखा। पर मैं तो पूनम के लबों का रस चूसने में मशगुल था। कुछ देर बाद मैंने अपना हाथ पूनम के उभारों पर रख दिया और उन्हें मसलने लगा। जैसे ही मेरा हाथ उसके उभारों पर पड़ा वो और भी ज्यादा वाइल्ड तरीके से मेरे होठों को चूसने लगी। मैंने उसके होठों पर अपने दांत गड़ा दिये और हलके हलके दांतों के बीच रगड़ने लगा। पूनम ने मेरी कमर में एक मुक्का जमा दिया। मैंने अपने दांत हटा लिये, परन्तु जैसे ही मैंने अपने दांत हटाये पूनम ने मेरे होठों पे अपने दांत गड़ा दिये और जोर से काटने लगी। मैंने उसकी चूची को हाथ में भर बुरी तरह भींच दिया। वो दर्द और वासना से सीत्कार उठी और मेरे लबों को छोड़ दिया। हमारी सांसे उखड़ी हुई थी। हम गहरी सांसे लेने लगी। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, उसके होठों पे थोड़ा सा खून लगा हुआ था।
सोनल ने मौके का फायदा उठाया और पूनम का हाथ पकड़कर उसे बेड पर गिरा दिया और मुझे अपने उपर खींच लिया। और मेरे होठों को अपने होठों में कैद कर लिया। पूनम के काटने की वजह से मेरे होंठों में दर्द हो रहा था। पर सोनल के रसीले होंठों के रस के लालच ने दर्द को भुला दिया। मैं अब सोनल के नीचे वाले होंठ को चूसने लगा और और सोनल मेरे उपर वाले होंठ को। वो अपनी आंखें खोल कर मुझे देख रही थी। उसके हाथ मेरी कमर में घुम रहे थे। अचानक मुझे अपनी कमर में तीन हाथ महसूस हुये। मैंने पूनम की तरफ देखा। वो हमारे साइड में लेटकर अपने एक हाथ से मेरी कमर सहला रही थी। मैं वापिस सोनल के होठों को रस पीने लग गया। पूनम ने मेरी कमर सहलाते हुए अपना हाथ मेरे कुल्हों पर ले गई और मेरे कुल्हों को सहलाने लगी। अचानक वो उठी और मेरे उपर आकर लेट गई।

बेचारी सोनल तो दोनों के नीचे दब गई। पर उसने मेरे होठों को नहीं छोड़ा। पूनम की गीली पैंटी मुझे अपने कुल्हों पर महसूस हो रही थी। पूनम ने अपने हाथ नीचे की तरफ किये और अपनी पैंटी को अपने कुल्हों से खींचकर निकाल दिया। अब उसकी पैंटी उसकी जांघों में अटकी हुई थी। उसके बूब्स मेरी कमर में रगड़ खा रहे थे। वो धीरे धीरे हिलने लगी और अपनी जांघों को मेरे कुल्हों पर ओर अपने बूब्स को मेरी कमर पर रगड़ने लगी। उसकी योनि से निकलता गर्म पानी मेरे कुल्हों पर गिर कर भिगो रहा था। वो वासना में बहुत ही ज्यादा डूब गई थी। उसने अपने गाल भी मेरी कमर पर रगड़ने शुरू कर दिये। पूनम ने अपने हाथ मेरी कमर में से लेते हुए हमारे बीच में ले आई और सोनल की चूचियों को सहलाने लगी। जब उसके हाथ सोनल की चूचियों पर पड़े तो सोनल के शरीर ने एक झटका खाया। और शायद उसकी पैंटी और ज्यादा गीली हो गई थी। सोनल से हम दोनों का वजन सहन नहीं हो पा रहा था, वो मेरे कंधों पर हाथ रखकर मुझे उठाने की कोशिश करने लगी। मैंने अपना एक हाथ पिछे ले जाकर पूनम की कमर में डाल दिया और दूसरी तरफ पलट गया। अब पूनम मेरे नीचे बेड पर और मैं उसके उपर पीठ के बल लेटा हुआ था। सोनल करवट लेकर मेरी तरफ लेट गई। पूनम ने मेरे पेट पर अपने हाथ कस दिये और मेरे नीचे से निकलते हुए मुझे दोनों के बीच में लेटा दिया। उसने मुझे इस तरह से पलटा था कि मेरा मुंह अब पूनम की तरफ था।
पूनम ने अपना एक हाथ मेरी कमर में डाला और मुझे अपनी तरफ खींचकर मुझसे चिपक गई। मेरा लिंग सीधा उसकी योनि पर जाकर टकराया और हम दोनों के मुंह से आह निकल गई। उसके उभार मेरी छाती में दब गये। उसके कड़े निप्पल मुझे चुभ रहे थे। मैंने उसके होठों पर एक पप्पी दी और पलटी मारकर उसके उपर आ गया। अब पूनम मेरे नीचे थी और मैं उसके उपर। मैंने सोनल की तरफ देखा वो मुस्कराते हुए हमारी ही तरफ देख रही थी।
पूनम नीचे से अपने कुल्हे उठाकर मेरे लिंग पर अपनी योनि को रगड़ने लगी। मैं हाथ को हमारी जांघों के बीच ले गया और अपना लिंग उसकी योनि की फांकों के बीच में सैट कर दिया। मेरा लिंग उसकी योनि की फांको को खोलकर पूरी तरह उसकी योनि के उपर सेट हो गया और मेरा सुपाड़ा उसके क्लिट को रगडने लगा। पूनम मस्ती में सिसकारी भरने लगी। अब मैं भी धीरे धीरे अपने लिंग को उसकी योनि पर रगड़ रहा था। मेरा सुपाडा उसकी क्लिट को बुरी तरह मसल रहा था, जिससे उसकी योनि ने पानी बहाना शुरू कर दिया। पूनम के हाथ मेरे कुल्हों पर थे और नीचे की तरफ दबा रहे थे। मेरे होंठ उसके होठों का रस पी रहे थे। वो तेजी से अपने कुल्हे उठाकर मेरे लिंग पर अपनी योनि रगड़ने लगी। अचनाक उसके कुल्हें हवा में उठे और उपर से उसने मेरे कुल्हों पर अपने हाथों का दबाव बढ़ा दिया। उसका शरीर अकड गया था और उसने मेरे होठों पर अपने दांत गड़ा दिये, उसकी योनि से पानी का सैलाब बह निकला। थोड़ी देर में वो निढाल होकर बेड पर गिर गई। और जोर जोर से सांसे लेने लगी। मेरे होंठों से खून निकल आया था। पूनम आंखें बंद करके शांत होकर लेटी थी।
क्रमशः.....................
