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मेरी शंका अब भी खतम नहीं हुई थी। पर मैंने और ज्यादा पूछना ठीक नहीं समझा तो मैं चुप हो गई। 3:00 बजे गये, पूरा कालेज खाली हो गया। मैं और रीता कालेज के पीछे वाले हिस्से में जाकर बैठे, वहां खास कोई आता जाता नहीं था। पहले तो वहां गार्डन बनाया हुवा था। पर ठीक तरह से मेंटिनेंस न करने की वजह से । जंगल जैसा लगने लगा था, टूटे हुये बेंचेस, कुर्सियां और ब्लैकबोई एक कोन में रखे हुये थे।
रीता- “विकास आएगा तो मैं वहां सामने चली जाऊँगी। निशा, वो तुमसे अकेले में बात करना चाहता है...” रीता ने कहा।
रीता की बात मुझे पसंद नहीं आई- “मैं अकेले में बात नहीं करूंगी, तुम कहीं गई ना तो मैं चली जाऊँगी...” मैंने रीता को धमकी दी।
रीता- “तुम्हें मुझ पर विस्वास है की नहीं? विकास ने मुझे पैसे दिए, इसलिए मैं उसकी तरफदारी नहीं कर रही, वो मुझे अच्छा लगा इसलिए तुम्हें मिलने को कहा और तुम्हें जाना है तो तुम जा सकती हो...” रीता ने कहा।
मुझे भी लगा की मैं बात को ज्यादा ही सियरियस ले रही हैं। मैंने बोलना बंद कर दिया और विकास की राह देखने लगी।
रीता- “विकास आ रहा है निशा...”
ने गेट की तरफ देखा, तो विकास जीन्स और टी-शर्ट में आ रहा था। रीता जाने लगी तो मैंने उससे कहाविकास को बोलकर जाना, 5 मिनट मतलब, 5 मिनट ही..."
रीता कुछ भी जवाब दिए बगैर चली गई और पेड़ के पीछे जाकर बैठ गई। विकास मेरे करीब आ गया। मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा, मैं पहली बार किसी लड़के को अकेले में मिल रही थी।
विकास ने हाथ आगे बढ़ाया और कहा- “आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे हसीन दिन है...”
मैं विकास से हाथ मिलना नहीं चाहती थी पर उसकी आवाज में कोई जादू था। मैंने मेरा हाथ आगे करके मिलाया।
विकास- “निशा तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मुझसे शादी करोगी?”
विकास की बात सुनकर मेरा दिल इतनी जोर से धड़कने लगा की मुझे लगा की कहीं मेरा सीना फट ना जाए।
मैंने सोचा भी नहीं था की ये लड़का इस तरह से सीधा अपने दिल की बात करेगा। मैंने तो सोचा था की वो
कहेगा की मुझसे दोस्ती कर लो और मैं ना बोलकर निकल जाऊँगी, पर यहां तो उल्टा हुवा। मैं उसका दिल नहीं तोड़ना चाहती थी थोड़ा सोचकर बोली- “तुम बहुत अच्छे इंसान हो, जो भी लड़की तुमसे शादी करेगी वो खुश रहेगी। पर मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती...”
विकास- “क्यों, तुम किसी और से प्यार करती हो?” विकास ने पूछा।
मैं- “नहीं, मैं किसी से प्यार नहीं करती..” मैंने कहा।
विकास- “तो फिर क्यों ना बोल रही हो?” विकास की आवाज थोड़ी ऊंची हो रही थी।
पर मैंने शांति से कहा- “वो मैं अभी शादी नहीं करना चाहती...”
मेरी बात सुनकर विकास मेरे करीब आया और बोला- “मैं राह देगा, बस तुम सिर्फ हाँ बोल दो...”
मुझे अब उससे डर लगने लगा था- “मुझे जाना है मैं जा रही हूँ..” कहकर मैं वहां से निकलने लगी।
विकास ने मेरा हाथ पकड़ लिया- “मुझे जवाब देकर जाओ, ऐसे कैसे जा सकती हो?”
मैंने उसके हाथ से मेरा हाथ छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुये कहा- “मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती,मुझे जाने दो..."
