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Adultery मेरा सुहाना सफर-कुछ पुरानी यादें

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मैं बोला- फिर उन्होंने क्या कहा?नैना बोली- उनको आप से अकेले में मिलने की बहुत इच्छा है. मैंने कहा कि वो आज रात आ सकती हैं मिलने के लिए अगर उनकी मर्ज़ी है तो!दोनों ने कहा कि वो आएँगी आज रात ज़रूर.मैंने कहा- क्या तुमने उनको बता दिया कि मिलने पर क्या संभव है?नैना बोली- साफ़ साफ़ तो नहीं बताया लेकिन इतना ज़रूर पूछा कि क्या वो कुंवारी हैं? दोनों ने कहा कि ‘नहीं उनकी तो सील टूटी हुई है.’

हम यह बातें कर ही रहे थे कि दरवाज़ा जो खुला था थोड़ा खटका और फिर वो दोनों अंदर आ गई.मैंने बड़ी गरम जोशी से कहा- आइये आपका ही इंतज़ार कर रहे थे हम दोनों !दोनों काफी शरमा रही थी और उनकी सुन्दर फुलकारी साड़ियाँ बहुत ही सुंदर लग रही थी उनके शरीर पर!

नैना ने कोक की बोतलें मंगवा के रखी हुई थी, वो उनको पीने को दी और फिर बातों ही बातों में नैना ने उनसे पूछ लिया कि क्या वो किसिंग के लिए या फिर चुदाई के लिए आई हैं?दोनों ने सर नीचे किये ही कहा कि जैसा सतीश जी कहें वो उनको मंज़ूर है.मैं बोला- तो फिर देर काहे की आइये शुरू करें.

मैं उन दोनों के पास गया और उनको अपने आलिंगन में ले लिया और फिर मैंने उनको लबों पर एक एक गर्म चुम्मी जड़ दी.पहले रेवा को और फिर सांवरी को लबों पर चूमने और चाटने लगा और उनके ब्लाउज के ऊपर से उनके गोल और सॉलिड मुम्मों को दबाने लगा.दोनों ने आँखें बंद की हुई थी लेकिन मैं समझ रहा था कि उनको बहुत आनन्द आ रहा था.अब नैना ने आगे बढ़ कर उनके कपड़े उतारने शुरू कर दिए.

सब से पहले रेवा के कपड़े उतारे और वो बहुत ही खूबसूरत जिस्म वाली लड़की लग रही थी, उसके उरोज उन्नत और सॉलिड थे और एकदम मस्त सफेदी लिए हुए थे.मैं सांवरी के कपड़े उतारने लगा और उसके ब्लाउज को उतारते ही उसके सॉलिड सांवले मम्मे जम्प करके सामने आ गए.सांवरी का जिस्म सांवला ज़रूर था लेकिन निहायत ही सेक्सी और आकर्षण वाला जिस्म था.

जब मैंने उसका पेटीकोट नीचे किया तो उसके काले चमकीले बालों से भरी हुई चूत एकदम आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी.उधर नैना भी रेवा को नग्न कर के मेरे सामने ले आई.अब नैना मेरे कपड़े उतारने के लिए आगे बढ़ी तो रेवा ने उसको रोक दिया, स्वयं आगे आकर मेरे कुर्ते को उतार दिया और जैसे ही उसने मेरा कुरता उतारा, मैंने झुक कर उन दोनों का अभिवादन किया.

और फिर जब उसने मेरा पजामा उतारा तो मैंने अपने खड़े लंड के साथ फिर एक बार झुक कर दोनों का अभिवादन किया ठीक उसी तरह जैसे कि रेवा ने नदी किनारे अपने कपड़े उतारते हुए किया था.रेवा यह देख कर झेंप गई लकिन मैं बड़ा ही आनन्दित महसूस कर था.

मैंने रेवा को उसके लबों पर चूमना शुरू कर दिया अपनी जीभ को उसके मुंह में डाल कर उसकी जीभ से खेलने लगा.उधर नैना ने सांवरी को पकड़ रखा था और उसको लेकर पलंग की ओर बढ़ रही थी और उसको लिटा कर उसके मुम्मों और चूतड़ों को छेड़ रही थी.

मेरा एक हाथ रेवा की चूत में गश्त लगा रहा था और उसकी मुलायम चूत के बालों में ऊँगली चलाते हुए कभी कभी उसकी भग पर भी उंगली चला रहा था.रेवा की चूत एकदम गीली हो चुकी थी, मैंने उसको अपनी बाहों में उठा लिया और उसकी चूत को लंड के सामने लाकर उसकी चूत में अपना लोहे के समान लंड घुसेड़ दिया. एक ही धक्के में लंड पूरा का पूरा अंदर घुस गया और मैंने उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर उसको लंड के ऊपर आगे पीछे करने लगा और साथ में अपने मुंह में उसके मुम्मों के गोल चूचुकों को चूसने लगा.

रेवा ने अपने बाहें मेरे गले में डाल रखी थी और वो झूला झूलते हुए चुद रही थी.अब मैंने एक उंगली रेवा की गांड में भी डाल दी जिससे वो बहुत भड़क उठी और तेज़ी से मेरे हाथों के झूले में आगे पीछे होने लगी और जल्दी ही अपनी गर्दन को एकदम पीछे कर के ज़ोर से हुंकार भरती हुई झड़ गई.

जैसे ही उसकी चूत से ढेर सारा पानी छूटा, वो कांपती हुई मेरे जिस्म से चिपक गई.मैंने उसको ले जाकर पलंग पर लिटा दिया और वहीं लेटी हुए सांवरी के साथ दूसरी तरफ जा कर लेट गया.
 
अब नैना उठ कर रेवा के पास आ गई और उसके जिस्म को पौंछने लगी और उसकी चूत में से निकल रहे रस को साफ़ करने लगी.इधर मैंने सांवरी की टांगों में बैठ कर उसकी चूत में हाथ डाला तो वो नैना ने पूरी तरह से तैयार कर रखी थी. उसके होटों पर एक गर्म चुम्मी जड़ते हुए मैंने अपने खड़े लंड को सांवरी की चूत के ऊपर रख दिया और एक हल्का सा धक्का मारा और लंड सारा का सारा अंदर चला गया.

मैं अब बड़े धीरे धीरे सांवरी की फैली हुई टांगों के बीच चूत के अंदर गए लंड को आगे पीछे करने लगा.सांवरी की टांगों को मैंने हवा में उठा दिया था सो उसको बड़े ही हल्के और कभी तेज़ धक्कों से इत्मीनान से चोदने लगा.

वो भी हर धक्के का जवाब दे रही थी और अपनी चुदाई में पूरी तरह से सहायक बन रही थी, उसके छोटे मगर सॉलिड मुम्मे मेरी छाती से चिपके हुए थे और बाद में मैं उनके चूचुकों को अपने मुंह भी ले रहा था और गोल गोल चूस रहा था.

थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि सांवरी जल्दी ही छूट जायेगी, मैंने धक्कों की स्पीड बहुत ही तेज़ कर दी और उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर मैं बहुत ही गहरी स्ट्रोक्स मारने लगा जो पूरी उसकी चूत के अंत तक जा रही थी.जब वो हाय-हाय करने लगी तो मैंने उसकी कमर को कस कर अपने हाथों में ले कर बहुत ही तेज़ स्पीड से उसकी चुदाई शुरू कर दी.

वो जल्दी ही ‘उफ्फ मेरी माआआआ मैं गई…’ कहती हुए छूट गई. तब उसने अपनी बाहों में मुझको पूरी ताकत से बाँध लिया और कमर से मुझको अपनी कैद में ले लिया.मैं ज़रा भी नहीं हिल सकता था जब तक सांवरी पूरी तरह से स्खलित नहीं हो गई.उसके बाद ही उसने मुझको अपनी लोहे के समान गिरफ़्त से आज़ाद किया, उसके ऊपर से उठने से पहले मैंने उसको एक भाव भीनी चुम्मी दी उसके लबों पर और उसके मुम्मों को चूमते हुए मैं उसके ऊपर से उठ गया.

नैना ने इशारे से मेरी नज़र उसकी चूत में से निकले पानी की तरह दिलाई जो उस वक्त बिस्तर की चादर के ऊपर पड़ा हुआ था.नैना बोली- वाह, कमाल की छुटास है सांवरी की चूत की, ऐसी मैंने कभी न देखी ना सुनी थी इससे पहले!रेवा भी आ गई और सांवरी की चूत से निकले पानी को देख कर वो भी हैरान थी.

सांवरी चुप रही और कुछ नहीं बोली और ना ही हम में से किसी ने इस बात को दुबारा उठाया.नैना बोली- क्यों लड़कियों, अब क्या मर्ज़ी है तुम दोनों की?रेवा और सांवरी एक साथ बोली- एक बार और कर देते सतीश जी तो मज़ा आ जाता!नैना बोली- आप दोनों तो कल रात भी रुक रही हो ना, कल फिर तुम्हारा काम कर देंगे छोटे मालिक. क्यों छोटे मालिक?मैं बोला- हाँ हाँ क्यों नहीं, अगर दोनों की यही इच्छा है तो कल फिर इनको मज़ा दे देंगे.

नैना बोली- चलो तो फिर आप कपड़े पहनो और मैं आपको आप के कमरे में छोड़ आती हूँ.दोनों कपड़े पहनने लगी और मैं उनको बड़ी हसरत से देखता रहा क्यूंकि रेवा और सांवरी दोनों ही सुंदर शरीर की मालकिन थी और उनकी टाइट चूतों को चोद कर बड़ा आनन्द आया था.

जाने से पहले दोनों ही मेरे पास आईं और मेरे खड़े लंड को चूम कर जाने लगी तो मैंने रोक दिया और उनको होटों पर एक मस्त चुम्मी देकर कहा- कल फिर आप का स्वागत करेंगे हम सब!यह कह कर वो चली गई.नैना कहने लगी- अभी तो रात के 11 बजे हैं, आप कम से कम दो और लड़कियों का काम कर सकते हैं. क्यों छोटे मालिक?

कहानी जारी रहेगी.
 


मेहमान लड़कियों की चूत की आखिरी चुदाई



नैना कहने लगी- अभी तो रात के 11 बजे हैं आप कम से कम दो और लड़कियों का काम कर सकते हैं, क्यों छोटे मालिक?मैं बोला- मुझको तो कोई ऐतराज़ नहीं लेकिन नैना डार्लिंग क्या यह सब मम्मी के जागते हुए संभव है क्या? अभी हमने रिस्क लिया था लेकिन रिस्क बार बार लेना उचित होगा क्या?

नैना बोली- शायद आप ठीक कह रहे हैं छोटे मालिक, मैं उनको कह आती हूँ कि और किसी का यहाँ आना सम्भव नहीं आज!मैं बोला- नैना डार्लिंग उनमें ऐसी कौन है जिसको खुश करना ज़रूरी है अभी? सब तो चुद चुकी है एक दो बार कम से कम, ऐसा करो उन सबको यहाँ बुला लेते हैं और खूब मस्ती करते हैं सब मिलकर, क्यूँ यह ठीक है ना? जो बहुत गर्म हो जायेगी उसको चोद भी देंगे हम सब मिल कर, क्यों यह ठीक है ना?

नैना एकदम खुश हो गयी और बोली- मैं उनको बुला लाती हूँ. साली कुछ की चूत में तो बहुत ही खुजली होवत है रे!मैं बोला- तो इन सब का लाइए ना, हम खुजली मिटावन का ही तो काम करते हैं न!नैना ज़ोर से हंस दी और लड़कियों के कमरे में चली गई.

उन सबके कमरे दूसरे फ्लोर पर ही मेरे कमरे के साथ लगे हुए थे तो उन लड़कियों को वहाँ लाने में कोई ख़ास वक्त नहीं लगा.सबने अपनी अपनी नाइटी पहन रखी थी, सबने आते ही मुझको जफ्फी मारी और मैंने भी उनके मुम्मों और चूत को हाथ लगाया.एक भाभी और 4 अनब्याही कन्याएँ आ धमकी और सब मेरे इर्द गिर्द घूम रही थी.

नैना ने पूछा- अब आप कैसे क्या करना चाहती हैं?सबसे तेज़ रिया ही थी, वो बोली- चुपके चुपके और शांत ढंग से हम एक गेम खेलते हैं… ताश के पत्ते बांटे जाएंगे हम सबमें, जिसका पत्ता सब से कम नंबर का होगा उसको अपनी नाइटी उतारने होगी, इसके बाद जब सबकी नाइटी उतर जायेगी तो फिर हम तय करेंगी कि कौन सी लड़की पहले चुदेगी सतीश से! ठीक है ना?

नैना बोली- मेरे ख्याल से हम ऐसे ताश के पत्ते खेलते हैं जिसका पत्ता सब से बड़ा निकलेगा, उसको पहले चोदा जाएगा और इसी तरह हम यह तय कर लेते हैं कि किसकी बारी कब! क्यों यह ठीक नहीं क्या? इससे छोटे मालिक को भी वक्त मिल जाएगा आलखन के लिए?सबने कहा- हाँ हाँ यह ठीक रहेगा.

ताश के पत्ते बंटने लगे और जब सबने अपने पत्ते खोले गए तो जूही भाभी नो.1 पर थी और प्रेमा न. 2 पर और इसी तरह ही बाकी सबका नंबर लग गया.नैना ने कहा- जूही भाभी और प्रेमा अपनी नाइटी उतार दें और बाकी भी सब अपनी अपनी नाइटी उतार दें और सब आपस में प्यार करना शुरू कर दें. छोटे मालिक के पास इतना वक्त नहीं होगा कि हर किसी लड़की को तैयार करें सो आप सब अपनी अपनी साथिन के साथ लग जाओ, चूमो, चाटो और खूब आनन्द लो लेकिन ध्यान रहे कि कोई भी शोर नहीं होना चाहिए.