 
गतांक से आगे ...........
सोनल ने मेरी कमर पर अपने हाथ रख दिये और सहलाने लगी।
मैं पूनम के उपर से उठने लगा तो पूनम ने मेरी कमर में अपने हाथ कस दिये और मुझे अपनी बाहों में भींच लिया और मेरे गालों को चूमने लगी। वो इतनी जल्दी फिर से तैयार हो गई थी और नीचे से अपने कुल्हें उठाकर मेरे लिंग को अपनी योनि पर रगड़ने लगी थी। मैंने भी अपने कमर को हिलाना शुरू कर दिया और उसकी योनि को कुचलने लगा। पूनम के पैर मेरी कमर के चारों तरफ लिपट गये थे। मैंने हाथ नीचे करके अपने लिंग को उसके योनि द्वार पर सैट किया और हल्का हल्का दबाव बढ़ाने लगा। पूनम ने नीचे से एक तेज धक्का मारा और मेरा सुपाड़ा उसकी योनि में जाकर फंस गया। पूनम के मुंह से चीख निकल गई। उसकी योनि ने मेरे सुपाड़े को अपनी दीवारों में भींच लिया था। ऐसा लग रहा था कि उसकी योनि मेरे लिंग को अंदर की तरफ खींच रही है। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और लिंग को थाड़ा सा पीछे करके एक जोर का झटका मारा। पूनम का शरीर अकड़ गया और मेरा लिंग दो इंच उसकी योनि में घुस गया। पूनम की आंखों से आंसू बहने लगे और उसके हाथ और पैर मेरी कमर पर बुरी तरह से कस गये। उसके नाखून मेरी कमर में गड़ गये थे, जिससे मुझे भी दर्द हो रहा था। मैंने फिर से अपने लिंग को थोड़ा सा पीछे खींचा और एक जोरदार धक्का मारा, मेरा लिंग उसकी झिल्ली को फाड़ता हुआ आधे से ज्यादा पूनम की योनि में समा गया। उसने मेरे कंधे पर अपने दांत गड़ा दिये और मेरी कमर में अपने नाखुन। उसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। मैं थोड़ी देर ऐसे ही रहा और उसके बालों को सहलाता रहा। उसके उभार मेरी छाती के नीचे दबे हुए थे। सोनल ने उसके गालों पर अपने होंठ रख दिये और चूसने लगी। जब पूनम कुछ नोर्मल हुई तो मैंने अंदर रखे रखे ही मैंने अपने लिंग का दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया। फिर मैंने अपने लिंग को थोड़ा सा बाहर निकाला और आराम से आराम से थोड़ा सा अंदर करने लगा। मैंने पांच छः बार ऐसे ही किया। फिर मैंने लिंग को सुपाड़े तक बाहर निकाला और जैसे ही मैंने धक्का मारा, पूनम ने नीचे से अपने कुल्हें उठाकर एक तेज धक्का मारा और मेरा लिंग उसकी पूरी योनि को चीरता हुआ उसके गर्भाश्य से जाकर टकरा गया। पूनम के मुंह से दर्द व मस्ती भरी आह निकली और उसके दांत फिर से मेरे कंधो पर गड़ गये। मुझे दर्द तो बहुत हो रहा था, पर शायद जो दर्द उसे हो रहा था उसके सामने कम ही था। पूनम कुछ देर ऐसे ही लेटी रही और फिर धीरे धीरे नीचे से अपने कुल्हों को हिलाने लगी। इशारा पाकर मैंने अपने लिंग को बाहर निकाला और एक जोर का धक्का मारा। मेरा पूरा लिंग उसकी योनि में समा गया और उसके गर्भ द्वार को खोलने की कोशिश करने लगा। पूनम मस्ती भरी सिसकारियां निकालने लगी थी। अब उसका दर्द खत्म हो गया था और वो मेरे धक्कों के साथ अपने कुल्हें उठाकर धक्के लगा रही थी।

उसकी योनि इतनी टाइट थी कि मेरे लिंग को बुरी तरह जकड़ रखा था। मैं उसकी योनि के इस मुलायम और मस्त घर्षण को सहन नहीं कर पाया और मेरे लिंग ने उसके अंदर अपना रस निकालना शुरू कर दिया। मेरी गर्म गर्म रस की पिचकारी सीधे उसके गर्भ द्वार पर जाकर टकरा रही थी। मेरे गर्म वीर्य की बौछार होते ही उसका शरीर फिर से अकड़ गया और उसने चिल्लाते हुए योनि रस बहाना शुरू कर दिया। उसके कुल्हे हवा में उठ गये और उसके हाथों ने मेरे कुल्हों को नीचे की तरफ दबा लिया। मेरा पूरा लिंग उसकी योनि में समाया हुआ अपने रस की बौछार कर रहा था और साथ में उसकी योनि अपना पानी बहा रही थी। उसकी योनि कभी मेरे लिंग पर सिकुडती और कभी ढीली हो जाती, मानों मेरे लिंग में से एक-एक बूंद निचोड रही हो। उसकी योनि की इस हरकत ने मेरे लिंग को मैदान नहीं छोड़ने दिया और मेरा लिंग तुरंत ही फिर से तैयार हो गया। मैंने फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिये। हमारे रस के कारण पच-पच की आवाजें आ रही थीं। उसकी सिकुडती और खुलती योनि के कारण मेरे लिंग पर बहुत ज्यादा घर्षण हो रहा था, जिससे बहुत ही मजा आ रहा था। थोउ़ी ही देर में उसने भी नीचे से अपने कुल्हों को उछालना शुरू कर दिया और जोर जोर से सिसकारियां निकालने लगी।
 
आहहहहहह ओर जोर ससससससससससससे बहुत मजा आ रहा हहहहहहहहहहहै, अगर पहले पता होततततततततततता किक इततततनाााा ममममजजजजजजजजा आययययययययेगगगगगा तततततततो नननननननाश्श्श्श्श्श्श्श्श्ता बबबबबबबबनननननननााययययययययययययया थ्थ्थ्थ्थ्थ्थ्थ्था उसससससससी दिन चुददददददददददददददववववववववववा लललललेतती, ओहहहहहहहहह माइइइइइइइइइ गोडडडडडडडड औररररररररररर जोरररररर से
