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Adultery मस्तराम की कहानियाँ

दिदि मेरी बातो को शांत होकर सुन रही थी और तब बोली तो प्रमोद... तुम्हारे कहने का मतलब है कि मेरी सुंदरता ने तुम्हे पागल बना दिया था।

जब वह मुझसे अपने बहन से चिपक ली थी तब उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों मेंरी छाती पर गड़ने लगा था। - वह मेरी होठों को चुसते हुए अपनी चुचियों को छाती से रगड़

रही थी और इस तरह रगड़ से मेरा बदल सनसनाने लगा था।

पहले तो मैं स्थिर होकर जिभ को चुस रहा था, लेकिन उसे अपने चुचियाँ पर दबाते देखकर मैं भी उसे अपने आलिंगन में बांध लिया।

वह मेरे चेहरे को चारों तरफ चुम्न करते हुए मेरी पीठ को सहलाते हुए बोली तुमने मुझे अपनी हरकतों से पागल बना दिया है .... तुम बदमाश लड़के गुंडा... साले तुम मेरी पेटिकोट को खोलकर उसी समय अलग क्यो नहीं कर दिया?

मुझे चोद क्यों नहीं दिया... जब तुम्हारा हाथ पहली दफा मेरी गांड पर पड़ा था तभी मैं जाग गई थी।

। मैं तो सोने का बहाना कर रही थी और सोच रही थीं कि तुम मेरे साथ क्या करने जा रहे हो।

तुम्हारी हरकतों ने मेरी बुर को गुदगुदा दिया था ओर बूर से पानी। रिसने लगा था। - मेरे प्यारे भाई तुम जानते हो....मैं चाह रही थी कि तुम तुम अपने लंड को मेरी बूर में धांस दो।

लेकिन साले तुम तो गदहे निकल... ओह प्रमोद... वह मुझसे गाली का शब्द प्रयोग करते हुए बोल रही थी और साथ में मुझे अपनी दन से चिपका भी रही थी। - दिदि के मुंहसे गाली -भरी बातों को सुनकर मैंफिर से सनसनानेलगा ओर मेरा लंड खड़ा होकर डंडे के समान कड़ा हो गया था।

ओह मेरी प्यारी दिदि....तुम कितनी अच्छी हो...। - मैं बोला ओर मस्ती में भरकर अपने हाथों को उसकी बाडिज के ऊपर चुचियों पर ले गया ओर हाथ से पकड़ कर दबाने लगा।

अब मेरे दिल में जो भय था खत्म हो चुका था। उसके गुदाल चुचियों को मसलने में अच्छा लग रहा था।

उर्मीला दिदि को अपने मुलायम हाथ में लेकर मेरे लंड पर धक्का लगा रही थी। - और मैं उसकी चुचियों को जोर जोर से मसल रहा था। तब मैं चुचियों को मसलते हुए उसकी किस किस समान कुंडियों को दो उंगली के बीच लेकर मसलने लगा था। _मैं इस समय बूर को मसलते हुए सोच रही थी कि अब मुलायम अपने बदन को बूर चोदने को मिलेगा अब वह धक्का अपने हाथों से दे रही थी।

तब मुझे महसुस हो रहा था उसे मेरी दिदि के बूर में लंड आ रहा

हम दोनों एक दूसरे के अंगों पर जोर कि अजमाइस की तेज कर दिया था।

मैं उसकी चुचियों और बूरको कपड़े के उपर जोर जोर से मसल रहा था।

दिदि की चुचियां असलाहट पाकर कड़ी हो गई थी और साथ में बूर से पानी निकलने के वजह पेटिकोट बूर कि भाग का भाग उठी थी। बहन के बूर कि खुजली बढ़ती जा रही थी। - अब वह मेरे लंड को हथेली के बीच कसकर दबाकर ऊपर नीचे कर रही थी जिसस लंड पर नशा कि बैगनी रेखा उमर उठी थी। बहन एक अनुभवी की तरह मेरे लंड को मुठिया रही थी।

इस तरह मेरे लंड में मस्ती कुछ ही पल में खलास हो गया था उम्मी हो चली थी जैसा कि महसुस कर रहा था।

मेरा बदल कांपने लगा था और कांपते हुए बोला आवाज में बोला- मैं कुछ ही देर में झड़ जाउंगा-दिदि। म..म... स.स..ओह दिदि मेरी मस्ती खलास हो रहा है हाय मेरा लंड से पानी गिर रहा है..ओह. हाय..सी...ई।

और मेरा लंड से गरम वीर्य का फौव्बारा पिचकारी के तरह उसके शरीर पर गिरना शुरू हो गया बहुत ही गाढ़ा बीर्य उसके बदन के अंगों पर गिरकर चिपक गया था।

जैसे किपहला तो उसकी दाहिने हाथ कि हथेली वाले से तर हुआ था ओरबाद फौब्बारे की तरह उसकी चुचि के उपर वाली तथा पैंट के काफी भाग में वीर्य का लसलसा चिपक उठा था। - अब मेरा लंड से पानी गिर रहा था तब वह हो जाने साथ ने लंड को अपनी शरीर की ओर मोड़ दि थी। के जब मैं झड़ गया तब वह मुझसे मुस्कुराते हुए बोली- ओह माई गॉड तुम्हारा लंड से बहुत मात्रा में पानी गिरा है।

हाय प्रमोद- मेरे प्यारे भाई जान- यहतो गाढ़ा भी बहुत है अच्छा ठीक है अब हम दोनों मिलकर इस तरह से खेलकर आनंद प्राप्त करेंगे। - और यह कहकर यह दिवार के तरफ चली बड़े और अपने कपड़े को उतार कर खूटी पर टांग दी।

जब वह आरही थी तब मैं उसके चिकने कुल्हे को बहुत ही गौर से देख रहा था। - उसके कुल्हे मटक रहे थे। सबसे पहले वह अपनी बाडिस को खोल कर चुचियां का नग्न कर दि ओर तब अपनी पेटिकोट कि डोरी को खोलकर जमीन पर गिरा दि।

जैसे ही उसके ऊपर से पेटिकोट सरक कर जमीन पर गिरा वैसे ही मेरी नजर उसके कोहरे समान के चुतड़ो के बिच गहरे पड़े पर पड़ी। मैं बहुत ही गौर उसके फुले चुतड़ों को देख रहा था।

उसके दोनों गोल चुतर आपस में सटकर आकर्षण पैदा कर रहेथे। जब वह अपने वस्त्र को खूटी पर टांग दी तब वह पलट कर मेरे सामने हो गई।

और मैं उसके नग्न बदन को देखकर फिर से गनगनां उठी उसके चमक रहे जांघ मुलायम पेट केबिच गहरी नाभी ओर उसके झांटो के बिच पत्तिदार बूर को अच्छी तरह से देख रहा था।

उसके बूर के होठ थोड़ा सा खूला हुआ था और साथ में छेद का किनारा भाग काला -काला नजर आ रहा था ऐसा लग रहा था जैसे बूर मेकं काजल लगा दिया गया है।

उसके बड़ी ओर कड़ी चुचियां के बिच आधे इंच कि काली घुड़ियाँ थी।

ओह- मेरे भगवान- मेरी बहन नग्न अवस्था में बहुत सुंदर लग रही थी।

 
मैं अपने को बहुत भाग्यशाली समझ रहा था कि मैं अपनी दिदि के नग्न अंगों को अपने आखों से देख रहाथा।

मेरे आंखों में दिदि किमस्त जवानी नाच रही थी और मुझे बेचैन करने लगी।

प्रमोद- मेरी बहन बोली- देखे तुम्हारा लंड का आकार क्या है तुम्हारी बहन के बूरके लिए फिट है या नहीं उस बूर के लिए जिस बूर से दो बच्चा निकल चुका है।

