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Adultery ब्लैकमेल

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३२

ईशा अपने कॅबिनमें अपने काममें व्यस्त थी. तभी फोनकी घंटी बजी.

" हॅलो " ईशाने फोन उठाया.

" ईशा देअर इज गुड न्यूज फॉर यू…"" उधरसे इन्स्पेक्टर राणा बोल रहे थे.

" यस अंकल"

" ब्लॅकमेलरने अस्तित्व को छोड दिया है …" इन्स्पेक्टरने ईशाको खुशखबरी सुनाई.

" ओ.. थॅंक गॉड … आय कान्ट एक्सप्लेन … आय ऍम सो हॅपी…"

ईशाको अस्तित्व के छुटनेकी खबर जबसे मिली थी तबसे उसे कुछभी सुझ नही रहा था. उसे कब मिलती हूं ऐसा उसे हो रहा था. वह ऑफीसका सारा काम वैसाही छोडकर सिधे एअरपोर्टकी तरफ निकल पडी.

… उसे पहले बताना कैसा रहेगा ?

नही … उसे सरप्राईज देते है …

और उसे डायरेक्ट बतानेका कोई रास्ताभी तो नही …

इमेल थी. लेकिन आजकल ईशाको इमेल, चॅटींग इन सारी चिजोंसे सक्त नफरत और मनमें डरसा बैठ गया था.

एअरपोर्ट आया वैसे उतरकर उसने ड्रायव्हरको गाडी वापस ले जानेके लिए कहकर वह लगभग दौडते हूए तिकिट काऊंटरके पास गई.

" मुंबईके लिए … अब कोई फ्लाईट है ?" उसने पुछा.

" वन फ्लाईट इज देअर .. जस्ट रेडी टू टेक ऑफ…" काऊंटरपर बैठे लडकिने बताया.

" वन टीकट प्लीज" ईशा अपना क्रेडीट कार्ड आगे करते हूए बोली.

उसने काऊंटरसे टिकट खरीदा और लगभग दौडते हूए ही वह फ्लाईटकी तरफ दौड पडी. तभी उसका मोबाईल बजा. उसने मोबाईलका डिस्प्ले देखा. डिस्प्लेपर उसके ऑफिसका नंबर था. उसने आगे कुछ ना सोचते हूए ही फोन बंद किया और दौडते हूएही फ्लाईटमें जाकर बैठ गई. सिटवर बैठतेही फिरसे उसका मोबाईल बजने लगा. उसने मोबाईलका डिस्प्ले देखा. वही ऑफीसका नंबर

ऑफीसचा नंबर… क्या काम होगा ?… निकिता एक कामभी ठीकसे नही संभाल सकती ..

उसने फोन बंद किया. लेकिन वह फिरसे बजने लगा.

निकिता कभी ऐसा बार बार फोन नही करती …

कुछ तो जरुरी काम होगा …

उसने फोन उठाया और उधर फ्लाईटका लास्ट कॉल हो गया.

" क्या है निकिता?… " वह लगभग चिढकरही बोली.

लेकिन यह क्या? उधरसे आनेवाला आवाज आदमीका था – हां अस्तित्व का आवाज था.

" अस्तित्व तूम… " वह एकदमसे सिटसे उठकर खडी होते हूए बोली, " ऑफीसमें तुम कैसे .. कब.. और वहां क्या कर रहे हो …?" उसे क्या बोला जाए कुछ समझ नही आ रहा था.

वह बोलते हूए जल्दी जल्दी प्लेनके दरवाजेकी तरफ जा रही थी.

" तुम्हे मिलनेके लिए आया था " उधरसे अस्तित्व का आवाज आया.

वह जब प्लेनके दरवाजेके पास पहूंची तब प्लेनका दरवाजा बंद किया जा रहा था.

" रुको मुझे उतरना है … "

" क्यों क्या हुवा ?" अटेंडंट्ने पुछा.

" आय ऍम नॉट फीलींग वेल" उसके पास अब पुरी बात समझानेका वक्त नही था.

वह दरवाजा बंद करते हूए रुक गया. और वह तेजीसे चलते हूए प्लेनसे उतर गई.

वह अटेंडंट उसकी तरफ आश्चर्यसे देख रहा था.

“इसकी तबीयत ठीक नही … फिर वह इतने जल्दी जल्दी और जोशके साथ कैसे उतर रही है ?’ उसके मनमें आया होगा.

उसकी टॅक्सी लगभग अब उसके घरके पास पहूंच गई थी. टॅक्सी जैसेही उसके घरतक आकर पहूंची उसके दिलकी धडकने तेज हो रही थी. प्लेनसे बाहर निकलतेही वह सिधे एअरपोर्टके बाहर आ गई थी और टॅक्सी लेकर उसने टॅक्सीवालेको सिथे उसके घर ले जानेके लिए कहा था. और प्लेनमें जब अस्तित्व का फोन आया था तभी उसने उसे अपने घर आनेके लिए कहा था. उसे ऑफीसमें सिन नही चाहिए था. तबतक टॅक्सी उसके घरके आहातेमें आकर रुकी. उसे पोर्चमेही अस्तित्व उसकी बडी अधिरतासे राह देखता हूवा दिखाई दिया. उसकी टॅक्सी आतेही वह पोर्चसे उतरकर उसके टॅक्सीके पास आ गया. उसेभी अब रहा नही जा रहा था. टॅक्सीका दरवाजा खोलकर सिधे वह उसके बाहोंमे घुस गई. न जाने कितने दिनोंसे वे एक दुसरेकों मिल रहे थे. ईशा के आंखोमें आंसू आ गए और वे फिर रुकनेका नाम नही ले रहे थे.

" अरे अरे… यह क्या ?" अस्तित्व उसे थपथपाते हूए बोला.

" देखो तो मै पुरा की पुरा सहीसलामत तुम्हारे पास पहूंच गया हूं " वह मजाकिया अंदाजमे, मौहोल थोडा ढीला करनेके लिए बोला.

लेकिन वह उसे इतनी मजबुतीसे चिपक गई थी की वह उसे छोडनेके लिए तैयार नही थी.
 
३३

ईशा और अस्तित्व जबसे आए थे तबसे ईशाके बेडरुममें, एक दुसरेकों बाहोंमे भरकर, लेटे हूए थे. ना उन्हे खानेकी सुध ती ना पिनेकी.

" जब उसकी पहली मेल आई, तब तुम्हे क्या लगा?" अस्तित्व ने पुछा.

" सच कहूं … मुझे तो मानो मेरे पैर के निचेसे जमिन और सर के उपरसे आसमान खिसक गया ऐसा लगा था… मैने तो दिलसे तुम्हे स्विकारा था और ऐसी स्थितीमें ऐसाभी कुछ हो सकता है, मैने सपनेभी नही सोचा था…." ईशाने कहा.

" इसका मतलब तुम्हे सब सच लगा था " अस्तित्व ने मजाकिया अंदाजमें पुछा.

"अरे.. मतलब ?… भलेही दिल नही मानता था पर परिस्थितीयां उसीके ओर इशारा कर रही थी. " ईशाने अपना बचाव करते हूए कहा.

" और तुम्हे क्या लगा था ?" ईशाने पुछा.

" नही तुम ठीक कहती हो … मेराभी हाल कुछ कुछ तुम जैसाही था … भलेही दिल ना माने परिस्थितीयां किसी ओर इशारा कर रही थी. " अस्तित्व ने उसे सहलाते हूए कहा.

" ऐसा वक्त फिरसे अपने जिंदगीमें कभी ना आए " ईशाने कहा.

" सचमुछ… पहले तो मुझे अपने प्यारको किसीकी नजर लगी हो ऐसाही लग रहा था. " अस्तित्व उसके माथेको चुमते हूए बोला.

उसने उसके माथेको चुम लिया और वह उसके होंठोके पास अपने होंठ ले जाकर बडे बडे सांस लेते हूए वही रुक गया. और फिर आवेशके साथ एकदुसरेके होठोंको अपने मुंहमें लेकर वे एक बडे चुंबनमें मशगुल हो गए.

अचानक ईशाको उनका पहले हॉटेलमें हुवा वह प्रणय याद आ गया और उसीके साथ कोई उनके फोटो खिंच रहा है ऐसा आभास हो गया.

वह झटसे अपने होंठ उसके होठोंसे हटाते हूए वह पिछे हट गई.

" क्या हुवा ?" अस्तित्व ने पुछा.

" हम वही गलती दुबारा तो दोहरा नही कर रहे है " ईशाने मानो खुदसेही पुछा.

" मतलब ?" अस्तित्व ने पुछा.

" यह सब और वहभी शादीसे पहले… तूम मेरे बारेंमे क्या सोच रहे होगे " ईशाने अपने जहनमें उठा दुसरा सवालभी पुछा.

" डोन्ट बी सिली" वह फिरसे पहल करते हूए बोला.

लेकिन उसके हाथपैर मानो ठंडे पड चुके थे. वह कुछभी प्रतिक्रिया नही दे रही थी.

" तुम्हे अगर इसमें गलत लगता है और… तुम्हारा दिल अब नही मान रहा है तो ठीक है … " वह उससे अलग होते हूए वहांसे उठते हूए बोला.

" वैसा नही हे … डोन्ट मिसअंडरस्टॅंड मी" वह उसे फिरसे अपने पास खिंचते हूए बोली.

उसने फिरसे उठनेका प्रयास किया लेकिन अब वह उसे छोडनेके लिए तैयार नही थी. अस्तित्व को कुछ समझ नही रहा था की. वह शिथील होकर सिर्फ उसके पास बैठा रहा. लेकिन अब मानो ईशाके शरीरमें किसी चिजका संचार हुवा था. वह कॉटपर उसे एक तरफ गिराकर उसके उपर चढ गई और उसके शरीरपर सब तरफ चुंबनोकी मानो बरसात करने लगी. और फिर उनके बिच कुछ पलके लिए क्यों ना हो तैयार हुवा फासला मिट गया और वे एकदुसरेमें कब समा गए उन्हे कुछ पताही नही चला.

