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Adultery शहनाज की बेलगाम ख्वाहिशें

शहनाज फिर बोलना स्टार्ट की- “ राज जी सच में बहुत अज़ीम हैं। कहीं तुम भी मुझे गलत मत समझ लो, लेकिन जब मैं उनसे पूछी की आप मुझसे बात क्यों नहीं करते, करते तो शायद आपको राहत मिलती..."

राज जी बोले- "तुमसे दूर रहता हूँ तब तो इतना मुश्किल है जीना, अगर बातें करूँ या देखूं तो शायद खुद को रोक ना पाऊँ और तुम्हें पकड़ ही लूँ..."

मैं भी बोली - "तो पकड़ लेते...

राज जी बोले- मैं किसी के साथ गलत नहीं कर सकता...'

वसीम सोचने लगा की शहनाज सही कह रही है। ये तो मैंने खुद देखा है की शहनाज की कोशिशों के बाद भी राज जी उसकी तरफ देखते भी नहीं थे। मेरी बीवी होने के बावजूद मेरी आँखें फटी रह जाती थीं, लेकिन वो नहीं देखते थे। मैं भी कितना पागल हूँ जो क्या-क्या सोचने लगा था। ओह्ह... शहनाज तुम कितनी अच्छी हो। आई लव यू। खामखा मैं तुमपे शक कर रहा था और बुरा सोच रहा था। तुम तो किसी की मदद कर रही थी?

फिर वसीम ने शहनाज से पूछा- तो अब .. अब क्या चाहती हो तुम?"

शहनाज- “मैं उनकी मदद करना चाहती हूँ। ये सब मेरी वजह से हुआ है। या तो कहीं और घर ले लो, जिससे हम उनसे दूर हो जाएं तो फिर उन्हें ठीक लगेगा या जैसा भी लगेगा मेरे सामने तो नहीं होगा और नहीं तो फिर कुछ ऐसा करो की हम उनकी मदद कर पाएं। मैं किसी भी तरह उनकी मदद करना चाहती हूँ। मैं नहीं चाहती की कोई मेरी वजह से तड़पता रहे..." कहकर शहनाज वसीम की गोद में जा गिरी और उसके कंधे पे सिर रख दी।

वसीम शहनाज को सहलाता हुआ बोला- "इतनी जल्दी घर ढूँढ़ना आसान नहीं है। और वैसे भी अगर तुमने उनकी सोई तमन्नाओं को जगाया है तो तुम्हारे दूर जाने से भी वो कम नहीं होगा। हाँ ये अलग बात है की तुम्हारी नजरों के सामने नहीं होगा। अब ये बताओ की किस तरह उनकी मदद करना चाहती हो?"

शहनाज- “किसी भी तरह। मैं नहीं चाहती की मेरी वजह से कोई इंसान तड़पे ..."

वसीम- “तुम्हें क्या लगता है की तुमसे बात कर लेने से उनकी घुटन कम हो जाएगी ? जान तुमने उनकी बीवी की यादों को जगाया है। सही कहा है उन्होंने बात करने के बाद उनके अरमान और जागेंगे। उनके लिए खुद को रोकना और मुश्किल हो जाएगा..."

शहनाज- “तो मैं कुछ भी करूँगी लेकिन उन्हें घुट-घुटकर जीने नहीं दूँगी..."

वसीम ने शहनाज के सिर को कंधे से उठाया और उसकी आँखों में झाँकता हुआ बोला- "तो फिर एक ही उपाय है। तुम्हें अपना जिश्म उसे सौपना होगा। राज जी के साथ सेक्स करना होगा.” और बोलते-बोलते वसीम का लण्ड टाइट हो गया।

शहनाज कुछ नहीं बोली। मन ही मन वो सोची- “बाकी सारे उपाय करके मैं देख चुकी हूँ और यही आखिरी उपाय है की मैं राज जी से चुदवाऊँ। वो मेरे जिश्म को रंडी की तरह रौंद डाले, मसल डाले, मैं तैयार हूँ इसके लिए । लेकिन उस फरिश्ता समान नेक इंसान को तुम्हारी मंजूरी चाहिए। अगर हर इंसान उनकी तरह खुद पे काबू पाना सीख जाए तो ये दुनियां स्वर्ग बन जाए?"

वसीम फिर बोला- “बोलो, यही एकलौता उपाय है की तुम उससे उसकी मर्जी के हिसाब से चुदवा लो । तभी वो राहत महसूस कर पाएगा...

शहनाज थोड़ी देर चुप रही फिर बोली- "मैं क्या करूँ। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा। अगर उन्हें कुछ हो गया या कुछ कर लिया तो ये पूरी तरह से मेरा गुनाह होगा..."

वसीम भी थोड़ी देर चुप रहा। उसका लण्ड टाइट होने लगा। वो एक लम्बी सांस लिया और बोला- "अगर तुम उसे अपना जिश्म सौंपने के लिए तैयार हो तो मैं तुम्हारे साथ हूँ। मुझे अपनी बीवी पे भरोसा है। अगर तुम्हारे चुदवा लेने से राज जी जैसा नेक इंसान अपनी जिंदगी फिर से जी सकता है, तो मुझे कोई एतराज नहीं। मुझे खुशी है की तुम अपना तन देकर भी किसी की मदद करना चाह रही हो। तुम मेरी पर्मिशन से ये कर रही हो तो मैं हर कदम पे तुम्हारे साथ हूँ..."

शहनाज खुश होती हुई वसीम के माथे को चूम ली- “क्या सच? मुझे पता था आप मेरा यकीन करेंगे। आप समझेंगे मुझे। ये बहुत बड़ी बात है वसीम। आप भी बहुत अज़ीम हैं-."

वसीम ने भी शहनाज के माथे पे किस किया, और बोला- “अज़ीम मैं नहीं तुम हो। तुम अगर मुझे बिना बताए राज जी से चुदवा लेती तो मुझे तो पता भी नहीं चलता कुछ। लेकिन तुमने मुझसे सलाह ली, मेरी पर्मिशन ली ये बड़ी बात है..."

शहनाज बोली- “मैं तो ये सोच रही थी की अगर मैं किसी इंसान को एक बार खुद को दे दूं, और इससे उसकी जिंदगी बदल जाए तो मुझे ये करना चाहिए। अगर मैं अपना जिश्म देकर उनकी खोई खुशियां वापस ला पाऊँ तो मुझे खुशी होगी..."

वसीम सोचने लगा की "अगर ये बिना मुझे बताए राज से चुदवा लेती तो मैं क्या करता? मैं तो सोच भी चुका था की दोनों खूब चुद रहे होंगे। तो अब मेरी 23 साल की जवान खूबसूरत मुस्लिम बीवी 50 साल के बूढ़े मोटे काले हिंदू मर्द से चुदेगी..."

शहनाज बेड से उतरकर बाथरूम जा चुकी थी और वसीम अपने टाइट लण्ड को सहलाने लगा था। अब भला वसीम को कौन समझाए की शहनाज गई तो थी बिना उसके पर्मिशन के ही चुदवाने और चुद भी गई होती अगर राज ने बड़े शिकार के लिए छोटी कुर्बानी ना दी होती तो।

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शहनाज बाथरूम में सोचने लगी की “अब कहाँ बचकर जाओगे राज जी । अब तो आपको मुझे चोदना ही होगा। बहुत वीर्य बहाया है आपने मेरी पैंटी ब्रा पें, अब तो मेरी चूत में बहाना ही होगा?"

शहनाज बाथरूम से आई और नंगी ही सोने लगी। उसकी चूत में चींटियां चल रही थी। वसीम ने उसे चोदकर उसकी प्यास को और बढ़ा दिया था। लेकिन वसीम से चुदवाना उसकी मजबूरी थी, नहीं तो वसीम से वो राज से चुदवाने की पर्मिशन नहीं ले पाती। अपने पति को इस बात के लिए मनाना की मैं किसी और मर्द से चुदवाना चाहती हूँ, मामूली काम नहीं था। लेकिन ये राज के वीर्य का जादू ही था जो शहनाज इस काम को भी कर ली। अब शहनाज अपने पति की पर्मिशन लेकर राज से चुदवाने वाली थी।
 
शहनाज सोच रही थी अब तो राज जी मना नहीं कर पाएंगे। हाय मेरा तो मन कर रहा है की मैं अभी ही इसी तरह उनके रूम में चली जाऊँ। वो तो मुझे नंगी देखते ही बिफर पड़ेंगे और जाने को कहेंगे। फिर मैं हँसती हुई वसीम को आवाज दूँगी और वसीम कहेगा की राज जी आप मेरी बीवी को चोदिए । अब ये मेरी बीवी नहीं आपकी रंडी है। फिर मैं राज जी से लिपट जाऊँगी और तब तो वो मुझे चोदेंगे ही। उफफ्फ ... अब उनका बड़ा सा लण्ड मेरी चूत में जाएगा। आहह.... राज जी , फाड़ डालना मेरी चूत को अपने मूसल लण्ड से रौंद डालना मुझे कोई रहम मत करना आपनी रंडी पे जो जो करना हो सब करना। कोई अरमान बाकी मत रखना..." शहनाज सोचती जा रही थी और उसकी चूत गीली हो गई थी।

शहनाज फिर से बाथरूम गई और अच्छे से बैठकर चूत में उंगली अंदर-बाहर करने लगी। उसका जिश्म जल रहा था। शहनाज अपनी चूत से पानी निकाल ली। वो थोड़ी देर वहीं बैठी रही। फिर सांस नार्मल होने पे बेड पे आई।

लेटे-लेटे वो सोचने लगी की "ये क्या हो गया है मुझे? क्या मैं राज जी से चुदवाने के लिए परेशान हूँ मेँ तो उनकी परेशानी देखकर उनकी मदद करना चाहती थी। लेकिन ये क्या हो गया है मुझे जो मैं चुदवाने के लिए परेशान हो रही हूँ। क्या सच में मैं रंडी बन गई हूँ। हाँ, तभी तो मैं ऐसे कर रही हूँ। किसी की मदद के लिए कोई रुपया पैसा देता है, या और कुछ करता है, लेकिन रंडी बनकर चुदवाने नहीं लगता।

मैं राज जी का वीर्य सूंघकर और उनका मोटा लण्ड देखकर पागल हो गई हूँ। जब से उनका लण्ड देखी हूँ तो या तो वसीम से चुदी ही नहीं और अगर चुदी तो मजा बिल्कुल नहीं आया। अगर मुझे चुदवाना नहीं था तो फिर मैं क्यों पागल थी राज जी को अपना जिश्म दिखाने के लिए? क्यों मैं उनसे चिपट गई और खुद अपने कपड़े उतारी। उसके बाद भी जब उस नेक इंसान ने नहीं चोदा, तो उनसे चुदवाने के लिये उन्हें कैसे-कैसे समझा रही थी। खुद को रंडी तक साबित कर ली? शहनाज का सच उसके सामने आ गया था। इतने दिनों से वो खुद से झूठ कहे जा रही थी।

लेकिन अब जब राज से चुदवाने के रास्ता पूरा क्लियर है तो उसके अच्छे मन ने आखिरी आवाज लगाई है उसे- "छी: मैं कितनी गंदी जो गई हूँ। मैं अपने पति से धोखा करने चली गई थी। बेहया की तरह खुद को रंडी बनाकर राज जी के आस-पास मंडरा रही थी की किसी तरह वो मुझे चोद दे। भला हो उस इंसान का की उसने मुझे नहीं चोदा, नहीं तो मैं कहीं की नहीं रहती । उफफ्फ .. मैं अपने पति तक को मना ली अपनी ही चुदाई किसी और से करवाने के लिए और वसीम को भी तो मना करना चाहिए था।

ओह वसीम सच में आप कितने अज़ीम हैं जो अपनी घटिया बीवी पे इतना भरोसा करते हैं की उसे किसी और से चुदवाने की भी पर्मिशन दे दिए। नहीं वसीम आपसे पर्मिशन लेना मेरी मजबूरी थी, नहीं तो अगर राज जी ऐसा नहीं करते तो मैं तो उनसे चुद भी चुकी होती। मुझे तो खुद पे घिन्न आ रही है की मैं किसी और से चुदवाने के लिए क्या-क्या कर रही हूँ?"

