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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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भाभी ने पलंग पर लेटने के बाद अपनी गोल सफेद टांगों को खोल दिया और मैंने झट से अपनी पोजीशन लेकर उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.थोड़ी देर में ही भाभी इतनी गर्म हो गई कि उन्होंने मुझको मेरे बालों से पकड़ कर मुझको चूत से हटा कर अपने ऊपर कर लिया और मेरे मुंह को बेतहाशा चूमने लगी.

मैंने भी उनकी चुम्मियों का जवाब वैसे ही दिया और फिर उनको घोड़ी बनने के लिए उकसाया.जब भाभी घोड़ी बन गई तो मैं भी उस चूतड़ों के बीच से अपना लंड उनकी उभरी हुई चूत में धीरे धीरे डालने लगा, लंड जब पूरा अंदर चला गया तो मैं ज़रा रुक गया और आज की भाभी की चूत की पकड़ को सराहने लगा, इतनी तेज़ और मज़बूत पकड़ भाभी की चूत में पहले कभी नहीं थी, यह ज़रूर नैना की ख़ास डिश का कमाल था.

अब मैंने धीरे धीरे चुदाई की स्पीड बढ़ा दी, लंड को पूरा निकाल कर फिर धीरे से अंदर डालने का क्रम शुरू कर दिया. लंड पूरा निकाल कर धीरे धीरे से पूरा डालना भी एक कला होती है जो चूत के शहसवार अच्छी तरह से जानते हैं क्योंकि लंड को पूरा निकालने का मतलब है कि लंड की टिप कभी भी चूत के बाहर नहीं आनी चाहिए.इस तरीके से पूरे लंड का घर्षण और गर्जन कायम रहता है और औरतों को लंड का पूरा मज़ा मिलता रहता है.

और उधर नैना भी भाभी को गर्म करने की कोशिश कर रही थी, वो उसके गोल और मोटे मम्मों के साथ खेल रही थी.फिर वो भाभी की चूत में हाथ डाल कर उसकी भग को रगड़ने लगी, थोड़ी देर में भाभी खूब हिलते हुए झड़ गई..

मैंने अपनी चुदाई स्पीड फिर एकदम आहिस्ता कर दी ताकि भाभी को फिर गर्म करके उसका एक बार और छुड़ाया जाये.मैं अब पूरा का पूरा लंड एक साथ अंदर डाल कर उसको भाभी की चूत में थोड़ा थोड़ा घुमाने लगा, यह स्टाइल भाभी को बहुत पसंद आया और वो जल्दी जल्दी अपने चूतड़ों को आगे पीछे करने लगी.

नैना जो अभी भी भाभी की चूत में हाथ डाले हुए थी और उसके भग को रगड़ रही थी, नीचे से ही मुझको इशारा किया और मैं अपने लौड़े का घोड़ा सरपट दौड़ाने लगा.इस रेस में भाभी एक बार फिर एकदम से अकड़ी और फिर चूतड़ हिलाती हुई झड़ गई और उनकी चूत से बहुत सा पानी नीचे गिरा.

अब नैना ने मुझको इशारा किया कि मैं अपना छूटा लूँ जल्दी ही!मैंने लंड से भाभी की चूत के अंदर उसके गर्भाशय के मुंह को तलाश लिया और जब मेरा लंड उनके ठीक गर्भाशय के मुंह पर था तो मैंने अपना वीर्य का बाँध खोल दिया और भाभी की चूत को अपने वीर्य से पूरा भर दिया.जैसे ही गर्म वीर्य भाभी की चूत और गर्भाशय पर गिरा, भाभी एक बार फिर झड़ गई और वो पलंग पर लेटने की कोशिश करने लगी लेकिन मैंने उनके चूतड़ अपने हाथों में पकड़ रखे थे.

नैना ने जल्दी से भाभी के पेट के नीचे 2 मोटे तकिये रख दिए ताकि उनके चूतड़ ऊपर रहें और वीर्य नीचे न बह जाए.मैं भी उठ कर अपना लंड को साफ़ करने के लिए बाथरूम में चल गया.तब तक भाभी सामान्य हो चुकी थी.

फिर हम पलंग पर लेट गए, एक तरफ़ नैना नंगी लेट गई और दूसरी तरफ़ भाभी, बीच में मैं लेट गया.भाभी कुछ थकी हुई लगी और वो झट ही सो गईं.

मैंने नैना की चूत में ऊँगली डाली तो वो एकदम गीली हो रही थी. मैंने देखा कि भाभी तो काफी गहरी नींद में थी तो मैं पहले नैना को चूमता रहा और फिर उसके मम्मों को चूसा और फिर उसकी भग को थोड़ी देर मसला और फिर जब वो मुझको खुद ही लंड से खींच कर अपने ऊपर आने का न्योता देने लगी तो मैं भी उसके ऊपर चढ़ गया.

नैना के साथ चुदाई एक इंस्ट्रक्टर के साथ चुदाई के समान था क्यूंकि वो बड़े ध्यान से मेरी हर चेष्टा को देखती थी और जहाँ मैं गलती करता था वो मेरा कान पकड़ने में नहीं हिचकिचाती थी.

लेकिन मैं नैना को चोदते हुए ख़ास ख्याल रखता था कि उसके द्वारा बताये हुए तरीके का पूरी तरह से पालन हो क्यूंकि मैं उसके कमज़ोर पॉइंट अब जान गया था तो मुझको अपनी मर्ज़ी के मुताबिक उसको छुटाना आता था. अब भी वैसा ही हुआ, मैंने जल्दी से नैना रानी का छूटा दिया और उसके बाद एक मधुर चुम्बन और प्रगाढ़ आलिंगन के बाद हम दोनों सो गए.

कहानी जारी रहेगी.
 
भाभी का गर्भाधान

सुबह उठा तो देखा कि नैना रानी तो नहीं थी लेकिन भाभी मस्त सोई थी. मैं उठा और टेबल पर रखी चाय पीकर अपने कपड़े पहनने लगा.तब तक मैं नंगी लेटी भाभी के जिस्म को ही देखता रहा, एकदम लेटी औरत सदा ही काफी सेक्सी लगती है.

थोड़ी देर बाद भाभी को वैसे हो सोते छोड़ कर मैं कॉलेज की तैयारी में लग गया और जल्दी ही नहा धोकर तैयार होने लगा.तब भाभी भी जाग गई और बड़ी ही मस्त अंगड़ाई लेती हुई उठी और मुझको एक बड़ी ही हॉट जफ़्फ़ी डाल दी और फिर मुझको बेतहाशा चूमने और मेरे लंड को पकड़ने लगी.

मैं बोला- क्या हुआ भाभी? इतनी मेहरबान क्यों हो रही हो?भाभी मुझको कस कर फिर से जफ़्फ़ी डालने लगी और बोली- वाह सतीश राजा, यार तुमने तो कमाल कर दिया.मैं हैरान होकर बोला- ऐसा क्या किया है मैंने भाभी जान?भाभी बोली- रात को तुम सोये सोये ही मुझ पर 3 बार चढ़े हो और 2 बार नैना पर भी चढ़े, अपने आप चढ़ जाते हो और फिर जब मेरा छूट जाता था तुम अपने आप ही उतर जाते थे. यह कैसे होता है यार? तुम्हारी आँखें तो पूरी तरह से बंद थी.मैं बोला- मैं खुद नहीं जानता यह कैसे होता है भाभी. अगर मैंने आपको सोये सोये चोद कर गलती की है तो मुझको माफ़ कर दीजिए.

भाभी एकदम प्यार से बोली- नहीं सतीश, मैं तो अपनी हैरानी बता रही थी तुमको!मैं बोला- मैं अपनी इस कमज़ोरी को जानता हूँ लेकिन नैना कहती है कि मेरा शरीर बहुत अधिक यौन क्रिया करने में सक्षम है तो वो बगैर मेरे चाहे ही ऐसा हो जाता है.

इतने में नैना भी आ गई और भाभी को सुबह की चाय देते हुए बोली- मैंने सुन लिया है भाभी आप जो कह रही हैं वो बिल्कुल सही है, छोटे मालिक को रात को कुछ नहीं पता रहता कि वो क्या कर रहे हैं.भाभी बोली- जो सतीश की पत्नी बनेगी, उसकी तो मौज ही मौज है.

नैना बोली- अच्छा भाभी, छोटे मालिक तो कॉलेज जा रहे हैं और वापस आकर फिर से आप को चोदेंगे ताकि गर्भ ठहरने की सम्भावना बढ़ जाए. ठीक है न? भैया तो शाम को को ही आएंगे ना?भाभी ने कहा- वो कह रहे थे कि उनको लौटते हुए शाम हो जायेगी.

