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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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पूनम की दिल खोल कर चूत चुदाई

नैना हैरान होकर हंसने हुए बोली- छोटे मालिक, यह लड़की आपकी चोट की है, देख लेना यह तुमको हरा देगी.

अगले दिन पूनम और मैं जब कॉलेज पहुँचे तो मेरे एक सहपाठी मित्र मिल गए और बोले- सतीश यार, तुमने नोटिस बोर्ड देखा क्या?मैं बोला- नहीं यार, मैं तो अभी कॉलेज आया हूँ. क्या ख़ास बात लिखी है वहाँ?वो बोला- तुम देख लो तो पता चल जाएगा. यह कौन है तुम्हारे साथ?मैं बोला- यह पूनम है, मेरी कजिन मेरी ही क्लास में आई है अभी अभी!दोनों ने एक दूसरे को नमस्कार किया और फिर हम तीनों नोटिस बोर्ड पढ़ने चले गए.

वहाँ एक ट्रिप के बारे में नोटिस लगा था जो उसी महीने होना था.यह ट्रिप दिल्ली और आगरा भर्मण के बारे में था, दो रात और 3 दिन का ट्रिप था और खास तौर से इतिहास के छात्रों के लिए था, एक सौ रूपए प्रति छात्र का खर्च था, वो छात्र जो इस ट्रिप में भाग लेना चाहते थे 3 दिन में जमा करवाना था.

मैं और पूनम अपनी क्लास में पहुँचे तो वहाँ इस ट्रिप की ख़ास चर्चा हो रही थी.मैंने पूनम से कहा- तुम चलोगी क्या इस ट्रिप में?पूनम बोली- जाने की इच्छा तो है लेकिन मम्मी पापा से पूछना पड़ेगा और इतनी जल्दी पैसों का भी इंतज़ाम होना मुश्किल है तो तुम हो आओ!मैंने कहा- मैं मम्मी पापा से पूछता हूँ और तुम भी आज घर में जाकर पूछ लेना. पैसों की फ़िक्र ना करो!

बाद में पता चला कि ट्रिप की इंचार्ज निर्मला मैडम होंगी और उनका साथ एक और लेडी प्रोफ़ेसर देंगी.

शाम को घर पहुँच कर मैंने मम्मी को फ़ोन से पूछ लिया और उन्होंने कहा- चले जाओ, लेकिन हर रोज़ फ़ोन ज़रूर करते रहना.पूनम ने जब घर में पूछा तो उन्होंने कहा- क्या सतीश भी जा रहा है और पूनम ने कहा हाँ तो उन्होंने कहा ‘चली जाओ’ लेकिन अपना प्रोग्राम बताती रहना हर रोज़.

रात आई और खाना खाकर हम तीनों बैठक में बैठे दिल्ली आगरा ट्रिप की ही बात कर रहे थे.हम तीनों ने यह जगह अभी तक नहीं देखी थी तो नई जगह देखने की उत्सुकता थी लेकिन फिर मन में संशय भी था कि आपसी चुदाई कैसे हो पायेगी.

नैना ने मेरी तरफ भेदभरी नज़र से देखा और शायद वो नैनीताल ट्रिप के बारे में सोच रही थी.मैंने नैना से पूछा- वो नैनीताल ट्रिप के बारे में पूनम को बता दें क्या?वो बोली- देख लो छोटे मालिक, क्या पूनम हमारा यह राज़ रख पाएगी?

पूनम बोली- कौन सा राज़ सतीश?मैं बोला- बड़ा ही भयानक राज़ है, अगर किसी को पता चल गया तो मैं कहीं का नहीं रहूँगा, मेरी इज़्ज़त की धज्जियाँ उड़ जाएंगी.पूनम अब बहुत उत्सुक हो गई और ज़ोर देकर पूछने लगी तो मैंने कहा- कसम खाओ यह राज़ तुम किसी को नहीं बताओगी?पूनम बोली- कसम से, तुम्हारी इत्ती सी की कसम खाती हूँ.मैं और नैना दोनों हंस पड़े.

तब मैंने उसको नैनीताल ट्रिप का राज़ बताया कि कैसे चार लड़कियों ने मिल कर मेरा देह शोषण किया और एक बार नहीं, कई बार किया. और हर बार लड़कियों को कम और मुझको ज़्यादा मज़ा आया और यह था जबरदस्ती का मज़ा.पूनम बोली- वो लड़कियाँ अभी कॉलेज में हैं क्या?मैं बोला- हाँ हैं, और रोज़ मुझको पूछती हैं जोर आजमाइश करें क्या?पूनम बोली- आप क्या कहते हो उनको?मैं बोला- मैं कहता हूँ अकेली हो या फिर 3-4 हैं और भी? वो हमेशा यही कहती है वही अकेली है. और मेरा जवाब होता है मैं अकेली लड़की से देह शोषण नहीं करवाता, तीन चार मिल कर आओ तो करवा भी लूंगा.

नैना पूनम के पीछे बैठी थी और वो मुंह में साड़ी का पल्लू डाल कर ज़ोर से हंस रही थी.अब पूनम समझ गई कि मैं उसकी टांग खींच रहा हूँ, वो रूठने का नाटक करते हुए बोली- हमको नहीं सुननी तुम्हारी देह शोषण की कहानी.

मैं बोला- तुम सुनाओ, तुम्हारे साथ क्या हुआ था यार?पूनम बोली- मेरे साथ क्या होना था सतीश ठाकुर? और क्यों होना था रंगीले ठाकुर?मैं बोला- कुछ तो हुआ होगा ना जो तुम्हारी सील टूटी थी?पूनम शर्माती हुई बोली- वो तो आम की वजह से हुआ!

मैं और नैना हैरान हो कर बोले- आम? कौन सा आम? कैसा आम? और उससे सील टूटने का क्या सम्बन्ध हो सकता है?पूनम संजीदा होते हुए बोली- वो ऐसा है, जब मैं छोटी थी तो गाँव में अपने ही आमों के बाग़ में कुछ सहलियों के साथ आम तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ी थी लेकिन आम तोड़ने के बाद मैं जब नीचे उतर रही तो मेरा पैर फिसल गया और वहाँ में गिर गई और मेरी जो ‘वो’ है न, उससे बड़ा खून गिरा. फिर डॉक्टर ने मम्मी को बताया कि इस हादसे में सील टूट गई है.

मैंने और नैना ने बड़ा अफ़सोस जताया और मैंने उसको तसल्ली दी और कहा- कोई बात नहीं, नई लगवा लेना लखनऊ में!पूनम बोली- अब नई नहीं लगती प्यारे मोहन!मैं बोला- ऐसा क्यों? मेरा भी ‘इत्ता’ सा साला चूहा खा गया था एक रात को लेकिन नैना मेरे साथ गई थी और नया मोटा और बड़ा लगवा लिया था एक ख़ास दुकान थी हज़रात गंज में. क्यों नैना?
 
नैना तो अब हंसी के मारे सोफे के नीचे लुढ़क गई थी.पूनम कुछ समझ नहीं पा रही थी यह क्या हो रहा है.फिर भी वो इतना तो समझ गई थी कि मैं उसके साथ मज़ाक कर रहा हूँ.उसने सोफे के पास एक छड़ी पड़ी देखी तो उसको उठा कर मुझ को मारने के लिए दौड़ी और मैं भी दौड़ कर बाहर निकल गया.

अब वो मेरे पीछे भाग रही थी और मैं छुपने की जगह तलाश रहा था. फिर मैं एक खुले दरवाज़े में घुस गया और वहाँ छुप गया.पूनम ढूंढती हुई जैसे ही उस कमरे में घुसी, मैंने उसको पीछे से अपनी बाहों में दबोच लिया, मेरा खड़ा लंड उसकी गांड में घुसने की कोशिश कर रहा था और वो कसमसा कर छूटने की कोशिश कर रही थी.उसके हाथ की छड़ी मैंने अब अपने हाथ में ले ली थी और बोला- हिम्मत है तो छूट के दिखा पुन्नो?पूनम बहुत ज़ोर लगा रही थी लेकिन मेरी भी पकड़ ठाकुरों वाली थी सो आसानी से छूटने वाली नहीं थी.

मेरा लौड़ा तो आदतन खड़ा ही था तो उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी गांड में घुसने की कोशिश में था.इस पकड़ा पकड़ी में मेरा लंड बहुत ही अकड़ गया था तो मैं बिना कुछ सोचे समझे ही उसकी साड़ी पीछे से ऊपर उठाई और अपने लौड़े को पैंट से निकाल कर उसकी फूली हुई चूत में घुसेड़ दिया.

