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रामू ने मुझे सोफे पर से खड़े होते हुये देखा तो वो अंदर चला गया। मेरे अंदर जाते ही उसने मेरा हाथ पकड़कर उसकी चड्डी पर के उभरे भाग पर रखवा दिया। वहां हाथ रखते ही मुझे मालूम पड़ गया की वो चूत के अंदर जाने के लिए बिल्कुल तैयार है, और जो थोड़ी बहुत कमी थी वो मेरे हाथ के दबाव ने पूरी कर दी, उसका लण्ड झटके मारने लगा।
मैंने उसे शरारत से बिल्कुल धीमी आवाज में कहा- “कहीं ये तुम्हारी चड्डी फाड़कर बाहर न निकल जाए?”
रामू- “आपकी चूत उसे नहीं मिली तो वो क्या-क्या फाड़ देगा, वो तो मैं भी नहीं जानता। मेमसाब, आप साहेब को ऊपर भेज दो ना, मैं जल्दी-जल्दी कर लूंगा आप फिर ऊपर चली जाना...” रामू ने अपना मुँह मेरे मुँह के नजदीक लाकर कहा।
रामू के लण्ड को छूने के बाद मेरी वासना भी जाग गई थी, मेरी चूत रोने लगी थी और मुझसे कह रही थी
जब तक मुझे इंडे से मारोगे नहीं तब तक मैं चुप नहीं रहूंगी, रोती ही रहूंगी...”
मैंने रामू को धीमी आवाज में कहा- “मुझे छोड़ो और अपना काम जल्दी से निपटाओ, मैं कुछ करती हूँ..”
रामू- “सच ना?” कहते हुये रामू ने मेरा हाथ छोड़ दिया।
मैं कोई जवाब दिए बगैर बाहर निकल गई। मैं सोच रही थी क्यों नहीं करूंगी कुछ? अब तो मैं चुदासी बन चुकी हूँ, चुदवाने के लिए कुछ भी कर सकती हूँ। मैं बाहर आकर नीरव के बाजू में थोड़ी जगह थी वहां बैठ गई और उसके बालों को सहलाने लगी। मैंने देखा की रामू अब अपना काम जल्दी से निपटा रहा था।
मैंने कहा- “नीरव मैं थक चुकी हैं, थोड़ी देर सोना चाहती हूँ। तुम जाओ, मैं बाद में आऊँगी...”
नीरव- “ओके, जैसी मेडम की मर्जी, सोना है तो सो जाओ..” नीरव ने कहा।
मैंने रामू की तरफ देखा, हमारी नजरें मिली तो वो अपने लण्ड को चड्डी में अडजेस्ट (वहां कुछ ज्यादा ही उभरा हुवा दिख रहा था) करने लगा जो देखकर मुझे हँसी आ रही थी पर मैंने दबा दी।
नीरव- “पर मेडम हम भी आपके साथ सो जाएंगे और जब आप ऊपर जाएंगी तभी हम ऊपर जाएंगे..." नीरव ने पहले शायद अपनी बात अधूरी छोड़ दी थी जो पूरी की।
नीरव की बात सुनते ही मेरा और रामू का चेहरा उतर गया और उसके बाद रामू काम निपटाकर निकल गया।
रामू को बाहर जाते देखकर नीरव बोला- “ये अभी घर में ही था?"
मैंने कहा- “हाँ, क्यों?”
नीरव- “मैंने उसके सामने तेरे साथ सोने की बात की, क्या सोचेगा मेरे बारे में?” नीरव ने कहा।
मैं कुछ बोली नहीं, सिर्फ मुश्कुराई की तेरे बारे में नहीं सोचेगा, मेरे बारे में सोचेगा की मेमसाब कब सोने आएंगी मेरे साथ? थोड़ी देर बाद मैंने नीरव से कहा- “चलो ऊपर चलते हैं, थकान तो कल भी उतर जाएगी, पतंग उड़ाने को कल नहीं मिलेगा..."
नीरव- “मुझे मालूम था कि थोड़ी ही देर में तुम ऐसा ही कहोगी.” नीरव ने कहा।
मैं- “क्यों ऐसा कहते हो?” मैंने पूछा।
नीरव- “वो तुम्हें पतंग का शौक इतना है ना, चलो अब छत पे चलते हैं..” नीरव ने कहा।
थोड़ी देर बाद नीरव के पतंग ने 3 पतंगें काट दिए थे, हमारी छत पर से सब थोड़ी-थोड़ी देर में- “कयपो छे..” की आवाज लगा रहे थे, सारे लोग पूरा एंजाय कर रहे थे। छत पर जितने लोग थे सबका ध्यान हम पर था और मेरा ध्यान रामू की तरफ था। मेरे तन, मन में वासना की आग लगी थी, मैं उसके नीचे पिसने के लिए तड़प रही थी, तभी मेरे दिमाग में एक खयाल आया।
मैंने मेरा मोबाइल निकाला और कान पे लगाकर- हेलो...” कहा। मैं चाहती थी कि नीरव देखे, पर वो अपनी मस्ती में मसगूल था तो मैंने और जोर-जोर से- “हेलो, हेलो...” कहा।
मैंने उसे शरारत से बिल्कुल धीमी आवाज में कहा- “कहीं ये तुम्हारी चड्डी फाड़कर बाहर न निकल जाए?”