कॉलेज से लौटा तो जल्दी से खाना खाकर मैं तैयार हो गया और नैना भाभी को ले कर मेरे कमरे में आ गई.नैना बोली- भाभी, जी आपको पूर्ण रूप से कामवासना से ओतप्रोत होना है तो मैं इस काम में आपकी मदद करती हूँ और छोटे मालिक भी यही काम करेंगे.

हम तीनों जल्दी ही वस्त्रहीन हो गए और नैना ने भाभी को पलंग पर लिटा दिया, फिर मैंने भाभी के गोल सॉलिड मम्मों को मुंह में ले लिया और उनको चूसने लगा.काली गोल चूचियों को चूसना भाभी को बहुत अधिक मज़ा देता था, वो काम मैंने शुरू कर दिया.

थोड़ी देर में भाभी गर्मी से उफन गई और उनकी चूत में उंगली डाली तो वो एकदम गीली हो रही थी.तब नैना ने मुझको इशारा किया, मैंने भाभी को पलंग पर चिट लेटा दिया और उनकी चौड़ी संगममर जैसी टांगों में बैठ कर चुदाई का काम शुरू कर दिया.

भाभी जल्दी ही चुदाई में पूरी तरह से रंग गई और खूब ज़ोर ज़ोर से मेरे धक्कों का जवाब देने लगी.कोई 10-12 मिन्ट बाद मैंने महसूस किया कि भाभी के गर्भाशय का मुंह खुल रहा है और बंद हो रहा है. तभी भाभी का छूट गया और मेरे जांघों को भिगो गया.अब मैंने फिर धीरे धीरे से और फिर जल्दी ही तेज़ तेज़ चुदाई करने दी.इस बीच नैना भाभी के मम्मों को चूस रही थी और साथ ही उसके भग को भी मसल रही थी.अब भाभी ने अपनी कमर को ऊपर को उठा कर झटका देना शुरू कर दिया और मैं समझ गया कि भाभी फिर स्खलित होने वाली हैं, मेरे धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ हो गई और मैंने अपने दोनों हाथ भाभी के चूतड़ों के नीचे रख कर उनको ऊपर उठा लिया और गहरे और तेज़ धक्के मारने लगा.

भाभी जोश में तड़फड़ा रही थी और अपने सर को इधर उधर कर रही थी, नैना ने इशारा किया और मैंने भी निशाना साध कर ठीक उनके गर्भाशय पर लंड को बिठा कर अपना तीव्र फव्वारा छोड़ दिया.मैंने भाभी के चूतड़ों को ऊपर उठाये हुए ही अपने लंड के साथ जोड़ दिया.नैना ने बाद में बताया कि मैं और भाभी एक दूसरे के साथ जुड़े हुए बुरी तरह से कांप रहे थे.

भाभी को नीचे पलंग पर लिटा कर नैना ने उनके चूतड़ों के नीचे मोटे तकिये को रख दिया और मुझको नीचे आने के लिए कहा.मैं बगल में लेट गया और ज़ोर ज़ोर से हांफ़ने लगा, जब थोड़ा हांफ़ना कम हुआ तो नैना ने वहीं रखा खास शरबत का गिलास हम दोनों को पकड़ा दिया.

भाभी भी आँख मूंद कर लेटी हुई थी, जब शरबत दिया गया तो उन्होंने पहले मुझको होटों पर किस किया और साथ ही कस के जफ़्फ़ी डाली और कहा- थैंकयू सतीश यार! यू आर ग्रेट!

अब मैं जल्दी से उठा और अपने कपड़े पहन कर बैठक में आ गया क्यूंकि मुझको अंदेशा था कि भैया कभी भी वापस आ सकते हैं.जब सब सामान्य हुए तो चाय का इंतज़ाम पारो ने कर दिया.चाय पी कर मैं अपनी कोठी के बगीचे में टहलने लगा.

कोई 6 बजे भैया वापस आये और काफी थके हुए लगे, आते ही नहाये धोये और बैठक में आकर बोले- सतीश यार, मेरा काम यहाँ खत्म हो गया है, कल सवेरे हम निकल जाएंगे अपने गाँव के लिए!मैंने कहा- अभी कुछ दिन और रुक जाते, बड़ा मज़ा आ रहा था आपके और भाभी के साथ!भैया बोले- फिर आएंगे और फिर यह मज़ा दोबारा करेंगे.

उस रात हम सब अपने अपने कमरों में सोये और भाभी को नैना ने पहले ही कह रखा था कि आज की रात भैया से ज़रूर चुदवाना.

अगले दिन भैया और भाभी जाने के लिए तैयार हो गए थे, नैना थोड़ी देर के लिए भाभी को उनके कमरे में ले गई और थोड़ी देर में ही दोनों वापस भी आ गई और दोनों ही बड़ी खुश लग रही थी.नैना ने मुझको आँख मारी और सर हिला दिया जिसका मतलब था कि काम हो गया था.थोड़ी देर बाद नाश्ता करके वो दोनों अपनी कार में बैठ कर गाँव चले गए और मैं कॉलेज चला गया.
 
कॉलेज की लड़कियाँ

थोड़ी देर बाद नाश्ता करके भैया और भाभी अपनी कार में बैठ कर गाँव चले गए, मैं भी नाश्ता करके कॉलेज चला गया.आज कॉलेज के मुख्य गेट पर मुझको शानू और बानो मिल गई.पाठकों को याद होगा नैनीताल ट्रिप में ये लड़कियाँ उन चार लड़कियों का ग्रुप था जो मेरे संपर्क में आईं थी. और मेरे ही कॉलेज में पढ़ती थी.

शानू बोली- सतीश यार, तुम तो ईद का चाँद हो गए हो, कभी मिलते ही नहीं?मैं बोला- सॉरी दोस्तो, पीछे कुछ दिन बहुत बिजी था, मेरे घर में बहुत मेहमान आये हुए थे. बोलो क्या सेवा करें आप दोनों की?शानू बोली- अभी टाइम है कुछ मिन्ट का तुम्हारे पास?मैं बोला- हाँ हाँ, है क्यों नहीं, आप जैसी हसीनों के लिए टाइम ही टाइम है, तुम अर्ज़ करो क्या काम है?शानू बोली- चलो फिर थोड़ी देर के लिए कैंटीन चलते हैं अगर कोई पीरियड नहीं है तुम्हारा तो?मैं बोला- ठीक है आओ!

कैंटीन पहुँच कर मैंने पूछा- क्या खाएंगी या पियेंगी दोनों?बानो बोली- एक एक कोक मंगवा लो यार!मैं काउंटर पर गया और 3 कोक का आर्डर दे आया और वापस आकर उन दोनों के साथ बैठ गया.

पाठकों को याद दिला दूँ कि ये दोनों वही लड़कियाँ थी जिन्होंने मेरा अपहरण किया था जब मैं निम्मी और मैरी के कमरे से निकला था नैनीताल के होटल में.

कोक पीते हुए मैं बोला- शानू और बानो, कैसे हो आप दोनों, बड़े अरसे के बाद आपको मेरी याद आई जब कि बहुत सेवा की थी मैंने आप दोनों की नैनीताल में!शानू हँसते हुए बोली- वही सेवा तो करवाने के लिए आई हैं तुम्हारे पास सतीश राजा.मैं बोला- बोलो, क्या करना है मुझको?

शानू बोली- तुमने नैनीताल में बताया था कि तुम्हारे पास एक कोठी है जिसमें तुम रहते हो?मैं बोला- हाँ है तो सही, बोलो क्या काम है?शानू बोली- नैनीताल वाला किस्सा दोहराना है यार बस, और क्या करना है!मैं थोड़ी देर चुप रहा और फिर बोला- देखो शानू, वहाँ मेरी हाउसकीपर भी है और एक कुक भी है, वहाँ तुमको वैसी प्राइवेसी नहीं मिल पाएगी जैसा कि नैनीताल में थी. बोलो उनके रहने से तुम दोनों को कोई प्रॉब्लम नहीं तो फिर मैं बात कर लेता हूँ उन दोनों से?शानू बोली- ठीक है कल सुबह बता देना.

