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Adultery शहनाज की बेलगाम ख्वाहिशें

बात मजाक में कही गई थी लेकिन वसीम की आँखों के सामने ये दृश्य चलने लगा की कैसे शहनाज खाना खिलाते वक़्त झुक रही थी बार-बार वो अकेला बैठकर टीवी देख रहा था लेकिन उसकी आँखों के सामने ये दृश्य चल रहा था की राज के सामने झुकने पे शहनाज का आँचल उड़ गया और वो हड़बड़ा कर राज पे गिर पड़ी थी, और राज उसकी चूचियों को मसलने और चूसने लगा। अपनी हसीन बीवी का उस बूढ़े मर्द के साथ ये बात सोचकर वसीम का लण्ड टाइट हो रहा था। वो खाना खाती हुई शहनाज को गौर से देखने लगा और सोचने करने लगा की कैसे राज उसके चिकने जिश्म को मसल रहा है, और कैसे शहनाज उस बूढ़े आदमी के साथ मस्ती कर रही है।

सोने जाते वक़्त शहनाज अपने सारे कपड़े उतार दी और नाइट सूट पहनकर सोने आ गई। उसे गुस्सा आ रहा था की उसकी इतनी मेहनत बेकार गई। कितने जतन से वो सजी थी, ताकी राज उसे देखकर अच्छा महसूस कर पाए लेकिन उसने देखा तक नहीं उसे लगा था की शहनाज को इस तरह अच्छे से देखकर उसे आराम मिलेगा। लेकिन उसे क्या पता था की यहाँ तो राज किसी तरह खुद पे काबू किए रहा, लेकिन रूम में जाते ही वो नंगा हुआ और शहनाज का नाम जप्ते हुए लण्ड से वीर्य निकालकर बर्बाद कर दिया।

वसीम का लण्ड टाइट था। उसने चोदने के लिए शहनाज के जिश्म पे हाथ लगाया।

शहनाज उसे मना कर दी और सोचने लगी- "मुझे नहीं चुदवाना इस बच्चे टाइप के लण्ड से दो मिनट होगा नहीं की खुद तो सो जायेगा और मैं मरती रहूंगी। एक वो राज जी हैं जिनके पास इतना बड़ा मोटा मूसल टाइप का लण्ड है और जिसका वीर्य वो मेरे पैंटी ब्रा पे निकलता है, लेकिन सामने मैं हूँ तो देखता भी नहीं। दोनों का काम बस मुझे तड़पाना है। वो अकेले में तड़पेगा लेकिन ये चैन की नींद सोएगा। इसलिए तुम भी तड़पो पतिदेव..” और शहनाज सोचती हुई सो गई।

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राज रूम में घुसते ही नंगा हो गया और लण्ड आगे-पीछे करने लगा। उसका लण्ड फुल टाइट था- "आह्ह... मेरी रांड़, क्या माल लग रही थी तू... जी तो चाह रहा था की उसी वक़्त पटक कर तुझे चोद दूं। लेकिन क्या करूँ जान, तेरे इस हसीन जिश्म को ऐसे नहीं पाना चाहता। जो तू झुक कर चूची दिखा रही थी उसे जरूर मसलूंगा, और चुसूंगा, बस तू थोड़ी और पक जा मेरी रंडी बनने के लिए। फिर तेरे पूरे जिश्म पे मेरा अधिकार होगा...."

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अगले दिन दोपहर होते ही शहनाज राज के लण्ड का दर्शन करने अपनी जगह पहुँच गई। अब शहनाज को बिल्कुल डर नहीं लगता था और वो ऐसे स्टोररूम में जा रही थी जैसे ये कोई नार्मल सिंपल काम हो। उसने अपने मन में सोच लिया था की अगर राज ने उसे देख भी लिया तो भी कोई परवाह नहीं। क्योंकी राज गलत काम कर रहा है, मैं नहीं। मैं तो ये पता लगाने छत पे छुपकर बैठी थी की आखिर वो है कौन जो रोज मेरी पैंटी ब्रा को गीली करता है?

शहनाज अपनी जगह पे बैठ गई। रोज की ही तरह राज आया और फिर कपड़े चेंज करके अपने काम में लग गया। आज उसका लण्ड जरा ज्यादा टाइट था, शहनाज का कल का रूप देखकर उसने पैंटी ब्रा को भीगा दिया और अपनी जगह पर टांग कर अपने रूम में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया।

दो ही मिनट बाद शहनाज स्टोररूम से बाहर निकली और आज सिर्फ पैंटी ब्रा लेकर नीचे चली गई। बाकी कपड़े उसने छत पे ही छोड़ दिए। सीढ़ियों पे ही शहनाज कपड़े में लगे वीर्य को सूँघने और चाटने लगी। उसे राज पे बहुत गुस्सा आ रहा था? ये क्या पागलपन है यार सामने होती हूँ तो देखता भी नहीं, बात करना तो दूर की चीज है और रोज पैंटी ब्रा पे वीर्य गिराता है। इतनी ही आग है मन में मुझे लेकर तो मेरे से बात करो, मुझे देखो तो शायद आराम मिले, शायद अच्छा लगे। और अगर शरीफ ही बने रहना है तो ये भी मत करो। मन में तो पता नहीं कितने अरमान पाल रखा होगा मेरे बारे में, कितनी तरह से चोद चुका होगा, लेकिन बाहर से इतना शरीफ बनता है की कहना ही नहीं?

शहनाज भी रोज की तरह नीचे आकर नंगी हुई और वीर्य चाटते हुए राज के बारे में सोचती रही और चूत से पानी निकालने के बाद नंगी ही रहीं।

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3:00 बजे शहनाज के घर का दरवाजा नाक हुआ। शहनाज नंगी ही लेटी टीवी देख रही थी। वो हड़बड़ा गई और जल्दी से कपड़े ढूँढ़ने लगी। वो पैंटी ब्रा पहनती तो लेट होता। इसलिए वो हड़बड़ी में बस नाइटगाउन पहनते हुए पूछी- “कौन है?"

उधर से राज की आवाज आई- मैं हूँ, राज ..."

शहनाज का दिल जोरों से धड़क गया की ये क्यों आए हैं? कहीं मुझे देख तो नहीं लिया? शायद सिर्फ पैंटी ब्रा लाई उठाकर तो इन्हें पता लग गया होगा की मुझे पता है। पता नहीं क्या बोलेगा? शहनाज हड़बड़ाती हुई दरवाजा खोली- “आइए ना राज जी , अंदर आइए..."

राज बोला- “नहीं, बस जा रहा हूँ। रात में आने में थोड़ी देर हो जाएगी। बस यही बोलने आया था। तो दरवाजा बंद कर लीजिएगा और मैं काल करूँगा तो दरवाजा खोल दीजिएगा...'

शहनाज बोली- “ठीक है, कोई बात नहीं खोल दूँगी। आइए ना चाय तो पीकर जाइए...

राज - “ना ना चलता हूँ अभी" बोलता हुआ चला गया।

शहनाज की जान में जान आई राज के जाने के बाद। लेकिन उसके मन उदास हो गया की अंदर आकर बैठकर कुछ बात तो करते कम से कम बेकार मैं कपड़े पहनी। नंगी ही दरवाजा खोल देती, नहीं तो कम से कम कपड़े तो ढीले रखती। पूरा ढक ली। बेचारे एक तो कभी आते नहीं और आए भी तो मुझे कुछ तो दिखा ही देना चाहिए था। मैं इतनी हड़बड़ा गई थी की दिमाग ही काम नहीं किया? और शहनाज राज के ख्यालों में फिर से खो गई।

बाहर जाते हुए राज का लण्ड टाइट हो चुका था। शहनाज अपने हिसाब से राज को कुछ नहीं दिखा पाई थी, लेकिन राज की हरामी नजर एक झटके में ये ताड़ गया था की रंडी ने अंदर कुछ नहीं पहना था। चूचियों की गोलाई में सटी नाइटगाउन को देखकर ही वो समझ गया की अंदर ब्रा नहीं था और इसलिए राज का लण्ड और टाइट हो गया था। रोड पे आने से पहले उसने अपने लण्ड को पायजामा में अड्जस्ट किया और दुकान की तरफ चल पड़ा।

राज सोचने लगा- "रंडी पक्का अंदर नंगी होगी। चुदवाने के लिए मरी तो जा रही है लेकिन हाए रे संस्कारी नारी, कुछ बोल नहीं पा रही। बाकी कपड़े छोड़कर सिर्फ पैंटी ब्रा इसलिए ले गई ताकी मैं जान सकूँ की वो जानती है और मेरी हिम्मत बढ़ जाए। लेकिन मेरी रांड, इतनी आसानी से तुझे थोड़ी मेरा लण्ड दे दूँगा। जब तक तू पूरी मेरी रांड नहीं बन जाती तब तक तू तड़पेगी । तड़प तो मैं तुझसे ज्यादा रहा हूँ राड़। तुझे थोड़ी जल्दी करनी चाहिए थी, तेरी स्पीड बढ़ानी पड़ेगी?"

