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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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कुछ समय तक जब कोई नहीं बोला तो मैंने कहा- अगर हिना जी और आप सबको भी मंज़ूर हो तो मैं अपनी हाउसकीपर नैना रानी से मिलवा देता हूँ शायद उसको कुछ मालूम हो!हिना और सबने कहा- ठीक है आप बुलाओ उनको हम पूछ लेते हैं!

मैं नैना को बुला लाया.हिना ने सारी बात उसको बताई और पूछा कि आपकी राय में हमको क्या करना चाहिये इस मामले में.

नैना बोली- देखिये, मैंने भी अभी तक ग्रुप सेक्स या सामूहिक सेक्स के बारे में पढ़ा था कि पहले ज़माने में यह प्रथा राजा रजवाड़ों में आम थी और कई अमीर-उमरा इस तरह का सामूहिक यौन समारोह अपने महल मेंकिया करते थे लेकिन उसमें भाग लेने वाली स्त्रियाँ अक्सर बाज़ारू होती थी. जहाँ तक घरेलू लड़कियों का सवाल है, आजकल मॉडर्न माहौल में शायद यह मान्य हो लेकिन इसमें सबसे बड़ी अड़चन लड़कियों के लिए होती है क्यूंकि वास्तव में इस सारी क्रिया में लड़कियों का रोल इम्पोर्टेन्ट हैं. क्या आप लड़कियाँ इसके साथ होने वाली बदनामी की सम्भावना के लिए तैयार हैं?

हिना बोली- कैसी बदनामी दीदी?नैना बोली- क्या आपके साथ यौन क्रिया में भाग लेने वाले लड़के इस बात की गारंटी ले सकते हैं कि यह बात बाहर नहीं निकलेगी?लड़के चुप रहे.मैंने कहा- नैना जी ने सही सवाल उठाया है, क्या आज आप इन तीनों लड़कियों के साथ सेक्स करने के बाद यह गारंटी लेते हैं कि इसके बारे में कभी किसी को कोई बात नहीं बताएंगे?

सब लड़के चुप रहे.तब नैना बोली- आप सिर्फ 6 लड़के लड़कियाँ हैं, आप में यह बात छुप सकती है अगर आप सब मिल कर कसम खाएँ कि कभी भी इस ग्रुप सैक्स के बारे में किसी को भी कुछ नहीं बताएँगे.सबने ज़ोर से कहा- हम सब कसम खाएंगे कि हम इस बारे में कभी भी किसी को नहीं बताएँगे.

नैना बोली- चलो यह तय हो गया. अब सवाल है कि किस जगह यह कार्यक्रम किया जाए, क्यों हिना तुम्हारा क्या इरादा है?हिना बोली- मैं सोच रही थी कि अगले हफ्ते मेरे मम्मी पापा बाहर जाने वाले हैं तो मैं अपने बंगले में उनके जाने के बाद इसका आयोजन कर लूंगी.नैना बोली- सिर्फ शाम का या फिर पूरी रात का आयोजन होगा यह?हिना बोली- नैना जी, आप क्या उचित समझती हैं?

नैना बोली- मेरे विचार में आप इस कार्यक्रम को दोपहर में कॉलेज खत्म होने के बाद ही रखें. आपके पास 3-4 घंटे होंगे इस काम के लिए… मेरे ख्याल में वो काफी हैं और फिर किसी भी लड़की को झूठ का सहारा नहीं लेना पड़ेगा अगर यह प्रोग्राम दिन को करते हैं.हिना बोली- वो तो ठीक है लेकिन मेरे पास तो जगह सिर्फ रात को मिल पाएगी न!नैना ने मेरी तरफ देखा, मैं उसका इशारा समझा गया और मैंने कहा- मेरी कोठी में यह प्रोग्राम रख सकती हैं लेकिन उसमें हिस्सा लेने वाले केवल यही लोग होंगे सिर्फ हम 6… क्यों? मंज़ूर है?

हिना ने सबकी तरफ देख कर पूछा- क्यों बॉयज एंड गर्ल्स मंज़ूर है?सबने कहा- मंज़ूर है.नैना बोली- आप सब लड़कियों को मालूम होना चाहिए कि इस ग्रुप सेक्स प्रोग्राम में कोई भी लड़का किसी लड़की के साथ और कोई लड़की किसी दूसरे लड़के के साथ सेक्स कर सकती है और किसी को कोई भी ऐतराज़ नहीं होगा.सब बोले- हमको मंज़ूर है.

हिना बोली- इस प्रोग्राम में कुछ ख़ास खाने के लिए या पीने का इंतज़ाम हम आपस में पैसे इकटठे कर के करेंगे. क्यों मंज़ूर है?

जब सबने हाँ बोल दी तो हिना ने कहा- आप सब नैना दीदी को 100-100 रूपए दे दें. इस प्रोग्राम की तारीख बाद में तय होगी.तब हिना बोली- आज जब हम सब इकट्ठे हुए ही हैं तो क्यों न आज कुछ थोड़ी सी शुरुआत कर लें? क्यों सतीश और नैना जी?मैं बोला- हमको तो कोई ऐतराज़ नहीं, आप सब देख लो, क्यों नैना?नैना बोली- हाँ छोटे मालिक, ठीक है, अगर आप सब तैयार हैं तो प्रबंध कर सकते हैं हम!हिना ने सबसे पूछा तो सबने हाँ कर दी.

नैना बोली- इससे पहले कि कार्यवाही शुरू करें, आप सब अपनी कसम तो खा लो मिल कर!

हिना ने कहा- आओ सब जने एक दूसरे का हाथ पकड़ें और कसम खाएँ कि हम 6 इस ग्रुप में घटने वाली किसी भी घटना का ज़िक्र किसी और से नहीं करेंगे.सबने एक दूसरे का हाथ पकड़ कर कसम खाई, फिर नैना सबको लेकर मुख्य गेस्ट रूम में ले गई. वहाँ नीचे फर्श पर मोटे गद्दे बिछा रखे थे और टेबल पर शीशे के गिलास, शरबत और कोक की बोतलें ला कर रख ली.

मैं बोला- आप सब शर्बत या फिर कोक पी सकते हैं. एक बात और अगर हिना जी और आप सब बुरा न मानें तो नैना जी सारे कार्यक्रम के दौरान यहीं रहेंगी ताकि कोई प्रॉब्लम हो तो वो उसको अटेंड कर सकती हैं.हिना और सबने कहा- हमको कोई ऐतराज़ नहीं है.

फिर हिना ने नैना के साथ कुछ सलाह की और कहा- हम सब अपने कपड़े उतार देंगे. किसी को शर्म वर्म की प्रॉब्लम तो नहीं है ना? इस काम में नैना जी हम लड़कियों की मदद करेंगी.

फिर लड़के लोग अपने कपड़े उतारने लगे और नैना एक एक कर के लड़कियों के कपड़े उतारने लगी. सब से पहले हिना ही नग्न हुई, उसके बाद निशा और अंत में उर्मि.

अब नैना ने कहा- लड़के एक लाइन में खड़े हो जाएँ और लड़कियाँ उनके सामने लाइन बना कर खड़ी हो जाएँ.अब मैंने और बाकी सबने अपने सामने खड़ी लड़की या लड़के को गौर से देखा कि वो देखने में कैसे हैं.

मेरे सामने हिना खड़ी थी और उसका शरीर काफी ख़ूबसूरती लिए हुए था, उसके मम्मे गोल और ज़्यादा मोटे नहीं थे लेकिन उसके चूतड़ मोटे और फैले हुए थे, गोल नहीं थे, चूत पर हल्के भूरे बाल थे और पेट एकदम स्पाट था.फिर निशा को देखा, उसके मम्मे गोल लेकिन छोटे थे और चूतड़ भी गोल और छोटे थे, उभरे हुए नहीं थे और उसकी चूत पर काले घने बाल छाए हुए थे.

लड़को को देखा तो सिवाए मेरे किसी और का लंड खड़ा नहीं था, मेरा लंड एकदम तना हुआ खड़ा था.