शहनाज पूरी तरह से बेचैन हो गई "नहीं, मैं ये नहीं कर सकती। शुक्र है अल्लाह की मैं अभी तक चुदी नहीं हूँ। मेरे लिए गैर-मर्द के बारे में सोचना भी पाप है और मैं यहाँ गैर-मर्द से चुदवाने के लिए इतने जतन कर रही थी। लेकिन अब मुझे खुद को सम्हालना होगा। मैं चुदवा नहीं सकती किसी और से राज जी का जो होना है वो हो मदद करने का मतलब जिश्म सौंपना नहीं होता। मैं उनसे बात कर सकती हूँ, उन्हें समझा सकती हूँ, लेकिन और कुछ नहीं कर सकती। शुक्रिया अल्ला की आपने मुझे सम्हाल लिया। बचा लिया मुझे अपवित्र होने से..." और शहनाज सोचते-सोचते सो गई।

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आज वसीम की नींद सवेरे खुल गई। दरअसल वो रात में चैन से सो ही नहीं पाया था। वो शहनाज और राज के बारे में अक्सर बहुत कुछ सोचता रहता था और जब भी सोचता था उसे बहुत मजा आता था और अब तो उसकी उत्तेजना का ठिकाना नहीं था की उसकी 23 साल की बीवी 50 साल के मर्द से चुदेगी।

शहनाज अभी तक नंगी ही सो रही थी। वसीम उसके चिकने जिश्म को गौर से देखने लगा और सोचने लगा की राज कैसे-कैसे क्या करेगा? उफफ्फ ... राज जी तो पागल जो जाएंगे मेरी बीवी को पाकर कितना रोमांचक होगा जब गोरी शहनाज और काला राज एक दूसरे में लिपटे चिपते चुदाई कर रहे होंगे। उफफ्फ ... मुझे कुछ करना होगा ताकी मैं इस चुदाई को लाइव देख सकूँ। मुझे पता होना चाहिए की ये लोग कहाँ चुदाई करेंगे और कब ? उफफ्फ... जिस चीज के बारे में सोचकर मेरा लण्ड टाइट हो जाता था वो अब सच में होने वाला है। मैं इसे मिस नहीं कर सकता।

वसीम बाथरूम से फ्रेश होकर आया। तब तक शहनाज भी जाग चुकी थी। वो खुद को ऐसे नंगी पाकर शर्मा गई। वो जब जागती थी तब वसीम सोया रहता था, तो कोई बात नहीं थी, लेकिन वसीम को जगा हुआ पाकर वो शर्मा गई और जल्दी से उठकर अपनी नाइटी पहन ली।

शहनाज अपने डेली रूटीन में लग गई। वसीम को जगा देखकर वो परेशान हो रही थी की कहीं वसीम इसलिए तो नहीं जाग गये की में आज राज जी के साथ चुदवाने वाली हूँ? और ये बात उन्हें परेशान कर रही होगी। वसीम मुझसे बहुत प्यार करते हैं इसलिए मेरे कहने पे पर्मिशन तो दे दी, लेकिन इस बात को बर्दास्त नहीं कर पा रहे होंगे और परेशान होंगे। अपनी बीवी को किसी और के पास चुदवाने के लिए भेजना मामूली बात है क्या? ये अलग बात है की उन्होंने मुझे आज तक कभी किसी चीज के लिए मना नहीं किया, कभी कोई बंदिश नहीं लगाई मेरे पे, फिर भी किसी और से चुदवाने की पर्मिशन देना तो बहुत बड़ी बात है। नहीं वसीम, आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आपकी बीवी आप ही की रहेगी, किसी और की रंडी नहीं बनेगी। मैं उनसे चुदवाने नहीं जा रही। और चुदवाने तो क्या मैं उनके आस-पास भी नहीं जाने वाली आप जल्दी से कोई दूसरा घर देख लीजिए और हम यहाँ से दूर होकर सुकून से अपनी दुनियां में जियेंगे ।

शहनाज नहाने के बाद इबादत करने लगी और वहाँ भी उसने अल्लाह का शुक्रिया अदा किया की- “आपने मुझे बचा लिया अल्लाह, मुझे सच्ची राह दिखाना, मुझे और मेरे पति को एक साथ रखना और हमेशा खुश रखना..”

शहनाज के लिए चाय लिए तैयार था।

शहनाज वसीम के हाथ से चाय लेते ही बोल दी की "मैं राज जी से नहीं चुदवाऊँगी...”

वसीम के तो सारे सपने टूटकर बिखर गये, और कहा- "क्यों, अचानक क्या हो गया? वसीम खुद को नार्मल दिखाते हुए ही बोला ।

शहनाज- “कुछ नहीं, लेकिन मैं उनके पास नहीं जाने वाली..." शहनाज ने मजबूती से अपना जवाब सुना दिया।

वसीम- “रात में खुद इतना कुछ बोली, मुझे इतना समझाई और फिर सोकर जागी तो मूड चेंज। अब राज जी की हेल्प नहीं करनी क्या?"

शहनाज- “मैं अभी भी उनकी हेल्प करना चाहती हूँ, क्योंकी वो मेरी वजह से परेशान हैं, लेकिन इस तरह से नहीं। मैं किसी गैर-मर्द के साथ सेक्स नहीं कर सकती." बोलती हुई शहनाज किचेन में चली गई। उसका फैसला मजबूत था। रात में चूत से पानी निकालने के बाद उसके संस्कार पूरी तरह से जाग गये थे।

वसीम बेचारा क्या करता? कहा- "जैसी तुम्हारी मर्ज़ी। मैं उस फैसले में भी तुम्हारे साथ था और अभी भी हूँ-" कहकर वसीम उदास हो गया था। आज सनडे था तो उसे आफिस नहीं जाना था। वसीम सोने चला गया और सो गया।

शहनाज राज के बारे में सोचना ही नहीं चाह रही थी। वो सोची की जितना सोचूँगी उतना परेशान होऊँगी। वो अपने कम में बिजी रही। आज सनडे था तो राज भी घर पे ही था।

शहनाज अपने कपड़ों को सुखाने भी छत पे नहीं जा रही थी। फिर काफी हिम्मत करते हुए वो छत पे गई की वो भी मुझे नहीं देखते और मैं भी उन्हें नहीं देखूंगी। वो बाकी कपड़े तो सुखाने डाल दी लेकिन अपनी पैंटी ब्रा को रूम में ही रखी।

वसीम ने भी शहनाज से इस टापिक पे चर्चा नहीं की। वो भी बाकी दिन की तरह ही नार्मल रहा। वो प्रेस तो नहीं कर सकता था शहनाज को की वो राज से चुदवा ले।

राज आज दिन भर घर पे ही था। उसने शहनाज को कपड़े रखते हुए देखा था, और ये भी देखा था की आज उसने पैंटी ब्रा को सूखने नहीं डाला है। लेकिन वो परेशान नहीं हुआ। बहुत शातिर था राज इस मामले में। उसे पता था की मुझे इन लोगों को घर नहीं खाली करने देना है बस यहाँ रहेगी शहनाज तो उसकी रंडी बनेगी ही । फिर भी उसके मन में ये ख्याल आया की कहीं वो ज्यादा तो नहीं कर दे रहा कुछ? उसे शहनाज को चोद तो लेना ही चाहिए था।

राज काफी सोच विचार कर रहा था और सोचते हुए ही उसने अपनी गर्दन को झटका दिया- "ना, छुप-छुपाकर क्या चोदना ? शहनाज को चोदना है तो मजे से चोदना है। अपने हिसाब से चोदना है। ये नहीं की हड़बड़ी में चोदा और फिर भागना पड़े। क्या होगा, कुछ दिन और इंतजार करना होगा। लेकिन एक बात तो तय है की रांड़ को इस लण्ड के नीचे आना तो होगा ही। अब जब वो इतना कुछ कर चुकी है तो आगे भी करेगी ही?"

राज आज इसीलिए दिन भर घर में रहा की उसे शहनाज की हलचल पता चल सके, और अगर वो लोग घर चेंज करने की बातें करें तो उन्हें रोक सके।
 
रात को सोने के वक़्त वसीम ने शहनाज से पूछा- “इतनी परेशान क्यों हो? क्या सोच रही हो?"

शहनाज- “कुछ नहीं..." बोलती हुई दूसरे करवट हो गई।

वसीम उसके पास आया और कंधे पे हाथ रखता हुआ प्यार से उसे समझाते हुए बोला- "जो फैसला करो, उसपे कायम रहो। उसके बाद सोचने की जरूरत नहीं है। सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दो। इतना याद रखो की मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ.."

शहनाज सीधी लेट गई। वो काफी इमोशनल हो रही थी। क्योंकी उसके मन में ये था की वो राज के पास नंगी होकर अपने पति को धोखा दी है।

वसीम ने उसके गाल को सहलाया और बोला- “अब मत सोचो ये सब कुछ.. "

शहनाज वसीम की तरफ घूम गई और उससे चिपक गई। शहनाज मन में बोली- “आई लव यू वसीम। मैं तुम्हारी हूँ और हमेशा तुम्हारी ही रहूंगी?"

वसीम ने भी उसे खुद से चिपका लिया। दोनों आँखें बंद किए एक दूसरे को बाँहों में पकड़े सो रहे थे। थोड़ी देर बाद वसीम ने शहनाज से पूछा- "तुम्हें राज जी की परेशानी के बारे में कब पता चला?"

शहनाज ने आँखें खोली और वसीम को देखकर बोली- "पहले बोलो की तुम मुझे गलत नहीं समझोगे?"

वसीम- “तुम्हें लगता है की मैं तुम्हें गलत समझूंगा। जब इतनी बड़ी बात में मैं तुम्हारे साथ रहा तो?"

शहनाज - "मैं कपड़े सुखाने हमेशा छत पे जाती थी। एक दिन मुझे लगा की मेरी पैंटी कुछ टाइट जैसी है देखी तो उसपे कुछ दाग जैसा भी था। कुछ समझ में नहीं आया और बात को इग्नोर कर दी। अगले दिन भी ऐसा ही था। अगले दिन थोड़ा जल्दी कपड़े ले आई तो पैंटी गीली थी और उसपे कुछ लगा था। मैं अच्छे से देखी तो लगा की कुछ है। अगले दिन और जल्दी ले आई। आज पैंटी और गीली थी और उसपे सफेद जैसा कुछ दाग भी था। अगले दिन मैं छत पे स्टोररूम में जाकर छिप गई तो देखती क्या हूँ की राज जी आए, रूम में जाकर कपड़े चेंज किए और बाहर आकर मेरी पैंटी पे अपना वीर्य गिरा दिया..." कहकर शहनाज एक सांस में बोलती जा रही थी।

वसीम का लण्ड टाइट हो रहा था, बोला- “तुम ने उसे अपनी पैंटी में वीर्य गिराते देखा?"