रामू- “आपकी चूत उसे नहीं मिली तो वो क्या-क्या फाड़ देगा, वो तो मैं भी नहीं जानता। मेमसाब, आप साहेब को ऊपर भेज दो ना, मैं जल्दी-जल्दी कर लूंगा आप फिर ऊपर चली जाना...” रामू ने अपना मुँह मेरे मुँह के नजदीक लाकर कहा।
रामू के लण्ड को छूने के बाद मेरी वासना भी जाग गई थी, मेरी चूत रोने लगी थी और मुझसे कह रही थी
जब तक मुझे इंडे से मारोगे नहीं तब तक मैं चुप नहीं रहूंगी, रोती ही रहूंगी...”
मैंने रामू को धीमी आवाज में कहा- “मुझे छोड़ो और अपना काम जल्दी से निपटाओ, मैं कुछ करती हूँ..”
रामू- “सच ना?” कहते हुये रामू ने मेरा हाथ छोड़ दिया।
मैं कोई जवाब दिए बगैर बाहर निकल गई। मैं सोच रही थी क्यों नहीं करूंगी कुछ? अब तो मैं चुदासी बन चुकी हूँ, चुदवाने के लिए कुछ भी कर सकती हूँ। मैं बाहर आकर नीरव के बाजू में थोड़ी जगह थी वहां बैठ गई और उसके बालों को सहलाने लगी। मैंने देखा की रामू अब अपना काम जल्दी से निपटा रहा था।
मैंने कहा- “नीरव मैं थक चुकी हैं, थोड़ी देर सोना चाहती हूँ। तुम जाओ, मैं बाद में आऊँगी...”
नीरव- “ओके, जैसी मेडम की मर्जी, सोना है तो सो जाओ..” नीरव ने कहा।
मैंने रामू की तरफ देखा, हमारी नजरें मिली तो वो अपने लण्ड को चड्डी में अडजेस्ट (वहां कुछ ज्यादा ही उभरा हुवा दिख रहा था) करने लगा जो देखकर मुझे हँसी आ रही थी पर मैंने दबा दी।
नीरव- “पर मेडम हम भी आपके साथ सो जाएंगे और जब आप ऊपर जाएंगी तभी हम ऊपर जाएंगे..." नीरव ने पहले शायद अपनी बात अधूरी छोड़ दी थी जो पूरी की।
नीरव की बात सुनते ही मेरा और रामू का चेहरा उतर गया और उसके बाद रामू काम निपटाकर निकल गया।
रामू को बाहर जाते देखकर नीरव बोला- “ये अभी घर में ही था?"
मैंने कहा- “हाँ, क्यों?”
नीरव- “मैंने उसके सामने तेरे साथ सोने की बात की, क्या सोचेगा मेरे बारे में?” नीरव ने कहा।
मैं कुछ बोली नहीं, सिर्फ मुश्कुराई की तेरे बारे में नहीं सोचेगा, मेरे बारे में सोचेगा की मेमसाब कब सोने आएंगी मेरे साथ? थोड़ी देर बाद मैंने नीरव से कहा- “चलो ऊपर चलते हैं, थकान तो कल भी उतर जाएगी, पतंग उड़ाने को कल नहीं मिलेगा..."
नीरव- “मुझे मालूम था कि थोड़ी ही देर में तुम ऐसा ही कहोगी.” नीरव ने कहा।
मैं- “क्यों ऐसा कहते हो?” मैंने पूछा।
नीरव- “वो तुम्हें पतंग का शौक इतना है ना, चलो अब छत पे चलते हैं..” नीरव ने कहा।
थोड़ी देर बाद नीरव के पतंग ने 3 पतंगें काट दिए थे, हमारी छत पर से सब थोड़ी-थोड़ी देर में- “कयपो छे..” की आवाज लगा रहे थे, सारे लोग पूरा एंजाय कर रहे थे। छत पर जितने लोग थे सबका ध्यान हम पर था और मेरा ध्यान रामू की तरफ था। मेरे तन, मन में वासना की आग लगी थी, मैं उसके नीचे पिसने के लिए तड़प रही थी, तभी मेरे दिमाग में एक खयाल आया।
मैंने मेरा मोबाइल निकाला और कान पे लगाकर- हेलो...” कहा। मैं चाहती थी कि नीरव देखे, पर वो अपनी मस्ती में मसगूल था तो मैंने और जोर-जोर से- “हेलो, हेलो...” कहा।