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Adultery बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई (Completed)

उसकी ऐसी हालत देखकर मैं खड़ा हुआ और उसके अपनी बाहों में भर लिया। सोनल तुरंत ही किसी बेल की तरफ मुझसे लिपट गई और मेरे गले और गालों को बेहताशा चूमने लगी।
मेरे हाथ उसकी पीठ को सहला रहे थे और सोनल के हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और वो कभी मेरे गालों किस करती, चाटती और कभी मेरे गले को। और बीच बीच में बड़बड़ाती जा रही थी।

मुझे तो लगा, मेरी जान ही निकल जायेगी, ओहहहह आहहह इतना मजा, मैं ब्यान नहीं कर सकती, पुच पुच,,, लव यू,,,,, आहहहह,, ओहहहह, आई लव यू,, आहहहहहह, लव यू,,,,,,
वो थोड़ा पिछे हटी और मेरे एक पल के लिए मेरे लबों पर अपने लब रखे और उन्हें चूसा ओर फिर नीचे होते हुए मेरी चिन को चूमने लगी, फिर वो नीचे हुई और मेरे निप्पल पर अपनी जीभ फिराने लगी, पैर कांपने की बारी अब मेरी थी, मेरे शरीर में आनंद की तरंगे उठने लगी, अचानक सोनल ने मेरे निप्पल को दांतों के बीच दबा के हलके से चुभला दिया। मेरा तो निकलने को ही हो गया। उसके हाथ मेरे कंधों पर टिके थे। फिर वो नीचे हुई और मेरे पेट को चाटने और चूमने लगी। उसके हाथ मेरी छाती पर मेरे निप्पल्स को छेड़ रहे थे।
फिर वो नीचे घुटने टेक कर बैठ गई और मेरी तरफ देखा, मैंने उसकी तरफ देखा और अपनी आंखें बंद कर ली।
सोनल ने मेरे पेट के नीचे वाले भाग पर अपने होंठ रखे और गोल गोल घुमाते हुए चूमने लगी और साथ साथ अपनी जीभ फिराने लगी। मैं तो बस हवा में उड़ रहा हूं, ऐसा लग रहा था। मेरा लिंग उसके गालों और ठोडी पर रगड़ रहा था। अचानक उसने अपना चेहरा मेरी जांघों में घुसा दिया और अपनी जीभ से मेरी गोलियों के नीचे के हिस्से पर फिराने लगी। अब मेरी टांगे जवाब दे गई थी, इतनी सेंसेशन मैंने अब तक महसूस नहीं की थी। वो मेरी गोलियों पर अपनी जीभ फिरा रही थी और कभी अपने होंठ लगाकर उन्हें अन्दर की तरफ खींचने की कोशिश कर रही थी।
अचानक उसने अपने होंठ खोले और मेरी दोनों गोलियों को मुंह में भर लिया और उन पर जीभ फिराने लगी। मेरा लिंग उसकी आंखों पर टकरा रहा था। वो मेरी गोलियों को जोर जोर से चूसने लगी। मुझे हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था और मजे की तो बस पूछो मत, इतना ज्यादा मजा आ रहा था, कि मुझे लग रहा था कि मैं अब निकला कि तब निकला। मेरी आंखें जोरों से बंद थी और मुंह से मजे की सिसकारियां निकल रही थी।
पर मेरे निकलने से पहले ही सोनल ने गोलियों को बाहर निकाल दिया और मेरी जांघों को अपने हाथों से सहलाने लगी।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--29
गतांक से आगे ...........
अचानक उसने एकदम से मेरे पूरे लिंग को मुंह में ले लिया और अपनी जीभ को उस पर लपेट दिया। मैं उसके मुंह की गर्मी को बर्दाश्त न कर सका और मेरे लिंग ने पिचकारियां मारनी शुरू कर दी। मेरा लिंग उसके गले में अटका हुआ था, मेरे हाथ उसके सिर पर कस गये थे और लिंग को ओर अंदर घुसाने की कोशिश में उसके सिर को जांघों की तरफ दबा रहे थे। सोनल अपने सिर को पिछे हटाने के लिए जोर लगा रही थी, पर मैं तो ओर ही दुनिया में पहुंचा हुआ था, मेरी जांघें आगे की ओर जोर लगाकर लिंग को ओर ज्यादा उसके मुंह में धकेलने की कोशिश कर रही थी। मेरा रस सीधा उसके गले में गिर रहा था। मजे के मारे मेरी आंखें बंद थी।
सोनल ने अपने हाथों को मेरे पेट पर रखा और मुझे पिछे धक्का देने लगी। मेरा रस भी निकल गया था जिस कारण मेरे हाथों की पकड़ ढीली हो गई थी। सोनल ने मेरे लिंग को मुंह से निकाला और खांसने लगी। मेरा रस उसके मुंह से निकल कर बह रहा था और वो अपने गले पर हाथ रखकर खांसे जा रही थी।
उसकी ऐसी हालत देखकर मैं उसके गले को सहलाने लगा। थोड़ी देर में उसकी सांसे नोर्मल हुई तो उसने मेरी छाती में दनादन घुस्से मारने शुरू कर दिए और रोने लगी।
मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसके गालों को सहलाने लगी। उसके गालों पर से लुढ़कते आसुंओं को मैंने अपने लबों से चूसना शुरू कर दिया। सोनल ने अपना चेहरा मेरी छाती से चिपका दिया और एक हाथ मेरी कमर में डाल दिया और दूसरे हाथ से अभी भी मेरी छाती में मुक्के मारे जा रही थी।

मुझे अब आपसे कभी बात नहीं करनी, उसने रोते रोते कहा।
मैं उसकी हालत को समझ सकता था, इसलिए मैंने उसे कुछ कहा नहीं, बस कभी उसके गालों को तो कभी गले को, कभी कमर को सहलाता रहा।
जब वो थोड़ा नोर्मल हुई तो मैंने उसे शॉवर के नीचे ले आया और उसके छाती और ठोडी पर गिरा अपना रस साफ करने लगा।
सॉरी, मुझे माफ कर देना, प्लीज, मेरा खुद पर कंट्रोल नहीं रहा, प्लीज, मैंने उसके कान के पास अपने होंठ करके कहा।
तुम्हें तो मजा आ रहा था, पर मेरी तो जान निकलने वाली थी, ऐसा लग रहा था कि आज मैं नहीं बचूंगी, सोनल ने कहते हुए फिर मेरी छाती में एक मुक्का मार दिया।
नहाने के बाद मैंने शॉवर बंद किया और खुद को टॉवल से साफ किया और उसके शरीर पर टॉवल लपेट कर अपनी बांहों में उठा लिया और कमरे में आकर बेड पर लेटा दिया।
बेड पर लेटते ही सोनल ने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर दिया।
क्या हुआ बेबी, नाराज हो, प्लीज आज के बाद कभी नहीं होगा, अब तो मान जाओ, मैं कान पकउ़ता हूं, मैंने उसके यों मुंह फेरने पर सॉरी बोलते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर सोनल मेरी तरफ पलटी, 'पहले उठक बैठक लगाओ,।
मैंने छोटी छोटी दो तीन उठक बैठक लगा दी।
ऐसे नहीं, पूरी उठक बैठक लगाओ, और जब तक मैं ना कहूं, लगाते रहो, उसके चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी।
मैंने फिर से सही तरह से उठक बैठक लगानी शुरू कर दी। दस-बारह उठक बैठक के बाद ही मेरे पैर कांपने लगे। मैंने याचक की तरह उसकी तरफ देखा तो, उसे भी दया आ गई और वो उठी और मुझे बाहों में भर लिया।
वो बेड पर थी और मैं बेड के किनारे खड़ा था। जब वो उठी तो टॉवल नीचे गिर गया था, जिस कारण उसके नंगे उभार मेरी नंगी छाती में दब गये थे। मुझे बांहों में भरे हुए ही वो बेड पर लुढक गई, और मैं उसके पर लुढक गया।
उसने मेरे लबों को अपने लबों से दबोच लिया और प्यारी प्यारी किस्स्सी करने लगी।
टनननननन टननन, तभी पांच बजे का अलार्म बजना शुरू हो गया। मैंने हाथ मारकर अलार्म बंद किया और वापिस सोनल को किस करने लगा। थोड़ी देर किस करने के बाद सोनल ने धक्का देकर मुझे साइड में लुढ़का दिया और खुद उठ गई।
मम्मी उठने वाली होगी, अब मैं चलती हूं, बेड पर से उतरते हुए सोनल ने कहा।
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया, प्लीज एक बार और करते हैं ना, मैंने कहा।
नहीं, अब बिल्कुल भी नहीं, मम्मी उठ गई तो प्रॉब्लम हो जायेगी, सोनल ने अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा।
और अपना हाथ छुड़ाकर कपड़े पहनने लगी। मैंने भी ज्यादा नहीं कहा।
सोनल कपड़े पहनकर बेड पर झुकी और पहले मेरे होंठों पर एक किस की और जैसे ही उठने लगी तो उसकी नजर मेरे झटके खाते हुए लिंग पर पड़ी तो उसने मुस्करा कर एक किस मेरे लिंग पर दी और बायें कहते हुए चली गई। मैं थोड़ी देर और लेटा रहा और फिर उठकर कपड़े पहने और बाहर छत पर आकर टहलने लगा।
मैंने नीचे गली में देखा, पड़ोस वाले अंकल आंटी घूमने के लिए पार्क में जा रहे थे, तो मैं भी पार्क में घूमने के लिए चल पड़ा।