नैना ने कहा- अब लड़की और लड़के की जोड़ियाँ बनाने का टाइम है, इसके दो तरीके हैं, या तो जैसे आप खड़े हैं आमने सामने वही आपके पार्टनर हैं या फिर लाटरी डाली जाए?सबने कहा- आमने सामने वाले ही ठीक हैं.

नैना ने कहा- अब आप अपने पार्टनर को अपने पास ला सकते हैं और आगे का कर्यक्रम शुरू कर सकते हैं, लेकिन याद रहे कोई भी ऐसी हरकत ना करें जो आपके पार्टनर को मंज़ूर न हो.

कहानी जारी रहेगी.
 
ग्रुप सेक्स

नैना ने कहा- अब आप अपने साथी को अपने पास ला सकते हैं और आगे का कर्यक्रम शुरू कर सकते हैं, लेकिन याद रहे कोई भी ऐसी हरकत ना करें जो आपके पार्टनर को मंज़ूर न हो.हिना धीरे धीरे चल कर मेरे पास आई, हम दोनों ने हाथ मिलाया, फिर हिना मेरे खड़े लंड को दखने लगी.वो हैरान थी क्यूंकि किसी लड़के का लंड अभी भी पूरा खड़ा नहीं हुआ था.

राज का लंड काफी मोटा था लेकिन वो लम्बाई में छोटा था और उधर विनी का लंड लम्बा था लेकिन पतला लग रहा था.क्यूंकि उर्मि के हिस्से में राज आया था सो वो उसके छोटे लंड को बड़ी मायूसी से देख रही थी और उसकी आँखें तो मेरे लम्बे और मोटे लंड की तरह ही थी.

मैंने हिना को अपने पास खींच लिया और उसके लबों पर एक सॉफ्ट चुम्बन जड़ दिया. उसने भी मेरे चुम्बन का जवाब अपनी बाहों को मेरे गले में डाल कर मुझको एक बड़ा ही गहरा चुम्बन दिया.उसका हाथ अपने आप सरकता हुआ मेरे लौड़े पर चला गया और उसके साथ खेलने लगा.

बाकी जोड़े भी एक दूसरे को लेकर बिजी हो गए. विन्नी निशि को किस कर रहा था और राज उर्मि के मम्मे चूस रहा था लेकिन वो दोनों ही अपने खड़े लंडों को लेकर दोनों लड़कियों के ऊपर टूट पड़े.

मैं और हिना एक दूसरे को बहुत ही गहरी किसिंग में लग गये, वो मेरे लंड के साथ खेल रही थी और मैं उसकी चूत में ऊँगली डाल कर उसके भग को मसल रहा था.

फिर मैंने हिना को लिटा दिया और उसके मम्मों को चूसने लगा और मेरा एक हाथ उसके भग के को सहला रहा था.हिना की चूत भी गीली हो चुकी थी लेकिन अभी इतनी नहीं थी कि लंड को डाला जाए.

मैं उसके मम्मों के काले चुचूकों को चूसने लगा और ऊँगली से उसकी भग को रगड़ने लगा. थोड़ी देर में ही हिना ने मेरे लौड़े को खींचना शुरू किया जिसका मतलब था कि वो चुदाई के लिए तैयार है.मैंने उसकी गोल सिल्की टांगों में बैठ कर अपने खड़े लंड को उसकी चूत के ऊपर रख कर भग को ज़ोर ज़ोर से रगड़ना शुरू किया.अब हिना रह नहीं पा रही थी और अपनी कमर को ऊपर उठा कर लंड को अंदर डालने की कोशिश कर रही थी.

जब मैंने देखा कि वो काफ़ी उतावली हो गई है तो मैंने लंड का सिर्फ मुंह उसकी चूत पर रखा और थोड़ा भाग ही अंदर डाला कि उसके चूतड़ ने नीचे से ज़ोर से धक्का मारा और पूरा लंड अंदर ले गई.अब मैंने अपने हाथ उसकी कमर के नीचे रखे और उसके चूतड़ों को अपने हाथ में ले लिया और धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये, पूरा लंड निकाल कर फिर पूरा अंदर डालना यही क्रम मैंने अपना लिया.हिना भी नीचे से पूरी कमर उठा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी..

दूसरी तरफ देखा कि विनी तेज़ धक्कों के आखरी पड़ाव पर पहुँच चुका था और राज उर्मि के अंदर झड़ चुका था और वो उर्मि की बगल में लेट कर हाम्फ़ रहा था.उर्मि के हाव भाव से लग रहा था कि उसका कुछ भी नहीं हुआ और वो उठ कर बाथरूम में जा रही थी.

इधर मैंने हिना की चुदाई धीरे धीरे से थोड़ी तेज़ कर दी और ऐसा करते ही हिना ज़ोर से स्खलित हो गई और उसके मुख से हाय की जोर की आवाज़ निकली.मैं भी रुक गया और जब वो थोड़ी सी संयत हुई तो उसको उठा कर मैंने अपने ऊपर बैठा लिया.

अब वो ऊपर से मुझको धक्के मारने लगी और मैं अपने हाथों से उसके मम्मों को सहलाने लगा, ख़ास तौर से उसके चुचूकों को ऊँगली से गोल गोल घुमाने लगा.जल्दी ही हिना फिर से तैयार हो गई और ऊपर से बैठे ही मुझको ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगी. कोई 5 मिन्ट की ऐसी चुदाई के बाद वो फिर से काम्पने लगी और फिर झड़ गई और मेरे ऊपर पूरी तरह से लेट गई.

अब मैंने उसको उठाया और उसको दीवार के सहारे खड़ा करके पीछे से चोदने लगा.वो भी बड़े आनन्द से इस पोज़ में मुझसे चुदती रही. केवल 5 मिन्ट में फिर मैंने महसूस किया कि उसकी चूत फिर बंद और खुल रही है और थोड़ी देर में उसका ढेर सारा पानी झड़ गया और वो थक कर वहीं बैठ गई.
 
नैना जल्दी से आई और मैंने और उसने मिल कर उसको गद्दे पर लिटा दिया.

दूसरी तरफ़ दोनों निशि और उर्मि खाली हाथ बैठी थी और दोनों लड़के आलखन से गद्दों पर लेटे थे.मुझको हिना से फारिग होते देख कर निशि उठ कर आई और मेरे लंड को चूसने लगी और उधर उर्मि विनी को जगाने की कोशिश करने लगी.

मैंने निशि की चूत को टटोला तो वो बहुत ही गीली हो रही थी, मैंने उससे पूछा- क्या इरादा है निशि? मुझसे करवाना है क्या?वो बोली- हाँ सतीश प्लीज!मैंने उसको कहा कि वो फ़ौरन घोड़ी बन जाए.जैसे ही वो घोड़ी बनी, मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और उसके छोटे लेकिन सॉलिड मम्मों के साथ खेलने लगा, अपनी पुरानी घुड़चाल शुरू कर दी यानि पूरा लंड निकाल कर फिर उसको पूरा डालना पहले धीरे धीरे, फिर जल्दी ही तेज़ी से घुड़ दौड़ शुरू कर दी, साथ ही उसके चूतड़ों पर हाथ की थपकी भी देने लगा.

चूतड़ों पर पड़ती थपकी को निशि ने बहुत ही पसंद किया और उसने अपने चूतड़ों को हिला हिला कर इस का अभिवादन किया.अब मैंने उसको गर्म होते महसूस किया तो मैं पूरी ताकत से उसको पीछे से चोदने में लग गया, मेरी बेतहाशा स्पीड से वो घबरा गई और जल्दी ही छूट गई और छूटते ही चिल्ला पड़ी- मर गई रे!

नैना जल्दी से आई और उसको संभालने लगी.

मुझको खाली देख उर्मि दौड़ कर आ गई और बोली- सतीश प्लीज, मेरा भी काम कर दो, प्लीज सतीश!