आओ मेरे भाई जान अपने लंड को मुझे देखने दो ओह प्रमोद देखे तुम्हारे लंड कितना बड़ा है।

और हैवी कुत्ते के काबि है कि नहीं...। इतना कहकर मेरे लुंगी को जांघों पर से हटाकर लंड को नग्न कर दी उसकी पाली ने मेरे सारे बदन को गुदगुदा दिया था।

उसके हरकतों पर मेरा लंड टनटनाकर फुदकने लगा था और लोहे के समान कड़ा होगया था।

मैं चुपचाप से स्थिर था और वहअपनेगर्म हथेली के बिच मेरे लोहे समान कड़े लंड को पाकर धीरे धीरे हाथ से उपर नीचे करते हुए बोला प्रमोद- मेरे प्यारे भाई जान- मेरे यार वास्तव में तुम्हारा लंड तो मेरे पति के लंड से काफी मोटा है। हाय आह सी सी और मुझसे बिना उतार पाये हुए।

मेरे लंड को हाथ से धक्का देना शुरू कर दी मैं अपनी दिदि द्वारा लंड को बढ़ाई सुनकर अचम्भा मेंपड़ गया था ओर मुझे खुशी हो रही कि मेरे लंड को देखकर मेरी दिदि मुझे पर मुग्ध हो उठी थी। तुम सोच क्या रहे हो मेरे अच्छे भाई? ओ ओह वास्तव में तुम्हारा लंड बहुत मोटा है?

यह तो गदहा के लंड के समान लग रहा है तुम्हारा मोटे लंड को देखकर मेरी बूर से पानी गिरने लगा है। .

बूर में पानी भर गया है मेरे छोटे भैया औह प्रमोद - अपनी बहन को चुच को ओर बुर को नहीं मसला आगे- हाय मैने बूर और चुचि मसला और सिसियाते हुए। - मेरे हाथको अपनेहाथ से पकड़कर चुचियाँ पर ले गई। मैं उसको चुचियों को एकहाथ से पकड़कर मसल रहा था और दूसरे हाथ को अपने झांटेदार बूर पर लेजा कर पेटिकोट के ऊपर से मसलने लगा मैं अपने पूरे हथेले के बीच में बूर को पकड़कर दबाने लगा।

और साथ में उसके बड़ी-बड़ी चुचियों को भी मसल रहा था वह भी मेरे लंड कोअपने हाथों से मुठिया रही थी।

वह मेरी ओर मुस्कुराते हुए बढ़ती जारही थी और कुछ ही पल बाद वह मेरे आँखों के काफी नजदीक आ गई थी।

और वह हमारे चेहरे के सामने आकर खड़ी होकर अपने पेरो को फैला दी। जिससे उसका बूर खुलकर हमारे सामने आ गई थी। उसकी जाँघों के बीच त्रिकोण समान बूर मुश्किल से मेरे चेहरे से तीन चार इंच की दूरी पर थी।

उसकी बूर के ओठ थोड़ा खुला था और छेद के उपर टीट साफ नजर आता था।

दीदी के बूर के बाल काला होने के साथ बूर के ओठों की किनारा लग रहाथा।

हालां कि बूर को भीतर दिवार लगायी थी और अपने चेहरे के . नजदीक पाकर मेरा मुख में पानी भर उठा था।

मेरे अपने दिल की धड़कने बढ़ गई थी ओर मैं अपने हाथे को उसके पिछे लेजाकर फुली हुई चुतड़ों पर रख दिया।

और अपने चेहरे को दबात हुए अपने चेहरे का जांघों के बीच घुसा दिया था।

मैं उसकी बूर के चारो तरफ बूर के काले बालों को जीभ से चाटना शुरू किया दिदि केबूर कि बाल काफी कड़ा था।

ओर जीभ को फाड़ पाकर फुल पचा रहा था। मैं बुर के चारो तरफ चाहते हुए टोट को भी चाटा। दीद का टिट पटाई पर तन के एकदम खड़ी होने लग गया था।

मैं उसके खड़े टिट को ओठों के बीच दबा कर चुसना शुरू कर दिया था।

उसका पैर कांपने लगा था और मैं टिट को चुसने के बाद मोटे पती पर अपनी ओठो को चिपका कर चुसने लगा।

साथ में अपने दोनों हाथ से गोल चुतड़ों को भी मसल रहा था।

मेरी बेहन भी उत्तेजना में मेरे सिर के ऊपर हाथ रखकर अपना बूर पर दबाते हुए बोली। - प्रमोद मेरी बूर को चुसना छोड़ दो और चित्त होकर लेट जाओ ताकि मैं भी तुम्हारे लंड को चुसकर इसका स्वाद लुं जबकि इस हालतमें मेरी बूर को चाट की तरह चाटोगे। ,

इतना कहकर वह मुझे बिछावन पर चित कर लिटा दिया और मेरे चेहरे के पास बुर रख दि और अपने चेहरे को मेरे लंड के पास कर दो जिसे लंड मुंह के सामने पड़े।

मेरी बहन का बूर से बहुत ही सुंदर सुगंध मेरे नाकों में धीरे धीरे समा रहा था।

मैं उसके चुतड़ों के होठों की उंगलियों से जाते हुए अपने जीभ को बूर के दीवारों पर फिरा फिराकर चाटना शुरू कर दिया तो मुझे एक अपूर्व आनंद का अनुभव हुआ।

जब मेरे खुरदरे जीभ उसकी बूर के टीट पर फिर रहा था तब वह चिढ़िया की तरह कुहु कुहु कर रही थी। २ आ.. आहमेरे प्यारे भाई तुम बहुत अच्छी तरह से मेरी बूर को चाट रहे हो। हाय मेरे राजा अपनी जीभ को मेरे बूर के छेद में ठीक से दबाओ।

अपनी दिदि के बूर में डाल दो.. यार ... हाय तुम्हारा बहुत मोटा सा लंड है।

और गांड में जायकेदार भी है यह तो मेरे मुँह में घुसकर कंठ पर ठोकर मार रहा है। - वह मेरे लंड के चारो किनारों को चाटते हुए अपनी मुंह में लंड को घूसा ली और बहुत प्रेम से लंड को चूसने लगी। मैं भी उसके बूर चाटते हुए चुस रहा था।

और दिदि के कहने पर मैं अपनी जीभ को बूर पर फिराकर दबाना शुरू कर दिया।

इस बीच में अपनी ऊँगलियों से उसकी गाड़ को चोद रहा था ओर साथ में गोलाकार चुतड़ों को मसल रहा था।

मेरी प्यारी बहन मेरे खड़े मस्त लंड को अपने मुँह में रखकर चुस रही थी। और साथ अपनी जीभ को सूपाड़ा के गोल भाग पर फिरा रही और बीच-बीच में जीभ के नोक से पेशाब करनेवाला छेद पर ठोकर मार रही थी जिससे एक बार एक खलास लंड दिदि द्वारा चुसाई होने पर फिर सेतन कर खड़ा हो गया था।

मैं सनसना उठा था और साथ ही उसकी हरकत से मेरी उत्तेजना भर उठा था।

मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी गर्म मंह में घसा पड़ा था और वह अपने मुंह में रखकर लंड को चभला-चभला कर चूस रही थी। मुझे ऐसा लग रहा था।

जैसे मेरा लंड उसकी मंह में न घसकर बर में घसा हुआ है और यह ख्याल से अपनी कमर को ऊपर की ओर उचका कर मुँह पर धक्का मारकर मुंह चोदना शुरू कर दिया।

