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Adultery वासना की मारी औरत की दबी हुई वासना

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औरत और मर्द के रिश्ते के बारे में रोहित और अनिल आपस में कुछ भी नहीं छुपाते थे रोहित अनिल को अपने सारे अफेयर्स के बारे में बताता था और यही हाल अनिल का था वो भी अपने सेक्स एडवेंचर रोहित के साथ शेयर करते थे | अनिल ने ही टूटे दिल के रोहित को love गुरु बनकर सारा ज्ञान दिया था | रोहित ने रीमा का अनुभव भी अनिल के साथ शेयर किया था | हर मर्द की तरह रीमा अनिल की नजरो में भी चढ़ी हुई थी | अनिल को रोहित और रीमा में रिश्ते में कोई आपत्ति नहीं थी हालांकि वह खुद रीमा की खूबसूरती के दीवाने थे और अपने रिश्ते में बंधे हुए वह बहुत ज्यादा कुछ कर नहीं सकते थे | रीमा और प्रियम के बीच की कहानी किसी को नहीं पता थी और रोहित भी प्रियम को लेकर बहुत सेंसिटिव था | अनिल रीमा और प्रियम के बीच क्या है इसके बारे में लगभग न के बराबर जानते थे इसलिए आज अनिल को थोड़ा सा अचरज हुआ | जिस तरह से रीमा आई और फिर चली गई | अनिल को इससे कुछ ज्यादा लेना देना नहीं था वह तो बस महीने भर के मेहमान थे | रीमा और रोहित और प्रियम के बीच में क्या खिचड़ी पक रही है इससे मतलब भी नहीं था लेकिन फिर भी अनिल की अनुभवी आंखों और उनके ढेर सारे जीवन के एक्सपीरियंस ने कहा कि कुछ न कुछ तो गड़बड़ है | इसलिए उनके दिमाग खुराफाती घोड़े दौड़ने लगे और उनके जासूसी दिमाग में एक कीड़ा कुलबुलाने लगा आखिर पता किया जाय की माजरा क्या है | एक मन कहता कुछ गड़बड़ है दूसरा मन कहता की मिस्टर अनिल आप जरुरत से ज्यादा सोच रहे है | रोहिणी ने उन्हें कही खोया हुआ देख पुछा, कहाँ गुम हो गए | वो बस मुस्कुरा भर दिए | असल में उनके लिए न तो रोहित पहेली था न ही प्रियम और सच में गारा दिल पर हाथ रखकर खुद से पूछते तो वो खुद का ही चुतिया काट रहे थे | उनके दिलो दिम्माग में बस एक ही पहेली थी रीमा | वो उसे सुलझाना चाहते थे | बाकि सारे बहाने उनका मन उन्हें भटकाने बहलाने की लिएय कर रहा था | उनको सारी दिलचस्पी रीमा के बारे में जानने की थी जब से रोहित ने अपना रीमा की चुदाई का किस्सा उन्हें बताया था, उनके मन के किसी कोने में लगातार रीमा को लेकर खलबली मची रहती | अब तक तो वो सब विचारो तक सिमित था लेकिन साक्षात्उ रीमा को देखने के बाद उनकी वो इक्षा अब बलवती हो उठी | खूबसूरत स्त्री का सानिध्य पाने के सहज मानुष की लालसा | वह रीमा की खूबसूरती के दीवाने थे जाहिर सी बात है हर मर्द का सपना होता है कि वह हर एक खूबसूरत औरत के पास बैठे से बात करें और अगर हो सके तो बात को आगे बढ़ाएं रीमा भी एक इसी तरह की खूबसूरत औरत थी | रीमा अनिल की सबसे डार्क छुपी हुई एक फैंटसी में से एक थी इसलिए उन्होंने रीमा के बारे में ढेर से ढेर सारी जानकारी जानने के बारे में फैसला कर लिया था | उन्हें पता था रीमा का एटीट्यूड उसका बात करने का तरीका काफी कुछ पिछली बार से अलग अलग था | उनकी रीमा की बेहत प्राइवेट जिंदगी के बारे ज्यादा से ज्यादा जानने की उत्सुकता और बढ़ गयी |

फिर भी सच तो यही था की किसी के चाहने से क्या होता है | अनिल रीमा से बात करना चाहते थे उसके साथ बैठना चाहते थे उसके साथ ड्रिंक शेयर करना चाहते थे, उसको छूना चाहते थे उससे चिपकना चाहते थे और असल में जो सच उनका मन स्वीकार नहीं कर पा रहा था वो ये था की वो रीमा को चोदना चाहते थे | उनके मन की असली कामना यही थी बाकि सब लफ्फाजी थी | जीजा जी को लेकर रीमा काफी मजाकिया थी लेकिन उनसे मजाक भी वह अपने दायरे में रहकर ही करती थी इसीलिए कभी अनिल को अपनी बात आगे बढ़ाने का मौका नहीं मिला और दूसरे अभी बीवी और बच्चे सब आए हुए थे तो अनिल के लिए रीमा के साथ अकेले बैठाना लगभग नामुनकिन था |