सोचता हुआ राज दुकान चल पड़ा और अपने प्लान को माडिफाई करने लगा। वो प्लान जिसमें एक सीधी सादी शरीफ पवित्र टाइप की लड़की को उसे अपनी रंडी बनाना था। उसके तन मन को अपने सामने समर्पित करवाना था। शहनाज का समर्पण चाहिए था उसे ।

रात में फिर शहनाज वसीम से राज के बारे में ही बात कर रही थी। शहनाज ने कहा- "आज राज जी लेट से आएंगे। दरवाजा बंद कर लेने बोले हैं। जब वो आएंगे तो काल कर लेंगे तब दरवाजा खोल देने बोले हैं..."

वसीम- ठीक है। ज्यादा रात होगी क्या उन्हें?"

शहनाज “ये तो पूछी नहीं। बस इतना बोले और चले गये। मैं तो अंदर आने बोली भी लेकिन आए नहीं..."

वसीम मुश्कुरा दिया, और बोला- “अरे वाह... आकर बोल गये। कल देखकर गये तुम्हें तो आज फिर से देखने का मन किया होगा। क्या पहनी हुई थी तुम आज?"

शहनाज बनावटी गुस्से में बोली- “नंगी थी... तुम्हें और कुछ तो सूझता है नहीं। तुमने देखा था ना उस दिन वो देखते भी नहीं मेरी तरफ...

वसीम- "तुम्हें दिखाकर थोड़े ना देखते होंगे। तुम्हारी जैसी हूर को कोई बिना देखे रह ही नहीं सकता। लेकिन उसे शर्म आती होगी की वो उतना उम्रदराज होकर भी तुम्हें देख रहा है। लेकिन एक बात तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की लार तो जरूर टपकती होगी उनकी मर्द जात ऐसे ही होते हैं। तुम्ही खोल देना दरवाजा, एक बार और देख लेंगे तुम्हें..."

शहनाज को वसीम की बात में दम नजर आया- "उन्हें उम्र की वजह से शर्म आती होगी। हैं भी तो वो मेरे से दुगुने उम्र के उफफ्फ ... इसीलिए वो इंसान अंदर ही अंदर तड़प रहा होगा। मुझे ही कुछ करना होगा उनके लिए?

सोचती हुई फिर वो वसीम को बोली- "मुझे तो उन पर दया आती है। मुझे देखते तक नहीं, बात करना तो दूर की बात है। लेकिन इतने सालों से अकेले ही अंदर-अंदर घुट रहे हैं। मेरी छोड़ो, तुमसे भी तो बात करके मन का बोझ हल्का कर सकते हैं..."
 
वसीम हम्म्म... बोलता हुआ करवट बदलकर सोने लगा और शहनाज अभी का प्लान बनाने लगी- "दोपहर में तो वो हड़बड़ी में थी लेकिन अभी उसके पास पूरा टाइम था। वसीम अब सुबह ही जागने वाला था। शहनाज का मन हुआ की सच में नंगी ही जाकर दरवाजा खोल दूं। देखती हूँ बूढ़े मियां फिर देखते हैं की नहीं?" सोचकर वो खिलखिला दी ।

शहनाज वही नाइटगाउन पहनी हुई थी। वसीम के सो जाने के बाद वो उठी और ब्रा उतार दी। फिर वो बाडी लोशन लेकर अपने सीने पे और चूचियों पे अच्छे से लगा ली। उसकी चूचियां तो ऐसे ही गोरी थीं, अब और चमक उठीं। फिर उसने चेहरे को साफ किया और क्रीम और डी. ओ. लगा ली। अब शहनाज ने नाइटगाउन के सामने के हिस्से को थोड़ा नीचे खींच लिया और कालर को थोड़ा फैला ली। अब उसकी दोनों गोलाइयां गहराई के साथ दिख रही थीं। शहनाज अब दरवाजा खोलने के लिए तैयार थी। शहनाज को नींद ही नहीं आ रही थी।

शहनाज मन ही मन सोच रही थी की कैसे दरवाजा खोलेगी और क्या करेगी? लेकिन शहनाज की इतनी हिम्मत नहीं हुई की राज से कोई भी बात सीधी कर पाए। वो अपने नाइटी को ठीक कर ली और ब्रा पहनने लगी। उसे लगा की अगर मैं ऐसे गई तो कहीं वो मुझे गलत टाइप की ना समझ लें। फिर शहनाज को खयाल आया की मैं तो सज संवर कर बैठी हूँ, तो उन्हें लगेगा की मैं तो जाग कर उनका इंतजार कर रही थी। अगर मैं नींद में रही की किसी तरह की गलती हो सकती हैं। उसने फिर से ब्रा को उतार दिया और नाइटगाउन को ढीली कर ली।

अब चलने पे उसकी चूचियां आराम से गोल-गोल घूम रही थी और क्लीवेज खुले होने से चूचियों में हो रही थिरकन साफ-साफ दिख रही थी। शहनाज अपने बाल बिखरा दी और चेहरे को भी पानी से धोकर उनींदा टाइप का चेहरा बनाने लगी। रात के 11:00 बज गये थे और राज का अब तक काल नहीं आया था। शहनाज अपनी पैंटी भी उतार दी थी। वो दो-तीन बार बाहर झाँक कर भी आ गई थी राज आए या नहीं।

उसने सोचा की मैं ही पूछ लेती हूँ लेकिन फिर उसने ये इरादा त्याग दिया। थोड़ी देर बाद वसीम के मोबाइल पे काल आया। शहनाज दौड़कर फोन उठाई तो राज जी लिखा हुआ था। शहनाज अपनी साँसों को कंट्रोल की और उनींदी आवाज में "हेलो" बोली।

राज ने कहा- "मैं आ गया हूँ, दरवाजा खोल दो प्लीज...”

शहनाज फिर से उनींदी आवाज में ही- "हाँ आती हूँ.” बोली और खुद को अड्जस्ट कर ली। उसने खुद को एक बार आईने में देखा और गाउन को ठीक से अड़जस्ट की जिससे क्लीवेज चूचियों की गोलाईयों के साथ दिखे।

शहनाज ऐसे चलकर बाहर आई, जैसी कितने नींद में हो। उसने बाहर की लाइट जला दी और दरवाजा खोल दिया।

दरवाजा खुलते ही राज की आँखों के सामने शहनाज की गोरी चूचियां चमक रही थी। राज तो शहनाज की आवाज सुनकर ही लण्ड टाइट किए बैठा था। एक झटके में उसे अंदाजा लग गया की उसकी होने वाली रंडी अभी भी बिना ब्रा के है और उसी को दिखाने के लिए डीप नेक गाउन पहनी हुई है। उसका मन किया की हाथ बढ़ाए और इन दूध से भरी रसमलाईयों को पकड़कर निचोर दे और चूस ले। राज को पता था की शहनाज भी यही चाहती होगी, और अगर उसने ऐसा किया तो छोटी मोटी आक्टिंग के अलावा और शहनाज कुछ नहीं करेगी।

लेकिन राज ने खुद पे काबू किया और बोला- “सारी, आप लोगों को परेशान किया...."

शहनाज उल्टे कदम ही पीछे होती हुई बोली। ताकी उसकी चूचियों की थिरकन को राज अच्छे से देख सके। कल वसीम मौजूद था तो इन्हें बुरा लग रहा होगा लेकिन आज कोई नहीं है तो ये अच्छे से देख सकें मुझे। शहनाज बोली- "इसमें परेशानी की क्या बात है?"