मैं बोला- नैना रानी, मैं चाहता हूँ कि आज सब लड़कियाँ मिल कर या फिर बारी बारी मेरा चोदन करें. एक समय में कम से कम दो लड़कियाँ मुझ पर पीछे से हमला करेंगी और फिर मेरा चोदन करेंगी. मेरे हाथ बाँध दिए जायें ताकि मैं किसी को रोक नहीं सकूँ. क्यों यह खेल कैसा रहेगा सुंदरियों?

सब लड़कियाँ और भाभी चहक उठी और नैना ने फैसला किया कि सब अपनी अपनी बारी से दो दो कर के मुझको चोदेंगी.

सबसे पहले नैना ने मेरे हाथ एक दुपट्टे से बाँध दिए और फिर मुझको नंगा करके खड़ा कर दिया और सबसे पहली टोली जिस में जूही भाभी और प्रेमा शामिल थी, ने मिल कर मुझको पीछे से पकड़ा और मुझ को खींचते हुए बेड पर ले गई.जूही भाभी मुझको बेतहाशा होटों पर चूमने लगी और उनके मोटे मुम्मे मेरी छाती में धंसे जा रहे थे लेकिन मैं उनको हाथ नहीं लगा सकता था.

उधर प्रेमा ने मेरे लंड को अपने कब्ज़े में किया हुआ था और वो उसको ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी.अब भाभी ने अपनी पोजीशन प्रेमा के साथ बदली और वो मेरा लंड चूसने लगी और प्रेमा मेरे सारे चेहरे को चुम्मियों से गीला करने में लगी हुई थी, वो भी बार बार अपने मुम्मों को मेरी छाती से रगड़ रही थी.
 
थोड़ी देर में ही जूही भाभी मेरे ऊपर बैठ सी गई और मेरे लंड को अपनी चूत में डाल कर जल्दी जल्दी ऊपर नीचे होने लगी. उसकी आँखें मेरी आँखों पर टिकी हुई थी और वो ऐसे व्यवहार कर रही थी कि मेरे द्वारा किये हुए सारे ज़ुल्मों की सजा मुझको अभी दे देना चाहती थी.इस कश्मकश में जूही भाभी बहुत ही जल्दी ही छूट गई और कंपकपाती हुई मेरे ऊपर लेट गई और तब नैना ने उसको मेरे ऊपर से उठाया और प्रेमा ने जल्दी से उसका स्थान लेने के लिए आगे आने लगी.

फिर कुछ सोच कर उसने मुझ को पलंग पर से उठा दिया और कहने लगी कि वो खड़ी होकर चुदवाना चाहती है, मुझको सहारा देकर उसने उठाया और खुद पलंग पकड़ कर झुक कर खड़ी हो गई और मैंने उसके पीछे खड़े होकर अपने अकड़े लंड को उसके चूतड़ों पर रख दिया और प्रेमा ने हाथ डाल कर उसको चूत के मुंह पर रख कर कहा- धक्का मारो मेरी सरकार!

मैंने एक ज़ोर का धक्का मारा और मेरा लंड एकदम गीली चूत में फटाक से घुस गया. जैसे ही मेरा गर्म लोहे के समान सख्त लंड प्रेमा के अंदर गया तो वो एकदम से तिलमिला उठी.मैंने भी बड़ी तेज़ धक्काशाही शुरू कर दी और अपने बंधे हाथों को प्रेमा के चूतड़ों पर रख कर बड़ी तेज़ स्पीड से चुदाई शुरू कर दी क्योंकि मैं चाहता था कि वो जल्दी ही झड़ जाए तो तीसरी चूत से मिलन हो जाये.

प्रेम की टाइट चूत में भी जल्दी ही हरकते उल अंसार होने लगी और वो जल्दी ही हाय हाय करती हुई झड़ गई.झड़ते वक्त उसकी चूत में सिकुड़न होने लगी और उसकी चूत मेरे लंड को दोहने की कोशिश करने लगी लेकिन आखिर में चूत को ही हारना पड़ा.

जैसे ही प्रेमा झड़ी, उसी वक़्त दो और लड़कियाँ आ गई और मुझसे चिपट कर मुझको चूमने और चाटने लगी. उनमें से एक रिया थी और दूसरी सुधा थी.रिया नीचे बैठ कर मेरे गीले लंड को चूसने लगी और सुधा मेरी छाती के छोटे निप्पल को चूसने लगी. सुधा के ऐसे करने से मुझको बहुत गुदगुदी हो रही थी लेकिन मैं भी हँसते हुए उछल कूद रहा था.

मैंने बंधे हाथों से ही सुधा के सॉलिड बूब्स को छूना शुरू कर दिया और अपने मुंह को नीचे कर के उनके निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और अपने लंड को भी रिया के मुंह में आगे पीछे करने लगा.

अब रिया उठी और पलंग पर घोड़ी बन गई, मैं भी उसके पीछे बैठ गया और अपने लंड को चूत के मुंह पर रखा और एक धक्के में पूरा का पूरा अंदर कर दिया.रिया पूरे जोश में थी, वो शुरू से हर धक्के का जवाब डबल धक्के से दे रही थी और मेरी इस चुदाई को पूरी तरह से एन्जॉय कर रही थी क्यूंकि उसको पता था कि कल वो सब अपने अपने घरों में चले जाएँगी.

रिया की तेज़ी की वजह से वो जल्दी ही छूटने के कगार पर पहुँच रही थी लेकिन मैं रिया को काफ़ी चाहने लगा था तो मैं अपनी स्पीड धीरे कर देता था जिसके कारण रिया का छूटना भी रुक जाता था.यह सब नैना की तेज़ नज़रों से नहीं छुप सका, उसने मेरे कान में कहा- मालिक जल्दी कीजिये, अभी लाइन में और भी हैं.

मैंने फिर अपनी स्पीड तेज़ कर दी और अंतिम क्षणों में इतने तेज़ धक्के मारे कि रिया जल्दी ही स्खलित हो गई और ज़ोर से मेरे लंड से अपने चूतड़ों को चिपका दिया और काफी कांपती रही कुछ देर तक!सुधा रिया के हटने की इंतज़ार कर रही थी और जैसे ही रिया हटी तो सुधा मेरे से लिपट गई और मुझको बड़ी बेरहमी से चूमने लगी और मेरे सारे शरीर पर हाथ फेरती रही.

फिर उसने मुझको बिस्तर पर बैठा दिया और खुद अपनी टांगें चौड़ी कर मेरे सामने बैठ गई, अपनी टांगें मेरी दोनों तरफ करके खुद मेरे लंड की सीध में बैठ गई और मेरे बंधे हाथों को अपनी पीठ के पीछे ले गई जिससे हम दोनों छाती से छाती जोड़ कर बैठ गए.अब उसने अपनी गीली चूत में मेरा लंड फिट किया और खुद ही धक्का मार कर लंड को पूरा अंदर ले गई.

