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Adultery मस्तराम की कहानियाँ

कुंवारी बुर की चुदाई

अपने पहले ही सेक्स में मुझे एक कुंवारी बुर की चुदाई करने को मिली.

मैं आपको पहले अपना नाम बता देना चाहूँगा, मेरा नाम अंकुश है, उम्र 19 साल है और मैं इलाहाबाद में रहता हूँ।

यह बात अभी 3 महीने के पहले की है तब मैंने 12वीं के एक्साम दिए थे और आगे की पढ़ाई के बारे में सोच रहा था.

तभी फ़ोन आया कि मेरे नाना की तबीयत ख़राब हो गई और मम्मी-पापा ने मुझे मेरे नाना के घर भेज दिया. मैं वहाँ पर पहले भी रह चुका था इसलिए मुझे वहाँ रहने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई, मैं आराम से रह रहा था.

वहाँ पर मैं और मेरे नाना के अलावा मेरी मामी भी थी, मामी बहुत ही गुस्से वाली थी इसलिए मैं उनसे डरता था.

सामने वाले घर में एक बहुत ही खूबसूरत लड़की रहती थी जिसका नाम उपासना था, वो बहुत ही खूबसूरत थी और गली मोहल्ले के सारे लड़के उसे पटाने में लगे रहते थे पर वह किसी से कुछ बात नहीं करती थी। धीरे धीरे वो मुझे भी अच्छी लगने लगी थी।

वो मेरे घर पर अक्सर आती थी और मेरी मामी से बातें किया करती थी और हंसने लगती थी।

एक दिन मैंने उसे बोल दिया कि मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ, उसने कुछ जवाब नहीं दिया और वहाँ से चली गई।

फिर वो मुझे बाज़ार में मिली और उसने भी कहा कि वो मुझसे प्यार करती हैं और वहाँ से सामान लेकर चली गई।

एक दिन मेरे नाना की तबीयत ख़राब हो गई सब उन्हें लेकर अस्पताल चले गए, मैं घर पर अकेला था।

मैंने सोचा क्यों ना उपासना के घर चला जाए, मैं वहाँ पर गया, वहाँ पर उसकी मम्मी थी, मैं उन्हें बड़ी मामी कह कर बुलाता था, वो मुझे अपने बेटे की तरह मानती थी.

मैंने उन्हें नमस्ते की और मुझे बैठने को कहा.

वो चाय बनाने चली गई, मैं वहाँ पर ना बैठ कर सीधा उपासना के कमरे में गया. वहाँ पर मैंने जो देखा, मैं उसे देख के हैरान हो गया, वो अपने पर्सनल कम्प्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रही थी।

उसने जब मुझे देखा तो वो हड़बड़ा गई और कम्प्यूटर बंद करने लग गई.

फिर उसने मुझसे कहा कि वो डी.वी.डी. उसकी सहेली श्वेता ने दी है, वो तो बस ऐसे ही देख रही है।

तभी उसकी मम्मी वहाँ पर आ गई और मैं हॉल में चला आया, वहाँ पर चाय पी और घर चला आया।

घर आने पर मामी का फ़ोन आया कि वो आज नहीं आयेंगे, तू बड़ी मामी के यहाँ से खाना खा लेना.

मैंने कहा- ठीक है.

मामी ने फोन करके बड़ी मामी को मेरा खाना बनाने के लिए कह दिया।

मैं रात को जब वहाँ पर खाना खाने के लिए पहुंचा तब मैंने देखा, वहाँ पर सिर्फ उपासना है. मैंने उससे उसकी मम्मी के बारे में पूछा तो उसने कहा- वो सो गई हैं, उनके सर में दर्द हो रहा था।

मैं खाना खाकर उठ के जाने ही वाला था कि उसने कहा कि मेरे कमरे में चलो!

मैं उठ कर उसके कमरे में गया जो उपर था. वहाँ पर कम्प्यूटर पर एक ब्लू फिल्म चल रही थी. मेरे पहुँचते ही उसने मुझे किस करना शुरू कर दिया, मैं इस उसके इस हमले से हक्का बक्का रह गया मुझ पर भी सेक्स सवार हो गया, मैंने उसकी कमीज उतार दी. उसने आज ब्रा नहीं पहनी हुई थी. मैंने आज पहली बार किसी की नग्न चूचियाँ देखी थी, उसने मुझे उन्हें मुंह में लेकर चूसने को कहा जैसा ब्लू फिल्म में चल रहा था।

मैं पागलों की तरह उन्हें चूसने लगा, मुझे बहुत अच्छा लगा, मैं दूसरी चूची को दबाने लगा.

उसे भी बहुत अच्छा लग रहा था, वो अह्ह.. अह्ह्ह… अहह की आवाजें निकाल रही थी.

क्योंकि हम सबसे उपर वाले कमरे में थे इसलिए किसी का कोई डर नहीं था।

मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था, अचानक से उसने मेरी पैंट की जिप खोली और ब्लू फिल्म वाली लड़की की तरह मेरा लंड चूसने लगी.

मैं भी सेक्स, बुर की चुदाई के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानता था इसलिए कुछ नहीं कर रहा था.

तभी मेरा वीर्य निकल गया, उसने उसे थूक दिया और अपनी सलवार उतार कर फ़ेंक दी.

अब वो मेरे सामने सिर्फ पेंटी में थी. मैंने वो उतार दी, उसकी बिना बालों वाली बुर मेरे सामने थी, उसमें से कुछ चिपचिपा सा निकल रहा था। तभी उसने मेरा मुंह अपनी बुर पर लगा दिया. मैं भी उसे जीभ से चाटने लगा. उसमें से फिर कुछ निकल रहा था, वो थोड़ा नमकीन था.

अब मेरा लंड दोबारा खड़ा होने लगा था, मैंने उसे ऊपर उठा कर बिस्तर पर लेटाया और उसकी बुर के छेद पर लगाया और एक जोर का धक्का मारा और मेरा लंड आधे से ज्यादा अन्दर चला गया वो रोने लगी और चिल्लाने लगी.

मैंने देखा कि मेरे लंड पर खून लगा हुआ है, मैं समझ गया कि उसकी बुर की सील टूट गई है।

वह बार बार लंड निकालने को कह रही थी पर मैंने सोचा कि अगर इस समय लंड निकल लूँगा तो यह फिर कभी नहीं डालने देगी इसलिए मैं लंड न निकाल कर उसके ऊपर लेट गया और उसे किस करने लगा। थोड़ी देर में वो शांत हो गई और कहने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे चोदो… मुझे चोदो…

अब मेरा लंड दर्द करने लगा था, मैंने धक्के मारने चालू कर दिए, मैं 10 मिनट तक धक्के मारते रहा.

अचानक उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और झड़ गई पर अभी मेरा नहीं हुआ था इसलिए मैं धक्के मारते रहा और 7-8 मिनट बाद मैं भी उसकी बुर में झड़ गया और उसके बगल में लेट गया। फिर हमने अपने अपने कपड़े पहने और मैं अपने घर वापस आ गया।

मैं वहाँ पर 2 महीनों तक रहा और उसकी बुर की खूब चुदाई की.

फिर उसके मम्मी पापा ने उसकी शादी कर दी, उसके बाद वो मुझे कभी नहीं मिली.
 
नाजायज़ बीवी

दोस्तों में गाँधीधाम का रहने वाला हूँ और कुछ समय पहले मुझे पता चला कि हमारे पास के एक गाँव में मेरे कज़िन की शादी है तो इसलिए में, मेरा भाई और मेरी मामी शादी से चार दिन पहले ही चले गये. वहां पर पहले से कई करीब के रिश्तेदार भी आ गये थे. फिर में और मेरा भाई ऐसे ही चक्कर मारने निकल पड़े और कुछ दूरी चलने के बाद हमें कुछ मकान छोड़कर पास वाले एक घर में एक ज़बरदस्त लड़की दिखी, वाह क्या मस्त सेक्सी लग रही थी और वो मुझसे करीब तीन चार साल बड़ी लग रही थी, लेकिन उसका साईज़ देखकर मेरा लंड नाचने लगा और उसके फिगर का साईज करीब 38-32-36 होगा और वो कलर में थोड़ी सांवली थी. मैंने पहली एक बार देखकर उसे स्माईल दी. फिर मुझे उसकी तरफ से इतना कुछ ख़ास जवाब नहीं मिला और में थोड़ा आगे की तरफ चला गया और फिर मुझे पता चला कि जिस कज़िन की शादी है, यह लड़की उसकी सहेली है, क्योंकि वो घर में बहुत आना जाना कर रही थी तो इसलिए में बस अब उससे थोड़ी नज़र मिलाने लगा, लेकिन अब मुझे उसकी तरफ से अच्छा जवाब मिलने लगा था.

फिर में बस थोड़ी बहुत बात करने लगा था, शाम को जब में छत पर गया तो मैंने देखा कि वो भी पास वाली छत पर थी और अब हम दोनों बातें करने लगे. उसका नाम जैस्मिन था, मुझे उससे बात करते करते पता चला और मुझे उससे यह भी पता चला कि वो मुझसे करीब दो साल बड़ी थी. फिर रात को जब हम सोने जा रहे थे तो मामा ने मुझसे कहा कि हमारी छत पर आज बिल्कुल भी जगह नहीं है और तुम पास वाली छत पर जाकर सो जाना. दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे थे तो में तुरंत अपने लिए बिस्तर लेकर पास वाली छत पर चला गया. फिर मैंने वहां पर पहुंचकर देखा कि वो भी उस समय ऊपर ही सो रही है. वैसे दोस्तों हमारे अलावा कुछ और भी लोग वहां पर थे. फिर मैंने अपना बिस्तर उसके पास ही लगा लिया और बातों ही बातों में उसने मेरा मोबाइल ले लिया, पहले मुझे थोड़ा सा डर लगने लगा था,

क्योंकि मैंने ब्लूफिल्म बंद नहीं की थी. अब मैंने सोने का नाटक किया. फिर जब एक बज रहे थे तो मुझे नींद में ही उसकी सिसकियों की आवाज़ आ रही थी और जब मैंने थोड़ी आँख खोली तो देखा कि वो मेरे फोन पर ब्लूफिल्म बिना आवाज़ के देख रही थी और उसका एक हाथ नीचे उसके कपड़ो के अंदर था. दोस्तों में तुरंत समझ गया कि यह अब वो फिल्म देखकर बहुत जोश में आ चुकी है और अब वो अपनी गरम चूत में उंगली कर रही है. फिर मैंने कुछ नहीं किया और सो गया. अगली रात को मैंने फिर से उसे अपना मोबाईल दे दिया और दोबारा से सोने का नाटक करने लगा और फिर कुछ देर बाद वो दोबारा मेरे मोबाईल पर फिल्म देखकर अपनी चूत में दोबारा उंगली करने लगी थी. फिर क्या था और जब वो कुछ देर बाद झड़कर बिल्कुल शांत हो गई तो मैंने चुपके से उसके कान के पास में जाकर उससे बोला कि तुम यह क्या कर रही थी?

तो वो अचानक से मुझे अपने पास देखकर और मेरे मुहं से यह बात सुनकर एकदम से डर गयी थी और फिर उसने मुझसे कहा कि प्लीज़ धीरे बोलो वरना किसी ने सुन लिया तो बहुत बड़ी समस्या हो जाएगी. फिर मैंने उससे बोला कि में नीचे पानी पीने जा रहा हूँ, तुम मुझे वहां पर मिलो. अब वो एकदम चुपचाप मेरे पीछे पीछे नीचे आ गई. फिर में आगे आगे नीचे जाने लगा और वो आ गई और अब वो मेरे सामने शरम से अपना सर नीचे झुकाकर खड़ी हुई थी.

फिर मैंने उससे कहा कि तुम मुझसे बिल्कुल भी मत डरो, में किसी को कुछ भी नहीं बताऊंगा और यह बात हमेशा हम दोनों के बीच में रहेगी, लेकिन अगर तुम मेरा साथ दो तब ऐसा हो सकता है और फिर मैंने उसका एक हाथ पकड़ लिया और उसे एक स्माईल दी तो वो भी मेरी तरफ हंसने लगी. दोस्तों अब मैंने उस अच्छे मौके का फ़ायदा उठाया और उसे तुरंत हग कर लिया, वो पहले मुझसे मना करके दूर हटने लगी. फिर मैंने उससे कहा कि अब ज्यादा नाटक मत करो वरना में सभी लोगों को सब कुछ सच सच बता दूँगा कि तुम क्या कर रही थी. फिर उसने कहा कि प्लीज़ तुम्हें जो कुछ भी करना है करो,

लेकिन किसी को कुछ भी बताना मत, वरना मेरी बहुत बदनामी होगी और मेरे घर वाले मुझे बहुत मारेंगे. दोस्तों अब मुझे उसकी तरफ से ग्रीन सिग्नल मिल गया, जिसको देखकर में मन ही मन बहुत खुश हो गया और अब मैंने उसे किस करते हुए उसे हग किया, हम लोग उस समय बहुत अंधेरे में खड़े हुए थे और उस समय सभी लोग सो भी चुके थे, इसलिए कोई भी हमें नहीं देख पा रहा था. फिर कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि वो भी अब हल्की हल्की गरम होने लगी थी.

फिर मैंने कुछ देर पेंटी के ऊपर से ही चूत को सहलाया और छूकर उसकी गरमी को महसूस किया और फिर जैसे ही कुछ देर बाद मैंने उसकी पेंटी में अपना हाथ डाला तो मैंने महसूस किया कि वो तो पहले से ही बिल्कुल गीली थी. फिर बस थोड़ी देर चूत पर अंदर बाहर हाथ घुमाने के बाद मैंने उससे कहा कि कल रात को तुम मुझे फिर से मिलना और फिर वो वहां से चली गई. में अब बस अगली रात होने का इंतज़ार कर रहा था, मेरा वो दिन बहुत मुश्किल से निकला और में पूरे दिन उसकी चूत बूब्स के बारे में सोचता रहा, मेरा बहुत बुरा हाल था. फिर कुछ घंटो बाद रात को मैंने दोबारा पास वाली छत पर उसके पास अपना बिस्तर लगाकर उससे बातें करने लगा. कुछ घंटो बाद की हंसी मजाक करने के बाद जब सभी लोग सो गए तो मैंने सही मौका देखकर उसे इशारा किया और उससे कहा कि तुम मेरे पीछे आ जाओ. वो मेरे पीछे आ गई.