मैं खड़ा हो गया और उसको चूतड़ों से उठा लिया और अपने खड़े लंड का निशिना लगा कर उसकी चूत में अपना मोटा लंड घुसेड़ दिया और फिर उसको हाथों में लेकर सारे कमरे का चक्कर लगाने लगा.उर्मि मेरे लंड पर बैठी हुई अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी और जल्दी ही वो पूरी तरह से मुझको चोदने लगी.

मैं आलखन से खड़ा था और वो मेरे लंड पर नाच रही थी. जल्दी ही उसका नाच इतना तेज़ हो गया कि मैं और नैना उसको संभाल नहीं पा रहे थे.जल्दी ही वो मेरे गले में अपनी बाहें डाल कर मुझ से चिपक गई और सिर्फ अपने चूतड़ों को आगे पीछे नचा रही थी.

थोड़ी देर में उसका नाचना बंद हो गया और वो मेरे मुंह से अपना मुंह जोड़ कर मेरी छाती से चिपक गई और ज़ोर ज़ोर से कांपने लगी.जब वो पूरी तरह से झड़ गई तो वो अपने आप से मेरे लंड के ऊपर से हट गई और उसके हटते ही मेरा लंड पॉप कर बाहर आ गया. लंड का रंग एकदम लाल हो गया था जैसे बहुत ही गुस्से में हो!एक घंटे में 3 जवान लड़कियों को चोदने के बाद कोई भी आदमी या फिर लंड लाल सुर्ख हो ही जाता.

जब सबने थोड़ी देर आलखन कर लिया तो नैना सबके लिए रूह अफजा का शरबत ले आई.शरबत पीने के बाद तीनों लड़कियाँ मेरे चारों तरफ खड़ी हो गई और बिना कुछ कहे ही बहुत सी बातें अपनी आँखों से कह गई जिसमें मुख्य बात थी कि अब फिर कब? तब सिर्फ़ मेरे साथ!

मेरी भी आँखें जवाब दे रही थी- देखेंगे तब की तब, फिर आ जाना सब की सब!नैना बोली- चलिए खेल खत्म करें या अभी कुछ मन में बाकी है?हिना ने सब की तरफ देख कर कहा- बोलो क्या मर्ज़ी है आप सब की?

लड़के सब चुप थे लेकिन उर्मि और निशि की मर्ज़ी अभी बाकी खेल खलने की थी.नैना ने कहा- लड़के तो खेल खत्म करना चाहते है सो अच्छा हो गा अगर यह आज का शो यहीं खत्म किया जाए. चलिए लड़कियां और लड़के अलग अलग बाथरूम में अपने कपडे पहन लें.

नैना लड़कों को साथ वाले कमरे के बाथरूम में ले गई और तीनों लड़कियाँ वहीं बाथरूम में कपड़े पहनने लगी.कपड़े पहन कर हम सब फिर बैठक में इकट्ठे हुए.हिना बोली- कहो, कैसा रहा यह ग्रुप सेक्स का एक नमूना. आशा है आप सब ने इस प्रोग्राम का आनन्द लिया होगा. आगे का प्रोग्राम रखा जाए या नहीं उसके बारे में बाद में सोचेंगे. अब लड़के अपने घर जा सकते हैं लेकिन यह याद रहे कि जो कसम हम सबने खाई है उसका पूरा निर्वाह होना चाहये.

मैं विनोद और राज को कोठी के बाहर तक छोड़ आया जहाँ से उन्होंने रिक्शा कर ली थी.वापस आया तो लड़कियों में बहस चल रही थी, उन सब का कहना था कि सिवाए मेरे बाकी दोनों लड़के बिल्कुल नौसिखिया थे, उनको काम क्रिया का ज़्यादा अनुभव नहीं था.

नैना बोली- मेरा भी यही ख्याल है, उसका मुख्य कारण मैं यह समझ रही हूँ कि शायद यह उनका सेक्स का पहला ही मौका था.हिना बोली- मैं नहीं समझती कि आगे का प्रोग्राम हम अभी बना सकते हैं क्यूंकि जब तक हमको अनुभवी लड़के और लड़कियां नहीं मिल जाते, आगे के प्रोग्राम के बारे में सोचना भी बेकार है. क्यों नैना दीदी?नैना बोली- बिल्कुल ठीक कह रही हो हिना जी!

हिना बोली- लेकिन एक बात जो साफ़ हो गई है वो है कि अपना सतीश कमाल का लड़का है यार, तीन तीन को तीन बार चोद देना और फिर तीन बार हर एक का छूटा भी देना और फिर खुद ज़रा सा भी नहीं थकना… वाह वाह… यह सब किस से सीखा तुमने सतीश? सच सच बताना?मैं थोड़ा शरमाया और फिर बोला- सच बताऊँ, मेरी सेक्स गुरु नैना रानी है, ये सब दांव पेच नैना जी ने सिखाये हैं.तीनो लड़कियों ने खूब तालियाँ बजाई.

हिना बोली- मुझको भी पूरा सेक्स का ज्ञान नहीं है और इन दोनों को भी शायद बहुत कम ज्ञान होगा, क्यों?उर्मि और निशि ने हाँ में सर हिला दिया.

हिना बोली- नैना दीदी, क्या आप हम लड़कियों को भी सेक्स के मामले में ट्रेनिंग दे सकती हो?नैना ने मेरी तरफ देखा और कहा- अगर छोटे मालिक इजाज़त दें तो यह काम हो सकता है.मैं बोला- हाँ हाँ, ज़रूर ट्रेनिंग दो इनको भी और जो दूसरी लड़कियाँ भी ट्रेनिंग लेना चाहें, उनको भी ट्रेनिंग दो, यह तो पुण्य का काम है.नैना बोली- लेकिन छोटे मालिक इसमें प्रैक्टिकल कर के भी दिखाना पड़ सकता है तो ऐसा पुरुष कहाँ से लाएँगे जो प्रैक्टिकल कर के लड़कियों को समझा सके?

मैं चुप रहा लेकिन हिना बोली- क्यों, अपना सतीश प्रैक्टिकल करके दिखा सकता है अगर ज़रूरत पड़ेगी तो!मैं चुप रहा और फिर थोड़ी देर सोचने के बाद बोला- खैर वो मदद तो मैं करने को तैयार हूँ, बाकी जो नैना कहेगी वो हम सबको करना पड़ेगा. इस काम के लिए नैना को भी तो कुछ फीस मिलनी चाहिए न, बेचारी कॅाफ़ी मेहनत करेगी.

हिना बोली- उसकी आप चिंता छोड़ दीजिये, वो मैं संभाल लूंगी. अगले हफ्ते हम फिर यहाँ ही मिलते हैं आगे का कार्यक्रम तय करने के लिए!

कहानी जारी रहेगी.
 
कॉलेज की लेडी प्रोफेसर

सब लड़कियों के जाने के बाद मैं और नैना बैठक में बैठे थे और सोच रहे थे कि हमारा जीवन किस दिशा की ओर जा रहा है.कॉलेज ग्रुप सेक्स तो एक बुरा एक्सपेरीमेंट था क्योंकि मैं समझता हूँ सबसे कमज़ोर कड़ी वो लड़के थे जिनको इस ग्रुप में शामिल किया गया था.हिना ने बगैर उनकी कार्य कुशलता जाने ही उनको इस काम के लिए चुन कर बहुत बड़ी गलती की.

जब मैंने नैना से पूछा तो वो भी इसी विचार की थी.फिर मैंने उससे पूछा कि उसका जो अपना क्लिनिक खुलने वाला था उसका क्या हुआ?उसका जवाब था कि कोई खास पूछताछ नहीं हुई है हालाँकि उसने एक दो दाइयों को कहा भी था.