लौड़ा अंदर जाते ही पूनम का मुंह मेरी तरफ हुआ और मैंने झट से अपना मुंह उसके मुंह से चेप दिया, उसकी कमर को कस कर पकड़ कर मैं धीरे धीरे से लंड को चूत के अंदर बाहर करने लगा.जैसे जैसे लंड की गर्मी चूत में जा रही थी वैसे वैसे ही पूनम ढीली पड़ती जा रही थी.

अब मैंने उसको पलंग के किनारे पर हाथ टेक कर खड़ा कर के पीछे से धुआँ धार चुदाई शुरू कर दी. मेरा लंड अब पूनम की चूत से पूरा वाकिफ हो गया था, वो उसकी हर हरकत को पहचान गया था.थोड़ी देर में पूनम एकदम अकड़ी और फिर काफी ज़ोर से कांपी और बेड पर अपना सर रखने लगी.

मैंने उसको अपनी तरफ मोड़ा और उसके लबों पर एक गहरा चुम्बन दे दिया, वो और भी सब लड़ाई भूल कर मेरे को टाइट जफ्फी डाल कर मेरे गले में झूल गई.फिर हम दोनों संयत हो कर बैठक में लौटे.

और हम को देखते ही नैना समझ गई कि चूत चुदाई हो गई है.पूनम मुझको छोड़ कर सीधे ही नैना की गोद में बैठ गई. मैं भी नैना की गोद में बैठने की ज़िद करने लगा और फिर हमारी धींगा मस्ती शुरू हो गई जो उम्मीद के अनुसार बिस्तर पर खत्म होनी थी सो वो वहीं ख़त्म हुई.

आज नैना काफी खुश लग रही थी, जब मैंने पूछा- क्या बात है?तो वो बोली- तुम दोनों की लड़ाई देख कर मन बड़ा प्रसन्न हो रहा है. बड़े दिनों बाद इस कोठी में यह हंसी ठट्ठा हो रहा है.

मैं बोला- हाँ नैना, तुम शायद ठीक कह रही हो. बड़े दिनों बाद ऐसी लड़की मिली है जो बहुत ही शरारती और चुलबुली है. यह वाकयी में एक मनमोहक लड़की है, जिस घर में जायेगी वहाँ यह तूफान पैदा कर देगी.नैना बोली- हाँ छोटे मालिक, आप ठीक कह रहे हो.

मैं बोला- सोचो ज़रा देर सोचो की बाग़ में आम खाने गई और अपनी चूत फड़वा आई. वाह वाह… क्या बात है पूनम के चाँद की!

पुन्नो बोली- हाँ हाँ, कह लो जितना कह सकते हो. अपना नहीं देखते जब भी बाहर निकलते हो अपना दैहिक शोषण करवा कर आते हो?यह सुन कर मैं और नैना बड़े ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे.मैं बोला- तभी मैं कहूँ, वो ससुर रिक्शा वाला भी पूछ रहा था कि सब ठीक है न कहीं देह शोषण तो नहीं हुआ तुम्हारा आज बबुआ?यह सुन कर पुन्नो और नैना बहुत हंसी.

अब मैं अपने बैडरूम में आ गया और कपड़े उतार कर सोने की तैयारी में लग गया.इतने में पूनम भी आ गई और मुझको नंगा लेटा हुआ देख कर ज़ोर ज़ोर से तालियाँ बजाने लगी- सतीश की शेम शेम… शेम शेम… नंग धडंग लेटा है बेशर्म कहीं का! तुझको मालूम नहीं माँ बहन का घर है कपड़े पहन कर लेटते हैं?मैं नकली हैरानी में बोला- किधर हैं माँ बहन? कहाँ हैं वो दोनों देखूँ तो सही?पूनम बोली- आ रहीं हैं, अभी तुम्हारे कान पकड़ती हैं.

इतने में नैना अंदर आ गई और मुझ को नंगा लेटे देख कर वो तो हंस पड़ी लेकिन पूनम बोली- देखिये ना सासू जी, यह आपका छोरा तो नंग धड़ंग बेशर्म हो कर लेटा है?नैना हँसते हुए बोली- तो बहु, तुम भी नंग धड़ंग उसके संग लेट जाओ. तुम नहीं लेटोगी तो मैं लेट जाऊँगी.यह कह कर नैना भी अपने कपड़े उतारने लगी और नग्न होकर वो मेरे ही पलंग पर आकर लेट गई और मेरे खड़े लंड के साथ खेलने लगी.

यह देख कर पूनम के मुंह पर ताला पड़ गया लेकिन वो भी पक्की ठकुराईन थी, वो भी जल्दी से अपने कपड़े उतार कर मेरे दूसरी तरफ आकर लेट गई.मैंने भी नैना के मुम्मों को सहलाना शुरू कर दिया और साथ में उसकी चूत में ऊँगली से उसकी भग को भी दबा रहा था.यह देख कर पूनम अब मेरे लौड़े को पकड़ने की कोशिश कर रही थी लेकिन उस पर तो नैना ने कब्ज़ा जमाया हुआ था.
 
पूनम को जब और कुछ नहीं सूझा तो वो मेरे मुंह पर अपना मुंह रख कर मुझको चूमने लगी, मैं भी उसके मुंह में अपनी जीभ डाल दी और उस को गोल गोल घुमाने लगा.फिर मैंने नैना को कहा- नैना, तुम आज पूनम को चुदाई की थोड़ी ट्रेनिंग दे दो. कैसे क्या करते हैं यह उसको पूरा मालूम होना चाहिये ना!नैना बोली- ठीक है, पूनम तुम मेरी इस तरफ आ जाओ!

जब पूनम नैना की दूसरी साइड में चली गई तो मैं तब नैना के मुम्मे चूसने लगा, उसकी बालों से भरी चूत पर हाथ फेरने लगा और फिर उसके एकदम स्पाट पेट पर अपने हाथ फेरने लगा.नैना का जिस्म बहुत ही सुंदर ढंग से तराशा हुआ एक मुजस्मा लग रहा था हालांकि उम्र के हिसाब से वो हम सबसे बड़ी थी. उसके शरीर के सारे अंग एक साँचे में ढले हुए लग रहे थे, उसके सामने पूनम का शरीर अभी एक किशोर बालिका के समान ही लग रहा था.

आज जब मैं नैना के बारे में सोचता हूँ तो मुझे खजूराहो के मंदिरों में तराशी हुई सुन्दर स्त्रियों के समान उसका बदन लगता है.

नैना इस बीच पूनम को मस्त करने में लगी हुई थी, उसके मुम्मों को चूसने के बाद वो उसके पेट से होती हुई उसकी चूत पर जा कर रुक गई.नैना पूनम की चूत को चाटने लगी, पहले धीरे धीरे से उसने उसकी चूत के उभरे हुए लबों को चूमा और फिर जीभ का तिकोना बना कर उसने उसकी चूत के अंदर डाली और उसको गोल गोल घुमाई.वहाँ से वो उसके भग पर आ गई और उसको जीभ से पहले हल्के से चाटा और फिर उसको होटों के बीच लेकर चाटने लगी.

यह करते ही पूनम की कमर एकदम ऊपर उठ गई और मैंने मौका देख कर उसके गोल छोटे मुम्मों को अपने मुंह में ले लिया और उनको और उनके चुचूकों को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगा.इस डबल अटैक से पूनम एकदम बड़ी ज़ोर से झड़ गई और उसकी दोनों गोल सफ़ेद झांगें नैना की गर्दन के इर्द गिर्द लिपट गई और उसके चेहरे को उन्होंने जकड़ लिया और साथ ही वो बहुत तीव्र कंपकंपी महसूस करने लगी.मेरे भी सर को भी उसने अपनी छाती के साथ जोड़ दिया और फिर मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी.देखते देखते ही वो एकदम ढीली पड़ गई.

तब नैना मेरी तरफ मुड़ी और पूनम की चूत के रस से भीगा हुआ मुंह उसने मेरे मुंह से जोड़ दिया और मेरी जीभ को चूसने लगी.पूनम की चूत की भीनी खुशबू मेरे मुंह में भी आ गई और जैसे सांड मुंह ऊपर उठा कर गाय की चूत के रस को सूंघता है वैसे ही मैं भी सूंघता हुआ नैना के ऊपर चढ़ गया.नैना की टांगें हवा में लहरा उठी अब मेरी चुदाई का पहला दौर शुरू हुआ.

