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Adultery मस्तराम की कहानियाँ

शर्मिंदगी के मारे मेरे पसीने छूट रहे थे और चेहरा गुस्से से लाल हो गया था. मैं बड़ी मुश्किल से अपने आप पर नियंत्रण रक्खे हुए था, मगर यह क्या हो रहा था?

मेरी प्यारी अनु को वो ब्लैकमेलर निखिल बड़ी बेरहमी से उसकी इच्छा के विपरीत एक जंगली भेड़ियेके जैसा चोद रहा था, और वो दृश्य देखकर धीरे धीरे मेरा लिंग खड़ा होने लगा. फिर मुझे याद आया की, मेरी पार्टनर स्वैपिंग की इच्छा थी जिसमे अनु मेरी आँखों के सामने किसी गैर पुरुष से चुदती। आज वो इच्छा एक अलग तरह से ही सही मगर पूरी हो रही थी. जैसे जैसे निखिल अनु के शरीर को मसलता गया और अपने लम्बे चौड़े लिंग से उसकी योनि में लगातार आघात करता गया, मेरा लौड़ा सख्त और लम्बा होने लगा.

डॉली मेरे लौड़े को चूसकर मुझे और भी पागल करने लगी. कुछ समय पहले जैसे डॉली की आँखों से आंसू रुक गए थे, वैसे ही अब मेरी अनुपमा की आँखोसे भी आसूं बहना बंद हुआ और मुझे ऐसा लगा की वो निखिल के पागलोंकी तरह संभोग का सुख लेने लगी.

आखिर कार अनु से रहा नहीं गया और उसके मुँह से आवाज़ निकलने लगी, "यस, यस, फक मि, आह, आह, और जोर से , यस फक मि, हार्डर, आह."

अति प्रसन्न होकर निखिल चिल्लाया, "यस, रांड, छिनाल, कैसे मजे लेकर चुद रही है तू, आह ,ले और पेलता हूँ तुझे. देख हरामी, तेरी बीवी कैसे मुझसे चुद रही हैं और मेरे लौड़े से मजे ले रही है. अब मैं इसकी चूत में ही मेरा पानी छोडूंगा. ओह फक, यस्स।"

अगले पंद्रह मिनट तक यही सिलसिला चलता रहा. कभी मिशनरी तो कभी डॉगी पोज में निखिल अनुको चोदता गया और अनु जैसे स्वर्ग की सैर कर रही थी. निखिल तो सुख की परमावधि पर था.

मैं एक बार अपना वीर्य डॉली के मुँह में झड़ चूका था, और डॉली फिर उसे खड़ा करने की कोशिश में थी. मगर निखिल अभी भी पूरी ताकत लगाकर चोदने के काम में लगा हुआ था. अब निखिल को लगा की उसका पानी जल्द ही निकलने वाला हैं.

तभी मेरे अपने मोबाइल फ़ोन एक मैसेज आया. जैसे ही मैंने मैसेज पढ़ा, मैंने ड्रावर में रखा हुआ लोहे का मजबूत डंडा निकाला और निखिल के सर पर मार दिया. उसी समय उसका पानी मेरी अनु डार्लिंग की चूत में छूटा और उस के सर से खून की धारा भी निकली. निखिल बेहोश होकर बेडपर गिर गया, अनु उसके नीचे से हटकर जमीन पर आ खड़ी हुई.

इस अचानक घटना से डरी हुई अनु और डॉली दोनों चिल्लाकर मेरी तरफ देखने लगी. मैंने अपने होठोंपर ऊँगली रखके उन्हें चुप होने के लिए कहा. मैंने एक फ़ोन किया और पांच मिनट में अपने कपडे पहनकर हम तीनो रूम से बाहर निकले. जैसे हम बाहर आये, दरवाजे पर खड़े तीन मुश्टण्डे अंदर गए और उन्होंने निखिल को ख़तम कर दिया. कुछ घंटो में उसकी लाश भी ठिकाने लगा दी.

ये क्या हुआ, कैसे हुआ, क्यों हुआ..अब उन फोटोग्राफ और वीडियो का क्या, जो निखिल के प्राइवेट डिटेक्टिव के पास थे? इतनी बड़ी जोखिम मैंने क्यों उठाई?

पांचवा भाग अनुपमा की जुबानी है.

खंडाला के होटल के सूट से बाहर निकलकर हम तीनो (मैं, पराग और डॉली) बाहर हमारी कार में बैठ गए. ड्राइवर पहले सी ही गाडी में बैठा हुआ था. मैं और डॉली, दोनोंने पराग की तरफ प्रश्नार्थक दृष्टि से देखा. उसने इशारों से कहा बाद में बताऊंगा.

यात्रा समाप्ति के पश्चात हमें डॉली को उसके घर पर विदा किया और अपने घर पहुँचे. दोनोने साथ मिलकर स्नान किया और वाइन का एक एक गिलास लेकर सोफे पर बैठे. अब पराग ने सारा वृत्तांत बताया।

"जिस दिन मुझे वो लिफाफा मिला, उसी दिन मैंने मेरे चचेरे भाई अजय को फ़ोन किया. अजय के संपर्क में कई खबरी, जासूस और गुंडे लोग रहते हैं, क्योंकि वो एक आपराधिक मामलोंके जाने माने वकील का सहायक वकील हैं. मैंने उसे सिर्फ इतना ही बताया की कोई हमें ब्लैकमेल कर रहा हैं. बात गोपनीय रेहनी चाहिए."

अजय ने हमारे पीछे भी एक जासूस लगा दिया.

"जिस दिन हम तीनो मॉल के सामने कॉफी शॉप में गए, उसी समय हमारा जासूस भी दूरी पर था. उसने निखिल का पीछा किया और निखिल के जासूस का पता लगाया. फिर इस बात का भी पता लगाया की सारे ओरिजिनल फोटोज और वीडिओज़ कहाँ रक्खे हुए हैं."
 
"जब हम खंडाला के लिए निकले, तब अजय, अपना जासूस और चार गुंडे निखिल के जासूस के घर के बाहर थे. सारे मेरे इशारे की प्रतीक्षा में थे. जैसे ही निखिल ने डॉली को चोदना शुरू किया, मैंने अपने फ़ोन से अपने अजय को एक मिस्ड कॉल दिया. अब निखिल की भी सूरत में उसके अपने जासूस को कांटेक्ट नहीं करने वाला था, क्योंकि वो चुदाइ में मग्न था. उसी समय गुंडे निखिल के जासूस के घर में घुसे. उससे पहले लॉकर की चाबी ली फिर उसे मार कर बेहोश किया, और फिर अजय ने मुझे मैसेज किया."

"तभी मैंने उस लोहे के डंडे से निखिल पर प्रहार किया. बाकी का बचा हुआ काम उन तीन गुंडोंने किया जो हमारे बाद उस सूट में दाखिल हुए."

"अब सारे सबूत से भरा वो लॉकर और उसकी चाबी अजय के पास हैं. मैं कल सुबह जाकर सारे सबूत मिटा दूंगा."

मैंने कहा, "ओह माय गॉड, तुमने इतना सारी विस्तार से योजना बनायी और मुझे बताया तक नहीं."

"कोई बात नहीं अनु डार्लिंग, जिसका अंत भला, वो सब भला," कहकर पराग ने मुझे गले लगाया.

"तुम्हारा पहला और सच्चा प्रेमी और पति होने नई नाते यह मेरा उत्तरदायित्व था की मैं हम दोनोंकी रक्षा के लिए जो जरूरी है वो सब करून. इस सारे मामले में मुझे एक बात का बड़ा दुःख है और एक बात की अजीब ख़ुशी हैं," पराग ने कहा.

"दुःख तो समझ में आया मगर ख़ुशी?" मैं अचम्भे में पड़ गयी.

"देखो डार्लिंग, दुःख तो इस बात का हैं की उस ब्लैकमेलेर निखिल और उसके जासूस को हमको रास्ते से हटाना पड़ा. और अजीब ख़ुशी की बात ये हैं तुम किसी और आदमी के साथ संभोग करो ये मेरी इच्छा पूरी हो गयी. मैं मानता हूँ की जो तुम्हारे साथ हुआ वो बलात्कार ही था, मगर मैंने देखा की थोड़े समय के बाद तुम्हे उस जंगली संभोग से अत्याधिक सुख मिलने लग गया था. सच कहो," पराग ने बड़े प्यार से मुझे बाहोंमे लेकर कहा.