मैंने नैना से पूछा- वो सेठानियों का फ़ोन या वो खुद नहीं आई क्या?नैना मुस्कराते हुए बोली- अगले अफ्ते उनका चेकअप होना है, देखो तब कुछ बात हो सके, क्या आपको उनकी चाहिये?मैं बोला- देखो नैना, तुम्हारे अलावा अगर कोई खूबसूरत औरत या लड़की मेरे जीवन में आई है तो वो हैं रानी और प्रेमा, उनके जैसा शरीर न मैंने अभी तक देखा है और ना देखने की कोई उम्मीद है.नैना बोली- ठीक है आज हम दोनों आपको चोदेंगी और आपका सारा रस निकाल कर ले जाएंगी. वैसे छोटे मालिक, आज शाम को मैं आपकी नज़र भी उतार दूंगी.

अगले दिन मैं टाइम पर कॉलेज चला गया. लंच इंटरवल में मुझको हिना मिल गई और मुझको लेकर कॉलेज के गार्डन में घूमने लगी.घूमते हुए उसने कहा कि आज छुट्टी के बाद मैं उसके साथ उसके घर में चलूँ, एक ज़रूरी काम है.मैंने पूछा- वही काम है क्या?हिना हँसते हुए बोली- नहीं सतीश यार, तुमको किसी ख़ास बन्दे से मिलवाना है.मैं बोला- बन्दा या बंदी?हिना बोली- वहीं देख लेना न कि वो बंदा है या बंदी?मैं बोला- ठीक है, मैं नैना को फ़ोन पर बता देता हूँ कि शाम हो जायेगी मुझको घर आते हुए.

कॉलेज की छुट्टी के बाद मुझको अपनी कार में लेकर हिना अपने बंगले में पहुँच गई.उस वक्त बंगले में उसकी एक मेड थी और एक कुक थी और बाकी परिवार के सदस्य शहर के बाहर गए हुए थे.उसकी नौकरानी शरबत ले आई और हम पीने लगे.

तभी कोठी में एक और कार आ कर रुकी और एक स्मार्ट लेडी उस में से निकल कर बैठक मैं आई.हिना ने उठ कर उनका स्वागत किया.मैं फ़ौरन पहचान गया कि वो तो हमारे कॉलेज की प्रोफेसर थी, मैंने भी उठ कर उनको नमस्कार किया.

हिना ने कहा- मैडम, यह सतीश है अपने ही कॉलेज में प्रथम साल का आर्ट्स का छात्र है. और सतीश, तुम तो मैडम को तो जानते ही होगे.मैंने कहा- मैडम को कौन नहीं जानता.मैडम बोली- अरे यार, तुम तो फॉर्मल हो गए हो, हम तो अभी कॉलेज से बाहर हैं न, मेरा नाम निर्मला है, उससे ही पुकारो तुम दोनों.मैं बोला- जैसा आप कहें निर्मला मैडम!तब तक मेड कोल्डड्रिंक ले आई थी.

हिना बोली- सतीश, निर्मला मैडम यहाँ एक ख़ास मकसद से आईं हैं. वो मैं खाना खाने के बाद बताऊँगी, चलिए खाना लग गया है.

हम सब उठ कर डाइनिंग टेबल पर आकर बैठ गए और काफी स्वादिष्ट खाना खाने लगे लेकिन मैं इस खाने का पारो के बनाये खाने से मिलान करता रहा और पाया कि पारो के हाथ का खाना ज़्यादा स्वादिष्ट बनता है.खाने से फ़ारिग़ होकर हम फिर बैठक में आकर बैठ गए.

तब हिना बोली- निर्मला मैडम बेचारी बड़ी मुसीबत में हैं, उनके पति उनकी इच्छा को पूरा नहीं कर पाते क्यूंकि वो ज़्यादा समय अपने कारोबार में बिजी रहते हैं.यह कह कर हिना मेरी तरफ देखने लगी लेकिन मैं मुंह झुका कर चुप बैठा रहा.हिना फिर बोली- उनकी प्रॉब्लम को समझ रहे हो सतीश?मैं बोला- समझ तो रहा हूँ लेकिन मैं उनकी क्या मदद कर सकता हूँ इस मामले में?हिना बोली- वही जो तुम अक्सर सबकी करते हो?मैं बोला- क्या मदद चाहिए और कब चाहिए यह निर्मला मैडम को कहने दो हिना प्लीज!

निर्मला मैडम सर झुका कर बैठी रही लेकिन उसके चेहरे के हाव भाव से लग रहा था कि वे काफी दुखी हैं.मेरा मन तो किया कह दूँ कि मैं मदद के लिए तैयार हूँ लेकिन फिर नैना के शब्द मन में गूँज रहे थे कि जब तक कोई भी औरत स्वयं यौन संबंध के लिए नहीं कहे, मुझको आगे नहीं बढ़ना चाहिए.मैंने कहा- निर्मला मैडम जी, मैं हर प्रकार से आप की सहायता करने के लिए तैयार हूँ लेकिन आप कुछ बताएँ तो सही?

निर्मला मैडम मेरी तरफ देखते हुए बोली- मैं सेक्स की प्यासी हूँ. मेरे पति मेरा बिल्कुल ध्यान नहीं देते और आज 10 साल से मेरे घर बच्चा नहीं हुआ क्योंकि मेरे पति को सेक्स के प्रति कोई लगाव ही नहीं, न उनमें इसकी कोई इच्छा है लेकिन मैं उनसे तलाक भी नहीं ले सकती.यह कहते हुए निर्मला मैडम फूट फूट कर रोने लगी.
 
मैं और हिना उनके पास गये और उनको तसल्ली देने लगे.

फिर वो एकदम से उठी और मुझको कस कर आलिंगन में ले लिया और मेरे होटों को बेतहाशा चूमने लगी.मैंने भी उनको जफ़्फ़ी डाली और उनकी चूमाचाटी का वैसे ही जवाब देने लगा.

तब हिना बोली- आओ सतीश और मैडम, हम सब मेरे बैडरूम में चलते हैं.बैडरूम में पहुँचते ही निर्मला तो मेरे ऊपर भूखे शेर की तरह से टूट पड़ी, चूमने चाटने के अलावा मेरे लंड को भी पैंट के बाहर से पकड़ कर मसलने लगी.

हिना ने जल्दी से मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए. कमीज और पैंट उतार कर मेरे अंडरवियर में हाथ डालने लगी तो मैंने उसका हाथ रोक दिया और कहा- पहले आप दोनों.यह सुन कर निर्मला मुस्कराने लगी और हिना भी हंस दी, फिर दोनों ही अपनी साड़ियाँ उतार कर और ब्लाउज उतार रही थी कि मैंने निर्मला का हाथ रोक दिया और बोला- आपको निर्वस्त्र करने का सौभाग्य मुझको दीजिये मैडम जी!

अब मैं निर्मला के ब्लाउज और पेटीकोट को बहुत धीरे धीरे से उतारने लगा और फिर उसकी ब्रा पर जब हाथ रखा तो उसके गोल और सॉलिड मम्मों को देख कर दिल एकदम से खुश हो गया.उसके पेटीकोट को उतारा तो उसकी चूत पर हल्के काले बाल थे जिनको ट्रिम किया गया था.

मैं एकदम से झुका और अपना मुंह निर्मला जी की चूत में डाल दिया और उसकी चूत के लबों पर हल्के हल्के जीभ फेरने लगा.ऐसा करते ही निर्मला एकदम से अकड़ गई और मेरा सर पकड़ कर उसने अपनी चूत में और ज़ोर से घुसेड़ दिया, अब उसकी भगनासा मेरे मुंह में थी और मैं उसको धीरे धीरे चूस रहा था.

मैंने अपना मुंह उसकी चूत से निकाल कर उसके मोटे मम्मों पर रख दिया और उसके चुचूकों को मज़ा लेकर चूसने लगा.उधर देखा तो हिना भी अपने सारे कपड़े उतार कर मेरे अंडरवियर के पीछे लगी हुई थी, उसको जैसे ही उतारा तो मेरा गुसाया हुआ लंड टन से सीधा खड़ा हो गया.