 
इस तरह मेरा लंड बहन मुंह में अंदर बाहर करता हुआ चोद रहा था। . आह...सी..सी....दीदी चुसी इसे...और जोर से चुसो...साली कुतिया....मेरे पूरे शरीर को मुंह में भरकर चुसों....और इस तरह से अपने छोटे भाई का लंड चुसो।

दीदी....आह भाई के मजबूत लंड का जायका मुँह में रखकर महसुस करो....ओह साली....इसी तरह।

मैं सिसकी मारते हुए बोला और अपनी हाथों से उसके चुतड़ों को सहलाकर दबाते हुए उसके गांड में अपना एक ऊँगली धीरे से घुसाना शुरू कर दिया।

मेरी दिदि अपनी गांड़ को नचाकर पेली गई जीभ कोबूर से भकर चेहरे पर रगड़ते हुए बोली- तुम बदमाश लड़का...साला गुंडा तुम मुझे गाली देता है।

फिर कसमसा कर बोली- मैं तेरा साली...मैं कुत्तिया हूँ ...कितेरा बहन हूं।

आ...आह- तुम बदमाश और गंदे लड़के होओहमेरी टीट को मत काटो।

ओह-साला -सी..सी.... इस छोटे से बदन को अपने होठों में भर लो और धीरे-धीरे चुभलाकर चुसो इस मेरी फाइल लवली -गुंडे गड़े हां...रे।

वह कराह रही थी और मैं उसके कहने पर उसकी टीट को मुंह में। भरकर चुसना शुरू कर दिया। वह जोश में आकर बूर को मेरे मुंह पर रंगड़ रही थी।

इसके साथ ही बूर से रज मेरे मुंह में छिड़काव करना शुरू हो गया। मैं उसकी बूर से गिर रहे पानी को बहुत जायका के साथ चुसचुस कर पीने लगा।

उसके गाढ़े ओर नमकीन रंज को निगल कर अपने कंठ के नीचे उतार कर पी रहा था। - उसकी बूर से गिर रही पानी की खुशबू ने मुझे पागल बना दिया, था। वास्तव में दिदि कि बूर के रस को पाकर मैं भारी उत्तेजना से भर उठा था। _मैं टीट को चुसना छोड़कर उसकी बूर में पूरी जीभ को पेलकर ओठों से बूर की दिवारों को चुसना शुरू कर दिया ओर अपनी जीभ को उसकी बूर केछेद में हिला रहा था।

ओह? मेरी बहन....अब मैं ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता था। अब मुझे अपने लंड को तुम्हारा भींगी और मीठे पत्तेदार बूर का गहराई में घुसाने का मौका दो- हाय .... रानी अपनी प्यारी बहन की स्थान तृष्ट बूर को चाटने दो।

हाय दिदि अपनी बूर मुझे चोदने दो अब मेरा लंड फिर से सनसनाने लगा है सी सी।

मैं कराहते हुए बोला- और अंत में उसके बूर से अपनी जीभ निकालकर चुसना बंद कर दिया।

ओके-ओके-मेरे प्यारे भाई जान- मेरे छोटे राजा- तुम अपनी बहन की बूर को चोदने के लिए बहुत बेचैन हो- ओर मैं भी तुम्हारी मोटे लंड पेलवाने की छटपटाती हैं।

पर ठहरो- मैं तुम्हारे ऊपरे आकर अपनी बूर में लंड चुसाती हूं पहले मुझे चोदने दो।

फिर इतना कहकर वह अपनीबूर को मेरे चेहरे से रगड़ना छोड़कर उठकर बैठ गई। । मेरा लंड दिदि की थूक से भंग रहा था और इसलिए वह चादर से मेरे भीगे लंड को पोंछकर सुखा दि। - मेरे लंड को पोछने के बाद वह अपनी बूर के छेद में कपड़ा डालकर रगड़-रगड़कर पोंछा। इस तरह से मेरे थूक से भंगी बूरको सुख गया था।

मैं चुपचाप अभी भी चित्त होकर लेटा हुआ था। मेरा लंड खड़ा था और मदहोश में मेरा सुपाड़ा काफी फुट गया था।

मेरी दिदि उठकर मेरी जांघों के दोनों तरफ अपनी पैरों को फैलाकर मेरे गोदी में बैठ गई।

इस तरह से बैठने पर उसका सुंदर बूर कि पत्तियाँ खुल गई थी और मैं उसकी गहरा ओखली के खुले भाग को अच्छी तरह से आंख से देख रहा था।

उसकी बूर की भीतर सतह अंगुरी लाल रंग का देखा त मेरी लंड का सुपाड़ा फुलकर फुदकने लगा।

अब लंड उसकी बूर पर रगड़ मारनेके लिए बेचैन हो उठा था। मैं अपना कमर को ऊपर उचकाने लगा।

वह ऐसा करते देखकर खिलखिलाकर जोर-जोर से हंसने लगी और हंसते हंसते मुझसे बोली- पागल लड़के मेरे यार- तुम इस तरह अपने कमर को मत उचकाओ।।

देखो यार- मैं तेरा सहयोग कर रही हूं। तुम अपने दिदि के बूर में लंड पेलने के इतना बेचैन क्यो हो रहे हो...साला गदहा कहीं का-जानता - तक नही। - यह कहकर वह अपने हथेली के बीच मेरे को जोर से पकड़ ली

और मुठियाते हुए अपने सिर को झुकाकर अपनी बूर को लंड पर सीधे भिड़ा दि।

वह अपनी रसीली बूर को ऊपर नीचे कर मेरे लंड को हाथ से पकड़कर रगड़ने लगी।

 
इस तरह से उसकी झांटो की रगड़ मेरे लंड पर रगड़ रगड़कर सहलाने लगा था।

मैं अपनी दोनों हाथों कोउसकी पतली कमर पर से हटाकर मोटे जांघो के बीच ले गया ओर जांघो को हाथ से पकड़कर फैला दी इस तरह दिदि की जांघ काफी फैल गया। - मैं अपने उंगली ओर अंगूठे को अपने दोनों किनारों पर स्थिर कर दिया ओर तब उसकी बूर को थेड़ा फैला दिया। जिससे बूरकी दो पाट दिखने लगा।

दिदि की बूर गहरीहोने के साथ भीतर का पोरशन बाल से घिरा पड़ा था।

उसके झांट से घिरी बूर के भीतर का सतह लाल गुलाबी रंग की टीट ऊपर की ओर झांक रहा था।

उसकी प्यारी बूर ओर टीट अपने भाई के मोटे लंड का प्रहार सहने को तैयार थी।

इस तरह से उसकी बूर के ओठों के बीच मेरा लंड अड़ गया था ओर वह धीरे-धीरे अपना बूर को लंड पर दबाते हुए बैठने लगी। - इस तरह से मेरा खड़ा लंड उसके बूर कि दिवारों को रगड़ते हुए अंदर प्रवेश करने लगा था।

सबसे पहले मेरा लंड का सुपारा बूर में प्रवेश कर गया ओर वह धीरे-धीरे अपनी बूर कोलंड पर दबाते चली गयी और कुछ ही पल मेंमेरा पूरा लंड उसकी बूर को चिपते हुए भीतर घूसता चला गया अंत में मेरा पूरा लंड आठ इंच का उसके बूर की गहराई में घूसकर जड़ तक समा गया।

भाई-भाई डार्लिंग प्रमोद तुम्हारा लंड तो बहुत लंबा है और साथ में मोटा भी है-इसने गोरा बूर को चिर दिया ओह....ओह यह मुझसे बोली।

जब मेरा लंड उसकी बुर में चला गया तब वहमेरेकंधों कि हाथ से झूककर पकड ली और धीरे-धीरे अपना चुतड़ को ऊपर नीचे कर घूसाने लगी और इस तरह से उसकी बूर में मेरा डंडा अंदर बाहर होने लगा।