ईशा सुबह सुबह निंदसे जब जाग गई तब वह अपने पास पडे अस्तित्व के मासूम चेहरेकी तरफ एकटक देखने लगी. उसने खिडकीसे बाहर झांककर देखा. बाहर अभीभी अंधेरा था. वह फिरसे अस्तित्व के चेहरेकी तरफ एकटक देखने लगी. अचानक उसके खयालमें आगयाकी उसका मासूम चेहरा धीरे धीरे उग्र होता जा रहा है.

शायद वह कोई बुरा सपना देख रहा हो….

उसने उसके चेहरेपर हाथ फेरनेकी कोशीश की. लेकिन उसके हाथका स्पर्श होतेही वह चौंककर उठ गया और गुस्सेसे बोला, ‘ मै तुम्हे छोडूंगा नही … मै तुम्हे छोडूंगा नही "

कुछ पलके लिए तो ईशाभी घबराकर असमंजसमें पड गई.

" क्या हुवा ?" ईशाने पुछा.

लेकिन कुछ पलमेंही उसका गुस्सा ठंडा पडा दिखाई दिया. और वह इधर उधर देखते हूए फिरसे सोनेके लिए लेटते हूए बोला,

" कुछ नही "

और फिरसे सो गया.
 
३४

सुबह सुबह ईशा, अस्तित्व , निकिता और इन्स्पेक्टर राणा कॉन्फरंन्स रुममें इकठ्ठा हूए थे.

" मै इस बातसे संतुष्ट हूं की आखिर ब्लॅकमेलरने अस्तित्व को कोईभी हानी ना पहूंचाते हूए छोड दिया." ईशा काफी समयसे चल रहे चर्चाके बाद एक गहरी सांस लेते हूए बोली.

" एक मिनीट" अस्तित्व ने हस्तक्षेप किया.

सब लोग एकदम गंभीर होकर उसकी तरफ देखने लगे.

" मुझे लगता है …. ब्लाकमेलरकी वजहसे हमे, मुझे, आपको, ईशाको – सबकोही काफी तकलिफ उठानी पडी…. " अस्तित्व ने कहा.

" अस्तित्व … पैसा चला गया इस बातका मुझे दुख नही है … तुझे कुछ हानी नही हुई यह मेरे लिए सबसे महत्वपुर्ण है " ईशाने बिचमेही उसे काटते हूए कहा.

इन्स्पेक्टर राणाभी उसकी हां मे हां मिलाएंगे इस आशासे ईशाने उनकी तरफ देखा. लेकिन वे कुछ नही बोले.

" ईशा बात सिर्फ पैसोकी नही है … कमसे कम मुझे लगता है की उसे यूही छोड देना कुछ उचित नही होगा. .. वैसे अबभी देरी नही हूई है… अब अगर हमने उसे पकडनेकी कोशिश की तो कैसा रहेगा?…" अस्तित्व ने सवाल खडा किया और वह इन्सपेक्टरकी प्रतिक्रिया परखनेके लिए उनकी तरफ देखने लगा. इन्स्पेक्टरने सोचते हूए कमरेकी छतकी तरफ देखा और वे कुछ बोलनेही वाले थे तभी निकिता बिचमेंही बोली.

" लेकिन हमे ना उसका नाम पता है … ना उसका पता… वह क्या करता है यहभी हमे पता नही है … फिर अगर हमने उसे पकडनेकीभी ठान ली तो उसे पकडेंगे कैसे ? …" निकिताने अपनी आशंका जाहिर की.

ईशाने निकिताकी तरफ देखकर मानो उसके बातको मुक संमती दर्शाई.

" इतके दिन हम उसे पकडनेकी कोशीश कर रहे थे…. वे सब कोशिशें एकदम खाली गई ऐसा कहना कुछ उचित नही होगा … क्योंकी अबभी अपनेपास कुछ क्लूज है … एक तो उस ब्लॅकमेलरका हॅंन्ड रायटींग जो हमें सायबर कॅफेके लॉगबुकसे मिला…. दुसरा उसके फिंगर प्रिन्टस जो हमें सायबर कॅफेसेही मिले और तिसरा … यह फोटोग्राफस देखो … " इन्स्पेक्टर राणा बोल रहे थे.

अबभी ब्लॅकमेलरको पकडनेकी अस्तित्व की तिव्र इच्छा देखकर मानो इन्स्पेक्टरके शरीरमें फुर्ती दौड रही थी. वे अपने जेबसे दो फोटोग्राफ्स निकालकर वहा इकठ्ठा हूए लोगोंको दिखाकर आगे बोले,

" यह फोटोग्राफ्स उस सायबर कॅफेमें मिले कॉम्प्यूटरके है, जहां फोटोग्राफ लेनेके थोडीही देर पहले ब्लकमेलर बैठा हुवा था .. इस फोटोग्राफ्सकी तरफ थोडा गौरसे देखो … देखो कुछ खयालमें आता है क्या ?" इन्सपेक्टरने वे फोटो सबको देखनेके लिए आगे खिसकाए.

सब लोगोंने वह फोटोग्राफ्स एक एक करके देखे. लेकिन किसीकोभी उन फोटोग्राफ्समें कुछ अलग महसूस नही हुवा. तभी अस्तित्व वे फोटोग्राफ्स देखते हूए मंद मंद मुस्कराया.

" क्या हुवा ?" ईशाने पुछा.

" जरा देखोतो… गौरसे देखो … इस फोटोग्राफ्समें कॉम्प्यूटरका माऊस कॉम्प्यूटरके बाए तरफ की बजाय दाई तरफ रखा हुवा दिख रहा है …" अस्तित्व ने कहा.

" यस यू आर ऍब्सुलेटली राईट" इन्स्पेक्टरने उत्साहभरे स्वरमें कहा.

अब ईशाभी मंद मंद मुस्कुराने लगी.

" लेकिन इसका क्या मतलब है ?" निकिता अबभी संभ्रममें थी.

"… इसका एकही मतलब निकलता है की वह ब्लकमेलर लेफ्ट हॅन्डेड है … " इन्स्पेक्टरने कहा.

" यस दॅट्स राईट " अब कहा निकिताभी मुस्कुराने लगी थी.

तभी कॉन्फरंस रुममें रखे हूए फोनची घंटी बजी. फोन ईशाके बगलमेंही रखा हूवा था. उसने फोन उठाया,

" हॅलो"

" गुड मॉर्निंग ईशा … " उधरसे सीक्युर डेटाके मॅनेजींग डायरेक्टर मि. कश्यपं बोल रहे थे.

" गुड मॉर्निंग कश्यपजी…" ईशाने उतनीही सरगर्मीसे उनका स्वागत किया, " बोलीए क्या कहते हो ?"

" हमारे यहा हमने एक नेटवर्किंग सॉफ्टवेअर डेव्हलपमेंट कॉन्टेस्ट रखी थी … कॉन्टेस्टचा टॉपीक है इथीकल हॅकींग… उस कॉन्टेस्टमें प्राईज डिस्ट्रीब्यूशन आपके हाथसेही हो ऐसी हमारी इच्छा है … " उधरसे कश्यपजी मानो अपना हक जताते हूए बोले.

" आपने बुलाया और हम नही आए ऐसा कभी होगा क्या कश्यपजी … मै जरुर आऊंगी … प्राईज डिस्ट्रीब्यूशन कब है ?… " ईशाने पुछा.

" पुरा प्रोग्रॅम अभी फायनल होनेका है … वैसे वह प्रोग्रॅम टेंटीटीव्हली समव्हेअर अराऊंड धीस मंथ होगा … पुरा प्रोग्रॅम फायनल होतेही आपको वैसे डीटेलमें बताया जाएगा … " उधरसे कश्यपजी बोले.

" नो प्रॉब्लेम"

" थॅंक्स"

" मेन्शन नॉट"

" ओके बाय… सीयू"

" बाय"

ईशाने फोन क्रॅडल वापस रखा और उसने वहा बैठे सब लोगोंपर अपनी नजर घुमाई. उसके चेहरेपर फिरसे मुस्कुराहट दिखने लगी थी.

" मेरे दिमागमें एक आयडीया आया है … अभी सीक्युर डेटाके मॅनेजींग डायरेक्टर मि. कश्यपजींका फोन था … इथीकल हॅकींगपर वे एक सॉफ्टवेअर डेव्हलपमेंट कॉन्टेस्ट ले रहे है … मुझे यकिन है की अगर इस कॉन्टेस्ट का प्रचार बडे पैमानेपर अगर किया गया और उस कॉन्टेस्ट जितनेवालोंको अगर बडे बडे प्राईजेस रखे गए … तो वह ब्लॅकमेलर इस प्रतियोगीतामें जरुर हिस्सा लेगा …" ईशाने कहा.

" लेकिन तुम यह सब इतने यकिनके साथ कैसे कह सकती हो ?" अस्तित्व ने आशंका जताई.

" पुरे यकिनके साथतो नही… फिरभी … क्रिमीनल सायकॉलॉजीके अनुसार… वह ब्लॅकमेलर अभी अपना आत्वविश्वास और गर्वमें पुरी तरह चुर है … उसतक अगर यह कॉन्टेस्टकी बात पहूचाई गई तो वह उसमें जरुर हिस्सा लेगा … " इन्स्पेक्टरने अपना अंदाजा लगाया.
 
३५

सुबह सुबह ऑफीसमें आए बराबर ईशा अपने काममें व्यस्त हो गई. तभी निकिता कॅबिनमें आ गई.

" प्रतियोगीता कब कलसे शुरु होनेवाली है ना? " ईशाने निकितासे पुछा.

" हां" निकिताने एक फाईल ढुंढते हूए जवाब दिया.

" कितने लोगोंके अप्लीकेशन्स आए है ?" ईशाने पुछा.

" लगभग तिन हजार" निकिताने उत्तर दिया.

" ओ माय गॉड … इतने लोगोंमें उस ब्लॅकमेलरको ढुंढना यानी … पहाड खोदकर चुहा निकालने जैसा होगा… और वहभी अगर वह इस प्रतियोगीतामें शामील हुवा तो?… नही?" ईशाने पुछा.

" हां कठिण तो है ही " निकिता एक फाईल लेकर निकिताके सामने आकर बैठते हूए बोली.

तभी ईशाका फोन बजा. ईशाने फोन उठाकर अपने कानको लगाया,

" ईशा… मै इन्स्पेक्टर राणा बोल रहा हूं .." उधरसे आवाज आया.

