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मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था। लगता है अब मंजिल बस दो कदम दूर रह गई है। सच कहूं तो इस समय मेरी हालत यह थी कि जैसे मुझे कैरूँ का खजाना ही मिलने जा रहा है और अब उत्तेजना और रोमांच में मुझे इस खजाने को कैसे संभालना है? कुछ सूझ ही नहीं रहा था। एक बात की मुझे और हैरानी हो रही थी? अभी तक मेरा पप्पू बिलकुल अटेंशन की मुद्रा में सलाम बजा रहा था पर अचानक वह कुछ ढीला सा पड़ गया था। कहीं आज भी उसकी मनसा धोखा देने की तो नहीं है?
हे लिंग देव! गच्छामी तव शरणम्!!!
थोड़ी देर में कामिनी दो कटोरियों में शहद और कच्चा दूध और एक प्लेट में गुलाब और नीम की पत्तियाँ डालकर ले आई।
“कामिनी बाथरूम में चलते हैं यहाँ सोफे पर शहद वगेरह गिर गया तो गंदा हो जाएगा और फिर मधुर तुम्हें डांटेगी.”
“हओ” कामिनी ने मरियल सी आवाज में कहा।
कामिनी अपनी मुंडी झुकाए मेरे पीछे पीछे ऐसे चल रही थी जैसे जिबह होने के समय कोई जानवर चलता है।
और फिर हम दोनों बेडरूम में बने बाथरूम में आ गए। मैंने बाथरूम की लाइट जला दी और पंखा और एग्जॉस्ट फैन भी चला दिया। कामिनी ने दोनों कटोरियाँ और प्लेट वाशिंग मशीन पर रख दी।
“कामिनी! देखो तुम मेरी प्यारी शिष्या हो। मैं यह सब केवल तुम्हारे हित के लिए ही कर रहा हूँ। मेरे मन में किंचित मात्र भी यह भावना नहीं है कि मैं तुम्हारा कोई नाजायज फायदा उठा रहा हूँ और ना ही मेरी मनसा और नियत में कोई खोट है। मैं तुम्हारे साथ कोई भी छल-कपट या फरेब जैसा कुछ नहीं कर रहा हूँ और ना ही कोई शोषण कर रहा हूँ। मैं जो भी कुछ कर रहा हूँ सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी बेहतरी और भलाई के लिए कर रहा हूँ। और हाँ… एक और बात है.”
“त्या?”
“देखो गुरु और डॉक्टर के सामने कोई शर्म नहीं की जाती। इस समय तुम मेरे लिए केवल एक मरीज हो और मेरा फ़र्ज़ है कि मैं अपनी प्रिय शिष्या की हर संभव सहायता करूँ ताकि तुम्हें इन मुंहासों से छुटकारा मिल जाए। अब तुम्हें भी अपने इस मर्ज़ (मुंहासों की बीमारी) के लिए कुछ त्याग और तपस्या तो करनी ही होगी। अपने भले के लिए और मर्ज़ को ठीक करने के लिए कई बार ना चाहते हुए भी शर्म छोड़कर कड़वी दवा पीनी पड़ती है। और तुम तो जानती हो कुछ पाने के लिए कुछ त्याग भी करना पड़ता है। तुम समझ रही हो ना?”
“हओ” कामिनी ने मिमियाते हुए कहा।
मैं कामिनी की मन:स्थिति अच्छी तरह समझ रहा था। इस समय वह एक दोराहे पर खड़ी थी। एक तरफ उसकी नारी सुलभ लज्जा एवं उसके संस्कार और दूसरी तरफ उसके चहरे के खराब हो जाने का भय। वह अंतिम फैसला लेने में कुछ हिचकिचा सी रही थी।
एक पल के लिए मेरे मन में यह ख्याल जरूर आया कि मैं कहीं इस मासूम का शोषण तो नहीं कर रहा? कहीं इसके साथ यह ज्यादाती तो नहीं है? पर दूसरे ही पल मेरा यह ख्याल जेहन से गायब हो गया। अब मेरा जाल इतना पुख्ता था कि अब किसी भी प्रकार से उसमें से निकल पाना कामिनी के मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था।
“कामिनी अगर अब भी तुम्हें लगता है कि यह तुमसे नहीं हो पायेगा तो कोई बात नहीं … तुम्हारी मर्ज़ी!” मैंने अपना ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था अब वो चिर-प्रतीक्षित लम्हा आने वाला था जिसका इंतज़ार मैं पिछले एक महीने से कर रहा था।
“थीत है आप बताओ त्या तरना है?”
“कामिनी कुछ भी करने से पहले तुम्हें मुझे एक वचन देना होगा?”
“त्या?”
“तुम्हें अब शर्म बिलकुल नहीं करनी है और जैसा मैं कहूं तुम्हें करना है.”