फिर में उसे अपने साथ नीचे ले गया और एक बिल्कुल अँधेरी, सुरक्षित जगह देखकर में किस करने लगा और फिर से उसकी पेंटी के हाथ डालकर चूत में उंगली करने लगा और अपने एक हाथ से उसके बूब्स को दबाने लगा और कुछ देर बाद उसने मुझसे कहा कि यहाँ पर नहीं, एक रूम बिल्कुल खाली है और तुम मेरे साथ वहाँ पर चलो. फिर हम दोनों उस रूम में चले गये. फिर मैंने दरवाजा खोलकर देखा तो वहां पर कोई भी नहीं था बस एक बिस्तर पड़ा हुआ था, शायद वो हमारे लिए ही था. में उसे कुछ देर खड़े खड़े ज़ोर से किस करते हुए बिस्तर पर ले गया और फिर उसके कपड़े उतारने लगा और वो भी अब तक बहुत गरम हो गयी थी, अब में उसके गरम, मुलायम बूब्स को दबाने और चूसने लगा और वो सिसकियाँ लने लगी, सस्स्स्स्ईईईईइ आह्ह्ह्हह्ह. फिर में धीरे से चूत की तरफ बढ़ने लगा और उसकी चूत को चाटने लगा और बहुत देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुहं में देने लगा.

फिर वो मुझसे साफ मना कर रही थी. मैंने उसका सर जबरदस्ती पकड़ा और अपना लंड उसके बालों को खींचते हुए उसके मुहं में डाल दिया और बहुत देर तक जबरदस्ती अपना लंड चुसाने के बाद अब वो खुद बहुत अच्छे से चूसने लगी. अब उसने मुझसे कहा कि प्लीज़ आज तुम मेरी चूत की खुजली को अच्छी तरह से मिटा दो, मेरी तड़पती तरसती चूत को आज तुम पूरी तरह से शांत कर दो. फिर मैंने जोश में आकर उसको नीचे लेटा दिया और उसकी प्यासी चूत में लंड को डालने लगा, में धीरे धीरे अपने लंड को आगे की तरफ धकेलने लगा तो वो बहुत ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी, आह्ह्ह्हह उफफ्फ्फ्फ़ आईईई और मुझे उसके चिल्लाने से ही पता लग रहा था कि वो कितनी प्यासी है?

फिर मैंने उसके मुहं पर अपना एक हाथ रखकर उससे कहा कि प्लीज अब ज्यादा मत चिल्ला वरना कोई सुन लेगा. फिर वो कुछ शांत हो गई और हल्की हल्की सिसकियाँ लेने लगी, में अब लगातार अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, लेकिन कुछ देर बाद उसने अपना पानी छोड़ दिया और फिर भी में उसे चोदता ही रहा. कुछ देर बाद में लंड को चूत से बाहर निकालकर उसकी गांड में डालने लगा तो वो बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी. उसने मुझसे कहा कि प्लीज़ इसे बाहर निकालो, प्लीज़ उफ्फ्फ्फ़ माँ आईईइ में मर जाउंगी, मुझे बहुत आह्ह्ह्हह्ह दर्द हो रहा है, लेकिन फिर भी में थोड़ा सा रुककर चुदाई करने लगा और कुछ देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा था और में अपनी चुदाई की स्पीड को बढ़ाने लगा था. अब वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज तुम अपना पानी मेरे मुहं में छोड़ देना, मुझे उसे चखकर भी देखना है.

कुछ देर उसकी चुदाई करने के बाद फिर से अपने लंड को उसकी गांड से बाहर निकालकर उसके मुहं में दे दिया और वो बहुत मज़े ले लेकर चूसने लगी, लेकिन कुछ देर बाद मैंने अपना गरम पानी उसके मुहं में छोड़ दिया और वो उसे बहुत मज़े से चूसकर चाटकर गटक गई और थोड़ी देर तक उसकी चूत से खेलने के बाद फिर से मेरा लंड खड़ा हो गया और फिर मैंने उसे अपना लंड उसकी चूत में डालकर चोदना शुरू कर दिया, कुछ देर के धक्कों के बाद मैंने अपनी पोज़िशन बदल ली और अब में उसे डॉगी स्टाईल में चोदने लगा और बहुत देर तक लगातार धक्के देकर चुदाई करने के बाद मैंने उसकी गांड में दोबारा से अपना लंड घुसा दिया और ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा, लेकिन मैंने महसूस किया कि अब वो कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से चिल्लाने लगी. फिर भी में नहीं रुका और अपना लंड डालता रहा और अब मैंने उसके मुहं में अपना लंड देकर लेट गया और वो बहुत देर तक चूसती रही और अब उसने खुद कहा कि मेरी गांड में अपना लंड घुसा दो और में फिर से अपना लंड उसकी गांड के अंदर डालने लगा और अब मैंने उसके दोनों पैरों को पूरे फैला दिए थे और साथ ही में उसकी चूत में उंगली भी कर रहा था. अब फिर से उसकी चूत का पानी निकल गया और अब उसे और भी मज़ा आने लगा था और फिर से में उसकी गांड में ही दूसरी बार झड़ गया और कुछ देर उसके पास थककर लेट गया.

फिर कुछ देर बाद मैंने उठकर अपने कपड़े पहने और टाईम देखा तो उस समय रात के करीब 3:45 हो रहे थे. में ऊपर जाकर सो गया और कुछ देर बाद वो भी मेरे पास आकर लेट गई और मुझे पता ही नहीं चला कि कब सुबह हो गई थी. दोस्तों अब शादी को दो दिन और थे, लेकिन फिर से मैंने शादी के जागरण वाली रात को उसे एक बार फिर से बहुत जमकर चोदा. मैंने उसकी चुदाई करके उसके जिस्म के बहुत मज़े लिए और उसने भी मुझसे मेरी चुदाई से खुश होकर मेरा हमेशा पूरा पूरा साथ दिया,

लेकिन शादी के दो दिन बाद में अपने घर पर आ गया और उस समय मैंने उससे मिलकर कहा कि में दोबारा जरुर आऊंगा और हम दोबारा चुदाई के ऐसे ही मज़े लेंगे और अब में इंतजार कर रहा हूँ कि कब में फिर से अपने गाँव जाऊंगा और फिर से उसकी चुदाई करूंगा, में अब भी उसकी चुदाई को याद करके कभी कभी मुठ मार लिया करता हूँ और में आज तक उस चुदाई को नहीं भुला सका हूँ ..
 
बेटे ने मां को चुदवाया

हेलो दोस्तों मेरा नाम धम्मदीप कांबळे है। मै महाराष्ट्र के रमाबाई आम्बेडकर नगर का रहनेवाला हूँ। मेरी उम्र २९ साल है और मैं एक कॉलेज में प्राध्यापक हूँ। वैसे मै दिखने ने ठीकठाक हूँ मेरी हाइट ५ फुट १० इंच है। रंग काला है और फ्रेंच कट दाढ़ी रखता हूँ, मेरी कमर 32 इंच है और मेरा सीना चौड़ा है मेरे सारे बदन पर काफी बाल हैं . लंड मेरा औसत से कुछ ज्यादा है, यही कोई 7 इंच और औसत से ज्यादा मोटा भी है।

आज मै आपको मेरी जिंदगी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ। एक बार मै मुंबई से अहमदाबाद ट्रेन से आ रहा था । मेरे पास एक २५ साल का लड़का बैठा था, उसने अपना नाम जतिन पटेल बताया, बोला प्यार से उसे जीतू कह सकते हैं . बातो बातो में उसने बताया की उसके पिता बड़े अधिकारी हैं और उसका सरकारी मकान गांधीनगर में है. मुझे उस रोज़ अहमदाबाद ही रुकना था और अगले दिन सुबह वह से निकलना था, उसके आग्रह पर मैं उसके साथ उसके घर चल दिया.

उसके पिता का सरकारी घर ठीकठाक सा था . घर में शाम को नौकर आया और खाना बना कर चला गया. हमने खाना खाया फिर छत पैर गप्पे मारने लगे. थोड़ी गर्मी थी, इसलिए हमने टी शर्ट और निक्कर पहना हुआ था।

"गर्मी बहुत है धम्मदीप, चाहो तो टी शर्ट खोल कर आराम से बैठो, तुम कहो तो मैं तुम्हे अपने पिताजी की लुंगी ला देता हू उसे पहन लो, " उसने कहा।

मैं हाँ बोलता उस से पहले ही वह निचे से लुंगी ले आया, "तुम कहते हो तो पहन लेता हू", कह कर मैं नीचे जाने लगा। तो वो बोला,' धम्मदीप दोस्तों में क्या शर्म यहीं पहन लो".

मैं हँसते हुए बोला, "यार मैं घर में चड्डी नहीं पहनता,"

"तो क्या हुआ, पहन लो यार , अँधेरा है वैसे भी छत से कोई देख नहीं सकता.."

मुझे लगा अब पहन ही लेता हूँ, मैंने लुंगी उपर लपेटी और निक्कर सरका दिया और फिर लुंगी लपेट ली,' ' क्या यार तुम तो बड़ा शरमाते हो,' वो बोला, मैं हसने लगा..

' धम्मदीप मैं मालिश बहुत अच्छी करता हूँ, तुम ट्रेन के सफ़र से थके हुए भी हो, कहो तो एक अच्छी मालिश कर दू? जीतू बोला.

अब मालिश के लिए कौन मना करेगा, मैं वही छत पर बिछे बिस्टर पर लेट गया, जीतू तेल ले आया और मेरे पैरों से उसने मालिश शुरू कर दी, अँधेरा था ठंडी हवा थी बड़ा अच्छा लग रहा था, उसने रानो पर मालिश के बाद मेरी जांघों पर मालिश शुरू कर दी , मालिश करते करते उसके हाथ मेरे नितम्बों से टकराने लगे, और उसने थोड़ी देर बाद मेरे नितम्बों से लुंगी उपर कर दी , जांघों के बाद वो मेरे नितम्बों पर भी मालिश करने लगा और बीच के छेद पर भी खूब तेल लगता रहा , मुझे अच्छा लग रहा था , मैं चुपचाप लेटा रहा. मालिश करते करते वो खुद नंगा हो गया था और बिच बिच में उसका लंड मेरी जांघों से टकरा रहा था , पर यह सब मुझे अजीब नहीं लग रहा था न जाने क्यूँ? पहली बार मेरी मालिश कोई नग्न पुरुष कर रहा था और मैं भी तो नग्न ही तो था..

' यार धम्मदीप लुंगी की गाँठ खोल दे, तेल से ख़राब हो जाएगी , मैंने भी कपडे इसी लिए उतारे हैं, जीतू बोला. मैंने उसके कहे मुताबिक लुंगी हटा दी, अब मैं उल्टा और नंगा लेटा था.. उसने मेरी पीठ और हाथो पर भी मालिश की , और फिर वापस वो मेरी गांड पर आ गया , गांड के छेद पर उसने खूब सारा तेल डाला और उसको धीरे धीरे सहलाने लगा,' धम्मदीप बुरा न मनो तो गांड चाट लू ?

मुझसे कुछ बोला न गया और मैंने गांड उपर कर दी, जैसे मैं कोई चौपाया जानवर हूँ, उसने अब मेरी गांड के छेद को खोला और अंडर जीभ डाल दी, उसकी जीभ और गहरी जा रही थी , वो गांड ऐसे खा और चाट रहा था जैसे लॉलीपॉप चूस रहा हो, मुझे आश्चर्य हो रहा था की इसको घिन नहीं आ रही पर मैं आनंद ले रहा था जीवन मैं पहली बार गांड चटाई का,

किसी उस्ताद खिलाडी की तरह वो रुका नहीं और अब उसके हाथ मेरे लटक रहे थेले पर आ गए , मेरे अंडकोष वो अब सहला रहा था और बीच बीच में उनको भी चाट रहा था , लेकिन उसका पूरा जोर गांड पर ही था, गांड में उसकी जीभ कोई एक- डेढ़ इंच जा चुकी थी बीच बीच में वो छेद को थोडा खोलता और जीभ और अन्दर दाल देता , अब मेरी हालत ख़राब थी और उसको इसका अंदाज़ा था, उसने चटाई के साथ साथ एक हाथ से मेरा लौड़ा पकड़ लिया और उसको हिलाने लगा.. दुसरे हाथ से वो मेरे आंड दबा रहा था, गांड आंड और लंड तीनो को उसने अपने कब्ज़े में कर रखा था , मैं झड़ने को ही था और मेरी गांड अब तेज़ी से उपर नीचे होने लगी थी, उसने जीभ से मेरी गांड को चोदना शुरू कर दिया और हाथ की स्पीड बाधा दी,

'ओह्ह चूतिये पानी छूट रहा है मेरा , मैं बोला, ' हा राजा पानी नहीं अमृत ' कह कर उसने ठीक पानी की पिचकारी छूटने से पहले मुह को गांड से हटा कर मेरे लंड के छेद पर रख दिया, मेरी फूट रही वीर्य की बूंदों को वो गटागट पी गया, धम्मदीप तेरा अमृत बड़ा गाढ़ा और रसीला है, वो बोला . मैंने पहली बार किसी आदमी के मुह में पानी छोड़ा था, मुझे किस चूत को चोदने का मौका भी नहीं मिला था इसलिए पहली बार किसी और ने मेरे लंड पर हाथ लगाया था और पहली बार किसी ने पानी छुट्वाया था... मैं उत्तेजित तो था लेकिन पूरा रोमांचित नहीं था, मुझे लगा मैं कहीं होमो तो नहीं हूँ या हो रहा हूँ?