हाय! काफी दिनों बाद दिखाई दिये, पार्क में घुसते ही स्वीट सी आवाज मेरे कानों में घुल गई।
मैंने आवाज की दिशा में देखा, मोनी थी, परन्तु आज उसका डॉगी उसके साथ नहीं था।
हाय, बस कुछ बिजी था तो आने का टाइम नहीं मिला, मैंने उसके सवाल का जवाब देते हुए कहा।
मोनी घास पर टहल रही थी। मैं जाकर उससे थोड़ी दूरी पर घास पर बैठ गया, कुछ देर टहलने के बाद मोनी भी मेरे पास आकर बैठ गई।
उसके बदन से उठती खूशबू मेरी नाथूनों में भर गई और मैं मदहोश हो गया।
वॉव, यार आज तक ये समझ में नहीं आया कि ये लड़कियां ऐसा क्या लगाती हैं, कि इतना बदन हमेशा ही महकता रहता है, मैंने मोनी की तरफ देखते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर मोनी मुस्करा दी।
कुछ नहीं, आज तो मैंने बस हलकी सी क्रीम ही लगाई थी, परफयूम भी नहीं लगाया, मोनी ने मुस्कराते हुए कहा।
तुम्हें मुझसे से कोई खूशबू आ रही है, मैंने मोनी की तरफ सरकते हुए कहा।
मोनी ने मेरे पास अपना चेहरा किया और सूंघ कर कहा, नहीं।
मैंने सुबह क्रीम, डियो, दोनों चीज लगाई थी, फिर भी महक नहीं आ रही और तुमने सिर्फ क्रीम ही लगाई थी, फिर भी ऐसे महक रही हो।
ये तो हमारे बदन की नेचुरल महक है, इसी से तो लड़के पागल हो जाते हैं लड़कियों के पिछे, मोनी ने मेरी तरफ आंख मारते हुए कहा।
शायद मुझे अपने मम्मी पापा के साथ देखकर वो मुझसे कुछ ज्यादा ही खुल गई थी, इसलिए इतनी खुलकर बात कर रही थी।
हूं, पर ------,,, फिर मैं कुछ सोचकर चुप हो गया।
क्या, पर----, मोनी ने पूछा।
कुछ नहीं, बस वैसे ही, मैंने बात टालते हुए कहा।
सोनी जी के कैसे हाल-चाल हैं, मैंने कहा।
तुम्हें सोनी के बारे में कैसे पता, मोनी ने थोड़े आश्चर्य से कहा।
यहीच, यहीच तो प्रॉब्लम है तुम लड़कियों की, कि तुम्हारा दिमाग घुटनों में होता है, मैंने चुटकी लेते हुए कहा।
 
ऐसा कुछ नहीं है, और आप है ना, ऐसे बेइज्जती ना करो लड़कियों की, आजकल लड़कियां लड़कों से आगे हैं।
वो तो होंगी ही, लड़कों को पिछे ज्यादा मजा जो आता है, इसलिए वो आगे जाने देते हैं, मैंने कहते हुए उसकी तरफ आंख मार दी।
मतलब क्या है आपका, आप है ना मुझसे ज्यादा दो-अर्थी बात मत करो, मैं सब समझती हूं आपकी बात का मतलब, सोनी ने मुंह बनाते हुए कहा।
अब समझाने के लिए ही तो मैंने बात कही है, अच्छा हुआ आप समझ गई नहीं तो मुझे समझाना पड़ता तो मुश्किल होती, मैंने हंसते हुए कहा।
देखो, मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हूं, आप है ना तमीज से बात करो, मोनी ने फिरसे मुंह बनाकर कहा।
लो जी, हर बार तो आपको आप कहकर ही बोला हूं, और कुछ गलत भी नहीं कहा है, फिर भी आप खामखां नाराज हो रही हैं, मैंने हंसते हुए कहा।
छोड़ो, आप ये बताओ की सोनी को कैसे जानते हो, मोनी ने बात बदलते हुए कहा।
लो भूल गई, आपने ही तो बताया था कि आप दो बहनें हो, सोनी और मोनी, मैंने अपने पैरों को सीधे करते हुए कहा।
और मैं अपने पैरों को सीधा करके हाथ पिछे टिका कर बैठ गया। हाथ पिछे करते वक्त मेरे हाथ मोनी के कुल्हों से टकरा गये और मैंने उसके कुल्हों से सटाकर ही अपना हाथ रख दिया। मेरी उंगलियां थोड़ी सी उसके कुल्हों के नीचे घुस गई थी।
मैंने मोनी की तरफ देखा, उसका चेहरा थोड़ा सा लाल हो गया था, पर उसने खुद को हटाया नहीं।
आपके घर में कौन कौन है, मोनी ने शरमाते हुए पूछा। (शरमा वो मेरे हाथ के कारण रही थी)।
जी हम तो अकेले ही रहते हैं, अब कोई है नहीं आप जैसा साथ रहने के लिए, मैंने मुस्कराते हुए कहा।
क्यों, मम्मी-पापा नहीं रहते साथ में, मोनी ने कहा।
मम्मी-पापा गांव में रहते हैं, यहां पर मैं अकेला ही रहता हूं, मैंने कहा।
मोनी मेरी बात सुनकर मुस्कराने लगी, आप कहा रहते हैं, मोनी ने कहा।
यही पास में, वो गली में मुडकर जो कोने वाला मकान है, उसी में सबसे उपर वाली मंजिल पर रहता हूं, कभी आइयेगा, मैंने कहा।
जरूर, आप बुलायेगें तो जरूर आउंगी, मोनी ने कहा।
अचानक मेरे हाथ पर शायद चींटी ने काटा होगा, जिससे मैंने हाथ को एकदम से उठाकर सामने लाया। झटके से उठाने के कारण मेरा हाथ मोनी के कुल्हों से घर्षण करता हुआ उपर को हुआ तो उसके बूब्स से साइड से छू गया। मैं हाथ को देखने लगा।
क्या हुआ, मोनी ने पूछा।
सॉरी, शायद चींटी ने काट लिया, मैंने उसे सॉरी बोलते हुए कहा।
सॉरी क्यों, मोनी ने कहा।
मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, वो ऐसे बिहेव कर रही थी कि जैसे मेरा हाथ उसके शरीर से टच हुआ ही ना हो।
बस ऐसे ही, मैंने बात टालते हुए कहा और फिर से अपना हाथ उसके शरीर से रगड़ते हुए पिछे ले जाकर गया और अपनी कोहनी को घास पर टिका दिया और अपना हाथ उसके दूसरी तरफ लेजाकर उसके कुल्हे पर सैट कर दिया। इस तरह से मेरी दो उंगलियां तो उसके कुल्हों के नीचे थी और बाकी की दो उसके कुल्हें पर साइड से रखी हुई थी, जैसे तरबूज को एक हाथ से पकड़ते हैं उस प्रकार। और मेरा अंगूठा उसके पिछे की तरफ उसके कुल्हों के बीच की गहराई में टच हो रहा था।