एक हफ्ता ऐसे बीत गया जैसे कुछ हुआ ही न हो | रीमा रोहित को यहाँ के अपडेट देती रहती थी | उधर राजू और जग्गू की जिंदगी में तूफान मचा हुआ था रह-रह कर उन्हें हर वह बात का कचोटती जो रीमा ने उनके साथ करी थी हालांकि इसके साथ ही यह भी सच था की उनको जिंदगी भर के लिए एक सबक मिल गया था | लेकिन एक औरत द्वारा इस तरह से सबक सिखाया जाना उनके अपने मर्द होने के अहंकार को चुनौती दे रहा था | कच्ची मुर का किशोर मन इन सब चीजों को हैंडल कर पाने में असमर्थ था अगले दिन सुबह जब जग्गू के बाप ने जग्गू से पूछताछ की तो जग्गू ने सब कुछ सच सच बोल दिया पहले तो जग्गू के बाप को उस पर बहुत गुस्सा आया लेकिन उसके बाद रीमा को ले करके उसके अंदर बदले की भावना कर गई क्योंकि रीमा ने उसके बच्चे को तोड़ कर रख दिया था | जग्गू का बाप पहले भी रीमा को देखकर लार टपकाने लगता था ,रीमा उसकी ढेर सारी सेक्स फैंटसी में से एक थी | हालांकि वह अलग बात है रीमा ने उसे कभी घास नहीं डाली | जग्गू के बाप के अंदर रीमा को पाने की एक लालसा तो थी ही दूसरे अब उसके पास एक मकसद भी था रीमा को सबक सिखाने का क्योंकि उसने उनके बेटे की जिंदगी को बर्बाद कर दिया था |अब जग्गू काफी डरा डरा सा रहने लगा था, सहमा सहमा सा रहने लगा | लडकियों के पास जाने से डरने लगा | वो बस गुमसुम सा अपने में ही खोया रहता | अपने बेटे के व्यवहार में आए इस परिवर्तन को लेकर के जग्गू का बाप काफी परेशान था उसने गुस्से में कोई उल्टा सीधा कदम उठने की बजाय शांत रहकर रीमा को सबक सिखाने का फैसला किया लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था | वो सीधे सीधे रीमा पर हाथ नहीं डाल सकता था | रीमा अपनी जिंदगी में भले ही अकेली हो लेकिन उसके आसपास के लोग बहुत ताकतवर थे | उसके स्वर्गीय पति के दोस्त पुलिस में बहुत ही पावरफुल पोजीशन में थे | रीमा के एक फ़ोन काल पर वो शहर का कोना कोना खोद डालेगे | जग्गू के बाप को कुछ समझ नहीं आ रहा था ...... वह क्या करें कैसे रीमा को सबक सिखाएं वह अपने बेटे के साथ किए गए हरकतों का बदला लेना चाहता था यही सोचते-सोचते समय पंख लगाकर उड़ता हुआ निकलता जा रहा था |

इधर अनिल रीमा को पाना भी चाहते थे लेकिन रिश्तो की नाजुक डोर पर कोई आंच न आये इसका भी पूरा ख्याल था | एक दिन पत्नी से बोले - रोहिणी इतने दिन हो गए है आजतक हमने रीमा का घर नहीं देखा | चले किसी दिन उसके यहाँ डिन्नर करने | बच्चो के अपने प्लान थे घूमने फिरने के इसलिए बस पति पत्नी दोनों ही सज धज के रीमा के मेहमान बनने चल दिए |

रीमा ने उन दोनों को अपने घर आया देख थोड़ा सा हैरान हुई और खुस भी |

रोहिणी - सरप्राइज, हमने सोचा आज बिना बताये मेहमान बनते है |

रीमा खिलखिलाते हुए - आई लव सरप्राइज दीदी | प्लीज आइये न आपका ही तो घर है |

रीमा ने दोनों की खूब आव भगत की | चाय नाश्ते से लेकर शराब का एक लम्बा दौर चला | रोहिणी जानती थी रीमा कभीकभार ड्रिंक ले लेती है लेकिन अनिल के लिए ये सरप्राइज था | बीबी के सामने अनिल काफी संजीदा बनने की कोशिश कर रहे थे जबकि रीमा रोहिणी आपस में खुलकर हंसी मजाक कर रही थी | शराब का दौर चले और जिंदगी में प्राइवेट पलो की बाते न हो, ऐसा भला हो सकता था |

रीमा और रोहिणी शादी के पहले की हरकतों और शैतानियों को एक दुसरे को बता रहे थे | अभी तक रीमा के दिम्माग में अनिल को लेकर कुछ भी नहीं था | इसलिए वो स्वाभाविक सहज रूप से रोहिणी के साथ हंसी मजाक कर रही थी |