एक बार खुलते ही जीतू फॉर्म में आ गया, और मुझे उसकी कहानी सुनाने लगा।

बोला जब वो ७ साल का था तब घर के एक नौकर ने उसको लंड चुसवाने और गांड मरवाने की आदत डाल दी थी। ' मैं घर से थोडा दूर एक दूधवाले के यहाँ दूध लेने जाता था,' वो मुझे दूध के बहाने रोक के रखता फिर अपनी धोती खोल कर मेरा मुह चोदता , १३ साल का होते होते जीतू ने कोई १५ लोगों से गांड मरवा ली थी '

"उन दिनों मैं अच्छे स्कूल में पढने सूरत आया , जहाँ पूरा परिवार रहता था, मैं मेरे पिताजी, मेरी मा और मेरी बहिन" , यहाँ जीतू के घर उसको और उसकी बहन को पढ़ने एक अध्यापक आता था ,' उसका नाम था अमीन खान और वो साठ के आसपास था।

जीतू ने बताया , "दिन में जब माँ सो जाया करती थीं या कई बार बाहर गयी हुई होतीं तब वह बड़ा ज़ालिम बन जाता। मुझे वो नंगा कर के डंडे से मारता, मेरी बहन के सामने मेरी गांड लाल कर देता, कई बार उसी डंडे को मेरी गांड में डालता। मेरी बहन और मुझे दोनों को डरा धमका कर नंगा कर देता, मेरी बहन की छोटी छोटी चुचियों को वो बड़ी बेरहमी से दबाता और उसकी चूत में ऊँगली करता और कभी डंडा डालने की कोशिश करता, फिर वो नंगा हो कर मेरे मुह पर बैठ जाता , मैं उसकी बदबूदार गांड चाटता और मेरी बहन उसका कटा हुआ लंड चूसती , हालाँकि उसका लंड खड़ा नहीं होता था लेकिन वो नरम लंड से ही मेरे और मेरी बहन के मुह में पानी छोड़ देता था "

जीतू ने बताया , "बस तब से ही मेरी गांड चाटने की आदत पड़ गई . जीतू की बाते सुन कर में फिर से उत्तेजित होने लगा था, धम्मदीप अब तक मैंने कोई ४० से ५० के बीच लोगों की गांड चाटी है और कोई ६० लोगों का लंड चूसा है या गांड मरवाई है "

"जीतू तुम्हें कभी किसी औरत को चोदने की इच्छा नहीं हुई ?" मैंने पूछा .

"नहीं कभी नहीं हुई मुझे सिर्फ आदमी ही आकर्षित करते हैं, मैं चाहता हूँ मैं मेरे पापा का लंड भी चूसूं , एक दो बार बहाना कर के उनके साथ भी सोया लेकिन उन्होंने कोई इंटेरेस्ट नहीं लिया" , वो बोला.

"और कभी माँ या बहिन को चोदने की इच्छा नहीं हुई ? "

"नहीं कभी नहीं लेकिन अगर तुम उनको चोदोगे तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा। "

मुझे उत्तेजना हुई , मैंने पूछा ,' कैसे ? '

'कैसे क्या तुम चोदो मेरी माँ को और बहिन को मैं तुम्हारा लंड चूसूंगा और गांड चाटूंगा ,' वो बोला।

अच्छा तुम्हारी माँ और बहन की गांड चाटने की इच्छा नहीं होगी ? मैंने पूछा .

"गांड तो मैं किसी का भी चाट लूँ , माँ हो या बहिन , लेकिन अब तक किसी औरत की गांड चाटी नहीं, "उसने कहा .

मैंने कपडे पहने नहीं थे इसलिए मेरा फूलता हुआ लंड अब साफ़ दिख रहा था, जीतू ने उसको प्यासी नज़रों से देखा और अपना मुह उसके पास ले आया, "धम्मदीप तुम्हारा लंड बहुत मोटा है किसी काले केले के जैसा "

"ले गांडू अब तू इस केले का छिलका उतर और खा इसको" मैं बोला।

जीतू ने अपने होठों से मेरे लंड के आगे की चमड़ी उपर नीचे करना शुरू कर दिया और सुपाड़े को गीला कर के उसको दांतों से हल्का हल्का दबाते हुए चूसने लगा , मेरा सुपाडा फूल कर आलू जैसा हो गया था, ' धम्मदीप तू मेरी गांड बाद में मरना अगर तुझे सुसु आ रही हो तो पहले मेरे मुह में मूत ले मुझे प्यास लगी है, मुझे कुछ उल्टा सीधा सोचना पड़ा ताकि उत्तेजना कम हो और लंड सामान्य हो जाए क्यूंकि सुसु तो लंड के छोटे होने पर ही निकलती है , खैर थोड़ी देर में मेरा लंड छोटा हो गया ' मेरे मुह पर बैठ जाओ धम्मदीप और मूतो , वो बोला, मैं उसके मुह पर बैठ गया उसने मेरा लंड पकड़ा और उसको होठों से लगा दिया, मेरी धार छूट रही थी, मैं मूत रहा था और वो सांस बंद करके उसको पी रहा था, कोई आधा लीटर मूत वो पी गया, आह धम्मदीप तुमने मेरी प्यास बुझा दी, अब अगर तुमको बाथरूम का कोई भी काम हो टट्टी आये तो भी मेरे मुह में करना , मैं तुम्हारा टोइलेट हू, वो बोला.

' तुमको ये अपमान कैसे अच्छा लगता है? मैंने पूछा , ' धम्मदीप मुझे अपमान में बहुत आनंद आता है, ' एक बार मुझे दो ऑटो रिक्क्षा वाले अपने साथ अपनी चाल में ले गए और मेरा खूब अपमान किया वो रात मुझे अभी तक याद है, वो बोला, ' क्या किया उन्होंने ?' मैंने जिज्ञासा में पूछा ,' उन्होंने मुझे नंगा कर के एक कुर्सी से बाँध दिया, फिर वो भी नंगे हो गए फिर पहले तो उन्होंने मुझे थप्पड़ मारे जोर जोर से मुह पर, फिर उन्होंने मेरे मुह में मूता और गन्दी गन्दी गालियाँ दीं , वो बोला,' क्या गलियां दीं ? बोलते रहे कुत्ते , हरामजादे , कमीने , गांडू , भोसड़ी के, चूतिये , मादरचोद , भेन्चोद , भड़वे वगेरह फिर मुझे कहा अपनी माँ और बहिन को गालियाँ दे भड़वे , तो मैंने मेरी माँ को रंडी कहा लंड चोद कहा भोसड़ी की कहा चूत कहा , बहिन को भाई चोद , बाप चोद रंडी और खूब साडी गालियाँ दीं , फिर उन्होंने मेरे हाथ पांव बाँध कर मुझे घोड़ी बना दिया, एक ने अपना लौड़ा मुह में डाला दुसरे ने गांड में उन्होंने पूरी रात मुझे चोदा मूता गांड चटवाई और गालियाँ दीं और मेरी माँ बहिन को गालियाँ दिलवायीं , जीतू बोला.

" तुम्हारी माँ बहिन को ये सब पता है? मैंने पूछा . ' नहीं उनको नहीं पता कि मैं गांडू और गांड चाटू हूँ, बहिन को सिर्फ वो मास्टर वाला किस्सा पता है पर तब हम दोनों छोटे थे , ' वो बोला,' अच्छा जीतू तुम मुझे अपनी माँ और बहिन को चुदवादोगे ? ' हा क्यूँ नहीं? लेकिन मैं सिर्फ मदद कर पाउँगा बाकी काम तुमको खुद करना होगा , वो बोला, ' मैं कैसे करूँगा ? और तुम क्या करोगे ? ' देखो एक साथ तो कुछ होगा नहीं मेरी माँ अगले शनिवार को यहाँ आ जाएगी, मैं उनको कह दूंगा की तुम एक कॉलेज में पढ़ते हो और मेरी पढाई में मदद के लिए यहाँ आ रहे हो, बाकी सब तुमको करना पड़ेगा , वो बोला, इधर उसकी बातें सुनकर मेरा लौड़ा फिर बेकाबू हो चुका था, ' जीतू फिर से मेरे लंड की टिप से मेरी गांड के छेद तक अपनी जीभ और उँगलियाँ चला रहा था , जब लंड पूरा कड़क हुआ तो वो घोड़ी बन गया, ' धम्मदीप अब मेरी गांड की प्यास बुझाओ , सहन नहीं होता अब, कहके उसने गांड ऊँची कर दी, मैंने उसकी गांड पर कसके थप्पड़ मारे और फिर बिना थूक लगाये सूखा लंड गांड के छेद पर रख के दबाव दिया तो सुपाडा गांड में धंस गया, उसकी हलकी चीख निकली ,' ये सोच भड़वे मैं तेरी माँ को चोद रहा हूँ, बता तेरी माँ कैसी है? '
 
चुदते चुदते ऊ ओह आह करते करते वो बोलने लगा, "मेरी माँ का नाम सजल पटेल है , वो 45 साल की है, उसकी लम्बाई 5 फूट 3 इंच है, शादी के वक्त तो दुबली थी अब मोटी है। "

मैंने जोर से लंड गांड में डाला और बोला, "कितनी मोटी है भड़वे ?"

"कोई 80 किलो होगी, उसके स्तन कोई 36 इंच के होंगे एक बार मैंने ब्रा का साइज़ पढ़ा था बाथरूम में", वो बोला।

"अपनी रंडी माँ को कभी नंगा देखा ?", मैंने पूछा।

"हा थोडा सा देखा था", वो बोला। मैंने फिर लवडे का स्ट्रोक लगाया और पूछा "कैसे और कब देखा बता रंडी की औलाद?"

"बाथरूम के छेद से देखा था, वो अपनी काख के बाल और नीचे की झांटें रेजर से साफ़ कर रही थी। वो नंगी खड़ी थी उसके स्तन थोड़े लटके हुए हैं और निप्प्ल्स थोड़े छोटे हैं और पीले से रंग के हैं, थोडा सा पेट निकला हुआ है, नीचे झांट ज्यादा भरे हुए नहीं थे थोड़े ही थे कम गहरे और थोड़े गुन्घराले , मेरी रंडी माँ ने नीचे बैठ कर चूत के फांकें फैलायीं और फिर पहले क्रीम लगाया.................."

"ऊऊ गांड फट गयी धम्मदीप तुम्हारी चुदाई से "

"तू माँ के बारे में बता गांडू , अपनी गांड की चिंता छोड़ इसमें सुबह मैं टाँके लगवा दूंगा", मैंने कहा।

"हा फिर उसने नीचे झुक के अपने झांटों में रेजर फिराया मुझे साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था क्यूंकि वो नीचे बैठी थी, पर उसकी चूत के होठ फुले हुए और मोटे लग रहे थे थोड़े से भूरे या काले रंग के, फिर मेरी चोदु माँ ने खड़े होकर नल से चूत और काख धोयी और फिर मुझे लगा की वो बाहर न आ जाये इसलिए मैं वहां से हट गया "

"गांड कैसी थी रंडी सजल की ? "

" गांड बहुत मोटी है मेरी गांड की दोनों फांकें मिला दो तो उसकी एक फांक बनती है", वो बोला। .

"अच्छा भड़वे ये बता तेरी जगह अगर इस वक़्त मैं तेरी माँ की गांड मार रहा हूँ तो तू क्या करेगा?"

"मैं पीछे आकर आपके अंडकोष और गांड चाटूंगा, और जब आप माँ की गांड में पानी छोड़ दोगे तो वो पानी भरी गांड चाटूंगा"

ये सुनकर मुझे इतनी उत्तेजना हुई कि मेरी पिचकारी भर गयी , "ले रंडी के बेटे, ले तेरी माँ के खसम. तेरे बाप का पानी अपनी भोसड़ी में मादरचोद रंडवे , कोठे की औलाद ये ऊऊह्ह्हआआआआ आआआआआआअहऊ ऊऊऊऊ", कहकर मैंने फिर पानी छोड़ दिया , ऐसे करके सुबह तक उसने मुझे कोई 5 बार खाली किया.

सुबह वो अपनी गाडी में मुझे स्टेशन छोड़ने आया, "धम्मदीप अगले सन्डे आ जाना , और एक बार माँ को जैसे तैसे पटा लेना , फिर आगे देखेंगे" . मैंने हाँ कहा और ट्रेन में बैठ गया।

अगले शनिवार मैं वापस अहमदाबाद पंहुचा , जीतू मुझे स्टेशन पर लेने आया था, गाडी में बैठकर आधे घंटे से भी ज्यादा समय में मैं उसके घर पंहुचा ,

जीतू ने मेरा बैग उठाया और जैसे ही अन्दर गया उसकी माँ ने नमस्ते किया। और बोली, "जीतू आपकी बहुत तारीफ कर रहा था की सर बहुत अच्छा पढाते हैं और इसके लिए इतनी दूर से चलकर आये"

"मैं चाहकर भी ठीक से जीतू की मा को देख नहीं पाया, और सीधा उपर वाले कमरे में चला गया जो जीतू का कमरा था। मैं थकान उतरने के लिए नहाया और नहाकर बाहर आया तो जीतू खड़ा था।

"जीतू बता क्या पहनू , लूंगी चलेगी या पजामा कुरता पहनू ?"

