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Adultery मस्तराम की कहानियाँ

चुदाई के शोले-2

हाई दोस्तों, चुदाई के शोले के पहले भाग में आपने देखा की कैसे इनाम की लालच में जय और वीरू गब्बर सिंह को पकड़ने और ठाकुर से उसकी गांड में डिल्डो डलवाने के लिए जाते हैं. साथ ही मैं गांडू बन के अपनी गांड गाँव वालो से मरवाते हैं ताकि गब्बर उन्हें ले दबोचे. राधा जो की ठाकुर की बहु हैं उसकी चुदाई भी जय और वीरू ने मिलके कर डाली हैं. अब आगे पढ़े.

राधा की परफेक्ट चुदाई कर दी

राधा के चूत को जय और वीरू ने इस कदर मारा था की उस से चला भी नहीं जा रहा था. रामलाल को जब पता चला की यह दो लौंडे राधा की चुदाई कर गए हैं तो वो आगबबूला हो गया. लेकिन जब राधा ने उसे यह कहा की काका तुम्हारे लंड में अब वो बात नहीं रही तो वो बेचारा शांत हो गया. राधा अब रोजाना इन दोनों को टिफिन देने के बहाने उनके रूम में जाती और थ्रीसम चुदाई का मजा ले के ही वापस आती थी. एक बार राधा को गर्भ भी रह गया, लेकिन यह दोनों पास के ही गाँव के डॉक्टर सुरमा भोपाली को ले आये और बच्चा गिरा दिया. वीरू ने एक रंडी जिसका नाम बसंती पटेल था उसे भी फांस लिया था. बसंती किसी हिरोइन से कम नहीं थी, वो टांगा चलाने की आड़ में दारु की स्मगलिंग किया करती थी. वीरू उसके वहाँ नियमित दारु लेने जाता और एक दिन मौका देख उसने बसंती को दबोच ही लिया. उधर ठाकुर परेशान था क्यूंकि यह दोनों ठाकुर का खाते थे और 2 महीने तक गाँव के जवान बूढों से गांड मराते थे. ठाकुर को किसी भी तरह अपने डिल्डो का उपयोग करना था. आखिर एक दिन आया जब गब्बर को जय और वीरू के बारे में पता चला. उसके दाहिने हाथ सांभा ने गब्बर को बताया की कालिया और उसके दो साथी दो गुड की गांड मार के आये हैं…….फिर क्या था, बुलाया गब्बर ने तीनो को.

कितने आदमी थे रे कालिया

गब्बर ने तीनो को बिच में खड़ा किया और वो अपनी पेंट उतार के उनकी चारो तरफ घुमने लगा.

गब्बर: कितने आदमी थे रे कालिया.?

कालिया: सरकार, दो.

गब्बर: और तुम.?

कालिया: तिन.

गब्बर: मादरचोद, फिर भी हमका भूल गए. तुम्हे ख़याल नहीं आया की गब्बर भी गांड का भूखा हैं. उसे भी लंड शांत करना हैं. तुमने क्या सोचा सरदार खुश होगा, शाबाशी देगा की तुम तीनो मिल के दो गांडू चोद के आये हो. बहुत ना-इंसाफी है यह हमारे साथ.

कालिया: माफ़ कर दो. सरदार हमने आप के बुरे वक्त में कितनी बार आप से गांड तक मरवाई हैं.

गब्बर: तो अब लौड़ा चुसो.

और सच में गब्बर ने अपने लौड़े को पकड़ के कालिया और बाकी के दो के मुहं में डाल दिया. उसने लंड चुसाते चुसाते ही कहाँ, “होली कब हैं, इस बार ठाकुर को उठाएंगे जब गाँव वाले होली खेल रहे होंगे.”

ठाकुर की फिर से गांड मार ली

होली के दिन बसंती और राधा को ले के जय और वीरू नदी के पीछे बने कोतर में चले गए थे. चुदाई के भूखे इन दोनों लौंडो ने ग्रुपसेक्स चुदाई का प्लान बनाया और राधा और बसंती की चूत और गांड की मस्त चुदाई कर दी. राधा की और बसंती की गांड भी दोनों ने बारी बारी मारी और लंड भी चुसाया. 2 घंटे बाद जब वो नदी में नहा के घर आये तो पता चला की गब्बर के डाकू ठाकुर को घर से उठा ले गए हैं. जय और वीरू हैरान हो गए की साला गब्बर ठाकुर का क्या करेगा.

इधर ठाकुर की पतलून उतार के उसकी गांड में दो डाकू सरसों का तेल मल रहे थे, उधर गब्बर लकड़ियों के ऊपर बकरे के मटन को अपने हाथो से नोंच के खा रहा था. तभी एक डाकू जो तेल लगा रहा था वो बोला: सरदार ठाकुर की गांड में बहुत बाल हैं.

गब्बर: तो भोसड़ी के कैंची से काट दे ना.

डाकू उठ के एक जंग लगी केंची लाया और उसने ठाकुर की गांड के बाल क़तर दिए. ठाकुर ने गब्बर को कहा, “एक बार मेरे हाथ खोल दे, फिर बताता हु तुझे.”

गब्बर: साले तू हमको बहुत सताता था. जिस गांडू को हम गाँव में लाते थे तू खुद ही उनकी गांड की चुदाई करता था. हम भी इंसान हैं, हमें भी चुदाई के अरमान और सपने होते हैं. आज वो सब तेरी गांड में लौड़ा दे के मिटेंगे.

गब्बर:

यह गांड हम को दे दे ठाकुर.

ठाकुर: नहींहीही हीही………………!!!

गब्बर: यह गांड हम को दे दे ठाकुर.

गब्बर ने सीधे ही ठाकुर की फैली हुई गांड में लंड दे दिया. गब्बर के लंड के अंदर जाते ही ठाकुर चिल्ला उठा. गांडू लोगो के सौखीन गब्बर ने 10 मिनिट तक ठाकुर की गांड की मस्त चुदाई की. उसके बाद उसने ठाकुर की गांड में ही अपना वीर्य छोड़ दिया. गब्बर फिर से मटन के पास गया और आवाज लगायी, “चलो मादरचोदो, अब तुम्हे क्या टेलीग्राम भेजूं, गांड गरम हैं डाल दो अपना अपना लौड़ा.”

ठाकुर की गांड को गब्बर के बाद सांभा, रणजीत, गोला, प्रभात और कालिया जैसे 7 डाकू ने मारा. ठाकुर की आँखे लाल हुई और वो जय और वीरू को मनोमन गालियाँ देने लगा. दो दिन तक यह लोग ठाकुर की गांड मारते रहे और फिर उसे बाँध के गाँव के चौराहे पे छोड़ आये. ठाकुर ज्योत्यों से घर पहुंचा और रामलाल से अपनी गांड में मलम लगवाया. उसने तभी जय और वीरू को भी बुलवाया.

ठाकुर: मादरचोदो, मेरा खाते हो और गाँव के लोड़ो से चुदाई करवाते हो. भोसड़ीवालो काम कब कर रहे हो मेरा.

जय: ठाकुर साहब, हम लोग कल बंजारों की एक टोली गाँव के बाहर आ रही हैं उसके सरदार लीला से मिलेंगे. यह लीला गब्बर को गांड और चूत सप्लाय करता हैं. हम उसे 10000 का लालच देंगे और अगली बार की गांड की डिलीवरी में दो गांड हमारी होंगी.

ठाकुर: लेकिन तुम लोगो को यह पता हैं की लीला गब्बर के पास जाने वाली हरेक गांड को चेक करता हैं और पहली चुदाई वो करता हैं.

वीरू: ठाकुर, तुम्हारे बदले के लिए 100 लंड तो ऐसे भी हम ले चुके हैं, तो एक और ले लेंगे.

शाम को ही जय और वीरू लीला के पास पहुंचे और उसको विनंती करने लगे की हमारी गांड भी गब्बर को दे दो. लीला ने कहाँ “अंदर जाओ और पतलून उतारो.”

दो मिनिट में लीला अपना 8 इंच का लंड ले के आया और उसने जय और वीरू की गांड की चुदाई कर के चेक किया. उसने दोनों गांड पास कर दी और शाम को ही ऊंट के उपर दोनों को बिठा के गब्बर के पास भेज दिया. दोनों गब्बर की गुफा में आ गए और गब्बर के हाथो से अपनी गांड को 10 दिन तक खूब मरवाते रहे. गब्बर जब उनकी गांड मार मार के थक गया तो उसने उन्हें अपने साथियों को सौंप दिया. यहाँ जय और वीरू का प्लान चालू हुआ. उन्होंने डाकुओ को एक जड़ीबूटी के बारे में पूछा जिसे पिने से लंड 20 मिनिट खड़ा रहता हैं. किसी भी डाकू को इसके बारे में पता नहीं था.

जय: अरे चुतियो, तुम लोगो को कुछ पता ही नहीं हैं, यह देखो मैं दिखाता हूँ.

उसने अपनी जेब से एक छोटी सी पुडिया निकाली जिस में वो लोग वायेग्रा का पावडर ले गए थे. उसने पावडर फांक के दस मिनिट बाद जय की गांड मारनी चालू की. 1 घंटे के बाद मुश्किल से उसका वीर्य निकला. सभी डाकू अब यह जड़ीबूटी मांगने लगे. जय ने उन्हें कहा की शाम के खाने के बाद उन्हें देगा. शाम के खाने के बाद जय और वीरू ने एक पतीले में पानी लिया और दूसरी पुडिया जिस में वायेग्रा के बदले नींद की गोली का पावडर था वो मिला दिया. गब्बर को छोड़ सभी डाकुओ ने यह पानी पिया और आधे घंटे में तो सभी घोड़े बेच के सो गए.

ठाकुर का बदला पूरा हुआ

सभी डाकुओ के सोते ही जय और वीरू ने उनकी बन्दूको से गोलिया निकाल ली और दो भरी हुई बंदूक ले के गब्बर के कमरे में गए. गब्बर वहाँ बैठा शिलाजीत खा रहा था. उन्होंने गब्बर को बंदूक के इशारे पे उठाया और तीनो घोड़ो के उपर गाँव में आये. जय ने पुलिस को ले के गब्बर का अड्डा बता दिया. सभी डाकुओ को सोता पकड़ लिया गया. वीरू ने गब्बर को ठाकुर के हाथो सौंप दिया. ठाकुर ने रामलाल से कह के गब्बर को उल्टा लिटा के उसके हाथ बंधवा दिए. जब ठाकुर गब्बर की तरफ बढ़ने लगा तो गब्बर जोर जोर से हंसने लगा.

गब्बर: हा हा हा हा.

ठाकुर: काहे हंस रहा हैं बे मादरचोद.

गब्बर: तू हम से बदला लेगा बे. तेरे लंड के कीटाणु का तो हम पहले ही रस्ता कर दिया हूँ. अब तेरा लंड बांसुरी के जैसा ही जिस से सिर्फ मूत निकलेगा.

अब ठाकुर जोर जोर से हंस ने लगा और उसने अपनी जेब में हाथ डाल के काला और 12 इंच का डिल्डो निकाला. गब्बर डिल्डो को हैरानी से देखने लगा.

ठाकुर: तेरी चुदाई के लिए बहुत बेकरार हु मैं, मैं नहीं ले सकता बदला लेकिन इस बारह इंच के रबर के लंड को तेरी गांड में पेल के आज हम तुम्हे बताएँगे की गांड की चुदाई में कितना दर्द होता हैं. गब्बर यह गांड हम को दे दे.

गब्बर: नहींहीहीहिहिहिही….!!!

ठाकुर: यह गांड हमको दे दे गब्बर…!

गब्बर अभी और एक चीख लगाये उसके पहले तो ठाकुर ने उसकी गांड में डिल्डो ठूंस दिया. गब्बर की गांड को उसने चार दीन तक ऐसे डिल्डो से चोदा और फिर रामलाल को बोल के गाँव के ही 20 जवान लडको को बोल के गब्बर की गांड की चुदाई करने को कहा. गब्बर यह जिल्लत बर्दास्त नहीं कर सका और उसी रात वो गाँव से भाग गया. ठाकुर ने वादे के मुताबिक़ जय और वीरू को पैसे और जमीन दे दी. जय और वीरू ने गांव में एक डांस बार चालू कर दिया और ख़ुशी से रहने लगे. राधा की और बसंती की चुदाई वो अभी भी करते हैं उन्हें अब डांस बार में बुला के……………….!!!

मित्रो आप को हमारी यह अदभुत चुदाई की कहानी कैसी लगी. लेखक ने आपने मनोरंजन के लिए ख़ास लिखा हैं. अगर आप इस स्टोरी को आप के फेसबुक या ट्विटर पेज के उपर शेर करेंगे तो बहुत महेरबानी होंगी, हम चाहते हैं की यह अदभुत कहानी ज्यादा से ज्यादा फैले और सभी लोग इस जरा हट के चुदाई स्टोरी का मजा ले. आप हमें कमेन्ट में यह लिख भेजें की आप को यह कहानी कैसी लगी,
 
बदनाम रिश्ते-1

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम टीना है और यह कहानी मेरे बारे में है की कैसे मेरे भाई और उस के दोस्तों ने मेरे बॉय फ्रेंड के बजाय उन लोगो ने जबरदस्ती मेरी सील तोड़ी. चुदने बैठी थे अपने बॉय फ्रेंड से और चोद दिया भाई और उस के दोस्तों ने

यह वेब साईट मेरे भाई ने मुझे बताई थी यहाँ की कहानिया पढ़ के ऐसा लगा की मुझे भी अपनी कहानी लिखनी चाहिए. मेरे भाई ने ही मुझे निम्फो मेनिअक बना दिया है आप तो जानते ही होंगे की निम्फ़ोमेनिआक का मतलब क्या होता है मतलब की चालू भाषा में मुझे उसने चुदेल बना दिया है अब तो चुदे बिना ऐसा लगता ही नहीं की जिन्दगी है बस चुदवाते रहो हर तरीके से लंड लेते रहो बस चले तो २४ घंटे चूत का बजा बजवाते रहो.

एक दिन की बात है की मम्मी पापा दो दिनों के लिए बाहर जाने वाले थे तो उन्होंने मेरे भाई से कहा की घर का ख्याल रखना कही जाना नहीं तुम और टीना को ही रहना है दो दिन अकेले तो उस पर समीर (भाई ) ने कहा की पापा आज मेरा क्रिकेट मेच है मैं नहीं रुकुंगा शाम को वापस आ जाऊंगा तो पापा ने कहा की बेटा टीना ऐसा करना की शाम तक के लिए किसी सहेली को बुला लेना मैंने कहा ठीक है पापा वोह लोग ११ बजे की ट्रेन से चले गए और भाई भी आधे घंटे बाद यह कह के चला गया की मैं जा रहा हूँ तू किसी सहेली को बुला ले मैं पांच या छः बजे तक आ जाऊंगा. मैंने भी सोचा की क्या फर्क पड़ता है अकेले रह लुंगी जाने देती हूँ समीर को. मैं उसके जाने के बाद टी वी देखने बैठ गई थोड़ी देर बाद मैंने सोचा की अब १ बज रहा है नहा धो लेती हूँ फिर कुछ बना लूंगी खाने के लिए तो मैंने अपने ब्रा पेंटी उठाये तोवेल लिया और बाथरूम में घुस गई कपडे उतार के घर में कोई था नहीं तो कोई टेंशन भी नहीं थी

जवान तो मैं हो ही गई थी पर कमाल की बात थी की मैंने अभी तक किसी से चुदवाया नहीं था बस कभी कभी अपनी चूत में ऊँगली डाल के उस को मज़े दिला लेती थी आज भी अकेली थी तो बाथरूम में जब मैं नंगी होके नहाने लगी तो मन किया की क्यूं ना थोडा मजा लिया जाये तो मैं अपनी चूत में उंगी डाल के उसे सहलाने लगी थोडा बहुत मसल मसल के मैंने चूत को गरम कर लिया अपने बूब्स से खेलने लगी उंगली डालने के कारन अब मस्ती छाने लगी थी चूत गरम हो गई थी अचानक मेरे मोबाइल पर किसी का कॉल आया तो मैंने सोचा आने दो नहा के कॉल बेक कर लूंगी पर मोबाइल फिर से बज उठा मुझे बड़ा गुस्सा आया की यहाँ चूत में गर्मी चढ़ रही है जाने कौन है जो मेरी चूत का दुश्मन बना जा रहा है तीसरी बार बजी तो मैंने सोचा की कही पापा का ना हो तो मैं बाथरूम से टॉवेल लपेट के कमरे में आई तो फ़ोन फिर से बज उठा मैंने जल्दी से मोबाइल उठाया तो देखा की आकाश ( मेरा बॉय फ्रेंड) का फ़ोन था

मैंने हेल्लो बोला तो बोला जान इतना टाइम कैसे लगा किया कॉल ले ने में मैंने कहा की नहा रही थी तुम्हे भी तो चैन नहीं है नहाने भी नहीं दिया ठीक से तो आकाश ने शरारत से कहा की वाह जान मैंने भी आ जून क्या नहाने साथ तुम्हारे मैं थोड़ी शर्मा सी गई तो मैंने कहा धत्त शरारती कही की वह हंस पड़ा बोला यार टीना मैं कौन सा आने ही वाला था मरना है क्या वह आके तुम्हारे मम्मी पापा मुझे मार डालेंगे तो अचानक मेरे मुह से निकल गया की अरे वह लोग तो हैं नहीं यार आज घर में मैं अकेली ही हूँ भाई भी नहीं है तो आकाश ने कहा की वाह जानेमन आज तो मौका है आ जाऊं क्या थोड़ी मस्ती हो जाये मैंने कहा की पागलो जैसी बात नहीं करो चलो अब मैं जा रही हूँ नहा के आती हूँ फिर खाना भी बनाना है मुझे अपने लिए तुम्हे क्या है तो वह बोला की जानू मैं पिज्जा ले आता हूँ वही पर थोड़े मजे भी कर लूँगा तुम्हारे साथ मैंने कहा की नहीं नहीं आना मत यहाँ पर उसने कहा की जैसी तुम्हारी मर्ज़ी

मैं फिर से बाथरूम में घुस गई और नहाने लगी नहाते नहाते मैंने चूत पर साबुन लगाया अपने नीचे के बालो को भी थोडा सा साबुन लगा के साफ़ किया तो जब मैं चूत पर साबुन लगा रही थी तो चूत में फिर से सनसनाहट होने लगी तो मैंने फिर से उंगली डाल के चूत को रगड़ना शुरू कर दिया अचानक मैं वासना से पागल सी हो गई ऐसा लग रहा था की उफ़ यह पतली सी ऊँगली क्या मज़ा देगी कोई मोटी चीज़ होती तो मजा आ जाता बस यही सोचते हुए अचानक मेरे मन में ख़याल आया की टीना आज चूत की गर्मी निकलने का अच्छा मौका है माँ पापा भी नहीं है भाई शाम तक आने वाला नहीं है तो क्यूं ना आकाश को बुला लिया जाये बस यह ख़याल आते ही मैंने चूत से खेलना छोड़ के अपने नीचे के बाल रिमूवर से साफ़ किये ताकि पहली बार चुदने जा रही हूँ तो बॉय फ्रेंड को भी तो मजा आना चाहिए फिर मैंने फटाफट नहाया और बाहर आ के आकाश को फ़ोन लगाया की उस ने फ़ोन उठाया तो बोला की जानू क्या हुआ कैसे कॉल किया तो मैंने कहा की पिज्जा खाने का मन हो रहा है ला रहे हो क्या (मैंने उसे यह नहीं बताया की आज मैं चुदाई की आग में जल रही हूँ मैंने सोचा की उस को थोडा सा तडपाऊँगी तो अपने आप ही कहेगा की आज कुछ कर लेने दो मन मत करो ) उसने कहा की जानू तुम्हारे लिए कुछ भी बोलो कब आना है मैंने कहा की आ जाओ जल्दी से भूख लग रही है बड़ी (वह बात अलग है की पिज्जा की नहीं चुदाई की) उस ने कहा की डोमिनो से पिज्जा ले के आ रहा है वह बस थोड़ी देर में.

