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Adultery ब्लैकमेल

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१०

जब ईशा अपनी पुरानी यादोंसे बाहर आ गई, उसके सामने अस्तित्व खडा था. उंचा, गठीला शरीर, चेहरेपर हमेशा मुस्कान और उसकी हर एक हरकतसे दिखता उसका उत्साह. उसने देखे उसके फोटोसे वह बहुत अलग और मोहक लग रहा था. वे एकदुसरेसे पहली बारही मिल रहे थे इसलिए दोनोंके चेहरे खुशीसे दमक उठे थे. दोनों एकदुसरे की तरफ सिर्फ एकटक देखने लगे.

ईशा और अस्तित्व दोनो न जाने कितनी देर सिर्फ एक दुसरे की तरफ ताक रहे थे. भलेही वे एकदुसरे को एक महिने से जानते थे लेकिन वे एक दुसरे के सामने पहली बार आ रहे थे. वैसे वे एकदुसरे को सिर्फ जानते ही नही थे तो उन्होने एक दुसरेको अच्छी तरह से समझ लिया था. एकदुसरे के स्वभाव की खुबीया या खामीयां वे भली भांती जानते थे. फिरभी एक दुसरे के सामने आते ही उन्हे क्या बोले कुछ समझ नही आ रहा था. वे इतने चूप थे की मानो दो-दो तिन-तिन पेजेस की मेल करनेवाले वे हम ही है क्या? ऐसी उन्हे आशंका आए. आखिर अस्तित्व ने ही पहल करते हूए शुरवात की,

" ट्रॅफिकमें अटक गया था… इसलिए देर हो गई …"

" मै तो साडेचार बजेसेही तुम्हारी राह देख रही हूं .." ईशाने कहा.

" लेकिन तूमने तो पांच का वक्त दिया था. " अस्तित्व ने कहा.

सिर्फ शुरु करनेकी ही देरी थी, अब वे आपस में अच्छे खासे घुल मिलकर बाते करने लगे, मानो इंटरनेट पर चॅटींग कर रहे हो. बाते करते करते वे धीरे धीरे बीचके रेतपर समुंदरके किनारे किनारे चलने लगे. चलते चलते कब उनके हाथ एकदुसरे में गुथ गए, उन्हे पताही नही चला. न जाने कितनी देर तक वे एक दुसरेके हाथ पकडकर बीचपर घुम रहे थे.

सुर्यास्त हो चुका था और अब अंधेराभी छाने लगा था. बिचमेंही अचानक रुककर, गंभीर होकर अस्तित्व ने कहा,

" ईशा… एक बात पुछू ?"

उसने आखोंसेही मानो हा कह दिया.

" मुझसे शादी करोगी ?" उसने सिधे सिधे पुछा.

उसके इस अनपेक्षित सवालसे वह एक पल के लिए गडबडासी गई. अपने गडबडाए हालातसे संभलकर उसने कुछ ना बोलते हूए अपनी गर्दन निचे झूकाई.

अस्तित्व का दिल अब जोरजोरसे धडकने लगा था.

मैने बडा ढांढस कर यह सवाल तो पुछा….

लेकिन वह ‘हां’ कहेगी या ‘नही’ ?…

वह उसके जवाबकी प्रतिक्षा करने लगा.

मैने यह सवाल पुछनेमें कुछ जल्दी तो नही कर दी ?…

उसने अगर ‘नही’ कहा तो ?…

उसके जहनमें अलग अलग आशंकाएं आने लगी.

थोडी देरसे वह बोली,

" चलो हमें निकलना चाहिए .."

उसने बोलने के लिए मुंह खोला तब उसका दिल जोर जोरसे धडकने लगा था.

लेकिन यह क्या … वह उसके सवालके जवाबसे बच रही थी….

लेकिन वह एक पीएचडी का छात्र था. किसी भी सवाल के जवाब का पिछा करना उसके खुनमें ही भिना हूवा था.

" .. तूमने मेरे सवाल का जवाब नही दिया .." उसने उसे टोका.

" चलो मै तुम्हे छोड आती हूं " वह फिर से उसके सवाल के जवाब से बचते हूए बोली.

लेकिन वहभी कुछ कम नही था.

" अभी तक तूमने मेरे सवालका जवाब नही दिया "

वह शर्मके मारे चूर चूर हो रही थी. उसकी गर्दन झूकी हूई थी और उसका गोरा चेहरा शर्मके मारे लाल लाल हुवा था. वह अपनी भावनाए छुपानेके लिए पैर के अंगुठेसे जमीन कुरेदने लगी.

" मैने थोडी ना कहा है " वह किसी तरह, अभीभी अपनी गर्दन निची रखते हूए बोली.

अपने मुंहसे वह शब्द बाहर पडे इसका उसे खुदको ही आश्चर्य लग रहा था. अस्तित्व का अब तक मायूस हुवा चेहरा एकदम से खुशीके मारे खिल उठा. उसे इतनी खुशी हुई थी की वह उसे कैसे व्यक्त करे कुछ समझ नही पा रहा था. उसने अपने आपको ना रोक पाकर उसे अपने बाहोंमें कसकर भरकर उपर उठा लिया.
 
११

ईशा गाडी ड्राईव्ह कर रही थी और गाडीमें आगे उसके बगलकीही सिटपर अस्तित्व बैठा हुवा था. गाडीमें काफी समयतक दोनो अपने आपमें खोए हूए गुमसुमसे बैठे हूए थे.

सच कहा जाए तो अस्तित्व उसने सोचा उससे भी जादा चुस्त , तेज तर्रार और देखनेमें उमदा है … और उसका स्वभाव कितना सिधा और सरल है …

पहलेही मुलाकातमें शादीके बारेमें सवाल कर उसने अपनी भावनाएं जाहिर की यह एक तरहसे अच्छा ही हुवा.. सच कहा जाए तो उसने वह सवाल पुछकर मुझेभी उसके बारेमें अपनी भावनाएं व्यक्त करनेका मौका दिया है…

उसे अब उसके बारेंमे एक अपनापन महसूस हो रहा था. उसने अब उसमें अपना भावी सहचारी … एक दोस्त… जो हमेशा दुख और सुखमें उसका साथ देगा … देखना शुरु किया था.

उसने सोचते हूए उसकी तरफ एक कटाक्ष डाला. उसनेभी उसकी तरफ देखकर एक मधूर मुस्कुराहट बिखेरी.

लेकिन अब वहभी अपनेही बारेमें सोच रहा होगा क्या?…

" तूम पढाई वैगेरा कब करते हो… नही .. मतलब .. हमेशा तो चॅटींग और इंटरनेटपरही बिझी रहते हो " ईशा कुछ तो बोलना है और अस्तित्व को थोडा छेडनेके उद्देश्यसे बोली.

अस्तित्व उसके छेडनेका मुड पहचानकर सिर्फ मुस्कुरा दिया.

" हालहीमें तुम्हारे कंपनीका प्रोग्रेस क्या कहता है ? " अस्तित्व ने पुछा.

" अच्छा है … क्यों?… हमारी कंपनी तो दिनबदीन प्रोग्रेस करती जा रही है " ईशाने कहा.

" नही मैने सोचा … हमेशा चॅटींग और इंटरनेटपर बिझी होनेसे उसका असर कंपनीके कामपर हुवा होगा. … नही?" अस्तित्व भी उसे वैसाही नटखट जवाब देते हूए बोला.

वहभी उसके तरफ देखकर सिर्फ हंस दी. वह उसके इस बातोंमें उलझानेके खुबीसे वाकीफ थी और उसे उसका इस बारेमें हमेशा अभिमान रहा करता था.

ईशाकी गाडी एक आलीशान हॉटेलके सामने – हॉटेल ओबेरायके सामने आकर रुकी. गाडी पार्कींगमें ले जाकर ईशाने कहा, " एक मिनीट मै मेरा मोबाईल हॉटेलमें भूल गई हूं … वह झटसे लेकर आती हूं और फिर हम निकलेंगे… नही तो एक काम कर सकते है … कुछ ठंडा या गरम हो जाए तो मजा आ जाएगा … नही?… और फिर निकलेंगे " ईशा गाडीके निचे उतरते हूए बोली.

ईशा उतरकर हॉटेलमें जाने लगी और अस्तित्व भी उतरकर उसके साथ हो लिया.

हॉटेलका सुईट जैसे जैसे नजदिक आने लगा, वैसे एक अन्जानी भावनासे ईशाके दिलकी धडकन तेज होने लगी थी. एक अनामिक डरने मानो उसे घेर लिया था. अस्तित्व भलेही उसके पिछे पिछे चल रहा था लेकिन उसके सासोंकी गति विचलीत हो चुकी थी. ईशाने सुईटका दरवाजा खोला और अंदर चली गई.

अस्तित्व दरवाजेमेही इधर उधर करता हुवा खडा हो गया.

" अरे आवोना अंदर आवो " ईशा उनके बिच बनी, असहजता, एक तणाव दूर करनेका प्रयास करती हुई बोली.

" बैठो " ईशा उसे बैठनेका इशारा करती हुई बोली और वही कोनेमें रखा फोन उठानेके लिए उसके पासही बैठ गई.

ईशाने अस्तित्व के पास रखा हुवा फोन उठानेके लिए हाथ बढाया और बोली, " क्या लोगे ठंडा या गरम"

फोन उठाते हूए ईशाके हाथका हल्कासा स्पर्श अस्तित्व को हुवा था. उसका दिल जोर जोरसे धडकने लगा. ईशाको भी वह स्पर्श आल्हाददायक और अच्छा लगा था. लेकिन चेहरेपर वैसा कुछ ना बताते हूए उसने ऑर्डर देनेके लिए फोनका क्रेडल उठाया.