नैना की चूत की हर हरकत से मैं वाकिफ था और वो लंड के सब थपेड़े झेल चुकी थी इसलिए उसने आँखें बंद कर आनन्द लेना शुरू कर दिया.क्योंकि यह लंड चूत का तमाशा पूनम के लिए खास तौर से आयोजित किया जा रहा था तो उसको इस खेल की हर चाल दिखानी ज़रूरी थी.अब मैं पलंग पर बैठ गया और बगैर लंड को अलग किये मैंने उसको अपनी गोद में ले लिया और अब मैंने बैठ कर लंड घिसाई का कार्य शुरू किया.थोड़ी देर इस पोज़ में चोदा नैना को, फिर नैना को इशारा किया और मैं लेट गया, नैना मेरे ऊपर आ गई बिना चूत लंड को अलग किये.

थोड़ी देर इस पोज़ में अपने करतब दिखाए पूनम को… फिर मेरे इशारे पर नैना घोड़ी बन गई और मैंने उसको इस पोज़ में खूब ज़ोर ज़ोर से चोदा. जब वह 2-3 झड़ गई तो मैंने उसको आखिरी बार फुल स्पीड से चोदा.

अब मैंने पूनम को इशारा किया तो वो भी नैना के साथ घोड़ी बन कर नैना के साथ बैठ गई.मैंने नैना के ऊपर चढ़े हुए ही पूनम की चूत में हाथ लगाया तो वो अत्यंत गीली हो चुकी थी, मैं नैना की घोड़ी को रोक कर पूनम की घोड़ी पर जा बैठा.

पूनम को काफी देर मैंने इस तरह चोदा और उसने खुद कहा- सतीश, मैं थक गई हूँ प्लीज बस करो.मैंने कहा- सच्ची में थक गई हो क्या?पूनम बोली- सतीश, हाँ सच्ची में थक गई हूँ!मैं बोला- कसम खाओ कि आगे से कभी नहीं छेड़ोगी मुझको?पूनम बोली- कसम से… कभी नहीं छेड़ूंगी.मैं बोला- चलो माफ़ किया इस ठकुराईन को, एक बार और छूटा ले ना अगर मन हो तो?पूनम बोली- नहीं ना… अब और नहीं.

यह सुन कर मैंने एक आखिरी राउंड धक्कों का मारा और नीचे उतर गया.नैना ने हमारे लिए शर्बत तैयार किया हुआ था, वो पी कर हम तीनों एक दूसरे की बाहों में सो गए.

कहानी जारी रहेगी.
 
कॉलेज में मिली नई दोस्त चूतें

अगले दिन कॉलेज में हम दोनों ने अपने नाम भी लिखवा दिए और पैसे भी जमा करवा दिए.अगले हफ्ते का प्रोग्राम बना था जिसमें रात को ट्रेन से दिल्ली जाना था और एक दिन और रात दिल्ली रहना था, और अगली सुबह बस से आगरा के लिए निकलना था, वो रात आगरा में रहना था और फिर लखनऊ की वापसी थी.

मैं सोच रहा था कि मैडम साथ है तो शायद चुदाई का मौका ही न मिले पूनम या फिर किसी और लड़की के साथ!लेकिन मेरा इस बात पर कोई बस नहीं था.

अगले दिन मैडम ने दिल्ली, आगरा जाने वाले लड़कों और लड़कियों की मीटिंग बुलाई जिसमें उन्होंने पूरा कार्यक्रम समझा दिया, यह भी बता दिया कि 2 फर्स्ट क्लास के कूपे में लड़कियाँ रहेंगी और लड़के भी इसी तरह लड़कों के लिए तय कूपे में रहेंगे.

मैंने जाने वाली लड़कियों की तरफ ध्यान से देखा, सब अच्छे घरों की लग रही थी और उनमें से मैं किसी को भी नहीं जानता था.

मीटिंग खत्म होने पर 2 लड़कियाँ मेरी तरफ आ रहीं थी, मैं रुक गया, एक लड़की बोली- क्या तुम ही सतीश ठाकुर हो?मैं हैरानी से बोला- जी हाँ मैं सतीश हूँ, बोलिए क्या सेवा कर सकता हूँ आपकी?तब वो लड़की मुस्कराते हुए बोली- सेवा वेवा नहीं करवानी है, बस तुम से मिलना था सो पूछ लिया. अगर खाली हो तो कुछ समय के लिए कैंटीन में आ सकते हो क्या?मैं बोला- कोई खास काम है क्या?वो लड़की फिर बोली- नहीं कोई खास काम नहीं था, बस सोचा कि ट्रिप पर जाने वाले लड़के लड़कियों के साथ थोड़ा परिचय कर लिया जाए!मैं बोला- ज़रूर, चलें क्या?उन्होंने सर हिला दिया और मैं और पूनम उन के साथ चलने लगे.

कैंटीन पहुँच कर उन्होंने अपना परिचय दिया, भरे निस्म वाली गोरी लड़की जो सलवार कमीज़ में थी उसका नाम जसबीर था और उसके साथ वाली लड़की जो थोड़ी लम्बी और गंदमी रंग वाली थी, उसका नाम नेहा था.मैंने कहा- आप दोनों से मिल कर बड़ी ख़ुशी हुई, मेरे साथी लड़की का नाम है पूनम और मेरा नाम तो आप जानती ही हैं.

हम सबने कोकाकोला पिया और फिर बातें होने लगी.वो दोनों ही इंटर के दूसरे वर्ष में थी यानि हम दोनों से एक वर्ष आगे थीं.

फिर जसबीर बोली- क्या आप दोनों साथ साथ रहते हैं?पूनम बोली- जी हाँ, मैं कुछ दिनों से इनकी कोठी में ही रह रही हूँ और सतीश मेरे कजिन हैं.जसबीर बोली- वो क्या है कि हम चाहती थी कि सतीश जी से ट्रिप पर जाने से पहले दोस्ती कर लें तो शायद ठीक रहेगा.मैं बोला- वह तो ठीक है लेकिन इतने लड़कों से सिर्फ मुझको दोस्ती के लिए चुनना कुछ अजीब लग रहा है, क्यों पूनम?

पूनम चुप रही लेकिन मैं बोला- चलो ठीक है हम दोनों को आपकी दोस्ती कबूल है! और हुक्म दीजिये?अब नेहा बोली- सतीश तुम्हारे बारे में हमने बहुत कुछ सुन रखा है, हम चाहती हैं कि आप दोनों हमारे जिगरी दोस्त बन जाएँ तो अच्छा हो.मैंने पूनम की तरफ देखा और बोला- आप दोनों कहाँ रहती हैं लखनऊ में?नेहा बोली- आपकी कोठी के पास मेरा बंगलो है और उससे थोड़ी दूर जसबीर रहती है.मैं बोला- अगर आप फ्री हों तो आज या कल हमारे गरीबखाने आ जाएँ तो खुल कर बातें हो सकती हैं.जसबीर बोली- ठीक है, हम आप को बाद में बता देती हैं कि आज या कल का प्रोग्राम बन सकता है.मैं बोला- ठीक है आज जाने से पहले बता दीजियेगा.

अगले दिन मैं पूनम क्लास के बाहर खड़े थे क्यूंकि प्रोफेसर साहिब नहीं आये थे तभी देखा जसबीर और नेहा आ रही थी.मैं बोला- ठीक है आप आ जाओ, आप लंच करना चाहेंगी मेरी कोठी में?नेहा बोली- नहीं लंच हम कर के आएँगी. आप दोनों गेट के पास मिल जाना तो मैं आपको अपनी कार में ले जाऊँगी. ओके?

कॉलेज की छुट्टी पर हम सब नेहा की कार में बैठ कर मेरी कोठी में पहुँच गए.नैना को मैंने पहले ही फ़ोन कर दिया था सो वो नाश्ता इत्यादि टेबल लगा कर बैठी हुई थी.हम सब बैठक में बैठ गए और नैना और पूनम ने नाश्ता प्लेट्स में लगा दिया.

नाश्ता और चाय पीने के बाद हम सब बैठक में सोफों पर आ बैठे और हलकी फुल्की बात चीत शुरू हो गई.फिर मौका देख कर मैंने बात छेड़ी- हाँ, अब बताओ जस्सी जी और नेहा जी, आपका क्या प्रोग्राम है?