उसके बाद मैंने अपनी एक लेस वाली बढ़िया सी ब्रा और पेंटी निकली और पहन ली बढ़िया परफ्यूम लगाया और एक टॉप निकाल के पहन लिया जींस पहन ही रही थी की ख्याल आया की नहीं जींस नहीं कोई मिनी स्कर्ट पहनी जाये ताकी आकाश को रिझाने में आसानी रहेगी तो मैंने एक सेक्सी सी मिनी स्कर्ट पहन ली फिर शीशे में देखा की हाँ अब मैं किसी भी लड़के का लंड खड़ा करने लायक दिख रही हूँ आज आकाश मुझे खुद कहेगा की आज मुझे अपनी जवानी का मज़ा ले लेने दो. मैं अपने आप को शीशे में निहार रही थी की घंटी बजी मैं समझ गई की आकाश आ गया है पिज्जा ले के मैंने तेज़ी में गेट की तरफ गई और दरवाजा खोला तो वह आकाश ही खड़ा था. उस ने मुझे देख के कहा की क्या बात है जानेमन आज तो क़यामत लग रही ही देख के ही बिजली गिर रही है दिल पर मैंने शरमाते हुए कहा की चलो बेकार की बातें मत करो रोज़ जैसी ही तो लग रही हूँ अब जल्दी से अन्दर आ जाओ वरना कालोनी वाले देख ना ले मैंने आकाश का हाँथ पकड़ा और उसे अन्दर खीच लिया आकाश अन्दर आ गया तो मैं पलट के दरवाजे को लौक लगाने मुड़ी तो उस ने मुझे वापस खीच लिया और अपने होठ मेरे होठों पर रख दिए मुझे बांहों में भर लिया और मुझे किस करने लगा मैं तो आग में जल ही रही थी जवानी की मैंने भी उस को कस के बाहों में भर लिया और उस के होंठों को चूमने लगी मेरा साथ पा के तो आकाश पागल सा हो गया उस ने मुझे अपनी बाहों में मसलना शुरू कर दिया जैसे आज मेरा अंग अंग तोड़ देगा मैंने उस के कहा की उफ़ छोडो भी मुझे पिज्जा उस ने जमीन पर छोड़ दिया था और अब मेरे होठो को छोड़ के वह मेरी गर्दन मेरे गाल को चूमते हुए बोल उठा की आज तो ऐसा लग रहा है की कच्चा चबा जाऊं जानेमन कामाल की लग रही हो मैंने कहा हटो भी पिज्जा ठंडा हो रहा है मुझे भूख लगी है उस ने कहा की जानू आज तो तुम इतनी हॉट लग रही हो की पिज्जा भी तुम्हारी जवानी के आगे ठंडा ही लगेगा मैंने उसे धक्का दे कर अपने आप को छुडाया ओउर पिज्जा ले के सोफे पर बैठ गई और टीवी चला लिया तो आकाश भी मेरे बगल में आ के बैठ गया उस ने कहा की टीना मैं पिज्जा लगा तो अब कम से कम लेन का मेहनताना तो ले लेने देती ठीक से

मैं हंस पड़ी उसे चिड़ाते हुए मैंने कहा की फिर तो मुझे खुद ही डोमिनो फोन कर के माँगा लेना था और जो पिज्जा देने आता उसे दो चार किस दे के कहती की हो गए तुम्हारे पैसे अब जाओ तो आकाश ने कहा की जानेमन वोह चला भी जाता पर अगर उस का खड़ा हो जाता तो तुम्हारी लिए बिना नहीं जाता और कहते हुए उस ने मेरे नंगी जांघ पर हाँथ फेर दिया मैं तो अभी मस्त हो के पिज्जा खाने के नाटक कर रही थी मैंने उसे रोका नहीं तो उस की हिम्मत बड़ी और और ने हाँथ थोड़ा और अन्दर कर दिया अब आकाश मेरी स्कर्ट के अन्दर हाँथ ड़ाल के मेरी जांघ को रगड़ रहा था मुझे मजा आने लगा था.मैंने टीवी के चैनल चेंज करने का नाटक किया और फिर से पिज्जा में मस्त हो गई तो उस ने मौका देख के जांघ को मसलना शुरू कर दिया और थोड़ा अन्दर की और हाँथ बड़ा के मेरे पेंटी को छूने लगा तो मैंने थोड़ा सा नाटक करते हुए उस के हाँथ पर चांटा मारा और कहा की हटो भी क्या मस्ती कर रहे हो और उस की तरफ नकली गुस्से से देखा तो मुझे समझ में आ गया की आकाश का चेहरा लाल होने लगा था उस पर मस्ती छाने लगी थी मैं समझ गई की तीर निशाने पर लग गया है अब ज्यादा देर नहीं है मेरी सील टूटने में अन्दर से डर भी लग रहा था की पहली बार है ऐसा ना हो की सह नहीं पाऊं मैं लंड को अपनी छोटी सी चूत में फिर सोचा की जो होगा देखेंगे मर जवानी का मज़ा तो लेना है आज चाहे कुछ भी हो जाये मैं फिर से टीवी की तरफ देखने लगी मन टीवी में नहीं लग रहा था पर नाटक तो करना था ना की आकाश ये न समझे की उस की गर्ल फ्रेंड तो बिगड़ी हुयी लड़की है मैं चाहती थी की वो ही मुझ से कहे की आज सेक्स कर लेने दो मुझे ताकि मेरा काम भी हो जाये और उस की नज़र में यह भी रहे की मैंने आकाश के कहने पर ही अपनी सील तुडवाई है

मैंने आकाश को रोका नहीं तो उस की हिम्मत और बढ़ गई उस ने जांघ पर हाँथ फेरना बंद कर दिया और अब उस ने अपना हाँथ मेरे टॉप के नीचे से अन्दर ड़ाल दिया और मेरे बूब्स को मसलने लगा तो मैंने कहा हाय क्या कर रहे हो क्यूं शैतानी कर रहे हो यह कहते हुए मैंने उस के हाँथ को पकड़ लिया तो उस ने कहा की जानू प्लीज थोड़े मज़े ही ले लेने दो ना मैंने कहा हटो यह सब शादी के बाद करने के काम है किस तो चलता है यह सब नहीं. आकाश का तो तब तक मन बन गया था की आ मेरी ले के ही मानेगा तो उस ने मुझे प्यार की कसम देते हुए कहा की जानू तुम मुझ से प्यार करती हो तो मुझे आज रोको मत तो मैंने भी थोड़े नाटक करते हुए उसे मेरे बूब्स दबाने दिए तो मुझे भी थोड़ी मस्ती आने लगी मैं भी सिसकारी भरने लगी तो उस को और मजा आने लगा तो उस ने मुझे सोफे पर धकेल दिया और मेरे ऊपर चढ़ के मेरे लिप्स चूमने लगा और अपने हाँथ से मेरे बूब्स को मसलने लगा मैं उफ़ उफ़ करने लगी और उस से कहने लगी की हाय आकाश मत करो ना कुछ कुछ होता है अन्दर तो उस ने कहा की होने तो जानेमन प्यार की आग है जो तुम्हारे अन्दर जल रही है आज मुझे अपनी जवानी की आग को बुझा लेने दो कहते हुए मेरी स्कर्ट के उंदर हाँथ ड़ाल के उसे नीचे सरका दिया और फिर मेरी पेंटी में हाँथ ड़ाल के मेरी चूत को रगड़ने लगा

टीना - हाय क्या कर रहे हो आग सी लग रही है अन्दर मत करो ना

आकाश - जानू आज जो हो रहा है हो जाने दो प्लीज मत रोको मुझे आज कहते हुए उस ने मेरे टॉप को ऊपर कर दिया और ब्रा को भी बूब्स से हटा के ऊपर कर दिया और फिर एक निप्पल को मुह में लेके चूसने लगा और दूसरे को अपनी उँगलियों में दबा के मसलने लगा.

टीना - क्या कर रहे हो लेस वाली ब्रा है फट जाएगी उतार लेने दो

आकाश - जानेमन आज तो मैं जाने क्या क्या फाड़ दूंगा तुम नहीं जानती.

टीना - चलो हटो ना उतार लेने दो ना प्लीज

आकाश - ठीक है उतार लो

मैंने धीरे से अपना टॉप उतार के साईड में ड़ाल दिया तो उस ने हाँथ बढ़ा के मेरे ब्रा को उतार दिया और मुझे फिर से धक्का दे के नीचे सोफे पर गिरा दिया और फिर मेरे बूब्स को चूसने लगा और मसलने लगा

थोड़ी देर बूब्स से खेलने के बाद उस ने मेरी स्कर्ट को खीच के नीचे ड़ाल दिया और मेरी मेंटी सरका के उतार दी और मेरी चूत को रगड़ने लगा अपनी उँगलियों से

आकाश - वाह जानेमन आज तो झांटे भी साफ कर रखी हैं तुम ने तो

टीना - हाँ आज कोई नहीं थी तो मैंने सोचा की चलो साफ़ कर लेती हूँ.

आकाश - जानेमन आज तो सब कमाल कर रही हो तुम तो कहते हुए उस ने थोडा झुक के मेरी चूत को चूम लिया

टीना- म्मम्म सीईईईई क्या करते हो आकाश

आकाश - इतनी प्यारी चूत को किस नहीं करू क्या अभी तो बहुत कुछ करना है उस ने मेरी चूत को उंगली से फाड़ा और अपनी जीभ अन्दर घुसा दी

टीना - सीईईईईईए हाय रे मर गई म्मम्मम्म मेरी सिस्कारिया सुन के उस को जोश आ गया और उस ने मेरी चूत को और जोर से चाटना शुरू कर दिया

और तभी

दरवाजा खुला ( क्यूंकि मैं दरवाजा बंद नहीं कर पाई थी क्योंकि आकाश ने मुझे खीच लिया था किस करने के लिए जब मैं लोक करने जा रही थी दरवाजे को )

समीर और उस के एक दोस्त ने अन्दर कदम रखा और वह सोफे का नजारा देख के वह चिल्ला पड़ा बहन***** क्या हो रहा है यह साले हट वह से तेरी माँ की ****

मैं अन्दर तक कांप गई ऐसा लग रहा था की जमीन फट जाये और मैं उस में समां जाऊं

समीर - बंटी भाई पकड़ साले को माँ चो** देंगे साले की मेरी बहन के साथ क्या कर रहा हे यह

बंटी - ठीक है समीर

आकाश - अरे सुनो तो

मैं जल्दी से अपने कपडे समेट के अपनी नंगे शरीर को छुपाते हुए अपने कमरे की तरफ भागी पलट के पीछे देखा तो समीर ने आकाश को धक्का दे दिया था पर बंटी मेरे तरफ देख के हंस रहा था मुझे गुस्सा भी आया और शर्म भी मैं सीधे अपने कमरे में भाग गई अन्दर मैं जल्दी से अपनी ब्रा पेंटी पहन के जल्दी से बाकि के कपडे पहनने लगी तब तक आकाश के पिटने की आवाजे आती रही मैं कपडे पहनते हुए सोचने लगी की अब मैं मर गई भाई पापा को बता देगा और बंटी मुझे पूरी कालोनी में बदनाम कर देगा चूत तो चुदाने मिली नहीं और बदनामी मुफ्त में मिल रही है. मैं कपडे पहन के अपने बेड पर जा के लेट गई मैंने सोचा की भाई आएगा तो क्या कहूँगी पर होना कुछ और था आज रिश्ते बदनाम होने थे

क्रमशः। ……………।
 
बदनाम रिश्ते-2

गतांक से आगे

भाई का सामना करने के बारे में सोचने रही थी वह बंटी मेरे भाई को कुछ और समझा रहा था यह बात मुझे बाद में पता चली की बंटी ने भाई को कहा की यार समीर मिठाई का डब्बा घर में रखा हो तो खाने की बनती है कोई बाहर वाला ( आकाश ) खाले यह गलत है और फिर हम अगर कुछ कर भी ले तो तेरी बहन को कोई कमी थोड़ी हो जाएगी समुद्र में से एक दो लोटे निकाल लो तो पानी कम थोड़ी हो जायेगा तेरी बहन तो जवानी की आग में जल ही रही है यह लौंडा नहीं तो कोई और आ जायेगा उसे चोदने के लिए चूत तो है ही चुदने के लिए हम चोद ले तो हमारी नहीं तो बाहर वाला मजे ले जायेगा और हम ताकते रह जायंगे वैसे भी हम एक बार कर ले तो चूत का क्या बिगड़ जायेगा ( सच तो यह है की शायद भाई भी चाहता था की उस के बहन की जवानी का मज़ा लूट लिया जाये) उस ने बंटी का साथ दिया और फिर उस ने मेरे कमरे में कदम रखा तो मैं सकपका गई मेरा रोना छूट गया मैंने रोते हुए भाई को कहा की भाई आकाश और मैं एक दूसरे से प्यार करते हैं हम शादी करने की सोच रहे हैं उस का ऍम. बी. बी. एस. हो जाये तो वह पापा मम्मी को भेजेगा हमारे यहाँ बात करने मैं अपनी ही धुन में कहे जा रही थी मैंने यह नहीं देखा की समीर वासना भरी नजरो से मुझे घूर रहा था फिर पीछे से बंटी ने कमरे में कदम रखा

टीना - समीर बंटी को कहे की वो बाहर निकल जाये यह हमारे बीच के बात है.

बंटी - क्यूं जब वह सोफे पर नंगी हो हो के चुदवा रही थी तब गेट बंद नहीं किया तब ध्यान नहीं आया की कोई आ जायेगा.

टीना - समीर इसे बाहर निकालो ना देखो न कैसी गन्दी भाषा में बात कर रहा ही मुझ से .

बंटी - अरे अभी गन्दा काम खुद कर रही थी ऐसी चुदास लग रही थी तो हम से कह देती बाहर वाले को बुलाने की क्या जरुरत थी

टीना - बन्तीईईईए चुप हो जा समीर कुछ कहते क्यूं नहीं अपने दोस्त को

समीर - चुप साली एक तो घर में लौंडे बुला के मुह कला करवाती है और हमें चुप रहने को कहती है

मैं सन्न रह गई की भाई कैसी भाषा में मुझ से बात कर रहा है मैंने कहा की तुम दोनों बाहर निकल जाओ

टीना - समीर तुम अपने दोस्त को ले के चले जाओ वरना मैं पापा मम्मी से तुम्हारी शिकायत कर दूंगी

समीर - तू क्या शिकायत करेगी वो तो मैं करूँगा तेरी अगर तुने मेरी बात नहीं मानी तो बताऊंगा की कैसे तू उस के साथ चुदवा रही थी. शादी करनी है तो ठीक है पर चुदाई करवाने कैसे बैठ गई तू.

मैं चुप हो गई मुझे समझ में नहीं आया की क्या कहूं मुझे कुछ समझ में नहीं आया की क्या कहूं क्या करू

अभी मैं कुछ समझ पाती की बंटी आगे आया और मुझे बाहों में भर के मुझे किस करने लगा मैंने उस को धक्का दिया और समीर के तरफ देख के बोला की समीर ऐसे क्या देख रहे हो यह तुम्हारी बहन की इज्जत पर हाँथ ड़ाल तुम खड़े हो

समीर - खड़ा तो मैं हूँ ही और मेरा लंड भी खड़ा हो रहा है तेरी जवानी देख के जब तू नंगी भाग रही थी ना तो पेंट में फनफना उठा था मेरा लौडा.

बंटी - साली तेरी जवानी देख के तो पूरा मुहल्ला तेरा दीवाना हो जाये हम दोनों की क्या है

टीना - समीर तुम दोनों निकल जाओ मेरे कमरे से वरना मैं चिल्लाउंगी

बंटी - चिल्लाएगी साली क्यूं तू चाहती है की हम तेरे हाँथ पैर बाँध के तेरे साथ वो सब करे जो तुम अभी मजे ले के कर रही थी शांति से हम दोनों को खुश कर दे वरना आज तेरी इज्जत लूटनी पड़ेगी हमें कहते हुए उसने मुझे धक्का देके बेड पर गिरा दिया फिर उस ने समीर से कहा की समीर आजा अब किस का इंतज़ार कर रहा है

समीर - इंतज़ार किस का करू बंटी यार लौड़े को बहुत सरका लगा लगा की शांत किया है आज जब मौका है तो चूत को छोड़ दूंगा क्या?

बंटी - तो फिर आ जा जल्दी से कहते हुए उस ने मेरी स्कर्ट के अन्दर हाँथ ड़ाल दिया और मेरी चूत को मसल मसल के देखने लगा

समीर - सुन बंटी पहले मेरी बारी क्यूंकि माल तो मेरे घर का है ना तो चूत के दरवाजे मेरे लौड़े से ही खुलेंगे फिर समीर ने मुझ से कहा की क्यूं साली छिनाल पहले कितनो के साथ चुदवा चुकी है?

टीना - भाई ऐसा मत करो मेरे साथ मैं तुम्हारी बहन हूँ कुछ तो सोचो भगवान् के लिए मैंने कभी किसी के साथ कुछ नहीं किया है मैं कुवारी हूँ अभी तक.

समीर - भाई वाह आज तो मज़ा आ गया कुवारी लड़की की सील तोड़ने का मौका मिला है आक्जो बंटी भाई मज़ा आ गया कहते हुए उस ने मेरे रोने को ना देखते हुए

मेरे स्कर्ट को खींच के उतार दिया मैं हाँथ जोड़ के कहने लगी के प्लीज मुझे छोड़ दो लेकिन उन लोगो को सुनना थोड़ी था मेरी कोई बात वोह तो हवास की आग में पागल हो गए थे जैसे ही समीर ने मेरी स्कर्ट उतारी तो मेरी नंगी टाँगे देख के बंटी पागल सा हो गया उस ने मेरी टांगो को ही जीभ से चाटना शुरू कर दिया

और समीर बेड पर आ गया और मेरी पेट पर बैठ के मेरे टॉप को उतरने लगा तो मैंने अपने टॉप को पकड़ लिया तो उस ने गुस्से में उसे फाड़ दिया अब मेरा फटा हुआ टॉप एक तरफ गिरा पड़ा था उस ने गुस्से में मेरी ब्रा भी खीची तो वो भी तार तार हो गई समीर मेरे बूब्स को मसलने लगा कहने लगा की हाय रे कैसे प्यार हैं इतने गोरे ढूध तो मैंने कभी ब्लू फिल्मो में भी नहीं देखे हैं कहते हुए उस ने मेरे निप्पलस को खीचना शुरू कर दिया मुझे दर्द होने लगा मैंने कहा भाई ऐसा मत करो प्लीज मुझे लग रही है तो उस ने मुझे चांटा मारा और कहा की अब मुझे भाई कहा तो साली काट के रख दूंगा तेरे निप्पलस को समीर ने मेरे बूब्स को और जोर जोर से मसलना शुरू कर दिया वह बंटी मेरे टांगो को चाट रहा था और धीरे धीरे ऊपर की तरफ बाद रहा था उस ने समीर को देख के मेरी पेंटी भी फाड़ के ही उतारी

अब मेरे शरीर पर कपड़ो के नाम पर कुछ चिंदिया लटक रही थी उस ने मेरी टांगो को फेलाने की कोशिश की तो मैंने जोर लगा के अपनी चूत को छिपा लिया टांगो को क्रोस में बंद कर लिया तो बंटी ने समीर को कहा की समीर यह साली तो कुछ करने नहीं दे रही है यार टाँगे बंद कर ली साली ने

तो समीरे ने कहा की रुक जरा और कहते हुए उस ने मेरे निप्पलस को खीचना शुरू कर दिया ऊपर की तरफ मैं दर्द से चिल्ला padi तो उस ने कहा की टाँगे खोल ले नहीं तो खींच के इतने लम्बे कर दूंगा की घुटनों तक लटकेंगे मैंने कहा ठीक है ठीक है मैं खोल रही हूँ टाँगे प्लीज निप्पलस को छोड़ दो कहते हुए मैंने अपनी टाँगे फैला ली

तो समीर ने कहा की हरामी छोड़ने मत लग जइयो पहले मैं चोदुंगा तो बंटी ने कहा नहीं यार पहले तेरी बारी है मैं तो सिर्फ चाट के थोडा रस पी रहा हूँ कुवारी चूत का

कहते हुए उस ने मेरी चूत में ऊँगली ड़ाल दी

बंटी - हाय रे देखो तो कितनी गरम है चूत इसकी लगता है भट्टी लगा रखी है अन्दर

समीर - अच्छा ! बूब्स भी बड़े मस्त है छिनाल के कहते हुए समीर मेरे ऊपर से उठ गया और बोला की अब तो साला लौडा पेंट के अन्दर रुक ही नहीं रहा कहते हुए उस ने अपनी पेंट अंडरवेयर समेट उतार कर फेक दी तो बंटी ने मेरे चूत की फाको को अलग किया और उस के अन्दर अपनी जीभ ड़ाल दी और चूत के जी स्पोट को मसलने लगा उस ने मेरी चूत को चाट चाट के गीला कर दिया ऊपर से मेरी चूत को मसल मसल के लाल कर दिया अब मुझे भी मजा आने लगा था तो anjane में ही मैं अपनी चूत को उछलने लगी अपने आप ही मेरे अन्दर मस्ती आने लगी जब कोई लड़की मस्त हो जाती है तो उसकी कमर में अपने आप लोच आ जाती है उस की कमर अपने आप मचलने लगती है तो यह देख के बंटी ने कहा की समीर भाई चूत पर मस्ती छाने लगी है चुदाई के लिए तैयार यह छेद यह सुन के समीर मेरे ऊपर से उठ गया और अपने लौड़े को मसलते हुए बोला की तो फिर मेरी बारी शुरू मेरे बाद तू निपट लेना मैंने देखा की समीर का लंड काफी बड़ा था मैंने आकाश का लंड तो कभी देखा नहीं था तो कह नहीं पाई की किस का बड़ा है समीर ने कहा की टीना तैयार हो जा चुदाने के लिए कहते हुए उस ने मेरी चूत पर अपना लौडा रख दिया मस्ती तो मुझ पर भी छ गई थी पर मैं कुछ कह नहीं रही थी अपने आप को मैंने कंट्रोल कर रखा था फिर समीर ने मेरी चूत के छेद पर अपने लंड का दबाव बढाया तो लंड थोडा सा अन्दर गया पर मुझे ऐसा लगा की किसी ने चूत में चाकू ड़ाल दिया हो मेरी चूत में दर्द होने लगा तब तक समीर ने थोडा और जोर लगा के अन्दर डालने की कोशिश की तो मैं दर्द से चिल्ला पड़ी

टीना - समीर छोड़ दो मुझे लग रही है बहुत दर्द हो रहा है नीचे

बंटी - चुप रह साली कुवारी चूत है पहली बार तो लगेगी ही जब उस लौंडे से चुद्वाती तो नहीं लगती क्या

समीर - टीना चुप चाप कर लेने दे नहीं तो मैं जबरदस्ती ड़ाल दूंगा प्यार से चुद्वायेगी तो आराम से करूँगा

मैं चुप चाप हो के वापस लेट गई तो समीर ने धीरे से थोडा और अन्दर ड़ाल दिया और मैं फिर दर्द से तड़प उठी समीर ने धीरे धीरे अपना लंड अन्दर पलना शुरू कर दिया मैं दर्द सह के लेती रही समीर आराम से ड़ाल रहा था उस ने वापस निकाल लिया अपने लंड को और फिर एक बार धीरे से अन्दर ड़ाल दिया ऐसा करते करते उस ने अपने लौड़े को अचानक मेरी चूत में पूरा पेल दिया मैं दर्द से उचक गई आँख से आंसू निकल आये तो समीर ने कहा की अब बस पूरा चला गया है अब दर्द नहीं होगा

कहते हुए समीर ने मेरे चूत को छोड़ना चालू कर दिया धीरे धीरे उस ने अपने लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया तब तक बंटी भी अपने कपडे उतार के नंगा हो गया था उस का समीर के मुकाबले थोडा छोटा था

बंटी - समीर भाई मैं क्या अपना लौडा हाँथ में लिए खड़ा रहूँ क्या ?