मेरा लंड अब निर्मला की चूत में घुस रहा था और बाहर से घर्षण रगड़ण कर रहा था.मैंने अपने मुंह को निर्मला के मुंह से जोड़ दिया और उसकी जीभ को चूसने लगा, उसकी जीभ भी मेरे मुंह में प्रवेश कर रही थी. अब मैंने निर्मला को उसके चूतड़ों से उठाया और अपनी बाँहों में लेकर उसको पलंग पर लिटा दिया, फ़िर मैं उसकी गोल और सफ़ेद गुदाज़ झांगों में बैठ कर अपने लंड का उसकी चूत में गृह प्रवेश करवा दिया..

मैंने हिना को इशारा किया कि वो निर्मला के मम्मों को चूसे.जैसे ही लंड कुछ अंदर जा कर सारा निरीक्षण परीक्षण कर बैठा तो मैंने लंड से धीरे धीरे धक्के मारने लगा, पूरा का पूरा निकाल कर सिर्फ अगली टिप अंदर रख के मैं फिर पूरा अंदर धकेल देता था, एक दो बार लंड को बाहर निकाल कर उसकी भग को थोड़ा लंड से रगड़ा और फिर पूरा घुसेड़ दिया.

इसी क्रम से मैंने निर्मला को चोदना शुरू किया और थोड़ी मेहनत के बाद पहला नतीजा सामने आया जब निर्मला कांपती हुई झड़ गई और मुझको अपने से चपटा लिया.अब मैंने उसको अपने जांघों के ऊपर बिठा लिया बगैर लंड को निकाले, उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर उसको आगे पीछे करने लगा और साथ ही उसके मम्मों को चूसने लगा.

हिना उसके पीछे बैठ गई और उसको आगे पीछे होने में मदद करने लगी, मैं कभी उसके लबों को चूसता और कभी उसकी जीभ के चुसके लेता, वो काफ़ी ज़ोर ज़ोर से अपनी कमर से धक्के मार रही थी.मैंने उसको कस कर जफ़्फ़ी मारी हुई थी और उसके मम्मों को अपनी छाती से क्रश किया हुआ था.इस पोज़ में भी वो ज़्यादा देर नहीं टिक सकी और जल्दी ही ‘ओह्ह्ह आआह’ कह कर उसने अपना सर मेरे कंधे पर लुढ़का दिया और कम्कम्पाते हुई चूत से ढेर सारा पानी गिरा दिया.

मैंने देखा वो काफी थक चुकी थी तो मैंने उसको लेट जाने दिया.मैं उठा और हिना के पीछे पड़ गया क्यूंकि मेरा लाला लंडम बहुत ही खूंखार मूड में था. मैं हिना को लेकर बेड में आ गया, निर्मला के पास ही उसको घोड़ी बनने के लिए कहा और खुद पीछे से उस पर बड़ा तीव्र हमला बोल दिया.निर्मला भी यह खेल देख रही थी.

मैं लंड को पूरा हिना की चूत में अंदर डाल कर आहिस्ता आहिस्ता अंदर बाहर करने लगा पूरा अंदर और फिर पूरा बाहर. हिना की चूत भी पूरी तरह से पनिया रही थी तो उसको भी चोदने का अलग ही आनन्द था, दोनों की चूत का पूरा हालाते हाजरा भी मिल रहा था, निर्मला की चूत ज़्यादा खुली और लचकीली थी लेकिन हिना की चूत टाइट और रसीली थी, निर्मला काफी सालों से ब्याहता थी लेकिन हिना तो अनब्याही थी.

मेरे धीमे धक्के अब तेज़ी में बदल रहे थे और मैं घोड़ी की लगाम अब कस के रख रहा था और साथ ही उसको थोड़ी ढील भी दे रहा था, वो भी अब आगे से पीछे को धक्के मारने लगी, जिसका मतलब साफ़ था कि वो भी अब छुटाई की कगार पर पहुँच चुकी थी.मेरी चुदाई की स्पीड एकदम से बहुत तेज़ और फिर बहुत धीमी होने लगी, इस प्रकार मैंने हिना को जल्दी ही छूटा दिया.

कहानी जारी रहेगी.
 
लेडी प्रोफेसर की सन्तान की चाह

मेरा लाला लंडम बहुत ही खूंखार मूड में था. मैं हिना को लेकर बेड में आ गया, निर्मला के पास ही उसको घोड़ी बनने के लिए कहा और खुद पीछे से उस पर बड़ा तीव्र हमला बोल दिया.निर्मला भी यह खेल देख रही थी.

मैं लंड को पूरा हिना की चूत में अंदर डाल कर आहिस्ता आहिस्ता अंदर बाहर करने लगा पूरा अंदर और फिर पूरा बाहर. हिना की चूत भी पूरी तरह से पनिया रही थी तो उसको भी चोदने का अलग ही आनन्द था, दोनों की चूत का पूरा हालाते हाजरा भी मिल रहा था, निर्मला की चूत ज़्यादा खुली और लचकीली थी लेकिन हिना की चूत टाइट और रसीली थी, निर्मला काफी सालों से ब्याहता थी लेकिन हिना तो अनब्याही थी.

मेरे धीमे धक्के अब तेज़ी में बदल रहे थे और मैं घोड़ी की लगाम अब कस के रख रहा था और साथ ही उसको थोड़ी ढील भी दे रहा था, वो भी अब आगे से पीछे को धक्के मारने लगी, जिसका मतलब साफ़ था कि वो भी अब छुटाई की कगार पर पहुँच चुकी थी.मेरी चुदाई की स्पीड एकदम से बहुत तेज़ और फिर बहुत धीमी होने लगी, इस प्रकार मैंने हिना को जल्दी ही छूटा दिया.

उधर देखा तो निर्मला अब अपनी ऊँगली चूत में डाल रही थी जो हरकत मेरे लंड को पसंद नहीं आई.

मैंने लेट कर निर्मला को अपने ऊपर आने के लिए निमंत्रित किया जिसको उसने सहर्ष स्वीकार कर लिया. मैं लेटा था और वो मेरे ऊपर बैठी थी और खुले आम वो मुझ गरीब को चोद रही थी.मौका देख कर मैं उसके मम्मों के साथ खेल रहा था या फिर उसकी चूत में ऊँगली डाल कर उसकी भग को मसल रहा था.

ऐसा करने से निर्मला का मज़ा दुगना हो रहा था लेकिन मुझको काफी आलखन मिल रहा था और मुझको ऐसा लग रहा था कि मेरी मोटरसाइकिल निर्मला के गेराज में खड़ी है और उसकी चूत उसकी सफाई कर रही हो.थोड़ी देर बाद गेराज वाली चूत पकड़ धकड़ में लग गई और फिर आखिर में उस गेराज में लगे फ़व्वारे खुल गए और मेरी मोटरसाइकिल की पूरी धुलाई हो गई.यानि निर्मला एक बार फिर झड़ गई और उतर के सीधे मेरे मुंह से अपना मुंह चिपका लिया.

हिना जो पास ही खड़ी थी वो निर्मला के हटते ही मेरे लौड़े पर झपट पड़ी और उसको मुंह में ले कर चूसने लगी जैसे मलाई वाले पान की ग्लोरी हो!जब हिना ने पूरी मलाई चाट ली तो मैंने पूछा- क्यों देवियो? बस करें या फिर अभी और मैच खेलने की इच्छा है?निर्मला मेरे मज़ाक को समझ गई और हँसते हुए बोली- बस अब और नहीं, सारे प्लेयर्स बहुत थक गए हैं.हिना ने अभी भी मेरे लौड़े को पकड़ा हुआ था तो मैंने उससे प्रार्थना की- आप कृपा कर हमारे बॉलर को तो छोड़ दें, वो बेचारा घर जाए!

कपड़े पहन कर बैठे ही थे कि हिना ने चाय मंगवा ली और हम सब गर्म गर्म चाय पीने लगे.