जब वह अपना चुतड़ को उठा उठाकर पटक रही थी तब उसका बड़ी बड़ी चुचियां घड़ी के पेन्डुलम के तरहहिल रहे थे।

मैं अपने दोनों हाथों से उसको लटक रही चुचियों पकर लिया ओर जोर जोर से मसलने लगा।

बीच-बीच में चुचियोंमसलतेहुए उसकी घुण्डियों को रगड़ देता था।

मुझे दिदि को बड़ी और कठोर चुचियां को मसलने में बहुत मजा आ रहा था।

इस तरह से एक तरफ उसकी बूर को चित कर लंड घुसाया था और दूसरी तरफ उसकी चुचियां को रगड़ाई हो रही थी।

उसकी मस्त बूर मेरे मोटे और कड़े लंड को अंदर तक कर ली रही थी ओर बूर कि दीवारे लंड पर घर्षण पैदा कर रहा थ॥ मैं उत्तेजना में मस्त होकर बोला।

आ...ओह..मुझे तो विश्वास हो नहीं हो रहा कि तुम्हारी इस कसी बूर से दो बच्चा पैदा हुआ है हाय - तुम्हारी चुचियां तो बहुत कड़ा । है। - देखो देख न दिदि धुडी तनकर खड़ा होगया है मेरे लंड के सुपाड़ी को अपनी बुर के जड़ तक रगड़ कर धक्का मारी हाय दिदि चोदो मुझे मैं आज बहुत खुश हूँ। - किमेरी इतनी प्यारी बहन मुझे मिली ओर जोर से और जोर से अपनी गांड को उपर नीचे कर धक्का मारने लगी ओह ओह सी सुदई और में कराते हुए।

अपने हाथों को दिदि के पिछले भाग की ओर ले गया। एक हाथ से उसकी चुतड़ को लंड पर दबा रहा था ओर हाथ से उसे के भारी चुतड़ को मसल रहा था।

उसके मांसल चुतड़ी को मसलने में मुझे मजा आ रहा था। वह हिचकोला मारते हुए।

मेरे विशाल लंड को अपनी प्यारी बुर में पेलवा रही थी। चह मेरी जांघो की धूने से दाबकर धक्का मार रही थी और इस तरह से उसकी चुचियां जोर-जोर से हिल रहे थे।

तभी वह मुद्दा पर औधे होकर पड़ गई। और इस हालत में उसकी चुचियों मेरे छाती पर दबने लगी थी।

और मेरे ओठों को अपने मुंह में भरकर चुसने लगी। वह मेरे ओठो को चूसते हुए अपनी जीभ को मेरे मुंह में घूसा कर नचाने लगी और इस हालत में दीदी के जीभ को चूमता कर चुसने लगा।

वह अपनी बड़ी-बड़ी चुचियों को मेरी छाती पर रगड़ रही थी और में इसे दबाने में उसकी बड़ी और गोलाकार चतड़ों को उंगली से पकड़कर फैला दिया।

और अपनी लुंगी से गाड़ को खोदने लगा वह अपनी कमर को उठाकर मेरे लण्ड अपनी रसदार बुर को उठाकर मेरे लण्ड अपना रसदार बूर को पटक रही थी।

और तभी मै अचानक उसकी गांड में अपनी एक उंगली की पेल दिया।

मेरी इस हरकत पर वह चिहुंकी और मेरे जीभ को अपने दांतो से काटते हुए बोली।

तुम लटखट लड़के मेरी गांड में उंगली क्यों पेल रहे हो क्या तुम्हे अपनी बहन पर दया नहीं आ रही।

मेरे प्यारे भाई पहले मेरी बूर को चोद ले तब यदि तुम्हारी इच्छा है तो बाद में मेरी गांड मार लेना ओह प्रमोद अपनी कमर कमो उपर उठा उठा कर मुझे जोर जोर से चोदो।

ओह माई गौड दवा दो पुरा हाय आने दो अब कुझे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है और अच्छे लड़के तुम्हारा सुपारी बहन की बर के तह ४ तक जा रहा है। - उसके मुंह से सिसकी भीर आवाजा निकल रही थी तभी वह मुझे अपनी बदन से चिपकाते हुए विछावन पर पलट गई और मुझे बदन से कसकर पिचका और जब वह मुझे चिपका कर पलटी तब मेरा लण्ड दीदी के बूर में ज्यों के त्यों धंसा रहा।

वह पलटने के बाद धक्का मारने के लिए बोली अब मेरी बड़ी बहन नीचे थी।

और मै उसकी उपर था अभी भी उसकी बुर के जर तक मेरा लण्ड धंसा हुआ था।

मैं अपनी कमर को उपर नीचे कर धक्का मारने लगा।

उसकी बूर चिपचिपा गई थी और मेरा लण्ड उसकी बूर में फच फच की आवाज करते हुए जा रहा था।

वह भी अपनी कमर को नीचे से उठाकर बूर को लण्ड पर दबा रही थी।

और सिसियाते हुए बोली ओह प्रमोद जोर जोर से धक्का मारो हाय मेरी बूर में खूजली ओह -सी...सी.....।

मै अपनी बहन को सिसकी भरी आवाज को सुनकर अपनी बड़ी बहन उर्मीला को जोर से चोदने लगा।

मै अपने पूरी लण्ड को उसकी बूर से बाहर कर एक ही धक्के में भीतर तक पेल देता था। - उस दिन के बाद उमेश को ऐसी बूर का सस्का लगी कि वह नित्य मुझे चोदा करता था।

एक सप्ताह के बाद ही मैं गर्भवती हो गई तो उमेश हमसे बेहद खुश हुआ।

मै अपने घर के चाहरदीवार के भतर ही अपनी मस्ती कामना को अब पूरी करने लगी और अब मुझे भी उमेश के बिना कभी भी चैन नहीं पड़ता था।

धीरे-धीरे समय अपनी रफ्तार से बीत रहा था।पूरे छः माह त िमै अपने देवर उमेश के लण्ड का मजा मिलती रही लेकिन अब थोड़ा थोड़ा पेट में दर्द सा होने लगा था।

मैने अपनी सहेली मधू कि जवान लड़की राधिका से उमेश सम्पर्क करा दी।

राधिका बेहद खूबसूरत थी और इस समय उसका उन सोलह से अधिक नहीं हो पाई थी।

उमेश राधिका को पाकर इतना खश था कि वह बार बार कहता था कि भाभी तुम बहुत अच्छी हो। राधिका भी उमेश का दिल खोलकर साथ देती थी।

क्योंकि उसकी बर के टेस्ट में और भाभी के बर के टेस्ट में जमीन आसमान का अंतर पाया था।

अब उमेश और राधिका अपनी दिल से एक दूसरे पर फिदा हो गई थी।

उमेश का लण्ड बगैर खाये उसे चैन ही नहीं मिलता था।

जब तक वह उमेश की लण्ड खाने के लिए बेकरार रहती। इधर उमेश का भी वही हाल था।

वह भी अपनी पढ़ाई को ताख पर रख हमेशा राधिका के बूर के पीछे रह गया था।

अगर सच पुछिये तो सावन भादव कि कुत्ता और कुत्तिया जैसे दोनो एक दुसरे के पीछे लगे थे।

और मौका मिलते ही वह उसके बूर में अपना लण्ड पेल देता। इस तरह का खेल अब हरेक दिन चलने लगा।