समीर - अरे यार तो मैं करू ? एक काम कर ना ब्लू फिल्मो की तरह तूभी अपना लौडा चुसवा के देख मजा आता होगा उस में भी बंटी को बात जम गई वो मेरे ऊपर आ गया और अपना लंड मेरे मुह के पास लाते हुए बोला की चल जरा चूस के दिखा मेरे लौड़े को देखे तो कैसा मज़ा आता है मैंने कहा

टीना - छी छी मैं नहीं लेती मुह में गन्दा होता है यह

बंटी - साली नखरे ना कर अब जल्दी से मुझ भी खुश करना शुरू कर दे नहीं तो तेरी गांड में ही पेल दूंगा

समीर - ले ले टीना वरना अभी तो चूत में दर्द है बाद में गांड में भी दर्द हो जायेगा हा हा हा

टीना - ठीक है पर प्लीज बंटी से नहीं करवाउंगी मैं बहुत दर्द हो रहा है मुझे

बंटी - ठीक है पहले जरा लौड़े को चूस तो मैंने अपने मुह को थोडा था खोला तो बंटी ने मेरे होठो पर अपने लंड को रख दिया तो मैंने भी उसे चाट के देखा तो मुझे स्वाद बड़ा अजीब सा लगा मैंने मुह हटा लिया तो उस ने मेरे सर को पकड़ के अपने लौड़े के पास लाते हुए कहा की चूस भी ले अब जानेमन तो मैंने थोडा मुह खोल के उस के लौड़े को अन्दर लिया तो मुझे भी मज़ा सा आया और ध्यान चूत की तरफ से हट गया तो दर्द भी कम लगने लगा मैंने बंटी के लंड को चुसना चुरू कर दिया तो वो मस्ती से कहने लगा हाय रे बड़ा मज़ा आता है चुस्वाने में तो यार यह ब्लू फिल्म वाले तभी सबसे पहले मुह में देते हैं फिर चोदते हैं वह जाने मन मज़ा आ गया आज तो चूस अच्छे से चूस तभी समीर ने मेरी चूत में अपने लंड के धक्के तेज कर दिए अब मुझे भी मज़ा आ रहा था दर्द गायब हो गया था तो मैंने भी मज़ा लेने लगी चूत को उचका उचका के समीर का लंड लेने लगी 5 - 7 मिनट बाद समीर ने तेजी से मुझे चोदना शुरू कर दिया और अचानक ऐसा लगा की अन्दर कुछ गरम सा भर गया है समीर लस्त पस्त हो के अपने लंड को निकाल के कहने लगा अआः आः आह आज तो जन्नत का मज़ा आ गया बंटी भाई मैं तो फ्री हो गया तेरी बारी है बंटी फट से उठा और नीचे आ के मेरी चूत का निशाना लेने लगा उस ने अपना लंड डाला मेरी चूत में तो वो आसानी से चला गया क्यूंकि एक तो चूत फ़ैल गई थी थोड़ी और ऊपर से समीर के वीर्य ने अन्दर चिकनाई पैदा कर दी थी उस ने तेज़ी दिखाई और मेरे चूत में लंड पेलने लगा जोर जोर से तो अभी उस ने कुछ धक्के दिए होंगे की मुझे ऐसा लगा की मेरे उंदर से कुछ निकल रहा है ऐसा लगा की पेशाब आ गया है पर यह था जब मैं पहली बार झड़ी थी किसी लौड़े से. मेरा मन भर गया तो मुझे मज़ा आना बंद हो गया तो मुझे फिर से दर्द भी होने लगा था पर बंटी था की रुक ही नहीं रहा था उस के धक्के तेज़ होते जा रहे थे वो तो समीर से ज्यादा फास्ट चुदाई कर रहा था मैंने कहा की मुझे दर्द हो रहा है तो समीर ने कहा की कुछ देर और पड़ी रह बंटी को भी निपट लेने दे उसे भी तो पता चले की चूत में माल निकलने में क्या मज़ा आता है समीर मेरे बगल में आ के लेट गया और मेरे बूब्स से खेलने लगा

बंटी का लंड छोटा जरूर था पर वो समीर से ज्यादा दमदार था उस की चुदाई से मेरी चूत में जलन सी होने लगी पर मैं क्या करती चुप कर के उस के लंड को झेलती रही

तभी बंटी के शरीर ने झटका खाया और उस ने भी मेरी चूत में अपना वीर्य निकाल दिया फिर से एक गरम अहसास से चूत भर गई बंटी ने चूत से अपना लोडा निकलने की कोशिश नहीं की और मेरे ऊपर ही लेट गया हाँफते हुए समीर ने कहा की बंटी मज़ा आया की नहीं तो बंटी ने कहा की यार ऐसा लगा की अगर यह कहती की चूत चुदवाने का हजारो लुंगी तो भी मैं देने को तैयार हो जाऊं थोड़ी देर बंटी मेरे ऊपर ही लेते रहा तब तक समीर मेरे बूब्स से खेल ता रहा . फिर बंटी उठा और उस ने कहा की एक राउंड और हो जाये क्या मैंने कहा नहीं अब नहीं अब मैं किसी कीमत पर राजी नहीं हूँ तेरे से चुदवाने के किये समझा अब निकल जा यहाँ से और अपनी शक्ल नहीं दिखाना मुझे समीर ने उसे इशारा किया की अब बस. समीर ने कहा की चल बंटी अब बस करे तो मुझे लगा की लगता है की समीर की इंसानियत जाग गई है पर क्या कहूं तो बंटी ने अपना लंड मेरे अन्दर से निकाल और अपने कपडे उठाये और बहार निकल गया और समीर भी अपनी पेंट पहन के बाहर निकल गया

पहली बार में ही दो लोगो से अपनी सील तुडवा के मेरे अंग अंग में दर्द हो रहा था मैं अब घिन सी महसूस कर रही थी की छी सालो ने मेरे अन्दर ही अपनी गन्दगी निकाल दी. यही सोचते हुए मैं बेड पर से उठी ही थी की मेरी चूत में से कुछ निकलने का अहसास हुआ तो मैंने देखा की चूत में से खून निकल रहा था वोह बहता हुआ मेरी जांघ से फैलता हुआ नीचे आ रहा था साथ में दोनों के वीर्य का थोडा सा हिस्सा बाहर आ रहा था मैं तेज़ी में बाथरूम की तरफ बड़ी तो चलने में ऐसा लगा की चूत में दर्द की लहर उठ गई हो मगर मैं सब सहती हुयी बाथरूम गई वह मैंने अपने आप को साफ़ किया चूत को अच्छे से साफ़ किया और एक बार गरम पानी से सिकाई की

जब तक मैं बाहर आई अपने को साफ़ कर के तब तक बंटी जा चुका था और समीर मेरे बेड पर नंगा लेता था और अपने खड़े लंड को सहला रहा था मैंने उसे देख के कहा की अब नहीं मेरे बस का नहीं है अब कुछ करना अभी अभी एक बार करवाया तो खून की धार निकल रही थी अब तो मैं मर ही जाउंगी तो वो बोला की करना तो तुझे पड़ेगा अब राजी राजी कर ले या जबरदस्ती वैसे भी सील एक बार टूटती है बार बार नहीं खून नहीं आएगा अब समझी अब आ जा जल्दी से और मुझे भी अपने लौड़े को चुस्वाने का मज़ा लेने दे साली बंटी का तो बड़ा रस ले ले के चूस रही थी

तो समीर ने मुझे पहली ही बार में पूरी रात भर चोदा पहली ही बार में मैंने इतना दर्द सहा की अब तो दर्द में ही मज़ा आता है उस ने मुझे चोदा तो चोदा ही साथ में मुझे अपना वीर्य भी पिलाया मेरी फिल्म भी बनायीं अपने mobile से सुबह मैंने समीर से कहा की अगर मैं प्रेग्नेंट हो गई तो उस ने कहा की आज तो मैं गोली ला देता हूँ 72 घंटे वाली पर तू अब रोज़ वाली गोली खाना शुरू कर दे मैंने मना किया तो उस ने मुझे कहा की वो अपने 4 - 5 दोस्तों को ले आएगा किसी दिन मुझे चुदवाने के लिए और चुदवाना तो पड़ेगा तुझे उन से नहीं तो मेरी विडियो मेरे बॉय फ्रेंड को देखा देगा फिर भूल जाओ फिर उस डॉक्टर से शादी की तो और वैसे भी चूत घिस थोड़े जाएगी चुदवाने से हा हा हा ........

मैं क्या करती चुप रह गई फिर धीरे धीरे मुझे चुदाई का भूत सवार हो गया मैं एक निफो मेनिआक बन गई अब तो मुझे जितने लौड़े मिले कम हैं आगे तो मेरे भाई ने मुझ से हार मान ली थी लेकिन वो कहानी फिर कभी मैं अपनी जिंदगी की हर चुदाई को ऐसे ही कहानी के रूप में लाती रहूंगी आप के सामने

आपकी टीना
 
बदनाम रिश्ते-3

गतांक से आगे .............................

क्यूंकि माँ और पापा तो दो दिन के लिए गए थे और अभी तो एक ही दिन हुआ था और पहले भाई ने मुझे ब्लेकमेल क्या था और मेरी सील तोड़ दी थी फिर उस के दोस्त बंटी ने भाई को धमकी दी तो चुदाई मेरी ही हुयी बर्बाद मैं ही हुयी

पिछले दिन की चुदाई ( भाई और बंटी के द्वारा करी गई ) के बाद मैं रात भर दर्द से तडपती रही थी क्यूंकि पहले तो मेरी कुवारी चूत को भाई और बंटी ने चोदा फिर रात में भाई ने मुझे तीन बार फिर चोदा अगले दिन सुबह ही समीर ( भाई ) मार्केट से इमरजेंसी contraceptive pills ले आया था और उस ने मुझे खिला दी थी यहाँ तक की समीर ने महीने भर खाने वाली contraceptive पिल्स ला दी थी की अब तुझे रोज़ खाना है ताकि तू पेट से ना हो जाये मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था की क्या करूँ समीर तो हद से ज्यादा पागल हुआ जा रहा था और तो और वो सुबह जब वापस आया तो फिर कहने लगा की कपडे उतार मुझे चुदाई करनी है मैंने मना किया तो उस ने मुझे पीटना शुरू कर दिया मेरी सलवार कमीज फाड़ दी थी तो मैंने हार के उस के साथ फिर सेक्स किया उसके साथ किये सेक्स को मैं यहाँ नहीं लिख रही हूँ क्योंकि कहानी लम्बी हो जाएगी समीर मुझे चोद के सोफे पर ही लेट गया मैंने अपने फटे कपडे उठाये और अपने कमरे में चेंज करने चली गई वापस आ के मैं खाना बनाने लग गई किचन में जब मैं किचन में थी तो घंटी बजने की आवाज आई ( यहाँ शुरू हुयी मेरी बर्बादी की कहानी या यूं कह ले की मेरी चुदैल बनने की कहानी )

घंटी बजी तो समीर ने दरवाजा खोला तो बंटी और उस के साथ समीर के तीन और दोस्त खड़े थे समीर ने उन से कहा की आओ दोस्तों अन्दर आओ आज अचानक सब एक साथ कैसे मेरे यहाँ आ गए ? ( किचन ड्रएंग रूम एकदम लगे हुए हैं हमारे घर में तो मुझे सब बाते सुनने में आ रही थी.)

बंटी - यार समीर कल तेरे यहाँ से निकला तो बस हवा में उड़ रहा था बड़ा हल्का हल्का लग रहा था यह तीनो (आशु , जावेद , दीपक ) बाहर ही मिल गए मुझे मस्ती में देख के पूछने लगे की भाई बंटी क्या बात है हवा में उड़े कहा चले जा रहे हो ?

समीर - तो तुने क्या कह दिया समीर ने गुस्से में बंटी की तरफ देखा तो बंटी कमीनेपन से मुस्कुरा उठा

बंटी - भाई वही निकल गया जो अपना कल का राज़ था क्या करू यार इतना मज़ा जिंदगी में कभी नहीं आया तो मजा अपने दोस्तो से कैसे नहीं शेयर करता

समीर - साले मादर चो***** अब कह ही दिया तो यहाँ क्यूं आया है अब ?

बंटी - भाई मैंने तो इन भोस**वालो को मन किया था की मैं नहीं जाऊंगा समीर भाई के पास लेकिन साले ये मुझे कहने लगे की अगर नहीं चले तो पूरी कालोनी में हल्ला मचा देंगे की कैसे समीर ने अपनी बहन की सील तोड़ी और दोस्त से भी चुदवाया

समीर - आशु क्या बकवास है यह क्यूं आये हो यहाँ बोलो ?

आशु - यार समीर देख भाई ऐसा है तुम दोनों ने तो कल बोतल की सील तोड़ ही ली है तो एक एक घूँट हम भी पी ले तो क्या चला जायेगा चूत तो चूत है कितना भी डालो उस का क्या बिगड़ जायेगा और फिर हम दोस्तों ने भी आज तक एक बार भी नहीं चुदाई की है किसी की --- यह सुन के मेरे हाँथ पाँव फूल गए मेरी चूत में अभी तक दर्द हो रहा था और अब यह 4 और चले आये हैं मैं रो पड़ी की एक आकाश से अपनी प्यास बुझ वाना चाहती थी अब तो सारी कालोनी मेरे से अपनी प्यास बुझाना चाहता है अगर मैंने आकाश को बुलवाया नहीं होता सिर्फ अपनी उंगली से ही अपनी आग बुझा ली होती तो यह दिन नहीं देखना पड़ता.

समीर - आआआशूऊउ क्या बकवास कर रहा है गुस्से में समीर ने बोला साले मादरचोद मेरी बहन है कोई रंडी नहीं है की आये और पैसे दे के चोद के चले गए

आशु - हम कहा पैसे दे रहे हैं समीर भाई हम तो फ्री में चोद के जायेंगे और रंडी नहीं है तो कल अपने भाई से चुदवाने से पहले मर क्यूं नहीं गई ? और आराम से बात ख़त्म कर लो तो ठीक है नहीं तो ऐसी बदनामी कर देंगे की घर से निकल नहीं पाओगे और यह भी वादा है की हम फिर नहीं आयेंगे बस यार एक बार हमें भी चुदाई का मज़ा लेने दे ना कल बंटी ने जो सुनाया है कल का किस्सा की हम तो कल से 4 बार मुट्ठ मार चुके हैं की टीना के नाम पर एक और सही एक और सही करते हुए चार बार सरका लगा दिया है अब तो तभी मजा आयेगा जब टीना की चूत में पेल लेंगे एक बार

सच्चा वादा है दोस्त की फिर से फ्री की चूत समझ के नहीं आयेगे तेरे पास पक्का सब राजी हो दोस्तों की नहीं आशु ने सब की तरफ देख के बोला तो सब कह उठे की हाँ समीर भाई पक्का वादा है हमारा

बंटी - समीर मान जा यार अपने ही तो दोस्त हैं सब मिल बाँट के कर लेंगे एक बार तो क्या जायेगा और कभी हमें मौका मिला तो हम भी तुझे कोई लौंडिया चुदवा देंगे समीर अब लालच में आने लगा था

समीर - यार समझा करो यार वो कोई चुदैल नहीं है यार तुम सब एक साथ चुदाई करने लग जाओगे तो ऐसा ना हो की कुछ परेशानी हो जाये ?

जावेद - यार समीर कुछ नहीं होता है यार रस तो गन्ने का निकलता है मशीन का क्या जाता है ? और हम कोई जानवर थोड़ी है की उस के साथ जबरदस्ती थोड़ी करेंगे

सब प्यार से हो जायेगा यार उसे भी मजा आएगा ऐसा थोड़ी होता है की सिर्फ लौंडे ही मज़ा लेते हैं लडकियां भी तो चुतड उचका उचका के चुद वाती हैं .

दीपक - भाई सुन ले तू ध्यान से मैं तो चोदे बिना नहीं जाऊंगा यहाँ से दीपक ने धमकाते हुए समीर से कहा राजी राजी चुदवा दे टीना को नहीं तो तू जनता है की मैं क्या कर सकता हूँ .

समीर कुछ कहने की स्थिति में नहीं था उसे भी समझ में नहीं आ रहा था क्या करे अब उस ने भी हालात से समझौता कर लिया था तो उसे ने कहा

समीर - ठीक है दोस्तों आज चूत पार्टी मेरी तरफ से लेकिन रात को दारू तुम लोग पिलवाओगे और मुर्गा भी बोलो जल्दी से मंजूर है की नहीं वरना जाओ जो करना है कर लो मैं नहीं करने दूंगा कुछ तुम लोगो को

आशु - हुर्रे यह हुयी ना यारो वाली बात समीर भाई रात की पार्टी हम लोगो की तरफ से पक्की क्यूं दोस्तों ?

दीपक - जावेद - याहूऊऊ समीर भाई पक्का रात को पार्टी हमारी तरफ से दोनों एक साथ बोल पड़े की तो बुला ना यार अब टीना को लौड़े को कब तक मसलते रहे हम ?

समीर - टीना ओ टीना यहाँ आना जरा

मैंने सब सुन लिया था अब मैं भी समझ गई थी की यह चार आज मुझे चोदे बिना नहीं जायेंगे और फिर समीर तो है ही बहनचोद साला वो क्यूं छोड़ेगा मुझे चोदे बिना मैं समझ गई की आज हॉस्पिटल जाने की नौबत आ सकती है प्यार से करवा ले तो शायद दर्द कम हो और तुने अगर प्यार से बात ना मानी तो यह साले तेरा रेप करने से भी नहीं चुकेंगे तो मैंने भी मन बना लिया की अब जो होगा देखा जायेगा. मैंने वही से आवाज लगे आ रही हूँ भाई . मैं बाहर निकल के आई तो सब मुझे घूरने लगे मैंने कहा की क्या बात है ?

समीर - टीना यह चारो तेरी चूत चोदना चाहते हैं बोल रहे हैं की अगर इन्हे मन किया तुने तो यह कल की बात सब से कह देंगे अब तू जो कहे तेरी मर्ज़ी बोल इन्हें भगा दूं यहाँ से क्या ? समीर भी अब खुली खुली भाषा में मुझ से बात कर रहा था भाई बहन वाली कोई बात थी ही नहीं उस के शब्दों में मैंने सर झुका लिया और वही खड़ी रही कुछ कहे बिना तो सब समझ गए की मेरी हाँ है वरना तो मैं अब तक चिल्लाने लगती की निकल जाओ यहाँ से या ऐसा ही कुछ

आशु - दोस्तों टीना क्यूं मना करेगी क्यूं टीना हम कोई दुश्मन थोड़े हैं उसके पूरा मज़ा देंगे टीना को भी कहते हुए वो मेरे करीब आ गया और मेरा हाँथ पकड़ के मुझे सोफे पर ले आया मैं सर झुका के उस के साथ चलती हुयी सोफे पर बैठ गई तो फिर क्या था सब पिल पड़े मुझे पर

जावेद - यारो मैं तो एक ब्लू फिल्म भी लाया हूँ ग्रुप सेक्स वाली चला दूं क्या DVD पर ?