रोहिणी अपने कॉलेज का किस्सा सुनाने लगी जब एक लड़के ने उसे प्रोपोज किया था और उसने मना कर दिया था | फिर वो लड़का उसके पीछे हाथ धोकर पड़ गया, आखिर एक दिन रोहिणी ने उसको हाँ बोल दी | लेकिन वो लड़का एक नंबर का चुतिया निकला, रोहिणी के हाँ बोलते ही उसने रोहिणी की चूत मारने के लिए मिन्नतें करने लगा | उसकी इन्ही हरकतों की वजह से रोहिणी ने अपनी सहेली के साथ सबक सिखाने की सोची | उसे बहला फुसलाकर फीमेल टॉयलेट में ले गयी, उसके कपड़े उतारे और एक किनारे फेंक दिए | उसके लंड को सहलाने लगी, वो बस मस्ती में चूर हो कर झूमने लगा | उसकी सहेली ने मौका देखते ही उसके कपड़े समेटे और बाहर आ गयी | मौका देखकर पी करने के बहाने रोहिणी जल्दी से उठी और अपना बैग उठाकर बाथरूम से बाहर निकल आई और शोर मचा दिया | लेडिज बाथरूम में एक नंगा लड़का, पूरी तरह से तने हुए लंड के साथ, उसके बाद उसकी जो धुनाई हुई जो सुताई हुई | फिर कभी उसने मुड़कर भी रोहिणी की तरफ नहीं देखा |

तीनो मतलब की शराब पी चुके थे | रोहिणी की जिंदगी में रीमा की दिलचस्पी बढ़ती जा रही थी |

दीदी बताइए न अपने बारे में - मुझे बहुत मजा आ रहा है आपकी बाते सुनकर |

अनिल ने सोचा यही मौका है चौका मार दिया जाये - कुछ अपने बारे में बतावो न रीमा | तुमने भी तो कॉलेज में बहुत एडवेंचर किये होंगे | यू नो व्हाट इ मीन |

रीमा अन्दर से सतर्क हो गयी कही रोहित के बारे में उसके मुहँ से कुछ न निकल जाये फिर अगले ही पल संभलकर उसी लापरवाह अंदाज में बोली - क्या बताऊ जीजा जी , करेले नीम जैसी जिंदगी है, कुछ बताने को है ही नहीं | पहले पढाई में उलझी रही फिर शादी और उसके बाद की ये लम्बी विधवा जिंदगी | इसमें कोई रंग नहीं है, बस जी रही हूँ |

रीमा ने एक पल में अपने तरफ उछलने वाले हर सवाल को ख़त्म कर दिया | अनिल और रोहिणी दोनों ही उसके चेहरे पर छाई बर्फीली उदासी देखने लगे | उसको देखकर रीमा अगले ही पल ही अपनी उदासी छोड़ती हुई - दीदी आगे बतावो न, कहाँ इतने दिनों बाद मिले है | आज आप मेरे मेहमान है आज तो आपको मेरी बात माननी पड़ेगी | बतावो न दीदी | अच्छा जीजा जी से सबसे पहली बार कब मिली |

रोहिणी - जीजा जी से पहले दो बॉयफ्रेंड रह चुके थे मेरे |

रीमा की दिलचस्पी बढ़ गयी - फिर क्या हुआ, कैसे मिली आप जीजा जी से |

रोहिणी - थम जा बावली बता रही हूँ सब बता रही हूँ | मेरा एक लड़के से 6 महीने से चला रहा रिलेशनशिप टूट चूका था | दूसरा बॉयफ्रेंड खोने के कारन बहुत परेशान और दुखी थी | मेरे इम्पुल्सिव नेचर के कारन कोई भी लड़का मुझे बर्दाश्त करने में असमर्थ था | उस टाइम मै खुद को किसी तोप से कम समझती नहीं थी | ऐसे ही एक दिन मै कॉलेज से घर आ रही थी, गेट पर पंहुचने पर देखा, एक आदमी मेरे घर की चाहरदीवारी के ऊपर पेशाब कर रहा है | मेरे पारा जमीं से सीधा आसमान पंहुच गया | वो अलग बात थी की बाद में मुझे महसूस हुआ की वो इन्सान मेरे चाहरदीवारी की बजाय उससे सटकर बह रही नाली में मूत रहा है | उस समय तो मुझे कुछ सुझा नहीं, ब्रेकअप से सदमे में थी | उसके पास जाते ही फट पड़ी | जमकर माँ बहन करी, वो आदमी जो इत्मिनान से हलका हो रहा था, उसका मूतना रुक गया | उसका मूत लंड में और थूक गले में अटक गया, मैंने उसे ऐसी झाड़ लगायी | वो इतना ज्यादा डर गया की अपना लम्बा काला लंड भी अपनी पतलून में घुसेड़ना भूल गया और माफ़ी मांगने लगा | मेरे तेज आवाज से लोग हमारी तरफ आना शुरू हो गए और वो आदमी सब कुछ भूलकर मुझसे माफ़ी मांगने में जुटा रहा | उसकी सिट्टी पिट्टी इस कदर गम थी की उसे याद ही नहीं उसका लम्बा काला मोटा सांप अपने बिल से बाहर झूल रहा है | आखिर हारकर मैंने ही बोला - इस काले नाग को दिखाकर किसको डराने की कोशिश कर रहा है | इससे तगड़े मोटे लम्बे काले नाग मैंने बहुत देखे है | तब जाकर इनका ध्यान नीचे पेंट की तरफ गया और फटाफट इन्होने अपने काले भुजंग को अपनी पतलून में समेटा | मेरा गुस्सा चरम पर था, आस पास भीड़ इकट्ठी हो चुकी थी | मै बस चिल्लाये जा रही थी |

