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Adultery Chudasi (चुदासी )

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मैं कोई जवाब दिए बगैर गाड़ी से उतर गई और नीरव गाड़ी पार्क करने गया। मैं लिफ्ट के पास गई और नीरव के आने की राह देखने लगी।

तभी सीढ़ियों से रामू आया और मेरे हाथ में फिल्म की सीडी देकर बोला- “मेमसाब अकेली हो तब देखना.." और वो फिर से सीढ़ियां चढ़ गया।

सीडी तो ले ली मैंने, पर मेरा पूरा मस्तिष्क हिल गया। मेरे दिमाग में ढेरों सवाल खड़े हो गये थे की सी.डी. में क्या होगा? तभी नीरव को आते देखकर मैंने जल्दी से सी.डी. पर्स में डाल दी।

घर के अंदर दाखिल होते ही मैं नहाने चली गई और सोचने लगी की रामू मुझे ये सी.डी. क्यों दे गया होगा? और उसके अंदर क्या होगा? तभी मेरे दिमाग में एक बात आई की आजकल एम.एम.एस. बहूत बन रहे हैं। लड़के लड़कियों की चुदाई करते वक़्त मोबाइल से वीडियो उतार लेते हैं और फिर बाद में उसे ब्लैकमेल करते हैं। कहीं रामू ने तो हमारी वीडियो नहीं बनाई होगी ना? पहले उसने मोबाइल में ले लिया होगा और फिर उसकी । सी.डी. तो नहीं बनाई होगी ना? रामू इतना कर सकता है क्या? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। मेरा बदन डर के करण थरथराने लगा, मुझे रोना आ गया।

मैं आवाज निकाले बिना धीरे-धीरे रोती हुई नहाने लगी। थोड़ी देर ऐसे ही नहाने के बाद मेरा दिल थोड़ा हल्का । हुवा तो मैं खड़ी होकर मेरा बदन पोंछकर गाउन पहनकर बाहर निकली। बाहर आकर देखा तो नीरव सो गया था। नीरव को सोते देखकर मेरे दिल को थोड़ा सकून मिला। मैंने पर्स में से सी.डी. निकाली और धीमे कदमों से रूम के बाहर निकली और टीवी के पास आई। टीवी ओन करके आवाज मूट किया और फिर डी.वी.डी. प्लेयर चालू । किया और कंपकंपाते हाथों से सी.डी. को अंदर डाला। स्क्रीन पे अंधेरा दिख रहा था और मेरे दिमाग में भी। मेरा कदम डगमगा रहा था, मैं डरते हुये टीवी की स्क्रीन पे आँख गड़ाए खड़ी थी और सोच रही थी की अब क्या होगा?

मेरे बदन में आग लगी हुई थी, मैं मेरी चूत को उंगली से चोद रही थी, दूसरे हाथ से मैं मेरी चूचियों को दबा रही थी। मेरी आँखों के सामने थोड़ी देर पहले देखी हुई ब्लू-फिल्म के दृश्य चल रहे थे। मूवी इंग्लिश थी पर। उसका टाइटल हिन्दी में था, शायद उसके डायलोग भी हिन्दी में होगे। पर रात के 2:00 बजे तो टीवी की आवाज रखकर मैं नीरव को जगा नहीं सकती थी। टाइटल कितना अजीब था- ‘छोटा छेद, बड़ा इंडा'

सीडी चालू होते ही मेरा डर खतम हो गया था, क्योंकि रामू ने मुझे ब्लू-फिल्म की सी.डी. देखने को दी हुई थी। मैंने पहले भी ब्लू-फिल्में देखी थी पर आज देखने में मुझे ज्यादा इंटरेस्ट हुवा। शायद उसका करण ये भी था की आजकल सेक्स में मेरी दिलचस्पी बढ़ चुकी थी।

मैंने पहले जो फिल्में देखी थी उससे ये थोड़ी अलग किश्म की फिल्म थी। मैंने अब तक देखी हुई फिल्मों में । लड़के-लड़कियां सफेद ही देखे थे। पर इस फिल्म में सारे लड़के ब्लैक और लड़कियां सफेद थीं, साथ में लड़कियां कम उमर की और जीरो साइज के फिगर की थीं। लड़कों की उमर तो वोही थी, पर सब सुपरमैन जैसे थे। सारे लड़कों की बाडी किसी भारी भरकम मुक्केबाज जैसी थी। फिल्म के अंदर 5 कपल के अलग-अलग सेक्स दृश्य थे। अच्छे तो सभी थे पर एक सेक्स दृश्य मुझे बहुत ज्यादा पसंद आया था, क्योंकि उस दृश्य के माडल सबसे ज्यादा अच्छे थे।