मेरे बंधे हाथ सुधा की पीठ के पीछे थे, मैंने उनको उसके चूतड़ों के नीचे फिट किया और उनके सहारे सुधा मुझको सही मायने में चोदने लगी.धक्कों की स्पीड अब पूरी सुधा के हाथ में थी, उसने पहले धीरे धीरे धक्कों से शुरू कर के तेज़ धक्कों की और बढ़ने लगी और मैं भी उसके गोल सॉलिड मुम्मों को चूसने में लगा हुआ था.

जब वो धक्कों की तेज़ स्पीड पकड़ने लगी तो मैंने अपनी एक हाथ की मध्य तर्जनी को उसकी गांड में डाल दिया. और वो तो अब इतनी तेज़ी से धक्के मारने लगी कि कुछ ही क्षणों में वो धराशायी हो गई और उसकी चूत ने मेरे लंड के रस को दूध की तरह दोहने का प्रयत्न शुरू कर दिया.फिर वो बेइन्तेहा जोश से मुझसे चिपकी रही काफी देर तक और वो शायद अभी भी ना हटती अगर नैना उसको मुझको छोड़ने के लिए ना कहती.

अब नैना ने कहा- चुदाई में अब इंटरवल दिया जाता है, छोटे मालिक के बंधे हाथ खोल दिए जाएँ ताकि वो बाथरूम वगैरह जा सकें.
 
बाथरूम से आकर मैंने पूछा- कितनी और?नैना बोली- अभी दो और हैं, अगर आप थक गए हैं तो इन दो को रात में चोद देना तो इस तरह सारी चुद जाएंगी.मैंने कहा- यह ठीक है, इन चारों को अपने कमरे में छोड़ आओ और बाकी दो मेरे बिस्तर की शोभा बढ़ाती रहेंगी.

जब बाकी चारों कपड़े पहनने शुरू कर ही रही थी तो मैंने कहा- इन सबका ब्यूटी कांटेस्ट कर लेती ना लेकिन वो तन्वी भाभी, रेवा और सांवरी भी नहीं हैं तो रहने दो.

सबने अपने नाइटी पहननी शुरू कर दी और थोड़ी देर में वो सब अपनी नाइटी पहन कर तैयार हो गई जाने के लिए. जूही भाभी और बाकी सब लड़कियों ने मुझको जाने से पहले भाव भीनी चुम्मियाँ और टाइट जफ्फी मारी और मेरा शुक्रिया अदा किया और कहा- सतीश यार, तुम तो कमाल की चीज़ हो, तुम जैसा लड़का हमने आज तक नहीं देखा जिसका लंड हमेशा ही खड़ा रहता है? ऐसे कैसे हो सकता है यार?

मेरी जगह नैना ने जवाब दिया- ऐसा है भाभी जी, मैंने छोटे मालिक को बड़ी छोटी उम्र से पाला है और मैं इनके साथ काफ़ी समय से हूँ. मैं इनको बहुत अच्छी तरह से जानती हूँ, इनको एक मेडिकल प्रॉब्लम है जिसके कारण ज़रा सा भी कोई इनके लंड को छूता है तो वो तुरंत खड़ा हो जाता और काफी समय वो ऐसे ही खड़े रहता है चाहे वो इसका इस्तेमाल करें या ना करें.डॉक्टरों से भी चेक करवाया था लेकिन वो यही कहते हैं कि यह बिमारी लाइलाज है. वैसे छोटे मालिक अगर ना चाहें तो भी इनके खड़ा लंड से वीर्य डिस्चार्ज नहीं होता. आप सब ने नोट किया हो गा कि आप सब की चुदाई करते समय छोटे मालिक के लंड से कोई वीर्य नहीं निकला आप किसी की भी चूत में!यह इस बात की गारंटी है कि इनके द्वारा चुदाई एकदम सेफ है और किसी भी लड़की या औरत को कभी कोई नुक्सान नहीं होने देते अगर उसकी स्वयं की मर्ज़ी प्रेग्नेंट होने की ना हो तो!

भाभी बोली- अच्छा ऐसा है क्या? मुझ को पहले बतला नहीं सकते थे क्या? उफ्फ्फ मेरे से कितनी बड़ी गलती हो गई.नैना बोली- क्या गलती हो गई भाभी?भाभी बात छुपाते हुए बोली- कुछ नहीं, लड़कियो, तुम अपना काम करवा चुकी हो, जाओ यहाँ से, जल्दी करो कहीं कोई ना आ जाए यहाँ.

तभी सब लड़कियाँ कपड़े पहनने लगी जल्दी जल्दी और फिर नैना उन सबको छोड़ने के लिए उनके साथ चली गई.

अब सिर्फ जूही भाभी ही रह गई और वो मुझको बड़ी प्यार भरी नज़रों से देखने लगी और धीरे धीरे वो मेरे निकट आने लगी, पास आकर मुझसे लिपट गई और मेरे होटों पर प्रगाढ़ चुम्बन देने लगी.

मैं भी भाभी की चूत पर छाई काली ज़ुल्फ़ों के साथ खेलने लगा और उसके मस्त गोल और मोटे स्तनों को मसलने लगा. मैंने मज़ाक में पूछा- क्यों भाभी, अभी और चुदवाने की इच्छा है क्या?भाभी मेरे गले में बाहें डालते हुए बोली- यार सतीश, नैना ने पहले नहीं बताया कि तुम मुझको गर्भवती बना सकते हो, नहीं तो मैंने अभी तक तुमसे गर्भ धारण कर लिया होता.

अब मैं समझा कि जूही भाभी क्यों रुक गई थी, बाकी लड़कियों के साथ नहीं गई थी.

जब नैना वापस आई तो दरवाज़ा थोड़ा भिड़ा हुआ था, उसको खोल कर वो कमरे के अंदर आ गई.जूही भाभी ने झट उसको घेर लिया और शिकायत के लहजे में बहभी बोली- नैना बहन, बता देती तो मैं भी सतीश से प्रेग्नेंट होने की कोशिश करती ना! तुम तो जानती हो मेरा पति तो एकदम निकम्मा है साले से कुछ नहीं होता. यह मौका था कि मैं सतीश से गर्भ धारण कर लेती?भाभी यह कहते हुए एकदम से रोने लगी और तब नैना ने उसको मुश्किल से चुप करवाया.नैना बोली- भाभी, अब तो कुछ नहीं हो सकता, आप तो कल वापस जा रही हो ना?भाभी बोली- अगर मैं कल रुक जाऊँ तो कुछ हो सकता है क्या?