कभी-कभी तो उमेश उसके बूर को दिन में रात दोनो समय में छ: सात बार भी चोद देता था।

इस तरह चोदाते चोदाते राधिका दो महीने में ही कली से फुल बन गई।

अब उसके सुन्दरता औरी भी देखने लायक हो गई थी।

कोई भी नौजवान अगर एक बार राधिका की तरफ देखता तो उसका और उसके चेहरे पर से हटने का नाम ही नहीं लेता था।

और फिर ईश्वर से प्रार्थना करने लगता। राधिका की खुबसूरती से उमेश खुब प्रसन्न था।

यह ईसाही कैसी-कैसी सुरते तुने बनाई है यह सुरत कलेजे में समा लेने के काबिल है।

इस रोमांस के बाद राधिका भी कुछ माह बाद गर्भवती हो गई तो वह घबराने लगी।

तो मैने कहा राधिका घबराओं नहीं तुम्हारी शादी उमेश से करा दूंगी।

फिर राधिका कि मां को पटाकर सचमुच मैने उमेश से उसको शादी करा दी।

कुछ दिन बाद एक स्वस्थ लड़के को जन्म दिया। शादी के बाद भी मेरी देवर से अवैध सम्बन्ध बना रहा।

समाप्त

 
(बरसात की रात)

लेखक – मस्तराम



"सबिता के उन्नत और कठोर चुचियों तथा चिकनी और मांसल टांगे उसके तन बदन पर बिजलियां गिरा रही थी और वह । बेचैन से अपने होठों पर जुबान फेर रहा था।

सबिता के नशीले बदन को देखते हुए अनिस का बदन तप उठा और उसे अपने कपड़े भार स्वरूप लगने लगे।

बिस्तर का दर्द एक ऐसा दर्द है जिसमे आप खो उठेंगे। कहां से आ रहे हो इतना रात गए।

तारात गए अनिल ने जेसे ही अपने घर में प्रवेश किया उसे असली पत्नी | का नाम जगी भरा स्वर सुनाई पड़ा। अनिल ने अपनी बीमार पत्नी पर एक सरसरी निगाह मारी।

फिर अपने पुरा स्वर बोला कहीं से आउं उससे तुम्हें मजलब। मझे इससे मतलब नहीं होगा तो और क्या होगा। सबिता दुख भरे वर में बोली मैं यहां बीमार पड़ी हूं और तुम बाहर गुलछरे उड़ाते

रते हो। ___ यह नहीं सोचते कि इस समय मुझे तुम्हारे प्यार और सहानभूति की कितनी आवश्यकता है। अपना यह रोना धोना बंद •करो। इस समय मैं थका हूं और आराम करना चाहता हूं। अनिल अकताहट भरे स्वर में बोला।

थके तो होंगे ही उस कलमुही से मुंह काला करके जो आ रहे हो।अपनी उपेक्षा से त्रस्त सबिता जल भुन कर बोली। हां हाँ मैं

उसके पास से ही आ रही हूं। तुम क्या बिगाड़ लोगी मेरी अनिल क्रोधित स्वर में बोला।

तुम तो मुझे कोई सुख दे नहीं पाती ओर जब मैं किसी से यह सुख प्राप्त कर लेता हूं तो नाहक हाय तौबा मचवाती हो। क्या मैं भी तुम्हारी तरह बीमार किन रात दौरे दमन रो चिपटा रहूं। हां हां अब तुम मुझसे क्यों लिपटे रहोगे भला।

सबिता रो देने वाले आवाज में बोली।

अब मेरे बेकार जिस्म से क्या हासिल होगा। अब तो मैं तुम्हारी परिवार वालों के लिए बोझ बन गई हूं। जिससे तुम लोग जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहते हो।

अब अपनी बकवास बंद करो और मुझे सोने दों

कहने के बाद अनिल बिछावन पर जा लेटा। थोड़ी देर बाद उसके खर्राटे गुंज रहे थे और सबिता आंखों में आंसू लिए उसे देख रही थी।

एक समय था जब वही अनिल उससे रूप ओर जवानी प्रशंसा करते नहीं थकता था। हमेशा उसके दामन से लिपटा रहना चाहता था। लेकिन आज वह उसकी परछाई से भी दूर भागना चाहता था।

सबिता की शादी लगभग चार बरस पहले बुनियाद गंज थानान्तर्गत गोपालगंज रोड निवासी लक्ष्मी साव के पुत्र अनिल से हुई थी। मिलन की पहली रात को जब अनिल ने उसे देखा था तो वह उसके रूप ओर जवानी को दीवाना हो उठा था।

वह उसे अपना बाहों में भरता हुआ बोला था सबिता तुम तो मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा खूबसूरत हो जी चाहता है तुम्हारे इस खूश्बू कि ता देखता ही रहूं। अभि तो मैं पूरी तरह तुम्हारी हूं। सबिता के होठ हिले अब मेरे सम्पूर्ण बदन पर तुम्हारा ही अधिकार है। ___ और तुम जैसे चाहो इसका उपयोग कर सकते हो। सबिता की बात सुन कर अनिल के सम्पूर्ण बदल में उत्तेजना की लहर दौड़ गई। उसने अपने तरसते होठ सबिता के रसीले होठों पर रख दिए।

उसकी इस हरकत पर सबिता का समस्त बदन रोमांचित हो उठा और वह अनिल से बुरी तरह लिपट गई। वह सबिता को बुरी तरह चुमने लगा।

उसके कठोर हाथों से स्पर्श और तप्त चुम्बनों से सबिता का जवान जिस्म सुलग उठा और मुंह से सिसकारियां निकलने लगी। अचानक अनिल सबिता से अलग हुआ और उसे निर्वस्त्र करने लगा। थोड़ी देर बाद सबिता पूरा निर्वस्त्रावस्था में उसके सामने खड़ी थी और वह आंखें पुाड़े उसके कामोत्तेजक बदन को घुर रहता था।

 
प्रमिला के उननत ओर कठोर चुचियां तथा चिकनी और मांसल टांग उसर्को तन बदन पर बिजलियां गिरा रही थी और वह अबेचैनी से अपने होठों पर जुबान फेर रहा था। सबिता के नशीले बदन को देखते हुए अनिल का बदन तप उठा और उसे अपने कपड़े भार स्वरूप लगने लगे। उसने अपने कपड़ों से निजात पाई। फिर पीछे से आकर सबिता के जवान जिस्म से सट गया तथा अगले ही पल उसके हाथ सबिता की बगल से निकल करके आगे आये ओर उसकी उन्नत कठोर चुचियों पर पहुंच गये।

वह बेताबी से उसकी चुचियों को सहलाने लगपा। उसके बेताब हाथों का स्पर्श अपनी उन्नत चुचियों पर पाकर वह बेहाल हो उठी। वह झटके से पलटी। फिर अनिन के निर्वस्त्र टाईट लंड पर अपनी नाजुक उंगलियों पर फिराने हो गया। उसने सबिता को बिछावन पर ढकेला फिर उसके जिस्म पर झुकता चला। थोड़ी देर बद दोनों की आहों कराहों से कमरा गुंज रहा था और दोनों एक दूसरे में समाये अलौकिक सुख लूट रहे थे।

जब इस सुख का अंत हुआ तो दोनो पुरा तृप्त परंतु ठानली लग रहे थे। इसके बाद तो उनकी हर रात सुहाग रात की तरह रंगीन होती थी ओर हर सुबह खुशियों का संदेश लेकर आती थी। - खुशियों से भरे ये दिन तेजी से बीते थे और देखते ही चार बरस का लम्बा समय निकल गया था। इस बीच सबिता ने एक बच्ची को जन्म दियार था। लेकिन इसके बाद ही उसके दुख के दिन शुरू हो गए थे। - वह बीमार रहने लगी थी। बीमार के कारण वह शारीरिक रूप से कमजोर होती चली गई थी। जिससे अब वह अनिल के एकांत के क्षणों में पूरा तृप्त प्रदान नहीं कर पाती थी। ऐसा होते ही अनिल उसकी ओर से विमुख होता चला गया था और उसने नीभा नामक एक लड़की ले अपना नाजायज सम्बंध जोड़ लिए थे।