वो अपने कुल्हों को पूरी तेजी के साथ उपर की तरफ उछाल रही थी। जैसे मैं अपने लिंग को बाहर की तरफ खिंचता वो नीचे से अपने कुल्हों को उछाल देती और मेरे धक्के के साथ ही उसके कुल्हे वापिस बेड पर पहुंच जाते, और मेरा लिंग सीधे उसके गर्भाश्य से जाकर टकरा जाता।
ओहहहहहहहहह मैं गइइइइइइइइइइइइइई और उसके हाथ मेरी कमर पर इतनी बुरी तरह कस गये कि मुझे सांस लेने में भी प्रॉब्लम होने लगी। उसकी चूचियां मेरे सीने में दबकर बुरी तरह से पिचक गई थी।
उसकी योनि ने तीसरी बार पानी बहाना शुरू कर दिया। उसके गर्म पानी को महसूस करके मैंने भी तेज धक्के लगाने शुरू कर दिये और मेरे लिंग ने भी उसकी योनि में रस की बौछार कर दी। मेरे रस की बौछार होते ही उसने मुझे और कस के भींच लिया, ऐसा लग रहा था कि मुझे ऐसे भींच कर ही मार देगी। थोड़ी देर में उसकी पकड़ कमजोर होेन लगी और वो हांफने लगी। मैं भी उसके उपर लेटे लेटे हांफ रहा था। थोड़ी देर में मेरा लिंग छोटा होकर उसकी योनि से निकल आया और हमारा मिक्स जूस बाहर निकलकर चददर को भिगोने लगा।
मैं बहुत ज्यादा थक गया था इसलिए हिलने का भी मन नहीं कर रहा था। मैं ऐसे ही अपनी आंखें बंद करके उसके उपर लेटा रहा। वो भी अपनी आंखें बंद करके अपनी सांसों को नॉर्मल करने की चेष्टा कर रही थी। उसके हाथ अभी भी मेरी कमर में ही थे, जिनसे वो हलके हलके मेरी कमर को सहला रही थी। ऐसे ही लेटे लेटे पता नहीं कब नींद आ गई।
मुझे मेरे कुल्हों पर हरकत महसूस हुई तो मेरी नींद खुली। मैं आंखें बंद किए किए ही समझने की कोशिश करने लगा कि पूनम के हाथ हैं या सोनल के। पर पूनम के हाथ तो मेरी कमर में थे। मैंने अपनी आंखें खोली और पूनम के चेहरे की तरफ देखा। बहुत ही प्यारा लग रहा था। वो चैन की नींद सो रही थी। उसके चेहरे पर अलग ही चमक और शांति झलक रही थी। सोते हुए भी उसके हाथ मेरी कमर पर ही कसे हुए थे, जैसे उसे डर हो कि मैं कहीं भाग ना जाउं।
फिर मैंने सोनल की तरफ देखा। वो पूरी नंगी हो चुकी थी। उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। मुझे उठा हुआ देखकर वो मुस्कराई।
सोनल: खुद खुद मजे करके सो गये, मैं यहां पर तड़प रही हूं। अपनी उंगली से ही शांत होने की कोशिश की पर और ज्यादा आग लग गई।
मैंने अपनी आंखों के इशारे से पूनम के हाथों की तरफ इशारा किया। सोनल समझ गई और हलके से पूनम के हाथ मेरी कमर में से हटाकर आराम से बेड पर रख दिये।
मैं पूनम के उपर से उठा। उसकी योनि के उपर हमारा मिक्स रस जम सा गया था। मेरे लिंग पर भी सफेद सफेद पपड़ी सी जम गई थी।
मैं उठकर बाथरूम में गया और शॉवर ऑन करके नहाने लगा। सोनल भी मेरे पिछे पिछे बाथरूम में आ गई और बेल की तरह मुझसे लिपट गई।
सोनल मेरे पीछे आकर मुझसे लिपट गई और अपना एक हाथ मेरे पेट पर रख कर सहलाने लगी और दूसरे हाथ में मेरे लिंग को पकड़ लिया और मसलने लगी। उसकी नंगी चूचियां मेरी कमर में चुभ रही थी। उसके होंठ मेरी गर्दन और कंधों पर किस कर रहे थे। मैंने अपने हाथ पीछे करके उसके कुल्हों को पकड लिया और मसलने लगा। उसके मुंह से आहें निकलने लगी।
शॉवर का ठंडा पानी हमारे गर्म शरीर पर गिरकर आग में घी का काम कर रहा था। मैं बुरी तरह से उसके कुल्हों को मसलने लगा। उसने भी मेरे लिंग को कसकर पकड़ लिया और स्पीड से अपना हाथ चलाने लगी। मैंने अपनी गर्दन को पिछे की तरफ घुमाया और उसके होठों पर अपने होंठ रख दिये। मेरे होंठ मिलते ही सोनल उन पर टूट पड़ी और चूसने व काटने लगी। पहले से ही तान्या ने मेरे होठों को काट रखा था इसलिए मुझे दर्द होने लगा। मैंने अपने होंठ उससे अलग किए।
मैं: प्लीज! दांत मत लगाओ, बहुत दर्द हो रहा है।
मेरी बात सुनते ही सोनल ने मेरे होठों पर अपनी उंगली फिराई और फिर से अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये और बहुत ही आराम से अपने होंठों के बीच में लेकर चूसने लगी। उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी। मैंने उसकी जीभ को चूसना शुरू कर दिया।
मैं घूम कर सीधा हो गया। मेरे सीधे होने से मेरा लिंग उसकी योनि पर जाकर सैट हो गया। मैंने अपने हाथों में उसके कुल्हों को पकड़ा और उसको थोडा सा उपर उठाकर वापिस नीचे कर दिया। मेरा लिंग सीधा उसकी योनि में घुस गया। उसके मुंह से आह निकली और वो अपने कुल्हों को आगे पिछे करके मुझे चोदने लगी। मैं भी अपने हाथों से उसके कुल्हों को दबाकर उसकी मदद कर रहा था। मैंने निप्पल पर अपने होंठ टिकाये और चुभलाने लगा और उसके उभारों पर अपनी जीभ फिराने लगी।
सोनल अपने कुल्हों को जोर जोर से आगे पिछे करने लगी, और उसका शरीर अकड़ने लगा। उसके मुंह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी।
आहहहहहहहहहहहहहहहह पूराा अंदर डाल दो, क्या कर रहे हो,,,,, और जोर जोर से अपने कुल्हों को हिलाने लगी। मेरा लिंग पूरा उसके अंदर जाकर वापिस आ रहा था।