विकास मेरे करीब आ गया और मुझे बाहों में लेकर बोला- “शादी नहीं करना चाहती हो तो सुहागरात मनाते हैं, चलो अपने कपड़े निकालो..."
उसकी बात सुनकर मैं उसके सीने पे मारते हुये चिल्लाने लगी- “रीता, रीता..”
रीता- “विकास आएगा तो मैं वहां सामने चली जाऊँगी। निशा, वो तुमसे अकेले में बात करना चाहता है...” रीता ने कहा।
रीता की बात मुझे पसंद नहीं आई- “मैं अकेले में बात नहीं करूंगी, तुम कहीं गई ना तो मैं चली जाऊँगी...” मैंने रीता को धमकी दी।
रीता- “तुम्हें मुझ पर विस्वास है की नहीं? विकास ने मुझे पैसे दिए, इसलिए मैं उसकी तरफदारी नहीं कर रही, वो मुझे अच्छा लगा इसलिए तुम्हें मिलने को कहा और तुम्हें जाना है तो तुम जा सकती हो...” रीता ने कहा।
मुझे भी लगा की मैं बात को ज्यादा ही सियरियस ले रही हैं। मैंने बोलना बंद कर दिया और विकास की राह देखने लगी।
रीता- “विकास आ रहा है निशा...”
ने गेट की तरफ देखा, तो विकास जीन्स और टी-शर्ट में आ रहा था। रीता जाने लगी तो मैंने उससे कहाविकास को बोलकर जाना, 5 मिनट मतलब, 5 मिनट ही..."
रीता कुछ भी जवाब दिए बगैर चली गई और पेड़ के पीछे जाकर बैठ गई। विकास मेरे करीब आ गया। मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा, मैं पहली बार किसी लड़के को अकेले में मिल रही थी।
विकास ने हाथ आगे बढ़ाया और कहा- “आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे हसीन दिन है...”
मैं विकास से हाथ मिलना नहीं चाहती थी पर उसकी आवाज में कोई जादू था। मैंने मेरा हाथ आगे करके मिलाया।
विकास- “निशा तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मुझसे शादी करोगी?”
विकास की बात सुनकर मेरा दिल इतनी जोर से धड़कने लगा की मुझे लगा की कहीं मेरा सीना फट ना जाए।
मैंने सोचा भी नहीं था की ये लड़का इस तरह से सीधा अपने दिल की बात करेगा। मैंने तो सोचा था की वो
कहेगा की मुझसे दोस्ती कर लो और मैं ना बोलकर निकल जाऊँगी, पर यहां तो उल्टा हुवा। मैं उसका दिल नहीं तोड़ना चाहती थी थोड़ा सोचकर बोली- “तुम बहुत अच्छे इंसान हो, जो भी लड़की तुमसे शादी करेगी वो खुश रहेगी। पर मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती...”
विकास- “क्यों, तुम किसी और से प्यार करती हो?” विकास ने पूछा।
मैं- “नहीं, मैं किसी से प्यार नहीं करती..” मैंने कहा।
विकास- “तो फिर क्यों ना बोल रही हो?” विकास की आवाज थोड़ी ऊंची हो रही थी।
पर मैंने शांति से कहा- “वो मैं अभी शादी नहीं करना चाहती...”
मेरी बात सुनकर विकास मेरे करीब आया और बोला- “मैं राह देगा, बस तुम सिर्फ हाँ बोल दो...”
मुझे अब उससे डर लगने लगा था- “मुझे जाना है मैं जा रही हूँ..” कहकर मैं वहां से निकलने लगी।
विकास ने मेरा हाथ पकड़ लिया- “मुझे जवाब देकर जाओ, ऐसे कैसे जा सकती हो?”
मैंने उसके हाथ से मेरा हाथ छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुये कहा- “मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती,मुझे जाने दो..."
विकास मेरे करीब आ गया और मुझे बाहों में लेकर बोला- “शादी नहीं करना चाहती हो तो सुहागरात मनाते हैं, चलो अपने कपड़े निकालो..."
उसकी बात सुनकर मैं उसके सीने पे मारते हुये चिल्लाने लगी- “रीता, रीता..”