फिर निर्मला बोली- जैसा कि मैंने बताया था, मेरी माँ बनने की बहुत इच्छा है लेकिन कोई साधन नहीं जुट रहा है.मैं बोला- कैसा साधन जुटाने की कोशिश कर रही हैं मैडम आप?निर्मला बोली- किसी पुरुष की मदद से गर्भाधान हो सके तो अच्छा है!मैं बोला- अगर आप संजीदा हैं तो मैं इसकी राह सुझा सकता हूँ.निर्मला बोली- कैसी राह?

मैं बोला- हमारी कोठी में एक हाउसकीपर है वो काफी होशियार दाई भी है, आप चाहें तो उससे मैं आपको मिलवा सकता हूँ, आगे वो सलाह देगी कि क्या करना है.निर्मला ने खुश होते हुए कहा- बहुत अच्छा, मैं उससे अवश्य मिलना चाहूंगी.मैंने निर्मला और हिना का थैंक्स किया और घर के लिए निकलने लगा की निर्मला बोली- सतीश तुमने किस तरफ जाना है?मैंने अपनी कोठी का पता बता दिया.
 
निर्मला बोली- चलो सतीश, मैं तुमको तुम्हारी कोठी में ड्राप कर देती हूँ मेरे तो रास्ते में पड़ेगी वो!मैं इंकार करता रहा पर वो नहीं मानी और मुझको कार में बिठा लिया, हिना से बाई और थैंक्स किया और ‘फिर कल मिलते हैं’ का वायदा किया.

मेरे घर के पास आते ही वो चौंक कर बोली- अरे यह तो हमारे जानने वाले ठाकुर साहब की कोठी है, क्या तुम उनको जानते हो?मैंने कहा- मैं उनका ही बेटा हूँ.वो बड़ी गर्म जोशी से बोली- वाह सतीश यार, तुम तो अपने ख़ास निकले.मैं भी ख़ुशी से बोला- मैडम जी क्या पता था कि आप हमारी जानकार निकलेगी, अंदर आइये, मैं आपको नैना से मिलवाता हूँ.

वो नानुकर करने लगी लेकिन मैं भी ज़बरदस्ती उनको अपनी कोठी में ले आया.चोकीदार लखन लाल ने सलाम किया.

फिर मैं मैडम को लेकर बैठक में आ गया और जल्दी ही नैना भी वहाँ आ गई.मैंने उनका परिचय कराया और उनकी प्रॉब्लम भी बताई तो नैना बोली- अगर आप कल आ जाएँ तो मैं आपका पूरा चेकअप कर लूंगी और उसके बाद सोचेंगे कि क्या करना है.

अगले दिन निर्मला मैडम मेरे साथ ही मेरे घर आ गई.खाना खाने से पहले नैना उनको लेकर मेरे बेडरूम में चली गई और आधे घंटे बाद वापस आई.नैना ने आते ही कहा- मैडम तो बिल्कुल ठीक हैं, जो भी कमी है वो इनके पति में होगी.

मैं बोला- फिर क्या सोचा मैडम जी?निर्मला मैडम बोली- नैना का सुझाव है कि मैं किसी दूसरे मर्द द्वारा गर्भाधान कर लूँ. लेकिन ऐसा मर्द मुझको कहाँ से मिलेगा?नैना बोली- अगर आप बुरा ना मानें तो मेरा सुझाव है कि छोटे मालिक यह काम भली भांति कर सकते हैं.निर्मला मैडम बोली- लेकिन यहाँ छोटे मालिक कहा मिलेंगे और वो क्यों तैयार होंगे इस काम के लिए?

नैना और मैं ज़ोर से हंस दिये और मैडम हमको हैरानी से देख रही थी.निर्मला मैडम बोली- आप दोनों हंस क्यों रहे हैं? क्या मैंने कुछ गलत कह दिया?नैना हँसते हुए बोली- अरे मैडम छोटे मालिक तो आपके सामने ही खड़े हैं, और आप इन का थोड़ा सा लुत्फ़ भी ले चुकी हैं आज!मैडम हैरानी से बोली- तुम्हारा मतलब छोटे मालिक सतीश है क्या?मैं मुस्कराते हुए बोला- आपका सेवक मैडम, आपके सामने खड़ा है.

निर्मला मैडम इतनी खुश हुई कि आगे बढ़ कर मुझ को गले लगा लिया और मेरे लबों पर चुम्मियों का अम्बार लगा दिया.वो सारे घटना चक्र से घबरा गई और सोफे पर बैठ गई और नैना उसके लिए कोक ले आई.थोड़ी देर बाद वो संयत हो गई.

मैडम बोली- नैना क्या तुम जानती हो तुम क्या कह रही हो? क्या सतीश गर्भाधान कर सकेगा?नैना फिर हंसने लगी और बोली- ऐसा है मैडम जी, सबसे पहले इस छोटे मालिक ने मुझको गर्भवती किया, इसके बाद कम कम से इस सांड नुमा छोटे मालिक ने अब तक 10 औरतों को गर्भवती किया है और सब की सब ने इन से गर्भधारण केवल अपनी मर्ज़ी से किया है, इन्होंने कभी भी किसी लड़की या स्त्री को उसकी मर्ज़ी के खिलाफ ना तो यौन क्रिया की है न उसको गर्भाधान किया है.

मैडम बोली- वो तो मैंने आज हिना के बंगले में देख लिया है, इसने मुझसे 3-4 बार सेक्स किया है लेकिन एक बार भी इसका नहीं छूटा था मेरे या फिर हिना के अंदर. ऐसा क्यों?नैना बोली- छोटे मालिक को मैंने सेक्स ट्रेनिंग दी है बचपन से और इनको अपने पर पूरा कंट्रोल करना सिखाया है. इसलिए जब तक इनकी मर्ज़ी ना हो यह कभी नहीं छुटाते.

मैडम अभी भी हैरान थी और हैरानगी से सर हिलाते हुए बोली- कुछ विश्वास नहीं हो रहा, लेकिन मैं तो आज सतीश का जलवा देख चुकी हूँ, अच्छा नैना, मुझको आगे क्या करना होगा?नैना मैडम को एक तरफ ले गई और कुछ पूछा जिसका जवाब मैडम ने दे दिया.

नैना बोली- मैडम, अभी समय ठीक नहीं है आप इस काम के लिए कम से कम 20 दिन इंतज़ार कर लीजिये फिर आपका काम शुरू करेंगे. ठीक है? इस बीच आप जब चाहें, सतीश के साथ यहाँ आ सकती है.

कहानी जारी रहेगी.
 
मेरी मौसेरी बहन की चूत

अभी हम यह बातें कर ही रहे थे की फ़ोन की घंटी बजी.मैंने फ़ोन सुना और वो मम्मी जी का था.

हाल चाल पूछने के बाद वो बोली- सतीश, वो कानपुर वाली मौसी जी और उनकी दो बेटियाँ वहाँ लखनऊ आ रही हैं, वो कुछ दिन वहाँ ठहरने का प्रोग्राम बना रही हैं, कह रही थी कि वे हमारी कोठी में ठहरना चाहती हैं, बेटा, मैंने हाँ कर दी है, उनका ख़ास ख्याल रखना. वो नैना अगर तेरे नज़दीक है तो उसको फ़ोन देना, मैं उसको समझा देती हूँ.मैं बोला- ठीक है मम्मी जी!यह कह कर मैंने फ़ोन नैना को दे दिया.

फ़ोन पर बात करने के बाद नैना बोली- छोटे मालिक, आपने अपनी मौसी को पहले देख रखा है क्या?मैंने कहा- हाँ देखा है कई बार, क्यों?नैना बोली- मालकिन कह रही थी कि वो थोड़ी सनकी हैं, उनकी बातों का बुरा ना मानना आप सब!मैं बोला- हाँ हैं तो थोड़ी सनकी लेकिन ऐसी डरने की को कोई बात नहीं, मैं उनको संभाल लूँगा. हाँ आज रात को तुम दोनों चुदवा लेना नहीं तो काफी दिन टाइम नहीं मिलने वाला. मैंने भी आज की चुदाई में नहीं छुटाया सो रात को तुम्हारी या फिर पारो की चूत को हरा करना है.