फोनका नंबर डायल करनेके लिए अब उसने अपना दुसरा हाथ बढाया. इसबार इस हाथकाभी हल्कासा स्पर्श अस्तित्व को हुवा. इस बार वह अपने आपको रोक नही सका. उसने ईशाने आगे बढाया हुवा हाथ हल्केही अपने हाथमें लिया. ईशा उसकी तरफ देखकर शर्माकर मुस्कुराई. उसे वह हाथ उसके हाथसे छुडाकर लेना नही हो रहा था. मानो वह हाथ सुन्न हो गया हो. अस्तित्व ने अब वह हाथ कसकर पकडकर उसे खिंचकर अपनी बाहोंमे भर लिया. सबकुछ कैसे तेजीसे घट रहा था और वह सब ईशाकोभी अच्छा लग रहा था. उसका पुरा बदन गर्म हो गया था और होंठ कांपने लगे थे. अस्तित्व नेभी अपने गर्म और बेकाबू हूए होंठ उसके कांपते होंठोपर रख दिए. ईशाका एक मन प्रतिकार करनेके लिए कह रहा था. लेकिन दुसरा मन तो विद्रोही होकर सारी मर्यादाए तोडने निकला था. वह उसपर हावी होता जा रहा था और ईशाकी मानो होशोहवास खोए जैसी स्थिती हो गई थी. अस्तित्व ने उसे झटसे अपने मजबुत बाहोंमे उठाकर बगलमें रखे बेडपर लिटाया. उसके उस उठानेमें उसे एक आधार देनेवाली मर्दानी और हक जतानेवाली भावना दिखी इसलिए वह इन्कारभी नही कर सकी. या यू कहिए उसके पास प्रतिकार करनेके लिए कुछ शक्तीही नही बची थी.

उसे उसका वह सवाल याद आगया, " ईशा मुझसे शादी करोगी ?"

और उसे अपना जवाबभी याद आगया, " मैने ना थोडीही कहा है "

उसे अब उसके बाहोमें एक सुरक्षा का अहसास हो रहा था. वहभी अब उसके हर भावनाको उतनीही उत्कटतासे प्रतिसाद दे रही थी.

" अस्तित्व आय लव्ह यू सो मच" उसके मुंहसे शब्द बाहर आ गये.

" आय टू" अस्तित्व मानो उसके गलेका चुंबन लेते हूए उसके कानमें कह रहा था.

धीरे धीरे उसका मजबुत मर्दानी हाथ उसके नाजूक बदनसे खेलने लगा. और वहभी किसी लतीका की तरह उसको चिपककर अपने भविष्यके आयुष्यका सहारा ढुंढ रही थी.

‘ हां मै ही तुम्हारे आगेके आयूष्य का सहारा … साथीदार हुं ‘ इस हकसे अब वह उसके बदनसे एक एक कपडे हटाने लगा था.

‘ हां मैने भी अब तुम्हे सब कुछ अर्पन कर दिया है .. ‘ इस विश्वास के साथ समर्पन करके वहभी उसके शरीर से एक एक कपडे हटाने लगी.

ईशा अचानक हडबडाकर निंदसे जाग गई. उसने बेडपर बगलमें देखा तो वहा अस्तित्व निर्वस्त्र अवस्थामें चादर बदनपर ओढे गहरी निंद सो रहा था. लेकिन निंदमें भी उसका एक हाथ ईशाके निर्वस्त्र बदनपर था. इतने दिनोंमे रातको अचानक बुरे सपनेसे जगनेके बाद उसे पहली बार उसके हाथका एक बडा सहारा महसूस हुवा था.
 
१२

ईशा चिंताग्रस्त अवस्थामें अपनी कुर्सीपर बैठी थी. उसके टेबलके सामनेही निकिता बैठी हूई थी. अस्तित्व के साथ बिताया एक एक पल याद करते हूए पिछले तिन कैसे बित गए ईशाको कुछ पता ही नही चला था. लेकिन आज उसे चिंता होने लगी थी.

" आज तिन दिन हो गए … ना वह चाटींगपर मिल रहा है ना उसकी कोई मेल आई है." ईशाने निकितासे चिंताभरे स्वरमें कहा.

एक दिनमें न जाने कितनी बार चॅटींगपर चॅट करनेवाला और एक दिनमें न जाने कितनी मेल्स भेजनेवाला अस्तित्व अब अचानक तिन दिनसे चूप क्यों होगया? सचमुछ वह एक चिंताकी ही बात थी.

" उसका कोई कॉन्टॅक्ट नंबर तो होगाना ?" निकिताने पुछा.

" हां है… लेकिन वह कॉलेजका नंबर है… लेकिन वहां फोन कर उसके बारेमें पुछना उचीत होगा क्या ?" ईशाने कहा.

" हा वह भी है " निकिताने कहा.

" मुझे चिंता है … कही वह मेरे बारेमें कुछ गलत सलत सोचकर ना बैठे … और अगर वैसा है तो पता नही वह मेरे बारेंमे क्या सोच रहा होगा … " ईशाने मानो खुदसेही सवाल किया.

हॉटेलमें जो हुवा वह नही होना चाहिए था …उसकी वजहसे शायद वह अपने बारेमें कुछ गलत सोच रहा होगा….लेकिन जोभी हुवा वह कैसे … अचानक… दोनोंको कोई मौका दिए बिना हो गया…मैने उसे हॉटेलमें बुलाना ही नही चाहिए था…उसे अगर हॉटेलमें नही बुलाया होता तो यह घटना घटी ही नही होती…

ईशाके दिमागमें पता नही कितने सवाल और उनके जवाब भिड कर रहे थे.

" मुझे नही लगता की वह तुम्हारे बारेमें कुछ गलत सोच रहा होगा… वह दुसरेही किसी कारणवश तुम्हारे संपर्कमें नही होगा… जैसे किसी महत्वपुर्ण कामके सिलसिलेमें वह किसी बाहर गाव गया होगा…." निकिता ईशाके दिलको समझाने बहलानेकी कोशीश करते हुए बोली.

लेकिन अंदरसे वहभी उतनीही चिंतातूर थी. ईशाने निकिताको हॉटेलमें घटीत घटनाके बारेमें विस्तारसे बताया मालूम हो रहा था. वैसे वह उसे अपनी बहुत करीबी दोस्त मानती थी और उससे निजी बातेभी नही छुपाती थी.

" उसे हॉटेलके अंदर बुलाया नही होता तो शायद यह नौबत नही आती " ईशाने कहा.

" नही नही वैसा कुछ नही होगा… पहले तुम अपने आपको बिना मतलब कोसना बंद करदो… " निकिता उसे समझानेकी कोशीश करती हुई बोली.
 
१३

दीपिकाने जल्दी जल्दी उसके सामनेसे गुजर रहे आनंदजींको रोका.

"आनंदजी आपने निकिताको देखा क्या ?" दीपिकाने पुछा.

" हां .. वह उपर विकासके पास बैठी हूई है … क्यो क्या हुवा ?" आनंदजीने दीपिकाका चिंतासे ग्रस्त चेहरा देखकर पुछा.

" कुछ नही… ईशा मॅमने उसे तुरंत बुलानेके लिए कहा है .. आप उधरही जा रहे हो ना … तो उसे ईशा मॅमके पास तुरंत भेज देंगे प्लीज… कुछ महत्वपुर्ण काम लगता है " दीपिका आनंदजींसे बोली.

" ठीक है … मै अभी भेज देता हूं .." आनंदजी सिढीयां चढते हूए बोले.

निकिताको आनंदजींका मेसेज मिलतेही वह तुरंत ईशाके कॅबिनमें गई. देखती है तो ईशा हताश, निराश दोनो हाथोंके बिच टेबलपर अपना सर रखकर बैठी थी.

" ईशा क्या हुवा ?" ईशाको उस अवस्थामें बैठी हुई पाकर निकिताने चिंताभरे स्वरमें, उसके पास जाकर, उसके पिठपर हाथ सहलाते हूए पुछा.

उसने उसे इतना हताश और निराश, और वह भी ऑफीसमें कभी नही देखा था.

ऐसा अचानक क्या हुवा होगा?…

निकिता सोचने लगी. ईशाने धीरेसे अपना सर उठाया. उसके हर हरकतमें एक धीमापन और दर्द दुख का अहसास दिख रहा था. उसका चेहराभी उदास दिख रहा था.

हां उसके पिताजी जब अचानक हार्ट अटॅकसे गुजर गए थे तबभी वह ऐसीही दिख रही थी….