नैना भाभी को लेकर एक कोने में चली गई और उससे कुछ पूछताछ करने लगी और फिर वापस आकर कहने लगी- छोटे मालिक, भाभी गर्भ के लिए तैयार है, आप उसको आज रात दो तीन बार चोद दो तो शायद यह भी गर्भवती हो जाए, कोशिश कर देखने में क्या हर्ज है?मैं बोला- कोई हर्ज नहीं, पर अभी भाभी को मेरे साथ सोना पड़ेगा?भाभी बोली- वो तुम्हारी मम्मी ने तो यह कमरा मुझको और एक लड़की को सोने के लिए दिया था और तुम्हारे साथ रूम शेयर करने के लिए भी कहा था.नैना बोली- तो फिर ठीक है छोटे मालिक, आज रात को आपको चोदेंगे और आगे आपकी किस्मत है कि आप गर्भवती हो जाती हो या नहीं!मैंने कहा- नैना तुम को भी यहाँ सोना पड़ेगा आज की रात और मैं छोड़ूंगा नहीं तुमको भी!नैना हँसते हुए बोली- मत छोड़ना मुझको और भाभी को भी!

कहानी जारी रहेगी.
 


पर्बती की ना और बाद में मेरी भी ना


मैंने कहा- नैना, तुमको भी यहाँ सोना पड़ेगा आज की रात और मैं छोड़ूंगा नहीं तुमको भी!नैना हँसते हुए बोली- मत छोड़ना मुझको लेकिन भाभी का काम कर दो, वरना वो बच्चा कहाँ से लाएगी अपने जीवन में!मैं बोला- भाभी की मुराद तो पूरी करनी ही है लेकिन उनसे पूछ लो की उनका पति वापस जाने पर चोद सकेगा क्या?भाभी बोली- वो साला अफीमची है तो मैं उसको जाते ही घेर लूंगी और जैसे भी होगा, उससे चुदवा लूंगी.नैना बोली- तो फिर उतारो नाइटी और शुरू हो जाओ!

मैं तो तैयार था ही और जल्दी से भाभी को जफ्फी मारी, उसके सुंदर होटों पर एक हॉट किस करते हुए मैं उसको जल्दी ही बेड पर ले गया और उधर नैना ने भी अपने कपड़े उतार दिए और वो भी चुदाई के मैदान में कूद पड़ी!जूही भाभी को उस रात मैंने 3 बार चोदा और हर बार मैंने उसकी चूत मैं अपना गाढ़े वीर्य की पिचकारी छोड़ी जो उसके गर्भदानी के अंदर तक चली गई होगी, ऐसा मेरा अनुमान है.हर बार भाभी की चूत को नैना ने गर्भ वाली पोजीशन में रखा ताकि उसको गर्भ ठहरने की पूरी उम्मीद बनी रहे.

जब भाभी थक कर गहरी नींद में सो गई तो मैंने नैना की एकदम गीली चूत को भी चोदा और उसका दो बार छुटाया और साथ में यह वायदा भी ले लिया नैना से की अगली रात में वो निम्मो और पर्बती को भी घेर कर लाएगी मेरे पास!नैना बोली- हाँ, कल तक तो सारे मेहमान चले ही जाएँगे तो वो खाली होंगी दोनों. निम्मो को तो आपने पहले ही चोद रखा है, पर्बती है जो नई है. उसका भी कुछ जुगाड़ करती हूँ, आप निश्चिन्त रहे छोटे मालिक.

रात को हम दोनों काफी देर बाद सोये लेकिन सोने से पहले मैंने नैना से पूछा कि यह भाभी गर्भवती हो पायेगी कि कह नहीं सकते.नैना ने विश्वास दिलाया कि सवेरे तक वो बता देगी कि उसका कुछ काम हुआ या नहीं अन्यथा उसको लखनऊ शहर में बुला लेंगे और वहाँ इतमीनान से इन को गर्भवती कर देना.

अगले दिन जाने से पहले सब लड़कियाँ मुझ से मेरे कमरे में मिलने आयी और मुझ को बहुत ही हॉट जफ्फी मारी चुम्मियाँ भी ली और थैंक्स भी कहा.सांवरी और रेवा जो बाद में जाने वाली थी, उनके भी भाई आ गए थे, वो भी सबके साथ सवेरे का नाश्ता पानी करके अपने अपने घरों के लिए चली गई थी.

लड़कियों से मिलने के बाद दोनों भाभियाँ भी आईं मुझसे मिलने और मेरा बहुत धन्यवाद करने लगी क्यूंकि नैना ने कन्फर्म कर दिया था कि वो दोनों भी प्रेग्नेंट हो चुकी हैं.सब मेहमानों के जाने के बाद मम्मी और पापा और मैं बैठक में बैठे थे कि पापा जी बोले- वाह सतीश, तुम तो लखनऊ जाकर पूरे ट्रेंड हो गए कि कैसे मेहमानों का स्वागत करना है और कैसे उनका ध्यान रखना है… बहुत खूब सतीश, वेल डन!

मम्मी भी हँसते हुए बोली- तुमने लड़कियों का काफी अच्छा ख्याल रखा और सब तुम्हारी तारीफ़ कर रही थी. अच्छा कोई इनमें से पसंद आई तुमको अपनी दुल्हन के रूप में?मैं एकदम से हैरान हो गया- क्या बात कर रही मम्मी जी? मैं और शादी अभी? कभी नहीं. अभी में तो कॉलेज के प्रथम साल में हूँ मम्मी जी! मुझ को कम से कम बी ए तो कर लेने दो फिर सोचना शादी का, क्यों पापा जी आपका ख्याल है?पापा बोले- सतीश ठीक कह रहा है अभी इसको पढ़ने दो शादी की बाद में सोचेंगे.

आज कोई काम नहीं था, मैं पापा की बाइक लेकर अपने गाँव ही घूम आने की बात सोच ही रहा था कि नैना मेरे कमरे में आ गई और बोली- छोटे मालिक क्या करने का विचार है आज आपका?मैं बोला- मैं सोच रहा था कि ज़रा गाँव ही घूम आते हैं! क्यों ठीक नहीं क्या?नैना बोली- ठीक है, घूम आइये लेकिन मैंने पर्बती से बातचीत की है, वो कह रही थी हवेली में तो आपसे मिलना उसके लिए ठीक नहीं सो कहीं और जगह मिल लेते हैं?मैं हैरान होकर बोला- वो ऐसा क्यों बोली?
 
नैना हँसते हुए बोली- उसको मम्मी जी का डर है, इसलिए! मैंने कहा भी कि मम्मी जी कभी ऊपर सतीश के कमरे में रात को नहीं जाती लेकिन वो अभी भी डर रही है.मैं बोला- तो फिर क्या करें?नैना बोली- आप उसको कॉटेज में क्यों नहीं मिल लेते आज लंच के बाद?मैं बोला- तुमको भी तो वहाँ रहना ज़रूरी है ना तो तुम भी चलो!नैना बोली- ठीक है मैं भी चल पडूँगी उसके साथ!