बंटी - यार मुझे तो टीना के मम्मे बड़े पसंद आये हैं कहते हुए वोह मेरे पीछे खड़ा होके सोफे के पीछे से थोड़ा झुक के मेरे बूब्स दबाने लगा

आशु - साले हरामी लगा ना देर क्या कर रहा है ? जैसे जैसे उस में चुदाई होगी हम भी वैसा ही करेंगे कभी ग्रुप में चुदाई की नहीं है तो उस से सीख के ही कर लेंगे

दीपक - जानेमन आ जा अब मेरी बाहों में कहते हुए उस ने मेरे होंठ चूम लिए और मेरे बूब्स मसलने लगा उतनी देर में आशु ने अपनी पेंट उतार दे और पूरा नंगा हो गया उस का लंड पहले से ही खडा था आशु को देख के समीर ने भी अपनी पेंट उतार दी तो जावेद वही से चिल्लाया की अबे मुझे भी आने दो तब तक बंटी भी पीछे खड़े हुए अपने कपडे उतार चुका था जावेद ने भी अपने कपडे उतार के वही जमीन पर डाल दिए और सोफे के पास आ गया उन सब को नंगा देख के दीपक भी नंगा हो गया और सब मुझे देखने लगे की मैं अपने कपडे उतारू आशु ने कहा की यार सोफे पर नहीं हो पायेगा चलो बेद पर चलते हैं तो आशु सब से आगे आया और बोला की मुझे मौका दो ( आशु ६ फुट का लम्बा तगड़ा लड़का था) कहते हुए उस ने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया बोला की बोलो कहा ले के चालू तो समीर ने कहा की पापा के कमरे में ही चलते हैं डबल बेड डाला हुआ है तो वोह सब मुझे कमरे में ले आये और आशु ने मुझे बेड पर पटक दिया जैसे ही मैं बेड पर गिरी सब मुझ पर पिल गए आशु ने आगे बढ़ के मेरी सलवार का नाडा खोल दिया और मेरी सलवार खीच के उतार दी समीर ने कहा की अब जल्दी से कुर्ता भी उतार दे वरना एक और फट जाएगा पहले ही एक फट गया है तो मैं उठ के कुर्ता उतारने लगी तो जावेद ने मेरी पेंटी नीचे खीच दी और मेरी चूत पर हाँथ फेर के बोला वाह क्या चिकनी चूत है साली ऐसी तो फिल्मो में भी नहीं देखी है

समीर तब तक DVD निकाल के ले आया था और उस ने पापा की टीवी पर लगा दी थी ब्लू फिल्म उस में सीन चालू हुआ तो उस में चार लड़के एक लड़की को चूम रहे थे कोई उसकी चूत चाट रहा था तो कोई उसके बूब्स .

वहां पर तो चार थे यहाँ पांच सब मेरे बगल में खड़े थे की क्या करे और कौन कहा शुरू हो जाये ? तब तक मैंने अपनी कुर्ती निकाल दी थी और ब्रा भी अब मेरे बूब्स लटक रहे थे उन सभी को लग रहा था की कहा से शुरू करे तो समीर ने ही शुरुवार कर दी की भाई लोग जिस को जहा जगह मिले शुरू हो जाओ मैं तो सबसे पहले अपना लौड़ा चुस्वाऊंगा तभी जावेद ने कहा की भाई लोग फिल्म में देखो वहा पर भी चारो खड़े हो के अपना लौड़ा चुसवा रहे हैं बारी बारी तो आशु ने कहा की चलो हम भी वैसा ही करते हैं पांचो मेरे सामने बेड पर खड़े हो गए अपना लौड़ा हाँथ से हिलाते हुए दीपक ने कहा की अब चल साली हमारे लौड़े चूस जैसे फिल्म में चूस रही है वोह छिनाल मैं बिना कुछ बोले अपने सामने खड़े समीर के लौड़े को पकड़ के अपने मुह में लेने लगी और उसे चूसने लगी तो समीर आहें भरने लगा आह्ह्ह आह्ह्ह म्मम्मम समीर बोला तू तो जल्दी सीख गई है टीना की लौड़ा कैसे चूसा जाता है पक्की छिनाल निकली तू तो मैंने अभी समीर के लौड़े को मुह में थोड़ी देर चूसा ही था की बंटी ने समीर के लौड़े के साथ साथ मुझे अपना लौड़ा भी पकड़ा दिया तो मैं जल्दी जल्दी दोनों के लंड मुह में लेने लगी कभी बंटी का कभी समीर का थोड़ी देर बाद आशु ने कहा की अब मेरी बारी तो मैं उस के तरफ मुड गई और उस के लौड़े को पकड़ के हिलाने लगी तो उस ने मेरे बाल पकड़ लिए बोला छिनाल मुह में ले हिलाना नहीं है तो मैंने उस के लौड़े को भी मुह में ले के चूस लिया और उस के लौड़े को मुह से अन्दर बाहर करने लगी थोड़ी देर बाद जावेद अपना लौड़ा लेके मेरे सामने चला आया तो मैंने उस के लौड़े को चूसना शुरू कर दिया उस का लौड़ा बड़ा छोटा था एक बार को तो मुझे हंसी आ गई की इतना छोटा है और चला है चोदने खैर समीर को बड़ी देर हो गई थी खड़े हुए उस का सबसे पहले चूसा था मैंने तो उस को सहन नहीं हुआ और वोह बेड पर लेट गया और मेरे नीचे अपना सर ले के आ गया और मेरी चूत चाटने लगा अब चार अपना लौड़ा चुसवा रहे थे समीर बेड पर लेट के मेरी चूत को चाट रहा था अब मुझे भी मज़ा आने लगा था तो मैं भी फिल्म की तरफ देखती हुयी मस्ती से सब के लौड़े बारी बारी चूसने लगी थी कभी बंटी तो कभी दीपक का तो कभी आशु का तो कभी जावेद का लौड़ा मेरे मुह में आ रहा था सब के स्वाद ले ले के मैं चूस रही थी १० मिनट बाद मेरा मुह दुखने लगा और ऐसा लगने लगा की लौड़े चूस चूस के मेरे होंठ फट जायेंगे तो मैंने कहा की अब बस कर मुझे दर्द हो रहा है मुह में

आशु - तो जानेमन हम क्या करे तेरे पास चूत तो एक ही है और हम पांच जब तक एक चोदेगा बाकि के चार तो कुछ ना कुछ करेंगे ही ना

जावेद - समीर भाई मुझे पहले चोदने दो ना प्लीज

समीर - तो आ जा ना किस ने रोका है ?

जावेद - अबे तो मैं चोदु कैसे तुम लोग उसे छोडो तो

आशु - अबे तो हम क्या करेंगे तब तक ?

क्रमशः ..........................
 
बदनाम रिश्ते-4

गतांक से आगे .............................

तभी दीपक का ध्यान फिल्म की तरफ गया तो उस ने कहा की सालो जैसे वोह चोद रहे हैं वैसे ही करो न तो सब ने देखा की उस में लड़की को एक लड़का मिशनरी पोज में चोद रहा था बाकि उस के शरीर से खेल रहे थे और बारी बारी अपना लौड़ा चुसवा रहे थे तो जावेद ने मुझे बेड पर धक्का दे दिया और अपना लंड मेरी चूत के दरवाजे पर रख दिया और कहा की भाई लोग मैं चोद रहा हूँ अब तुम लोग अपनी अपनी जगह पसंद कर लो कहते हुए उस ने अपना छोटा सा लंड मेरी चूत में पेल दिया मुझे ज्यादा लगी नहीं क्यूंकि उस का बड़ा नहीं था उसे ने अपने घुटने मोड़ रखे थे और मेरी चूत में अपना लंड पेल रखा था बाकि चारो सोच रहे थे की कौन कहा जाये तो आशु मेरे ऊपर आ गया और उस ने मेरे बूब्स चूसने शुरू कर दिए मुझे भी थोडा मज़ा आने लगा था और दर्द भी कम था तो मैं भी मस्ती में उन का साथ देने लगी थी

मैंने समीर का लौड़ा अपने हाँथ में पकड़ा और उस से कहा की आओ मैं तुम्हारा लौड़ा चूस लूं तो समीर खुश हो गया वाह रानी अब तो मस्ती में आ गई हो समीर ने मेरे सर के नीचे तकिया लगाया और घुटने मोड़ के बैठ गया मेरे मुह के पास तो मैंने थोड़ा सा सर ऊपर किया और समीर के लौड़े को मुह में भर लिया और गप्पा गप मुह में लेने लगी समीर की हाय हाय निकल गा जब मैंने मुह को टाईट कर के उस के लौड़े को कस के चूसना शुरू कर दिया तो

बंटी - समीर यार अकेले अकेले मज़े ले रहा है हमें भी तो लेने दे कहते हुए वोह मेरे सर की दूसरी तरफ आ गया अपना लौड़ा ले के तो समीर ने कहा की जरा बंटी को भी अपने मुह का मज़ा दे दे टीना

आशु मजे से मेरे बूब्स पर मुह मार रहा था कभी निप्पल तो कभी पुरे बूब को मसल मसल के दबा रहा था खली खड़ा था

दीपक तो मैंने दीपक की तरफ देखा और फिर अपने दूसरे बूब्स की तरफ देखा तो वो मेरा इशारा समझ गया की मैं उस अपने दूसरे बूब को चूसने के लिए कह रही हूँ

वोह भी झट से मेरे दूसरे बूब पर पिल गया और मेरे दोनों बूब्स को अब आशु और दीपक कुत्ते की तरह भम्भोड़ रहे थे जैसे किसी कुत्ते को पहली बार बोटी मिली हो

समीर और बंटी अपने मोटे मोटे लौड़े मेरे मुह में पेल रहे थे और जावेद मजे से मेरी चूत में लगा था पांच मिनट बाद आशु दीपक बाटी समीर ने अपनी अपनी जगह बदल ली अब मैं आशु का और दीपक का लौड़ा चूस रही थी ( सब में दीपक का लौड़ा सबसे बड़ा था और भयानक मोटा था ) समीर और बंटी मेरे बूब्स पर थे और जावेद के धक्के मेरी चूत में तेज़ हो गए थे और तभी

जावेद - भाई लोग मैं तो झड़ने वाला हूँ आह्ह्ह म्मम्म कहते हुए उस ने चुदाई तेज़ कर दी मेरी चूत की और चार पांच धक्को के बाद ही उस ने अपनी सारी गंदगी मेरे अन्दर डाल दी मेरी चूत एक गरम से अहसास से भर गई

जावेद ने अपना लौड़ा मेरी चूत से निकाल और हट गया और बोला अब जिस को आना हो आ जाओ मैं तो निपट गया

आशु - यार समीर अब मेरी बारी तुम दोनों तो कल भी निपट चुके हो आज पहले हम लोगो को कर लेने दो

समीर - जा बेटा ऐश कर तू भी क्या याद रखेगा

आशु फटाफट उठा और अपना लौड़ा ले के मेरी चूत के पास बैठ गया और चूत में लौड़ा डालने की कोशिश करने लगा पर उस का गया नहीं क्यूंकि ????

ऊओह्ह्ह्ह आह आह क्या कर रहे हो आशु मैंने कहा चूत में डाल वोह नीचे है थोड़ी पहले किसी की चूत देखि नहीं है क्या ?

तो आशु ने शरमाते हुए कहा की हाँ पहली बार ही है हम सब का तो मैंने कहा की तू तो सब में अनाड़ी लग रहा है कहते हुए मैंने दीपक का मोटा सा लौड़ा वापस अपने मुह में भर लिया और समीर और बंटी हँसते हुए मेरे बूब्स चूसने लगे आशु ने फिर निशाना लेते हुए डाला तो अन्दर चला गया चूत में मेरी मुझे अब थोडा सा दर्द हुया लेकिन जावेद के वीर्य से चूत भरी थी तो उस के वीर्य ने क्रीम का काम किया और उस का लंड आराम से अन्दर चला गया आशु ने मेरी चुदाई शुरू कर दी धीरे धीरे जावेद तब तक जा के अपने कपड़ो में से सिगरेट निकाल लाया था और वही पीने लगा था आशु ने अभी थोड़े धक्के ही मारे होने की उस के लंड ने मेरी चूत में पिचकारी चला दी

आशु - मर गया रे आःह्ह्ह म्मम्म यह क्या हुआ यार मेरे साथ इतनी जल्दी कैसे चूत में पिचकारी चल गई

समीर - साले हरामी जब चोदा नहीं जाता तो क्यों सब से पहले जाने की जिद्द कर रहा था

दीपक हट साले मैं बताता हूँ कैसे की जाती है चुदाई दीपक ने मेरे हाँथ से अपना लंड खीचा और कहा की देख जानेमन मैं कैसे तेरी चूत का बाजा बजता हूँ तो मैंने भी मस्ती में कहा की फाड़ मत देना बस बाकि जो करना है करो तुम्हारा बड़ा मोटा है थोडा आराम से करना अब मेरी चूत में दो लोगो का वीर्य भर गया था दीपक गया और उस ने मेरी चूत पर अपना लौड़ा रख के जो पेला है मैं उचक गई

टीना - आह आह्ह्ह क्या कर रहे हो ?आःह्ह मार डालोगे क्या फ्री की चूत है तो क्या फाड़ दोगे ?

दीपक - हाँ साली रंडी मैं तेरी फाड़ ही डालूँगा क्योंकि तू दूसरी बार तो देगी नहीं चोदने तो एक बार में ही तेरा बाजा ऐसा बजाऊंगा की याद रखेगी की किस मर्द से पाला पडा था

टीना - देखो दीपक आराम से करो वरना मैं नहीं करने दूँगी कुछ

दीपक - अरे गुस्सा क्यूं होती हो जाने मन मैं आराम से ही करूंगा वोह तो मैं पहली बार में अपने लोडे को पूरा पेल रहा था ताकि एक ही बार दर्द हो फिर बाद में मज़ा आ जाये तुझे भी. मैंने मन ही मन सोचा की अगर चूत में पहले से ही वीर्य नहीं पड़ा होता तो इस ने तो मेरी फाड़ ही देनी थी लेकिन दीपक बाद में सच में आराम से करने लगा उस ने बड़े धीरे धीरे से धक्के लगाना शुरू किया और साथ ही साथ मेरे चूत की फुनगी को भी अपने हाँथ से मसल रहा था तो मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था दर्द तो हो रहा था लेकिन दर्द में भी मज़ा आ रहा था मेरी चुदाई अब रफ़्तार पकड़ती जा रही थी दीपक ने मेरी कमर को कस के पकड़ लिया और जोर से चोटे मरना शुरू कर दिया मैं दर्द से आह आह उई उई करने लगी मज़ा भी था और दर्द भी तो मेरी आवाजे निकल रही थी सिस्कारिया भर रही थी मैं साथ साथ मैं चिल्लाते भी जा रही थी की धीरे धीरे उसे १५ मिनट हो गए मुझे चोदते चोदते तो मैंने कहा की बस करो मैं दो बार झड चुकी हूँ अब तक अब तो मुझे छोड़ दो तो दीपक ने कहा की बस जानेमन मैं भी झड़ने वाला हूँ उस ने मेरी कमर में अपने नाखून गडा दिए और जो चुदाई शुरू की मेरी की क्या कहू उसके हर धक्के पर मैं उचक उचक जा रही थी मेरे बूब्स उछल उछल के यहाँ वहाँ हो रहे थे उस ने मेरी बुरी हालत कर दी अब तो मैं समीर और बंटी के लौड़े चूसना भूल के सिसकारी भर रही थी दर्द हद्द से ज्यादा बड गया था की तभी ऐसा लगा की ढेर सारा गरम पानी मेरे अन्दर भर गया हो दीपक ने भी मेरी चूत में अपना वीर्य निकाल दिया था और वोह पसीने से लथपथ था यहाँ मेरी हालत भी ख़राब हो गई थी चूत में जलन होने लगी थी मैंने चूत पर हाँथ लगा के देखा तो हल्का हल्का खून सा दिखाई दिया मैं समझ गई की दीपक ने मेरी चूत का भुरता बना दिया है साले ने फाड़ के ही रख दी है सच में

तीन लौड़े मेरी चुदाई कर चुके थे अभी तो दो और लौड़े बचे थे और मेरी हालत खराब हो गई थी दीपक ने भी अपना लौड़ा मेरी चूत से निकाल लिया तभी चूत में से देर सारा वीर्य बाहर निकल के बेड पर गिर गया आखिर तीन तीन लौडों का वीर्य था कब तक अपनी छोटी सी चूत में भर के रखती

मैंने समीर से कहा की अब मेरे बस का नहीं है चुदवाना मुझे प्लीज छोड़ दो तो बंटी ने कहा की नहीं नहीं ऐसा कैसे हो सकता है मैं क्या चुतिया हूँ जो ऐसे ही चला जाऊं

कहते हुए वोह जल्दी से मेरी चूत पर आ के बैठ गया और अपने लंड को मेरी चूत पर रखने लगा मैंने कहा की जो करना है जल्दी कर लो मैं एक बार दर्द सह के सब करवा लुंगी अब देर मत करो मुझ से अब ज्यादा दर्द सहन नहीं होगा यह सुन के समीर ने कहा के बस करो बे अब जल्दी निपट लो मेरी भी बारी आनी है अभी

तो बंटी ने जल्दी से अपना लौड़ा मेरी चूत में डाल दिया और मेरी चुदाई का फोर्थ राऊंड चालू हो गया तब तक आशु जो की सब से जल्दी झड गया था उस का खड़ा भी हो गया सब से जल्दी तो उस ने कहा की यार मैं तो मजे ले ही नहीं पाया मैं तो आठ दस चोटों में ही झड गया था था देखो ना कितनी जल्दी फिर खड़ा हो गया है मुझे एक बार और करने दो ना मैं तब तक अपना ध्यान दर्द से हटाने के लिए ब्लू फिल्म देख रही थी ताकि मेरा ध्यान चूत पर ना जा के कही और लगा रहे तो दर्द कम महसूस होगा मैंने ब्लू फिल्म में देखा की लड़की ने एक लड़के का लंड अपने मुह में ही झडवा लिया तो मैंने भी फुल छिनाल बन के कहा की आ जा तेरा मैं अपने मुह से निकाल देती हूँ एक बार और वरना हमेशा रोता रहेगा की मुझे मजा नहीं आया था .

समीर - साली तू तो पूरी रंडियों जैसी बातें करने लगी अब तो

टीना - तुने वही तो बना दिया है मुझे मैंने समीर से कहा और आग बरसाती नज़रो से उसे घूरा तो समीर सकपका के दूसरी तरफ देखने लगा

टीना - आ जा आशु तुझे वोह मजा दूँगी की तू भी क्या याद करेगा ( अब मुझ को भी समझ में नहीं आ रहा था की मुझे क्या हो गया है )

आशु तेज़ी में मेरे मुह के पास अपना लौड़ा ले के आ गया की ऐसा ना हो की मेरा मन बदल जाये मैंने आशु का लौड़ा अपने मुह में चूसना शुरू कर दिया और ऐसे कस कस के की आशु की हालत पतली हो गई की कब मैं उस का लौड़ा अपने मुह से निकालू

तब तक बंटी ने मेरे चूत में अपना लावा निकाल दिया उस को फिर से भर दिया अपने वीर्य से बंटी हटा नहीं की मेरा बहनचोद भाई भी तेज़ी से पिल गया मेरी चूत में

थोड़ी देर में ही मैंने आशु की वोह गत बना दी की उस ने मेरे मुह में ही अपना वीर्य निकाल बैठा तो मैं उसे धक्का दे दिया की हट अब और पूरा वीर्य साइड में थूक दिया

उधर समीर के धक्के शुरू थे उस ने भी दीपक की तरह से मेरी कमर पकड़ के मेरी चूत चोदना चुरू कर दिया था और थोड़ी देर में उस ने भी मेरी चूत में अपना वीर्य निकल दिया और मेरे ऊपर लस्ट पस्त होके लेट गया अब तक मेरे पुरे अंग अंग में दर्द की लहरे उठने लगी थी ऐसा लग रहा था की किसी ने मेरी बहुत पिटाई कर दी हो

मैं अपनी आँख बंद कर के लेट गई थी मैंने आँख बंद करे करे ही कहा की अब सब यहाँ से निकल जाओ तेज़ी में वरना ठीक नहीं होगा ( अब तक मैं समझ गई थी की हर मर्द चूत का गुलाम होता है अगर चूत चाहे तो मर्द से कुछ भी करवा सकती है यह मैं आप को अपनी किसी और कहानी में बताउंगी की चूत के जलवे क्या होते हैं )

सब बिना कुछ बोले बाहर चले गए यहाँ तक की समीर भी उठा और सीधे बाहर निकल गया मैं एक घंटे तक वैसे ही नंगी लेटी रही दर्द और मज़ा क्या था कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन अब दिमाग में काफी कुछ साफ़ हो गया था की यहाँ कोई रिश्ता नहीं है बस चूत और लंड का रिश्ता है.