उसकी आँखों में आंखें मिलाकर मैंने पराग को चुम्बन दिया और कहा, "तुम कितने प्यारे हो, हाँ, यह सच हैं की मैं उस आक्रामक और क्रूर संभोग का सचमुच आनंद लिया. तुम्हारी फैंटसी भी पूरी हो गयी."

प्रेम भरे आलिंगन और चुम्बन करते हुए हम लोग बैडरूम की तरफ बढे और आज पराग ने बड़े रोमांटिक तरीके से मुझे संभोग सुख दिया.

अगले दिन, सुबह उठकर पराग अजय के साथ उन सबूतोंको नष्ट करके घर वापिस लौटा. मैंने ही उसे फ़ोन करके कहा, "तुम अजय भैया को भी साथ में लेकर आओ. हम तीनो किसी अच्छे से रेस्ट्रॉन्ट में जाकर भोजन करेंगे."

अजय भैया ने जो हमारी इतने बड़े संकट में मदद की थी, उसके लिए मेरा उनसे विशेष रूप से आभार प्रकट करना आवश्यक था. अजय सांवले रंग के ही हैं मगर उनके फीचर्स अच्छे हैं. बीच बीच में उनसे मुलाक़ात होती रहती थी, हर बार वो मुझसे बड़े प्यार और अपनेपन से पेश आते.

जब पराग ने कहा की उसे मेरे और निखिल के सम्भोग को देख करा मज़ा आया, फिर मैंने सोचा क्यों न अजय भैया को भी खुश कर दूँ. मेरी जैसी सुन्दर, सेक्सी और प्यारी लड़की के साथ संग करने को तो वो एक पल में तैयार हो जाएंगे. पोर्न फिल्मोंमें हमने ऐसे सैंकड़ो दृश्य देखे थे, जहां दो लड़के एक साथ एक लडकीसे अलग अलग प्रकार से संभोग करते हैं. अब गुदा (ऐनल) सेक्स में मुझे कोई दिलचस्पी नहीं थी, मगर एक लौडेको चूसना और दुसरे से चुदवाने के सिर्फ विचार से ही मैं उत्तेजित हुई और मेरी योनि गीली होने लगी.

जब मेरा पति स्वयं मुझे रोकता नहीं, बल्कि प्रोत्साहित करता है, तो फिर मैं भी एम्-ऍफ़-एम् थ्रीसम का मजा लूंगी. वैसे भी मैंने गोवा के होटल में उस रात पराग को जूलिया के साथ कंडोम लगाकर चुदाइ करते देखा था. इसलिए मेरा भी मन किया की मैं भी अलग लड़के के साथ सेक्स का मजा लू.

वैसे मुझे पराग और जूलिया के सेक्स से कोई शिकायत नहीं थी, मगर उसने अगले दिन भी मुझे नहीं बताया, इस बात का थोड़ा बुरा तो जरूर लगा. शायद इसीलिए मैं अजय भैया के साथ सेक्स करने के लिए उत्साहित हुई थी, वो भी न की सिर्फ पराग के आँखों के सामने, उसके साथ.
 
अजय को आकर्षित करने के लिए मैंने ख़ास लाल रंग की साडी, पीले रंग का स्लीवलेस ब्लाउज, काले रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी. मेरी बाकी के साड़ी ब्लाउज की तरह इस ब्लाउज का भी गला काफी खुला हुआ था. पल्लू सरकते ही मेरे गठीले वक्षोंका और दो वक्षोंके बीच की दरार (क्लीवेज) की आसानी से दर्शन होते थे. रेस्ट्रॉन्ट में अजय मेरे सामने बैठा था और उसे मैं पल्लू गिरा गिराकर अपने वक्षोंके प्रदर्शन से लुभा रही थी.

भोजन समाप्ति के पश्चात हम तीनो पुनः हमारे घर पर आये. लाल वाइन पीते हुए हंसी मजाक शुरू हुआ. फिर मैंने अजय के पास जाकर उसे कहा, "अजय भैया, आप ने हमें एक बड़े संकट से निकाला हैं. मैं आप की अत्यंत आभारी हूँ." इतना कहकर मैंने उसे गले से लगा लिया. तभी पीछे से पराग ने मुझे आलिंगन दिया और मेरी अधनंगी पीठ पर चुम्बन करने लगा. मुझे लगा की पराग ने मुझे संकेत दे दिया की मैं अजय के साथ अपनी इच्छा से जो चाहे करू.

अजय के गालोंपर हलके चुम्बन करके मैंने उसके कानोंमें हलके से कहा, "थैंक यू डिअर अजय भैया. आप कितने अच्छे हो और कितने हैंडसम भी."

"ओह, भाभी, आप कितनी प्यारी हो. माय स्वीट डार्लिंग भाभी," कहकर उसने मेरे माथेपर और गालोंपर किस करने लगा. अभी भी पीछे से पराग मेरी गर्दन, पीठ और कमर को सेहला रहा था. पराग का खड़ा हुआ लंड मेरी गांड के बीच की दरार में चुभ रहा था. साफ़ था की मेरा अजय के साथ आलिंगन चुम्बन पराग को बिलकुल नहीं खटक रहा था, बल्कि वो जैसे की मुझे प्रोत्साहित कर रहा था.

"अजय, मैं आज आपसे बहुत खुश हूँ, यू आर सच अ स्वीटहार्ट," कहके मैंने उसके होठों पर अपने होठ रख दिए.

"ओह भाभी, यू आर सो स्वीट एंड सो सेक्सी," अजय ने मुझे चूमते हुए कहा.

"अजय, प्लीज मुझे भाभी मत कहो, अनु कहो."

"नहीं भाभी, मेरी युवा अवस्था से एक फैंटसी हैं की मैं तुम्हारी जैसी किसी सेक्सी हॉट भाभी के साथ रोमांस और सेक्स करु. आज मुझे वो मौका मिला है, मुझे भाभी कहने से मत रोको."

अब अजय मेरे होठोंको चूसकर मेरी जीभ से अपनी जीभ लड़ाने लगा. उसके दोनों हाथ अनायास मेरे स्तनोंपर आ गए और उन्हें प्यार से मसलने लगे.

"ओह अजय, तुम कितने गंदे हो," मैंने झूटमूठ की नाराजगी दिखाते हुए अपने मम्मे उसकी छाती पर दबा दिए.

अजय मेरी गर्दन और कानोंको चूमते हुए "ओह मेरी सेक्सी भाभी" की रट लगाए हुए था.

पराग ने मेरे ब्लाउज के पीछे के बटन खोल दिए और दोनों भाइयोंने मिलकर मेरी ब्लाउज उतार दी. अजय मेरे क्लीवेज को चूमने और चाटने लगा. पराग ने पीछे से हाथ मेरे कमर पर लाये और मेरी साडी निकालना शुरू किया. धीरे धीरे एक एक परत हटती गयी और मेरी साडी मेरे पैरों में थी.

अजय मेरे अधनंगे स्तनोंको मसलते हुए बोला, "हाय भाभी, क्या मस्त बूब्ज हैं तेरे. एकदम घट्ट और बड़े बड़े."

एक कंधे पर से ब्रा की पट्टी हट गयी और अजय उसपर गीले चुम्बनों की बौछार करने लगा.

"अजय, तुझे मेरे बूब्ज देखने की, इनसे खेलने की कब से इच्छा थी?"

" जबसे तुम्हे तुम्हारी शादी में पहली बार देखा था. आह, कितने गोरे और स्मूथ स्किन हैं भाभी तुम्हारे बूब्ज," अजय के मुँह से गर्म साँसे निकल रही थी.

पराग ने मेरे लहंगे का नाडा खोला और वो भी नीचे गिर गया. मैं अब काली ब्रा और पैंटी में अजय की बाहों में थी. हाथ नीचे लेकर मैंने उसके लौड़े को पैंट के ऊपर से ही टटोला और कहा, "साले, अच्छा, तो जब से ही मुझे चोदने के सपने देख रहा था, हाँ. देख तेरा लंड भी कितना उठ गया हैं."

"हाँ भाभी, तुम हो ही इतनी माल," अजय ने मेरी ब्रा का हुक खोलकर कहा.

फिर दोनों भाइयोंकी सहायता से मेरी ब्रा भी अलग हुई और अजय थोड़ा झुककर मेरे स्तनाग्रोंको चूसने लगा.

"और, क्या मस्त गांड हैं तुम्हारी भाभी," मेरे नितम्बोँको सहलाते हुए अजय बोला।

"चल अजय, मास्टर बैडरूम में चलते है, वही पर दोनों भाई मिलकर अनु को चोदेंगे, वो भी एकदम आरामदायक पोज में," पराग ने कहा और हम तीनो बैडरूम में चले गए.