राज ने दरवाजा लाक कर दिया और ऊपर जाने लगा। शहनाज को लगा की ये क्या हो रहा है। ये तो जा रहे हैं।

शहनाज तुरंत बोली- “खाना खाकर आए हैं या अभी बनाएंगे। आइए यहीं खा लीजिए, मैं बनाकर रखी हूँ..."

राज नजरें नीची किए हुए ही चलते हुए बोला- "नहीं शुक्रिया, मैं खाकर आया हूँ। सो जाइए आप भी शुक्रिया फिर से और माफी माँगता हूँ परेशान करने के लिए " बोलता हुआ राज सीढ़ियों पे चल दिया और शहनाज ठगी सी खड़ी की खड़ी रह गई।

शहनाज को यकीन नहीं हुआ की ये आदमी ऐसा है। उसे लगा था की इस तरह के कपड़े और अकेली पाकर वो पकड़कर शहनाज से बातें करने लगेगा और शहनाज उसकी मदद कर पाएगी उसके अंदर के जमे हुए गुबार को बाहर करने में उसे गुस्सा भी बहुत आया और फिर वसीम की वही बात याद आई की इसे अपने उम्र की वजह से शर्म आती होगी, नहीं तो जी तो चाहता होगा उसका की तुम्हारे साथ खूब मस्ती करे।

शहनाज को बहुत जोर का गुस्सा आया। उसका मन किया की अभी राज पे बरस पड़े। वो वहीं खड़ी थी और राज सीढ़ियां चढ़ता हुआ ऊपर चला गया। शहनाज का मन हुआ की राज को खींचकर रोक ले और उससे पूछे की अगर अभी नजर उठाकर देख भी नहीं सकते, बात भी नहीं कर सकते तो दिन में क्या करते हो? लेकिन गुस्सा दिखना सही नहीं होगा। वो तो वही कर रहे हैं जो एक शरीफ इंसान को करना चाहिए।

फिर उसने सोचा की जाती हूँ ऊपर और अच्छे से बात कर ही लेती हूँ आज वो दो-तीन सीढ़ी चढ़ी भी लेकिन इससे आगे की उसकी हिम्मत नहीं हुई। वो सोचने लगी की इतनी रात को अगर मैं उनके रूम में जाऊँगी तो ये ठीक नहीं रहेगा। कल दिन में पूछ लूँगी। वो तो शरीफ इंसान हैं, लेकिन मैं क्यों रंडी जैसी हरकत कर रही हूँ? शहनाज कल दिन में कैसे क्या बात करेगी सोचती हुई अपने रूम में आ गई।

वसीम ने आधखुली आँख से अपनी बीवी को अंदर आते देखा। उसे सदमा लगा । शहनाज उसे सोया हुआ मानकर दरवाजा खोलने की जो तैयारी कर रह रही थी। वसीम वो सब अपनी अधखुली आँखों से देख रहा था। उसे अब यकीन हो चला था की उसकी कमसिन जवान बीवी उस बूढ़े राज के चक्कर में है। जितनी देर शहनाज रूम से बाहर दरवाजा के पास थी, वसीम सोच रहा था की राज और शहनाज क्या कर रहे होंगे?

वसीम के अनुसार शहनाज दरवाजा खोली होगी और राज के सामने उसकी गोल मुलायम गोरी चूचियां चमक उठी होंगी। राज देखता रह गया होड़ा। उसने अपनी नजरें नीची कर ली और शहनाज को थैंक्यू बोलते हुआ पीछे हटने बोला लेकिन शहनाज हटी नहीं और उससे सट गई। उसने चूचियां राज के सीने से दबा दी और राज को पकड़ लिया। अब राज के लिए कंट्रोल मुश्किल था। वो शहनाज के होठों को चूमने लगा और नाइटगाउन की डोरी को खींच दिया। शहनाज की चूची बाहर आ गई और राज पागलों की तरह उसे मसलता हुआ चूसने लगा । शहनाज आहह.... उहह.... कर रही थी..." सोचते हुये वसीम का लण्ड पूरा टाइट हो चुका था। लेकिन शहनाज के अंदर आने से उसे बहुत बुरा लगा की उसकी इतनी हसीन बीवी को राज भाव नहीं दे रहा ।
 
शहनाज को भी लगा था की अभी तो राज उससे बात करेगा ही और देखेगा ही लेकिन ऐसा हुआ नहीं। शहनाज सो गई और उसकी नाइटी ढीली हो गई जिससे उसकी चूचियां बाहर आ गई। वसीम को नींद नहीं आ रही थी और उसका लण्ड टाइट था। शहनाज की चूची को देखकर वो उसे सहलाने और चूसने लगा। शहनाज नींद में थी और गरम थी वो सपने देख रही थी की राज उसके साथ ऐसा कर रहा है। वो मुश्कुरा रही थी और वसीम का पूरा साथ देते हुए वो पूरी गरम हो चुकी थी।

वसीम ने शहनाज की नाइटी को सामने से पूरा खोल दिया और शहनाज का गोरा जिश्म चमक उठा। वसीम ने लण्ड को शहनाज की चूत पे लगाया और अंदर डाल दिया। शहनाज कमर उठाकर और अंदर लेने के लिए उछलने लगी, लेकिन राज का लण्ड होता तब तो अंदर जाता था तो ये वसीम का ही लण्ड । शहनाज की नींद खुल गई और उसका मूड आफ हो गया। वो वसीम को हटाने लगी।

वसीम पहले से ही पूरा टाइट था, लण्ड अंदर डालते ही 8-10 धक्के में उसने पानी छोड़ दिया। शहनाज को अब गुस्सा आ गया और उसका मन किया की वसीम से खूब झगड़ा करे लेकिन रात थी इसलिए वो मन मसोसकर रह गई और वसीम को अपने ऊपर से उतारकर बाथरूम चली गई।

शहनाज नाइटी उतार दी थी और नंगी ही बाथरूम गई थी। पेशाब करने के बाद वो चूत सहलाने लगी। सोचने लगी की कितना अच्छा सपना था की राज मुझे चूमते हुए मेरी चूची को सहला रहे थे, और फिर नाइटी की डोरी खोलकर नंगी चूचियों को सहला रहेज थे, और चूस रहे थे। आहह कितना अच्छा होता की ये राज ही होते, वसीम नहीं होता । आहह.. राज का लण्ड चूत में कितना अंदर तक जाता आह्ह... आहह... राज क्यों नहीं आपने पकड़ लिया मुझे दरवाजा पे? क्यों नहीं मुझे चूमने लगे? खोल देते मेरी नाइटी को और अच्छे से देखते मेरे नंगे जिश्म को देखते उस जगह को जहाँ में पैंटी ब्रा पहनती हूँ। छू लेते उस जगह को चूमते मसलते मेरी चूचियों को जो वीर्य आप पैंटी ब्रा पे गिराते है वो उस जगह पे गिरते जहाँ मैं उन्हें पहनती हूँ। आहह.... राज जी चोद लेते मुझे मेरी चूत में डाल देते अपना मोटा लण्ड और गिरा देते वीर्य मेरी चूत में। आहह... उम्म्म्म....... शहनाज की चूत ने पानी छोड़ दिया और वो हाँफती हुई बाथरूम से आ गई।

शहनाज को चोदने के बाद वसीम सो गया था। शहनाज नेकिचेन में जाकर पानी पिया और फिर सोने आ गई।

पहली बार आज शहनाज नंगी सो रही थी। शहनाज सोचने लगी की ये क्या सोच रही थी वो? ये कैसा सपना था की उसका पति वसीम उसे चोद रहा था लेकिन वो सोच रही थी की राज से चुद रही है। क्या मैं सच में राज से चुदवाना चाहती हूँ? हाँ, तभी तो मैं दरवाजा पे ऐसे गई थी। अगर राज जी मुझे कुछ करते तो क्या मैं उन्हें रोक पाती ? बिल्कुल नहीं। मैं उनसे चुदवाना चाहती हूँ तभी तो उनके वीर्य की खुश्बू मुझे पागल कर देती है। और जो आदमी मेरी पैंटी ब्रा पे वीर्य गिराता है रोज तो वो मुझे चोदने का सोचकर ही वीर्य गिराता होगा, कोई भजन गाकर तो वीर्य नहीं ही गिरता होगा।

मुझे चोदकर ही राज जी रिलैक्स हो पाएंगे। नहीं तो वो शरीफ इंसान अंदर ही अंदर घुट-घुट कर मार जाएगा। कल मैं उनसे सीधी-सीधी बात करूँगी, और अगर वो मुझे चोदना चाहेंगे तो मेरा जिश्म पेश है उनकी मदद के लिए मेरी वजह से वो आदमी मर रहा है तो ये पूरी तरह मेरी जिम्मेवारी है की मैं उन्हें इससे बाहर निकालूं, चाहे भले इसके लिए मुझे उन्हें अपना जिश्म ही क्यों ना देना पड़े।

शहनाज के अंदर से आवाज आई- “तू रंडी हो गई है क्या,

"तू रंडी हो गई है क्या, जो दूसरे मर्द से चुदवाने की बात सोच रही है? तू ऐसा सोचकर भी पाप कर रही है। अपने पति को धोखा देगी तू? राज के बड़े लण्ड के लालच में तू वसीम को धोखा देगी?"