उसके अंदर लड़की की चूत धनुष के आकर की थी, जिसे चाट-चटकार लड़का लड़की को चीख पड़ने पर मजबूर कर देता है (आवाज तो बंद थी पर देखने से भी मालूम पड़ रहा था) और बाद में लड़की भी लड़के का लण्ड चाटकर उससे चुदाई करवाती है। सारा नजारा याद करते हुये मैं न जाने कितनी देर तक उंगली को चूत के अंदर-बाहर करती रही और थोड़ी देर बाद झड़ गई। झड़ने के बाद मैं तुरन्त सो गई।

सुबह गोपाल चाचा के दूध देकर जाने के बाद मैं हर रोज की तरह फिर से सोई नहीं। मैं नहाने बैठ गई पर साथ में नीरव के शेविंग का सामान ले गई। आज से पहले तो मैं वैक्स करते वक़्त ही कांख भी करा देती थी जिसमें वो नीचे के बाल भी साफ कर देते थे।

 
नहाने से पहले मैंने ध्यान से मेरी चूत के बाल की सफाई कर दी। सफाई करने के बाद मैंने वहां हाथ लगाकर चेक करके देखा की कहीं कोई बाल तो नहीं रह गया ना... मेरी चूत इतनी चिकनी हो गई थी की हाथ सर्र से सरक जाता था।

हर रोज से थोड़ी ज्यादा देर नहाकर मैं बाहर आई तब तक 8:00 बज गये थे। मैंने गैस पे चाय बनाने को रखी और नीरव को जगाया। नीरव के जाने के बाद मैंने जल्दी-जल्दी खाना बनाया और टिफिन भर के मैंने बाहर रख दिया और मैं खाना खाने बैठ गई। खाना खाते हुये मैंने फिर से वो सी.डी. लगाई। मैंने फिर से हर दृश्य देखा और मेरे पसंदीदा दृश्य तो मैंने 3 बार देखे। डायलोग हिन्दी में ही थे पर कोई दमदार नहीं थे। उससे तो अच्छा इंग्लिश में होता तो ज्यादा मजा आता। देखते-देखते मैं फिर से गरम हो चुकी थी, तभी बेल बाजी और मैंने टीवी और डी.वी.डी. प्लेयर को आफ करके दरवाजा खोला तो सामने रामू था।

मैं दरवाजा खुला छोड़कर बेडरूम में चली गई।

आधे घंटे बाद रामू की आवाज आई- “जा रहा हूँ मेमसाब...”

मैं- “रामू 10 मिनट रुकना...” मैंने रामू को कहा।

थोड़ी देर बाद मैंने बेडरूम का दरवाजा खोला और रामू के सामने मैं मेरी कमर पे एक हाथ लगाकर खड़ी हो । गई। रामू फटी आँखों से मुझे देखने लगा। शायद उसे अपनी आँखों पर विस्वास नहीं हो रहा था, होता भी कैसे उसके सामने मैं आज हुश्न की परी बनकर खड़ी थी।

मैंने ब्लैक कलर की नाइटी पहनी हुई थी, जो मेरी मखमली जांघ के दीदार करा रही थी। साथ में नाइटी स्लीवलेश थी, जो मेरे कोमल हाथों को उजागर कर रही थी, और ऊपर के कट से मेरी आधी चूची बाहर दिख रही थी। मैंने हल्का सा मेकप किया था जो मेरी सुंदरता पे चार चाँद लगा रहा था। रूम में मैंने एसी ओन करके रूम स्प्रे कर दिया था, जिसकी मादक-मादक खुशबू तो शायद रामू ने आज तक ली नहीं होगी।

रामू- “मैं कहा हूँ मेमसाब? मरकर स्वर्ग में तो नहीं पहुँच गया ना?” रामू मदहोशी की हालत में इतना बोलकर चुप हो गया।