सब चले गए थे दीपक आशु जावेद और बंटी भी समीर टीवी देख रहा था मैं उठी सीधे बाथरूम में घुस गई अब मुझे अपने आप से घिन सी आ रही थी ऐसा लग रहा था की जाने क्या करू मैं अपना मैं कम से कम १ घंटे तक नहाती रही क्यूंकि मुझे लगता रहा की मैं अब भी गन्दी हूँ लेकिन एक ओरत कितनी गन्दी हो सकती है मुझे बाद में मालूम चला

आगे क्या हुआ यह अगली बार बताउंगी अभी तो मुझे बहुत कुछ सहना था

क्रमशः ....................................
 
भाभी ने माँ को चुदवाया

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम वासु है दोस्तों यह स्टोरी मेरी भाभी और मेरी माँ के साथ मेरे गलत सम्बन्ध के ऊपर आधारित है। मेरी माँ और भाभी के बूब्स बहुत मोटे है और गांड दोनों की एक जैसी ही है। मेरी माँ की उम्र 42 साल है और मेरी भाभी की उम्र 34 साल है और में 18 साल का हूँ। दोस्तों यह बात तब की है जब में एक बार माँ को नंगी देखकर पागल हो गया था.. माँ बिल्कुल नंगी होकर नहा रही थी और तब से में माँ के जैसे फिगर वाली औरतों में ज़्यादा रूचि लेने लगा और मेरी बहुत तमन्ना थी कि में भी चुदाई करूं.. माँ की नंगी चूत को चाटूं और माँ की गांड भी मारुँ और फिर लगता था कि सब यूँ ही रह जाएगा.. लेकिन फिर में बुआ के यहाँ गया और वहाँ पर मेरी भाभी भी थी.. भाभी हमेशा साड़ी के अंदर कभी भी पेंटी नहीं पहनती थी और यह बात मैंने भाभी के मुहं से सुनी थी वो एक दिन माँ से कह रही थी कि आप भी तो पेंटी नहीं पहनती और फिर मैंने भाभी को फंसाने की सोची और फिर एक दिन मेरी भाभी अपने बच्चे को दूध पिला रही थी और मैंने उसके मोटे मोटे बूब्स देखे और में उनको घूरकर देखने लगा.. लेकिन भाभी ने मुझे इस तरह उनके बूब्स को देखने पर भी कुछ नहीं कहा और ब्लाउज को थोड़ा नीचे कर लिया। फिर में धीरे धीरे भाभी से बहुत मज़ाक करने लगा और खुलकर बातें करने लगा.. तो वो भी थोड़ा बहुत समझ जाती थी और फिर धीरे धीरे भाभी का भी मेरे साथ मन लग गया और उन्हें भी मेरे से बात करना अब बहुत अच्छा लगता था।

फिर एक दिन हम बातें कर रहे थे और थोड़ी ही देर के बाद भाभी बोली कि में नहा लेती हूँ.. मुझे बहुत गरमी लगने लगी है। तो मैंने कहा कि हाँ नहा लो.. तो वो बहार बरामदे में दरवाजा बंद करके नहाने लगी। तो मैंने मजाक में कहा कि दरवाजा थोड़ा अच्छे से बंद करना वरना में तुम्हे नहाते हुए देख लूँगा। तो वो कहने लगी कि नहीं तुम अंदर ही रहना। फिर वो थोड़ी देर के बाद नहाकर आ गई और बोली कि में बिल्कुल नंगी होकर नहाती हूँ और पेटिकोट भी नहीं पहनती.. क्योंकि वो गीला होकर चिपक जाता है और नहाने में बहुत दिक्कत होती है इसलिए में हमेशा ऐसे ही नहाती हूँ और फिर मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और चूमने लगा.. तो वो कहने लगी कि चल दूर हट वरना कोई आ जाएगा। तो मैंने कहा कि कोई नहीं आएगा.. प्लीज एक बार करने दो ना और मैंने उनके होंठ को अपने होंठो से चूस लिया.. तो वो कह रही थी कि बस करो समझा करो कोई आ जाएगा। फिर मैंने भाभी को छोड़ दिया और उसके अगले दिन वो कपड़े बदल रही थी.. तो मैंने कहा कि आ जाऊं.. तो वो कहने लगी कि सब तुम्हारा ही तो है आ जाओ। फिर भाभी बिल्कुल नंगी हो गई और उसने अपने पेटिकोट का नाड़ा खोल दिया तो वो नीचे गिर गया और में भाभी से लिपट गया और मैंने कहा कि में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और उसे चूमने लगा और बूब्स चूसने लगा। तो वो कहने लगी कि उफफफफफ्फ़ आहह वासु आराम से पियो दूध और थोड़ा सा बचा देना बच्चे को भी पिलाना है। फिर मैंने एक बूब्स पिया और फिर थोड़ी देर के बाद दूसरे वाले से भी पिया.. फिर मैंने कहा कि में नीचे की जगह भी चूस लूँ.. लेकिन उसने कोई भी जवाब नहीं दिया.. बस सिसकियाँ लेती रही। तो मैंने देर ना करते हुए झट से अपना मुहं उसकी चूत पर लगा दिया और उसको बोला कि में दूध की जगह जूस तो सारा पी सकता हूँ ना। तो वो कहने लगी कि वासु इसमे से जितना जूस पिया जाये पी लो उफफफ्फ़ अहह माँ मर गयी उफफफफफ्फ़ और वो मेरे सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी और फिर कहने लगी और ज़ोर से चूस और कुछ देर के बाद कहने लगी कि मुझे अपना वो दिखाओ। तो मैंने कहा कि आपका ही है निकाल लो ना.. तो उसने मेरी पेंट को खोलकर लंड को बाहर निकाला और कहने लगी कि यह तो बहुत लम्बा है और मेरी उम्मीद से कहीं बड़ा है और मैंने इतना बड़ा लंड कभी भी नहीं देखा और यह कहकर लंड को मुहं में लिया और चूसने लगी। तो में कहने लगा कि हाँ भाभी और लो पूरा डालो मुहं में.. हाँ और आगे पीछे करो.. भाभी हाँ बहुत अच्छे.. हाँ ऐसे ही करो। तो बोली कि हाँ वासु में कर रही हूँ और फिर थोड़ी देर बाद कहने लगी कि अब रहा नहीं जा रहा.. तो वो कहने लगी कि एक मिनट रूको.. में मेक्सी पहन लूँ फिर नीचे से नंगी रहूंगी तो तुम आराम से कर लेना और कपड़े पहने में भी ज्यादा देर नहीं लगेगी और फिर उन्होंने मेक्सी पहनी और उन्होंने अपनी मेक्सी को चूत से ऊपर अपने बूब्स तक उठा लिया।

फिर मैंने उनको नीचे लेटा दिया और लंड को एक ही धक्के के साथ चूत के अंदर डाल दिया तो वो बहुत ज़ोर से चिल्ला पड़ी अहह उईईई माँ मरी.. धीरे करो। तो मैंने कहा कि क्या हुआ? क्या ज्यादा दर्द हो रहा है? तो वो कहने लगी कि हाँ तुम्हारा लंड बड़ा है ना.. तुम एक काम करो थोड़ा मक्खन लगा लो.. तो मैंने अपने लंड पर मक्खन लगाया और लंड को एकदम ज़ोर से धक्का देकर अंदर डाल दिया। तो वो उफफफफ्फ़ अहह माँ मर गई और फिर उसने मेरी कमर में अपने दोनों पैर फंसा दिए और मुझे गंदे तरीके से चूमने लगी। फिर में नीचे से पूरा दम लगाकर धक्के मारता रहा और फिर वो भी अपने चूतड़ उछाल कर मरवाने लगी और कहने लगी कि अब तुम थक गए होंगे में तुम्हारे ऊपर आती हूँ और फिर वो मेरे ऊपर आकर चूतड़ो को घुमाने लगी और बूब्स मेरे मुहं में डाल दिया। फिर मैंने उसे कुतिया बनाया.. वो कुतिया बनी हुई क्या लग रही थी? पेरों में पायल और हाथों में चूड़ियाँ और बूब्स पर लटकता हुआ मंगलसुत्र.. बस मैंने और तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए और फिर कहने लगी कि में झड़ गयी हूँ और फिर थोड़ी देर के बाद में भी झड़ने लगा तो उन्होंने मेरा सारा वीर्य अंदर ही गिरा दिया और कहने लगी कि तुमने आज मुझे बहुत खुश कर दिया और फिर मेक्सी को नीचे किया और फिर हम किस करने लगे।

फिर हमने साथ में बैठकर खाना खाया और फिर हम एक हफ्ते तक लगातार ऐसे ही चुदाई करते रहे। फिर कुछ दिनों के बाद मुझे मम्मी ने घर बुला लिया.. तो मेरे जाते वक्त भाभी रोने लगी और में भी रोने लगा। तो मैंने कहा कि में तुम्हारे बिना कैसे रहूँगा और अब में घर में अकेला क्या करूँगा.. मुझे आपकी बहुत याद आएगी और कहा कि आपके पास तो आपके पति का लंड है और में किसकी चूत से मजे लूँगा और मेरी तो अभी शादी भी नहीं हुई है.. पापा, मम्मी को चोदते है.. में उन्हें देख देख कर भी थक चुका हूँ और माँ के अलावा घर पर कोई औरत नहीं है में क्या करूं? कैसे अपने लंड को शांत करूं और मम्मी को नंगी देखकर तो मुझे आपकी और याद आएगी और में उन्हे रोज़ नंगी नहाते हुए देखता हूँ। फिर भाभी बोली कि तुम अपनी माँ को पटा लो और हर रोज़ तुम्हे मज़े आ जाएगे और तुम्हारा लंड भी शांत हो जाएगा। तो मैंने कहा कि माँ नहीं मानेगी और वो बोली कि तुम्हारा लंड देखकर तो हर औरत मान जाएगी और वो भी लंड की बहुत भूखी है और साड़ी के नीचे बिल्कुल नंगी रहती है.. वो साली तुम्हारे पापा से चुदने के अलावा और किसी से अभी तक नहीं चुदी है.. लेकिन में तुम्हारी मदद करूँगी और फिर वो मान जाएगी और फिर तुम माँ को बहुत खुश रखना।

फिर भाभी ने कहा कि तुम बाथरूम से नहाकर बाहर निकलना और अपना तोलिया उसके सामने गिरा देना और उसे अपना लंड दिखा देना। फिर में घर आ गया और मैंने ऐसा ही किया.. नहाते हुए बिल्कुल नंगा हो कर नहाने लगा और जानबूझ कर तोलिया और अंडरवियर बाथरूम में नहीं लेकर आया और माँ को आवाज़ दी और मुहं पर साबुन लगा लिया और आंख बंद करके हाथ बाहर निकल कर तोलिया लेने लगा और दरवाजा ज्यादा खोल दिया और मेरी माँ तोलिया देते हुए और मेरे लंड को देखती रह गयी और चली गयी। तो मैंने भाभी को फोन पर सब कुछ बताया.. फिर उसने मुझे दूसरा प्लान बताया और वो कहने लगी अपनी चैन में अपना लंड फंसाना पड़ेगा और फिर चिल्लाना पड़ेगा। तो मैंने कहा कि भाभी में माँ के लिए कुछ भी करूंगा और मैंने ऐसा ही किया और हल्का सा पेंट की चैन में लंड फंसाकर चिल्लाया तो माँ मेरी आवाज सुनकर आ गई और बहुत डर गयी। फिर मेरे लंड की तरफ देखने लगी और हाथ लगाते हुए डरने लगी और एकदम से लंड पकड़कर चैन पर तेल डाला और लंड पेंट की चैन से निकल गया और मेरा लंड एकदम से माँ के मुहं की तरफ खड़ा हो गया। तो माँ उसके सुपाड़े की खाल उतारकर देखने लगी और कहने लगी कि अंडरवियर क्यों नहीं पहनते हो?

तो मैंने कहा कि माँ तुम भी तो नहीं पहनती हो। तो वो कहने लगी कि हमारी बात कुछ और है.. तो मैंने कहा कि क्या बात है? वो कहने लगी कि हमारा इतना मोटा केले जैसा नहीं होता है तो मैंने कहा कि माँ फिर कैसा होता है? माँ ने कहा कि बस थोड़ा छोटा सा छेद होता है। तो मैंने कहा कि माँ आप भी आपका वो दिखाओ ना कैसा होता है? तो माँ ने मेरे लंड हाथ से छोड़ दिया और फिर मैंने माँ से कहा कि आपने भी मेरा देखा है ना.. आप भी दिखा दो ना। फिर माँ ने कहा कि नहीं में नहीं दिखा सकती हूँ और फिर मैंने कहा कि माँ प्लीज आपको मेरी कसम। तो माँ ने कहा कि इसमे कसम देने की क्या ज़रूरत थी? तो मैंने कहा कि माँ क्या आप मेरी कसम तोड़ोगी? तो माँ ने अपनी साड़ी को ऊपर करके मुझे दिखाने लगी.. उनकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे और में नीचे बैठकर बड़े ध्यान से देखने लगा और मैंने कहा कि माँ साड़ी को ऊपर करके पकड़े रहो और दोनों पैर खोलकर दिखाओ ना और माँ ने अपने दोनों पैर खोल दिए और मुझे अपनी चूत दिखाने लगी।

तो मैंने एकदम से माँ की चूत के दाने को मुहं से कसकर चूसा और माँ चिल्लाई उफफफफ्फ़ आईई क्या कर रहा है.. छीईई.. मुहं हटा वहाँ से वो गंदी चीज़ है बेटा। तो में कहने लगा कि नहीं माँ मुझे अच्छी लगती है और माँ उफफफ्फ़ अहह कर रही थी.. फिर मुझे जोश चड़ने लगा तो में और चूत पर मुहं से झटके लगाने लगा माँ उफफफफफ्फ़ अहह और मेरा सर चूत में दबाने लगी। फिर माँ ने कहा कि चल बस हो गया अब छोड़ दे। तो मैंने कहा कि अभी तो इसकी प्यास बुझाऊंगा माँ यह सुनते ही बोली कि तू समझदार है और सब जनता है.. फिर भी मुझे तड़पा रहा है। इतना प्यारा लंड है तेरा.. कितना मज़ा देगा यह आह उफ़फफफफ और फिर शरमाने लगी और वो पूरे जोश में थी.. फिर कहने लगी कि बेटा मेरी साड़ी खोल दो ना। तो मैंने माँ की साड़ी खोली और माँ का ब्लाउज, ब्रा और अब माँ के विशाल बूब्स मेरे मुहं में थे और माँ ने सिसकियाँ भरना शुरू कर दिया और दूसरा बूब्स मेरे मुहं में डाल दिया। तो मैंने माँ का नाड़ा खोल दिया और माँ का पेटिकोट खुल गया और नीचे गिर गया.. माँ पूरी नंगी थी। अब माँ क्या लग रही थी.. सर पर बिंदी बूब्स पर लटकता मंगलसूत्र और हाथों में चूड़ियां और पेरों में पायल और बिल्कुल नंगी.. दोस्तों आज मेरा सपना सच होने जा रहा था.. मैंने कहा कि माँ में आपकी चुदाई के पहले चूत में सिंदूर भरूँगा.. तुम्हे पहले अपना बनाऊँगा फिर चोदूंगा.. तो माँ कहने लगी कि तुझे जो करना है कर.. लेकिन मेरी प्यास बुझा दे.. में बहुत बहुत दिनों से भूखी हूँ.. तेरे पापा भी यहाँ पर नहीं रहते है। फिर मैंने सिंदूर का लाल तिलक झांटो के ऊपर लगा दिया और माँ की चूत के होंठो पर लिस्टिक लगाई और फिर उसे किस करने लगा माँ उफफफफफ्फ़ कितना अच्छा बेटा है तू.. थोड़ा लंड पर शहद लगा ले.. में भी तेरा लोलीपोप चूसूंगी.. तो माँ और में 69 पोज़िशन में एक दूसरे के लिंग और योनि को चूसने लगे उफफफफ्फ़ हफफफ्फ़ बेटा बहुत मज़ा आ रहा है। तुम्हारे लंड से शादी करके अच्छा लग रहा है और में माँ के ऊपर ही लेट गया तो मैंने माँ की चूत पर मेरा लंड लगाया। वो एकदम चिल्ला गई.. लेकिन चूत गीली होने के कारण माँ ज्यादा ज़ोर से नहीं चिल्लाई और कहने लगी कि उफफफ्फ़ कितना मोटा है.. मेरी चूत को इसे लेने के लिए पूरा मुहं खोलना पड़ रहा है। फिर मैंने धक्के और तेज़ कर दिए और माँ ने भी चूतड़ को उछालना शुरू कर दिया।

फिर वो कहने लगी कि उफ़फ्फ़ अह्ह्ह बेटा और तेज़ करो.. माँ को चोद और चोद उउफफफफ्फ़.. बुझा दे इसकी प्यास.. तो में माँ के दोनों पैर अपने हाथ से पकड़कर चोदने लगा और चूमने चाटने लगा। तो माँ कहने लगी कि तू मुझसे कितना प्यार करता है? तो मैंने माँ को अपनी गोद में ले लिया और हम एक दूसरे से चिपक कर चूमने लगे.. माँ उफफफफफ्फ़ आअहह बेटा बहुत मज़ा आ रहा और माँ ने कहा कि तू थक गया होगा और माँ मेरे ऊपर आ गयी और मेरे लंड पर बैठ गयी और उचकने लगी और फिर लंड पर चूतड़ को गोल गोल घुमाने लगी.. माँ उफफफ्फ़ आह बेटा में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और माँ कहने लगी कि में झड़ने वाली हूँ और फिर मैंने माँ को गोद में ले लिया और माँ को लेकर खड़ा होकर चोदने लगा। माँ की चूत और चूतड़ को खड़े खड़े उछाल रहा था और माँ मेरे गले में हाथ डालकर किस कर रही थी और मेरे निप्पल चूस रही थी। फिर स्मूच करते ही माँ झड़ गयी और फिर मैंने भी झड़ गया और फिर में और माँ नंगे ही सो गये। फिर माँ और मैंने खाना खाया और हम दोनों पूरे दिन नंगे रहे और हमने 4 बार और चुदाई की और फिर हम सो गये ।।
 
माँ ने मजा लिया

दोस्तों में उत्तरप्रदेश के एक छोटे से गावं का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र 26 साल है और मेरी माँ की उम्र 47 साल है उसकी हाईट 4.6 होगी उनका छोटा कद है.. लेकिन उनके बूब्स 38 से तो कम नहीं है हाँ एक विशेष चीज़ जो उसकी गांड है वो 43 इंच की है जिसे नंगा देखकर मेरे दिल में माँ के बारे में धीरे धीरे बुरे ख्याल आने लगे। फिर एक बार मेरी नौकरी भुवनेश्वर में लगी और मेरे वहाँ पर जाने के बाद एक दिन मेरी माँ वहाँ पर मेरा सामान सेट करने के लिए आई।

फिर जब वो आई मेरे दिल में अजीब सी ख़ुशी होने लगी और मुझे लगा कि आज में सारी कहानियाँ जो पढ़ी है वो खुद आजमा कर देखूँगा और इस ख्याल से ही लंड उछाले मारने लगा। फिर में ऑटो से माँ को स्टेशन से घर पर लाने गया.. वो साड़ी पहने हुई थी और बहुत सुंदर लग रही थी और में उसे देखकर अपने पुराने ख़यालो में खो गया.. जब पहली बार मैंने उनकी गांड देखी थी अपने गावं में छत पर से वो सुबह सुबह का समय था और जब वो संडास के लिए आई थी और उसकी बड़ी, गोरी गांड मेरे सामने थी और उसने अपनी साड़ी को कमर से ऊपर उठाकर मुझे गांड दिखा दी और जब वो झुककर लोटे से गांड धो रही थी तो उतना ही देखकर मैंने वहीं पर मुठ मार लिया.. लेकिन वो सपना सच करने का सुनहरा मौका अब आ गया था।

मैंने दो रूम का घर लिया था जो कि बहुत सुनसान जगह पर था.. फिर मेरी माँ नहाने बाथरूम में चली गई और फिर बाहर आकर उन्होंने दोपहर का खाना बनाया और फिर हम दोनों खाना खाकर अपने अपने कमरे में सो गये। फिर उसे रात मैंने कम से कम चार बार मुठ मारी तब जाकर मुझे नींद आई और फिर मैंने प्लान भी बना लिया भोसड़ी की चूत को चोदने का। तो सुबह होते ही में झट से उठा और मैंने एक पतला टावल अपने मुहं पर रख लिया और कंप्यूटर की तरफ़ पैर रखा जिससे कंप्यूटर के ऊपर बनने वाली इमेज से मुझे पता चल जाए कि कोई आ गया है या आ रहा है और फिर लंड को पूरा खड़ा करके सो गया और बाहर सलामी देने लगा.. लेकिन मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी कड़ी क्योंकि एक तो यह खुद ही माँ के ख्याल से ही खड़ा हो जाता है और दूसरा सुबह का टाईम भी था अपने आप भी खड़ा रहता है। फिर मेरा लंड माँ की शान में खड़ा होकर सलामी दे रहा था और फिर माँ मेरे पास आई और जैसे ही उसकी नज़र मेरे खड़े लंड पर पड़ी तो वो हड़बड़ा गई और जल्दी से कमरे का झाड़ू मारा और बाहर निकली..