तब तक अन्दर से डैड बाहर आ चुके थे - क्या हो गया बेटा |

मै गरजती हुई - ये आदमी अपनी दीवाल पर मूत रहा था मैंने मना किया तो बेशर्मी से अपना काला नाग मुझे दिखाने लगा |

इससे पहले कोई कुछ कहता ये बिलकुल समर्पण की मुद्रा में आ गए - बहन जी गलती हो गयी, मुझे बहुत तेज लगी थी और यहाँ कोई ओट नहीं थी इसलिए | इतना कहते ही बिना किसी के कुछ काहे उठक बैठक लगाने लगे | डैड अनुभवी आदमी थे, इनकी रोनी सूरत देख के ही समझ गए की लड़का गाय है बस गलती कर बैठा | वो भीड़ को समझाने बुझाने लगे ताकि कही कोई हाथ न उठा दे | धीरे धीरे करके मेरे डैड ने सबको वहां से भगाया और उस लड़के से जाने को भी बोलो दिया | मेरा गुस्सा अब काफी कम हो चूका था |

ये मरी हुई आवाज में बोले - अंकल जी अगर नजर न हो तो एक गिलास पानी पिला दीजिये, यहाँ दूर दूर तक कोई नल नहीं दिखाई दे रहा है | प्यास लगी है |

मुझे हंसी आ गयी, इतनी जोर से प्यास लगी है फिर भी अपनी टंकी खाली किये जा रहा है | ये सोचकर मुझसे रहा न गया, मेरे मुहँ से ठहाका छुट गया | मेरे डैड मुझे देखकर बोले - क्या हुआ तुझे, पागल है क्या लड़की, जाकर एक गिलास पानी ले आ |

मैंने साफ़ मना कर दिया | डैड उसे गेट पर खड़े रहने को बोलकर अन्दर चले गए और एक बोतल पानी लेकर बाहर आये | उसे पानी पिलाया और उसके बारे में पूछने लगे | मै अन्दर कमरे के दरवाजे ओंट में खादों सारी बाते सुनने लगी | रोहित बार बार मुझे परेशान करने आ जाता लेकिन मुझे उस मिमियाते काले भुजंग इंसान में न जाने क्यों दिलचस्पी पैदा हो गयी | कुछ देर बाद पता चला वो यहाँ कॉलेज में PG में एडमिशन लेने आया है | किसी गाँव का रहने वाला है और ग्रेजुएशन के बाद वहां आगे पढने के लिए कोई कॉलेज नहीं है | रोहित मुझे बार बार परेशान कर रहा था इसलिए ज्यादा बाते तो मै सुन नहीं पाई और रोहित की कुटाई करने उसके पीछे भागने लगी | डैड उससे काफी देर बात करते रहे | शाम को पता चला वो अपने कॉलेज का टापर है और आफ्टर ग्रेजुएशन की पढाई के लिए एडमिशन लेने आया है | उसका बैकग्राउंड कुछ खास नहीं था पिताजी थे नहीं माताजी छोटी सी जमीन पर सब्जी भाजी पैदा करके घर का खर्च चलाती थी |

एक महीने बाद मेरे उअप्र बम तब फटा जब डैड ने उसे ऊपर वाला कमरा रहने के लिए दे दिया और भी बिना एक पैसे लिए | उसके बाद एक लम्बे समय तक मै इनसे नफरत करती रही अपने अन्दर हिकारत भरती रही, इनके कपड़ो का मजाक, इनकी बोली का मजाक, इनके गरीब होने का मजाक उड़ाती रही और ये सब बर्दाश्त करते रहे | यही सब करते करते पता नहीं कब जाने इन्ही से प्यार हो गया |

अनिल बस पैग पर ध्यान लगाये थे और रीमा के जिस्म के कटाव घुमाव को आँखों से पीने की कोशिश कर रहे थे, रोहिणी यादो के समुद्र में खोयी थी और रीमा बस रोहिणी की यादो में खुद को डुबोने की कोशिश कर रही थी | एक और पैग ख़त्म हो चूका था | रीमा नयी बोतल निकालने के लिए उठी तो रोहिणी ने उसे थाम लिया - तू बैठ, जाइये आप बोतल निकाल कर लाइए और पैग बनाइये |