मैंने अपना हाथ इस तरह से रख तो लिया था, पर मेरे दिल की धड़कन एकदम बढ़ गई थी और मुझे उम्मीद भी थी कि मेरे गालों पर एक चांटा आने वाला है, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
इसके उलटे मोनी ने भी अपने पैरों को आगे की तरफ इस फैला दिया, उसका एक पैर मेरे पैर पर आकर टिक गया, जिसे मेरी जांघें साइड से उसकी जांघों से सट गई। उसने अपने हाथ भी पिछे घास पर टिका दिये और बैठ गई।
उसके इस तरह बैठने से एक फायदा ये हुआ कि अब वो मेरे से बिल्कुल सटकर बैठी थी, परन्तु इससे ज्यादा नुकसान ही हुआ, क्योंकि मेरा हाथ उसके कुल्हों के नीचे दब गया था और नीचे की जमीन में पड़ी छोटी छोटी कंकर उंगलियों में चुभ रही थी।
मोनी का चेहरा लाल हो गया था और वो सामने की तरफ देख रही थी। मेरे चेहरे पर दर्द की शिकन साफ महसूस की जा सकती थी, पर वो तो तब उसे पता चलता जब वो मेरी तरफ देखती, वो तो बस सामने ही देखे जा रही थी और मंद मंद मुस्करा रही थी।
आप क्या करते हैं, मेरा मतलब किस चीज की तैयारी कर रहे हैं, उसने सामने देखते हुए ही कहा।
अब तक तो आपको समझ जाना चाहिए था कि मैं किस चीज की तैयारी कर रहा हूं, मैंने कहते हुए अपनी उंगलियों को थोड़ा सा उसके कुल्हों पर दबा दिया।
मेरी द्वारा कुल्हों को दबाये जाने पर वो समझ शायद वो समझ गई कि मैं क्या कहना चाहता हूं, और उसके गाल धीरे धीरे फड़कने लगे और साथ ही उसकी एक आंख भी।
मेरा मतलब वो नहीं था, उसने कहते हुए अपना पैर उठाकर मेरे पैर पर अपनी ऐडी से वार किया।
आउच, तो क्या था, अब मुझे क्या पता क्या मतलब था आपका, जो मेरी समझ में आया मैंने बता दिया, मैंने अपना दूसरा पैर उसके पैर के उपर जो कि मेरे पैर पर रखा हुआ था, रखते हुए कहा।
मेरी उंगलियों में अब ज्यादा दर्द होने लगा था तो मैंने उसके कुल्हें को मुट्ठी में भर लिया, सोनी के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकली, जिसे वो दबा गई।
मेरे पैर को उसके पैर के उपर रखने से उसकी पैर घुटनों से थोड़े से उपर तक मेरे पैर के उपर था। उसके कुल्हों को मुट्ठी में भरने से उसका उस पैर का दबाव मेरे नीचे वाले पैर पर बढ़ गया।
बताओ ना क्या करते हो, मोनी ने हकलाते हुए सा कहा।
अब पहले मतलब समझा दो कि किस के बारे में पूछ रही हो, नहीं तो फिर कहोगी कि मेरा ये मतलब नहीं था, मैंने अपने पैर को उसके पैर पर थोड़ा सा दबाते हुए कहा।
मेरा मतलब है कि आप काम क्या करते हो, किसी चीज की कोचिंग कर रहे हो या, फिर अभी पढ़ रहे हो, या जॉब करते हो, अब की बार उसने अच्छी तरह से समझाते हुए कहा।
ओह तो आप ये पूछना चाहती थी, पहले ही ऐसे कहना चाहिए था ना, मैंने कहा।
तो अब बता दो, अब तो समझा दिया कि क्या पूछना चाहती हूं, मोनी ने कहा।
मैं जॉब करता हूं, आई-टी- फील्ड मैं, तुम क्या कर रही हो, मैंने कहा।
आई-टी- फील्ड में, सॉफ्रटवेयर इंजीनियर हो, मोनी ने अबकी बार मेरी तरफ देखते हुए कहा।
मैंने उसकी तरफ आंख मारी, नहीं, वेब डेवलपर हूं।
वॉव, वेब डेवलपर, फिर तो एक मेरी भी वेबसाइड बनाना, बढ़िया सी, मोनी ने चहकते हुए कहा।
आप क्या करती हो, मैंने पूछा।
मैं तो एम-टेक कर रही हूं, इलेक्ट्रोनिक्स से, जेएनयू से, उसने कहा।
वाह, बहुत खूब, इलेक्ट्रोनिक्स से, मैंने कहा।
आप मेरी वेबसाइड बनाओगे ना, प्लीज, मोनी ने कहा।
किस चीज की वेबसाइट बनवानी है तुम्हें, मैंने कहा।
हम्मममम--- अभी सोचा नहीं है, पर आप तो बना देना बस, मैं सोचकर बता दूंगी, उसने अपने होंठों पर उंगली रखते हुए कहा।
ठीक है जी, आप बता देना, मैंने अपना घर तो आपको बता ही दिया है, आ जाना कभी भी, जब आप सोच लो कि किस चीज की बनवानी है।
तभी उसका मोबाइल बजने लगा।
ओ-के, अब मैं चलती हूं, नहीं तो कॉलेज के लिए लेट हो जाउंगी, कहकर वो अपने कुल्हों को मेरे हाथ पर मसलते हुए उठ गई।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--30
गतांक से आगे ...........
उठते हुए उसने अपना एक हाथ मेरी जांघों पर रख दिया और दूसरा हाथ मेरे कंधे पर रखकर सहारा लेकर उठी तो उसके बूब्स मेरे कंधे पर दब गये, एकदम नर्म नर्म बूब्स थे।
उसके खड़े होने के बाद मैं भी उठ गया, वो वायें कहते हुए चली गई। उसके जाने के बाद मैं कुछ देर पार्क में टहला और फिर वापिस रूम पर आ गया।
मैंने नाश्ता बनाया और ऑफिस के लिए तैयार हो गया, अभी आठ ही बजे थे तो मैंने सोचा चलो कुछ देर आंटी के पास चलते हैं। ये सोचकर मैं नीचे आ गया।