शहनाज झेंप गई और उसकी आँखों के सामने वो दृश्य घूम गया, जिसमें राज अपने मोटे काले लण्ड से शहनाज की पैंटी और ब्रा को वीर्य से भर रहा था।

शहनाज बोलना स्टार्ट की “हाँ, मुझे बहुत गुस्सा आया। इस बूढ़े इंसान को लाज शर्म नहीं है की अपने से आधे से भी कम उम्र की औरत की पैंटी ब्रा के साथ ऐसा कर रहा है। मैं नीचे आ गई और सोची की तुम्हें बताऊँगी लेकिन फिर तुरंत सीधे-सीधे नहीं बताई की पता नहीं तुम क्या सोचो और क्या करो? इसलिए तुमसे राज जी के बारे में पूछी तो तुमने बताया की वो यहाँ बहुत साल से अकेले रहते हैं और उनकी वाइफ नहीं है। मुझे तो ये सब कुछ पता था नहीं तो मैं जैसे हमेशा रहती थी उसी तरह रहती रही और इन्हें पागल बनाती रही। मुझे उनसे हमदर्दी हो गई। फिर मैं नोटिस की की वो मुझे देखते भी नहीं, मेरे से बात भी नहीं करते। दो-चार बार ऐसा हुआ की मुझे किसी काम से बात करना पड़ा तो मैं देखी की वो मुझसे बात करने से बचते हैं। फिर मैं सोची तो मुझे लगा की मैंने इनके दिल की घंटी बजा दी है...."

वसीम- फिर?"

शहनाज आगे बोलना स्टार्ट की- "जब से मैं बड़ी हुई हूँ तब से मैं यही देखते और महसूस करती आई हूँ की हर कोई मुझसे बात करना चाहता था, और मेरे नजदीक आना चाहता था। मुझे लगा की इन्हें बुरा लगता होगा और अगर मैं उनसे बात करूँ, हँसी मजाक करूँ तो इन्हें राहत मिलेगी। लेकिन ये मेरे से दूर ही रहते और अंदर ही अंदर तड़पते रहते। तब मैं सोची की मैं इनसे फाइनल बात कर लूँ, और उन्हें बोल दूं की मुझसे शर्माने की जरूरत नहीं है और आप मुझसे बात कर सकते हैं।

लेकिन राज ने मना कर दिया और बोले की "तब तो मैं खुद को और रोक नहीं पाऊँगा और हो सकता है की तुम्हें पकड़ ही लूँ "

वसीम- हाँ ये तो सही बात है। फिर क्या हुआ?*

शहनाज- "देखो प्लीज... मुझे गलत मत समझना। मेरी नजर में सारी गलती मेरी थी और मुझे उनपे बहुत दया आ रही थी तो मैं बोल दी की तो पकड़ क्यों नहीं लेते? मुझे लगा की उन्हें खुलकर बातें करने की छूट दूँगी तो वो फ्रेश हो जाएंगे। वो कुछ नहीं बोले तो मैं ही आगे बढ़कर उनके गले लग गई। वो पीछे हटने लगे। मैं उन्हें पकड़े रही और बोली की आप मुझसे खुलकर बातें करिए। आप शर्माइए मत...”

राज जी बोले- कैसे तुमसे खुलकर बातें करूँ? तुम किसी और की हो..."

मैं भी पता नहीं किस रो में थी की बोली- "आपके लिए मैं और किसी की बीवी नहीं हूँ। आप बिंदास मेरे से बात करिए." और फिर से उनके गले लग गई।

शहनाज सांस लेने के लिए रुकी। वो सोच रही थी की वसीम को ये बताया हैं या नहीं लेकिन फिर वो सोची की अगर इन्हें बाद में पता चला तो तकलीफ होगी। वैसे भी अब तो मैं राज जी के पास जा नहीं रही और वसीम तो मुझे उनसे चुदने की पर्मिशन तक दे चुके हैं।

शहनाज फिर आगे बोलना शुरु की- “वो.. वो... वो मेरे गले लगते ही वो मुझे लिप किस करने लगे। मैं उन्हें करने दी की चलो ठीक है, उन्हें राहत मिलेगी। तुरंत ही वो फिर मुझे हटाने लगे और मैं फिर उन्हें पकड़ ली तो उनकी लुंगी खुलकर नीचे गिर गई..."

वसीम चौंकता हुआ बोला- "लुंगी खुलकर गिर गई मतलब ? वो सिर्फ चड्डी में बचे या अंदर कुछ नहीं था?”

शहनाज ने नजरें झुका ली। वो अपने पति को किसी और के साथ बिताए पल बता रही थी। बोली- "अंदर कुछ नहीं था। वो लुंगी पहनते हैं तो अंदर कुछ नहीं पहनते...”

वसीम- “मतलब वो लुंगी नीचे से नंगे हो गये, और तुम उनकी बाहों में थी?"

शहनाज- “प्लीज वसीम में पहले ही बोली थी की मुझे गलत मत समझना। हाँ वो नीचे से नंगे हो गये थे..."

वसीम- “तो उनका लण्ड तो पूरा टाइट होगा..."

शहनाज- "हाँ..."

वसीम "वो तो होना ही था। जिसकी बाहों में तुम हो और वो नंगा हो तो उसका लण्ड टाइट तो होगा ही। फिर, फिर क्या हुआ ?"

शहनाज- “वो मुझे लिप किस कर रहे थे और नीचे से नंगे थे। फिर वो मुझे छोड़ दिए और लुंगी उठाने की कोशिश करने लगे। मुझे लगा की उन्हें शर्म आ रही होगी की वो मेरे सामने नंगे खड़े हैं। मुझे लगा की ये अगर अभी हट गये तो फिर मुझसे फ्रैंक नहीं होंगे और घुटते रहेंगे। मैं उन्हें पकड़ ली और लिप किस करने लगी। मैंने अपनी साड़ी की गाँठ ढीली कर दी और पेटीकोट को खोलकर नीचे गिरा दी...

वसीम- “तुम भी नीचे से नंगी हो गई राज जी के साथ?"

शहनाज- “मैं पैंटी पहनी हुई थी लेकिन वो फिर भी मुझसे चिपक नहीं रहे थे। तब मैं अपने ब्लाउज़ को ऊपर कर दी और उनसे कस के चिपक गई..."

वसीम - “कमाल का इंसान है यार तुम अपनी चूचियों को बाहर करके उनसे चिपक गई?"

शहनाज- "प्लीज वसीम। सुन तो लो पूरी बात फिर वो भी मुझसे कस के चिपक गये और लिप किस करने लगे। फिर मुझे बेड पे गिरा दिया और मेरे ऊपर आकर मेरे निपल चूसने लगे। मैं उन्हें चूसने दे रही थी की अब वो हल्का महसूस करेंगे। लेकिन तुरंत ही वो उठ गये और लुंगी पहनकर मुझे जाने बोले..."

राज बोले- "मैं किसी के साथ गलत नहीं कर सकता। इससे अच्छा तो मैं मर जाऊँ। मैं ये गुनाह नहीं कर सकता की किसी और की बीवी के साथ चोरी छिपे संबंध बनाऊँ...

शहनाज- “फिर मैं नीचे आ गई। तब मुझे लगा की ये आदमी नहीं पेगम्बर है और मुझे इसकी मदद करने के लिए कुछ भी करना पड़े तो करूँगी। इसीलिए फिर मैं तुमसे बात की और तुमने पर्मिशन भी दे दो की मैं राज जी से चुदवा सकती हूँ। लेकिन फिर मुझे लगा की नहीं, किसी की मदद करने के नाम पे मैं अपने पति की अमानत उसे नहीं दे सकती। मेरे जिश्म पे बस मेरे पति का हक है, ये हक और किसी को नहीं मिल सकता...'

वसीम - “मतलब मेरी बीवी एक 50 साल के बूढ़े आदमी का लण्ड वीर्य गिरते हुए देख चुकी है, उसकी बाहों में जाकर लिप किस कर चुकी है, अपनी चूचियों को दिखा और चुसवा चुकी है, और सिर्फ पैंटी में उसके साथ लेट चुकी है...."

शहनाज- “प्लीज वसीम, ऐसे मत कहो। मैं पहले ही कह चुकी हूँ की मुझे गलत मत समझना। मेरा इंटेन्शन सिर्फ उनकी मदद करना था। लेकिन फिर भी मुझे लगा की ये गलत है तो तुम्हारे पर्मिशन के बाद मैं खुद को रोक ली..."

वसीम- “तुम्हें पता है मैंने तुम्हें पर्मिशन क्यों दी थी? क्योंकी तुम राज जी की मदद करना चाहती थी और सच में वो फरिश्ता समान आदमी परेशान है। लेकिन अब तो तुमने उसकी परेशानी और बढ़ा दी..."

शहनाज- "कैसे?"

वसीम- "तुम्हें देखकर उसके अरमान जागे । उसने खुद को रोकने की बहुत कोशिश की और जब कामयाब नहीं हो पाया तो तुम्हारी पैंटी ब्रा को हाथ में लेकर और वीर्य गिराकर शांत कर पाया खुद को फिर तुमने उससे बात करने की ओट खुद को दिखाने की कोशिश की। बेचारे राज जी की मुश्किल और बढ़ गई होगी। अब तुम उन्हें भी नंगा कर चुकी हो और खुद भी नंगी होकर उनके गले लगकर लिप किस कर चुकी हो। इतना कुछ होने के बाद अब तुम अचानक ये फैसला करती हो की तुम उनसे दूर रहोगी, और अब तुम अपनी पैंटी ब्रा को भी छत पे नहीं डालोगी, तो सोचो की अब उस इंसान की मुश्किल कितनी बढ़ गई होगी?"

शहनाज कुछ नहीं बोली।

वसीम फिर बोला- “वो तो पहले ही परेशान था। अब तो वो शहनाज के रस भरे होठों का और रसीली चूचियों का टेस्ट भी कर चुका है। नंगी होकर बाहों में उसके नंगे जिश्म में जा सटी हो तुम भूखे शेर को खून चटा दिया और फिर सब कुछ बंद। अब तो वो पागल हो रहा होगा...

शहनाज- “अब जो भी हो वो उसकी किश्मत? लेकिन मैं इसके लिए उसे अपना जिश्म नहीं दे सकती। मैं किसी गैर मर्द से चुदवा नहीं सकती। मैं तुम्हारी बीवी हूँ, सिर्फ तुम्हारी। किसी और की कुछ नहीं..."

वसीम- "अब ये तुम समझो। ये तुम्हारा फैसला है। तुम उसकी मदद करो या ना करो। मुझे तो उसकी तकलीफ के बारे में पता भी नहीं है, और मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन मैंने बस इतना कहा है की वो अब ज्यादा तकलीफ में होगा..."

शहनाज- "मुझे अब ये सब कुछ नहीं सोचना। सोने दो मुझे.." बोलकर शहनाज करवट लेकर सोने लगी और वसीम भी उसे पकड़कर सो गया।
 
शहनाज सुबह सोकर जागी तो वो वसीम की बात सोचने लगी? सही तो कहते हैं वसीम भूखे शेर के मुँह में खून लगा दी मैं। लेकिन किसी की मदद के नाम पे किसी और से चुदवाया तो नहीं जा सकता। मैं अभी भी उनकी मदद करना चाहती हूँ लेकिन बिना चुदवाए । अगर राज जी चाहें तो मुझे नंगी देख सकते हैं। वैसे भी वो मुझे नंगी देख ही चुके हैं, यहाँ छुपकर बाथरूम में, इसलिए तो वहाँ मैं नंगी हो गई थी। वो चाहें तो मैं उनसे खुलकर बात भी कर सकती हूँ। अगर वो बोलेंगे तो रंडियों टाइप बात भी कर लूँगी। लेकिन छूना और चोदना नहीं होगा अब । इससे ज्यादा मैं आपकी मदद नहीं कर सकती राज जी ?

