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Guest
रोहित - अच्छा ठीक है बाबा बस मेरे एक सवाल का जवाब दे दो फिर मै अपनी घर वापसी की तयारी शुरू करू | (उसका चेहरा अपने दोनों हाथो में लेते हुए, थोडा सा भावुक होकर) सीरियसली बताना, कैसा लग रहा है | सेक्स के बाद अच्छा फील कर रही हो, बुरा फील कर रही हो, आत्मग्लानी हो रही है, प्राउड फील कर रही हो, रिलैक्स फील कर रही जैसे बरसो का बोझ उतर गया, या अभी भी अन्दर तूफान उमड़ रहे है |
रीमा कैसे अपने दिल के भावो की बताये, उसने आज तक किसी को नहीं बताया अब कैसे बता दे ,उसने ये सब कभी नहीं किया था ये तो फिर रातो रात कैसे वो बदल जाएगी | है तो वही टिपिकल रीमा | उसने ख़मोशी बनाये रखी, और तिरछी कनखियों से एक बार रोहित को देखकर नजरे झुका ली |
रोहित - अच्छा चलो अपने प्रोजेक्ट के बारे में ही बताओ | लेकिन कुछ बोलो, खामोश मत रहो |
अब रीमा की ख़ामोशी पर रोहित को गुस्सा आने लगा - मेरी सांसे उखड़ गयी तुम्हे चोदने में, लंड छिल गया तुँमारी चूत का छेद नरम करने में और चूत की गहराई तक जाने में सर का पीसना पैर तक आ गया और तुम हो की एक शब्द बोलने में भी तुम्हे तकलीफ है |
रोहित रीमा को झटक के चला |
रीमा भी भावुकत से फट पड़ी - क्या चाहते हो रोहित ? मै तुमारे साथ रंडियों की तरह गन्दी गन्दी बाते करू | मुझसे नहीं होगा ये, मै रंडी नहीं हूँ | तुमने कहा कपडे मत पहनो, मैंने नहीं पहने, तुमने कहाँ काफी बनाकर लावो मै बनाकर लायी | बोलो अब और क्या चाहते हो | अभी भी कुछ करने को बचा है क्या ??????, सब कुछ तो कर चुके हो | क्या बाकि रह गया है, कुछ बाकि रह गया हो तो वो भी कर लो, मेरे रोकने से रुकोगे क्या ?
रोहित समझा गया चोट सही जगह लगी है - मैंने सिर्फ इतना पुछा था तुम्हे कैसा लगा ? तुम खुस हो | तुम संतुष्ट हो | तुम तृप्त हो | जिस चीज के लिए इतना तड़पी हो वो मिली या नहीं मिली |
रीमा भावुक हो गयी - एक दिन में इतना सब कुछ तो दे दिया है तुमने, क्या बोलू मै, मुझे नहीं पता मै तुमारे सवालो का क्या जवाब दूं | जो मिला है उसके लिए कोई शब्द नहीं होते, अगर होते भी होंगे तो मुझे नहीं पता | क्या जवाब दूं जिसके लिए मेरे पास शब्द ही नहीं है |
रोहित - ठीक है, तुम कंफ्यूज हो हमेशा की तरह | सिर्फ इतना बता दो तो फिर मै जाऊ या रुकू ? मै सिर्फ इसलिए पूछ रहा हूँ कि बाद में मत कहना की सब मर्द एक जैसे होते है, अपना काम निपटते ही औरत को भूल जाते है |
रीमा चुप रही | रोहित - अगर तुम्हे जरुरत है तो मै रुकू नहीं तो.................... ???
रीमा ने इस बार रोहित की बार पकड़ ली | वो समझ गयी अगर इसको जाना होता तो एक बार बोलकर चला गया होता | ये रुकना चाहता है लेकिन चाहता ये है मै बोलू रुकने के लिए | भावुक बैठी
रीमा कैसे अपने दिल के भावो की बताये, उसने आज तक किसी को नहीं बताया अब कैसे बता दे ,उसने ये सब कभी नहीं किया था ये तो फिर रातो रात कैसे वो बदल जाएगी | है तो वही टिपिकल रीमा | उसने ख़मोशी बनाये रखी, और तिरछी कनखियों से एक बार रोहित को देखकर नजरे झुका ली |
रोहित - अच्छा चलो अपने प्रोजेक्ट के बारे में ही बताओ | लेकिन कुछ बोलो, खामोश मत रहो |
अब रीमा की ख़ामोशी पर रोहित को गुस्सा आने लगा - मेरी सांसे उखड़ गयी तुम्हे चोदने में, लंड छिल गया तुँमारी चूत का छेद नरम करने में और चूत की गहराई तक जाने में सर का पीसना पैर तक आ गया और तुम हो की एक शब्द बोलने में भी तुम्हे तकलीफ है |
रोहित रीमा को झटक के चला |
रीमा भी भावुकत से फट पड़ी - क्या चाहते हो रोहित ? मै तुमारे साथ रंडियों की तरह गन्दी गन्दी बाते करू | मुझसे नहीं होगा ये, मै रंडी नहीं हूँ | तुमने कहा कपडे मत पहनो, मैंने नहीं पहने, तुमने कहाँ काफी बनाकर लावो मै बनाकर लायी | बोलो अब और क्या चाहते हो | अभी भी कुछ करने को बचा है क्या ??????, सब कुछ तो कर चुके हो | क्या बाकि रह गया है, कुछ बाकि रह गया हो तो वो भी कर लो, मेरे रोकने से रुकोगे क्या ?
रोहित समझा गया चोट सही जगह लगी है - मैंने सिर्फ इतना पुछा था तुम्हे कैसा लगा ? तुम खुस हो | तुम संतुष्ट हो | तुम तृप्त हो | जिस चीज के लिए इतना तड़पी हो वो मिली या नहीं मिली |
रीमा भावुक हो गयी - एक दिन में इतना सब कुछ तो दे दिया है तुमने, क्या बोलू मै, मुझे नहीं पता मै तुमारे सवालो का क्या जवाब दूं | जो मिला है उसके लिए कोई शब्द नहीं होते, अगर होते भी होंगे तो मुझे नहीं पता | क्या जवाब दूं जिसके लिए मेरे पास शब्द ही नहीं है |
रोहित - ठीक है, तुम कंफ्यूज हो हमेशा की तरह | सिर्फ इतना बता दो तो फिर मै जाऊ या रुकू ? मै सिर्फ इसलिए पूछ रहा हूँ कि बाद में मत कहना की सब मर्द एक जैसे होते है, अपना काम निपटते ही औरत को भूल जाते है |
रीमा चुप रही | रोहित - अगर तुम्हे जरुरत है तो मै रुकू नहीं तो.................... ???
रीमा ने इस बार रोहित की बार पकड़ ली | वो समझ गयी अगर इसको जाना होता तो एक बार बोलकर चला गया होता | ये रुकना चाहता है लेकिन चाहता ये है मै बोलू रुकने के लिए | भावुक बैठी