रीमा ने अपनी नशीली आँखों से रोहिणी की तरफ देखा और रोहिणी ने अपनी नशीली आँखों से रीमा को देखा | फिर दोनों ने अनिल को एक साथ देखा और नशे में झूमती खिलखिला कर हंस पड़ी | अनिल औरतो के इस विनोद से अन्दर तक गदगद होते हुए नयी बोतल निकालने चल दिए |

रीमा और रोहिणी को भरपूर नशा हो चूका था | अनिल के जाने के बाद रीमा को मस्ती सूझी - दीदी एक बात पूछु बताओगी |

रोहिणी - पूछ न |

रीमा - सच्ची मेरी कसम खावो |

रोहिणी - अरी पूछ तो सही |

रीमा - जीजा जी का सच में काले नाग के इतना मोटा है क्या ?

रोहिणी शरारती आँखों से - क्यों री, तुझे भी लेना है क्या |

रीमा सकपका गयी, रोहिणी खिलखिलाकर हंस पड़ी - हाहाहाहाहाहाहाहाहा तू डरती बहुत है, पता है क्यों, क्योंकि तूने कुछ किया नहीं है | मै तो मजाक कर रही थी |

रीमा के साँस में साँस आई - तो बतावो न दीदी |

रोहिणी आंखे मटकाते हुए - तुझे मेरे पति के उसमे बड़ी दिलचस्पी है..............|

रीमा ने भी ताड़ लिया की रोहिणी उसके मजे ले रही है उसने भी बनावटी नाराजी जाहिर की - इसलिए मै नही पूछ रही थी दीदी मुझे पता था आप मेरी ही टांग खिचोगी | मै तो बस ऐसे ही पूछ रही थी आप पता नहीं उसे कहाँ से खीचकर के मेरे ऊपर चिपकाये दे रही हो |

रोहिणी गंभीर होती हुई - अच्छा एक बात का जवाब दे, तुझे कैसा पसंद है, स्माल मीडियम या लाआआआआआआअरज |

जिस तरह से रोहिणी ने लार्ज को खीचा, रीमा भी रोहिणी के साथ खिलखिलाने लगी |

 
रीमा को लगा को इतना भी पर्दा क्या ठीक, जब दीदी इतना खुल गयी है तो मै क्यों खुद को लिहाज के बोरे में बंद रखु |

रीमा - दीदी अब आपके इतना तो एक्सपीरियंस है नहीं, मैंने तो ये भी सुना है आपने ही सारा काम ज्ञान जीजा को दिया है |

रोहिणी - तू जीतनी सीधी' दिखाती है उतनी है नहीं, मै कुछ और पूछ रही हूँ और तू जलेबी बनाकर मुझे ही गुमाए दे रही रही है, शैतान कंही की | सच सच बचा किस किस साइज़ के खा चुकी है मुई |

रीमा थोड़ा सा शरमाते हुए झेपते हुए - सारे |

रोहिणी अपने गालो पर हाथ रख कर मुहँ फैलाते हुए - हाय हाय मेरी कट्टो तुम तो छुपी रुस्तम निकली | मुझे पता था इतनी हसीन औरत ज्यादा दिन तक चूत की खुजली बर्दाश्त ही नहीं कर सकती |

रीमा मासूमियत से - क्या मै खूबसूरत हूँ दीदी |

रोहिणी - हाय मै मर जावा इस मासूमियत पे | अरे मेंरी कट्टो रानी तू बहुत खूबसूरत है, इतनी की मुझे डर है कही ये भी तेरे नाम की मुट्ठ न मारते हो |

रीमा - दीदी छी छी छी छी छी छी कैसी बाते करती है |

रोहिणी - मुझे तो ये भी लगता है ये हमरे खसम मौनी बाबा कही तुझे चोदने के सपने भी न देखते हो |

रीमा मुहँ बनाते हुए - दीदी छी छी छी छी छी छी बस करो दीदी, वरना सारा सारा नशा यही काफूर हो जायेगा | हाय हाय हाय आप ये सब कैसे सोच लेती हो |

रोहिणी फुल नशे में थी - जब 11 इंच मोटा लम्बा तगड़ा लंड एक झटके में निगल सकती हूँ तो क्या नहीं कर सकती |

अब चौकने की बारी रीमा की थी - हाय दईय्यिया इतना बड़ा है |

रोहिणी - चौंक गयी, बोल तुझे चखना हो तो बताना, ये तो अपने पालतू है जहाँ कह दूँगी वहां चाटना शुरू कर देगें |

रीमा सवालिया लहजे - क्या ???

