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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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उधर भाभी भी बार बार अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा कर मेरा ध्यान अपनी और आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी.फिर हम तीनों उठ कर बैठक में आ गए और बाकी मेहमानों का इंतज़ार करने लगे.

थोड़ी देर में बाकी के जवान लड़कियाँ और दो लड़के वहाँ आ गए और मुझसे बड़े ही प्रेम पूर्वक मिले, सबसे परिचय हुआ.

लड़कियाँ कुछ तो सुंदर थी और स्मार्ट दिख रही थी और कुछ एवरेज शक्ल सूरत वाली थी.सुन्दर लड़कियों ने पूरी कोशिश की वो मेरे ही निकट आकर बैठें लेकिन उनमें कुछ को ही सफलता मिली.अब मैं उनके रहने और दूसरे कामों के बारे में पूरी रुचि ले रहा था और उनको वहाँ घूमने के स्थानों के बारे में बता रहा था.

फिर हम सबने बैठक में बैठ कर खाना खाया, खाना बहुत ही स्वादिष्ट बना था.मेरे पूछने पर नैना ने बताया कि एक नई बावर्चिन आई है जो बहुत ही अच्छा खाना बनाती है और कई और काम भी करती है.यह बताते हुए नैना कुछ मुस्कराई थी, मैं समझ गया कि मेरे मतलब की है वो!

रात को खाना खाकर हम सब अपने अपने कमरों में सोने के लिए आ गए, कुछ देर गपशप चलती रही और जब सोने का टाइम हुआ तो मैंने भाभी से कहा- मैं फर्श पर एक गद्दा बिछवा लेता हूँ, मैं वहाँ सो जाऊँगा और आप दोनों पलंग पर सो जाना.जूही भाभी बोली- नहीं नहीं, तुम क्यों नीचे सोओगे, हम तीनो पलंग पर ही सो जाते हैं. इतना बड़ा तो पलंग है इसमें तो दो जने और सो जाएँ तो भी जगह बचती है. सतीश तुम एक साइड में सो जाओ और रिया दूसरी साइड में सो जायेगी और मैं तुम दोनों के बीच में… क्यों ठीक है ना रिया और सतीश?रिया बोली- आज रात तो ऐसे सो कर देखते हैं और अगर कष्ट हुआ तो कल रात देख लेंगे, क्यों ठीक है ना सतीश?मैं बोला- जैसा आप दोनों को ठीक लगे, वैसा ही कर लेते हैं.फिर हम सबने गुड नाईट की और सो गए.

तकरीबन एक घंटे के बाद मुझको महसूस हुआ कि कोई हाथ मेरे पयज़ामे के ऊपर से मेरे लौड़े को छेड़ रहा है और मेरा लौड़ा भी बेलगाम घोड़े की तरह खड़ा होना शुरू हो गया.पहले तो मैंने सोचा कि शायद भाभी का हाथ गलती से मेरे लौड़े के ऊपर पड़ रहा है लेकिन जब मैं दम साध कर लेटा रहा तो वो हाथ वाक़यी में मेरे अब खड़े लौड़े के साथ खेल रहा था यानि मुट्ठी मारने की प्रक्रिया कर रहा था और वो भी मेरे पायज़ामे के ऊपर से.लेकिन मैं भी चुपचाप आँखें बंद करके लेटा रहा, इंतज़ार करता रहा कि देखो आगे क्या होता है..

अब भाभी ने धीरे से मेरे पज़ामे को थोड़ा नीचे खिसका दिया और लंड लाल को बाहर निकाल लिया.अब मैं भी अपने को रोक नहीं सका और आँखें बंद किये ही मैंने अपना हाथ भाभी की नाइटी के ऊपर उनके मुम्मों पर रख दिया.यह देख कर भाभी थोड़ी झिझकी लेकिन उन्होंने फिर लंड की मुट्ठी मारनी शुरू कर दी और अब उन्होंने मेरी तरफ करवट ले ली और मेरे पज़ामे को उन्हों ने मेरी कमर के नीचे खिसका दिया और मेरे लंड को हाथ में लेकर उसको नापने लगी.

इधर मैं भी भाभी के मुम्मों को अब दबाने लगा और धीरे धीरे दूसरा हाथ उसकी चूत की तरफ ले गया.मैंने उनकी नाइटी को अब काफी ऊपर उठा लिया और दूसरे हाथ को उनकी जांघों पर फेरते हुए उनकी चूत के पास ले जाने लगा.

अब भाभी ने अपना मुंह थोड़ा उठाया और मेरे गालों को और मेरे होटों को हल्के हल्के चूमना शुरू कर दिया.जब उनके होंट दूसरी बार मेरे होटों पर लगे तो मैंने भी उनके लबों को अपने होटों में दबा लिया.मेरा एक हाथ अब भी उनके मुम्मों को नाइटी के बाहर से मसल रहा था दूसरा अब भाभी की चूत के बाहर खड़ा था और जब बालों से भरी चूत में ऊँगली डाली तो उसको एकदम गीला पाया.

मैं समझ गया कि भाभी सेक्स की भूखी है और इस वक्त वो अन्तर्वासना, काम अग्नि में जल रही हैं, मैंने भी भाभी की भग को मसलना शुरू कर दिया.भाभी ने मेरा लंड छोड़ दिया और वही अपना हाथ मेरे उंगली मार हाथ पर रख दिया और उसको और भी तेज़ी से ऊँगली चलाने के लिए प्रेरित करने लगी.

अब मैंने अपना सर उठाया और भाभी के कान के पास जाकर बहुत ही धीरे से कहा- भाभी, आप अपना मुंह दूसरी तरफ कर लो तो मैं पीछे से तुम्हारे अंदर लंड डाल दूँ?जूही भाभी ने धीरे से कहा- ठीक है, लेकिन ज़्यादा ज़ोर से नहीं, रिया कहीं जाग ना जाये.

भाभी ने अपना सर दूसरी तरफ कर दिया और अपने चूतड़ बिल्कुल मेरे लंड के सामने ले आई.मैंने उसकी नाइटी को अब उसके चूतड़ों के ऊपर कर दिया और उसकी चूत का निशाना पीछे से लगा दिया.मैंने धीरे से लंड को भाभी की फूली हुए चूत के मुंह पर रख कर एक हल्का धक्का मारा और वो तकरीबन आधे से ज़्यादा अंदर चला गया.
 
लोहे जैसी गरम सलाख वाला लंड जब अंदर गया तो भाभी थोड़ी से कसमसाई लेकिन फिर संयत हो गई और मेरे मोटे और लम्बे लंड का मज़ा लेने लगी.मैं भी धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर कर रहा था ताकि बिना ज़रा सा शोर किये मैं भाभी को मज़े से चोद सकूँ.लंड के अंदर बाहर होने के साथ ही मेरे हाथ उसके एकदम मुलायम नितम्बों को बार बार छू कर आनन्द ले रहे थे.भाभी की चूत काफी टाइट थी और उसकी पकड़ भी काफी गज़ब की थी.

कोई दस मिन्ट की चुदाई में ही भाभी का शरीर एकदम अकड़ गया और फिर ढीला पड़ गया.अब वो उठी बाथरूम जाने के लिए तो मैं भी उठ कर उसके पीछे हो लिया और दोनों ही हम बाथरूम में साथ ही पहुँचे.