मैं बोला- सिर्फ आप दोनों ही हैं या फिर कोई और भी है?शानू बोली- अगर किसी और को बुलाएँ तो तुम को ऐतराज़ तो नहीं न?मैं बोला- कोई और लड़का या लड़की?बानो बोली- लड़की ही होगी. हम तुमको उससे मिलवा भी देंगे.मैं बोला- अपने कॉलेज की है या कहीं और की?शानू बोली- हमारी क्लास फेलो है यार, लंच टाइम में तुम को मिलवा देते हैं उसको!मैं बोला- उफ़ मेरे मौला 3 तुम और एक मैं?दोनों हंस पड़ी और शानू बोली- हमने देखा है कि कैसे तुम 4 को भी संभाल लेते हो!

मैं बोला- लेकिन हमारी हाउसकीपर की एक शर्त होती है, मेरे साथ जो भी लड़की आती है मेरे घर में वो सारे कार्यक्रम में उपस्थित रहती है और वो उस कार्यक्रम का संचालन भी करती है, बोलो मंज़ूर है?शानू बोली- यह कैसी शर्त है सतीश यार. एक बूढ़ी औरत का वहाँ क्या काम?मैं बड़े ज़ोर से हंसा- बूढ़ी औरत? अरे नहीं वो तो 22-23 की है और सेक्स में एक्सपर्ट है, तुम से यही कोई 3-4 साल बड़ी होगी.शानू बोली- अच्छा हम सोच कर लंच टाइम में तुमको बताती हैं.

फिर हम सब अपनी अपनी क्लासों में चले गए.

लंच टाइम में शानू और बानो मिली और उनके साथ एक बहुत ही खूबसूरत लड़की भी थी जिसका नाम उर्मिला था.एकदम खिलता हुआ चेहरा, लालिमा भरी रंगत थी उसके चेहरे की और सिल्क की साड़ी में वो बेहद हसीन और सेक्सी लग रही थी. गोल गोल उभरे हुए उरोज और उसी तरह के गोल और मोटे चूतड़.मैं तो उसको देखता ही रह गया.

फिर मैंने उनसे पूछा- क्यों शानू जी क्या फैसला किया आपने?शानू बानो और उर्मि को देखते हुए बोली- ठीक है जैसा तुम ठीक समझो!

मैं बोला- एक और बात, क्या आप सब नॉन-वेज हैं या फिर टोटली वेज हैं?शानू बोली- क्यों यह क्यों पूछ रहे हो?मैं बोला-वाह शानू जी, आप हमारे घर आएँगी तो हम ठाकुर लोग आपको ऐसे थोड़े ही जाने देंगे? कुछ खातिर वातिर भी तो करना फ़र्ज़ बनता है हमारा.शानू हँसते हुए बोली- वैसे उर्मि भी ठाकुरों के खानदान से है और हम सब नॉन-वेज हैं.

मैं बोला- ठीक है, कल का लंच आप सब हमारे घर में करेंगी. क्यों ठीक है न?शानू सबको देखने के बाद बोली- ठीक है सतीश यार, तुम इतनी तक़ल्लुफ़ में क्यों पड़ रहे हो?

जब घर पहुँचा तो नैना ने खाना परोस दिया और पास ही बैठ गई.मैंने उसको सारी बात बताई और कहा- कल लंच और आगे के कार्यक्रम के लिए मैं उन कॉलेज की लड़कियों को बोल आया हूँ और यह भी बता दिया है कि तुम हम सबके साथ रहोगी.

नैना हँसते हुए बोली- वाह छोटे मालिक, आप तो दिन पर दिन बहुत ही समझदार हो रहे हो!मैंने नैना को समझा दिया कि उन तीन लड़कियों में से दो तो मैंने चोद रखी हैं और तीसरी मेरे लिये नई कली है. साथ ही मैंने उसके गोल चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया.

वो भी मेरी गोद में आकर बैठ गई, मैंने उस को हॉट किस किया और उसके मम्मों को भी दबाया.मेरा खाना खत्म हो चुका था, वो बर्तन लेकर चली गई.उसको ठुमक ठुमक चलते देख कर सुमी भाभी की बहुत याद आ रही थी. क्या चीज़ थी यार और क्या चुदवाती थी!हाँ, उसकी पुरानी प्यास थी लेकिन उसने कैसे उस पर काबू रखा, वो वाकयी सराहनीय था.चलो नैना ने उसके पति को भी ठीक कर दिया और साथ में उसको एक बच्चे के सुख के भी योग्य बना दिया.

लेकिन उसका अपना क्या हुआ?जब वो वापस आई तो मैं उसके हाथ को पकड़ कर अपने कमरे में ले गया और वहाँ उसको एक बहुत ही गर्म चुम्मी होटों पर कर दी.मैंने जान कर अपनी एक टांग उसकी साड़ी के ऊपर से उसकी चूत को छूने के लिए डाल दी.

तब मैंने उसको पूछा- नैना डार्लिंग, यह जो तुम्हारे पास बच्चों के बारे में जो हुनर है, उसका सही इस्तेमाल करो न, तुम पता लगाओ कैसे क्या करना है और मैं तुमको जगह और धन दिलवा दूंगा.नैना बोली- वो सब मैंने पता कर लिया है, आप अगर इजाज़त दें तो मैं कोठी में एक छोटी कोठरी में अपना छोटा सा क्लिनिक खोल दूंगी.मैं बोला- ठीक है, मैं आज ही मम्मी से बात करता हूँ, उनकी इजाज़त लेकर मैं यह तुम्हारे लिए कर देता हूँ, ठीक है?नैना बोली- ठीक है.

फिर मैंने उसको कहा- तो चलो फिर एक छोटी सी चूत ही दे दो, बस इत्ता सा ही अंदर डालूँगा, सिर्फ डाला और निकाला, यही होगा!नैना हँसते हुए बोली- मुझको सब मालूम है तुम कितना डालोगे और कितना निकलोगे.यह कहते हुए उसने अपनी साड़ी इत्यादि उतार दी और मैंने भी पैंट कमीज उतार दी.

फिर हम एक धीमी प्यारी सी चुदाई में लग गए, न ज़ोर का धक्का न ज़ोर का उछाला.धीरे धीरे कभी न खत्म होने वाली चुदाई जिसमें दो जान एक शरीर हो जाते हैं, ना छुटाने की जल्दी न निकालने की जल्दी, हल्की प्यारी सी चूमा चाटी और फिर अंतहीन रगड़ा रगड़ी और साथ ही शारीरिक गर्मी उसकी मेरे में और मेरी उस में!यह खेल खलते हुए ही हम दोनों एक दूसरे की बाहों में सो गए.

कहानी जारी रहेगी
 
कॉलेज की लड़कियाँ

अगले दिन दोपहर को कॉलेज कैंटीन में शानू और बानो तो आ गई लेकिन उर्मि नहीं आई.हम तीनो कैंटीन में इंतज़ार कर रहे थे, कोई 10 मिन्ट की इंतज़ार के बाद उर्मि भी आ गई.

हम सब दो रिक्शा पर बैठ कर मेरी कोठी पहुँच गए.लखन लाल चौकीदार ने हम सबको सलाम की और फिर मैं तीनों लड़कियों को लेकर बैठक में आ गया.नैना रानी ग्लासों में शरबत ले आई और मैंने उन सबको उससे मिलवाया और यह भी बताया कि ये लड़कियाँ तुमको एक बुढ़िया समझ रही थी.इस बात पर काफी हंसी मज़ाक चलता रहा.

खाना बहुत ही स्वादिष्ट बना था और अंत में हम सबने आइसक्रीम खाई.खाना समाप्त करके हम सब मेरे कमरे में आ गए जहाँ नैना ने पहले से ही मोटे गद्दे बिछा रखे थे.

शानू और बानो को मैं नैनीताल में चोद चुका था तो वो झट से मेरे पास आ गई और मुझको दोनों ने अपने बाहों में भर लिया. मैं भी एक एक कर के दोनों को चूमने लगा और वो भी खुल्लम खुल्ला मेरे लौड़े को पकड़ कर खेलने लगी.

उर्मि यह सब बड़ी ही हैरानी से देख रही थी.नैना उर्मि के पास गई और उसको लेकर मेरे पास आ गई.शानू और बानो ने हम दोनों का पहले हाथ मिलवाया और फिर दोनों ने उर्मि को मेरी तरफ धकेल दिया.

मैंने झट से उसको अपनी बाहों में ले लिया और कहा- वेरी सॉरी उर्मि जी, आप से नई मुलाकात है न… तो अभी एक दूसरे के साथ खुल नहीं पाये.उर्मि भी अपनी मधुर आवाज़ में बोली- आपका ज़िक्र बहुत बार इन दोनों ने मेरे से किया था लेकिन आपको देखा तो आप बहुत ही अच्छे निकले.मैंने झट से उर्मि को अपने गले लगा लिया और उसके हल्के गुलाबी होंटों को चूम लिया.उसकी हाइट यही कोई 5 फ़ीट 5 इंच थी तो वो एकदम से मेरे साथ फिट बैठ गई.