“हओ… थीत है।”
“सबसे पहले तो तुम हाथ जोड़कर भगवान जी से या मातारानी से यह प्रार्थना करो कि इस दवाई से तुम्हारे मुंहासे जल्दी से जल्दी ख़त्म हो जाएँ।”
कामिनी ने मेरे कहे मुताबिक़ हाथ जोड़कर प्रार्थना की। मैंने भी हाथ जोड़कर प्रार्थना करने का सफल अभिनय किया। एक बात आपको बता दूं ज्यादातर हम भारतीय लोग धर्मभीरु होते हैं और किसी बात पर अगर धर्म या भगवान् का मुलम्मा (चासनी) चढ़ा दिया जाए तो सब कुछ आसानी से किया और करवाया जा सकता है।
प्यारे पाठको और पाठिकाओ! आपके दिलों की धड़कनें भी अब बढ़ गयी हैं ना? आप सोच रहे होंगे कि यार प्रेम क्यों अपना बेहूदा ज्ञान बखार कर हमारे लंडों और चूतों को तड़फा रहे हो? जाल में फंसी इस कबूतरी को अब हलाल कर दो। ठोक दो साली को।
चलो आपकी राय सिर माथे पर, आज मैं आपकी बात मान लेता हूँ…
“कामिनी मुझे भी थोड़ी शर्म तो आ रही है पर अपनी प्रिय शिष्या की परेशानी के लिए मुझे अपनी शर्म पर काबू करना ही होगा।” मेरे ऐसा कहने पर कामिनी ने मेरी ओर देखा।
उसकी साँसें बहुत तेज चल रही थी। इतने खुशनुमा मौसम में भी उसके माथे और कनपटी पर हल्की हल्की पसीने की बूँदें झलकने लगी थी।
“देखो, मैं अपना निक्कर उतारता हूँ। तुम्हें मेरे लिंग को पकड़कर बस थोड़ी देर हिलाना है और उसके बाद उसमें से वीर्य निकलने लगेगा। तुम्हें थोड़ी जल्दी करनी होगी, वीर्य नीचे नहीं गिरना चाहिए तुरंत कटोरी में डाल लेना। वीर्य ताज़ा हो तो जल्दी असर करता है। समझ रही हो ना?”
कामिनी ने अपनी मुंडी झुकाए हुए सुस्त आवाज में ‘हओ’ कहा।
मैंने अपने बरमूडा (निक्कर) का नाड़ा खोल दिया। पप्पू महाराज जो अब तक सुस्त पड़ा था अब थोड़ा कसमसाने लगा है। अभी तो इसकी लम्बाई केवल 3-4 इंच ही लग रही है। पूर्ण उत्तेजित अवस्था में तो यह लगभग 7 इंच के आस पास हो जाता है। हे लिंग देव तेरा शुक्र है अभी इस पर अभी पूरा जलाल नहीं आया है वरना कामिनी इसे देख कर डर ही जाती और हो सकता है अपना इरादा ही बदल लेती।
हे लिंग देव! गच्छामी तव शरणम्!!!
थोड़ी देर में कामिनी दो कटोरियों में शहद और कच्चा दूध और एक प्लेट में गुलाब और नीम की पत्तियाँ डालकर ले आई।
“कामिनी बाथरूम में चलते हैं यहाँ सोफे पर शहद वगेरह गिर गया तो गंदा हो जाएगा और फिर मधुर तुम्हें डांटेगी.”
“हओ” कामिनी ने मरियल सी आवाज में कहा।
कामिनी अपनी मुंडी झुकाए मेरे पीछे पीछे ऐसे चल रही थी जैसे जिबह होने के समय कोई जानवर चलता है।
और फिर हम दोनों बेडरूम में बने बाथरूम में आ गए। मैंने बाथरूम की लाइट जला दी और पंखा और एग्जॉस्ट फैन भी चला दिया। कामिनी ने दोनों कटोरियाँ और प्लेट वाशिंग मशीन पर रख दी।
“कामिनी! देखो तुम मेरी प्यारी शिष्या हो। मैं यह सब केवल तुम्हारे हित के लिए ही कर रहा हूँ। मेरे मन में किंचित मात्र भी यह भावना नहीं है कि मैं तुम्हारा कोई नाजायज फायदा उठा रहा हूँ और ना ही मेरी मनसा और नियत में कोई खोट है। मैं तुम्हारे साथ कोई भी छल-कपट या फरेब जैसा कुछ नहीं कर रहा हूँ और ना ही कोई शोषण कर रहा हूँ। मैं जो भी कुछ कर रहा हूँ सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी बेहतरी और भलाई के लिए कर रहा हूँ। और हाँ… एक और बात है.”
“त्या?”