ओहहहहहहहहहहहहहहहहह आहहहहहहहहहहहहहहहहहसीदइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ समीरररररररररररर प्लीजजजजजजजजजजजज आहहहहहहहहहहहहहहहहह ओहहहहहहहहहह मैं गईइइइइइइइइइइइइइइइइइइइ
और उसका शरीर अकड़ कर मेरे साथ चिपक गया, उसकी योनि ने अपना पानी बहाना शुरू कर दिया। उसका गर्म गर्म लावा मुझे अपने लिंग पर महसूस हो रहा था। उसके गर्म लावा को महसूस करके मेरे लिंग ने उसकी योनि के अंदर ही झटके लेने शुरू कर दिये।
झडने के बाद सोनल निढाल होकर मेरी बाहों में झुल सी गई। और अपने हाथ मेरी कमर में कसकर लपेट दिये। उसने अपना चेहरा मेरी छाती में रख दिया और गहरी सांसे लेने लगी। मैंने शॉवर को बंद किया और उसे अपनी गोद में उठाकर बाथरूम से बाहर आ गया।
मैंने एक हाथ से बेड पर तौलिया बिछाया और सोनल को उसके उपर लेटा दिया। सोनल ने आंखे खोलकर प्यार से मेरी तरफ देखा और फिर अपनी आंखें बंद कर ली। सोनल का गोरा बदन पानी में भिगा हुआ कयामत ढा रहा था। मैंने खुद को पौंछा और बेड पर चढकर सोनल के उपर लेट गया। उसके गीले बदन का स्पर्श मेरे शरीर में सिहरन पैदा कर रहा था। मैं बैठ गया और अपने हाथ उसकी टांगो के पिछे ले गया और उसकी टांगों को उठाकर अपने कंधों पर रख दिया।
मेरा लिंग उसके गुदा द्वार पर जाकर टकराया जिससे सोनल के मुंह से जोर की सिसकारी निकली। मैं वैसे ही बैठा हुआ अपने लिंग को आगे पिछे करने लगा। मेरा लिंग उसके गुदा द्वार पर टक्कर मार रहा था।
 
सोनल के मुंह से मादक सिसकारियां निकल रही थी। उसने अपने हाथ अपने उभारों पर रखे और उन्हें बुरी तरह मसलने लगी। मैंने अपने लिंग को उसके गुदा द्वार पर रखकर थोडा सा अंदर की तरफ धक्का मारा। सोनल सिहर गई और मेरा लिंग उसके द्वार पर दबाव डालने लगा।
मैं उठा और बाथरूम में जाकर अपने पूरे लिंग पर तेल लगाकर थोडा सा तेल अपने हाथ में लेकर वापिस आ गया। सोनल मुझे देख रही थी और अपनी आंखों से ना का इशारा कर रही थी।
मैंने बेड पर आकर सोनल को उलटा होने को कहा, वो मना करने लगी। मैंने अपने तेल वाला हाथ सीधा उसके कुल्हों की दरार में ले गया और उसके पीछे वाले छेद पर तेल मसल दिया। सोनल कसमसा उठी। उसके शरीर में आनंद की लहरें उठने लगी। अच्छी तरह से तेल मसलने के बाद मैंने उसकी कमर को पकड़ा और उसके पेट कर बल लेटा दिया।
सोनल धीमी धीमी आवाज में कह रही थी 'प्लीज पिछे नहीं, बहुत दर्द होगा'। पर मैंने उसकी बातों पर धयान नहीं दिया और अपना लिंग उसके कुल्हों और जांघों के बीच में सैट करके उसके उपर लेट गया। मेरा लिंग उसके छेद पर दस्तक दे रहा था। मैंने अपने कुल्हों को थोड़ा सा उपर उठाया और उसके छेद पर हल्का सा दबाव डाला। सोनल ने तकिया उठाकर अपने मुंह के नीचे रख लिया और बेड की चद्दर को जोरों से अपनी मुठठी में भींच लिया। मैं उसके छेद पर अपना लिंग रगड़ने लगा। उसकी सिसकारियां तकियें में घुट रही थी। मैं उसी तरह अपने लिंग को उसके छेद पर रगड़ता रहा। तभी अचानक सोनल ने अपने कुल्हों को उपर उठा दिया और दबाव के कारण मेरा सुपाडा उसके छेद में घुस गया। पर अगले ही पल सोनल को अपनी गलती का अहसास हो गया। दर्द के मारे उसका शरीर अकड़ गया और उसने चददर को और भी जोर से कस के पकड़ लिया।

मैंने अपने लिंग पर थोडा थोड़ा जोर देना शुरू कर दिया। सोनल ने अपने कुल्हों को वापिस नीचे कर लिया जिससे मेरा सुपाड़ा उसके गुदा द्वार से बाहर आ गया। सोनल ने सीधा होने की कोशिश की, पर मैंने उसको कसकर पकड़ लिया और उलटा ही लेटाये रखा और फिर से अपना लिंग उसके द्वार पर सैट किया और एक हल्का धक्का मारा, जिससे मेरा सुपाड़ा फिर से उसके छेद में घुस गया। सोनल ने अपना मुंह तकिये में दबा लिया और अपने दोनों हाथों से तकिये को दोनों साइड से पकड़ लिया। मैंने थोड़ा सा पिछे होके एक जोर का धक्का मारा और मेरा आधा से ज्यादा लिंग उसकी गुदा में समा गया। सोनल के मुंह से जोर की चीख निकली जो तकिये में घुट गई। मैं कुछ देर ऐसे ही रहा। जब सोनल को थोडा आराम पहुंचा तो मैंने अपने लिंग को फिर से थोडा सा बाहर खींचा और एक और जोर का धक्का मारा। मेरा पूरा लिंग उसके अंदर समा गया और मैं उसके उपर लेट गया। उसके कुल्हें एक दम गदेदार थे। मेरे लेटने से वो पिचक गये। सोनल ने तकिये को इतना कसके पकड़ा हुआ था कि उसके नाखून तकिये में घुस गये थे और तकिया फट गया था। मैं कुछ देर ऐसे ही उसके उपर लेटा रहा। थोड़ी देर में तकिये पर से सोनल की पकड़ कुछ कम हो गई और वो गहरी सांसे लेने लगी। मैंने अपने कुल्हों को उठाकर लिंग को थोडा सा बाहर निकाला और फिर आराम से अंदर डाल दिया। सोनल के मुंह से फिर से दर्द भरी सिसकारी निकली। मैं धीरे धीरे हल्के हल्के धक्के लगाने लगा। अब सोनल को मजा आने लगा था वो अपने कुल्हों को उछाल कर लिंग को अंदर लेने की कोशिश करने लगी।