खाना खाकर नैना आ गई और कहने लगी- कैसे चलेंगे वहाँ?मैंने कहा- बाइक पर चलते हैं, तुम दोनों पीछे बैठ जाना, क्यों ठीक नहीं क्या?नैना बोली- ठीक तो है, पर यह गाँव खेड़ा है यहाँ मालिक और नौकरों के बीच फर्क रखा जाता है.मैं बोला- ठीक है, मैं पहले चलता हूँ बाइक पर, तुम दोनों आ जाना पैदल.

मैं बाहर निकला और पापा की बाइक उठाई और थोड़े समय में कॉटेज पहुँच गया और चौकीदार को कोक की बोतलें और बर्फ लाने के लिए भेज दिया.दस पंद्रह मिन्ट में वो दोनों भी पहुँच गई.

पर्बती दिखने में सुंदर थी, चाहे उसका रंग सांवला था लेकिन उसका जिस्म भरापूरा था और वो चाल में मस्तानी और आँखों से शराबी लग रही थी.वो बिना कुछ बोले ही अंदर आ गई और नैना उसके पीछे आई.दोनों को बिठा कर मैं अंदर घूमने लगा और फिर थोड़ी देर बाद चौकीदार कोकाकोला की बोतलें भी दे गया.नैना ने बोतलें खोल कर हम सब के हाथ में दे दी.

फिर मैं बोला- क्यों नैना. आगे का क्या प्रोग्राम है?नैना बोली- आप बोलो, क्या करना है. पर्बती से बात की थी लेकिन वो बोली कि छोटे मालिक तो लड़के लगते हैं वो पूरी तरह से मर्द नहीं हैं. अभी तो मैं चुप कर गई.मैं हंस पड़ा- हाँ, पर्बती ठीक कहती है लेकिन एक बात तो है यह खाना बड़ा ही लज़ीज़ बनाती है इसमें कोई शक नहीं. बिल्कुल अपनी पारो की तरह… क्यों?नैना बोली- हाँ छोटे मालिक, वो भी तो कहती थी ना कि आप तो अभी लड़के लगते हैं.मैं बोला- वही तो, ऐसा करते हैं हम दोनों पर्बती को एक नमूना दिखाते हैं फिर उसके ऊपर छोड़ देते हैं जैसे वो चाहे, क्यों पर्बती?

पर्बती कुछ नहीं बोली और हम तीनों बैडरूम में चले गये. वहाँ नैना मेरे कपड़े उतारने लगी, जब वो मेरे कच्छे तक पहँची तो अपना मुंह पीछे कर लिया और फिर मेरे कच्छे को नीचे खींच लिया.जैसे ही उसने कच्छे को उतारा मेरा लंड एकदम खड़े नाग की तरह उछल कर बाहर आ गया और नैना ने उसको अपने मुंह में ले लिया और उसको चूसने लगी.

मैंने उसको उठाया और उसके कपड़े उतारने लगा जैसे कि पहले उसकी साड़ी को उतारा और फिर उसके हल्के नीले ब्लाउज को उतार दिया और एकदम सफ़ेद ब्रा से ढके मुम्मों को आज़ाद किया.और अब मैंने उसके पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया, उसका पेटीकोट झट से नीचे उतर गया, मैंने अपने मुंह को उसकी चूत पर छाई काली घटाओं में छुपा लिया और उसकी चूत में से निकल रही खुशबू को सूंघने लगा.

फिर मैं खड़ा हो कर उसके मुम्मों के चूचुकों को चूसने लगा और नैना का हाथ मेरे लौड़े से खेल रहा था.हम दोनों पर्बती से बेखबर अपनी काम क्रीड़ा में लगे हुए थे और अब नैना खड़े होकर चुदवाने के लिए तैयार हो गई. मैंने उसको बिस्तर पर थोड़ा झुकाया और पीछे से अपने लम्बे लंड को उसकी गरम चूत में डाल दिया और फिर मैंने धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करने में लग गया.

मेरे हाथ पीछे से नैना के मोटे और सॉलिड मुम्मों को मसलने में लगे हुए थे और कभी कभी उसके चूतड़ों पर भी हाथ की थपकी मार रहा था, नैना भी मेरे मूड को समझती हुई मज़े में चुदवा रही थी.मैं अब उसको काफी गहरे धक्कों की चुदाई करने लगा था. मैंने महसूस किया कि नैना अपने छूटने की कगार पर पहुँच रही थी और अब मैंने उसकी बड़ी तेज़ चुदाई शुरू कर दी.

मेरी अंधाधुंध स्पीड के आगे मेरी गुरु नैना भी नहीं टिक सकी और अपने शिष्य से हार बैठी और जैसे ही उसका छूटा वो ज़ोर ज़ोर से काँपने लगी और मैंने उसको कस कर उसके चूतड़ों को अपने लंड के साथ जोड़ लिया.जब वो छूट गई तो उसने मुझको अपने गले से लगा लिया और मेरे मुंह पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी.जवाब में मैं भी उसको बार बार जफ्फी लगाने लगा और उसके गालों को चूमने लगा.फिर हम दोनों थक कर पलंग पर एक दूसरे की बाहों में लेट गए.
 
तब मैंने पर्बती की तरफ देखा तो वो अपने एक हाथ को अपनी साड़ी के अंदर डाल कर चूत घर्षण कर रही थी.मैंने और नैना ने पर्बती को पूरी तरह से इग्नोर किया और फिर हम दोनों अपने कपड़े पहनने लगे और वापस जाने के लिए तैयार हो गए.तब पर्बती बोली- मेरा क्या होगा?नैना बोली- तुम्हारा क्या होना है पर्बती? तुमने तो छोटे मालिक से करवाने के लिए इंकार कर दिया था, हम अब वापस चल रहे हैं.पर्बती ने कहा- नहीं, मैंने दुबारा सोचा, मैं तैयार हूँ छोटे मालिक से करवाने के लिए!मैं बोला- पर्बती, तुमने एक बार ना कर दी, मैं अब तैयार नहीं हूँ तुम्हारे साथ कुछ भी करने के लिए, चलिए नैना.

यह कह कर मैं बाहर निकल आया और अपने मोटर साइकिल की तरफ जाने लगा.तब नैना मेरे पास आई और बोली- जाने दो छोटे मालिक, पर्बती से गलती हो गई है, उसको सुधारने दो ना!मैं बोला- ऐसा नहीं नैना, मैं बिना किसी की मर्ज़ी के कुछ भी नहीं करता, पर्बती ने अपनी मर्ज़ी बता दी तो कहानी यहीं खत्म करो ना! अच्छा मैं चलता हूँ, तुम दोनों पीछे आ जाना.यह कह कर मैं हवेली की तरफ चल दिया.

दोपहर के खाने के बाद मैं अपने कमरे में आलखन कर रहा था और ना जाने कब मेरी आँख लग गई.