अंदर से शैतान ने जवाब दिया- "धोखा वाली कौन सी बात हो गई? मैं तो राज की मदद करूँगी, क्योंकी वो मेरी वजह से दर्द सह रहा है। इतने सालों से वो अकेला है और अब मेरी वजह से तड़प रहा है, तो मेरा ही फर्ज़ है उसकी मदद करना। और मैं उससे चुदवाने नहीं जा रही हूँ। मैंने कहा की अगर मुझे अपना जिश्म देकर भी उसकी मदद करनी पड़ी को करूँगी। अगर मैं उससे चुदवाऊँगी ही तो कौन सा रोज चुदवाऊँगी ?
 
शहनाज की राज से चोदवाने की ख्वाहिश

शहनाज सोचती सोचती नींद के आगोश में जा चुकी थी। सुबह जब नींद खुली तो नंगी थी शहनाज रोज सवेरे जागकर फ्रेश होती थी और फिर नहाकर इबादत करके फिर चाय बनाती थी और वसीम को जगाकर चाय देती थी। शहनाज नंगी ही बेड से उठी और फ्रेश होकर नहाने चल दी। पहली बार वो अपने घर में ऐसे नंगी घूम रही थी। नहाने के बाद वो एक साड़ी पहन ली और इबादत करने लगी। फिर चाय बनाकर उसने वसीम को जगाया और फिर किचेन के काम में लग गई।

शहनाज का ये सब डेली रुटीन था लेकिन शहनाज का ध्यान दोपहर पे था की आज वो राज से फाइनल बात करके रहेगी।

वसीम आफिस चला गया और शहनाज एक बजे का इंतजार करने लगी। उसके मन में बहुत उथल-पुथल मची हुई थी। आज वो स्टोररूम में नहीं गई। उसका प्लान था की जब राज पैंटी ब्रा हाथ में लेकर मूठ मार रहा होगा तब वो ऊपर जाएगी और राज से क्लियर कट बात करेगी।

आज फिर उसका दिल तेजी से धड़क रहा था की क्या होगा? कहीं राज ने मुझे चोदने की बात कह दी तो क्या मैं उसी वक़्त चुदवा लूँगी? अगर उन्होंने मना कर दिया और गलती मानते हुए बोल दिया की आगे से ऐसा कभी नहीं करेंगे तो? नहीं नहीं। मैं उन्हें गलती नहीं मानने दूँगी। इस तरह तो वो और शर्मिंदगी महसूस करेंगे और अंदर-अंदर ही और घुटेंगे। मुझे उन्हें समझाना होगा की आपने जो किया उसमें कुछ गलत नहीं है और आप तो बहुत महान हैं की बस ऐसा करके खुद को सम्हाल लेते हैं। मेरे सामने रहने पे भी मुझे देखते भी नहीं । आपकी जगह कोई और होता तो रोज जो दिन भर मैं अकेली होती हूँ, पता नहीं क्या करता? आपको घबराने शर्माने की जरूरत नहीं है। आप मुझसे बात कीजिए और मुझे बताइए की प्राब्लम क्या है?

दरवाजे से अंदर आते ही शहनाज के घर के दरवाजा को देखकर राज समझ गया की उसकी होने वाली रांड़ शहनाज आज ऊपर नहीं गई है। शहनाज का दरवाजा अंदर से बंद था। अगर वो ऊपर जाती तो दरवाजा या तो बाहर से बंद होता या फर खुला होता। उसे थोड़ा बुरा लगा की कहीं में ओवरएक्टिंग तो नहीं कर गया। ऊपर पैंटी ब्रा अपनी जगह पे राज के वीर्य के इंतजार में टंगी पड़ी थी। राज रूम में गया और कपड़े चेंज करके शहनाज का इंतजार करने लगा की शायद वो आए लेकिन वो नहीं आई।

राज अपने डेली के काम में लग गया, स्टोररूम के बाहर मूठ मारने का। उसने स्टोररूम में झाँक कर भी देखा लेकिन वहाँ कोई नहीं था। आज राज का लण्ड टाइट ही नहीं हो रहा था। उसे लगने लगा की मैंने ओवर आक्टिंग कर दी है। रात में शहनाज रंडियों की तरह बिना ब्रा पहने क्लीवेज दिखाते सिर्फ गाउन लपेटे आई थी और बात भी करने की कोशिश की। लेकिन मैं सीधा ऊपर आ गया था। कहीं रांड ने ये तो नहीं सोच लिया की मैं उसके हाथ नहीं आने वाला, और अब वो कहीं मुझसे दूर तो नहीं रहने वाली सही बात है यार, रोज-रोज कोई सिर्फ मुझे लण्ड हिलाता देखने क्यों आएगी? नहीं मेरी जान, मैं तुझे बिना चोदे नहीं छोड़ सकता। अगर मैं तुझे बिना चोदे मर गया तो मेरी रूह को भी शुकून नहीं मिलेगा। मुझे कुछ करना होगा। मैं तुझे खुद से दूर होने नहीं दे सकता।

राज ने पूरी कोशिश की और फिर मूठ मारकर वीर्य को पैंटी पे गिरा दिया और टांगकर रूम में चला गया। आज उसका मन तो नहीं था लेकिन इस चीज को वो छोड़ नहीं सकता था। शहनाज की पेंटी ब्रा पे वीर्य गिराना उसके प्लान का मुख्य हिस्सा है।

इधर शहनाज अंदाजे से रूम से निकली की अब राज लण्ड को पैंटी ब्रा पे रगड़ रहा होगा। वो आगे बढ़ने के लिए हुई लेकिन उसकी हिम्मत ही नहीं हुई। कल रात की ही तरह आज भी उसके पैर नहीं बढ़े। कल रात में और अभी में अंतर बस इतना था की कल शहनाज एक सीढ़ी भी नहीं चढ़ पाई थी और रूम में सोने चली गई थी। आज पहले दो सीढ़ी, फिर चार सीढ़ी और फिर छत के दरवाजे तक जाकर शहनाज रुक गई थी। उसके मन में उठा तूफान शांत ही नहीं हो रहा था, और फिर वो नीचे आ गई। शहनाज बेचैन सी रही ।

शहनाज थोड़ी देर बाद हिम्मत करके उठी और सीधे धड़धड़ाते हुए छत पे चली गई, लेकिन तब तक राज रूम में जा चुका था। शहनाज अपनी पैंटी ब्रा को उठाई और वहीं पे उसे देखते हुए सूँघने लगी की अगर राज देख रहा हो तो उसकी हिम्मत उससे बात करने की हो जाए। शहनाज पैंटी को सूँघते हुए वहीं पे वीर्य को चाटने लगी । उसकी हिम्मत ने जवाब दे दिया और वो नीचे आ गई, और अपनी पहनी हुई पैंटी को उतार दी और राज के वीर्य लगी पैंटी को पहन ली। वो पैंटी के ऊपर से अपनी चूत को सहला रही थी। राज का वीर्य उसकी चूत को भिगो रहा था और शहनाज के हाथों में भी लग गया था, जिसे शहनाज चाट ली।