धीरेसे अपना चेहरा कॉम्प्यूटरके मॉनीटरकी तरफ घुमाते हूए ईशा बोली, " निकिता… सब कुछ खतम हो चुका है "

कॉम्प्यूटरका मॉनीटर शुरुही था. निकिताने झटसे नजदिक जाकर कॉम्प्यूटरपर क्या चल रहा है यह देखा. उसे मॉनीटरपर अस्तित्व की ईशाने खोली हूई मेल दिखाई दी. निकिता वह मेल पढने लगी –

" मिस ईशा… हाय… वुई हॅड अ नाईस टाईम … आय रिअली ऍन्जॉइड इट.. खुशीसे और तुम्हारे प्यारकी वर्षावसे भिगे हुए वह पल मैने मेरे दिलमें और मेरे कॅमेरेमें कैद करके रखे है… मै तुम्हारी माफी चाहता हूं की वे पल मैने तुम्हारे इजाजतके बिना कॅमेरेमें बंद किये है … वह पल थे ही ऐसे की मै अपने मोहको रोक नही सका…. तुम्हे झूट तो नही लग रहा है न? .. देखो … उन पलोंसे एक चुने हूए पलको मैने इस फोटोग्राफके स्वरुपमें तुम्हारे मेलके साथ अटॅच करके भेजा है…. ऐसे बहुतसे पल मैने मेरे कॅमेरेमे और मेरे हृदयमें कैद कर रखे है … सोचता हूं की उन पलोंको .. इन फोटोग्राफ्सको इंटरनेटपर पब्लीश कर दूं .. क्यो कैसी दिमागवाली आयडिया है ? है ना? … लेकिन यह तुम्हे पसंद नही आएगी … तुम्हारी अगर इच्छा नही हो तो उन पलोंको मै हमेशाके लिए मेरे दिलमें दफन करके रख सकता हूं … लेकिन उसके लिए तुम्हे उसकी एक मामुलीसी किमत अदा करनी पडेगी…. क्या करे हर बात की एक तय किमत होती है … है की नही ?…कुछ नही बस ५० लाख रुपए… तुम्हारे लिए बहुतही मामुली रकम … और हां … पैसेका बंदोबस्त तुरंत होना चाहिए … पैसे कब कैसे पहुंचाने है … यह बादमें मेलके द्वारा बताऊंगा …

मै इस मेलके लिए तुम्हारी तहे दिलसे माफी चाहता हूं .. लेकिन क्या करें कुछ पाने के लिए कुछ खोना पडता है … अगले मेलका इंतजार करना … और हां … तुम्हे बता दूं की मुझे पुलिसका बहुत डर लगता है … और जब मै डरता हूं तब हडबडाहटमें कुछभी अटपटासा करने लगता हूं …. किसीका खुनभी …

— तुम्हारा … सिर्फ तुम्हारा … अस्तित्व "

मेल पढकर निकिताको मानो उसके पैरके निचेसे जमिन खिसक गई हो ऐसा लग रहा था. वह एकदम सुन्न हो गई थी. ऐसाभी हो सकता है, इसपर उसका विश्वासही नही हो रहा था. उसने अस्तित्व के बारेमें क्या सोचा था, और वह क्या निकला था.

" ओ माय गॉड… ही इज अ बिग फ्रॉड… आय कांट बिलीव्ह इट…" निकिताके आश्चर्यसे खुले मुंहसे निकल गया.

निकिताने मेलके साथ अटॅच कर भेजे फोटोके लिंकपर क्लीक करके देखा. वह ईशाका और अस्तित्व का हॉटेलके सुईटमें एकदुसरेको बाहों में लिया हुवा नग्न फोटो था.

" लेकिन उसने यह फोटो, कैसे लिया होगा ?" निकिताने अपनी उलझन जाहिर की.

" मै मुंबईको कब जानेवाली थी … कहा रुकने वाली थी … इसकी उसे पहलेसेही पुरी जानकारी थी. " ईशाने कहा.

" यह तो सिधा सिधा ब्लॅकमेलींग है." निकिता गुस्सेसे आवेशमें आकर चिढकर बोली.

" उसके मासूम चेहरेके पिछे इतना भयानक चेहराभी छिपा हूवा हो सकता है … मुझे तो अबभी विश्वास नही होता. " ईशाने दुखसे कहा.

" कमसे कम शादीके पहले हमें उसका यह भयानक रुप पता चला… नही तो न जाने क्या हो जाता …" निकिताने कहा.

" मुझे दुख पैसेका नही … दुख है तो सिर्फ उसने दिए इतने बडे धोखे और विश्वासघात का है. " ईशाने कहा.

" एक पलके लिए समझ लो की अगर हम उसे ५० लाख रुपए दे देते है… लेकिन पैसे लेनेके बादभी वह फिरसे हमें ब्लॅकमेल नही करेगा इसकी क्या ग्यारंटी? … " निकिताने फिरसे अपने मनमें चल रहा सवाल जाहिर किया.

ईशा चेहरे पर डर लिए सिर्फ उसकी तरफ देखती रही. क्योंकी उसके पासभी इस सवालका कोई जवाब नही था.

" मुझे लगता है तूम एक बार उसे मेल कर उसका मन परिवर्तीत करनेका प्रयास करो… और अगर फिरभी वह नही मानता है तो … चिंता मत करो… हम जरुर इसमेंसेभी कुछ रास्ता निकालेंगे. " निकिता उसको ढांढस बढाते हूई बोली.
 
१४

सायबर कॅफेमें लोग अपने अपने क्यूबीकल्समें अपने अपने इंटरनेट सर्फींगमें बिझी थे. कुछ कॉम्प्यूटर्स वही खुले हॉलमें रखे थे, वहांभी कोई कॉम्प्यूटर खाली नही था. की बोर्डके बटन्स दबानेका एक अजिब आवाज एक लय और तालमें सारे कॅफेमें घुम रहा था. सब लोग, कोई चॅटींग, कोई सर्फींग, कोई गेम्स खेलनेमें तो कोई मेल्स भेजनेमें मग्न था. तभी एक आदमी दरवाजेसे अंदर आ गया. वह अंदर आकर जिस तरहसे इधर उधर देख रहा था, कमसे कम उससे वह यहां पर पहली बार आया हो ऐसा लग रहा था. रिसेप्शन काऊंटरपर बैठा स्टाफ मेंबर उसके सामने रखे कॉम्प्यूटरपर ताशका गेम ‘सॉलीटेअर’ खेल रहा था. उस आदमीकी आहट होतेही उसने झटसे, बडी स्फुर्तीके साथ अपने मॉनिटरपर चल रहा वह गेम मिनीमाईझ किया और आया हुवा आदमी अपना बॉस या उसके घरका कोई आदमी नही है यह ध्यानमें आतेही वह फिरसे वह गेम मॅक्सीमाईज करके खेलने लगा. वह अंदर आया हुवा आदमी कुछ पलके लिए रिसेप्शन काऊंटरके पास मंडराया और रुककर स्टाफको पुछने लगा –

" अस्तित्व आया क्या ?"

उस स्टाफने भावना विरहित चेहरेसे उसकी तरफ देखकर पुछा –

" कौन अस्तित्व ?"

" अस्तित्व जाधव … वह मेरा दोस्त है ….. और उसनेही मुझे यहां बुलाया है .." उस आदमीने कहा.

" अच्छा वह अस्तित्व … नही आज तो वह दिखा नही .. वैसे तो वह रोज आता है … लेकिन कलसे मैने उसे देखा नही है … " काऊंटरपर बैठे स्टाफने जवाब दिया और वह सामने रखे हूए कॉम्प्यूटरपर फिरसे ‘सॉलीटेअर’ खेलनेमें व्यस्त हो गया.

१५

ईशा कॉन्फरंन्स रुममें दिवारपर लगे छोटे पडदेपर प्रोजेक्टरकी सहाय्यतासे निकिताको कुछ समझा रही थी. और निकिता वह जो बोल रही है वह ध्यान देकर सुन रही थी.

" निकिता जैसा तुमने कहा था वैसेही मैने अस्तित्व को समझाकर देखनेके लिए एक मेल भेजी है … लेकिन उसे सिर्फ मेलही ना भेजते हूए मैने एक बडा दांव भी फेंका है … " ईशा बोल रही थी.

" दांव? … कैसा ?…" निकिताने कुछ ना समझते हूए आश्चर्यसे पुछा.

" उसे भेजे हूए मेलके साथ मैने एक सॉफ्टवेअर प्रोग्रॅम अटॅच कर भेजा है" ईशाने कहा.

" कैसा प्रोग्रॅम?" निकिताको अभीभी कुछ समझ नही रहा था.

" उस प्रोग्रॅमको ‘स्निफर’ कहते है … जैसेही अस्तित्व उसे भेजी हूई मेल खोलेगा .. वह स्निफर प्रोग्रॅम रन होगा …" ईशा बोल रही थी.

" लेकिन वह प्रोग्रॅम रन होनेसे क्या होगा ?" निकिताने पुछा.

" उस प्रोग्रॅमका काम है … अस्तित्व के मेलका पासवर्ड मालूम करना … और वह पासवर्ड मालूम होतेही वह प्रोग्रॅम हमे वह पासवर्ड मेलद्वारा भेजेगा … " ईशा बोल रही थी.

" अरे वा… " निकिता उत्साहभरे स्वरमें बोली लेकिन अगलेही पल कुछ सोचते हूए उसने पुछा, " लेकिन उसका पासवर्ड मालूम कर हमें क्या मिलेगा ?"

" जिस तरहसे अस्तित्व मुझे ब्लॅकमेल कर रहा है … उसी तरह हो सकता है की वह और बहुत लोगोंको ब्लॅकमेल कर रहा होगा …या फिर उसके मेलबॉक्समें हमे उसकी कुछ कमजोरी… या जो हमारे कामका साबीत हो ऐसा कुछतो हमें पता चलेगा … वैसे फिलहाल हम अंधेरेमें निशाना साध रहे है…. लेकिन मुझे यकिन है … हमें कुछ ना कुछतो जरुर मिलेगा " ईशा बता रही थी.

" हां … हो सकता है " निकिताने कहा.

और फिर कुछ सोचकर उसने कहा, " मुझे क्या लगता है … हमें अपना दुश्मन कौन है यह पता है … वह कहां रहता है यहभी पता है … फिर वह अपनेपर वार करनेके पहलेही अगर हम उसपर वार करते है तो ?"