रोहिणी - मर्द को क्या चाहिए ...............(थोड़ा रूककर एक दुसरे की आँखों में आंखे डालकर) बोल क्या चाहिए | फिर दोनों एक साथ बोल पड़ी - चूत | इसके बाद फिर से खिलखिलाकर हँसने लगी |

रोहिणी रीमा को छेड़ते हुए - बता करेगी ११ इंच के नागनाथ के दर्शन | सबके बस का नहीं होता ११ इंच का घोटना लेकिन मुझे पूरा यकीन है तू पूरा निगल जाएगी |

रीमा - ऊऊउफ़्फ़्फ़्फ़ दीदी अब छोड़ो भी न | आप तो बात को पकड़कर ही बैठ गयी |

रोहिणी - देख कट्टो तू है तो एक नंबर की हरामन, इत्ती देर में पहचान गयी हूँ, अब खुलकर बात कर न | दीदी बोलती है तो सच बता |

रीमा - क्या बताऊ |

रोहिणी - सबसे बड़ा अब तक कितना बड़ा घोंट चुकी है | शर्मा मत, ऐसे बता जैसे अपने बचपन की सहेली के साथ बैठी हो |

रीमा थोड़ी शर्माते हुए - अब क्या बताऊ दीदी, कोई इंची टेप लेकर तो नापता नहीं |

रोहिणी उत्साह से - कोई नहीं कोई नहीं, अंदाजा |

रीमा - सात आठ इंच या ज्यादा से ज्यादा 9 होगा |

रोहिणी - हाय मै वारी जावा तेरी मासूमियत पर, हरामन 9 इंच मोटा लंड घोट चुकी है और ऐसे जता रही है जैसे अभी सील भी न टूटी हो | सोच जब 9 इंच का घोट चुकी तो २ इंच और सही |

रीमा झुंझलाकर - दीदी |

रोहिणी - अरे इसमें परेशान होने की बात क्या है, देख एक ही जिंदगी है, जी भर के जी ले | अगर मन है तो घोट ले अपने जीजा का ११ इंची नागनाथ, मुझे कोई ऐतराज नहीं है |

रीमा - क्या बात कर रही है दीदी...................भला ऐसे कही होता है |

रोहिणी - देख पगली, मुझसे छुपकर कही इधर उधर मुहँ मरेगा और दुनिया भर की बीमारी लाकर मेरी चूत में घुसेड दे इससे तो अच्छा है की मेरा पति जिसको चोद रहा हो उसके बार एमे मुझे पहले से पता हो | एक साथ रहते रहते नीम करेले जैसी जिंदगी हो जाती है | कभी कभी टेस्ट बदलने में कोई हर्ज नहीं है | और अगर घर की बात घर में ही रहे तो इससे अच्छा क्या |

रीमा - दीदी आपको चढ़ गयी है |

रोहिणी - आदमी शराब पीने के बाद ही सच बोलता है | एक रात चोदने से कोई किसी से दूर नहीं जाता और न ही कोई और किसी के पास आ जाता है | हवस है भूख है , खावो पीवो और मिटावो, जहाँ बन पड़े जिससे बन पड़े | ये सब चीजे रिश्तो में नहीं घुसानी चाहिए थी | हवस का क्या है चाँद पलो की है और रिश्ते बरसो में बनते है | जिंदगी के बाद सबसे ज्यादा कदर रिश्तो की करनी चाहिए | बाकि ये लंड चूत का खेल तो चलता रहता है, इसके लिए ज्यादा दिल से नहीं सोचना चाहिए | अगर किसी को चोदने का मन हो या किसी से चुदने का मन हो तो बात वही निपटा देनी चाहिए |

रीमा समझ गयी थी रोहिणी अब फुल नशे में जा चुकी है |

रोहिणी काफी शराब पी चुकी थी, अनिल को पता था अगर बोतल ले गयी तो जब तक बोतल ख़त्म नहीं होगी रोहिणी नहीं मानेगी | इसलिए वो बस तीन गिलास में एक एक बड़ा पैग बनाकर लाये |

पैग आते ही रोहिणी और रीमा उस पर टूट पड़ी | और आधा गिलास एक साँस में ख़त्म कर दिया | रीमा के दिमाग में रोहिणी की बाते घूमने लगी | रीमा ने अनिल की तरफ देखा, उनको देखते ही वो ११ इंच लम्बा मोटा लंड इमेजिन करने लगी | रोहिणी ने तुरंत कोहनी रीमा को कोहनी मारी | रीमा कुछ समझी नहीं | रोहिणी ने झूमते हुए उसे अपनी बांहों में भरा और उसके कान में कुछ फूसफुसाया - वरी रीमा देख तेरे जीजा को दारू चढ़ गयी है कैसे अकड़ गया है |

 
बूढ़ा आदम - नहीं, जो शरीर दो परमाणुओं की ऊर्जा के मिलन से बना है वो अकेले की तप से नष्ट तो हो सकता है लेकिन मुक्ति नहीं मिलेगी । दो बाते है एक है संभोग और दूसरा है मुक्ति। दोनो एक दूसरे के पूरक है । सम्भोग के अंतिम समय जब आपके विचार शून्य हो जाते हैं , कोई विचार रह ही नहीं जाता सिर्फ़ एक साक्षी होता है जो असीम आनंद की अनुभूति करता है । जब विचार शून्य हो जाते हैं और आप साक्षी हो जाते हैं तो आप सीधे जाकर मिलते हैं परम ऊर्जा से ।