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शहनाज ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और "आह्ह... राज आप इतने शरीफ क्यों हैं? क्यों नहीं मुझे देखते, क्यों नहीं मुझसे बात करते? आपको क्या लगता है मैं गुस्सा करूँगी ? बिल्कुल नहीं करूँगी। मैं तो आपकी मदद करना चाहती हूँ । उफफ्फ ... राज आपको लगता है की मेरे जैसी पढ़ी-लिखी शरीफ घर की औरत आप जैसे इतने बड़े उम्र के इंसान से दोस्ती क्यों करेगी? ऐसा नहीं है राज अंकल मैं चाहती हूँ की आपसे बातें करूँ। अब आप ऐसे नहीं मानेंगे। अब मैं भी आपको मनाकर ही रहूंगी। आप मुझे शरीफ समझते हैं इसलिए बात नहीं करते ना? तो अब मैं रंडियों की तरह बिहेव करूंगी आपके सामने। तब तो आप मानेंगे ना?" शहनाज की चूत ने पानी छोड़ दिया और वो निढाल होकर सोफे पे पड़ी रही।

राज ने शहनाज को छत पे आता देखकर और पैंटी ब्रा ले जाता हुआ देखकर थोड़ी राहत की सांस ली। शहनाज को अपना वीर्य सूँघता और चाटता हुआ देखकर राज के मुर्दा लण्ड में फिर से जान आ गई थी। लेकिन फिर भी उसने सोचा की अब जल्दी ही कुछ कर लेना चाहिए।
 
आज वसीम को भी आफिस में मन नहीं लग रहा था। वो अपनी बीवी की हरकतों के बारे में सोच रहा था। उसे शहनाज पे बहुत गुस्सा आ रहा था। कैसे शहनाज राज को डिनर पे बुलाई और कैसे उसके लिए तैयार हुई ? कैसे वो उसके सामने खुद को पेश कर रही थी? और कल रात तो वो रंडियों की तरह बिहेव कर रही थी। मादरचोद कभी ब्रा पहन रही है तो कभी खोल रही है। अरे कुतिया चूत में इतनी ही आग है तो सीधे-सीधे जाकर चुदवा क्यों नहीं लेती हरामजादी और क्या पता चुदवाती भी हो, और चुदवा रही हो अभी दोपहर में दो घंटे रोज अकेले रहते हैं दोनों और सिर्फ दोपहर को ही क्यों, मेरे आते ही तो पूरा घर उनका उछल उछलकर चुदवाती होगी।

राज तो शरीफ इंसान है, लेकिन है तो मर्द अगर किसी मर्द को कोई इसके जैसी हसीन रंडी पटाए तो उसका लण्ड तो ऐसे ही टाइट हो जाएगा। राज भी अब तक चढ़ गया होगा रंडी पे। सोचते-सोचते वसीम गुस्से में ही शहनाज और राज की चुदाई सोचने लगा। इंटरनेट पे उसने कई तरह के पोर्न देखे थे और स्टोरीस पढ़ी थी। उसका लण्ड टाइट हो गया और वो अपनी बीवी की चुदाई राज के साथ एंजाय करने लगा। वो मन में सोचने लगा की राज ऐसे चोद रहा होगा तो वैसे चोद रहा होगा।

वसीम बाथरूम में जाकर मूठ मारने लगा, अपनी रंडी बीवी शहनाज के राज से चुदाई के नाम पे | उसका शहनाज से गुस्सा खत्म हो गया था और उसने सोच लिया था की शहनाज को जो करना है करने देगा। घर में कुछ जासूसी कैमरे लगवाकर वो अपनी बीवी को चुदवाते हुये देखेगा और जब उससे मन भर जाएगा तो उसे छोड़ देगा।

रात में राज ने दरवाजा में नाक किया। शहनाज अभी खाना बना ही रही थी। वसीम और शहनाज दोनों चकित हो गये की कौन आया, क्योंकी उनके यहाँ बहुत कम लोग आते जाते थे और जो आते भी थे उनके बारे में इन लोगों के पास पहले से खबर होती थी। वसीम ने दरवाजा खोला तो सामने राज खड़ा था।

दरवाजा खुलते ही राज ने कहा- “नमस्कार वसीम जी, पता नहीं कहाँ आज मेरे घर की चाभी खो गई है...'

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वसीम हँसने लगा और बोला- “अरे राज जी , तो इसमें इतना घबराने वाली कौन सी बात है? आप ही का घर है ये हम सिर्फ किराया देते हैं। आइए अंदर, यहीं रहिए। सुबह देखेंगे की चाभी का क्या करना है?"

तब तक शहनाज भी दरवाजा पे आ गई थी। उसके मन में तो लड्डू फूटने लगे की राज जी आए हैं और रात में यहीं रहेंगे। इससे पहले की राज वसीम की बात पे कुछ बोलता, शहनाज चहकते हुए बोल पड़ी- “और नहीं तो क्या आपका ही घर है। बिंदास आइए...'

राज “शुक्रिया..” बोलता हुआ अंदर आ गया और सोफे पे बैठ गया ।

शहनाज नाइट सूट वाले टाप और ट्राउजर में थी। शहनाज राज के लिए भी खाना बना ली। राज आज भी शहनाज को नहीं देख रहा था। राज वसीम से बातें कर रहा था। शहनाज अभी तक राज के वीर्य लगी पैंटी को ही पहनी हुई थी। राज को सामने देखकर शहनाज की चूत गीली हो गई। उसे लगा की राज ने उसे चोदकर अपना वीर्य उसकी चूत में भरा है और वही उसकी पैंटी में लगा है। वो राज की तरफ देखी जो आज भी उसे नहीं देख रहा था। उसे अपना दोपहर में लिया हुआ प्रण याद आ गया की उसे राज को मनाना है।

शहनाज ने अपने टाप की ऊपर की एक बटन खोल दी। खाना तैयार हो चुका था तो वोने वसीम और राज का खाना सर्व करने लगी। जब वो झुकी तो राज की नजरों के सामने दो पके आम लटक रहे थे।

राज की नजर शहनाज की झूलती चूची पे पड़ ही गई और उसका लण्ड एक झटके से टाइट हो गया। उसका मन हुआ की अभी दोनों हाथ बढ़ाए और रंडी के टाप के बटन को फाड़कर इसकी चूचियों को मसल दे। उसने बड़ी मुश्किल से ये सोचकर खुद पे काबू किया की बस, कुछ दिन और, फिर बताऊँगा तुझे की मैं क्या चीज हूँ ।

इस चीज को वसीम भी देख रहा था की उसकी बीवी कैसे उस बूढ़े हिंदू मर्द के लिए पागल हैं। उसे अपनी बीवी में पहले गुस्सा आया, फिर मजा आया। उसने सोचा की आज रात तो मेरी बीवी मेरे ही घर में इस बूढ़े से चुदवाकर ही मानेगी। ये सोचकर उसका लण्ड टाइट हो गया की वो आज ही अपनी बीवी को एक बूढ़े हिंदू मर्द से चुदवाते देखेगा।

खाना खाने के बाद राज वाश बेसिन के पास हाथ धो रहा था। शहनाज के किचेन में जाने के लिए वहाँ पे जगह कम थी। वसीम टेबल पे ही बैठा हुआ था। शहनाज के मन में शैतानी ख्याल आया। शहनाज राज की पीठ पे अपनी चूचियां रगड़ती हुई किचेन में चली गई।

राज के लिए ये पहला मौका था जब उसने शहनाज के बदन का स्पर्श किया। उसकी लण्ड सनसनाता हुआ टाइट हो गया। राज ने कोई रिएक्सन नहीं दिया लेकिन अपनी पीठ पे शहनाज की गुदज चूचियों की छुअन को अभी

तक महसूस कर रहा था।

शहनाज को राज की तरफ से कोई रिएक्सन ना आता देखकर गुस्सा भी आया। फिर शहनाज को लगा की ब्रा पहने होने की वजह से हो सकता है की राज को पता ही ना चला हो। वो अपने बेडरूम में गई और टाप को उतार कर ब्रा को उतार दी और आल्मिरा में रख दी और बिना ब्रा के बाहर आ गई। टाप के ऊपर का बटन अभी भी खुला ही रखा था उसने पूरे रण्डीपने के मूड में आ गई थी शहनाज । अब उसने सोच लिया था की राज को मनाना है ताकी वो शहनाज के साथ फ्रैंक हो सके।

राज सोफे पे जाकर बैठ गया और रिएक्सन तो उसपे ऐसा हुआ था की उसका लण्ड अब तक टाइट ही था। वो तो आज आया ही इसलिए था की माहौल पता कर सके शहनाज के मन का। दोपहर में शहनाज नहीं आई थी इसलिए वो परेशान हो उठा था लेकिन यहाँ शहनाज की आग को देखकर वो निश्चिंत हो गया। उसे कुछ करने की जरूरत नहीं थी और उसका प्लान सही दिशा में जा रहा था।