जब उसके मोटे उरोज मेरी छाती से टकराये तो मुझको एक झनझनाहट सी हुई सारे शरीर में!मैंने फिर से उसको बाँहों में भर लिया और उसके होटों को बार बार चूमने लगा.नैना मुझको गुस्से में देख रही थी.

मैं समझ गया और मैंने झट से शानू को बाँहों में ले लिया और उसको गरम जोशी से भरी एक चुम्मी दे दी और फिर मैंने अपना ध्यान बानो की तरफ किया और जल्दी ही उसको भी जफ़्फ़ी डाली और चूमा चाटी शुरू कर दी.

अब नैना ने तीनों लड़कियों से कहा- छोटे मालिक अब बारी बारी से आपके कपड़े उतारेंगे जिसमें मैं उनकी मदद करूंगी.

सबसे पहले बानो सामने आ गई और मैंने उसकी सलवार कमीज धीरे से उतार दी और उसके मोटे और सॉलिड मम्मों को ब्रा में से उछल कर बाहर आते देखा, जल्दी से उसके मम्मों को एक चुम्मी दे दी और फिर मैंने शानू को सामने पाया और वैसे ही उसके कपड़े भी उतार दिए और वैसी ही एक चुम्मी उसके छोटे लेकिन सॉलिड मम्मों को दे दी.

अब नैना उर्मि को लेकर मेरे सामने आई और उसके कपड़े खुद ही उतारने लगी. जब मैंने उसको देखा तो उसने आँख से इशारा किया कि उसको वो काम करने दो.धीरे धीरे से नैना पहले उर्मि की साड़ी उतारने लगी और फिर उसके पेटीकोट को उतार दिया लेकिन उसने ऐसे तरीके से उर्मि के कपड़ों को उतारा कि मैं और बाकी दोनों लड़कियाँ उसके मम्मों और चूत की झलक नहीं पा सके.

और अंत में उसने उसके मोटे मम्मों के ऊपर से ब्रा भी उतार दी लेकिन हम तीनों बड़ी उत्सुकता से उसके मम्मों और चूत की झलक पाने के लिए बेकरार थे.नैना ने हमारी बेकरारी समझ ली थी, वो जानबूझ कर हम को तरसा रही थी और कुछ भी नहीं देखने दे रही थी.

उर्मि को भी सारे तमाशे से बड़ा आनन्द आ रहा था और वो भी भरसक कोशिश कर रही थी कि हम कुछ न देख पाएँ.इस ऊहापोह में हमने मिल कर नैना की साड़ी खींच दी.जैसे ही उसका ध्यान अपनी साड़ी की तरफ गया, हम तीनों ने उर्मि को खींच कर उसके पीछे से निकाल लिया.

अब उर्मि नंगी ही हम तीनों के सामने थी, मैं तो उसके मम्मों और काले बालों से ढकी चूत को देख कर मुग्ध हो गया, फिर उर्मि के गोल चूतड़ देखे तो मन एकदम पगला गया और मैंने आगे बढ़ कर उर्मि को फिर से गले लगा लिया.उर्मि भी आगे बढ़ कर मेरे कपड़े उतारने लगी.
 
तब नैना भी अपने कपड़े उतार कर उर्मि का साथ दे रही थी.दोनों ने मिल कर मुझ को जल्दी ही नंगा कर दिया और उर्मि ने पहली बार मेरे लम्बे और मोटे लंड को देखा.

वो झट से बैठ गई और मेरे लंड को अपने मुंह में डाल दिया और शानू और बानो भी मेरे दोनों और खड़ी हो गई और मेरी सफाचट छाती को चूमने लगी.मुझको ऐसा लगा कि मैं स्वर्ग में अप्सराओं के बीच में खड़ा हूँ.

नैना ने जल्दी से आगे बढ़ कर मुझसे पूछा- छोटे मालिक, आप ठीक तो हैं न?मैंने उसको आँख मारी- नैना डार्लिंग, यह सब होने के बाद मैं कैसे ठीक रह सकता हूँ, मेरा तो स्वर्गवास हो गया लगता है.तीनों लड़कियाँ यह सुन कर बहुत ज़ोर से हंसने लगी.

अब उर्मि बोली- इतने मोटे और लम्बे लंड वाला भूत मैंने पहले कभी नहीं देखा था.मैं भी बोला- इतनी सुंदर परियाँ मैंने पहले कभी नहीं देखी थीं.और मैंने झट से उर्मि के गोल मम्मों को झपट कर पकड़ लिया और उनको चूमने लगा. उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो एकदम गीली हुई थी और लंड के लिए बेकरार हो रही थी.

नैना ने कहा- अब उर्मि नीचे लेट जाए और छोटे मालिक उसको चोदना शुरू कर दें ताकि बाकी दोनों की भी बारी आ जाए. जब तक ये दोनों चुदाई में बिजी हैं, तब तक हम तीनों एक दूसरे से प्रेमालाप करेंगी. उर्मि के बाद शानू की बारी और आखिर में बानो और मेरी बारी है.

मैंने पहले उर्मि को होंटों पर चुम्बन किया और फिर उसके मम्मों को चूसता हुआ पेट पर उसकी नाभि में जीभ से चुसाई और फिर नीचे का सफर शुरू हुआ.

नीचे पहुँच कर नर्म, गुलाबी और उभरी हुई चूत को देखा, उसको सूंघा और फिर उसमें जीभ से हमला कर दिया.उसकी भग को चूसने लगा तो उर्मि ने अपनी कमर उठा कर अपनी चूत को मेरे मुंह में दे मारा और उसको मेरे मुंह में रगड़ने लगी.वो बहुत ही कामातुर हो चुकी थी और मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से खींच रही थी, मेरा लौड़ा भी इस हसीना की चूत के लिए तरस गया था..

मैं उसकी टांगों में बैठा और अपने लोह समान लंड को चूत के निशाने पर बिठा कर एक हल्का धक्का मारा, उर्मि की चूत बहुत ही टाइट थी तो लौड़ा बाहर ही रुका हुआ था.

थोड़ी देर मैंने लंड को चूत के मुंह और भग पर रगड़ा और फिर प्रवेष के लिए अर्जी दी, इस बार शायद चूत ने इजाजत दे दी थी और लौड़ा आसानी से पूरा अंदर चला गया.जैसे ही लंड पूरा अंदर गया, उर्मि के मुंह से बहुत ज़ोर से हाय की आवाज़ निकली.

मैंने घबरा कर पूछा- अंदर जगह कम है तो थोड़ा निकाल लूँ क्या?उर्मि तो नहीं समझी इस लतीफ़े को, लेकिन शानू और बानो ज़ोर से हंस पड़ी.

मैं धीरे धीरे से चुदाई की स्पीड बढ़ाने लगा.उधर नैना भी दोनों सेहलियों को गर्म करने में लगी थी, एक की चूत में उंगली थी और दूसरी के मम्मों में मुंह था.बानो के मोटे मम्मे जबरन निगाहें अपनी तरफ खींच रहे थे और नैना भी उसके मम्मों को बहुत चूस चूस कर मज़ा ले रही थी.

शानू की चूत से बहुत रस टपक रहा था और बानो इस कोशिश में थी कि उसके खुशबूदार रस को पी जाए.

जैसे ही मैं उर्मि को फुल स्पीड से चोदने लगा, वैसे ही उसके मुंह से ‘हाय हाय…’ की मधुर आवाज़ें निकलने लगी और मेरा लौड़ा यह कह रहा था कि फाड़ दूंगा इस साली को छोड़ूंगा नहीं.

एक ज़ोरदार धक्के के बाद उर्मि की कमर इतनी ऊपर उठी और अपने साथ मुझको भी ऊपर उठा दिया पूरा का पूरा.फिर इतने ज़ोर से नीचे हुई कि मेरी कमर उसकी मुलायम और संगमरमरी जांघों की कैद में आ गई.

फिर उर्मि की कंपकंपाहट इतने ज़ोर से शुरू हुई कि मेरे साथ बाकी तीनों चूतों को भी अपना कारोबार रोक कर सिर्फ उर्मि की खूबसूरत जांघों और कमर को देखना पड़ा.मैंने अपना मुंह उर्मि के मुंह से चिपका रखा था ताकि वो और न चिल्लाये.