"लुंगी पहन लो मेरे पापा भी तो पहनते हैं, और पापा वाली लुंगी ही लाया हूँ ताकि माँ को अच्छा लगे", कहकर उसने मुझे लुंगी दे दी। मैंने उपर एक कुरता पहना हुआ था, नीचे जीतू के पापा की लुंगी पहन ली।

इससे पहले की आगे की बात बताऊँ, जीतू के पापा के बारे में बता देता हूँ, उनको सरकार ने डेप्युटेशन पर जामनगर भेजा हुआ था इसलिए वे गांधीनगर नहीं के बराबर आते थे। जीतू कोचिंग के लिए गांधीनगर था जबकि उसकी बहन सूरत में ही कॉलेज में पढ़ रही थी।

मैं सीढ़ी उतर के नीचे आया और हम दोनों डायनिंग टेबल पर बैठ गए जीतू की माँ और उनका नौकर खाना परोस रहे थे, "आंटी आप भी साथ बैठ कर खा लीजिये ना", मैंने कहा।

"नहीं आप और जीतू खाईये वैसे भी मेरा शुक्रवार का व्रत है", जीतू की माँ बोलीं, मैं उनको तिरछी नज़रों से देख रहा था, उन्होंने गाउन पहना हुआ था वे औसत महिला थी, गोरी थीं और बदन भारी था, उनके स्तन खास बड़े नहीं थे मगर गांड विशाल थी , थोडा पेट उभरा हुआ था मगर इतना तो उत्तेजित करता ही है. उन्होंने गाउन के उपर इज्ज़तदार महिलाओं की तरह चुन्नी नहीं लपेटी हुई थी।

मुझे लगा वे थोड़ी खुली हुई महिला हैं. खाना खाने के बाद मैं वाश बेसिन में हाथ धो रहा था तो जीतू की माँ मेरे पास तौलिया लेकर आई। हाथ पोंछने के बहाने मैंने उनकी उँगलियाँ और थोडा कोहनी से पेट छूने की कोशिश की। उनको इस से कोई खास परेशानी नहीं हुई।

"धम्मदीप सर मेरी माँ कोल्ड कॉफी बहुत अच्छी बनाती है, पियोगे ?" जीतू बोला।

"आंटीजी कोल्ड कॉफी से तो व्रत तो नहीं टूटता ?" मैंने पुछा।

"नहीं सर, कोल्ड कॉफी तो आपके साथ ज़रूर पियूंगी", वो बोलीं।

"आप मुझे सर मत कहिये मैं आपसे छोटा हूँ," मैं बोला।

"नहीं जीतू के सर हमारे भी सर हैं", वो बोलीं।

मैं और जीतू बाहर लॉन में आकर बैठ गए।

"धम्मदीप कैसी लगी मेरी माँ ?" उसने पूछा।

"यार जीतू चुद जाये तो ज़िंदगी बन जाये, माल है तेरी माँ तो," मैं धीरे से बोला।

कोई सुन न ले इसलिए हम दूसरी बातें करने लगे। थोड़ी देर में सजल कॉफी ले आई और हमारे साथ ही बैठ गयी। फिर हम घर गृहस्थी की बातें करने लगे, मेरे घर में कौन है वगेरह वगेरह। बातों बातों में पता चल गया कि उनके पति यानि जीतू के पापा बरसों से सरकारी नौकरी में इधर उधर रहे हैं यानि उनको पति सुख नहीं के बराबर मिला है। उधर जीतू बिस्तर लगाने के बहाने उठ कर चला गया। मैंने बातों ही बातों में सजल को साथ घूमने के लिए राज़ी कर लिया।

वो नाथद्वारा जाना चाहती थीं मगर संभव नहीं हो पाया था क्यूंकि उनके पति व्यस्त रहते थे और दूसरा कोई साथ मिल नहीं पाया था। चूँकि मैं बीसियों बार वहां गया था इसलिए वे मेरे साथ जाने की इच्छुक थीं। मगर वे चाहती थीं की वे मैं और जीतू साथ चलें। फैसला हुआ की अगले हफ्ते हम तीनों एक साथ नाथद्वारा चलेंगे। मैं उसके बाद फ़ोन पर सजल से बात करता रहा, और उसके बेटे जीतू से भी।

जीतू को मैं बताता की मैं उसकी मां को कैसे कैसे चोद रहा हूँ और वो उस वक्त क्या क्या कर रहा है। और फिर फ़ोन पर ही मैं मुठी मारता जीतू अपनी माँ को फ़ोन पर खूब चुदवाता। शनिवार को मैं नाथद्वारा पहुच गया। और वही कॉटेज में मैंने एक कमरा ले लिया। जीतू और सजल भी अहमदाबाद से वहां बस से पहुच गए। कॉटेज में ज़मीन पर ही बिस्तर बिछा कर सोना पड़ता था। ओढने को रजाई और तकिया वगेरह वहीँ से किराये पर मिलता था। कमरा काफी बड़ा था और ठण्ड भी थी, मैंने पहले से ही तीनो बिस्तर एक साथ ज़मीन पर बिछा दिए थे।

जीतू की मां को कॉटेज और जगह बहुत पसंद आई। "इसके कितने पैसे लगे सर?" उन्होंने पूछा।

"अब आप मेरे विद्यार्थी की मां हैं आपसे छोटे मोटे पैसों की बात थोड़े ही करूँगा?"

"फिर भी?"वे बोलीं।

"आप से मैं वसूल लूँगा इसकी कीमत।" मैंने हँसते हुए बोला।

"ठीक है सर", वे बोलीं।

हमने शीघ्र ही मंगला के दर्शन कर लिए, वहीँ से मैंने प्रसाद भी ले लिया। और दर्शन की भीड़ में मैंने उनका हाथ पकड़ लिया था और मौके बेमौके उनसे खूब चिपटा और उनको दबाता रहा। वे दर्शन के बाद भाव विव्हल थीं, "सर आपने मेरा सपना पूरा कर दिया, आप का मुझ पर बहुत बड़ा एहसान है",

मैंने कहा, "अच्छा इस को आप एहसान मानती हैं तो बदले में आप मुझे क्या देंगी?"

"जो आप मांगो मेरे बस में जो भी होगा दे दूंगी आपको, आपका मुझ पर और मेरे बेटे पर बहुत अहसान है सर", उन्होंने कहा।

"जो मैं मांगूं? पक्का?"

"हाँ सर बिलकुल पक्का", वे बोलीं।

दिन में हमने खाना खाया और घूमे फिरे , शाम को उन्होंने एक बार फिर दर्शन की इच्छा ज़ाहिर की।

"मैं नहीं आऊंगा मां आप सर के साथ चले जाओ", जीतू बोला।

हम लोग दरवाज़ा खुलने का इंतजार करने लगे। जैसे ही दरवाज़ा खुलने वाला था मैंने कहा, "देखो आप मुझे सर कहते हो और मैं आपको आंटी दोनों शब्द मुझे अटपटे लगते हैं, कोई और शब्द खोजते हैं", "आपको घर में किस नाम से बुलाते थे?", मैंने पूछा।

"मुझे बचपन में सज्जू कह कर पुकारते थे"

"और मुझे धम्मु",' मैं बोला।

"दर्शन से पहले आप मुझसे वादा कीजिये की आप मुझे धम्मु बुलायेंगीं और मैं आपको सज्जू", मैंने कहा।

"पर जीतू क्या समझेगा?", उन्होंने कहा।

"ओके आप जब जीतू नहीं हो तब मुझे इस नाम से बुला लीजियेगा, ठीक है, उन्होंने कहा, पक्का वादा?" मैंने पूछा।

"हाँ पक्का वादा धम्मुजी"

"धम्मुजी नहीं धम्मु कहो सज्जू"

"ओके धम्मु", कह कर हम दोनों हस पड़े और मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। भीड़ में प्रवेश से पहले मैंने उनके कान में कहा, "आज श्रीनाथजी से मैं आपकी दोस्ती मांगूंगा" और हम अन्दर चल पड़े।

मैंने प्रवेश से पहले सजल की कमर में हाथ डाल दिया। "भीड़ बहुत है इस से लोगों के धक्के नहीं लगेंगे सज्जू", मैंने कहा। सजल ने कोई प्रतिरोध नहीं किया। भीड़ के बहाने मैंने उनको खूब दबाया और उनसे चिपटता रहा, शायद सज्जू को भी अच्छा लग रहा था। कई बार मैंने भीड़ के बहाने से उनकी कमर पर हाथ फिराया, दबाया और एक दो बार हाथ थोडा नीचे खिसका कर नितम्ब पर भी सहलाया।

हम बाहर आये तो शाम हुई ही थी और अभी खाने में काफी समय था। मैंने जीतू को फोन लगाया। "मैं बाज़ार में घूम रहा हूँ धम्मदीप सर, आप मा के साथ खाना खा लीजिये मैं सीधा कमरे पर आ जाऊंगा", वो बोला। ( आखिर उसको सहयोग तो करना ही था... ) मैंने फोन सजल को दिया, जीतू ने उससे भी यही बात कही। "सज्जू अभी काफी समय है, बगीचे में चलें?"

"हाँ सर ओह सॉरी धम्मु , चलिए,'' कह कर सजल हस पड़ी।

सर्दी थी इसलिए बगीचे में ज्यादा भीड़ नहीं थी। हम थोड़ी देर तो घूमे फिर एक बेंच पर बैठ गए। सजल घर गृहस्थी पति बच्चे और ज़िन्दगी की बातें बताती रहीं, मुझसे वो काफी सहज हो चुकी थीं। मुझे लगा अब बात थोड़ी आगे बधाई जा सकती है।

"सज्जू अगर मैं कोई व्यक्तिगत बात पूछूँ तो बुरा तो नहीं मानोगी?"

"नहीं, आपकी किसी बात का बुरा मानने का तो प्रश्न ही नहीं उठता", वो बोली।

"शादी से पहले आपका कोई बॉयफ्रेंड था या किसी से इश्क हुआ था?"

सज्जू थोड़ी चुप हो गयी फिर बोली, "आप किसी से कहोगे तो नहीं?"

"सज्जू श्रीनाथजी की कसम खाता हूँ तुम्हारे मेरे बीच जो भी बात या जो कुछ भी होगा उसका किसी को पता नहीं चलेगा", मैंने कहा।

"ओके धम्मु, मुझे आप पर विश्वास है", मैंने जोड़ा, "लेकिन आपको भी श्रीनाथजी की कसम खानी पड़ेगी की हमारे बीच जो कुछ भी बात होगी या कुछ भी होगा उसकी जानकारी किसी को नहीं होगी"

"हाँ मैं कसम खाती हूँ", वे बोलीं।

"तो फिर बताओ न", मैं बोला।

"ठीक है.."
 
सज्जू ने फिर उसकी कहानी सुनाना शुरू की। पढ़िए सज्जू की जुबान में।

मैं तब छोटी थी शायद आठवीं या नवीं में पढ़ती थी। मेरा घर भी सूरत में ही है। मेरे सात भाई और तीन बहने हैं, घर में काफी भीडभाड थी, चार भाई मुझसे बड़े और तीन छोटे थे। मेरा ननिहाल सौराष्ट्र में है वहां हमारा बड़ा घर है हालाँकि कहने को गाँव है लेकिन सारी सुविधाएँ वहा थीं। मेरे चार मामा थे और तीन मासियाँ। सबसे बड़े मामा मुझसे कोई ३० साल बड़े थे लेकिन सबसे छोटे मामा मुझसे भी ३ साल छोटे थे। हम हर छुट्टियों में वहां जाते थे। बीच वाले मामाओं में से एक मुझसे कोई १५ साल बड़े थे और दूसरे कोई ५ साल। हम वहां अक्सर खेलते थे।

"क्या खेलते थे बताओ न सब?", मैंने पूछा।

सारे खेल वो बोली। "फिर भी?

दिन में डॉक्टर डॉक्टर खेलते थे। वे बोलीं। मैं समझ गया, सजल क्या खेल खलती थी।

"क्या उम्र थी तब आपकी"

"कोई १२-१३ साल होगी", वो बोलीं।

"अच्छा एक बात पूछूँ बुरा न मनो तो?"

"हाँ पूछो?"

"उस उम्र में आपके पीरियड्स शुरू हो गए थे?"

"क्या आप भी कैसे कैसे सवाल पूछते हैं।"

"बताओ न इसमें क्या हुआ।"

"नहीं मेरे पीरियड्स तो १४-१५ की उम्र में शुरू हुए थे, हमारे समय में आज की लड़कियों की तरह जल्दी पीरियड्स नहीं आते थे।"

सजल अब आराम से बात करने लगी थी।

"सब कुछ खुल कर आराम से बताओ सज्जू, मैं तो आपका दोस्त हूँ।"

"कैसे बताऊँ बताते हुए भी शर्म आती है। बस इतना बता सकती हूँ मेरे मामा ने मेरे साथ गलत काम किया, कहते हुए उनकी आँखें भर आयीं "

मुझे लगा ये मौका अच्छा है इसलिए मैंने तुरंत उनको जकड कर चिपटा लिया। वे मेरे सीने पर चिपक गयीं। मैं अब सज्जू के बालों पर हाथ फिराने लगा।

"आप बहुत अच्छी हैं और बहुत सुंदर भी", कह कर मैंने उनका चेहरा उपर किया और अचानक से होठ चूम लिए। सज्जू को इस की उम्मीद नहीं थी वो अचकचा गयीं, "ये क्या किया सर?"

"सर नहीं धम्मु, मैं मुस्कराते हुए बोला"

"हाँ धम्मु ये तो अच्छी बात नहीं"

"देखो सज्जू हम दोस्त हैं और आप मुझे बहुत अच्छी लगती हैं और दोस्तों के बीच कुछ भी गलत नहीं होता मैंने प्यार ही तो किया है इसमें क्या गलती?"