शहनाज नहाकर इबादत करके वसीम को जगाई। शहनाज गंजी कपड़ा के एक नाइटगाउन में थी। अंदर वो टी-शर्ट ब्रा और पैंटी में थी, तो ब्रा की धारियां नाइटी पे नहीं दिख रही थी और उसकी दोनों चूचियां पूरी तरह से दो अलग- अलग गोल बॉल जैसी दिख रही थीं। वसीम चाय पीता हुआ शहनाज को देख रहा था। उसने शहनाज की चूचियों की तरफ इशारा किया और मुश्कुरा दिया। शहनाज मुश्कुरा गई ।

·

वसीम हँसता हुआ बोला- “राज जी तो क्या मैं इन गोलाईयों को देखकर खुद को रोक नहीं पा रहा। पता नहीं उनकी क्या हालत होगी?"

शहनाज भी हँस दी और किचेन में चली गई।

वसीम आफिस जा रहा था तो शहनाज भी उसे छोड़ने घर के मुख्य दरवाजे तक आई थी। वसीम के जाने के बाद वो वापस आ रही थी तभी राज नीचे उतर रहा था। शहनाज सीधे अपने घर के अंदर आना चाह रही थी, लेकिन पता नहीं क्या हुआ की उसके कदम जैसे ठिठक गये। वो राज को देख रही थी लेकिन एक बार देखने के बाद राज ने शहनाज पे नजर भी नहीं डाला और बाहर चला गया।

11:00 बजे शहनाज के पास वसीम का काल आया की वो अपने चपरासी जय को भेज रहा है डाइनिंग हाल का फैन लगाने के लिए। जय भी लगभग 50 साल का ही था। लेकिन वो आवरेज कद और फिगर का था । वो जब भी शहनाज को देखता था तो ऐसे जैसे आँखों से ही शहनाज को चोद रहा हो। हालाँकी शहनाज के लिए ये आम बात थी, लेकिन फिर भी जय की नजर उसके जिश्म में चुभती थी। शहनाज को वो दिन याद आ गया जब वो यहाँ शिफ्ट कर रही थी। वो साड़ी में थी और जय उसे खा जाने वाली नजरों से देख रहा था। शहनाज अपने बदन को छिपाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन साड़ी में जिश्म छिपता कहाँ है? एक जगह ढकती तो दूसरी जगह दिखने लगता ।

शहनाज जब वो झुकती तो जय अपनी आँखों में उसकी झूलती चूचियों को देखने लगता। उसकी फटी आँखें और खुला मुँह देखकर ही किसी को भी लग जाता था की ये अपने मन में शहनाज को लेकर क्या-क्या सोच रहा होगा? जय दो-तीन बार और आ चुका है घर पे और अगर उसका बस चले तो शहनाज लो पटक-पटक कर चोदे।

शहनाज सोच रही थी की कपड़े बदल लेती हूँ की तब तक दरवाजा पे नाक हुआ। शहनाज समझ गई की जय ही होगा। उसने डोर-आई से बाहर देखा तो दरवाजे पे 45-50 साल का एक 55 इंच का आवरेज फिगर का इंसान मुँह में पान चबाता हुआ खड़ा था। शहनाज को उसके पान खाने से बहुत आलर्जी थी। पता नहीं इसे क्यों भेज देते हैं? जाहिल इंसान अब जितनी देर तक रहेगा अपनी हवस भरी नजरों से घूरता रहेगा मुझे। शहनाज गुस्से में पूछी- “कौन है..."

जय बोला- मेडम मैं हूँ, जय, साहब ने भेजा है..."

शहनाज दरवाजा खोल दी। वही हुआ जो शहनाज सोच रही थी।

जय उससे कुछ ना कुछ बातें करता रहा और कभी पानी माँगता रहा, तो कभी कोई और सामान वो नाइटी के अंदर से शहनाज की कल्पना करता रहा, और जब भी मौका मिल रहा था उसकी क्लीवेज में झाँक रहा था। दोनों चूचियों को देखकर उसका मन और ललचा रहा था। शहनाज आ जा रही थी और वो शहनाज की गाण्ड को हिलता डुलता देखता रहा। थोड़ी देर बाद वो फैन लगाकर चला गया।

उसके जाने के बाद शहनाज ने राहत की सांस ली। वो सोच रही थी की कुछ लोग होते हैं जो राज की तरह होते हैं। नहीं तो सबके सब हरामी लार टपकाते हुए उसे देखते हैं। राज तो इंसान नहीं पेगम्बर था।

शहनाज फिर घर में अकेली थी। वो वसीम की बातों को सोच रही थी और अभी जय और राज में तुलना करने के बाद उसे लगा की वो तो सच में राज की मुशीबत और बढ़ा दी है? राज जी के लिए तो अब खुद को रोक पाना और मुश्किल हो गया होगा। उफफ्फ ... मैं भी कितनी खराब औरत हूँ। बेकार में वसीम ने यहाँ घर लिया। किसी की शांत जिंदगी में तूफान ले आई मैं उसपर से ये कैसी मदद करने चली में की और बढ़ा ही दी उनकी मुशीबत। सच बात तो ये है की बिना मुझे चोदे राज जी को राहत नहीं मिल सकती। ये बात मुझे पता थी और मैं इसके लिए तैयार भी थी। तभी तो गई थी राज जी की बाहों में नंगी होकर। काश की उस दिन उन्होंने मुझे चोद ही दिया होता तो फिर ये झमेला ही नहीं होता। उनसे चुदवाने के लिए ही ना मैं वसीम को पटाई। कितनी चालबाजी करके मैं उससे पर्मिशन ली थी राज जी से चुदवाने की। मुझे तो घिन आती है की पहले उसे चोदने दी और फिर नंगी उससे छिपककर सेंटिमेंटल करके चुदवाने की पर्मिशन ली। और इतना होने के बाद अब मैं उनसे चुदवाऊँगी भी नहीं, तो मुझसे खराब और बुरी कोई होगी क्या? मैं तो राज जी की जान को खतरे में डाल दी उफफ्फ ... "

शहनाज का ध्यान घड़ी की तरफ गया। एक बजने वाले थे। मतलब अब किसी भी वक्त राज जी आने वाले होंगे। वो दौड़कर रूम में से अपनी पैंटी ब्रा ली और छत पे अच्छे से फैलाकर टांग आई। फिर भागती हुई वो अपने घर में आई और दरवाजा बंद कर ली। शहनाज हाँफ रही थी लेकिन वो खुश थी। मैं चुद नहीं सकती लेकिन पैंटी ब्रा बाहर छोड़ने में तो कोई दिक्कत नहीं है। कम से कम राज जी उसपे वीर्य तो निकाल लेंगे। मुझे वही पैंटी ब्रा पहनने में कोई तकलीफ नहीं है।

थोड़ी देर बाद राज के आने की आहट हुई। शहनाज की धड़कन तेज हो गई। वो सिर्फ राज के बारे में सोच रही थी की क्या सोच रहे होंगे मेरे बारे में? पता नहीं पैंटी ब्रा छुएंगे की नहीं? उन्होंने कहा तो था की नहीं छुएंगे। नहीं राज जी , कम से कम उसपे वीर्य तो निकाल लीजिएगा। प्लीज मेरी मजबूरी को समझिए । मैं एक शादीशुदा मुस्लिम औरत हूँ, जो अपने शौहर के अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती। लेकिन फिर भी मैं आपकी इतनी मदद कर रही हूँ और चुदवाने के अलावा आपकी हर तरह से मदद करूँगी ?

राज ने अपने रूम में जाते वक़्त शहनाज की टंगी हुई पैंटी ब्रा को देखा तो मुश्कुरा उठा। सुबह पैंटी ब्रा यहाँ नहीं थी? शायद वसीम से वो छुपाना चाहती होगी। शायद वसीम को पता चल गया होगा या वसीम शहनाज पे शक करने लगा होगा? हम्म्म... रंडी की चूत तो पूरी गरम है। लेकिन ऐसे खाने में मजा नहीं आएगा। रांड़ मजबूर शौहर के हाथों। कोई बात नहीं, दो-चार दिन और देखता हूँ, नहीं तो फिर दूसरा रास्ता अपनाना होगा। लेकिन चुदेगी तो तू जरूर मेरे से शहनाज ।

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दोपहर के 2:30 बज गये थे। अब तक शहनाज बेचैन हो चुकी थी? अगर कहीं उन्होंने पैंटी ब्रा पे वीर्य नहीं गिराया होगा तो? नहीं नहीं, उन्हें इस तरह तड़पता हुआ छोड़ा नहीं जा सकता। वैसे भी चुदवाने के अलावा मैं बाकी सब कुछ तो कर ही सकती हूँ। अपने शौहरव्रत धर्म का इतना त्याग तो करना ही होगा मुझे। और वैसे भी मेरे पास मेरे शौहर की पर्मिशन है। उन्हें थोड़े ही पता है की मैं चुदवाने का डिसाइड की हूँ। उन्हें तो मैं बोलकर आई थी की मैं आपको तड़पता नहीं छोड़ सकती चाहे कुछ भी हो। मैं जितना कर सकती हूँ उतना तो करूँगी ही।

शहनाज बेचैन हो गई और छत पे चल दी। उसकी पैंटी ब्रा उसी तरह टंगी हुई थी जैसे वो टाँग कर गई थी। मतलब राज जी ने इसे छुआ भी नहीं पागल है ये आदमी और मुखे भी पागल कर देगा ।

शहनाज गुस्से में पैंटी ब्रा को हाथ में ली और राज के दरवाजा पे नाक की "राज जी ... राज जी ..”

अंदर राज मुश्कुरा उठा और हड़बड़ाने की आक्टिंग करता हुआ दरवाजा खोला- “क्या हुआ?"

शहनाज ने पैंटी ब्रा दिखाते हुए गुस्से में ही पूछा- “ये क्या है? आप समझते क्या हैं खुद को? हर चीज में जिंद आपने इसपर वीर्य क्यों नहीं निकाला ? "

राज कुछ नहीं बोला। वो उसे ऐसे देख रहा था जैसे वहाँ शहनाज नहीं कोई अजूबा हो। वो हँसना चाहता था, ठहाके लगाना चाहता था लेकिन वो सिर झुकाए खड़ा रहा- "नहीं शहनाज, मैं अब ये सब कुछ नहीं करूँगा । और प्लीज... मुझे मेरे हाल में छोड़ दो। मेरी भाग्य मे भगवान ने तड़पना ही लिखा है...

शहनाज- “आप पागल हैं राज जी । मैं वो सब नहीं जानती। मुझे आपसे बहस भी नहीं करना। बस ये लीजिए मेरी पैंटी ब्रा और इसपर वीर्य गिराइए बस...:

राज "नहीं शहनाज प्लीज... अब नहीं। जो गलती मैं कर चुका हूँ उसे और मत बढ़ाओ। जाओ यहाँ से...

शहनाज आगे बढ़ी और राज की लुंगी को खोल दी। लुंगी नीचे गिर पड़ी। राज नीचे से नंगा हो गया। राज का लण्ड उसके पैरों के बीच शांत बेजान पड़ा था। शहनाज उसे पकड़ ली और हाथ आगे-पीछे चलाने लगी। शहनाज का स्पर्श पाते ही मुर्दे में जान आ गई और लण्ड टाइट होता चला गया।

राज- “आहह... नहीं शहनाज आह्ह... ये क्या कर रही हो? आहह.. छोड़ो, नहीं ये गलत है...” कहकर राज ने शहनाज के हाथ को हल्के से पकड़कर हटाने का कोशिश किया। लेकिन ना तो वो हटाना चाहता था और ना ही हटा पाया।

शहनाज राज के हाथ को हटा दी और लण्ड पे जल्दी-जल्दी हाथ आगे-पीछे करने लगी। उसकी चूड़ियां छन-छन कर रही थीं। थोड़ी ही देर में शहनाज का हाथ दर्द करने लगा। वो नीचे बैठ गई और दूसरे हाथ से करने लगी। लेकिन भला इतनी जल्दी राज का लण्ड वीर्य कैसे छोड़ देता? शहनाज गुस्से से ऊपर राज को देखी, जो चेहरे पे ऐसे भाव बनाए था जैसे बहुत मजबूर और परेशान हो ।

शहनाज और जोर से करती हुई खीझ में बोली- “निकालिए ना वीर्य चाचा। क्यों खुद को ही परेशान कर रहे हैं?"