जस्सी ही बोली- ऐसा है सतीश यार, हम को तुम्हारे बारे में उड़ती हुए खबर लगी थी कि आप काफी रोमांटिंक हो और नैनीताल ट्रिप में आपने कुछ लड़कियों को काफी एंटरटेन किया था. इसी लिए हमने सोचा कि अगर आप हमारे दोस्त बन जाओ तो यह 3-4 दिन का बोरिंग ट्रिप अच्छा निकल जाएगा और हम एक दूसरे को काफी एंटरटेन कर सकेंगे. क्यों तुम्हारा क्या विचार है?मैं बोला- आपने जो उड़ती हुए खबर मेरे बारे में सुनी, वो तो काफी हद तक ठीक है और मैं इस से इंकार नहीं करता लेकिन इसको दुबारा रिपीट करना क्या ठीक होगा?
 
अब नेहा बोली- मुझको जान कर ख़ुशी हुई सतीश कि तुम काफी फ्रैंक हो और हमारी बात को इतनी जल्दी समझ गए हो. दरअसल हमारी इच्छा थी कि हम तुम्हारे दोस्त बन जाएंगे तो हमें भी एक दूसरे को एंटरटेन करने का मौका मिल जाएगा.मैं बोला- आप दोनों ने अपनी बात बड़े अच्छे ढंग से रख दी है, अगर आपको नैनीताल ट्रिप के बारे में पता चला है तो यह भी पता चल गया होगा कि वहाँ क्या हुआ था?

जस्सी बोली- वही तो सुन कर हमको काफी अचरज हुआ लेकिन फिर सोचा शायद वो लड़कियाँ जानबूझ कर बात बहुत बढ़ा चढ़ा कर बता रही हैं तो हम खुद इसको आज़माना चाहती हैं.मैं अब हँसते हुए बोला- यानि आप को पूरा ज्ञान है कि मेरे से दोस्ती का मतलब क्या है और आप दोनों उसका अनुभव स्वयं करना चाहती हैं.अब जस्सी और नेहा दोनों ही मुस्करा पड़ी.

मैंने पूनम की तरफ देखा और कहा- यह मेरी कजिन पूनम है जो मेरे साथ ही मेरी क्लास में पढ़ने के लिए आई है और मेरे साथ ही रह रही है और यह भी दिल्ली आगरा ट्रिप में जा रही है, आप दोनों कृपा करके इससे पूछ लीजिये कि क्या आपसे दोस्ती इनको बर्दाश्त होगी?जस्सी ने पूनम से पूछा- क्यों पूनम, तुम्हारी क्या राय है हमारे साथ दोस्ती के बारे में?पूनम बोली- मुझको तो आपके साथ दोस्ती करके बहुत ही ख़ुशी होगी. आप दोनों मुझ से बड़ी हैं और शहर की रहने वाली है तो आपकी दोस्ती से मुझको काफी फायदा होगा लेकिन यह नैनीताल ट्रिप के बारे में मुझको कुछ खास नहीं पता! हाँ, इतना जानती हूँ कि इस ट्रिप में सतीश का जबर चोदन हुआ था, शायद 3-4 लड़कियों ने इसके साथ ज़बरदस्ती की थी! क्यों सतीश?

मैं और वो दोनों भी ज़ोर से हंस पड़ी.जस्सी बोली- क्यों सतीश यह सही है क्या? उन 4 लड़कियों ने तुम्हारा जबर चोदन किया था?मैं नकली गुस्से में बोला- हाँ, किया तो था लेकिन अगले दिन उनमें से दो फिर आ गई थी मेरा जबर चोदन करने के लिए लेकिन मैंने मना कर दिया.अब जस्सी बोली- उफ़, मेरी माँ… लेकिन तुमने मना क्यों किया?मैं बहुत ही संजीदा होते हुए बोला- मैंने उन दो को साफ़ कह दिया कि मैं सिर्फ 2 लड़कियों से जबर चोदन नहीं करवाता अगर करवाना ही है तो कम से कम 4 लड़कियाँ होनी चाहिए?जस्सी और नेहा तो हंसी के मारे लोटपोट हो गई.

मैं उसी टोन में फिर बोला- अब आप सिर्फ दो लड़कियाँ हैं तो मेरा जबर चोदन होना तो मुश्किल है.जस्सी बोली- क्या आप चाहते हों कि हमारे ग्रुप में 2 लड़कियाँ और हों तो काम बनेगा?मैं बोला- नहीं नहीं, मैंने यह नहीं कहा, यह तो सिर्फ मज़ाक की बात हो रही है, वैसे पूनम को मिला कर आप 3 लड़कियाँ तो हैं इस ग्रुप में तो मेरा जबर चोदन तो आप कभी भी कर सकती हैं?

नेहा बोली- क्या अभी भी हो सकता है तुम्हारा चोदन सतीश?मैं मज़ाक की टोन में बोला- जबर चोदन करवाने वाला तो अभी भी बैठा है लेकिन जबर चोदन करने वाली लड़कियाँ भी तो होनी चाहये ना?अब जस्सी और नेहा की सूरत देखने वाली थी, दोनों शर्म से लाल हो रही थी.

इतने में नैना कमरे में दाखिल हुई, नैना ने आते ही बोला- कौन किस का जबर चोदन कर रहा है?मैंने नैना का परिचय दिया- यह नैना जी हैं, यह इस घर की मालकिन है और इस घर को चलाने का सारा ज़िमा इनका है. मैं इन लड़्कियों को बता रहा था कि नैनीताल में क्या हुआ था? मेरा जबर चोदन हुआ था लेकिन मैंने तभी प्रण किया था कि कम कम से तीन या चार लड़कियाँ होंगी तभी चोदन करवाऊंगा नहीं तो नहीं!नैना बोली- हाँ, कम से कम इतनी तो होनी ही चाहिए न.जस्सी और नेहा बेचारी सर नीचे कर के बैठी थी.

तब पूनम ने दोनों लड़कियों से पूछा- अच्छा बताओ क्या आप दोनों सतीश का जबर चोदन करना चाहती हैं?जस्सी बोली- करना तो चाहती हैं लेकिन हम तो सिर्फ दो ही हैं न सो कैसे सतीश का जबर चोदन कर सकती हैं?पूनम बोली- आप घबराओ नहीं, मैं आपके साथ मिल जाती हूँ और फिर हम तीन बदमाशों से कहाँ भाग के जाएगा सतीश?

यह सुनते ही नेहा और जस्सी की बांछें खिल उठीं.जस्सी बोली- सच्ची पूनम तुम हमारे साथ मिल जाओगी? वेरी गुड! सतीश अब तैयार हो जाओ तुम लखनऊ की तीन गुंडियों से नहीं बच सकते? हम तीनों तुमको नहीं छोड़ेंगी.

नैना और मैं उनकी बातें सुन कर बहुत हंस रहे थे.मैं बोला- बस तीन ही सिर्फ? कम से कम चार तो ढूंढ के लाओ!नैना बोली- छोटे मालिक, ज़्यादा ताव मत दिलाओ, नहीं तो गुंडों की सरदार भी इनके साथ मिल जायेगी?मैं थोड़ा चकराया- यह गुंडों की सरदार कौन है जी? और कहाँ से आ रही है? हम भी तो देखें?

नैना अपनी छाती ठोक कर मैदान में आकर खड़ी हो गई, तीनों छोटी गुंडियाँ भी दौड़ कर अपने सरदार के साथ आ कर खड़ी हो गई.मैं थोड़ा घबराया तो सही लेकिन फिर हिम्मत करके एक ज़ोर की दहाड़ लगाई- यह एक शेर की गर्जना है जिससे बड़े बड़े गुंडे बदमाश भी थर थर कांपते हैं! है कोई माई की लाली जो इस भूखे शेर के सामने टिक सके?
 
तभी चारों लड़कियाँ एकदम से मुझ पर झपट पड़ी और मुझको दबोच लिया और मुझको उठा कर मेरे वाले बैडरूम में ले गई.मैं मन ही मन सोच रहा था कि या खुदा अब मेरे लौड़े का बचना मुश्किल है, चार चार गुंडियाँ सतीश का हरण करके ले जा रही हैं, कोई बचाये तो सही!

मेरे कमरे में पहुँचते ही सबने मिल कर मुझको निर्वस्त्र कर दिया और नेहा और जस्सी ने जब मेरा मोटा और लम्बा खड़ा लंड देखा तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गई.उस धींगा मुष्टि में जस्सी ने मेरे लौड़े को अपने हाथ में पकड़ लिया और नेहा ने भी उसको अपने हाथों में ले लिया.फिर मैं उनके हाथों से छूट कर नेहा की साड़ी को उतारने लगा और बाकी की गुंडियाँ भी इस काम में मेरी मदद करने लगी.