वसीम भी अब हाथ धोकर वहीं सोफे पे आ गया।

राज का लण्ड टाइट हो चुका था और वो जान गया था की अब वो जब चाहे इस चिड़िया को पटक कर खा सकता है। लेकिन उसे कोई हड़बड़ी नहीं थी और वो बड़ा खेल खेलना चाह रहा था। उसने एक नजर में ताड़ लिए की शहनाज ब्रा के बिना घूम रही है। उसका भी जी चाह रहा था की अब शहनाज को चोद डाले ।

एक मर्द के लिए तो फेसबुक पे लड़की की दोस्त रिक्वेस्ट रिजेक्ट करना मुश्किल कम होता है और यहाँ तो राज सामने परोसा हुआ खाना रिजेक्ट कर रहा था। राज शहनाज के दिमाग को इस अवस्था में ले आना चाहता था जिसमें वो उसकी हर बात माने। किसी भी कीमत पे राज को ना छोड़ पाए, चाहे और सब कुछ छोड़ना पड़े। इसके लिए बहुत धैर्य की जरूरत थी और राज इसीलिए खुद पे काबू किए हुए बैठा था ।

वसीम ने भी ये नोटिस किया की उसकी बीवी ने ब्रा को उतार दिया है। वो सोचने लगा की कैसी है शहनाज जो इस बूढ़े मर्द के लिए पागल है? और कैसा है ये राज जो इस चिंगारी से खुद को बचाए हुए है? उसने सोचा की शायद मेरी वजह से राज घबरा रहा है या शहनाज खुलकर कुछ नहीं कर पा रही है। उसने सोचा की मैं थोड़ा दूर होकर इन लोगों की मदद कर देता हूँ ताकी मेरी रंडी बीवी अपने आशिक से चुद पाए।

वसीम और राज वहीं बातें कर रहे थे और शहनाज किचेन की सफाई कर रही थी। थोड़ी देर बाद राज ने शहनाज से पानी माँगा। राज सोफे पे बैठ था। वसीम उसी वक़्त फोन पे किसी से बात करता हुआ उठा और रूम में जाकर बात करने लगा। शहनाज पानी लेकर आई। उसके एक हाथ में जग और एक हाथ में ग्लास था। वो कुछ ऐसे लड़खड़ाई की राज की तरफ दोनों हाथ फैलाकर गिरने लगी।
 
राज ने उसे पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया और राज का हाथ शहनाज की चूचियों पे दब गया। शहनाज का रोम- रोम सिहर गया। राज का पूरा हाथ शहनाज की चूचियों की गोलाई को दबा गया था। शहनाज साड़ी थैंक्यू कहती हुई खड़ी हो गई। भले ही उसकी चूची दब गई थी, लेकिन उसने पानी नहीं गिरने दिया था, जग ग्लास से । राज ने ये जानबूझ कर नहीं किया था लेकिन उसके पूरे हाथ में शहनाज की बिना ब्रा की चूची आ गई थी। राज को बहुत मजा आया था।

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हालाँकी शहनाज का प्लान सफल रहा था और आखिरकार वो अपनी चूची राज से मसलवा ही ली थी फिर भी उसे शर्म आ ही गई। शहनाज नजरें झुकाए हुए राज को पानी दी और फिर किचेन में चली गई। राज अपने हाथ पै शहनाज की चूचियों को महसूस करता रहा और शहनाज अपनी चूची पे राज का सख्त हाथ ।

तभी लाइट कट गई। अंदर सबको गर्मी लगने लगी तो वसीम ने ही कहा- छत पे चलते हैं..."

सब छत पे टहलने लगे और शहनाज राज के आस-पास ऐसे चक्कर काटने लगी की जिससे किसी तरह एक और बार वो अपने बदन को राज के बदन में सटा पाए। शहनाज और राज उसी जगह पे थे जहाँ राज शहनाज की पैंटी ब्रा पे अपना वीर्य गिराता था।

छत पे अंधेरा था। वसीम अपने मोबाइल में कुछ देख रहा था और राज से बात कर रहा था। शहनाज को मौका नहीं मिल रहा था। तभी वसीम ने मोबाइल में एक वीडियो प्ले किया और राज को दिखाने लगा। शहनाज भी राज के साइड से आकर वीडियो देखने लगी। ये सबसे अच्छा मौका था।

शहनाज राज के बदन में चिपक गई। उसकी गोल-गोल मुलायम चूचियां राज के बाजू में दब रही थी। शहनाज को बड़ा सुकून मिल रहा था। अब शायद राज थोड़ा रिलैक्स हो पाएंगे। लेकिन राज ने वीडियो देखते हुए ही अपने जिश्म को थोड़ा आगे किया तो शहनाज भी आगे हुई। राज वीडियो देखता हुआ हँसने लगा और थोड़ा और आगे हुआ। शहनाज अब इससे आगे नहीं हो सकती थी। उसे बहुत गुस्सा आ रहा था अब ।

थोड़ी देर में सब सोने चले गये, लेकिन शहनाज की आँखों में नींद नहीं थी। वो समझ नहीं पा रही थी की क्या करे? वो अपनी चूचियों में राज का सख्त हाथ महसूस कर रही थी और चाह रही थी की राज अच्छे से आकर उसकी चूचियां मसल डाले। लेकिन राज तो इतना शरीफ है की देखता तक नहीं, लेकिन इतना प्यासा है की पैंटी पे अपना वीर्य बर्बाद कर रहा है। उसे गुस्सा आ रहा था की जब अंदर से इतने बेचैन हो तो कुछ करो। इतना हिंट दे रही हूँ, इतनी तरह से कोशिश कर रही हूँ फिर भी कोई असर होता ही नहीं जनाब पे अब क्या करूँ? सीधा-सीधा जाकर बोल दूं की चोद लो मुझे। ये वीर्य मेरी पैंटी पे नहीं मेरी चूत में डालो। लगता है यही सुनकर मानेंगे राज जी ।

शहनाज राज के खयालों में खोई थी तभी वसीम उसकी तरफ करवट बदला और उसकी चूची पे हाथ रखता हुआ बोला- "ब्रा क्यों खोल दी ?"

शहनाज थोड़ा घबरा गई लेकिन तुरंत बोली- “बहुत गर्मी लग रही थी और पेट भी टाइट लग रहा था तो खोल दी । तब थोड़ा रिलैक्स हुई..."

वसीम उसकी चूचियों को बाहर निकालकर मसलने लगा तो शहनाज वसीम का हाथ हटा दी और उसे मना कर दी की तबीयत ठीक नहीं लग रही। शहनाज चाहती थी की अभी राज आकर उसकी चूचियों को मसलता तो ज्यादा मजा आता।

वसीम करवट बदलकर सोने की आक्टिंग करने लगा। उसे लगा की उसके सोने के बाद शायद शहनाज और राज चुदाई करें। राज को नींद नहीं आ रही थी और वो शहनाज की चुदाई के सपने देख रहा था।

*****
 
शहनाज का पेट दर्द और राज

शहनाज को भी नींद नहीं आ रही थी। क्योंकी वो चाहती थी की किसी तरह राज उसके नजदीक आए और उसके बदन से खेले।

आधे घंटे भी नहीं हुए की शहनाज पेट दर्द चिल्लाने लगी। उसने वसीम को जगाया और जोर-जोर से कराहने लगी। वो मछली की तरह तड़पने लगी। वसीम जाग गया और राज भी जागकर इसके रूम में आ गया। वसीम को समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे? घर में कोई दबाई भी नहीं थी और रात काफी हो चुकी थी। शहनाज इधर से उधर छटपटा रही थी। वसीम अपनी बीवी से बहुत प्यार करता था और शहनाज को ऐसे देखकर वो घबरा गया था।

राज बोला- “मुझे देखने दो की कहाँ दर्द है?"