दरवाजा खुला था, मैं अंदर आ गया, आंटी किचन में थी,
गुड मॉर्निंग आंटी, मैंने आंटी से कहा।
गुड मॉर्निंग बेटा, आंटी ने कहा।
अब दर्द कैसा है, मैं दोपहर को आ जाउंगा, फिर डॉक्टर के पास चलेंगे, मैंने कहा।
अभी तो आराम है बेटा, पर डॉक्टर को तो दिखाना ही पडेगा, आंटी ने रोटी सेकते हुए कहा।
गुड मॉर्निंग, मेरे पिछे से आवाज आई। मैंने पिछे पलटकर देखा तो मैं देखता ही रह गया।
कितनी ही बार मैं इसे पूरी तरह नंगी देख चुका था, और भोग चुका था, पर आज जब वो नहाकर बाथरूम से बाहर आई तो उसने शरीर पर बस एक तौलिया लपेटा हुआ था, जो उपर से उसके आधे उभारों के दर्शन करा रहा था और नीचे से बस उसकी योनि को ही ढांप रहा था, बाकि उससे नीचे उसकी मांसल जांघें जिनपर पानी की हल्की हल्की बूंदे चमक रही थी, साफ दिखाई दे रही थी। मेरी नजर तो बस हटने का नाम ही नहीं ले रही थी।
गुड मॉर्निंग, मैंने उसे हाथ से ओ बनाते हुए मस्त लगने का इशारा किया और उसके गुड मॉर्निंग का जवाब दे दिया।
सोनल अपने रूम में चली गई और मैं आंटी से बातें करने लगा। कुछ देर बाद सोनल कपड़े पहनकर बाहर आई।
उसने व्हाइट कलर की स्लीवलैस कुर्ती पहनी हुई थी जो थोड़ी थोड़ी चमक भी रही थी, कुर्ती उसके उभारों पर इस तरह से थी जैसे दो कपड़ों को तिरछे करके एक दूसरे के उपर रख दिया जाता है, और उनके बीच में जो गेप बन जाता है, उसमें से उसकी कातिल क्लीवेज दिखाई दे रही थी। नीचे कुर्ती उसके कुल्हों से बस थोड़ी सी नीचे थी, जो कि उसके कुल्हों पर कसी हुई थी और शेप को उजागर कर रही थी। कुर्ती पर बूब्स के पास तिरछी किनारों पर ब्लैक कलर की डिजाइन और सेम वही डिजाइन नीचे की किनारियों पर भी था। नीचे उसने ब्लैक कलर की सलवार पहनी हुई थी।
मेरा तो लिंग एकदम उछाल मारकर जींस को फाड़ने को हो गया, बहुत ही होट लग रही थी, पता नहीं कॉलेज के लड़कों का क्या हाल होगा आज तो, मैंने मन ही मन सोचा।
मेरी नजर उसपर से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी, सोनल चलते हुए मेरे पास आई और मेरे गालों पर उंगली फिराती हुई रसोई में चली गई।
उसकी इस कातिल अदा ने तो मेरा कल्त ही कर दिया बस। और वोही बात जो सभी लड़कियों में पाई जाती है, जैसे ही वो मेरे पास से गुजरी उसके बदन से उठती महक मेरी नथूनों में भर गई।
जैसे ही वो अंदर जाने लगी मैंने उसके कुल्हों पर एक थप्पड मार दिया। उसने कातिल अदा से पिछे चेहरा घुमाकर मेरी तरफ घूरते हुए देखा और फिर सीधे किचन में घुस गई।
ओ-के आंटी अब मैं चलता हूं, कहकर मैं बाहर की तरफ आने लगा।
तभी मुझे धयान आया की बाइक में पटरोल तो है ही नहीं।
सोनल स्कूटी की चाबी देना, बाइक में तेल ही नहीं है, मैंने वापिस मुड़ते हुए कहा।
मैं रसोई के दरवाजे तक पहुंच गया था, तब सोनल रसोई से बाहर आ रही थी, जैसे ही वो बाहर निकली मैंने उसके कुल्हों पर चुटकी काट ली।
आह----- सोनल के मुंह से निकला।
क्या हुआ बेटी, अंदर से आंटी की आवाज आई।
कुछ नहीं मम्मी, कहते हुए सोनल ने मुझे एक मुक्का मारा और अपने रूम की तरफ चल दी। उसने चाबी लाकर मुझे दी और मेरे कान में कहा, दो मिनट रूकना, मैं भी आ रही हूं।
चाबी लेकर मैं नीचे आ गया और एक प्लास्टिक वाली दो लीटर की बोतल लेकर पैटरोल लेने के लिए चल पड़ा। पम्प पर कुछ भीड़ थी, इसलिए बीस मिनट लग गए वापिस आने में। जब मैंने स्कूटी अंदर खडी की तो सोनल नीचे ही आ रही थी।
कहां गये थे, सोनल ने नीचे आते ही मुझसे पूछा।
मैंने पैटरोल की बोतल उसके चेहरे के सामने कर दी। सोनल थोड़ी सी पिछे हो गई।
आज मेरे साथ चलो ना, अब कहा पैटरोल के हाथ करोगे, इसको रख दो, शाम को आकर डाल लेना।
अच्छा, अभी तो तुम्हारे साथ चल पडूंगा, पर शाम को फिर बस से आना पडेगा। फिर मैंने कुछ सोचा।
चलो ठीक है, मैंने सोचते हुए कहा।
मेरी हां सुनकर सोनल ने मेरे गले में बाहें डाली और मेरे होंठों पर एक किस्सससी ले ली।
ठीक है, ठीक है, अब इतना प्यार दिखाने की जरूरत नहीं है, चलो अब। मैंने पैटरोल की बोतल को वहीं पर रखा और पिछे वाली सीट पर बैठ गया।
आप चलाओ ना, सोनल ने मुंह बनाते हुए कहा।
नहीं, तुम चलाओ, मैं पिछे बैठकर मजा लूंगा।
सोनल अनमने मन से आगे बैठ गई और स्कूटी स्टार्ट की और बाहर आ गये। मेरे नजर सामने वाले मकान पर पड़ी तो वहां पर टू-लेट का बोर्ड लगा हुआ था, शायद अभी अभी लगाया था।
मैंने सोनल से पूछा, ये सामने वाले घर में टू-लेट लगा है। पहले इन्होंने किराये पर दे रखा था क्या।
सोनल: नहीं, पहले ये खुद ही इस्तेमाल करते थे, उपर वाले पोर्शन के लिए टू-लेट लगाया है।
वो मकान हमारे मकान के सामने था, बीच में गली थी। उसमें एक अंकल-आंटी रहते हैं, बाकी बच्चों को तो मैंने एक दो बार ही देखा है उस घर में। शायद दो लड़कियां हैं उनकी और दो लड़के। चारों बाहर ही रहते हैं। कभी कभार ही आते होंगे।
सोनल ने स्कूटी को मंजिल की तरफ बढ़ा दिया। मैं आराम से पिछे बैठा था। सोनल बार बार पिछे की तरफ होकर मेरी छाती में अपनी कमर मार रही थी।
क्या है, आराम से नहीं बैठ सकती, मैंने सोनल से कहा।
पर वो कहां मानने वाली थी, बार बार वैसे ही मेरी छाती में कमर से वार करती रही।
हम मेन रोड पर आ गये थे। अब कोई टेंशन नहीं थी। मैंने अपने हाथ उसके पेट पर कस दिये और आगे होकर उसकी कमर से अपनी छाती चिपका दी और उसके कंधे पर ठोडी रखकर आराम से बैठ गया। फिर मैंने अपने गाल को उसके कंधे पर रख दिया और उसकी गर्दन पर अपने होंठ फिराने लगा। उसे गुदगुदी हो रही थी शायद, वो बार बार अपनी गर्दन को हटाने की कोशिश कर रही थी।
मैंने अपने हाथ की उंगलियों को थोड़ा सा उपर की तरफ किया जो सीधी उसके उभारों से जा टकराई। उसकी उस कुर्ती में ऐसा लग रहा था कि मैं सीधे उसके नंगे उभार से हाथ टच कर रहा हूं। मैंने अपने हाथों से थोड़ा सा टटोला तो मुझे लगा कि उसने नीचे ब्रा वगैरह कुछ नहीं पहनी है। मैंने ब्रा की स्टरेप को ढूंढने की कोशिश की पर नहीं मिली, फिर मैंने हाथों को नीचे किया और उसकी कुर्ती को उपर उठाकर देखा तो समीज भी नहीं था।
पर मुझे यकीन नहीं हो रहा था। मैं उसके कान में फुसफुसाया, तुमने ब्रा नहीं पहनी। उसने शर्माते हुए नहीं में गर्दन हिला दी।
 
समीज भी नहीं पहना, मैंने फिर से उसके कान में कहा।
नहीं, उसने थोड़ा सा शर्माते हुए कहा।
मैंने अपने हाथ सीधे उसके उभारों पर रख कर दबा दिये, उसके मुंह से हलकी सिसकारी निकली, और साथ ही निकला, हटाओ कोई देख लेगा।
मैंने थोड़ा सा उसके उभारों को दबाकर वापिस अपने हाथ उसके पेट पर रख दिये। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसने ब्रा नहीं पहनी है, क्योंकि उसके उभार एकदम शेप में थे।
हम्मम,, लगता है हमेशा ही गीली रहती है तो तुम जो बगैर ब्रा के भी तुम्हारी चूचियां सीधी तनी हुई हैं।
ऐसी ही हैं मेरी चूचियां, औरों की तरह नहीं हैं लटकी हुई, मैं गरम नहीं होती तब भी ये नहीं लटकती। हमेशा तनी हुई रहती हैं।
मैंने उसे जोर से बाहों में भीच लिया।
ओह शिटटटटअअअअअअअअ मर गये, सोनल ने ब्रेक लगाते हुए कहा।
क्या हुआ, मैंने पूछा।
सामने देखों, मामू खडे हैं, उसने कहा। तब तक एक पुलिस वाला हमारी तरफ ही भागता हुआ, सीटी बजाता हुआ आ रहा था।
दरअसल वो मोड मुड़ते ही थोडी सी दूरी पर खड़े थे, जिससे दूर से दिखे नहीं, पर अब कुछ नहीं हो सकता था। दोनों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था।
चलो साइड में लगाओ, पुलिस वाले ने आते ही चाबी निकाल ली और साइड में इशारा करते हुए कहा।
मैं नीचे उतर गया और सोनल ने स्कूटी साइड में खडी कर दी।
हेलमेट क्यों नहीं है, चलो लाइसेंस दिखाओ, पुलिस वाले ने कहा।
सोनल का चेहरा तो एकदम देखने लायक हो गया था। घबराओ मत, मैंने सोनल से कहा।
मैंने अपना लाइसेंस निकाल के दिखाया, पुलिस वो का धयान पूरी तरह से हमारी तरफ नहीं था। वो बार बार इधर उधर देख रहा था।
कागज दिखाओ, लाइसेंस देखते हुए पुलिस वाले ने कहा।
जी वो चाबी, वो कागज लॉक में रखे हैं, सोनल ने पुलिस वाले से कहा।
हेलमेट क्यों नहीं लगाया, चालान कटेगा, पुलिस वाले ने कहा।
तो सर मना कौन कर रहा है, काट दो, मैंने बीच में ही कहा।
पुलिस वाला मुझे घूरकर देखने लगा। स्कूटी ये चला रही थी, ना तुम अपना लाइसेंस दिखाओ।
सोनल ने स्कूटी पर से अपना बैग उठाया और चैन खोलकर लाइसेंस ढूंढने लगी।
जी ये लीजिए, लाइसेंस निकाल कर सोनल ने पुलिस वाले से कहा।
हम्मममम----- चलो ठीक है, आगे से हेलमेल पहनकर चलना, चलो अब 50 रूपये निकालो और चलते बनो।
उसने सोनल का लाइसेंस वापिस कर दिया।
आप चालान काटिये, मैंने उससे कहा।
चालान पांच सौ का कटेगा, 50 में काम चल रहा है, चलो जल्दी दो।
सोनल बैग में से पर्स निकाला, और पैसे निकालने लगी।
क्या कर रही हो, पागल हो क्या, सोनल से कहा।
आप चालान काटिए कोई दिक्कत नहीं, आप पांच सौ क्या, हजार का काटिए, मैंने पुलिस वाले से कहा।