उसे मजा लेते देख मैंने भी अपने धक्कों की स्पीड बढा दी और तेज तेज धक्के मारने लगा। मेरा लिंग बुरी तरह से जकड़ा हुआ था उसकी गांड द्वारा। बहुत ही टाइट अंदर जा रहा था। मैं इतना ज्यादा घर्षण सहन नहीं कर सका और जल्दी ही उसकी गांड में अपना सारा रस निकाल दिया। मेरा रस अपनी गांड में महसूस करते ही सोनल का शरीर भी अकड़ गया और उसकी योनि ने भी पानी बहाना शुरू कर दिया। मेरे साथ ही उसका शरीर भी अकड़ गया और जल्दी ही हम शांत हो गये और गहरी सांसे लेने लगे। मेरे लिंग छोटा होकर बाहर निकल गया। मैं अभी भी उसके उपर लेटा हुआ था और सांसों को नॉर्मल करने की कोशिश कर रहा था।
सोनल थोडा कसमसाई तो मैं उसके उपर से उतरकर साइड में लेट गया। सोनल ने मेरी तरफ करवट ली और मेरी छाती में मुक्के मारने लगी।
सोनल: तुम बहुत जालिम हो, मेरे दर्द की थोड़ी सी भी परवाह नहीं की।
मैं: अरे मेरी जान! दर्द में ही तो असली मजा है, क्यों है ना।
सोनल शरमा गई और अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया। मैं उसके बालों में हाथ फिराने लगा और ऐसे ही कब हमें नींद आ गई पता ही चला।

टननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननननन
'उं हूं' मैं उंघते हुए उठा और अलार्म की तरफ हाथ बढ़ाया, पर मेरा हाथ लगकर अलार्म नीचे गिर गया।
मैं आंखों को मसलते हुए उठने लगा तो मेरे उपर पड़े हाथों की वजह से उठ नहीं पाया। अलार्म की आवाज सुनकर पूनम की आंख खुल गई।
मैंने आंखें खोलते हुए चारों तरफ का जायजा लिया। सोनल मुझसे आगे से चिपक कर सो रही थी और पिछे से पूनम मुझसे चिपकी हुई थी। पूनम का एक हाथ मेरे पेट पर था। उसका हाथ इस प्रकार रखा हुआ था कि उसकी कोहनी तो मेरे पेट पर थी और उसके हाथ का पंजा मेरी छाती पर था। उसके हाथ के ठीक नीचे सोनल का हाथ मेरे लिंग को छूता हुआ रखा हुआ था। दोनों का एक एक पैर मेरी जांघों पर था। पूनम का सिर मेरे हाथ पर कंघे के पास था और सोनल ने मेरे दूसरे हाथ को तकिया बना रखा था।
सोनल (नींद में बड़बड़ाते हुए): हूंहहहहहहूं, इस अलार्म को बंद करो ना जानूं।
पूनम ने अपने गाल मेरी छाती पर रख दिये और मेरे पेट को अपने हाथों से सहलाने लगी।
जब अलार्म बंद नहीं हुआ तो सोनल ने धीरे से आंख खोली।
सोनल: उंहहहहहहहहहहहहहहह, क्या टाइम हो गया।
मैं: पांच गये स्वीटू।
मेरी बात सुनते ही दोनों हसीनाओं एकदम उठकर बैड पर खड़ी हो गई।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--24
गतांक से आगे ...........
पूनम: मर गई आज तो, मम्मी उठ गई होंगी, और सबसे पहले मुझे ही उठाने आती हैं, और मैं रूम में मिलूंगी नहीं, तो आज तो मेरी बैंड बज जायेगी।
मैं: कुछ नहीं होगा, कह देना उपर टहलने चली गई थी।
दोनों ने जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहने और बाहर की तरफ भाग ली।

सोनल ने जैसे ही बेड से नीचे पैर रखा वो लड़खड़ा कर वापिस बेड पर बैठ गई।
आहहहहहहहह------------ कमीने,,,,, क्या हालत कर दी, चला भी नहीं जा रहा। सोनल की आंखों में आंसू आ गये थे।
सोनल की दर्द भरी आह सुनकर पूनम ने पीछे मुड़कर देखा और उसकी आंखों में आंसू देखकर वापिस हमारे पास आई।
मैं उठ कर बैठ गया और सोनल के गालों को सहलाने लगा।
मैं: ओह बेबी, बस कुछ देर होगा, फिर ठीक हो जायेगा। तुम आराम आराम से नीचे जाओ, ताकि आंटी को शक ना हो, मैं जाकर पेन किलर लेकर आता हूं।
मैंने अपने कपड़े पहने और मैंने सहारा देकर सोनल को उठाया।
तान्या ने आंखों के इशारे से मुझसे पूछा कि क्या हुआ, तो मैंने बात में बताने के लिए कहा।
दूसरी साइड से पूनम ने सोनल को पकड़ लिया और हम बाहर आ गये।
हर रोज की तरह आज भी छतों पर कोई नहीं था, गली में इक्के-दुक्के अंकल आंटी पार्क में टहलने के लिए जा रहे थे। हमने थोडी देर सोनल को छूत पर घुमाया, जब वो चलने में थोडी आसानी महसूस करने लगी तो मैंने उसके नीचे जाने के लिए कहा। पर जैसे ही वो सीढ़ियों में उतरने के लिए पैर नीचे किया, उसके शरीर में दर्द की लहर उठी और वो वहीं पर बैठने लगी। मैंने उसे पकड़ा और गोद में उठाकर वापिस बेड पर लाकर लेटा दिया।
मैं अभी आया, कहकर मैं बाहर निकल गया, और जल्दी से जाकर पेन किलर लेकर आया। आंटी शायद अभी नहीं उठी थी।
उपर आकर मैंने सोनल को पैन किलर दी। पूनम वहां पर नहीं थी।
पेन किलर देकर मैंने सोनल को आराम करने को कहा, और खुद बाहर आकर आंटी पर नजर रखने लगा, कि जैसे ही आंटी जागेगी, सोनल को बाहर बुला लूंगा, ताकि आंटी को लगे कि सोनल जल्दी उठकर छत पर टहलने चली गई होगी।
थोडी देर में पूनम भी छत पर आ गई और मुझे छत पर खड़ा देखकर मेरे पास आ गई।
पूनम: क्या हुआ, वो चल क्यों नहीं पा रही है?