"लेकिन मेरी उम्र आपसे ज्यादा है आप मेरे बेटे के दोस्त हैं कल को जीतू को पता चल गया तो वो तो शर्म से मर जायेगा या फिर जीतू के पापा तो मेरी जान ही ले लेंगे", वे बोलीं।

'"किसी को कुछ पता नहीं चलेगा और आज की इस दुनिया में किसी को किसी से कोई मतलब नहीं जीतू के पापा आपको कितना प्यार करते हैं? कितना वक़्त देते हैं? बिना प्यार कोई कैसे हक जमा सकता है सज्जू?, मैं बोला।

सज्जू कुछ बोलीं नहीं चुप हो गयी मुझे लगा बात थोड़ी सी जम गयी है। थोड़ी देर बाद हम पार्क से निकल पड़े क्यूंकि आठ बजने वाले थे, मैंने अँधेरे में सज्जू का हाथ पकड़ लिया और सहलाने लगा। उन्होंने कोई प्रतिरोध नहीं किया।

"अच्छा सज्जू तुमने मामा वाली बात तो बता दी लेकिन प्यार हुआ या नहीं ये नहीं बताया?

"ओह हाँ प्यार तो होगा ही। जब मैं स्कूल मैं पढ़ती थी तो मेरा एक क्लासमेट था जय वो मेरा बहुत ध्यान रखता था और हम दोनों में प्यार था मगर दोनों एक दूसरे को कह न सके, फिर कॉलेज में गयी तो वहां के एक टीचर थे अनुराग सर, उनसे थोडा आकर्षण हुआ"

"उनसे कुछ हुआ क्या? चुदाई वुदाई?"

"ये क्या बोल रहें हैं सर?", सज्जू बोली।

"ओह सॉरी मेरी आदत है गंदे शब्द निकल जाते हैं ", मैं बोला। सज्जू हसने लगी।

मैंने दुबारा पूछा "बताओ न"

"सब बातें बतायीं थोड़ी जाती है", सज्जू ने हंस कर कहा।

मैं समझ गया। मुझे लगा अगर आज की रात जीतू आसपास नहीं हुआ तो बात बन सकती है। हम खाना खाने गए, वहीँ बातों बातों में मैंने जीतू को एसएमइस भेजा "सज्जू चुदने को तैयार है किसी बहाने से आज रात कमरे से बाहर सो जा"

"ओ के" जीत का जवाब आया।

खाना खाने के बाद हम फिर बातें करने लगे शायद सज्जू से पहली बार कोई इतने दिनों बाद इतनी फुर्सत से बात कर रहा था।

"धम्मु पता नहीं इतनी फुर्सत से मैं शायद बरसों बात बातें कर रही हूँ मुझे ये ट्रिप हमेशा याद रहेगी", वो बोली।

तभी जीतू का फोन आया सज्जू गुजराती में बातें कर रही थी पर मुझे आईडिया हो गया की जीतू किसी बहाने से बाहर रुकने वाला है पर मैंने अपनी तरफ से कुछ नहीं बोला और इंतजार करने लगा की सज्जू क्या कहती है थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद मैंने कहा, "अब थकान हो गयी है कमरे पर चलें सज्जू बाकी बातें वहीँ कर लेंगे?"

"ठीक है लेकिन एक प्रॉब्लम है..!"

"प्रॉब्लम यहाँ क्या प्रॉब्लम हो गयी?", मैंने पूछा।

"जीतू को कोई दोस्त मिल गए हैं इसलिए वो आज बाहर ही रुकेगा..",सज्जू बोली।

"बाहर मतलब?", मैंने जान बूझ कर पूछा।

"बाहर मतलब वो शायद सुबह आएगा कमरे पर", सज्जू बोली।

"कोई बात नहीं अच्छा है न रात भर बातें करेंगे", मैंने कहा।

रस्ते में ही पीने का पानी ले लिया था हम सीधे कमरे पर चले गए। सज्जू बाथरूम में कपडे बदलने के लिए चली गयी। बाहर आई तो मैंने देखा उसने नाईटी पहनी हुई थी और उपर एक शाल लपेट लिया। मैं भी बाथरूम में गया और कुरता और लूंगी पहन आया।

"धम्मु ठंड नहीं लगेगी खाली कुरता पहना है आपने", सज्जू बोली।

"नहीं सज्जू लगेगी तो आपका शाल ले लूँगा", मैंने मजाक किया।

"और अगर मैं नहीं दू तो?", सज्जू बोली।

"तो मैं आधी बाँट लूँगा", मैंने फिर मजाक किया।

थोड़ी देर में हम दोनों ज़मीं पर बीचे बिस्तर पर अधलेटे हो गए। सज्जू मुझसे दूर लेटी थी बीच में जैसे जीतू की जगह छोड़ रखी हो।

"इतनी दूर रहोगे तो फिर मैं शाल कैसे लूँगा?", मैंने कहा।

"सोना नहीं है क्या?", सज्जू बोली।

"ठीक है मगर सोने से पहले थोड़ी देर बातें और करेंगे", मैंने कहा।

सज्जू ने हाँ में सर हिला दिया। "बत्ती तो बुझा दो बात तो अँधेरे में भी कर सकते हैं", सज्जू ने कहा।

मैंने उठ कर बल्ब बुझा दिया। "सज्जू मुझे आपका साथ और आपकी बातें बहुत अच्छी लगती हैं। आपको मेरा साथ और बातें कैसी लगती हैं?, मैंने पूछा।

"ये भी कोई पूछने की बात है। आप हो ही अच्छे बाकी जीतू के पता नहीं कैसे कैसे दोस्त आते हैं", वे बोलीं।

"कैसे मतलब?", मैंने पूछा।

"अरे कोई कोई तो बिलकुल गंवार लगते हैं इसको डांटती भी हूँ पर इसको असर ही नहीं होता", वे बोलीं।

"ओह्ह", मैं बोला।

थोड़ी देर इधर उधर की बातों के बाद मैंने यकायक अपना हाथ बढाया और सज्जू को पास खींच लिया।

"इतनी दूर बैठी हो की आवाज़ तक नहीं सुनाई दे रही। कल जीतू आयेगा तो दूर सोना ही है कम से कम आज की रात तो पास बैठ कर बातें करो", मैंने बोला।

"क्या सर", सज्जू बोली। मगर मेरा प्रतिरोध नहीं किया। अब सज्जू मेरे बिलकुल पास थी..

थोड़ी देर इधर उधर की बातों के बाद मैंने सज्जू से पूछा, "अच्छा मैं आपका दोस्त हूँ?"

"हाँ ये बात भी पूछने की ज़रूरत है क्या?", सज्जू बोली।

"तो फिर एक वादा करो जो कुछ भी पूछूँगा उस का सही सही उत्तर दोगे कोई लाग लपेट बिना", मैंने कहा।

"हाँ बाबा हाँ", सज्जू बोली।

"तो फिर बताओ आपकी रजोनिवृत्ती हो गयी?"

"कैसे कैसे सवाल पूछते हो आप भी ", वो बोली।

"अब इसमें क्या है बताओ न। मैंने सुना है उसके बाद औरतों की पुरुष में रूचि ख़त्म हो जाती है"

"नहीं ऐसा तो नहीं, पर हाँ मेरी रजोनिवृत्ती दो साल पहले आ गयी", सज्जू बोली।

"तो फिर सच बताओ प्रेम में रूचि ख़त्म हो गयी क्या दो साल पहले?", मैंने पूछा।

"क्या धम्मु आप भी"

मैंने मौका देखा और कहा, "सज्जू एक बात कहूँ अगर बुरा नहीं मनो तो?"

"हाँ कहो मैंने आपकी किस बात का बुरा माना है?", वे बोलीं।

"मुझे थोड़ी देर आपकी गोद में सोना है।" कह कर मैं तुरंत उनकी गोद में सो गया। उनकी मज़बूत जांघें मेरे होठों को छु रही थीं। वे थोड़ी देर चुपचाप बिना हिले डुले बैठी रहीं। फिर मैंने उनका हाथ अपने बालों पर रख दिया थोड़ी देर बाद वे मेरे बालों में उंगलिया घुमाने लगीं। मैंने इसी दौरान उनका हाथ पकड़ा और उसको चूम लिया। सज्जू ने विरोध नहीं किया।

बातों बातों में मैंने सज्जू के पावों पर उंगलिया फिराना शुरू किया वो बोली, "पाव मत छुओ आप"

"अरे आपके पाव कितने नाज़ुक और सुंदर हैं ये भी तो आपके बदन का हिस्सा हैं क्यूँ नहीं छूँउ?", मैं बोला।

धीरे धीरे मैंने उनकी रान और फिर थोडा सा जांघों पर हाथ फिराना शुरू कर दिया इसी प्रक्रिया में मैंने अपना सर उनकी गोद से उठाया और सीधा उनके सीने से सटा दिया और उनके हाथ अपने सर और कंधे पर रख दिए। सज्जू ने मुझे अपनी छाती से भींच लिया। मैंने अपने दोनों हाथ उपर किये और उनके कंधे और पीठ पर रख कर उनको भी अपनी बाँहों में कस लिया।

वे हलकी सी सिसका कर कर चुप हो गयीं अब सज्जू की साँसें तेज़ चलने लगीं थीं। अब मैं अपना मुह होठ नाक गाल औत पूरा चेहरा उनके सीने पर घुमा रहा था और चेहरे से उनकी छातियाँ दबा रहा था। उनकी छोटी और नरम छातियाँ मेरे चेहरे से दब रही थी और उनका सीना उत्तेजना में फूल रहा था। मुझे लगा लोहा गरम है। मैंने अपने दोनों हांथों को आगे किया और उनके स्तन दबाने और मसलने शुरू कर किए।

"ओह्ह आआआआअह्ह" कर के उनके मुह से हलकी सी चीख निकली। इसी दौरान मेरे हाथ में उनके निप्पल्स आ गए और मैंने उनको भी मसलना शुरू कर दिया। मैं खुद अब गरम था और मेरी सांस तेज़ चलने लगी थी। अब मेरे हाथ सज्जू के स्तन गले कंधे पीठ पेट सब जगह घूम रहे थे उसने मुझे जकड़ा हुआ था।

उसकी सांस तेज़ चल रही थी और साथ ही वो पूरी गरम हो चुकी थीं। मैंने इसी दौरान अपने होठ उनके होटों पर रखे तो सज्जू ने होठ हटा दिए। मुझे रुकना नहीं था मैंने सज्जू का चेहरा हाथ से जबड़ो से कस कर पकड़ लिया और उनके होटों को चूमने चूसने लगा।

उन्होंने शायद घबराहट या डर से या अनुभव नहीं होने के कारण अपने होठ पूरे नहीं खोले मगर मैंने जबड़ा कस कर पकड़ लिया। और होठ थोड़े से चौड़े कर के अन्दर जीभ दाल दी। ओह्ह आह कर के वे आनंद ले रही थीं थोड़ी देर में वे चुम्बन का मज़ा ले रही थीं और उनकी सांस धोंकनी सी चल रही थी।

मैंने चुमते चुमते ही उनके गाउन को नीचे से सरकाना शुरू कर दिया। जो जांघों तक तो आ गया लेकिन आगे उनकी मोटी गांड के नीचे दब गया। जहाँ से उनके सहयोग के बिना उसे उपर कर पाना संभव नहीं था। मैं उनके कंधो, गर्दन स्तनों , पेट और जांघों के उपरी हिस्से को चुमते चुमते नीचे आया और उनकी नंगी हो चुकी जांघों को चूमने चाटने काटने लगा। और इसी प्रक्रिया में मैंने अपने हाथ पीछे ले कर पहली बार उनकी मोटी और मांसल गांड को छुआ और दबाया।

जैसे ही वे उत्तेजना में थोड़ी सी हिलीं मैंने तुरंत गाउन को उनकी गांड से उपर सरका दिया। अब मैं चड्डी के उपर से उनकी चूत को चूमने की कोशिश कर रहा था लेकिन वे अपने पावों को आपस में दबा रही थीं। इसी दौरान मैंने पीछे हाथ ले जा कर उनकी विशाल गांड को दबाना शुरू कर दिया। और चड्डी के साइड से हाथ डाल कर अन्दर से भी नंगी गांड मसलना जरी रखा। इसी दौरान मैंने दुबारा अपना सफ़र उपर की तरफ शुरू कर दिया और चूमने के साथ साथ गाउन को उपर करना जारी रखा।

उनके थोड़े मांसल मगर लज़ीज़ पेट को भी मैंने चूमा और चाटा फिर उपर आ कर उनकी ब्रा के उपर अपना मुह फेरने लगा। इसी दौरान मैंने उनका गाउन उपर कर दिया। और उन्होंने अपने हाथ भी उपर कर दिए। मैंने गाउन को उपर ले कर हटा दिया। अब वे सिर्फ चड्डी और ब्रा में थीं। खिड़की के कांचों से आ रही रिशनी में उनकी स्तन काली ब्रा में मस्त लग रहे थे।

मगर में किसी जल्दी में नहीं था। मैंने ब्रा के उपर से ही उनके स्तनों पर मुह घुमाना चालू रखा और ऐसा करते करते पीछे हाथ ले जा कर ब्रा का स्ट्रप खोल दिया। ब्रा खुलते ही उनके छोटे कोई संतरे के आकार के स्तन आजाद हो गए और मेरे भीतर के बच्चे को माँ का दूध मिल गया। मैं उनके स्तनों को मसलते हुए काटते हुए खाते हुए चूसते हुए उनके निप्पल्स को दबाने लगा चूसने लगा। अब वे पूरी तरह उत्तेजित थीं और उनके मुह से सिस्कारियां निकल रहीं थीं। मैंने तुरंत क्षण भर में अपना कुरता हटा दिया अब उपर से मैं निर्वस्त्र था। वे मेरे निप्पल्स को सहलाने दबाने लगीं मुझे लग गया वे काम कला में पूर्ण रूप से निपुण हैं।