" वह संभावनाभी मैने जांचकर देखी है … लेकिन अब वह उसके होस्टेलसे गायब है … वुई डोन्ट नो हिज व्हेअर अबाऊट्स"

तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा. ईशाने और निकिताने झटसे पलटकर मॉनिटरकी तरफ देखा. मॉनिटरकी तरफ देखतेही दोनोके चेहरे खिल गए. क्योंकी उनकी अपेक्षानुसार ईशाने अस्तित्व के मेलको अटॅच कर भेजे ‘स्निफर’ सॉफ्टवेअरकीही वह मेल थी. अब दोनोंको वह मेल खोलनेकी जल्दी हो गई थी. कब एक बार वह मेल खोलती हूं और कब एक बार उस मेल द्वारा आए अस्तित्व के पासवर्डसे उसका मेल अकाऊंट खोलती हूं ऐसा ईशाको हुवा था. उसने तुरंत डबलक्लीक कर वह मेल खोली.

" यस्स!" उसके मुंहसे विजयी उद्गार निकले.

उसने भेजे स्निफरने अपना काम बराबर किया था.

उसने बिजलीके गतीसे मेल सॉफ्टवेअर ओपन किया और …

" यह उसका मेल आयडी और यह उसका पासवर्ड" बोलते हूए अस्तित्व का मेल ऍड्रेस टाईप कर उस प्रोग्रॅमको अस्तित्व के मेलका पासवर्ड दिया.

ईशाने उसका मेल अकाऊंट खोलतेही और कुछ की बोर्डकी बटन्स और दो चार माऊस क्लीक्स किए. और दोनो अब कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी.

" ओ माय गॉड … आय जस्ट कान्ट बिलीव्ह" ईशाके खुले मुंहसे निकल गया.

निकिता कभी मॉनिटरकी तरफ तो कभी ईशाके खुले मुंहकी तरफ असमंजससे देख रही थी.

ईशा अपने ऑफीसमें कुर्सीपर बैठकर कुछ सोच रही थी. उसका चेहरा मायूस दिख रहा था. शायद उसने उसके जिवनमें इतना बडा भूचाल आएगा ऐसा कभी सोचा नही होगा. उसने अपना कॉम्प्यूतर शुरु कर रखा तो था, लेकिन उसे ना चाटींग करनेकी इच्छा हो रही थी ना किसी दोस्तको मेल भेजनेकी. उसने अपनी सारी ऑफीशियल मेल्स चेक की और फिरसे वह सोचने लगी. तभी कॉम्प्यूटरपर बझर बजा. उसने अपनी चेअर घुमाकर कॉम्प्यूटरकी तरफ अपना रुख कीया –

‘ हाय … मिस ईशा’

अस्तित्व का चॅटींगपर मेसेज था.

उसे अहसास हो गया की उसके दिलकी धडकने तेज होने लगी है. लेकिन इसबार धडकने बढनेकी वजह कुछ अलग थी. ईशा सिर्फ उस मेसेजकी तरफ देखती रही. उसे अब क्या किया जाए कुछ सुझ नही रहा था. तभी निकिता अंदर आ गई. ईशाने निकिताको अस्तित्व का मेसेज आया है ऐसा कुछ इशारा किया. निकिता झटसे बाहर चली गई, मानो पहले उन्होने कुछ तय किया हो. ईशा अबभी उस मेसेजकी तरफ देख रही थी.

‘ईशा कम ऑन एकनॉलेज यूवर प्रेझेन्स’ अस्तित्व का फिरसे मेसेज आ गया.

‘यस’ ईशाने टाईप किया और सेंड बटनपर क्लीक किया.

ईशाने कॉम्प्यूटर ऑपरेट करते हूए उसके हाथोमें और उंगलियोंमे पहली बार कंपन महसूस किया.

‘ मै अब मेलमें सारी जानकारी भेज रहा हूं ‘ अस्तित्व का मेसेज आ गया.

‘ लेकिन ५० लाख रुपए देनेके बादभी फिरसे तुम ब्लॅकमेल नही करोगे इसकी क्या गॅरंटी. ?’ ईशाने मेसेज भेजकर उसे बार बार सता रहा सवाल उठाया.

अस्तित्व ने उधरसे एक हंसता हूवा छोटासा चेहरा भेजा.

इस बार ईशाको उस चेहरेके हसनेमें मासूमियतसे जादा कपट दिख रहा था.

‘ देखो … यह दुनिया भरोसेपर चलती है … तुम्हे मुझपर भरोसा करना पडेगा … और तुम्हारे पास मुझपर भरोसा करनेके अलावा और क्या चारा है ?’ उधरसे अस्तित्व का ताना मारता हुवा मेसेज आ गया.

और वह भी सचही तो था … उसके पास उसपर भरोसा करनेके अलावा कोई दुसरा चारा नही था….

ईशा अब उसने भेजे मेसेजको क्या जवाब दिया जाए इसके बारेमें सोचने लगी. तभी अगला मेसेज आ गया –

‘ ओके देन बाय… दिस इज अवर लास्ट कन्व्हरसेशन… टेक केअर… तुम्हारा … और सिर्फ तुम्हारा अस्तित्व …’

ईशा उस मेसेजकी तरफ काफी देरतक देखती रही. बादमें उसे क्या सुझा क्या मालूम, उसने फटाफट कीबोर्डपर कुछ बटन्स दबाए और कुछ माऊस क्लीक्स किए. उसके सामने उसका खुला हुवा मेलबॉक्स अवतरीत हुवा. उसके अपेक्षानुसार और अस्तित्व ने जैसा कहा था, उसकी मेल उसके मेलबॉक्समें पहूंच चूकी थी. उसने पलभरकी भी देरी ना करते हूए वह मेल खोली.

मेलमें ५० लाख रुपए कहां, कैसे, और कब पहुचाने है यह सब विस्तारपुर्वक बताया था. साथमें पुलिसके चक्करमें ना पडनेकी हिदायतरुप धमकीभी दी थी. ईशाने अपनी कलाईपर बंधी घडीकी तरफ देखा. अबभी मेलमें बताए स्थानपर पैसे पहुंचानेमें ४ घंटेका अवधी बाकी था. उसने एक दिर्घ श्वास लेकर धीरेसे छोड दी. वह वैसे कर शायद अपने मनका बोझ हलका करनेकी कोशीश करती होगी. वैसे चार घंटे उसके लिए काफी समय था. और पैसोंका बंदोबस्त भी उसने पहलेसे ही कर रखा था – यहांतक की पैसे सुटकेसमें पॅकभी कर रखे थे. मेलकी तरफ देखते देखते उसके अचानक ध्यानमें आ गया की मेलके साथ कोई अटॅचमेंटभी आई हूई है. उसने वह अटॅचमेंट खोलकर देखी. वह एक फोटो था. उसने क्लीक कर वह फोटो खोला.

वह उनके हॉटेलके रुममें दोनो जब एक दिर्घ चुंबन लेते हूए आलिंगनबध्द थे तबका फोटो था.
 
१६

विकास अपनेही धुनमें मस्त मजेमें सिटी बजाते हूए रास्तेपर चल रहा था. तभी उसे पिछेसे किसीने आवाज दिया.

" विकास…"

विकासने वही रुककर सिटी बजाना रोक दिया. आवाज पहचानका नही लग रहा था इसलिए उसने पिछे मुडकर देखा. एक आदमी जल्दी जल्दी उसीके ओर आ रहा था. विकास असमंजससा उस आदमीकी तरफ देखने लगा क्योंकी वह उस आदमीको पहचानता नही था.

फिर उसे अपना नाम कैसे पता चला ?..

विकास उलझनमें वहा खडा था. तबतक वह आदमी आकर उसके पास पहूंच गया.

" मै अस्तित्व का दोस्त हूं … मै उसे कलसे ढूंढ रहा हूं … मुझे कॅफेपर काम करनेवाले लडकेने बताया की शायद तुम्हे उसका पता मालूम हो " वह आदमी बोला.

शायद उस आदमीने विकासके मनकी उलझन पढ ली थी.

" नही वैसे वह मुझेतो बताकर नही गया. … लेकिन कल मै उसके होस्टेलपर गया था… वहां उसका एक दोस्त बता रहा था की वह १०-१५ दिनके लिए किसी रिश्तेदार यहां गया है …" विकासने बताया.

" कौनसे रिश्तेदार यहां ?" उस आदमीने पुछा.

" नही उतना तो मुझे मालूम नही … उसे मैने वैसा पुछाभी था लेकिन वह उसेभी पता नही था … उसे सिर्फ उसकी मेल मिली थी " विकासने जानकारी दी.

ईशा अपने कुर्सीपर बैठी हूई थी और उसके सामने रखे टेबलपर एक बंद ब्रिफकेस रखी हूई थी. उसके सामने निकिता बैठी हूई थी. उनमें एक अजीबसा सन्नाटा छाया हूवा था. अचानक ईशा उठ खडी हो गई और अपना हाथ धीरेसे उस ब्रिफकेसपर फेरते हूए बोली, " सब पहेलूसे अगर सोचा जाए तो एकही बात उभरकर सामने आती है .."

ईशा बोलते हूए रुक गई. लेकीन निकिताको सुननेकी बेसब्री थी.

" कौनसी ?" निकिताने पुछा.