हर चक्र में कुछ ऊर्जा समाहित है जो बंद है अर्थात् जिस तक आपके चेतन मन की पहुँच नहीं है । जब आप संभोग की चरम अवस्था पर होते है तो इन चक्रो की सुसुप्त ऊर्जा प्रज्वलित होती है । जितना समय आप संभोग की चरम अवस्था में रहते है उतने समय तक ही ये चक्रीय ऊर्जा सक्रिय रहती है । इसे ऐसे समझो

सबसे नीचे का चक्र है मूलाधार चक्र । मूलाधार चक्र में सातों चक्र से कई अधिक ऊर्जा है । इसका भी एक कारण है , मूलाधार चक्र हमारे प्रजनन तंत्र को ऊर्जा देता है । अब जहाँ से एक सम्पूर्ण शरीर के बीज का निर्माण होना हो जिसमें आत्मा रूपी ऊर्जा को सम्भालने की क्षमता होनी है , उसे अधिकतम ऊर्जा की आवश्यकता पड़ेगी ही ।

तो मूलाधार से ऊर्जा जब नीचे यानी प्रजनन तंत्र की ओर बहती है तो वो सम्भोग में काम आती है ।

अब जब आप ध्यान करते हैं तो सबसे पहले यही मूलाधार चक्र खुलता है इसे से ऊर्जा ऊपर की ओर बहती है और सारे चक्रों को खोलती चली जाती है । जब ये ऊर्जा सबसे ऊपर के चक्र सहस्त्राधार को खोल देती है इस अवस्था को समाधि कहते हैं ।

तो जब मूलाधार से ऊर्जा नीचे की ओर बहती है उसे सम्भोग कहते हैं

जब ऊर्जा ऊपर की ओर बहती है तो उसे समाधी कहते हैं ।

नीचे की तरफ़ ऊर्जा का बहाव स्वाभाविक है , इसमें ज़्यादा प्रयास की आवश्यकता नहीं पड़ती । जबकि ऊर्जा को ऊपर की ओर बहाने के लिए अधिक प्रयास की आवश्यकता पड़ती है ।

इसी लिए लोग अधिकतर सम्भोग में फँस कर रह जाते हैं । जो तपस्वी इस ऊर्जा को ऊपर की बहने का सिद्ध हासिल कर लेते है उनका संभोग में क्षरण नहीं होता । संभोग के उन क्षणों में जब आपका मूलाधार चक्र पूरी तरह प्रज्वलित है तो महा योगी/योगनी उस वीर्य या रज रूपी ऊर्जा की खीच कर न केवल मस्तिष्क तक ले जा सकते है बल्कि एक तेज स्वास से उसे शरीर से बाहर निकाल कर प्राण भी त्याग सकते है ।

बूढ़ा आदम एक लंबी सांस खीच कर - तुम्हें देवी वही महा तपस्वनी वाली सिद्धि देकर गई है । तुम देवी के प्रताप से उर्ध्वरेता महा महिषी तपस्वनी बन गई हो । जो हमारी वर्षों से संचित ऊर्जा को स्खलन के बाद न केवल अपनी गर्भ में संभाल सकती हो बल्कि जिन योगियों की कुंडलिनी जागरण का अभ्यास नहीं है उनके शरीर में भी ऊर्जा का प्रहाव पलट सकती हो, बशर्ते वो उस समाधि की अवस्था में हो जो केवल संभोग के ज़रिये ही प्राप्त की जा सकती है ।

रीमा - आपने तो काम की लेकर मेरी पूरी सोच समझ ही हिला दी । अब तक मैं सिर्फ़ वासना को ही समझती रही ।

बूढ़ा आदम - इसलिए देवी, बहुत फर्क है देवी, भावना का फर्क है, लक्ष्य का फर्क है | क्या संतानोपत्ति के लिए किये गए सम्भोग और सामान्य वासना तृप्ति के सम्भोग में कोई अंतर नहीं | क्या गर्भ धारण करते समय दंपत्ति उत्तम संतान के समस्त ब्रम्हांड की सकारात्मक शक्तियों का, अपने पूज्य देवी देवताओं का अहवान नहीं करते | बहुत फर्क है देवी | भावना का फर्क है, कर्म का फर्क है और मिलने वाले कर्म फल का अंतर है |

रीमा हल्का सा हँसते हुए - आपकी फ़िलासफ़ी एक तरफ़ और लेकिन ३६ मूसल लंड को लेना, तुम सबकी मुक्ति हो न हो मेरी ज़रूर हो हो जाएगी ।

बूढ़ा आदम - मैं देख रहा था आपने महा देवी की अग्नि को आत्मसात् कर लिया है, उसके आगे कामाग्नि क्या है ।