बैडरूम में पहुँचते ही अजय और पराग ने अपने अपने कपडे उतार दिए, अब दोनों भी सिर्फ फ्रेंची में थे. मेरे शरीर पर भी सिर्फ पैंटी ही बची हुई थी. अजय ने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरा दाया स्तन चूसने लगा. उसकी देखा देखि पराग भी मेरा बाया स्तन चूसने लग गया. जीवन में पहली बार दो मर्दोंसे संग के विचार से ही मेरी योनि गीली हुई जा रही थी, उसी में दोनों निप्पल एक साथ चूसे जाने से मैं और भी कामोत्तेजित हुई.

"आहां, कितना मजा आ रहा हैं. ऐसे ही चूसो मेरे मम्मोंको।"

"चल अजय, अब तू मेरी चूत चाट और मैं इधर पराग के लौड़े को चूसती हूँ." अब मैं भी दो मर्दोंके साथ पहले थ्रीसम की पूरी मस्ती में आ गयी थी.

एक पालतू कुत्ते की तरह अजय नीचे झुका, मेरी पैंटी निकली और दोनों जांघें खोलकर मेरी गीली योनि पर अपने जीभ, होंठ और दातोंसे सुख देने लगा.

"ले मेरी अनु डार्लिंग, वैसे भी तुझे मेरा लिंग चूसना पसंद हैं मेरी रानी. आज तुम अजय का लौड़ा चूसोगी भी और उससे चुदवाओगी भी."

पांच मिनट के बाद मैं बोली, "चलो, अब दोनों अदलाबदली करो. मुझे पता है की अजय उसकी सेक्सी भाभी से लौड़ा चुसवाने के लिए तड़प रहा हैं. और पराग, तुमको भी तो मेरी गीली चूत को और दाने को चाटने में बड़ा मज़ा आता हैं, न. आ जाओ दोनों."

अजय अपनी फ्रेंची कबकी निकाल चूका था, उसका मोटा और कड़क लिंग जैसे ही मेरे मुँह के सामने आया, मैंने उसे लपक लिया और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

"आह, मेरी सेक्सी अनु भाभी, क्या मस्त लौडा पीती हो तुम, आह, तुम सिर्फ दिखने में ही माल नहीं हो, बिस्तर में भी एकदम हॉट हो. चल, अब मैं तेरे मुँह को मस्त चोदता हूँ," इतना कहकर अजय शब्दशः मेरे मुँह में अपना लंड जोर जोर से घुसाने लग गया.
 
वो सारा नज़ारा देखकर पराग से और संयम नहीं हुआ और उसने मुझे अपने कड़क मोटे लौड़े से चोदना आरम्भ किया.

एक लौड़ा मुँह में और दूसरा चूत में, मैं तो सातवे क्या, सत्तरवें आसमान में उड़ने लगी.

"आह, भाभी कितनी लक्की हो तुम, दो दो लौड़े साथ में ले रही हो. मैंने तो सिर्फ तुमको चोदने के सपने देखे थे, ये कभी नहीं सोचा था की तुम थ्रीसम भी करती हो."

"अजय, कल तुम्हें एक और चूत दिलाऊंगा, मेरे ऑफिस की रिसेप्शनिस्ट और हमारी सेक्स पार्टनर डॉली. आज दिल भर के चोद ले अनु को," पराग हाँफते हुए बोला.

"चल, अब मैं भाभी को चोदूंगा और तुम अपनी अनु डार्लिंग से अपना लौड़ा चुसवाओ पराग भैया," कहकर अजय ने अपना सख्त हथियार मेरे मुँह से निकाला.

परागने उठकर मेरे स्तनोंको मसला और अपना लंड मेरे मुँह में देकर धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा.

अजय ने मिशनरी पोज में ही मुझे चोदना चाहा, मगर मुझे एक और विचार आया.

"पराग, तुम पीठ के बल लेट जाओ, मैं झुककर तुम्हारा लंड चूसती हूँ. अजय भैया, तुम मुझे पीछे से डॉगी पोज में चोदो।"

दोनों मेरे बताये हुए पोज में आ गए और मैं ज़िन्दगी का पहला दो मर्दोंके साथ थ्रीसम का आनंद लेने लगी. अजय मेरी योनि में अपने लौड़े से ठोकर मारने लगा और साथ में मेरे वक्षोंको मसलता गया. पराग अपनी आँखे बंद कर लेटा रहा और मैं उसका लंड चूसकर उसे सुख देती रही. हम तीनों भी अत्याधिक उत्तेजना के बहाव में डूब रहे थे. मेरी योनि से लगातार कामरस बह रहा था, और अजय भी लगभग झड़ने वाला था. पराग के लंडसे वीर्य की बूंदे मेरे मुखमें आ रही थी, जिन्हे मैं प्रेम से निगल रही थी.

"भाभी डार्लिंग, अब मेरा फव्वारा छूटने वाला हैं, तेरे अंदर ही छोड़ दूँ या मुँह में लोगी?" अजय ने पूछा.

"अंदर ही छोड़ दे तेरा गरम पानी मेरी जान," मैं पराग का लौड़ा चूसते और वीर्य की बूंदो को निगलते हुए बोली. उसी समय पराग के वीर्य की पिचकारी मेरे गले में उतर गयी. उसका नमकीन और गाढ़ा वीर्य मैं पीते गयी. और दो तीन पिचकारियोंमें और बहुत सारा वीर्य मेरे गले के नीचे उतर गया.

चार पांच झटके मारने के बाद अजय भी मेरी योनि के अंदर स्खलित हो गया. मैं पराग के बाजू में लेटी और अजय मेरी दूसरी ओर. दस मिनट विश्राम करने के बाद हम तीनो बाथरूम में गए. वहां दोनों भाइयोंने मुझे नहलाया, साबुन के झाग से मेरे स्तन, कूल्हे, पीठ, योनि और जांघोंको अच्छे से साफ़ कर दिया. शावर के नीचे मैंने एक एक करके दोनोंके लंड चूसे, उन्होंने भी मेरे निप्पल्स चूसकर और मेरी चूत को अपनी उंगलिया, होठ, जीभ और दातोंसे बहुत प्यार दिया.

तौलिये से अंग पोंछकर हम फिरसे कामक्रीड़ा में लग गए. पराग योनि चाटता गया और अजय ने मेरे बड़े बड़े वक्षोंके साथ टिट फकिंग किया. फिर पराग को बिस्तर पर लिटाकर मैं उसके लौंड़ेपर सवार हो गयी. उछलते हुए अजय के लंड को चूसती गयी. इस बार अजय जल्दी स्खलित हुआ और अब उसका वीर्य मैंने पी लिया.

पांच मिनट बाद पराग भी वीर्यपतन के करीब आ गया. मैंने नीचे उतारकर उसे चूसने लगी. मेरी खुद की योनिरस से लबालब लिंग चाटने लगी, तभी उसका वीर्य उमड़ा। आज कई दिनोंके बाद मैं खुद की योनि का रस और पराग के वीर्य का मिला-जुला स्वाद ले रही थी.

रात में पराग गहरी नींद में सो गए, मगर अजय को कहाँ नींद आने वाली थी. उसने मेरे स्तनोंको चूसते हुए जगाया और धीरे से कानों में फुसफुसाया, "चलो भाभी, दुसरे कमरे में जाकर एन्जॉय करेंगे."

उत्तेजित हो कर मैंने भी हाँ कर दी. अजय ने मुझे अपनी मजबूत बाहोंमें उठाया और दूसरे बैडरूम में ले गया. मुझे पलंग पर पटक कर वो मेरे बदन पर लेट गया.

मेरे होठ चूसते चूसते उसकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी. अजय की दोनों हथेलिया मेरे स्तनोंको मसलने में व्यस्त हुई और उसकी बालोंसे भरी जाँघे मेरी मुलायम मांसल जाँघोंसे रगड़ने लगी. उसका लंड भी तन कर मेरी योनि पर घिसने लगा. मानो वो पूरे शरीर से मेरे साथ संभोग सुख लेने की कोशिश कर रहा था.

"आह, अनु, कितनी हॉट और सेक्सी हो तुम," अब अजय ने मुझे भाभी की जगह अनु बुलाया.

"चूस मेरे बॉल्स अजय डार्लिंग, तुझे पसंद आये न ये बड़े बड़े बूब्ज?"

"हाँ अनु," मेरे वक्षोंको मसलते और निप्पल्स चूसते हुए अजय पागल हो रहा था.