" मॉर्निंग अंकल…."

" मॉर्निंग … तुम्हे पता तो होगाही की प्रतियोगिताके लिए ३१२३ अप्लीकेशन्स आए है … उसमें हमने जो लेफ्ट हॅन्डेड और राईट हॅन्डेड जानकारी मंगवाई थी … उसके अनुसार जो लेफ्ट हॅन्डेड लोगोंके है वे ३२ अप्लीकेशन्स अलग किए हूए है…. उसमेसें एक लडकेका हॅन्डरायटींग हुबहु मॅच हो रहा है … उसका नाम है सॅम बिश्वास … " उधरसे इन्स्पेक्टरने जानकारी दी.

" गुड व्हेरी गुड… " ईशा एकदम खुश होते हूए बोली, " थॅंक्यू अंकल… मै आपके उपकार किस तरह उतार सकुंगी… मुझे तो कुछ समझमें नही आ रहा है …" ईशा खुशीके मारे बोली.

" इतने जल्दी इतना खुश होकर नही चलेगा … अभी तो सिर्फ शुरुवात है … उसे कानुकके शिकंजेमें पकडनेके लिए हमे और काफी मेहनत करनी पडेगी .." इन्स्पेक्टरने कहा.

" क्यों? … अभी तुरंत हम उसे नही पकड पाएंगे ?" ईशाने निराश होकर पुछा.

" नही अभी नही … आगे तो सुनो … हमने अभी उसका फोन टॅप करना शुरु किया है .. ताकी उसके और कोई साथीदार होंगे तो उसे हम पकड पाएंगे … और सारे सबुत इकठ्ठा होतेही उसे अरेस्ट करेंगे .. " इन्स्पेक्टर राणाने कहा.

ईशाका तो मानो खुन खौल रहा था. उस ब्लॅकमेलरको कब एक बार पकडकर उसे सजा दी जाए ऐसा उसे हो रहा था. उसे फिलहाल वह कुछभी नही कर सकती इस बातका दुख हो रहा था.

लेकिन नही…

मै कुछ तो करही सकती हूं …

यह खबर अगर अस्तित्व को दी जाए तो…..

यह खबर सुनतेही वह कितना खुश हो जाएगा …

उसने फोनका क्रेडल उठाया और वह एक नंबर डायल करने लगी.
 
३६

पोलिस स्टेशनमें इन्स्पेक्टर राणाके सामने एक पुलिस बैठा हुवा था.

" सर हमने अतुल बिश्वासके सारे फोन कॉल्स टॅप किए है … उनमेंसे यह एक महत्वपुर्ण लगा .." वह पुलिस सामने रखा टेपरेकॉर्डर शुरु करते हूए बोला.

टेपरेकॉर्डर शुरु हो गया और उसमेंसे वह टेप किया हुवा फोन कॉल सुनाई देने लगा.-

" रघु… मुझे वहां आनेके लिए ७-८ दिन लगेंगे … पैसे संभालकर रखना … मै वहां पहूचनेके बाद हम उसे बाट लेंगे .. " अतुलने कहा.

" ठीक है .. " रघुने कहा.

" और हां … अपने कॉम्प्यूटरको पुरी तरहसे फॉरमॅट करना… उसमें कुछभी बाकी रहना नही चाहिए … "

" ठीक है … तूम इधरकी बिलकुल चिंता मत करो… मै सब संभाल लूंगा .."

" ओके देन … बाय"

" बाय .. "

इन्स्पेक्टर राणाने वह संवाद रिवाईंड कर फिरसे बार बार सुना. और फिर वे एक इरादेके साथ खडे होते हूए उस पुलिससे बोले,

"चलो "

इन्सपेक्टरने भलेही सिर्फ एकही शब्द कहा था, फिरभी वह इशारा उस पुलिसको काफी था. इन्स्पेक्टर आगे आगे और वह पुलिस उनके पिछे पिछे चलने लगे.

३७

रातका समय था. एक अंधेरे कमरेमें रघु कॉम्प्यूटरके सामने बैठकर कुछ कर रहा था. कमरेमें जोभी कुछ उजाला था वह उस मॉनिटरकाही था. उस मॉनिटरके रोशनीमें रघुका भद्दा चेहरा और ही भयानक दिख रहा था. तभी दरवाजेपर दस्तक हूई. रघु उठ खडा हूवा,

लगता है आगए साले बेवडे…

उसने सोचा. यह उसके रातमें इकठ्ठा होनेवाले दोस्तोंके आनेका वक्त था. वे इकठ्ठा होकर देर रात तक पिते थे और गप्पे मारते बैठते थे. और इतनेमें उसके पास पैसा आनेसे उसके यहां आनेवाले दोस्तोंकी गिनती बढती जा रही थी.

" कोण है बे?" मस्तीमें बोलते हूए उसने दरवाजा खोला.

और उसके चेहरेका रंग फिका पड गया. उसके चेहरेकी मस्ती पुरी तरहसे उड गई थी. उसके सामने दरवाजेमें इन्स्पेक्टर राणा और और पांच छे पुलिस खडे थे. उनमेंसे दो लोग ड्रेसमें नही थे. वह कुछ सोचे और कुछ हरकत करे इसके पहलेही पुलिसने उसे दबोचकर अरेस्ट किया.

" मैने क्या किया ?" रघु अपने चेहरेपर मासुमियतके भाव लाकर बोला.

कोई कुछभी प्रतिक्रिया नही दे रहा है यह देखकर वह फिरसे बोला,

" मुझे क्यों अरेस्ट किया गया … कुछ तो कहोगे ?"

फिरभी कोई कुछ नही बोला.

" ऐसे आप कुछभी गलती ना होते हूए किसीको अरेस्ट नही कर सकते … यह कानुनन अपराध है " वह अपनी आवाज बढाकर बोला.

फिरभी कोई कुछ बोलनेके लिए तैयार नही था, यह देखते हूए वह चिढकर चिल्लाया,

" मुझे क्यो अरेस्ट किया गया है ?"

" पता चलेगा… जल्दीही पता चलेगा " इन्सपेक्टरका एक साथी ताना मारते हूए धीमे स्वरमें बोला.

अब कंधा उचकाकर, चेहरेपर जितने हो सकते है उतने मासुमियतके भाव लाकर, वह उनकी हरकते निहारने लगा. एक बलवान पुलिस उसके हाथोमें हथकडीयां पहनाकर उसे घरके अंदर ले गया. बाकी सारे पुलिस घरमें सब तरफ फैलकर घरकी तलाशी लेने लगे. उनमेंसे दो लोग ड्रेसमें नही थे, वे कॉम्प्यूटर एक्सपर्ट थे. उन्होने तुरंत कॉम्प्यूटरपर कब्जा किया. कॉम्प्यूटर शुरुही था इसलिए अपराधीसे पासवर्ड हासिल करना या उस कॉम्प्यूटरका पासवर्ड ब्रेक करना, यह सब टल गया था. पुलिसकी टीम पुरे घरकी और आसपासकी तलाशी लेते हूए जब कॉम्प्यूटरके इर्द गिर्द इकठ्ठा हो गई, तब कॉम्प्यूटरपर बैठे एक्सपर्टमेंसे एकने इन्स्पेक्टर राणासे कहा,

" सर इसमें तो कुछभी नही है "

" घरमेंभी कुछ नही मिल रहा है " टीममेंसे एकने जोड दिया.

" कुछ होगा तो मिलेगा ना … मुझे लगता है आप लोग गलत घरमें घुस गए हो " रघुने बिचमेंही कहा.

" ठीकसे देखो .. उसने अगर हार्डडिस्क फॉरमॅट की हो तो अपने रिकव्हरी टूल्स रन करो " इन्सपेक्टरने कहा.

" यस सर" कॉम्प्यूटर एक्सपर्ट बोला.

टिममेंसे कुछ पुलिस अबभी घरमें सामान उलट पुलटकर देख रहे थे. तभी एक पुलिस वहा इन्सपेक्टरके पास एक बॅग लेकर आया. उसने बॅग खोली तो अंदर कपडे थे. उसने कपडेभी बाहर निकालकर देखा, लेकिन अंदर कुछभी नही था.

" देखो … घरका कोना कोना छान मारो …" इन्स्पपेक्टर उन्हे मायूस हुवा देखकर उनका हौसला बढानेके उद्देशसे बोला.

" यस सर" उस पुलिसने कहा और फिरसे घरमें ढुंढने लगा.

तभी कॉम्प्यूटर एक्स्पर्टका उत्साहीत स्वर गुंजा " सर मिल गया "

सारे लोग अपने अपने काम छोडकर कॉम्प्यूटरके इर्द गिर्द जमा हो गए. और वे कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ बडी आस लेकर देखने लगे. उनमेंसे सिनियर कॉम्प्यूटर एक्सपर्टने कॉम्प्यूटरपर एक फाईल खोली. शायद उसने वह रिकव्हरी टूल्सका इस्तेमाल कर रिकव्हर की होगी. वह फाईल यानी ब्लॅकमेलरने पहले मेलमें ईशाको भेजा हुवा ईशा और अस्तित्व के प्रणयका फोटो था. इन्सपेक्टरने अब गुस्सेसे मासूम बननेकी कोशीश कर रहे रघुकी तरफ देखा. रघुके चेहरेसे मासूमियतभरे भाव कबके उड चुके थे. उसने अपनी गर्दन झुकाई थी. इन्स्पेक्टरने अपने साथीसे इशारा करतेही वह पुलिस अरेस्ट किए हुए रघुको बाहर ले गया. रघु चुपचाप कुछभी प्रतिकार ना करते हूए उस पुलिसके पिछे पिछे चलने लगा.

