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बात मजाक में कही गई थी लेकिन वसीम की आँखों के सामने ये दृश्य चलने लगा की कैसे शहनाज खाना खिलाते वक़्त झुक रही थी बार-बार वो अकेला बैठकर टीवी देख रहा था लेकिन उसकी आँखों के सामने ये दृश्य चल रहा था की राज के सामने झुकने पे शहनाज का आँचल उड़ गया और वो हड़बड़ा कर राज पे गिर पड़ी थी, और राज उसकी चूचियों को मसलने और चूसने लगा। अपनी हसीन बीवी का उस बूढ़े मर्द के साथ ये बात सोचकर वसीम का लण्ड टाइट हो रहा था। वो खाना खाती हुई शहनाज को गौर से देखने लगा और सोचने करने लगा की कैसे राज उसके चिकने जिश्म को मसल रहा है, और कैसे शहनाज उस बूढ़े आदमी के साथ मस्ती कर रही है।
सोने जाते वक़्त शहनाज अपने सारे कपड़े उतार दी और नाइट सूट पहनकर सोने आ गई। उसे गुस्सा आ रहा था की उसकी इतनी मेहनत बेकार गई। कितने जतन से वो सजी थी, ताकी राज उसे देखकर अच्छा महसूस कर पाए लेकिन उसने देखा तक नहीं उसे लगा था की शहनाज को इस तरह अच्छे से देखकर उसे आराम मिलेगा। लेकिन उसे क्या पता था की यहाँ तो राज किसी तरह खुद पे काबू किए रहा, लेकिन रूम में जाते ही वो नंगा हुआ और शहनाज का नाम जप्ते हुए लण्ड से वीर्य निकालकर बर्बाद कर दिया।
वसीम का लण्ड टाइट था। उसने चोदने के लिए शहनाज के जिश्म पे हाथ लगाया।
शहनाज उसे मना कर दी और सोचने लगी- "मुझे नहीं चुदवाना इस बच्चे टाइप के लण्ड से दो मिनट होगा नहीं की खुद तो सो जायेगा और मैं मरती रहूंगी। एक वो राज जी हैं जिनके पास इतना बड़ा मोटा मूसल टाइप का लण्ड है और जिसका वीर्य वो मेरे पैंटी ब्रा पे निकलता है, लेकिन सामने मैं हूँ तो देखता भी नहीं। दोनों का काम बस मुझे तड़पाना है। वो अकेले में तड़पेगा लेकिन ये चैन की नींद सोएगा। इसलिए तुम भी तड़पो पतिदेव..” और शहनाज सोचती हुई सो गई।
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राज रूम में घुसते ही नंगा हो गया और लण्ड आगे-पीछे करने लगा। उसका लण्ड फुल टाइट था- "आह्ह... मेरी रांड़, क्या माल लग रही थी तू... जी तो चाह रहा था की उसी वक़्त पटक कर तुझे चोद दूं। लेकिन क्या करूँ जान, तेरे इस हसीन जिश्म को ऐसे नहीं पाना चाहता। जो तू झुक कर चूची दिखा रही थी उसे जरूर मसलूंगा, और चुसूंगा, बस तू थोड़ी और पक जा मेरी रंडी बनने के लिए। फिर तेरे पूरे जिश्म पे मेरा अधिकार होगा...."
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अगले दिन दोपहर होते ही शहनाज राज के लण्ड का दर्शन करने अपनी जगह पहुँच गई। अब शहनाज को बिल्कुल डर नहीं लगता था और वो ऐसे स्टोररूम में जा रही थी जैसे ये कोई नार्मल सिंपल काम हो। उसने अपने मन में सोच लिया था की अगर राज ने उसे देख भी लिया तो भी कोई परवाह नहीं। क्योंकी राज गलत काम कर रहा है, मैं नहीं। मैं तो ये पता लगाने छत पे छुपकर बैठी थी की आखिर वो है कौन जो रोज मेरी पैंटी ब्रा को गीली करता है?
शहनाज अपनी जगह पे बैठ गई। रोज की ही तरह राज आया और फिर कपड़े चेंज करके अपने काम में लग गया। आज उसका लण्ड जरा ज्यादा टाइट था, शहनाज का कल का रूप देखकर उसने पैंटी ब्रा को भीगा दिया और अपनी जगह पर टांग कर अपने रूम में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया।
दो ही मिनट बाद शहनाज स्टोररूम से बाहर निकली और आज सिर्फ पैंटी ब्रा लेकर नीचे चली गई। बाकी कपड़े उसने छत पे ही छोड़ दिए। सीढ़ियों पे ही शहनाज कपड़े में लगे वीर्य को सूँघने और चाटने लगी। उसे राज पे बहुत गुस्सा आ रहा था? ये क्या पागलपन है यार सामने होती हूँ तो देखता भी नहीं, बात करना तो दूर की चीज है और रोज पैंटी ब्रा पे वीर्य गिराता है। इतनी ही आग है मन में मुझे लेकर तो मेरे से बात करो, मुझे देखो तो शायद आराम मिले, शायद अच्छा लगे। और अगर शरीफ ही बने रहना है तो ये भी मत करो। मन में तो पता नहीं कितने अरमान पाल रखा होगा मेरे बारे में, कितनी तरह से चोद चुका होगा, लेकिन बाहर से इतना शरीफ बनता है की कहना ही नहीं?