मैं (हंसकर उसकी आंखों में देखा): क्यों तुम्हें दर्द नहीं हो रहा?
पूनम: हो तो रहा है, पर इतना ज्यादा तो नहीं हो रहा, बस थेाडा थोडा हो रहा है। और मेरा तो पहली बार था, पर वो तो हर रोज करती है तुम्हारे साथ, फिर भी।
मैं मुस्कराया और उसकी तरफ आंख मारकर बोला।
मैं: आज उसका पिछे का उदघाटन हुआ है?
मेरी बात सुनकर पूनम के चेहरे पर मुस्कान तैर गई और उसने चारों तरफ देखा और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और एक जोरदार किस करके, बायें बोलते हुए वापिस अपनी छत पर चली गई।
नीचे से दरवाजा खुलने की आवाज आई, मतलब आंटी उठ गई थी। मैं अंदर गया और एक चेयर बाहर लाकर रख दी और फिर सोनल को सहारा देकर बाहर ले आया और चेयर पर बैठा दिया।
सोनल चेयर पर बैठ गई। पूनम की आवाज सुनकर उसने पिछे देखा।
पूनम (हंसते हुए): आज तो पूरे मजे ले लिए जानी ने।
सोनल: हंस ले, हंस ले, तेरा नम्बर आयेगा तब देखूंगी हंसती है या रोती है।
पूनम: मैं उलटे-सीधे काम नहीं करती, बस मतलब की चीजों से मतलब रखती हूं।
सोनल: हां, देखती जा, सब पता चल जायेगा।
तभी नीचे से आंटी की आवाज आई, सोनल बेटा।
सोनल उठकर मुंडेर के पास गई।
सोनल: मम्मी मैं, उपर हूं।
 
आंटी: बेटा, मैं पार्क में जा रही हूं, थोड़ा धयान रखना।
सोनल (मुस्कराते हुए): ठीक है मम्मी, आप जाओ, मैं देख लूंगी।
आंटी पार्क के लिए निकल गई।
सोनल वापिस मुडी और मेरे गले में अपनी बांहें डाल दी।

सोनल: अब मुझे गोद में उठाओं और अंदर ले चलो।
जो हुकुम मेरे आका कहकर मैंने सोनल को गोद में उठाया और अंदर ले आया, और बेड पर लेटा दिया। पूनम नीचे चली गई थी।
मैं भी बेड पर बैठ गया और सोनल की तरफ देखकर मुस्कराने लगा।
सोनल ने मेरे कंधे पर एक मुक्का मारा।
सोनल: हंस क्या रहे हो, कभी तुम्हारे पिछे डालूंगी डिल्डो, तब पता चलेगा।
मैं: अच्छा तो तुम्हारे पास डिल्डो भी है।
सोनल: ओर नहीं तो क्या आपके ही लंड है।
मैं: कहां से लाई?
सोनल: दीदी लेकर आई थी, जब इंडिया आई थी।
मैं: ओह, तो ये बात है, हसीनाओं को डिल्डो का चस्का लगा हुआ है, अरे यार डिल्डो को ही यूज करोगी तो हमारे लंड तो बेचारी ऐसे ही सूख जायेंगे।
सोनल: तो सूखने दो, जिनको हमारी थोड़ी सी भी परवाह नहीं, उनकी यही सजा है, चलने लायक भी नहीं छोड़ा।
मैंने सोनल के माथे पर किस की और किचन में आ गया, चाय बनाने के लिए।
चाय बनाकर मैंने दो कप में डाली और एक सोनल को दी और एक खुद पीने लगा। पेन किलर ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था, उसका दर्द कम हो रहा था।

चाय पीकर सोनल नीचे चली गई। 6 बज गये थे तो मैं ऑफिस के लिए तैयारी करने लगा। मैं नाश्ता तैयार करके नहाकर तैयार हो गया। जब तक मैंने नाश्ता किया तो साढ़े आठ बज चुके थे।
मैं मुंडरे के पास आकर खड़ा हो गया। मैंने देखा कि सोनल तैयार होकर स्कूटी पर कहीं जा रही है, शायद कॉलेज के लिए निकली होगी।
मैं भी नीचे आया और बाईक स्टार्ट करने लगा। पर बाईक नहीं हुई। मैंने तीन-चार कोशिश की पर नहीं स्टार्ट हुई। फिर मैंने तेल चैक किया तो टंकी तो खाली थी।
ओह शिट यार, ये भी अभी खत्म होना था। मैंने बाइक को वहीं खड़ा किया और बस पकड़ने के लिए निकल पड़ा।
सत्कार पर आकर मैं सिटी बस का वेट करने लगा, करीब दस मिनट बाद बस आई। मैं बस में चढ़ गया। सुबह का टाइम था तो बस में बहुत ही ज्यादा भीड़ थी। मैं भी घुसते घुसते बीच में जाकर खड़ा हो गया।
मेरे आगे एक लड़की खड़ी थी, बस में भीड़ बहुत ज्यादा था इसलिए मेरे और उसके बीच में बिल्कुल गैप नहीं था, मैं बिल्कुल उससे सटकर खड़ा था। उस लड़की ने पजामी (वो टाइट वाली नहीं, ढीली वाली, जो कुल्हों पर तो एकदम टाइम होती है और पूरी शेप दिखाती है पर कुल्हों से नीचे ढीली होती है) और कुर्ती पहन रखी थी। मेरा लिंग उसके कुल्हों की दरार के बीच में सैट हो गया था। उसकी शरीर की गर्मी पाकर मेरे लिंग ने अंगडाई लेनी शुरू कर दी। मैं परेशान हो गया। क्योंकि हम बिल्कुल सटकर खड़े थे और मेरे पप्पू के खड़े हो जाने पर उसे पता चलना ही था। पर अब हो भी क्या सकता था। मैंने अपना हाथ नीचे लेजाकर अपने लिंग को एडजस्ट करने की कोशिश की पर इतनी भीड़ में कहां, और उपर से इस बात की भी डर की कहीं मेरा हाथ उसके कुल्हों से टच न हो जाये।