रघुको उस पुलिसने वहांसे बाहर ले जातेही, इन्स्पेक्टर राणाने अपना मोबाईल लगाया –

" ईशा गुड न्यूज… "
 
३८

पुरी कहानी सुनाकर इन्स्पेक्टरने एक लंबी सांस ली. स्टेजपर इन्स्पेक्टर राणा, ईशा, सीक्युर डेटाके डायरेक्टर और ऍन्कर खडे थे. पुरी कहानी खत्म होगई थी, फिरभी लोग अभीभी शांत थे. हॉलमें मानो शमशानसी चुप्पी फैली हुई थी. तभी ईशाको हॉलके पिछले हिस्सेमें अस्तित्व खडा हुवा दिखाई दिया. ईशाने हात हिलाकर उसे स्टेजपर बुलाया. अस्तित्व भी लगभग दौडते हूएही स्टेजपर गया. ईशाने उसका हाथ अपने हाथमें लेकर उसे अपने पास खडा किया. अबतक जो सब लोग शांत थे वे अब तालियां बजाने लगे. और तालियाभी इतनी की मानो उन्होने सारा हॉल सरपर लिया हो. तालियां रुकनेका नाम नही ले रही थी.

अबभी अस्तित्व का हाथ ईशाके हाथमें कसकर पकडा हुवा था. ईशाने दुसरा हाथ दिखाकर लोगोंको शांत रहनेका इशारा किया और वह माईक हाथमें लेकर बोलने लगी –

" हमारा प्रेम… यां यू कहिए … हमारा इ – लव्ह … लगा था कमसे कम इसमें तो बाधाएं नही आयेंगी .. लेकिन ऐसा लगता है की प्यार की राहमें हमेशा बाधाए आती है …"

ईशाने हॉलमें सब तरफ अपनी नजरे घुमाई और वह अस्तित्व का हाथ और कसकर पकडते हूए आगे बोली, " … लेकिन कुछभी हो … आखिर जित प्यारकीही होती है "

लोगोंने तालिया बजाते हूए फिरसे पुरा हॉल मानो अपने सरपर उठा लिया.

अब अस्तित्व ने माईक अपने हाथमें लिया और लोगोंको शांत रहनेका इशारा करते हूए वह बोला,

" हमारे दोनोके प्रेमकहानीसे आप लोग एक सिख जरुर ले सकते है की … " एक क्षण स्तब्ध रहकर वह आगे बोला, " की बुरेका अंत आखिर बुरेमेंही होता है …"

फिरसे लोगोंने तालियां बजाकर मानो उसके कहनेको अपनी सहमती दर्शाई. तभी एक कंपनीका आदमी स्टेजके पिछले हिस्सेसे स्टेजपर आ गया. उसकी चारो ओर घुमती हूई आंखे स्टेजपर किसीको ढूंढ रही थी. आखिर उसे कंपनीके मॅनेजिंग डायरेक्टर कश्यपजी दिखतेही वह उनके पास गया और उनके कानमें कुछ बोलने लगा. वह जोभी बोल रहा था वह सुनकर कश्यपजींके चेहरेपर अचानक हडबडाहट, आश्चर्य और डरके भाव दिखने लगे. उनके चेहरेपर वे भाव देखकर स्टेजपर उपस्थित बाकी लोगोंके चेहरेपरभी भाव बदल गए थे. स्टेजपर जो हल्का फुल्का खुशीका माहौल था वह एकदमसे तनावमें बदल गया था. उस कंपनीके आदमीने कश्यपजीको सब बतानेके बाद कश्यपजीने स्टेजपर इधर उधर देखा और वे इन्स्पेक्टर राणाकी तरफ बढने लगे.

अब कश्यपजी इन्स्पेक्टरके कानमें कुछ बोल रहे थे. इन्स्पेक्टरकीभी वही दशा हो गई थी. उनके चेहरेपरभी हडबडाहटभरे आश्चर्य और डरके भाव आगए थे. तबतक ईशा, अस्तित्व और वह ऍन्करभी इन्स्पेक्टरके पास पहूंच गए.

" क्या हुवा ?" ईशाने एकबार इन्स्पेक्टरकी तरफ तो दुसरी बार कश्यपजीकी तरफ देखते हूए पुछा.

" जाते हूए वह अपना आखरी दांव खेल गया है " इन्सपेक्टरने बताया.

" लेकिन क्या हुवा ?" अस्तित्व ने पुछा.

" थोडा खुलकर तो बताओ ?" ईशाने कश्यपजीकी तरफ देखते हूए पुछा.

" खुलकर बोलनेके लिए अब वक्त नही है … चलो मेरे साथ चलो " कश्यपजी अब जल्दी करते हूए बोले. और तेजीसे स्टेजके पिछले हिस्सेसे उतरकर उस कंपनीके आदमीके साथ अपने ऑफीसकी तरफ जाने लगे.

इन्स्पेक्टर, ईशा, और अस्तित्व भी चुपचाप उनके पिछे चलने लगे. वह ऍन्कर उनके पिछे जाएकी ना जाए इस दुविधामें स्टेजपरही रुका रहा, क्योंकी अबतक हॉलमें उपस्थित लोगोंमे खुसुरफुसुर और गडबडी शुरु हो गई थी. हकिकतमें क्या हुवा यह जाननेकी जैसे उन लोगोंकी उत्सुकता बढ रही थी. लेकिन जितने वे लोग अनभिज्ञ थे उतनाही वह ऍन्करभी अनभिज्ञ था. लेकिन क्या हुवा यह जाननेसे बडी जिम्मेदारी अब उस एन्करके कंधेपर आन पडी थी – किसीभी तरह उन लोगोंको शांत करके वहां उस हॉलसे सही सलामत बाहर निकालनेकी.

कंपनीके उस आदमीने कंपनीके मॅनेजींग डायरेक्टरके कानमें कुछ खुसफुसाकर प्रोग्रॅमका सारा मुडही बदल दिया था. डायससे निचे उतरकर कंपनीके मॅनेजिंग डायरेक्टर कश्यपची सिधे अपने कॅबिनके तरफ जाने लगे. कश्यपजींको वह फासला मानो बहोत दूर लग रहा था. डायसकी सिढीयां उतरकर और उनके ऑफीसकी सिढीयां चढते हूए पहलीबार उन्हे थकावट महसूस हो रही थी. उनके पिछे इन्स्पेक्टर राणा और सबसे पिछे असमंजसमें चल रहे ईशा और अस्तित्व थे. सबलोग जब कश्यपजींके कॅबिनमें घुस गए, तब वहां पहलेसेही कुछ लोगोंने कॉम्प्यूटरके इर्दगिर्द भिड की थी. कश्यपजीभी उस भिडमें शामिल हो गए और कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ आश्चर्यसे देखने लगे. ईशा और अस्तित्व ने जब उस भिडमें घुसकर उस मॉनिटरकी तरफ देखा. तब कहां उनको सारे मसलेका अवलोकन हुवा. उनके मनमें चल रही सारी शंकाए एक पलमें नष्ट होकर वह जगह अब चिंता और डरने ली थी. मॉनिटरपर एक ब्लींक हो रहा मेसेज दिख रहा था – आल दी सर्व्हर डाटा अँड कॉम्प्यूटर डाटा ह्याज बिन डिलीट. टू रीकवर एंटर दी पासवर्ड’ और मॉनिटरपर उलटी गिनती दिखा रही टाईम बॉम्बके घडी जैसी एक घडी दिख रही थी. टाईम– ५:१०:२६

" ओ माय गॉड… " कश्यपजींके आश्चर्यासे खुले रहे मुंहसे निकल गया.

उनका पुरा बदन पसिना पसिना हो गया था और चेहरेपरभी पसिनेकी बुंदे दिख रही थी. सब डाटा अगर डिलीट हूवा तो होनेवाले नुकसानके कल्पनाभरसेही वे घबरा गए थे.

" सर यही नही तो कंपनीके सारे कांम्प्यूटरपर यह मेसेज आया है … " कंपनीका एक आदमी बोला. और फिर सब लोगोंको डॆव्हलपमेंट सेंटरकी तरफ ले जाते हूए बोला, " सर जरा इधरभी देखिए .."

उसके पिछे सारे लोग कुछ ना बोलते हूए जा रहे थे, मानो समशानमें जा रहे हो.

डेव्हलपमेंट सेंटर यानी एक बडा हॉल था और वहां छोटे छोटे क्यूबिकल्स बनाकर हर डेव्हलपरकी तरफ ध्यान दिया जा सके और सबको प्रायव्हसीभी मिले इसका खास ध्यान रखा गया था. वहां सब कॉम्प्यूटरके मॉनिटर्स शुरु थे और सब मॉनिटरपर एकही मेसेज था – आल दी सर्व्हर डाटा अँड कॉम्प्यूटर डाटा ह्याज बिन डिलीट. टू रीकवर एंटर दी पासवर्ड’

और यहांभी सब कॉम्प्यूटर्सपर उलटी गिनती चल रही थी.

टाइम - ०५:०३:०२

" सचमुछ गुनाहगार जाते हूए अपनी आखरी चाल चल गया है " अस्तित्व ने कहा.

" इट्स अ टीपीकल एक्झाम्पल ऑफ ईटेररीझम" ईशाने कहा.

" हमारे तो कंपनीका अस्तित्वही खतरेमें आया है " कश्यपजी अपने चेहरेसे पसिना पोंछते हूए बोले.

" आप चिंता मत किजिए … पासवर्ड गुनाहगारसे कैसे उगलना है यह हमारा काम है " इन्स्पेक्टरने कहा.

तभी दो पुलिस हथकडी पहने हूए सॅमको वहां लेकर आ गए. इन्स्पेक्टरने पुरा मसला समझमें आतेही उसे वापस यहां लानेके लिए अपने साथीयोंको पहलेही वायरलेसपर बताया था. सॅम धीमे मस्ती भरी चालसे मंद मंद मुस्कुराते हूए इन्स्पेक्टरकी तरफ चलने लगा.

" पासवर्ड क्या है ?…" इन्स्पेक्टरने उसे कडे स्वरमें पुछा.

इन्स्पेक्टरने ‘साम दाम दंड भेद’ से पहले ‘दंड’ का इस्तेमाल करनेकी ठान ली थी ऐसा दिख रहा था.

" जल्दी क्या है … पहले मेरी हथकडीतो खोलो … अभी और ५ घंटे बाकी है " सॅम हसते हूए शांत स्वरमें बोला.