राज को शहनाज की खीझ पे हँसी आ गई। लेकिन उसने खुद को हँसने से रोक लिया।

शहनाज समझ गई की राज उसकी बात नहीं मानने वाला है। वो खड़ी हो गई और राज के गले लगकर उसके होठ चूमने लगी। उसे लगा की अब शायद राज अपने लण्ड का वीर्य गिरा पाए। लेकिन वो राज था । शहनाज राज के होंठ चूमते हुए ही लण्ड को हाथ से आगे-पीछे करने लगी ।

कुछ असर नहीं होता देखकर शहनाज फिर बोली- "क्यों नहीं वीर्य निकाल रहे आप? आखिर चाहते क्या हैं आप? मैं इतना कुछ कर रही हूँ अब और क्या करूँ? कूद जाती हूँ मैं ही छत से" और राज से अलग हो गई थी।

शहनाज- “आप क्यों खुद तड़पना चाहते हैं? क्यों कर रहे हैं आप ऐसा? आप चाहते क्या हैं आखिर..." शहनाज आगे बढ़कर राज को धक्का दी।

राज - “शहनाज मैं कुछ भी चाहूं क्या फर्क पड़ता है? इंसान की सारी चाहत पूरी तो नहीं होती..."

शहनाज अभी राज से बहस के मूड में नहीं थी। वो नीचे बैठ गई और राज के लण्ड को मुँह में ले ली। उफफ्फ ... इसी मदहोश कर देने वाली खुश्बू की तो दीवानी थी वो। शहनाज बड़ा सा मुँह खोली अपना और लण्ड को अंदर लेती हुई चूसने लगी। शहनाज अपने दोनों हाथ से राज की गाण्ड पकड़ते हुए लण्ड चूसने लगी। अब राज का लण्ड और टाइट हो गया था।

राज - “आहह.... शहनाज प्लीज़्ज़... आह्ह... ये क्यों कर रही हो तुम्म ओह्ह.." राज सीधा खड़ा शहनाज के सिर पे हाथ रखे खड़ा था।

शहनाज अपने हिसाब से लण्ड को अच्छे से चूस रही थी। हालांकी राज का आधे से ज्यादा लण्ड बाहर था। अब शहनाज का दिमाग कुछ और कर रहा था। शहनाज लण्ड चूसते चूसते ही अपनी नाइटी को उतार दी। अब शहनाज पैंटी ब्रा में बैठी राज का लण्ड चूस रही थी। राज का लण्ड पूरा टाइट था लेकिन वीर्य निकलना आसान नहीं था। शहनाज बोली - "राज जी प्लीज... निकालिए ना वीर्य मुझे नहीं आता क्यों परेशान कर रहे हैं। आप वीर्य नहीं निकालेंगे तो मुझे लगेगा की मैं कसूरवार हूँ.”
 
शहनाज समझ रही थी की उसने शेर के मुँह में खून लगाकर उसकी भूख को और बढ़ा दिया है। शेर खुद को भूखा मारना चाहता है, लेकिन वो हिम्मत नहीं हारेगी। शहनाज खड़ी हो गई और फिर राज से चिपक गई। वो अपनी पैंटी को थोड़ी नीचे की और लण्ड को अपनी पैंटी में लेते हुए चूत से सटा ली। शहनाज राज से पूरी चिपकी हुई थीं और राज का लण्ड शहनाज की पैंटी में चूत से रगड़ रहा था।

शहनाज- "उस पैंटी पे नहीं तो इस्स पैंटी में गिरा लीजिये राज जी । लेकिन बिना वीर्य गिराए मैं आपको छोडूंगी नहीं आहह...."

राज का लण्ड पूरा टाइट था और वो चूत के छेद पे रगड़ रहा था। राज ने अब शहनाज को पकड़ लिया। अचानक शहनाज को अपनी चूत पे लण्ड की चुभन हुई और शहनाज दर्द से चिहुँक गई। शहनाज राज के कंधे को पकड़कर पंजे के बल उठ गई। राज ने शहनाज को खुद से चिपकाए हुए ही उठा लिया। राज का लण्ड शहनाज की चूत के बीच में फँसा था, और एक तरह से शहनाज राज के लण्ड पे बैठी थी।

लण्ड चूत में सटते ही शहनाज पागल हो उठी। राज भी पागलों की तरह शहनाज के होठों को चूसने लगा और टी- शर्ट ब्रा का पीछे से उठा दिया। शहनाज ब्रा को हटा दी और राज का साथ देने लगी। उसकी नंगी चूची एक बार फिर राज के सीने से दब रही थी। राज इसी तरह शहनाज को लिए हुए ही बेड पे आ गिरा और होठ चूमते हुए ही शहनाज की चूची को जोर-जोर से मसलने लगा।

शहनाज- “आहह.... उह्ह.." किए जा रही थी। शहनाज पागल हो रही थी। अब उसका जिश्म उसके काबू में नहीं था।

राज शहनाज से अलग हुआ और उसकी पैंटी को उसके पैरों से अलग करता हुआ फेंक दिया। उसने एक चूची को कस के भींचा और दूसरे हाथ से शहनाज की चूत में अपनी बीच वाली उंगली को घुसा दिया।

शहनाज का बदन ऐंठ गया- “आहह.. अह्ह... राज्ज्ज चाऽऽचा आहह...

राज अपनी उंगली को शहनाज की गीली चूत के अंदर जलता हुआ महसूस किया। उसे शहनाज के बदन की गर्मी का एहसास हो गया। उसे अंदाजा हो गया की ये रांड़ उसे कितना मजा देने वाली है। शहनाज की चूत की आग आसानी से वैसे भी बुझने वाली नहीं थी और राज बस इस आग को बढ़ा रहा था ।

राज तीन-चार बार उंगली को अंदर बाहर किया और शहनाज के मुँह में दे दिया। शहनाज अपनी ही चूत के रस को पागलों की तरह चूस ली। शहनाज का दिमाग भी साथ-साथ काम कर रहा था और उसे अपनी शोहर की फरमाबरदार की कसम भी याद आ रही थी। लेकिन एक तो उसका जिश्म उसके काबू में नहीं था और दूसरा वो राज को रोकना नहीं चाहती थी। वो सोची की वसीम ने तो बोल ही दिया है चुदवाने को तो चुदवा ही लेती हूँ। और उसके पैर अपने आप फैल गये थे।
 
राज ने उसके फैलते पैर और ऊपर उठती कमर को देख लिया। उसने मन ही मन सोचा "अभी नहीं रंडी, अभी तुझे और तड़पना है मेरे लण्ड के लिए। अभी मेरे लण्ड और तेरी चूत के बीच तेरा शौहर खड़ा है। तुझे मुझसे चुदवाने के लिए गिड़गिड़ाना होगा रांड़, अपने शौहर से बगावत करना होगा.." सोचकर राज उठा और खड़ा होकर लण्ड पे हाथ आगे-पीछे चलाने लगा।

शहनाज ये देखकर चकित हो गई- “आह्ह.. नहीं राज जी आहह... ये क्या कर रहे हैं आप आअह्ह... नहीं ऐसा मत करिए प्लीज... ओह्ह... इसे मेरी चूत में डालिए आह्ह... नही..” शहनाज हड़बड़ा कर उठी और राज का हाथ पकड़ने की कोशिश की। वो चुदने के लिए खुद को मेंटली तैयार कर चुकी थी और फिजिकली तो वो तैयार थी ही। लेकिन राज ने ऐसा करके जैसे उसे आसमान से जमीन पे ला पटका हो ।

राज का लण्ड झटके खाने लगा और गाढ़ा सफेद वीर्य हवा में उछलता हुआ इधर-उधर गिरने लगा ।

शहनाज को समझ में नहीं आया की क्या करे? वो राज के लण्ड को हाथ में पकड़ ली और वीर्य उसके सामने जमीन पे गिरने लगा। ताजा वीर्य सामने बह रहा था। शहनाज तुरंत ही अपना मुँह खोली और लण्ड को मुँह में ले ली। राज का मोटा लण्ड अब शहनाज के मुँह में झटके मार रहा था और गरमा गरम वीर्य शहनाज की जीभ को अपना टेस्ट दे गया। लण्ड वीर्य उगले जा रहा था और शहनाज उसे अपने मुँह में भरती हुई जीभ से होकर गले में उतारती जा रही थी। लण्ड थक गया और उसने वीर्य गिराना बंद कर दिया लेकिन इससे शहनाज के प्यासे जिश्म की प्यास और बढ़ गई थी। वो चूस चूसकर वीर्य को निकालने लगी और पीने लगी।

राज हाँफता हुआ चेयर पे जा बैठा और शहनाज अपने सिर को बेड पे टिकाए नीचे ही बैठी रही। शहनाज खुद के लिए बहुत बुरा महसूस कर रही थी की आज भी इतना कुछ होने के बाद भी वो बिना चुदे रह गई। वो उठी और राज की चेयर के सामने जा बैठी।

शहनाज- “ऐसा क्यों किया आपने राज जी ? मुझे चोदा क्यों नहीं? लण्ड को मेरी चूत में क्यों नहीं डाला? वीर्य को मेरी चूत में क्यों नहीं गिराए ? ये क्या पागलपन है बोलिए?"

राज आँखें बंद किए हुए ही बोला- “क्योंकी मेरे भाग्य में यही लिखा है..."

शहनाज- “प्लीज... राज जी ऐसा ऐसा मत बोलिए। आपके नशीब में मेरी चूत है। में नंगी बैठी हैं आपके सामने आप क्यों ऐसा करके खुद को तकलीफ दे रहे और मुझे भी?"

राज- "तुम किसी और के भाग्य में हो शहनाज तुम जितना मेरे लिए कर रही हो उतना कोई नहीं करेगा। इसके लिए तुम्हारा शुक्रिया। लेकिन मुझे इससे आगे के लिए मजबूर मत करो। किसी के चाहने से कुछ नहीं होता...."

शहनाज- “सारी चाहत भले किसी की पूरी ना हो पाई हो। लेकिन समय और हालत के मुताबिक इंसान को जो मिलता है उसी में ढलकर खुश होने की कोशिश करता है। मैं मनती हूँ की तन्हाई आपकी तकदीर में थी। लेकिन जब मैं यहाँ आई तो आपकी तन्हाई कुछ हद तक तो दूर कर ही सकती थी। लेकिन आपने इसे भी एक मर्ज़ बना लिया...*

राज - "शहनाज तुम किसी और की अमानत हो । बस यही मेरी मर्ज़ का कारण है। तुम भले ही मुझे अपना जिश्म दे देना चाहती हो, लेकिन वो किसी और की अमानत है। तुम्हारे शौहर की है। तुम्हारे चूत में उसका वीर्य गिरेगा, तुम उसके वीर्य से माँ बनोगी, तो मैं कैसे अपने वीर्य को तुम्हारे चूत में गिरा दूं?"