शाम की चाय लेकर नैना मेरे पास आई और कहने लगी- वो पर्बती बड़ी पछता रही है, आपसे माफ़ी माँगना चाहती है, आप मान जाइए ना प्लीज?मैं बोला- ऐसा है नैना, मैं चाहता हूँ एक दो दिन उसको ज़्यादा घास मत डालो, उसके बाद देखेंगे! और हाँ, आज रात तुम और निम्मो आ जाना मेरे कमरे में!नैना बोली- ठीक है छोटे मालिक, जैसे आप कहो! वैसे मेरी सलाह मानिए, पर्बती हमारे सारे राज़ जानती है, जैसे आपने उन मेहमान लड़कियों से कुछ किया, यह वो जानती है, हालांकि पूरी तरह से नहीं लेकिन थोड़ी बहुत तो जानती है. और फिर आज उसने हम दोनों को देखा है तो आप उसको माफ़ कर दीजिये और आज रात उसका काँटा खींच दीजिये.

मैं थोड़ी देर सोचता रहा और फिर बोला- ठीक है नैना डार्लिंग, जैसे तुम कहो वैसे ही कर लेंगे. और कोई नई लड़की या औरत आई है हवेली में?नैना बोली- हाँ, आई तो है लेकिन वो सिर्फ दिन के काम के लिए है, रात को नहीं रहती यहाँ.मैं बोला- कैसी है दिखने में? सेक्सी है क्या?नैना अब हँसते हुए बोली- छोटे मालिक, आप भी न… कभी कभी सरकारी सांड की तरह व्यवाहर करते हो? अच्छी है देखने में और सेक्सी भी है और उसका पति भी यहाँ नहीं है, कई महीनों से वो आम भी पका हुआ है, तोड़ लेंगे कभी उसको.मैंने नैना को जफ्फी मारते हुए कहा- वाह नैना रानी… अच्छा सुनो, उस दिन नदी पर एक बड़ी ही सुन्दर सांवली सी औरत नहा रही थी, उसके बारे में पता करो ना प्लीज!नैना मुस्कराते हुए बोली- मैं उस दिन ही समझ गई थी कि आपकी नज़र इस काले हीरे पर ज़रूर पड़ेगी, मैंने उसके बारे में पूरा पता कर लिया है और समय आने पर उसको भी आपकी झोली में ज़रूर डाल दूँगी.मैं इतना ज़्यादा खुश हो गया कि मैंने नैना को बाहों में भर कर एक ज़ोरदार किस उसके रसीले होटों पर जड़ दी.

कहानी जारी रहेगी.
 


पर्बती की कसी चूत चोदी


नैना मुस्कराते हुए बोली- मैं उस दिन ही समझ गई थी कि आपकी नज़र इस काले हीरे पर ज़रूर पड़ेगी, मैंने उसके बारे में पूरा पता कर लिया है और समय आने पर उसको भी आपकी झोली में ज़रूर डाल दूँगी.मैं इतना ज़्यादा खुश हो गया कि मैंने नैना को बाहों में भर कर एक ज़ोरदार चुम्मी उसके रसीले होटों पर जड़ दी.

उस रात पर्बती और निम्मो नैना के साथ आई और आते ही पर्बती ने मुझसे माफ़ी मांगी.मैंने पर्बती से कहा- देखो पर्बती, मैं किसी भी औरत के साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं करता और ना ही मैं अपने ज़मींदार साहिब के लड़के होने का नाजायज़ फायदा ही उठाता हूँ. आज तक जितनी भी औरतों या फिर लड़कियों से मेरे सम्बन्ध रहे है वो सब उनकी ख़ुशी और इच्छ से ही रहे हैं. जब कभी भी तुमको लगे कि तुमको किसी काम को करने की मर्ज़ी नहीं है तो खुल कर मुझसे या फिर नैना से कह दो और वो काम करने के लिए तुमको कोई मजबूर नहीं करेगा.

पर्बती बोली- आप ठीक कह रहे हैं छोटे मालिक, जैसा आप या फिर नैना बहन कहेंगी मैं वैसा ही करूंगी.मैं बोला- तो आओ मुझको एक जफ्फी मारो और लबों पर गर्मागर्म चुम्मी दो.

पर्बती फ़ौरन आई, मुझको एक टाइट जफ्फी मारी और अपने गर्म होंट मेरे होंटों पर रख दिए और मैंने भी उसके मुम्मों को अपने हाथों में ले कर खूब मसला और एक हाथ उसकी चूत में उसकी नीली साड़ी के ऊपर से ही रख दिया.

उसको छोड़ कर मैं निम्मो की तरफ मुड़ा और उसको भी एक टाइट जफ्फी मारी और उसके होटों पर एक रस भरी चुम्मी कर दी.फिर मैंने नैना की तरफ देखा और उसको भी जफ्फी मारने के बाद एक गर्म चुम्मी भी की और फिर बाकी औरतों की तरफ देख कर मैं बोला- पर्बती और निम्मो शायद यह नहीं जानती कि नैना और मेरा रिश्ता एक गुरु और चेले का रिश्ता है. जो कुछ भी मैंने आज तक कामकला के बारे में सीखा है वो सब नैना की देन है. यह नैना ही थी जिसने मुझमें मौजूद असाधारण काम शक्ति को पहचान लिया था शुरू से ही और उसको ठीक रास्ते पर ले कर गई, अब तक वरना अगर वो ना होती तो हो सकता है मैं बहुत ही गलत रास्ते पर चल पड़ा होता. इस लिए हमेश से नैना का बहुत अधिक ऋणी हूँ और आगे चल कर भी रहूंगा. धन्यवाद आप दोनों ने मेरी कहानी का एक छिपा हुआ अध्याय सुना और मैं यह उम्मीद करता हूँ कि आप इस को केवल अपने तक ही रखेंगे.

नैना ने अपनी आँखें पौंछते हुए दोनों से कहा- चलो शुरू हो जाओ चुदाने वाली कन्याओं. उतारो अपनी धोतियाँ और ब्लाउज पेटीकोट.मैं बोला- पर्बती के कपड़े मैं उतारूंगा क्यूंकि नई लड़की या फिर औरत का चीरहरण मैं स्वयं ही करता हूँ! इधर आओ पर्बती.

और जब वो मेरे पास आ गई तो मैंने पहले उसकी साड़ी को उतार दिया और फिर उसका ब्लाउज, और फिर उसका पेटीकोट भी निकाल दिया. और फिर मैं थोड़ा पीछे हट कर उसकी जिस्मानी ख़ूबसूरती को देखने लगा जो वाकयी में ही बड़ी सुंदर थी. उसके मुम्मे बड़े गोल और सॉलिड और सांवले थे लेकिन मक्खन की तरह मुलायम थे और इसी तरह ही उसकी जांघें भी गोल और मुलायम थी.उसकी चूत पर छाई काली घटायें बड़ी ही आकर्षक लग रही थी, कुल मिला कर वो एकदम सेक्स का मजस्मा लग रही थी.