शहनाज सीधी लेटी हुई थी, वो अपने पेट से शर्ट को उठा ली और अब उसका चमकता हुआ पेट राज की नजरों के सामने था। शहनाज अभी मात्र 23 साल की थी और उसके पेट में अभी तक चर्बी जमा नहीं हुई थी, इसलिए उसका पेट पूरी तरह फ्लैट था। शहनाज का ट्राउजर नाभि से नीचे ही था, इसलिए बहुत सेक्सी सा दृश्य था ।

राज ने अपना हाथ बढ़ाया और शहनाज के चिकने पेट को सहलाता हुआ दबाने लगा। शहनाज का पेट गैस की वजह से टाइट था और इसलिए वो दर्द से छटपटा रही थी। राज शहनाज के पेट को दबा दबाकर सहला रहा था।

शहनाज की पेट पूरी गोरी चिकनी थी। शहनाज ब्रा नहीं पहनी हुई थी और उसने टाप को चूचियों तक उठा लिया था। उसका ट्राउजर नाभि से नीचे था और शहनाज का पूरा नाभि क्षेत्र राज के सामने था और उसके लिए फुल अवेलबल था। राज के लिए खुद को रोकना बड़ा मुश्किल हो रहा था। उसने बड़ी मुश्किल से अपने एक्सप्रेशन को संभाल रखा था। वो वसीम के सामने उसकी हसीन बीवी की नाभि को सहला रहा था।

राज शहनाज के पेट को सहला रहा था और शहनाज अपने बदन को ऐंठने लगी। शहनाज का जी चाह रहा था की राज अपना हाथ पैंट के अंदर चूत पे या फिर और ऊपर शर्ट के अंदर ले जाए जहाँ उसकी टाइट चूची बिना ब्रा के खड़ी थी। शहनाज पेट दर्द से जो भी परेशान हो लेकिन उसे मजा बहुत आ रहा था। उसके अंदर ये खुशी तो थी ही को आज राज ने उसकी चूचियों को भी छू लिया और पेट भी सहला लिया।

वसीम परेशान सा चुपचाप खड़ा देख रहा था। उसे परेशानी में राज से पूछा- "क्या हुआ है इसे?"

राज बोला- “कुछ खास नहीं, गैस बन गई है पेट में.." फिर राज ने वसीम को एक बोतल में गरम पानी भरकर लाने को कहा।

वसीम दौड़ता हुआ किचेन की तरफ भगा और पानी गरम करने लगा।

अब रूम में सिर्फ राज और शहनाज थे। शहनाज अपने पेट को उघारे लेटी हुई थी और राज उसके पेट को सहला रहा था। वसीम के जाते ही और तेज दर्द की आक्टिंग करते हुए शहनाज राज का हाथ पकड़ ली और ऊपर अपनी चूची पे रख ली।

उफफ्फ ... राज हड़बड़ा गया। उसे शहनाज से इस बोल्डनेस की उम्मीद नहीं थी। राज हड़बड़ाते हुए हाथ नीचे खींचा की कहीं अगर वसीम ने देख लिया तो पूरा खेल, पूरा प्लान चौपट हो जाएगा। लेकिन शहनाज की पकड़ मजबूत थी। उसने फिर से हाथ ऊपर खींच लिया। इस खींचा तानी में शहनाज का टाप थोड़ा सा और ऊपर उठ गया था और चूची के नीचे का हिस्सा चमकने लगा था।

शहनाज की चूचियां राज के हाथ से दब रही थी नीचे से अब राज खुद को रोक नहीं पाया और उसने हाथ को ढीला कर दिया। शहनाज फिर से राज के हाथ को ऊपर की, और अब राज के हाथ में शहनाज की नंगी चूचियां थी। उफफ्फ... राज ने ना चाहते हुए भी कस के एक बार दबा ही दिया और फिर हाथ हटा लिया।
 
शहनाज की प्यास और बढ़ गई। राज का मन तो नहीं था हाथ हटाने का, लेकिन उसे वसीम का डर था की कहीं अगर उसने देख लिया तो हंगामा ना हो जाए और हाथ आया हुआ शिकार उससे दूर ना चला जाए। ये रिस्क वो नहीं ले सकता था।

राज ने बहुत मेहनत और इंतजार किया था इसके लिए राज अलग होकर खड़ा हो गया, क्योंकी वो अगर शहनाज के पास रहता तो शहनाज उसे नहीं छोड़ती।

शहनाज भी हाथ से आए मौके को निकलता देखकर पागल हो गई। वो अपनी पीठ को उठाते हुए अपने टाप के ऊपर से अपनी चूचियां मसलने लगी। उसने चूची मसलते हुए टाप को भी ऊपर कर लिया। राज नजरें नीचे किए खड़ा था, लेकिन चूचियों के चमकते ही उसने कनखियों से देखा। शहनाज की गोल-गोल चूची और उसके बीच में ब्राउन कलर का निपल कयामत ढा रहा था।

वसीम के आने की आहट हुई और शहनाज टाप नीचे करके अपनी चूची ढक ली। वसीम ने बोतल राज को दे दिया।

राज ने उसे बताया- "बोतल को पेट पे रखकर ऊपर से नीचे रोल करो..."

वसीम हड़बड़ाया हुआ था, बोला- “मुझे ये सब नहीं आता, आप ही करिए ना राज जी , आप अच्छा करेंगे...'

शहनाज मन ही मन मुश्कुरा दी की फिर से राज जी उसके जिश्म को टच करेंगे। राज ऐसा नहीं करना चाहता था। क्योंकी उसे डर था की कहीं शहनाज वसीम के सामने कुछ ऐसी वैसे हरकत ना कर दें। लेकिन और कोई उपाय नहीं था।

राज फिर से बेड पे शहनाज के बगल में बैठ गया और बोतल को शहनाज के पेट पे ऊपर से नीचे रोल करने लगा। राज पूरा ख्याल रख रहा था की वो शहनाज को कहीं से टच ना करे। थोड़ी देर में शहनाज का दर्द थोड़ा कम हो गया।

वसीम देख रहा था और अब उसका ध्यान गया की राज उसकी नजरों के सामने उसकी बीवी के पेट को सहला रहा है। जब राज ने एक बार शहनाज के पेट को दबाकर देखा की अब कैसा है यो अचानक वसीम के लण्ड में हरकत हुई। उसका ककोल्ड मन जाग गया था।

वसीम सोचने लगा। वसीम की आँखों में जो दृश्य चल रहे थे उसमें शहनाज नंगी हो चुकी थी और राज उसकी चूचियां चूस रहा था। शहनाज का पेट दर्द कम हो गया लेकिन वो अब भी कुछ ऐसा ही चाह रही थी की राज उसके पेट को सहलाता रहे और चूचियों को मसले। लेकिन राज अपनी जगह से उठ गया और रूम से बाहर आ गया। राज बिल्कुल शातिर खिलाड़ी की तरह अपनी चाल में मस्त था।

सब सोने चले गये। शहनाज की एक तरह से जीत हुई थी। जैसा उसने सोचा था दोपहर में, उसने उसी तरह रंडियों की तरह की हरकत की थी राज के सामने उसने पहले ब्रा के ऊपर से फिर बिना ब्रा के टाप के ऊपर से और फिर अपनी नंगी चूचियों को राज से मसलवा लिया था और पेट तो बहुत देर तक सहलाया था राज ने। शहनाज सोच रही थी की अब राज जी को रिलैक्स लग रहा होगा। अब तो मैंने अपनी तरफ से इतना न्योता दे दिया है। शायद अब वो मेरे से बात करें, मुझे देखें। अब शर्माना घबराना बंद कीजिए राज जी , अब आपको मेरी पैंटी खराब करने की जरूरत नहीं है।

राज बेड पे लेटते ही अपने लण्ड को फ्री किया और सहलाने लगा। उसकी हथेली पे शहनाज की नंगी चूचियों की छुअन अब भी थी। उसकी आँखों के सामने शहनाज की नंगी चूचियां चमक रही थीं। उफफ्फ आग भर गई है रांड़ की चूत में अब ये पूरी तरह तैयार है और अब इसे चोदना होगा, नहीं तो कहीं ऐसा ना हो की देर हो जाए। बस एक-दो दिन और फिर उसके बाद तो तू मेरी पालतू कुतिया बनकर मेरे इशारों पे नाचेगी। राज अपने लण्ड को सहलाता हुवा सो गया।

शहनाज रोज की तरह सवेरे जाग कर घर में झाड़ू की और फ्रेश होकर नहाने चली गई। वसीम भी रोज की तरह सो रहा था लेकिन शहनाज की आहट सुनकर राज की आँखों से नींद उड़ चुकी थी। राज सोने की आक्टिंग करता हुआ शहनाज पे ही नजर रखे हुए था।