" … की हमें उस ब्लॅकमेलरको ५० लाख देनेके अलावा फिलहाल अपने पास कोई चारा नही है … और हम रिस्क भी तो नही ले सकते "

" हां तुम ठीक कहती हो " निकिता शुन्यमें देखते हूए, शायद पुरी घटनापर गौर करते हूए बोली.

ईशाने वह ब्रिफकेस खोली. ब्रिफकेसमें हजार हजारके बंडल्स ठीकसे एक के उपर एक करके रखे हूए थे. उसने उन नोटोंपर एक नजर दौडाई, फिर ब्रिफकेस बंद कर उठाई और लंबे लंबे कदम भरते हूए वह वहांसे जाने लगी. तभी उसे पिछेसे निकिताने आवाज दिया –

" ईशा…"

ईशा ब्रेक लगे जैसे रुक गई और निकिताके तरफ मुडकर देखने लगी.

" अपना खयाल रखना " निकिताने अपनी चिंता जताते हूए कहा.

ईशा दो कदम फिरसे अंदर आ गई, निकिताके पास गई, निकिताके कंधेपर उसने हाथ रखा औड़ मुडकर फिरसे लंबे लंबे कदम भरते हूए वहांसे चली गई.
 
१७

घना जंगल. जंगलमें चारो तरफ बढे हूए उंचे उंचे पेढ. और पेढोंके निचे सुखे पत्ते फैले हूए थे. जंगलके पेढोंके बिचसे बने संकरे जगहसे रास्ता ढूंढते हूए एक काली, काले कांच चढाई हूई, कार तेडेमेडे मोड लेते हूए सुखे पत्तोसे गुजरने लगी. उस कारके चलनेके साथही उस सुखे पत्तोका एक अजिब मसलने जैसा आवाज आ रहा था. धीरे धीरे चल रही वह कार उस जंगलसे रास्ता निकालते हूए एक पेडके पास आकर रुकी. उस कारके ड्रायव्हर सिटका काला शिशा धीरे धीरे निचे सरक गया. ड्रायव्हींग सिटपर ईशा काला गॉगल पहनकर बैठी हूई थी. उसने कारका इंजीन बंद किया और बगलके पेडके तनेपर लगे लाल निशानकी तरफ देखा.

उसने यही वह पेढ ऐसा मनही मन पक्का किया होगा…

फिर उसने जंगलमें चारो ओर एक नजर दौडाई. दुर-दुरतक कोई परींदाभी नही दिख रहा था. आसपास किसीकीभी उपस्थिती नही है इसका यकिन होतेही उसने अपने बगलके सिटपर रखी ब्रिफकेस उठाकर पहले अपने गोदीमें ली. ब्रिफकेसपर दो बार अपना हाथ थपथपाकर उसने अपना इरादा पक्का किया होगा. और मानो अपना इरादा डगमगा ना जाए इस डरसे उसने झटसे वह ब्रिफकेस कारके खिडकीसे उस पेडके तरफ फेंक दी. धप्प और साथही सुखे पत्तोंका मसलने जैसा एक अजिब आवाज आया.

होगया अपना काम तो होगया …

चलो अब अपनी इस मसलेसे छूट्टी होगई…

ऐसा सोचते हूए उसने छुटनेके अहसाससे भरी लंबी आह भरी. लेकिन अगलेही क्षण उसके मनमें एक खयाल आया.

क्या सचमुछ वह इस सारे मसलेसे छूट चूकी थी? …

या वह अपने आपको एक झूटी तसल्ली दे रही थी…

उसने फिरसे चारो तरफ देखा. आसपास कहीभी कोई मानवी हरकत नही दिख रही थी. उसने फिरसे कार स्टार्ट की. और एक मोड लेते हूए कार वहांसे तेज गतिसे चली गई. मानो वहांसे निकल जाना यह उसके लिए इस मसलेसे हमेशाके लिए छूटने जैसा था.

जैसेही कार वहांसे चली गई, उस सुनसान जगहके एक पेडके उपर, उंचाईपर कुछ हरकत हो गई. उस पेडके उपर उंचाई पर बैठे, हरे पेडके पत्तोके रंगके कपडे पहने हूए एक आदमीने उसी हरे रंगका वायरलेस बोलनेके लिए अपने मुंहके पास लीया.

" सर एव्हरी थींग इज क्लिअर … यू कॅन प्रोसीड" वह वायरलेसपर बोला और फिरसे अपनी पैनी नजर इधर उधर घूमाने लगा. शायद वह, वहांसे चली गई कार कही वापस तो नही आ रही है, या उस कारका पिछा करते हूए वहां और कोई तो नही आया ना, इस बातकी तसल्ली करता होगा.

" सर एव्हती थींग इज क्लिअर… कन्फर्मींग अगेन" वह फिरसे वायरलेसपर बोला.

उस पेडपर बैठे आदमीका इशारा मिलतेही जिस पेडके तनेको लाल निशान लगाया हुवा था, उस पेडके बगलमेंही एक बढा सुखे हूए पत्तोका ढेर था, उसमें कुछ हरकत होगई. कार शुरु होनेका आवाज आया और उस सुखे हूए पत्तोके ढेरको चिरते हूए, उसमेंसे एक कार बाहर आ गई. वह कार धीर धीरे आगे सरकती हूई जहां वह ब्रीफकेस पडी हूई थी वहा गई. कारसे एक काले कपडे पहना हूवा और मुंहपरभी काले कपडे बंधा हूवा एक आदमी बाहर आ गया. उसने अपनी पैनी नजरसे इधर उधर देखा. जहां उसका आदमी पेडपर बैठा हूवा था उधरभी देखा और उसे अंगुठा दिखाकर इशारा किया. बदलेमें उस पेडपर बैठे आदमीनेभी अंगूठा दिखाकर जवाब दिया. शायद सबकुछ कंट्रोलमें होनेका संकेत दिया. उस कारमेंसे उतरे, उस काले कपडे पहने आदमीने आसपास कोई उसे देखतो नही रहा है इसकी तसल्ली करते हूए वह निचे पडी हूई ब्रीफकेस धीरेसे उठाई. ब्रीफकेस उठाकर कारके बोनेटपर रखकर खोलकर देखी. हजार रुपयोंके एकके उपर एक ऐसे रखे हूए बंडल्स देखतेही उसके चेहरेपर काले कपडेके पिछे, एक खुशीकी लहर जरुर दौड गई होगी. और उन नोटोंकी खुशबू उसके नाकसे होते हूए उसके मश्तिश्क तक उसे एक नशा चखाती हूए दौड गई होगी. उसने उसमेंसे एक बंडल उठाकर उंगली फेरकर देखकर फिरसे ब्रिफकेसमें रख दिया. उसने फिरसे ब्रिफकेस बंद की. पेडपर बैठे आदमीको फिरसे अंगुठा दिखाकर सबकुछ ठीक होनेका इशारा किया. वह काला साया वह ब्रिफकेस उठाकर फिरसे अपने कारमें जाकर बैठ गया. कारका दरवाजा बंद हो गया, कार शुरु होगई और धीरे धीरे गति पकडती हूई तेज गतिसे वहांसे अदृष्य होगई. मानो वहांसे जल्द से जल्द निकल जाना उस कारमें बैठे आदमीके लिए उन नोटोंपर जल्द से जल्द कब्जा जमाने जैसा था.
 
१८

उस दिलको दर्द देनेवाले, नही दिल को पुरी तरह तबाह कर देनेवाले घटनाको घटकर अब लगभग १०-१५ दिन हो गए होंगे. उस घटना को जितना हो सके उतना भूलनेकी कोशीश करते हूए ईशा अब पहले जैसे अपने काममें व्यस्त हो गई थी. या यू कहिए उन घटनासे होनेवाले दर्दसे बचनेके लिए उसने खुदको पुरी तरह अपने काममें व्यस्त कर लिया था. उसी बिच ईशाको आयटी क्षेत्रमें भूषणाह समझे जाने वाला ‘आय टी वुमन ऑफ द ईअर’ अवार्ड मिला. उस अवार्डकी वजहसे उसके यहां प्रेसवालोंका तांता लगने लगा था. उस भिडकी अब ईशाकोभी जरुरत महसूस होने लगी थी. क्योंकी उस तरहसे वह अपने अकेलेपनसे और कटू यादोंसे बच सकती थी. पिछले चारपांच दिनसे लगभग रोजही कभी न्यूजपेपरमें तो कभी टिव्हीपर उसके इंटरव्हू आ रहे थे.

ईशा ऑफीसमें बैठी हूई थी. निकिता उसके बगलमेंही बैठकर उसके कॉम्प्यूटरपर काम कर रही थी. उस बुरे अनुभवके बाद ईशाका चॅटींग और दोस्तोंको मेल भेजना एकदमही कम हुवा था. खाली समयमें वह यूंही बैठकर शुन्यमें ताकते हुए सोचते बैठती थी. उसके दिमागमें मानो अलग अलग तरहकी विचारोंका सैलाब उठता था. लेकिन वह तुरंत उन विचारोंको अपने दिमागसे झटकती थी. अबभी उसके मनमें विचारोंका सैलाब उमड पडा था. उसने तुरंत अपने दिमागमें चल रहे विचार झटकर अपने मनको दुसरे किसी चिजमे व्यस्त करनेके लिए टेबलका ड्रावर खोला. ड्रॉवरमें उसे उसने संभालकर रखे हूए न्यूजपेपरके कुछ कटींग्ज दिखाई दिए. ‘ आय टी वुमन ऑफ द इअर – ईशा मेहता’ न्यूज पेपरके एक कटींगपर हेडलाईन थी. उसने वह कटींग बाहर निकालकर टेबलपर फैलाया और वह फिरसे वह समाचार पढने लगी.