शहनाज इस बात को तो मानती ही थी की उसके बदन पर केवल उसके शौहर का हक है। लेकिन वो अजीब पेशोपेश में फँसी है। वो राज से दूर रहती है तो लगता है की राज से चुदवाएगी नहीं, लेकिन राज के बारे में सोचती है तो उसका जिश्म राज के लिए पेश कर देती है। उसे वसीम की बात याद आ गई की सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दो और निशचिंत होकर रहो।

शहनाज भला राज को अपनी हालत क्या बताती की वो खुद किस मजधार में है? वो उठी और अपने कपड़े ढूँढ़ने लगी। उसकी नाइटी पे भी राज का वीर्य गिर गया था। शहनाज ने सिर्फ नाइटी पहन ली और पैंटी ब्रा को हाथ में लेकर नीचे चल दी।

शहनाज- "आपको जो समझ में आता है वो करिए, मुझे जो समझ में आता है मैं कर रही हूँ। आपसे बस इतना ही कहूँगी की परेशान मत रहा करिए, और सब ऊपर वाले पे छोड़ दीजिए" बोलती हुई शहनाज नीचे चल दी और राज उस हसीन अप्सरा को गाण्ड हिलाकर जाते देखता रहा।

शहनाज नीचे आकर सोफे पे लेट गई। उसे अपनी जीभ पे अभी भी राज के वीर्य का टेस्ट महसूस हो रहा था। वो मदहोश होने लगी। सोचने लगी की "ठीक ही है, शायद यही सही है। वो मुझे चोदना नहीं चाहते और मैं भी उनसे चुदवाना नहीं चाहती। लेकिन बाकी चीज करने में मुझे कोई दिक्कत नहीं है, और अब उन्हें भी नहीं होगी। और अगर कभी ऐसा हुआ की उन्होंने मुझे बोला तो मैं चुदवा लूँगी। वसीम बोल ही चुका है और तब मुझे भी कोई ऐतराज नहीं..."

शहनाज आज खुद को संतुष्ट महसूस कर रही थी की बिना चुदे भी वो राज की मदद कर पा रही है। उसकी शोहर की फरमाबरदार धर्म भी निभ रही थी और राज की मदद भी हो रही थी। शाम होते-होते वो परेशान हो गई की आज की बात वो वसीम को बताए या नहीं ? वसीम ने मुझे चुदवाने की पर्मिशन भी दे दी और जब मैं मना की की मैं राज जी से नहीं चुदवाऊँगी तो उन्होंने मुझे समझाया भी। लेकिन फिर वो कहेंगे की कभी बोलती हो की नहीं चुदवाऊँगी तो कभी चुदवाने पहुँच जाती हो?

बहुत सोचने के बाद शहनाज इस नतीजे पे पहुँची की जब राज उसे चोदने के लिए तैयार हो जाएंगे तब बता दूँगी। लेकिन अगर ऐसा हुआ की राज जी दिन में चोद दिए तो, क्या मैं उन्हें उस वक़्त मना करूँगी। नहीं नहीं, मैं उन्हें मना नहीं कर सकती। चुदवा तो लूँगी ही उस वक़्त और शाम में बोल दूँगी की मुझे राज जी से चुदवाना है और फिर अगले दिन बोल दूँगी की चुदवा ली। शहनाज के दिमाग में ये सारा हिसाब किताब चल रहा था।

वसीम उसे देखकर मुश्कुरा रहा था। उसे दिन में क्या हुआ ये पता तो था नहीं। उसे लग रहा था की शहनाज अभी तक अपनी बात पे कायम है और राज से दूर रही है। वो शहनाज के पास आया और यसए पीछे से पकड़कर कंधे पे किस लेता हुआ बोला- “मेरी जान, इतना मत सोचो। मैंने कहा ना की सब ऊपर वाले पे छोड़ दो। राज जी से ज्यादा तकलीफ में तो तुम हो। मैं अपने आफिस में जय को और बाकी लोगों को दूसरे घर के लिए बोल दूंगा कल। तभी तुम खुश रह पाओगी और राज जी भी रिलैक्स हो पाएंगे..."

अब भला शहनाज क्या बोलती की घर चेंज मत कीजिए, मैं बिना चुदे राज को सर्विस दे रही हूँ? वो सिर्फ हाँ में सिर हिलाई ।
 
शहनाज भी सोचने लगी की "ये भी ठीक है। ना वो चोदना चाहते हैं ना मैं चुदवाना चाहती हूँ। तो जब तक यहाँ हूँ तब तक आज की तरह ही चलने देती हूँ। फिर जाने के बाद मैं भी रिलैक्स रहूंगी और वो भी पता नहीं राज जी रिलैक्स हो पाएंगे या नहीं? जाने से पहले तो एक बार उनसे चुदवा ही लूँगी। जब में जिद करके वीर्य गिरवा सकती हूँ तो चुद भी सकती हूँ। यहाँ से जाने से पहले अगर राज जी ने मुझे चोद लिया तो फिर वो रिलैक्स रह पाएंगे।

अगले दिन शहनाज नहाने में थोड़ा ज्यादा टाइम लगाई। उसने अपनी चूत पे उग आए हल्के बालों को भी साफ कर लिया और अपनी पैंटी ब्रा को रूम में ही सूखने दी। वसीम को लगा की शहनाज अपनी बात में कायम है लेकिन शहनाज को अब इसकी जरूरत ही नहीं थी। क्योंकी राज का वीर्य अब उसके पैंटी ब्रा पे नहीं सीधा उसके मुँह में गिरना था- उम्म्म्म... क्या यम्मी टेस्ट था उसका आहह...

शहनाज एक बजने का इंतजार कर रही थी। आज वो शार्टस और टाप पहनी हुई थी। शहनाज पैंटी और ब्रा उतार दी थी। वो जानती थी की उसे वहाँ जाना है और नंगी हो जाना है तो पैंटी ब्रा की क्या जरूरत थी? और कौन सा उसे रोड पे जाना है। बीच में कोई उसे देखेगा नहीं और जो देखेगा उसके सामने तो नंगी ही होना है। राज के साथ पल बिताने की चाहत में उसके निपल टाइट हो गये थे और टाप के ऊपर से झाँक रहे थे। उसकी चूत तो राज के बारे में सोचते ही गीली हो जाती थी।

राज के आने की आहट हुई और शहनाज का मन हुआ की दौड़कर बाहर चली जाए। लेकिन फिर उसे लगा की पहले उन्हें ऊपर जाकर फ्रेश तो होने देती हूँ। बड़ी मुश्किल से शहनाज ने 5-7 मिनट गुजारे और फिर ऊपर चल दी। राज के घर का दरवाजा बंद देखकर उसे बुरा भी लगा। वो दरवाजा पे नाक की।

राज सोचने लगा- "आ गई रंडी..." उसने दरवाजा खोला और शहनाज अंदर आ गई और बेड के पास खड़ी हो गई। राज कुछ नहीं बोला और यूँ ही खड़ा रहा। शहनाज को लगा था की राज उसे इस तरह देखकर खुश होगा और बाहों में भर लेगा, लेकिन वो तो ऐसे खड़ा था जैसे वो यहाँ क्यों आ गई?

शहनाज आगे बढ़ी और राज के गले लग गई और उसे लिप किस करने लगी।

राज ने किस में शहनाज का साथ नहीं दिया और छूटते ही बोला "तुम क्यों आ गई यहाँ?"

शहनाज तुरंत बोली- “आपका वीर्य गिरवाने आप रोज यही करते थे ना। आप मुझे सोच करके वीर्य गिराते थे तो अब मेरे साथ करते हुए गिराएं

राज - “प्लीज शहनाज, तुम समझो मेरी बात ये ठीक नहीं है। ये गुनाह है, पाप है..” बोलता हुआ राज चेयर पे जा बैठा।

शहनाज झट से उसकी गोद में जा बैठी- "क्या पाप है? ना तो आप मुझे चोद रहे हैं और ना मैं चुदवा रही हूँ। मेरे जिश्म पे मेरे पति का ही हक है और वो तो आप ले नहीं रहे हैं। तो फिर इतना करके तो मैं आपकी मदद कर ही सकती हूँ। आप भी बिना मुझे चोदे रिलैक्स रहेंगे और मैं भी..."

राज मन ही मन सोचने लगा की “अगर इतने ही से मन भरना होता तो इतना इंतजार नहीं करता। ना खुद इतना तरसता तेरे जिश्म के लिए, ना तुझे तड़पने देता अपने लण्ड के लिए? अब तक तो कई दफा तेरी चूत को अपने वीर्य से भर चुका होता। मुझे तुझे पालतू कुतिया बनाना है। अकेले में नहीं, तेरे पति के सामने। ताकी जब मैं तुझे चोदूं तो मेरे या तेरे मन में कोई डर नहीं रहे। मुझे कंडोम पहनने के लिए या चूत में वीर्य ना भरने के लिए ना बोल पाए तू..."

राज बोला- “अगर तुम इस तरह मेरे साथ करोगी तो फिर मैं खुद को नहीं रोक पाऊँगा शहनाज..."

शहनाज तुरंत जवाब दी- “तो आप रोकते क्यों हैं? मुझे तो यही समझ में नहीं आता। मैं तो बोलती ही हूँ आपको की मत रोकिए। तभी ना ऐसे आपके पास आती हूँ। आप पता नहीं मुझे किस टाइप की औरत समझने लगे होंगे?” शहनाज राज की छाती को सहलाती हुई उसके जाँघों को सहलाने लगी थी।

राज "क्योंकी तुम किसी और की हो, मेरी नहीं। नाजायज रिस्ते नहीं बनाना चाहता मैं..."

शहनाज राज का हाथ पकड़कर टाप के ऊपर से अपने चूची में रख ली। राज ने उसे कस के मसल दिया ।

शहनाज- “आहह.. राज जी , ये नजायज रिस्ता कैसे है? जब मैं खुद आपसे चोदने को कह रही हूँ। वसीम को मैं बता चुकी हूँ आपके बारे में और उन्होंने मुझे कह दिया है की मैं आपसे चुदवा सकती हूँ..."

राज "नहीं, मुझे यकीन नहीं हो रहा की वो तुम्हें मुझसे चुदवाने बोल दिया है..."

शहनाज राज के लण्ड को बाहर कर चुकी थी और हाथ में लेकर सहलाती हुये बोली- “मैं सच कह रही हूँ। लेकिन आप मुझे चोदना ही नहीं चाहते और मैं भी सोची की मेरे जिश्म पे मेरे पति का हक है तो वो आपको क्यों दूं? लेकिन आप जब भी मुझे चोदना चाहें मेरा जिश्म आपका है। मैं आपके लिए हमेशा तैयार हूँ--- ::

राज - "तुम झूठ बोल रही हो ना, सिर्फ मेरा दिल रखने के लिए। ताकी मैं तुमपे भरोसा करके तुम्हें चोद दूं और तब तुम्हारे हिसाब से मुझे सुकून मिलेगा। लेकिन इस तरह तुम मुझे और तकलीफ दोगी शहनाज ” कहकर राज शहनाज को अपनी गोद से उतारते हुए खड़ा हो गया था, और वो थोड़ा गुस्से में भी था ।

शहनाज- “मैं झूठ क्यों बोलूँगी राज जी ? उन्होंने तो मुझे उसी दिन सटर्डे को ही बोल दिया था। लेकिन मैं ही फिर बदल गई थी की मैं अपना जिश्म आपको नहीं दे सकती। अगर मैं उस दिन तैयार रहती तो सनडे दिन में ही आप मुझे चोद चुके होते उनके पर्मिशन से। वसीम बहुत अच्छे हैं, और उन्हें मेरी फीलिंग और मेरे फैसले की कदर है। उसके बाद भी आप मुझे चोद नहीं रहे थे तो मैं सोची की इसी तरह चलने देती हूँ। आपको भी राहत मिलेगी और मेरा जिश्म भी मेरे पति के लिए बचा रहेगा..."