इन्स्पेक्टर गुस्सेसे उसे मारनेके लिए उसकी तरफ बढे वैसे सॅम चेहरेपर कुछभी डर ना दिखाते हूए वैसेही खडा रहते हूए, उनकी आखोंमें आखे डालकर बोला, ‘ अं हं… इस्न्पेक्टर यह गल्ती कभी ना करना … ऐसी गलती करोगे तो मै पासवर्ड तो दुंगा लेकिन वह पासवर्ड देनेके बाद … तुम्हारेपास जो ५ घंटे बाकि है वहभी नही रहेंगे….. पुरा डाटा वह पासवर्ड देनेके बाद तुरंत नष्ट हो जाएगा …"

इन्स्पेक्टरने उसपर उठाया हुवा हाथ पिछे लिया. उन्हे अहसास हो गया था की उसके बोलनेमें तथ्य था.

" खोलो मेरी हथकडी " सॅमने फिरसे कहा.

इन्स्पेक्टरने उसे लेकर आए पुलिसको इशारा किया. उन्हे इशारा मिलतेही उन्होने चूपचाप उसकी हथकडी खोली. सॅमने अपनी खुली हूई कलाइयां एक के बाद एक दुसरे हाथमें लेकर घुमाई और वह अपने दोनो हाथ पिछे ले जाते हूए जम्हाई भरते हूए, उसे मिली हूई रिहाईका आनंद व्यक्त करते हूए बोला,

" हां अब देखो… कैसे खुला खुला लग रहा है "

" पासवर्ड क्या है ?" फिरसे इन्स्पेक्टरका कडा स्वर गुंजा.इन्स्पेक्टर, ईशा, और अस्तित्व भी चुपचाप उनके पिछे चलने लगे. वह ऍन्कर उनके पिछे जाएकी ना जाए इस दुविधामें स्टेजपरही रुका रहा, क्योंकी अबतक हॉलमें उपस्थित लोगोंमे खुसुरफुसुर और गडबडी शुरु हो गई थी. हकिकतमें क्या हुवा यह जाननेकी जैसे उन लोगोंकी उत्सुकता बढ रही थी. लेकिन जितने वे लोग अनभिज्ञ थे उतनाही वह ऍन्करभी अनभिज्ञ था. लेकिन क्या हुवा यह जाननेसे बडी जिम्मेदारी अब उस एन्करके कंधेपर आन पडी थी – किसीभी तरह उन लोगोंको शांत करके वहां उस हॉलसे सही सलामत बाहर निकालनेकी.
 
कंपनीके उस आदमीने कंपनीके मॅनेजींग डायरेक्टरके कानमें कुछ खुसफुसाकर प्रोग्रॅमका सारा मुडही बदल दिया था. डायससे निचे उतरकर कंपनीके मॅनेजिंग डायरेक्टर कश्यपची सिधे अपने कॅबिनके तरफ जाने लगे. कश्यपजींको वह फासला मानो बहोत दूर लग रहा था. डायसकी सिढीयां उतरकर और उनके ऑफीसकी सिढीयां चढते हूए पहलीबार उन्हे थकावट महसूस हो रही थी. उनके पिछे इन्स्पेक्टर राणा और सबसे पिछे असमंजसमें चल रहे ईशा और अस्तित्व थे. सबलोग जब कश्यपजींके कॅबिनमें घुस गए, तब वहां पहलेसेही कुछ लोगोंने कॉम्प्यूटरके इर्दगिर्द भिड की थी. कश्यपजीभी उस भिडमें शामिल हो गए और कॉम्प्यूटरके मॉनिटरकी तरफ आश्चर्यसे देखने लगे. ईशा और अस्तित्व ने जब उस भिडमें घुसकर उस मॉनिटरकी तरफ देखा. तब कहां उनको सारे मसलेका अवलोकन हुवा. उनके मनमें चल रही सारी शंकाए एक पलमें नष्ट होकर वह जगह अब चिंता और डरने ली थी. मॉनिटरपर एक ब्लींक हो रहा मेसेज दिख रहा था – आल दी सर्व्हर डाटा अँड कॉम्प्यूटर डाटा ह्याज बिन डिलीट. टू रीकवर एंटर दी पासवर्ड’ और मॉनिटरपर उलटी गिनती दिखा रही टाईम बॉम्बके घडी जैसी एक घडी दिख रही थी. टाइम - ०५:१९:२६

" ओ माय गॉड… " कश्यपजींके आश्चर्यासे खुले रहे मुंहसे निकल गया.

उनका पुरा बदन पसिना पसिना हो गया था और चेहरेपरभी पसिनेकी बुंदे दिख रही थी. सब डाटा अगर डिलीट हूवा तो होनेवाले नुकसानके कल्पनाभरसेही वे घबरा गए थे.

" सर यही नही तो कंपनीके सारे कांम्प्यूटरपर यह मेसेज आया है … " कंपनीका एक आदमी बोला. और फिर सब लोगोंको डॆव्हलपमेंट सेंटरकी तरफ ले जाते हूए बोला, " सर जरा इधरभी देखिए .."

उसके पिछे सारे लोग कुछ ना बोलते हूए जा रहे थे, मानो समशानमें जा रहे हो.

डेव्हलपमेंट सेंटर यानी एक बडा हॉल था और वहां छोटे छोटे क्यूबिकल्स बनाकर हर डेव्हलपरकी तरफ ध्यान दिया जा सके और सबको प्रायव्हसीभी मिले इसका खास ध्यान रखा गया था. वहां सब कॉम्प्यूटरके मॉनिटर्स शुरु थे और सब मॉनिटरपर एकही मेसेज था – आल दी सर्व्हर डाटा अँड कॉम्प्यूटर डाटा ह्याज बिन डिलीट. टू रीकवर एंटर दी पासवर्ड’

और यहांभी सब कॉम्प्यूटर्सपर उलटी गिनती चल रही थी.

टाइम - ०५:०३:०२

" सचमुछ गुनाहगार जाते हूए अपनी आखरी चाल चल गया है " अस्तित्व ने कहा.

" इट्स अ टीपीकल एक्झाम्पल ऑफ ईटेररीझम" ईशाने कहा.

" हमारे तो कंपनीका अस्तित्वही खतरेमें आया है " कश्यपजी अपने चेहरेसे पसिना पोंछते हूए बोले.

" आप चिंता मत किजिए … पासवर्ड गुनाहगारसे कैसे उगलना है यह हमारा काम है " इन्स्पेक्टरने कहा.

तभी दो पुलिस हथकडी पहने हूए सॅमको वहां लेकर आ गए. इन्स्पेक्टरने पुरा मसला समझमें आतेही उसे वापस यहां लानेके लिए अपने साथीयोंको पहलेही वायरलेसपर बताया था. सॅम धीमे मस्ती भरी चालसे मंद मंद मुस्कुराते हूए इन्स्पेक्टरकी तरफ चलने लगा.

" पासवर्ड क्या है ?…" इन्स्पेक्टरने उसे कडे स्वरमें पुछा.

इन्स्पेक्टरने ‘साम दाम दंड भेद’ से पहले ‘दंड’ का इस्तेमाल करनेकी ठान ली थी ऐसा दिख रहा था.

" जल्दी क्या है … पहले मेरी हथकडीतो खोलो … अभी और ५ घंटे बाकी है " सॅम हसते हूए शांत स्वरमें बोला.

इन्स्पेक्टर गुस्सेसे उसे मारनेके लिए उसकी तरफ बढे वैसे सॅम चेहरेपर कुछभी डर ना दिखाते हूए वैसेही खडा रहते हूए, उनकी आखोंमें आखे डालकर बोला, ‘ अं हं… इस्न्पेक्टर यह गल्ती कभी ना करना … ऐसी गलती करोगे तो मै पासवर्ड तो दुंगा लेकिन वह पासवर्ड देनेके बाद … तुम्हारेपास जो ५ घंटे बाकि है वहभी नही रहेंगे….. पुरा डाटा वह पासवर्ड देनेके बाद तुरंत नष्ट हो जाएगा …"

इन्स्पेक्टरने उसपर उठाया हुवा हाथ पिछे लिया. उन्हे अहसास हो गया था की उसके बोलनेमें तथ्य था.

" खोलो मेरी हथकडी " सॅमने फिरसे कहा.

इन्स्पेक्टरने उसे लेकर आए पुलिसको इशारा किया. उन्हे इशारा मिलतेही उन्होने चूपचाप उसकी हथकडी खोली. सॅमने अपनी खुली हूई कलाइयां एक के बाद एक दुसरे हाथमें लेकर घुमाई और वह अपने दोनो हाथ पिछे ले जाते हूए जम्हाई भरते हूए, उसे मिली हूई रिहाईका आनंद व्यक्त करते हूए बोला,

" हां अब देखो… कैसे खुला खुला लग रहा है "

" पासवर्ड क्या है ?" फिरसे इन्स्पेक्टरका कडा स्वर गुंजा.

इन्स्पेक्टर तुम्हे लगता है, की मै इतने आसानीसे और इतने जल्दी तुम्हे पासवर्ड बताऊंगा ?" सॅम इन्स्पेक्टरकी आंखोसे आंखे मिलाते हूए बोला.

" फिर तुम्हे और क्या चाहिए ?" इन्स्पेक्टरने अपना स्वर अबभी कडा रखते हूए पुछा.

" बस कुछ नही … सिर्फ मेरे पुरे रिहाईका इंतजाम .. " सॅमने कहा.

" मतलब ?" इतनी देर से चुप था अस्तित्व पहली बार बोला.

" अरे हां … अच्छा हुवा तु बोला … तुझे मेरे साथ आना पडेगा … मुझे यहांसे दूर … जहां ये लोग फिरसे पहूंच नही पाए ऐसी जगह मुझे पहुचानेकी जिम्मेदारी अब तुम्हारी … और फिर वहांसे मै इन्हे मोबाईलसे वह पासवर्ड बताऊंगा … " सॅमने कहा.

" हमें क्या मुरख समझ रखा है ?" इन्स्पेक्टर फिरसे गुर्राया.

" इन्स्पेक्टर यह वक्त अब कौन मुरख है या बननेवाला है यह तय करनेका नही है … संक्षिप्तमें कहा जाए तो … यू डोन्ट हॅव चॉईस… तुम्हे मेरे कहे अनुसार करनेके अलावा कोई चारा नही है " सॅमने कहा.

इन्स्पेक्टरने एक बार अस्तित्व की तरफ तो दुसरी बार सॅमकी तरफ देखा.