यह समाचार पढनेके लिए अब इस वक्त मेरे पिताजी होने चाहिए थे….

उसके जहनमें एक विचार आकर गया.

उन्हे कितना गर्व महसूस हुवा होता… अपनी बेटीका …

लेकिन भाग्यके आगे किसका कुछ चला है? …

अब देखोना अभी अभी आया हुवा अस्तित्व का ताजा अनुभव …

वह सोच रही थी तभी कॉम्प्यूटरका बझर बजा.

काफी दिनोंसे चॅटींग और मेलींग कम करनेके बाद ज्यादातर उसे किसीका मेसेज नही आता था ….

फिर यह आज किसका मेसेज होगा …

कोई हितचिंतक?…

या कोई हितशत्रू…

आजकल कैसे हर बातमें उसे दोनो पहेलू दिखते थे – एक अच्छा और एक बुरा. ठेस पहूंचनेपर आदमी कैसे संभल जाता है और हर कदम सोच समझकर बढाता है.

ईशाने पलटकर मॉनीटरकी तरफ देखा.

" अस्तित्व का मेसेज है …" कॉम्प्यूटरपर बैठी निकिता ईशाकी तरफ देखकर सहमकर बोली. निकिताके चेहरेपर डर और आश्चर्य साफ नजर आ रहा था. वह भावनाए अब ईशाके चेहरेपरभी दिख रही थी. ईशा तुरंत उठकर निकिताके पास गई. निकिता ईशाको कॉम्प्यूटरके सामने बैठनेके लिए जगह देकर वहांसे उठकर बगलमें खडी हो गई. ईशाने कॉम्प्यूटरपर बैठनेके पहले निकिताको कुछ इशारा किया वैसे निकिता तुरंत दरवाजेके पास जाकर जल्दी जल्दी कॅबिनसे बाहर निकल गई.

" मिस. ईशा … हाय … कैसी हो ?" अस्तित्व का उधरसे आया मेसेज ईशाने पढा.

एक पल उसने कुछ सोचा और वह भी चॅटींगका मेसेज टाईप करने लगी –

" ठीक है … " उसने मेसेज टाईप किया और सेंड बटनपर क्लीक करते हूए उसे भेज दिया.

" तुम्हे फिरसे तकलिफ देते हूए मुझे बुरा लग रहा है … लेकिन क्या करे? … पैसा यह साली चिजही वैसी है … कितनेभी संभलकर इस्तमाल करो तो भी खतम हो जाती है …" उधरसे अस्तित्व का मेसेज आ गया.

ईशाको शक थाही की कभी ना कभी वह और पैसे मांगेगा …

" मुझे इस बार २० लाख रुपएकी सख्त जरुरत है …" उधरसे अस्तित्व का मेसेज आ गया.

" अभी तो तुम्हे ५० लाख रुपए दिए थे … अब मेरे पास पैसे नही है …" ईशाने झटसे टाईप करते हूए मेसेज भेज भी दिया.

मेसेज टाईप करते हूए उसके दिमागमें औरभी काफी विचारोंका चक्र चल रहा था.

" बस यह आखरी बार … क्योंकी यह पैसे लेकर मै परदेस जानेकी सोच रहा हूं " उधरसे अस्तित्व का मेसेज आया.

" तुम परदेस जावो … या और कही जावो … मुझे उससे कुछ लेना देना नही है … देखो … मेरे पास कोई पैसोका पेढ तो नही है … " ईशाने मेसेज भेजा.

" ठीक है … तुम्हे अब मुझे कमसे कम १० लाख रुपए तो भी देने पडेंगे … पैसे कब कहा और कैसे पहूंचाने है वह मै तुम्हे मेल कर सब बता दुंगा …" उधरसे मेसेज आया.

ईशा कुछ टाईप कर उसे भेजनेसे पहलेही अस्तित्व का चॅटींग सेशन बंद हो गया था. ईशा एकटक उसके सामने रखे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ देखने लगी. वह देख तो मॉनिटरके तरफ थी लेकिन उसके दिमागमें विचारोंका तांता लग गया था. लेकिन फिरसे उसके दिमागमें क्या आया क्या मालूम?, वह झटसे उठकर खडी हो गई और लंबे लंबे कदम भरते हूए कॅबिनसे बाहर निकल गई.
 
१९

‘इथीकल हॅकींग कॉम्पीटीशन – ऑर्गनायझर – सीक्युर डेटा’ ऐसा एक बॅनर बडे अक्षरोंमें स्टेजपर लगाया गया था. आज कॉम्पीटीशन का आखरी दिन था और जितनेवालोंके नाम घोषीत किए जाने थे. पारीतोषीक वितरणके लिए प्रमुख अतिथीके तौर पर ईशाको बुलाया गया था. स्टेजपर उस बॅनरके बगलमें ईशा प्रमुख अतिथी के लिए आरक्षित कुर्सीपर बैठी हुई थी. और उसके बगलमें एक अधेड उम्र आदमी, कश्यपजी बैठे थे. वे ‘सीक्युर डेटा’ के हेड थे. तभी स्टेजके पिछेसे ऍन्कर सामने माईकके पास जाकर बोलने लगा,

" गुड मॉर्निंग लेडीज ऍंड जन्टलमन… जैसे की आप सब लोग जानते हो की हमारी कंपनी " सीक्युर डेटाका यह सिल्वर जूबिली साल है और उसी सिलसिले में हमने ‘इथीकल हॅकींग’ इस प्रतियोगीता का आयोजन किया था … आज हम उस प्रतियोगीताके आखरी दौरसे यानीकी पारितोषीक वितरणके दौरसे गुजरने वाले है … इस पारितोषीक वितरण के लिए हमने एक खास मेहमान को यहां आमंत्रित किया है … जिन्हे हालहीमें ‘आय टी वूमन ऑफ द ईयर’ सम्मान देकर गौरवान्वीत किया गया है … "

हॉलमें बैठे सब लोगोंकी नजरे स्टेजपर बैठे ईशापर टीक गई थी. ईशानेभी एक मंद स्मित बिखेरते हूए हॉलमें बैठे लोगोंपर एक नजर दौडाई.

" और उन खास मेहमानका नाम है … मिस ईशा मेहता …. उनके स्वागतके लिए मै स्टेजपर हमारे एक्सीक्यूटीव मॅनेजर श्रीमती सोनी झवेरिया इन्हे आमंत्रित करता हूं …"

श्रीमती सोनी झवेरियाने स्टेजपर आकर फुलोंका गुलदस्ता देकर ईशाका स्वागत किया. ईशानेभी खडे होकर उस गुलदस्तेका बडे विनयके साथ अभिवादन करते हूए स्विकार किया. हॉलमें तालीयां गुंज उठी. मानो एक पलमें वहां उपस्थित लोगोंके शरीमें उत्साह प्रवेश कर गया हो. तालीयोंकी आवाज थमतेही ऍन्कर आगे बोलने लगा –

" अब मै स्टेजपर उपस्थित हमारे मॅनेजींग डायरेक्टर श्री. कश्यपजीके स्वागतके लिए हमारे मार्केटींग मॅनेजर श्री. फिलिप हँकजीको यहां आमंत्रित करता हूं …"

श्री. फिलिप हँकने स्टेजपर जाकर कश्यपजीका एक गुलदस्ता देकर स्वागत किया. हॉलमें फिरसे तालियां गुंज उठी.

" अब कश्यपजींको मै बिनती करता हूं की वे यहां आकर दो शब्द बोलें " ऍन्करने माईकपर कहां और वह कश्यपजींकी माईकके पास आनेकी राह देखते हूए खडा रहा.

कश्यपजी खुर्चीसे उठकर खडे हो गए. उन्होने एक बार ईशाकी तरफ देखा. दोनों एक दुसरेकी तरफ देखकर मुस्कुराए. और अपना मोटा शरीर संभालते हूए धीरे धीरे चलते हूए कश्यपजी माईकके पास आकर पहूंच गए.

" आज इथीकल हॅकींग इस स्पर्धाके लिए आमंत्रित की गई … जी.एच इन्फॉर्मॆटीक्स इस कंपनीकी मॅनेजींग डायरेक्टर और आय टी वूमन ऑफ दिस इयर मिस ईशा मेहता, यहां उपस्थित मेरे कंपनीके सिनीयर आणि जुनियर स्टाफ मेंबर्स, इस स्पर्धामें शामिल हूए देशके कोने कोनेसे आए उत्साही युवक आणि युवतीयां, और इस स्पर्धाका नतिजा जाननेके लिए उत्सुक लेडीज ऍन्ड जन्टलमन… सच कहूं तो … यह एक स्पर्धा है इसलिए नही तो हर एक के जिंदगी की हर एक बात एक स्पर्धाही होती है … लेकिन स्पर्धा हमेशा खिलाडू वृत्तीसे खेली जानी चाहिए .. अब देखो ना … यह इतना बडा अपने कंपनीके स्टाफका समुदाय देखकर मुझे एक पुरानी बात याद आ गई … की १९८४ में हमने यह कंपनी शुरु की थी…. तब इस कंपनीके स्टाफकी गिनती सिर्फ ३ थी … मै और, और दो सॉफ्टवेअर इंजिनिअर्स… और तबसे हमने हर दिन लढते झगडते …. हर दिनको एक स्पर्धा एक कॉंपीटीशन समझते हूए हम आज इस स्थितीमें पहूंच गए है….. मुझे यह बताते हूए खुशी और अभिमान होता है की आज अपने कंपनीने इस देशमेंही नही तो विदेशमेंभी अपना झंडा फहराया है और आज अपने स्टाफकी गिनती .. ३०००० के उपर पहूंच चूकी है …"

हॉलमें फिरसे एकबार लोगोंने तालियां बजाते हूए हॉल सर पर उठा लिया. तालीयां थमनेके बाद कश्यपजी फिरसे आगे बोलने लगे. लेकिन स्टेजपर बैठी ईशा उनका भाषण सुनते हूए कब अपने खयालोंमे डूब गई उसे पताही नही चला …

( ईशा और निकिता कॉफी हाऊसमें एकदुसरेके सामने बैठे थे और दोनो अपने अपने सोच मे डूबी धीरे धीरे कॉफीकी चुस्कीयां ले रही थी. उनमें एक अजिबसा सन्नाटा फैला हुवा था. आखिर ईशाने उस सन्नाटेको भंग किया –

" बराबर २ दिन हो गए है … उसकी अगली मेल अभीतक कैसे नही आई ? "

" शायद उसे शक हुवा होगा " निकिताने कहा.