 
मैंने ब्लैक कलर की नाइटी पहनी हुई थी, जो मेरी मखमली जांघ के दीदार करा रही थी। साथ में नाइटी स्लीवलेश थी, जो मेरे कोमल हाथों को उजागर कर रही थी, और ऊपर के कट से मेरी आधी चूची बाहर दिख रही थी। मैंने हल्का सा मेकप किया था जो मेरी सुंदरता पे चार चाँद लगा रहा था। रूम में मैंने एसी ओन करके रूम स्प्रे कर दिया था, जिसकी मादक-मादक खुशबू तो शायद रामू ने आज तक ली नहीं होगी।

रामू- “मैं कहा हूँ मेमसाब? मरकर स्वर्ग में तो नहीं पहुँच गया ना?” रामू मदहोशी की हालत में इतना बोलकर चुप हो गया।

मैं धीरे-धीरे पीछे जाने लगी और बेड पर जाकर लेट गई। रामू मदहोशी के आलम में घिरा हुवा धीमे कदमों से बेड के पास आया, और मुझे निहारने लगा। शायद अब भी उसे अपनी किश्मत पे भरोसा नहीं हो रहा था।

उसने मेरी टांगों को पकड़ा और मुझे खींचकर बेड की किनारे पे ले लिया और मेरी नाइटी को ऊपर किया। नाइटी ऊपर होते ही रामू के मुँह से लार टपक पड़ी। वो मेरी सफाचट चूत को देखकर पागल हो गया। उसने उसके एक हाथ से 3-4 बार मेरी चूत को सहलाया और फिर मुझे बिठाकर मेरी नाइटी निकाल दी।

रामू के सामने पूरी नंगी मैं पहली बार हुई थी। वो फिर से एकटक मुझे निहारने लगा। मानो इस पल को वो हमेशा के लिये अपने दिलो-दिमाग में कैद कर लेना चाहता हो। फिर उसने झुक के मेरी चूत में उंगली डाली। मेरी चूत गीली तो हो ही गई थी, जिससे उसकी उंगली गीली हो गई। गीली उंगली मुँह में डालकर उसने चाटी और फिर मेरी चूत के नीचे के हिस्से पर उसने अपनी जबान लगाई।

मैं सिहर उठी।

रामू ने उसकी जबान से चूत नीचे के हिस्से को चाटना चालू किया और फिर वो जबान को ऊपर तक ले गया, और इस तरह उसने पूरी चूत के बाहरी हिस्से को चाटा तो मेरे न चाहते हुये भी दो मिनट के लिए मेरी आँखें बंद हो गई और मैं सिसकियां लेने लगी। रामू ने अब एक हाथ की दो उंगली से चूत को खींचा और चूत में दूसरे हाथ की उंगली डाल दी और वो उसे अंदर-बाहर करते हुये चूत के अंदर के हिस्से को चाटने लगा।

मैं मचलने लगी, रामू के बालों को सहलाने लगी।

थोड़ी देर बाद रामू ने उंगली से चोदना बंद कर दिया और सिर्फ अंदर तक जबान डालकर मेरी चूत की चुसाई। करने लगा। रूम के अंदर मेरी मादक सिसकारी गूंजने लगी। मैं अब मेरा धैर्य खो बैठी थी, और नागिन की तरह रेंगने लगी थी। मेरी सांसें भारी होती जा रही थी, मैं जोरों से लंबी-लंबी सिसकारियां लेते हुये मदहोश होती जा । रही थी। मेरे हाथों ने रामू के बालों को खींचना चालू कर दिया था, मुझे अब मालूम हो चुका था की मैं अब कभी झड़ सकती हूँ।

रामू ने अपने हाथ को ऊपर किया और मेरी चूचियां सहलाना शुरू कर दिया और कुछ पल के बाद मैं झड़ गई। झड़ते वक़्त मैंने रामू के बाल खींचकर उसे चूसना बंद करने को कहा पर उसने चूसना चालू रखा, और पूरी चूत चाटने के बाद वो उठा और बोला- “मेमसाब आपकी चूत का पानी तो अमृत जैसा है...”