धीरे धीरे से वो संयत हुई और मैं उसके ऊपर से उठा.मेरा लंड उर्मि की चूत से निकले रस में काफ़ी सराबोर हो गया था जिसको नैना ने तौलिये से साफ़ किया और फिर उर्मि को भी आये पसीने को साफ़ किया और हम सबको शरबत भी पिलाया.

उर्मि ऐसे लेट गई जैसे वो बड़ी लम्बी रेस के बाद लौटी हो.

अब शानू और बानो ने मुझको घेर लिया, दोनों मेरे दोनों तरफ खड़ी होकर मुझको चूमने और मेरी छाती के चुचूकों को चूसने लगी.नैना ने दोनों को पलंग पर लिटा दिया और फिर मुझको उन दोनों के बीच में लेटना पड़ा.

मैंने पहले शानू को चूमा और फिर बानो को, दोनों की चूत में हाथ डाला तो दोनों तपती हुई भट्टी बनी हुई थी क्यूंकि उर्मि की चुदाई और बाद में नैना के साथ खेल खिलवाड़ में दोनों बेहद सेक्सी हो गई थी.
 
नैना ने सुझाया- छोटे मालिक, आप इन दोनों लड़कियों को एक साथ चोद डालो जैसे आप कई बार कर चुके हो.मैं बोला- क्यों शानू और बानो, मैं तुमको एक साथ चोद डालूँ या फिर एक एक कर के? बोलो क्या मर्ज़ी है?बानो बोली- अभी तो हम नहीं रुक सकती हैं अभी इतनी गर्मी चढ़ी हुई है. अभी तो साथ साथ कर दो हमारा काम, बाद में सिंगल एंट्री कर देना ओके?शानू भी बोली- हाँ हाँ, यही ठीक रहेगा.

नैना बोली- चलो, फिर तुम दोनों घोड़ी बन जाओ.

जब वो घोड़ी बन गई तो मैं पहले बानो के पीछे से चूत में खड़े लंड को धीरे से डालने की कोशिश करने लगा लेकिन बानो इतनी सेक्सी हो चुकी थी कि उसने ज़रा भी सब्र किये बगैर अपनी गांड को मेरे लंड के साथ जोड़ दिया और लंड पूरा का पूरा अंदर चला गया.बानो की चूत एकदम गीली और फूली हुई थी, वो स्वयं ही चूतड़ों को आगे पीछे कर रही थी और चुदाई का पूरा आनन्द ले रही थी. उसकी इस हालत को देख कर मैंने चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी और उसके चूतड़ों को हाथ में पकड़ कर लम्बे और गहरे धक्के मारने लगा.थोड़ी देर में ही वो छूट गई और उसकी चूत खुलने और बंद होने लगी.

मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत से निकाल कर शानू की चूत में डाल दिया और वैसे ही पूरी स्पीड से उसको भी चोदने लगा. वो इतनी गर्म नहीं थी तो उसकी चुदाई मैंने धीरे धीरे करनी शुरू की. धीरे चुदाई का मज़ा ही कुछ और है, वहाँ दोनों पक्ष अपना प्रेम व्यक्त कर सकते हैं.लेकिन अब शानू भी काफी हॉट हो चुकी थी तो मैंने फ़ास्ट और स्लो वाली स्पीड को अपनाया.मैं नीचे हाथ डाल कर उसकी चूत के भग को भी मसलने लगा जिससे उसका मज़ा दुगना हो गया और वो अब जल्दी जल्दी अपने चूतड़ आगे पीछे करने लगी.

दूसरी तरफ नैना उर्मि के साथ प्रेमालाप करने में मग्न थी, उसके गोल सॉलिड मम्मों को चूस रही थी और उर्मि भी अपने हाथ को नैना की चूत में डाल कर उसकी भग को मसल रही थी.जब मैंने महसूस किया कि शानू छूटने के कगार पर है तो मैंने अपनी स्पीड बहुत तेज़ कर दी और कुछ ही मिन्ट में शानू धराशायी हो गई.

मैं अपना लंड शानू की चूत से निकाल कर फर्श पर आ गया और ललकार भरी आवाज़ में बोला- और कोई है माई की लाडली जो मेरे सामने आकर खड़ी हो सके?नैना ने हँसते हुए कहा- अभी तो मैं बाकी हूँ लेकिन अपना हिसाब बाद में कर लूंगी. क्यों उर्मि और इच्छा है क्या?उसने इंकार में सर हिला दिया और बानो और शानू भी कुछ नहीं बोली.

मैं अभी भी उर्मि पर मर मिटा था तो मैंने उर्मि को आलिंगन में लिया और उसके कान में कहा- उर्मि डार्लिंग, तुम बड़ी सेक्सी और सुन्दर हो, तुम से जी नहीं भरा है अभी, क्या कल आना चाहोगी तुम अकेली ही?उसने हाँ में सर हिला दिया और मैंने वैसे ही उसके कान में कहा- फिर कॉलेज में बात कर लेंगे.

कपड़े पहनने से पहले मैंने उर्मि और बानो के मम्मों को चूमा चाटा और शानू के चूतड़ों को हल्के से मसला.फिर तीनों ने कपड़े पहन लिए और हम सब फिर बैठक में आ गए.नैना सबके लिए शर्बत और चाय ले आई. मैंने और उर्मि ने चाय पी और बाकी दोनों ने शरबत पिया.

नैना ने तीनों को हमारे घर का फ़ोन नंबर दे दिया और कहा- कभी ज़रूरत हो तो फोन कर लेना.उर्मि मेरे साथ वाली क्लास में बैठती थी और शानू और बानो एक ही क्लास में बैठती थी.फिर मिलने का वायदा करके वो तीनों अपने अपने घर चली गई.कहानी के नीचे अपने कमेन्ट्स भी लिखिये !

कहानी जारी रहेगी.
 
उर्मि की चूत चुदास

कुछ दिन बाद उर्मि मुझको कॉलेज में फिर मिली.मेरा इंग्लिश का पीरियड खत्म हुआ तो अगला पीरियड खाली था, मैं क्लास में ही बैठा हुआ पिछले नोट्स को कॉपी करने में लगा था

कि मुझको लगा कि कोई मेरे साथ बेंच पर आकर बैठ गया है.

मैंने मुड़ कर देखा तो वो उर्मि ही थी, उसको देखते ही मेरी तो बांछें खिल गई.मैं बोला- आओ उर्मि जी, कैसी हैं आप?उर्मि बोली- बिल्कुल ठीक हूँ और तुम सुनाओ सतीश कैसे हो?मैं बोला- बढ़िया, लेकिन आपकी याद में बेकरार हूँ.उर्मि बोली- वही हाल मेरा है. बहुत तरस रही है मेरी वो आपके उनके लिए?मैं शरारत के मूड में बोला- मैं कुछ समझा नहीं उर्मि जी, कौन तरस रहा है किसके लिए?उर्मि थोड़ा शर्माती हुई बोली- वही!

मैं उसके मुंह से पूरा नाम सुनना चाहता था तो बोला- वही कौन? कुछ नाम तो लीजिये कौन है वो?उर्मि बोली- सतीश यार, तुम जानते हो कौन किसके लिए तरस रहा है, फिर भी बनते हो.मैं बोला- सच्ची!! कसम से, मैं कुछ समझा नहीं, इसलिए पूछ रहा था कि कौन किसके लिए तरस रहा है.उर्मि झुंझलाते हुए बोली- मेरी वो तुम्हारे उसके लिए तरस रही है.

मैं कुछ सकुचाते हुए बोला- आपकी वो मेरे उसके लिए तरस रही है? पर क्या है यह ‘वो’ और ‘उस’ ज़रा खोल के समझाओ ना उर्मि जी?

मैं सीधा साधा लड़का हूँ यह लड़कियों की भाषा नहीं समझता उर्मि जी!

मन ही मन मैं मज़े ले रहा था. अब उर्मि ने मेरी आँखों में आँखें डाल कर देखा और फिर कहा- वाकयी में ही तुम नहीं समझे सतीश?मैं बड़ा मासूम सा पोज़ बना कर बोला- कतई ही नहीं समझा, आप साफ़ शब्दों में कहिये न प्लीज!अब उर्मि कुछ सोच में पड़ गई और फिर अपना मुंह मेरे कान के पास ला कर बोली- मेरी चूत आपके मोटे लंड के लिए तरस रही है.मैं बोला- ऊह्ह्ह… रियली? ओह्ह्ह माय गॉड!उर्मि बोली- क्यों क्या हुआ?