" ऐसाही लगता है … " ईशा आह भरती हुई बोली.

" मुझे लग रहा था की इस बार हम उसे पकडनेमें जरुर कामयाब होंगे … लेकिन अब मुझे चिंता होने लगी है की हम उसे कभी पकडनेमें कामयाबभी होंगे की नही " ईशाने कहा.

" और हा उसे शक होना भी उतनाही खतरनाक है .. उसने सारे फोटो अगर इंटरनेटपर डाले तो सारा ही खेल बिगड जाएगा … और बदनामीभी होगी वह अलग " निकिताने कहा.

ईशाने अपने सोचमें डूबे हूए हालतमें सिर्फ सर हिलाया.

" एकही झटकेमें उसे पकडना जरुरी है … नही तो अपना प्लान पुरा फेल हो जाएगा " ईशाने कहा ….)

…. हॉलमें चल रहे तालीयोंकी गुंजसे ईशा अपने सोचके विश्वसे बाहर आ गई. उसने चारो तरफ अपनी नजरे दौडाई. कश्यपजींका स्पीच खत्म हो चुका था और वे उसके बगलकेही सिटपर वापस आ रहे थे. वह उनके तरफ देखकर मुस्कुराई, मानो उनके स्पिचकी सराहना कर रही हो. उधर ऍन्कर फिरसे माईकके पास गया था और उसने ऐलान किया – " अब मै पारितोषीक वितरणके लिए जी. एच. इन्फॉरमेटीक्सकी मॅनेजींग डायरेक्टर … दि आय. टी वुमन ऑफ दिस इयर… मिस. ईशा मेहता … उन्हे आमंत्रित करता हूं …"

ईशा उठ खडी होगई और माइकके पास चली गई. फिरसे हॉल तालीयोंसे गुंज उठा.

" तो अब हम पारितोषीक वितरणके लिए आगे बढते है … " एन्करने माइकपर जाहिर किया.

"… जैसे आप लोग जानते हो … इस प्रतियोगिता को जब जाहिर किया गया तब हमे इसमें भाग लेनेके लिए इच्छूक लोगोंका बहुत प्रतिसाद मिला… देशभरसे लगभग तिन हजार लोगोंके अप्लीकेशन फॉर्मस हमें मिले …. पहले छाननीमें हमनें उसमेंसे सिर्फ ५० अप्लीकेशन्स चूने … और अब फायनलमें जो चुने है वे है सिर्फ तिन … लेकिन उन तिन लोगोंके नाम जाननेके पहले हमें थाडा रुकना पडेगा. क्योंकी पहले हम कुछ लोगोंको कुछ प्रोत्साहनपर प्राईजेस देने वाले है …."

प्रोत्साहनपर प्राइजेस देनेमें जादा समय न बिताते हूए ऍन्कर एक एकको स्टेजपर बुला रहा था और ईशा उनको प्राईज देकर उनको शाबासकी देकर उनकी वहांसे रवानगी कर रही थी. प्रोत्साहनपर प्राईजेस खत्म हूए वैसे लोगोंमे फिरसें उत्साह बढता हूवा दिखने लगा.

" अब जिन तिनोंके नाम जाननेके लिए हम उत्सुक है वह वक्त आ चुका है … सबसे पहले मै तिसरा प्राईज जिसे मिला उस प्रतियोगीका नाम जाहिर करने वाला हूं … " एन्करने सब लोगोंकी जिज्ञासा और बढाते हूए एक बडा पॉज लिया , " तिसरा प्राईज है १ लाख रुपये कॅश और मोमेंटो… तो थर्ड प्राईज… मि. उज्वल जोशी फ्रॉम नागपूर… प्लीज कम ऑन द स्टेज… "

हॉलमें तालियां गुंजने लगी. एक पतलासा सावला २० -२२ जिसकी उम्र होगी ऐसा एक लडका सामनेके दसमेंसे एक कतारमेंसे खडा होकर स्टेजकी तरफ जाने लगा. उस प्रतियोगीकी तरफ देखकर किसे लगेगा नही की उसे तिसरा प्राईज मिल सकता है … लेकिन उसके चलनेमें एक जबरदस्त आत्मविश्वास झलक रहा था. अमोल राठोड स्टेजपर आया. जिस आत्मविश्वाससे वह चला था उसी आत्मविश्वासके साथ उसने पुरस्कारका स्विकार किया और ईशासे हस्तांदोलन किया. हॉलमें मीडीयाकी भी काफी उपस्थिती थी. पुरस्कार स्विकार करते वक्त बिजली चमकें ऐसे फोटोंकें फ्लॅश दोनोंके उपर चमक रहे थे.

फिरसे हॉलमें मानो जोरसे बारिश हो ऐसे लोगोंने तालियां बजाई. अमोल राठोड स्टेजसे उतरकर फिरसे अपने कुर्सीकी तरफ जाने लगा वैसे ऍन्कर दुसरा प्राईज जिसे मिला उसके नामका ऐलान करनेके लिए सामने आया,

" दुसरा पारितोषीक है १.५ लाख रुपये कॅश और मोमेंटो… तो थर्ड प्राईज गोज टू… मिस. मेघना रस्तोगी फ्रॉम बंगलोर … प्लीज कम ऑन द स्टेज… "

हॉलमें फिरसे तालियां बजने लगी. एक गोरी उंची पतली नाजूकसी लगभग २०-२१ सालकी युवती स्टेजपर आने लगी. ईशा शायद वह खुदभी एक स्त्री होनेसे उस लडकीकी तरफ आंखे भरकर देख रही थी. अनघा स्टेजपर ईशाके पास आ गई. पुरस्कार देकर ईशाने उसे गले लगा लिया. फिरसे कॅमेरेके फ्लॅश जैसे बिजली चमके ऐसे चमकने लगे.

अनघा जैसेही स्टेजसे निचे उतरकर अपने जगहपर वापस आगई ऍन्करने फिरसे माईकपर कब्जा कर लिया था ,

" अब आखिरमें हम जिस पलकी इतनी बेसब्रीसे राह देख रहे है वह पल एकदम नजदिक आ पहूंचा है … पहला पुरस्कार ऐलान करनेका पल … इन फॅक्ट मै अपने आपको बडा भाग्यशाली समझता हूं की पहला पुरस्कार किसको जानेवाला है यह ऐलान करनेका सौभाग्य मुझे मिल रहा है … क्योंकी वह प्रतिस्पर्धी सारे भारतमें एक अव्वल प्रतिस्पर्धी रहनेवाला है … तो पहले देखते है की वह प्रथम पुरस्कार क्या है … प्रथम पुरस्कार है ३ लाख रुपए कॅश, मोमेंटो ऍन्ड अ जॉब ऑफर इन सीक्युर डेटा… "
 
सब लोग शांत होकर सुन रहे थे. मानो उस पलके लिए उन्होने अपनी सांसे रोककर रखी थी. बहुत लोग अपनी गर्दन उंची कर सामने देखने की कोशीश कर रहे थे. हॉलमें सब तरफ पिनड्रॉप सायलेन्स था ….

" फर्स्ट प्राईज गोज टू … द वन ऍन्ड ओन्ली वन… मि. सॅम पॅट्रिक फ्रॉम दमन दिऊ …"

दुसरी कतार विचलित हूई दिखी, क्योंकी दुसरी कतारसे कोई उठा था. सब लोगों के सर उस दिशामें मुड गए. इसबार हॉलमें सबसे बडा और सबसे दिर्घ तालियोंका आवाज हुवा. सचमुछ उसका यश उसके नामके अनुरुप ‘सॅम’ यानी की अतुलनीय था. वह उठकर लगभग दौडते हूए ही स्टेजपर चला गया, इससे उसका अपूर्व उत्साह और आत्मविश्वास दिख रहा था. गोरा, उंचा, स्मार्ट, कसा हूवा शरीर ऐसा वह सशक्त यूवक था. ईशाने अपनी दिशामें आते उस पहले पुरस्कारके हकदारकी तरफ देखा. उसके चेहरेपर एक तेज चमक रहा था. आंखे निली और चमकीली थी. उसकी आखोंमे देखकर पलभरके लिए ईशाको अस्तित्व की याद आ गई. लेकिन अपने विचारोंको दिमागसे झटककर वह आगे गई. वह ईशाके सामने आकर खडा हो गया और उसने लोगोंकी तरफ मुडकर उनको अभिवादन किया. पहलेका तालियोंका आवाज जो अब भी बरकरार था वह और बढ गया. लोगों को अभिवादन कर उसने ईशाकी तरफ देखा और उसकी नजर ईशापर से हटनेका नाम नही ले रही थी, मानो वह उसके मदहोश करनेवाली आंखोमें अटकसा गया था. तालियोंकी गुंज अब भी चल रही थी. लेकिन अचानक एक अजिब घटना घटी, ईशाने जितने जोरसे हो सकता है उतनी जोरसे उसके गालपर एक चाटा जड दिया था. तब कहा वो होशमें आगया. हॉलमें चल रहा तालियोंका आवाज एकदमसे बंद होगया, मानो किसीने स्विच ऑफ किया हो. उसने और वहां उपस्थित किसीनेभी सोचा नही होगा वैसी अजिब वह घटना थी. हां ईशाने उसके गालपर एक जोरका चाटा जमा दिया था. उसका ही क्यों सारे उपस्थित लोगोंका इस बातपर यकिन नही हो रहा था. हॉलमें एकदम श्मशानवत चुप्पी फैल गई.. एकदम पिनड्रॉप सायलेन्स.