भाभी बोली- सतीश, तुम बाहर जाओ न, मुझको थोड़ा करना है.मैं बोला- जूही भाभी, अब मुझसे क्या शर्माना, कर लो जो आपको करना है!भाभी थोड़ी हिचकी लेकिन अभी भी मेरे खड़े लौड़े को देख कर उनके सारे ऐतराज़ काफूर हो गए.

भाभी पॉट पर बैठ कर पेशाब करने लगी और मैं ने भी अपना खड़ा लौड़ा पयज़ामे से निकाला और सामने ही बैठ कर अपनी धार को छोड़ दिया.वैसे मैंने यह पहली बार देखा था कि औरतें कैसे पेशाब करती है तो यह रोमांचक दृश्य देख कर मेरा लौड़ा और भी सख्ती के आलम में आ गया और मेरे पेशाब की धार दूर तक जाकर भाभी के

यह दृश्य भाभी को बड़ा ही रोमांचक लगा और वो आँखें फाड़ कर यह सब देख रही थी.जब हम इस क्रिया से निवृत हुए तो भाभी उठ कर अपनी नाइटी नीचे करने लगी थी लेकिन मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और एक कामातुर चुम्मी लबों पर दे दी.फिर मैंने भाभी को बाथरूम की दीवार पकड़ कर खड़ा कर दिया और उनकी गांड को ऊँचा करके और स्वयं थोड़ा झुक कर अपने लंड को उसकी उभरी चूत में पीछे से डाल दिया.

भाभी मुड़ मुड़ कर देख रही थी कि मैं क्या कर रहा हूँ और जब मेरा लोहखंड उसकी चूत पर टिका कर मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा तो भाभी को तसल्ली हुई कि मैं उनकी गांड नहीं बल्कि चूत मार रहा हूँ.

भाभी के मुम्मों को अपने हाथों में लेकर धकों की स्पीड धीमे धीमे बढ़ानी शुरू की तो भाभी को अति आनन्द आने लगा क्यूंकि अब वो अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके पूरी तरह से जवाब देने लगी.

जैसा कि मुझको उम्मीद थी, भाभी सेक्स की इतनी प्यासी थी कि वो 10 मिन्ट भी धक्कों को नहीं बर्दाश्त कर सकी और जल्दी ही तेज़ी से कांपती हुई फिर झड़ गई.

अब उन्होंने अपने आप को सीधा किया और मेरे मुंह से मुंह जोड़ कर मुझ से बेतहाशा लिपट गई और मुझ को बारम्बार चूम्मियाँ देने लगी.कुछ समय बाद हमको समय का बोध हुआ और हम जल्दी से बाहर निकले.पहले भाभी निकली और उसके कुछ समय बाद मैं निकला.भाभी जाकर अपनी साइड में लेट गई और उसकी एक तरफ मैं लेट गया.

और तभी रिया उठ कर बैठ गई और आँखें मलते हुए बोली- कहाँ गए थे आप दोनों?चौंक कर बोली- कहीं नहीं रिया, बस बाथरूम गई थी मैं!

रिया बोली- सतीश को साथ लेकर जाना पड़ा, क्या डर लग रहा था भाभी?मैं और भाभी एकदम सकते में आ गए.अब रिया बोली- मैं सब जानती हूँ आप दोनों क्या कर रहे थे? मेरा हिस्सा कहाँ है?

कहानी जारी रहेगी.
 
रिया और जूही भाभी की चूत चुदाई

मैं और भाभी एकदम सकते में आ गए.अब रिया बोली- मैं सब जानती हूँ आप दोनों क्या कर रहे थे? मेरा हिस्सा कहाँ है?भाभी बोली- कौन से हिस्से की बात कर रही हो रिया रानी?रिया अपनी आँखें मटकाती हुई बोली- वही आप दोनों ने अभी अभी जिसका आनन्द लिया है?भाभी पूरी घाघ थी सो बोली- हमने किसका आनन्द लिया है बहना?रिया मुस्कराते हुए बोली- लंड और चूत के खेल का और किस का?भाभी बोली- अरे नहीं न रे, वो खेल कौन खेल सकता है मेरे साथ?

रिया थोड़ी गुस्से में बोली- भाभीम तुम टालो नहीं… अभी अभी सतीश के साथ तुमुने चूत चुदाई का खेल खेला है. मैं सब सुन रही थी और देख भी रही थी! इतनी चुदाई तो भैया भी नहीं करते हैं तुम्हारी, जितनी सतीश ने आज तुम्हारी कर दी एक घंटे में!

अब भाभी का रंग एकदम पीला पड़ गया और वो मेरी तरफ देखने लगी और चुपचाप मेरे से उसकी मदद करने की अपील आँखों ही आँखों में करने लगी.

मैं रिया से बोला- तुमको क्या चाहिए यह बताओ रिया? इधर उधर की बातें मत करो और ना ही भाभी को ब्लैकमेल करने की कोशिश करो, समझी? अब बोलो साफ़ साफ़ कि तुमको क्या चाहिए?रिया बोली- सतीश, मुझको भी चूत चुदाई का खेल खेलना है तुम्हारे साथ अभी!मैं बोला- ठीक है, लेकिन आज के बाद तुम भाभी को ब्लैकमेल नहीं करोगी?रिया बोली- कभी नहीं करूँगी, गॉड प्रॉमिस.

मैं बोला- रिया, तुमने पहले कभी चूत चुदाई का खेल खेला है किसी के साथ?रिया थोड़ी सकपकाई लेकिन फिर हिम्मत कर के बोली- हाँ सतीश, खेला है एक दो बार!मैं बोला- अच्छा, तुम चूत चुदाई के सब तरीके जानती हो क्या?रिया बोली- नहीं, सारे तरीके तो नहीं जानती, एक दो से ही खेल खेला है न, तो वही जानती हूँ.

मैं बोला- खेल खेलते हुए कभी तुम्हारा पानी छूटा है?रिया बोली- कौन सा पानी छूटता है सतीश यार? मेरा तो कभी कुछ नहीं छूटा?मैं बोला- मैं जानता था कि तुमको चुदाई का ज़्यादा कुछ मालूम नहीं है और जब भी तुमने किया है यह काम, वो किसी नौसिखिये लौंडे के साथ… क्यों ठीक है रिया?रिया सर झुका कर बोली- हाँ, वो नौसिखिया ही था साला, उसको तो यह भी नहीं पता था कि कौन से छेद में डालना है.

मैं और भाभी बड़े ज़ोर से हंसने लगे और जल्दी ही मैं बोला- देखो रिया, तुम अभी पूरी तरह से पक्की कली नहीं बनी हो!रिया बोली- वही तो बनने आई हूँ यहाँ और वो भी सतीश राजा से!मैं घबरा कर बोला- मेरे से पकी कली बनने आई हो? क्या मतलब?रिया हँसते हुए बोली- मुझको सब मालूम है तुम्हारे बारे में! तुमने अभी तक कई पक्की कलियाँ बनाई हैं.

