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Guest
शर्मिंदगी के मारे मेरे पसीने छूट रहे थे और चेहरा गुस्से से लाल हो गया था. मैं बड़ी मुश्किल से अपने आप पर नियंत्रण रक्खे हुए था, मगर यह क्या हो रहा था?
मेरी प्यारी अनु को वो ब्लैकमेलर निखिल बड़ी बेरहमी से उसकी इच्छा के विपरीत एक जंगली भेड़ियेके जैसा चोद रहा था, और वो दृश्य देखकर धीरे धीरे मेरा लिंग खड़ा होने लगा. फिर मुझे याद आया की, मेरी पार्टनर स्वैपिंग की इच्छा थी जिसमे अनु मेरी आँखों के सामने किसी गैर पुरुष से चुदती। आज वो इच्छा एक अलग तरह से ही सही मगर पूरी हो रही थी. जैसे जैसे निखिल अनु के शरीर को मसलता गया और अपने लम्बे चौड़े लिंग से उसकी योनि में लगातार आघात करता गया, मेरा लौड़ा सख्त और लम्बा होने लगा.
डॉली मेरे लौड़े को चूसकर मुझे और भी पागल करने लगी. कुछ समय पहले जैसे डॉली की आँखों से आंसू रुक गए थे, वैसे ही अब मेरी अनुपमा की आँखोसे भी आसूं बहना बंद हुआ और मुझे ऐसा लगा की वो निखिल के पागलोंकी तरह संभोग का सुख लेने लगी.
आखिर कार अनु से रहा नहीं गया और उसके मुँह से आवाज़ निकलने लगी, "यस, यस, फक मि, आह, आह, और जोर से , यस फक मि, हार्डर, आह."
अति प्रसन्न होकर निखिल चिल्लाया, "यस, रांड, छिनाल, कैसे मजे लेकर चुद रही है तू, आह ,ले और पेलता हूँ तुझे. देख हरामी, तेरी बीवी कैसे मुझसे चुद रही हैं और मेरे लौड़े से मजे ले रही है. अब मैं इसकी चूत में ही मेरा पानी छोडूंगा. ओह फक, यस्स।"
अगले पंद्रह मिनट तक यही सिलसिला चलता रहा. कभी मिशनरी तो कभी डॉगी पोज में निखिल अनुको चोदता गया और अनु जैसे स्वर्ग की सैर कर रही थी. निखिल तो सुख की परमावधि पर था.
मैं एक बार अपना वीर्य डॉली के मुँह में झड़ चूका था, और डॉली फिर उसे खड़ा करने की कोशिश में थी. मगर निखिल अभी भी पूरी ताकत लगाकर चोदने के काम में लगा हुआ था. अब निखिल को लगा की उसका पानी जल्द ही निकलने वाला हैं.
तभी मेरे अपने मोबाइल फ़ोन एक मैसेज आया. जैसे ही मैंने मैसेज पढ़ा, मैंने ड्रावर में रखा हुआ लोहे का मजबूत डंडा निकाला और निखिल के सर पर मार दिया. उसी समय उसका पानी मेरी अनु डार्लिंग की चूत में छूटा और उस के सर से खून की धारा भी निकली. निखिल बेहोश होकर बेडपर गिर गया, अनु उसके नीचे से हटकर जमीन पर आ खड़ी हुई.
इस अचानक घटना से डरी हुई अनु और डॉली दोनों चिल्लाकर मेरी तरफ देखने लगी. मैंने अपने होठोंपर ऊँगली रखके उन्हें चुप होने के लिए कहा. मैंने एक फ़ोन किया और पांच मिनट में अपने कपडे पहनकर हम तीनो रूम से बाहर निकले. जैसे हम बाहर आये, दरवाजे पर खड़े तीन मुश्टण्डे अंदर गए और उन्होंने निखिल को ख़तम कर दिया. कुछ घंटो में उसकी लाश भी ठिकाने लगा दी.
ये क्या हुआ, कैसे हुआ, क्यों हुआ..अब उन फोटोग्राफ और वीडियो का क्या, जो निखिल के प्राइवेट डिटेक्टिव के पास थे? इतनी बड़ी जोखिम मैंने क्यों उठाई?
पांचवा भाग अनुपमा की जुबानी है.
खंडाला के होटल के सूट से बाहर निकलकर हम तीनो (मैं, पराग और डॉली) बाहर हमारी कार में बैठ गए. ड्राइवर पहले सी ही गाडी में बैठा हुआ था. मैं और डॉली, दोनोंने पराग की तरफ प्रश्नार्थक दृष्टि से देखा. उसने इशारों से कहा बाद में बताऊंगा.
यात्रा समाप्ति के पश्चात हमें डॉली को उसके घर पर विदा किया और अपने घर पहुँचे. दोनोने साथ मिलकर स्नान किया और वाइन का एक एक गिलास लेकर सोफे पर बैठे. अब पराग ने सारा वृत्तांत बताया।
"जिस दिन मुझे वो लिफाफा मिला, उसी दिन मैंने मेरे चचेरे भाई अजय को फ़ोन किया. अजय के संपर्क में कई खबरी, जासूस और गुंडे लोग रहते हैं, क्योंकि वो एक आपराधिक मामलोंके जाने माने वकील का सहायक वकील हैं. मैंने उसे सिर्फ इतना ही बताया की कोई हमें ब्लैकमेल कर रहा हैं. बात गोपनीय रेहनी चाहिए."
अजय ने हमारे पीछे भी एक जासूस लगा दिया.
"जिस दिन हम तीनो मॉल के सामने कॉफी शॉप में गए, उसी समय हमारा जासूस भी दूरी पर था. उसने निखिल का पीछा किया और निखिल के जासूस का पता लगाया. फिर इस बात का भी पता लगाया की सारे ओरिजिनल फोटोज और वीडिओज़ कहाँ रक्खे हुए हैं."