नीभा लगभग पच्चीस साल की एक भरपूर जवान ओर खुबसूरत चुवती थी। वह स्वभाव से बेहद शौख और रंगीन मिजाज ओरत थी और उसकी इसी रंगीन मिजाज के कारण उसके पति ने उसे छोड़ रखूगा।

दूसरी ओर अनिल के घर वाले भी सबिता से तंग आ चुके थ। क्योंकि उन्हें उसका बीमारी पर बहुत पेसा खर्च करना पड़ रहा था। अब तो स्थिति यह थी कि वे उससे छुटकारा पाना चाहते थे और बात बात पर प्रतिदिन करते रहते थे ताकि सबिता तंग आकर अपने मायके चली जाय। - परतु उनकी आशाओं के विपरीत सबीता ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। हां समय पर अपने दुख दर्द से अपने मायके वाले को अवश्य परिचित कराती रहती थी। ओर तुम अभी तक जाग रही हो अचानक अनिल के टोकने पर सबिता की विचार श्रृंखला भंग हो गई।

और बिना कुछ बोले बिछावन पर लेट गई। अनिल को यह समझते देर न लगी कि सबिता उससे नाराज है ओर वह यह हरगिज नहीं.चाहती की वह नीभा से को सम्बंध रखे।

इस बात से अनिल को बड़ा बेचैन कर दिया। दूसरे दिन शाम को जब वह सबिता के पास पहुंचा तो उस समय भी वह कुछ बूचैन ओर परेशान थी। उसे यूं परेशान देखकर सबिता ने पूछा क्या बात है डियर कुद पेरशान लग रहे हो। हां परेशान तो हूं ओर इसका कारण है मेरी पत्नी। - खुद तो बीमार रहने के कारण कोई सुख भोग नहीं पाती और चाहती है मैं भी महात्मा बना रहूं। कोई सुचा न भोग हमेशा उसके दुख से दुखी ही उसकी तीमारदारी में लगा रहूं। अनिल झुंझलाहट भरे स्वर में बोला।

तो लग रहो सबिता उससे सटती हुई शरारत पूर्ण स्वर में बोली। और तुम्हे भूल जाउं। अनिल सबिता के भरपूर जवान ओर गुदाज बदल को गहरी नजरों देखता हुआ बोला नहीं सबिता अब यह नहीं हो सकता।

ऐसा कया है मुझमें जो ऐसा नहीं हो सकता। वह सब कुद जो मुझे चाजिए। अनिल उसकी आंखों में झांकता हुआ बोला तुम खुबसूरत हो जवान हो ओर सबसे बड़ी बात यह है कि तुम पूर्ण संतुष्ट प्रदान करती हो। - कहते हुए अनिल ने उसके ब्लाउज में हाथ डालकर उसकी कठोर चुचियों को सहलाने लगा। हाय राम ऐसी मैं। अनिल इठलाती हुई बोली। उसकी इस हरकत मर सबिता के मुंह से एक हल्की सीस्कार निकली ओर वह उसे मीठी झिड़की देती हुई बोली।

बड़े शैतान हो तुम।

तुम्हारी जवानी ही ऐसी हूजोर हैकि जो देखें शैतान बन जाता है। अनिल आवेशित स्वर में बोला फिर वह सबिता को बाहों में भर उसने सम्पूर्ण वस्त्रों को खोलकर उसके शरीर से अलग कर दिया। हाय राम यह क्या। - आज कुछ न बोला डार्लिंग आज जी भर कर प्यार कर लेने दो आज तुम परी लगती हो। हां ऐसी बात है। - डार्लिंग कहते हुए वह भी पूर्ण निर्वस्त्र हो गया। हाय लगता है इधर जरूर कोई इन्जेक्शन लगवा रहे हो।

- सबिता मस्ती में भर बोली आज तो तुम्हारा रोज से कही अधिा टाइट दिख रहा है। तभी अनिल ने उसे लिटा दिया ओर उसकी गांड़ के नीचे तकिया लगा काफी देर तक उसकी चुत को देखता रहा।

फिर ज्योंही उसकी बुर के मुंह पर भिड़ाया अनिल नीचे से उपर तकगिनगना गया। हाय यह क्या कर रहे हो। आज कछ न बोलो मेरी जान।

मैं जेसे कुछ भी कर रहा हूं करने दो मुझे ये तो जानवर करते है। शैतान भी जानवर ही होता है। तुमने तो पहले ही मुझे शैतान कह दी हो। और आज शैतान की करामात को भी देख लो। आज तक सबिता की बुर को किसी मरद ने मुंह से चुमा नहीं था। __ओर न जीभ से चाटा ही था। जीभ का कोर ज्योंही उसकी 'चुत के शिशनिका से टकराई सबिता गनगना सी गई। वह काफी जवान ओर मरदखोर औरत थी फिर भी अनिल उसकी चुत का उपरी परत को चाटना शुरू कर दियासिबिता को इतना आनंद मिलने लगा कि वह मस्त से हो उठे।

और इतनी नशीली हो गई कि उसका चेहरा ही गहाहदार बन गया था। चेहरा गुलाब के फुल की तरह सुर्ख लाल हो गया। और आंखों में एक गहरा नशा छा गया था। ऐसा नशा था जो शराब गांजा भांग आदि सबसे बड़े थे।

 
यौवन के नशा जी चढ़ता है तो उतरने का नाम ही नहीं लेता ऐसा ही नशा छा गया तथा सबिता के तन बदन में। हाय बड़ा मजा आ रहा है। डियर इतनपा मजा सी कभी भी नहीं आया था। वह अपने दोनों जांघों को सिकोरने लगी थी। जिससे अनिल का सर चपचप जाता था। उसकी बुर की उपरी परत चिकनाहट से भर उठी थी। वह उफ उफ ओफ ओफ करने लगी थी। अनिल तो मानों पागल सा हो गया था। उसमें इतना नशा छा गया कि वह उसकी चुत मे पूरी तरह से समा जाना चाहता था।

उसने जीभ को चूत के भीतर अंदर तक घसेड दिया। अब तो सबिता सातवें आसमान की सैर करने लगी थी। उसे इतना आनंद आ रहा था। कि वह अपनी आंखें तक मुंद ली थी। उस जवान लौण्डिया के लिए यह पहला ही अवसर था कि कोई मरद उसकी चुत पर अपनी जीभ को रगड रहा था। वह अपने होशोहवाश में नहीं रह गई थी। हाय डियर बहुत मजा आ रहा है। मजा तो आएगा ही डार्लिंग। कहते हुए अनिल अपनी जीभ को उसकी चुत में घिरनी की तरह नाचने लगा था।

