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शाज़िया की शादी को 5 साल हो गये थे और उसके तलाक को भी एक साल हो गया था। वो अपने मम्मी पापा के साथ दसरे शहर में रहती थी, जो की नजमा के घर से चार घंटे की दूरी पर था।
शाज़िया गुस्से से नजमा को देखकर कहती है- "क्या भाभी 15 मिनट से मैं बाहर खड़े होकर बेल बजा रही हूँ और आप हो की सुन ही नहीं रही हो... इतना कहकर वो घर के अंदर चली जाती है।
शाज़िया के अंदर जाते ही नजमा को ध्यान आता है की वो कहीं उसके बेडरूम में ना चली जाए, जिससे उसे वहां पर हुई भयानक चुदाई का पता चल जाए। इसलिये वो भी तुरंत नजमा के पीछे लंगड़ाते हुए चल देती है। उसकी चूत बुरी तरह से फैली हुई थी। उसे अपनी चूत में अभी भी राज का तगड़ा लण्ड महसूस हो रहा था। वो शाज़िया के पीछे-पीछे चल रही थी। शाज़िया सीधा अपने रूम में चली जाती है, और नजमा उसके गम के बाहर खई होकर उसको चाय और खाने के लिए पूछती है। तब शाज़िया उसे नहाने के बाद खाना खाने के लिए बोलती है और वो अपने कपड़े चेंज करके आराम करने लगती है।
उधर राज नंगा होकर ही सीधा ऊपर चला जाता है। उसे बहुत गुस्सा आ रहा था। उसका लण्ड अभी भी खड़ा था। वो नजमा को तसल्ली से चोदना चाहता था। वो अपने लण्ड को पकड़कर सहलाता है तब उसे अपने हाथ में
और लण्ड में खून दिखाई देता है। उसका पूरा लण्ड लाल हो गया था। नजमा की चूत का खून उसके पूरे लण्ड में लगा था। तब राज सोचता है अगर नजमा को एक बार और चोद दूं तो वो हमेशा के लिए मेरी हो जाएगी।
उधर नजमा शाज़िया के पास में सीधे अपने बेडरूम में जाती है, जहां उसका बैड उसकी चुदाई का गवाह बना था। बेडशीट पर नजमा की चूत का खून और राज के लण्ड का बीज पड़ा हुआ था, जो आपस में मिल गया था। नजमा एक बार फिर से अपनी चुदाई में खो जाती है, और एक बार फिर राज से चुदने का मूड बनाती है। लेकिन वो शाज़िया के होते हए कैसे राज का लण्ड अपनी चूत में ले? यही सोचती है। तभी उसके दिमाग में एक आइडिया आता है और वह शाज़िया के कमरे की तरफ जाकर शाज़िया को आवाज लगाती है, तो शाज़िया कोई जवाब नहीं देती।
शाज़िया गुस्से से नजमा को देखकर कहती है- "क्या भाभी 15 मिनट से मैं बाहर खड़े होकर बेल बजा रही हूँ और आप हो की सुन ही नहीं रही हो... इतना कहकर वो घर के अंदर चली जाती है।
शाज़िया के अंदर जाते ही नजमा को ध्यान आता है की वो कहीं उसके बेडरूम में ना चली जाए, जिससे उसे वहां पर हुई भयानक चुदाई का पता चल जाए। इसलिये वो भी तुरंत नजमा के पीछे लंगड़ाते हुए चल देती है। उसकी चूत बुरी तरह से फैली हुई थी। उसे अपनी चूत में अभी भी राज का तगड़ा लण्ड महसूस हो रहा था। वो शाज़िया के पीछे-पीछे चल रही थी। शाज़िया सीधा अपने रूम में चली जाती है, और नजमा उसके गम के बाहर खई होकर उसको चाय और खाने के लिए पूछती है। तब शाज़िया उसे नहाने के बाद खाना खाने के लिए बोलती है और वो अपने कपड़े चेंज करके आराम करने लगती है।
उधर राज नंगा होकर ही सीधा ऊपर चला जाता है। उसे बहुत गुस्सा आ रहा था। उसका लण्ड अभी भी खड़ा था। वो नजमा को तसल्ली से चोदना चाहता था। वो अपने लण्ड को पकड़कर सहलाता है तब उसे अपने हाथ में
और लण्ड में खून दिखाई देता है। उसका पूरा लण्ड लाल हो गया था। नजमा की चूत का खून उसके पूरे लण्ड में लगा था। तब राज सोचता है अगर नजमा को एक बार और चोद दूं तो वो हमेशा के लिए मेरी हो जाएगी।
उधर नजमा शाज़िया के पास में सीधे अपने बेडरूम में जाती है, जहां उसका बैड उसकी चुदाई का गवाह बना था। बेडशीट पर नजमा की चूत का खून और राज के लण्ड का बीज पड़ा हुआ था, जो आपस में मिल गया था। नजमा एक बार फिर से अपनी चुदाई में खो जाती है, और एक बार फिर राज से चुदने का मूड बनाती है। लेकिन वो शाज़िया के होते हए कैसे राज का लण्ड अपनी चूत में ले? यही सोचती है। तभी उसके दिमाग में एक आइडिया आता है और वह शाज़िया के कमरे की तरफ जाकर शाज़िया को आवाज लगाती है, तो शाज़िया कोई जवाब नहीं देती।