अब हैरान होने की मेरी बारी थी- तुमको क्या मालूम है? बताओ तो सही?रिया बोली- मैंने तुमको सुबह भांप लिया था कि तुम बड़े पहुंचे हुए हो, तभी मैंने अपना डेरा तुम्हारे कमरे में लगवाने का फैसला किया था.अब मैं बड़े ज़ोर से हंसा और बोला- वाह रिया रानी, बड़ी अच्छी बनाई है तुमने यह कहानी. जिसमें न कोई दम है और न ही कोई खम है!

अब भाभी बोली- सतीश, तुम बुरा नहीं मनाना, यह तो ऐसे ही गप्पें हाँक रही है, इसको किछु नहीं मालूम.अब मैं बोला- देखो रिया, प्यार से मैं सब कुछ कर सकता हूँ और धमकी से मैं कुछ भी नहीं करता! और वैसे भी हम दो हैं और तुम अकेली हो हमारे खिलाफ बोलने वाली, सो कौन विश्वास करेगा तुम पर जानी?

लगता था कि रिया के दिमाग में यह बात बैठ गई कि मैं धमकियों से नहीं डरने वाला तो अब वो काफी नरम पड़ गई और हाथ जोड़ कर मेरे सामने झुक कर माफ़ी मांगने लगी.मैंने भाभी की तरफ देखा और उन्होंने आँखों के इशारे से कह दिया कि माफ़ कर दो इसको!मैंने भी यह उचित समझा और रिया से कहा- अब बताओ तुम मेरे से क्या चाहती हो? सच्ची बताना!

रिया तब गिड़गड़ाते हुए बोली- भाभी के साथ जो खेल तुमने खेला था, वही मेरे साथ भी खेल दो सतीश.मैं थोड़ा सोचने का नाटक करते हुए बोला- ठीक है, जाओ पहले कमरे का दरवाज़ा अच्छी तरह से बंद करके आ जाओ ताकि कोई अंदर ना आ सके.

जब रिया दरवाज़ा बंद कर के आ गई तो मैं बोला- चलो पहले तुम अपने कपड़े उतारो और फिर भाभी के! ठीक है?रिया जल्दी से अपनी नाइटी उतारने लगी और जब वो बिल्कुल नंगी हो गई तो मैंने भाभी की तरफ इशारा किया और रिया तब उनके कपड़े भी उतारने लगी.

अब दोनों पूरी तरह से निर्वस्त्र थी और कमरे में लगे नाईट बल्ब की मद्धम रोशनी में भाभी बड़ी सेक्सी लग रही थी क्यूंकि उनके मुम्मे नैना की तरह मोटे, गोल और सॉलिड थे और उनके नितम्ब भी काफी रसीले थे, खूब मोटे, उभरे हुए और मुलायम दिख रहे थे और उनकी चूत पर छाई काले बालों की घटा बहुत ही सेक्सी लग रही थी.
 
उधर रिया भी बहुत सेक्सी लग रही थी और वो उम्र में भाभी से चार पांच साल छोटी लग रही थी. उसके मुम्मे अच्छे बड़े थे लेकिन वो भाभी का मुकाबला नहीं कर सकते थे. और उसके चूतड़ों को भी अच्छा कहा जा सकता था लेकिन वो भाभी के चूतड़ों से काफी छोटे थे और उनको पूरी तरह से भरे हुए नहीं कहा जा सकता था.

मैंने भाभी की तरफ देखा तो उन्होंने भी आँखों में ही रिया को पहले चोदने के लिए प्रार्थना की.अब मैंने रिया को अपनी बाहों में कर कर जकड़ लिया और उसके होटों पर एक गर्म और गीली चुम्मी जड़ दी और उसके चूतड़ों पर हाथ रख कर मैं अपना लौड़ा उसकी चूत के बाहर से रगड़ने लगा.रिया को मेरा ऐसा करने से काफी आनन्द आने लगा था और वो अपनी चूत को और खोल खोल कर मेरे लंड पर रगड़ने लगी.

रिया अब काफ़ी गर्म हो चुकी थी और वो चाहती थी कि मैं उसको चोदना आरम्भ करूँ लेकिन मैं अभी उसको सजा देने के मूड में था, मैं उसको और गर्म करने में लगा हुआ था लेकिन रिया बार बार मेरे लंड को खींच रही थी, वो चाहती थी कि मैं फ़ौरन उस पर सांड की तरह चढ़ जाऊँ लेकिन मैं उसको अभी और तरसाना चाहता था.

अब मैं रिया की भग को घिसने लगा, पहले धीरे धीरे और फिर थोड़ी तेज़ी से !और रिया अब अपनी टांगों को बंद और खोल रही थी और भग घिसाई बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी.

अब मैंने उसको अपनी बाहों में उठा कर उसकी टांगों को अपनी चारों तरफ कस लिया और अपने लंड को एक धक्के में उसकी चूत में डाल दिया.मोटी गर्म सलाख को चूत में महसूस करके रिया तड़फ रही थी लेकिन क्यूंकि उसकी चूत मेरी कमर में कैद थी सो वो हिल भी नहीं सकती थी और मैं गरम सलाख को लेकर सारा कमरा घूम रहा था.रिया मेरे लंड के ऊपर नीचे होना चाहती थी लेकिन वो मेरे हाथों और कमर की कैद में थी तो वो कुछ नहीं कर सकती थी.

उधर भाभी अपनी एक ऊँगली से अपनी चूत में भग को मसल रही थी और दूसरी से मुझ को इशारे कर रही थी कि मैं रिया को जल्दी चोद कर भाभी के साथ लग जाऊँ.

अब मैंने रिया को पलंग पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. रिया अपने सर को आनन्द में इधर उधर हिला रही थी और थोड़ी देर में ही मैंने महसूस किया कि वो छूटने वाली है क्यूंकि उसकी चूत में हलचल शुरू हो गई थी, वो जल्दी जल्दी सुकड़ना शुरू हो गई थी और फिर एक ज़ोरदार धक्के के बाद रिया के शरीर में ज़ोरदार कंपकपाहट शुरू हो गई और तब उसने मुझको अपनी टांगों के बीच में कैद कर लिया.

जब रिया पूरी तरह से स्खलित हो गई तो उसने मुझको अपनी कैद से आज़ाद कर दिया और खुद निढाल हो कर पड़ गई.

मैं रिया को छोड़ कर उठा और भाभी को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उनके होटों पर गरमा गरम चुम्मी जड़ दी.भाभी मेरी और रिया की चुदाई देख कर काफी गर्म हो चुकी थी वो अब ठीक तरह से चुदने के लिए तड़प रही थी.मैंने भाभी को घोड़ी बना दिया और पीछे से उनकी पूरी गीली चूत में अपना गीला लंड घुसेड़ दिया. एक झटके से वो पूरा का पूरा अंदर डाल दिया और उनको बेतहाशा स्पीड से चोदने लगा.

मेरी स्पीड के आगे जूही भाभी ज़्यादा देर टिक नहीं सकी और वो भी शीघ्र ही स्खलित हो गई.अब दोनों इलाहबादी अमरूदों को वहीं छोड़ कर मैं पलंग के एक कोने में सो गया और सुबह जब नींद खुली तो वो दोनों घोड़े बेच कर सोई थी और मुझको ही उठ कर दरवाज़ा खोलना पड़ा.