वह जीभ को जितना ही नचाता जा रहा था सबिता आसमान में उडती जा रही थी। उसे बेहद मजा आ रहा था। अब वह जवान लौण्डिया सी सी करने लगी थी उसकी बुर पानी से चिपचिपा उठी थी। __ ओर भीतर एक बुरी तरह से हलचल सी उत्पन्न हो गई थी उससे अब तनिक भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। वह इस कामोत्तेजित हो गई कि अनिल ने जब देखा तो वह भी उठा। ओर अपनी जीभ उसकी चुत से बाहर खींचकर उसकी गाड़ के नीचे से तकिया खीच कर के नीचेलगा दिया ओर उसकी जांघ को अपनी जांघ पर चढ़ा लंड की सुपाड़े को उसकी चुत के छेद पर ज्योंकि भिड़ाया वह जोर से गनगना गई। उसे लगा कोई उसकी चुत के मुंह पर आग का धधकता हुआ धर दिया हो। वह अपने चुतड़ को उपर क ओर जोरों से उछाल तभी अनलि ने उसे बाहों में पर इतनी जोर से चापा कि वह चिगुर गइस और अनिल का लंड बुर को फाड़ते हुए बहुत तेजी के साी नश्तर की भांति जाने लगा था बुर में। - हाय सहन नहीं हो रहा है डियर आज तो कमाल का है तुम्हारा बस थोड़ी देर ओर बर्दाश्त करो मेरी जान। जब पुरा चला जायेगा तो अपने आप इतना मजा मिलेगा तुम्हे कि तुम स्वयं इसे बाहर नहीं निकालना चाहोगी।

इस समय तो बेहद दर्द हो रहा है आह।

मर जाउंगी डीयर तुम्हारा बड़ा तगड़ा है आज जरूर कोई इन्जेक्शन लगवा कर आए है। तभी अनिल ने ऐसा करनारा चोट मारा कि वह बिहुक उठी ओर बहुत जोरो से चिल्ला उठी। अनिल तो इसके पूर्व भी कई बार उसका बुर का बहार ले चूका था कि इतना टाइट लंड कभी भी नहीं हुआ था।

वह तुरंत उसके गदराये बदन पर औंध गया और उसकी दाई चुचि को लेमनचुस की तरह चुभलाने लगा। और उसकी बाई चुचि के नेपल को चुटकी में पकड़ हौले हौले मीजन मसल देगा।

वह जितना ही मीजता मसलता जा रहा था सबिता की पीड़ा हद तक कम हो गई थी और वह अपने चुतड़ को आहिस्ते आहिस्ते उछालने लगा अनिल समझ गया कि अगर इसे तनिक आनंद नहीं होता तो यह कदापी चुतड़ को उपर नहीं उछालती वह उठकर बैठ गया। __ अनिल उसे चुमते हुए बोला पेलू डार्लिंग। हां हां पेलो ना अब तो दर्द बिल्कुल नहीं है। बस उस लौण्डिया का इतना कहना क्या गि अनिल पूरी तरह से मस्ती में भर आया ओर अपने लंड को जड़ तक बाहर खींच कसकर ठाप मारा।

ठाप इतना झगड़ा था कि वह चिगुर सी गई। किंतु अनिल पर उसके चिगुरने का तनिक भी प्रभाव नहीं पड़ा था ओर वह ताबड़तोड़ ठाप पर ठाप मारने लगा था।

सबिता की चुत का स्प्रिंग एकदम ढीला हो गया ओर अनिल का लंड गपागप अंदर बाहर आने जाने लगा था। अब सबिता की बुर से पानी भी फचफचाकर निकलने लगा था। इतना पानी जिसकी कल्पना नहीं किया जा सकता।

 
अनिल तो एकदम पागल सा हो उठा था। वह साबिता को अपने अंकपाश में भर ताबड़तोड़ ठाप पर ठाप देने लगा था। सुजाता अपने होश में नहीं रह गई थी। वह दिल खोलकर अब सुनील का साथ देने लगी थी। उसकी बुर से फचफचा कर पानी आने लगा था। अब वह आसमान में उड़ने लगी थी। उसे इतना आनंद आ रहा था जिसका वर्णन न किया जा सकता।

सुनील उसे मस्ती से चोदे जा रहा था। सुजाता डार्लिंग उं कैसा मजा आ रहा है। __ अब तो बेहद मजा आ रहा है। ऐसा मजा तो कभी भी नहीं आया था। सुजाता की बुर में अब आग की लहर निकलने लगी

थी।

वह एकदम मस्ती में आ चुकी थी। उसे इतना आनंद मिल रहा

जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। वह हवा में उड़ती जा रही थी। तभी सुनील ने इतनी जोर दार ठाप मारा कि सुजाता अपनी जांघों से उसका कमर को कसकर बांध ली। सुनीलन का वीर्य फौव्वारे की तरह छूट पड़ा। सुजाता को अप्रतिम सुख उससे मिला था। तूफान अब काफी धीमा पड़ गया था। सुनील का बंधन काफी हद ढीला हो यगा तब जाकर सुजाता को राहत मिली।

कुछ देर बाद सुनील ने अपना लंड उसकी बुर से बाहर खींच लिया उस विशाल लंड को देख सुजाता बोली हाय राम इतना लंबा और मोटा था। तुम्हारा इसीलिए तो मेरी नस नस चटक गई।

सुजाता का बदन काफी हल्का सा हो गया था। अभी तक जितने भी मर्द उसे मिले थे सभी में सुनील काफी तगड़ा ओर मजबूत था सुनील से सुजाता पूर्ण तृप्त हो उठती थी। - ओर सुनील को भी वह मजा मिलता था लौकिक जो उसकी पत्नी प्रमिला ने दिया था।

इस कारण सुनील सुजाता के उपर दिलोजान से फिदा था। बोलो डार्लिंग अब क्या करूं तुम्हीं कोई उपाय बताओं ना। मेरा तो दिमाग बिल्कुल काम नहीं कर रहा है। प्रमिला मेरे लिए बहुत बड़ी बाधा है। तो समाप्त कर दो इस बाधा को वैसे भी वह बीमार

• लोग सहज ही उसकी मौत पर विश्वास कर लेंगे। सुजाता की बात सुन सुनील पल भी तक खामोश रहा फिर बोला डार्लिंग अगर प्रमिला की जगह तुम होती और मैं ऐसा करता तो कया तुम मुझे क्षमा कर देती। , सुजाता गंभीर सोच में पड़ गई फिर बोली अगर उपदेश झाड़ना है तो राय कयों ले रहे हो। राय लेना तो आवश्यक है तो ऐसा करो वह तुम्हे बांधकर नहीं रखेगी जब तुम्हें फुसरत मिले मेरे पास चला आया करो ओर प्रमिला का दिल खोल कर इलाज करो।

- ऐसे में उसे तुम्हारी ही जरूरत है। तुम्हारे सहयोग की वह -आकांक्षी है। व्याहता पत्नी है मैं भी ऐसा राय नहीं देना चाहती थी। किंतु जब तक उलझे पूरा छुटकारा पाना ही चाहते ही ना यही एक मार्ग है दूसरा नहीं। - सुनील की हिम्मत ही छुट गई। उसका दिल गंवारा नहीं किया

ओर न वह उसकी हत्या के बारे में सोच भी सकता है ओर कोई दूसरा मार्ग नहीं है डार्लिंग । है क्यो नहीं प्रमिला को ले जाकर सदर अस्पताल में भरती कर दो।

वहां नर्स उसकी सेवा करेगी ओर दवा दारू होने से वह शीघ्र ही स्वस्थ हो जाएगी। तुम्हारा तो विचार एवन है।

अब मैं ऐसा हीं करूंगा। प्राईवेट डाक्टरों से बहुत इलाज कराया ओर अधिक रूपया लगा दिया कि बीमारी अच्छी होने के बजाय बढ़ती चली गई। सुनील सुजाता को अहंग में भर उसे आश्वासन देते बोला डार्लिंग तुम्हे तो जीवन भर नहीं भूलेगे।

कभी अपने मन में ऐसा विचार लाना। अब तो मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता। मैं भी नहीं जी सकती सुनील। तुमने तो मुझे ऐसा जाम पिलाया है कि उस जाम का नशा जीवन भर नहीं उतर सकता। - तो अब मैं जाउं डार्लिंग हां जाओ किंतु जो मैंने बताया है वही करना। प्रमिला को सदर अस्पताल में भरती करना न भुलना। देखो प्रयास करेंगे ओर अनिल घर चला आया।आकर उसने अपने परिवार वालों से राय लिया।