मेरी प्यारी अनु को वो ब्लैकमेलर निखिल बड़ी बेरहमी से उसकी इच्छा के विपरीत एक जंगली भेड़ियेके जैसा चोद रहा था, और वो दृश्य देखकर धीरे धीरे मेरा लिंग खड़ा होने लगा. फिर मुझे याद आया की, मेरी पार्टनर स्वैपिंग की इच्छा थी जिसमे अनु मेरी आँखों के सामने किसी गैर पुरुष से चुदती। आज वो इच्छा एक अलग तरह से ही सही मगर पूरी हो रही थी. जैसे जैसे निखिल अनु के शरीर को मसलता गया और अपने लम्बे चौड़े लिंग से उसकी योनि में लगातार आघात करता गया, मेरा लौड़ा सख्त और लम्बा होने लगा.
डॉली मेरे लौड़े को चूसकर मुझे और भी पागल करने लगी. कुछ समय पहले जैसे डॉली की आँखों से आंसू रुक गए थे, वैसे ही अब मेरी अनुपमा की आँखोसे भी आसूं बहना बंद हुआ और मुझे ऐसा लगा की वो निखिल के पागलोंकी तरह संभोग का सुख लेने लगी.
आखिर कार अनु से रहा नहीं गया और उसके मुँह से आवाज़ निकलने लगी, "यस, यस, फक मि, आह, आह, और जोर से , यस फक मि, हार्डर, आह."
अति प्रसन्न होकर निखिल चिल्लाया, "यस, रांड, छिनाल, कैसे मजे लेकर चुद रही है तू, आह ,ले और पेलता हूँ तुझे. देख हरामी, तेरी बीवी कैसे मुझसे चुद रही हैं और मेरे लौड़े से मजे ले रही है. अब मैं इसकी चूत में ही मेरा पानी छोडूंगा. ओह फक, यस्स।"
अगले पंद्रह मिनट तक यही सिलसिला चलता रहा. कभी मिशनरी तो कभी डॉगी पोज में निखिल अनुको चोदता गया और अनु जैसे स्वर्ग की सैर कर रही थी. निखिल तो सुख की परमावधि पर था.
मैं एक बार अपना वीर्य डॉली के मुँह में झड़ चूका था, और डॉली फिर उसे खड़ा करने की कोशिश में थी. मगर निखिल अभी भी पूरी ताकत लगाकर चोदने के काम में लगा हुआ था. अब निखिल को लगा की उसका पानी जल्द ही निकलने वाला हैं.
तभी मेरे अपने मोबाइल फ़ोन एक मैसेज आया. जैसे ही मैंने मैसेज पढ़ा, मैंने ड्रावर में रखा हुआ लोहे का मजबूत डंडा निकाला और निखिल के सर पर मार दिया. उसी समय उसका पानी मेरी अनु डार्लिंग की चूत में छूटा और उस के सर से खून की धारा भी निकली. निखिल बेहोश होकर बेडपर गिर गया, अनु उसके नीचे से हटकर जमीन पर आ खड़ी हुई.
इस अचानक घटना से डरी हुई अनु और डॉली दोनों चिल्लाकर मेरी तरफ देखने लगी. मैंने अपने होठोंपर ऊँगली रखके उन्हें चुप होने के लिए कहा. मैंने एक फ़ोन किया और पांच मिनट में अपने कपडे पहनकर हम तीनो रूम से बाहर निकले. जैसे हम बाहर आये, दरवाजे पर खड़े तीन मुश्टण्डे अंदर गए और उन्होंने निखिल को ख़तम कर दिया. कुछ घंटो में उसकी लाश भी ठिकाने लगा दी.
ये क्या हुआ, कैसे हुआ, क्यों हुआ..अब उन फोटोग्राफ और वीडियो का क्या, जो निखिल के प्राइवेट डिटेक्टिव के पास थे? इतनी बड़ी जोखिम मैंने क्यों उठाई?
पांचवा भाग अनुपमा की जुबानी है.
खंडाला के होटल के सूट से बाहर निकलकर हम तीनो (मैं, पराग और डॉली) बाहर हमारी कार में बैठ गए. ड्राइवर पहले सी ही गाडी में बैठा हुआ था. मैं और डॉली, दोनोंने पराग की तरफ प्रश्नार्थक दृष्टि से देखा. उसने इशारों से कहा बाद में बताऊंगा.
यात्रा समाप्ति के पश्चात हमें डॉली को उसके घर पर विदा किया और अपने घर पहुँचे. दोनोने साथ मिलकर स्नान किया और वाइन का एक एक गिलास लेकर सोफे पर बैठे. अब पराग ने सारा वृत्तांत बताया।
"जिस दिन मुझे वो लिफाफा मिला, उसी दिन मैंने मेरे चचेरे भाई अजय को फ़ोन किया. अजय के संपर्क में कई खबरी, जासूस और गुंडे लोग रहते हैं, क्योंकि वो एक आपराधिक मामलोंके जाने माने वकील का सहायक वकील हैं. मैंने उसे सिर्फ इतना ही बताया की कोई हमें ब्लैकमेल कर रहा हैं. बात गोपनीय रेहनी चाहिए."
अजय ने हमारे पीछे भी एक जासूस लगा दिया.
"जिस दिन हम तीनो मॉल के सामने कॉफी शॉप में गए, उसी समय हमारा जासूस भी दूरी पर था. उसने निखिल का पीछा किया और निखिल के जासूस का पता लगाया. फिर इस बात का भी पता लगाया की सारे ओरिजिनल फोटोज और वीडिओज़ कहाँ रक्खे हुए हैं."