लेकिन वो दरवाज़े के पास से मेरे खड़े लंड को देख रही थी.. जो मुझे कंप्यूटर की बंद स्क्रीन पर पता चल रहा था। तो में मन ही मन बहुत खुश था कि शायद मेरे लंड की अब किस्मत खुलने वाली है.. फिर क्या मैंने दो दिन तक बहुत लंड दिखाया और एक बार तो मुठ भी मारते हुए अपनी दोनों आंखे बंद किए चोरी चोरी देखता रहा.. जैसे कि में किसी सपने में हूँ उसने मेरा पूरा काम देखा जब तक कि मेरा माल बाहर ना निकल गया। फिर तीन दिन के बाद अचानक से मुझे सर में बहुत दर्द होने लगा.. शायद मुझे बुखार आने वाला था। माँ बोली कि में तेरे सारे बदन पर तेल लगा देती हूँ और तेल गरम करके लाने चली गई। फिर जब वो आई तब में लूँगी में था और मेरे लंड ने लूँगी का टेंट बना दिया था। फिर वो जैसे तैसे नीचे तक तेल लगाती गई और फिर पेट पर आ चुकी थी उसकी हाईट कम थी और जब उसने खड़ी होकर मेरे सर पर तेल लगाया तो मेरा सर उसकी गद्देदार बूब्स से दबने लगा और लंड झटके देने लगा.. जो माँ एक दो बार पहले ही देखते हुए तेल लगा रही थी और फिर तेल लगाने के बाद वो मुझसे बोली कि में एक सप्ताह तक लगातार तेल लगा दूँगी.. तो सब ठीक हो ज़ायगा। तो में ख़ुशी से पागल होकर उछलकर बाथरूम में गया और सारी भड़ास निकाल दी।

फिर दूसरे दिन मैंने लूँगी के अंदर अंडरवियर पहना था.. तो मैंने बोला कि में लूँगी हटा देता हूँ.. यह तेल की मालिश से गंदी हो ज़ायगी और मैंने उसे हटा दिया तो मेरा लंड अंडरवियर में तना हुआ था और झांटे साईड से दिख रही थी। माँ ने उसे देखा और तेल लगाने लगी और आज वो मालिश करते करते मेरी जाँघ तक गई.. बस फिर क्या था तीसरे दिन मेरी हिम्मत बढ़ते हुए मैंने माँ से कहा कि माँ आप को बुरा तो नहीं लगता कि मेरा लंड ऐसे खड़ा रहता है में इसका क्या करूं यह रोज सुबह ऐसे ही खड़ा रहता है। तो वो बोली कि इस उम्र में अक्सर ऐसा होता है.. कोई बात नहीं। तभी में झट से बोला कि मुझे दर्द हो रहा है क्या में इसे अंडरवियर से बाहर निकाल दूँ और वैसे भी आपने बचपन से मुझे पाला है और आपने ना जाने कितनी बार देखा होगा? तो वो कुछ ना बोल पाई और मैंने अपना लंड बाहर निकाल दिया और मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धक धक करने लगा। लंड पूरे जोश में सांप की तरह खड़ा होकर डोल रहा था। वो आज लंड के बहुत करीब तक तेल लगाने लगी.. मैंने माँ से फिर कहा कि क्या में एक बात कहूँ आप बुरा तो नहीं मनोगी? तो वो बोली कि अब क्या है? फिर में बोला प्लीज इस पर भी थोड़ा तेल लगा दो ना मुझे अंडरवियर की वजह से बहुत दर्द हो रहा है।

तभी वो बहुत हैरान थी। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़कर लंड पर रख दिए तो वो बोली कि तुझे क्या हो गया है? तो मैंने कहा कि प्लीज़ माँ मुझे बहुत दर्द हो रहा है और उसने अपने हाथ से लंड को ऊपर नीचे कर दिया और फिर वो मालिश करती ही गई और में धीरे धीरे जन्नत में जाता ही गया और जब मेरा वीर्य निकलने वाला था तो उसने लंड को पकड़कर तिरछा कर दिया और पूरा वीर्य नीचे जमीन पर गिरा दिया। में तो ख़ुशी से झूम उठा। तभी वो बोली कि में तेरी परेशानी को समझ गई हूँ और अब में रोज तेरा जब जब यह खड़ा होगा में इसका वीर्य निकाल दूँगी। में तो ख़ुशी से झूम उठा और अगला दिन शनिवार रविवार का था और दोनों दिन छुट्टी में पूरे दिन में घर में नंगा घूमने लगा और मेरा लंड खड़ा होते ही वो तेल लगाकर मेरा वीर्य निकाल देती। अब माँ के किचन में बर्तन धोते वक़्त पीछे से गांड में लंड सटा देता हूँ और फिर एक बार जब वो लंड से माल निकाल रही थी तो मैंने उससे उसके बूब्स से दूध आने की बात पूछी। तो वो बोली कि इस उम्र में दूध थोड़े ही आता है.. वो तो जब बच्चा होता है तब आता है। तो मैंने कहा कि में देखूँगा और मैंने अपने हाथ से बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से दबा दिया..

लेकिन उसने ज्यादा विरोध नहीं किया और में ज़ोर ज़ोर से बूब्स को दबाने लगा और दबाते दबाते ब्लाउज में हाथ डाल दिया और वो मुठ मार रही थी और में उसके बूब्स दबा रहा था। तभी मेरे लंड से एक जोरदार पिचकारी निकली और दरवाज़े तक गई। तो वो बोली कि वाह यह तो बंदूक की तरह गोली चल रहा है। फिर में जब भी जहाँ भी रहता उसके बूब्स दबा देता और किचन में तो गांड पर लंड सटाकर बहुत बूब्स दबाता और मज़े लेता। तो वो बोलती कि चल रूम पर.. में तेरा वीर्य निकाल देती हूँ। फिर एक दिन मैंने भांग खाई और उसे गोद में उठाया और उसे किचन से रूम पर ले आया और मेरा लंड उसकी गांड को उसकी साड़ी के ऊपर से छू रहा था और उसे दीवार की तरफ़ मुहं करके खड़ा कर दिया और लंड रगड़ने लगा.. वो गर्म होने लगी में बूब्स को मसले जा रहा था और पीछे से साड़ी को उठाने लगा तो वो बोली कि क्या कर रहा है.. लेकिन उसकी आवाज़ में कोई जान नहीं थी और उसने कोई विरोध नहीं किया। तो मैंने उसकी साड़ी को पूरी कमर तक उठा दिया और नीचे बैठकर गांड में मुहं डालकर जीभ से चाटने लगा। तो वो बोली कि रूको.. लेकिन में नहीं माना और चाटने लगा। फिर चूत में उंगली भी डाल दी.. अब वो पूरा मजा कर रही थी और वो कुछ नहीं बोल रही थी। फिर में उसे बेड पर लाया और पैर फैलाकर चूत पर लंड सटाकर एक झटका मारा और चूत में लंड डाल दिया और चुदाई चालू कर दी और उस रात हमने बहुत देर तक सेक्स किया और फिर मैंने पूरे 34 दिन तक मेरी माँ के साथ सेक्स किया ।।
 
मेरी पसंदीदा चुदक्कड़ घोड़ी

मेरा लम्बा और मोटा लंड हर वक़्त बस चोदने की फ़िराक में लगा रहता है. हर मर्द का मन चुदाई करने का करता है. हर मर्द चाहता है कि उसके पास कोई न कोई मस्त लड़की या औरत हो जिसे वो जब चाहे जैसे चाहे चोद सके. मस्त नंगी नंगी चुदक्कड़ घोड़ियों को चोदने से ज्यादा मज़ा किसी चीज़ में नहीं आता. वैसे तो ज्यादातर मर्दों के जीवन में सिर्फ़ एक ही घोड़ी होती है और वो है उनकी बीवी. पर मैंने 20 साल की उम्र होने से पहले ही कुल मिलाकर 24 मस्त चुदक्कड़ घोड़ियाँ चोद डाली थीं.. पर इतनी सारी लड़कियों और औरतों में मुझे सबसे ज्यादा मज़ा एक लड़की की चुदाई करने में आता था. और वो लड़की थी मेरी सबसे प्यारी, सबसे गदराई, सबसे ज्यादा कामुक और हद से ज्यादा चुदक्कड़ दीदी.......मेरी लंगड़ी मधु दीदी. जब तक मैंने दीदी की चुदाई नहीं की थी तब तक मैं उन्हें अपनी दीदी की तरह ही मानता था. वो दोनों पैरों से लंगड़ी थी पोलियो की वजह से और खड़ी ना हो पाने की वज़ह से हमेशा घुटनों पर चलती थी या फिर ३ पहियों की रिक्शा पर. पर जब मधु दीदी मुझसे पहली बार चुदी तो मैं उनका दीवाना हो गया. पहली बार चुदने के बाद दीदी भी मेरी चुदाई की दीवानी हो गयीं. शुरू के 2 महीने तो दीदी चुदाई से काफ़ी डरती भी थी कि कहीं हम पकड़े ना जाएँ. बड़ी मुश्किल से मैं दीदी को हफ्ते 10 दिन में एक बार चोद पाता था और बड़ी बेसब्री से उस दिन का इंतज़ार करता था. पर इतने इंतज़ार के बाद उस लंगड़ी को चोदने में खूब मज़ा भी आता था. घंटों उस चुदक्कड़ लंगड़ी को घोड़ी बना कर चोदने में हद से ज्यादा आनंद आता था. और दीदी भी मेरा नाम ले ले के खूब जोशीले ढंग से चुदती थी. दीदी को चुदने में इतना मज़ा आने लगा कि वो 2 महीने बाद हर दुसरे तीसरे दिन चुदने के लिए कहने लगीं.

“दीपू...मैं 2 दिन से नहीं चुदी. कब चुदुंगी?”

“कल मोका मिलेगा अच्छा. पुरे दिन तुम्हारी चुदाई करूँगा”

बस इस तरह ही दीदी मुझसे चुपके से बात करती रहती जब मैं उनके घर जाता. और जब मैंने देखा कि ये लंगड़ी मेरे लंड की दीवानी हो गयी है तो मैंने एक दिन दीदी की मस्त खरबूजे जैसी गांड भी चोद दी. जब पहली बार दीदी की गांड चुदी तो दीदी ख़ूब रोयीं और दर्द से चिल्लाई. पर मैं तो उस दिन जैसे जन्नत में ही घुस गया था. दीदी की गांड की ही वजह से मेरे अंदर दीदी को चोदने की इच्छा जागी थी. दो महीने तक लंगड़ी मुझसे चुदती रही पर मैंने दीदी की गांड में कभी ऊँगली तक नहीं डाली. मैं पहले दीदी को सेक्स के लिए पागल कर देना चाहता था. क्यूंकि सच तो ये था कि जितना मज़ा मधु दीदी को मुझसे चुदने में आता था उससे कई गुना ज्यादा मज़ा मुझे आता था दीदी को चोदने में. मैं जब चुदाई करता हूँ तो लड़की को घोड़ी बनाकर खूब देर तक चुदाई करना पसंद करता हूँ. अक्सर लड़कियां 20-25 मिनट से ज्यादा घोड़ी पोज़ में नहीं खड़ी हो पातीं. उनके घुटनों में दर्द होने लगता है. पर दीदी तो एक सचमुच की घोड़ी थी. वो तो हर वक़्त ही घोड़ी के पोज़ में रहती थीं. लंगड़ी होने की वजह से वो घोड़ी की तरह घुटनों पर ही चलती थीं. इसी वजह से दीदी मेरे लिए किसी भी जगह घोड़ी बन कर खड़ी हो जाती थीं ताकि उनका नंगा घोड़ा.......यानि की मैं.....उस मस्त चुदक्कड़ घोड़ी की चुदाई कर सकूँ. अब चाहे मैं उनको 3 घंटे चोदूं या 6 घंटे चोदूं दीदी पुरे टाइम अपने हाथों और घुटनों पर घोड़ी बनी रहती. कभी नहीं कहा कि “दीपू मेरे घुटनों में दर्द हो रहा है!” बहुत बार तो यूँ ही फ़र्श पर या लकड़ी की बेंच पर दीदी बिना कोई तकिया घुटनों के नीचे रखे घोड़ी बनी रहतीं और चुदती रहतीं. कई बार तो दीदी फ़र्श पर मस्त घोड़ी बन जातीं और मैं पूरा उनके ऊपर चढ़ के कमर पकड़ के बहुत ही ज़ोर से उनकी चुदाई करता. मैं इतने तेज़ और भयंकर तरीके से धक्के लगाता कि मुझे खुद को लगता कि कहीं दीदी के घुटने छिल ना जाएँ. मैं दीदी से पूछता “दीदी तकिया लगा लो घुटनों के नीचे नहीं तो घुटने छिल जायेंगे और दर्द भी होगा.” पर दीदी कहती “कोई बात नहीं दीपू.....मुझे आदत है....तू बस ऐसे ही चोदता रह मेरे घोड़े.......ऊऊह्हह्हह्हह्हह्हह .......रुक मत दीपू.......बस चोद मुझे”

दीदी की यही बात बड़ी मस्त थी. वो बिलकुल वैसी लड़की थी जैसी मुझे चाहिए थी. मेरे सामने अगर कोई नंगी लड़की घोड़ी बनी हो तो मैं उस घोड़ी को बिना रुके चार चार घंटे तक चोद सकता हूँ. लड़की को घोड़ी बना कर चोदना या डौगी स्टाइल में चोदना मुझे हद से ज्यादा पसंद है. और दीदी ही अकेली ऐसी लड़की थी जो मेरे लिए तब तक घोड़ी बनी रह सकती थी जब तक मैं चाहूं. इसलिए मुझे दीदी को चोदने में बहुत ज्यादा मज़ा आता था. और इसलिए मैंने दीदी की गांड चोदने में जल्दबाज़ी नहीं दिखाई. दीदी को मुझसे चुदते हुए 2 महीने से ज्यादा हो चूका था जब मैंने उस दिन पहली बार दीदी की मस्त कुंवारी फूली हुई गांड का उद्घाटन किया. दीदी की गांड ने मुझे काफी समय से पागल कर रखा था. और जब मैं उनकी डौगी स्टाइल में चुदाई करता तब तो मेरी और ज्यादा हालत ख़राब हो जाया करती थी. चुदाई करते टाइम मैं खूब उस लंगड़ी के मस्त नंगे नंगे मुलायम चूतडों को पकड़ता और सहलाता रहता. और डौगी स्टाइल में तो बहनचोद उस लंगड़ी की गांड का वो मस्त भूरा छेद भी हमेशा मुझे चिड़ाता रहता. पर मैंने भी सोच रखा था कि इस लंगड़ी गांड का उद्घाटन जब करूँगा जब ये लंगड़ी मेरी चुदाई के लिए पागल हो जाएगी. क्यूंकि गांड का भूरा छेद देख के ही लगता था कि गांड काफी तंग है. और दीदी की गांड कभी चुदी भी नहीं थी. और चुदती भी कैसे उस कुतिया की तो चूत भी पहली बार मैंने ही चोदी थी. इसलिए जब 2 महीने बाद हम रोज़ चुदाई करने लगे और हमें दीदी के घर पर ही सुबह से शाम तक अकेले रहने का मोका भी मिलने लगा तो मैंने एक दिन दीदी की गांड का उद्घाटन कर दिया. दोस्तों एक लकड़ी की बेंच पे चुदी थी उस दिन दीदी की गांड. और लंड को तो मैंने दीदी की रसोई में रखे सरसों के तेल के डिब्बे में पूरा डुबो कर तरर किया था उस लंगड़ी कुतिया की गांड में डालने के लिए. पर मैं भी खूब कमीना था. मैंने दीदी की गांड में तो बिलकुल भी तेल नहीं लगाया. बस एक पतली सी इंजेक्शन वाली पिचकारी से दीदी की गांड में गुनगुना पानी भर के दीदी को एनीमा देकर अच्छे से गांड को साफ कर लिया था. हाँ जब दीदी बेंच पर घोड़ी बनी तो मैंने पहली बार उनकी गांड का स्वाद लिया. मैंने आधे घंटे तक दीदी की गांड के छेद को खूब मस्ती से चाटा. मैं मज़े से पागल हो रहा था. जिस गांड को मैं इतना पसंद करता था और जिस गांड के छेद को मैंने दीदी की चुदाई करते हुए खूब फुदकते हुए देखा था वो छेद आज दीदी ने मेरे सामने परोस के रख दिया था. ये ख्याल कि मैं आज दीदी की इतनी कोमल और गरम गांड अपने लंड से चोदुंगा, मुझे पागल बना रहा था. मैं दीदी के उस गरम गांड के छेद को किसी कुत्ते की तरह चाट रहा था. मेरे होंठ दीदी की गांड के छेद पे ऐसे रगड़ खा रहे थे जैसे वो दीदी की गांड का छेद नहीं बल्कि उनके होंठ हो. ........पर उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़......वो भूरा मस्त फुदकता हुआ गांड का छेद उनके होंठों से कम भी नहीं था. मैं जोश में खूब गन्दी हरकत करने लगा. गांड के छेद में थोडा सा थूक जीभ से अंदर करता और फिर ज़ोर से छेद को चूस के थूक वापस अपने मुंह में ले लेता और उसे सटक जाता. बिलकुल ऐसा लग रहा जैसे मैं दीदी की गांड का रस पी रहा हूँ. लंगड़ी तो मेरी ऎसी हरकतों से गर्मी से पागल हो गयी. कहने लगी “उफ्फ्फफ्फ्फ़ दीपू .....कितना मज़ा आ रहा है......इस्स्स्सस.....उफ्फ्फफ्फ्फ़......आःह्हह्ह्ह्हह्ह्ह्ह”

मैंने जानबूझ कर दीदी की गांड के अंदर थूक नहीं जाने दिया. जितना भी थूक गांड चाटते टाइम गांड में जाता मैं उसे मुंह से खींच के चूस लेता और और फिर मैं दीदी की गांड में लंड डालने के लिए दीदी के पीछे खड़ा हो गया. मैंने दीदी की कच्छी उठा कर दीदी की गांड के छेद को अच्छे से पोंछ दिया ताकि उस मस्त छेद से थूक पूरा साफ़ हो जाये. मैं ऐसा इसलिए कर रहा था क्यूंकि मैं आज दीदी को खूब दर्द देकर चोदना चाहता था. मैंने अपनी आंटी बबिता की खूब गांड चोदी थी और मुझे पता था कि जब गांड चुदाई के टाइम लड़की चिल्लाती है तो मज़ा 10 गुना आता है. बबिता ने ही मुझे बताया था कि लड़की या औरत की गांड कैसे चोदी जाती है जिससे लड़की और उसकी गांड भी पूरी तरह से ठंडी हो जाये और लंड को भी खूब गरमा गरम चुदाई का आनंद मिले. बबिता ने ही बताया था कि अगर चुदाई के टाइम लड़की को थोड़ा दर्द हो तो उसका आनंद कई गुना बढ़ जाता है.