राज - “उफफ्फ शहनाज, इस तरह मुझे राहत नहीं मिलती। बल्कि मैं और जलता रहता हूँ। अगर तुम और तुम्हारा पति मेरी मदद करने के लिए इतनी बड़ी कुर्बानी देने को तैयार हो तो फिर मुझे क्या प्राब्लम है? अगर तुम्हारी और तुम्हारे पति की पर्मिशन है तो फिर मैं कोई गुनाह नहीं करूँगा तुम्हें चोदकर ..."

शहनाज वसीम के सीने से चिपक गई। उसकी चूची राज के सीने से दब रही थी।

शहनाज- “तो अब आप मुझे चोद सकते हैं ना, तो चोद लीजिए। पूरे कर लीजिए अपने अरमान। पूरी कर लीजिए अपनी तमन्नाओं को जिन्हें सोचते हुए आप मेरे पैंटी ब्रा में वीर्य गिराते हैं। गिरा लीजिए मेरी चूत में वीर्य । अब मत रोकिए खुद को और पूरी तरह मुझे हासिल कर लीजिए.. "

राज ने शहनाज को कस के पकड़ लिया और उसके होठों को पागलों की तरह चूमने लगा। वो पीछे से शहनाज की टाप को ऊपर करता हुआ उसकी नंगी पीठ को सहलाने लगा। राज का हाथ पीठ सहलाता हुआ सामने आया और टाप को सामने से भी उठाकर उसकी चूचियों को बेरहमी से मसलने लगा।

शहनाज को बहुत दर्द हो रहा था और वो दर्द से आहह उहह.. भी कर रही थी। लेकिन राज जैसे पागल हो गया था। शहनाज भी उसे रोकी या मना नहीं की। वो नहीं चाहती थी की राज रुके या किसी भी तरह उसे कोई कमी लगे। शहनाज राज की खुशी के लिए अब सारा दर्द सह सकती थी । \

राज भले ही शहनाज के साथ ये सब पागलों की तरह कर रहा था, लेकिन उसका दिमाग उसी तरह शांति से अपने प्लानिंग में लगा था। उसे लगा की चुदवाने के लिए अगर ये रांड झूठ बोल रही होगी और उसने अपने पति को मनाया नहीं होगा तो जो वो 5 दिन से बिना चोदे रह रहा है वो तो बेकार हो जाएगा। क्योंकी अगर ये ऐसे चुद जाएगी तो फिर मेरा प्लान 15-20 दिन के लिए टल जाएगा। अभी तो रांड़ की चूत पूरी गरम है लेकिन एक बार चुदवाने के बाद फिर से ये पतिव्रता धर्म और पति की अमानत ये सब सोचने लगेगी। नहीं मुझे कन्फर्म करना होगा की वसीम का स्टैंड क्या हैं अभी तक ?

अचानक राज रुक गया और शहनाज से अलग हो गया।
 
शहनाज हड़बड़ा गई की अब क्या हुआ इस पागल इंसान को? उसे गुस्सा भी आया क्योंकी वो गरमा चुकी थी। उसकी चूत से पानी चुहुने लगा था। फिर भी वो बड़े प्यार से पूछी- "क्या हुआ राज जी , रुक क्यों गये अब?"

राज बोला- “नहीं, मुझे तुमपे ऐसे ही यकीन नहीं करना चाहिए। मुझे एक बार वसीम से कन्फर्म हो लेना चाहिए। जब मैंने इतने दिन दर्द सहा है तो एक दिन और रात में तुम बोलना वसीम को की वो मुझे बोल दे, उसके बाद ही मैं तुम्हारे साथ कुछ कर पाऊँगा”

शहनाज के मन में कोई डर नहीं था। वो फिर से राज के सीने लग गई और बोली- "आप वसीम से काल करके पूछ लीजिए...."

राज को लगा की ये सही है। तुरंत ही उसके दिमाग में ख्याल आया की "अगर रंडी ने उसे बताया नहीं होगा तो फ्री फोकट में बात बिगड़ जाएगी...

राज थोड़ा गुस्से में था- "मैं नहीं, तुम अपने नम्बर से काल लगाओ और मुझे सुनाओं, अगर वो हाँ कह देगा फिर मुझसे बात करवाओ। अगर ऐसा कर सकती हो तो ठीक है नहीं तो प्लीज... चली जाओ यहाँ से और अब दुबारा मेरे आस-पास भी मत आना। अगर तुमने आज झूठ कहा है तो मुझे अपनी शकल भी मत दिखाना...*

शहनाज को कोई प्राब्लम नहीं थी, बोली- "मेरा मोबाइल तो नीचे ही है। यहाँ लाइट भी कटी हुई हैं और गर्मी भी लग रही है। आप भी नीचे चलिए और वहीं बात भी कर भी लीजिएगा और वहीं मेरे बेडरूम में ही मेरे साथ अपने अरमान पूरे कर लीजिएगा....

राज ने कुछ देर सोचा और उसमें उसे कोई बुराई नहीं नजर आई। उल्टा वो और उत्तेजित हो गया की शहनाज के बेडरूम में उसकी चूत की चुदाई करेगा। दोनों नीचे आ गये। राज ने मुख्य दरवाजा बंद कर दिया ताकी बीच में कोई उसे डिस्टर्ब ना कर पाए ।

शहनाज अपने घर का दरवाजा बंद कर ली। राज सोफे पे बैठ गया। उसके लण्ड में हलचल मचने लगी थी। फाइनली उसका प्लान सफल होने वाला था। वसीम के पर्मिशन के बाद वो आराम से शहनाज को चोद सकता था और उसे छिपाने की जरूरत नहीं थी। बस सिर्फ इस रांड़ ने झूठ ना बोला हो। अगर ये झूठ बोली होगी तो इसे चोदूंगा तो नहीं, लेकिन इसकी गाण्ड फाड़ दूँगा आज ।

शहनाज अपना फोन ढूँढ़ करके आई और राज की गोद में बैठ गई। उसने राज के गाल पे किस किया और उसका हाथ अपनी चूचियों पे रखवा लिया।

राज सोचने लगा की "बस रांड़, कुछ मिनटों की देर है, फिर मसलूंगा तेरी चूची और तब तुझे पता चलेगा की चुदाई क्या होती है? बहुत खुजली मची है ना तेरी चूत में... सब एक ही झटके में मिट जाएगी...

शहनाज वसीम को काल लगाई। रिंग जा रही थी राज की सांसें तेज हो गई थी। शहनाज को भी अजीब लगने लगा की वो फोन पे वसीम से ये पूछेगी की वो राज जी से चुदेगी या नहीं। हे भगवान्... वो कहाँ बैठे होंगे, किसके साथ होंगे? कहीं किसी ने सुन लिया तो? कहीं उनका मूड खराब हो गया और उन्हें गुस्सा आ गया तो? कहीं वो मना कर दिए तो ? शहनाज की भी धड़कन तेज हो गई थी। लेकिन वसीम ने काल नहीं उठाया ।

सन्नाटा था रूम में राज तो कुछ नहीं बोला।

शहनाज बोली “काल तो नहीं उठाए, फिर से करूँ क्या?"

राज कुछ बोला नहीं और अपने कंधे ऊपर करता हुआ इशारा किया की तुम समझो क्या करना चाहिए?

शहनाज फिर से डायल करने लगी लेकिन फिर रुक गई, और बोली- "अगर वो कहीं मीटिंग या किसी के साथ होंगे और अगर किसी ने सुन लिया तो? मैं उन्हें बता चुकी हूँ और वो मुझे बोल चुके है की तुम चुदवा सकती हो। आप मेरा भरोसा कीजिए। मैं झूठ नहीं बोलती। रात में वो आएंगे तब पूछ लीजिएगा...

राज - “ठीक है..." बोलता हुआ शहनाज को गोद से उठाया और बाहर जाने लगा। उसके लण्ड के साथ धोखा हो रहा था। उसे गुस्सा आ रहा था।

शहनाज भी उसे जाता देखकर हड़बड़ा गई, दौड़कर राज के सामने आई और बोली “आप जा क्यों रहे हैं? रात को वसीम आएंगे तो पूछ लीजिएगा। मैं खुद आपको उनसे कन्फर्म करवा दूँगी की मैं सच बोल रही हूँ, उन्होंने पर्मिशन दी है। ट्रस्ट कीजिए मेरे पे..." और शहनाज ने राज का हाथ पकड़ लिया और उसे अंदर खींचने लगी।

राज भला शहनाज से क्या हिलता राज बोला- "जब कन्फर्म करवा देना तब आना मेरे सामने..."

शहनाज उसका हाथ पकड़े हुए ही बोली- "नहीं रुकिये, मैं फिर काल लगाती हूँ। लेकिन आप मत जाइए. "
 
राज सोफे पे बैठ गया और शहनाज ने अब बिना किसी बात की परवाह किए वसीम के पास काल लगा दी । शहनाज की बुरी या अच्छी ये तो पता नहीं, लेकिन किश्मत से वसीम ने फिर काल रिसीव नहीं किया। शहनाज उदास नजरों से राज की तरफ देखने लगी की मैं क्या कर सकती हूँ, अब अगर वो काल नहीं रिसीव कर रहे हैं तो? वो नहीं चाहती थी की राज यहाँ से जाए। राज जब चोदने के लिए तैयार हुआ था तो शहनाज ने उसका पागलपन देखा था। अब अगर राज उसे बिना चोदे चला गया तो पता नहीं क्या कर ले? पहले तो वो शेर के मुँह में सिर्फ खून लगाई थी, आज तो खाना सामने लाकर हटा ले रही है।

राज उठने लगा ।

शहनाज तुरंत राज पे गिर पड़ी और उससे रुकने की मिन्नतें करने लगी- "नहीं राज जी प्लीज... मत जाइए, मेरा भरोसा करिए "

राज कुछ नहीं बोला और उठकर जाने लगा।

शहनाज उसे पकड़ ली और बोली- "नहीं मैं आपको ऐसे नहीं जाने दूँगी। अगर आप मुझे चोदना नहीं चाहते तो कोई बात नहीं, लेकिन अपना वीर्य तो गिराते जाइए...

राज - “उसकी कोई जरुरत नहीं..” बोलता हुआ दरवाजे तक आ गया।

शहनाज को उसके गुस्से से भी डर लग रहा था की ये मुझे तो कुछ नहीं बोल रहे, लेकिन पता नहीं गुस्से में कहीं कुछ कर ना लें।

शहनाज उसके सामने खड़ी हो गई, और कहा “नहीं मैं आपको ऐसे जाने नहीं दे सकती। आपको मुझे नहीं चोदना है तो मत चोदिए। लेकिन वीर्य तो आपको गिराना ही होगा। अगर आप यहाँ से गये तो मैं ऊपर भी आ जाऊँगी। अगर आपने दरवाजा बंद कर लिया तो मुख्य दरवाजे पे ही आपका इंतजार करती रहूंगी, वो भी नंगी। लेकिन आपको बिना वीर्य निकाले तो मैं नहीं छोड़ सकती...”

राज ने उसे एक हाथ से साइड किया और दरवाजा खोलने लगा। शहनाज बैठकर उसके पैर पकड़ ली- "राज चाचा आपको मेरी कसम, प्लीज... अपना वीर्य निकाल लीजिए। आपकी नजर में मेरी जो भी अहमियत हो,

.

वसीम की बीवी की आपका भला चाहने वाले की, एक रंडी की, या एक सड़क की कुतिया की, उसका मान वीर्य निकाल दीजिए प्लीज...