सामने नैना चाय की ट्रे लिए खड़ी थी और कमरे में एक नज़र डालते ही वो समझ गई कि रात को क्या हुआ होगा.

नैना कमरे के अंदर आ गई और मैं फ़ौरन बाथरूम में घुस कर अपना कुरता पयजामा पहन कर निकल आया और आते ही नैना को एक कस के जफ्फी मार ली.

नैना ने हँसते हुए कहा- कर दिया इन दोनों का कल्याण छोटे मालिक?मैंने उसके चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए कहा- नैना रानी, तुम मेरा स्वभाव तो जानती हो, मैं किसी को भी इंकार नहीं कर सकता. अब इनको जगा दो और कपड़े पहना दो नहीं तो पकड़ी जाएँगी ये दोनों.

नैना ने हँसते हुए पहले भाभी को जगाया और फिर रिया को उठा दिया और दोनों नैना को देख कर खूब शर्मा गई और भाग कर दोनों बाथरूम में चली गई.मैं गर्म गर्म चाय पीते हुए उन दोनों की परेशानी का लुत्फ़ उठा रहा था.

नैना बोली- छोटे मालिक, अब बाकी लड़कियों से नहीं मिले क्या?मैं बोला- मिला तो था बैठक में दिन को खाने के समय! क्यों कोई ख़ास बात है?

नैना हँसते हुए बोली- जो आपके साथ रात में हुआ, वो तो ट्रेलर था, असली फिल्म तो बाकी है.मैं हैरान होकर बोला- यह तुम कैसे कह सकती हो?नैना बोली- मैंने यहाँ आकर बहुत बातें सुनी हैं इनके बारे में, इसी लिए कहती हूँ कि बच कर रहिये!मैं बोला- वाह री नैना, तेरे कुर्बान जाऊँ, लेकिन ऐसा करो ना, तुम वो सारा चुदाई प्रोग्राम कॉटेज में रखा करो ताकि यहाँ किसी को पता नहीं चले. एक या फिर दो के ग्रुप में आने दो सबको, मैं देख लूँगा.

नैना मुस्करा रही थी.वो दोनों बाथरूम से निकली और चुपचाप चाय पीने लगी.जाते हुए नैना बोली- छोटे मालिक, आपको नाश्ते में वो स्पेशल डाइट बना दूंगी क्योंकि आपको शायद जल्दी ही उसकी ज़रूरत पड़े.

कहानी जारी रहेगी.
 
हवेली के लॉन में तीन की चूत चुदाई

जाते हुए नैना बोली- छोटे मालिक आप को नाश्ते में वो स्पेशल डाइट बना दूंगी क्योंकि आपको शायद जल्दी ही उसकी ज़रूरत पड़े.नैना की भविष्यवाणी एकदम सही निकली.दोपहर के खाने में जो लड़की भी खाने के टेबल पर आ रही थी वो पहले मेरे पास आती थी और हल्के से मुस्करा के चली जाती थी.खाना खाते हुए भी मेरी साथ वाली बहुत ही चुलबुली लड़की के पैर मेरे पैरों से लग रहे थे और टेबल के दूसरी तरफ वाली लड़की अपने पैरों से मेरी जांघों को छेड़ रही थी.दोनों साइड में बैठी हुई लड़कियाँ भी बार बार अपनी कोहनियाँ मेरे बाज़ुओं से टकरा रही थी और हर बार ऐसा करने पर वो रहस्यमयी हंसी हंस रही थी.

खाने के बाद जब में हाथ धोने के लिए बाथरूम में घुसा तो मेरे पीछे 3 लड़कियाँ भी मेरे साथ अंदर आ गई और मेर दोनों तरफ खड़ी हो गई और एक मेरे पीछे खड़ी हो गई और पीछे वाली तो अपने शरीर को मेरे साथ जोड़ कर खड़ी थी और उसके गोल मुम्मे और उसकी चूत वाला हिस्सा उसकी सलवार के अंदर से मुझको पीछे से छू रहा था.

दोनों साथ खड़ी लड़कियाँ तो ऐसे जुड़ कर खड़ी थी जैसे कि वो मुझको धक्का दे कर हटाना चाहती हों वाश बेसिन से लेकिन दोनों के भी मुम्मे मुझको मेरे बाज़ुओं पर लग रहे थे और उनकी कोहनी मेरी साइड में लग रही थी.ऐसा लग रहा था कि मैं स्वर्ग की अप्सराओं से चारो तरफ से घिरा हूँ.

यह बहुत शुक्र हुआ कि मम्मी जी वहाँ मौजूद नहीं थी वर्ना यह बेशर्मी वाला माहौल नहीं बनने देती.

मैं रसोई में गया और नैना को बुलाया अपने कमरे में… उससे पूछा- यह सब क्या चल रहा है?नैना हँसते हुए बोली- आपकी दिली इच्छा थी इतनी और जवान और सुन्दर लड़कियों में घिरा रहने की… वो आज पूरी हो रही है.

मैं घबराते हुए बोला- लेकिन नैना, कुछ तो हद होती है इन सब बातों की! तुम अभी पता लगाओ कि इन लड़कियों को बेशर्म बनने के लिए कौन उकसा रहा है और वो ऐसा व्यवाहर क्यों कर रही हैं?नैना बोली- मैं जानती हूँ छोटे मालिक, इन सब के पीछे किसका हाथ है.मैं बोला- जल्दी बताओ, किसका हाथ है?

नैना बोली- शायद तुमको याद हो, चंदा नाम की एक औरत तुमसे एक दो बार मिली थी कॉटेज में, तुम्हारे कॉलेज जाने से पहले?मैं सोच कर बोला- हाँ, याद आ रहा है, वो भी बार बार गर्भवती होने की इच्छा ज़ाहिर कर रही थी लेकिन मैं नहीं मान रहा था क्यूंकि उसका पति उसके साथ रहता था तो उसको गर्भाधान की कोई ज़रूरत नहीं थी.नैना बोली- बस उसी चंदा ने यह बात फैलाई है कि छोटे मालिक बड़े चोदू हैं. हमारे आने से पहले वो कुछ दिन हवेली में काम करती रही थी और इन सब लड़कियों से मिल चुकी है.

मैं हैरान रह गया और बोला- उफ़ नैना, अब क्या होगा? तभी ये लड़कियाँ एकदम निर्लज्ज व्यवहार कर रही हैं? लेकिन हम क्या कर सकते हैं इस मुसीबत से बचने के लिए?नैना बोली- बस दो तीन दिन की बात है, जैसे ही दशहरा खत्म हुआ, ये सब चली जाएँगी अपने अपने गाँव या शहर में… लेकिन तब तक सोचना है कि इनसे कैसे छुटकारा पाया जाए!