"आह, हाँ, ऐसे ही चूसता जा और चबाता जा मेरे निप्पल्स को. आह, यस्स, ओह फक, चूस और चूस मेरे राजा," मैं कामाग्नि में जल रही थी.

मेरे स्तनोंको चूसते हुए उसकी दो उंगलिया मेरी योनि में प्रवेश कर गयी. मैंने भी अपनी जांघें फैलाकर उन्हें अंदर ले लिया. अब अजय की स्तन चूसने और चूत को उंगलियोंसे चोदने की गति तीव्र हो गयी. मैं आँखें मूंदकर एन्जॉय कर रही थी और मेरे मुँह से आह आह की आवाज़े निकल रही थी.

मुझसे और अधिक सुख सहन नहीं हुआ और मेरी चिपचिप योनि से एक जबरदस्त फव्वारा निकला. अजय की दोनों उंगलिया ही नहीं, उसका हाथ भी उस कामरस से भर गया. अब अजय से भी रहा न गया और उसका लम्बा चौड़ा तगड़ा लिंग मेरी योनि में प्रवेश कर गया.

बीस पच्चीस मिनट मुझे मिशनरी पोज में चोदने के बाद मैं घुटनों और हथेलियोंके बल पर घोड़ी बन गयी. अजय दनादन मुझे पीछे से चोदता गया.

"अनु, अब मेरा भी छूटने वाला हैं," हाँफते हुए वो बोला।

"मेरे मुँहे में दे, मैं तेरा पानी निगल जाऊंगी मेरे राजा," मैंने कहा.

झट से उसने अपना हथियार निकाला और मैं घुटनोंपर बैठ गयी. उसके लौड़े के मुँह में लेकर चूसने और आँखों में आँखे डालकर मुस्कुराने लगी.
 
एक मिनट में ही उसका खीर सा गाढ़ा और स्वाद में नमकीन वीर्य मेरे मुँह में उतरने लगा. मैं निगलती गयी और वो पिचकारियां मारता गया. आखिर चूसते और निगलते हुए मेरा मुँह थक गया. उसके लौड़े के टोपे के ऊपर से वीर्य की आखरी बूंदे चाटकर मैं निढाल हुई.

सुबह देर तक हम दोनों बेहोशी की नींद सोते रहे. जैसे ही पराग जग गए, उसे पता चला की अजय और अनु दुसरे बैडरूम में जाकर चुदाई करे. मगर उसपर पराग को कोई आपत्ति नहीं थी.

तीनो साथ में नहाये और नाश्ता भी साथ में किया. कुछ समय के बाद हम तीनो डॉली से मिलने गए, तो उसने हमें एक बड़े से कॉफ़ी शॉप पर मिलने के लिए कहा.

छठा भाग पराग की जुबानी है.

मैं, अनु और अजय, हम तीनो डॉली से मिलने कॉफ़ी शॉप में पहुंचे. वहां पहुँचते ही डॉली ने हमें कहा, "ये है मेरा बॉयफ्रेंड लकी," और एक सुन्दर ३० वर्षीय युवक से हमें मिलाया.

"हेलो, पराग, अनुपमा. डॉली ने आप दोनोंके बारे में मुझे काफी कुछ बताया हैं. और आप कौन?" लकी ने अजय से पूंछा.

"मैं अजय, पराग का चचेरा भाई."

"तुम्हारा बॉयफ्रेंड," मैं तो एकदम हक्का-बक्का रह गया.

"हाँ, पराग, पिछले कुछ दिनोंसे हम एक दुसरे के अच्छे दोस्त बन चुके है और कल ही लकी ने मुझसे प्रेम प्रकट किया है. मैंने भी उसे अपना प्रेमी स्वीकार किया हैं."

अब सच बात तो ये हैं की मैं अजय को डॉली से मिलवाने लाया था ताकि अजय डॉली को चोद सके. मगर यहांपर तो कहानी ने कुछ और ही मोड़ ले लिया था.

फिर थोड़े समय तक यहाँ वहाँ की बाते करने के बाद, मैं, अनु और अजय वहांसे निकल गए.

"क्या पराग भैया, ये तो के एल पी डी (खड़े लौडे पर धोखा) हो गया यार. इतनी मस्त माल लड़की को चोदने के इरादे से मैं आया था मगर उसे तो कोई और ही उड़ा ले गया," निराशाजनक स्वर में अजय ने कहा.

"चलो अजय भैया, मैं आप को एक फाइव स्टार होटल में ले चलती हूँ. वहाँ हम दोनों खूब मजे करेंगे," अनु ने मुस्कुराते हुए अजय से कहा.

मेरी सुन्दर और सेक्सी पत्नी एक महीने पहले किसी और आदमी से संभोग करने के लिए मेरे मनाने के बावजूद मान नहीं रही थी. आज वही पत्नी मेरे चचेरे भाई के साथ फाइव स्टार होटल में अपनी मर्जी से जाकर पूरी रात चुदने वाली थी.

अब वो इतनी निर्भीक (बिनधास्त) हो गयी थी की इस बात के लिए उसने मुझसे अनुमति तक नहीं मांगी. मैं अनु की ओर हैरान होकर देखता रह गया.

मेरे जले पर नमक छिड़कते हुए अजय ने "थैंक यू पराग भैया," कहकर अनु को लेकर चला गया.

मेरा एकदम मूड ऑफ हो गया और मैं नजदीक के एक बार में चला गया. रम के दो-तीन पेग लगाने के बाद शायद मुझे नशा चढ़ गया.

मैं कार मैं बैठकर फिर से डॉली के घर पर गया. उसने दरवाजा खोला और मुझे देखकर वो अचम्भे में पड़ गयी.

"पराग, तुम तो शराब के नशे में धुत्त लग रहे हो, क्या हुआ?"

"साली अनु, उस अजय के साथ चली गयी और मैं इधर खाली बैठा हूँ. मेरे पास अनु भी नहीं और तुम भी नहीं, मेरी डॉली डार्लिंग."

मौके की नजाकत को देखके डॉली ने मेरे ड्राइवर को अपने घर पर भेज दिया और मुझे कार में बिठाकर एक पार्क के पीछे अंधरे में लेकर आयी. फिर हम दोनों पिछली सीट पर चले गये और मैं उसके बदन को सहलाने और फिर लगभग नोचने लग गया. उसे समझ में आया की मैं सेक्स का भूखा हूँ.

डॉली की स्कर्ट उठाकर उसकी पैंटी नीचे खींचकर मैं उसे कठिन पोज में पीछे की सीट पर चोदने लग गया. नशे के कारण मैं अनाप शनाप कुछ न कुछ बकता जा रहा था और डॉली मुझे पूरा सहयोग दे रही थी.

जब मैं अपना पानी छोड़कर निढाल हुआ, तब डॉली ने अनु को फ़ोन मिलाया.

"अनु, तुम और अजय कौनसे होटल में हो? यहाँ पराग की हालत खराब हुई जा रही हैं."

जैसे ही होटल का नाम और पता मिला, डॉली मुझे लेकर वहाँ चली गयी. होटल पहुँचने तक मैं पीछे की सीट पर लेटा हुआ था.

जैसे ही मैं और डॉली होटल के कमरे में पहुंचे, मेरी हालत देखकर अनु को बुरा लगा. वो मुझसे लिपट गयी और मुझे प्यार से चूमने लगी.

डॉली ने अजय को गले लगाकर सारा किस्सा बताया, उसे भी बुरा लगा.

अब डॉली भी बिनधास्त हो कर बोली, "मुझे पता हैं, यह सब तमाशा मेरे कारण हो रहा हैं. मैंने आप लोगोंको लकी से मिलाया, इसलिए आप सब मुझसे नाराज हैं. मगर मैं भी क्या करती, मुझे भी अपनी ज़िन्दगी जीनी है. मुझे भी एक जीवन साथी चाहिए."

"मैंने लकी को पिछले एक साल में मैंने जो भी सेक्स का आनंद लिया हैं, सब कुछ खुले रूप से बता दिया. उसकी भी भूतकाल में तीन गर्लफ्रेंड रह चुकी हैं जिनके साथ वो सब कुछ, यहां तक की ऐनल सेक्स भी कर चुका है. इसलिए उसे मुझे अपनाने में कोई समस्या नहीं हुई."
 
अजय ने कहा, "सॉरी डॉली, पराग ने तुम्हारी इतनी प्रशंसा करने के बाद मैं तुमसे प्यार करने के लिए बेताब हो गया था. फिर तुम्हारे बॉयफ्रेंड से मिलने के बाद मेरे अरमानोंपर पानी फिर गया ऐसा लगा. इसलिए अनु मुझे यहाँ लेकर आयी. अब मुझे क्या पता था की पराग भैया इस बात से इतना नाराज़ हो जाएंगे?"