दे दो ना पैसे, अब कहां चालान भरते फिरेंगे, सोनल ने मुझसे कहा।
आप चालान काटिए, मैंने फिर से कहा।
वो मुझे घूरते हुए देखने लगा और फिर अपने दूसरे साथी को आवाज लगाकर हमारी तरफ इशारा किया।
जाओ, उधर जाकर कटवाओ, उसने नाराज होते हुए कहा।
मैंने आगे खडी पुलिस की गाड़ी के पास जाकर चालान कटवाया। अपना लाइसेंस लिया और चल पडे।
सोनल थोड़ी नाराज सी लग रही थी। उसने पूरे रास्ते बात नहीं की। ऑफिस पहुंचकर उसने मुझे उतारा और बगैर कुछ बोले ही चली गई। मैं अंदर आ गया, अपूर्वा की स्कूटी खडी थी, मैंने टाइम देखा तो मैं पंद्रह मिनट लेट हो गया था। जैसे ही मैं अंदर घुसा सामने से बोस बाहर आये।
गुड मॉर्निग सर, मैंने सर को कहा।
गुड मॉनिंग, लेट कैसे हो गये, सर ने कहा।
सर वो बाइक में पेैटरोल खत्म हो गया था, तो उस चक्कर में लेट हो गया।
आज हम बाहर जा रहे हैं, घूमने फिरने, तो तुम चाहो तो छुट्टी कर लो, बॉस ने कहा।
ठीक है सर, एक काम भी है, तो मैं बारह बजे निकल जाउंगा, मैंने कहा।
मैं ऑफिस में आ गया।
वॉव, लगता है आज तो किसी का कत्ल करने का इरादा है, मैंने ऑफिस में घुसते ही कहा।
गुलाबी तंग कुर्ती, बहुत ही महीन सी थी, ब्रा की स्ट्रैप साफ झलक रही थी, नीचे महीन व्हाइट पजामी, जिसमें से पेंटी लाइन साफ दिखाई दे रही थी, कुल्हों की शेप को इस तरह उजागर कर रही थी, मानों कुछ पहना ही ना हो, कुर्ती कुछ उपर उठ गई थी, जिस वजह से पजामी के थोड़ी उपर तक कमर दिख रही थी।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--31
गतांक से आगे ...........
मेरी आवाज सुनते ही कोमल (जो कि अपूर्वा के चेयर के साथ थोड़ी झुक कर खडी थी, शायद अपूर्वा की गोद में कुछ था, जिससे वो देख रहे थे) पलटी।
मैं तो एकदम सुन्न हो गया, कुर्ती का गला बहुत ही गहरा था, जिसमें से उसके तने हुए उन्नत उभार और उनके बीच की गहरी खाई किसी की भी हालत खराब करने के लिए काफी थी। मेरी नजर तो सीधे उसके उभारों पर टिक गई।
मेरे इस तरह देखने से वो कुछ शर्मा गई।
क्या है, कभी लड़की नहीं देखी क्या--------------।
उसकी तीखी मधुर आवाज सुनकर मैं स्वप्न लोक से वापिस आया।
आपको किसने कह दिया कि मैं लड़की देख रहा हूं, मैंने कहा।
मैंने उसके उभारों की तरफ हाथ से इशारा किया, और फिर थोड़ा उसके पास होकर धीरे से उसके कान में कहा - मैं तो अमृतकलश के दीदार कर रहा था।
चिपपप-----, उसने धीरे से कहा और वापिस अपूर्वा की तरफ घूम गई और झुककर नीचे देखने लगी। परन्तु जैसे ही वो झुकी मैं थोड़ा सा और आगे हो गया और उसके उभारों के रिएक्शन से एक्शन में आया मेरा लिंग उसके कुल्हों की खाई में जा टकराया। मैं वापिस तुरंत पिछे हो गया।
कोमल ने खा जाने वाली नजरों से मेरी तरफ देखा और कुछ उसके होंठ फुसफुसाये पर कुछ समझ में नहीं आया।
तीखी मिर्ची है, बड़ा मजा आयेगा खाने में, मैंने मन ही मन सोचा और अपनी चेयर पर आकर बैठ गया और सिस्टम ऑन कर दिया।
आज किसी का कत्ल करने की तैयारी है क्या, मैंने चेयर को लड़कियों की तरफ घुमाते हुए कहा।
मेरी बात सुनकर दोनों ने मेरी तरफ देखा, कोमल फिर कुछ बड़बड़ाई और वापिस अपूर्वा की गोद में देखने लगी।
ये तुम्हारी गोद में ऐसा क्या है, जो ये इतनी देर से वहीं झुकी हुई है, मैंने चेयर से उठते हुए कहा।
मैं अपूर्वा के पास आया और कोमल जिस तरफ खडी थी उसकी तरफ से आकर अपना हाथ कोमल की कमर में रखकर खड़ा हो गया और अपूर्वा की गोद में देखने लगा।
उसकी गोद में फोटो एलबम रखी थी, वो भी कोमल की। क्या एक से बढ़कर एक पोज दे रखे थे, सैक्सी सैक्सी से।
वॉव काफी अच्छे फोटो हैं, मैंने कहा और कोमल की तरफ मुंह करके, वैसे किसके हैं?
दिखाई नहीं दे रहा क्या, मेरे हैं, और किसके हैं, कोमल ने नाक सिकोड़ते हुए कहा।
तुम्हारा, दिखाना यार, और मैं अपूर्वा की गोद में रखी एलबम को पलटकर देखने लगा।
ये देखो, कितना अच्छा है ना, अपूर्वा ने एलबम को वापिस पिछे पलटकर एक फोटो दिखाते हुए कहा। उस फोटो में कोमल ने रेड कलर की साडी पहनी हुई थी जिसमें उसका सपाट मुलायम पेट कहर ढा रहा था, लम्बी नाभि तो घायल ही कर रही थी, साड़ी को उसने अपनी योनि से बस थोड़ा सा उपर बांधा हुआ था जिससे उसके कातिल कर्व साफ उजागर हो रहे थे, ब्लाउज ऐसा था कि मस्त उभारों को उपर से निकालने की कोशिश में लगा हुआ था शायद, कातिल क्लिवेज।
 