मैं बहुत ही परेशान होते हुए बोला- नैना रानी, दिमाग लड़ाओ. यह तो तय है कि यहाँ इन सबकी चुदाई नहीं हो सकती और कोई जगह नहीं है जहाँ यह किया जा सकता है मम्मी और पापा के जाने बगैर!तभी नैना हँसते हुए बोली- छोटे मालिक, आप भी न कभी कभी भूल जाते हो! अपने गाँव वाली कॉटेज है न, यह सारा प्रोग्राम वहीं रख लिया करेंगे. क्यों छोटे मालिक?मैं एकदम खुश होते हुए बोला- वाह नैना, छोटी मालकिन, तुम्हारा जवाब नहीं. हाँ, यही ठीक रहेगा. अब यह तुम्हारा काम है कि कैसे इनको कंट्रोल करो?नैना बोली- मैं आज इन 6 लड़कियों से मिलती हूँ आपके कमरे में और साथ में 2 भाभियों को भी ले लेती हूँ अपने साथ, फिर हम इनको तगड़ी डांट पिलाती हैं.

एक घंटे के बाद नैना मुझको हवेली के बाहर लॉन में मिली और बताया कि कैसे इस समस्या को हल किया जाएगा.नैना की प्लान के मुताबिक़ हर रोज़ रात को एक भाभी मेरे कमरे में सोयेगी और साथ में एक लड़की भी सोयेगी जैसे कि मम्मी जी ने फैसला किया है. भाभी बारी बारी से सोयेंगी और हर रात को एक नई लड़की रात में मेरे साथ सोयेगी. इस तरह 3 रात में तीन लड़कियाँ चुद जाएँगी और बाकी हर रोज़ एक लड़की को कॉटेज में चोदा करूँगा. इस तरह 3 दिन में 6 लड़कियों के साथ काम क्रीड़ा हो जाया करेगी.
 
नैना बोली- छोटे मालिक, आप घबराएं नहीं, सब की सब अब तक कई बार अपने गाँव में चुद चुकी हैं तो इनके लिए यह कोई नई बात नहीं है. तभी यह इतनी निर्लज्ज हो रही हैं. इन सबने अपने यहाँ काम करने वाले नौकरों या फिर ड्राइवर या मालियों के साथ शारीरिक संबंध बनाये हुए हैं और चुदाई के काम में पूरी तरह से माहिर हैं.मैं हैरान होकर बोला- अच्छा, मुझको मालूम नहीं था कि गाँव के बड़े लोगों की लड़कियाँ इतनी गिर चुकी हैं. खैर छोड़ो, वो नई बावर्चिन से तो मिलवाओ ना… देखें तो सही कैसी है वो?

नैना गई और थोड़ी देर में नई बावर्चिन को ले आई, काफी सुन्दर शरीर की मालिक थी, चाहे रंग सांवला था लेकिन शरीर बहुत ही आकर्षक था, खूब मोटे और गोल, सॉलिड मुम्मों के साथ खूब उभरे हुए नितम्ब उसके बड़े आकर्षक लग रहे थे और नैना ने बताया कि उसका नाम था परबतिया लेकिन सब प्यार से पर्बती बुलाते थे.

फुर्सत में इसके बारे में भी सोचेंगे, ऐसा मैंने फैसला किया.

रात को खाने के बाद मम्मी और पापा को गुडनाईट कह कर मैं अपने कमरे में आ गया लेकिन वहाँ रिया आई हुई थी, वो कहने लगी- हम सब लड़कियाँ और लड़के लॉन में कुछ खेलने का फैसला किया है, चलिए आप भी चलिए ना प्लीज.मैंने कहा- ठीक है, चलो!

वो चलते चलते मेरे से टकराने से पीछे नहीं हट रही थी, उसके चूतड़ों पर हाथ फेरना और यदा कदा उसके मुम्मों को भी हाथ लगाना मैंने जारी रखा.एक जगह थोड़ी अँधेरी थी, मैंने रिया को बाहों में भर लिया और उसके गीले लबों पर एक ज़ोरदार चुम्मी कर दी और उसकी साड़ी के बाहर से उसकी चूत और चूतड़ों पर हाथ फेरने से बाज़ नहीं आया.

लॉन में आये तो सब लड़कियाँ वहाँ एकत्रित हो गई थी और दो मरियल से लड़के भी थे उनके साथ. उन सबसे मैं ही लम्बा लड़का था सो वो सब मेरे साथ ही खेलना चाहती थी.रिया और पार्टी ने फैसला किया कि हम सब जा कर छुप जायेंगे और सुधा हम सब को ढूंढने लगेगी.

सुधा की तरफ देखा तो वो काफी सुंदर और सुघड़ शरीर वाली लड़की थी, उसने लाल रंग की साड़ी पहन रखी थी. हम सब छुप गए और जिस जगह मैं छुपा था वो कोई और नहीं जानता था, सिर्फ मैं ही जानता था कि क्यूंकि मैं बचपन में ही यहाँ खेलता रहा था.तो मैं हर छुपने वाली जगह को अच्छी तरह से जानता था.

थोड़ी देर बाद मैंने देखा एक और लड़की छुपने की जगह ढूंढते हुए वहाँ ही आ रही थी और जैसे ही वो मेरे स्थान के पास पहुँची, मैंने हाथ बढ़ा कर उसको अपनी जगह में खींच लिया.पहले तो वो हैरान हुई लेकिन जब उसने मुझको देखा तो तो खुश हो गई और मैंने उसको अपने से चिपटा लिया और उसको चुप रहने का इशारा किया.

जब सुधा वहाँ से चली गई तो मैंने उसको अच्छी तरह से देखा, वो भी अच्छी लगी, मैंने उसको अपने गले से लगा लिया और फिर अपने होटों को उसके लबों पर रख दिया.मेरे अनुभवी हाथ उसके मोटे मुम्मों को दबा रहे थे और एक हाथ उसके चूतड़ों पर चल रहा था..

वो भी अब पूरी तरह सहयोग देने लगी और अब मैंने अपने पज़ामे को नीचे खिसका दिया और अपना खड़ा लौड़ा उसके हाथ में दे दिया और लौड़े को छूते ही उसके शरीर में हल्का सा करंट दौड़ गया.मैंने भी उसकी साड़ी पीछे से ऊपर कर दी और अपने खड़े लंड को उसकी चूत में डालने की कोशिश करने लगा.जब वो अंदर नहीं जा पा रहा था तो मैंने उसको थोड़ा झुकने के लिए कहा और जैसे ही वो झुकी तो मैंने लंड का फिर निशाना लगाया और खटाक से मेरा लंड उसकी गीली चूत में चला गया, मैं उसके चूतड़ों को दोनों हाथ में लेकर हल्के हल्के धक्के मारने लगा.

थोड़ी देर में ही वो लड़की भी गर्म हो गई और धक्के का जवाब अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके देने लगी और जल्दी ही मैंने उसको बड़ी तेज़ स्पीड से चोदना शुरू कर दिया.वो लड़की चंद मिनटों में ही झड़ गई, मैंने उसको पलट कर अपनी बाहों में ले लिया और उसके मुंह पर ताबड़ तोड़ चुम्बन देने लगा और वो भी जवाब में मुझको चूमने लगी.
 
मैंने उसके कान में कहा- मज़ा आया क्या तुमको?उसने भी वैसे ही जवाब दिया- थैंक यू सतीश, मेरा नाम लीलू है और आज रात को आपके साथ सोने की बारी मेरी है.मैं बोला- ठीक है जानू, जाओ और किसी और को भेज दो यहाँ छुपने के लिए!

लीलू हँसते हुए मेरे लौड़े को झुक कर चूम कर चली गई.