मैंने अब उनके कंधे गर्दन और स्तनों पर चुम्बनों की ताबड़तोड़ झड़ी लगा दी। वे शायद ही कुछ सोच पातीं, मैंने उन्हें मुझसे दूर होने और मेरी गिरफ्त ढीला करने का मौका ही नहीं दिया। चूमते चूमते मैंने उनका हाथ अपनी लुंगी में फडफडा रहे लौड़े पर रख दिया। मैंने चड्डी नहीं पहनी थी इसलिए वो लगभग पूरा ही उनके हाथ में आ गया। उन्होंने लौड़े को सहला हिलाना और दबाना शुरू कर दिया। मैंने तुरंत लुंगी को ऊँचा किया और नंगा लौड़ा उनके हाथों में थमा दिया।

वे अब मेरे सुपाडे के उपर की चमड़ी को हिला रहीं थीं। सुपाडे के उपर उनकी उंगलिया अभ्यस्त चुदक्कड़ औरत की तरह हिल रहीं थीं बेच बीच में वे मेरे मूत के छेद को भी संभाल लेतीं। मैंने अब उनको लिटा दिया और उनकी गांड उपर कर उनकी भूरे रंगकी फूलों वाली चड्डी को हटा दिया। उनके पाव फैलाये और उनकी चूत के पास मुह ले गया।

उनके झांट बढे हुए थे। और मैं जैसे ही चूत चाटने की कोशिश करने लगा उन्होंने पाँव जोड़ लिए। मुझे पता था ऐसा वो ही औरत करती है जिसकी चूत काफी संवेदनशील हो। मुझे लगा अगर मैंने लौड़ा डाल दिया तो सज्जू शायद दो मिनट में पानी छोड़ देगी और मैं उनकी जांघें, चूत, पेट, बोबे, कंधे और गर्दन चूमते चूमते उनके उपर आने लगा। और अपने लौड़े को हमले के लिए तैयार करने लगा।
 
सज्जू ने पाँव मिलाये हुए थे मैं उपर आया और एक हाथ से उसकी गर्दन पकड़ कर ताबड़तोड़ चुम्मिया लेने लगा खास तौर पर गर्दन और कंधे पर और बीच बीच में उसके मम्मे सहला और दबा देता निप्पल को खा लेता चूम लेता चाट लेता। सज्जू अब निचे से हिल रही थी उसकी गांड अपने आप ही उपर नीचे हो रही थी। मैंने एक हाथ नीचे किया और उसकी चूत के होठ खोल दिया। धीरे धीरे मैं उसकी क्लिटोरिस से खेलने लगा और बीच बीच में ऊँगली अन्दर छेद में सरकता रहा। उसकी चूत पनिया गयी थी और मेरी उंगलिया भीग चुकीं थीं। वो मेरी उंगलीओं के साथ साथ अपनी विशाल गांड को हिला रही थी।

अब मेरे हथिआर को सब्र नहीं हो रहा था। मैंने उसके पाव चौड़े किया और जांघें खोल दी। उसने अपने पाँव लंड की प्रतीक्षा में मोड़ लिए थे। अब देरी ठीक नहीं थी। मैंने अपने लंड को उसके हाथ में पकड़ा दिया ताकि वो खुद ही उसको अन्दर डाले। सज्जू ने दोनों हाथ नीचे ले लिए एक हाथ से वो अपनी चूत के होंट खोलने लगी और दूसरे से मेरा लौड़ा पकड़ कर उसका टोपन चूत के द्वार पर रख दिया या यूँ कहूँ की लगभग पूरा सुपाडा ही अन्दर ले लिया था। मैंने अब थोडा एडजस्ट किया और लगभग आधा लंड उसकी गीली चूत में सरका दिया।

"सज्जू एक बात कहूँ?", मैं बोला। उसने सी सी करते हुए हाँ में सर हिला दिया।

"तुम्हारी चूत इतनी टाईट है की, ऐसा लगता है जैसे किसी सोलह साल की कुंवारी लड़की की चूत चोद रहा हूँ", मैं बोला।

"हठो धम्मु झूठ मत बोलो", वो बोलीं।

"नहीं सज्जू मेरे लंड की कसम इतनी टाईट चूत मैंने कोई बरसो बाद चोदी है। मैं झूठ नहीं बोल रहा तुम्हारी चूत बहुत टाईट है। ऐसा लग रहा है जैसे मेरे लौड़े को कस कर पकड़ रखा है इसने।", मैं बोला।

"जिस चीज़ का इस्तेमाल कम होता हो वो टाईट ही तो होगी", वो बोली।

"सज्जू अब इसको चोद चोद के मैं भोसड़ा बना दूंगा। पूरा लौड़ा अन्दर ले लो मेरी जान।", मैं बोला।

मैंने थोड़े घिस्से और लगाये और मेरा पूरा लंड उसकी फुद्दी में समां गया। सिर्फ आंड बाहर बचे जो भी अन्दर जाने को कसमसा रहे थे। मैंने अपने होट सज्जू के होटों से जोड़ रखे थे और दोनों हाथ नीचे ले लिए थे। और दोनों हाथों में उसकी मोटी गांड की फांकें पकड़ी हुई थीं। जिनके वज़न से मेरे हाथ दब से गए थे। मैं उसकी गांडों को मसल रहा था दबा रहा था और उनमे अपने नाख़ून चुभा रहा था। इतनी मोटी थी सज्जू की गांड की नाख़ून मोटी चमड़ी में कुछ असर नहीं कर रहे थे। इसी दौरान मैंने गांड को थोडा सा खोल कर अपनी एक ऊँगली उसकी गांड के छेद में तीन चौथाई सरका दी। सज्जू को कोई असर नहीं हुआ मुझे पता चल गया की गांड खुल जाये तो सज्जू उसको आसानी से मरवा भी लेगी। या शायद पहले भी मरवा चुकी हो।

अब सज्जू ने अपने दोनों पाँव आसमान में कर लिए थे और मेरा लवड़ा अब फचफच उसकी चूत की ठुकाई और सैर कर रहा था। सज्जू ने पैर थोड़े और उपर करके लगभग मेरे कंधे पर रख दिए दे अब उसकी चूत की फांकें पूरी तरह खुल चुकी थी और लौड़ा आसानी से आ जा रहा था। अब वो गांड को नीचे से और जोर से हिलाने लगीं और उनके मुह से सी सी की आवाजें और तेज़ हो गयीं। उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और उसका एक हाथ मेरे बालों पर था। जिन्हें उसने कस कर पकड़ा हुआ था और उसकी साँसें अब मेरे कंधे को छू रही थीं। उसका दूसरा हाथ मेरी पीठ और कंधे को जकड कर उसको सहला रहा था।

"सज्जू कैसा लग रहा है मेरा लंड?", मैंने पुछा। वो अब गरम थी इसलिए शर्म की कोई संभावना नहीं थी।

"बहुत अच्छा।"

"अच्छा कैसे?", मैंने पूछा।

"अच्छा मतलब अच्छा", वो बोली।

"चूत को कैसा लग रहा है?" मैंने फिर पूछा।

"अच्छा", वो बोलीं। और फिर सी सी की आवाज़ आने लगी।

"अच्छा या बहुत अच्छा?", मैंने पूछा।

"बहुत अच्छा आह्ह" वोह बोलीं।

"रुको मत और जोर से करो रुको मत", सज्जू बोली।

"जोर से क्या करूँ?" मैंने पूछा।

"वही जो कर रहे हो"

"क्या कर रहा हूँ मैं?", मैंने पूछा।

"ओह्ह वही जो कर रहे हो", वो बोली।

"क्या सज्जू चुदाई बोलने में क्या शर्म। बोलो न चुदाई", मैंने कहा।

"हाँ चुदाई " वो बोली।

"कैसी है मेरी चुदाई सज्जू?"

"बहुत अच्छी है आही ऊऊऊऊऊऊऊऊ ऊऊऊऊऊऊऊऊ आआआआआअह"

"अब कैसे चोदुं सज्जू?", मैंने पूछा।

"ऐसे ही बस थोडा जोर से।", वो बोलीं।

मुझे पता था सज्जू झड़ने वाली है इसलिए मैंने गति बढा दी। सज्जू ने अब अपने दोनों हाथों से मेरी गांड पकड़ ली थी और वे उसको गाइड कर रही थी। मैं अब पूरी स्पीड से घचाघच चोद रहा था मेरे मुह से भी अब ऊऊ ऊऊ आह्ह निकलने लगा था। सज्जू की चूत अब गीली झील बन चुकी थी मेरा वीर्य आने से पहले का रस भी खूब सारा उसकी चूत में डल चुका था और उसके खुद के रस भी थे। सज्जू की सांस एकदम से तेज़ हुई और उसने मेरी गांड कस कर पकड़ी खुद की गांड तेज़ी से हिलाई फिर वो शांत पड़ गयी। और उसकी सांस जो धोंकनी की तरह चल रही थी शांत पड़ने लगी।

"क्या हुआ सज्जू चूत का पानी निकल गया?", मैंने पूछा।

"हाँ", उसने आँखें बंद करके बोला।

"मैं मेरा वीर्य निकालूं या थोड़ी देर और चोदूं सज्जू रानी?"

"जैसी आपकी मर्ज़ी", वो बोली।

"नहीं सज्जू तुम बताओ, जो तुम कहोगी वही करेगा मेरा लंड।", मैंने कहा। "तो थोड़ी देर और करो।", सज्जू बोली।

मुझे लग गया सज्जू की चूत प्यासी है उसने शायद बहुत दिनों से चुदाई नहीं की थी। सज्जू का ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैंने अब धीरे धीरे फिर से उसकी चुदाई और घिसाई शुरू कर दी। मैंने सज्जू को बिस्तर पर ही टेढ़ा कर दिया और इसी मुद्रा में लंड अन्दर सरका दिया उसकी मोटी गांड के बीच से लंड चूत की खुदाई कर रहा था। उसने पाँव मोड़ कर खुद के सीने की तरफ कर दिया इससे उसकी गांड बाहर निकल गयी और चूत खुल गयी। मेरा लंड अब आसानी से अन्दर जा रहा था मैं पूरा लंड बाहर निकल कर अन्दर डाल रहा था। उसको चुदाई अच्छी लग रही थी। कोई २-४ मिनट ऐसे चोद कर मैंने सज्जू को बिलकुल उल्टा कर दिया और उसकी जांघों और चूत के आसपास तकिया रख दिया।

इससे उसकी मोटी गांड और उपर हो गयी और चूत भी थोड़ी उपर आ गयी। इस मुद्रा में मैं उसको चोदने लगा सज्जू का बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी गर्दन को काटना शुरू कर दिया। वो ऊओह्ह आह करने लगी मैंने स्पीड बढा दी थी और फचाफच चोदने लगा। सज्जू को भी मज़ा आ रहा था। अब मैंने सज्जू का पेट पकड़ा और उसके गांड उपर कर दी सज्जू ने अपना सर बिस्तर पर टिकाया हुआ था। इस पोजीशन में उसकी चूत पूरी खुली हुई थी और लंड को चूत के फूले और मोटे होंट साफ़ दिख रहे थे। नीचे हाथ कर के मैंने सज्जू का मोटा पेट पकड़ लिया और एक हाथ से उसके झूल रहे स्तन पकड़ लिए और उनको दबाने लगा।

उसकी चूत से अब चुदाई की आवाजें जोर जोर से आ रही थीं। मेरी गोटियाँ उसकी चूत के होटों से टकरा रही थीं। सज्जू इसी मुद्रा में शायद एक बार और झड़ने वाली थी।

"सज्जू मेरा लंड कैसा है? बताओ न..?",मैंने पूछा।

"बहुत अच्छा", वे बोलीं।

"अच्छा, ये बताओ ऐसे चोदते वक़्त मेरा लंड घोड़े का लग रहा है या कुत्ते का?"

"घोड़े का", सज्जू बोली।

"घोड़े का तो डेढ़ फूट का होता है सज्जू मेरा तो सिर्फ ८ इंच का ही है", मैं बोला।

"नहीं ये घोड़े जैसा है ऊऊ अह्ह्ह", वो बोली।

"ओह्ह सज्जू तेरा घोडा अपनी घोड़ी की मोटी फुद्दी चोद रहा है। आआआआआ मेरी रानी सज्जू तू बहुत प्यारी और चोदू है", मैं बोला।

"आप भी तो एक नंबर के चोदू घोड़े हो।"

"ओह्ह्ह आआआआआह अशूऊऊऊओ" कह कर उसने फिर अपनी विशाल गांड हव में लहरानी शुरू कर दी।

मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारने शुरू कर दिए। उनकी गांड थप्पड़ों से सूज रही थी। मैंने चुदाई और पिटाई दोनों चालू रखे फिर से ग्रर्र्रर्र्र घर्रर की की आवाजें आने लगी और सज्जू की चूत ने दूसरी धार छोड़ दी।

 
अब सज्जू थक चुकी थी। मैंने कहा, "जान अब और चोदूं या अपनी थैली खाली कर दूँ?"