मैंने खुद देखा है कि लड़कियों को अगर चुदाई में दर्द होता है तो उन्हें ज्यादा आनंद आता है. यही वजह है कि बड़ी उम्र की औरतें गांड मरवाना खूब पसंद करतीं हैं. क्यूंकि ज्यादा चुदाई के बाद चूत में तो दर्द होता नहीं पर गांड में अगर चिकनाई न लगाओ तो काफी दर्द होता है. और जब लड़की दर्द से ज़ोरों से सिसकती है तो हम मर्दों को भी तो उन्हें चोदने में बड़ा मज़ा आता है. पर उस दिन जब मैं दीदी की गांड पहली बार चोदने वाला था तो मेरी ठरक सातवें आसमान पे थी. मैं दीदी की गांड के लिए बहुत ज्यादा तड़पता था. इसलिए उस दिन जब मेरे सामने ऐसा मोका आया कि मैं अपनी उस प्यारी सी लंगड़ी दीदी की प्यारी सी नंगी गांड में लंड डाल सकूँ तो मैं पता नहीं क्यूँ दीदी को punish करना चाहता था. मैं चाहता था कि मैं जब दीदी की गांड में लंड डालूं तो दीदी ज़ोरों से चिल्लाये और हाथ पैर पटके. मैं चाहता था कि मैं जब उस लंगड़ी की गांड चोदूं तो तो लंगड़ी की आँखों से आँसू निकले और गांड से चरचराहट. मैं लंगड़ी के पीछे खड़ा था. और दीदी की मस्त गदराई नंगी गांड को देख रहा था. दीदी अजीब तरह से बेंच पर हिल रह थी और पीछे मुड़ मुड़ के देख रही थी.

“दीपू.......प्लीज.......आहिस्ता करना. मीनू बताती है कि पीछे बहुत ज्यादा दर्द होता है. संजू जब भी मीनू की गांड मारता है तो मीनू पुरे टाइम रोती रहती है दर्द से. (संजू है लंगड़ी दीदी का सगा बड़ा भाई जिसने दीदी की पक्की सहेली मीनू को पटा रखा था चोदने के लिए )”

“पर दीदी फिर भी मीनू संजू को अपनी गांड मारने देती है ना. तो क्या हुआ अगर वो रोती है तो....उसे मज़ा आता है तभी तो वो गांड मरवाती है.”

“हाँ यार ये बात तो तू सही कह रहा है....मीनू मुझसे कहती भी रहती है कि ‘तेरा भाई मेरी गांड बहुत बुरी तरह मारता है कुत्ता कहीं का’ तो फिर क्यूँ उस कुत्ते को गांड मारने देती है.”

“दीदी दर्द तो होता है गांड चोदने में...बहुत ज्यादा दर्द होता है...पर बाद में बहुत ज्यादा मज़ा आता है जो चूत के मज़ा से अलग होता है. इसलिए ही मीनू दीदी दर्द के बावजूद भी संजू को गांड चोदने देती हैं. वैसे दीदी.......आपका भाई बहुत किस्मत वाला है.”

“वो क्यूँ”

“अरे मीनू दीदी जैसी लड़की की गांड मारने के लिए मिल रही है तो किस्मत वाला ही हुआ ना. बहुत प्यार करती हैं ना मीनू दीदी संजू से”

“ही ही ही ही”

“क्या हुआ? आप हंस क्यों रही हो?”

“मीनू और प्यार!............वो तो एक नंबर की हरामी लड़की है. मेरे भाई को बस चुदवाने के लिए पटा रखा है. संजू से पहले भी 4 लड़कों से चुदवा चुकी है. पर कहती तो है कि संजू से चुदने में उसे बड़ा मज़ा मिलता है. कहती है कि खूब मोटा और लम्बा लंड है संजू का”

“क्या दीदी मेरे लंड से भी ज्यादा मोटा है संजू का लंड?”

“हट पागल ...संजू मेरा सगा भाई है....मैं तो कभी मीनू से उसके लंड के बारे में पूछती भी नहीं. मुझे तो बस तेरा लंड पसंद है. पर आज तुझे भी ना जाने क्यूँ मेरी गांड मारने का भूत सवार है. पर हाँ......जब मीनू अपनी गांड चुदवा सकती है वो भी मेरे भाई से तो मैं तो तुझपे अपनी जान छिड़कती हूँ. तेरे लिए मैं दर्द भी सह लूंगी. बस दीपू थोडा आहिस्ता आहिस्ता चोदना.”

“क्यूँ दीदी? क्या संजू मीनू दीदी की गांड आहिस्ता आहिस्ता चोदता है.”

“हट बदमाश......तो क्या तू भी संजू की तरह बेरहमी से चोदेगा?”

“उम्म्म........बेरहमी से तो नहीं ........पर हाँ ख़ूब जी भरके और तबियत से चोदने का मन है तुम्हारी गांड. साली ये गांड है ही इतनी मस्त....... ‘चटाक’........” मैंने जोर से दीदी की नंगी गांड पे चांटा मारा.

“आउच.....उफ्फ्फ्फ़.....दीपू......आःह्ह्ह......कुत्ता”

“दीदी अगर आप कहो तो मैं तुम्हारे घुटने किसी चीज़ से बांध दूँ?”

“क्यूँ?”

“वो दीदी मैंने किताब में पढ़ा था कि अगर गांड चोदते टाइम लड़की की टाँगें आपस में बांध दो तो लड़की को बहुत ज्यादा मज़ा आता है जिससे दर्द ज्यादा महसूस नहीं होता.”

मैं दरसल दीदी के पैर आपस में बांध देना चाहता था जिससे कुतिया चुदते टाइम आगे को ना भागे. क्यूंकि डौगी स्टाइल में गांड चोदते टाइम लड़की दर्द होने पे आगे को भागती है पैर चला के.

“ठीक है बांध दे अगर ऐसी बात है तो.

मैंने जल्दी से दीदी के घुटने उनके एक दुपट्टे से बांध दिए. दुपट्टा काफी लम्बा था. मैंने दुपट्टे के एक सिरे से तो दीदी के पैर बांध दिए और फिर दूसरा सिरा दीदी की कमर पे कस कर दीदी की कमर को भी घुटनों से बांध दिया. ऐसा मीने इसलिए किया दीदी की कमर मस्त नीचे को झुकी रहे और मादक गांड का छेद कुतिया की गांड से बेरोकटोक बाहर को झांकता रहे.

“क्या ऐसे कमर बांधने से भी दर्द कम महसूस होगा?”

“हाँ दीदी”

अब मुझे बिलकुल नहीं रुका जा रहा था. इतनी प्यारी और गरम लग रही थी दीदी की वो नंगी गांड कुतिया स्टाइल में. मैं तुरंत दीदी की रसोई से सरसों के तेल का पूरा भरा हुआ डब्बा ले आया. डब्बा बड़े ढक्कन वाला था. मैंने ढक्कन खोला और अपना मोटा तन्नाया हुआ लंड पूरा डब्बे में डुबो दिया.

“ओह्हो...दीपू...तूने ये लंड डब्बे में क्यूँ डाल दिया. पूरा तेल ख़राब कर दिया.”

“दीदी अब तो ये तेल और भी ज्यादा टेस्टी हो गया” दीदी ये सुन के मुस्कुराने लगीं.

“दीपू.....ये तेल सिर्फ़ मेरे लिए टेस्टी बना है. मैं अब रोज़ इसी तेल के पराठे खाऊँगी.”

मैंने जब डब्बे से लंड बहार निकाला तो लंड पूरा सरसों के तेल से भीगा हुआ था. तेल लंड से टपक कर नीचे भी गिर रहा था. मैं डब्बे को यूँ ही मेज़ पर खुला छोड़ कर जल्दी से बेंच पे घोड़ी बनी उस चुदक्कड़ लंगड़ी के पीछे आ गया. लंगड़ी के घुटने आपस में बंधे थे और कमर भी घुटनों से लगी हुई थी. गांड का छेद बहुत ही गरम अंदाज़ में झांक रहा था. मैंने तुरंत दीदी के नरम नंगे चूतड़ पकड़ लिए. दीदी के चूतड़ इतने लाज़वाब थे कि बता नहीं सकता.

मैंने अपने बाएं हाथ से दीदी के बाएं चूतड़ को पकड़ा और दायें हाथ से अपने लंड को दीदी की गांड के सुराख़ पे सेट करके दीदी से बोला:

“दीदी तुम अपने दायें हाथ से अपने दायें चूतड़ को फेलाओ ना प्लीज...”

दीदी ने ऐसा ही किया और मैंने झट से जोर लगा के लंड को गांड में अंदर ठेला. मेरे लंड की नुकीली नथुनी जोर लगाने से दीदी की गांड में घुस तो गयी पर दर्द से दीदी ने गांड सुकोड़ ली जिससे लंड की नथुनी एकदम से उछल के दीदी की गांड से बहार आ गयी.

“ओह्ह्ह......दीपू......मुझे तो बहुत दर्द होगा.......हाय.....कैसे घुसेगा इतना मोटा लंड गांड में?”

“दीदी......तुम बस गांड को टाइट मत करो......बस ढीली रखो. बस दो मिनट के लिए भूल जाओ कि मैं गांड में लंड डाल रहा हूँ. दीदी प्लीज अब जल्दी से फिर से फेलाओ ना.......”

दीदी ने फिर से एक हाथ से अपना दायाँ चूतड़ फेलाया और पीछे मुड़ के देख रहीं थीं. दीदी की आँखें शायद पहले धक्के के दर्द से गीली हो गयीं थीं.

“दीपू ..........प्लीज आहिस्ता से........चाहे थोड़ा टाइम लगा ले पर लंड बहुत होले होले घुसाना गांड में. नहीं तो मैं मार जाउंगी......”

“दीदी रिलैक्स.......कुछ नहीं होगा. और गांड चुदवाने से कोई नहीं मरता. अगर ऐसा होता तो तुम्हारी सहेली मीनू दीदी कब की मर चुकी होती”

मैंने फिर से लंड को पकड़ के दीदी की गांड के सुराख़ पे टिका दिया और दीदी की कमर पे हाथ फेरने लगा दीदी को रिलैक्स करने के लिए. छेद लंड की नथुनी पे बार बार फूल पिचक रहा था. छेद कभी रिलैक्स होता तो कभी सिकुड़ जाता. मैं बस दीदी के छेद की इस हरकत का जायजा ले रहा था और धक्का मारने के लिए छेद के रिलैक्स रहने का इंतज़ार कर रहा था. करीब ५ मिनट तक ऐसे ही मैं लंड को दीदी की गांड के सुराख़ पे चिपका के खड़ा रहा और दीदी के मस्त नरम नंगे चूतड़ों को सहलाता रहा. मैं बस जल्दी से लंड को दीदी की गांड में घुसेड़ देना चाहता था. मेरा मन दीदी के नंगे चूतड़ों को सहलाने के बजाये ज़ोरों से चोदने का कर रहा था. उस दिन से पहले मैंने दीदी की नंगी गांड को ख़ूब प्यार से सहलाया था. पर अब उस गांड की चुदने की बारी थी.

फिर जैसे ही दीदी की गांड का छेद ज़रा रिलैक्स हुआ तो मैंने ज़ोर से धक्का मारा और लंड की नथुनी दीदी की गांड में घुस गयी. दीदी की बहुत तेज़ चीख़ निकली.

“आआयीयाआआ...........आआआईईयाआआआआ .........मर्र्र्रर्र्र्रर गयीईईईइ ..............उईईईईई............दीपूऊऊऊऊऊ.............आआय्य्य्यीईईईईईईइ..........रीईईईइ...........”

लेकिन मैंने तुरंत उस लंगड़ी कुतिया की कमर पकड़ ली और लंड को और अंदर घुसाने लगा. मैं इतना जोर लगा रहा था जैसे मैं अपनी दीदी की नहीं बल्कि किसी बाज़ारू रंडी की गांड मार रहा हूँ. दीदी ज़ोरों से बिलखती हुई बेंच पर हाथ पटक रही थी.

“ऊउह्ह...दीपू....नहीं..... ऊउह्ह...दीपू....नहीं..... ऊउह्ह...दीपू....नहीं..... ऊउह्ह...दीपू....नहीं.....आआऐईईइयाआआअ..........ऊऊऊऊईईईईइमा ........ ऊउह्ह...दीपू....नहीं..... ऊउह्ह...दीपू....नहीं.....आआआईईयाआआआआ ............आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह........मैं मर जाउंगी दीपू.......नह्हह्ह्ह्हह्ह्ह्ही प्लीज दीपू............ओह्ह्हह्ह्ह्ह रीईईईईईई...............आईईईईईईईईईईईईई...........रीईईईइ ..........दीपू..........ओह माय गॉड.........मर गयीईईईइ मैं..........दीपूऊऊऊऊऊऊऊऊउ............ ऊउह्ह...दीपू....नहीं..... ऊउह्ह...दीपू....नहीं..... ऊउह्ह...दीपू....नहीं.....”

दीदी के आँसू निकल रहे थे और ऊउह्ह...दीपू....नहीं..... ऊउह्ह...दीपू....नहीं.....कहे जा रही थीं. पर दीपू तो बस उस लंगड़ी की गांड में लंड जड़ तक घुसा देना चाहता था. मैंने दीदी की कमर बड़ी कस के पकड़ रखी थी और बहुत ही ज़ोर से लंड को घुसेड़ रहा था. मैं पहली बार किसी को इतनी बेरहमी से चोद रहा था. पर हद से ज्यादा मज़ा भी आ रहा था. वो तो ये अच्छी बात थी कि दीदी के घर से आवाज़ बाहर नहीं जाती थी चाहे कितना भी जोर से क्यूँ ना चीख़ो. नहीं तो किसी बहार वाले को ऐसा ही लगता जैसे अंदर किसी का रेप हो रहा हो. खेर मैं जब तक धक्के मारता रहा जब तक मैंने पूरा का पूरा ८ इंची लंड उस लंगड़ी की गांड में नहीं घुसा.

गांड इतनी ज्यादा टाइट थी कि इतनी ज़ोर से धक्के मारने पर भी पूरा लंड गांड में डालने में 12 मिनट लग गए. पूरा लंड गांड में डाल कर मैं रुक गया.

दीदी की हालत बहुत ज्यादा ख़राब हो गयी थी. दीदी की बेंच पर टांगें कांप रहीं थीं और वो अब भी रो रहीं थीं.

“ऊउह्ह्ह्ह ........दीपू........हद से ज्यादा दर्द हो रहा है........ऊऊऊऊऊ.........ऊऊऊन्न्न........ऊऊऊऊऊ.........ऊऊऊन्न्न”

“बस दीदी हो गया..........” ‘पुन्छ्ह’.... ‘पुन्छ्ह’.... ‘पुन्छ्ह’.... ‘पुन्छ्ह’....मैं दीदी की कमर पर झुक कर चुम्मी लेने लगा.

मेरा लंड गांड में घुस कर हद से ज्यादा आनंद महसूस कर रहा था. मैंने जोर से दीदी के बाल पकड़े और एक हाथ से दीदी के चूतड़ पर थप्पड़ लगाने लगा. हद से ज्यादा मज़ा आ रहा था दोस्तों. इतनी मस्त लंगड़ी लड़की की डॉगी स्टाइल में गांड मारने का मज़ा सबसे निराला था. सबसे ज्यादा उत्तेजक बात ये थी कि मैं एक लंगड़ी लड़की की गांड चोद रहा था. एक तो वो लंगड़ी थी और ऊपर से वो मेरी दीदी भी थीं. [दीदी के घर वालों को यहीं लगता था कि मैं और दीदी एक दुसरे को भाई बहन मानते हैं. दीदी रक्षाबंधन पे मुझे राखी भी बांधती थीं. पर जब दीदी मुझसे चुदने लगीं तो रक्षाबंधन पर दीदी मुझे एक नहीं दो राखी बांधती थीं. एक सबके सामने कलाई पर और दूसरी अकेले में मेरे लंड पर. लंड पर राखी बांध कर फिर दीदी घोड़ी बन जातीं थीं ताकि मैं उनकी गांड मारू. एक साल तक किसी को पता नहीं था कि मैं दीदी को चोदता हूँ. और मेरी भी ऐश आ रही थी. सबके सामने मधु मेरी ‘दीदी’ होती और अकेले में वो मेरी मस्त नंगी, लंगड़ी चुदक्कड़ कुतिया बन जाती. लंगड़ी को चोदना मेरा सबसे फेवरेट काम हो गया. मैंने खेलना भी बंद कर दिया. स्कूल से भी बंक मारना शुरू कर दिया. विडियो गेम भी खेलना बैंड कर दिया था. बस लंगड़ी का ऐसा नशा लगा हुआ था कि हर वक़्त लंगड़ी को चोदने का मन करता रहता था.]

दीदी की गांड में अपना लंड फंसा हुआ देख कर बहुत अच्छा लग रहा था. मैंने पूरा का पूरा 8 इंची लंड दीदी की गांड में जड़ तक घुसेड़ दिया था. लंड का सुपाड़ा तो लगभग दीदी के पेट में घुसा हुआ था. बहुत सताया था उस लंगड़ी की गांड ने मुझे. अब जाके पूरी हुई थी दीदी की गांड में लंड डालने की तमन्ना.

मैं लगभग 10 मिनट तक यूँ ही दीदी के गांड में लंड गाड़े खड़ा रहा क्यूंकि दीदी दर्द से बेहाल थीं. अभी तुरंत धक्के मार के गांड चोदना शुरू कर देता तो लंगड़ी बेहोश भी हो सकती थी. और इधर मेरा लंड भी बुरी तरह गरमाया हुआ था. इतनी मस्त कुंवारी गांड में लंड जल्दी से वीर्य भरने के मूड में था. पर मैं अभी दीदी को कम से कम आधा घंटा चोदना चाहता था. वैसे तो मैं लम्बी रेस का घोड़ा हूँ पर उस दिन एक तो दीदी की पहली बार गांड मारने की उत्तेजना ने और ऊपर से उस लंगड़ी की मस्ती से भरी गांड ने लंड को बिलकुल झड़ने की कगार पे ला खड़ा किया. ऊपर से दीदी गांड में लंड डलवाते टाइम ऐसे अजीब तरह से रम्भा रहीं थीं जैसे कोई गाय की बछिया रंभाती है. दीदी की इनती मस्त रंभाती हुई आवाज़ सुन के तो लंड की नसें फटने को हो रहीं थीं. इसलिए मैं लंड को गांड में डाल कर कुछ देर रुका रहा ताकि दीदी का थोड़ा दर्द कम हो जाये और मेरी थोड़ी उत्तेजना कम हो जाये.

कुछ देर ऐसे ही खड़े रहने पर दीदी अब होले होले सुबक रहीं थीं. अब सही वक़्त था जब मैं दीदी की गांड का तबियत से मज़ा ले सकता था. मैंने दीदी के गदराये चूतड़ फिर से थाम लिए. जैसे ही मैंने दीदी के चूतड़ पकड़े दीदी समझ गयीं कि मैं अब गांड चोदुंगा. उन्होंने पीछे मुड़कर मुझे रोकने की कोशिश करी.

“दीपू........बाबू.........प्लीज अब बाद में चोद लेना. अभी बड़ा दर्द हो रहा है. आज के लिए इतना काफी है मेरे राजा..........प्लीज.........मेरे भोंदू........मेरे राजा..........ऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह .........राजा............बाद में...........ऊऊउईईईईईईई मर गयीईईईइ दिपूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ.............आआआईईयाआआआआ ...............उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.......धीईईईईईइरीईईईईईईईईई ...........धीरे से.........दीपू...........आःह्ह्ह.........बहुत दर्द हो रहा है कुत्ते.............उईईईईईईईईईईईईईइ.........मर्र्र्रर्र्र्रर गयी................हाआय्य्य्य रीईईईई.............माआआआ.........”

दीदी मुझे बाद में चोदने के लिए बोल रहीं थीं पर मैंने लंड को गांड में आगे पीछे करना शुरू कर दिया तो लंगड़ी फिर से रंभाने लगी. ‘हाआय्य्य्य’, ‘उईईईईईईईईईईईईईइ’, ‘मर गयीईईईइ’............फिर से लंगड़ी के मुंह से ऐसी आवाज़े निकलने लगीं. जब मैं ज़ोरों से गांड में धक्के लगता तो दीदी खूब ‘उईईई’, ‘उईईई’, करती. मैं पूरी सज़ा दे रहा था दीदी को मुझे तड़पाने की. ‘उईईई’, ‘उईईई’, करती लंगड़ी कुतिया की गांड चोदने में हद से ज्यादा मज़ा आ रहा था.

10 मिनट की चुदाई में तो दीदी खूब दर्द से चिल्लाई और बेंच पर हाथ पैर पटके पर उसके बाद तो दीदी ने बेंच को कस के पकड़ लिया. फिर तो मैंने दीदी की गांड की रेल ही बना दी. दना दन मैं लंगड़ी के मादक चूतड़ों की माँ चोद रहा था. बहुत बुरी तरह मैं दीदी की गांड मार रहा था. पूरा उछल उछल के मैं दीदी की गांड की चुदाई कर रहा था. दीदी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि कोई इस तरह उनकी गांड चोदेगा. मैंने तो जैसे लंगड़ी की गांड का बैंड ही बजा दिया था. एक तो गांड को बुरी तरह मेरा लंड चोद रहा था और ऊपर से मैं उस लंगड़ी रांड के हिलते चूतड़ों पे चांटे लगा रहा था और कुतिया के बाल पकड़ के खींच रहा था.