पिछले कई महीनोंसे मैंने और अनु ने डॉली को इतना अपनापन, प्यार और संभोग सुख दिया था, की वो मुझे और उदास न देख सकी. डॉली बारी बारी मेरे और अजय के गले लगकर हमारे होठोंको चूमने और चूसने लगी.

मैं अनु के पास जाकर उसके स्तनोंको मसलते हुए उसके कपडे उतारने लगा.

"ओहो, डॉली आखिर मेरी किस्मत चमक ही गयी. साली कितनी माल हो तुम, क्या मस्त चूचियाँ हैं तेरी, आहे," अजय डॉली के स्तनोंको दबाते हुए और डॉली के वस्त्र हटाते हुए बोला।

अब बिस्तर पर अजय और डॉली एक तरफ और मैं और मेरी अनु डार्लिंग दूसरी तरफ सेक्स की आग में जलने लगे. जैसे ही अजय ने अपना कड़क हथियार डॉली की गीली योनि में घुसेड़ दिया, मैंने अनु की ओर देखा. मेरा इशारा पाकर, अनु डॉली के नजदीक पहुंची और उसके एक स्तन को पूरा का पूरा मुँह में लेकर चूसने लगी.

"वा, क्या नज़ारा हैं मेरी जान," कहते हुए मैंने डॉली के दुसरे स्तन को चूसना आरंभ किया. वो सब देख कर अजय और भी उत्तेजित होकर डॉली की चूत में लगातार जोर जोर से ठोकरे मारने लगा. इतने सारे सुख से डॉली मानो पागल हो रही थी. दो आदमी और एक सेक्सी लड़की का एक साथ प्यार एक साथ आज तक उसने पाया नहीं था.

अब डॉली को भी शरारत सूझी और अपना हाथ बढ़ाकर अपना मोबाइल फ़ोन अपने मुँह के पास लाया.

"लकी डार्लिंग, तुमको एक बड़ा सरप्राइज देना हैं, तुम अभी के अभी यहाँ पहुँच जाओ. कमरे का दरवाजा खुला ही रखूंगी, तुम अंदर आ जाना," कहकर उसने होटल का नाम और पता उसे बता दिया.

कमरे का दरवाजा खुला ही रक्खा और हम तीनो फिर से सुख लेने में लग गए. अजय ने डॉली की दोनों टाँगे अपने कन्धोंपर रख दी थी. अब उसका सख्त लौड़ा गहराई तक जाके डॉली की योनि में ठोकरे मारने लगा, जिससे डॉली पागल होने लगी.

अब मैं डॉली के एक एक स्तन को चूसता रहा मेरी प्यारी अनु अब डॉली के मुँह पर बैठ गयी. सेक्स में मारे बेहाल डॉली अनु की चूत में जीभ डालकर चाटने लगी और बहता हुआ रस पीने लगी. अनु कामसुख के चरम सीमा पर पहुंची और खुद के स्तनोंको मसलने लगी. डॉली ने एक हाथ बढ़ाया और मेरे कड़क लौड़े को सहलाने लगी.

इतने में कमरे का दरवाज़ा खुला और लकी अंदर दाखिल हुआ. बिस्तर पर चार लोग जिस तरह से लगे हुए थे, वो समझ गया की डॉली ने कौनसे सरप्राइज के लिए उसे बुलाया हैं. अपनी तीन गर्लफ्रेंड के साथ रंग रलिया मनाया हुआ वो भी संभोग के मामले में मंझा हुआ खिलाडी था. डॉली के मुँह पर बैठी नंगी अनु को देख कर उसका लिंग तुरंत खड़ा होकर सलामी देने लगा. अपने सारे कपडे उतारकर वो अनु के पास खड़ा हुआ.

"आहा, डॉली मेरी जान, कितना मस्त है री तेरा बॉयफ्रेंड," कहते हुए अनु ने लकी का लंड को चूमना और उसकी गोटियोंको चाटना आरम्भ किया.

अब लकी ने अनु को डॉली के मुँह पर से उठाकर अपनी नयी नवेली गर्लफ्रेंड डॉली के बाजू में लिटाया. अनु के पूरे नंगे बदन पर लकी चढ़ गया और उसके रसीले होटोंको चूसते हुए अनु के कठोर वक्षोंको सहलाने लगा.

अनु को भी एक और नए मर्द के स्पर्श से बड़ा मजा आया. दोनों एक दुसरे की जीभ चूसने लगे. उन्मादित होकर अनु पलट कर लकी के ऊपर आ गयी. लकी की बालोंसे भरी छाती को चूमते हुए अब अनु उसके निप्पल्स को चूसने और चबाने लगी. लकी के दोनों हाथ अनु की कमर और गांड को टटलोने लगे. लकी का लिंग पूरा नब्बे डिग्री में खड़ा हो गया था. निप्पल्स से नीचे आते अनु ने लकी के मोटे तगड़े लिंग के ऊपर की त्वचा हटाई और उसके टोपे को चाटने लगी.

"ओह माय गॉड, कितनी हॉट और सेक्सी हो तुम अनु. जितनी डॉली अच्छे से लंड चूसती हैं, तुम भी वैसे ही लौड़े चूसने में माहिर हो. आहां, ऐसे ही ऊपर से चाटो फिर पूरा मुँह में लेकर चूसती जाओ."

जैसे ही अनु उसके लौड़े को मुँह में लेकर पूरा चूसने लगी, लकी के पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ गयी. उसने अनु की जांघोंको नीचे की तरफ खींचा। अब अनु की गीली योनि लकी के मुँह पर आयी, जिसे वो पूरी ताकत लगाकर चाटने लग गया. अनु और लकी दोनों सिक्सटी नाइन के पोज में ओरल सेक्स का भरपूर आनंद लेने लगे.
 
इधर मौका पाकर मैंने अपना लम्बा चौड़ा कड़क लंड डॉली के मुँह में दिया. डॉली को मेरा लौड़ा चूसना बड़ा अच्छा लगता था, इसिलए उसका पसंदीदा लंड मिलते ही वो जोर जोर से चूसने लगी. मैं भी कमर के झटके मार मार कर उसके मुँह को चोदने लगा. अजय अभी भी डॉली को मिशनरी पोज में चोदे जा रहा था. अब मैं अनु के बाजू में लेट गया, डॉगी पोज में आकर डॉली मेरे लिंगको और अंडकोष को चूसती गयी. पीछे से अजय उसकी गीली योनि में अपना कड़क लंड पेलते गया और डॉली के लटकते हुए स्तनोंको मसलने लगा.

अब लकी और अनु सिक्सटी नाइन के पोज से निकलकर अनु डॉगी पोज में आ गयी थी. लकी उसकी योनि में अपना लिंग घुसाकर उसके साथ जबरदस्त संभोग करने लग गया. अनु भी अपने नितम्बोँसे उसे पूरा सहयोग दे रही थी. लकी बेताब होकर अनु के बड़े बड़े गठीले वक्ष मसलता गया और अनु को चोदता गया.

पूरे कमरे में सेक्स की आवाज़े गूँज रही थी.

अब अजय से अपना वीर्य और रोका न गया. उसने डॉली की योनि में एक आखरी झटका मारकर अपनी वीर्य की पिचकारी छोड़ दी. अभी भी उसका लिंग सख्त था और झटकों के साथ पिचकारियां मारता रहा. अजय का पूरा लंड झड़ने के बाद एकदम नरम हुआ और अजय ने डॉली की चूत में से उसे बाहर निकाला. कुछ दो-चार मिनट के बाद मैं भी अपने लौड़े से डॉली के मुँह में वीर्य की धार मारने लगा. तीन चार बार झड़ कर मैंने भी अपना लौड़ा डॉली के मुँह से बाहर निकाला. टोपे पर लगी आखरी बूंदे भी डॉली चाट गयी.

अनु जैसी सुपर हॉट और सेक्सी लड़की के साथ पहली बार संभोग करने वाला लकी ने आज अपने आप को सचमुच लकी समझ लिया. लकी ने न की सिर्फ तीन गर्लफ्रेंड मगर अन्य कई लड़कियोंके साथ संभोग का आनंद लिया था, मगर अनु के साथ उसे कुछ अत्याधिक सुख मिल रहा था.

शायद उसे अब अपने वीर्यपतन को रोकना असंभव होने लगा, इसलिए लकी ने हाँफते हुए अनु से पूंछा, "पानी चूत में छोड़ू या मुँह में लोगी?"