अगले दिन कॉलेज से वापस आया तो मौसी और उसकी बेटियाँ अभी तक नहीं आई थी. मैं खाने पर उनका इंतज़ार करने लगा.थोड़ी देर बाद ही चौकीदार लखनलाल मौसी जी और उनकी बेटियों का सामान ले कर अंदर आ गया.

मौसी जी से चरणवंदना के बाद उनकी दोनों बेटियों की तरफ देखा तो दोनों ही सुन्दर और स्मार्ट लगी, साड़ी ब्लाउज में दोनों ही काफी अछी लग रही थी.मिल कर हेलो हॉय हुई और मैंने अपना नाम बताया और उन दोनों ने भी अपने नाम बताये, बड़की का नाम मीना और छोटी का नाम टीना था.

मीना थोड़ी ठहरे हुए स्वभाव की थी और टीना काफी चंचल थी लेकिन दोनों थी बहुत ही बातूनी. मीना कानपुर में गर्ल्स कॉलेज में इंटर के फाइनल में थी और टीना मेरी तरह फर्स्ट ईयर में थी.मीना उम्र में भी मुझ से साल दो साल बड़ी थीं. ये मौसी जी मेरी मम्मी के रिश्ते में बहन थी, मेरी सगी मौसी नहीं थी.

उन्होंने आते ही अपना सनकीपन दिखाना शुरू कर दिया.वो रसोई में गई और पारो को बोली- जितने दिन हम यहाँ हैं, खाना हम से पूछ कर बनाया जायेगा और सिर्फ कुछ चुनी हुई सब्जियाँ ही बनेगी, मीट रोज़ बनेगा और वो भी सिर्फ बकरे का!मौसी ने यह भी बताया कि कल मौसा जी भी आ रहे हैं तो उनका कमरा तैयार कर दिया जाये.

नैना ने मेरे साथ वाला कमरा लड़कियों को दिया था और उनसे काफी दूर वाला कमरा मौसी के लिए तैयार किया गया था.वो मौसी को लेकर दोनों कमरे उनको दिखा आई और मौसी को दोनों ही कमरे पसंद आ गए थे.

उस रात कुछ नहीं हुआ सिवाय इसके कि हम तीनों काफी देर मेरे कमरे में बैठ कर गपशप करते रहे.मीना ने कई बार कोशिश कि वो मेरी आँखों में आँखें डाल कर बात कर सके लेकिन मैंने उसको ज़्यादा छूट नहीं दी.

अगले दिन जब मैं कॉलेज से लौटा तो मौसा जी भी पहुँच चुके थे, उनसे मिल कर चरण स्पर्श किया और पूछा- आपको अपना कमरा पसंद आया है न?तब मौसी ने बताया कि वो बड़की मीना की सगाई पक्की करने आये हैं, यहीं लखनऊ का लड़का है और अपना कारोबार है.मैंने ख़ुशी का इज़हार किया और फिर हम सबने मिल कर खाना खाया.

आते जाते दो बार मीना से मेरी टक्कर होते होते रह गई और हर बार वो मेरी बाँहों में आकर झूल जाती थी.मैं समझ गया कि मीना टक्कर के अलावा भी कुछ और चाहती है.अगली बार जब वो मेरे रास्ते से गुज़री तो मैं सावधानी से एक साइड हो गया लेकिन वो जानबूझ कर मेरे लौड़े को हाथ से छूते हुए निकल गई.अब जब मौका लगा तो मैं भी साइड से निकलते हुए उसके चूतड़ों को हाथ लगाता गया.

थोड़ी देर बाद वो फिर मुझको रास्ते में मिली और इस बार उसने जानबूझ कर अपना बायां मुम्मा मेरी बाज़ू से टकरा दिया.मैंने मुड़ कर उसको देखा और फिर अपने कमरे में चला गया.वो भी इधर उधर देखती हुई मेरे पीछे मेरे कमरे में घुस आई और आते ही मुझको कस के जफ़्फ़ी मार दी और लबों पर चुम्मी जड़ कर फ़ौरन भाग कर कमरे से बाहर निकल गई.

मैं कुछ हैरान था, फिर मैं सोचने लगा कि यह तो गेम खेल रही है, मैंने भी सोचा कि चलो इसके साथ गेम ही खेल लेते हैं.
 
खाने के समय भी हम दोनों डाइनिंग टेबल पर आमने सामने बैठे हुए थे, टेबल पर टेबल क्लॉथ पड़ा हुआ था, मीना उसके नीचे से मेरी जांघों में अपना पैर टिका कर बैठी हुई थी और बार बार मेरे लंड को पैर से छू रही थी.

खाना खाकर हम जब अपने कमरे में आये तो पता चला कि मौसा मौसी कहीं बाहर जा रहे थे.जैसे ही वो गेट के बाहर हुए तो मीना और टीना दोनों दौड़ कर मेरे कमरे में आ गई और मेरे कमरे का निरीक्षण करने लगी. मैं भी उनको बहुत मना कर रहा था लेकिन वो मान ही नहीं रही थी.

तब मैं मीना के पीछे अपना पैंट में से खड़े लंड को उसके साड़ी से ढके चूतड़ों में टिका कर खड़ा हो गया. वो भी मेरे लंड को महसूस कर रही थी और उसने भी धीरे धीरे अपने चूतड़ों को हिलाना शुरू कर दिया.उधर टीना हम दोनों के खेल से अनजान मेरी किताबों को देख रही थी.

मीना ज़्यादा भरे हुए शरीर वाली और उभरे चूतड़ों और मोटे सॉलिड मुम्मों वाली लड़की थी. मीना ने इस लंड चूत के घर्षण का आनन्द लेना शुरू कर दिया, अब उसने अपना बायां हाथ मेरे लंड पर रख दिया और सहलाने लगी.

मैंने उसके कान में कहा- अगर तुम चाहो तो और भी ज़्यादा आनन्द लिया जा सकता है.उसने बगैर मुड़े ही फुसफुसा दिया- कैसे और कहाँ?मैं बोला- मैं जा रहा हूँ और तुम थोड़ी दूर से मेरे पीछे आना शुरू कर दो और टीना को भी बता आना कि तुम यहीं हो.

उसने हामी में सर हिला दिया और मैं चुपके से बाहर निकल आया और चलते चलते पीछे मुड़ कर भी देखता रहा कि मीना आ रही है न!मैं चुपके से चलते हुए पीछे के एक कमरे में चला गया जिसका दरवाज़ा खुला रहता था.थोड़ी देर बाद मीना भी वहाँ आ गई और मैंने झट से उसको अंदर खींच लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया.

अब मैंने उसको कस कर आलिंगन में ले लिया और उसके लबों पर एक बहुत ही हॉट किस करने लगा और अपने हाथों को उसके मोटे चूतड़ों पर फेरने लगा, ब्लाउज के बाहर से ही मैं उसके मुम्मों को किस करने लगा.

वो भी मेरे लौड़े पर टूट पड़ी और पैंट के बटन खोलकर मेरे खड़े लौड़े को अपने हाथ में लेकर मुठी मारने लगी.अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर सका और मीना की साड़ी को ऊपर कर के उसकी चूत को सहलाने लगा, उसकी बालों से भरी चूत एकदम रंगारंग हो रही थी.

मैंने भी पैंट को नीचे सरकाया और लाल मोटे लंड को निकाल लिया और मीना को पलंग पर हाथ रखवाकर खड़ा किया और उसकी चूत को सामने कर लिया और अपने लंड का निशाना साध कर उसकी चूत में पूरी ताकत से डाल दिया.जैसे ही लंड चूत में गया, मीना का मुंह खुल गया और वो आँखें बंद कर चुदाई का मज़ा लेने लगी..

मैंने भी लंड की धक्काशाही तेज़ कर दी और अँधाधुंध लंडबाज़ी शुरू कर दी.इस धक्कमपेल में मीना दो बार छूट गई और दूसरी बार छूटने के बाद उसने खुद ही जल्दी से चूत पर पर्दा गिरा दिया यानि साड़ी नीचे कर के बाहर की तरफ भागी.