"अब बिलकुल नहीं, अब खाली कर दो अपना अमृत मेरे अन्दर", वो बोली।

मैंने उसको वापस सीधा लिटा दिया और टाँगे खोल दीं। अब मैंने अपने हाथों पर अपना उपर का बदन टिका कर निचे खचाखच जोर के झटके लगाने शुरू कर दिए। उसकी चूत और पेट के टकराने से कमरे में फच फच फचाफच की आवाजें गूँज रही थीं।

"जब तक कुछ सेक्सी बोलोगी नहीं सज्जू मेरा पानी नहीं निकलेगा।", मैं बोला।

"क्या सेक्सी बोलूं?", सज्जू ने पुछा।

"कुछ भी बोलो, मेरे लंड के बारे में चुदाई के बारे में तुम्हारी चूत को कैसा लग रहा है। मेरी गन्दी आदत है सज्जू मैं गन्दी बातें नहीं सुनूँ तो पानी नहीं झड़ता।", मैंने कहा।

सज्जू ने ये सुन कर मुझे भींच लिया और टांगे और खोल दीं। "ओह मेरे राजा चोदो अपनी रानी को इसकी प्यासी चूत को अपना अमृत पिलाओ राजा। हाँ मेरे राजा मेरे धम्मु रुको मत चोदते जाओ और गीली कर दो मेरी चूत। हाँ ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊऊओ आआआआआअह राजा।", सज्जू ने कहा और उसकी सी सी की आवाजें तेज़ हो गयीं।

मैंने पानी छोड़ने का वादा कर दिया था नहीं तो शायद सज्जू एक बार और चूत की पिचकारी अवश्य छोडती। मुझे भी अब नियंत्रण नहीं हो रहा था मैं चाह रहा था सज्जू की चूत को पानी पिला ही दूं।

"हाँ सज्जू मेरी रानी, मेरी गरम चूत, मेरी मोटी गांड वाली चोदू, मेरी चुदक्कड़, मेरे लंड और मेरे गरम पानी की प्यासी, मेरी चोदू रानी, मेरे मोटे लौड़े की गुलाम, मेरे आंड के रस की प्यासी ये ले तेरा पानी ये आ रहा है। गरम पानी गाढ़ा और ताकतवाला वीर्य। चूत खोल दे रानी और अपनी बच्चेदानी को भी खोल ले। ले तेरे आशिक का असली वीर्य, ये ले ऊऊऊऊह आआआआआआआआअह हाआं हाआआआआआआन याआआआअ ऊऊऊऊऊऊऊ", कह कर मैं झड गया।

वीर्य की बूँदें उछल उछल कर उसके भोसड़े में समां गयी। उसने मुझे भींच लिया और सारा वीर्य अपने भीतर समाने दिया। जब मैं शांत हो गया तो वो रोने लगी। मैंने उसके आंसू पोंछे और कहा,

"क्या हुआ सज्जू दर्द हुआ?"

"सोरी.. , नहीं ये बात नहीं"

"तो फिर?"

"कुछ नहीं", वो बोली।

"बताओ न क्या हुआ, बताओ न प्लीज़", मैंने कहा।

"कुछ नहीं धम्मु, तुमने इतना प्यार दिया की बस मरे ख़ुशी के आंसू छलक गए.. ",वो बोलीं।

मैंने उसको गले से लगा लिया और ऐसे ही ५ मिनट तक उपर पड़ा रहा। उसके बाद हम दोनों बारी बारी से बाथरूम गए और धो कर आये। अपने अपने हथियार , तलवार और ढाल। मैंने सज्जू को कपडे नहीं पहनने दिए और रजाई में ही भींच कर अपने से चिपटा दिया।

"देखो तुमने सर्दी में भी मेरे पसीने छुटा दिए", मैंने कहा।

"इतनी मेहनत की ज़रूरत ही कहाँ थी?", सज्जू बोली।

"अरे जब ज़मीं इतनी मस्त हो तो तो किसान को हल चलाने में मज़े आते हैं चाहे पसीने बहें या पानी।",कह कर हम दोनों हसने लगे।

"सज्जू अब तुम मुझसे कुछ नहीं छुपा सकती बताओ न तुम्हारे साथ बचपन में मामा ने क्या किया था?"

"अरे वो सारे मामा थे ही मादरचोद उनका बस चलता तो अपनी माँ तक को नहीं छोड़ते", सज्जू के मुह से गाली निकली।

"ओह्ह, कैसे?"

"सबसे बड़ा मामा तो मैं जब १० साल की थी तो मुझे खिड़की में उल्टा खड़ा कर देता फिर मेरी फ्रोक ऊँची कर के मेरी गांड को दबाता और उसकी पिटाई करता। और अपना लंड इस दौरान बाहर निकाल कर उसको हिलाता। मुझे कुछ पता नहीं चलता। मैं मरे डर के खिड़की में उलटी खड़ी रहती। बीच बीच में वो मेरी चूत को भी ऊँगली करता फिर वो मेरी चूत और गांड दोनों को छूता।"

"उसने चोदा नहीं?"

"नहीं बड़े वाले मामा ने सिर्फ यही किया, लेकिन तीसरे नंबर के मामा ने ज्यादा बदमाशियां की"

"कैसे?"

"हम लोग खेलते थे तो एक दिन वो सीढ़ी में बैठा था। मैं उपर जा रही थी तो उसने मुझे पकड़ कर बिठा दिया और फिर अपने निक्कर की साइड से अपना लंड बाहर निकल लिया और मुझे पकड़ा दिया। और बोला इसको हिला। मैं उसके कहे अनुसार उसका लंड हिलाती रही फिर उसका पानी निकल जाता। फिर उसके बाद तो लगभग हर रोज़ वो तीन चार बार वो मुझसे मुट्ठी मरवाता। रात में भी हम साथ साथ ही सोते थे तो सब के सोते ही वो चद्दर ओढ़ कर घुटने मोड़ लेता और मेरा हाथ अन्दर डाल देता। मैं उसकी मुट्ठी मारती।"

"एक दिन घर में कोई नहीं था तो उसने अपने कपडे उतारे। और मुझे भी नंगा कर दिया। मेरी छातियाँ तब थोड़ी सी उभरी थीं, और नीचे हलके हलके बाल आये ही थे। उसने अब अपना लंड मेरे मुह में दे दिया और मुझसे चुस्वाने लगा मुझे बहुत गन्दा लगा मगर मैं मजबूर थी। ऐसा करते करते उसने मेरे बाल पकड़ कर मेरे मुह में ही अपना वीर्य खाली कर दिया। उसके बाद उसने मेरी कुंवारी चूत भी चाटी"सज्जू ने अपनी दर्द भरी कहानी जारी रखी।

"ओह्ह सज्जू फिर क्या हुआ? उसने तुमको चोदा?"

"सब बता रही हूँ धम्मु। ", सज्जू बोली।

"ओ के", मैंने कहा।

"उसके बाद मेरा मामा नंगा कर के मुझ पर लेट जाता और मैं अपनी टांगें भींच लेती ताकि वो अन्दर नहीं डाल सके। लेकिन वो मेरे पाँव मिला कर मेरी जांघों के बीच और चूत के मुह को चोदता और फिर पानी छोड़ देता। कभी कभी उल्टा कर के गांड और जांघों के बीच लंड फंसा के पानी निकालता। उस वक्त सिर्फ बड़े दो मामा की शादी हुई थी। बाकि दोनों मामा कुंवारे थे", सज्जू बोली।

"सभी की उम्र में फर्क था। सबसे बड़े मामा उस वक़्त ५० के आसपास थे। और उनके एक लड़का था जो मुझसे ५-६ साल बड़ा था। उनसे छोटे मामा शायद तब ४० के थे और उनकी कोई औलाद नहीं थी। बाकि दोनों मामा कुंवारे थे। घर के नौकर चाकर भी बदमाश किस्म के थे। दूसरे नंबर के मामा कुछ अजीब थे और बहुत लम्बी उम्र तक तो मुझे पता ही नहीं चला वो मुझसे क्या करवाते थे।"

"वे कई बार मौका देख कर मुझे कमरे में ले जाते और उलटे हो कर नंगे हो जाते फिर मुझसे पीछे कुछ न कुछ डलवाते। मैं कई बार कहती मामी आ जाएँगी। मगर वे कभी दरवाज़ा बंद नहीं करते थे। कई बार उनकी गांड में मैंने मामी की लिपस्टिक भी डाली थी"

"ओह्ह", मेरे मुह से निकला। "तुमको तुम्हारे मामा ने चोदा तो नहीं?"

"नहीं चोद नहीं पाए लेकिन बाकि सब कुछ कर डाला। लेकिन मेरे कजिन ने आखिर मेरी सील तोड़ ही डाली।"

"कजिन? कौनसा?"

"वही मेरे बड़े मामा का इकलौता लड़का, सुमित नाम था उसका तब वो कोई २२-२३ साल का था। लेकिन ये काम उसने गावं में नहीं किया बल्कि मेरे घर में किया। वो हमारे घर में रह कर शहर में पढता था। गर्मिओं में हम अक्सर छत पर सोते थे। हालाँकि हमारा घर भरा पूरा था और खूब भीडभाड थी। लेकिन कई बार छत पर हम बच्चे ही सोते थे क्यूंकि बड़े कहीं बिज़ी होते। ऐसे ही रात में कई बार वो मेरे पास अपना बिस्तर लगा लेता। रात में कई बार वो पजामे में मेरा हाथ घुसा देता और मैं उसका लंड हिला देती। फिर वो मेरी चूचियां भी सहलाता और मेरी चूत में भी ऊँगली करता।"

"ऐसे ही एक रात उसने मुझे गरम किया हालाँकि मैं उसका एक बार पानी निकाल चुकी थी। लेकिन उसने मुझे नंगा किया और मेरे उपर चढ़ गया। मैं शोर करती तो आवाजें नीचे जातीं इसलिए मैं चुप थी। उसने मेरी कुंवारी चूत के दरवाज़े पर अपना मोटा लंड रखा और जोर जोर से धक्के मार कर अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगा। मेरी दर्द से हालत ख़राब थी लेकिन वो रुका नहीं बड़ी बेरहमी से वो अपनी तलवार को ज़बरदस्ती अन्दर घुसाता रहा। हालाँकि उसका लंड अन्दर तो नहीं जा सका लेकिन मेरी दर्द के मारे रो रो कर हिचकियाँ बंध गयीं। मुझे कुछ पता नहीं चला सिवाय दर्द के शायद उसके लंड का टोपा अन्दर जा पाया था। पर उसने पानी वहीँ छोड़ा।"

"उसके बाद मैं उससे बचने लगी और नीचे सोने लगी। एक दिन उसने मुझे कहा। देखो चुपचाप उपर आ जाना नहीं तो बुआजी (मेरी माँ) को सब कुछ कह दूंगा। और ये भी कहूँगा की तुमने मेरे साथ ज़बरदस्ती की। मैं बहुत घबराई और फिर छत पर सोने लगी। अगली रात उसने फिर मुझे चोदने की कोशिश की। इस बार भी मुझे भयंकर दर्द हुआ लेकिन वो रुका नहीं। रात में कोई ३-४ बार वो कोशिश करता। मैं रोते रोते उसके हाथ जोडती तो वो मुझे थप्पड़ मार कर चुप करवा देता। भईया रहम करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है मैं रो रो कर कहती, पर उसने कोई रहम नहीं किया।"

"ऐसे ही कोई १५-२० दिन बाद उसके लंड का काफी हिस्सा अन्दर जाने लगा या शायद पूरा ही जाता होगा। मुझे थोडा बहुत मज़ा आने लगा क्यूंकि दर्द अब गायब हो चूका था। लेकिन मेरी बदकिस्मती से मेरे पीरियड्स शुरू हो गए। और उस हरामजादे ने बंद भी कर दिए। मुझे मजबूरन माँ को बताना पड़ा, माँ ने बहुत मारा फिर किसी डॉक्टर के पास ले जा कर मेरा गर्भपात करवाया। उसको घर से निकाला। और माँ ने चुपचाप लड़का देखना शुरू कर दिया फिर जीतू के पापा से मेरी छोटी उम्र में ही शादी हो गयी।"

"मेरी उम्र ज्यादा नहीं थी। लेकिन ये बहुत अच्छे थे और इन्होने मुझे प्यार से रखा। और प्यार से ही सम्भोग किया और मेरे बच्चे होते गए।

end
 


मामी घोड़ी बन जाओ


यह बात कोई 6 महीने पहले की है लेकिन है बिलकुल सच्ची !

मैं किसी काम से मामा के यहाँ गया जो कि शहर में रहते हैं। जब मैंने घर पहुंचकर घण्टी बजाई तो दरवाजा मेरी मामी ने खोला।

और गजब......... मैंने देखा तो फिर देखता ही रह गया। मेरी मामी इतनी खूबसूरत थीं कि उनको देखते ही मेरा मुँह खुला का खुला ही रह गया, चौंका तब जब कि मामी ने पूछा कि कहाँ खो गये?

मेरे मुँह से आह की आवाज निकल गई। मैंने कहा- आप में ही खो गया हूँ ! आप सुन्दर ही इतनी हैं कि होश ही न रहा !

यह सुनकर मामी शरमा गईं और कहा- उंह ! चलो अंदर !

मैं अंदर आ गया तो मामी से पूछा- मामा कहाँ हैं ?

तो मामी ने बताया- वे काम से शहर से बाहर गये हुए हैं, शाम तक आ जायेंगे।

उस समय दस बज़े थे। तब मामी बोली- तुम बैठो, मैं चाय लेकर आती हूँ।

मैं वहाँ पर बैठ गया और मामी चाय लेने चली गईं। मैं मामी के बारे में सोच रहा था। उनकी उम्र 20 साल की थी और फिगर 34-26-34. वोह गॉड. अब मैं सोचने लगा कि कैसे मामी की चुदाई की जाये। लेकिन मुझे कुछ ज्यादा मेहनत नहीं करनी पडी मामी ने खुद ही शुरूआत कर दी। थोड़ी देर बाद मामी चाय लेकर आ गई। चाय पीते हुए मैं मामी को बड़े ध्यान से देख रहा था, खास तौर से उनकी चूचियों को जो कि उस समय टॉप में से छलक कर बाहर आने को हो रही थीं और जींस की पैंट में कसे हुए चूतड़ ! वाह वाह क्या गजब के थे ! पतली कमर लोच खाती हुई ! मस्त मस्त ! सब कुछ मस्त ही तो था।

यह सब देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था। मामी यह जानकर भी अंजान बनकर बैठी हुई थीं कि मैं उनको देख रहा हूँ और मुस्कुरा भी रही थीं।

अचानक मामी ने मुझसे पूछा- क्या देख रहे हो?