" ठीक है " अस्तित्व ने दृढतासे कहा.

इतनी बडी कंपनीका अस्तित्व और भविष्य खतरेमें आया था, इसलिए इन्स्पेक्टरको सॅमका सबकुछ सुननेके अलावा कोई रास्ता नही था. और उससे कितना नुकसान हो सकता है यह कश्यपजींके पसिनेसे लथपथ चेहरेपर साफ दिख रहा था. वैसे देखा जाए तो कश्यपजी बहुत हिम्मतवाले या यू कहा जाए की मोटी चमडीवाले आदमी थे. और उनके चेहरेपर और पुरे बदनमें पसिना आए मतलब कंपनीका अस्तित्व बुरी तरफ दाव पर लगा था यह स्पष्ट था.

सॅमने बताए अनुसार अस्तित्व भी उसके साथ उसे उस जगहसे दूर छोडनेके लिए तैयार हुवा था. इसलिए उसके साथ कौन जाएगा यह एक बडी गुथ्थी सुलझ गई थी. क्योंकी उसके साथ अकेला जाना खतरेसे खाली नही था, यहांतककी खुदकी जान जानेकाभी खतरा था और वह किसे अपनेसाथ कोई हथीयार ले जाने देगा इतना मुर्ख नही था. लेकिन अस्तित्व को उसके साथ अकेले भेजनेके लिए ईशाका दिल नही मान रहा था. वह वैसे कुछ बोली नही लेकिन उसके चेहरेसे सबकुछ झलक रहा था. एक तरफ कश्यपजींकी कंपनी उसकी वजहसेही खतरेमें आ गई थी और उसनेही अस्तित्व को भेजेनेके लिए इन्कार करना उसे ठीक नही लग रहा था. अतुलको जाल डालकर फांसनेके काममें कश्यपजींका बहुमोल योगदान था. और उन्होने उस बातके खतरेका अहसास होते हूए भी उसे पुरा सहयोग दिया था. और अब उनकी कंपनी खतरेमें आनेके बाद मुंह मोड लेना उसे जच नही रहा था.

अस्तित्व नें उसकी दुविधा जानते हूए उसे अपनी बाहोमें लेते हूए थपथपाकर कहा.

" डोन्ट वरी हनी… आय विल बी फाईन"

ईशा कुछभी बोली नही, लेकिन आखीर अपने दिलपर पत्थर रखकर वह उसे जाने देनेके लिए तैयार हो गई.

एक तरहसे इन्स्पेक्टर राणानेही उसे धिरज बंधाकर तैयार किया था.
 
३९

कश्यपजी, ईशा, अस्तित्व और इन्स्पेक्टर राणा स्टेजसे उतरकर वहांसे निकल जानेके बाद हॉलमें इकठ्ठा हूए लोगोंको शांतीसे बाहर निकालनेका काम ऍन्करने कुछ पुलिसकी मदत लेते हूए खुब निभाया था. अब कंपनीके कंपाऊंडके अंदर पुलिस, कंपनीके लोग, अस्तित्व , ईशा और वह गुनाहगार के अतिरिक्त कोई नही था. कुछ लोगोंको इस पुरे मसलेकी खबर शायद लगी थी, क्योकी वे पुलिसकी डरकी वजहसे कंपाऊंडके बाहर जाकर इधर उधर छिपते हूए उधरही देख रहे थे. और वेभी लोग बहुत कम थे. इसलिए अब गुनाहगारको संभालनेमें या उसकी मांगे सुन लेनेमें इन्स्पेक्टर राणाको जादा तकलिफ नही हो रही थी. अगर लोग अबभी कंपाऊंडके अंदर या हॉलमें होते तो शायद इस गुनाहगारको संभालनेसे उन लोगोंको संभालना जादा तकलिफदेह होता था.

आखिर सॅमको उसके कहे अनुसार कही बहुत दुर ले जाकर छोडनेके लिए पुलिस राजी हो गई. सब लोग कंपनीके बिल्डींगके बाहर खुले मैदानमे इकठ्ठा हुए थे. मैदानमें पुलिसकी और बाकी बहुतसारी गाडीयां खडी थी. सॅमने वहां खडी पाच छे गाडीयोंके पास जाकर गौरसे देखा और उनमेंसे एक गाडीके छतपर थपथपाते हूए पुछा,

" यह गाडी किसकी है ?".

वह कंपनीके एक ऑफिसरकी गाडी थी. वह ऑफिसर डरते हूएही सामने आते हूए बोला, " मेरी है "

" चाबी दो " सॅमने फरमान छोडा.

कश्यपजींने उस ऑफीसरकी तरफ देखते हूए आंखोसेही उसे वैसा करनेके लिए कहा. उस ऑफीसरने चुपचाप अपने पॅन्टकी जेबसे चाबी निकालकर सॅमके हवाले कर दी.

" हम इस गाडीसे जाएंगे " सॅमने एलान किया.

अस्तित्व ने एक कडा कटाक्ष सॅमकी तरफ डालते हूए कहा, " पहले तुम्हारा मोबाईल इधर दो "

सॅमने कुछ क्षण सोचा और अपना मोबाईल निकालकर अस्तित्व के पास देते हूए बोला, " गुड मुव्ह"

अस्तित्व ने वह मोबाईल लेकर इन्स्पेक्टरके पास दिया.

" अब तुम्हारा मोबाईल इधर लाओ " सॅमने कहा.

अस्तित्व ने अपना मोबाईल निकालकर सॅमके पास दिया. सॅमने गाडीकी डीक्की खोली और वह मोबाईल डिक्कीमें डाल दिया. लेकिन उसे क्या लगा क्या मालूम, उसने वह मोबाईल फिरसे डीक्कीसे बाहर निकाला और उसे ऑफ कर फिरसे डिक्कीमें डालते हूए डिक्की बंद की.

गुड मुव्ह" अब अस्तित्व की बारी थी.

सॅम उसकी तरफ देखकर मक्कारकी तरह मुस्कुराते हूए बोला, " हां अब सब ठीक है "

" हू विल ड्राईव्ह द व्हेईकल?" अस्तित्व ने गाडीके पास जाते हूए पुछा.

" ऑफ कोर्स मी" सॅमने कहा और गाडीके ड्राईव्हींग सिटकी तरफ जाने लगा.

लेकिन अचानक सॅम बिचमेंही रुकते हूए बोला , "वेट’

अस्तित्व भी रुक गया. सॅम मुस्कुराते हूए अस्तित्व के पास गया और उसकी उपरसे निचेतक पुरी तलाशी लेने लगा. शायद वह उसके पास कोई हथीयार है क्या यह देख रहा था.

" हां अब ठीक है " सॅम ड्रायव्हींग सिटकी तरफ जाने लगा वैसे अस्तित्व ने कहा,

" वेट… दॅट अप्लाईज टू यू टू"

अस्तित्व नेभी सॅमके पास जाकर उसकी पुरी तलाशी ली.

" हां अब ठीक है " अस्तित्व ने कहा और गाडीकी तरफ जाने लगा वैसे सॅम इन्स्पेक्टरकी तरफ देखते हूए बोला,

" नही अभीभी सब ठीक नही है … "

इन्सपेक्टर कुछ ना बोलते हूए सॅमकी तरफ देखने लगा.

" इन्स्पेक्टर अगर मुझे किसीभी क्षण खयालमें आगया की हमारा पिछा हो रहा है … या हमारी जानकारी कही भेजी जा रही है … तो ध्यानमें रखो … मै पासवर्ड तो दुंगा … लेकिन वह गलत पासवर्ड होगा … जो दिए बराबर तुम्हारे कंपनीका सारा डाटा तुरंत नष्ट हो जाएगा … समझे ?" सॅमने कडे स्वरमें ताकिद दी.

" डोन्ट वरी यू विल नॉटबी … फालोड… प्रोव्हायडेड यू गिव्ह अस द करेक्ट पासवर्ड…" इन्स्पेक्टरने कहा.

" दट्स लाईक अ गुड बॉय" सॅम गाडीके ड्रायव्हीग सिटपर बैठते हूए बोला.

सॅमने गाडी शुरु करके अस्तित्व की तरफ कडी नजरसे देखा. अस्तित्व उसकी बगलवाले सिटपर चुपचाप आकर बैठ गया और ईशाकी तरफ देखते हूए उसने गाडीका दरवाजा खिंच लिया.

सॅमने गाडी रेस की और कंपनीके कंपाऊंडके बाहर ले जाकर तेजीसे रास्तेपर दौडाई.

सॅम अब अस्तित्व के एकदम सामने खडा होकर उसकी आखोंमें आखे डालकर देखते हूए बोला,

" तुम्हे पासवर्डही चाहिए ना ?"

" हां … और बहभी डाटा डिलीट होनेके पहले " अस्तित्व फिरसे चिढकर ताना मारते हूए बोला.

" अरे हां … वह डाटा डिलीट होनेके बाद पासवर्डकी क्या जरुरत ?" सॅम अपने आपसेही जोरसे हंस दिया.

और एकदम अपनी हंसी रोककर बोला, " लेकिन पहले तुम्हारे पासका हथीयार मेरे हवाले कर दो "

अस्तित्व ने उसकी तरफ चौंककर देखते हूए पुछा, " हथीयार ?… मेरे पास कोई हथीयार नही .. तुमनेही तो निकलते वक्त मेरी तलाशी ली थी. "

" मि. अस्तित्व … मुझे क्या इतना बेवकुफ समझते हो ?… " सॅम मोबाईल लगाते हूए बोला. अस्तित्व कुछ नही बोला.

सॅमका मोबाईल लगा था और उधरसे इन्स्पेक्टर मोबाईलपर थे. " सॅम पासवर्ड क्या है ?" उन्होने फोन लगतेही पुछा.

" इन्स्पेक्टर थोडा धीरज रखो … पहले इधरका एक काम निपट लूं और फिर तुम्हे पासवर्ड बताता हूं " सॅम फोनपर बोला और उसने चलता हुवा मोबाईलही गाडीके बोनेटपर रख दिया.

" मैने सुना है की आजकल तुम्हारी पी एच डी चल रही है " सॅमने अस्तित्व से पुछा.

फिरभी अस्तित्व कुछ नही बोला.