शहनाज भी रोज की तरह नीचे आकर नंगी हुई और वीर्य चाटते हुए राज के बारे में सोचती रही और चूत से पानी निकालने के बाद नंगी ही रहीं।
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सोने जाते वक़्त शहनाज अपने सारे कपड़े उतार दी और नाइट सूट पहनकर सोने आ गई। उसे गुस्सा आ रहा था की उसकी इतनी मेहनत बेकार गई। कितने जतन से वो सजी थी, ताकी राज उसे देखकर अच्छा महसूस कर पाए लेकिन उसने देखा तक नहीं उसे लगा था की शहनाज को इस तरह अच्छे से देखकर उसे आराम मिलेगा। लेकिन उसे क्या पता था की यहाँ तो राज किसी तरह खुद पे काबू किए रहा, लेकिन रूम में जाते ही वो नंगा हुआ और शहनाज का नाम जप्ते हुए लण्ड से वीर्य निकालकर बर्बाद कर दिया।
वसीम का लण्ड टाइट था। उसने चोदने के लिए शहनाज के जिश्म पे हाथ लगाया।
शहनाज उसे मना कर दी और सोचने लगी- "मुझे नहीं चुदवाना इस बच्चे टाइप के लण्ड से दो मिनट होगा नहीं की खुद तो सो जायेगा और मैं मरती रहूंगी। एक वो राज जी हैं जिनके पास इतना बड़ा मोटा मूसल टाइप का लण्ड है और जिसका वीर्य वो मेरे पैंटी ब्रा पे निकलता है, लेकिन सामने मैं हूँ तो देखता भी नहीं। दोनों का काम बस मुझे तड़पाना है। वो अकेले में तड़पेगा लेकिन ये चैन की नींद सोएगा। इसलिए तुम भी तड़पो पतिदेव..” और शहनाज सोचती हुई सो गई।
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राज रूम में घुसते ही नंगा हो गया और लण्ड आगे-पीछे करने लगा। उसका लण्ड फुल टाइट था- "आह्ह... मेरी रांड़, क्या माल लग रही थी तू... जी तो चाह रहा था की उसी वक़्त पटक कर तुझे चोद दूं। लेकिन क्या करूँ जान, तेरे इस हसीन जिश्म को ऐसे नहीं पाना चाहता। जो तू झुक कर चूची दिखा रही थी उसे जरूर मसलूंगा, और चुसूंगा, बस तू थोड़ी और पक जा मेरी रंडी बनने के लिए। फिर तेरे पूरे जिश्म पे मेरा अधिकार होगा...."
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अगले दिन दोपहर होते ही शहनाज राज के लण्ड का दर्शन करने अपनी जगह पहुँच गई। अब शहनाज को बिल्कुल डर नहीं लगता था और वो ऐसे स्टोररूम में जा रही थी जैसे ये कोई नार्मल सिंपल काम हो। उसने अपने मन में सोच लिया था की अगर राज ने उसे देख भी लिया तो भी कोई परवाह नहीं। क्योंकी राज गलत काम कर रहा है, मैं नहीं। मैं तो ये पता लगाने छत पे छुपकर बैठी थी की आखिर वो है कौन जो रोज मेरी पैंटी ब्रा को गीली करता है?
शहनाज अपनी जगह पे बैठ गई। रोज की ही तरह राज आया और फिर कपड़े चेंज करके अपने काम में लग गया। आज उसका लण्ड जरा ज्यादा टाइट था, शहनाज का कल का रूप देखकर उसने पैंटी ब्रा को भीगा दिया और अपनी जगह पर टांग कर अपने रूम में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया।
दो ही मिनट बाद शहनाज स्टोररूम से बाहर निकली और आज सिर्फ पैंटी ब्रा लेकर नीचे चली गई। बाकी कपड़े उसने छत पे ही छोड़ दिए। सीढ़ियों पे ही शहनाज कपड़े में लगे वीर्य को सूँघने और चाटने लगी। उसे राज पे बहुत गुस्सा आ रहा था? ये क्या पागलपन है यार सामने होती हूँ तो देखता भी नहीं, बात करना तो दूर की चीज है और रोज पैंटी ब्रा पे वीर्य गिराता है। इतनी ही आग है मन में मुझे लेकर तो मेरे से बात करो, मुझे देखो तो शायद आराम मिले, शायद अच्छा लगे। और अगर शरीफ ही बने रहना है तो ये भी मत करो। मन में तो पता नहीं कितने अरमान पाल रखा होगा मेरे बारे में, कितनी तरह से चोद चुका होगा, लेकिन बाहर से इतना शरीफ बनता है की कहना ही नहीं?
शहनाज भी रोज की तरह नीचे आकर नंगी हुई और वीर्य चाटते हुए राज के बारे में सोचती रही और चूत से पानी निकालने के बाद नंगी ही रहीं।
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