मैंने भी अपना मुंह उर्मि के कान के पास ले जाकर कहा- मेरा भी वो बहुत तरस रहा है आपकी उसके लिए!अब उर्मि और मैं ज़ोर से हंस पड़े और उर्मि ने मेरी कमर में चुटकी काट ली, उर्मि बोली- बहुत शरारती हो गए तुम सतीश!मैं बोला- जो भी बनाया हज़ूर आपने!उर्मि बोली- कब करोगे?मैं बोला- जब तुम चाहो.उर्मि बोली- आज हो सकता है क्या?मैं बोला- हाँ हाँ, हो क्यों नहीं हो सकता, तुम हुक्म तो करो मेरी जान, अभी अरेंज कर लेते हैं, तुम अकेली ही ना?उर्मि बोली- हाँ!मैं बोला- तब ठीक है, मैं नैना को फ़ोन कर देता हूँ, लास्ट पीरियड के बाद कैंटीन में मिलते हैं.

उर्मि चली गई तो मैंने नैना को फ़ोन कर दिया, उसने कहा कि वो खाना तैयार रखेगी.

लास्ट पीरियड की खत्म होने की घंटी बजी तो मैं दौड़ कर कैंटीन पहुँच गया और वहाँ उर्मि का इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर में वो छोटे

से बैग के साथ आ गई.उर्मि और मैं रिक्शा में बैठ कर 10 मिन्ट में ही घर पहुँच गए.

नैना हमारा इंतज़ार कर रही थी, पहले उसने ठंडा शर्बत पिलाया और फिर खाना लगा दिया.खाने के दौरान उर्मि ने बताया कि उसका घर भी वहाँ से ज़्यादा दूर नहीं है.

नैना ने पूछा कि उसके घर में कौन कौन हैं तो वो बोली- बड़े भैया और भाभी हैं और एक छोटा भतीजा है जो बहुत ही शरारती है. वैसे

हमारा गाँव वहाँ से 2-3 घंटे ही दूर है और मम्मी पापा वहीं रहते हैं.

नैना बोली- तुम बड़ी सुन्दर हो, अब तक तुम्हारी शादी क्यों नहीं हुई?उर्मि बोली- ऐसा है दीदी, मेरे माँ बाप तो पीछे पड़े हैं लेकिन मैं तो एक डॉक्टर बनना चाहती हूँ तो अभी तक सबको बोल दिया है कि

मेरी शादी करने की कोई कोशिश ना करें.नैना भी हँसते हुए बोली- बहुत ही अच्छा विचार है तुम्हारा उर्मि… तुम ज़रूर डॉक्टर बन जाओगी.

फिर हम आइस क्रीम खाकर मेरे कमरे में आ गए. वहाँ नैना थोड़ी देर बाद आई और पूछने लगी- छोटे मालिक, आज मेरी ज़रूरत है

यहाँ क्या?मैंने उर्मि की तरफ देखा और पूछा- क्यों उर्मि? तुम्हारी क्या इच्छा है?उर्मि बोली- सतीश, तुम्हारी क्या इच्छा है तुम बताओ.तब नैना बोली- छोटे मालिक, आज आप अकेले ही संभाल लीजिये उर्मि को!यह कह कर नैना वहाँ से चली गई.मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया और मुड़ कर उर्मि को उठा कर एक बहुत ही प्रगाढ़ आलिंगन किया और उसके होंटों को बहुत ही प्रेम से

चूमा.

उर्मि भी मुझको चूमने लगी बेतहाशा और फिर वो एकदम से मेरे कपड़ों पर टूट पड़ी और जल्दी जल्दी मुझको वस्त्रहीन करने लगी.मैं भी उसके कपड़े उतारने लगा, पहले उसकी हल्के नीले रंग की साड़ी को उतार दिया और फिर उसके नीले रंग के ब्लाउज को भी

अलग कर दिया और जल्दी ही उसके पेटीकोट को भी उतार दिया.
 
वो उस समय सिर्फ सिल्क की ब्रा में ही थी, मैं दूर खड़ा होकर उसकी ख़ूबसूरती को निहारने लगा.ऐसा लग रहा था कि उसके जिस्म का हर हिस्सा जैसे साँचे में ढला हुआ हो!

और जब मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया तो उसके गोल और ठोस उरोज ऐसे हाथ में उछल कर आ गए जैसे बड़े खूबसूरत गेंद हों.

औरतों के उरोज मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी रहे हैं, मेरी मम्मी बताया करती थी कि जितनी भी आया मेरी देखभाल के लिए रखी जाती थी

वो सब यही कहती थी कि मैं उनकी गोद में जाते ही सीधे उनके मम्मों पर हाथ रखता था.

मैंने आगे बढ़ कर उर्मि को अपनी बाँहों में भर लिया और उसके होंटों को चूमने लगा.फिर उसको धीरे से मैं अपने पलंग की तरफ ले आया और उसको चित लिटा दिया.

अब मैं खुद पलंग पर बैठ गया और उसके मम्मों के साथ खेलने लगा, फिर उनको मुंह में लेकर उनके काले चुचूकों को भी चूसने लगा,

एक को चूम रहा होता तो उर्मि दूसरा मेरे मुंह में दे देती! जैसे एक के साथ दूसरा फ्री !!!

मैंने उर्मि के मम्मों के बाद अपना ध्यान उसके सपाट पेट और नाभि पर लग दिया और थोड़ा सा चाटने के बाद मैंने चूत पर छाए काले

घने बालों की तरफ ध्यान केंद्रित कर दिया.वहाँ ऊँगली से चूत के रेशमी बालों को छूते हुए उसकी चूत में ऊँगली डाल दी. बेहद गीली चूत में से भीनी भीनी सी खुशबू आ रही थी.

अब मैंने मुंह चूत में डाल दिया और उसकी भग को और चूत के लबों को चाटने लगा. फिर मेरा पूरा ध्यान उर्मि की चूत में छिपे भग

पर चला गया,. भग को मुंह में लेकर हल्के हल्के चूसने लगा.ऐसा करते ही उर्मि के चूतड़ अपने आप ऊपर की तरफ उठ गए और उसके मुख से हल्की हल्की सिसकारी की आवाज़ आने लगी.

फिर एकदम उर्मि की दोनों जांघों ने मेरे मुंह को अपने बीच जकड़ लिया, उसके हाथों ने मेरे सर को ऊपर उठाने की कोशिश की लेकिन

मैं मस्त चुसाई में लगा रहा.फिर उर्मि एकदम से चिल्ला पड़ी- ऊह्ह्ह ऊह्ह…और उसका सारा शरीर बेहद तीव्रता से कांपने लगा, उसकी जांघों ने मेरे मुंह को ऐसा ज़ोर का जकड़ा हुआ था कि मुझको सांस लेना भी

मुश्किल हो रहा था.

फिर उर्मि का शरीर एकदम से ढीला पड़ गया और यह मौका देख कर मैं उर्मि की टांगों में लेट गया और काफी देर से खड़े अपने लौड़े

को उर्मि की चूत के मुंह पर टिका कर एक हल्का सा धक्का मारा और फच्च से लंड सारा उर्मि की चूत में गृहप्रवेश कर गया.

अब मैंने धीरे धीरे से चुदाई शुरू कर दी. उर्मि का आलम यह था कि वो ही आँखें बंद किये आनन्द ले रही थी.कभी कभी नीचे से ठुमका ज़रूर लगा देती थी नीचे से शायद यह जताने के लिए कि वो सोई नहीं थी.अभी भी मैं उसके उरोजों को मुंह में लेकर चूस रहा था.

धीरे धीरे उर्मि की सोई हुई चूत फिर से जागने लगी और वो अंदर ही अंदर मेरे लंड को पकड़ और छोड़ रही थी क्यूंकि शायद उसको यह

उम्मीद थी कि इस गाय के थन से थोड़ा बहुत दूध निकल आये.लेकिन वो अभी सतीश के लंड से वाकिफ नहीं थी पूरी तरह! यह वो लंड था जिसको ओलिंपिक सेक्स गेम्स में भी गोल्ड मेडल मिल

सकता था.यह मैं नहीं कह रहा यह मेरे द्वारा उन चुदी हुई चूतों का एक मत निर्णय था, ऐसा मेरा ख्याल है.

लेकिन उर्मि की चूत अब पूरी तरह से जाग गई थी और पूरी शानो शौकत से चुदवा रही थी, कुछ धक्कों के बाद ही वो धराशाई हो गई.अब मैंने उसको घोड़ी बना कर चोदना शुरू कर दिया और उसके गोल और मुलायम चूतड़ों को अपने हाथों में लेकर धक्के मारने लगा.