" मुझे एक बात नही समझमें आती, इतनी अमीर लडकीको फांसनेके बाद तुम्हे पिएचडीकी क्या जरुरत है ?" सॅमने आगे पुछा.

अस्तित्व कुछभी बोलनेके लिए तैयार नही था, सच कहे तो वह बोलनेके मन:स्थितीमें नही था.

" तुम्हारे पी एच डी का सब्जेक्ट क्या है ?" सॅमने एकदम गंभिर होते हूए पुछा.

अस्तित्व उसके इस असंबंध सवालको कुछ जवाब देना नही चाहता था.

" तुम्हारे पी एच डी का सब्जेक्ट क्या है ?" सॅमने अब कडे स्वरमें पुछा.

अस्तित्व ने पहले उसकी आखोंमे देखा. वह इस सवालके बारेमें सिरीयस दिख रहा था.

" अनकन्व्हेन्शनल वेपन्स" अस्तित्व ने कंधे उचकाकर जवाब दिया.

" अनकन्व्हेन्शनल वेपन्स … हूं … तुम्हारे जुते बताओ.. निचेसे " सॅमने मांग की.

अस्तित्व को उसके सवालका उद्देश अब पता चल चुका था. उसे अबभी उसके पास कोई हथीयार होनेकी आशंका थी. अस्तित्व ने अपना दाया जुता वैसेही पैरमें रखते हूए उलटा कर बताया. सॅमने गौरसे देखा. वहां कुछ होनेके निशान तो नही दिख रहे थे.

" अब बाया बताओ " सॅमने फिरसे आदेश दिया.

अस्तित्व ने थोडी हिचकिचाहट जताई तो वह चिल्लाया, " कम ऑन क्वीक".

अस्तित्व ने बाया जुताभी उलटा कर बताया. सॅमने गौरसे देखा. वहांभी कुछ नही था. लेकिन अब सॅम सोचमें पड गया. उसे अस्तित्व के पास कुछ हथीयार होनेका पुरा विश्वास था.

" रुको … हात उपर करो …" सॅम उसके पास जाते हूए बोला.

अस्तित्व ने दोनो हाथ उपर किए. और सॅम उसके जेबसे एक एक सामान निकालकर बोनेटपर रखने लगा. पहले पॅन्टके जेबसे और फिर शर्टके जेबसे सब सामान निकालकर सॅमने गाडीके बोनेटपर रख दिया.

उस सामानमें कुछ लोहेके छोटे छोटे टूकडे थे. सॅम उन टूकडोंकी तरफ गौरसे देखते हूए बोला, " यह क्या है ?"

" कुछ नही .. मेरे रिसर्चका सामान " अस्तित्व ने कहा.

" अच्छा!" सॅम अविश्वासके साथ बोला. .

सॅम अब वे सारे टूकडे एक एक करते हूए उलट पुलटकर निहारने लगा. उन सारे टूकडोंमे उसे एक टूकडा थोडा अलग लगा. वह उसने उठाया और वह उसे और गौरसे निहारकर देखने लगा. उस टूकडेके एक तरफ लाल बटन जैसा कुछ तो था. उसकी तरफ अस्तित्व का ध्यान आकर्षीत करते हूए सॅम बोला,

" यह क्या है ऐसा ?"

अस्तित्व कुछ नही बोला. सॅमने वह टूकडा उलट पुलटकर देखते हूए वह लाल बटन दबाया. और क्या आश्चर्य गाडीके बोनेटपर रखे सब टूकडोंमे अब हरकत दिखने लगी थी. और वे किसी चुंबककी तरह एक दुसरेसे चिपकने लगे. जब सारे टूकडे चुंबककी तरह एक दुसरेसे चिपक गए. उसमेंसे एक बंदूककी तरह वस्तू तैयार हो गई.

" अच्छा तो यह ऐसा है ?…" सॅम आश्चर्यसे बोला, “‘ मेरा अंदेशा कभी गलत नही होता … मुझे पता था की तुम्हारे पास कोईना कोई हथीयारतो होनाही चाहिए "

सॅमने वह बंदूक उठाकर उलट पुलटकर देखी.

" स्मार्ट व्हेरी स्मार्ट… अस्तित्व यू आर जिनियस … बट ओन्ली इंटॆलेक्चूअली … नॉट प्रोफेशन्ली" सॅम अजीब तरहके मुस्कुराहटके साथ बोला.

सॅम अबभी वह छोटे छोटे लोहेके टूकडोंसे बनी बंदूक हाथमें लेकर उलट पुलटकर देखते हूए अस्तित्व के इर्द गिर्द चल रहा था. उसने अस्तित्व की तरफ अर्थपुर्ण ढंगसे मुस्कुराते हूए एक कटाक्ष टाकला. उसका हंसना ‘ अब कैसे आया उट पहाड के निचे’ इस तरह का था. अस्तित्व चुपचाप अपने जगह खडा था. उसके इर्द गिर्द चलते चलते उसने अपने कलाईपर बंधे घडीमें देखा ,

" अबभी एक मिनट बाकी है "
 
सॅम अब बोनेटके पास गया और उसने वहा रखा हुवा शुरु मोबाईल उठाकर अपने कानको लगाया. उधरसे अबभी, " हॅलो… सॅम… हॅलो… पासवर्ड क्या है … जल्दी बोलो … टाईम खत्म होनेको आया है …" ऐसा सुनाई दे रहा था.

" इन्स्पेक्टर … इतनीभी जल्दी क्या है … बताता हूं ना पासवर्ड " सॅमने कहा और उसने अपने हाथमें पकडी बंदूक अस्तित्व पर तानी.

इधर ईशा, इन्स्पेक्टर, कश्यपजी इन्स्पेक्टरके हाथमें पकडे मोबाईलपर चल रहा संभाषण कान लगाकर सुन रहे थे, और साथही सामने मॉनिटरकी तरफ देख रहे थे. कमसे कम मोबाईलपर आ रहे सॅमके बोलनेके आवाजसे तो लग रहा था की अस्तित्व मुष्कीलमें फंसा हुवा है. और सामने मॉनीटरपर -‘ आल दी सर्व्हर डाटा अँड कॉम्प्यूटर डाटा ह्याज बिन डिलीट. टू रीकवर एंटर दी पासवर्ड’ और मॉनिटरपर उलटी गिनती चल रहा टाईम बॉम्ब जैसी घडी बता रही थी – टाइम- ००:०२:१०. और उपरसे सॅम अबभी पासवर्ड बतानेके लिए तैयार नही था. हर एकको अलग अलग चिंता सता रही थी. ईशाको अस्तित्व की. कश्यपजींको कंपनीकी और इन्स्पेक्टरको अस्तित्व और कंपनीकी. आखिर मॉनिटरपर चल रही घडी बता रही थी – टाइम- ००:००:५०.

" टाईम खत्म होनेको आया है … जल्दी पासवर्ड बताओ" इन्स्पेक्टर लगभग चिल्लाए.

" बताता हूम इन्स्पेक्टर… धिरज रखो "

टाइम- ००:००:४०.

" अब क्या डाटा डिलीट होनेके बाद बताओगे ? " इन्स्पेक्टर चिढकर बोला.

कश्यपजींने उनके पिठपर हाथ रखकर उन्हे शांत रहनेका इशारा किया. नही तो सॅम अगर चिढ गया तो वह पासवर्ड बतानेके लिए इन्कार कर सकता है.

टाइम- ००:००:३०.

" प्लीज … जल्द से जल्द बता दो " इन्स्पेक्टर मानो अब गिडगिडाने लगे थे.

" उसे पहले अस्तित्व को छोड देनेके लिए बोलीए " ईशा अपने आपको ना रोक पाकर चिल्लाई.

" और तुम्हे पहले अस्तित्व को छोडना पडेगा " इन्स्पेक्टर.

टाइम- ००:००:२०.

" पहले उसे छोडना है या पासवर्ड बताना है ? " सॅमभी मौकेका फायदा लेते हूए बोला.

" पहले अस्तित्व को छोड दो " ईशाने कहा.

उधरसे सॅमके ठहाकेकी आवाज आ गई.

टाइम- ००:००:१०.

" नही इन्स्पेक्टर पहले मै पासवर्ड बतानेवाला हूं …क्यो ठीक है ना ?"

" बोलो जल्दी …" इन्स्पेक्टर

" हं यह लो – इलव्ह… ऑल स्मॉल… नो स्पेस इन बिट्विन.."

टाइम- ००:००:०३

सामने कॉम्प्यूटरपर बैठे एक कर्मचारीने तुरंत पासवर्ड टाईप किया.

टाइम- ००:००:०१

और एंटर दबाया.

मॉनिटरवर चल रहा काऊंटर रुक गया और मेसेज आ गया, " पासवर्ड करेक्ट… रिकवरी स्टार्ट"

सब लोगोंने अपने इर्द गिर्द देखा. सभी कॉम्प्यूटरके मॉनिटरपर वही मेसेज आया था – " पासवर्ड करेक्ट… रिकवरी स्टार्ट"

हॉलमें उपस्थित सब लोग, सिर्फ एक ईशाको छोडकर इतने खुश हो गए की वे तालियां बजाने लगे. मानो कोई यान आसमानमें किसी ग्रह पर सही सलामत उतरनेमें कामयाब हुवा हो. लेकिन अचानक इन्स्पेक्टरके हाथमें पकडे हूए शुरु मोबाईलसे आए बंदूकके आवाजने, सब लोगोंकी तालियां एकदम बंद हो गई और हॉलमें श्मशानवत सन्नाटा छा गया. ईशा तो इतनी देरसे उस पर पड रहा तनाव सह नही पाकर और बंदूकका आवाज सुनकर अस्तित्व का क्या हो गया होगा इसके कल्पनामात्रसे बेहोश होकर निचे गिर गई.

एक तरफ सॅम मोबाईलपर बोल रहा था और दुसरे हाथमें उसने अस्तित्व पर बंदूक तानी हूई थी. आखिर उसने लगभग ५ सेकंद बचे होगे तब इन्स्पेक्टरको पासवर्ड बताया था – " हं यह लो पासवर्ड – इलव्ह… ऑल स्मॉल… नो स्पेस इन बिट्विन.."

