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चाची, उषा की चूत गान्ड चुदाई
चाची रात में 3-4 बार चुद चुकी थी इसलिए मैंने सोचा सुबह उषा को ही चोद दूंगा लेकिन जब आँख खुली तो देखा कि चाची का हाथ मेरे लंड के साथ खेल रहा था.लंड, जैसा कि आम बात थी, पूरा तना हुआ था और चाची का हाथ मुठ की तरह नीचे ऊपर हो रहा था.
चाची बिल्कुल नंगी लेटी थी और उसकी सफाचट चूत सुबह के हल्के प्रकाश में भी चमक रही थी.चाची की चूत असल में मुझको बिल्कुल अच्छी नहीं लग रही थी क्यूंकि बालों के बिना चूत असल में चूत नहीं लग रही थी बल्कि एक लकीर के समान लग रही थी.चूत की शान तो उस पर छाये घने बाल ही होते हैं. बालों भरी चूत यह आभास देती है कि शायद बालों के पीछे कोई अनमोल खज़ाना है.वैसे देखा जाए तो बालों बिना चूत की कोई शान या कोई आन नहीं होती.
चाची बार बार मेरे लंड को खींच कर इशारा दे रही थी कि मैं उस पर चढ़ जाऊँ लेकिन सुबह सुबह चाची का मुंह नहीं देखना चाहता था तो मैंने चाची को घोड़ी बनने का इशारा किया और जब वो घोड़ी बनी तो मैंने पीछे से उसकी चूत पर हमला कर दिया.एक ही धक्के में लंड पूरा अंदर हो गया और चाची भी चूतड़ आगे पीछे करने लगी.मैंने आँखें बंद किये ही उसको चोदना शुरू कर दिया.
थोड़े ही धक्के मारे थे कि मुझको लगा कि कोई मेरे अंडकोष के साथ खेल रहा है, आँखें खोली तो देखा कि उषा जो मेरी बायें और लेटी थी अपने हाथ से मेरे अंडकोष के साथ खेल रही थी.मैं लगातार ज़ोर ज़ोर से चाची की चूत चोद रहा था और चाची का हाय हाय करना जारी रहा.
थोड़ी देर में देखा कि उषा भी साइड में घोड़ी बन कर बैठी है. जब चाची झड़ गई तो वो पेट के बल लेट गई और उसकी गोल गांड हवा में लहरा रही थी.उषा की गांड सीधे मेरे लंड के सामने आ गई और मैंने चाची की चूत से निकाला लंड उसकी बेटी की चूत में डाल दिया.
मेरे लंड से टपकता रस उसकी माँ की चूत का ही था तो झट से पूरा चूत में घुस गया.
पहले धीरे धीरे उषा को चोदना शुरू किया और मेरे लंड को महसूस हुआ एक बहुत ही तंग और टाइट गली में लंड आ जा रहा है. उस की चूत की पकड़ गज़ब की थी जिससे साफ़ ज़ाहिर हो रहा था कि यह चूत ज्यादा नहीं चुदी है.
मैंने अपने हाथ उषा के बूब्स की तरफ रखने की कोशिश की लेकिन वो काफी नीचे लेटी थी और वहाँ हाथ नहीं पहुँच रहा था. फिर मैं उसके छोटे लेकिन गोल और सॉलिड चूतड़ को ही हल्के हल्के थाप देने लगा. यह शायद उषा को अच्छा लगा और वो चूतड़ों को ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करने लगी.
मैंने भी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और उसके चूतड़ों को उठा कर अपनी छाती से लगा तेज़ तेज़ जो धक्के मारे तो थोड़े ही समय में वो ‘ओह्ह्ह ओह्ह्ह मरी रे…’ बोलने लगी और उसकी चूत अंदर से बंद और खुल रही थी.
मैंने भी तेज़ी से चूत की गहराई तक धक्के मारे और उसकी चूत को जल्दी ही झड़ने के लिए मजबूर कर दिया.वो भी बिस्तर पर पसर गई.
तब मैं उसके ऊपर से उठा और कपड़े पहनने लगा.फिर मैंने चाची को उठाया- अभी दोनों नौकरानियाँ आ जाएंगी, आप लोग अपने कमरे में जाओ जल्दी से.