वो भी बिदकी घोड़ी की तरह से अपनी लातें मरने से बाज़ नहीं आ रही थी लेकिन ऐसी घोड़ी को कंट्रोल करना मुझको अच्छी तरह से

आता था.मैंने फुल स्पीड से उसकी चुदाई शुरू कर दी, पूरा अंदर और फिर पूरा बाहर… इसी क्रम और फिर सरपट घुड़दौड़ से मैंने उर्मि जैसी घोड़ी

को भी मात दे दी.

जब तीसरी बार उर्मि छूटी तो वो पलंग पर ढेर हो गई और मैं उसकी बगल में लेट गया, मेरा लौड़ा तो अभी भी हवा में लहलहा रहा

था.मैं उठा और नैना को बुला लाया.उसने आते ही पहले उर्मि का पसीना पौंछा और फिर उसको और मुझ को रूह अफजा शरबत पीने को दिया.

नैना भी वहाँ रुक गई और उर्मि जो मेरे साथ लेटी थी, उसके मम्मों को सहलाने लगी और उसकी चूत के बालों को संवारने लगी.नैना बोली- उर्मि, अगर चाहो तो हमको बता सकती हो कि तुमको सबसे पहले किसने चोदा था?

उर्मि कुछ देर सोचती रही फिर बोली- मेरे गाँव में मेरा एक दूर का रिश्ते का भाई हमारे साथ रहता था, उसने मुझे पहली बार धोखे से

चोदा था जब मैं किशोरावस्था में थी.मैं बोला-अच्छा? बहुत बुरा हुआ तुम्हारे साथ उर्मि… लेकिन उसके बाद तुम चुदाई की शौक़ीन कैसे हो गई?
 
नैना बोली- इस विषय के बारे में मैं बहुत कुछ जानती हूँ वो आप दोनों को भी बता देती हूँ. अगर कच्ची कली को तोड़ा जाए यानि

छोटी उम्र वाली लड़की से यौन क्रिया की जाए तो वो एकदम से पगला जाती है और अक्सर देखा गया है कि वो किसी एक मर्द की हो

कर नहीं रह सकती क्यूंकि उसके एक मर्द से तसल्ली नहीं होती. क्यों उर्मि, क्या मैं ठीक कह रही हूँ?

उर्मि हैरानी से नैना को देख रही थी. फिर एकदम से उर्मि रोने लगी और नैना उसको चुप करवाने की कोशिश करती रही. काफ़ी

कोशिश के बाद उर्मि शांत हुई और बोली- बड़े अरसे के बाद मुझको सतीश जैसा मर्द मिला है जो मेरी भूख को शांत कर सकता है.नैना बोली- छोटे मालिक जैसे आप एक तरह से एक अजीब बिमारी की चपेट में हो, वैसे ही उर्मि को भी उसी तरह की बीमारी है.

यानि जबसे उसकी छोटी उम्र में चुदाई हुई है, तब से उसको चुदाने की तीव्र इच्छा रहती है और वो एक मर्द से पूरी नहीं हो पाती. क्यों

मैं ठीक कह रही हूँ उर्मि?

उर्मि कुछ सोचते हुए बोली- नहीं ऐसी बात नहीं है, असल में मुझको काफी देर की चुदाई और एक रात में 3-4 बार की चुदाई बहुत

अच्छी लगती है. यह ज़रूरी नहीं कि अलग अलग मर्द हों यह काम एक मर्द भी कर सकता है जैसे सतीश कर रहा है.नैना बोली- इसका मतलब यह है कि तुम ने अभी तक कई मर्दों के साथ सम्भोग किया है?

उर्मि बोली- नहीं दीदी, मैंने मुश्किल से 2 मर्दों के साथ ही सेक्स किया है क्यूंकि गाँव में ज़्यादा चॉइस ही नहीं था तो मैं अभी तक तो

ऊँगली से ही काम चलाती रही हूँ.नैना बोली- फिर छोटे मालिक का कैसे पता चला तुमको?उर्मि बोली- वो शानू और बानो ने अपना नैनीताल वाले ट्रिप का किस्सा सुनाया तो मुझको पता चला. लेकिन जब 3 दिन पहले सतीश ने

मेरे को चोदा ना, तो मुझको यकीन हो गया कि सतीश ही वो मर्द है जो मुझको पूरी तसल्ली दे सकता है.

नैना और मैं एक दूसरे को देखने लगे कि क्या किया जाये?नैना ने कहा- उर्मि, यह सारी कहानी तुम्हारे भैया और भाभी को पता है क्या?उर्मि बोली- नहीं… उनको यह बात पता लग गई तो वो मुझको जान से मार देंगे. ठाकुर लोग बड़े ज़ालिम होते हैं आपको तो शायद

मालूम होगा ना?मैं बोला- बड़ी अजीब स्थिति है उर्मि तुम्हारी… अच्छा कब कब महीने में कब कब तुमको चुदवाने की इच्छा बहुत बलवती होती है?

उर्मि अपनी चूत में दायें हाथ की ऊँगली से अपनी भग को हल्के हल्के रगड़ रही थी, उसका बायां हाथ मेरे खड़े लंड के साथ खेल रहा

था.उर्मि शर्माते हुए बोली- पीरियड्स के बाद 10-15 दिन मेरे लिए बड़ी मुश्किल से कटते हैं और फिर मैं नार्मल हो जाती हूँ.नैना बोली- यह समय तो आम लड़कियों और औरतों के लिए काफी उत्तेजना भरा होता है, इन्हीं दिनों गर्भवती होने का ज़्यादा चांस

होता है. इसका मतलब यह है कि तुमको अगर इन 5-6 दिनों में अगर चुदाई का चांस मिल जाए तो इसके बाद तुमको कोई प्रॉब्लम

नहीं होती है?उर्मि ने हाँ में सर हिला दिया.

अब तक उर्मि फिर पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और वो मेरे लौड़े को बार बार खींच रही थी कि चुदाई के मैदान में फ़ौरन आ जाए.मैंने उसको पलंग के सहारे खड़ा किया और उसके पीछे से लंड की एंट्री उसकी चूत में कर दी.वो अपनी चुदाई का किस्सा सुनाती हुए बहुत ही कामुक हो चुकी थी.

मैंने धीरे और फिर तेज़ वाली स्पीड का सहारा लिया और पूरी कोशिश में लग गया कि वो पूर्ण रूप से स्खलित हो जाए और उसकी

चुदाई की भूख कुछ शांत हो जाए.मैंने लंड की स्पीड को ऐसे कंटोल किया कि बार बार लंड उसकी चूत की गहराइयों में विचरता रहे और उसकी चूत को हर तरह से

आनन्द की विभूति मिलती रहे.

कुछ देर में ही मैंने महसूस किया कि उसकी चूत से कुछ रसदार पानी निकल रहा है और वो उसकी टांगों के नीचे गिर रहा है.मैंने उस पानी को छूकर देखा तो वो काफी गाड़ा और खुशबूदार था.यह देख कर मैंने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी और कुछ ही क्षण में उसके चूतड़ आगे पीछे होने लगे और फिर एक साथ पूरी तरह से

मेरे लौड़े के साथ चिपक गए.

उर्मि के मुख से कुछ अस्फुट शब्द निकल रहे थे और फिर वो पलंग पर ढेर हो गई.मैं भी कुछ देर अपना लंड उसकी चूत में डाल कर खड़ा रहा उसके पीछे.

थोड़ी देर बाद नैना आई और उसने तौलिये से मुझ को पौंछा, उर्मि की टांगें पकड़ कर उसको पलंग पर लिटा दिया और उसके सारे

शरीर को अच्छी तरह से पौंछा.फिर वो हम सबके लिए शरबत ले आई.

शरबत पीते हुए नैना ने उर्मि को कहा- तुम मुझको टेलीफोन करके आ जाया करो, यहाँ कुछ गपशप मार लिया करेंगे और अगर छोटे

मालिक खाली हुए तो तुम्हारा काम भी कर दिया करेंगे. क्यों छोटे मालिक?मैं बोला- हाँ हाँ ज़रूर, तुम्हारा काम अवश्य कर दिया करेंगे. जब चाहो नैना से फ़ोन पर बात कर के आ जाया करो, मैं तुम्हारी पूरी

सेवा कर दिया करूँगा जैसे तुम चाहो वैसे ही!फिर वो तैयार हो कर चलने लगी तो मैं उसको गेट पर जाकर रिक्शा में बिठा आया.