रामू की बात सुनकर मेरे मन में खयाल आया की अगर मेरी चूत का पानी सच में अमृत है तो, आज वो देव की जगह दानव को मिला है। झड़ने के बाद, थोड़ी देर तक मैं मेरे दोनों हाथ ऊपर की तरफ करके आँखें बंद । करके पड़ी रही। दिन का उजाला, पूरी नंगी, मेरी कमर तक का बदन बेड पर और टाँगें जमीन पर लटकी हुई, हाथ ऊपर की तरफ किए हुये थी, जिससे मेरे उरोज भी ऊपर खिंच गये थे। इस पोज में तो आज तक नीरव ने भी कभी मुझे नहीं देखा था।

तभी मेरे उरोजों पर स्पर्श होते ही मैंने आँखें खोल दीं। रामू मेरे उरोजों को सहला रहा था उसकी रूखी और सख्त हथेलियां मेरे उरोजों को कहीं खरोंच न दें ऐसा डर मुझे लगने लगा।

 


तभी मेरे उरोजों पर स्पर्श होते ही मैंने आँखें खोल दीं। रामू मेरे उरोजों को सहला रहा था उसकी रूखी और सख्त हथेलियां मेरे उरोजों को कहीं खरोंच न दें ऐसा डर मुझे लगने लगा।

रामू- “मेमसाब आप घूम जाओ..” रामू ने मेरे बायें उरोज के निप्पल को दो उंगली से दबाते हुये कहा।

रामू की बात सुनकर मैं डर गई की कहीं ये मेरी गाण्ड का इस्तेमाल तो नहीं करना चाहता ना? थोड़ी ही देर पहले मैंने उसकी दी हुई सी.डी. में देखा भी था- “नहीं रामू, प्लीज़...” मेरे मुँह से इतने ही शब्द निकले।

रामू- “अरे मेमसाब अपुन आपके साथ कुछ उल्टा सीधा नहीं करने वाला, मैं जो करूंगा उससे आपका चुदवाने का मूड फिर से आ जाएगा...”

रामू की बात सुनकर मैं डरती हुई पीछे की तरफ हुई।

राम्- “अब मेमसाब कुतिया बन जाओ..” रामू ने कहा।

मैं- “क्या?” मैंने पूछा।

रामू- “दो हाथ और दो पैरों पे हो जाओ...” रामू ने कहा।

मैं उसके कहे मुताबिक हो गई और मेरे स्तन नीचे की तरफ झूलने लगे। रामू ने मेरी गाण्ड को थोड़ी देर सहलाया और फिर पीछे की तरफ चला गया।

अब क्या होगा वो सोचकर मुझे डर लग रहा था। तभी मुझे मेरी गाण्ड के छेद पे कुछ गीला लगने का अहसास हुवा। मैंने पूछा- “क्या कर रहे हो?”

रामू- “आपकी ये मस्त मलाई जैसी गाण्ड चाटने जा रहा हूँ मेमसाब, जिससे आप फिर से गरम हो जाओगी...” रामू ने कहा और फिर से उसने उसी जगह पर चाटा।

मैं देख तो नहीं सकती थी, पर स्पर्श से इतना पता तो चल ही रहा था की वो कहां-कहां और किस चीज से चाट रहा है। रामू ने उसकी जबान से मेरी गाण्ड के छेद के ऊपर के हिस्से को थोड़ी देर चाटा। रामू ने चाटना शुरू किया था तब से मेरी सिसकारियां चालू हो गई थी। रामू ने मेरे दो कूल्हों को अलग दिशा में खींचा और वो अब अंदर तक जबान डालकर चाटने लगा।

उसके बाद तो मैं बिल्कुल ही पागल हो गई और सिसकारियों की बजाय चीखने लगी और रामू को रुकने को कहने लगी- “अब बस करो रामू, मुझसे सहन नहीं हो रहा, कहीं मैं फिर से न छूट जाऊँ, छोड़ो रामू...”

 
उसके बाद तो मैं बिल्कुल ही पागल हो गई और सिसकारियों की बजाय चीखने लगी और रामू को रुकने को कहने लगी- “अब बस करो रामू, मुझसे सहन नहीं हो रहा, कहीं मैं फिर से न छूट जाऊँ, छोड़ो रामू...”

रामू मेरी बात सुने बगैर अपना काम किए ही जा रहा था और मैं अपना संतुलन खो बैठी, मैं एक तरफ ढल के झुक गई और लेट गई। रामू ने चाटना बंद किया और कहा- “मजा आया ना मेमसाब?”