सॅमने अब शुरु मोबाईल फिरसे गाडीके बोनेटपर रख दिया. और वह उस अस्तित्व की तरफ ताने हूए बंदूकका ट्रीगर दबाने लगा.

" रुको … तुम बहुत बडी भूल कर रहे हो …" अस्तित्व किसी तरह बोला.

" भूल … इसके बाद तुम्हारी वजहसे … सिर्फ तुम्हारे हठकी वजहसे … मुझे जिस अंडरवर्डमें जाना पड रहा है … उसके लिए मुझे एक योग्यता हासील करनी पडेगी … पुछो कौनसी ? … कम से कम एक खुन… और वह योग्यता अब मै हासिल करनेवाला हूं " सॅमने कहा और उसने झटसे बंदूकका ट्रीगर दबाया.

एक बडीसी आवाज हो गई और बगलमें खडे गाडीके खिडकीके कांचपर खुनकी बडी बडी छिंटे उड गई थी.

मोबाईलसे बंदूककी आवाज सुननेके बाद ईशा चक्कर आकर निचे गिर गई. कंपनीके हॉलका खुशीका माहौल एकदमसे श्मशानवत सन्नाटेमें बदल गया. इन्स्पेक्टरने तुरंत एक दो लोगोंकी सहायता लेकर ईशाको उठाया. किसीने झटसे फोन कर ऍम्बूलन्स बुलाई.
 
ईशा बेडपर पडी हुई थी. उसके पास डॉक्टर खडे थे और उसका बीपी चेक कर रहे थे. इन्स्पेक्टर, कश्यपजी, निकिता और, और दो चार लोग उसके आसपास खडे थे.

" डॉक्टर कैसी है उसकी तबियत ?" निकिताने पुछा.

" इनके उपर अचानक बहुत बडा आघात हुवा है जो की वे सह नही पाई … ऐसे वक्त थोडा वक्त बितने देना बहुत जरुरी होता है … फिलहाल मैने इनको निंदका इन्जेक्शन दिया है … तबतक आप लोग बाहर बैठीएगा … लेकिन उन्हे होश आए बराबर उनके पास कोई होना बहुत जरुरी है … इनके करीबी कौन है ?" डॉक्टरने पुछा.

" मै " निकिताने जवाब दिया.

" आप कौन … इनकी बहन ?"

" नही मै इनकी दोस्त हूं " निकिताने कहा.

" दुसरा कोई नही है? … जैसे मां बाप भाई बहन."

निकिताने उलझनमें इधर उधर देखा तो इन्स्पेक्टरने कहा, " डॉक्टर उनका नजदिकी ऐसा कोई नही है "

" अच्छा ठीक है … ऐसा करो आप इनके पास रुको " डॉक्टरने निकितासे कहा.

वैसेभी निकिताका वहांसे हिलनेके लिए मन नही कर रहा था. बाकी सब लोग कमरेसे बाहर चले गए और निकिता वही उसके सिरहाने बैठी रही. वह भलेही उसकी बॉस रही हो लेकिन उसने उसे कभी बॉसकी तरह ट्रीट नही किया था. और असलमें ईशाने उसे एक दोस्तके हैसियतसेही वह पीए का जॉब जॉइन करनेके लिए कहा था. निकिता उसके सिरहाने बैठकर उसे होश आनेका इंतजार करने लगी.

ईशाको इंजक्शन देकर लगभग दोन-तिन घंटे हो गए होंगे. उसके रुमके बाहर अबभी इन्स्पेक्टर, कश्यपजी और बाकी काफी लोग उसे होश आनेकी राह देख रहे थे. होशमें आनेके बाद उसकी दिमागी हालत कैसी रहती है इसपर काफी चिजे निर्भर करती थी. असलमें उसे मां बाप ऐसे एकदम करीबी कोई ना होनेसे उसने अस्तित्व पर अपनी पुरी जिंदगी निछावर की थी. और उसका उसे ऐसे बिचमें छोडकर चला जाना उसके लिए बहुत बडा आघात था. तभी एक नर्स जल्दी जल्दी बाहर आ गई.

" इन्स्पेक्टर उन्हे होश आ गया है " नर्सने कहा और वह फिरसे अंदर चली गई.

सारे लोग अंदर जानेके लिए हरकतमें आ गए.

अंदर ईशा निकिताके कंधेपर सर रखकर जोर जोरसे रो रही थी. और निकिता उसके पिठपर थपथपाकर और सरपर हाथ फेरते हूए उसे जितना हो सके उतना धीरज बंधानेकी कोशीश कर रही थी. दरअसल पहले वह बुरी खबर सुननेके बाद उसे अपनी भावनाए व्यक्त करनेके लिए मौका नही मिला था क्योंकी वह अपनी भावनाओंको व्यक्त करनेके पहलेही बेहोश हो गई थी. कमरेंमे वह हृदयविदारक दृष्य देखकर इन्स्पेक्टर उसे धीरज बंधानेके लिए आगे बढने लगे, तब बगलमें खडे डॉक्टरने उन्हे इशारेसेही मना कर दिया. डॉक्टरकाभी सही था क्योंकी उसका सारा दर्द बाहर आना बहुत जरुरी था. सब लोग, भलेही उन्हे बहुत दुख हो रहा था फिरभी चुप्पी साधकर वह दृष्य देखते रहे.

तभी कमरेके बाहर, काफी दुरसे, शायद अस्पतालके प्रमुख द्वारसे आवाज आया, " ईशा…"

वह आवाज सुनकर ईशाही नही तो वहां उपस्थित सारे लोगोंको मानो कुछ आभास होगया है ऐसा लगा. ईशाका रोना रुक गया था. सारे लोग स्तब्धतासे खडे होकर दरवाजेकी तरफ देख रहे थे.

" ईशा " फिरसे आवाज आ गया.

इसबार काफी नजदिकसे आए जैसा. लगभग दरवाजेकी बाहरसे ही. अब ईशा उठकर खडी हो गई और दरवाजेकी तरफ जाने लगी. कमरेमें उपस्थित बाकी लोगभी दरवाजेकी तरफ जाने लगे. ईशा दरवाजे तक पहूंच गई होगी जब कमरेका दरवाजा खुला और दरवाजेमें अस्तित्व खडा था. उसके सारे कपडे और सारा शरीर खुनसे सना हुवा था. दोनों आवेशके साथ एक दुसरेकी तरफ दौडे और उन्होने एक दुसरेको बाहोंमें लिया.

४१

सॅमने इन्स्पेक्टरको पासवर्ड बतानेके बाद शुरु मोबाईल गाडीके बोनेटपर रखा. और वह उस अस्तित्व की तरफ ताने हूए बंदूकका ट्रीगर दबाने लगा.

" रुको … तुम बहुत बडी गलती कर रहे हो …" अस्तित्व किसी तरहसे बोला.

" भूल … इसके बाद तुम्हारी वजहसे … सिर्फ तुम्हारे हठकी वजहसे … मुझे जिस अंडरवर्डमें जाना पड रहा है … उसके लिए मुझे एक योग्यता हासील करनी पडेगी … पुछो कौनसी ? … कम से कम एक खुन मेरे नामपर होनेकी… और वह योग्यता अब मै हासिल करनेवाला हूं " सॅमने कहा और उसने झटसे बंदूकका ट्रीगर दबाया.

एक बडीसी आवाज हो गई और सॅमके हाथमें पकडे बंदूकका किसी बॉंम्बकी तरह विस्फोट हो गया.

अतुलके शरीरके टूकडे टूकडे होकर चारो ओर उड गए थे. अस्तित्व अपना बचाव करते हूए पिछेकी तरफ लपक पडा था. फिरभी खुनकी छिंटे सॅमके शरीरपर उड गई थी और उसका पुरा शरीर और कपडे खुनसे सन गए थे. पासमें खडे कारके शिशेभी सॅमके खुनसे सन गए थे.

थोडी देर बाद अस्तित्व उठ खडा हुवा. उसने निचे गिरे हुए सॅमके शवपर अपनी नजर डाली.

फिरभी मैने उसे बतानेकी कोशीश की की वह बंदूक ना होकर बॉम्ब है …

लेकिन वह मानाही नही … उसमें मेरा क्या दोष…

अस्तित्व मानो अपने आपको समझानेकी कोशीश कर रहा था.

आखिर क्या है … की पराई नार … और पराये हथीयारसे आदमीको बचना चाहिए…

अस्तित्व के जहनमें आकर गया.

४२

ईशा अपने ऑफीसमें अपने काममें व्यस्त थी. उसने हमेशाकी तरह आए बराबर कॉम्प्यूटर ऑन करके रखा था. तभी कॉम्प्यूटरपर चाटींगका बझर बजा. उसने मॉनिटरपर देखा. एक मेसेज था –

" मिस ईशा … ५० लाख रुपयोंका मेरे लिए इंतजाम करना वर्ना नतिजा तो तुम जानतीही हो …" ईशाने वह मेसेज पढा और उसके रोंगटे खडे हो गए.

तभी अस्तित्व और निकिता उसके कॅबिनमें आ गए.

" ईशा चलो आज हम पिक्चरको चलते है …मॉर्निंग शो"

" अस्तित्व … इधरतो देखो … ब्लॅकमेलरका फिरसे मेसेज आ गया है" ईशा उसका ध्यान मॉनिटरकी तरफ आकर्षीत करते हूए बोली.

अस्तित्व कॉम्प्यूटरके पास जाकर देखने लगा. लेकिन निकिता अपनी हंसी नही दबा सकी. वह जोरजोरसे हसने लगी.

" ए क्या हुवा ?" ईशा.

" अरे वह मेसेज अभी अभी अस्तित्व ने बगलके कॅबिनसे भेजा है " निकिता हंसते हूए बोली.

" लेकिन वह तो अभी अभी यहां आया है " ईशा.

" अरे नही … बगलके कॅबिनसे वह मेसेज भेजकर तुरंत हम इधर आ गए.

" यू नॉटी बॉय" ईशा अस्तित्व पर पेपरवेट उठाते हूए बोली.

और फिर पेपरवेट टेबलपर वापस रखते हूए वह उठ गई और उसके पास जाकर उसके छातीपर प्यारसे मारने लगी. अस्तित्व ने हल्केसे उसे अपने आगोशमें खिंच लिया.

************ समाप्त ************
 
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