मेरे हाथ लगाने से पप्पू और भी ज्यादा हुडदंग मचाने लगा और एकदम तन गया। अब मेरा लिंग बिल्कुल उसके कुल्हों के बीच में सैट हो गया।
तभी बस के ब्रेक लगे और वो लड़की थोउ़ी आगे होकर फिर से पिछे को आई तो मेरा लिंग उसके कुल्हों के बीच में जाकर सैट हो गया। शायद उसे महसूस हो गया था।
उसने मेरी तरफ घूर कर देखा। मैंने उसकी तरफ देखा, बहुत ही खूबसूरत आंखे थी। चेहरे पर तो उसने कपड़ा बांधा हुआ था, केवल आंखें ही देख पाया।
मैं: सॉरी, बहुत ज्यादा भीड़ है, माफ कीजियेगा।
वो लड़की मुस्कराई और 'इट्स ओके' कहा।
मैं थोड़ा सा पिछे हो गया, पर पिछे वाले ने थोड़ा सा मुझे आगे की तरफ धक्का दे दिया और मेरा लिंग फिर से उसके कुल्हों के बीच में जाकर सैट हो गया।
तभी मुझे महसूस हुआ कि वो लड़की अपने कुल्हों को मेरे लिंग पर रगड़ रही है। मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, पर कुछ एक्सप्रेशन तो जब दिखें ना तब चेहरा दिखे।
मैं आराम से खड़ा हो गया, और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया। मुझे उसके कुल्हें साफ महसूस हो रहे थे। उसकी पजामी का कपड़ा काफी पतला था।
मैंने भी उसके कुल्हों पर अपना लिंग रगड़ना शुरू कर दिया। अब मैं उसके कुल्हों पर हल्के हल्के धक्के लगा रहा था। वो भी पूरा साथ दे रही थी और बार बार अपने कुल्हों को आगे करके फिर से पिछे ला रही थी। मैं पहली बार सिटी बस में सफर कर रहा था तो मुझे इन सबका कोई एक्सपीरियंस नहीं था। इतना मजा आ रहा था कि मेरे मन में हर रोज ही बस से आने जाने का ख्याल आने लगा।
तभी बस ने ब्रेक लगाये और ओ-टी-सी- पर बस में से काफी सवारी उतर गई। हमारे सामने वाली सीट पर जो आंटी बैठी थी वो भी उतर गई, पर वो लड़की बैठी नहीं और वैसे ही खड़ी रही। उस खाली सीट पर एक दूसरी लड़की बैठ गई। जितनी सवारी उतरी थी उससे आधी बस में और चढ गई। अब बस में ज्यादा भीड तो नहीं थी, पर फिर भी चिपक कर खड़ा होने पर कोई कुछ कह नहीं सकता था, इतनी भीड़ तो थी ही।
उसके ना बैठने से मैं समझ गया कि ये पूरे मजे ले रही है और जैसे ही बस चली मैंने अपने हाथ नीचे लेजाकर उसके कुल्हों को मसलना शुरू कर दिया। मैंने अपनी ठोडी उसके कंधे पर रख दी।
मैं: मुझे तो पता नहीं था कि बस में इतने मजे आते हैं, नहीं तो डेली बस से ही सफर करता।
उसने मेरी तरफ चेहरा करने की कोशिश की तो मेरे होंठ कपडे के उपर से उसके गालों से टकरा गये। उसने अपने चेहरे को वैसे ही रखा और अपने कुल्हों को मेरे लिंग पर रगड़ने लगी। हमारे सामने जो लड़की बैठी थी वो हमें घूर घूर कर देख रही थी, उसने भी अपने चेहरे पर कपड़ा बांधा हुआ था (जिसने भी ये चेहरे पर कपड़ा बांधने का चलन चलाया, उसपर बहुत गुस्सा आता है)। मैंने उस लड़की को आंख मार दी। उसने मेरी तरफ आंखें निकाली और फिर दूसरी तरफ देखने लगी। मैं अपना एक हाथ आगे की तरफ ले गया और उसकी जांघों को भिंचने लगा। वो अपने गालों को मेरे हाेंठों पर रगड़ने लगी। तभी कंडेक्टर ने बापू नगर की आवाज लगाई और मैं उस लड़की को बायें बोलकर नीचे उतर आया। मेरी हैरानी का ठिकाना न रहा जब मैंने देखा कि वो भी मेरे पीछे पीछे नीचे उतर गई। मैंने उसकी तरफ देखा, वो मुझे ही घूर घूर कर देख रही थी और मुझे ऐसा लग रहा था कि वो मुस्करा रही थी।
 
मैं मुडकर चलने लगा तो उसने मुझे पिछे से आवाज लगाई, 'समीर'।
मैं अपना नाम सुनकर चौंक गया और उसकी तरफ देखा। इसको मेरा नाम कैसे पता चला।
वो मेरे पास आई, और मेरी तरफ अपना हाथ बढ़ा दिया और हाय कहा।
मैंने उससे हाय कहा।
मैं: सॉरी, पर आपको मेरा नाम कैसे पता चला।
लड़की: तुमने मुझे पहचाना नहीं?
मैं: अब मुंह पर तो ऐसे कपड़ा बांध रखा है जैसे पता नहीं कहां मुंह काला करवाकर आई हो और कपड़ा बांधकर छिपाने की कोशिश कर ही हो, तो पहचानूंगा कैसे।
वो मेरी बात सुनकर थोडा सा नाराज हो गई और उसने कपड़ा खोल दिया।
उसे देखकर मेरा मुंह खुला का खुला रह गया।

तुम, तभी तो मैं सोचूं कि ये लड़की इतनी बेशर्म कैसे है, जो किसी अनजान के साथ ऐसे मजे ले रही है, मैंने उसे देखते हुए कहा।
वो खड़ी खड़ी मुस्करा रही थी।
मैं: तुम्हारे पास तो स्कूटी पर, फिर बस में।
निशा: वो मम्मी को कहीं जाना था तो, इसलिए स्कूटी नहीं लाई।
मैं: इधर क्या काम है?