 
फिर दूसरे दिन उसने सरकारी अस्पताल के डाक्टर के पास पहुंचा डाक्टर ने कहा- अगर ज्यादा शिरियस तबियत हो तो लाकर भर्ती कर दो उसे बेड मिल जायेगा और वह सीधे प्रमीला के पास पहुंचा। कहां गए थे। डाक्टर के पास उन्होंने राय दिया है कि तुम्हे अस्पताल में भर्ती कर दूं। जल्दी ही तबियत ठीक हो जाएगी। अब तुम्हारे दिमाग में आई है यह बात? मैं तमो पहले से ही कह रही थी कि प्राईवेट डाक्टर मेरे रोग को पकड़ नहीं पाता और अंदाज से दवा दे रहा है।

इसलिए तो रोग घटने के बजाय बढ़ने लगा और मैं खाट पकड़ ली। दुसरे दिन प्रमीली अस्पताल में थी। उसके पहुंचते ही डाक्टरों ने उसे घेरा लिया और तत्काल दवा स्टार्ट हो गई अब आप इतमिनान रखे बहुत शीघ्र ही स्वसी हो जाएगी चेक कने के बाद डाक्टर मलहोत्रा ने बताया।

और पन्द्रह दिन रहने के बाद प्रमीला के चेहरे में काफी परिवर्तन आने लगा। वह स्वस्थ दिखने लगी थी प्रमीला की सारी अस्पताल से ही मिलती थी।

बहुत कम ऐसी दवा थी जो बाजार से लेनी पड़ती थी। वेसे अनिल सम्पन्न परिवार का युवक था। पैसे की विशेष तंगी नहीं थी। उसके पिता एक अच्छे बिजनेस मैन थें। जब उन्हें मालूम हुआ उनकी पतोहु अब पहले से काफी स्वस्थ हो गई है। - वे खुद अस्प्ताल आए और डाक्टर को एक बंद लिफाफा देते बोले यही नहीं इसे घर पर खोलिएगा। पूरे दस हजार रूपये का ड्राफ्ट थी उस लिफाफे में। डाक्टर मल्होत्रा चौंक गए।

और दूसरे दिन उनका मुड इतना फ्रेश था कि कीमती से कीमती दवा अस्पताल से निकलकर प्रमिला के उपर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। उतने ही रूपये ने उनकी मुड को काफी परिवर्तित कर दिया था।

प्रमीला एक माह में इतना स्वस्थ हो गई कि देखते ही बनता था एक अब उसे दवा की जरूरत नहीं था। डाक्टर मल्होत्रा ने कहा अब कभी शायद ही बीमार पड़े। - अनिल ने जब डाक्टर से पूछा कि ऐसी हालत क्यों हो गई तो उन्होंने कहा दवा रिसान कर दी थी अगर प्रमिला घर आ गई थी। परिवार का स्नेह उसे पूर्णवज मिलने लगा था। नीभा जब इस बात का सुनी तो उसके चेहरे पर उदासी छा गई। क्योंकि प्रमिला अब अपने पति पर अधिकार जमाने लगी थी। __ उदास क्यों हो डालिंग? जब तो तुम पहले जेसा प्यार मुझे नहीं दे पावोगे। कयो नहीं पहले से भी अधिक दूंगा ओर प्रमीला को बताउं की नीभा ने तुम्हारी जान बचाई।

अगर उसने अस्पताल ले जाने का राय नहीं दी होती तुम घर पर बच भी नही पाती। उसी के कहने से मैं।

तु म्ह ' ही बराबर उसे कलमुंही कहा करती हो। ।

तुम्हारी अनुपस्थिति में उसी ने मुझे संभाला M। मैं सब समझती हूं किंतु जब तुम मेरे जीते जी दूसरे ओरत के पास जा सकते हो तो मरने के बाद तो उसे घर में लाकर बिठा भी सकते हो देखो डालिंग मैं मर्द हूं। । कोई हिजड़ा नहीं। और मेरा प्रवृति तो अन्य मदों से अलग है। मुझे तो चोदने के लिए औरत चाहिए - औरत। चाहें वह अपनी बीबी हो चाहे बाजार की जूठना अगर यही बात में तुम्हें कहुं तो कैसा लगेगा तुम तो एक क्षण भी मुझे घर में नहीं रहने दोगे।

कर के देखो अगर मैं बोलूी तो कहना। '. मैं तुम्हारे जेसा बेहाया नहीं हूं। प्रमिला बोली। तभी अनिल ने बाहों में भरते बोला डार्लिंग मुझे तुम्हारे उपर पूरा पूरा विश्वास

ओर वह उसकी कठोर चुचियों पर हाथ रख उसे उत्तेजित करने लगा। बीमारी उठने के बाद अनिल का यह पहला वाक्या था। प्रमीला उत्तेजित होती गई।

तभी अनिल ने उसके बदन के समुचे वस्त्रों को खोलकर एक ओर फेंक दिया। प्रमिला का चांदी का सा बदन चमक उठा ओर 'अनिल बेताब आंखों से उसके शरीर के गहराईयों से डूबने उतरने लगा। उस समय नोभा को भी मात कर रही थी।

समाप्त

 
शादी का मजा

मुकेश थका मादा जब अचेत अवस्था में छत के ऊपर सोया था तो किसी की हाथ सरकती हुये अपने लंड पर अहसास हुआ तो देखा की कोई अधेर चालीस वर्षीय ओरत हमारे लंड को - पकड़ धीरे धीरे सहला रही है...।

हमारा लंड कठोर होकर आकाश की ओर देख रहा था। इतने में वह औरत हमारी लंड पर अपना चोदास बुर को रख इतनी जोर से चांपा की गपाक सा पूरा लंड उसकी बुर में घुस गया।

ओर मैं जब चालिस वर्षीय बुढ़ी होजब सोला कर ठाप पर ठाप मारने लगा तो वह चोदवाने के लिये हमारी फुआ के घर चार पांच रोज रहकर पूरने हवेली के पलंग पर सोला जब मुख मैथून कराया तो मैं पागल होकर अपना पूरा जीभ बूर के अंदर घुसा दिया। फिर उसे एकाध घण्टा चोदता रहा फिर...?

शादी व्याह का घर होने के कारण सभी लोग अपने आप में अस्त व्यस्त थे। जब शादी हो गई ओर घर लक्ष्मी यानी बेटी अपने सौहर के साथ बेचारी अपने बाबूल की घर छोड़ अपने पिया के घर चली गई तो घर एकाएक सन्नाटा सा हो गया।

सभी लोग बेटी की बिदाई के बाद सभी के ऑख अपने आप नम सी गई थी।

घर में आगे सभी मेहमान बेचारे लोग सब के सब चके चेहरो पे उदासी सी छा सी गई थी।

मैं भी अपनी फफेरी बहन की बिदाई से रो सा पड़ा था। वैसे भी हम तीन चार दिनों से भाग दौड़ से काफी थक सा गया था। पर जब तक शादी नहीं हुई थी तब तक मुझे एक नई उमंग था। हम तो सभी से ज्यादा घर का काम कर रहे थे। हमारी फुफा जी ने पहले ही कह चुकी थी कि मुकेश तुम्हें ही शादी में ज्यादा भाग दौड़ करना है।

मैं भी फुआ से कही थी कि हां फुफा जी मेरी फुफेरी बहन की शादी है। ओर भाई काम न करे। वेसे भी हमारे फुआ का बेटा राहुल अभी बच्चा था।

 
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