“देखो गुरु और डॉक्टर के सामने कोई शर्म नहीं की जाती। इस समय तुम मेरे लिए केवल एक मरीज हो और मेरा फ़र्ज़ है कि मैं अपनी प्रिय शिष्या की हर संभव सहायता करूँ ताकि तुम्हें इन मुंहासों से छुटकारा मिल जाए। अब तुम्हें भी अपने इस मर्ज़ (मुंहासों की बीमारी) के लिए कुछ त्याग और तपस्या तो करनी ही होगी। अपने भले के लिए और मर्ज़ को ठीक करने के लिए कई बार ना चाहते हुए भी शर्म छोड़कर कड़वी दवा पीनी पड़ती है। और तुम तो जानती हो कुछ पाने के लिए कुछ त्याग भी करना पड़ता है। तुम समझ रही हो ना?”
“हओ” कामिनी ने मिमियाते हुए कहा।
मैं कामिनी की मन:स्थिति अच्छी तरह समझ रहा था। इस समय वह एक दोराहे पर खड़ी थी। एक तरफ उसकी नारी सुलभ लज्जा एवं उसके संस्कार और दूसरी तरफ उसके चहरे के खराब हो जाने का भय। वह अंतिम फैसला लेने में कुछ हिचकिचा सी रही थी।
एक पल के लिए मेरे मन में यह ख्याल जरूर आया कि मैं कहीं इस मासूम का शोषण तो नहीं कर रहा? कहीं इसके साथ यह ज्यादाती तो नहीं है? पर दूसरे ही पल मेरा यह ख्याल जेहन से गायब हो गया। अब मेरा जाल इतना पुख्ता था कि अब किसी भी प्रकार से उसमें से निकल पाना कामिनी के मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था।
“कामिनी अगर अब भी तुम्हें लगता है कि यह तुमसे नहीं हो पायेगा तो कोई बात नहीं … तुम्हारी मर्ज़ी!” मैंने अपना ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था अब वो चिर-प्रतीक्षित लम्हा आने वाला था जिसका इंतज़ार मैं पिछले एक महीने से कर रहा था।
“थीत है आप बताओ त्या तरना है?”
“कामिनी कुछ भी करने से पहले तुम्हें मुझे एक वचन देना होगा?”
“त्या?”
“तुम्हें अब शर्म बिलकुल नहीं करनी है और जैसा मैं कहूं तुम्हें करना है.”
“हओ… थीत है।”
“सबसे पहले तो तुम हाथ जोड़कर भगवान जी से या मातारानी से यह प्रार्थना करो कि इस दवाई से तुम्हारे मुंहासे जल्दी से जल्दी ख़त्म हो जाएँ।”
कामिनी ने मेरे कहे मुताबिक़ हाथ जोड़कर प्रार्थना की। मैंने भी हाथ जोड़कर प्रार्थना करने का सफल अभिनय किया। एक बात आपको बता दूं ज्यादातर हम भारतीय लोग धर्मभीरु होते हैं और किसी बात पर अगर धर्म या भगवान् का मुलम्मा (चासनी) चढ़ा दिया जाए तो सब कुछ आसानी से किया और करवाया जा सकता है।
प्यारे पाठको और पाठिकाओ! आपके दिलों की धड़कनें भी अब बढ़ गयी हैं ना? आप सोच रहे होंगे कि यार प्रेम क्यों अपना बेहूदा ज्ञान बखार कर हमारे लंडों और चूतों को तड़फा रहे हो? जाल में फंसी इस कबूतरी को अब हलाल कर दो। ठोक दो साली को।
चलो आपकी राय सिर माथे पर, आज मैं आपकी बात मान लेता हूँ…
“कामिनी मुझे भी थोड़ी शर्म तो आ रही है पर अपनी प्रिय शिष्या की परेशानी के लिए मुझे अपनी शर्म पर काबू करना ही होगा।” मेरे ऐसा कहने पर कामिनी ने मेरी ओर देखा।
उसकी साँसें बहुत तेज चल रही थी। इतने खुशनुमा मौसम में भी उसके माथे और कनपटी पर हल्की हल्की पसीने की बूँदें झलकने लगी थी।
“देखो, मैं अपना निक्कर उतारता हूँ। तुम्हें मेरे लिंग को पकड़कर बस थोड़ी देर हिलाना है और उसके बाद उसमें से वीर्य निकलने लगेगा। तुम्हें थोड़ी जल्दी करनी होगी, वीर्य नीचे नहीं गिरना चाहिए तुरंत कटोरी में डाल लेना। वीर्य ताज़ा हो तो जल्दी असर करता है। समझ रही हो ना?”
कामिनी ने अपनी मुंडी झुकाए हुए सुस्त आवाज में ‘हओ’ कहा।
मैंने अपने बरमूडा (निक्कर) का नाड़ा खोल दिया। पप्पू महाराज जो अब तक सुस्त पड़ा था अब थोड़ा कसमसाने लगा है। अभी तो इसकी लम्बाई केवल 3-4 इंच ही लग रही है। पूर्ण उत्तेजित अवस्था में तो यह लगभग 7 इंच के आस पास हो जाता है। हे लिंग देव तेरा शुक्र है अभी इस पर अभी पूरा जलाल नहीं आया है वरना कामिनी इसे देख कर डर ही जाती और हो सकता है अपना इरादा ही बदल लेती।