निशा (मुस्कराते हुए): कुछ भी नहीं, मैं तो कॉलेज जा रही थी, आप उतरे तो सोचा आपको थोडा सरप्राइज दे दूं।
तभी दूसरी बस आ गई। निशा ने मेरे गालों पर एक पप्पी दी और बायें कहते हुए बस में बैठ गई।
मैं बॉस के घर पर आकर ऑफिस में आ गया।
मैं अभी ऑफिस में घुस ही रहा था कि अपूर्वा अंदर आती हुई दिखाई दी। मैं बाहर ही खड़ा हो गया। अपूर्वा ने अपनी स्कूटी खड़ी की और इधर-उधर नजर दौडाई और ऑफिस की तरफ चल दी।
मैं: हाय! आज तो लगता है किसी की जान ही लेकर रहोगी।
अपूर्वा: क्यों, ऐसे क्यों कह रहे हो?
मैं: बस, तुम लग ही इतनी ब्यूटीफुल रही हो कि किसी को तो हर्ट अटैक आयेगा ही आज।
अपूर्वा ने सफेद चुडीदार सलवार और हल्के गुलाबी रंग की कुर्ती पहनी हुई थी। कुर्ती उसकी जांघों से थोड़ी सी नीचे तक थी और उसकी जांघों से चिपकी हुई थी और उसकी मांसल जांघें की शेप उजागर हो रही थी।
हाय, अपूर्वा ने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--25
गतांक से आगे ...........
मैंने भी उसे हाय कहा और उसका हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। वो सीधी मेरे सीधे से आकर चिपक गई। मैंने अपने हाथ उसकी कमर में डाले और उसको अपने शरीर के साथ चिपका लिया। अपूर्वा ने एक आह ली और अपने हाथ मेरी कमर में कस दिये और अपना चेहरा मेरे कंधे पर रख दिया।
अपूर्वा बार बार अपने हाथों को थोडा सा कस रही थी। उसकी गोलाइयां मेरे छाती में दब गई थी। तभी मुझे पहले कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज आई तो हम अलग हो गये।
मैं: और कैसा रहा तुम्हारा टूर।
अपूर्वा: अच्छा था, बहुत मजा आया, मेरे मामा की लड़कियां भी आई हुई थी और बुआ के बच्चे भी आये हुए थे, काफी दिनों बाद सभी से मिली थी, बहुत ही अच्छा लगा। आप बताओ, आपके दिन कैसे बीतें, अकेले बोर हो गये होंगे ऑफिस में।
मैं: और क्या, यहां पर अकेला बैठा बैठा बोर होता रहा, और क्या करता? अब तुम तो मजे ले रही थी अपनी मौसी के घर पर।
गुड मॉर्निंग, बॉस ने हमारी तरफ आते हुए कहा।
गुड मॉर्निंग बॉस, हम दोनों ने एक साथ कहा।
हम अंदर ऑफिस में आ गये और अपने सिस्टम ऑन कर दिये। अपूर्वा अपनी चेयर पर बैठ गई।
बॉस: समीर वो तुम मैडम के साथ चले जाओ, उनकी सिस्टर आई हुई है, कल हम यहां पर थे नहीं तो वो अभी होटल में रूकी है। इधर जयपुर में पहली बार ही आई है, मैडम के मामा की बेटी है। तो तुम मैडम के साथ जाकर उन्हें ले आओ। मुझे अभी बैंक जाना है। गाड़ी ले जाना।
मैं: ठीक है बॉस।
बॉस: मैं अभी निकल रहा हूं, मैडम तैयार हो रही है, तुम चले जाना।
बॉस (अपूर्वा की तरफ घूमते हुए): और तुम्हारा वो काम पूरा हो गया अपूर्वा या बचा है?
अपूर्वा: बॉस अभी तो काफी बचा है, वो अगले दिन ही तो मैं चली गई थी, पर आप टेंशन मत लो, जल्दी ही पूरा हो जायेगा।
बॉस: गुड! दो चार दिन में ऑफिस भी खुल जायेगा, फिर उधर ही शिफ्रट हो जायेंगे।
और बॉस बाहर चले गये। मेरा सिस्टम चालू हो गया था, काम शुरू करने का तो कोई फायदा था नहीं, इसलिए मैंने फेसबुक खोल ली और न्यूजफीड देखने लग गया।
20-25 मिनट में मैडम आई, उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी जिसमें वो बहुत ही हॉट लग रही थी। ब्लाउज पिछे से बस थोड़ा सा था, जिससे उनकी लगभग पूरी कमर नंगी ही थी। आगे से उनकी क्लीवेज काफी दिख रही थी। और पेट पर हल्का सा पारदर्शी कपडा। कुल मिलाकर एकदम पटाका लग रही थी।
मैंने मैम को गुड मॉर्निंग कहा, अपूर्वा ने हमारी तरफ देखा और उसने भी मैम को गुड मॉर्निंग कहा।
मैम: गुड मॉर्निंग, समीर चलो, वो होटल तक चलना है एक बार।
मैं: जी मैम।
और मैं चेयर से उठ गया। मैम ने गाड़ी की चाबी मुझे दी और हम बाहर आ गये। मैं गाड़ी निकालने गैराज में आ गया और मैम बाहर गेट पर जाकर खड़ी हो गई। मैंने गाड़ी बाहर निकाली और मैम आगे की सीट पर बैठ गई। होटल जयपुर से बाहर 20 किलोमीटर के आस पास दूर था। थोड़ी ही देर में हम हाइवे 8 पर पहुंच गये। हाइवे पर आते ही मैम थोड़ा सा मेरी तरफ सरक गई और अपना हाथ सीधा मेरी जांघ पर रख दिया। मैंने मैम की तरफ देखा वो सीधे देख रही थी। मैंने वापिस सामने देखने लगा। मैम का हाथ लगते ही मेरा लिंग एकदम तन कर फुफकारने लगा। मैम ने अपना हाथ धीरे धीरे मेरी जांघों पर फिराना शुरू कर दिया। वो बहुत ही हल्के हल्के मेरी जांधाों को सहला रही थी। मैंने अपना एक हाथ उनके हाथ पर रख दिया और उनकी तरफ देखने लगा। मैम ने मेरी तरफ देखा और मुझे अपनी तरफ देखता पाकर मुस्करा दी और आंखों से सामने देखने का इशारा किया। मैं भी मुस्करा दिया और सामने देखने लगा। मैंने गाड़ी की स्पीड थोड़ी कम कर ली। होटल अब 5 मिनट की दूरी पर ही थी, पूरे रस्ते मैडम ऐसे ही मेरी जांघों पर अपना हाथ फिराती रही और कभी मेरे लिंग को अपनी मुठ्ठी में भरकर दबा देती।
 
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