नेहा जब नंगी हुई तो उसके मुम्मे देख कर हम सब को बड़ा आनन्द आया क्यूंकि वो एकदम गोल और मोटे थे और बिल्कुल सॉलिड थे ज़रा भी उनमें लटक नहीं आई थी.उसके बाद बारी आई जस्सी की, वो भी नंगी होने पर बहुत ही खूबसूरत लगी, उसके मम्मे भी मोटे और सॉलिड थे लेकिन उसकी ख़ूबसूरती दिख रही थी उसके गोल और सॉलिड लेकिन उभरे हुए चूतड़ों में थी!क्या चीज़ थे यार… वो तो गोल गोल और उभरे हुए थे.

अब बारी थी पूनम की और उसको भी जल्द ही नंगी कर दिया गया और उसके बाद मैंने नैना को भी निर्वस्त्र कर दिया.चार गुंडियों में अकेला लंडबाज़ और वो भी जबर चोदन के लिए तैयार किया जा रहा था.

जब सब मेरे लंड को सहलाने में लगी थी तो मैं उनसे बचने के लिए भाग उठा और भाग कर रसोई में चला गया जहाँ पारो मुझ को नंगा देख कर हैरान हो गई और जब मैंने उसके सामने चिल्लाना शुरू किया कि ‘बचाओ मुझको…’ तो उसने बेलन उठा लिया और मेरे साथ रसोई के बाहर आ गई और बोली- कौन है जो छोटे मालिक को तंग कर रहा है?

और जब उसने चार नंगी औरतों को देखा तो वो समझ गई और वो ज़ोर से बोली- खबरदार किसी ने भी छोटे मालिक को हाथ भी लगाया, काट के रख दूंगी.और मैं जल्दी पारो के मोटे चूतड़ों के पीछे छुप गया और मेरा खड़ा लंड उसकी गांड में घुसने की कोशिश करने लगा.

अब नैना ने पारो को भी पकड़ा और बाकी मुझको पकड़ कर हम दोनों को कमरे में ले आये और सबसे पहले नैना ही पारो की साड़ी उतारने लगी और पूनम और नेहा भी उसको नंगी करने में लग गई.वो बोलती रही- यह क्या कर रहे हो मेरे साथ? मेरे कपड़े क्यों उतार रही हो?

लेकिन कौन सुनता उसकी गुहार… थोड़ी देर में वो भी नंगी हो गई और वो भी गुंडियों की पार्टी में शामिल हो गई और उसने भी मुझको घेर लिया.अब नैना ने कहा- सब मेरी बात ध्यान से सुनो. सबसे पहले छोटे मालिक को लिटा दो पलंग पर और फिर सबसे पहले जस्सी उसके ऊपर चढ़ कर चोदेगी, उसके बाद नेहा और फिर पूनम की बारी है. मैं और पारो बाद में देख लेंगी.

यह सुन कर सबसे पहले दौड़ कर जस्सी मेरे ऊपर बैठ गई और मेरे खड़े लंड को अपनी बालों से भरी चूत में डाल दिया.और नैना ने उसकी कमर को पकड़ कर उसको ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया.मैंने जस्सी के गोल मुम्मों के साथ खेलना शुरू कर दिया और पूनम ने नेहा के सुन्दर मुम्मों को चूसना शुरू कर दिया और पारो पूनम के मुम्मों को अपने हाथ से छूने लगी.

मैं मुंह बना रहा था लेकिन मुझको जस्सी की चूत एकदम टाइट और गीली लगी, मुझको उसको चोदते हुए बड़ा आनन्द आ रहा था.जल्दी ही जस्सी लंड के धक्कों से छूटने के कगार पर पहुँच चुकी थी और वो बगैर किसी की मदद के अब अपने आप ऊपर नीचे हो रही थी और शीघ्र ही वो हाय हाय करती हुए झड़ गई.

नैना ने उसको उसकी मर्ज़ी के खिलाफ मेरे ऊपर से उठा लिया और नेहा को ऊपर आने के लिए कहा.अब नेहा मुझको चोद रही थी और मैं उसके बहुत ही सेक्सी मुम्मों से खेल रहा था.पारो भी अब नेहा के मम्मों को चूसने लगी और पूनम मौका देखते ही मेरे अंडकोष को सहला रही थी और उनकी टाइटनेस से बड़ी प्रभावित हो रही थी, वो मुझको लिप्स पर चूम रही थी और मैं उसके भी मोटे मुम्मों से बड़ा आनन्दित हो रहा था.

मुम्मों की गोलाई और मोटाई के मामले में इस वक्त नेहा एक नंबर पर थी और पूनम नंबर 2 पर थी. नैना और पारो के मुम्मे बहुत सॉलिड और बड़े थे लेकिन अब वो कन्या नहीं थी तो इस गिनती में नहीं आती थी.जस्सी के मुम्मे हालाँकि छोटे ज़रूर थे लेकिन सॉलिड और सीधे अकड़े हुए थे और बन्दूक की नल्ली की तरह उसके चुचूक एकदम खड़े थे.इन सब में से गांड के हिसाब से जस्सी एक नंबर पर थी और पूनम दो नंबर पर थी.

नैना बड़े ध्यान से मुझको देख रही थी कि मैं कहीं थक तो नहीं रहा और नेहा ने जब ऊपर से ज़ोर ज़ोर से और जल्दी धक्के मारने शुरू किये तो मैं समझ गया कि उसकी भी टाइट चूत में से भी अमृत जल निकलने वाला है.पांच मिन्ट के बाद वो झड़ गई और मेरे ऊपर पूरी तरह से पसर गई.

जब वो कुछ संयत हुई तो वो मुझको बेतहाशा चूमने लगी और मेरे सारे मुख को चूम चूम कर गीला कर दिया और नैना ने झट मेरा मुंह साफ़ कर दिया और नेहा की जगह पूनम को बुला लिया और कहा- चढ़ जा पूनम सूली पर!लेकिन पूनम ने कहा- अभी नहीं, हम तो रात को भी अपना काम कर सकते हैं.नैना बोली- छोटे मालिक, आपका चोदन हो चुका है, आप उठ जाओ अगर चाहो तो!मैं नकली गुस्से में बोला- कैसे उठ जाऊँ गुंडियों की रानी, जब तक तुम्हारी ना ले लूँ तो कैसे उठ जाऊँ बोलो तो? और फिर इस पुलिस वाली का क्या करें? वो साली भी तुम सबसे मिल गई थी, जब तक तुम दोनों को सज़ा नहीं दे लेता मैं कहीं भी जाने वाला नहीं.यह सुन कर नैना और पारो हंसने लगी.

नैना बोली- छोटे मालिक, हम दोनों गुंडियों को सजा रात को दे देना लेकिन इन नई गुंडियों को तो जाने दो, बेचारियों को घर जाने में बहुत देर हो रही है और टाइम भी काफी हो गया है.मैं बोला- अच्छा पहले यह दोनों कसम खाएँ कि ये दिल्ली आगरा ट्रिप में मेरा जबर चोदन नहीं होने देंगी और ना ही किसी और को मेरा चोदन करने देंगी.

दोनों जस्सी और नेहा ने कसम खाई और कहा- हम दोनों कसम खाती हैं कि हमारे होते हुए सिवाए हमारे कोई और सतीश को चोद नहीं सकता. हम जब चाहें सतीश का जबर चोदन कर सकती हैं.पूनम झट से बोल पड़ी- ऐसे कैसे कसम खा रही हो तुम दोनों? मैं तो सतीश की कजिन हूँ और उसकी बचपन की साथी हूँ और उस पर सब से ज़्यादा हक तो मेरा है. मेरी आज्ञा के बिना कोई भी सतीश को चोद नहीं सकता.

कहानी जारी रहेगी.
 
चूत चुदाई चलती ट्रेन में

लखनऊ से दिल्ली का सफर शुरु हुआ:

अगले दिन से हमने दिल्ली और आगरा के लिए तैयारी शुरू कर दी. कॉलेज में भी काफी गहमा गहमी थी इस ट्रिप के बारे में!और जल्दी ही वो दिन भी आ गया जब हम सबने सफर पर जाना था. दिन भर कॉलेज में खूब चहल पहल रही और सब लड़के लड़कियाँ काफी उत्सुक थे.

हमारे ग्रुप में अभी भी केवल जस्सी और नेहा और इधर पूनम और मैं ही थे, दोपहर को एक और लड़की ने हमारे ग्रुप में शामिल होने की इच्छा ज़ाहिर की.नेहा ने उसको कैंटीन में बुला लिया और हम सबको भी इकट्ठे कैंटीन में बुला लिया.