राज रुक गया। वो समझ गया था की शहनाज सच बोल रही है। अब कुछ घंटों की बात है जब शहनाज आफीशियली मेरी रंडी होगी और वीर्य गिराने में कोई परेशानी नहीं है, वो भी तब जब रंडी इतना जिद कर रही है। राज को रुकता देखकर शहनाज उसकी लुंगी को नीचे खींच ली। लुंगी राज के पैरों में गिर पड़ी और वो नीचे से नंगा हो गया।

शहनाज अपने जिश्म को राज के बदन से रगड़ती हुई सही पोजीशन में आई और राज का लण्ड पकड़ ली। मुर्दे में जान आ गई और लण्ड टाइट होने लगा। शहनाज लण्ड को मुँह में ली और चूसने लगी। वीर्य की खुश्बू से वो मदहोश होने लगी।

शहनाज लण्ड को मुँह से निकाली और राज को बोली- “सोफा पे आ जाइए राज जी , वहाँ आराम से बैठिए "

राज बोला- “सोफा पे क्यों, तुम्हारे बेडरूम में ही चलते हैं, वहीं पे वीर्य निकालूँगा..."

शहनाज के लिए तो ये खुश होने वाली बात थी। वो खुश होकर बोली- "हाँ... चलिए ना, आइए..”

राज इसी तरह नंगे ही बेडरूम की तरफ चल पड़ा और शहनाज उसके पीछे थी। शहनाज को लगा की शायद राज चोदने के लिए तैयार हो गया है। अचानक उसकी चूत बहुत गीली हो गई। राज दरवाजा पे रुक गया।

शहनाज पहले बेडरूम में जाती हुई बोली- “आइए ना, बैठिए ना. "

राज बेडरूम के अंदर घुसा तो उसकी नजर एक कोने में पड़े शहनाज की पैंटी ब्रा पे गई, जिसे वो उतारकर ऊपर गई थी। पता नहीं क्यों शहनाज अचानक शर्मा गई और जल्दी से उसे हटाने लगी।

राज मुश्कुरा उठा और बोला- “उसे छिपा क्यों रही हो?"

शहनाज को भी लगा की सही बात है, इसमें क्या शर्माना और इनसे क्या शर्माना? वो अपनी झेंप मिटाते हुए पैंटी ब्रा को राज के सामने कर दी और बोली- “नहीं, छिपा नहीं रही थी, बेड था इसलिए बस हटा रही थी...

"

राज ने पैंटी ब्रा उसके हाथ से ले लिया और शहनाज की गर्दन के पीछे हाथ रखकर उसके होठ चूसने लगा। शहनाज गरम तो थी ही, राज से चिपक गई। राज दूसरे हाथ से उसकी चूची मसलने लगा। वो उस वक़्त इतने जोर से तो नहीं मसल रहा था फिर भी इतना जोर तो था ही की शहनाज को दर्द हो रहा था। राज ने होठ चूसना बंद किया और थोड़ा झुका। वो टाप के ऊपर से चूची मसलते हुए निपल को चूसने लगा। उसकी थूक से टाप भीग रहा था। उसने शहनाज को बेड पे गिरा दिया और निपल को टाप के ऊपर से चूसने लगा। राज चूचियों को कस के मसल रहा था और निपल को भी उंगली से मसलते हुए शहनाज को दर्द दे रहा था।

राज चैक कर रहा था की उसकी रंडी उसके लिए कितना दर्द सह सकती है? इसी हिसाब से वो अपने प्लान को आगे बढ़ाता। राज निपल को चूसता हुआ दाँत काटने लगा। अब शहनाज के लिए दर्द बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था फिर भी वो आह्ह... उहह.. करती हुई बदन को हिला रही थी और दर्द को सह रही थी।

राज खुश हो गया। पहले तो दोनों निपल टाप के ऊपर से पता लग रहे थे लेकिन अब तो साफ-साफ दिख रहे थे। टाप राज के थूक लगने से ट्रांसपेरेंट हो चुका था और निपल साफ-साफ दिख रहे थे। टाप शहनाज के बदन से निपल के पास चिपका हुआ था। शहनाज सीधी ही लेटी हुई थी बेड पे राज उठकर दोनों निपल को देखने लगा। उसे इस तरह देखता देखकर शहनाज शरमा गई।

राज बोला- “अगर तुम्हें ऐतराज ना हो तो क्या मैं इसकी पिक ले सकता हूँ अपने मोबाइल में...

शहनाज राज को किसी चीज के लिए मना नहीं करना चाहती थी। वो इतना जानती थी की जब वो राज जी की मदद करने के लिए अपना जिश्म देने के लिए तैयार है तो वो सब कुछ सहेगी। वो राज को सब कुछ करने देगी जो वो चाहेगा। क्योंकी मना करने की स्थिति में हो सकता है की वो रुक जाएं।

शहनाज तुरंत बोली- "हाँ बिल्कुल। आप कुछ भी कर सकते हैं राज जी ...'

राज खुश होता हुआ बाहर गया और अपना मोबाइल ले आया। उसके मोबाइल में बहुत अच्छा कैमरा तो नहीं था लेकिन फिर भी ठीक ठाक था। रूम में आते ही वो बोला- “तुम घबराओ मत, तुम्हारा चेहरा नहीं लूँगा, बस इस निपल की पिक लूँगा। मुझे इस तरह बिना ब्रा के ट्रांसपेरेंट कपड़े बहुत पसंद हैं..."

शहनाज तुरंत बोली- “कोई बात नहीं है, आप जैसे चाहे वैसे पिक ले सकते हैं। आप चेहरे के साथ भी पिक ले सकते हैं। टाप उतारकर भी आप पिक लीजिए मुझे कोई प्राब्लम नहीं है। मैं बोली थी ना की मैं पूरी तरह आपके लिए हूँ, तो आप जो चाहे कर सकते हैं राज जी मुझे आप पे भरोसा है..."

राज खुश हो गया। चेहरे की तो वो ऐसे भी लेता। अब उसके सबर का बाँध टूटने ही वाला था। अब अगर वसीम नहीं माना होगा तब भी वो अब इस रंडी को चोदेगा और अपनी कुतिया बनाकर चोदेगा। राज निपल के ऊपर मोबाइल लाया और पिंक लेने लगा। वो एक हाथ से पिक लेने लगा और एक हाथ से निपल को उमेठने लगा। फिर उसने एक निपल को टाप से बाहर निकाल दिया और पूरी चूची को मसलता हुआ पिक लेने लगा।

शहनाज गरम तो थी ही, ये पल उसे और रोमांचित करने लगा। उसका चेहरा सेक्सी सा हो गया था। राज अब उसके चेहरा के साथ चूची की पिक लेने लगा। उसने दोनों चूची को बाहर कर दिया और चेहरे के साथ पिक लेने लगा।
 
माथे पे बिंदी, नंगी चूचियों के बीच में तो कभी बड़ी-ड़ी गोल-गोल गोरी सी चूचियों के बीच ब्राउन कलर का छोटा सा सिक्का और उसके बीच उभरे हुए निपल । इन पिक्स को देखकर ही लोगों के लण्ड टाइट हो जाते। राज ने मोबाइल रखा और शहनाज की शार्टस को उतार दिया। शहनाज की नंगी चिकनी चूत चमक उठी।

राज सोचने लगा की “मादरचोद, ये तो चुदवाने के लिए हमेशा तैयार रहती है." उसने शहनाज के पैर को फैला दिया। शहनाज की चूत पूरी तरह गीली थी तो वो शर्मा गई। वो पैर तो फैला ली लेकिन अपनी जांघों को दबाए रखने की कोशिश की, और अपने हाथों को चूत में रख ली।

राज फिर से पिक लेने लगा। नंगी चूत के साथ चेहरे की भी . राज ने शहनाज को टाप उतारने बोला । शहनाज पूरी तरह नंगी होकर बेड के बीच में लेट गई। राज उसकी फुल पिक ले रहा था। उसने शहनाज को पैर फैलाने का इशारा किया। शहनाज पैर फैला दी। राज पिक लेता हुआ चूत के नजदीक आता जा रहा था। ज्यादातर पिक में शहनाज का चेहरा आ रहा था। राज ने एक हाथ से चूत के छेद को फैलाया और उंगली अंदर डाल दिया। राज के चूत छूते ही और उंगली अंदर जाते ही शहनाज का बदन हिलने लगा। वो एक हाथ से तकिये को पकड़ी और दूसरे हाथ से चूची मसलते हुये कमर के ऊपर का जिश्म हिलाने लगी।

शहनाज चूत की गर्मी से मचल रही थी। राज को चूत में उंगली डालते ही एहसास हो गया था की कल भी शहनाज बिना चुदे ही रह गई थी। अभी शहनाज पूरी तरह से राज के कंट्रोल में थी।

राज ने मोबाइल रख दिया और शहनाज की चूत को फैलाकर जीभ की नोक से चाटने लगा। उफफ्फ.. शहनाज पागल होने लगी। राज धीरे-धीरे उसकी चूत को चूसने लगा। राज की जीभ का कोमल टच शहनाज की चूत को पिघला रहा था। शहनाज उसके सिर को अपनी चूत पे दबा ली और कमर उठा ली। उस की चूत ने पानी छोड़ दिया। पानी गिरते ही शहनाज कमर को बेड पे पटक दी और जोर-जोर से सांस लेने लगी। राज उस कामरस को पी गया। राज अब सीधा खड़ा हुआ और अपने लण्ड को हिलाने लगा।

शहनाज अब तक सोच रही थी की आज राज उसे चोदने वाला है लेकिन आज फिर उसके सपने चकनाचूर हो गये, कहा- “राज जी ये क्या कर रहे हैं आप? मुझपे भरोसा कीजिए, चोद लीजिए मुझे मेरी चूत में वीर्य गिराइए प्लीज... राज जी खुद को इतना मत तड़पाइए.." कहकर शहनाज हड़बड़ा कर उठ बैठी थी, और वो

राज का हाथ पकड़ ली।

राज शहनाज की हालत देखकर मन ही मन मुश्कुरा रहा था। खुद को ना तड़पाना रंडी की तुझे ना तड़पाना? वो तो सोच की तेरी चूत का पानी निकाल दिया। मन तो यही था की इसी तरह जलता हुआ छोड़ दूं की तू वसीम के आते ही चूत फैलाकर तैयार हो जाये। लेकिन तब पता नहीं तू क्या करती ? कही चूत की गर्मी से पागल होकर काम ही ना खराब कर देती।

राज बोला- “अभी नहीं, वसीम से कन्फर्म हो जाने के बाद। इतना कुछ इसलिए किया क्योंकी तुमने कसम दी थी अपनी। तुम लोग सच में बहुत अज़ीम हो। फरिश्ता हो मेरे लिए। इतना कोई नहीं करेगा किसी अंजान के लिए। लेकिन इससे ज्यादा आज नहीं..."

शहनाज नीचे बैठ गई और बोली- "जैसी आपकी मर्ज़ी, लेकिन वीर्य तो मुझे निकालने दीजिए, कम से कम ये तो मेरा हक है..." और वो लण्ड चूसने लगी।

राज ने मोबाइल उठा लिया और पिंक लेने लगा। शहनाज अपना चेहरा ऊपर कर ली और लण्ड चूसते हुए पिंक खिंचवाने लगी। वो जितना मुँह में भर सकती थी भरकर जोर-जोर से चूस रही थी। वो थकने लगी तो राज लण्ड को हाथ में पकड़कर जोर-जोर से हिलाने लगा। शहनाज को लगा की कहीं आज भी राज वीर्य को जमीन पे ना गिरा दे। वो अलर्ट हो गई। वो अभी भी पूरी तरह गरम थी
 
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