मैंने मेरा सिर ‘हाँ, में हिलाया।

रामू बेड से नीचे उतारकर अपने कपड़े निकालने लगा। मैं सीधी हो गई और उसे देखने लगी। रामू हमेशा खाकी चड्डी और टी-शर्ट में ही होता है, शायद उसके पास 2-3 खाकी चड्डी होगी। रामू ने अपनी टी-शर्ट निकाल दी और अपना सीना तानकर मुझे दिखाने लगा, कहा- “देखिए मेमसाब, मेरी बाडी सलमान खान जैसी ही है ना?”

मैं क्या बोलँ उसकी बाडी सलमान खान तो क्या पृनीत इस्सर से भी ज्यादा थी, उसका बदन बहत भारी था और साथ में आगे से निकली हुई तोंद देखकर उसका शरीर और तगड़ा लगता था। उसकी बाहें मेरी जांघों जितनी भरावदर थी। उसने जैसे ही चड्डी निकाली तो सबसे पहले मैंने उसके लण्ड की तरफ नजर डाली। बहुत ही बड़ा लण्ड था उसका, सुबह देखी हुई ब्लू-फिल्मों के माडेल के जितना। लण्ड के आजू-बाजू में बाल भी खूब थे। उसका लण्ड इतना बड़ा न होता तो शायद बालों के पीछे से दिखता भी नहीं। रामू काला तो था ही पर उसका लण्ड उससे भी ज्यादा काला था, मतलब की रामू में देखने जैसा कुछ भी नहीं था। फिर भी मैं उसे निहारती रही। कपड़े निकालकर रामू मेरे ऊपर आ गया और मेरे मम्मों को चूसने लगा।

मैं गरम तो पहले से हो ही गई थी और गरम होकर उसके बालों को सहलाने लगी।

रामू ने अपना लण्ड मेरी चूत के आजू-बाजू रगड़ना चालू किया और कहा- “सच में मेमसाब आप आज भी कोरा माल लगती हो...”

मैं आने वाले दर्द को सहने के लिए दिल को तैयार करने लगी। रामू ने अपना लण्ड मेरी चूत के द्वार पर रखा। मेरी सांसें रुक गई और मैं आने वाले हर एक पल का इंतेजार करने लगी। रामू ने अपने चूतड़ों को ऊपर उठाया और एक ही झटके में पूरे लण्ड को अंदर घुसेड़ दिया। मेरे मुँह से छोटी सी चीख निकल गई।

रामू- “मेमसाब बहुत ही नाझुक हो आप, दो बार की चुदाई के बाद भी सह नहीं पा रही हो...” रामू ने लण्ड को थोड़ा बाहर निकाला और फिर धीरे से अंदर डाला, 2-3 बार ऐसा करने के बाद वो स्पीड से करने लगा। धीरे-धीरे गति बढ़ने के साथ-साथ वो लण्ड भी ज्यादा अंदर तक और बाहर तक ले जाने लगा।

 
मैं मस्ती के महासागर में खोने लगी। मैंने रामू को मेरी बाहों की गिरफ्त में कैद कर लिया।

चोदते-चोदते रामू ने उसके होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। उसके मुँह से बीड़ी और शराब की मिली-जुली बदबू आ रही थी। मैंने सोचा रामू को हर रोज ना बोलूंगी, तो शायद उसे अच्छा नहीं लगेगा, थोड़ी देर कर लेने दो। रामू ने मेरे ऊपर के होंठ को उसके दोनों होंठों के बीच लेकर चूसना चालू किया। रामू बड़े इतनिनम और लज़्ज़त से मेरे होंठ चूसते हुये तेजी से मेरी चुदाई कर रहा था। वो अब ऊपर का होंठ छोड़कर नीचे का होंठ चूस रहा था।

मैंने मेरे पैरों को उसकी कमर के चौतरफा लपेट दिए थे, और साथ में वो जब लण्ड पीछे लेता था तब मैं गाण्ड उठाकर ऊपर कर रही थी। मेरे हाथ उसकी नंगी पीठ को सहला रहे थे, मतलब की आज मैं उसे पूरा सहयोग दे रही थी। मैं सिर्फ उसे होंठ चूसने में सहयोग नहीं दे रही थी, बल्की मेरे मुँह को ज्यादा खुला रखकर उसके होंठों से मेरा दूसरा होंठ दूर रख रही थी।