थोड़ी देर में राज उठा तो उसे लग गया की शहनाज बाथरूम में है और वसीम सो रहा है। उसके लिए मौका अच्छा था। राज छुप कर शहनाज के बाथरूम में झाँक कर देखने लगा। अंदर उसकी होने वाली रांड़ पूरी नंगी थी। उसका गोरा जिश्म पानी में भीग कर चमक रहा था। सुडौल चूचियां जवानी के नशे में टाइट थीं, जिसे कल राज ने मसला था, भले एक ही बार मसला हो मौका तो भरपूर था उसके पास लेकिन तब सही चाल नहीं होती वो चूची के नीचे चिकना सपाट पेट चूत तक जिसे रात में राज अच्छे से सहला चुका था, लेकिन मजा तब आता जब वो अपने हिसाब से पेट को सहलाते हुए चूमता भी और चूची चूत भी मसलता।

चूत पूरी चिकनी थी, एक भी बाल नहीं। राज के लण्ड के लिए सीधा चिकना रास्ता, चिकनी जांघें शहनाज शावर के नीचे थी और पानी उसके जिश्म को भिगोता हुआ नीचे उतर रहा था।

राज ने एक नजर वसीम पे डाला, तो वो सो रहा था। राज ने अपने लण्ड को बाहर निकाला और सहलाने लगा। आज पहली बार उसने शहनाज के नंगे जिश्म को देखा था। राज कई बार शहनाज के नाम की वीर्य गिरा चुका था। लेकिन आज वो नंगी उसके सामने थी। राज मूठ मारने लगा। अंदर शहनाज का नहाना हो चुका था और राज का वीर्य गिरने वाला था। राज ने बाथरूम के दरवाजा पे ही डोर मैट्रेस के बाद नीचे टाइल्स पे अपना वीर्य गिरा दिया। वीर्य बर्बाद नहीं होना चाहिए। शहनाज को पता चलना चाहिए की यहाँ पे राज ने उसे नहाता देखकर फिर से अपना वीर्य गिराया है। राज अपने रूम में चला गया जिसमें वो रात में सोया था और छुपकर देखने लगा।

थोड़ी देर में बाथरूम का दरवाजा खुला और शहनाज नजर आई। शहनाज किसी अप्सरा की तरह नजर आ रही थी । कमर के नीचे बँधी क्रीम कलर की साड़ी, स्लीवलेश ब्लाउज़ और उसके बीच में सिंगल लाइन में आँचल, जिससे शहनाज का एक उभर झाँक रहा था। गीले बाल इस हुश्न को और बढ़ा रहे थे।

शहनाज बाथरूम से निकलकर मट्रेस पे पैर पोछी और जैसे ही कदम बढ़ाई की उसका पैर राज के वीर्य पे पड़ा । चिपचिप करते ही वो नीचे देखी तो उसे कोई चमकदार सफेद लिक्विड जमीन पे गिरा हुआ दिखा। उसकी धड़कन तेज हो गई। वो अच्छे से देखने लगी और फिर कन्फर्म होने के लिए वो बैठकर देखने लगी। उफफ्फ ... तो क्या राज जी मुझे नहाता देख रहे थे? ये सोचकर शहनाज गई की राज ने उसे नंगी नहाता हुआ देख लिया है। उसे लगा की कल रात उन्होंने खुद को तो रोक लिया, इसलिए उनकी प्यास अब और बढ़ गई होगी। वो मेरे पेट को सहला तो रहे थे लेकिन मजा नहीं लिया, क्योंकी उन्होंने अपनी फीलिंग्स को दबा रखा है। कोई बात नहीं राज जी , मैं भी देखती हूँ की आप और कितना दबाते हैं खुद को ।

कल रात तो आपने मेरी चूचियों से हाथ हटा लिया था, देखती हूँ की क्या-क्या हटाएंगे और खुद को कितना तड़पाएंगे? मुझसे दूर रहेंगे और छिपकर वीर्य गिराएंगे, ये कौन सी बात हुई? अगर अभी भी आपका डर और शर्म मुझसे खतम नहीं हुआ है तो अब होगा। अब मेरा रण्डीपना और बढ़ेगा और तब देखूँगी की आप खुद को कितना रोकते हैं, और कैसे रोकते हैं? लेकिन एक बात तो तय है की आप बहुत महान इंसान हैं। इतने में तो कोई भी मर्द अब तक बिछ गया होता मेरे ऊपर इसलिए अब मुझे भी जिद होती जा रही है आपको खोलने की।
 
शहनाज उंगली से वीर्य को उठाई और उठाते हुए मुँह में चाटने लगी। वो फिर से ऐसा की और जब उसका मन नहीं भरा तो वो जमीन को चाटकर वीर्य चाटने लगी। उसकी चूत गीली होती जा रही थी। वो जब झुक कर वीर्य चाट रही थी तो उसके मंगलसूत्र पे भी राज का वीर्य लग गया था। जब सारा वीर्य चाटने के बाद वो खड़ी हुई तो उसका ध्यान मंगलसूत्र पे लगे वीर्य में गया, जो ब्लाउज़ के ऊपर भी थोड़ा सा लग गया था।

उसके सुहाग की निशानी पे किसी और का वीर्य लगा है, ये सोच ने उसे अंदर से पूरी तरह गीला कर दिया। वो मंगलसूत्र को साफ नहीं की। उसने सोचा की पैंटी ब्रा तो बहुत बार वीर्य से भरी थी, आज मंगलसूत्र को भी वीर्य लगा ही रहने देती हूँ।

राज शहनाज को अपने रूम से देख रहा था और शहनाज की हालत देखकर उसे खुद पे गर्व हुआ की अब शहनाज मन से उसकी रांड बन चुकी है, और अब बस उसके तन पे कब्जा करना बाकी है। राज ने अपने लण्ड को अड्जस्ट किया और बेड पे लेट गया।

शहनाज रूम में आकर चेहरे पे क्रीम लगाई और फिर आँखों में काजल और होठों पे लिप ग्लास। ये उसका रोज का नियम था। उसने सिंदूर की डिब्बी को हाथ में लिया और अपनी माँग में भरने जा रही थी की उसे कुछ ख्याल आया। वो अपने मंगलसूत्र पे लगी वीर्य को उंगली में लगाई और अपनी माँग में भर ली। आहह.... पता नहीं क्या हुआ लेकिन उसे बहुत मजा आ रहा था। उसने पूरे मंगलसूत्र के वीर्य को अपनी माँग में भर लिया और फिर सिंदूर लगा ली। सिंदूर शहनाज की माँग में लगे वीर्य से चिपक गया। शहनाज माथे पे लाल कुमकुम लगा ली। वो आईने में खुद को निहार रही थी। उसकी पैंटी पूरी तरह गीली हो चुकी थी।

शहनाज मन ही मन सोच रही थी- “लीजिए राज जी , अब तो मेरे मंगलसूत्र और माँग में भी आपका वीर्य लग गया। अब तो एक तरह से आप भी मेरे पति हुए। अब तो मेरे पूरे जिश्म पे आपका भी हक हैं और मैं चाहकर भी आपको मना नहीं कर सकती। अब तो मुझसे शर्माना छोड़ दीजिए और खुलकर जी लीजिये अपनी जिंदगी..." शहनाज मुश्कुराते और शर्माते हुए रूम से बाहर आ गई।

आज वो इबादत नहीं की और किचेन में जाकर चाय बनाने लगी। वो चाय लेकर पहले राज के कमरे में गई, जहाँ राज को सच में नींद आ गई थी। शहनाज उसे सोता देखकर सोच रही थी- "अभी मुझे नंगी नहाते देखे और वीर्य गिराए, तब तो बहुत मजा आ रहा होगा जनाब को। लेकिन अभी सोने की आक्टिंग कर रहे हैं."

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उसका मन हुआ की राज के साथ कुछ करे लेकिन फिर वो सोची की अभी सही वक़्त नहीं है। वसीम घर में है, और ये कुछ बोले अगर तो मैं कुछ बोल नहीं पाऊँगी। दोपहर का वक़्त तो अपना है आज। उसने फार्मल आवाज में कहा- “राज जी गुड मार्निंग, उठिए चाय हाजिर है, उठिए उठिए "
 
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