कहानी जारी रहेगी
 
ग्रुप सेक्स की तैयारी

कुछ दिन बीत जाने के बाद मुझको उर्मि फिर कॉलेज में मिली और बोली- तुमसे ज़रूरी बात करनी है, आओ कैंटीन चलते हैं.मैं उसके पीछे चलते हुए कैंटीन पहुँच गया और वो एक टेबल पर बैठते हुए बोली- सतीश यार कुछ खाओगे या पियोगे?मैं बोला- तुम बोलो, क्या लाऊँ तुम्हारे लिए?उर्मि बोली- कुछ नहीं चाहिए यार, क्या तुम मेरे घर आ सकते हो थोड़े टाइम के लिए?

मैं बोला- क्या काम है उर्मि, बोलो?उर्मि बोली- मेरी एक क्लास फेलो तुमसे मिलना चाहती है.मैं बोला- कब और कहाँ?उर्मि बोली- मेरे घर में, आज ही!

मैं बोला- ऐसा क्या काम आन पड़ा तुम्हारी सहेली को जो मुझको बुलाना चाहती है वो?उर्मि बोली- मैं उसको बुला लाती हूँ तुम यहीं रुको.मैं वेट करने लगा और थोड़ी देर में वो एक अपने जैसी ही खूबसूरत लड़की को साथ लेकर आ गई.

उसने हम दोनों को मिलवाया. उस लड़की का नाम हिना था और वो एक बड़े ही अमीर घराने से थी, वो कॉलेज अपनी कार में आया जाया करती थी.हम दोनों ने हेलो किया एक दूसरे को!फिर मैं चुपचाप वेट करने लगा कि इस लड़की को क्या काम हो सकता है मुझसे.

हिना बोली- देखो सतीश, मुझको तुम्हारी कुछ खासियतें पता चली हैं जिन पर मुझको कतई विश्वास नहीं, तो मैं चाहती हूँ कि मैं खुद उनको जांच लूँ?मैं गुस्से में कांपने लगा था लेकिन मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभाला और बड़े ही संयत स्वर में बोला- देखिये मैडम, मुझमें कोई भी ऐसी खासियत नहीं है जिसकी आपको जांचने की ज़रूरत पड़े, थैंक यू मैडम, बाय मैडम और बाय उर्मि!यह कह कर मैं वहाँ से उठ आया और अपनी क्लास की तरफ जाने लगा.

तभी उर्मि ने मुझको आवाज़ दी- रुको सतीश, बात तो सुन लो पूरी हिना की..मैं बोला- मैंने कोई बात नहीं सुननी, ओके बाय.मैं फिर मुड़ कर जाने लगा कि हिना मेरे निकट आ गई और बोली- मुझको माफ़ करना सतीश, मुझको ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी.

मैं चुप रहा.तब हिना फिर बोली- एक बार मेरी बात सुन तो लो यार सतीश.

मैं बोला- वैरी सॉरी हिना जी, वास्तव में जब आप ने मेरी खासियतों की जांच की बात की तो मुझको गुस्सा आ गया था. मुझमें ऐसी कोई भी खासियत नहीं है जो दूसरे लड़को में न हो!हिना बोली- सॉरी यार, मुझसे गलती हुई थी, अच्छा ऐसा है मैं एक प्रोग्राम बनाना चाहती हूँ जिसमें सिर्फ हम 4 लड़के फ्रेंड्स और 4 लड़कियाँ सहेलियाँ होंगे.मैं बोला- फिर क्या होगा.?

हिना बोली- मैं एक बहुत बड़े बंगले में रहती हूँ लखनऊ में जो मेरे पिताजी का है और वो इस शहर के बहुत ही अमीर आदमी हैं. कुछ दिनों के लिए मेरी सारी फैमिली लखनऊ से बाहर जा रही है तो मैंने सोचा कि क्यों न मैं अपने बंगले में एक नाईट पार्टी अपने फ्रेंड्स के साथ करूँ.मैं बोला- लेकिन मैं तो आपका दोस्त नहीं हूँ फिर मेरा क्या काम उसमें?हिना बोली- मैं तुमको अपना दोस्त ही तो बनाना चाहती हूँ सतीश यार!

मैं बोला- ठीक है मैं दोस्ती के लिए तैयार हूँ लेकिन आप पहले मेरी कोठी में आओ तो सही, मुझको मेहमान नवाज़ी का मौका तो दो, फिर देखेंगे आगे की पार्टी का!हिना बोली- ठीक है, कल मैं तुमसे आगे बात करूंगी, ओके बाय!

मैं भी अपने टाइम पर कॉलेज से वापस घर आ गया और खाना वगैरह खा कर कुछ देर के लिए सो गया. शाम को नैना को सारी बात बताई और पूछा- क्या कल अपने दोस्तों को यहाँ बुला लूँ?नैना बोली- हाँ हाँ बुला लो न, मैं सब इंतज़ाम कर दूंगी.

अगले दिन कॉलेज खत्म होने पर हिना, उर्मि और उसकी कुछ फ्रेंड्स मुझको कैंटीन में मिले, सबसे परिचय करवाया गया. फ्रेंड्स में 2 लड़के और एक लड़की थी.

लड़कों के नाम विनोद और राज थे और लड़की का नाम निशि था. यह सब साइंस के विद्यार्थी थे जबकि मैं और उर्मि और निशि आर्ट्स के विद्यार्थी थे, हम चारों ही इंटर के प्रथम साल के विद्यार्थी थे.फिर हम सब हिना की कार में बैठ कर मेरी कोठी में आ गए.

वहाँ नैना ने हम सबका स्वागत किया, बैठक में ले गई और शरबत और जलपान का इंतज़ाम कर दिया.अब मैंने नए मेहमानों का निरीक्षण परीक्षण किया, इन नए मेहमानों में से मैं सिर्फ उर्मि को ही जानता था.

हिना और निशि देखने में सुन्दर थी, उनकी शारीरिक सुंदरता उनके कपड़ों के कारण नहीं आंकी जा सकती थी लेकिन वो मनमोहक अवश्य थी.लड़कों में विनी 5 फ़ीट 8 इंच का पतले शरीर वाला लड़का था और राज का शरीर थोड़ा भरा हुआ नाटे कद बुत वाला था.

तभी नैना ने आकर कहा- खाना मेज पर लग गया है.हम सब बैठ कर खाना खाने लगे और वहीं बातें शुरू हो गई कि क्या प्रोग्राम बनाया जाए?

हिना बोली- ऐसा है, मैं काफी अरसे से सोच रही थी कि हम कुछ लड़के लड़कियाँ मिल कर डांस और ग्रुप सेक्स का प्रोग्राम बनायें. ‘उसके लिए आजकल के माहौल में मॉडर्न लड़के और लड़कियाँ कहाँ से मिलेंगी?’‘मैंने पूछताछ की तो पता चला कि मेरे अलावा दो लड़कियाँ और भी हैं जो इस किस्म का शौक रखती हैं और कुछ लड़कों ने भी अपनी रज़ामंदी जताई.’ हिना ने बताया.

विनी बोला- मेरे ख्याल में हम सबके अलावा भी कुछ और लड़के लड़कियाँ होंगे जिनको ग्रुप सेक्स से कोई परहेज़ ना हो.उर्मि बोली- मैं भी कालेज की कुछ लड़कियों को जानती हूँ जिन्होंने ग्रुप सेक्स का आनन्द पिछले कुछ दिनों में ले लिया है.यह कह कर वो मेरी तरफ देखने लगी लेकिन मैं सर नीचे कर के किसी से भी नज़र नहीं मिला रहा था.

राज बोला- मैं अपने बारे में तो कह सकता हूँ कि मुझको ग्रुप सेक्स में कोई ऐतराज़ नहीं होगा और मैं काफी मज़ा ले सकूंगा.

अब मैं बोला- मैं सोचता हूँ कि हम सब ग्रुप सेक्स का पूरा मतलब नहीं समझे हैं अभी तक, मेरे विचार में ग्रुप सेक्स का पूरा मतलब और उससे जुड़ी हुई समस्याओं को पूरी तरह समझ पाएँ, उसके बाद फैसला लें कि यह करना है या नहीं.हिना बोली- वाह सतीश यार, तुम तो काफी जानकारी रखते हो इस बारे में… मेरे ख्याल में सतीश ठीक कह रहा है और हमको इस बारे में पहले पूरी जानकारी ले लेनी चाहये. लेकिन यह जानकारी मिलेगी कहाँ से?
 
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