नेहा ने कहना शुरू किया- इनसे मिलो, यह डॉली है और मेरी ही क्लास में पढ़ती है. यह कह रही थी कि उसको कोई लड़कियों का ग्रुप नहीं मिल रहा जिस में वो शामिल हो सके यह हमारे पास आई है और हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहती है.पूनम बोली- वैसे तो हमारे ग्रुप में हम तीन ही लड़कियाँ हैं लेकिन डॉली को ग्रुप में शामिल होने से पहले उसको सब कुछ बता दो ताकि वो सब समझ कर ही ग्रुप ज्वाइन करे. क्यों ठीक है सतीश?मैंने हामी में सर हिला दिया.

तब नेहा और जसबीर उसको लेकर दूसरे बेंच में बैठ गई और उसको सब कुछ साफ़ समझाने लगी. ख़ास तौर से हमारे ग्रुप का उन्मुक्त व्यवहार उसको अच्छी तरह से समझा दिया.फिर वो दोनों उसको लेकर हमारे पास आ गई और नेहा ने कहा- डॉली को सब समझा दिया है और उसको हमारे उन्मुक्त व्यवहार के बारे में भी बता दिया है और वो हमारे साथ ही हमारे ग्रुप में शामिल होना चाहती है.

मैं बोला- ठीक है, हमको खुशी होगी कि आप हमारे ग्रुप में शामिल हो रहीं हैं. मुझको यह उम्मीद है कि आप चारों को एक ही कूपे में जगह मिल जायेगी और मुझ को शायद 2 बर्थ वाले या फिर 4 बर्थ वाले केबिन में जगह मिल जायेगी. और दिल्ली और आगरा में मैं सिंगल रूम प्रेफर करूँगा अगर मिल सका तो. इस तरह हम को एक दूसरे से मिलने में काफी आसानी रहेगी. क्यों गर्ल्स?सबने हामी में सर हिला दिया.

हम लोगों को कॉलेज से जल्दी छुट्टी हो गई क्योंकि हमने तैयारी करनी थी. सो हम सबने स्टेशन पर मिलने का वायदा किया और अपने घर चले गए.

पूनम और मैंने खाना खाया और मैं अपने कमरे में आकर आलखन करने लगा.थोड़ी देर बाद पूनम भी आ गई, मेरे साथ ही मेरे पलंग पर लेट गई और धीरे से उसका हाथ मेरे कुर्ते के बटन से चलता हुआ मेरे लंड के ऊपर आ गया और पयज़ामे के बाहर से उसके साथ खेलने लगा.

लंड महाशय रात की मेहनत के बाद अभी थोड़ी सुप्त अवस्था में थे. मैंने पूनम की तरफ देखा, उसकी आँखों में देखा और फिर मैं समझ गया कि इसकी चूत चुदवाने के लिए ज़ोर डाल रही है.मैं उठ कर दरवाज़ा बंद करके फिर लेट गया पूनम के साथ और फिर पूनम अपनी साड़ी थोड़ी सी अपनी टांगों के ऊपर ले आई थी और मेरा भी पायजामा खिसका कर नीचे कर रही थी.

मेरा लंड भी अब धीरे धीरे उन्मुक्त होने लगा था और मैंने पूनम की उठी साड़ी के अंदर हाथ डाल कर देखा, वो भी काफी गर्म हो रही थी.पूनम ने स्वयं ही अपना ब्लाउज खोल दिया था और ब्रा को भी हटा दिया था तो उसके भी मम्मे उन्मुक्त हो चुके थे.मैं भी पूनम की बालों से भरी चूत के साथ खेल रहा था और उसकी भग को भी सहला रहा था.

पूनम अब और इंतज़ार किये बगैर मेरे ऊपर अपनी साड़ी को समेट कर बैठ गई और अपने एक खाली हाथ से उसने मेरा लंड को चूत के अंदर डाल दिया और धीरे धीरे से ऊपर नीचे होने लगी.यदा कदा मैं भी नीचे से धक्का लगा देता था और आहिस्ता आहिस्ता चूत और लंड की लड़ाई तेज़ होने लगी.

मेरे धक्के तेज़ी पकड़ने लगे और फिर जब यह महसूस हुआ कि पूनम की चूत में कम्पन शुरू हो रहा है तो मैंने अपने धक्के बहुत ही तीव्र कर दिए और आखरी पड़ाव पर पहुँच कर मेरे धक्के एक रेल के इंजन की तरह तेज़ी से अंदर बाहर होने लगे थे, लंड एकदम लाल हो रहा था और उसका गुस्सा चूत को भी महसूस हो रहा था और उसने अपनी आदत के मुताबिक खुलना बंद होना शुरू कर दिया था.

पूनम एक लम्बी सांस लेकर मेरे ऊपर से नीचे आ गई और मैंने उससे पूछा- क्यों ठकुराइन, अभी और ताश का पत्ता फेंकूं या फिर अभी और नहीं?पूनम बोली- बस करो मेरे प्यारे ठाकुर, फिर कभी देखेंगे तुम्हारी पूरी ठकुराई.फिर हम एक दूसरे की बाँहों में बंध कर सो गए.

रात को हम सब लड़के लड़कियाँ स्टेशन पर मिले.वहाँ दोनों मैडमों की मदद के लिए मुझको और एक दूसरी लड़की को नियुक्त किया गया.हम दोनों ने तय किया कहाँ लड़के बैठेंगे और कहाँ लड़कियाँ बैठेंगी. अपनी 4 फ्रेंड्स को एक केबिन दे दिया और इसी तरह बाकी की चार लड़कियों को दूसरे केबिन में एडजस्ट कर दिया और बाकी बची 2 लड़कियों को दो सीट वाले कूपे में बिठा दिया.इसी तरह लड़को को भी 4-4 वाले 2 केबिन और बाकी को 2 वाले में बिठा दिया, मैडमों को भी एक 2 वाले कूपे में एडजस्ट कर दिया.
 
जब गाड़ी चली तो खूब बाय बाय हुई और फिर मैं और वो दूसरी लड़की जिसका नाम रेनू था अपनी अपनी बर्थ पर बैठ गए.थोड़ी देर बाद जब टी टी आया तो सारी टिकट्स दिखा दीं और सारे कूपे भी चेक करवा दिए.फिर मैं और रेनू ने जाकर मैडमों को बता दिया कि सब ठीक से बैठ गए हैं और टी टी ने भी सब चेक कर लिया है.

गाड़ी सुबह 8 बजे दिल्ली पहुँचने वाली थी तो अब मैं अपनी फ्रेंड्स के साथ जाकर बैठ गया. नेहा ने साड़ी, जस्सी ने सलवार सूट, पूनम ने साड़ी और डॉली ने भी सलवार सूट पहना था.हम सब में सिर्फ डॉली ही नई थी तो पहले तो वो मुझसे कुछ झिझक रही थी लेकिन धीरे धीरे वो हम सब से वाकिफ हो गई.

मैंने सबसे पहले केबिन को लॉक किया ताकि कोई बाहर से ना आ सके.अब सब लड़कियों खुल कर बातें करने लगी और नेहा और जस्सी ने डॉली को पिछले दिन हुई हमारी सेक्स कहानी भी बता दी और डॉली से पूछा कि अगर वो चाहे तो कार्यवाही उसी से शुरू करेंगी वो सब!

डॉली कुछ नहीं बोली लेकिन मैं समझ गया कि वो अभी झिझक रही है तो सबसे पहले सारी लड़कियाँ उठ कर मेरे पास आईं और मुझको बहुत ही हॉट किस की लबों पर!

और मैंने भी उनके चूतड़ों को सहला दिया और जस्सी के तो मम्मों को भी दबा दिया.फिर पूनम उठ कर मेरी गोद में आकर बैठ गई और मैंने उसको बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया, यह देख कर जस्सी और साथ में नेहा भी मुझ से आकर लिपट गई लेकिन डॉली अभी भी शरमा रही थी.

हम सब डांस करते हुए डॉली के पास गए और उसका हाथ पकड़ कर मैंने अपने पास खींच लिया और उसके मोटे गोल मुम्मों को छूने लगा और पूनम उसके गोल उभरे हुए चूतड़ों को छेड़ने लगी.एक ज़ोरदार चुम्मी मैंने उसके होटों पर जड़ दी और बाकी लड़कियों ने भी उसको घेर लिया और उसके जिस्म प्यार से छूने लगी.

पूनम का एक हाथ डॉली की सलवार के ऊपर से उसकी चूत पर चला गया और नेहा ने उसके चूतड़ों को मसलना आरम्भ कर दिया.मैंने नेहा से पूछा- आप में से कौन कौन मेरा चोदन करना चाहता है?सबसे पहले नेहा और जस्सी ने हाथ उठाया और फिर पूनम ने और आखिर में डॉली ने.