रीमा - फिर भी हाड़ मांस के शरीर का क्या ।

बूढ़ा आदम - ऐसा नहीं की हम अभी संभोग शुरू कर देगें, उसकी एक प्रक्रिया है और उस प्रक्रिया से गुजरकर आपको पूरी साधना करनी होगी, जब साधना पूर्ण होगी, तभी आपकी योनि हमारे लिंग को लेने के लिए उपयुक्त होगी । अन्यथा मैथुन तो उस मूर्ख बालक ने भी किया था, वीर्य क्षरण भी कर दिया लेकिन मुक्ति नहीं मिली । मेरे पास है आपके लिए कुछ, जो शायद आपका भय निकाल दे, एक लंबी साधना प्रक्रिया ।

इतने में दोनों उस पाषाण प्रतिमा की पास पहुँच गये । रीमा ने देखा एक निर्वस्त्र स्त्री की पत्थर नुमा मूर्ति है, जिस्म स्त्री पीठ के बल लेती है और उसकी जाँघे घुटनों से मुड़ी हुई है और उसकी योनि पूरी तरह से खुली है, यहाँ तक की उसकी योनि में दो उँगली जाने भर की जगह भी । प्रतिमा को देखकर लगता ही नहीं की वो निर्जीव पत्थर है, ऐसा लगता है किसी ने साक्षात मैथुन करती स्त्री को पत्थर में ढाल दिया है ।

रीमा - ऐसा लगता है किसी साक्षत् स्त्री को इस पत्थर में उतार दिया हो ।

बूढ़ा आदम - आप सच कह रही है देवी, ये प्रतिमा नहीं है, ये देवी लोचना है जो हमारे साथ ही साथ अपना भी मुक्ति का मार्ग देख रही है ।

रीमा - मतलब तुम कह रहे हो ये पत्थर नहीं है एक मनुष्य शरीर है।

बूढ़ा आदम - अब ये ख़ुद प्रत्यक्ष अनुभव करो, शब्दों का कोई अर्थ नहीं है यहाँ ।

रीमा - पहले मैं चमत्कारों को नहीं मानती थी तुमसे मिलने के बाद मानने लगी हूँ लेकिन अभी भी यह संशय है ।

बूढ़ा आदम - संशय अभी दूर हो जाएगा ।

पीठ के बल लेटी मूर्ति के योनि छिद्र की तरफ़ इशारा करके - इसमें अपनी उँगली डालिये ।

रीमा ने डरते हुए - अपनी उँगली उसमें डाली, ऊपर से पाषाण और रीमा की उँगली को अंदर वही अहसास हुआ जो उसे अपनी योनि में उँगली डालने में होता है ।
 
बूढ़ा आदम - ये योनि से रिसता रस, लोचना देवी की अतृप्त काम वासना की अन्नत प्रतीक्षा है । हम वासना रत होकर अपने सुसुप्त परमाणुओं को सक्रिय करेगें और आपकी ऊर्जा से सातो चक्रो को उर्जित कर समाधि अवस्था में चले जायेगें । उन्ही परमाणुओं को आपको देवी लोचना के गर्भ में निष्पादित करना है, जब सबके परमाणु देवी लोचना के गर्भ में पहुँच जायेगें तो उनके गर्भ में उस संचित ऊर्जा की अग्नि शायद देवी की कामाग्नि को नष्ट कर दे और वो भी मुक्त हो जाए, ऐसा मेरा अनुमान है ।

रीमा ने इतन कुछ देख लिया था सुन लिया था की अब कुछ और सुनने समझने की ताक़त नहीं बची थी । एक पत्थर के अंदर मानव वो भी जीवित - विज्ञान में ये संभव नहीं है ।

बूढ़ा आदम - विज्ञान क्या है, जिसको हम प्रमाणित कर पाये, इसका अर्थ है जो प्रमाणित नहीं क्या वो सत्य नहीं हो सकता, क्या वो वास्तविक नहीं हो सकता । ये आकाश अन्नत है और यहाँ अनंत ऊर्जा के स्वरूप है, कौन सी ऊर्जा किस रूप में क्या चमत्कार कर सकती है हम तुक्ष लोगो को क्या पता ।

रीमा बूढ़े आदम की तरफ़ देखती हुई - क्या है आपकी कहानी, मैं सुनना चाहूँगी । इन सबके बीच रीमा ये भी भूल गई वो आदम के साथ बिलकुल प्राकृतिक अवस्था में चल फिर रही है । न स्तनों को छिपाने का संकोच, न थिरकते नितंब कौन देख रहा है इसकी चिंता । रीमा के गले में एक हड्डी की माला पड़ी थी और शरीर पर नीला भभूत ।

बुढा आदम -हम न ही आदमखोर है, न ही मांस मदिरा भक्षी है, इ ही स्त्री खोर है और न ही जंगली है | ये बात है लगभग 800 साल पहले की |
 
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