वॉव क्या सैक्सी मॉल है यार, तुम्हारी है क्या? फोटो को देखते ही जो पहले शब्द मेरे मुंह से निकले वो यही थे।
अपूर्वा ने मेरी जांघों पर एक मुक्का रसीद कर दिया और कोमल तो जैसे अभी के अभी मुझे कच्चा चब्बा जायेगी, इस तरह से मेरी तरफ देखने लगी।
कोमल ने झटके से एलबम को उठाया, और बंद करके, दूर हटो मुझसे, चिपपपप, कहकर मेरा हाथ अपनी पीठ पर से झटक दिया और बाहर चली गई।
उसके जाते ही अपूर्वा का भाषण शुरू हो गया।
आपको ऐसे नहीं कहना चाहिए था, बेचारी को कितना बुरा लग गया, आप भी ना, ऐसा भी कभी कहते हैं, किसी लड़की के बारे में। जाओ, मैं आपसे बात नहीं करती, आप बहुत वो हो।
और अपना मुंह फुला कर दूसरी तरफ कर लिया।
अरे यार, अब तुम तो नाराज मत होओ, सॉरी यार, पर मैं क्या करूं, फोटो ही ऐसा था, कि देखते ही सीधा मुंह से निकल गया, मैंने उसका मुंह अपनी तरफ करते हुए कहा।
आप है ना उसे सॉरी कह देना, फिर वो खुश हो जायेगी, अपूर्वा ने मेरी तरफ मुंह करके कहा।
ओ-के- बाबा, जब मिलेगी तो मैं उसे सॉरी कह दूंगा, मैंने उसके गाल को सहलाते हुए कहा।
आज सुबह है ना, मम्मी-पापा मेरी शादी की बात कर रहे थे, अपूर्वा ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा।
अरे तो इसमें बुरा मुंह बनाने की क्या बात है, ये तो बड़ी अच्छी बात है, मैंने कहा।
अपूर्वा चुपचाप मेरी आंखों में देखने लगी, वो कुछ सीरियस लग रही थी।
तभी कामवाली चाय लेकर आई, उसने हमें चाय दी और चली गई। मैं चाय लेकर अपनी चेयर पर आकर बैठ गया।
अच्छा तुम्हें कैसा लड़का पसंद है, मैंने चाय की चुस्की लेते हुए अपूर्वा से पूछा।
पर उसने कोई जवाब नहीं दिया।
क्या हुआ, बताया नहीं तुमने, तुम्हें कैसा लड़का पसंद है, मैंने फिर से पूछा।
मुझे नहीं पता, उसकी आवाज से शायद कुछ नाराजगी झलक रही थी।
नाराज हो मुझसे, मैंने कहा।
मेरी बात सुनते ही अपूर्वा एकदम मेरी तरफ घूमी और मेरे चेहरे की तरफ गौर से देखने लगी।
अरे यार मैंने कहा ना कि मैं उससे माफी मांग लूंगा, प्लीज अब तुम ऐसे नाराज मत होओ, मैंने कहा।
पक्का, प्रोमीश करो, अपूर्वा ने वैसे ही उदास से चेहरे से कहा।
प्रोमिश, मैंने अपने गले को पकड़ते हुए कहा।
वो वापिस अपने सिस्टम की तरफ घूम गई और चाय पीने लगी।
अच्छा, आज मैं 12 बजे ही चला जाउंगा, वो कुछ काम है, और बॉस भी सबके साथ घूमने जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा है कि यदि छूट्टी करना चाहो, तो छूट्टी कर सकते हो, तो तुम भी चल पड़ना, यहां अकेली बोर होउगी, मैंने अपूर्वा से कहा।
ओ-के-, अपूर्वा की धीमी सी आवाज आई।

तभी बॉस ऑफिस में आये, ओ-के- हम जा रहे हैं, तुम जब चाहो चले जाना, समीर तो किसी काम से जायेगा, तो अगर तुम भी चाहो तो चली जाना अपूर्वा, बॉस ने अंदर आते हुए कहा।
ओ-के- बॉस, अपूर्वा की आवाज कुछ रूंधी हुई सी थी।
बॉस कहकर चले गये। बॉस के जाने के बाद मैं उठकर अपूर्वा के पास गया और उसका चेहरा हाथों से पकड़कर उपर उठाया।
क्या हुआ बेबी, तुम रो क्यों रही हो, उसकी आंखों में आंसू देखकर मैंने कहा।
कुछ नहीं, बस ऐसे ही, उसने अपने आंसू पोंछते हुए कहा।
नहीं, बताओ, प्लीज, देखों तुम मुझे अपना अच्छा दोस्त मानती हो कि नहीं, मैंने उसके गालों को सहलाते हुए कहा।
बहुत अच्छा मानती हूं, अपूर्वा ने थोडा सा मुस्कराते हुए कहा।
तो फिर बताओ क्या बात है, क्यों रो रही हो तुम, मैंने कहा।
मैं वहीं पर जमीन पर उकडूं बैठ गया था और मेरे हाथ उसके नीचे झुके हुए चेहरे पर थे, और मैं उसके गालों को सहला रहा था और उसकी आंखों से निकलने वाले आंसुओं को पौंछ रहा था।
'सच में, कोई बात नहीं है, ये तो बस ऐसे ही', कहते हुए उसका गला फिर से रूंध गया और वो आगे कुछ नहीं बोल पाई।
 
मैं खड़ा हो गया और झुककर उसे अपने सीने से लगा लिया।
अगर बताने की बात नहीं है तो, कोई बात नहीं, पर ऐसे हिम्मत नहीं हारा करते, देखो तुम रोते हुए बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती, मैंने उसके सिर में हाथ फिराते हुए कहा।
अच्छा ठीक है, आज शाम को मूवी देखने चलेंगे, अब तो खुश हो जाओ, मैंने बच्चों की तरफ उसे बहलाते हुए कहा।
अपूर्वा ने अपने नाकों से बह रहे पानी को वापिस खींचा और अपने चेहरे को मेरे सीने में से पिछे हटाया और मुस्कराते हुए हां में गर्दन हिला कर अपना नाक पौंछने लगी।
अच्छे बच्चे रोते नहीं, कोई बात नहीं, सुबह अपने मायके चली जाना, अब रोना बंद करो।
मेरी बात सुनकर अपूर्वा ने एक मुक्का मेरी छाती में जमा दिया और फिर हंसते हुए बोली।
कौन-सी मूवी देखने चलेंगे, आज ई-पी- में चलते हैं, मैं वहां कभी नहीं गई हूं।
ओ-के-, मैंने उसके सिर पर हाथ फिराते हुए कहा।
पर तुम तो अभी चले जाओगे, तो फिर मूवी देखने कैसे चलेंगे, उसने थोड़ा सा सीरियस चेहरा बनाते हुए कहा।
शाम को चलेंगे ना, अभी जाकर मुझे आंटी को डॉक्टर के पास लेकर जाना है, एक-दो घंटे का काम है, फिर शाम को चार बजे के आस-पास तुम आ जाना घर पर, मैंने कहा।
या फिर अभी मेरे घर पर ही चलना, और शाम को फिर सीधे वहीं से चल पडेगें, मैंने अपूर्वा को कहा।