मैं बोला- नेहा, तुम फैसला करो कि कौन पहले मेरा चोदन करेगा?नेहा बोली- नई मेंबर होने के नाते तो पहली बारी डॉली की होनी चाहिए लेकिन वो शरमा रही है तो इसकी शर्म खोलने के लिये पूनम को मौका मिलना चाहिए सबसे पहले. क्यों पूनम?

पूनम बोली- नहीं, मैं तो सतीश से रोज़ चुदती हूँ तो सब से पहले जस्सी की बारी होनी चाहये क्यों जस्सी?जस्सी बोली- ठीक है.नेहा बोली- सेफ्टी को देखते हुए हम सबको कम से कम कपड़े उतारने चाहिएँ. साड़ी वाली को तो दिक्कत नहीं है, सिर्फ सलवार वाली को परेशानी है?

मैं बोला- किसी को कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए. सलवार वाली और साड़ी वाली, सबको सतीश पीछे से चोदेगा. ठीक है न?सब लकड़ियाँ बोली- ठीक है, तुम पीछे से शुरू हो जाओ.

जस्सी आई और अपनी सलवार खोल कर उसको नीचे कर दिया और सीट पर हाथ रख दिया और थोड़ी झुक गई.मैंने भी अपनी पैंट खोल कर उसको टांगों के नीचे किया और थोड़ी सी थूक लगा कर लंड पर, जस्सी की चूत में पेल दिया.जस्सी थोड़ी गीली हो चुकी थी तो लंड एकदम फटाक से अंदर चला गया.मैंने नेहा को इशारा किया कि सब एक दूसरे के साथ शुरू हो जाओ और एक दूसरे को खूब आनन्द दो और उनको गर्म भी कर दो.

पूनम डॉली के साथ लग गई और नेहा ने जस्सी के मुम्मे सहलाने शुरू कर दिए.पूनम ने डॉली की सलवार खोल दी और उसकी सफाचट चूत में उंगली लगाने लगी और दूसरे हाथ से उसके मुम्मे दबाने लगी.नेहा जस्सी की चूत में हाथ डाल कर उसकी भग को मसलने लगी. भग पर हाथ पड़ते ही जस्सी एकदम उछल पड़ी और स्वयं आगे पीछे होने लगी..

मैं भी धीरे धीरे शुरू हो कर गाड़ी की स्पीड से मैच करने लगा और जैसे गाड़ी के चलने की स्पीड तेज़ हो रही थी वैसे ही मैं भी अपनी स्पीड को तेज़ दर तेज़ कर रहा था.

नेहा जो जस्सी की चूत पर ध्यान दे रही थी साथ ही उसकी चूत पर पूनम की ऊँगली भी चला रही थी. उसकी उठी हुए साड़ी में से उस की बालों भरी चूत साफ़ झलक दे रही थी और इस झलक का मुझको बहुत ही आनन्द आ रहा था.मैं बार बार डॉली की सफाचट चूत को देखने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसकी झलक कभी मिलती थी और कभी नहीं भी मिलती थी.

अब जस्सी ने अपनी गांड जल्दी जल्दी आगे पीछे करनी शुरू कर दी थी, मैं समझ गया कि सरदारनी झड़ने वाली है, उसकी कमर को कस कर पकड़ कर मैंने गाड़ी बेहद तेज़ स्पीड पर चला दी और स्पीडी धक्कों के बाद जस्सी का छूट गया और वो मुझसे अपनी गांड जोड़ कर कंपकंपाती हुई रुक गई.

नेहा ने कहा- जस्सी का तो हो गया अब किसकी बारी है?डॉली खुद ही बोल उठी- अब मेरी बारी है.सबने कहा- ठीक है, चल शुरू हो जा डॉली.मैंने कहा- डॉली के शरीर को मैंने देखा नहीं सो डॉली अपनी सलवार तो नीचे कर चुकी है अब वो अपनी कमीज भी ऊपर करे तो उस के मम्मों के दर्शन हो जाएंगे.
 
नेहा ने उसकी कमीज़ ऊपर कर दी और उसकी ब्रा भी हटा दी.सबसे पहले मैंने उसको लबों पर चूमा और फिर उसके गोल मुम्मों पर ध्यान दिया और थोड़ा उनको चूसा और उसकी सफाचट चूत को देखा भी और हाथ भी लगाया.वो वाकयी में एकदम गीली हो चुकी थी. मैंने उसको बर्थ पर लिटा दिया और उसकी टांगों से सलवार एक पौंचा भी निकाल दिया और फिर उसकी गोरी टांगों में बैठ कर अपने खड़े लंड को उसकी चूत में धकेला.

पहले धक्के में ही लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया और डॉली के मुख से एक प्यारी सी आअहाअ निकल गई और मैं रुक गया और डॉली से पूछा- अगर दर्द हो रहा हो तो निकाल लूँ क्या?डाली के चेहरे का रंग एकदम लाल हो गया और वो ज़ोर ज़ोर से सर हिला हिला कर नहीं नहीं कर रही थी.सब लड़कियाँ हंसने लगी और बाद में डॉली भी हंस पड़ी.

मेरे लंड के लिए डॉली की चूत एकदम नई नकोर थी तो वो भी मज़े ले ले कर डॉली को चोद रहा था.पूनम डॉली के उरोजों पर अटैक कर रही थी और नेहा जस्सी के मुम्मों संग खेल रही थी.और मैं कभी स्लो और कभी तेज़ स्पीड पर धक्का धक्की में लगा हुआ था. डॉली के दोनों हाथ मेरी गर्दन में लिपटे हुए थे और उसके चूतड़ उठ उठ कर लंड मियाँ का स्वागत कर रहे थे.वो काफी ज़्यादा गर्म हो चुकी थी और उको तीव्र आनन्द की अनुभूति हो रही थी.

जैसे कि उम्मीद थी, वो नए लंड के साथ पहली बार के मिलन के आनन्द को ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर सकी और ओह्ह करती हुई जल्दी ही झड़ गई.उसके झड़ने के टाइम उसके शरीर में इतना तीव्र कम्पन हुआ कि नेहा और पूनम उसको पकड़ कर बैठी तब उसको कंट्रोल कर सकी.

अब नेहा की बारी थी तो मैंने उससे पूछा- ऐ मलिका ऐ आलिया कैसे चुदना पसंद करेंगी आप?नेहा भी उसी लहजे में बोली- ऐ मेरे अदना ग़ुलाम, तुम्हारी मलिका तुम पर चढ़ाई करना चाहती है.मैं बोला- जो हुक्म सरकारे आली, यह आपका खाविन्द आपके लिए तैयार बैठा है, हुक्म कीजिये.नेहा खाविन्द को ख़ाकसार समझ थी पर खाविन्द का मतलब होता है पति… और मैं मन ही मन मुस्कराते हुए चुप रहा.

नेहा बोली- ऐ ग़ुलाम, हम तुम्हारा ‘बला ए जबर’ करना चाहते हैं.मैंने सर झुका कर कहा- मलिका को पूरा अख्तियार है.और मैं जा कर बर्थ पर लेट गया, नेहा अपनी साड़ी उठा कर मेरे ऊपर बैठ गई और लंड को अपनी चूत में खुद ही डाला.वो भी बहुत गीली थी तो बैठते ही उसकी चूत मेरे पेट के साथ आकर जुड़ गई.मैंने कोई धक्का मारने की कोशिश नहीं की और वो खुद ही धक्कम पेलम में लगी रही. क्योंकि वो 2 बार चुदाई देख चुकी थी सो वो भी बेहद गीली थी.

उसकी धकापेल जल्दी ही स्पीड पकड़ने लगी. मैंने उसके मुम्मों को उसके ब्लाउज के ऊपर से पकड़ा हुआ था और चुचूकों को मसल रहा था.पूनम भी उसके चूतड़ों को सहला रही थी और जस्सी मेरे ऊपर बैठी नेहा को लबों पर चूम रही थी.डॉली खड़े होकर पूनम के मुम्मों के साथ खेल रही थी.हर कोई अपने काम में बिजी था सिवाए मेरे क्यूंकि मेरा लंड मेरा काम कर रहा था.

जैसे ही नेहा को आनन्द आने लगा चुदाई का, उसने अपने धक्के तेज़ कर दिए और उसकी जांघें जो मेरे पेट से लग रही थी. अब काफी गर्म हो गई थी और मुझको महसूस हो रहा था कि वो भी जल्दी छूटने वाली है.मैंने हुक्म के खिलाफ नीचे से ज़ोरदार धक्के मारने शुरू कर दिए और इस कोशिश में था कि नेहा जल्दी से छूटे तो मैं अपने केबिन में जाऊँ.मुझको यह डर सता रहा था कि कहीं मैडम चेकिंग पर ना निकल पड़ें.