15 मिनट में ही मेरा लंड बेकाबू होने लगा. लगा कि अगर ऐसे ही चोदुंगा तो झड़ जाऊंगा. मैंने सोचा क्यूँ ना थोड़ी देर लंड गांड से बाहर निकाल लूं और लंड पे तेल लगा के फिर से लंगड़ी की गांड में डालूँगा. वैसे भी अब लंगड़ी की गांड लंड ने चोद चोद के थोड़ी ढीली तो कर ही दी थी. मैंने ये सोच के लंड दीदी की गांड से बाहर निकाल लिया और तुरंत दीदी के चेहरे के सामने तेल का डिब्बा लेके खड़ा हो गया.

“ओह्ह्ह..........दीदी.........अपने हाथ से तेल लगाओ इस लंड पे और...........”

“तू बहुत तंग करता है दीपू.......जब लंड निकालने के लिए बोल रही थी तब निकाला नहीं और जब मस्ती आ रही थी तो लंड बाहर निकाल लिया.”

“दीदी...सच.........आपको मस्ती आ रही थी........अब दर्द नहीं हो रहा था?”

“हाँ राजा.........अब मस्ती आ रही थी.........दर्द भी हो रहा था पर बड़ा मज़ा आ रहा था चुदने में. उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़.........आज कितनी ज़ोरदार तरीके से चोद रहा है तू........मेरी तो गांड में अजीब से मस्ती आ रही है........राजा..........डाल ना फ़िर इस मोटे चूहे को मेरी गांड में............हाययय.....”

“हाँ राजा.........अब मस्ती आ रही थी.........दर्द भी हो रहा था पर बड़ा मज़ा आ रहा था चुदने में. उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़.........आज कितनी ज़ोरदार तरीके से चोद रहा है तू........मेरी तो गांड में अजीब से मस्ती आ रही है........राजा..........डाल ना फ़िर इस मोटे चूहे को मेरी गांड में बिल में............हाययय.....”

“उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़ दीदी तेल तो लगाओ इस बहनचोद मोटे लंड पे........”

दीदी ने मुझे तेल का डिब्बा उनके सामने बेंच पे रखने को बोला और फिर मेरा लंड पकड़ कर पूरा लंड उस तेल के डिब्बे में डुबो दिया. इस्स्स्सस्स्स्स........उस कुतिया ने अपनी गांड से निकला लंड पूरा सरसों के तेल के डिब्बे में डाल दिया था.

“ओह्ह.......दीदी....अब तो ये पूरा तेल बेकार हो गया. चलो मैं आज शाम को नया लाके दे दूंगा ताकि किसी को पता नहीं चलेगा तुम इस तेल को फेक देना.”

“ओये दीपू.........अब तो और टेस्टी बनेंगे परांठे.....!”

“तुम इकदम कुतिया हो दीदी.........कुतिया........”

“और तू मेरा चोदू कुत्ता..........”

“तो अब चोदेगा ये कुत्ता अपनी लंगड़ी कुतिया की गांड”

“चोद.........मेरे कुत्ते........चोद.........खूब ज़ोर जोर से हरामी कुत्ते की तरह चोद अपनी लंगड़ी दीदी को........”

दीदी सच में हद से ज्यादा गरम थीं तभी वो अब गन्दा बोल रहीं थीं.

खेर मैं तेल से लथपथ लंड लेके फिर से दीदी के पीछे आ गया और लंड फिर से लंगड़ी की गांड में डाल दिया.

मैंने दीदी की कमर पकड़ ली और दना दन ऐसे शॉट दीदी की गांड में मारने लगा जैसे कोई पागल कुत्ता किसी कुतिया को चोदता है. दीदी भी बुरी तरह सिसकने लगीं और जल्दी ही जोर से झड़ गयीं. मैं जब झड़ने के नजदीक पहुंचा तो दीदी के चूतड़ लगभग नोचते हुए गांड चोदने लगा. मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मुझे क्या हो रहा था. बस मेरी कमर बहुत ज़ोरों से हिल रही थी और दीदी की गांड मस्ती से चुद रही थी. मैं अपने लंड से इतनी मस्त और कामुक गांड को चुदते हुए देख के पगला रहा था और कभी दीदी के बाल पकड़ता तो कभी चूतड़ पे थप्पड़ मारता. और फिर मेरी एक ज़ोरदार दहाड़ निकल गयी और मैं दीदी की गांड में झड़ने लगा.

“आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआअ............दीदी..ईईईईईईई.................”

मैं दीदी की कमर पकड़ के दीदी की गांड में वीर्य की पिचकारी मारता रहा. ऐसा लग रहा था जैसे मैंने कोई किला जीत लिया हो. हाँ........मैंने कुछ जीता था..........मैंने दीदी की गांड जीत ली थी. अब दीदी की गांड सिर्फ़ उनकी नहीं बल्कि मेरी भी थी. आज दीदी ने मेरे लंड को ‘गांड पास’ दे दिया था. अब लंड मौका मिलते ही दीदी की गांड में घुस सकता था.

मैं दीदी की गांड से लंड निकाल के कुछ देर खाट पर बैठा दीदी को बेंच पर चुदी घोड़ी की हालत में देखता रहा. फिर मैंने दीदी के पैर खोले और दीदी को बिस्तर पर बिठाया.

“बदमाश........कहीं का......आज तूने मुझे भी मीनू जैसा बना दिया ना आख़िरकार”

“मीनू जैसा मतलब?”

“मतलब ‘पूरी चुदी हुई’”

“हाँ मीनू अब तक यही कहती थी कि मैं अभी पूरी नहीं चुदी हूँ. वो कहती है जब तक लड़की मुंह, चूत और गांड में नहीं चुद लेती वो तब तक ‘आधी चुदी’ हुई ही रहती है. मैं भी अब तक आधी चुदी हुई थी अब पूरी चुद गयी हूँ.”

“दीदी या मीनू दीदी को आपने बता रखा है कि मैं तुम्हे चोदता हूँ?”

“हाँ.........वो जानती है”

“दीदी.........आप पागल हो.......इतनी पर्सनल बात कभी शेयर नहीं करते.”

“नहीं दीपू........मीनू मेरी सबसे प्यारी सहेली है. और उसकी तो खुद मुझे पर्सनल बातें पता हैं. वो तो खुद मेरे भाई संजू से चुदती रहती है आय दिन.”

“ठीक है दीदी जैसा आप ठीक समझो”

उस दिन मैं दीदी की गांड चोदके अपने घर वापस आ गया. उस दिन शाम को मीनू भी दीदी से मिलने उनके घर पहुंची.

उस दिन मैं दीदी की गांड चोदके अपने घर वापस आ गया. उस दिन शाम को मीनू भी दीदी से मिलने उनके घर पहुंची. उस दिन मीनू दीदी भी दोपहर में संजू से खूब चुदी थी और मीनू को पता था कि शायद मैं आज मधु दीदी की गांड चोदुंगा.

मीनू और लंगड़ी दीदी के बीच उस शाम जो बातें हुई वो कुछ इस तरह थीं:

मीनू: बड़ी खिली खिली लग रही है मेरी जान.........लगता है आज ये हरामी लंगड़ी पूरी चुद गयी.

दीदी: चल बदमाश..........जैसे खुद तो मंदिर में पूजा कर के आ रही हो. संजू बुरी तरह थक के सो रहा है ऊपर. संजू की हालत देख के ही समझ में आ गया था कि मीनू कुतिया आज खूब चुदी है.

मीनू: सच में यार.....आज तो क्या चोदा संजू ने! खूब पीट पीट के चोद रहा था कुत्ता. मुझे मार खाते हुए चुदना और चुदते हुए मार खाने में हद से ज्यादा मज़ा आता है.

दीदी: वो तो तेरी चाल ही बता रही है.

मीनू: हाँ यार बड़ा हरामी है तेरा भाई. मेरी चुदी हुई गांड का भी नक्शा बिगाड़ देता है. आज तो जब दर्द हो रहा था तो मन कर रहा था कि तुझे भी वो दर्द का अहसास कराऊँ. अगर संजू तेरा भाई नहीं होता तो तुझे जरूर चुद्वाती उससे. अच्छा तू ये बता कि आज तेरी गांड चोदी दीपू ने.......रोज़ कहती है कि वो तेरी गांड चोदने के चक्कर में है.

दीदी: हाँ री........आज मैं भी पूरी चुदी हुई लड़की बन गयी तेरी तरह.

मीनू: क्याआआआआअ..........सच मधु की बच्ची.........really.........क्या सच में आज तेरी गांड चुदी?

दीदी: हम्म्म्म.......चुदी ....

मीनू: दिखा.....मैं नहीं मानती......

दीदी: ........नालायक.......क्या दिखाऊ?

मीनू: अपनी चुदी हुई गांड और क्या.........

दीदी ने तुरंत अपनी सलवार खोली और मीनू के सामने घोड़ी बन गयी और उसे अपनी चुदी हुई गांड दिखाने लगी. मीनू लंगड़ी के नंगे चूतड़ खोल के देखने लगी.

मीनू: हाय्य्यय्य्य्य राम......कुतिया तू कह रही है कि तेरी गांड सिर्फ़ चुदी है .......कमीनी ये तो बहुत बुरी तरह चुदी हुई लग रही है! उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.......तेरी गांड का छेद तो बुरी तरह सूजा हुआ है. और तेरे चूतड़ कितने लाल हो रहे हैं. बहुत चाटें भी मारे क्या उसने तेरी गांड पे.........

दीदी: हाँ यार.......वो दीपू काफी उत्तेजित था तो उसने थोड़ा जोर से चुदाई करी आज.

मीनू: थोड़ा जोर से........ये थोड़ा जोर से है.........अरे ऐसी ठुकाई तो कभी मेरी गांड की भी नहीं हुई. तू तो खूब रोई होगी लगता है चुदते टाइम....वो तो तेरी आँखें ही बता रही है कि तू ख़ूब रोते हुए चुदी है.

दीदी: हाँ यार.........बड़ा रुलाया कमीने दीपू ने..........पूरा चोदू कुत्ता है. मेरे तो उसने आज पैर और कमर भी बांध दिए थे. हिल भी नहीं पा रही थी यार. बस किसी तरह रोते हुए चुद रही थी. मैंने आज पहले बार जाना कि लड़के इस तरह भी चुदाई करतें हैं.

मीनू: उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़.......पर बहुत ही कम लड़के इस तरह चुदाई करतें हैं मधु........तू किस्मत वाली है....सच्ची. इस दीपू को तो मुझ जैसी लड़की मिलनी चाहिए. मेरा भी बड़ा मन कर करता है कि कोई मुझे इतनी बेरहमी से चोदे. उफ्फ्फफ्फ्फ़...यार मधु......मेरा भी मन करता है हाथ पैर बंधवा के चुदने का. मैं हाथ पैर बंधवा के कभी नहीं चुदी यार. पर यार तेरी गांड के हालत देख के लगता है कि दीपू का लंड काफी तगड़ा है.

दीदी: हम्म्म्म.......

मीनू: क्या ह्म्म्म...ह्म्म्म.....मुझे लगता है कि दीपू का संजू से बड़ा है.

दीदी: हाँ.........

मीनू: तुझे कैसे पता कमीनी.........अपने भाई का भी लंड देखती है क्या तू कुतिया.

दीदी: कमीनी......मुझे दीपू ने ही बताया था कि उसका संजू के लंड से लम्बा भी है और मोटा भी.

मीनू: मेरे संजू का तो 6 इंच का है और खीरे जितना मोटा है.

दीदी: और मेरे दीपू का पुरे 8 इंच लम्बा है मोटा मूली जैसा. बस एक ही दिक्कत है कि दीपू का लंड थोड़ा टेड़ा है.

मीनू: पागल....टेड़ा लंड तो और ज्यादा मज़ा देता है....कुतिया.........किस्मत वाली.

दीदी: ही ही ही

 
कहानी लाइक करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
 
कुंवारी भाँजी पायल के साथ --1

मुझसे बड़ी मेरी चार बहनें हैं।

पायल मेरी सबसे बड़ी दीदी की लड़की है।

वो मुझे 7-8 साल छोटी है।

जब मैंने उसे चोदा था तब उसकी उम्र 18 साल से ज्यादा नहीं रही होगी।

पर इस उम्र में ही वो बड़ी-बड़ी लड़कियों को मात देने लगी थी।

गजब की खूबसूरती पाई थी।

उसके सीने पर उसकी चूचियाँ बड़े-बड़े नागपुरी सन्तरों के जैसी तनी रहती थीं।

उसकी फिगर 34:24:34 की थी जो उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रही थी।

बात तब ही है जब मेरे जीजा जी की तबियत खराब हो गई थी।

मुझे मम्मी को लेकर उनके घर जाना पड़ा।

मेरा मन तो नहीं था, पर जाना पड़ा।

सोचा था कि मम्मी को छोड़ कर दूसरे ही दिन वापस आ जाऊँगा, पर वहाँ तो कहानी कुछ और ही हो गई।

एक दिन के बजाय एक महीना रूक कर आया वो भी तब आया, जब पिता जी ने फोन करके बुलाया।

दरअसल जिस दिन गया, उसी दिन रात पायल की कुंवारी चूत हाथ लग गई।

फिर भला आने का क्या मन करता।

उस दिन शाम को हल्का-हल्का अन्धेरा हो चला था।

जिस कमरे में जीजा जी सोये थे, मोहल्ले की कुछ औरतें उन्हें देखने आई थीं।

मम्मी और दीदी उनके साथ बात कर रही थीं।

मैं भी वहीं दूसरी चारपाई पर रजाई ओढ़े आधा अन्दर आधा बाहर लेटा था।

बिजली थी नहीं.. पायल थोड़ी देर बाद एक मोमबत्ती जला कर लाई, जिससे थोड़ा बहुत उजाला हो गया था।

वो उसे टेबल के ऊपर रख कर मेरी ही रजाई में आ कर अपना पैर डाल कर बैठ गई और औरतों की बातें सुनने लगी।

पायल कुछ इस तरह से बैठी थी कि उसकी तनी हुई दोनों चूचियाँ मेरी नजर के सामने थीं।

जिन्हें देख कर मेरा लण्ड अपना नियन्त्रण खोने लगा था।

मैं अन्धेरे का पूरा फायदा उठाते हुए उसकी ऊचाईयों को अपनी आँखों से नाप रहा था।

थोड़ी देर में ही पायल ने अपना पैर कुछ इस तरह से फैलाया कि उसका पैर मेरे पैर से टकराने लगा।

उसके कोमल चिकने पैरों के स्पर्श ने मेरी भावनाओं को और भड़काने वाला काम किया।

मैंने उसे आजमाने के लिए अपने पैरों को जानबूझ कर आगे-पीछे करने लगा जिससे मेरा पैर पायल के चिकने पैरों से रगड़ खाते रहे।

पायल ने कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं दी, बस हल्की सी मुस्कान के साथ एक बार देखा और फिर सामान्य हो गई।

जिससे मेरी हिम्मत को थोड़ा बल मिला।

अब मैं अपने पैर को पायल के पैरों के और करीब ले जाने की कोशिश करने लगा।

पायल ने भी अपना पैर हटाया नहीं, बस एक-दो बार इधर-उधर किया।

जब भी वो मेरी तरफ देखती मुस्कुरा देती थी, जिससे मुझे और हिम्मत मिल जाती थी।

अब मैं पूरी तरह से रजाई के अन्दर घुस गया।

सिर्फ मेरी मुन्डी ही बाहर थी।

मैं अपनी क्रिया धीरे-धीरे तेज करने लगा।

मेरा लण्ड तन कर लोहे की रॉड बन चुका था।

काफी देर तक ऐसे ही करने के बाद जब मुझे लगने लगा कि पायल को भी मजा आ रहा हैं, तो मैंने धीरे-धीरे अपना पैर पायल के पैर के ऊपर चढ़ा लिया।

उसकी टाँगें एकदम संगमरमर की तरह चिकनी और कोमल थीं।

इस बार पायल ने मेरी तरफ नहीं देखा, पर मैंने गौर किया कि पायल के चेहरे पर गम्भीरता के भाव उभरने लगे थे।

जैसे वो अपने आप को सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही हो।

मैं मौके का फायदा उठाता जा रहा था।

मैंने अपने पैरों को उसकी मोटी चिकनी जाँघों तक पहुँचा चुका था।

जब मैंने अपना हाथ उसके पेट पर रखा तो वो काँप उठी और झट से मेरे हाथ को पकड़ कर नीचे कर दिया, पर अपने पैरों को अलग नहीं किया।

थोड़ी देर के बाद मैंने दोबारा कोशिश की।

इस बार भी उसने मेरे हाथ को हटाने की कोशिश की, पर मैंने बल के साथ उसके हाथ के दबाव का नाकाम कर अपना हाथ उसके पेट से हटने नहीं दिया।

पायल ने मेरा हाथ नहीं छोड़ा।

मैं ऐसे ही कुछ देर उसके चिकने पेट को सहलाता रहा।

फिर अपने हाथ को ऊपर की ओर खिसकाना शुरू किया तो पहले तो मेरा हाथ रोकने की हल्की कोशिश की, पर जब मैं नहीं माना तो उसने करवट ले ली और मेरी तरफ पीठ करके रजाई ऊपर तक खींच अपने हाथ से दबा लिया।

अब क्या था मैंने थोड़ा सा आगे खिसक कर उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही अपनी मुट्ठी में कैद कर लिया और हौले-हौले से दबाते हुए उसकी मस्त नरम चूचियों का भरपूर जायजा लेने लगा।

मुझे गजब का मजा आ रहा था।

इस समय मैं सारे रिश्ते-नाते भूल कर पायल की चूचियों के साथ खेल रहा था।

थोड़ी ही देर बाद पायल को भी मजा आने लगा।

वो हल्का सा पीछे आ गई जिससे मेरे हाथ में उसकी दोनों चूचियाँ आसानी से पकड़ में आने लगें।

अब मैं उसकी दोनों चूचियों के साथ मजे से खेल रहा था।

काफी देर तक ऐसे ही खेलने के बाद मेरा मन उसकी नंगी चूचियों को छूने की इच्छा होने लगी, पर उसकी दोनों चूचियाँ ब्रा में एकदम टाईट कसी थीं।

हाथ अन्दर जाने का कोई प्रश्न ही नहीं बनता था।

तो मैं उसकी ब्रा का हुक खोलने की कोशिश करने लगा, पर ब्रा भी काफी कसी थी। उसका हुक आसानी से खुलने का नाम ही नहीं ले रहा था।

तो पायल ने मेरी मदद के लिए अपनी पीठ को थोड़ा सा घुमा दिया जिससे हुक आसानी से खुल गया।

अब क्या था मैंने झट से हाथ बढ़ा कर उसकी ब्रा के अन्दर डाल दिया और थोड़ा जोर से दबा दिया।

पायल के मुँह से हल्की सी चीख निकल पड़ी।

उसने मेरा हाथ फौरन पकड़ लिया।

मैं भी थोड़ा सतर्क हो गया।

फिर हल्के से दो-तीन बार दबा कर जैसे ही मैंने दूसरी चूची को पकड़ा कि बिजली आ गई।

पायल ने झट से मेरा हाथ अपनी टी-शर्ट से खींच कर बाहर निकाल दिया और रजाई से बाहर आ गई।

पायल जब खड़ी हुई तो उसकी दोनों चूचियां टी-शर्ट के अन्दर लटक रही थीं क्योंकि मैंने उसकी ब्रा खोल दी थी।

पायल मेरी तरफ देखे बिना ही कमरे में भाग गई।

मेरा सारा मजा किरकिरा हो गया था।

उसके जाने के बाद जब मैंने अपना लण्ड पकड़ा तो देखा, मेरा लण्ड मस्ती का रस छोड़ने लगा था।

बिजली आने के कुछ ही देर बाद पड़ोस की सारी औरतें भी चली गईं।

उनके जाने के बाद मम्मी और दीदी भी रसोई में चली गईं।

थोड़ी देर में पायल मेरे और जीजा जी के लिए खाने की थाली ले कर आई।

पायल मुझसे नजरें तो नहीं मिला रही थी, पर उसके होंठों पर शर्मीली मुस्कान फैली हुई थी।

मुझे समझते देर नहीं लगी कि पायल को भी इस खेल में मजा आया है।

मेरी तो जैसे लाटरी लग गई थी।

मेरे खुशी का ठिकाना नहीं था।

मैं भूल गया कि पायल मेरी भाँजी है और वो भी मुझसे 7-8 साल छोटी है।

मैं तो बस उस कुंवारी चूत को चोदने की सोचने लगा।

रात में मम्मी और दीदी एक कमरे में मैं और जीजा जी एक कमरे में सो रहे थे, पर मेरी आँखों में नीद कहाँ थी मैं तो सबके सोने का इन्तजार कर रहा था।

थोड़ी ही देर में जीजा जी की नाक बजने लगी, मतलब वो सो चुके हैं।

मैंने उठ कर मम्मी और दीदी की आहट ली।

उनके कमरे में भी खामोशी थी।
 
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