S
StoryPublisher
Guest
मैं- “वो... वो आपका..” मैंने फिर मस्ती की।
जीजू- “क्यों तड़पा रही हो बताओ ना...” जीजू ने कहा।
मैं- “आपके लिंग की..” मैंने शर्माते हुये धीरे से कहा।
जीजू- “हाय... मर जाऊँ तेरी इस अदा पर। कब मिलती हो? कहो तो लेने आ जाऊँ?” जीजू ने पूछा।
मैं मिलना तो चाहती थी जीजू को, पर दीदी के बारे में सोचकर मैंने दिल पर पत्थर रखते हुये जीजू से झूठ कहा- “जीजू मेरा मासिक आ गया है...”
जीजू ने मेरी बात सुनकर ढीली आवाज में कहा- “अरे यार, तुम्हारा मासिक भी अभी ही आने वाला था। तुम तो कल जाने भी वाली हो ना..."
मैं- “हाँ जीजू, आपकी याद बहुत आएगी...” मैंने कहा।
जीजू- “मुझे भी, चलो बाइ...” कहते हुये जीजू ने फोन काट दिया।
उस दिन रात को भी मैंने जीजू के बारे में सोचते हुये मास्टरबेट किया और झड़ने के बाद मैं सो गई।
सुबह नीरव का फोन आया की वो 6:00 बजे आने वाला है तो पैकिंग करके रखना। शाम को नीरव के आते ही हम खाना खाकर स्टेशन के लिए निकल गये। जीजू और दीदी भी हमें मिलने आए थे, जो हमें उनकी गाड़ी में स्टेशन छोड़ने आए। नीरव जीजू के साथ आगे की सीट पर बैठा बातें कर रहा था और मैं और दीदी पीछे बैठी बातें कर रही थीं। स्टेशन आते ही जीजू भी हमारे साथ उतरे। जीजू ने 2-3 बार मुझे इशारा किया की मैं किसी भी बहाने से साइड में जाऊँ और वो वहां आएंगे। पर मेरी हिम्मत नहीं हुई और उनकी बात समझकर भी मैं नासमझ बनी रही।
रात के 5:00 बजे हम राजकोट पहुँचे और हम आटो लेकर घर गये, कांप्लेक्स में दाखिल होते ही देखा की रामू जमीन पर सिर्फ एक चड्डी पहनकर सोया हुवा था। नंगा रामू सोते हुये किसी राक्षस जैसा लग रहा था।
नीरव- “ये हमारा रात का चौकीदार देखो कैसे सो रहा है?” नीरव लिफ्ट में दाखिल होते हुये चिढ़कर बोला।
घर के अंदर दाखिल होते ही मैं सीधी बेडरूम में गई। मैंने जो ड्रेस पहना था, वो मुझे ज्यादा ही फिट हो रहा था इसलिए मुझे वो जल्दी ही चेंज करना था। नीरव ने सामान घर के अंदर लिया, दरवाजे को लाक करके अंदर
आया, तब तक मैं नंगी हो गई थी। उसने शर्ट निकाला और जैसे ही नाइट टी-शर्ट पहनने गया तो मैंने कहाबाद में पहनना यहां आओ ना...”
नीरव नजदीक आते हुये बोला- “बहुत थका हुवा हूँ निशु..”
मैं- “5 दिन के बाद मिल रहे है और तुम हो की.....” मेरी बात अधूरी रह गई।
नीरव ने मेरे होंठों पर अपने होंठ चिपका दिये थे। हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते हुये बेड पर लेट गये। बेड पर लेटते ही नीरव ने मुझे उल्टा कर दिया, और मेरी कमर पर चुंबन किया फिर थोड़ा ऊपर-ऊपर करते हुये नीरव मेरी गर्दन तक चुंबन करता रहा। मैं रोमांचित हो उठी, और मैं पलट गई। मैंने नीरव को मेरी तरफ । खींचकर उसकी गर्दन को मैंने बाहों में ले लिया। हम दोनों के चेहरे के बीच सिर्फ दो इंच जगह थी।
मैंने एक हाथ नीचे की तरफ करके उसकी पैंट की चैन खोलते हुये कहा- “तुम्हारी पैंट निकाल दो?”
नीरव ने मुझे किस करते हुये उसकी पैंट निकाल दी, और फिर नीचे झुक के मेरे उरोजों को चूसते हुये मेरी चूत के होंठों से खेलने लगा। मेरे मुँह से धीरे-धीरे सिसकारियां फूटने लगी थीं। नीरव ने अपनी उंगली मेरी योनि के अंदर दाखिल की।
तो मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा- “ऊपर आकर करो ना..."
नीरव मेरी दोनों टांगों के बीच आ गया और उसका लिंग मेरी योनि में डालने की कोशिश करने लगा। मैंने मेरा हाथ नीचे किया और नीरव का लिंग पकड़कर मेरी योनि पर टिकाकर रखा। नीरव ने धक्का देना चालू किया। उसका लिंग सरलता से अंदर चला गया, क्योंकी मेरी योनि बहुत ज्यादा ही गीली हो गई थी। नीरव ने चार-पाँच धक्के लगाए और उसकी सांसें भारी होने लगीं। नीरव ने कहा- “निशु मेरा छूटने वाला है, तुम भी जल्दी करो
ना..."