मैंने अब चुदाई का काम अपने हाथों में ले लिया और अपने हिसाब से स्पीड तेज़ कर दी, पूनम को इशारा किया कि वो नेहा की चूत को रगड़े और उसकी भग को सहलाये.पूनम ने यही किया और शीघ्र ही नेहा ने चुदाई की स्पीड अपने आप तेज़ कर दी. मेरे नीचे से ज़ोर के धक्के की चूत घिसाई जल्दी ही अपना रंग लाई और नेहा एक ज़ोर की हुँकार भर कर कर धराशयी हो गई और मेरे ऊपर पूरी तरह से लुढ़क गई.

लड़कियों ने मिल कर नेहा को मुझसे अलग किया और मैंने जल्दी से अपने कपड़े ठीक किये और पूनम से पूछा कि क्या उसकी इच्छा है चुदवाने की?उसने कहा- नहीं सतीश, मैं तो दिन को भी तुम्हारे साथ ही थी और तुमसे चुदी हूँ.

मैंने केबिन के बाहर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा और मैदान साफ़ देख कर मैं जल्दी से अपने केबिन की तरफ चला गया और दरवाज़ा खोल कर मैं अंदर चला गया.मेरा साथी बड़ी गहरी नींद में सो रहा था.मैंने घड़ी में देखा तो मुझको तीन लड़कियों को चोदने में तकरीबन एक घंटा लग गया था.

कहानी जारी रहेगी.
 
दो लेडी प्रोफेसरों की चुदाई

हमारी ट्रेन ठीक टाइम पर दिल्ली स्टेशन पर पहुँच गई और हम सब अपना अपना बैग उठाये हुए स्टेशन के बाहर आ गए.सिर्फ दोनों मैडमों का सामान कुली ने उठाया हुआ था.

स्टेशन के बाहर एक बस हमारे लिए खड़ी थी, उसमें सामान रख कर हम होटल पहुँच गए.मैंने और रेनू फिर होटल में कमरे अलॉट करने का काम शुरू कर दिया. हम में से एक लड़का अपने दादा के घर में रुक रहा था तो हमारे पास 10 कमरों में सिर्फ 19 छात्र ही थे तो 2-2 छात्रों को एक एक डबल बेड रूम दे दिया और एक कमरे में सिर्फ मैं अकेला ही रह गया.मेरी फ्रेंड्स का ग्रुप साथ साथ के 2 कमरों में टिक गए थे और मैं इनके साथ वाले कमरे में अकेला ही था.

नाश्ता वगैरह करके पुनः उसी बस में बैठ कर हम दिल्ली की ख़ास जगहों में घूमने के लिए गए.हमारे साथ दोनों प्रोफेसर इतिहास की प्रोफेसर थी, वे हर स्थान की इम्पोर्टेंस और उसका ऐतिहासक महत्व भी समझाती रही थी.सारा दिन घूम कर हम शाम को तकरीबन 6 बजे अपने होटल पहुँच गए थे.सब अपने कमरों में आलखन कर रहे थे और होटल से चाय वगैरह मंगा कर पी रहे थे.

रात के खाने के बाद जैसे ही मैं अपने कमरे में पहुँचा, तभी निर्मला मैडम मेरे कमरे में आई और बोली- सतीश राजा, क्या कुछ टाइम हम को भी दे सकते हो?मैं बोला- क्यों नहीं मैडम, आप हुक्म कीजिये.मैडम बोली- थोड़ी देर बाद तुम मेरे कमरे में आ जाना, वही उस दिन वाली कहानी दोहरानी है.मैं मन ही मन मुस्करा दिया लेकिन संजीदा होकर बोला- क्यों नहीं मैडम, जैसे आप कहें! मैं आ जाऊँगा.यह कह कर मैडम मुझको आँख मार कर वहाँ से चली गई.

उनके जाने के बाद मैं पूनम के कमरे में गया जहाँ नेहा भी साथ ही रह रही थी, दोनों को बताया कि मैडम मुझको किसी ख़ास काम के लिए बुला रही हैं, मैं शायद रात में देर से आऊँगा उनकी सेवा करने.दोनों थोड़ी मायूस हो गई लेकिन जब मैंने कहा कि आऊंगा ज़रूर तो वो फिर से चहक उठी.

आधे घंटे के बाद मैं मैडम के कमरे में पहुँच गया जहाँ हमारे कॉलेज की एक दूसरी मैडम भी उनके साथ रह रही थी.हाल चाल पूछने के बाद निर्मला मैडम ने कहा- इनसे मिलो, ये हैं उषा मैडम जो मेरे साथ ही हिस्ट्री की प्रोफेसर हैं.

मैंने ध्यान से देखा उषा मैडम कॅाफ़ी सुन्दर और गठीले बदन वाली 30 वर्ष की आयु की औरत लग रही थी.दोनों ने उस वक्त अपनी रात्रि वस्त्र पहन रखे थे.उषा मैडम की ड्रेस काफी झीनी थी और उसमें से उनके शरीर के अंगों की एक झलक मिल रही थी और निर्मला मैडम ने भी पिंक रंग की बहुत हॉट स्लीवलेस छोटी सी ड्रेस पहन रखी जो उनके घुटनों तक ही आती थी.

कुल मिला कर दोनों बड़ी ही सेक्सी लग रही थी और उनकी यह सेक्सी ड्रेस देख कर मेरा लौड़ा तो वैसे ही मेरी पैंट में कुलबला रहा था.निर्मला मैडम बोली- बैठो सतीश, उषा मैडम कह रही थी कि सतीश ठाकुर से मिलने की बहुत इच्छा है तो मैंने तकलीफ दी तुमको इतनी रात को!मैं बोला- नहीं मैडम, तकलीफ कैसी, बोलिए क्या सेवा करूँ?निर्मला मैडम बोली- सोचा उस दिन वाला खेल खेलें अगर तुम मूड में हो तो?मैं बोला- आप तो जानती हैं मैं तो हर वक्त मूड में होता हूँ.

निर्मला मैडम- तो फिर उतारो अपने कपड़े… देख क्या रहे हो!मैं बोला- मैं अपने कपड़े कभी आप नहीं उतारता सिवाए बाथरूम के!अब दोनों मैडम हंसने लगी और जल्दी से मेरे कपड़े उतारने में लग गई.

मेरी पैंट और अंडरवियर उतारने के लिए जब उषा मैडम झुकी तो मेरा लौड़ा कैद से छूटे कैदी की तरह आज़ाद हो कर उषा मैडम के मुंह पर लगा.यह देख कर निर्मला मैडम तो हंसी के मारे लोटपोट हो गई और उषा मैडम पहले तो कुछ खिसयानी हुई लेकिन जल्दी ही सम्भल कर हँसते हुए बोली- वाह, क्या चीज़ है यार सतीश तेरी तो? देखते ही थप्पड़ मार दिया ससुर ने! बहुत अच्छे!

मैंने उषा मैडम को उठाया और उनके कपड़े उतारने लगा, पहले साड़ी और फिर ब्लाउज और उसके नीचे की ब्रा खोल दी.मैंने जान कर अपना मुंह उन के मुम्मों के पास रख छोड़ा था और जैसे ही वो ब्रा की कैद से निकले सीधे मेरे नाक से टकराये.

मैं मज़ाकिया तौर पर एकदम पीछे हट गया और बोला- वाह मैडम जी, आपके मुम्मे ने मेरे लंड का जवाब दे दिया. क्यों ठीक है न?दोनों मैडम ने हँसते हुए मुझको जफ़्फ़ी डाल दी और मैं भी उषा मैडम का पेटीकोट उतारने में लग गया.

उधर निर्मला मैडम ने अपने कपड़े खुद ही उतार दिए और अपनी काली झांटों के साथ खूब सेक्सी पोज़ बनाने लगी.उषा मैडम की चूत को देखा तो वो सफाचट थी और रेजर से खूब साफ़ की गई लग रही थी.

मैंने उषा मैडम को ध्यान से देखा तो उनका शरीर एकदम सुंदर ढंग से तराशा हुआ था और उनके मुम्मे बहुत मोटे और गोल थे और काफी सख्त भी दिख रहे थे, चूतड़ गोल और उभरे हुए थे, कुल मिला कर एक निहायत ही खूबसूरत औरत थी वो!
 
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