थोड़ी देर में एक और लड़की को उधर आते हुए देखा, जैसे ही वो मेरे पास से गुज़री, मैंने उसको खींच लिया अपनी छुपने वाली जगह में!वो लड़की भी शायद यह जानती थी, वो मेरे पास आते ही मुझ से लिपट गई और मुझको लबों पर चूमने लगी. मैंने भी उसको चूमना शुरू कर दिया और इस तरह मैंने उसको दीवार के सहारे खड़ा करके उसकी टांग को ऊपर कर उसकी चूत में ऊँगली डाली जो अभी तक सूखी थी.मैंने उसकी भग को रगड़ना शुरू कर दिया तो जल्दी ही वो गीली होने लगी और अब मैंने उसको अपने हाथों पर उठा लिया और उसकी साड़ी को उसकी कमर में डाल कर उसकी चुदाई शुरू कर दी.मुझको ऐसा लगा कि वो भी पूरी तरह से तैयार हो कर आई थी और वो अब खुद ही आगे बढ़ बढ़ कर चुदवा रही थी और उसको भी झड़ने में ज़्यादा टाइम नहीं लगा.उसका नाम नीलू था.

लेकिन वो मेरी इस थोड़ी देर की चुदाई से पूरी तरह से खुश नहीं थी तो मैंने उसको नीचे घास पर लिटा दिया और उसकी साड़ी को पुनः ऊपर कर के पूरी मस्ती से चोदने लगा.अब नीलू ने भी नीचे से पूरी तरह से सहयोग देना शुरू कर दिया और हम दोनों चुदाई में इतने मस्त हो गए कि हमको पता ही नहीं चला कब सुधा वहाँ आ कर चुपचाप हमारी चुदाई को देख रही थी.

जब मैंने आखिरी धक्का ज़ोर से मारा और नीलू मुझ से चिपट कर छूटने लगी तो सुधा ने हल्के से ताली मारी और ‘वाह वाह’ करने लगी तो हमको पता चला कि कोई हमारे करतब देख रहा है.मैं तो नहीं शरमाया लेकिन नीलू एकदम शर्म से लाल पड़ गई.

मैं जैसे ही नीलू के ऊपर से उठा और अपने एकदम गीले लंड को निकाल कर खड़ा हुआ तो सुधा उसकी तरफ ही टकटकी बाँध कर देखती रह गई.मैंने एकदम आगे बढ़ा कर सुधा को अपनी बाँहों में गिरफ्तार कर लिया और उसको बेतहाशा चूमने लगा और मैंने उसको कुछ भी बोलने का मौका ही नहीं दिया.

सुधा भी सुंदर लड़कियों में से एक थी और काफी सेक्सी लग रही थी. उसकी लाल साड़ी अपना अलग ही समाँ बाँध रही थी.मैंने उसको कस के जफ्फी मारी और उसके कान में कहा- अभी या फिर रात में? जैसा तुम कहो?वो बोली- रात में मेरी बारी नहीं है, अभी कर दो ना!मैं बोला- बारी नहीं है तो क्या हुआ, मैं तुमको आज रात को एडजस्ट कर लूँगा.

वो मान गई और हम तीनों एक साथ मेरी छुपने वाली जगह से निकल कर सबके बीच में आये ही थे कि उधर से नैना आ गई और कहने लगी- छोटे मालिक, आपको मम्मी जी बुला रहीं हैं, जल्दी चलिए.

मैंने सबसे विदा ली और नैना के साथ हो लिया और जैसे ही हम थोड़ी दूर पहुँचे तो नैना ने कहा- छोटे मालिक, तुमको कोई नहीं बुला रहा वो तो मैंने बहाना बनाया था तो तुमको इन लड़कियों से बचाने के लिए! वैसे कितनी चोदी अभी तक?

मैं बड़ी ज़ोर से हंस दिया नैना की इस हरकत से और उसके चूतड़ों को टीपते हुए बोला- वाह छोटी मालकिन, तुमने मुझको बचा लिया. अभी तक सिर्फ तीन ही हुई थी.नैना हँसते हुए बोली- आधे घंटे में सिर्फ तीन? मुझको लगा कि कम से कम 5 तो हो गई होंगी! चलो सस्ते में छूटे हो छोटे मालिक.मैं धीमे से बोला- सस्ते में कहाँ? अभी तो रात बाकी है और वो दो तो तैयार खड़ी हैं चुदवाने के लिए!

कहानी जारी रहेगी.
 
तनु भाभी, सुधा और प्रेमा की चूत चुदाई

मैं धीमे से बोला- सस्ते में कहाँ? अभी तो रात बाकी है और वो दो तो तैयार खड़ी हैं चुदवाने के लिए!यह कह कर मैं अंदर जाने लगा तो मुझको ख्याल आया कि रात की चुदाई में नैना का होना बहुत ज़रूरी है तो मैंने उसको कहा कि रात में वो भी आ जाए तो अच्छा है मेरे लिए, नहीं तो यह शार्क मछलियाँ तो मुझको कच्चा खा जाएँगी.अभी मैं अपने कमरे में पहुँचा ही था कि एक सुंदर सी भाभी और दो लड़कियाँ भी साथ आ गई.

भाभी ने अपना नाम तन्वी बताया और कहा- प्यार से मुझको तनु के नाम से जानते हैं.सब और पहली लड़की तो सुधा थी और दूसरी का नाम था प्रेमा.तीनों ही दिखने में सुंदर लग रही थी और सबने साड़ी ब्लाउज पहन रखा था.

तनु भाभी की उम्र होगी कोई 22-23 की लेकिन मुझको समझ नहीं आया कि वो तो शादीशुदा लग रही थी तो उसको चुदाने की क्यों धुन सवार थी?यह बात मैंने नैना को कह दी, उसने भाभी से पूछा तो भाभी बोली कि उनके पति बचपन से अफीम बहुत खाते थे तो अब उनकी यौन शक्ति बहुत ही कम हो चुकी थी और वो हफ़्तों भाभी की तरफ नज़र भी नहीं डालते थे.

मैं हैरान हो गया यह कैसी विडंबना कि इतनी सुंदर स्त्री लेकिन यौन तृप्ति से कोसों दूर!

नैना बोली- छोटे मालिक, आप भाभी का खास ख्याल रखो क्यूंकि वो बहुत ही प्यासी है तो इन लड़कियों से पहले नंबर भाभी का लगेगा. क्यों ठीक है ना?दोनो लड़कियाँ मान तो गई लेकिन बड़ी ही बेदिली से, उनको शायद शक था कि मैं भी उन तक पहुँचते हुए शक्तिहीन हो जाऊँगा और उनके किसी काम नहीं आ पाऊँगा.उनका ऐसा सोचना तर्कसंगत ही था लेकिन वो शायद मेरी शक्ति से अभी तक परिचत नहीं थी.

नैना ने कहा कि कोई भी अपने सारे कपड़े नहीं उतारेगा क्यूंकि मम्मी जी थोड़ी दूर वाले कमरे में ही सोई थी, वो किसी समय भी आ सकती थी.नैना ने उनसे कहा कि अगर उनके पास नाइटी हो तो वो पहन कर आ आएँ तो अच्छा रहेगा.तीनों नाइटी पहनने के लिए चली गई और मैं नैना रानी को चूमने और छेड़ने में लग गया, कभी उसके मुम्मों को ब्लाउज के ऊपर से चूस रहा था और कभी साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फेरता रहा और इस तरह मैंने नैना को भी गर्म कर दिया लेकिन नैना के साथ सम्भोग करने का मौका नहीं मिलने वाला था, ऐसा मैं जानता था.