जीजू- “क्यों तड़पा रही हो बताओ ना...” जीजू ने कहा।
मैं- “आपके लिंग की..” मैंने शर्माते हुये धीरे से कहा।
जीजू- “हाय... मर जाऊँ तेरी इस अदा पर। कब मिलती हो? कहो तो लेने आ जाऊँ?” जीजू ने पूछा।
मैं मिलना तो चाहती थी जीजू को, पर दीदी के बारे में सोचकर मैंने दिल पर पत्थर रखते हुये जीजू से झूठ कहा- “जीजू मेरा मासिक आ गया है...”
जीजू ने मेरी बात सुनकर ढीली आवाज में कहा- “अरे यार, तुम्हारा मासिक भी अभी ही आने वाला था। तुम तो कल जाने भी वाली हो ना..."
मैं- “हाँ जीजू, आपकी याद बहुत आएगी...” मैंने कहा।
जीजू- “मुझे भी, चलो बाइ...” कहते हुये जीजू ने फोन काट दिया।
उस दिन रात को भी मैंने जीजू के बारे में सोचते हुये मास्टरबेट किया और झड़ने के बाद मैं सो गई।
सुबह नीरव का फोन आया की वो 6:00 बजे आने वाला है तो पैकिंग करके रखना। शाम को नीरव के आते ही हम खाना खाकर स्टेशन के लिए निकल गये। जीजू और दीदी भी हमें मिलने आए थे, जो हमें उनकी गाड़ी में स्टेशन छोड़ने आए। नीरव जीजू के साथ आगे की सीट पर बैठा बातें कर रहा था और मैं और दीदी पीछे बैठी बातें कर रही थीं। स्टेशन आते ही जीजू भी हमारे साथ उतरे। जीजू ने 2-3 बार मुझे इशारा किया की मैं किसी भी बहाने से साइड में जाऊँ और वो वहां आएंगे। पर मेरी हिम्मत नहीं हुई और उनकी बात समझकर भी मैं नासमझ बनी रही।
रात के 5:00 बजे हम राजकोट पहुँचे और हम आटो लेकर घर गये, कांप्लेक्स में दाखिल होते ही देखा की रामू जमीन पर सिर्फ एक चड्डी पहनकर सोया हुवा था। नंगा रामू सोते हुये किसी राक्षस जैसा लग रहा था।
नीरव- “ये हमारा रात का चौकीदार देखो कैसे सो रहा है?” नीरव लिफ्ट में दाखिल होते हुये चिढ़कर बोला।
घर के अंदर दाखिल होते ही मैं सीधी बेडरूम में गई। मैंने जो ड्रेस पहना था, वो मुझे ज्यादा ही फिट हो रहा था इसलिए मुझे वो जल्दी ही चेंज करना था। नीरव ने सामान घर के अंदर लिया, दरवाजे को लाक करके अंदर
आया, तब तक मैं नंगी हो गई थी। उसने शर्ट निकाला और जैसे ही नाइट टी-शर्ट पहनने गया तो मैंने कहाबाद में पहनना यहां आओ ना...”
नीरव नजदीक आते हुये बोला- “बहुत थका हुवा हूँ निशु..”
मैं- “5 दिन के बाद मिल रहे है और तुम हो की.....” मेरी बात अधूरी रह गई।
नीरव ने मेरे होंठों पर अपने होंठ चिपका दिये थे। हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसते हुये बेड पर लेट गये। बेड पर लेटते ही नीरव ने मुझे उल्टा कर दिया, और मेरी कमर पर चुंबन किया फिर थोड़ा ऊपर-ऊपर करते हुये नीरव मेरी गर्दन तक चुंबन करता रहा। मैं रोमांचित हो उठी, और मैं पलट गई। मैंने नीरव को मेरी तरफ । खींचकर उसकी गर्दन को मैंने बाहों में ले लिया। हम दोनों के चेहरे के बीच सिर्फ दो इंच जगह थी।
मैंने एक हाथ नीचे की तरफ करके उसकी पैंट की चैन खोलते हुये कहा- “तुम्हारी पैंट निकाल दो?”
नीरव ने मुझे किस करते हुये उसकी पैंट निकाल दी, और फिर नीचे झुक के मेरे उरोजों को चूसते हुये मेरी चूत के होंठों से खेलने लगा। मेरे मुँह से धीरे-धीरे सिसकारियां फूटने लगी थीं। नीरव ने अपनी उंगली मेरी योनि के अंदर दाखिल की।
तो मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा- “ऊपर आकर करो ना..."
नीरव मेरी दोनों टांगों के बीच आ गया और उसका लिंग मेरी योनि में डालने की कोशिश करने लगा। मैंने मेरा हाथ नीचे किया और नीरव का लिंग पकड़कर मेरी योनि पर टिकाकर रखा। नीरव ने धक्का देना चालू किया। उसका लिंग सरलता से अंदर चला गया, क्योंकी मेरी योनि बहुत ज्यादा ही गीली हो गई थी। नीरव ने चार-पाँच धक्के लगाए और उसकी सांसें भारी होने लगीं। नीरव ने कहा- “निशु मेरा छूटने वाला है, तुम भी जल्दी करो
ना..."