अनु कुछ बोले बिना ही उसके सामने अपना मुँह खोलकर बैठ गयी. अनु ने लकी के सख्त लौड़े को बस दो या तीन बार सहलाया और वो उसके मुँह में झड़ने लगा. उसका वीर्य अनु के चेहरे पर और मुँह में गिरने लगा. अनु ने खींचकर लकी के लौड़े को फिर मुँह में भर लिया और आगे आने वाली दो तीन पिचकारियां अंदर ही निगल ली.

पूरी रात में हम पाँचोँने सामूहिक संभोग का भरपूर आनंद लिया. सुबह सात बजे के करीब अजय को अपने ऑफिस के काम से कहीं जाना था, इसलिए उसे जाना पड़ा. बाकी हम चारोने थोड़ी देर विश्रांति लेकर फिर से स्वैपिंग सेक्स का मजा लूटा.

दो हफ्तोँके बाद लकी और डॉली की शादी हुई. उनके हनीमून पर मैं और अनु भी साथ गए. वहां पर क्या क्या हुआ उसके बारे में अगले भाग में.

सातवा भाग अनुपमा की जुबानी है.

लकी और डॉली ने शादी के बाद हनीमून के लिए मनाली जाने के बारे में सोचा था.

"पराग, अनु, आप दोनों भी चलो हमारे साथ. हम चारो मिलकर एक बिलकुल अलग प्रकार से हनीमून मनाएंगे," लकी ने मुस्कुराते हुए कहा.

"अलग, मतलब कैसे अलग?" मैंने पूंछा।

"अरे अनु डार्लिंग, हनीमून पर सिर्फ हम चारों ही नहीं जाएंगे, शमा और शकीला भी हमारे साथ आएगी," डॉली ने खिलखिलाते हुए कहा.

"अरे यार, अब ये शमा और शकीला कौन हैं, और हनीमून पर ये दोनों आकर क्या करेंगी?" पराग भी अचम्भे में पड गया.

"ये सब तुम हमपर छोड़ दो. सिर्फ तुम दोनों तुम्हारी शादी का जोड़ा साथ में लेकर चलो," डॉली ने कहा.

मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन छूटने से आधा घंटा पहले हम चारो प्लेटफार्म पर मिले. वहाँ पर ३०-३२ साल की दो सांवली सुन्दर लड़किया भी खड़ी थी.

"ये है शमा और शकीला. दोनों बहने हैं और हमारे साथ चलेगी," लकी ने उनका परिचय हमसे कराया और हमारा उनसे.

"ये दोनों विडिओ शूटिंग करने में निपुण हैं और ये दोनों हमारे हनीमून की शूटिंग करेगी," डॉली ने कहा.

अब हमें पता चला की शादी का जोड़ा क्यों चाहिए था.

हमने ए सी थ्री टायर में बुकिंग की थी, इसलिए पूरी छ सीटे हमारी ही थी. डॉली और मैं झीनी सी नाइटी पहनकर आ गयी. पराग और लकी सिर्फ बनियान और लूंगी में थे. अब शमा और शकीला भी पतली स्लीवलेस नाइटी पहनकर आ गयी. सब लोग एक दुसरे को शुभ रात्रि कह कर सोने चले गए.

दो अनजान लड़किया साथ में होने के कारण हम चारोंमे से (मैं, पराग, लकी और डॉली) कोई सेक्सी हरकत नहीं की और सब चुप चाप सो गए.

मनाली पहुँचने के बाद तीन कमरे लिए गए, एक मैं और पराग, दुसरे में लकी और डॉली और तीसरे में शमा और शकीला।

जब हम चारो मिले तब डॉली ने बताया, "मैं और पराग एक कमरे में, तथा लकी और अनुपमा दुसरे कमरे में सुहागरात का रोल प्ले करेंगे. शमा और शकीला एक एक कमरे में रहेगी और पूरी सुहाग रात को शूट करेगी."

"हां पराग, हमने आज तक भरपूर सेक्स किया हैं मगर ये सुहाग रात वाला धीमा सेक्स आज तक नहीं किया. मैं और डॉली दोनों शर्माने का अभिनय करेंगे और पूरा कार्यक्रम धीरे धीरे चलेगा. पराग और लकी हम दोनों लडकियोंको प्यार से लुभाएंगे तभी कपडे हटेंगे और चुदाई होगी," अब मैंने भी डॉली की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा.

"एक बार मैं और पराग, फिर अगली रात मैं और लकी, ऐसे बदल बदल कर सुहाग रात का रोल प्ले की शूटिंग करेंगे," डॉली ने बताया.

शाम का भोजन और थोड़ी सी वाइन के दौर के बाद मैं और डॉली एक कमरे में चली गयी. शमा और शकीला भी हमारे साथ थी. हमें शादी के जोड़े में सजने सवरने में भी वो सहायता करने वाली थी.

"पराग, लकी, मुझे और अनु को सजधज कर तुम्हारे लिए तैयार होने में कम से कम दो घंटे लग जाएंगे, इसीलिए आप लोग घूम कर आ जाओ," डॉली ने कह दिया.

डॉली की आज्ञा पाकर पराग और लकी खुली हवा में टहलने के लिए चले गए.

मैं स्लीवलेस टॉप और शार्ट पहनी हुई थी और डॉली ने खुले गले का फ्रॉक पहना था. मेरे बदन पर गुलाबी ब्रा और पैंटी मेरी सुंदरता को बढ़ा रही थी. डॉली के गोर गोर अंगपर भूरे रंग की ब्रा और पैंटी थी. शमा और शकीला ने हमारे कपडे उतारे और फिर ब्रा और पैंटी उतरने में भी सहायता की.

एक बड़े से प्लास्टिक शीट पर मुझे और डॉली को लिटाया गया. शमा और शकीला ने भी अपनी अपनी सलवार कमीज उतारकर सिर्फ ब्रा और पैंटी में आ गयी. दोनों बहने सांवली थी मगर दोनोंके भी वक्ष काफी बड़े थे और जाँघे, नितम्ब मांसल थी.

"चलो मैडम जी, अब आप की सेवा शुरू," कहते हुए दोनोने तेल से मालिश शुरू कर दी.

मेरी पीठ और गांड को शमा मसल रही थी और शकीला ने डॉली को पीठ के बल लिटाकर उसके कंधे, मम्मों और पेट की मालिश शुरू कर दी.

"हाय हाय, दोनों भी कितनी गठीली जवानी से भरपूर हैं," शमा ने आँख मारकर शकीला से कहा.

"हाँ री, दोनोंके मर्द कितने लक्की है, जिन्हे ऐसी हॉट लड़किया मिली हैं, वो भी अदल बदल कर चोदने में," अब शकीला ने कहा.

शमा अब मेरी गांड और जांघोंपर मसलते हुए उसकी उँगलियाँ मेरी योनि को छूने लगी. मेरे मुँह से सिसकारियां निकलती रही और शमा और भी बेशर्मी से मेरी गांड की दरार और चूत में टेल्स लबालब उंगलियोंसे मालिश करती रही. शमा ने मेरी जाँघे खोल दी और अब खुलकर मेरी गीली योनि में तीन उंगलियोंसे मुझे सुख देने लगी.
 
उधर शकीला डॉली के ऊपर झुककर उसके उन्नत वक्षोंको मसलती रही. डॉली भी अपनी आँखें मूंदकर पूरा आनंद ले रही थी. शकीला ने हाथ नीचे लाकर डॉली की चूत को ऊपर से सहलाना शुरू किया. अब डॉली से रहा न गया और उसने "अंदर डालो न," कहकर शकीला की तीन चार उंगलिया अपनी योनि में घुसा दी.

शमा ने चुपके से कहा, "अनु मैडम, अब आप भी पलट जाओ."

मैं पलट कर पीठके बल लेट गयी और डॉली का हाथ पकड़कर दोनों सिसकारीया लेने लगी.

अब शमा और शकीला हमारे स्तन और योनि को और भी मजा देने लगी. जैसे ही हमारे निप्पल्स मसलना शुरू हुआ, मुझसे रहा न गया और मैंने शमा को अपने ऊपर खींच लिया. उसके पतले होठोंको चूसते हुए शमा की ब्रा का हुक मैंने खोल दिया. उसकी ब्रा जैसे ही शरीर से अलग हो गयी वो मुझसे लिपट कर अपने बड़े बड़े वक्षोंसे मेरे वक्षोंको रगड़ने लगी. मैंने हाथ नीचे कर उसकी तेल से भरी पैंटी भी उतार दी. अब हम दोनों पूर्ण रूप से नग्नावस्था में आ गयी. शमा अब मुझे बॉडी टू बॉडी मालिश करने लगी.