आप तो डॉक्टर के चले जाओगे, मैं वहां बोर होती रहूंगी, मैं शाम को ही आ जाउंगी, अपूर्वा ने कहा।
हां ये भी ठीक है, तुम वहां खामखां बोर होती रहोगी, चलो तुम शाम को ही आ जाना, पर 4 बजे से पहले पहले आ जाना, नहीं तो फिर लेट हो जायेंगे, उधर के शो टाइम का भी पता नहीं है, मैंने कहा।
हां, मैं चार बजे तक आ जाउंगी, अपूर्वा ने कहा।
फिर हम काम करने लगे। मैंने 12 बजे का अलार्म सैट कर दिया ताकि लेट ना होउं। ठीक बारह बजे अलार्म बजा तो हमने अपने सिस्टम बंद किये और बाहर आ गये। सामने से कामवाली चाय लेकर आ रही थी।
क्या हुआ साहब, मैं तो चाय लेकर आई थी, कामवाली ने हमें बाहर देखकर कहा।
अभी तो पी थी चाय, इतनी जल्दी फिर ले आई, मैम को पता चल गया ना तो तेरी तनख्वाह में से पैसे काट लेगी, मैंने चुटकी लेते हुए कहा।
वो तो यहां पर हैं ही नहीं, सभी घूमने गये हैं, कोई भी नहीं हैं, तो पता कैसे चलेगा, कामवाली ने चहकते हुए कहा।
मैं एक मिनट अभी आई, अपूर्वा ने अपनी छोटी उंगली दिखाते हुए कहा और वापिस ऑफिस में चली गई।
मैं भी अंदर ऑफिस में आ गया और कामवाली भी चाय लेकर ऑफिस में ही आइ गई।
अपूर्वा दूसरे दरवाजे से बाथरूम में चली गई।
कामवाली ने चाय टेबल पर रख दी। मैं अपनी चेयर के साथ ही खड़ा था, जब उसने चाय टेबल पर रखी तो उसके कुल्हें मुझसे टच हो गये। मैं तुरंत पिछे घूम गया और मेरी जांघें सीधे उसके कुल्हों पर सैट हो गई। मैंने बाथरूम की तरफ देखा, पर वहां से बाथरूम दिखाई नहीं दे रहा था।
मेरा लिंग एकदम पोजीशन में आ गया और उसके जींस में उभार बनाते हुए उसके कुल्हों को दबाने लगा। कामवाली भी वैसे रहकर टेबल पर चाय के कपों को इधर उधर करती रही। जब उसने कोई विरोध नहीं किया तो मैंने उसके कुल्हों पर दबाव बढ़ा दिया और अपने हाथों से उसकी जांघों को पकड़ लिया। सच्ची मुझसे इतना सैक्स भर गया था कि अगर आज अपूर्वा न होती तो उसका तो काम हो ही जाना था। मेरी नजर बार बार दरवाजे पर ही चैक कर रही थी कि कहीं अपूर्वा तो नहीं आ जाये।
मैं उसकी जांघों को पकड़कर कपड़ों में से ही धक्के मारने लगा। मेरे हर धक्के से वो आगे को सरक जाती और फिर वापिस पिछे हो जाती। बहुत मजा आ रहा था ऐसे डर डर कर मजे लेते हुए।
तभी बाथरूम का दरवाज खुलने की आवाज आई और मैं अपनी चेयर पर बैठ गया। वो भी खड़ी हो गई। उसका चेहरा एकदम लाल हो रखा था और उसकी सांसे भी तेज चल रही थी। मैंने इशारे से उसे बाहर जाने को कहा, और वो तुरंत अपूर्वा के अंदर आने से पहले बाहर निकल गई। मैंने एक कप अपूर्वा को दिया और एक खुद ले लिया और चाय पीने लगे। मैंने अपूर्वा की तरफ देखा तो वो चाय पीते हुए मुझे ही देखे जा रही थी।
क्या बात है, ऐसे क्या घूर रही हो, मैंने कहा।
क्यों देख नहीं सकती, मेरी मर्जी मैं जिसे चाहूं देखूं, अपूर्वा ने मुस्कराते हुए कहा।
देख सकती हो, देख सकती हो, तुम्हारी आंखें हैं, तुम्हारी जो मर्जी हो वो देखों, मैं तो बस वैसे ही पूछ रहा था, मैंने कहा।
हमने चाय खत्म की और बाहर आ गये।
आपकी बाइक कहां है, अपूर्वा ने पूछा।
वो---------- पैटरोल------ नहीं था------- ना----- तो वो----- मैं आज भी भूल गया, डलवाना, इसलिए आज भी नहीं लाया, मैंने कहा।
पर तुम टेंशन मत लो, तुम्हें परेशान नहीं करूंगा, आज मैं बस से जाउंगा, काफी दिन हो गये बस से सफर किये, मैंने बात पूरी करते हुए कहा।
ज्यादा बकवास मत करो, आपको लगता है कि मैं आपको घर तक छोडती हूं तो मैं परेशान हो जाती हूं, मुझे कोई परेशानी नहीं होती, उल्टा अच्छा ही लगता है, कुछ देर और आपके साथ रह लेती हूं, अपूर्वा ने कहा।
मेरा मतलब, कुछ देर और साथ हो जाता है, मतलब मेरा मतलब---------- मतलब मैं कहना चाहती हूं कि, मतलब वो-------।
क्या मतलब, इतने मतलब तो मैंने एक साथ कभी सुने ही नहीं, मैंने चुटकी लेते हुए कहा।
मेरा मतलब है कि थोडी देर और बाहर घूम लेती हूं, नहीं तो घर जाकर तो घर में ही रहती हूं फिर, अपूर्वा ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा।
ओ-के- चलो अब, मतलब मतलब,,,, बस आने वाली होगी, निकल गई तो दस पंद्रह मिनट वेट करना पड़ेगा, मैंने कहा।
बस से कयों जाओगे, मैं छोड़ देती हूं, घर पर, अपूर्वा ने स्कूटी स्टार्ट करते हुए कहा।
नहीं, आज मैं बस से ही जा रहा हूं, तुम सीधे अपने घर पहुंचो, मैंने उसकी पीठ थपथपाते हुए कहा।
ओ-के- बाय- टेक केयर, अपूर्वा ने स्कूटी बाहर निकालते हुए कहा।
क्रमशः.....................
 
बैंक की कार्यवाही मजे लेकर आई--32
गतांक से आगे ...........
उसके साथ साथ मैं भी बाहर आ गया, और बस का इंतजार करने लगा। 2 मिनट में ही बस आ गई और मैं उसमें बैठ गया। बस में पूरी सीटिंग पूरी थी, तो मुझे खड़ा ही होना पड़ा। रस्ते में चार-पांच लडके और बैठे और आज ऐसे ही सूखा सूखा ही घर पहुंच गया।
सुबह क्या सोचा था, पर वैसा कुछ भी नहीं हुआ।
घर पहुंचा तो देखा सोनल की स्कूटी उधर ही खडी थी।
ये आज इतनी जल्दी कैसे आ गई, मैंने मन ही मन सोचा।
मैंने बोतल में से पैटरोल बाइक में डाला और उपर चल दिया। जब मैं पहली मंजिल पर पहुंचा, जिस पर सोनल और आंटी रहती हैं, तो मुझे अंदर से थोड़ी अजीब सी आवाज सुनाई दी, जैसी सैक्स के समय निकाली जाती हैं, मैंने थोड़ा धयान से सुना तो आंटी सिसकारियां ले रही थी, दरवाजा हल्का सा खुला था।
मैंने धीरे से दरवाजा खोला ताकि कोई भी आवाज न हो और सिर अंदर करके देखा कि हॉल में ही तो नहीं हैं। पर हॉल में कोई दिखाई नहीं दिया। मैं दबे पावों से अंदर आ गया। आवाज सोनल के बेडरूम में से आ रही थी। बेडरूम का दरवाजा आधा खुला हुआ था। मैं दीवार के साथ छुपते हुए थोड़ा सा सिर निकाल कर अंदर देखा तो आश्चर्य का ठिकाना न रहा।
वॉव, इतनी जल्दी, कल ही तो सुझाव दिया था, मैंने मन ही मन सोचा।
सामने बेड पर आंटी पूरी नंगी लेटी हुई थी, उनकी टांगे हवा में उठी हुई थी और मजे के कारण आंखें बंद थी। उनकी मोटी मोटी चूचियां तनी हुई थी और सोनल के हाथ उन्हें मसलने में लगे हुए थे। सोनल का मुंह उनकी टांगों के बीच में घुसा हुआ था।
वॉव बहुत खूब, मैंने मन ही मन कहा और दबे पांव वापिस बाहर आ गया। मेरा दिमाग चकरा सा गया था, कि एक मां बेटी में ऐसा रिश्ता भी हो सकता है। यही सोचते सोचते मैं उपर आ गया और रूम में आकर बेड पर लेट गया।
आधे घंटे बाद मैंने आंटी के पास फोन किया कि आंटी मैं आ गया हूं, डॉक्टर के चलते हैं।
ठीक है बेटा, मैं अभी तैयार हो जाती हूं, फिर चलते हैं, आंटी ने जवाब दिया।
मैंने फोन रख दिया और चलने के लिए बाहर आ गया और रूम को लॉक कर दिया। मेरी नजर पूनम वाली छत पर पड़ी तो वहां पर अंकल (पूनम के पिता जी) और उनके साथ एक लड़की कुछ सामान रख रहे थे। लड़की को मैं नहीं जानता था। मैं नीचे आ गया और दरवाजा नोक किया।
कौन है, अंदर से सोनल की आवाज आई।
मैंने दरवाजा नोक किया तो वो थोड़ा सा खुल गया और मैं उसे खोलते हुए अंदर आ गया।
मुझे देखते ही सोनल के चेहरे पर मुस्कान आ गई, परन्तु अगले ही पल उसने अपना नाक सिकोड़ा और गर्दन झटकते हुए रसोई में चली गई।
चले आंटी, मैंने सामने बैठी आंटी से कहा। आंटी के चेहरे पर एक अलग किस्म की संतुष्टि सी झलक रही थी।
चलो बेटा, आंटी ने उठते हुए कहा।
मैं आंटी को सहारा देने के लिए उनकी तरफ बढ़ा और उनका हाथ पकड़कर अपनी गर्दन के पिछे से लेकर अपने कंधे पर रख लिया।
सोनल बेटा, कुछ मदद करना, नीचे उतरने में, आंटी ने सोनल को आवाज देते हुए कहा।
मेरा एक हाथ मेरे कंधे पर रखे आंटी के हाथ को पकड़े हुए था और दूसरा हाथ आंटी की कमर के पिछे से जाकर उनके दूसरे साइड से कमर को पकड़े हुए था।
सोनल ने आकर दूसरी साइड से आंटी का हाथ पकड़ लिया और हम बाहर आ गये। सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए सोनल आगे हो गई और आंटी का हाथ अपने कंधे पर रख लिया। धीरे धीरे हम नीचे उतर आये। मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और आंटी पिछे बैठ गई। मैंने सोनल की तरफ देखा, तो उसने अपना मुंह घुमा लिया और उपर चली गई।
मैं आंटी को लेकर डॉक्टर के पास आ गया।
डॉक्टर ने आंटी का चेकअप किया और कुछ दवाईयां लिख दी। वापिस आते हुए मैंने स्टोर पर से दवाईयां ली और हम घर आ गये।
मैंने बाईक अंदर खडी की और आंटी को सहारा देकर उपर ले जाने लगा।
आंटी ने सोनल की कोई आवाज दी पर या तो उसने सुनी नहीं या फिर वो जानबूझ कर नहीं आई।
जैसे तैसे मैं सहारा देकर आंटी को उपर ले आया। आंटी को मैंने सोफे पर बैठा दिया और उपर अपने रूम में आ गया।
उपर आकर मैंने देखा कि पूनम के पापा अभी भी छत पर ही हैं। मैं उनकी तरफ चला गया।
नमस्ते अंकल जी, मैंने मुंडेर के पास खड़े होकर कहा।
 