थोड़ी देर में तीनों अपनी नाइटी पहन कर आ गई तो नैना ने दरवाज़ा बंद कर लिया और कुण्डी लगा दी.अब तीनों ने अपनी नाइटी उतार दी और वो एकदम पूर्णतया नंगी हो गई.अभी तक मैंने तीनों को ध्यान से नहीं देखा था, अब मैंने अच्छी तरह देखा.

तनु भाभी तो वाकयी में अच्छे जिस्म वाली और काफी सेक्सी लग रही थी, उसके गोल गोल मोटे मुम्मों और उसकी चूत पर छाये काले घने बाल चमक रहे थे और उसके गोल उभरे हुए नितम्ब अति लुभावने लग रहे थे.

सुधा और प्रेमा भी काफी सेक्सी यंग लड़कियाँ थी लेकिन उनका तनु भाभी और नैना के जिस्म से कोई मुकाबला नहीं था.सुधा के उरोज छोटे और सॉलिड थे और उसके नितम्ब भी अभी अपरिपक्व लग रहे थे.लेकिन प्रेमा काफी खूबसूरत थी, उसके उरोज भी काफी बड़े और सख्त लग रहे थे, उसके नितम्ब भी गोल और उभरे हुए थे और उसकी चूत पर छाई हुई बालों की घटा भी काफी मुलायम और घनी थी.

हर औरत या फिर लड़की की चूत पर छाए बाल ही उसका सबसे बड़ा गहना होते है क्यूंकि उन बालों के पीछे छुपे हुए ख़ज़ाने को देखने की उत्कंठा मन में तीव्र हो जाती है जबकि उनके मुम्मे और चूतड़ों को तो सब कोई देख सकते हैं चाहे वो कपड़ों में ही क्यों न लिपटे हों!

सबसे पहले तनु भाभी को मैंने चुना, उसको एक ज़ोरदार जफ्फी मारी, उसके गर्म लबों पर एक गरम सी किस जड़ दी और उसके गोल, मोटे मुम्मों को चूसने लगा और उनकी चूचुकों को मुंह में रख कर गोल गोल घुमा रहा था.तभी नैना ने मेरे पजामा उतार दिया और मेरे खड़े लंड को सब के सामने उजागर कर दिया. फिर उसने मेरे कुर्ते को भी उतार दिया और मुझको बिल्कुल नंगा कर दिया और मेरे लंड के साथ खेलने लगी और यह देख कर तीनों भी दौड़ कर आई और मेरे लंड और शरीर के साथ खेलने लगी.
 
मैंने भाभी के मोटे नितम्बों को अपने हाथ से मसलने लगा और उसके सुंदर गोल चेहरे को चूमने लगा.दोनों लड़कियाँ अब एक दूसरे के साथ लग गई थी जैसे कि नैना ने उनको बताया था और वो एक दूसरे की चूतों और मुम्मों के साथ खेल रही थी.

इधर मैंने भाभी की चूत में हाथ लगाया और उसकी चूत से टपकते रस को महसूस किया और वो रस अब उसके गोल गुदाज़ जांघों पर भी बह रहा था जो इस बात का सबूत था कि उसको यौन क्रिया की कितनी तीव्र इच्छा थी.अब मैंने तनु भाभी को चूमता हुआ उसको लेकर बेड पर ले आया, उसकी टांगों को पूरा खोल कर बीच में लेट गया और अपना खड़ा लौड़ा उसकी उबलती हुई चूत के ऊपर रख दिया, एक ज़ोरदार धक्के से तनु भाभी की चूत में लंड पूरा का पूरा का अंदर घुसेड़ दिया.

चूत में जैसे ही जलती हुई सलाख जैसा लंड घुसा तो भाभी के मुंह से एक गर्म आह निकल गई और उसने मुझको कस कर अपने मुम्मों से लिपटा लिया.मैं भाभी को बड़े प्यार से धीरे धीरे चोदने लगा ताकि भाभी की सोई हुए यौन शक्ति को जागृत किया जा सके और उसको सेक्स का पूरा आनन्द दिया जा सके.

अब जब भाभी को तसल्ली हो गई कि मेरा जल्दी छूटने वाला नहीं है तो वो काफी रिलैक्स हो कर चुदाई का मज़ा लेने लगी और वो अब हल्के हल्के से नीचे से मेरे धक्कों का जवाब भी देने लगी.

मैं चोदते हुए उसके मुम्मों को बार बार चूसना नहीं भूला था क्यूंकि मेरा सारा ध्यान भाभी को अपार आनन्द देने में लगा था और मेरी यह कोशिश थी कि भाभी को हर प्रकार से यौन आनन्द दिया जाए.

जब भाभी की चूत बहुत ज़्यादा गीली हो गई तो मैं अपने धक्कों की स्पीड तेज़ करने लगा और इस तेज़ स्पीड के कारण जल्दी ही तनु भाभी हाय हाय करती हुई झड़ गई.अब मैंने तनु भाभी को घोड़ी बना कर चोदना शुरू कर दिया और उसको शुरू से ही स्पीड से धक्के मारने लगा ताकि वो फिर जल्दी ही स्खलित हो जाए.

साथ ही मैंने उसके भग को भी मसलने लगा और वो बहुत ही कामातुर होकर धक्कों का जवाब देने लगी और उसकी साँसें भी एकदम तेज़ चल रही थी.वो फिर एक बार स्खलित हो गई और उसके शरीर में एक ज़ोरदार कंपकपी होने लगी और वो ‘आह ऊओह्ह…’ करती हुए नीचे लेट गई.

मैंने भाभी को छोड़ कर दूसरी लड़की सुधा को पकड़ लिया और उसके शरीर पर हाथ फेरने लगा, उसको एक ज़ोरदार जफ्फी डाली, पहले और फिर उसके लबों पर गर्म चुम्मी जड़ दी और उसके गोल मोटे मुम्मों को चूसना तो ज़रूरी था.

एक चुदाई के देखने के बाद कोई भी ठंडी से ठंडी औरत भी चुदाने के लिए तैयार हो जाती है, उसकी चूत में ऊँगली डाली तो वो बहुत ही पनिया रही थी, उसकी चूत एकदम तैयार थी चुदाई के लिए…अब मैं झुक कर सुधा की चूत में अपना मुंह डाल कर उसकी चूत को चूसने लगा और जल्दी ही उसकी भग को भी चूसना शुरू कर दिया.भग का चूसना था कि थोड़ी देर में ही सुधा के पानी के बाँध को एकदम से टूटने पर मजबूर कर दिया और उसका नमकीन पानी निकल कर मेरे मुंह में आ गिरा.