हमारी देखा देखि, डॉली ने भी शकीला को चूमना आरम्भ किया. वहां भी कुछ ही मिनटों में शकीला की ब्रा और पैंटी अलग हो गयी. शकीला डॉली को बॉडी टू बॉडी मालिश का सुख देने लगी. आज तक मेरी और डॉली की खूब चुदाई हुई थी मगर ऐसा बॉडी टू बॉडी मालिश पहली बार हो रहा था. मालिश करने वाली लड़किया भी उस कला में निपुण थी.

दस मिनट तक बॉडी टू बॉडी मालिश के बाद सिक्सटी नाइन का दौर चला. चारो लड़किया कितनी बार झड़ी इसका किसीको भी पता नहीं चल रहा था. फिर शकीला मुझपर चढ़ गयी और शमा ने डॉली को सुख देना शुरू किया. एक घंटा गुजर गया था मगर चारो प्रेम "रस" डूबकर तृप्त हो गयी थी.

लगता था की शमा और शकीला औरतोंको मालिश करने और लेस्बियन सेक्स देने में माहिर थी. वीडियो शूटिंग के साथ साथ ये भी करती थी और इस सारी सेवा के अच्छे खासे पैसे भी लेती थी.

शमा अब डॉली का हाथ थामकर उसे नहलाने के लिए बाथरूम में लेकर चली गयी. मैं और शकीला अभी भी एक दुसरे के स्तनोंको मसलती और चूसती रही.

जैसे ही मैंने उसका बाया निप्पल दातोंसे चबाया, वो चिहुँक उठी, "उई माँ, मर गयी, जरा धीरे चबाओ अनु मैडम. आह आह."

मेरी चार उंगलिया शकीला की तंग योनि में अंदर बाहर होने लगी और वो फिर एक बार झड़ गयी. अपनी उंगलिया मैंने खुद भी चाटी और शकीला से भी चटवायी.

कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटी रही.

अंदर बाथरूम में शमा ने डॉली को अच्छे से नहलाया. डॉली ने भी शमा की साबुन के झाग से मरम्मत की और शावर के नीचे दोनोने फिर एक दुसरे को प्लेज़र दिया.

दोनों भी नंगी बाथरूम से बाहर आयी. अब नहाने की मेरी और शकीला की बारी थी. शकीला ने मुझे बड़े प्यारसे नहलाया और हम दोनों भी नंगी कमरे में आ गयी.

शमा और शकीला ने मुझे और डॉली के बदन को टॉवल से सुखाया, फिर लोशन से एक-दो मिनट हलकी मालिश की. फिर हम दोनोंको लाल रंग की नयी ब्रा और पैंटी पहनाई गयी. लाल रंग के ब्लाउज पेटीकोट और शादी की साड़ी भी अच्छे से पहनाई. फिर शानदार मेकअप किया.

"डॉली डार्लिंग, हम दोनों सच मच नयी नवेली दुल्हन लग रही है री," मैंने मुस्कुराते हुए डॉली से कहा.

"हां मेरी जान, अब दोनों लडकोंको खूब सतायेंगे और चुदाई के लिए तरसाएँगे, तभी ज्यादा मज़ा आएगा," डॉली ने कहा.

पराग और लकी अब तक चार बार फोन करके पूँछ चुके थे की अब हम लोग कमरोंमे आ जाये, मगर हम अभी भी उन्हें तरसा रही थी.

आखिर शमा और शकीला अपने कमरे में चली गयी. मैं लकी के कमरे में और डॉली पराग के कमरे मैं आ गयी.

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अनुपमा - लकी की सुहाग रात और शमा की शूटिंग:

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मैं लकी के कमरे में आ गयी और बिस्तर पर बैठ गयी. एक कोने में खड़ी शमा अपना वीडियो कैमरा लेकर शूटिंग के लिए तैयार थी. एक थर्मस में गरम दूध मंगवाया था, जिसे शमा ने गिलास में भर दिया. शमा ने लकी को फ़ोन करके रूम में आने के लिए कह दिया.

"अनुपमा रानी, जरा अपना घूंघट तो खोलो," लकी ने अंदर आकर मुझसे कहा.

मैंने शर्माते हुए उसे दूध का गिलास दिया. "लीजिये जी, आप के लिए गरम दूध."

दूध पीकर लकी ने मेरा घूंघट उठाया, "तुम कितनी सुन्दर और प्यारी लग रही हो अनु."

शमा अपना वीडियो कैमरा लेकर ये सारा सीन शूटिंग कर रही थी.

लकी ने मेरे माथे पर चुम्बन लिया, और मैं शर्मा गयी.

"वाह वा, तुम जितनी सुन्दर हो, उतनी ही शर्मीली भी," लकी ने बड़े प्यार से कहा.

"अनु, ये देखो मैं तुम्हारे लिए क्या लाया हूँ?"

लकी ने एक सुंदर सा सोने का नेकलेस मुझे दिखाया. ये मेरी मुंहदिखाई की भेंट थी, जिसे मैंने सहर्ष स्वीकार किया.

लकी ने मुझे अपनी बाहोंमें भर लिया, मैं शरमाते हुए उसे लिपट गयी. शमा अलग अलग एंगल से ये सारा दृश्य लाइव शूटिंग कर रही थी.

मेरे माथे और गालोंको चूमते हुए लकी बोला, "अनु डार्लिंग मैं तुम्हारे होठोंका रसपान करना चाहता हूँ."

मैं शर्माकर उसे और जोरसे लिपट गयी और मेरा दिल जोरोंसे धड़कने लगा. दुल्हन का वेश और सुहागरात के रोल प्ले का मुझपर कुछ ज्यादा ही प्रभाव हुआ.

लकी ने मेरे होठोंपर अपने होठ रख दिए, मैं भी उसके चुम्बन का जवाब देने लगी. जैसे ही हमारी जीभ एक दुसरे को प्यार करने लगी, शमा एकदम पास आकर क्लोजअप लेने लगी.

"अनु, मुझे तुम्हारे स्तन देखना हैं. इस ब्लाउज में कितने कैसे हुए और भरे हुए लग रहे हैं," लकी भी अब रोल प्ले को एन्जॉय कर रहा था.

"छी, मुझे लज्जा आती हैं."

लकी मेरी गर्दन और कांधोंपर चुंबन वर्षा करने लगा और मेरी साड़ी कंधे पर से हटाई. अब मैं लाल रंग के तंग ब्लाउज में उसके सामने थी.

जैसे ही लकी ने मेरे क्लीवेज को चूमा, शमा फिर पास आकर क्लोजअप लेने लगी. मुझे लगा की शमा भी उत्तेजित हो रही थी और उसकी साँसे गर्म होने लगी थी.

लकी मेरे वक्षोंपर ब्लाउज के ऊपर से ही सहलाने लगा और मैं उह आह करती रही.

"रानी, मुझे तुम्हारी गोरी गोरी और मुलायम जाँघे देखनी हैं, और उन्हें चूमना हैं," लकी कामुक आवाज़ में बोलने लगा.

मैंने शर्माकर दोनों हाथोंसे अपना चेहरा ढक लिया, तभी लकी ने मेरी साडी और पेटीकोट ऊपर उठायी. मेरे पैर उजागर हुए जिन्हे लकी सहलाता गया. अब साडी घुटनेके ऊपर चली गयी और मैं बिस्तर पर लेट गयी. लकी ने साडी और ऊपर सरकाकर मेरी मांसल मुलायम जाँघे खुली कर दी.

"आहा, कितनी सुन्दर और सेक्सी हो तुम अनु डार्लिंग," कहते हुए लकी मेरी जांघोंको चूमने और चाटने लगा.

मैंने देखा की शमा शूटिंग करते करते एक हाथ से अपनी चूचियाँ दबा रही थी, जाहिर है की वो भी उत्तेजित हो रही थी.

"इतनी सुन्दर, मखमल सी मुलायम और पुष्ट जाँघे मैंने आज तक नहीं देखि. मैं सच मच कितना लकी हूँ मेरी जान," कहकर लकी ने अब मेरी साडी और पेटीकोट पूरा ऊपर उठाया और मेरी जाँघे सहलाना, चूमना और चाटना जारी रखा.

साडी की परत खोलकर और पेटीकोट का नाडा निकालकर दोनों मेरे शरीर से अलग हो गए. अब मैं लाल पैंटी और लाल ब्लाउज (जिसके अंदर लाल ब्रा थी) में लेट कर आँखें मूंदकर आनंद ले रही थी.