यह कमरा असल में हमारा स्पेयर गेस्ट रूम था लेकिन पूरी तरह से सामान से सुसज्जित था. इस कमरे के बारे में सिर्फ मैं और नैना ही जानते थे.जब मैं कमरे में वापस पहुँचा तो टीना वहीं बैठी हुई मेरी किताब को पढ़ रही थी.मैं पलंग पर लेट गया और सोच ही रहा था कि अच्छा हुआ मीना की चुदाई का किसी को पता नहीं चला.

तभी टीना बोली- दीदी का काम कर दिया सतीश?मैं घबरा कर बोला- दीदी का कौन सा काम?मीना बोली- वही… जिसके लिए तुम पर दीदी बार बार दाना फैंक रही थी?मैं बोला- कौन सा दाना और कैसा दाना? बताओ न प्लीज?टीना बोली- तुम मेरे सामने प्लीज वलीज़ ना करो और सीधे से बताओ कि मेरी बारी कब की है?मैं बोला- कौन सी बारी और कैसी बारी?

टीना चेयर से उठी और मेरे बेड पर आ कर बैठ गई और आते ही मेरे लंड को पैंट के बाहर निकाल कर उसको घूरने लगी और फिर बोली- अच्छा है मोटा भी है और लम्बा भी है, मुझको कब चखा रहे हो यह केला?मैं चुप रहा और फिर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा, हँसते हुए बोला- तुम दोनों बहनें कमाल की चीज़ हो.टीना बोली- मैं रात को आपका केला खाने आ रही हूँ.

कहानी जारी रहेगी.
 
दोनों बहनों की चूत चुदाई

टीना बोली- दीदी का काम कर दिया सतीश?मैं घबरा कर बोला- दीदी का कौन सा काम?मीना बोली- वही… जिसके लिए तुम पर दीदी बार बार दाना फैंक रही थी?मैं बोला- कौन सा दाना और कैसा दाना? बताओ न प्लीज?टीना बोली- तुम मेरे सामने प्लीज वलीज़ ना करो और सीधे से बताओ कि मेरी बारी कब की है?मैं बोला- कौन सी बारी और कैसी बारी?

टीना चेयर से उठी और मेरे बेड पर आ कर बैठ गई और आते ही मेरे लंड को पैंट के बाहर निकाल कर उसको घूरने लगी और फिर बोली- अच्छा है मोटा भी है और लम्बा भी है, मुझको कब चखा रहे हो यह केला?मैं चुप रहा और फिर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा, हँसते हुए बोला- तुम दोनों बहनें कमाल की चीज़ हो.टीना बोली- मैं रात को आपका केला खाने आ रही हूँ.

मैं बोला- मौसी जी और मौसा जी भी तो हैं क्या उनका डर नहीं है तुम को?टीना बोली- उनको मैं संभाल लूंगी वैसे भी दोनों रात को नींद की दवाई खा कर सोते हैं सो उनको कुछ पता नहीं चलेगा.मैं बोला- मीना को तो पता चल जाएगा न उसका क्या करोगी?टीना बोली- हम दोनों एक दूसरी से कुछ भी नहीं छुपाती.मैं बोला- इतना भरोसा है तो आ जाओ अभी कुछ नमूना पेश कर देते हैं!टीना बोली- ठहरो, मैं ज़रा देख कर आती हूँ कि मीना क्या कर रही है.

यह कह कर टीना गई और जल्दी ही वापस आ गई और बोली- मीना तो सो रही है तुमसे सेक्स करवाने के बाद शायद थक गई होगी.जल्दी से उसने भी अपनी साड़ी ऊपर उठा दी और मैं उसकी काली झांटों से भरी चूत को साफ़ देख सकता था, काफी उभरी हुई चूत थी.उसने मेरे लौड़े को पैंट से निकाला और झट से मेरे ऊपर बैठ गई, अपने आप ही उसने मेरे लंड को अपनी टाइट चूत में डाला और मेरे गले में बाहों को डाल कर ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे होने लगी.मैंने उसके छोटे गोल चूतड़ों को अपने हाथ में थामा हुआ था और वो मज़े से झूला झूल रही थी.

उसकी चूत टाइट और बहुत ही रसीली थी और अपनी बड़ी बहन से वो ज़्यादा जानकार और चुदक्कड़ लगी. 5-6 मिन्ट में वो झड़ गई और मेरे जिस्म से चिपक कर हल्के से काम्पने लगी.लेकिन अभी उसका मज़ा पूरा नहीं हुआ था, मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और मैं उसके ऊपर पैंट और शर्ट पहने ही चढ़ गया, उसके छोटे और गोल मुम्मों को हाथ से सहलाने लगा और फिर मैंने उसको ठीक ढंग से चोदना शुरू किया.तेज़ और धीमे धक्कों से मैं उसको फिर छूटने के कगार पर ले आया, पूरा निकाल कर पूरा अंदर डालने लगा और वो चंद मिनटों में फिर से झड़ गई.मैं जल्दी से उसके ऊपर से उठा और अपने कपड़े ठीक ठाक करने लगा और वो भी साड़ी नीचे कर के कमरे के बाहर हो गई.

उसके जाने के बाद नैना कमरे में आई और मुस्कराते हुए बोली- वाह छोटे मालिक, दोनों लड़कियों का काँटा खींच दिया आपने?मैंने हैरान होकर उससे पूछा- तुमको कैसे पता चला नैना डार्लिंग? तुम तो सारा टाइम बाहर थी ना!नैना हँसते हुए बोली- मुझ से कुछ नहीं छुपा रहता, मैंने इन लड़कियों को कल ही भांप लिया था कि दोनों ही चुदक्कड़ हैं और फिर लंच पर आपके साथ वो जो कुछ कर रही थी उसको मैं दबी आँखों से देख रही थी.

मैं बोला- वो दोनों रात को भी आने का प्रोग्राम बनाना चाहती हैं लेकिन मुझको डर लग रहा है मौसी से, वो बड़ी ही तेज़ है.नैना बोली- वही तो, मेरी मानो तो इनसे दूर रहो तो अच्छा है.मैं बोला- वो टीना कह रही थी कि मौसी और मौसा जी रात को सोने की दवाई खा कर सोते हैं, तो उनको कुछ पता नहीं चलता है.नैना बोली- छोटे मालिक, आप की क्या मर्ज़ी है? दोनों को चोद तो बैठे हो, क्या अभी और चोदने की इच्छा है?मैं बोला- वो तो जल्दी जल्दी की चुदाई थी, मज़ा नहीं आया ख़ास… तुम कहो तो रात को उन दोनों के साथ फिर हो जाए?

नैना मेरी मर्ज़ी जान गई थी, बोली- ठीक है मैं उन दोनों का इंतज़ाम कर दूंगी और मौसा मौसी को भी संभाल लूंगी.मैं बोला- नैना रानी, तुम वाकयी में हीरा हो मेरे दिल में बसे प्यार का ज़खीरा हो.रात को पारो ने खाना इस कदर लज़ीज़ बनाया कि सबने बड़ी तारीफ की ख़ास तौर से मौसा जी ने!

खाना खाने के बाद हम बच्चे बैठक में ही बैठ कर बातें करने लगे और वहीं नैना ने उन दोनों बहनों की मर्ज़ी जानने की कोशिश की.मीना बोली- 12 बजे तक मम्मी पापा गोली खाकर बड़ी गहरी नींद में सो जाते हैं, उस टाइम हम दोनों सतीश के कमरे में आने वाली हैं.नैना बोली- वो तो ठीक है लेकिन अगर कहीं मौसी जाग गई तो फिर क्या होगा?मीना बोली- हम अभी उनके कमरे में जाएंगी और वो खुद मेरे हाथ से रोज़ की तरह अपनी दवाई खाएंगे. तब तो कोई प्रॉब्लम नहीं नैना दीदी?
 
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