उधर देखा तो निम्मो और उसकी बहन नैना दोनों नंगी खड़ी थी और दोनों भी अपने स्टाइल में काफी सेक्सी लग रही थी.मैंने पर्बती को कहा- मेरे भी कपड़े उतारो न कोई?तब पर्बती आगे बढ़ कर मेरे कपड़े भी उतारने लगी, पहले कुरता, फिर पयजामा उतार दिया और उसके बाद मेरे अंडरवियर तक जब पहुँची तो नैना और निम्मो दोनों एकदम रुक गई और मेरे कच्छा उतारने का नाटक देखने लगी.

पर्बती का चेहरा मेरे लंड की सीध में ही था, जैसे ही उसने कच्छे को नीचे की तरफ खींचा तो मेरा नाग की तरह लंड उछल कर सीधा उसके मुंह पर लगा और वो हतप्रभ हुई पीछे गिर गई.दोनों औरतों इतने ज़ोर से हंस दी कि मुझको लगा ज़रूर यह आवाज़ मम्मी के कमरे तक पहुँच गई होगी.मैंने पर्बती को उठाते हुए कहा- पर्बती कहीं चोट तो नहीं लगी न?

अब वो सारी शरारत समझ गई थी तो ज़बरदस्ती मुस्कराने की कोशिश करते हुए बोली- कल तो नैना के साथ ऐसा नहीं हुआ था?नैना और निम्मो बोली- हमारे साथ भी यह हो चुका है लेकिन अब हम इस लंड लाल की काली करतूत समझते हैं तो छोटे मालिक का कच्छा बड़े ध्यान से उतारती हैं.
 
मैंने पर्बती को अपने गले लगाया और उसके होटों पर एक ज़बरदस्त चुम्मी की और उसके गोल और सॉलिड मुम्मों को चूसने लगा, एक ऊँगली उसकी चूत में डाल कर उसकी भग को रगड़ने लगा.पर्बती ने भी मेरा लंड अपने हाथों में पकड़ लिया, उससे खेलने लगी.

उसकी चूत अभी इतनी गीली नहीं हुई थी, मैंने उसको बिस्तर पर लिटा दिया और उसकी जांघों में बैठ कर उसकी चूत को चूसने लगा. जैसे ही मैंने उसकी चूत में मुंह लगाया तो वो एकदम से बिदक उठी और अपने हाथों से मेरे सर को हटाने लगी.मैंने पूछा- क्या हुआ पर्बती?पर्बती बोली- यह आप क्या कर रहे हो छोटे मालिक? यहाँ क्यों मुंह लगा रहे हो?

मैं हैरान हो गया और फिर पूछा- क्यों पर्बती, क्या तुम्हारी चूत में किसी ने मुंह से नहीं किया कुछ भी?पर्बती बोली- नहीं छोटे मालिक, यह तो गन्दी चीज़ है ना, यहाँ कभी मुंह नहीं डालते!नैना जो सब देख रही थी बोली- देख पर्बती, मैं भी तो निम्मो की चूत को चाट रही हूँ ना? यहाँ चाटने से हम औरतों को बड़ा मज़ा आता है. तू एक बार अपनी चूत को चटवा तो सही और मुंह से करवा तो सही ना छोटे मालिक से?

अब पर्बती ने अपनी टांगें फैला दी और मैं फिर से उसकी जाँघों में बैठ कर उसकी चूत को मुंह से चाटने लगा.जैसे ही उसकी चूत पर मुंह रखा तो पर्बती के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और जैसे ही मैंने उसकी भग को चूसना शुरू किया, उसकी कमर ऊपर को मेरे मुंह से जुड़ गई, मैंने तब उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर उसकी भग को पूरी तरह से चूसना शुरू किया. तब उसका एक हाथ मेरे बालों में उनको पकड़ कर और ऊपर खींचने लगा.

कुछ मिनटों में पर्बती का भग चुसाई में पानी ज़ोर से झड़ गया और उसकी जाँघों ने मेरे सर को पूरी तरह से कैद कर दियाअब मैंने अपना मुंह उठाया, सीधा उसके खुले हुए होटों पर रख दिया, उसके होटों को चूसने लगा और नीचे से मैंने अपने लंड को चूत के मुंह के ऊपर रख कर एक हल्का सा धक्का मारा और लंड फ़च से अंदर चला गया, फिर मैं इत्मीनान से पर्बती को चोदने लगा.

उधर नैना अपनी बहन के साथ लेस्बो सेक्स में व्यस्त थी और दोंनो एक दूसरे से गुत्थम गुत्था हो रही थी.अब पर्बती के दोनों बाहें मेरे गले का हार बनी हुई थी और उसकी कमर मेरे धक्कों का पूरा जवाब दे रही थी. उसकी चूत बहुत ही टाइट थी और उसकी पकड़ भी काफी जानदार थी, ऐसा लगता था कि वो बहुत ही कम चुदी हुई चूत थी.

अब मैं उसके चेहरे पर आने वाले भावों से साफ़ देख रहा था कि वो चुदाई को काफी एन्जॉय कर रही थी और काफी आनंदित हो रही थी.कोई 10 मिन्ट की चुदाई के बाद पर्बती एकदम पगला सी गई और अपने सर को इधर उधर मारने लगी और मुझको एकदम अपने से चिपका लिया और फिर उसकी चूत से सहस्रधारा बह निकली.

पर्बती की आँखें बंद थी और सांसें ज़ोर ज़ोर से चल रही थी और हम दोनों दो शरीर एक जान हो गए थे, नैना और निम्मो हम दोनों को आँखें फाड़ कर देख रहीं थी.जब पर्बती कुछ संयत हुई तो उसने मुझको अपनी कैद से छोड़ा और मैं उठ कर नैना के पास आकर खड़ा हो गया.निम्मो भी अपनी ऊँगली चूत में डाले हुए यह सारा गरम नज़ारा देख रही थी.

अब नैना पर्बती के पास गई और उससे पूछा- क्यों री पर्बती, कितने अरसे से नहीं चुदी तू?पर्बती की आँखों से जल की धारा बह चली, उसने रोते हुए ही बताया कि जब से उसका पति उसको छोड़ कर नाचने वाली के साथ भागा, तब से उसने कभी भी चुदाई नही की. उसको भागे हुए अब 3 साल हो गए थे.

नैना और निम्मो हैरान हो कर बोली- साली, तू 3 साल से नहीं चुदी और छोटे मालिक से कल तो ऐसे भाग रही थी जैसे कि तुझको लण्डों की लाइन लगी है. यह तो शुक्र कर, छोटे मालिक ने तुझको माफ़ कर दिया वरना आज भी तू आधी अधूरी ही रहती.

अब मैंने निम्मो को पकड़ा, उसको थोड़ी देर चूमा चाटी के बाद उसको घोड़ी बना कर चोदना शुरू कर दिया. थोड़े समय में ही वो परास्त हो गई और फिर आई नैना की बारी जिस को चोदना एक रोज़ का नियम सा बन गया था जैसे कि अक्सर मियां बीवी में होता है.बाकी की रात पर्बती और निम्मो को दो दो बार चोदा और उसके बाद हम एक ही पलंग पर घोड़े बेच कर सो गए.

कहानी जारी रहेगी.
 
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