चाची एकदम हड़बड़ाहट में नंगी ही अपने कपड़े उठा कर अपने कमरे की तरफ भागी और उसी तरह उषा भी कपड़े उठा कर भाग गई.उनके जाने के बाद मैंने कोठी का मुख्य द्वार खोल दिया.मैंने सोचा कि चलो पारो और नैना को उठा देते हैं.मैं पारो की कोठरी की तरफ गया तो देखा की दरवाज़ा ज़रा सा खुला है और अंदर से उफ्फ्फ उफ्फ की आवाज़ आ रही थी.दरवाज़ा थोड़ा खोल कर देखा तो पारो और नैना लेस्बियन सेक्स में लगी थीं, नैना की गांड उठी हुई थी और वो पारो की चूत को चाट रही थी.
थोड़ी देर मैं यह नज़ारा देखता रहा और फिर अपने खड़े लंड को नैना की खुली चूत में पीछे से डाल दिया.लंड के अंदर जाते ही नैना चौंक गई और ‘कौन है… कौन है…’ कहते हुए पीछे मुड़ने की कोशश करने लगी. लेकिन धीरे से उसके कान के पास मुंह ले जाकर मैंने कहा- मैं हूँ सतीश, चुपचाप लेटी रहो.
और उसके मोटे चूतड़ अब अपने आप हिलने लगे और उसका मुंह भी तेज़ी से पारो की चूत को चाट रहा था.जल्दी से पारो का छूट गया और फिर मैं तेज़ी से धक्के मार कर नैना का भी छूटा दिया.तीनो हम पारो की छोटी सी चारपाई पर लेटे थे.
फिर मैंने नैना से कहा- पारो को साथ ले जाओ और जल्दी से चाय बना कर ले आओ हम सबकी.और कपड़े ठीक करते हुए बाहर आ गया और जल्दी से कोठी में घुस गया.
थोड़ी देर में नैना चाय लेकर आ गई.चाय रखने के बाद उसने जो मुड़ कर देखा तो मुंह में ऊँगली दबा ली- यह क्या है छोटे मालिक?उसके हाथ में चाची की अंगिया थी जो चाची यहीं भूल गई थी और वो मेरे बिस्तर पर रखी थी.
नैना मुस्कराई- क्यों छोटे मालिक, रात को चाची को चोद दिया क्या?मैं भी मुस्कुरा कर बोला- हाँ री, दोनों माँ बेटी को रात को खूब चोदा, साली याद करेंगी. अच्छा चलो अब तुम उनको भी चाय दे आओ.
चाय पीकर मैं कॉलेज जाने की तयारी में जुट गया.
चाची रात में 3-4 बार चुद चुकी थी इसलिए मैंने सोचा सुबह उषा को ही चोद दूंगा लेकिन जब आँख खुली तो देखा कि चाची का हाथ मेरे लंड के साथ खेल रहा था.लंड, जैसा कि आम बात थी, पूरा तना हुआ था और चाची का हाथ मुठ की तरह नीचे ऊपर हो रहा था.
चाची बिल्कुल नंगी लेटी थी और उसकी सफाचट चूत सुबह के हल्के प्रकाश में भी चमक रही थी.चाची की चूत असल में मुझको बिल्कुल अच्छी नहीं लग रही थी क्यूंकि बालों के बिना चूत असल में चूत नहीं लग रही थी बल्कि एक लकीर के समान लग रही थी.चूत की शान तो उस पर छाये घने बाल ही होते हैं. बालों भरी चूत यह आभास देती है कि शायद बालों के पीछे कोई अनमोल खज़ाना है.वैसे देखा जाए तो बालों बिना चूत की कोई शान या कोई आन नहीं होती.
चाची बार बार मेरे लंड को खींच कर इशारा दे रही थी कि मैं उस पर चढ़ जाऊँ लेकिन सुबह सुबह चाची का मुंह नहीं देखना चाहता था तो मैंने चाची को घोड़ी बनने का इशारा किया और जब वो घोड़ी बनी तो मैंने पीछे से उसकी चूत पर हमला कर दिया.एक ही धक्के में लंड पूरा अंदर हो गया और चाची भी चूतड़ आगे पीछे करने लगी.मैंने आँखें बंद किये ही उसको चोदना शुरू कर दिया.
थोड़े ही धक्के मारे थे कि मुझको लगा कि कोई मेरे अंडकोष के साथ खेल रहा है, आँखें खोली तो देखा कि उषा जो मेरी बायें और लेटी थी अपने हाथ से मेरे अंडकोष के साथ खेल रही थी.मैं लगातार ज़ोर ज़ोर से चाची की चूत चोद रहा था और चाची का हाय हाय करना जारी रहा.