और मैं हड़बड़ा गया। इसी हड़बड़ाहट में मेरी थोड़ी सी चाय मेरे लंड के पास जांघों पर गिर गई। चाय गर्म थी इसलिए मैं जोर से चीख पड़ा। मेरी चीख सुनकर मामी खड़ी हो गईं और मेरी तरफ लपकी। इसी हड़बड़ाहट में वे चाय को मेज पर रखना भूल गईं और उनकी चाय जो कि आधी से भी कम बची हुई थी उनकी भी बुर के पास जांघों पर गिर गई। मैंने फौरन ही चाय मेज पर रखी और मामी की तरफ़ लपक कर उनकी जींस पर से चाय झाड़ने लगा। चाय झाड़ते हुए कई बार मेरा हाथ उनकी बुर पर भी लगा।

मामी बोली- उफ ! उधर तुम्हारी पैंट पर चाय गिरी और इधर मेरी पैंट पर !

और वो हा हा ही ही करके हंसने लगी। उनको हंसते देखकर मुझे भी हंसी आ गई। लेकिन चाय से होने वाली जलन से मेरी आँखों में आंसू आ गये थे।

उन्होंने कहा- मेरी पैंट तो भीग गई है उतारनी पड़ेगी !

और जब तक मैं कुछ समझता उन्होंने अपनी पैंट नीचे खिसका दी। अब उनकी केले के तने की तरह चिकनी जांघें चमचमा उठीं और मेरा लंड और भी तेजी से खड़ा हो गया।

उन्होंने कहा- यह देखो, यहाँ पर चाय गिरी है !

उन्होंने अपनी जांघ सोफे पर रखकर मुझे दिखाई। उफ्फ़ ! क्या गोरी गोरी चिकनी जांघें थी !

मैंने कहा- मामी, तुम्हारी जांघें कितनी चिकनी हैं !

तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी जांघों पर रख दिया और कहा- पहले मुझको इस दर्द से छुटकारा दिलाओ, फिर तारीफ करना !

मैंने कहा- मामी, तुम्हारी जांघें चाटनी पड़ेंगी तब तुमको इस दर्द से छुटकारा मिलेगा।

मामी ने कहा- चाहे जो करो, लेकिन जल्दी करो !

वे सोफे पर बैठ गईं। मैं मामी की जांघ को जोर जोर से चूमने चाटने लगा। करीब एक मिनट के बाद मैंने अपने हाथों से दूसरी जांघ भी सहलानी शुरू कर दी। मामी चुपचाप आंखें बंद किये मजा ले रही थीं और हल्के हल्के आह उह की आवाजें निकाल रही थीं। मैं जानता था कि चाय इतनी भी गर्म नहीं थी कि फफोले पड़ जायें लेकिन मामी चुदासी थीं, यह अब पता चल रहा था।

थोड़ी देर बाद मामी बोलीं- हाँ अब दर्द बहुत कम हो गया है !

तो मैंने कहा- मामी मैं दूसरी जांघ को भी चाट लूं !

तो उन्होंने पहले तो मुझे घूरकर देखा फिर धीरे से कहा- अच्छा जो चाहो, चाट लो !

तब मैंने दूसरी जांघ भी चूमनी चाटनी शुरू की और धीरे से अपना एक हाथ उनकी पैंटी पर फिराने लगा। मैंने देखा कि मामी की पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी। पैंटी पर हाथ फिराते फिराते मैं उनकी बुर पर भी हाथ फिराने लगा जो कि एकदम गीली थी।

जब मामी कुछ नहीं बोली तो फिर मैं समझ गया कि रास्ता एकदम साफ है। मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी पैंटी में डाल दिया और सहलाने लगा। अब मामी जोर जोर से उंह आह आह सीईईईईई आहहहह कर रही थीं। मैं समझ गया कि उनको मजा आने लगा है।

अब मैंने जांघे चाटनी छोड़ कर मुँह ऊपर उठाया तो मामी ने कहा- और जोर से चाटो ! चाटना क्यों छोड़ दिया? मैंने कहा- मामी, मैं अब तुम्हारी बुर चाटना चाहता हूँ !

तो मामी ने गुस्से से मेरी तरफ देखा और कहा- मैंने पहले ही तुमसे कहा था कि जो चाटना चाहो ,चाटो ! मुझसे पूछने की जरूरत नहीं है।

मैं फौरन अपना मुँह मामी की पैंटी के पास ले गया और उनकी बुर को ऊपर से ही चूसने लगा। फिर मैंने उनकी पैंटी को पकड़ा और मामी से कहा- अपने चूतड़ थोड़ा ऊपर उठाओ ताकि मैं तुम्हारी पैंटी को निकाल सकूं।

मामी ने बिना कुछ बोले अपने चूतड़ ऊपर उठाये और मैंने एक झटके से उनकी पैंटी निकाल दी।

वाह एकदम चमाचमा उठी उनकी चिकनी बुर ! कामरस से भीगी हुई ! कितने मोटे मोटे होंठ थे उनकी बुर के ! एक भी बाल नहीं था ! एकदम सफाचट थी !

मैंने उनकी बुर को खोला तो उनका लाल सुर्ख दाना चमक उठा और बुर का छेद पच्चीस पैसे के सिक्के जितना छोटा था। मैं तुरन्त ही अपना मुँह उनकी बुर के पास ले गया और चाटने लगा। मैं अब मामी की बुर के दाने को चुभला रहा था और मामी आहहहह उहह सीईईई ऊफफफफफ आहहहहह की जोरदार आवाज निकाल रही थीं और कह रही थीं- खा जाओ मेरी बुर को और अंदर तक जुबान डालो !

मैं अब मामी की बुर में जोर जोर से उंगली करने लगा लेकिन मेरी उंगली आसानी से अंदर नहीं जा रही थी, बडी ही कसी हुई बुर थी मामी की। उफ़्फ़ ! इतना मजा आ रहा था कि सारा वर्णन करना ही असम्भव है।

जब मैंने मामी की पूरी बुर चाट ली तो मैं हट गया और मामी का टॉप निकाल दिया। अन्दर उन्होंने ब्रा नहीं पहन रखी थी। अब मामी के मस्त कबूतर उछल कर बाहर आ गये। मैं मामी के दूधों को हल्के हल्के सहलाने लगा तो मामी ने मेरे हाथ अपनी चूचियों पर दबा दिये और कहा- जोर जोर से दबाओ।

मैंने दोनों चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा। कितने कसे हुए दूध थे उनके ! फिर उनकी घुडियों को अपनी उंगलियों में मसलने लगा। मामी के मुँह से वासनायुक्त सिसकारियाँ निकल रही थीं। धीरे से मैं अपना मुँह मामी के उभारों पर लाया और मुँह में भरभर कर जोर जोर से चूसने लगा। वाह बड़ा मजा आ रहा था !

फिर मैं मामी के होंठों और गालों को चूने चाटने लगा और अपनी जीभ मामी के मुँह में डाल दी। मामी उसको मजे से चूसने लगी। कुछ समय बाद मामी ने मुझको अपने से अलग किया और कहा- वाह, तुम तो सारे कपड़े पहने हुए हो और मुझे नंगा कर दिया?

मैंने मामी से कहा- तुम्हीं उतार दो !

और मामी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिये। मेरा लंड जो कि 6 इंच लंबा और गोलाई लिए हुए 3 इंच मोटा था को देखकर मामी खुश हो गईं। मैंने मामी को खड़ा किया और उनके होंठ चूमने लगा, उनसे कहा- अपनी जीभ मेरे मुँह में डालो !

और मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी और हम दोनों एक दूसरे की जीभ को चूसने चाटने लगे। थोड़ी देर बाद मामी अपना मुँह मेरे लंड के पास लाईं और कहा कि तुमने मेरी बुर चूसी है, अब मैं भी तुम्हारा लंड चूसूंगी !

मामी मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने और आइसक्रीम की तरह चाटने लगी। मुझे बड़ा मजा आ रहा था, लग रहा था कि मैं जन्नत की सैर कर रहा हूँ। 5 मिनट तक मेरे लंड को चूसने के बाद मामी ने मुझे सोफे पर बिठा दिया और मेरे सामने घुटनों के बल बैठकर मेरा लंड चूसने लगीं और मेरी गोलियों को मुँह में भर लिया।

मैंने मामी से कहा- अब छोड़ दो, नहीं तो मेरा रस बाहर निकल आयेगा।

लेकिन मामी मानी नहीं और मेरा लंड चूसती रहीं। कुछ समय के बाद मेरा रस निकलने लगा तो मैंने मामी का चेहरा पकड़कर ऊपर उठाया लेकिन वो हट ही नहीं रही थी तो फिर मेरा लंड रस उनके मुँह में ही भर गया। कुछ तो मामी के मुँह से बाहर निकल गया और कुछ उन्होंने चाट लिया।

फिर मेरी तरफ सेक्सी निगाहों से देखती हुई अपने होठों को चाटने लगी। मैंने आगे बढ़कर मामी को बाहों में भर लिया और चूमने लगा। मैं कहने लगा- आपने तो मुझे स्वर्ग की सैर करा दी !

मामी हंसने लगी और मेरे सीने को सहलाने लगी। इससे मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। तब मामी मेरे घुटनों पर बैठकर मेरा लंड अपने हाथ में पकड़कर अपनी बुर के दाने पर घिसने लगी और जोर जोर से सीत्कारें भरने लगी। वे मेरे ऊपर बैठी हुईं थी जिससे कि उनकी बुर का पानी मेरे लंड को पूरा भिगो गया था और अब किसी चिकनाई की जरूरत नहीं थी। मामी ने मेरे लंड का अपनी बुर के छेद पर निशाना बनाया और धीरे धीरे बैठने लगी।

उफ़्फ़ ! बडा मजा आने लगा मुझे !

मेरा लंड बडा ही कसा हुआ उनकी बुर में घुस रहा था। मैंने देखा कि मामी ने अपने जबड़े भींच रखे थे और धीरे धीरे करके मेरे लंड पर जड़ तक बैठ चुकी थीं और उसके बाद मेरे होंठों को अपने होठों में भर लिया और चूसने लगी। मैं अपने हाथ उनकी कमर से चूचियों पर लाया और दोनों हाथों में भर कर दबाने लगा।

अब मामी सीईईईईई सीसीसी आह अअअअहाहहहह की जोरदार आवाजें निकाल रही थी और ऊपर से झटका भी मार रही थी। पूरे कमरे में फच फच सीईसीइइइई और तेज और तेज तेज करो की जोरदार आवाजें हो रही थीं। करीब 5 मिनट तक मामी ऊपर से और मैं नीचे से एक दूसरे की चुदाई करते रहे और उसके बाद मामी का पानी निकल गया तो मामी रूक गईं और मुझसे कहने लगीं- बस अब और न करो !

लेकिन मेरा तो अभी रस निकला ही नहीं था इसलिए मैंने मामी से कहा- मेरा तो निकल जाने दो !

तो मामी मान गईं, मैंने मामी से कहा- घोड़ी बन जाओ !

और पीछे से मैं उनकी बुर में अपना मोटा लंड डाल कर धीरे धीरे चोदने लगा। कुछ समय के बाद मामी को फिर से मजा आने लगा तो मामी भी अपनी कमर को चलाने लगीं। मामी को चोदते हुए मैं उनकी गांड के छेद को फूलते पिचकते हुए देख रहा था और मुस्कुरा भी रहा था। मैंने मामी की बुर में एक अंगुली डाल कर उसको गीला किया और मामी की गांड में डाल दिया मामी उछल पडीं और उनकी सीत्कारें और भी तेज हो उठीं। मामी को इतना ज्यादा मजा आया कि वे फिर झड़ गईं।

कुछ समय बाद जब मुझे लगा कि अब मेरा भी निकल जायेगा तो मैंने मामी से कहा- मेरा वीर्य निकलने वाला है, कहाँ डालूं ?

तो उन्होंने कहा- मेरी बुर में ही डाल दो ! मेरा भी निकलने वाला है !

मैंने मामी से कहा कि ऐसे तो आपको बच्चा हो जायेगा तो मामी ने कहा- हो जाने दो ! मैं तुम्हारा ही बच्चा पैदा करूंगी ! तुम्हारे मामा तो बूढ़े हैं मैं तो तुम्हारा ही बच्चा पैदा करूंगी तो वो तुम्हारे जैसे ही खूबसूरत और बलिष्‍ठ होगा।

मैंने मामी को सोफे पर पीठ के बल लिटा दिया और उनकी बुर में अपना मोटा लंड खोंस कर धचाधच चुदाई करने लगा। 15-20 धक्के लगाने के बाद मामी चिल्लाने लगीं- मैं तो गई गई सीर्इसीसीसी ईई....ईसीई आह उह आह आह जोर से और जोर से ! करने लगी तो मैं समझ गया कि मामी का निकलने वाला है।

मैंने मामी के दूधों को दोनों हाथों में भर लिया और जोर जोर से दबाते हुए धक्के लगाने लगा। 8-10 धक्कों के बाद मेरे मोटे लंड से रस निकलने लगा किन्तु मैं रूका नहीं और अन्दर तक पेलने लगा। जब मेरा पूरा लंड रस निकल गया तो मैं मामी की बुर में ही लंड डालकर मामी के उपर लेट गया। करीब दस मिनट बाद हमें होश आया तो हम दोनों शरमाने लगे।

मामी ने मेरे होठों को चूमकर कहा- सच जितना मजा तुम्हारे साथ आया, उतना तुम्हारे मामा के साथ कभी नहीं आया। आज मैं सही मायने में औरत बन पाई हूँ।

मैंने मामी से कहा- मैं आया तो एक दिन के लिए ही था लेकिन मैं अभी कुछ दिन और रूककर तुम्‍हारे साथ मस्ती करना चाहता हूँ।

तो मामी ने कहा- यही तो मैं भी कहने वाली थी, जितने दिन चाहो उतने दिन रूको।

और मैं चार दिनों तक मामी के यहाँ रूककर मजे करता रहा।
 
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