रामू ने मेरा सिर ऊपर करके उसका हाथ मेरे सिर के नीचे डाल दिया, जिससे मेरा सिर थोड़ा और ऊपर हो गया और एक साइड के बालों को वो अपनी उंगलियों से सहलाने लगा। उसने दूसरे हाथ से मेरे स्तनों को सहलाना। चालू किया तो मैं और मदहोश होने लगी।

रामू ने अब मेरे होंठ छोड़कर गर्दन को चूमना चालू कर दिया। ये सब करने के साथ-साथ वो अपनी चुदाई की। स्पीड धीरे-धीरे बढ़ाते ही जा रहा था। मुझे उसका लण्ड नाभि तक जाता हुवा महसूस हो रहा था। वो लण्ड को सुपाड़े तक बाहर निकालकर फिर से पूरा अंदर डालता था। वो जब भी लण्ड को पूरा अंदर डालता था तब उसके लण्ड के आजू-बाजू के बालों से मुझे गुदगुदी हो रही थी।

मेरे मुँह से सिसकारियां रामू की स्पीड के साथ बढ़ती जा रही थीं, मैं अपने आप पर का काबू खो चुकी थी।

रामू- “सच में मेमसाब आप मस्त चुदवाती हो..” रामू ने मेरी गरदन पर अपनी जबान से चाटते हुये कहा।

मैं- “उम्म्म्म हूँ.” मेरे मुँह से इतना ही निकला और मैं फिर से सिसकारियां लेने लगी।

 
रामू- “सच में मेमसाब आप मस्त चुदवाती हो..” रामू ने मेरी गरदन पर अपनी जबान से चाटते हुये कहा।

मैं- “उम्म्म्म हूँ.” मेरे मुँह से इतना ही निकला और मैं फिर से सिसकारियां लेने लगी।

रामू ने फिर से उसके होंठों के बीच मेरा ऊपर का होंठ ले लिया।

रामू के लण्ड की सख्ती और ताकत मुझसे सहन नहीं हो पा रही थी। मुझे हर फटके के साथ मीठा दर्द दे जाती थी। मैंने अपने होंठ भींचे और मैं भी रामू के होंठ को चूसने लगी। मुझे मेरा दर्द कम होता महसूस हुवा और मजा बढ़ गया। अब मेरे हाथ की उंगलियां रामू के बालों में थी। हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे। रामू की और मेरी सांसें भारी होने लगी थीं, और रूम हमारी दोनों की सांसें और सिसकरियों से गूंज रहा था। एसी चालू था फिर भी रामू का शरीर पसीने से तरबतर हो गया था, और उसके बदन से चूकर मुझे भिगा रहा था। रामू ने स्तन पे से हाथ उठाकर मेरी गाण्ड पे रख दिया और उसे सहलाते हुये ऊपर की तरफ करने लगा।

मुझे अब लगने लगा था की मैं अब कभी भी झड़ सकती हैं, क्योंकि मेरे मुँह से अब सिसकारियों की जगह सीटियां निकलने लगी थीं। पर रामू अभी भी पूरे जोश में था। मुझे लगा की शायद मैं झड़ने के बाद रामू को झेल नहीं पाऊँगी, इसलिये वो मुझसे पहले झड़ जाए तो अच्छा होगा।

तभी रामू ने अचानक ही मेरी गाण्ड के अंदर उंगली घुसेड़ दी, जिससे मेरे मुँह से हल्की सी चीख निकल गई। मेरे मुँह खोलते ही रामू ने अपनी जबान मेरे मुँह के अंदर डाल दी, जो मेरे लिए सहन करना ज्यादा मुश्किल हो गया। मेरा चुदाई का मजा थोड़ा किरकिरा हो गया। मेरा सारा ध्यान मेरे मुँह के अंदर उसकी दाखिल की हुई। जबान पर चला गया। वो अपनी जबान से मेरे मुँह का जायजा लेने लगा। उसने उसकी जबान मेरे पूरे मुँह के अंदर घुमाई और फिर वो मेरी जीभ के साथ उसे घिसने लगा।