थोड़ी देर में देखा कि उषा भी साइड में घोड़ी बन कर बैठी है. जब चाची झड़ गई तो वो पेट के बल लेट गई और उसकी गोल गांड हवा में लहरा रही थी.उषा की गांड सीधे मेरे लंड के सामने आ गई और मैंने चाची की चूत से निकाला लंड उसकी बेटी की चूत में डाल दिया.
मेरे लंड से टपकता रस उसकी माँ की चूत का ही था तो झट से पूरा चूत में घुस गया.
पहले धीरे धीरे उषा को चोदना शुरू किया और मेरे लंड को महसूस हुआ एक बहुत ही तंग और टाइट गली में लंड आ जा रहा है. उस की चूत की पकड़ गज़ब की थी जिससे साफ़ ज़ाहिर हो रहा था कि यह चूत ज्यादा नहीं चुदी है.
मैंने अपने हाथ उषा के बूब्स की तरफ रखने की कोशिश की लेकिन वो काफी नीचे लेटी थी और वहाँ हाथ नहीं पहुँच रहा था. फिर मैं उसके छोटे लेकिन गोल और सॉलिड चूतड़ को ही हल्के हल्के थाप देने लगा. यह शायद उषा को अच्छा लगा और वो चूतड़ों को ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करने लगी.
मैंने भी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी और उसके चूतड़ों को उठा कर अपनी छाती से लगा तेज़ तेज़ जो धक्के मारे तो थोड़े ही समय में वो ‘ओह्ह्ह ओह्ह्ह मरी रे…’ बोलने लगी और उसकी चूत अंदर से बंद और खुल रही थी.
मैंने भी तेज़ी से चूत की गहराई तक धक्के मारे और उसकी चूत को जल्दी ही झड़ने के लिए मजबूर कर दिया.वो भी बिस्तर पर पसर गई.
तब मैं उसके ऊपर से उठा और कपड़े पहनने लगा.फिर मैंने चाची को उठाया- अभी दोनों नौकरानियाँ आ जाएंगी, आप लोग अपने कमरे में जाओ जल्दी से.
चाची एकदम हड़बड़ाहट में नंगी ही अपने कपड़े उठा कर अपने कमरे की तरफ भागी और उसी तरह उषा भी कपड़े उठा कर भाग गई.उनके जाने के बाद मैंने कोठी का मुख्य द्वार खोल दिया.मैंने सोचा कि चलो पारो और नैना को उठा देते हैं.मैं पारो की कोठरी की तरफ गया तो देखा की दरवाज़ा ज़रा सा खुला है और अंदर से उफ्फ्फ उफ्फ की आवाज़ आ रही थी.दरवाज़ा थोड़ा खोल कर देखा तो पारो और नैना लेस्बियन सेक्स में लगी थीं, नैना की गांड उठी हुई थी और वो पारो की चूत को चाट रही थी.
थोड़ी देर मैं यह नज़ारा देखता रहा और फिर अपने खड़े लंड को नैना की खुली चूत में पीछे से डाल दिया.लंड के अंदर जाते ही नैना चौंक गई और ‘कौन है… कौन है…’ कहते हुए पीछे मुड़ने की कोशश करने लगी. लेकिन धीरे से उसके कान के पास मुंह ले जाकर मैंने कहा- मैं हूँ सतीश, चुपचाप लेटी रहो.
और उसके मोटे चूतड़ अब अपने आप हिलने लगे और उसका मुंह भी तेज़ी से पारो की चूत को चाट रहा था.जल्दी से पारो का छूट गया और फिर मैं तेज़ी से धक्के मार कर नैना का भी छूटा दिया.तीनो हम पारो की छोटी सी चारपाई पर लेटे थे.
फिर मैंने नैना से कहा- पारो को साथ ले जाओ और जल्दी से चाय बना कर ले आओ हम सबकी.और कपड़े ठीक करते हुए बाहर आ गया और जल्दी से कोठी में घुस गया.
थोड़ी देर में नैना चाय लेकर आ गई.चाय रखने के बाद उसने जो मुड़ कर देखा तो मुंह में ऊँगली दबा ली- यह क्या है छोटे मालिक?उसके हाथ में चाची की अंगिया थी जो चाची यहीं भूल गई थी और वो मेरे बिस्तर पर रखी थी.
नैना मुस्कराई- क्यों छोटे मालिक, रात को चाची को चोद दिया क्या?मैं भी मुस्कुरा कर बोला- हाँ री, दोनों माँ बेटी को रात को खूब चोदा, साली याद करेंगी. अच्छा चलो अब तुम उनको भी चाय दे आओ.
चाय पीकर मैं कॉलेज जाने की तयारी में जुट गया.