मेरी जांघोंको चाटते चाटते लकी ने अपना कुरता और बनियान निकाल दिया था. ये सारा नजारा देखकर शमा से रहा न गया. वो भी पूरी तरह गर्म हो चुकी थी. उसने कुछ सेकंड के लिए शूटिंग रोका और अपना टॉप उतार दिया. उसकी काली ब्रा में कसी हुई चूचिया मस्त लग रही थी.

"डार्लिंग, अब तो मुझे तुम्हारे मम्मे देखने दो और उन्हें प्यार करने दो," लकी ने कहा. अब उसके पैजामे से उसका तना हुआ लंड दिखने लगा था.

मुझपर झुककर लकी मेरे वक्षोंको ब्लाउज के ऊपर से ही हलके दबाने लगा. साथ में मेरे क्लीवेज को चूमता और चाटता भी गया.

"हमम , कितने मस्त हैं तेरे बूब्ज मेरी जान."

मैंने उसे अपने बदन पर खींचा और हम दोनों होठ और जीभ से प्यार करने लगे. उसका कड़क लौड़ा मेरी पैंटी पर दब रहा था और धीरे धीरे रगड़ रहा था.

शमा ने फिर शूटिंग रोकी और अपनी सलवार उतर कर वो सिर्फ काली ब्रा और काली पैंटी में शूटिंग करने लगी.

मेरे हाथ लकी की पीठ पर सहलाने और नोचने लगे, और उसने मेरी गर्दन को चाटते हुए मेरे ब्लाउज के बटन खोलना शुरू किया.

"आहा , क्या भरपूर जवानी हैं तेरी अनु रानी. गोरी गोरी छातियाँ और वो भी कितनी सख्त."

लकी थोड़ा ऊपर उठा ताकि शमा मेरे ब्रा में कैसे वक्षोंको शूट कर सके.

आनन फानन में मेरा ब्लाउज निकल गया. अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी.

"तुम भी तो अपना पैजामा निकालो न मेरे राजा," कहके मैं लकी की आंखोंमे प्यार से देखने लगी.

झट से उसने अपना पैजामा और फ्रेंची निकाल दी और पूरा नंगा होकर मेरे बदन पर लेट गया.

उसकी हेयरी जाँघे मेरी मखमल सी मुलायम जाँघोंसे रगड़ रही थी और वो मेरे पूरे बदन पर चूमने लगा.

लकी का कड़क लंबा लौड़ा देखकर शमा के चूत में भी खुजली होने लगी. उसने अपनी ब्रा और पैंटी निकाल दी और पूर्ण नग्नावस्था में शूटिंग करने लगी.

अब मेरी चूत आग उबल रही थी और योनि रस निकलकर पैंटी भीगने लगी थी.

ब्रा का एक पट्टा हटाकर मेरा दाया वक्ष खुल गया.

"कितने मस्त हैं तुम्हारे दूध. अब मैं इन्हे चूसूंगा और खा जाऊँगा।"

पीछे हाथ डालकर लकी ने मेरी ब्रा को खोल दिया और मेरे उन्नत उरोज ब्रा के बंधन से मुक्त हुए.

जैसे ही वो बारी बारी दोनों स्तनोंको चूसता, दबाता, काटता और चाटता गया, मैं भी पूरी तरह से कामोत्तेजित हो गयी.

"आह, ऐसे ही चूस मेरे राजा। चबा इन्हे आहाहा , चूस मेरे निप्पल," मैं सुखके सागर में गोते ले रही थी.

अब शमा का एक हाथ कैमरे पर और दूसरा खुद की चूत को सहलाने में व्यस्त था.

मेरे बूब्ज चूसते हुए बीच में सांस लेकर लकी बोला, "अब तो अपनी मुनिया के दर्शन कराओ अनु डार्लिंग."

"रोका किसने है," मैंने स्मित हास्य से कहा.

मेरी पैंटी खींच कर निकली और मैंने भी अपनी गांड उठाकर सहयोग दिया.

"कितनी सुन्दर, गुलाबी चूत हैं तेरी डार्लिंग. आज तो इसे चाटूँगा भी और अपने लौड़े से चोद भी डालूंगा."

लकी मेरी जाँघे फैलाकर मेरी योनि को चूमने और चाटने लगा. दोनों पंखुडियोंको हटाकर जीभ अंदर घुसाकर मानो जीभ से ही मेरी योनि को चोदने लगा.

"आहा, लकी डार्लिंग, ऐसे ही मेरे दाने को चाटो न," मैं तड़पने लगी. मगर उसने मेरी क्लाइटोरिस को छोड़कर बाकी सारी जगह चाटना जारी रखा.

मैं पागल होती गयी और मेरी चूत पानी से तर बतर हो गयी. लकी ने सारा पानी पीना और चाटना जारी रखा मगर अभी तक वो मेरे क्लाइटोरिस को छुआ तक नहीं था.

मैंने देखा की नजदीक से शूटिंग करने के लिए शमा झुककर अपने सख्त वक्ष लकी की पीठ पर दबा रही थी.

"प्लीज लकी डार्लिंग, मेरा दाना चूसो न," कहकर मैं जल बिन मछली की तरह फड़फड़ाने लगी.

अब लकी के सब्र का बाँध टूटा और उसने मेरे दाने को मुँह में भर लिया.

"लकी, तुम्हारा लंड मेरे मुँह में दो, मैं उसे चूसकर तुम्हे खुश कर दूँगी," मैंने नशीली आवाज़ में कहा.

तुरंत वो पलटकर सिक्सटी नाइन की पोज में आया और मैंने उसका लम्बा चौड़ा कड़क औजार अपने मुख में भर कर लॉलीपॉप जैसे चूसने लगी.

दस मिनट तक सिक्सटी नाइन चला और हम दोनों (नहीं तीनो, शमा भी तो थी) पसीने में भीग गए. इतना चूसने के बाद भी लकी अपना कम तो क्या मगर प्री कम भी निकलने नहीं दे रहा था.

"चल मेरी रानी, अब घोड़ी बन और ले मेरा लौड़ा अपनी फुद्दी में," इतना कहकर लकी मेरे शरीर से उठ गया.

मैं अपने हाथ और घुटनोंपर आयी और लकी मेरी गीली चूत के द्वार पर अपने लंड का टोपा रगड़ने लगा.

"अंदर डाल न जल्दी, प्लीज, फक मि," मैं बेसुध हुए जा रही थी.

मेरी योनि को छेड़ने के साथ साथ लकी का एक हाथ शमा के वक्षोंसे खेल रहा था. फिर धीरे धीरे उसने अपना कड़क लौड़ा मेरी गीली और गर्म योनि में घुसाया.

"आह, मार मेरी चूत मार, चोद मुझे, आह, और जोर से, फक, फक, फक मि, हार्डर हार्डर, और जोर से."

अपने दोनों हाथोंसे मेरी गांड पर चांटे मारकर लकी मुझे चोदता गया. करीब बीस मिनट बाद मैं उस पोज में थक गयी.

मुझे नीचे लिटाकर वो मिशनरी पोज में चुदाई करने लगा.

"अनु डार्लिंग, अब मेरा निकलने वाला हैं. पानी कहाँ निकालू?"

"अंदर ही निकाल मेरे राजा, मेरी प्यास बुझा दे."

दो चार आखरी झटके मार कर वो मेरे अंदर झड़ गया. अब तक मैं तीन बार झड़ चुकी थी.

संभोग पूरा होने के बाद जैसे ही लकी मेरी बाजू में लेटा, शमा ने शूटिंग बंद की, कैमरा नीचे रखा और लकी के लंड को चूसने लगी.

नयी लड़की को चोदने के लिए पुरुष कितना उतावला रहता हैं न, उसी के चलते तीन मिनट में ही लकी का लंड फिर से कड़क हुआ.

अब उसने शमा की चुदाई की. मैं शमा के मुँह पर चूत लगाकर बैठी और उसने मेरा दो बार पानी निकाल दिया.
 
लकी आधे घंटे तक अलग अलग पोज में शमा को चोदता गया और आखिर उसके मुँह में पानी निकाल दिया. शमा पूरा वीर्य गटक गयी.

जब लकी पूर्ण रूप से थक कर सो गया, तब मैं और शमा सिक्सटी नाइन की पोज में आधे घंटे तक सुख लेती रही.

सुबह के चार बजे तरोताजा हुए लकी के लौड़े ने फिर से हम दोनोंको चोदा और मेरे मुँह में वीर्य निकाल दिया. मैंने थोड़ा शमा के मुँह में डाला और दोनों फ्रेंच किसिंग करके उसके वीर्य को पी गयी.
 
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