धीरे-धीरे फिर से मेरा मस्तिष्क चुदाई की तरफ हो गया। साथ में जबान से जबान लड़ाने में मुझे भी मजा आने लगा। रामू के मुँह में से थूक मेरे मुँह में आकर मेरे गले में उतर रहा था।

रामू- “आज से आप अपुन की रंडी बन चुकी हैं मेमसाब...” रामू ने मेरे मुँह में मुँह रखकर ही कहा।

मुझे उसकी बात ज्यादा समझ में नहीं आई।

अब हम दोनों की सांसें भारी होने लगी थीं। रामू झड़ने से पहले अपनी स्पीड बढ़ाता ही जा रहा था। मैं भी अपनी गाण्ड को ऊपर कर-करके चुदवाकर जल्दी झड़ना चाहती थी। रामू ने मेरी जीभ से उसकी जबान को भी घिसना तेज कर दिया था। हम दोनों एक दूसरे के बदन में ज्यादा से ज्यादा समाने की कोशिश करने लगे थे।

और फिर थोड़ी ही देर में मैं झड़ने लगी और मेरे झड़ने के चंद सेकंड के बाद ही रामू ने भी अपना वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। रामू के लण्ड से जब तक वीर्य निकलता रहा तब तक वो मेरे ऊपर रहा और फिर मुँह पर से हटकर वो मेरे बाजू में लेट गया।

 
रामू- “मजा आया ना मेमसाब?” थोड़ी देर बाद रामू ने पूछा।

मैंने कोई जवाब नहीं दिया।

तब उसने फिर से पूछा- “बोलो ना मेमसाब?”

मैं- “हाँ..”

मेरे इतना कहते ही रामू खुश हो गया और उसने अपना एक हाथ मेरे नीचे डाला और दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़कर मुझे उसके ऊपर खींच लिया। मैं उसके पसीने से लथपथ शरीर पर हो गई।

रामू- “किस करो ना मेमसाब...” रामू ने कहा।

मैंने झुक के उसके होंठों को चूमना चालू कर दिया। थोड़ी देर में ऐसे ही उसके होंठों को चूसती रही तो रामू ने। अपना मुँह खोल दिया। मैंने अपनी जबान उसके मुँह के अंदर डाल दी और उसी की तरह मैंने भी उसके मुँह का पूरा जायजा लिया। फिर मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली।

मैं- “अब तुम जाओ...” कहते हुये मैं रामू के ऊपर से हट गई।

रामू- “आपको छोड़कर जाने का दिल नहीं करता मेमसाब, पर जाना पड़ेगा...” कहते हुये रामू खड़ा हुवा और अपने कपड़े पहनने लगा।

मैंने भी खड़े होकर कपबोर्ड से गाउन निकालकर पहन लिया।

कपड़े पहनकर बाहर निकलते हुये रामू बोला- “मेमसाब, एक बार आपकी चुदाई मैं झंडू बाम लगाकर करूँगा...”

रामू के जाने के बाद मैं गहरी सोच में पड़ गई। मैंने आज जो रामू के साथ पूरे समर्पण से मेरी चुदाई करवाई थी, वो मैंने सही किया या गलत? वो मैं समझ नहीं पा रही थी। मैं अब मेरे जिश्म की भूख सह नहीं पा रही थी। रामू मुझे पसंद नहीं था, फिर भी मैंने जिस तरह से उसके सामने मेरा बदन परोस दिया था, वो मेरे लिए भी एक आश्चर्य था। फिर भी एक बात तो तय ही थी की रामू मुझे पसंद नहीं है, फिर भी उसके साथ संभोग के बाद मेरे दिल को जो शांती और बदन को जो सकून मिलता है वो उसके पहले मुझे किसी के साथ नहीं मिला था। बहुत सोचने के बाद भी मैं कोई नतीजे पे न पहुँच सकी तो मैंने सोचना छोड़ दिया।

दूसरे दिन जैसे ही रामू काम करने आया तो मैं बेडरूम में चली गई और वो कब काम खतम करके अंदर आए उसकी राह देखने लगी।

तभी मेरे मोबाइल की रिंग बजी। मैंने उसकी स्क्रीन पे नजर डाली। मीना दीदी का काल था। मैं सोच में पड़ गई की दीदी ने क्यों मुझे काल किया होगा? फिर से तो कोई झगड़ा नहीं करेगी ना? और मैंने काल काट दिया।

 
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