" यस आय स्लॅप्ड हिम… ऍन्ड ही डीजर्व इट… क्योंकी वह एक क्रॅकर है … सिर्फ क्रॅकरही नही तो ही इज आल्सो अ ब्लॅकमेलर…" हॉलमें चुप्पीका भंग हुवा वह ईशाके इन शब्दोनें .

ईशा लगातार बोल रही थी. उसकी आंखोमें आग थी. गुस्सेसे ईशाका पुरा शरीर कांप रहा था. तभी इन्स्पेक्टर राणा, जो पहलेसे ही तैयार थे, वे डायसपर दो कॉन्स्टेबलके साथ आ गए. उन्होने प्रथम सॅमकी कॉलर पकडकर दो तिन तमाचे उसके कानके निचे जड दिए.

" इन्स्पेक्टर " सॅम गुर्राया.

उसके मासूम, स्मार्ट चेहरेने अब उग्र रुप धारण किया था. उसे जडाए हुए तमाचोंकी वजहसे लाल हुवा उसका चेहरा औरही भयानक लग रहा था. इन्स्पेक्टरने जादा वक्त ना दौडाते हूए उसे हथकडीयां पहनाकर अरेस्ट किया और वे गुस्सेसे चिल्लाए, " टेक दिस बास्टर्ड अवे…"

कॉन्स्टेबल उसे लेकर, लगभग खिंचते हूएही वहांसे चले गए. उसका मद और नशा अबभी उतरा हुवा नही दिखाई दे रहा था. वह वहांसे जाते हूए कभी गुस्सेसे इन्स्पेक्टरकी तरफ तो कभी ईशाकी तरफ देख रहा था.

" याद रखो मुझे अरेस्ट करना तुम्हे बहुत महंगा पडनेवाला है " जाते जाते वह चिल्लाया.

कॉन्स्टेबल जब सॅमको वहांसे ले गया और सॅम सब लोगोंके नजरोंसे ओझल हुवा तब कहां इतनी देरसे हक्काबक्का रहे लोगोंमे खुसुरफुसुर शुरु हो गई. कुछ लोग अबभी डरे, सहमे और सदमे मे थे, तो कुछ लोगोंको यह सब क्या हो रहा है कुछ समझ नही आ रहा था. प्रथम पुरस्कार जिसे मिला उस लडकेको अचानक ईशाने मारा और इन्स्पेक्टरने डायसपर आकर उसे गिरफ्तार किया. सबकुछ कैसे लोगोंके समझके बाहर था. लोगोंमें चलरही खुसुफुसुर देखकर इन्स्पेक्टरने ताड लिया की लोगोंको पुरी केस और उसकी गंभिरता समझाना जरुरी है, नही तो लोग और गडबडी मचा सकते है. क्योंकी सॅम जो कुछ पल पहलेही सबलोगों का हिरो था उसे ईशाने अगलेही पल उसे व्हिलन करार दिया था. लोगोंको वह सच्चा या ईशा सच्ची यह जाननेकी उत्कंठा होनाभी लाजमी था.

" शांत हो जाईए … शांत हो जाईए प्लीज…" इन्स्पेक्टर हात उपर कर, जो कुछ लोग उठ खडे हूए थे उन्हे बिठाते हूए बोले, " कोई डरनेकी या घबरानेकी कोई जरुरत नही… दिस इज अ केस ऑफ ब्लॅकमेलींग ऍन्ड सायबर क्राईम… मैने खुद इस केसपर काम किया है … और इस केसका गुनाहगारके तौरपर अभी अभी आपके सामने सॅम बिश्वास को पकडा गया है …"

फिरभी लोग शांत होनेके लिए तैयार नही थे, तब ऍन्करने फिरसे माईकका कब्जा लिया, " दोस्तो शांत हो जाईए .. प्लीज शांत हो जाईए .. हमारी प्रतिस्पर्धाभी इथीकल हॅकींग … यानीकी हॅकिंगके बारेमेही थी… और इन्स्पेक्टरने अभी आप लोगोंके सामने हॅन्डल की केसभी हॅकींग और क्रॅकींगके बारेमेंही थी .. इसलिए इन्स्पेक्टर साहेबको मेरी बिनती है की वे इस केसके बारेमें… उन्होने यह केस कैसे हॅन्डल की… यह केस हॅन्डल करते वक्त कीन कीन चुनौतीयोंका सामना उन्हे करना पडा… और आखिर वह गुनाहगारतक कैसे पहूंचे … यह सब यहां इकठ्ठा हूए लोगोंको विस्तारसे बतायें …"

अब कहा लोग फिरसे शांत हो चुके थे. यह केस क्या है? … और इन्स्पेक्टरने उसे कैसे हॅन्डल किया.. यह जाननेकी लोगोंमें उत्सुकता दिखने लगी. एन्करने एकबार फिरसे इन्स्पेक्टरकी तरफ देखा और उन्हे आगे आकर पुरी कहानी बयां करनेकी बिनती की. इन्स्पेक्टरने ईशाकी तरफ देखा. ईशाने आखोंसेही इजाजत दे दी. इन्स्पेक्टर सामने आये और उन्होने माईक ऍन्करसे अपने पास ले लिया .

इन्स्पेक्टर कहानी कथन करने लगे –

" सायबर क्राईम यह अब भारतमें नया नही रहा है … आजकल पुरे देशमें लगभर रोज कुछना कुछ सायबर क्राईमकी घटनाएं घटीत होती रहती है …. लेकिन तहकिकात करते वक्त मुझे हमेशा इस बातका अहसास होता है की लोगोंकी सायबर क्राइमके बारेंमे बहूत गलतफहमीयां है … जितनी उनकी सायबर क्राईमके बारेमें गलतफहमीयां है उतनाही उनका अपने देशके पुलिस डिपार्टमेंटपर भरोसा उडा हूवा दिखाई देता है … उन्हे हमेशा आशंका लगी रहती है की यह टोपी और डंडे लेकर घुमनेवाले पुलिस यह इतना ऍडव्हान्स… यह इतना टेक्नीकल क्राईम कैसे हॅन्डल कर सकते है? … उन्हे सायबर क्राईमके बारेमें अपना पुलिस डिपार्टमेंट कितना सक्षम है इसके बारेमें आशंकाए लगी रहती है. … लेकिन अब अभी अभी मैने हॅन्डल किए केसके जरीए मै लोगोंको यकिन दिलाना चाहता हूं की … सायबर क्राईमके बारेमें अपना पोलीस डीपार्टमेंट सिर्फ सक्षमही नही तो पुरी तरहसे तैयार है … इस तरह का या और किसी तरहका गुनाह होनेके बाद जिस कार्यक्षमतासे हम दुसरे गुनाहगारोंको तुरंत पकड सकते है उसी कार्यक्षमतासे हम सायबर क्रिमीनल्सको भी पकड सकते है…. लेकिन फिर भी कुछ चिजोंके बारेंमे हम गुनाह हॅन्डल करते वक्त कम पडते है … खासकर जब उस गुनाहको दुसरे किसी देशके जमिन से अंजाम दिया जाता है तब… उस केसमें वह गुनाहगार किसी दुसरे देशके कानुनके कार्यक्षेत्रमें आता है … और फिर वह देश हमें उस गुनाहके बारेमें उस गुनाहगारको पकडनेके लिए कितना सहकार्य करते है इसपर सब निर्भर करता है…. सायबर गुनाहके बारेमें और एक महत्वपुर्ण बात… इसमें इंटरनेट इस्तेमाल करनेवाले लोगोंको कुछ चिजोंमे बहुतही जागरुक होना आवश्यक होता है .. जैसे किसीको, उस सामनेके पार्टीकी पुरी जानकारी रहे बिना खुदकी जानकारी … … पासवर्ड .. फोन … मोबाईल देना बहुतही खतरनाक होता है … वैसे अनसेफ, अनप्रोटेक्टेड, अनसेक्यूअर कनेक्शनपर फायनांसीयल ट्रान्झेक्शन करना … अपने खुदके प्रायव्हेट फोटो इंटरनेटपर भेजना … इत्यादी… यहभी खतरेसे खाली नही है… अब मै यह जो केस विस्तारपुर्वक बतानेवाला हूं … इससे आपको किस तरह जागरुक रहना पडेगा इसका अंदाजा आ जाएगा …"

इतनी प्रस्तावना देकर इन्स्पेक्टर सॅमके केसके बारेंमे बताने लगे …
 
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