मेरी आवाज सुनकर अंकल ने मेरी तरफ देखा, नमस्ते बेटा, कैसे हो, अंकल ने कहा।
ठीक हूं अंकल, आप सुनाओ, इतनी धूप में छत पर क्या कर रहे हो, मैंने कहा।
तभी वो लडकी हाथ में कुछ टूटा-फूटा सामान लिए उपर आई, मैंने उसकी तरफ देखा, काफी सुंदर थी, पर उसकी तरफ ज्यादा धयान नहीं दिया, क्योंकि अंकल मेरी तरफ ही देख रहे थे।
कुछ नहीं बेटा, ये कुछ टूटा-फूटा सामान इक्कठा हो गया था, नीचे तो सोचा इसे उपर रख देते हैं, नीचे जगह घेर रहा था, अंकल ने कहा।
मैंने फिर से एक नजर उस लड़की की तरफ डाली, वो मेरी तरफ ही देख रही थी। मैं कुछ देर और वहां खड़ा रहा, अंकल अपने काम में लग गये थे और वो लड=की सामान रखकर वापिस नीचे चली गई थी। जब धूप ज्यादा लगने लगी तो मैं रूम में आ गया। मैंने टाइम देखा तो तीन बज चुके थे।
मैं बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होकर व्हाईट शर्ट और ब्लू डेनिम पहन ली और फ्रीज में कुछ खाने के लिए देखने लगा।
वॉव, रसगुल्ले अभी रखे ही हैं, सामने फ्रीज में रसगुल्लों का डिब्बा रखा देखकर मैंने खुद से कहा।
मैंने रसगुल्लों का डिब्बा बाहर निकाला और उसमें से चार-पांच रसगुल्ले एक कटोरी में रखे और डिब्बा वापिस रख दिया, अभी उसमे पांच-छः रसगुल्ले और रखे थे।
मैं बेड पर आकर बैठ गया और रसगुल्ले खाने लगा।
मेरे फोन की मैसेज टोन बजी तो मैंने उठाकर मैसेज ओपन किया, सोनल का मैसेज था।
हमारे बीच में अब तक जो भी हुआ, उसे एक बढ़िया सपना समझकर भूल जाना।
मेरी कुछ समझ में नहीं क्या, ये कहना क्या चाहती है तो मैंने उसे कॉल किया पर उसने कॉल नहीं उठाया।
कुछ देर बाद उसका एक मैसेज और आया, 'मुझे ऐसे लडके बिल्कुल पसंद नहीं हैं, जैसा आज सुबह तुमने किया था', इसलिए मैं नहीं चाहती कि अब हमारे बीच कुछ भी रहे, और हां, मुझे कॉल करने की भी जरूरत नहीं है'।
मैंने मैसेज पढा ही था कि एक और मैसेज आ गया 'अगर कुछ पूछना चाहते हो तो मैसेज से पूछ सकते हो, पर कॉल करने की या मुझसे बात करने की कोशिश मत करना',।
मैंने मैसेज पढ़ा और फोन को बेड पर फेंक दिया और रसगुल्ले खाने लगा।
उसके मैसेज पढ़कर मेरा दिमाग खराब हो गया था, इसलिए जल्दी जल्दी सारे रसगुल्ले खा लिये और फ्रीज में से बाकी बचे रसगुल्ले भी निकाले और उन्हें भी खा गया।
तभी मेरा फोन बजने लगा। मैंने उठाकर देखा तो अपूर्वा की कॉल थी। मैंने कॉल रिसीव की।
हाय बेबी, निकल ली क्या घर से, मैंने फोन उठाते ही कहा।
आपके दर पर पहुंच भी गई हूं, जरा बाहर निकल कर देखो, अपूर्वा ने कहा।
मैं तुंरत बाहर आया, पर बाहर कोई नहीं था, मैं मुंडेर के पास गया और नीचे गली में देखा तो अपूर्वा दरवाजे के सामने स्कूटी पर बैठी थी। वो उपर की तरफ ही देख रही थी। उसने मुझे हाथ हिलाकर हाय कहा, तो मैंने भी उसका जवाब दिया।
दो सैकिण्ड अभी आ रहा हूं, मैंने रूम को लॉक लगाते हुए कहा।
मैंने फोन कट किया और नीचे आ गया। अपनी बाइक स्टार्ट की और बाहर आ गया।
समवन इज लुकिंग वेरी हैंडसम, अपूर्वा ने अपने हाथ से ओ बनाते हुए कहा।
समवन इज लुकिंग सो ब्यूटीफुल, मैं बाइक उसकी स्कूटी के साइड में ले आया था, उसके गालों को भिंचते हुए मैंने कहा।
आई------ दर्द होता है, अपूर्वा ने अपना गाल मसलते हुए कहा।
ओ-के- अब चलो, कहते हुए मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और हम चल पड़े। सुबह वाली घटना के कारण मैंने हेलमेट ले लिया था, अपूर्वा टोपी वाला हेलमेट पहने हुए थी।

धीरे धीरे डराइव करते हुए हम दस मिनट में ई-पी-(एंटरटेनमेन्ट पैराडाइज) पहुंच गये। हमने स्कूटी और बाइक पार्क की और टिकट काउण्टर पर आ गये। मूवी लिस्ट देखकर अपूर्वा ने 'जो उूबा सो पार' मूवी सलेक्ट की। टिकट की लाइन लम्बी थी और भीड़ भी ज्यादा थी, इसलिए मैंने अपूर्वा को वहीं खडे होने को कहा और मैं टिकट लेने के लिए लाइन में लग गया। टिकट लेने में ही आधा घण्टा लग गया।
मैं टिकट लेकर आया तो अपूर्वा के पास तीन लडकियां खड़ी हुई थी, उनकी पीठ मेरी तरफ थी तो मैं उनका चेहरा तो नहीं देख पा रहा था, पर अपूर्वा उनसे हंस हंसकर बात कर रही थी।
बड़ी मुश्किल से मिली हैं, मैंने उनके पास आकर कहा।
मेरी आवाज सुनकर उन तीनों ने मेरी तरफ देखा, तो खुशी और आश्चर्य के मिले जुले भाव मेरे चेहरे पर आ गये, और साथ ही नवरीत के चेहरे पर भी।
हाय, आप यहां, मेरा मतलब आप भी मूवी देखने आई हैं, मैंने थोड़ा हड़बड़ाते हुए कहा।
नहीं जी मैं तो बस उंट की सवारी करने आई थी, नवरीत ने फन पार्क में खड़े उंट की तरफ इशारा करते हुए कहा।
तभी बीच में अपूर्वा बोल पड़ी, वॉव, आप दोनों एक दूसरे को जानते हैं, और मैं खामखां परिचय करवाने की तैयारी किए बैठी थी।
मैंने बाकी की दो लड़कियों की तरफ इशारा किया, तो नवरीत ने उनका परिचय करवाया।
ये मेरी फ्रेंड्स हैं, मेरे पड़ोस में ही रहती हैं, ये रिया और ये सुमन।
 
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