अब मैं उठा, सुधा को अपने हाथों में उठा लिया और उसकी चूत को लौड़े की सीध में रख कर एक ज़ोर का धक्का मारा और लंड पूरा चूत में समा गया.मैं खड़े खड़े ही सुधा को अपने हाथों में लेकर चोदने लगा.सुधा के दोनों हाथ मेरे गले में थे, वो मेरे हाथों के सहारे अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी और लौड़े को अंदर बाहर कर रही थी.

मैंने अब अपना मुंह उसके मुम्मों पर रख कर उसको चूसने लगा और उसके चूचुकों को मुंह में रख कर गोल गोल घुमाने लगा और थोड़ी देर में ही सुधा झड़ने के करीब आ गई, मैंने उसको अब हाथों में ही पकड़ कर धक्कों की स्पीड एकदम तेज़ कर दी और उसके शरीर को उछाल उछाल कर धक्के मारने लगा.कुछ ही क्षणों में वो झड़ गई, झड़ने के बाद वो मुझ से गले में बाहें डाल कर ही चिपक गई और उसकी चूत मेरे लौड़े से भी जुड़ गई और उसके होंट मेरे होंटों से सट गए.

कमरे के एक दो चक्कर हमने ऐसे ही लगाए और फिर मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और देखा कि उसकी चूत में से बहुत सा रस टपक रहा था.अब दूसरे लड़की जिसका नाम प्रेमा था, मेरी तरफ बढ़ रही थी लेकिन नैना ने उसको रोक दिया और कहा कि छोटे मालिक को थोड़ा आलखन कर लेने दो और सब यह कोका कोला पियो.

कोका कोला पीते हुए तीनों ने काफी हैरत जताई क्यूंकि उनके गाँव में अभी यह ड्रिंक नहीं मिलती थी.साल 1954 तक यह कोक अभी तक सारे भारत में नहीं फैल पाया था ख़ास तौर पर गाँव खेड़े में, इसलिए यह उनके लिए एक अजीब ड्रिंक थी लेकिन जो इसको पी लेता था वो जल्दी ही इसका आदी हो जाता था.

अब प्रेमा की बारी थी, वो मेरे आगे पीछे चक्कर लगा रही थी और मेरे खड़े लौड़े को छेड़ कर उसके कड़ेपन पर हैरान हो रही थी. वो बैठ गई और झट से मेरे लौड़े को अपने मुंह में डाल लिया और उसको बड़े प्यार से और अदा से चूसने लगी.
 
मैंने नैना को कहा- भाभी को फिर से तैयार करो, उसको रात में एक बार और चोद दूंगा क्योंकि वो सबसे ज़्यादा भूखी है.प्रेमा के सुंदर सुडोल उरोजों को देख कर मन बड़ा ही प्रसन्न हो रहा था क्यूंकि अक्सर छोटी उम्र की लड़कियों के उरोज अपरिपक्व होते हैं लेकिन कुछ लड़कियाँ इस मामले में भाग्यशाली होती हैं और कुदरती तौर से सुन्दर और सख्त उरोजों की मालिक बन जाती हैं.

प्रेमा को लबों पर चूमने के बाद मैं उसको पलंग की तरफ ले गया घोड़ी बना कर चोदने के लिए…तब नैना बोली- छोटे मालिक, आप पहले भाभी को घोड़ी बना कर चोद चुके हैं तो आप प्रेमा को अब अपने ऊपर लेकर चोदो या प्रेमा को आपको चोदने दो. क्यों प्रेमा?

प्रेमा ख़ुशी से बोली- हाँ हाँ क्यों नहीं? सतीश तुम लेट जाओ और मैं ऊपर से तुमको चोदती हूँ.मैं बेड पर लेट गया अपने लहलहाते हुए लंड को लेकर और प्रेमा मेरे ऊपर बैठ कर अपनी गीली गोत चूत में लंड को डालने की कोशिश करने लगी लेकिन वो इतना मोटा था कि वो उसकी चूत के छोटे मुंह में नहीं जा रहा था.

मैंने उसकी कमर को अपने हाथ में पकड़ा और उसको धीरे से अपने लंड के ऊपर बिठा दिया.प्रेमा ने जल्दी पूरे लंड को अपनी बहुत ही टाइट चूत में डाल दिया और फिर अपनी कमर को एक दो बार ऊपर नीचे किया और जब उसको मज़ा आने लगा तो वो थोड़ा झुकी और मेरे लबों को अपने होटों में लेकर चबाने लगी.मैं उसके मुंह में अपनी जीभ डाल कर उसका रस पीने लगा.

अब प्रेमा कामांध हुई मेरे ऊपर एक तरह से नाचने लगी.वो इतनी तेज़ी से मेरे ऊपर नीचे हो रही थी कि कुछ ही क्षणों में ही वो जल्दी से स्खलित हो गई और मेरे ऊपर लेट कर काम्पने लगी और मुझको उसकी चूत के खुलने और बंद होने को अच्छी तरह से महसूस किया.प्रेमा की चुदाई का दृश्य भाभी और सुधा बड़ी हैरानी से देख रही थी.

जब यह चुदाई का सीन खत्म हुआ तो नैना ने सुधा को, जो लाइन तोड़ कर आई थी, वापस ले गई और हम तीनों को रात सोने के लिए छोड़ गई कमरे में!मैंने कमरे का दरवाज़ा लॉक किया और बेड पर लेट गया क्योंकि मैं बहुत ही थक गया था.मेरी एक तरफ भाभी लेटी थी और दूसरी तरफ प्रेमा.

मेरे सोने से पहले जब प्रेमा सो गई तो मैंने भाभी की चूत में ऊँगली डाली तो वो काफी गीली हो रही थी.तो मैंने भाभी के मुम्मों को चूसा और उंगली से उसकी भग को रगड़ा तो उसने मेरे लौड़े को खींच कर ऊपर आने के लिए ज़ोर डाला.

मैं भी ना नहीं कर सका और ज़्यादा देर न लगाते हुए उसके ऊपर चढ़ कर लौड़े को उसकी चूत में डाल दिया और फिर हौले हौले भाभी को चोदने लगा.लंड का पूरा अंदर जाना और फिर पूरा बाहर आना और फिर इसी क्रम को दोबारा दोहराना यही मेरा चुदाई का स्टाइल बन चुका था और इस स्टाइल से मैंने कई चूतों के किले फ़तेह किये थे और अपने लंड के परचम लहराए थे.

भाभी की बेचारी चूत इन हमलों के सामने कहाँ ठहर सकती थी, जल्दी ही भाभी की चूत ने भी हथियार डाल दिए और एक बार फिर उसका शरीर अकड़ा और फिर ढीला पड़ गया लेकिन मुझको अपने शरीर से पूरी तरह कस कर बाँध लिया.यही उनका धन्यवाद देने का स्टाइल था.

मैं भी करवट लेकर प्रेमा के मोटे और मुलायम चूतड़ों को टटोलने लगा कि कहीं यह भी चुदाई के लिए तैयार हो रही हो तो इसका भी काँटा एक बार और खींच डालूँ… लेकिन नहीं, वो तो जवानी की नींद में मस्त सोई थी.

रात को मैं बड़ी गहरी नींद में सोया था लेकिन मुझको यह अहसास हो रहा था कि रात को मुझ पर भाभी और प्रेमा ने कई बार चढ़ कर अपनी खूब चुदाई की.

कहानी जारी रहेगी.
 
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